Home Blog Page 5692

सोनभद्र हत्याकाण्ड से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, देखे यहाँ

सोनभद्र हत्याकाण्ड से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे हैं। 1 मिनट से कुछ सेकंड तक की लम्बाई के इन वीडियो में घटना के दौरान हुई हिंसा देखी और सुनी दोनों जा सकती है। हालाँकि, इन वीडियो को बनाने वाले की पहचान अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो में गोलियों की आवाज़ें और एक दूसरे पर लाठियाँ लेकर पिल पड़ते गुट साफ देखे जा सकते हैं।

जमीन विवाद में 10 से ज्यादा लोगों की हुई हत्या

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बुधवार, जुलाई 17, 2019 को जमीन को लेकर हुए विवाद में 3 महिलाओं समेत 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी। घोरावल इलाके के उम्भा गाँव में हुई इस घटना में 17 लोग घायल भी हुए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे के अनुसार मामले की जाँच में यह भी निकल कर आया कि इस घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी, जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी। 1955 में कॉन्ग्रेस की सरकार ने सोनभद्र में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के नाम पर जनजाति के लोगों की भूमि को एक पब्लिक ट्रस्ट के नाम कर दिया। वर्ष 1989 में उस ट्रस्ट से जुड़े लोगों के नाम पर वह जमीन कर दी गई। वर्ष 2017 में वह जमीन कुछ लोगों को बेची गई। उन्होंने पूरे मामले से जुड़े नेताओं को दण्ड भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा था।

विपक्षी नेताओं को रोका गया मिलने से

इस बीच घटना के बाद जिले में लागू धारा 144 के चलते विपक्ष के कई बड़े नेताओं को पीड़ितों से मिलने से भी रोक दिया गया। कॉन्ग्रेस महासचिव और लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल प्रभारी रहीं प्रियंका गाँधी रोके जाने पर चुनार गेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गईं। शनिवार को सोनभद्र जाने की कोशिश कर रहे तृणमूल सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने वाराणसी एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। इससे नाराज सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सुनील मंडल, अबीर रंजन बिस्वास और उमा सरेन ने भी हवाई अड्डे पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

‘मेरे छोटे भाई के साथ हलाला कर लो’ – तीन तलाक देने के बाद दोबारा निकाह करने के लिए रखी शर्त

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक शख्स अपनी पत्नी को तीन तलाक देने के बाद दोबारा उसके साथ रहना चाहता है, जिसके लिए वह अपनी पत्नी पर हलाला का दबाव बना रहा है। खबरों के मुताबिक इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच पंचायत में झड़प भी हुई, जिसका बीच-बचाव बिरादरी वालों ने कराया। युवती के परिजनों ने इस घटना की सूचना लिसाड़ी गेट थाने में दी है। उन्होंने लड़के के घरवालों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज करवाने की माँग की है।

जानकारी के अनुसार अब्दुल्लापुर निवासी युवती का निकाह 2 साल पहले समर गार्डन के युवक से हुआ था। लेकिन पिछले एक साल से वह अपनी पत्नी को तंग कर रहा था। 2 महीने पहले युवक ने उससे मारपीट की और घर से निकाल दिया। हालाँकि उस दौरान दोनों पक्षों ने समझौता करवाया। लेकिन 7 जुलाई को युवक ने महिला को तीन तलाक दे दिया।

लड़की के परिजनों को इसकी सूचना मिली तो वे आकर उसे अपने साथ ले गए। साथ ही इस घटना की सूचना लिसाड़ी गेट थाने में दी। अब कल यानी रविवार (जुलाई 21, 2019) को युवक अपने ससुराल पहुँचा और महिला से शादी करने की बात कही। जब तक युवती और उसके घरवाले कुछ कह पाते, युवक ने अपने छोटे भाई के साथ अपनी पत्नी के हलाला कराने की शर्त रख दी।

व्यक्ति की बात सुनते ही घरवालों को गुस्सा आ गया और दोनों पक्षों में जमकर हंगामा हुआ। बात पंचायत तक पहुँची, जहाँ दोनों पक्षों में धक्कामुक्की भी हुई। बाद में युवती के परिजनों ने लिसाड़ी गेट थाने में युवक समेत परिवार के 7 लोगों के ख़िलाफ़ तहरीर दी। हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक सीओ दिनेश शुक्ला ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है और मामले की जाँच जारी है।

