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लालू यादव को चारा घोटाला मामले में मिली ज़मानत… लेकिन जेल से नहीं मिलेगी छुट्टी!

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू यादव को झारखंड हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले में लालू यादव को राहत प्रदान की है। लालू यादव को यह ज़मानत 50-50 हज़ार रुपए के मुचलके पर दी गई। साथ ही कोर्ट ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराने का भी आदेश भी दिया है। इस पर उनके वकील ने जानकारी दी कि लालू यादव का पासपोर्ट पहले ही एक्सपायर हो चुका है। फ़िलहाल, लालू यादव चारा घोटाला मामले में रांची की एक जेल में बंद हैं।

दरअसल, चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में सज़ा की आधी अवधि गुज़र जाने को आधार बनाकर लालू यादव की ओर से 13 जून 2019 को ज़मानत याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें 50-50 हज़ार रुपए के मुचलके पर ज़मानत दे दी। लेकिन फ़िलहाल, लालू यादव जेल में ही रहेंगे क्योंकि इसी चारा घोटाला में उन्हें दुमका और चाईबासा कोषागार मामले में ज़मानत नहीं मिली है। हालाँकि, लालू यादव के वकील ने कहा है कि वो इन दोनों मामलों में भी ज़मानत याचिका दायर करेंगे।

ख़बर के अनुसार, देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की ज़मानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इससे पहले 5 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में डिफेंस की तरफ़ से दायर याचिका पर CBI ने सवाल उठाए थे। इन सवालों के जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने 12 जुलाई का समय तय किया था, जिसमें उन्हें ज़मानत मिली है। 

लालू यादव के अधिवक्ता के अनुसार, लालू प्रसाद यादव 25 महीने से अधिक समय जेल में गुज़ार चुके हैं, इसी आधार पर ज़मानत याचिका दायर की गई थी। बता दें कि चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से लगभग 89 लाख 27 हज़ार रुपए की अवैध निकासी के मामले में 23 सितंबर 2017 को लालू यादव को दोषी ठहराया गया था। इस मामले में CBI की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें साढ़े तीन साल की सज़ा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, सज़ा की आधी अवधि जेल में काटने पर सजायाफ्ता क़ैदी को ज़मानत दी जा सकती है। इसे ही आधार बनाकर ज़मानत याचिका दायर की गई थी। जानकारी के अनुसार, लालू यादव को कोर्ट द्वारा दुमका केस में पाँच साल और चाईबासा मामले में सात साल की सज़ा सुनाई गई है।

TDP से इस्तीफ़ा देकर एक और नेता हुए BJP में शामिल, 7 अन्य MLA भी हैं ‘चक्कर’ में

चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी से नेताओं के इस्तीफे देने का दौर अब भी थमा नहीं है। इस कड़ी में पार्टी के विधान परिषद सदस्य अन्नाम सतीश प्रभाकर ने भी आज टीडीपी को छोड़कर भाजपा का हाथ थाम लिया है।

सतीश को भाजपा में कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को सदस्यता दिलवाई है। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अंबिका कृष्णा भी 25 जून को भाजपा में शामिल हो गए हैं।

खबरों के अनुसार टीडीपी से जीतने वाले 7 अन्य विधायकों के भी भाजपा में संपर्क होने की बात पता चली है। राज्यसभा में टीडीपी के 4 सदस्य पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिनमें वाईएस चौधरी, टीजी वेंकटेश, जीएम राव और सीएम रमेश भी शामिल हैं।

भाजपा में शामिल हुए टीडीपी नेता

मराठा आरक्षण: रोक लगाने से SC का इनकार, महाराष्ट्र सरकार से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा और नौकरी में मराठा समुदाय को आरक्षण देने संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब माँगा है। हालॉंकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरक्षण कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है। लेकिन, यह साफ कर दिया है कि इस आरक्षण को 2014 से लागू करने के पहलू को लागू नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

महाराष्ट्र सरकार ने बीते नवंबर में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) आरक्षण कानून पास किया था। 27 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस कानून की संवैधानिक मान्यता पर मुहर लगा दी थी। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने याचिका दायर कर रखी है।

