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चलती ट्रेन का TikTok वीडियो बनाते हुए ट्रेन से टकराने के कारण 18 साल के छात्र की दर्दनाक मौत

TikTok पर वीडियो बनाने के कारण आए दिन नए हादसे जन्म ले रहे हैं। ताजा प्रकरण बिहार के वैशाली जिले का है। तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन का टिकटॉक वीडियो बनाने के चक्कर में मंगलवार (जुलाई 30, 2019) को हाजीपुर में एक युवक की जान चली गई। बिहार के 18 साल के इस युवक के लिए टिकटॉक वीडियो बनाना जानलेवा साबित हुआ। वीडियो बनाने में मशगूल युवक को यह तक पता नहीं चला कि ट्रेन एकदम करीब आ गई है और जब तक वह संभलता, तब तक ट्रेन के झटके से उसकी मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

मृतक 18 वर्षीय विवेक कुमार हाजीपुर नगर थाना क्षेत्र के बागमली मोहल्ले के निवासी रामप्रवेश सिंह का इकलौता पुत्र था। वह इंटर का छात्र था। घटना के बाद उसके घर में कोहराम मच गया है। घटना मंगलवार सुबह करीब 9 बजे के आसपास की है।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, विवेक प्रतिदिन सोनपुर स्थित पुराना गंडक पुल रोड में सुबह-सुबह दौड़ने जाता था। आज, मंगलवार को भी वह अपने कुछ मित्रों के साथ सोनपुर पुराना पुल रोड में दौड़ने गया था। इसी दौरान वह हाजीपुर से पटना जा रही पैसेंजर ट्रेन का टिकटॉक वीडियो बनाने लगा और इसी दौरान ट्रेन से उसके सिर में चोट लगी और उसकी जान चली गई।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुँच गए और उसे सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। टिकटॉक की दीवानगी में मौत की ये पहली घटना नहीं है। हाल ही में बिहार के दरभंगा जिले में टिकटॉक वीडियो के लिए बाढ़ के पानी में खतरनाक स्टंट करने के दौरान एक युवक की मौत हो गई थी।

आजम खान ने लग्जरी रिसॉर्ट ‘हमसफर’ के लिए सरकारी जमीन कब्जाया, नोटिस जारी

आज़म खान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। उनके कारनामों की लिस्ट काफी बड़ी होती जा रही है। सपा सांसद आज़म खान पर जमीन हथियाने के 26 नए मामलों के बाद अब एक और करोड़ों रुपए के जमीन घोटाले में नाम सामने आया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने आजम खान को रामपुर में लग्जरी रिसॉर्ट हमसफर के लिए सरकारी जमीन कब्जाने को लेकर नोटिस जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन के एक बड़े हिस्से को कब्जाने का आरोप लगाया है। इस जमीन पर लक्ज़री गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया है। सपा सांसद आजम खान के खिलाफ सरकारी और किसानों की कृषि योग्य भूमि हथियाने के सिलसिले में लगातार मामले दर्ज किए जाने के बाद उनको भूमाफिया घोषित कर दिया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय भी आजम खान के निजी विश्वविद्यालय के खाते में विदेशों से दान मिलने से संबंधित कथित धनशोधन के आरोपों की भी जाँच कर रहा है। ईडी ने रामपुर पुलिस से आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों की सूची पूरी सूची माँगी है। खबर ये भी है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने आजम खान के स्टाफ को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित जमीन के सभी सौदों का ब्योरा देने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस अधीक्षक (रामपुर) अजय पाल शर्मा ने बताया कि पुलिस ने राजस्व रिकॉर्ड, भुगतान रसीद और जिनसे जमीन ली गई है उन पक्षों के साथ जमीन के करार का सभी ब्योरा माँगा गया है। खरीदी गई जमीन का मूल्य कई सौ करोड़ रुपए बताया जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा ने यह भी कहा, “हमें बिक्री अभिलेख की जाँच करने की जरूरत है और असली विक्रेता से इसका सत्यापन करना है। साथ ही हम उन खातों की भी जाँच करना चाहते हैं जिनसे भुगतान हुआ है। जिन पक्षों ने भुगतान प्राप्त किया है उनका सत्यापन करना है।”