कनाडाई पायलट को लूटने के आरोपित मेहराज, आसिफ और फरमान को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर कनाडा के एक पायलट को बंधक बनाकर लूटने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त (एयरपोर्ट) संजय भाटिया ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मेहराज सलमानी, आसिफ और फरमान को 20 जुलाई को गिरफ्त में लिया गया। उन्होंने बताया कि तीनों आरोपित उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये घटना 12 और 13 जुलाई की रात की है, जब कनाडाई पायलट मोहम्मद मेंहदी घनज़ानफानी आधी रात को कोलकाता से आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल -1 पर पहुँचे थे। वो यहाँ पर अपनी कंपनी के कैब का इंतजार कर रहे थे। यहाँ से उन्हें होटल जाने के लिए कंपनी की तरफ से कैब उपलब्ध कराई गई थी, जो कि कंपनी के पार्किंग एरिया में खड़ी थी। पहली बार टर्मिनल-1 पर आने की वजह से पायलट को पार्किंग एरिया के रास्ते की जानकारी नहीं थी। वो पार्किंग का रास्ता खोजते हुए मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-2 पर पहुँच गए। वहाँ पर उन्हें एक शख्स मिला। जिसने खुद को टैक्सी ड्राइवर बताया और कहा कि वह भी पार्किंग की ओर जा रहा है। वह उन्हें ₹100 में वहाँ छोड़ देगा। उस शख्स की बातों में आकर वो टैक्सी में बैठ गए।

उस टैक्सी में ड्राइवर के अलावा दो और लोग पहले से ही बैठे थे। पायलट के बैठते ही उनलोगों ने टैक्सी के गेट लॉक कर दिए। इसके बाद उन्होंने उनसे अपनी कीमती चीजें देने के लिए कहा। उनके पास से देशी- विदेशी मुद्रा, एटीएम कार्ड के अलावा उनका कनेडियन वीजा कार्ड भी ले लिया। इसके बाद वह टैक्सी को दिल्ली की सड़कों पर दौड़ाते रहे और एटीएम से 10 बार में ₹1 लाख निकाले। कनाडाई वीजा कार्ड से ₹20 हजार निकाल लिए। बदमाशों ने उनका पर्स भी छीन लिया, जिसमें ₹12 हजार थे। जिसके बाद महिपालपुर फ्लाइओवर के पास टैक्सी से धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया और वहाँ से फरार हो गए।

पुलिस ने बताया कि जब टैक्सी चालक के बारे में पता लगाने की कोशिश की गई तो पता चला कि उसने अपनी टैक्सी के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद टेक्निकल सर्विलेंस के आधार पर तीनों आरोपितों को गिरफ्त में लिया गया। संजय भाटिया ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि तीनों आरोपितों ने दिल्ली कैंट इलाके में कई और डकैतियाँ की हैं और एक डकैती गाजियाबाद के विजयनगर में भी की थी।

जिला पार्षद के बेटों व भाई ने 1 किमी तक खदेड़कर नाबालिग को मारी गोली, हुई मौत

पटना के राजीव नगर थाने की चंद्रविहार कॉलोनी से शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ रविवार (जुलाई 21, 2019) को जदयू की दानापुर उत्तरी की जिला पार्षद रेणु देवी के बेटों और भाई ने छोटे से विवाद पर एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी।

जानकारी के मुताबिक रेणु देवी के बेटों और भाई ने पहले गाड़ी से उस युवक को लगभग एक किलोमीटर तक खदेड़ा और फिर उसे गोली मार दी। जिस कारण उसकी मौक़े पर ही मौत हो गई।

प्रभात खबर के अनुसार मृत युवक की पहचान 17 वर्षीय विशाल राय के रूप में हुई है। विशाल का दोष सिर्फ़ इतना था कि 10 दिन पहले उसके बाइक की टक्कर जिला पार्षद रेणु देवी के पति माला राय की सफारी गाड़ी से हो गई थी। जिसपर माला राय और उनके बेटों ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। विशाल राजीवनगर थाने की देवबिहार कॉलोनी के निवासी सिरदा राय का बेटा था।

मृतक के चाचा विनोद यादव ने इस मामले के मद्देनजर माला राय समेत 10 नामजद और 2 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई है। जिसके बाद डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर ने मौक़े पर पहुँच कर इस मामले में कार्रवाई की। इस घटना से इलाके में काफ़ी तनाव बना हुआ है।

घरवालों का कहना है कि घटना वाले दिन सुबह विशाल घर से निकलकर अपने दोस्त प्रिंस के साथ दीघा-आशियाना रोड की ओर जा रहा था कि तभी इस दौरान एक सफ़ेद सफारी आई, जिसमें माला राय और उनके परिवार के लड़के मौजूद थे। इन लोगों ने विशाल को एक किमी तक खदेड़ा और फिर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस को 6 लोगों का फुटेज मिला है, जिसकी पहचान की जा रही है।

