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जिसने हिंदुस्तान को ‘ईसाई राष्ट्र’ बनाने का ख्वाब देखा था, RSS को उससे सीखने की जरुरत नहीं Scroll

आरएसएस पर जो सबसे बड़ा आरोप विरोधियों द्वारा लगता है, और जो उसके समर्थकों की उससे सबसे बड़ी उम्मीद होती है, वह भारत को एक ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित करने की मंशा का है। यह बात और है कि समर्थकों में ‘हिन्दू राष्ट्र’ का अर्थ महज़ हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म को इस देश की प्राकृतिक आस्था और स्वभाव के रूप में स्वीकार करने का है (जोकि स्व-स्पष्ट रूप से है भी), जबकि विरोधी ‘हिन्दू राष्ट्र’ में फ़ासीवाद, मुस्लिमों का सामूहिक हत्याकाण्ड, सड़क पर मार्च करते बजरंग दल और हिन्दू युवा वाहिनी, लोगों के घर पर छापे मार कर उनके फ्रिज में प्याज-लहसुन-बीफ़ की तलाशी लेता उड़न-दस्ता देखते हैं। लेकिन स्क्रॉल वाले इन सब से आगे निकल गए हैं। वे हिन्दू-राष्ट्र के सपने से दूर जाने के लिए आरएसएस-समर्थकों को उस इंसान से ‘सीख लेने’ की सलाह दे रहे हैं, जो “एक मज़हब (ईसाईयत), एक जाति, एक राजवंश” में हिंदुस्तान का कल्याण देखता था। “एक राजवंश” के नीचे पूरे हिंदुस्तान को लाने का ख्वाब पालने वाले इंसान से स्क्रॉल का यह लेख ‘लोकतंत्र’ सीखने की भी हिमायत करता है।

‘एक टाइप का राष्ट्र’ गोम्स का सपना था, गोलवलकर का नहीं

स्क्रॉल पर लेखक पीटर रोनाल्ड डिसूज़ा जिस ‘भद्र पुरुष’ से संघ-समर्थकों को सीखने की नसीहत देते हैं, वह हैं फ्रांसिस्को लुइस गोम्स- हिंदुस्तान में पैदा हुए पुर्तगाली ‘पार्लिआमेंटेरियन’। इनके विपरीत गोलवलकर (संघ के शुरुआती सरसंघचालकों में से एक) को रखकर ज्ञान झाड़ा जाता है कि गोलवलकर की शाखाओं से निकले स्वयंसेवक भला क्या जानें पहाड़ी कला की सूक्ष्म विशिष्टताओं को, संगम तमिल साहित्य के इतिहास को और भक्ति आंदोलन को? भले ही “गोलवलकर की शाखाओं से निकले स्वयंसेवक” को, उनमें से हर एक को, उपरोक्त विषयों की जानकारी न हो, लेकिन न ही वे इनमें से किसी को नीची नज़र से देखते हैं, और न ही इन सभी के उद्गम हिन्दू धर्म से एलर्जी रखते हैं। वहीं इसके उलट महाभारत और शतरंज के हिंदुस्तानी उद्गम पर दावा ठोंक उनकी विरासत के दम पर यूरोप में अपने सुसंस्कृत होने का दावा करने वाले गोम्स ने न ही यूरोप और न ही हिंदुस्तान में हिन्दू धर्म को इनके उद्गम का श्रेय दिया। वह तो हिन्दू धर्म को मिटा कर ईसाईयत को पूरे हिंदुस्तान का एक ही मज़हब बना देने का सपना पालते थे

लोकतंत्र के लिए गोम्स का उद्धरण भी हास्यास्पद

गोवा में भाजपा जो कुछ भी कॉन्ग्रेस विधयकों को अपने पाले में करने के लिए कर रही है, उसके नैतिक या अनैतिक होने पर हर एक की दोराय हो सकती है- भाजपा समर्थकों की भी है। कुछ (लगभग) कॉन्ग्रेस-मुक्त गोवा के लिए खुश हैं, तो कुछ ‘कॉन्ग्रेस-युक्त भाजपा’ को लेकर शंकालु। लेकिन इसमें भाजपा की मुखालफत के लिए संघ और हिंदुत्व से घृणा में अंधे होकर डिसूज़ा गोम्स को उद्धृत करते हैं। क्या उन्हें पता है कि गोम्स न केवल पूरे हिन्दू समाज को ईसाई बना देने का कट्टरपंथी ख्वाब पालते थे, बल्कि लोकतंत्र नहीं, “एक राजवंश” की हिमायत करते थे हिंदुस्तानी समाज के हितों के लिए?

