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झारखंड कॉन्ग्रेस में सिर-फुटौव्वल, प्रदेश अध्यक्ष को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने लताड़ा

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद से कॉन्ग्रेस में जारी सिर-फुटौव्वल अब झारखंड पहुॅंच गई है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार पर हमला बोला है। सहाय ने कहा, “अजय कुमार को पद तो मिल गया, लेकिन उनकी कोई विचारधारा नहीं है। पहले वो झारखंड मुक्ति मोर्चा (JVM) में थे, उसके बाद कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए हैं।

ANI से सुबोध कांत सहाय ने शनिवार (जुलाई 20, 2019) को यह बात कही। 1986 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी अजय कुमार जुलाई 2011 में जेवीएम के टिकट पर मध्यावधि चुनाव में 15 वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए थे। अगस्त 2014 में वे कॉन्ग्रेस में शामिल हुए और नवंबर 2017 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पार्टी झारखंड की 14 सीटों में से केवल 1 सीट जीतने में सफल रही थी। इस हार के बाद अजय कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि उनके इस्तीफे पर अभी केंद्रीय नेतृत्व ने कोई फैसला नहीं किया है।

झारखंड में इस साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे वक़्त में सहाय ने अजय कुमार पर भाजपा की प्रशंंसा करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश में गाँधी और गोडसे की विचारधारा के बीच टकराव चल रहा है और वे (अजय) भाजपा की प्रशंसा कर रहे हैं।

गाजियाबाद में भाजपा नेता की हत्या, शाहरुख़ और तसनीम गिरफ्तार

भाजपा नेता डॉ. बलवीर सिंह तोमर की गाज़ियाबाद में हुई हत्या के मामले में यूपी पुलिस ने शाहरुख़ और तसनीम नामक दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया से जुड़े पत्रकार राज शेखर झा के ट्विटर हैंडल के मुताबिक दो अन्य आरोपित फ़रार चल रहे हैं। हमलावरों ने डासना में तोमर को शनिवार (20 जुलाई, 2019) की रात गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था।

पाँच राउंड गोलियाँ झेलने वाले तोमर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यह घटना नज़दीकी पुलिस स्टेशन से मात्र 50 मीटर की दूरी पर हुई। एसएचओ प्रवीण शर्मा को निलंबित कर दिया गया है।

कर्नाटक टेस्ट करूँगा ‘बंक’, बहनजी का इंस्ट्रक्शन: बसपा विधायक

कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की अगुआई वाली कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार विश्वास मत पर मतदान को जितना टाल रही है उसका संकट उतना ही गहराता जा रहा है। सोमवार को होने वाले बहुमत परीक्षण से पहले राज्य में बसपा के इकलौते विधायक एन सुरेश ने घोषणा की है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान वे विधानसभा में मौजूद नहीं रहेंगे।

उनके मुताबिक बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर उन्होंने बहुमत परीक्षण से दूर रहने का फैसला किया है। 16 विधायकों की बगावत के कारण 14 महीने पुरानी कुमारस्वामी सरकार पहले से ही संकट में है। इनमें से 13 कॉन्ग्रेस के और 3 जदएस के हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि उन्हें विधानसभा के सत्र में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके बाद से बागी विधायक विश्वासमत पर चर्चा से दूर ही रहे हैं। उन्हें मनाने के गठबंधन सरकार के प्रयास अब तक सफल नहीं हो पाए हैं।

बीते हफ्ते लगातार दो दिनों तक विश्वास मत पर मतदान नहीं होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी थी। इस दौरान राज्यपाल ने स्पीकर और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विश्वास मत पर वोटिंग कराने को कहा था।

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि राज्यपाल वजूभाई वाला विधानसभा को निर्देशित नहीं कर सकते कि विश्वास मत प्रस्ताव किस तरह लिया जाए। वहीं, कॉन्ग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रूख करते हुए कहा है कि बागी विधायकों की याचिका पर न्यायालय का आदेश विधानसभा के चालू सत्र में पार्टी के लिए अपने विधायकों को व्हिप जारी करने में बाधक बन रहा है।