बता दें प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद वहाँ आक्रोशित लोगों ने जिला पार्षद के घर को घेरकर खूब तोड़फोड़ की। गुस्साए लोगों ने इस दौरान उनके घर में खड़ी चार बाइकों में भी आग लगा दी।

साध्वी प्रज्ञा को निशाना बनाने के लिए उनके बयान को किया गया ट्वीस्ट, वास्तविकता कुछ और…

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा रविवार (जुलाई 21, 2019) को सोशल मीडिया पर साध्वी प्रज्ञा की एक वीडियो पोस्ट की गई जिसमें वो सेहोर के लोगों से साफ़-सफाई को लेकर बात करती नजर आई। इस वीडियो में वे कुछ लोगों से कह रही है, “हम नाली साफ़ करने के लिए नहीं बने हैं। हम आपका शौचालय साफ करने के लिए बिलकुल नहीं बनाए गए हैं। हम जिस काम के लिए बनाए गए हैं वो काम हम ईमानदारी से करेंगे।”

अब इस वीडियो को सोशल मीडिया पर विरोधियों द्वारा तोड़-मरोड़ के पेश किया जाने लगा। कुछ लोग इस बयान को आधार बनाकर साध्वी को घेरने लगे। तो रॉबर्ट वाड्रा के जीजा (ब्रदर इन लॉ) तेहसीन पूनावाला ने तो बिन कुछ सोचे इस बयान को आरएसएस से जोड़ दिया और कहा कि साध्वी का ये बयान आरएसएस के प्रभुत्व को दर्शाता है।

लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आखिर साध्वी ने अपने बयान में गलत क्या कहा? जो लोग उनपर सवाल उठाने लगे। दरअसल, उनकी बात किसी भी रूप में विवादित नहीं थी, लेकिन उसे विवादित बनाया गया। क्योंकि जो उन्होंने वीडियो में बोला वो सांसद पद के संदर्भ में था। और ये बिलकुल सच है कि एक सांसद का कार्य कचड़ा या फिर शौचालय साफ़ करने का नहीं होता।

अपनी बातचीत में साध्वी सरकार के अंगों से संबंधित कार्यों के बारे में चर्चा कर रही है। न कि किसी सफाईकर्मियों के काम की। प्रज्ञा अपनी इस बातचीत में ये भी कहती नजर आ रही है कि जो काम उन्हें मिला है वो उसे पूरी ईमानदारी से करेंगी, जिसके लिए वे सांसद चुनी गई हैं। गौर करने की बात है कि यहाँ उनकी कही पर लोगों द्वारा ताली भी बजाई गई। लेकिन विरोधियों ने इन बातों पर गौर करना उचित नहीं समझा और जो बयान आया उसे अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ दिया।

ये बात सच है मोदी सरकार द्वारा देश में स्वच्छता के उद्देश्य से जिस स्वच्छ भारत अभियान की मुहिम शुरुआत की गई है उसको आगे बढ़ाना सबका काम है, लेकिन इसका आशय ये बिलकुल भी नहीं है कि एक विभाग का कार्य किसी और विभाग से करवाया जाए। साफ़-सफ़ाई का कार्य स्थानीय गवर्नेंस बॉडी जैसे एमसीडी और टाउन कमेटी आदि का होता है। एक सांसद उनसे संबंधित प्रोग्राम के लिए फंड जुटाने में मदद कर सकता है लेकिन उनकी देख-रेख का काम स्थानीय तंत्र द्वारा किया जाता है।

इसलिए ये स्पष्ट है कि इस वीडियो में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके कारण मामले को विवादित बनाया जाए या फिर उनपर टिप्पणी की जाए। हो सकता है साफ़-सफ़ाई को लेकर उनके पास किसी ने शिकायत की हो और वे सिर्फ़ अपने सांसद होने के तौर पर उसे सिर्फ़ अपनी भूमिका समझा रही हों।

चल काँवड़िया शिव के धाम, राह में पत्थरबाजी करेंगे ‘शांतिप्रिय’ इंसान

क्या समुदाय विशेष के इलाकों से गुजरने वाली सड़कें मजहब विशेष के बाप की हैं? क्या हिन्दुओं के इलाकों से गुजरने वाली सड़कें हिन्दुओं के बाप की हैं? दोनों का जवाब है नहीं। फिर प्रश्न आता है कि शिवभक्त काँवड़िया जब इन इलाकों से गुजरता है तो पत्थरबाजी और मार-पीट की खबरें कैसे आती हैं? क्या इसके उलट आपने कहीं सुना है कि ईद की नमाज पढ़ते, या ईद तो छोड़िए हर शुक्रवार सड़क घेर कर देश के कई इलाके में नमाज पढ़ते लोगों पर किसी ने आवाज भी उठाई हो?