Goa Inquisition पर सन्नाटा

हज़ारों हिन्दुओं को ज़िंदा जला देने और शरीर छेद कर टाँग देने वाला पुर्तगालियों का Goa Inquisition शायद ईसाईयत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। लेकिन बहुत ढूँढ़ने पर भी मुझे श्री गोम्स साहब का इसके खिलाफ एक भी लफ्ज़ नहीं मिला- न इसे जिस मज़हब के लिए किया गया उसके ख़िआलफ, न इसे करने वाले पुर्तगाली शासक के खिलाफ, न ही उस ‘संत’ फ्रांसिस ज़ेवियर के ख़िलाफ़, जो इसका मुख्य षड्यंत्रकारी था। निंदा करना तो दूर की बात, गोम्स तो “बिना ज़ोर-ज़बरदस्ती के” समूचे हिंदुस्तान के साथ वही करने की सलाह ब्रिटिशों को देते थे, जो पुर्तगालियों ने गोवा वालों के साथ किया। ऐसे में गोम्स के किसी भी वक्तव्य (जिनमें उपरोक्त समेत दोहरे चरित्र को दर्शाने वाले विरोधाभासी उदाहरणों की कमी नहीं है), किसी भी विचार का क्या ऐतबार?

डिसूज़ा साहब का मज़हब उन्हें इसके लिए अगर नर्क की आग में चिरकाल के लिए जला देने की धमकी न दे तो बेहतर होगा कि वह गोम्स की बजाय गर्ग संहिता, गंगापुत्र भीष्म का “शांति पर्व” और गौरांग महाप्रभु की शिक्षाओं को पढ़ें। भाजपा-संघ को झाड़ने के लिए ज्ञान का ‘कच्चा माल’ वहाँ बेहतर मिल जाएगा!

RaGa और धोनी के भक्तों को हुआ एक समान कॉन्स्टिपेशन, हार को चुपचाप गए डकार

एक महान लेखक ने एक बार अपने एक फेसबुक पोस्ट में 3 हैशटैगों के साथ लिखा था- “एक पुराने और बड़े दुःख को भुलाने का सबसे आसान तरीका यह है कि किसी दूसरे बड़े दुःख को अपना लिया जाए।”

देश का कट्टर युवा जागा ही था कि युवराज के राज्याभिषेक में बाधा आ गई। बाधा क्या आई कि युवराज नाराज ही हो गए। फरमान जारी किया गया और गाँव-नगर में ढिंढोरा पिटवाने का राज-आदेश दे दिया गया कि युवराज नाराज हैं और कई दिनों से “कॉन्गलेच के छोना बाबू थाना नहीं था रहे।” तमाम विश्लेषकों के माथे बल पड़ गया। राजनीति के गलियारों में हलचल मच गई।

इस बाबू को थाना थिलाने के प्रयोजन से कॉन्ग्रेस के ‘दद्दावरों’ को मैदान में उतारा गया, क्योंकि उनकी रगों में अभी तक एक गुलाब के फूल वाले समाजवादी नेता का नमक बह रहा था। दद्दावरों को राज धर्म निभाने का वास्ता दिया गया, नेहरूघाटी सभ्यता के दौरान खाई गई अटूट कसम उन्हें आज भी याद थी। दद्दावरों ने दाँतुन के डॉक्टर से हाल ही में लगवाए नए दाँतों का सेट मुँह में डालते हुए कहा – “हाँ हमारी ही गलती थी, आप कहें तो परिवार समेत इस्तीफ़ा आपके चरणों में बिछा दें, लेकिन आप अपना इस्तीफ़ा रोक दीजिए।”

किन्तु, छोना बाबू नहीं डिगे। दल का मनोबल टूटने लगा, दद्दा अपनी टोपी राज दरबार में ही छोड़कर भारी मन से लौटने लगे। इन सब के बीच चुपचाप जो एक घटना दम तोड़ती रही, वो थी समानांतर रूप से डीएम तोड़ती हुई कॉन्ग्रेस की लोकसभा चुनाव में हार की जलालत!