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने राजनीतिक दबाव में यह फैसला किया है। साथ ही इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित आरक्षण की 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन भी होता है। एसईबीसी आरक्षण कानून मराठा समुदाय को शिक्षा में 12 और नौकरी में 13 फीसदी आरक्षण प्रदान करता है। इस कानून के पास होने के बाद महाराष्ट्र में आरक्षण की सीमा बढ़कर 68 फीसदी हो गई है।

याचिकाकर्ताओं ने मोहम्मद सईद नूरी शफी अहमद की अगुवाई में कहा कि एसईबीसी आरक्षण कानून संविधान के समानता के अधिकार के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वकील विपिन नायर और माधवी अय्यप्पन ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला अधूरे तथ्यों पर आधारित है।

27 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा ​था कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के रूप में वर्गीकृत करके राज्य सरकार द्वारा मराठा समुदाय को दिया गया आरक्षण वैध है। हालॉंकि हाई कोर्ट ने राज्य विधानसभा द्वारा निर्धारित आरक्षण को 16% से घटाकर शिक्षा में 12 और नौकरी में 13% कर दी थी।

तेलंगाना की ‘सर्वश्रेष्ठ तहसीलदार’ गिरफ्तार, ₹93.5 लाख नकद और 400 ग्राम सोना जब्त

2 साल पहले तेलंगाना सरकार की तरफ से सर्वश्रेष्ठ तहसीलदार का पुरस्कार प्राप्त कर चुकी वी लावण्या को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार (जुलाई 10, 2019) देर रात तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में तहसीलदार वी लावण्या के घर छापेमारी की। जिसमें ₹93.5 लाख और 400 ग्राम सोने की ज्वैलरी के अलावा कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए। ये बरामदगी लावण्या के हैदराबाद के हयातनगर में स्थित घर से हुई है।

यह कार्रवाई एसीबी (Anti Corruption Bureau) ने ₹4 लाख घूस लेने के मामले में की है। एससीबी के अधिकारियों ने बताया कि कोंदुरु ग्राम राजस्व अधिकारी (वीआरओ) एम अंतैयाह को बुधवार को ₹4 लाख घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। दरअसल, वीआरओ के खिलाफ एम भास्कर नाम के एक किसान ने एंटी करप्शन विंग से शिकायत की थी। शिकायत में उसने कहा था कि उसकी जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए ₹8 लाख की रिश्वत माँगी गई थी।

जानकारी के मुताबिक, भास्कर से कथित रूप से ₹8 लाख देने के लिए कहा गया था। रिश्वत की डील के मुताबिक, इन ₹8 लाख में से ₹5 लाख एमआरओ के लिए थे और शेष ₹3 लाख वीआरओ को मिलने वाले थे। इससे पहले भास्कर ने पासबुक के लिए वीआरओ को ₹30 हजार दिए थे और फिर जब उसने अपनी जमीन की ऑनलाइन रिकॉर्डिंग में मौजूद गलतियों को ठीक करने के लिए कहा, तो रिश्वत के तौर पर उससे ₹8 लाख की माँग की गई। इसके बाद भास्कर ने इसकी शिकायत एसीबी से कर दी।

किसान (भाष्कर) की शिकायत पर एसीबी के अधिकारियों ने पूछताछ कर एमआरओ को हिरासत में ले लिया। जब इस बारे में लावण्या से पूछताछ की गई तो उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनका रिश्वत से कोई लेना-देना नहीं है। जिसके बाद एसीबी ने उनके घर पर छापा मारा और आय से अधिक संपत्ति के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जाँच के दौरान लावण्या की निजी कार में नौ पट्टादार पासबुक और तकरीबन 45 निजी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी पाए गए। ऐसे में ये आशंका जताई जा रही है कि ये पासबुक किसानों की भूमि रिकॉर्ड के पासबुक होंगे, जिसे लावण्या ने जब्त कर रखा होगा और इसे लौटाने के एवज में मोटी रकम ऐंठने की उम्मीद रही होगी।