मार-पीट, पत्थरबाजी की तो बात बहुत दूर की है, यहाँ सोनू निगम को यह कहने पर सर काटने की धमकी दी गई थी जब उन्होंने बहुत ही तार्किक बात कही थी कि मस्जिदों के ऊपर लाउडस्पीकर से आने वाली आवाज हर किसी को सुनाना गैरजरूरी है। इस पर आप ट्वीट या पोस्ट लिख कर देख लीजिए, कुछ राज्यों में आप पर ब्लासफेमी का केस चलेगा और आप जेल में होंगे।

सावन चल रहा है, हर साल चलता है, एक महीने जल उठाकर शिव जी का अभिषेक करने हिन्दू भक्त शिव के धाम जाते हैं। ये कुछ लोगों के इस धरती पर आने से पहले से हो रहा है, और आगे भी होता रहेगा। न तो काँवड़िए किसी ‘शांतिप्रिय’ को छेड़ते हैं, गाली देते हैं, बल्कि पूरे रास्ते ‘बोल-बम’ का आह्वान करते हुए चलते हैं। ऐसा नहीं है कि ये ‘बोल-बम’ समुदाय विशेष के इलाके में आ कर बोलना शुरू कर देते हैं। अब खबर आ रही है कि समुदाय विशेष को इस ‘बोल-बम’ से समस्या हो रही है।

पिछले सालों में भी ऐसी खबरें आई हैं जहाँ ‘मजहबी इलाके’ से गुजरने वाले काँवड़ियों पर पत्थरबाजी भी हुई है। अगस्त 2016 में उत्तर प्रदेश के बागपत में ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। भीड़ ने गाड़ियों में आग लगा दी। जुलाई 2017 में बरेली के खेलम गाँव में कट्टरपंथियों ने पूरी योजना बना कर काँवड़ियों के जत्थे पर पथराव किया। वो जानते थे कि इधर से ये गुजरेंगे, और छतों पर ईंट-पत्थर लेकर बैठे हुए थे। जब पुलिस आई तो उस पर हमला किया गया। साथ ही, एसडीएम को इनकी भीड़ खींच कर अपने घर ले गई और जम कर पीटा।

अगस्त 2018 में राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे में डीजे बजाते हुए काँवड़िए आ रहे थे। कट्टरपंथियों ने डीजे बंद करने को कहा, तो काँवड़ियों ने आवाज धीमी कर दी। लेकिन, इसी के दौरान इस्लामी भीड़ ने उन पर पत्थर, लाठी, सरिया और तलवारों से हमला किया। सात लोग घायल हुए। इस घटना के कुछ ही दिन बाद जयपुर के मालपुरा में 150 काँवड़ियों के बड़े समूह पर कट्टरपंथियों ने गुंडागर्दी करते हुए पत्थरबाजी कर दी। तकरीबन 50 काँवड़िए गंभीर रूप से घायल हो गए।

अगस्त 2018 में काँवड़ में जल भरने के लिए फ़र्रूख़ाबाद से 65 लोग, जिसमें 25 महिलाएँ भी थीं, ट्रैक्टर की ट्रॉली से पांचाल घाट को निकले। रात के एक बजे जब वो जमुरा गाँव से गुजर रहे थे तो कुछ कट्टरपंथी अपनी छतों से पत्थर चलाने लगे। हमले से घबराए ट्रैक्टर चालक ने जब ट्रैक्टर रोका तो उन पर कट्टरपंथियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। फिर पुलिस आई और उन्हें सुरक्षा के साथ गाँव से बाहर निकाला गया।

आज की खबर यह है कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में काँवड़िए ‘बोल-बम’ का नारा लगाते हुए जल चढ़ाने जा रहे थे, तो गोला बाजार इलाके में कुछ कट्टरपंथी युवकों ने उन्हें ‘बोल-बम’ कहने से मना किया। वो नहीं माने तो इन कट्टरपंथियों ने दो काँवड़ियों की बुरी तरह से पिटाई कर दी। एक भी ऐसी घटना में काँवड़ियों का कोई दोष नहीं है क्योंकि वो अपनी धर्म और आस्था के हिसाब से, बिना किसी गैरकानूनी कार्य को अंजाम देते हुए जल चढ़ाने जा रहे थे, या वहाँ से आ रहे थे।

