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श्रद्धालुओं से गाली-गलौज, हनुमान जी की प्रतिमा तोड़ने की कोशिश: मंदिर में घुस कर मूसा ने पार की हदें

जनपद मुज़फ्फरनगर में गुरुवार को दिन निकलते ही उस समय हंगामा मच गया जब एक शरारती युवक ने एक मंदिर में घुस कर वहाँ पूजा कर रहे एक श्रद्धालु को गाली-गलौज करते हुए मंदिर में रखी हनुमान की मूर्ति को तोड़ने का प्रयास किया। इसी बीच वहाँ मौजूद लोगों ने आरोपित युवक को दबोच लिया मगर तब तक आरोपित मंदिर का शीशा तोड़ चुका था। देखते ही देखते मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई और भीड़ ने आरोपित युवक को पुलिस को सौंप दिया।

आरोपित के ‘दूसरे समुदाय’ के होने की वजह से इलाक़े में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जिसके बाद हिंदू संगठन के लोगों ने थाना खतौली में जमकर हंगामा किया। बताया जा रहा है कि आरोपित युवक का नाम मूसा है। जोगी जनपद बुलंदशहर के खुर्जा का रहने वाला है और मुजफ्फरनगर के खतौली में एक जमात में आया हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन के लोगों में रोष व्याप्त हो गया और मौके पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। बताया जा रहा है कि आरोपित युवक का नाम मूसा है, जो कि जनपद बुलंदशहर के खुर्जा का रहने वाला है।

खतौली में एक जमात में आया हुआ था। पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस उपाधीक्षक आशीष प्रताप सिंह का कहना है सुबह के समय एक युवक हनुमान मंदिर में घुसा और वहाँ पूजा कर रहे मंदिर के पुजारी व एक अन्य व्यक्ति के सामने तरह-तरह की धार्मिक भावनाओं को भड़काने जैसी बातें करने लगा। और मंदिर की मूर्ति को खंडित करने का प्रयास किया जिसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपित को जेल भेजा जा रहा है। मामले की छानबीन की जा रही है। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि आरोपित युवक बुलंदशहर के खुर्जा से यहाँ किसलिए आया।

बांग्लादेश टीम पर बिजली गिर जाए तो Pak वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में: पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद युसूफ़

ICC वर्ल्ड कप 2019 में पाकिस्तान का खेल ख़त्म हो गया है। सेमीफाइनल में पहुँचने की अब उसकी सभी उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। यूँ तो आगामी शुक्रवार (5 जुलाई) को पाकिस्तान की टीम बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैदान में उतरेगी, लेकिन उसका कोई फ़ायदा पाकिस्तान की टीम को नहीं मिलने वाला, क्योंकि इसका नतीजा सेमीफाइनल तक उसे नहीं पहुँचा पाएगा।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान के सेमीफाइनल में जगह न बना पाने से वहाँ की जनता उनसे काफ़ी नाराज़ है। इस बीच पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद युसूफ़ ने एक शर्मनाक बयान दिया है। युसूफ़ ने यह बयान पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज़ को दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि बांग्लादेश की टीम पर बिजली गिर जाए।

मोहम्मद युसूफ़ ने कहा, “पाकिस्तानी टीम वर्ल्ड कप से बाहर हो चुकी है। 316 रनों से जीत हासिल करना एक असंभव काम है, अगर पाकिस्तानी टीम किसी नकली टीम से भी मैच खेलेगी तो भी इतनी बड़ी जीत हासिल नहीं कर पाएगी।”

इसके आगे यूसूफ़ ने कहा, “इसमें कोई शक़ नहीं है कि पाकिस्तान वर्ल्ड कप से बाहर हो चुका है, हाँ अगर बांग्लादेश पर बिजली गिर जाए और वो 10 रन पर ऑल आउट हो जाए तो ही पाकिस्तानी टीम सेमीफाइनल में पहुँच पाएगी।”

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान का बांग्लादेश से मुक़ाबला शुक्रवार को लॉर्डस में होना है, जहाँ उसका वर्ल्ड कप से बाहर होना तय है। पाकिस्तान का सेमीफाइनल में पहुँचने का एक और रास्ता है, जो लगभग असंभव है। वो यह कि अगर पाकिस्तान की पहले बल्लेबाज़ी आती है और वो 350 रन बनाती है तो उसे बांग्लादेश को 38 रनों पर ऑल आउट करना होगा। वहीं, दूसरी तरफ़ अगर पाकिस्तान टीम 400 रन बनाती है तो उसे बांग्लादेश को 84 रन पर ऑल आउट करना होगा, जो कि नामुमकिन सा है।