इस इस्तीफे और युवराज को मनाने के खेल से कॉन्ग्रेस को चुनाव की हार का गम भुलाने में बड़ी राहत मिली। इस सारे ‘इस्तीफ़ा प्रकरण’ के बीच कॉन्ग्रेस की हार की घटना का दुःख एक कोने में चुपचाप अपनी मौत मरता रहा। तमाम दिन तैमूर के डायपर बदलने की खबर लिखने वाली गोदी मीडिया ने भी कॉन्ग्रेस की इस हार के दुःख को प्राथमिकता नहीं दी।

एकजुट होकर सबने लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को मिली बड़ी हार के दुःख को युवराज के इस्तीफे के दुःख में तब्दील कर दिया और दिखा दिया कि नेहरू जी के बिस्कुट में वाकई में नमक था। अब पार्टी कार्यकर्ता और तमाम वरिष्ठ-बुजुर्ग नेतृत्व की जान में जान आ चुकी है। सब अपने नकली दाँतों का सेट वापस मुँह में ठूँसकर खूब खिलखिला रहे हैं। इस ख़ुशी के शोर का कारण कॉन्ग्रेस के पार्टी प्रवक्ता बता रहे हैं कि लोकसभा सीट नहीं बचा पाए तो क्या, राहुल गाँधी जी को तो बचा लिया है। ये स्वर सुनते ही स्वर्ग में नेहरू जी की आत्मा फूट-फूटकर मुस्कुराई है।

लेकिन राहुल गाँधी को आखिरकार एक तेज दौरा इस्तीफे का फिर आया और इसमें त्यागपत्र देने से उन्हें कोई नहीं बचा पाया। सबका मनोबल सड़क पर आ गया। अब जनता को इस सदमे से भी जूझना था। बहन प्रियंका के पति और राहुल गाँधी जी के जीजा जी भी आज अश्रुपूरित चिट्ठी लिखकर अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल कर ही चुके हैं। राहुल गाँधी भी आज घोषणा कर चुके हैं कि वो खड़े रहेंगे।
यकीन ना हो तो अपनी आँखों से देख लो –

यूनेस्को द्वारा प्रमाणित ‘बेस्ट जीजाजी’ ने राहुल को क्या लिखा पत्र में?

क्रिकेट फैंस गहरी साँसें लेकर अपनी जिम्मेदारी पर ही आगे पढ़ें

इसी बीच विश्वविजय पर निकली BCCI की क्रिकेट टीम का कारवाँ भी इंद्रदेव ने सेमीफाइनल मुकाबले में रुकवा दिया। कुछ जानकारों का तो यह भी कहना है कि मोदी जी की सरकार आने के बाद ही भारतीय क्रिकेट टीम सेमीफाइनल मुकाबले में हारी है, वरना जब-जब इस देश में कॉन्ग्रेस का शासन था, तब कभी भारतीय टीम सेमीफाइनल में नहीं हारा करती थी। लेकिन कुछ फैक्ट चेकर्स ने इस दावे में ‘राइट एंगल’ तलाशते हुए पता लगाया कि कॉन्ग्रेस के शासन के दौरान तो अपनी टीम को सीधा बांग्लादेश जैसी अल्पविकसित टीम से हार मिली थी और उसके हाथों भारतीय क्रिकेट टीम को वर्ल्ड कप मुकाबले से बाहर होना पड़ा था। यह वर्तमान हार से कहीं ज्यादा ‘अपमानास्पद’ था।

सेमीफाइनल में मिली हार को पचाने के लिए फेसबुक के कुछ प्रगतिशील लेखक भी आगे आए। उन्होंने इस हार के बाद अपनी दिल की कलम से तुरंत पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए यहाँ तक लिख दिया-

“सुन ले पाकिस्तान! कुछ तो बात है टीम इंडिया के फ़साने में
2 दिन लगते हैं तुम्हारे बाप को हराने में।”

खैर, अब नया चैलेंज वर्ल्ड कप से बाहर होने के गम से भी बाहर निकलने का था। इस बीच व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी पर एक खबर आग की तरह फैला दी गई- “महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट को कहेंगे अलविदा।”