जानकारी के मुताबिक उनके ऊपर पहले ही इस मामले से सम्बंधित 26 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं लेकिन पिछले दिनों की खबर है कि सपा सांसद और उनके करीबियों पर फिर 8 नई शिकायतें दर्ज हुई हैं।

इस मामले के मद्देनजर रामपुर पुलिस ने बुधवार (जून 24, 2019) को जज के सामने उन किसानों के बयान भी दर्ज करवाए थे जिनकी जमीनें जौहर यूनिवर्सिटी बनाने के लिए कब्जाई गई। इन पीड़ित किसानों के बयानों को जुलाई 25, 2019 न्यायधीश के सामने दर्ज करवाया गया था।

वहीं, बता दें जमीन कब्जाने के पिछले मामले में पीड़ित किसानों में से कुछ किसानों के परिवारवालों ने बीते रविवार को राजभवन पहुँचकर राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई थी। जिसके बाद राज्यपाल राम नाईक ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जौहर यूनिवर्सिटी का अधिग्रहण करने की बात कही थी।

उन्होंने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष फैसल खान का जिक्र करते हुए कहा था कि वे कई बार जौहर यूनिवर्सिटी में कई अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। इस मामले के मद्देनजर फैसल 8 जुलाई को राज्यपाल से भी मिले थे और उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा था।

जिसमें उनका कहना था कि ‘यूनिवर्सिटी में 80 प्रतिशत जमीन सरकार और किसानों से कब्जाई गई है और 20 प्रतिशत जमीन चंदे के पैसे से खरीदी गई है। बावजूद इसके वहाँ बच्चों से मोटी फीस वसूली जाती है। जिसकी कमाई जौहर ट्रस्ट को जाती है और ये जौहर ट्रस्ट आजम खान के घर का निजी ट्रस्ट है।’

उन्नाव रेप मामला: राजनीति के चक्कर में प्रियंका गाँधी ने सोशल मीडिया पर डाला रेप पीड़िता का नाम

उन्नाव रेप केस मामले में प्रियंका गाँधी एक बड़ी गलती कर बैठीं। ‘सबसे तेज’ चैनल की तरह वो ‘सबसे तेज’ नेता बनना चाह रही थीं लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया। दरअसल उन्होंने उन्नाव रेप केस मामले में दर्ज हुई एफआईआर की हालिया कॉपी को अपने ट्विटर पर ट्वीट कर दिया। इस FIR कॉपी में पीड़िता के नाम का भी उल्लेख है।

ऐसी घटना पर गुस्सा और नाराजगी जायज है लेकिन चुनावों में महिलाओं को उनके अधिकारों से रू-ब-रू करवाने वाली प्रियंका गाँधी ये भूल गईं कि किसी भी रेप पीड़िता का नाम उगाजर करना न केवल मना है बल्कि कानूनन यह एक जुर्म भी है। प्रियंका गाँधी को एक राजनेता के तौर पर विपक्षी पार्टी पर हमला करते हुए, राजनीतिक पॉइंट बटोरते हुए यह ख्याल रखना चाहिए कि कहीं इससे किसी की निजता या सम्मान को ठेस न पहुँचे। लेकिन शायद अभी इन बातों से ये कोसों दूर हैं!