अगर यात्रा करते भक्त अपने आराध्य का नाम लेकर उद्घोष करते हैं तो कट्टरपंथियों को क्यों आपत्ति होती है? ये काफी आश्चर्य की बात है कि दिन में पाँच बार लाउडस्पीकर पर, चाहे इलाका मजहबी हो या नहीं, अल्लाह के अकबर होने की बात सुनाई जाती है, वो लोग काँवड़ियों को ‘बोल-बम’ कहने से रोकते हैं!

इन कट्टरपंथियों की भीड़ें लगातार मंदिर तोड़ रही हैं, शिवलिंग पर पेशाब कर रहे हैं, गाय काट कर दंगे करवाने की योजना बना रहे हैं, खुद ही ‘जय श्री राम’ का नारा लगवा कर वीडियो बनाते हैं कि लगे हिन्दू लगवा रहे हैं नारा, अफवाह फैला कर भीड़ जुटाते हैं और पत्थरबाजी करते हुए मूर्तियाँ तोड़ देते हैं, मार-पीट करते हुए टोपी गिरती है तो कहते हैं उनकी टोपी गिरा दी गई… पिछले 50 दिनों में इनके इतने कांड सामने आए हैं जहाँ ये हिन्दुओं पर हमला भी करते हैं और खुद को डरा हुआ भी बताते हैं।

ये तो नहीं चलेगा। प्रशासन अगर मस्जिद की दीवार पर कीचड़ के छींटे पड़ने पर एक्शन में आ जाती है तो फिर उसी शिद्दत से इन कट्टरपंथियों पर भी एक्शन लेना चाहिए। सिर्फ नैरेटिव बनाने के लिए कठुआ पीड़िता का नाम आज भी मजहबी नाम वाले प्रोफाइलों से हर मौलवी द्वारा रेप के खबर (जो काफी हो रही हैं) के नीचे आ जाता है, लेकिन इन अपराधों की स्वीकारोक्ति उस मजहबी इंसान में भी नहीं है जो आतंकियों को ‘वो तो सच्चे मुस्लिम नहीं है’ कह कर खुद को सच्चा बताता फिरता है। इनके मुँह में क्या लाउडस्पीकर डाल दिया गया है?

ये लोग हमेशा समुदाय विशेष के लोगों पर हुए सामाजिक, मजहबी नहीं, सामाजिक अपराध पर भी तुरंत सैकड़ों की तादाद में पोस्ट और ट्वीट लिख कर बताते हैं कि कैसे उन्हें टार्गेट किया जा रहा है। एक कथित चोर की पिटाई होती है और इनकी तख्तियाँ गले में लटक जाती है, भारत लिंचिस्तान हो जाता है। उसी सप्ताह एक हिन्दू को तीन ‘शांतिप्रिय’ चाकुओं से इसलिए गोद देते हैं कि उसने अपने घर के आगे गाँजा पीने से मना किया। वो मर जाता है। तख्तियाँ स्थान विशेष में छुपा ली जाती हैं, अच्छे मुस्लिम गायब हो जाते हैं देश से।

यह तर्क आएगा कि ये तो महज कुछ घटनाएँ ही हैं, देश में बीस करोड़ कथित अल्पसंख्यक हैं, सारे ऐसे नहीं हैं। सारे हिन्दू भी तो ‘जय श्री राम’ नहीं करवा रहे। सिर्फ पचास दिन में आठ ऐसी घटनाएँ सामने आईं जहाँ कट्टरपंथियों ने ‘जय श्री राम’ वाला एंगल मजे-मजे में डाल दिया और इनके इमाम तक धमकी दे रहे थे कि ये उखाड़ लेंगे और वो उखाड़ देंगे। वो तर्क तो हिन्दुओं पर भी लागू होगा न कि अपराधियों का धर्म नहीं होता, आठ लोगों ने अगर बलात्कार किया तो पूरा हिन्दुस्तान और सारे हिन्दू बलात्कारी कैसे हो जाते हैं?