करुण रस में डूबी हुई इन पंक्तियों को पढ़ते ही कट्टर फैन के कानों से लहू दौड़ने लगा। धोनी फैंस घर से नंगे पाँव निकल पड़े। क्रांति का सैलाब सोशल मीडिया पर जमकर बहा। चारों ओर “नहीं धोनी, नहीं धोनी” की चीत्कार सुनाई देने लगी। हालाँकि, अब तक तो कम से कम धोनी को क्रिकेट से इस्तीफा देने से रोक लिया गया है। क्रिकेट के यूट्यूब पर रन बनाने वाले कुछ विश्लेषकों का तो यहाँ तक भी कहना है कि धोनी के आखिरी ओवरों के स्ट्राइक रेट को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपने इस्तीफे पर दोबारा विचार करना चाहिए।

फैंस, चाहे राहुल गाँधी के हों या फिर धोनी के, हर जगह जीतते नजर आ रहे हैं। ‘वो’ युवराज को कॉन्ग्रेस में बने रहने के लिए मना चुके हैं और ‘ये’ धोनी को जमे रहने के लिए! इस बीच ख़ुशी की एक बात यह है कि इस्तीफे की आड़ में हम लोग 2 बड़ी हारों को चुपके से डकार गए। उस लेखक की कालजयी पंक्तियाँ बरबस याद आ रही हैं जिसने कहा था- “एक पुराने और बड़े दुःख को भुलाने का…”

मुरादाबाद के एक गॉंव में नाइयों की दादागिरी, दलितों की बाल-दाढ़ी बनाने से इनकार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का गॉंव पीपलसना। इस गॉंव के मजहब विशेष के नाइयों ने दलितों की बाल-दाढ़ी बनाने से इनकार कर दिया है। नाइयों का कहना है कि दलितों की बाल-दाढ़ी नहीं बनाने का सिलसिला काफी पहले से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा।

समुदाय विशेष के नाइयों ने न केवल खुद दलितों की बाल-दाढ़ी बनाने से मना किया है, बल्कि जो उनकी बाल-दाढ़ी बनाते हैं उनकी दुकान बंद करवा देते हैं। इससे आजिज आकर गांव के दलितों ने भोजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जॉंच के लिए टीम का गठन किया है। पुलिस का कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

गाँव के दलित समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह भेदभाव वे अरसे से झेलते आ रहे हैं। लेकिन, चाहते हैं कि उनकी नई पीढ़ी को इससे आजादी मिले। इसलिए जाति के आधार पर भेदभाव अब खत्म होना चाहिए।

पीड़ितों का आरोप है कि यहाँ लोग पढ़-लिख जरूर गए हैं, लेकिन अपनी पुरानी सोच बदलने को तैयार नहीं हैं।
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक गाँव के कल्लन ने बताया कि वे लोग दलितों से नफरत करते हैं इसलिए अपनी दुकानें बंद कर रखी हैं। वे उन लोगों के बाल नहीं काटते। जिसके कारण उनके घर कोई रिश्तेदारी नहीं करता, कोई लड़की नहीं देता और बेतरतीब बाल-दाढ़ी के कारण उनसे घृणा करते हैं।

आरोपित नाइयों के अनुसार पहले गाँव के दलित बाहर से बाल कटा के आ जाया करते थे, लेकिन अब वे यहाँ बाल कटाने पर अमादा हैं। एक ग्रामीण के मुताबिक नाई समाज का ये मानना है कि अगर वे दलितों के बाल काटेंगे तो उनके यहाँ समुदाय विशेष वाले बाल नहीं कटवाएँगे और अगर वे दलितों के बाल नहीं काटते तो वे प्रशासन से उनकी शिकायत कर देंगे।

इस मामले में स्थानीय निवासी नौशाद ने इंडिया टुडे को बताया कि दलित पहले कभी भी गाँव में नाई की दुकान पर नहीं जाते थे। वे बाल कटाने और दाढ़ी बनवाने के लिए भोजपुर जाया करते थे।

नौशाद के मुताबिक जब पुलिस ने नाइयों को हिरासत में लिया उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि गाँव के दलितों ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत की है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने 45 साल की उम्र में किसी दलित को गाँव की दुकानों पर बाल कटाते नहीं देखा। उनका कहना है, अगर दलित गाँव की इन दुकानों पर आकर बाल कटाएँगे और दाढ़ी बनवाएँगे तो तौलिए गंदे हो जाएंगे , फिर बाद में उनके मजहब वाले कैसे अपने बाल बनवाएँगे ?