इस बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक किसान लावण्या के पैरों में गिरकर उसकी गुहार सुन लेने के लिए गिड़गिड़ाता नजर आ रहा है। खबर के मुताबिक, उस किसान का नाम भास्कर है। वहीं, लावण्या दो साल पहले तेलंगाना सरकार की ओर से सर्वश्रेष्ठ तहसीलदार का पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं। लावण्या के पति ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं।

फेसबुक पर ‘बीफ सूप’ पीने की घोषणा करने वाला मो. फ़िज़ान पिटाई के बाद अस्पताल में भर्ती

तमिलनाडु के नागापट्टनम जिले में एक युवक के साथ कुछ लोगों द्वारा मारपीट की घटना सामने आई है। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार मुहम्मद फ़िज़ान नाम के इस युवक ने फेसबुक पोस्ट में बीफ का सूप पीने और उसे ‘एन्जॉय’ करने की बात लिखी थी, जिसके कारण बहस होने के बाद कुछ युवकों ने मुहम्मद फ़िज़ान को पीट दिया।

24 वर्षीय मुहम्मद फ़िज़ान की चार लोगों द्वारा पिटाई की घटना के बाद अभी वो अस्पताल में हैं। यह घटना बृहस्पतिवार (जुलाई 11, 2019) शाम 7 बजे, पोरवाचेरी गाँव, किलवेलूर थानाक्षेत्र की है। पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को पकड़ा है। मुहम्मद फ़िज़ान और पकड़े गए आरोपित एक ही गाँव के हैं।

पुलिस के अनुसार, मुहम्मद फ़िज़ान, जो कि एक फोटोकॉपी की दुकान चलाता है, ने अपनी एक फोटो फेसबुक पर यह कहते हुए पोस्ट की थी कि वो बीफ खा रहा है और उसे ये बहुत पसंद आ रहा है।

इस तस्वीर को देखने के बाद गाँव के ही 4 युवक – दिनेश कुमार (28 साल), आर अगाथियन (29 साल), गणेश कुमार (27 साल), मोहनकुमार (28 साल) की मुहम्मद फ़िज़ान के साथ ऐसी तस्वीर पोस्ट करने को लेकर बहस हो गई। पुलिस का कहना है कि पकड़े गए आरोपितों में से एक युवक स्थानीय राजनीतिक पार्टी का सदस्य है।

बहस के बाद चारों युवकों ने मुहम्मद फ़िज़ान को डंडों से पीटा। इसके बाद घायल फ़िज़ान को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। पुलिस ने चारों युवकों पर IPC की धारा 153(A) के तहत FIR दर्ज कर ली है।  

UP: गोकशी में महबूब आलम का पूरा गैंग धराया, घर में खोल रखी थी हथियार फैक्ट्री

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पुलिस ने गोकशी में लिप्त एक गैंग के 14 सदस्यों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इनमें गैंग का सरगना महबूब आलम और एक महिला भी है। उसने घर में हथियार बनाने की फैक्ट्री भी खोल रखी थी। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई कर पुलिस ने यह सफलता हासिल की है।

आजमगढ़ के एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि इस गैंग को धरने वाली पुलिस टीम को 25,000 रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि मुखबिर से आजमगढ़ के कोतवाली क्षेत्र में गोकशी का काम किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद एसपी सिटी कमलेश बहादुर और शहर कोतवाल सहित एसओजी टीम को इसकी जांच दी गई। पुलिस की टीम ने जब बुधवार को गांव के कसाईबाड़ा में छापेमारी की तो वह मौजूद लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए गो-तस्करी के मुख्य अभियुक्त महबूब आलम सहित गैंग के एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। मौके से कुछ बछड़े बरामद किए गए। घर में चल रहे अवैध हथियार फैक्ट्री से कट्टा, रिवॉल्वर, पिस्टल, चापड़ सहित कार्बाइन और राकेट लॉन्चर बनाने के सामान भी बरामद हुए।

गिरफ्तार लोगों में मुख्य अभियुक्त महबूब आलम सहित अब्दुल, टीपू सुल्तान, मोहम्मद सुहैल, सफीक, आरिफ, जमील अहमद ,फ़ैज़ अहमद ,मोहम्मद तारिक, मोहम्मद जैस, रिजवान अहमद और जवाद अहमद शामिल हैं। एसपी ने बताया कि इनलोगों से पूछताछ के बाद और भी बड़ा खुलासा हो सकता है। 