प्रियंका गाँधी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट (उस हिस्से को काला कर दिया गया है, जहाँ पीड़िता का नाम लिखा है, यही काम प्रियंका गाँधी को भी करना चाहिए था।)

एक ओर जहाँ प्रियंका गाँधी को उनकी पार्टी के शीर्ष नेता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए सबसे बेहतर दावेदार बता रहे हैं तो वहीं सरेआम एक रेप पीड़िता का नाम सोशल मीडिया पर उछालकर उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना परिचय दिया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में कुलदीप सेंगर जैसे लोगों को मिलने वाली राजनैतिक ताकतों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हम क्यों कुलदीप सेंगर जैसे लोगों को राजनैतिक ताकत और सुरक्षा दे देते हैं और पीड़िता को पूरी जिंदगी लड़ने के लिए अकेला छोड़ देते हैं।”

उन्होंने पीड़िता के नाम वाली प्राथमिकी को शेयर करते हुए हवाला दिया कि ये एफआईआर स्पष्ट बता रही है कि पीड़िता के परिवार वालों को धमकाया और डराया गया। साथ ही इसमें योजनाबद्ध दुर्घटना की संभावना का भी उल्लेख है।

अपनी गलती का अहसास होने पर प्रियंका गाँधी ने ट्वीट डिलीट कर दिया लेकिन तब तक स्क्रीनशॉट और उनके पूरे ट्वीट का वीडियो बनाया जा चुका था।

भोजपुरी हीरोइन रेशमा के शौहर मुदस्सिर ने 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर भेजा ‘तलाक-ए-बाईन’

एक तरफ जहाँ आज तीन तलाक बिल को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद राज्यसभा में पेश कर रहे हैं वहीं तीन तलाक से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। इंदौर में एक भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री रेशमा ने अपने शौहर मुदस्सिर पर यह आरोप लगाया कि उसके शौहर ने 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर तलाकनामा भेजा है। दरअसल, रेशमा शेख उर्फ अलीना नाम की भोजपुरी अभिनेत्री ने पहले अपने शौहर के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

अभिनेत्री ने बताया, “मेरे पति मुदस्सिर बेग (34) जो जूते-चप्पल का कारोबार करते हैं, ने मुझे 17 जुलाई को 100 रुपए का स्टाम्प पेपर भिजवाया। जिस पर तलाक-ए-बाईन (शरीयत के हिसाब से तलाक़ का एक प्रकार) छपा है। जिस पर लिखा था कि मैं तंग आ चुका हूँ। अपना रिश्ता यहीं खत्म करता हूँ। तुम भी आगे की जिंदगी अपने तरीके से जी सकती हो। यह पहला तलाक है। दो और भेज दूँगा।” हालाँकि, अभिनेत्री रेशमा ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है।

अलीना का आरोप है कि अब्दुल्ला और उसके परिजन ने झाँसे में लेकर उससे शादी की है। शादी के पहले लाखों रुपए भी ले लिए थे। साथ रखने का वादा कर इंदौर बुलाया और छोड़ दिया। अलीना के मुताबिक वह मुंबई में 10 साल तक भोजपुरी फिल्म और धारावाहिकों में सक्रीय रही हैं।

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता के साथ रेशमा

बता दें कि अलीना ने पाँच साल पहले 2016 में मुदस्सिर से प्रेम विवाह किया था। अलीना ने बताया, “अपनी शादी की  खातिर मैंने अभिनय करना भी छोड़ दिया है। हमारा दो महीने का बच्चा है और मैं अपने शौहर के साथ ही रहना चाहती हूँ।” अलीना का कहना है कि वह न्याय की आस लिए चंदन नगर पुलिस थाने और कुछ आला पुलिस अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट चुकी है लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चंदन नगर पुलिस थाने के प्रभारी राहुल शर्मा ने कहा कि यह पति पत्नी का आपसी मामला है। अलीना के पति मुदस्सिर बेग का पक्ष सुनने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। हमने बहुत प्रयास किया लेकिन, उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। अलिना के मुताबिक तीन तलाक का यह तरीका गलत है। इससे कई लड़कियों की जिंदगी खराब हो रही है। उन्हें न्याय का पूरा भरोसा है। अब देखना ये है कि उनके इस मामले में क्या होता है। यह मामला नया नहीं है ट्रिपल तलाक़ ने ऐसी न जाने कितनी मुस्लिम महिलाओं का जीना हराम कर दिया है। ऐसे में तलाक़ पर कानून की आस लगभग हर मुस्लिम महिला को है। लोकसभा में बिल के पास होने पर बहुत सारी मुस्लिम महिलाओं ने इस पर अपनी ख़ुशी जाहिर की थी।