आपको बता दें कि मोहम्मद युसूफ़ 2005 में इस्लाम अपनाने से पहले युसूफ़ योहाना (ईसाई) थे। एक कैलेंडर इयर में टेस्ट में सबसे ज्यादा रन (किसी भी देश के किसी भी बल्लेबाज द्वारा) बनाने का रिकॉर्ड युसूफ़ के पास ही है। 2006 में उन्होंने 1788 रन (टेस्ट मैचों में) बनाए थे।

RaGa के इस्तीफे से आहत हसीब अहमद ने माँगी इच्छा मृत्यु, लोगों ने कहा पहली फुरसत में निकल

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गाँधी के इस्तीफे के बाद पार्टी में शुरू हुआ नाटक हर रोज नई शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। कोई फाँसी लगाने को तैयार है, तो कोई उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए खून से पत्र लिख रहा है। वहीं, कुछ लोग आत्मदाह की भी धमकी दे चुके हैं। लेकिन इस बार राहुल गाँधी को अपनी भक्ति साबित करने के लिए सबसे ज्यादा क्रिएटिव तरीका लेकर आए हैं प्रयागराज कॉन्ग्रेस कमेटी के महासचिव हसीब अहमद।

नया नाटक प्रयागराज में सामने आया है। वहाँ कॉन्ग्रेस कमेटी के महासचिव हसीब अहमद ने राहुल गाँधी के इस्तीफे से आहात होकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिकर इच्छा मृत्यु की अनुमति माँगी है। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में हसीब अहमद लिखते हैं, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गाँधी के इस्तीफे से करोड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आहत हैं।” उन्होंने आगे लिखा है कि जिस देश में गाँधी विचारधारा का नेतृत्व करने वाले नेता को लोग अनसुना एवं अनदेखा कर दें, उस देश में जीने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। इसके साथ ही उन्होंने देश की न्याय प्रणाली पर विश्वास रखते हुए इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की माँग की है।

सोशल मीडिया पर आ रही हैं प्रतिक्रियाएँ

कॉन्ग्रेस नेता के इस पत्र के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है। हसीम अहमद के फेसबुक अकाउंट पर भी लोग इस संवेदनशील मुद्दे का मजाक बना रहे हैं। नदीम नाम के एक शख्स ने लिखा- “राष्ट्रपति महोदय…कभी-कभी इतिहास भी रच देना चाहिए” एक अन्य शख्स ने लिखा- “लोकतंत्र है, जिसमें सभी की राय का सम्मान होना ही चाहिए। अतः राष्ट्रपति महोदय बगैर देर किए उनकी इच्छा मृत्यु की माँग मान लें।”

हसीब अहमद अपनी फेसबुक वॉल पर बहुत दिन से राहुल गाँधी से इस्तीफ़ा वापस लेने की अपील कर रहे हैं। उनके पोस्ट पढ़कर भी यही महसूस हो रहा है कि वो वास्तव में राहुल गाँधी के इस्तीफे को दिल पर ले चुके हैं और अब किसी गहरे सदमे में हैं, शायद इसी वजह से उन्होंने इच्छा मृत्यु की भी माँग की है। कुछ लोगों ने हसीब अहमद को यह भी नसीहत दी है कि इस्लाम में मौत माँगना गुनाह है।

जिस तरह से हर दिन इस्तीफे के बाद राहुल गाँधी के समर्थकों की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं, उन्हें इस बारे में फिर से विचार करना चाहिए। वरना समर्थकों में दंगों सी स्थिति फैल सकती है।

चांदनी चौक के दुर्गा मंदिर में तोड़-फोड़ : गिरफ़्तार किए गए 10 लोगों में 5 नाबालिग

दिल्ली के चांदनी चौक इलाक़े के हौज़ क़ाज़ी स्तिथ दुर्गा मंदिर में बुधवार (3 जुलाई 2019) की रात तोड़-फोड़ के मामले में पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है। इनमें से पाँच नाबालिग हैं।