अली अहमद का कहना है कि इस गाँव में 95 प्रतिशत समुदाय विशेष से हैं। आज दलित नाई की दुकान में जाने की माँग कर रहे हैं, कल को शादी-घर बुक करने की माँग करेंगे। ये लोग यहाँ अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। यहाँ दशकों से शांति बनी हुई थी। इस मामले को गलत मकसद से हवा दी जा रही है।

यूनेस्को द्वारा प्रमाणित ‘बेस्ट जीजाजी’ ने राहुल गाँधी को लिखा भावुक पत्र

राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के बाद उनकी बहन के पति रॉबर्ट वाड्रा ने उनके लिए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में जमीन घोटाले के आरोपित वाड्रा ने राहुल की तारीफ़ करते हुए उन्हें यूथ आईकन, साहसिक और जमीनी नेता बताया है।

राबर्ट ने अपने फेसबुक पर लिखा, “राहुल, मुझे आपसे सीखने को बहुत कुछ मिला है। हमारे देश में लगभग 65 प्रतिशत युवा (45 साल से कम उम्र के) हैं, जो आपके मार्गदर्शन में विश्वास रखते हैं। आपने अपने बेहद साहसिक और दृसंकल्पित व्यक्तित्व का परिचय दिया है। आपका जमीनी स्तर पर काम करने का और देश की जनता से और करीब से जुड़ने का निश्चय बहुत ही सराहनीय है। आपके इस कदम में मैं आपके साथ हूँ क्योंकि जनसेवा किसी पदवी की महोताज नहीं होती।”

बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा से पहले उनकी पत्नी प्रियंका गाँधी ने भी राहुल के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी तारीफ़ की थी और कहा था,”आपने जो किया है, ऐसा करने का साहस कम ही लोग दिखा पाते हैं, आपके निर्णय के प्रति गहरा सम्मान।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद राहुल गाँधी ने खुद को हार का जिम्मेदार ठहराया था और आहत होकर कॉन्ग्रेस हाईकमान के सामने अपना इस्तीफ़ा पेश किया था। हालाँकि उस समय उनके इस्तीफ़े को स्वीकार नहीं किया गया। लेकिन कुछ दिन बाद 4 जुलाई को उन्होंने ट्विटर के जरिए अपने पद से इस्तीफ़ा देने की जानकारी दी थी और बताया कि वे अब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नहीं हैं।

उन्नाव: धार्मिक नारे और FIR के नाम निकले फर्जी, CCTV फुटेज से पुलिस ने किया झूठ का खुलासा

शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में क्रिकेट मैच को लेकर मदरसा दारुल उलूम फैज़ ए आम के छात्रों और कुछ स्थानीय युवकों के बीच आपसी झड़प की ख़बर सामने आई थी। मारपीट के बाद छात्र मदरसा पहुँचा और उसने मैच के दौरान हुई मारपीट की जानकारी काज़ी निसार अहमद मिस्बाही को दी, जिन्होंने पूरे मामले को मॉब लिंचिंग से जोड़ने और सांप्रदायिक रंग देने का भरसक प्रयास किया।

इस मामले में उन्नाव पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया है कि बच्चों से ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाने की शिक़ायत की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। अब तक पुलिस द्वारा एक शख़्स को गिरफ़्तार किया गया है और आगे जाँच जारी है।

उन्नाव पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी किया है। इसके अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है कि FIR में नामजद लोग मौक़े पर मौजूद ही नहीं थे। इस नोट में स्पष्ट लिखा गया है कि जय श्री राम का नारा लगवाने की बात इस पूरे प्रकरण में कहीं भी सामने नहीं आई है। इसका मतलब है कि जिस आधार पर उन चार लोगों को दोषी ठहराने की कोशिश की गई उन्हें ‘जय श्री राम’ के नारे के नाम पर बेवजह इस मामले में घसीटा गया था।

इस घटना के बाद कल (जुलाई 12, 2019) को पुलिस के बयान पर आधारित ऑपइंडिया की ही एक रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस द्वारा इस मामले में जाँच के बाद यह बात सामने आई थी कि ‘जय श्री राम’ के धार्मिक नारे लगवाने के लिए मजबूर करने वाली बात एकदम मनगढ़ंत और झूठी थी। ADG (क़ानून-व्यस्था) उन्नाव ने क्रिकेट खेलने को लेकर दो पक्षों में हुई मारपीट की घटना के बारे में बताया था कि इस मामले की जाँच में पता चला है कि मदरसे के बच्चों से धार्मिक नारे नहीं लगवाए गए थे। ऐसे झूठे आरोप लगाकर मेरठ और आगरा में भी शांति भंग करने का प्रयास किया गया।