बात तो प्रवृत्ति की है कि अपने पर आए तो विक्टिम कार्ड खेलो, और मौका मिले तो शिवलिंग पर पेशाब कर दो। कितने शांतिप्रियों ने इस पर लिखा या ट्वीट किया कि काँवड़ियों पर पत्थरबाजी गलत है? या उन्हें अपनी मजहबी शिक्षा याद आई जहाँ काफिरों को काट देना भी सही है? यहाँ तो बस ईंट-पत्थर और तलवार-सरिया से बस थोड़ी-सी हिंसा हो रही है।

इनके नेता अपने मजहब के उन्मादी लोगों और भीड़ों द्वारा पब्लिक से लेकर पुलिस तक पर हमला बोलने की बात पर चुप रह जाते हैं, और खुद को पीड़ित दिखा कर गाँधी-नेहरू-पटेल से पूछते हैं कि उन्हें सुरक्षा क्यों नही मिल रही? क्या कट्टरपंथी इस देश के नागरिकों में कोई ऊँचा स्थान रखते हैं? क्या वो देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी नहीं? क्या वो लगातार इस देश के सत्तालोलुप नेताओं को तुष्टीकरण के कारण हर उस जगह पर भी अल्पसंख्यक होने का फायदा नहीं उठा रहे जहाँ वो बहुसंख्यक हैं?

ये अगर आतंक नहीं है तो और आतंक की परिभाषा क्या है? हर धार्मिक आयोजन पर पत्थरबाजी को कैसे सही ठहराया जा सकता है? एक बार हो तो कहें कि सामाजिक अपराध है, दो बार हो तो कहें कि दुर्घटना है, हो जाती है, लेकिन एक मजहब के लोग, दूसरे धर्म के आयोजनों पर, मंदिरों पर, मूर्तियों पर एक ही तरीके से हमला बोलें, तब तो वो पैटर्न है। इसका सीधा अर्थ है कि कट्टरपंथी कुछ संदेश देना चाहते हैं।

क्या वो संदेश ये है कि इनके इलाकों की सड़कें, जमीन और हवा इनके बाप की जागीर है? या फिर भारत के हर राज्य के हर इलाके की सड़क सार्वजनिक है, जिस पर कोई भी जा सकता है। क्या अपने मस्जिदों के लाउडस्पीकर से दिन में पाँच बार तेज आवाज में अजान देने वाले मजहब के लोग साल में एक सोमवार को, अपने इलाके की सड़क से जाते काँवड़ियों के ‘बोल-बम’ को बर्दाश्त नहीं कर सकते?

क्या सहिष्णुता सिर्फ एक धर्म में ही सन्निहित रहे और दूसरे मजहब के लोग दुर्गा विसर्जन से लेकर रामनवमी के जुलूसों और सावन के काँवड़ियों पर पत्थर बरसाते रहें? आप सोचते रहिए।

Chandrayaan-2: भारत ने रचा इतिहास, अग्रणी चार देशों में शामिल

भारत एक बार फिर गौरवशाली इतिहास रचने को तैयार है। आज 22 जुलाई, 2019 को दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च हो गया है। इस रॉकेट को बाहुबली रॉकेट कहा जाता है।

भारत का चंद्रयान-2 चाँद के फलक पर पहुँचने के लिए तैयार है। चंद्रयान-2 का काउंटडाउन समाप्त होते ही मिशन लॉन्च हो चुका है। आज पूरा विश्व भारत के इस मिशन पर आँख गड़ाए है। आज इसरो के इस ऐतिहासिक मिशन की लॉन्चिंग देखने के लिए श्रीहरिकोटा में कई गणमान्य अतिथि मौजूद हैं।

चंद्रयान-2 के लॉन्च होते ही, हमारी यह ऐतिहासिक यात्रा शुरू हो चुकी है। आज भारत विश्व पटल पर ऐसे मिशन को अंजाम देने वाले अग्रणी देशों की श्रेणी में आ गया है। पृथ्वी से चंद्रमा की औसत दूरी 3,84,000 किमी है। विक्रम लैंडर मिशन के 48 वें दिन चंद्रमा पर उतरेगा, जो आज शुरू होता है। भारत चंद्रयान-2 मिशन की लॉन्चिंग के साथ वैश्विक पटल पर चाँद पर ऐतिहासिक मिशन भेजने वालों में चौथा देश बन चुका है।

आज आप भी लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से इसरो के इस गौरवशाली मिशन के साक्षी हो सकते हैं। लॉन्चिंग की लाइव स्ट्रीमिंग यहाँ देखे जा सकते हैं-

आरिफ और रियाज ने ‘बोल बम’ का नारा लगाने पर की काँवड़ियों की पिटाई, इलाके में तनाव