224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में भाजपा के 105 विधायक हैं और उसे दो निर्दलीयों का समर्थन भी हासिल है। ऐसे में अब तक अपने विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए विशेष पैकेज के बदले समर्थन का वादा करते रहे एन सुरेश के पीछे हटने से कुमारस्वामी सरकार के गिरने का खतरा और बढ़ गया है।

राष्ट्रगान के दौरान ‘अल्लाहु अकबर’ का विरोध करने पर रफीकुल और अशफुल ने 9वीं के छात्र अरुप को पीटा

पश्चिम बंगाल में 9वीं कक्षा के एक छात्र को स्कूल के सीनियर छात्रों ने बुरी तरह पीटा। स्कूल में राष्ट्रगान के दौरान ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए जाने पर एतराज जताने के बाद छात्र की पिटाई की गई। घटना गुरुवार (जुलाई 18, 2019) की है। पीड़ित छात्र अरुप हलधर का उपचार चल रहा है।

ख़बरों के मुताबिक घटना 24 परगना जिले के कैनिंग तालड़ी मोहनचंद हाई स्कूल की है। रफीकुल गाज़ी और अशफुल गाज़ी इस मामले के मुख्य आरोपित हैं। दोनों ने 12वीं के दो अन्य छात्रों के साथ मिलकर अरुप की पिटाई की।

बंगाली डेली दैनिक जुगसांखा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार की सुबह अन्य दिनों की तरह ही छात्र राष्ट्रगान जन गण मन गा रहे थे। तभी वहाँ पर कक्षा 12 के कुछ मुस्लिम छात्रों ने अचानक से अल्लाहु अकबर का नारा लगाना शुरू कर दिया।

दैनिक जुगसांखा में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

मुस्लिम छात्रों द्वारा मज़हबी नारा लगाने पर अन्य छात्र तो चुप रहे, मगर अरुप ने इसका विरोध किया। इसके बाद मुस्लिम छात्रों ने अरुप की बुरी तरह पीटा। गंभीर रूप से घायल अरुप को स्कूल के शिक्षकों ने कैनिंग अस्पताल में भर्ती कराया।

अरुप के परिवार वालों का कहना है कि दोषी छात्रों पर स्कूल ने कोई कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया। पुलिस पर मामले के निपटारे के लिए सादे कागज पर अरुप की माँ के हस्ताक्षर लेने के भी आरोप हैं।

गौरतलब है कि, इससे पहले 11 जुलाई 2019 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित श्री रामकृष्ण शिक्षालय नामक स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ने वाले छात्र आर्यन सिंह की शिक्षक ने क्लास में ‘जय श्री राम’ बोलने पर बेरहमी से पिटाई कर दी थी। पिटाई से छात्र इतना ज्यादा डरा हुआ था कि वो स्कूल जाने से मना कर रहा था। आर्यन ने बताया था कि उसके एक दोस्त आकाश साव ने उससे जय श्री राम बोलने के लिए बोला तो उसने बोल दिया। उसी समय क्लास रूम के पास से गुजर रहे एक शिक्षक ने कक्षा में आकर उसकी पिटाई कर दी और जय श्री राम का नारा लगाने से मना किया।

20 दिन में 5 गोल्ड, स्टार एथलीट हिमा दास का स्वर्णिम सफर जारी

भारतीय स्टार एथलीट हिमा दास का स्वर्णिम अभियान जारी है। उन्होंने शनिवार (जुलाई 20, 2019) को एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हिमा ने चेक रिपब्लिक में चल रहे एक इंटरनेशनल इवेंट में 400 मीटर रेस की स्पर्धा में पहला पायदान हासिल किया। इस दौड़ को जीतने के लिए उन्होंने 52.09 सेकंड का समय लिया। महीने भर के भीतर यह हिमा का 5वाँ गोल्ड है। हिमा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर फोटो शेयर कर इसकी जानकारी दी है।

इस स्पर्धा में दूसरे स्थान पर भी भारत की वीके विस्मया रहीं जो हिमा से 53 सेकंड पीछे रहीं। विस्मया ने 52.48 सेकंड में रेस को पूरा किया। वहीं, तीसरे स्थान पर सरिता बेन गायकवाड़ रहीं। जिन्होंने इस रेस को पूरा करने में 53.28 सेकंड का समय लिया। 