रसगुल्ले की यात्रा: भुवनेश्वर के पास ‘पहला’ नाम के गाँव से बना ‘पहला रसगुल्ला’

‘The Holy Cow’ टाइप कहावत ऐसे ही शुरू नहीं हुई। गाय से जुड़ी हर चीज़ को पवित्र माना जाता है। जाहिर है ऐसे में दूध भी पवित्र होता है। अगर दूध से जुड़ी परम्पराएँ भी देखेंगे तो ये नजर आ आएगा। बिहार के मिथिला या पश्चिम बंगाल के इलाकों में दूध फाड़ने, यानी छेना बनाने वाले को परिवार तोड़ने वाला बर्ताव माना जाता है, वहीं दही ज़माने को परिवार को एक जुट रखने से जोड़ा जाता है। मतलब अगर कोई महिला अच्छी दही नहीं जमा सकती तो ये उनके पाक कला पर ही नहीं बल्कि बर्ताव के तरीके पर भी बड़ा सा सवालिया निशान लगा देता है।

परिवार को तोड़ने वाला लक्षण माना जाएगा तो दूध फाड़ा नहीं जाएगा, यानी कोई पनीर नहीं बनेगा, कोई छेना नहीं होगा, कोई रसगुल्ला भी नहीं बनेगा! अब ये सुनने में आश्चर्य हो लेकिन 1850 से पहले तक कहीं भी रसगुल्ले का जिक्र नहीं आता। जी हाँ, कई फ्रेंच, पुर्तगाली, चीनी यात्री जो इस से पहले तक आए थे उन्होंने खाने पीने की चीज़ों का जिक्र तो जम कर किया है, लेकिन बंगाल में लम्बा समय गुजारने के बाद भी किसी ने रसगुल्ले का जिक्र नहीं किया है।

बंगाल में पहली बार रसगुल्ले बनने का जिक्र 1868 का है। ये वो समय था जब पुर्तगालियों ने चटगाँव में अपनी पहली फैक्ट्री लगा ली थी। विदेशियों की आबादी उस इलाके में पाँच हज़ार से ज्यादा हो गई थी। पुर्तगाली पनीर के बड़े शौक़ीन थे, इसी वजह से दूध से पनीर बनना शुरू हुआ। जब पनीर बनने लगा तो धीरे धीरे उस से रसगुल्ला पनपा। नोबिन चन्द्र दास ने बाग़ बाजार की अपनी दुकान से पहली बार बंगाल में रसगुल्ला बेचना शुरू किया। इसी रसगुल्ले जैसी चीज़ लगभग उसी दौर में ओड़िसा के जगन्नाथ मंदिर में भी पनपी।

वहाँ इसे खीर मोहन कहते हैं, ये रसगुल्ले से थोड़ी सी अलग है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण जब मंदिर से नौ दिन की रथ यात्रा पर निकले तो उन्होंने देवी लक्ष्मी को इस बारे में बताया ही नहीं। बिना इजाज़त निकलने का नतीजा ये हुआ कि जब वो लौटे तो गुस्से गुस्से में लक्ष्मी जी जय विजय नाम का दरवाजा बंद कर के बैठ गई। जब भगवान जगन्नाथ ने उन्हें खीर मोहन से मनाया तब जाकर वो मानी। रथ यात्रा के बाद यानी नीलाद्रि बीजे के एक भाग में ये बचनिका नाम की परंपरा आज भी मनाई जाती है। तीन सौ साल से पुराने कई दस्तावेजों में मंदिर के इस खीर मोहन का जिक्र है। माना जाता है कि भुवनेश्वर के पास “पहला” नाम के गाँव में दूध की बर्बादी होते देखकर मंदिर के पुजारियों ने ही उन्हें रसगुल्ला बनाने और दूध को बचा लेने की विधि सिखाई। इस तरह ओडिशा में “पहला रसगुल्ला” के नाम से ये प्रसिद्ध हुआ।