पुलिस ने बयान दिया कि प्रदेश में कहीं भी अफ़वाह और शांति भंग करने का प्रयास किया जाएगा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना को लेकर लोकभवन में ADG LO, IG LO और प्रमुख सचिव सूचना की प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की गई थी।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया था कि उन्नाव में क्रिकेट खेलने के चलते विवाद हुआ और क्रिकेट की वजह से ही बच्चों में झगड़ा हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों से कोई भी धार्मिक/मज़हबी नारे नहीं लगवाए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि उन्नाव, मेरठ और आगरा में असामाजिक तत्वों को गिरफ़्तार किया गया और बिना भेदभाव के लोगों पर कार्रवाई की गई है।

मॉब लिंचिंग के लिए BJP, RSS नहीं, कॉन्ग्रेस ज़िम्मेदार: मौलाना सुहैब क़ासमी

इस्लामिक मदरसा जमात-ए-उलेमा हिंद ने देश भर में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराया है।

जमात-ए-उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सुहैब क़ासमी ने आज (13 जुलाई 2019) गुवाहाटी में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं के लिए भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस ज़िम्मेदार है

क़ासमी ने खुले तौर पर यह कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली हिंसा के लिए कॉन्ग्रेस ज़िम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी से लिंचिंग से जुड़े हर उस मामले में सवाल पूछे जाने चाहिए जो उसके शासनकाल के दौरान घटित हुईं थीं।

हाल ही में सूरत नगर निगम (एसएमसी) के एक कॉन्ग्रेस पार्षद असलम साइकिलवाला को पुलिस ने गुजरात के सूरत शहर के अठवा लाइन्स इलाक़े में हुई एक भगदड़ की घटना में हिरासत में लिया था। इस घटना में झारखंड में तबरेज़ अंसारी की कथित रूप से हत्या के ख़िलाफ़ रैली निकाल रहे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया था। साइकिलवाला के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

तबरेज़ अंसारी की मौत के विरोध में एक हिंसक भीड़ द्वारा बस में आग लगाने की कोशिश के बाद एक अन्य कॉन्ग्रेसी नेता शमशेर आलम का नाम भी रांची की पुलिस ने FIR में दर्ज किया था।

कर्नाटक: विधानसभा स्पीकर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे कॉन्ग्रेस के 5 और बागी MLA

कर्नाटक में जारी सियासी उठापठक के बीच कॉन्ग्रेस के पांच और बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन विधायकों ने अपनी याचिका में कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार जान-बूझकर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुँचने वाले विधायकों में आनंद सिंह, डॉ. के सुधाकर, एन नागराज, मुनीरत्न और रोशन बेग शामिल हैं। इसी के साथ कर्नाटक में सियासी संकट शुरू होने के बाद से सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने वाले बागी विधायकों की कुल संख्या 15 हो चुकी है। 

दूसरी ओर, बगावत करने वाले विधायकों को पर्दे के पीछे से साधने की कोशिश में भी कॉन्ग्रेस और जनता दल(एस) लग गई है। कॉन्ग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले राज्य के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार तड़के एन नागराज को मनाने के लिए उनके आवास पर पहुँचे। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर भी नागराज को मनाने उनके आवास पर गए। साथ ही उनसे इस्तीफ़ा वापस लेने का अनुरोध भी किया।

अन्य विधायकों जिनमें रामलिंगा रेड्डी, मणिरत्न और रोशन बेग शामिल हैं, को मनाने की भी कवायद जारी है। गौरतलब है कि विधायकों की बगावत के कारण एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में चल रही कॉन्ग्रेस-जनता दल(एस) सरकार पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है।

‘1984 का सिख दंगा RSS का रचा हुआ’ – The Caravan के संपादक का झूठ और लंदन में छीछालेदर