कश्मीर: पुल शॉट लगाते वक़्त युवा क्रिकेटर जहाँगीर के गर्दन में लगी गेंद, मौत

एक युवा कश्मीरी क्रिकेटर की मौत गर्दन पर गेंद लगने से हो गई। मृतक जहाँगीर अहमद वार 11वीं कक्षा का छात्र था। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक ने युवा खिलाड़ी की मौत पर गहरा दु:ख जताते हुए उसके परिजनों को पाँच लाख रुपए सहायता राशि देने का ऐलान किया है।

यह घटना उत्तरी कश्मीर के बारामुला ज़िले के पट्टन इलाक़े में एक मैच के दौरान हुई। 18 वर्षीय जहाँगीर बारामुला क्रिकेट क्लब के लिए खेलता था।

ख़बर के अनुसार, पट्टन के नानिल खेल मैदान में अनंतनाग ज़िले के खेल विभाग की तरफ़ से बुधवार (11 जुलाई) को एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में बारामुला और बड़गाम के बीच मैच खेला जा रहा था। मैच के दौरान गोशबाग पट्टन निवासी गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का छात्र जहाँगीर बैटिंग कर रहा था। बाएँ हाथ के इस बल्लेबाज ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से गेंद उसके गले में जा लगी। इसके बाद वो वहीं मैदान में गिर गया।

जहाँगीर को अचेत अवस्था में तुरंत मट्टन उपजिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना पर खेल महानिदेशक सलीम-उर-रहमान ने बताया कि क्रिकेटर ने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन गेंद नाज़ुक जगह पर लगी थी। उन्होंने बताया कि इस घटना से सभी बहुत आहत हैं, तमाम कोशिशों के बावजूद हम उभरते खिलाड़ी को बचाने में असमर्थ रहे। युवा सेवाएँ एवं खेल विभाग के सचिव सरमद हफ़ीज़ ने दिवंगत के परिवार को हरसंभव सहायता देने की बात कही है।

निकाह हलाला और बहुविवाह के ख़िलाफ़ दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई करने से SC ने किया इनकार

भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा निकाह हलाला और बहुविवाह के ख़िलाफ़ जल्द सुनवाई के लिए दायर की गई याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में माँग की गई थी कि इस मसले को जल्द से जल्द सुना जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

आजतक की खबर के अनुसार अदालत की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले पर जल्द सुनवाई नहीं हो सकती है और न ही अभी संविधान पीठ के गठन की गुँजाइश है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में इससे पहले इस मामले में चार याचिकाएँ दायर हो चुकी हैं। नफीसा खान सहित भाजपा और अन्य हिंदू संगठन भी न्यायालय में इन प्रथाओं पर रोक लगाने व इन्हें असंवैधानिक करार देने की माँग कर चुके हैं

जानकारी के अनुसार नफीसा द्वारा दायर याचिका में उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि आईपीसी की सभी धाराएँ नागरिकों पर बराबरी से लागू होनी चाहिए। उनका कहना था कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत तीन तलाक क्रूर माना जाता है, और धारा 494 के तहत बहुविवाह एक अपराध माना जाता है। ऐसे में इन प्रथाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए।

जबकि अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि बहुविवाह और हलाला अनुच्छेद-14 (विधि के समक्ष समानता), 15 (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक) और 21 (जीवन जीने का अधिकार) तथा लोक व्यवस्था, नैतिकता एवं स्वास्थ्य के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों के लिए नुकसानदेह है। इसलिए इन प्रथाओं पर रोक लगानी चाहिए।

मदरसे से हथियार मिलने पर बोला मौलवी- रामनवमी पर जब तलवारें लहराई जाती है तो कुछ नहीं बोलते

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक मदरसे से बुधवार (जुलाई 10,2019) को अवैध हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था। इसका बचाव करते हुए एक मौलवी ने हिन्दू त्योहार का हवाला देते हुए कहा है कि जब रामनवमी पर तलवारें लहराई जाती हैं, तब तो कुछ नहीं होता।