शुरुआत में 9 लोगों की गिरफ़्तारी की खबर आई थी। इनमें से दो की पहचान मोहम्मद ज़ुबैर और मोहम्मद अनस के रूप में हुई है। एएनआई के मुताबिक नौ आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार को तीस हजारी कोर्ट में पेश किया। पाँचों नाबालिगों को अदालत ने जूवेनाइल ऑब्ज़र्वेशन होम और चार अन्य को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

30 जून, 2019 की रात को चांदनी चौक इलाक़े के लाल कुआँ में 300-400 लोगों की भीड़ ने दुर्गा माता मंदिर में धावा बोला और मूर्तियों को खंडित कर दिया। स्थानीय लोगों ने मंदिर में तोड़-फोड़ के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इन वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता था कि इस्लामी भीड़ ने मंदिर में प्रवेश कर तोड़-फोड़ की और पड़ोस में रहने वाले हिंदुओं को पीटा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि विवाद की शुरुआत पार्किंग को लेकर हुए झगड़े से हुई। पार्किंग को लेकर बहस गरम होने पर कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। बाद में रात में इस्लामी भीड़ ने मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की। पुलिस ने पुष्टि की हैं कि इलाक़े के कुछ युवकों ने ही मंदिर पर हमला किया था।

केंद्रीय मंत्री और चांदनी चौक के सांसद डॉ. हर्षवर्धन ने उपद्रव के बाद घटनास्थल का दौरा किया। घटना कि कड़ी निंदा करते हुए शांति का आह्वान किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस को उपद्रवियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए थे।

स्थानीय लोगों का दावा है कि AAP विधायक इमरान हुसैन ने मंदिर में तोड़-फोड़ करने वाली भीड़ का समर्थन किया था। उनका दावा है कि उन्होंने हिंसा को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने भी इमरान हुसैन पर हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा है, “मंदिर पर हमले में इमरान हुसैन का शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।”

स्कूलों में 51% शिक्षकों की कमी, 70% प्रिसिंपल भी नहीं: AAP ने कहा LG की है जिम्मेदारी

दिल्ली में सरकारी स्कूलों के प्रचार और जमीनी हकीकत में शायद जमीन-आसमान का अंतर है। यह बात स्कूलों की हालात से जुड़े हर दूसरे दिन सामने आ रहे तथ्यों के साथ आम आदमी पार्टी के वो बयान हैं, जिनमें वो समस्याओं से अपना पल्ला झाड़ने के लिए कह रहे हैं कि दिल्ली के स्कूलों के लिए BJP के LG जिम्मेदार हैं। अपनी नाकामी को छुपाने के लिए आम आदमी पार्टी अक्सर ‘LG, भाजपा, केंद्र’ का बहाना देती आई है। ऐसा ही एक नया वाकया सामने आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्‍ली की सत्‍ताधारी आम आदमी पार्टी की सरकार पर आरोप लगाते हुए बीजेपी ने कहा है क‍ि द‍िल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में 70% प्र‍िंस‍िपल और 51% श‍िक्षकों के पद खाली हैं। वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है क‍ि द‍िल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में भर्ती की जि‍म्‍मेदारी LG की है।

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार के स्कूलों के छात्रों के निराशाजनक प्रदर्शन के बारे में मीडिया के सामने प्रकाश डाला और कहा क‍ि जहाँ एक ओर कक्षा 10वीं में द‍िल्‍ली के निजी स्‍कूलों का औसत प्रदर्शन 93.18% रहा, वहीं सरकारी स्‍कूलों का 71.58% ही रह सका। पूरे देश का औसत उत्तीर्ण प्रतिशत 91.10% था लेकिन दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत इससे भी कम रहा।

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कई पद रखे गए हैं खाली

दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों के प्रदर्शन पर र‍िपोर्ट पेश करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने यह भी कहा क‍ि द‍िल्‍ली के सरकारी स्‍कूल के 10वीं व 12वीं के 75% छात्रों का स्‍कोर 60% से भी कम रहा। विजेंद्र गुप्‍ता ने कहा क‍ि प्रमुख शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों में कई रिक्तियाँ हैं, दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच स्वीकृत और भरे हुए पदों में एक बड़ा अंतर बना रहता है।