भारत की स्वघोषित “सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक-राजनीतिक पत्रिका” कारवाँ के सम्पादक विनोद के. होज़े को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। यह तब हुआ जब उनके एंटी-इंडिया प्रोपेगेंडा की प्रसार भारती के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार ए. सूर्यप्रकाश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कलई खोल दी। और-तो-और, जिस सभा में वह (होज़े) यह सब बोल रहे थे, उसके सभाध्यक्ष ने भी तत्काल ही लोकतांत्रिक दुनिया में हिंदुस्तान के ओहदे को निर्विवाद बताया।

लंदन में झूठ बोलते पकड़े गए होज़े

लंदन में ब्रिटेन और कनाडा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित मीडिया की आज़ादी पर वैश्विक कॉन्फ्रेंस (ग्लोबल कॉन्फ्रेंस फॉर मीडिया फ्रीडम) के दौरान ‘मीडिया एंड रिलिजन’ सत्र में कारवाँ के कार्यकारी सम्पादक विनोद के. होज़े ने भारत-विरोधी प्रेज़ेंटेशन दिया। बृहस्पतिवार (11 जुलाई, 2019) को हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि हिंदुस्तान के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि “सैकड़ों ईसाईयों की हत्या हो रही है।” और “1984 का सिख हत्याकांड भी आरएसएस का रचा हुआ था।” अपने दावों के सबूत के तौर पर उन्होंने कथित अल्पसंख्यकों पर हमले के मीडिया द्वारा कवरेज के वीडियो भी दिखाए

सूर्यप्रकाश का पलटवार

होज़े के प्रेज़ेंटेशन के बाद जब दर्शकदीर्घा के प्रति-प्रश्नों का समय आया तो सूर्यप्रकाश ने श्रोताओं को होज़े के दावों में गलतियों के प्रति आगाह करते हुए उनके कथनों को गलत बताया। उन्होंने याद दिलाया कि हिंदुस्तान न केवल (आबादी के लिहाज से) सबसे बड़ा, बल्कि सबसे जीवंत लोकतंत्र भी है। एक समाज के तौर पर हिंदुस्तानी समाज सबसे अधिक विभिन्नताओं वाला भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दर्शक होज़े पर भरोसा कर (हिंदुस्तान की नकारात्मक छवि ले) वापस जाएँगे, तो यह वैश्विक लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए आघात होगा।

‘एक्टिविस्टों को जनादेश से दिक्कत’

सूर्यप्रकाश ने यह भी कहा कि दुनिया के कुछ एक्टिविस्टों को हालिया लोकसभा के जनादेश से समस्या है। इसीलिए वे अपनी थ्योरियाँ चलाने के लिए ऐसे मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण दिया कि वहाँ हुए कुछ नस्लीय दंगों जैसी गिनी-चुनी घटनाओं से पूरा देश नस्लभेदी या लोकतंत्र-विरोधी नहीं हो जाता।

ब्रिटिश सांसद ने संभाली बात

सूर्यप्रकाश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आयोजकों का ऐसे खुले तौर पर हिंदुस्तान-विरोधी प्रेज़ेंटेशन को मंच देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दुनिया के सबसे जीवंत लोकतंत्र पर हमला कर के लोकतंत्र के हितों की कोई हिमायत नहीं होती। सूर्यप्रकाश की नाराज़गी दूर करने के लिए उस सत्र के सभाध्यक्ष और ब्रिटिश सांसद लॉर्ड अहमद ने तुरंत उनकी टिप्पणी का संज्ञान लिया और लोकतान्त्रिक विश्व में भारत की साख की तारीफ की। लॉर्ड अहमद विंबलडन के सांसद होने के अतिरिक्त कॉमनवेल्थ और संयुक्त राष्ट्र मामलों के ब्रिटिश विदेश राज्य मंत्री भी हैं।

MP: सचिव की जगह सरपंच का तबादला, कमलनाथ सरकार की किरकिरी

मध्य प्रदेश की सत्ता पर जब से कॉन्ग्रेस काबिज़ हुई है ताबड़तोड़ तबादले हो रहे हैं। ये तबादले कमलनाथ सरकार की किरकिरी की भी वजह बन रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि रीवा में सचिव की जगह सरपंच के तबादले का आदेश जारी कर दिया गया।  

इस मामले पर कमलनाथ सरकार के पंचायती राज मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सफ़ाई देते हुए कहा है, “यह गलती सरकार के स्तर से नहीं हुई है। निचले स्तर पर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। हमने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जिसने भी यह गलती की होगी उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”