बता दें कि, हिमा ने 2 जुलाई को पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर का रेस 23.65 सेकंड में जीतकर पहला गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 7 जुलाई को पोलैंड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस को 23.97 सेकंड में पूरा कर दूसरा गोल्ड अपने नाम किया था। फिर 13 जुलाई को चेक रिपब्लिक में हुई क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स में महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.43 सेकंड में पूरा कर तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही 17 जुलाई को चेक रिपब्लिक में चल रहे टबोर एथलेटिक्स मीट में एक और गोल्ड मेडल अपने नाम कर देश का नाम रौशन किया।


प्रियंका चोपड़ा का अस्थमा सिगरेट से नहीं, केवल दिवाली से उभरता है?

प्रियंका चोपड़ा हर समय लाइमलाइट में रहने का हुनर जानती हैं- जो उनके पेशे में लाज़मी भी है। लेकिन दिक्कत यह है कि उनके पेशे के कई अन्य लोगों की तरह ही सुर्खियाँ बटोरने के लिए अक्सर उनकी बलि का बकरा भी हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति और हिन्दू त्यौहार ही होते हैं। हिन्दुओं के त्यौहार दीपावली पर दमे से उनका दम निकलने लगता है, इतना ज्यादा कि वह चाहतीं हैं कि उनके एक के लिए पूरा शहर (बल्कि उससे भी अच्छा हो कि पूरा देश) दिवाली पर पटाखे चलाना छोड़ दे। लेकिन खुद की ‘सेक्युलर’ शादी में फूटे पटाखों और सिगरेट पीते वक़्त यह दमा उन्हें परेशां नहीं करता।

दमा, जानवर, प्रदूषण या हिन्दूफ़ोबिया?

पिछले साल दिवाली के पहले प्रियंका चोपड़ा का वीडियो आया था- जिसमें वह जानवरों, प्रदूषण, और अपने दमे का हवाला देकर लोगों से दिवाली नहीं मनाने की अपील की थी।

लेकिन इस ‘मार्मिक’ अपील के एक महीने के भीतर उनकी शादी में पटाखों का इस्तेमाल जमकर हुआ। उस समय भी प्रियंका इसे लेकर लोगों के निशाने पर आईं। लेकिन उन्होंने न फैंस से माफ़ी माँगी और न ही इसपर सफाई देना की जरूरत समझी।

सिगरेट भी ‘औरों’ के दमे के लिए हानिकारक?

हाल में प्रियंका की कुछ तस्वीरें वायरल हुईं हैं, जिनमें वह सिगरेट पीती नज़र आ रहीं हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह कैसा अस्थमा है, जो न ‘सेक्युलर’ शादी के पटाखों से होता है, न सिगरेट से होता है- केवल दीवाली के पटाखों से ही इसकी दुश्मनी होती है?

प्रियंका चोपड़ा फ़िलहाल किस ब्राण्ड की एम्बेसडर हैं, पता नहीं (कोई कह रहा है कि असम की हैं, पर मुझे विश्वास नहीं- अगर सच में होतीं तो शायद असम के लिए कुछ करतीं सुनाई पड़तीं), लेकिन ‘ठग लाइफ़’ की बड़ी सही ब्रांड एम्बेसडर होतीं- खुद लोगों को कुछ करने से मना करने के बाद चार बार दौड़कर उसे करने से ज़्यादा ‘ठग लाइफ़’ क्या होगी?

इससे पहले कि आप उनकी ‘माई चॉइस’ का राग अलापें…

प्रियंका चोपड़ा अपनी निजी ज़िंदगी में जो कुछ करें, वह उनका पूरा अधिकार है- उस पर सवाल उठाना गलत होगा। चाहे उन्हें दमा हो या न हो, चाहे वे दमे के लिए अनुलोम-विलोम करें, या दिन में पाँच पैकेट सिगरेट फूँकें, यह उनकी ‘माई चॉइस’ है। लेकिन जब आप अपनी निजी ज़िंदगी को, अपनी बीमारी को खुद न केवल बाजार में, सार्वजनिक जीवन में ले आते हैं, बल्कि उसे सहारा बना कर दूसरे की ज़िंदगी में हस्तक्षेप करने लगते हैं, या किसी और के हस्तक्षेप के पक्ष में खड़े होकर माहौल बनाने लगते हैं, जैसा प्रियंका ने लोगों के दिवाली पर पटाखे चलाने के अधिकार पर रोक के पक्ष में अपने दमे का हवाला दे माहौल बनाते हुए किया, तो आपकी ज़िंदगी का वह पहलू निजी नहीं रह जाता। फिर उस पर बात होगी, बहस होगी, और आपका दोहरापन सौ बार उजागर होगा- चाहे आप ऐसा करने वाले को जितना भी ट्रोल-ट्रोल बुलाएँ।