टाइम्स नॉउ से बातचीत के दौरान मौलवी रशीदी ने कहा, “देखिए होता क्या है कि मुस्लिम बच्चे पकड़े जाते हैं तो पुलिस या एनआईए उन्हें प्रेस के सामने लाकर सीधा आतंकवादी घोषित कर देती है। ऐसे ही मदरसे वाला केस है, जहाँ फौरन कह दिया गया कि यहाँ हथियार मिले हैं। ठीक है अगर मिले भी, तो यह जाँच का मसला है। हथियार कैसे मिले? कहाँ से मिले? हथियार कैसे आए? यह सब पता किया जाना चाहिए। हो सकता है जाँच में यह निकले कि ये लाइसेंसी बंदूक थे। लेकिन मैं ये जानना चाहता हूँ कि जब रामनवमी पर बंदूकें लहराई जाती हैं तो उस वक्त क्यों कुछ नहीं बोला जाता? वो भी अवैध हथियार हैं।

गौरतलब है जिस मदरसे के बचाव में मौलवी रशीद उतरे हैं वहाँ से अवैध हथियार और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। साथ ही मदरसे के बाहर से पुलिस को स्विफ्ट डिजायर गाड़ी भी मिली थी जिस पर ‘शिवसेना’ लिखा हुआ था। इस मामले में पुलिस ने मदरसा संचालक मुहम्मद साजिद समेत 6 आरोपितों को पकड़ा था। बताया जाता है कि हिकमत (इलाज) की आड़ में मदरसे से हथियारों की सप्लाई की जाती थी।

छापेमारी के दौरान मदरसे से 36 बोर का एक पिस्टल व आठ कारतूस, 315 बोर के तीन तमंचे व 32 कारतूस, 32 बोर का एक रिवॉल्वर व 16 कारतूस बरामद हुए थे।

तमंचे पर डिस्को वायरल Video का असर: निलंबित MLA प्रणव सिंह चैम्पियन अब हुए BJP से निष्कासित

भाजपा से निलंबित चल रहे उत्तराखंड के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को पार्टी ने अब बाहर का रास्ता दिखा दिया है। विधायक प्रणव चैंपियन का बीते दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो शराब के नशे में धुत होकर बंदूक लहराते हुए डांस कर रहे थे। 

इस दौरान वो उत्तराखंड को लेकर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी भी कर रहे थे। जिसके बाद बुधवार (जुलाई 10, 2019) को प्रदेश संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के पार्टी प्रमुख अजय भट्ट को प्रणव के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था और शाह के निर्देश के बाद प्रणव को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही उनसे 10 दिन के अंदर जवाब भी माँगा गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने चैंपियन के पार्टी से निष्कासन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि हालिया वायरल वीडियो में उन्होंने जिस तरह की हरकतें की हैं, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनकी इन्हीं हरकतों का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व से उनके निष्कासन की सिफारिश की गई थी, जिसे मंजूरी दे दी गई है। गुरुवार (जुलाई 11, 2019) को प्रदेश भाजपा की ओर से चैंपियन को बर्खास्तगी का नोटिस भी भेजा गया था।

प्रणव सिंह चैम्पियन ने वायरल वीडियो पर कहा था कि गाली देने और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने कि लिए वो माफी चाहते हैं। उनका कहना है कि वो उस वक्त शराब पिए हुए थे, इसलिए नशे में थे और नशे में ऐसा हो जाता है। साथ ही विधायक का यह भी कहना है कि ये वीडियो एडिट किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी माँ की तरह है और माँ उन्हें माफ कर देगी। हालाँकि, बीजेपी विधायक के इस ट्वीट का पार्टी पर कोई असर नहीं हुआ और उन्‍हें निष्‍कासित कर दिया गया।

गौरतलब है कि, यह पहला मामला नहीं है, जब चैंपियन सुर्खियों में आए हों। इससे पहले एक पत्रकार को धमकाते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इस वीडियो को लेकर भी उनकी काफी आलोचना हुई थी। भाजपा ने इसे अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए चैंपियन को पार्टी से तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया था।