ऐसा नहीं है कि नोबिन चन्द्र दास ने पहला रसगुल्ला बनाया हो। उसी दौर में कोलकाता की और दुकानों में भी रसगुल्ला बनने लगा था। भगवानदास बागला नाम के एक व्यापारी ने इसे नोबिन चन्द्र दास से लेकर काफी दूर तक फैलाया। 1930 में नोबिन चन्द्र दास के पुत्र कृष्ण चन्द्र दास ने इसे वैक्यूम पैक करना शुरू कर दिया और इस तरह ये पूरे भारत में, और विदेशों में भी प्रचलित हुआ। वैसे देखेंगे तो आज जो स्पंज रसगुल्ला मिलता है वो और भी नया अविष्कार है। दरअसल भैंस के दूध से उसे बनाया नहीं जा सकता। गाय के दूध को फाड़कर उस से छेना बनाना बाद में शुरू हुआ इसलिए स्पंज रसगुल्ला भी बाद में बना।

पहली और गोल चीजों की बात हो तो बंगाल पहले बम गोले के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। बाघा जतिन जैसे लोग भी यहीं के थे। बाकि बंगाल के जैसे हालात हैं, ऐसे में क्या बनाना और परोसना है, ये बंगाल के बुद्धिजीवी खुद ही सोच लेंगे। रसगुल्ला है, बम भी है ही।

‘ब्राह्मणों को मार दिया जाना चाहिए, हिंदी एक आम भाषा है, इसे रिक्शा चलाने वाले लोग बोलते हैं’

अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में रहने वाले असमिया गायक जुबीन गर्ग एक बार फिर विवादों में तब घिर गए, जब उन्होंने ब्राह्मण समाज को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ब्राह्मणों को मार देना चाहिए। अपनी अपकमिंग मूवी कंचनजंघा का प्रमोशन करते हुए उन्होंने कहा, “मैं ब्राह्मण हूँ, लेकिन मैंने अपनी फिल्म में लगून (जनेऊ) तोड़ दिया। मैंने बहुत पहले ही इसे उतार दिया था और अभी भी इसे नहीं पहनता। इन ब्राह्मणों को मार दिया जाना चाहिए।”

गर्ग के विवादित बयान के बाद ब्राह्मण समुदाय के कई लोगों ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया। गुवाहाटी के भांगागढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी खरगेश्वर राभा ने कहा कि विभिन्न समूहों और जातियों के बीच नफरत फैलाने के लिए आईपीसी की कई धाराओं के तहत रविवार (जुलाई 28, 2019) को गर्ग के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा गर्ग के खिलाफ एक और मामला गुवाहाटी के बाहरी इलाके बैहाटा चाराली में भी दर्ज किया गया है। इस मामले को भी भांगागढ़ पुलिस थाने में भेज दिया गया है, क्योंकि यह इलाका भी इसी थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है।

इस कार्यक्रम के दौरान गर्ग ने हिंदी भाषा को लेकर भी विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह एक आम भाषा है और इसे रिक्शा चलाने वाले लोग बोलते हैं। उनका यह बयान लोकल टीवी चैनल पर प्रसारित किया गया, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके खिलाफ आक्रोश जाहिर किया। अखिल असम ब्राह्मण समाज के उपाध्यक्ष सिबा सरमा का कहना है कि गर्ग भले ही अच्छे और प्रख्यात सिंगर हों, मगर ब्राह्मण समाज को लेकर दिया गया उनका बयान असंवैधानिक है।