प्रियंका चोपड़ा एक अभिनेत्री हैं, और इसलिए दोहरी ज़िंदगी, सच और झूठ के बीच झूलना उनके ‘प्रोफेशनल हज़ार्ड’ यानी पेशे से उपजी बीमारियाँ माने जा सकते हैं। लेकिन निजी ज़िंदगी में भी दोहरापन, वह भी केवल हिन्दुओं के त्यौहारों के प्रति, उनके पेशे की बीमारी नहीं, बल्कि सीधा-सपाट हिन्दूफ़ोबिया ही माना जाएगा।

Pak PM इमरान ख़ान की अमेरिका में फजीहत, एयरपोर्ट पर नहीं पहुँचे अधिकारी

आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की उस समय फजीहत हो गई जब एयरपोर्ट पर उनकी आगवानी के लिए अमेरिकी प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुॅंचा। इसको लेकर सोशल मीडिया में उनका खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। अपने कैबिनेट सहयोगी और अधिकारियों के साथ उन्हें मेट्रो में बैठकर होटल जाना पड़ा।

पाक पीएम इमरन ख़ान शनिवार (20 जुलाई 2019) शाम को तीन दिवसीय आधाकारिक यात्रा पर अमेरिका पहुँचे। सोमवार (22 जुलाई 2019) को उनकी मुलाक़ात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में होनी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई के लिए इमरान ख़ान पर दबाव बना सकते हैं।

क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान ख़ान देश के मुखिया होने के बावजूद किसी चार्टड विमान से नहीं, बल्कि कतर एयरवेज की फ्लाइट से अमेरिका पहुँचे थे। इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान का आर्थिक संकट है। ख़बर के अनुसार, अपनी इस अमेरिकी यात्रा के दौरान ख़ान IMF के कार्यवाहक प्रमुख डेविड लिप्टन और विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास से भी मुलाक़ात करेंगे। इसके अलावा पाक पीएम रविवार (21 जुलाई 2019) को वाशिंगटन डीसी में कैपिटल वन एरिना में एक सभा को संबोधित करेंगे।

मंगलवार को वह यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस थिंक-टैंक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। बता दें कि इससे पहले, अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री के तौर पर नवाज़ शरीफ़ ने अमेरिका की आधिकारिक यात्रा की थी।

ख़बर तो यह भी है कि इमरान ख़ान का यह अमेरिकी दौरा बलोच, सिंधी और मोहाजिर समेत पाकिस्तान के कई धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय को रास नहीं आ रहा है। इसके विरोध में वे प्रदर्शन भी कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार पर हमेशा से बलोच और सिंधी समाज के ख़िलाफ़ अत्याचार के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में इंग्लैंड में आयोजित विश्व कप मुक़ाबलों के दौरान भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ स्टेडियम में नारेबाज़ी के साथ-साथ पोस्टर और बैनर लहराए गए थे। इन बैनरों में बलोच का समर्थन किया गया था।

इरफान और घोसे ने बहनोई का गला रेता, कटा सिर लेकर पहुँचे पुलिस स्टेशन

तेलंगाना में शनिवार (जुलाई 20, 2019) को एक स्तब्ध करने वाली घटना घटी। दो भाइयों ने बहस होने पर अपने जीजा सद्दाम की गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों मृतक का कटा हुआ सिर लेकर नामपल्ली पुलिस थाने पहुँचे और आत्मसमर्पण कर दिया। घटना तेलंगाना के नालगोंडा जिले के नामपल्ली की है। आरोपितों ने घटना को सड़क पर भरी दोपहर में अंजाम दिया। आरोपितों के हाथ में मृतक का कटा हुआ सिर देखकर पुलिस भी हैरत में पड़ गई।