AAP ने कहा BJP के LG की है जिम्मेदारी

इस पर जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी के प्रवक्‍ता सौरभ भारद्वाज ने कहा क‍ि द‍िल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में न‍ियुक्‍त‍ियों की ज‍िम्‍मेदारी एलजी की है, ज‍िसे केंद्र न‍ियुक्‍त करती है। भारद्वाज ने कहा, “यह रोमांचक है क‍ि बीजेपी और इससे संबंधित संस्‍थाएँ अब श‍िक्षा व्‍यवस्‍था के बारे में सोचना शुरू कर रही हैं। हालाँकि मुझे आश्‍चर्य हो रहा है क‍ि ज‍िसे थ‍िंंक टैंक कहा जाता है, उसे यह मालूम नहीं है क‍ि दिल्‍ली सरकार में भर्त‍ियों की ज‍िम्‍मेदारी BJP के एलजी की है।”

मैं जन्‍म से मुस्लिम हूँ और आज भी मुस्लिम हूँ: रथ यात्रा में पूजा-अर्चना कर बोलीं नुसरत जहां

इस्लामी कट्टरपंथियों के दबाव में आकर अभिनेत्री जायरा वसीम ने भले फिल्मी दुनिया से तौबा कर ली हो, लेकिन अभिनेत्री से सांसद बनीं नुसरत जहां इस्लाम के इन ठेकेदारों की परवाह नहीं करतीं। यही कारण है कि आलोचनाओं की परवाह किए बिना वह गुरुवार को कोलकाता में आयोजित रथ यात्रा में न केवल शामिल हुईं, बल्कि पूजा-अर्चना भी कीं। नुसरत पश्चिम बंगाल की बसीरहाट लोकसभा सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद हैं। माथे पर सिंदूर, हाथों में चूड़ियाँ और मंगलसूत्र पहनकर लोकसभा पहुँचने के बाद से ही कट्टरपंथी उनसे चिढ़े हुए हैं।

हाल ही में व्यवसायी निखिल जैन से शादी रचाने वाली नुसरत ने अपने खिलाफ जारी कथित फतवे पर कहा है, “फालतू चीजों पर मैं ध्यान नहीं देती। मैं अपना धर्म जानती हूँ। मैं जन्‍म से मुस्लिम हूँ और आज भी मुस्लिम हूँ। यह आस्‍था का मामला है। इसे आपको अपने अंदर से महसूस करना होता है न कि अपने दिमाग से।”

कोलकाता के इस्कॉन मंदिर से निकली रथ यात्रा के दौरान वह विशेष अतिथि थीं और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहीं। उन्होंने यात्रा से पहले पूजा की और नारियल फोड़ा। मुख्यमंत्री के साथ रथ भी खींचा।

धर्म को लेकर नुसरत के रुख की तारीफ करते हुए इस्कॉन ने उन्हें रथ यात्रा में शामिल होने का न्योता दिया था। इस्कॉन के प्रवक्ता ने कहा था, “हम सभी धर्मों को मानने वाले लोग हैं। हमने पाया कि नुसरत के विचार हमारे विचारों से मिलते हैं। वह भी सभी धर्मों का आदर करती हैं। वह नए और समावेशी भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। यही चीज हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है और नुसरत जैसे युवा इसका रास्ता दिखाते हैं।”

न्योते के लिए इस्कॉन को धन्यवाद देते हुए नुसरत ने लोकसभा में अपने परिधान को लेकर हुई टीका-टिप्पणियों का जवाब भी दिया था। उन्होंने कहा था, “मैं अब भी मुस्लिम हूँ। और कोई किसी को यह नहीं बता सकता कि वह क्या पहने। वेशभूषा से आस्था परे है।”

तलाक न देने पर मोहम्मद सनोवर ने बेगम को जिंदा जलाया, अवैध संबंध को लेकर हुआ था विवाद

बिहार के भागलपुर जिले में एक हृदयविदारक घटना घटी है। यहाँ बुधवार (जुलाई 3, 2019) को तलाक न देने की वजह से एक मुस्लिम महिला को उसके पति मोहम्मद सनोवर ने जिंदा जला दिया। जानकारी के अनुसार महिला का शरीर 80 प्रतिशत झुलस चुका है और उसका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