शनिवार को बिश्वनाथ, उदलगुरी, दरांग, मोरीगांव समेत ब्राह्मण समाज की कई यूनिटों ने गायक गर्ग के खिलाफ बैठक की और जल्द ही सभी यूनिट गर्ग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएगी। साथ ही अखिल असम देवालय संघ के सचिव के सचिव मनोज शर्मा ने भी जुबीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात कही।

वहीं, अपने बयान को लेकर जुबीन का कहना है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है, वह कुछ और कहना चाहते थे लेकिन लोगों ने इसका गलत मतलब निकाल लिया। गर्ग ने कहा कि वह अभी अपने बयान पर कुछ नहीं कहना चाहते हैं, बाद में वह अपने बयान पर सफाई देंगे।

गौरतलब है कि गायक गर्ग ने पिछले साल भी ब्राह्मण समुदाय को लेकर विवादित बयान दिया था। तब उन्होंने कामाख्या मंदिर में दी जाने वाली बलि और जनेऊ के खिलाफ बोलकर समुदाय को आक्रोशित कर दिया था। साथ ही जुबीन ने इसी साल जनवरी में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने तो मीडिया के माध्यम से भारतीय एथलीट हिमा दास को सफलता के लिए बीफ खाने तक की सलाह दे डाली थी।

कमलनाथ के भाँजे ने VVIP घोटाले में दोनों पक्षों से की कमाई: ED

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार (जुलाई 29, 2019) को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे पर वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में दोनों पक्षों से पैसे मिलने का आरोप लगाया है। ईडी ने पुरी द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली की अदालत में विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के सामने यह आरोप लगाए।

ईडी ने कहा, “जाँच में खुलासा हुआ है कि रतुल पुरी को इस मामले से जुड़े धन शोधन के दोनों पक्षों से धन प्राप्त हुआ था।” इसमें एक पक्ष बिचौलिया क्रिश्चियन मिशैल का था जबकि दूसरे में सह आरोपित राजीव सक्सेना शामिल था।

इस सुनवाई के दौरान दलीलें पूरी नहीं होने के कारण न्यायाधीश अरविंद कुमार ने रतुल पुरी को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत एक दिन के लिए और बढ़ा दी। अब इस अग्रिम जमानत पर आज सुनवाई होगी। पुरी के आवेदन पर ईडी ने सोमवार को अदालत से कहा कि वह जाँच को लंबा खींचने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही ईडी ने अपने हलफनामे में उल्लेख किया कि रतुल का आवेदन समय से पहले और खारिज किए जाने योग्य है, क्योंकि रतुल पुरी अदालत के समक्ष गिरफ्तारी की आशंका के लिए कोई कारण दिखाए जाने में असमर्थ हैं। ईडी के मुताबिक पीएमएलए में अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं है।

गौरतलब है कुछ दिन पहले ईडी के दफ्तर से फरार हुए रतुल पुरी ने दिल्ली की एक अदालत पहुँचकर इस मामले में अग्रिम जमानत माँगी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें मामले में गिरफ्तार किए जाने की आशंका है। पुरी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता में एएम सिंघवी ने पूरे मामले में राजनैतिक दुश्मनी का आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश में भाजपा के 2 विधायक कॉन्ग्रेस में शामिल हुए थे। इसलिए अब ईडी रतुल को गिरफ्तार करना चाहती है क्योंकि उनके मामा राज्य के मंत्री हैं। इस दौरान कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी के लिए अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था, क्योंकि ईडी ने इस मामले में दलीलें देने का समय माँगा था।

500+ महिला एवं लड़की काँवड़ियों पर मस्जिद के पास से पथराव, बचाने आई पुलिस को दौड़ाया

बिहार के मुजफ्फरपुर में बरुराज थाना क्षेत्र में सावन के दूसरे सोमवार को जल भरने जा रहे श्रद्धालुओं पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा पथराव किया गया। जब बीच-बचाव के लिए पुलिस आई तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार हुआ।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक एसडीएम अनिल कुमार दास ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जब महिला श्रद्धालु यहाँ मस्जिद के पास से गुजर रहीं थीं, तभी कुछ लोगों ने उन पर पथराव किया।