पुलिस ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जाँच में पता चला है कि इरफान और घोसे ने सद्दाम की हत्या उस महिला की मौत का बदला लेने के लिए की है जिसे वो अपनी बहन मानते थे। कथित तौर पर आरोपितों की बहन रजिया को सद्दाम कुछ साल पहले हैदराबाद ले गया था। बाद में वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली थी।

नालगोंडा जिले के एएसपी पद्मनाभ रेड्डी ने बताया कि रजिया का सद्दाम के साथ निकाह नहीं हुआ था। कथित तौर पर उसके सद्दाम के साथ संबंध थे। वह उसे हैदराबाद ले गया और वहाँ सरूरनगर के एक घर में रजिया को काम दिलाया। 2017 में रजिया ने सद्दाम के निकाह न करने पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। रजिया की मौत के बाद सद्दाम ने बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने का वादा किया था। लेकिन जब उसने इससे इनकार कर दिया तो आरोपितों ने उसे मौत के घाट उतार दिया।

सद्दाम के इनकार से घोसे और इरफान गुस्से में आ गए। घोसे ने पास में नारियल बेच रहे एक ठेले से चाकू उठा लिया। सद्दाम फिर भी नहीं डरा तो उसने उसकी गर्दन पर ताबड़तोड़ हमले किए। बाद में इरफान ने घुसे के हाथ से चाकू ले लिया और फिर उसने भी सद्दाम पर हमला किया। दोनों तब तक हमला करते रहे, जब तक सद्दाम का सिर धड़ से अलग नहीं हो गया।

तबरेज के नाम पर और कितनी हिंसा! शेखर और बंसल पर चाकू से हमला

चोरी के आरोप में भीड़ की हिंसा का शिकार बने तबरेज अंसारी के नाम पर समूचे देश में हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश हो रही। कहीं तबरेज को शहीद का दर्जा देने की माँग हो रही तो कहीं उसके नाम पर उपद्रव। ISIS के झंडे तक लहराए गए। 

अब तबरेज का वीडियो दिखाकर दो हिन्दुओं को धार्मिक नारे लगाने के लिए मजबूर करने और उनकी पिटाई का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर में छपी ख़बर के अनुसार, रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू फल मंडी के पीछे शेखर राम और बसंत राम को चार स्थानीय लोगों ने पकड़ा और उन्हें धार्मिक नारे लगाने को मजबूर किया। धार्मिक नारे न लगाने पर उन दोनों को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। एक की गर्दन पर चाकू मारा तो दूसरे के हाथ को लहुलूहान कर दिया।

गंभीर रूप से घायल शेखर और बसंत ने अरमोड़ा थाने में एक पर नामज़द और तीन अज्ञात के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे अपने जानवर को ढूँढ़ने हरमू फल मंडी के पीछे गए थे। वहाँ चार लोगों ने उन्हें अचानक पकड़ लिया और उनसे उनका समुदाय पूछा। इसके बाद चारों ने मोबाइल पर उन्हें तबरेज का वीडियो दिखाया और धार्मिक नारे लगाने को बाध्य किया।

शेखर राम और बसंत राम ने धार्मिक नारे लगाने से मना किया तो चारों उन्हें चोर बताने लगे। यह कहते हुए कि दोनों फल मंडी में चोरी करने आए हैं उनके ऊपर चाकू से हमला कर दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

अंजुमन इस्लामिया, रांची के अध्यक्ष इबरार अहमद ने कहा है की इस मामले की गहराई से जाँच होनी चाहिए जिससे दोषियों को कड़ी सज़ा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं में घृणा और अहिंसा बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए सिविल सोसाइटी को आगे आना चाहिए।

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में कोर्ट ने अभिनेता एजाज़ ख़ान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। मुंबई पुलिस की साइबर विंग ने एजाज़ को 17 जुलाई को गिरफ़्तार किया था। दरअसल, ख़ान ने 9 जुलाई 2019 को सोशल मीडिया पर तबरेज से जुड़े दो वीडियो शेयर कर उसकी मौत का बदला लेने की बात कही थी।

जिस हत्याकाण्ड का आज शोक मना रहीं ममता, उसी के ज़िम्मेदार को भेजा राज्य सभा!