पीड़िता के बयान के आधार पर उसके ससुराल से जेठ, पति, सास और ननद पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, लेकिन गिरफ्तारी अभी सिर्फ़ सनोवर की ही हो पाई है, क्योंकि बाकी आरोपित फरार हैं।

दैनिक जागरण के भागलपुर संस्करण में प्रकाशित खबर

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार यह मामला नवगछिया के खड़ीक थाना क्षेत्र के पूर्वी घरारी गाँव का है। यहाँ अवैध संबंध को लेकर विवाद में मोहम्मद सनोवर नामक व्यक्ति ने अपनी पत्नी बेगम खातून उर्फ़ बेबी को आग में झोंक दिया। जब बेबी बुरी तरह जल गई तो उसके ससुराल वाले उसे ठिकाने लगाने की तैयारी करने लगे, लेकिन तभी बेबी के पिता व अन्य परिजन वहाँ पहुँच गए। जिसके बाद उन्हें देखकर ससुराल के सभी लोग मौक़े से फरार हो गए। महिला को खड़ीक के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया गया। यहाँ मौजूद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया।

खबरों के मुताबिक मोहम्मद सनोवर को महिला के मायके वालों के सहयोग से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं बाकियों की तलाश अभी जारी है। सनोवर ने पुलिस से पूछताछ में बताया है कि बेबी ने उसे सब्जी लेने भेजा था और बाद में खुद ही को आग लगा ली। जबकि बेबी के पिता फारूख शेख ने बताया है कि 13 साल पहले उन्होंने अपनी बेटी का निकाह सनोवर से करवाया था, लेकिन शादी के कुछ साल बाद ही उनके बीच विवाद शुरू हो गए।

फारूख शेख ने बताया कि सनोवर के अपनी भाभी के साथ अवैध संबंध थे, जिसके कारण वह अपने 2 बच्चों के साथ 3 साल से मायके में रहती थी। 10 दिन पहले ही दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद बेबी को उसके ससुराल वाले अपने साथ घरारी ले गए थे लेकिन बुधवार को उस पर तलाक देने का दबाव बनाया जाने लगा और तलाक देने से मना करने पर उसे आग के हवाले कर दिया।

कृष्णानंद राय केस: 400 राउंड गोलियाँ, गवाहों की रहस्यमयी मौत लेकिन हत्यारा कोई नहीं

राज्य में भाजपा की सरकार। केंद्र में भाजपा की सरकार। लेकिन मार दिए गए एक भाजपा विधायक को न्याय नहीं मिल पाया। जी हाँ, आपने सही पढ़ा। 2005 में हुई हत्या के मामले में आज तक कोई अपराधी नहीं! किस पर दोष लगाया जाए? क्या सरकारें अपना काम करने में विफल रहीं? क्या न्यायपालिका को सच नहीं दिख पाया? या फिर मुख़्तार अंसारी और उसके परिवार का रसूख सब पर भारी पर गया? आज इसकी चर्चा हम इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि मुख़्तार अंसारी और उसके भाई बसपा सांसद अफ़ज़ल अंसारी को इस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बरी कर दिया। आरोपितों को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी किया गया।

सबसे पहले इस ख़बर की बात करेंगे। उसके बाद हम इस घटना को रीविजिट करने 15 वर्ष पीछे जाएँगे और फिर हम वापस लौट कर यह देखने की कोशिश करेंगे कि आख़िर इतनी बड़ी हत्या के मामले में आरोपितों के बरी हो जाने, या फिर दोषियों के पकड़ में न आने के पीछे का कारण क्या है? जिम्मेदारी किसकी है? कृष्णनंदन राय की पत्नी अलका राय की याचिका पर इस केस को दिल्ली ट्रांसफर किया गया था क्योंकि यूपी में इसके निष्पक्ष सुनवाई होने की उम्मीद परिजनों को नहीं थी। दिल्ली की अदालत ने ‘साक्ष्य के अभाव’ में उन आरोपितों को भी बरी कर दिया।

