Home Blog Page 5664

हरियाणा: पशु चोरों ने की किसान की हत्या, दो भैंस और एक बछड़ा चोरी

हरियाणा के हिसार के बरवाला इलाक़े में एक किसान की रविवार रात को अज्ञात बदमाशों ने हत्या कर दी। इससे पहले कि वो किसान अपने पशु चोरी करने से अपराधियों को रोक पाता, तब तक चोर उसकी दो भैंस (मुर्राह नस्ल) और एक बछड़े को चोरी कर चुके थे, जाते-जाते किसान की हत्या कर चुके थे। मृतक की पहचान 40 वर्षीय नरेश के रूप में हुई है।

पीड़ित के भाई ने बताया कि हत्या की रात नरेश किराए के खेत में बनाए गए आश्रय में अकेला सो रहा था। अगली सुबह, वह अपने आश्रय में मृत पाया गया। उस पर धारदार हथियार से वार किया गया था और उसके मवेशी ग़ायब थे। उनके बयान के आधार पर, पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा-460 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

ख़बर के अनुसार, शव की खोज खेत मालिक के एक कार्यकर्ता ने की। उन्होंने तुरंत पुलिस को मामले की सूचना दी और पीड़ित के भाई को घटना के बारे में सूचित किया। पुलिस जल्द ही घटना-स्थल पर पहुँची और मामले में अपनी जाँच शुरू कर दी।

परिजनों के मुताबिक़, परिवार को होने वाला आर्थिक नुकसान 1 लाख रुपए से अधिक का है। उनका दावा है कि एक मुर्राह भैंस 50-60 हज़ार रुपए में आसानी से बेची जा सकती है। वहीं, बछड़े पर उन्होंने दावा किया कि आमतौर पर 15-20 हज़ार रुपए मिल जाते हैं। नरेश का परिवार उनकी आजीविका पर ही निर्भर था। वह 5 बेटियों और दो बेटों के पिता थे। उनकी हत्या से उनके परिवार की आजीविका भी ख़तरे में पड़ गई है।

देश में मवेशी चोरी एक बहुत बड़ी समस्या है। आए दिन मवेशी चोरी होने की ख़बरें सामने आती रहती हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ पशु तस्कर किसानों और यहाँ तक ​​कि पुलिस पर हमला तक कर देते हैं। ऐसी भी ख़बरें सामने आई हैं, जहाँ मवेशी तस्करों द्वारा बम फेंकने और लोगों पर अँधाधुँध हमला किया गया।

‘गाय अत्यधिक उपयोगी जानवर लेकिन इसे पूजना व्यर्थ है, सुपरवुमन की पूजा कीजिए न कि गायों की’

राजस्थान के शहरी विकास और आवास मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने सोमवार (जुलाई 22, 2019) को राजस्थान विधानसभा में विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि गाय एक “अत्यधिक उपयोगी जानवर” है, लेकिन इसकी पूजा करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सुपरवुमन की पूजा की जानी चाहिए न कि गायों की। धारीवाल ने वीर सावरकर की किताब का हवाला देते हुए ये बातें कहीं।

कॉन्ग्रेस नेता की विवादित टिप्पणी पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता वासुदेव देवनानी ने कहा कि शांति कुमार धारीवाल के गाय को “जानवर” कहने के बयान ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने कहा कि देश में गाय माता के रूप में पूजनीय है, लोग उन्हें पूजते हैं। ऐसे में गाय और हिंदुत्व पर धारीवाल की टिप्पणी निंदनीय है।

विधानसभा में अपनी बात रखते हुए धारीवाल ने कहा कि राष्ट्रवाद को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जितने भी मुस्लिम देश हैं, वो आपस में लड़ रहे हैं। भारत का मुस्लिम सर्वश्रेष्ठ है और देश के 22 करोड़ मुस्लिमों को साथ लिए बिना राष्ट्रवाद की कल्पना नहीं की जा सकती

गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (जुलाई 22, 2019) को ही देसी नस्ल की गाय आदि के वध पर चिंता जताया और इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा कि इस दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही मथला चंद्रपति राव द्वारा दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों को गैरकानूनी तरीके से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने और उच्चतम न्यायालय के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट दायर करने के लिए भी निर्देश देने की माँग की।

‘भारत का दामाद’ बना ब्रिटेन का PM, लेकिन एक दिक्कत है..

लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) को ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री चुना गया है। यह जानकारी ब्रिटिश मीडिया के हवाले से एएनआई ने दी है। बोरिस जॉनसन ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे की जगह लेंगे। उन्होंने पीएम पद की रेस में जेरमी हंट को हराया। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता जॉनसन बुधवार (जुलाई 24, 2019) को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। बोरिस जॉनसन ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुके हैं।

कभी खुद को बताते थे ‘भारत का दामाद’

बोरिस जॉनसन और उनकी पत्नी मैरीना व्हीलर की शादी को करीब 25 साल हो चुके हैं। मैरीना व्हीलर भारतीय मूल की हैं और पेशे से वकील हैं। हालाँकि, दोनों ही वर्ष 2018 में अपने रिश्ते के समाप्त होने की घोषणा कर चुके हैं। सितंबर 2018 को उन्होंने एक दूसरे से तलाक लेने की योजना बनाई थी। दरअसल, ऐसे दावे किए जा रहे थे कि जॉनसन ने अपनी पत्नी को धोखा दिया है।

लंदन के 2008 से 2016 तक मेयर रहने के दौरान जॉनसन ने खुद को ‘भारत का दामाद’ बताने के लिए अपनी पत्नी के भारतीय मूल का होने का कई बार जिक्र किया था। जॉनसन और व्हीलर के चार बच्चे हैं। 

चुनाव के दौरान गर्लफ्रेंड के साथ विवाद को लेकर चर्चा में रहे जॉनसन

एक ओर बोरिस जॉनसन का अपनी भारतीय मूल की पत्नी के साथ तलाक का केस चल रहा है, वहीं अपनी महिला मित्र के साथ विवाद को लेकर भी वो सुर्ख़ियों में रह चुके हैं। दरअसल, चुनाव के दौरान ही लंदन में उनकी महिला मित्र के साथ हुए उनके झगड़े की पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी गई थी। पिछले साल जॉनसन का उनकी गर्लफ्रेंड कोरी साइमंड्स के साथ प्रेम संबंध सार्वजनिक हो गया था। जिसके बाद उनकी भारतीय मूल की पत्नी मरीना व्हीलर ने तलाक की अर्जी दी थी।

कश्मीर की स्थायी समस्या जवाहरलाल की ग़लतियों का परिणाम, नेहरू को Thank You बोलिए सुरजेवाला जी

कश्मीर मुद्दे पर ट्रम्प के बयान ने एक संवेदनशील मुद्दे को हवा दे दी है। फ़िलहाल, मीडिया और राजनीति के ट्रोलों ने MEA के स्पष्टीकरण के बावजूद भारत के रुख़ के बारे में झूठ फैलाया, लेकिन कॉन्ग्रेस के नेता शायद अपनी भयंकर ग़लती के इतिहास को भूल गए हैं।

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कल रात ट्विटर पर दावा किया कि भारत ने कभी भी जम्मू-कश्मीर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की।

उन्होंने ट्वीट किया, “पीएम मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर में मध्यस्थता करने के लिए एक विदेशी शक्ति से पूछना देश के हितों के साथ एक बड़ा धोखा है।” सुरजेवाला, इसमें एक एक बहुत छोटा सा विवरण देना भूल गए। उन्होंने यह नहीं बताया कि जम्मू और कश्मीर की जो स्थायी समस्या है वो तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई ग़लतियों का परिणाम है।

अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान ने जब पहली बार कश्मीर की तत्कालीन स्वतंत्र रियासत पर आक्रमण किया, तो महाराजा हरि सिंह ने अपनी रियासत के भारत में विलय के लिए विलय-पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए भारत से मदद माँगी। भारत ने मदद दी और उस समय भारतीय सेना ने कश्मीर के दो-तिहाई हिस्से को जल्दी से हासिल कर लिया था।