सावन महीने के पहले सोमवार (जुलाई 22, 2019) को शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए काँवड़िया गंगा जल लेकर पहुँचने लगे हैं। इसी कड़ी में जब काँवड़ियों का एक समूह ‘बोल बम’ का नारा लगाते हुए यूपी के जौनपुर के मड़ियाहूँ थाना क्षेत्र से गुजर रहा था, तो मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दो काँवड़ियों की बेरहमी से पिटाई कर दी। इसमें दोनों काँवड़िया गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों काँवड़ियों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से एक काँवड़िया की हालत बेहद नाजुक है। उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, ठाकुर प्रसाद के पुत्र विकास गौतम मड़ियाहूँ विंध्याचल से जल लेकर विवेकानंद स्थित शिव मंदिर की ओर जा रहे थे। इस दौरान जैसे ही काँवड़ियों का समूह नगर के कजियाना मुहल्ले मे पहुँचा, वहाँ के समुदाय विशेष ने काँवड़ियों को धार्मिक नारा ‘बोल बम’ लगाने पर आपत्ति जताई। मगर कांँवड़ियों का समूह फिर भी नारा लगाता रहा। इसके बाद गुस्से में आकर समुदाय विशेष ने उनकी पिटाई कर दी।

साथी काँवड़ियों की पिटाई से आक्रोशित काँवड़ियों ने मड़ियाहूँ जौनपुर मार्ग पर कजियाना मोहल्ले में सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर पहुँची पुलिस ने सड़क जाम कर रहे काँवड़ियों को समझाया और पीड़ित विकास गौतम की शिकायत पर कजियाना निवासी आरिफ व रियाज के विरुद्ध दलित उत्पीड़न सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले में एक आरोपित को हिरासत में भी ले लिया गया है। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण संजय कुमार राय, प्रभारी निरीक्षक लाइन बाजार संजीव कुमार मिश्रा, क्षेत्राधिकारी मडियाहूँ अवधेश कुमार शुक्ला ने आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन देकर सड़क जाम समाप्त करवाया।

कई बार लात मारी, चेहरे पर मुक्के मारे: एक्टर मोहसिन अब्बास हैदर की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

पाकिस्तानी एक्टर, मॉडल और सिंगर मोहसिन अब्बास हैदर पर उनकी पत्नी फातिमा सोहेल ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है। फातिमा ने फेसबुक पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर आपबीती बताई। साथ ही उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें उनके चेहरे और हाथ पर चोट के निशान नजर आ रहे हैं।

फातिमा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि 26 नवंबर 2018 को उन्होंने अब्बास को धोखा देते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था और जब वो उनसे इस बारे में बात करने गईं तो बजाय शर्मिंदा होने के अब्बास ने फातिमा की बेरहमी से पिटाई कर दी। उन्होंने लिखा कि अब्बास ने उनके बाल खींचे, कई बार फर्श पर घसीटा, कई बार लात मारी, चेहरे पर मुक्के मारे, सिर को दीवार पर दे मारा। इस पोस्ट में फातिमा ने इस बात का भी जिक्र किया कि जब उनके साथ ये घटना हुई थी, उस समय वो गर्भवती थीं।

फातिमा ने आगे लिखा कि वो इस घटना से काफी डरी हुई थीं। उन्होंने इसके बारे में परिवार के किसी सदस्य को नहीं बताया और फिर अपनी एक दोस्त के साथ हॉस्पिटल गई, जहाँ डॉक्टर ने इसे पुलिस केस मानते हुए इलाज करने से मना कर दिया। मगर फिर उनके निवेदन पर डॉक्टर ने इलाज करना शुरू किया। फातिमा ने अपनी डिलीवरी के बारे में बताते हुए लिखा, “जब मैं लाहौर के एक अस्पताल में कराह रही थी तब मेरा मशहूर पति कराची में अपनी गर्लफ्रेंड नजीश जहाँगीर के साथ सो रहा था। 2 दिन बाद केवल दिखावे और प्रचार के लिए वो अस्पताल आया, बच्चे के साथ फोटो ली और फिर उसे पोस्ट कर दिया। उसे बच्चे की फिक्र नहीं थी। वह केवल प्रचार करना चाहता था।”

अभिनेता की पत्नी ने उन पर फिर से पीटने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब वो 17 जुलाई को बच्चे को लेकर उनके घर गईं और उनसे बच्चे की जिम्मेदारी उठाने को कहा, तो अब्बास ने बच्चे के लिए कुछ भी करने से मना कर दिया और उन्हें बुरी तरह पीटा। फातिमा का कहना है कि उनके परिवारवालों ने इस बात को सार्वजनिक करने से काफी रोका, मगर इस जुल्म को वो अब और बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। इसीलिए उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी आपबीती को सबके सामने रखा। उन्होंने कहा कि अब वो अपने पति से कोर्ट में मिलेंगी।