रीवा में पिछले दिनों पंचायत सचिवों के तबादलों के आदेश जारी किए गए थे। इनमें एक नाम सरपंच का भी था। ज़िले की शिवपुरवा ग्राम पंचायत की प्रभारी विबा द्विवेदी की जगह गाँव के सरपंच बिहारीलाल पटेल का तबादला कर दिया गया। मॉनसून सत्र के दौरान सदन में इस गलती को उठाए जाने के बाद मामला सामने आया।

ख़बरों के अनुसार, बजट पर चर्चा के दौरान सदन में देवतालाब से बीजेपी विधायक गिरीश गौतम ने तबादलों में हुई गड़बड़ियों का ख़ुलासा करते हुए कमलनाथ सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री तबादले करने में इतने व्यस्त हैं कि सचिव के बदले सरपंच का ही तबादला कर दिया।

तबरेज का बदला लेगा उसका आतंकवादी बेटा! एजाज़ खान ने TikTok वीडियो में दिया आरोपितों का साथ

हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा फैलाने की धमकी देने वाले विवादास्पद अभिनेता एजाज़ खान का एक और आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है। उन्होंने उस TikTok ‘सेलिब्रिटी’ के साथ यह विवादस्पद वीडियो बनाया है जिसके खिलाफ तबरेज़ अंसारी की मौत के बदले में हिंसा भड़काने के आह्वान को लेकर FIR दर्ज की गई है।

डायलॉग की नकल के बहाने पुलिस का मखौल

एजाज़ खान की TikTok प्रोफाइल पर शेयर किए गए इस वीडियो में वह मुंबई पुलिस का मज़ाक उड़ाते नज़र आते हैं। यह एक बॉलीवुड फिल्म के डायलॉग की मिमिक्री है। इसमें उनके साथ Team07 का एक सदस्य नज़र आता है। डायलॉग में जब पुलिस अफसर का किरदार कुछ अपराधियों को पुलिस की गाड़ी में बैठने को कहता है तो अपराधियों में से एक पुलिस वाले पर धौंस जमाता है।

हालाँकि यह वीडियो पुराना है, पर इसे हाल ही में एजाज़ खान द्वारा उनकी TikTok प्रोफाइल पर शेयर किया गया है। इसमें उक्त मामले में FIR कराने वाले शिवसेना कार्यकर्ता रमेश सोलंकी पर तंज कसते हुए “वारंट लाया है? रमेश सोलंकी” का कैप्शन भी लिखा गया है।

अजाज़ खान की प्रोफाइल पर शेयर वीडियो का स्क्रीनशॉट

‘तबरेज़ का बदला’ के मामले में हुई थी FIR

गत 9 जुलाई को मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने शिव सेना कार्यकर्ता सोलंकी की शिकायत पर TikTok दर्शकों में खासे लोकप्रिय युवकों फैसल शेख, हसनैन खान, फैज़ बलोच, अदनान शेख और सधन फ़ारूक़ी के खिलाफ FIR दर्ज की थी। सोलंकी का आरोप है कि इन युवकों का TikTok पर जारी वीडियो, जिसमें 22-वर्षीय तबरेज़ अंसारी की झारखण्ड में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर की गई कथित हत्या का बदला उसकी औलाद द्वारा आतंकवाद से करने की बात करते हैं, अन्य लोगों को हिंसा करने के लिए भड़काता है। उन्होंने उक्त Team07 द्वारा वीडियो हटा लेने और माफ़ी माँग लेने को भी नाकाफी बताते हुए इन लोगों को प्रतिबंधित करने और इनके अकाउंट ससपेंड करने की माँग की थी

एजाज़ खान के विवादस्पद वीडियो का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वह पायल रोहतगी को खरी-खोटी सुनाने में सारी दुनिया के एक दिन इस्लाम अपनाने की बात कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एक दूसरे वीडियो में मजहब विशेष के 40 करोड़ वैध-अवैध के सड़क पर उतर कर समूचे देश को बंद कर देने की बात भी कही थी। उन्होंने एक बार यह भी ट्वीट किया था कि वे संविधान के ऊपर कुरान चुनेंगे। इसके अलावा ड्रग्स रखने के मामले में वह नवी मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल द्वारा भी हिरासत में लिए जा चुके हैं

Muslim actor from India says he will choose Quran over Constitution of India