इसके बाद नेहरू ने 1 जनवरी, 1948 को संयुक्त राष्ट्र से शांति वार्ता में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था, जबकि उस समय सेना अपने ऑपरेशन में लगी हुई थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि इन सबका भारतीय सैनिक के मनोबल पर क्या असर पड़ा होगा, जब उन्हें पता चला होगा कि उनकी सरकार पहले से ही शांति की माँग कर रही है। अगर इस मामले को नेहरू द्वारा संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की बजाए सेना को पूरे कश्मीर पर फिर से क़ब्ज़ा करने की अनुमति दे दी जाती तो आज इतिहास कुछ और ही होता।

इस मामले पर हुआ ये कि संयुक्त राष्ट्र ने संघर्ष विराम की बात कह डाली और तभी से कश्मीर मुद्दा एक खुला घाव बन कर रह गया है, जबकि भारत ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि उसके द्वारा अमेरिका के साथ ऐसी कोई बातचीत या अनुरोध नहीं किया गया।

ऐसे में तो यही लगता है कि कॉन्ग्रेस शायद अपने उसी इतिहास को फिर से उजागर करने में लगी हुई है। आख़िरकार, कॉन्ग्रेस की तो आदत ही है कि वो हर उपलब्धि का श्रेय नेहरू को ही देने पर तुले रहते हैं। यदि चंद्रयान-2 के लिए नेहरू को धन्यवाद दिया जाना चाहिए, तो उन्हें कश्मीर मुद्दे पर की गई भयंकर भूलों के लिए भी ‘धन्यवाद’ दिया जाना चाहिए।

JNU: पहले पूछा ‘बिहारी हो?’ हाँ कहते ही मारे थप्पड़, उठक-बैठक लगवाई

अक्सर विवादों में रहने वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में सेंटर ऑफ जर्मन स्टडीज के बीए फर्स्ट ईयर के छात्र से रैगिंग का मामला सामने आया है। JNU में BA फर्स्ट इयर कोर्स में पढ़ने वाले छात्र ने पुलिस से रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई है। छात्र का आरोप है कि एक पीएचडी स्काॅलर ने कैंपस में उसके साथ मारपीट की और कान पकड़कर उठक-बैठक भी लगवाई। यह घटना 18 जुलाई की है।

पीड़ित ने जेएनयू की एंटी रैगिंग कमिटी और वसंत कुंज नाॅर्थ थाना पुलिस में शिकायत दर्ज की है। पुलिस ने अभी तक आरोपित के खिलाफ कोई करवाई नहीं की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की जाँच एंटी रैगिंग कमिटी कर रही है। पीड़ित स्टूडेंट ने ट्व‍िटर के जरिए MHRD और जेएनयू के वीसी से भी इसकी शिकायत की है।

‘यह दिल्ली है, यहाँ सलीके से रहा करो’

बिहार के रहने वाले 19 वर्षीय छात्र रवि राज ने बताया कि उसने 10 जुलाई को सेंटर ऑफ जर्मन स्टडीज में दाखिला लिया था। 18 जुलाई की शाम इंग्लिश स्टडीज का एक पीएचडी स्काॅलर विजय दहिया और दो अन्य युवक मिले। विजय ने पूछा- “तुम बिहारी हो?” हाँ में जवाब देते ही वह गाली देने लगा। आरोपित विजय ने रवि राज से कहा- “यह दिल्ली है, सलीके से रहा करो।” इसके बाद विजय ने रवि राज को फिर दाे थप्पड़ मारे, कान पकड़ उठक-बैठक लगवाने के बाद यह हिदायत भी दी कि आगे कभी भी मिलो तो नाक रगड़कर प्रणाम करना।

रवि राज ने 20 जुलाई को इस बारे में ट्वीट भी किया था, जिसमें उसने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल और नित्यानंद राय समेत जेएनयू के वीसी को भी टैग किया है।

₹14 लाख की मैं गाड़ी खरीदूँगी, मुझे चंदा दो: कॉन्ग्रेस सांसद की डिमांड पर पार्टी में बवाल