21 जुलाई, 1993 को पश्चिम बंगाल पुलिस ने यूथ कॉन्ग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं को गोली मारी थी। उनकी याद में आज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘शहीद दिवस’ मना रही है। इस शोक समारोह में तृणमूल के राज्य सभा सांसद मनीष गुप्ता भी शामिल हैं। उन्हें इस हत्याकाण्ड में जाँच कमीशन ने न केवल कठघरे में खड़े समूह का हिस्सा माना, बल्कि उनके बयानों में भी विरोधाभास पाया था। गुप्ता ममता की पिछली सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

पूरा मामला

1991 के विधान सभा चुनावों में लेफ्ट फ्रंट को एक बार फिर भारी बहुमत से जीत मिली। लेकिन, विपक्ष के अनुसार यह चुनावी धाँधली का परिणाम था। यूथ कॉन्ग्रेस की राज्य इकाई, जिसकी मुखिया उस समय खुद ममता बनर्जी थीं, सड़कों पर उतर कर विरोध-प्रदर्शन कर रही थी। उनकी माँग थी कि चुनाव में फ़ोटो वाले पहचान-पत्र इस्तेमाल हों। कार्यकर्ता जब दर्शन करते हुए लेफ़्ट की सरकार के शक्ति-केंद्र ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की ओर बढ़े, तो एक किलोमीटर पहले ही मेट्रो सिनेमा, मेयो रोड के निकट उनपर हमला हो गया। पुलिस फायरिंग में 13 लोग मारे गए। राइटर्स बिल्डिंग को दूसरी ओर से घेरने के लिए एक दूसरे दल का नेतृत्व कर बीटीएम सारणी रोड की तरफ़ से बढ़ रहीं ममता बनर्जी भी पुलिस के हमले में चोटिल हुईं, और लेफ़्ट के खिलाफ संघर्ष का चेहरा बन गईं।

2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने ओडिशा उच्च न्ययायालय के रिटायर्ड जज सुशांत चटर्जी की एक-सदस्यीय कमीशन बना कर मामले की जाँच सौंपी। इसी से हत्याकाण्ड के समय राज्य के गृह सचिव रहे मनीष गुप्ता की कलई खुलनी शुरू हो गई। हालाँकि चटर्जी कमीशन की जाँच में किसी एक नौकरशाह या नेता के सर फायरिंग का ठीकरा फोड़ने की बजाय पुलिस और प्रशासन की विफलता को जिम्मेदार ठहराया गया था। लेकिन बलि का बकरा न बनाने के बावजूद चटर्जी कमीशन ने मनीष गुप्ता के बयानों में विरोधाभास तो पकड़ा ही था।

‘मैंने तो केवल साइन किया’

तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के पीएमओ को जवाब देते हुए मनीष गुप्ता ने ममता बनर्जी के आरोपों को उस समय तथ्यहीन बताया था। ममता बनर्जी का आरोप था कि यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला अकारण था और उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन चटर्जी कमीशन को बयान देते हुए गुप्ता अपनी पिछले बातों से पीछे हट गए और उन्होंने कहा कि गृह सचिव के तौर पर वह तो महज़ सरकार के दावे के हस्ताक्षरकर्ता थे।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि ममता बनर्जी इस मुद्दे पर नैतिक आधार पर कहाँ खड़ी हैं? जिस पार्टी के परचम तले उन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था, उसे वह न केवल छोड़ चुकीं हैं, बल्कि प्रदेश में उसे धूल में मिलाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। जो इंसान न केवल गोलियाँ चलते समय चलाने वाले महकमे का मुखिया अफ़सर था, बल्कि उस घटना के बाद भी पद पर रहते हुए ममता बनर्जी को एक तरह से झूठा कहने वाला भी था, उसे उन्होंने पहले मंत्री पद दिया और बाद में ‘सम्मानितों के सदन’ राज्य सभा में भी पहुँचाया। ऐसे में ममता बनर्जी के ट्वीट्स में खोखलेपन के अलावा कुछ देखा जा सकता है क्या?