इस घटना में जब बीच-बचाव करने पुलिस पहुँची तो मोतीपुर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर की वर्दी पर लगे स्टार को भी नोचने का प्रयास किया गया। यहाँ इस दौरान पुलिस वालों के साथ गाली-गलौच भी की गई। उन्हें डंडा लेकर दौड़ाया भी गया। लेकिन पुलिस ने फिर भी अपनी समझदारी से जल लेने जा रही तकरीबन 500 से भी ज्यादा महिला और बच्चियों को निकालकर सुरक्षित तिरहुत मुख्य नहर से पुल तक पहुँचाया। इस दौरान हालात को काबू में करने के लिए एसटीएफ के जवानों को भी बुलाना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक इलाके में बढ़ती अराजकता को देखते हुए श्रद्धालुओं को दूसरे मार्ग से निकालकार मंदिर परिसर में पहुँचाया गया। कुछ लोगों ने दावा किया कि पथराव करते हुए इलाके में राष्ट्र विरोधी नारे भी लगाए गए, लेकिन फिलहाल जिला प्रशासन को अभी इस दावे के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि अगर उन्हें देश विरोधी नारे लगाने के बारे में सबूत मिलेंगे तो वे इस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।

बता दें कि एसडीएम के मुताबिक इसी इलाके में पिछले रविवार को धार्मिक कार्यक्रम की घोषणा करते कुछ अन्य लोगों को भी पीटा गया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने हिंदू और समुदाय विशेष के लोगों के साथ बैठक की थी और तय किया था कि दोनों समुदाय शांति के साथ रहेंगे।

उन्नाव रेप: सड़क हादसे में नया खुलासा, टक्कर मारने वाला ट्रक सपा नेता के भाई का – CBI करेगी जाँच!

उन्नाव रेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे में एक नया खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है जिस ट्रक से एक्सीडेंट हुआ है, वह समाजवादी पार्टी नेता नंदू पाल के बड़े भाई देवेंद्र पाल का ट्रक है। इस हादसे के बाद से ललौनी थाना क्षेत्र के मुत्तौर गाँव के रहने वाले देवेंद्र पाल के घर पर ताला बंद है। पुलिस ने इस एँगल से जाँच शुरू कर दी है और उनकी खोज जारी है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक फतेहपुर के सपा नेता व पूर्व जिला सचिव नंदू पाल का कहना है कि इस मामले को साजिश बताकर बेवजह तूल दिया जा रहा है। ये महज एक हादसा है। सपा नेता की मानें तो वे कुलदीप सेंगर को जानते तक नहीं हैं, सिर्फ़ नाम सुना है।

सपा नेता नंदू का अपने बड़े भाई के ट्रक को लेकर कहना है कि जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन ट्रक में लदा मोरंग रायबरेली में उतारने के बाद फतेहपुर लौट रहा था। ट्रक को ओती गाँव के निवासी सूरजपाल का सबसे छोटा बेटा आशीष कुमार चला रहा था।

इसके अलावा ट्रक के नंबर प्लेट में कालिख लगाने की वजह पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह सब केवल फाइनेंसर की नजरों से बचने के लिए किया गया था। अगर इसके बाद भी साजिश की आशंका है तो सरकार इसकी सीबीआई जाँच करवा ले, जिससे सच्चाई साफ़ हो जाए।

मुख्यमंत्री ने दिए CBI जाँच के आदेश

गौरतलब है कि इस हादसे के बाद पीड़िता के परिवार द्वारा सीबीआई जाँच की माँग की जा रही थी, जिसके मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (जुलाई 29, 2019) को इस मामले में सीबीआई जाँच के लिए सिफारिश दे दी है। इसके संबंध में केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र भी भेजा गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने भी रात में एसपी की रिपोर्ट, फॉरेंसिक जाँच में की गई अब तक की पड़ताल, हत्या की एफआईआर आदि से जुड़े अन्य दस्तावेज मँगवाए हैं।