केरल में कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस सांसद राम्या हरिदास ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से 14 लाख की गाड़ी खरीदने के लिए चंदा देने की गुहार लगाई थी, लेकिन अब प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष ने उनकी इस योजना पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि राम्या हरिदास खेती करने वाले मज़दूरों के घर से आती हैं, इसलिए गाड़ी खरीदने के लिए वह अपने संसदीय क्षेत्र में आने वाले 1400 बूथों से इसके लिए पैसा इकट्ठा करना चाहती थीं। उनका मानना है कि उन्हें मिल रहे वेतन से उनके लिए गाड़ी खरीदना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए वे यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से चाहती थीं कि वे कम से कम उन्हें 1000 रुपए दें। ताकि वे मल्टी यूटीलिटी व्हीकल खरीद पाएँ।

राम्या इससे पहले भी चुनाव प्रचार में क्राउड फंडिंग के जरिए 67 लाख रुपए इकट्ठा करने में कामयाब हुई थीं। लेकिन इस बार जब उन्होंने अपनी कार के लिए ऐसा करना चाहा तो पार्टी में ही विवाद हो गया। पार्टी के सदस्य इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाने लगे। मामले ने तूल पकड़ा तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कड़ी आपत्ति जताई।

इसके बाद राम्या हरिदास ने इस मामले पर कहा, “एक आज्ञाकारी कार्यकारी की तरह मैंने पार्टी अध्यक्ष की बातों को दिल में संजो लिया है। जो मुझे प्यार करते हैं, शायद उन्हें मेरा फैसला सही न लगा हो। मैंने अपने जीवन में बहुत मुश्किलें झेली हैं। ऐसे मौक़ो पर जनता ने जो सांत्वना दी, वही मेरा सहारा था।”

स्टेशन अधीक्षक की गलती से एक ही रेल लाइन पर दो ट्रेन, रेलवे ने दिया जबरन रिटायरमेंट की सजा

बिहार के गोरौल स्टेशन पर होते-होते बचे हादसे में रेलवे ने स्टेशन अधीक्षक को दोषी मानते हुए सेवानिवृत्ति की सजा दी है। जाँच में महकमे ने पाया कि अधीक्षक सुनील कुमार सिंह की भूल से 23 मई को दो ट्रेनों की भिड़ंत का भीषण हादसा हो सकता था। मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेलखण्ड के इस मामले में सोनपुर मण्डल ने जाँच समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर यह निर्णय लिया है।

एक ही लाइन पर दो ट्रेनें

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनपुर मण्डल में यह इतनी बड़ी सजा का पहला मामला है। गोरौल स्टेशन पर 23 मई को दो ट्रेनें, सिवान-समस्तीपुर पैसेंजर ट्रेन और बिहार सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस, एक साथ एक ही लाइन पर आ गईं थीं। इसके बाद मामले की जाँच के लिए डीआरएम ने जाँच टीम गठित की थी, जिसकी जाँच में स्टेशन अधीक्षक सुनील कुमार सिंह की लापरवाही की बात सामने आई थी। इसके बाद डीएआर के तहत एक दूसरी टीम का गठन स्टेशन अधीक्षक का पक्ष जानने के लिए किया गया था। उसके सामने उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था।

इस टीम ने स्टेशन अधीक्षक के अलावा 26 जून, 2019 को पीछे से आने वाली बिहार सम्पर्क क्रांति के चालकों (लोको पायलट व सहायक लोको पायलट) का भी बयान दर्ज किया था। उसके मुताबिक जिस समस्य एक नंबर लाइन पर पैसेंजर ट्रेन खड़ी थी, उसी दौरान कंट्रोल द्वारा थ्रो पास कराने को कहे जाने के बाद स्टेशन अधीक्षक ने सम्पर्क क्रांति को भी दो नंबर लाइन की बजाय एक नंबर लाइन का ही पास दे दिया था