वहीं, मोहसिन अब्बास ने फातिमा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने जो तस्वीरें शेयर की हैं, वो मारपीट की नहीं, बल्कि फातिमा के सीढ़ियों से गिरने की है और ये तस्वीर 2018 की है। उनका कहना है कि फातिमा झूठ बोल रही हैं और अगर सच बोल रही हैं तो अपनी मेडिकल रिपोर्ट पुलिस स्टेशन में जमा कराएँ। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि वो दोनों एक साथ खुश नहीं हैं। वो तलाक लेने वाले थे, लेकिन फिर बच्चा होने की वजह से रुक गए। फिर उन लोगों ने तलाक न लेकर हमेशा के लिए अलग रहने के बाारे में सोचा, मगर फातिमा इसके लिए तैयार नहीं हुईं। अब्बास ने ये भी कहा कि वो दूसरी शादी करने वाले हैं और परिवारवाले भी इसके लिए तैयार है। अब्बास का कहना है कि इसी वजह से फातिमा ये सब नाटक कर रही है, क्योंकि वो किसी भी हालत में ये शादी नहीं होने देना चाहतीं।

VIDEO वायरल: ‘जरुरत का सामान इधर-उधर से खरीदो, लेकिन BJP-समर्थित दुकानदार से नहीं खरीदो’

विवादित बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले उत्तर प्रदेश के शामली स्थित कैराना के सपा विधायक नाहिद हसन एक बार फिर चर्चाओं में हैं। उनके विवादित बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नाहिद हसन अपने विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम समाज के लोगों से भारतीय जनता पार्टी से संबंधित दुकानदारों से सामान न खरीदने की अपील करते हुए दिख रहे हैं।

नाहिद का कहना है कि उनके जैसे लोगों के सामान खरीदने से ही भाजपाइयों की दुकान और उनका घर चलता है। अगर वो लोग उनकी दुकान से सामान नहीं खरीदेंगे, तो उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। इसलिए वो सभी से अपील करते हैं कि बीजेपी समर्थित दुकानों से सामान लेना बंद करें। साथ ही विधायक ने कैराना के उच्च अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो लोग बीजेपी नेता और बीजेपी समर्थकों के इशारे पर काम कर रहे हैं।

हालाँकि, इस विरोध और अपील के पीछे नाहिद का तर्क है कि वो गरीब लोगों के हक और रोजगार के लिए लड़ रहे हैं। वीडियो में नााहिद कैराना के सराय इलाका के बारे में बताते हुए कहते हैं कि इस क्षेत्र में उनके वालिद और पूर्वजों ने सालों पहले गरीब लोगों को बसाया था और वो यहाँ पर कई सालों से रह रहे थे, लेकिन भाजपा के कुछ लोग और कुछ भाजपाई दिमाग वाले अधिकारियों ने गरीबों को वहाँ से हटाने की साजिश रची। वो लोग वहाँ पर ठेला लगाकर अपना घर चला रहे थे, लेकिन प्रशासन ने इस जमीन को अवैध अतिक्रमण व कब्जामुक्त कराकर खाली करा दिया है, जिससे इन गरीबों का रोजगार ठप्प हो गया है।

दरअसल, रविवार (जुलाई 21, 2019) को स्थानीय प्रशासन व नगरपालिका ने नगर के हर बाजार व मुख्य मार्ग पर खड़े होने वाले ठेलों को हटवाकर उन्हें सराय वाली भूमि में खड़े करने का निर्णय लिया। सरकार के इसी निर्णय को गलत बताते हुए नाहिद का ये वीडियो वायरल हो रहा है। नाहिद लोगों से अपील करते हैं कि वो 10 दिन या एक महीने अपने जरुरत की सामान इधर-उधर से या हरियाणा के पानीपत से खरीद लें, लेकिन जितने भी भाजपा समर्थित लोग बैठे हैं, उनसे सामान न खरीदें। वैसे, नाहिद जिन लोगों के हक और रोजगार की बात के लिए लड़ाई लड़ने और हक के लिए आवाज उठाने की बात कह रहे हैं, वो लोग कैराना के सराय इलाके में अवैध रुप से रह रहे थे। प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन है, जिस पर केवल सरकार का अधिकार है और सरकार इनका इस्तेमाल सरकारी भवन निर्माण के लिए कर सकती है।