MLA कुलदीप सेंगर समेत 10 पर हुआ हत्या का मुकदमा दर्ज

बता दें कि इससे पहले इस रोड एक्सीडेंट मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उनके भाई मनोज सिंह सेंगर और 8 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी। इस नए खुलासे के बाद मामला संदेह वाली स्थिति बनी हुई है। अब आगे की जाँच में खुलासा होगा कि यह घटना सच में कोई हादसा है या फिर साजिश।

लेकिन फिलहाल रेप पीड़िता के चाचा की तहरीर पर कुलदीप सिंह सेंगर समेत 10 नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 506, 120B के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र, हरिपाल मिश्र, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह और एडवोकेट अवधेश सिंह समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि आरोपित विधायक कुलदीप सेंगर उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। कुलदीप सेंगर ने अपनी राजनीति की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्टी से की थी। लेकिन, वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव के वक्त वो कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़कर हाथी (बसपा) के साथ चल दिए। तब बसपा के टिकट पर कुलदीप ने चुनावी मैदान में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराया था। 2007 में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कुलदीप सिंह सेंगर को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उसके बाद वो 2007 से 2017 तक समाजवादी पार्टी में रहे।

फातिमा के तीन बच्चों के साथ सुसाइड कांड में नया मोड़, दो बेटियों संग रेप की हुई पुष्टि, पिता अकरम पर शक

पुणे के भोसरी इलाके में रविवार को एक किराए के फ्लैट से एक 28 वर्षीय महिला और उसके तीन बच्चों का शव फाँसी पर लटकता हुआ मिला था। जिसे देखकर पहले यह अनुमान लगाया गया था कि महिला फातिमा ने पहले अपने तीनों बच्चों अलीफिया (9) ज़ेबा (7) जियान (5) की हत्या की और फिर खुद आत्महत्या कर ली। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले में एक बड़ा ट्विस्ट आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 9 और 7 साल की दो बेटियों के साथ हत्या से पहले रेप किया गया था। जिसके बाद पुलिस ने महिला के पति अकरम को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की रहने वाली 28 वर्षीय महिला फातिमा अपने फल विक्रेता पति अकरम के साथ कुछ दिन पहले भोसरी के तलेगांव दाभाड़े स्थित नूर मोहल्ला में रहने आई थी। यहाँ वह किराए के मकान में परिवार के साथ रह रही थी। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिया गया शख्स पहले फल विक्रेता के तौर पर काम करता था। कर्नाटक से आने के बाद वह काम की तलाश में था। फातिमा के पिता की भी मौत हाल ही में हुई थी। जिसे लेकर भी वह तनाव में थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में यह भी सामने आया है कि अकरम-पत्नी फातिमा के बीच पैसे को लेकर अक्सर झगड़ा होता रहता था। पति काम खोजने की बात कह कर बाहर चला गया। शाम को जब वह लौटा तो उसके 9 साल, 7 साल की बेटी और पाँच साल के बेटे और पत्नी का शव नायलोन की रस्सी से फाँसी पर लटका हुआ मिला था। बच्चों और पत्नी के शव अलग-अलग कमरों में थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह कहा जा रहा है कि जब पति घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज लगाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला। तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस के आने के बाद अंदर का दरवाजा खोला गया तो देखा कि चारों के शव लटके हुए थे। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था।

पुलिस का कहना था कि शुरूआती दौर में मामला आत्महत्या का लग रहा था लेकिन अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बेटियों अलीफिया और ज़ेबा से रेप की पुष्टि होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब मामला रेप और हत्या का ज़्यादा लग रहा है। फिर भी पुलिस का कहना है कि नए सिरे से इस आत्महत्या/हत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जाँच जारी है। पति को हिरासत में लेकर नए सिरे से पूछताछ की जा रही है।