मच गई थी भगदड़

जब सम्पर्क क्रांति स्टेशन पर सिवान-समस्तीपुर पैसेंजर की ओर बढ़ी तो पैसेंजर के यात्रियों में भगदड़ मच गई थी। जान बचाकर भागते यात्रियों की चपेट में आकर शालू देवी, सविता देवी, चंदन कुमार और शौकत खातून ज़ख़्मी हो गए थे। सम्पर्क क्रांति के चालक रवि शंकर कुमार ने बताया कि अपनी लाइन पर दूसरी गाड़ी खड़ी देखते ही उन्होंने ब्रेक लगा दिया था, जिसके चलते एक्सप्रेस ट्रेन पैसेंजर से 200 मीटर पहले ठहर गई और बड़ा हादसा होते-होते बच गया था। उग्र यात्रियों ने बाद में स्टेशन पर तोड़फोड़ शुरू कर दी थी, जिसमें रिटायर किए गए स्टेशन अधीक्षक सुनील खुद भी ज़ख़्मी हो गए थे।

मोदी सरकार शुरुआत से ही अकुशल कर्मचारियों पर हमलावर रही है। कई बड़े अफसरों के तबादले, निलंबन या जबरन रिटायरमेंट कर सरकारी मशीनरी की गुणवत्ता को सुधारा जा रहा है। रेलवे मंत्री ने भी अपने महकमे में चाबुक चलने को लेकर पहले ही सतर्क कर दिया था।

बीजेपी शासित राज्यों की बात करें तो भ्रष्ट कर्मचारियों पर हर जगह सख्ती दिखाई जा रही है। योगी सरकार की बात करें तो उत्तर प्रदेश में 200 अधिकारी को जबरन रिटायर, 600 पर कार्रवाई, 100 को रडार पर रखा। जिन 100 अधिकारियों पर योगी सरकार की नज़र है, उनमें से अधिकतर IAS और IPS अधिकारी हैं। उधर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लापरवाह और मनमानी करने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते हुए उन्हें कंपल्सरी रिटायरमेंट का अल्टिमेटम दे दिया है।

भारत में पहली बार 75% आरक्षण: प्राइवेट जॉब में स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए आंध्र प्रदेश सरकार का ऐलान

आंध्र प्रदेश में हाल ही में जगन मोहन रेड्डी सरकार ने कमान संभाली है। सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए उन्होंने कई चुनावी वादे किए थे। तमाम वादों में एक वादा रोज़गार में आरक्षण देना भी शामिल था, जिसे उन्होंने सोमवार (22 जुलाई 2019) को आंध्र विधानसभा में उद्योग/कारखाने अधिनियम, 2019 को पारित करके पूरा कर दिया। दरअसल, इस अधिनियम के तहत आंध्र प्रदेश सरकार अब स्थानीय अभ्यर्थियों को औद्योगिक नौकरियों में 75% आरक्षण देने जा रही है।

आंध्र प्रदेश सभी निजी औद्योगिक इकाइयों और कारखानों में स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों को आरक्षित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, फिर भले ही इन कंपनियों को सरकार से वित्तीय या अन्य मदद मिले या न मिले।

हालाँकि, कई अन्य राज्य भी स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए निजी नौकरियों में आरक्षण की बात करते रहते हैं, लेकिन अभी तक इसे लागू करने वाले राज्यों में केवल आंध्र प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जिसने यह किया। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार की ओर से 9 जुलाई को कहा गया था कि सरकार एक कानून लाएगी, जिसके माध्यम से स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए प्राइवेट क्षेत्र की 70% नौकरियों को आरक्षित किया जाएगा।

दिसंबर 2018 में, सत्ता में आने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक औद्योगिक नीति की घोषणा की थी, जिसमें सरकार से आर्थिक और अन्य सहायता हासिल करने के लिए कंपनियों को 70% स्थानीय अभ्यर्थियों को नौकरी देना अनिवार्य कर दिया गया। ऐसा ही कुछ कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र में भी देखने को मिला।

आंध्र प्रदेश के नए कानून में कहा गया है कि यदि आवश्यक कौशल वाले स्थानीय अभ्यर्थी उपलब्ध न हों पाएँ, तो कंपनियों को राज्य सरकार के साथ मिलकर उन्हें प्रशिक्षित करना होगा और फिर उन्हें काम पर रखना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके साथ ही कंपनियाँ कुशल श्रम न मिलने के बहाने छिप नहीं पाएँगी।

ख़बर के अनुसार, कंपनियों को अधिनियम के शुरू होने के तीन साल के भीतर इन प्रावधानों का पालन करना होगा और एक नोडल एजेंसी को स्थानीय नियुक्तियों के बारे में त्रैमासिक रिपोर्ट प्रदान करनी होगी।

तिरुपति स्थित अमारा राजा औद्योगिक समूह के अध्यक्ष और सीईओ व सीआईआई-एपी के चेयरमैन, विजय नायडू गल्ला ने इस अधिनियम को अच्छा और बुरा दोनों बताया। अच्छा इसलिए बताया क्योंकि इससे राज्य में स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देने की सरकार की नीति स्पष्ट होती है। बुरा इसलिए बताया कि विनिर्माण और आईटी कंपनियों में अब सरकार को स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य में अपने कौशल विकास केंद्रों को किराए पर लेने के लिए तैयार रहना होगा।

पूर्व RJD विधायक सुनील पुष्पम को उम्रकैद की सजा: गर्भवती दलित महिला को बंदूक के कुंदे से मारा था

बिहार के समस्तीपुर कोर्ट ने पूर्व विधायक और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता सुनील पुष्पम को गर्भवती दलित महिला की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पुष्पम पर ₹25 हजार का जुर्माना भी लगाया है और अगर सुनील पुष्पम ये जुर्माना नहीं भरता है, तो फिर उसे 6 महीने और कैद में रहना होगा। तकरीबन 14 साल पुराने केस में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश प्रणव कुमार झा ने सोमवार (जुलाई 22, 2019) को ये सजा सुनाई। इसके साथ ही पुष्पम के राजनैतिक जीवन पर भी पूर्ण विराम लग गया है।

जानकारी के मुताबिक, बिथान थाना क्षेत्र में छेछनी गाँव की कबूतरी देवी व मंजू देवी 2 अगस्त 2005 को सुबह करीब 8 बजे सिरसिया बाँध होकर बाजार जा रही थीं। इसी दौरान सुनील की गाड़ी वहाँ से गुजर रही थी। गाड़ी आते देख दोनों सड़क किनारे खड़ी हो गईं। उसी समय गाड़ी से 5 आदमी उतरे और तत्कालीन विधायक सुनील कुमार पुष्पम ने अपने हाथ में लिए बंदूक के कुंदे से गर्भवती मंजू देवी के पेट पर मारा। पिटाई से उनकी हालत बिगड़ गई। कबूतरी देवी मंजू को रोसड़ा अस्पताल ले गईं। वहाँ उसकी हालत गंभीर देखकर समस्तीपुर के सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहाँ उनका गर्भपात हो गया। फिर परिजन आगे के इलाज के लिए मंजू को बेगूसराय ले गए और बेगूसराय में इलाज के दौरान ही मंजू ने 6 अगस्त, 2005 को दम तोड़ दिया।

जिसके बाद बेगूसराय थानाध्यक्ष ने कबूतरी देवी का बयान दर्ज किया और इस बयान के आधार पर हसनपुर थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई। 14 साल तक न्यायालय में मुकदमा चला। जिसमें सभी पक्षों का बयान लेने के बाद कोर्ट ने पूर्व विधायक को हत्या में दोषी पाकर सजा सुनाई। फिलहाल विधायक न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 8 गवाहों का एवं बचाव पक्ष की ओर से 4 गवाहों का बयान दर्ज किया।

हत्याकांड की सुनवाई में अभियोजन पक्ष की तरफ से एपीपी गौरी शंकर मिश्रा और बचाव पक्ष की तरफ से वरीय अधिवक्ता परमेश्वरी सिंह ने कोर्ट में बहस किया। हालाँकि, कोर्ट के द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद भी पूर्व विधायक सुनील कुमार पुष्पम का कहना है कि वो निर्दोष है। उसने कहा कि राजनीतिक साजिश के तहत कहानी बनाकर मामला दर्ज कराया गया था, ताकि किसी तरह उन्हें चुनाव लड़ने से राेका जा सके। पुष्पम ने कहा कि वो अपने वकील से राय लेकर इस फैसले के विरोध में हाई कोर्ट में अपील करेगा।

‘मुस्लिमो को समझना होगा कि वो भी हिंदुओं की ही संतान हैं’ – B.Ed की किताब पर बवाल, FIR

बीएड द्वितीय वर्ष के वन वीक सीरीज में राजहंस प्रकाशन द्वारा समुदाय विशेष के खिलाफ विवादित और आपत्तिजनक बातें प्रकाशित कर दी गईं। इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। समुदाय विशेष के लोगों ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए राजहंस प्रकाशन के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।

दरअसल, राजहंस प्रकाशन ने बीएड द्वितीय वर्ष का वन वीक सीरिज प्रकाशित किया है। जिसमें पृष्ठ संख्या 22 के प्रश्न संख्या 21 में पूछा गया है कि धर्म संबंधी रुढ़िवादिता एवं पूर्वाग्रह को समाप्त करने के लिए हमें कौन-कौन से प्रयास करने चाहिए? जिसका जवाब देते हुए लिखा गया है- मदरसों में धार्मिक शिक्षा न दी जाए, मुस्लिमों को समझना चाहिए कि वो हिंदुओं की ही संतान हैं। साथ ही इसमें लिखा गया है कि मुस्लिम सारी दुनिया में अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहते हैं, फलस्वरुप उन्होंने आतंकवाद फैला रखा है, जिसे ‘जेहाद’ का नाम देते हैं, परंतु इस प्रकार आतंक फैलाकर वो अपना वर्चस्व कायम नहीं रख सकते हैं। उसके लिए भाईचारा और सद्भाव की आवश्यकता होती है, क्योंकि मृत्यु उपरान्त ‘दो गज जमीन’ की आवश्यकता होती है।

राजहंस प्रकाशन द्वारा समुदाय विशेष के खिलाफ प्रकाशित आपत्तिजनक सामग्री

धर्म संबंधी रुढ़िवादिता एवं पूर्वाग्रह को समाप्त करने के प्रयास के तौर पर ये भी लिखा गया है कि धार्मिक पूर्वाग्रहता के कारण साम्प्रदायिकता की भावना फैलती है। विशेषकर हिन्दू-मुस्लिम सम्प्रदाय पूर्वाग्रह व रुढ़िवादिता के कारण संघर्षरत रहते हैं। मूर्ति को तोड़ना, गौ-हत्या कर देना, मुस्लिमों पर रंग छिड़क देना, मस्जिदों के सामने बैंड बजाना और धार्मिक उत्सवों एवं जुलूसों में पथराव करने को उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।

इसके साथ ही ठाकुर प्रकाशन के ऊपर भी समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक बातें प्रकाशित करने की बात सामने आई है। हालाँकि, इसके खिलाफ अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, मगर जल्दी ही इसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करवाने की तैयारी चल रही है। मुस्लिम परिषद संस्थान के प्रवक्ता असरार कुरैशी ने इस पुस्तक को नफरतों का पुलिंदा बताया और कहा कि अगर प्रकाशकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो वो आंदोलन करेंगे।  राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमीन कायमखानी ने भी दोनों किताबाें में समुदाय विशेष को लेकर गलत बातें लिखे होने की बात कही है।

इस मामले पर ठाकुर पब्लिकेशन्स के डायरेक्टर सराेज ठाकुर ने सफाई देते हुए कहा ये  किताब साल 2014-15 में पब्लिश हुई थी। राजहंस ने पुरानी किताब लेकर पब्लिश कर दिया और शिकायत भी उन्हीं के खिलाफ हुई है। वहीं, राजहंस पब्लिकेशन्स के डायरेक्टर दीपक का कहना है कि किताब में छपी बाताें काे लेकर संगठनाें के प्रतिनिधियाें काे माफीनामा भेजा जा चुका है।