कोर्ट का कहना था कि अभियोजन पक्ष आरोपितों का दोष साबित करने में नाकाम रहा। अदालत 2 अन्य आरोपितों को पहले ही बरी कर चुकी है। सीबीआई ने मामले की लम्बी जाँच की लेकिन दोष नहीं साबित कर पाई। ये थी ख़बर। अब आते हैं अपने सवाल पर। मुख़्तार अंसारी, उसके भाई व बहनोई के ख़िलाफ़ कोई भी अपराध साबित करने में सीबीआई व पुलिस नाकाम क्यों रही? यह सवाल इसीलिए जायज हो जाता है क्योंकि दिसंबर 2005 को एसटीएफ एसएसपी अखिल कुमार ने साफ़-साफ़ कहा था कि ये हत्या मुख़्तार अंसारी ने कराई है। अब जरा पीछे जाकर इस हत्या की वारदात के बारे में जानते हैं।

गवाहों की रहस्यमयी मौतें

लेकिन उससे पहले इस घटना से जुड़ी कुछ रहस्यमयी बातों को जानते हैं, जिसके बाद आपको पता चलेगा कि क़ानून की देवी की आँखों में सचमुच पट्टियाँ बंधी होती हैं, जिसके पार उन्हें कुछ नहीं दिखता। जब कृष्णानंद राय व उनके सहयोगियों की हत्या हुई, उस समय कोई ऐसा भी था जो बच गया था। उस व्यक्ति का नाम था- शशिकांत राय। वह एक तरह से इस घटना के मुख्य चश्मदीद गवाह थे। थे इसलिए, क्योंकि अब वो नहीं रहे। सैंकड़ों राउंड गोलियों के बीच ज़िंदा बच जाने वाला शख़्श शराब पीने के बाद संदिग्ध स्थिति में सड़क पर बेहोश पड़ा पाया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

एक और गवाह था, उनका नाम था- मनोज गौड़। यह भी था, क्योंकि अब ये भी नहीं रहे। सितंबर 2006 को मनोज गौड़ की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं के बीच मात्र डेढ़ महीने का अंतर था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उन्हें डॉक्टरों ने ‘ब्रांको न्यूमोनिया’ की वजह से मृत करार दिया। जब वो अस्पताल में भर्ती थे, तब प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। दो अन्य गवाह भी थे- संजीव राय और मुन्ना राय। ये दोनों अभी भी हैं, लेकिन गाज़ीपुर में नहीं है। दोनों ही रहस्यमयी तरीके से किसी अन्य ज़िले में जाकर बस गए। और दोनों ने अपने बयान भी अदालत में दर्ज नहीं कराए

क्या हुआ था उस दिन?

वह 29 नवंबर 2005 का दिन था, जिसे गाज़ीपुर वाले आज भी ‘ब्लैक डे’ कहते हैं। कृष्णानंद राय मुहम्मदाबाद से विधायक थे। वह पिछली केंद्र सरकार में 5 वर्षों तक मंत्री रहे मनोज सिन्हा के क़रीबी भी थे। वही मनोज सिन्हा, जिन्हें गाज़ीपुर से हरा कर मुख़्तार अंसारी का भाई अफ़ज़ल अंसारी इस वर्ष सांसद बना है। यह बात बहुत कम ही लोगों को पता है कि कृष्णानदान राय इस घटना में मारे जाने वाले अकेले व्यक्ति नहीं थे बल्कि उनके साथ उनके 6 अन्य सहयोगियों की भी जान गई थी। ये हत्या इतनी वीभत्स थी और इतने बेख़ौफ़ तरीके से अंजाम दिया गया था, जिससे कोई भी इस बात का अंदाजा लगा सकता है कि इसके पीछे कितनी बड़ी ताक़तें थीं।

शासन से बेख़ौफ़ हत्यारों ने 400 राउंड गोलियाँ चलाईं थीं। घटना के बाद पोस्टमॉर्टम के दौरान मृतकों के शरीर से 67 गोलियाँ निकाली गईं। इतनी ज्यादा संख्या में बुलेट अंदर धँसने के बाद शायद ही कोई ज़िंदा बचे, वो भी तब जब ये गोलियाँ एके-47 दागी गई हों। विधायक राय लोगों में लोकप्रिय थे, इस कारण जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। विरोध प्रदर्शन करने वालों में कई ऐसे लोग भी शामिल थे, जो आज यूपी व दिल्ली में सत्ता के सर्वेसर्वा हैं। आपको बता दें कि देश के वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस वक़्त इस हत्या के विरोध में धरना दिया था। राजनाथ ने एक-दो दिन नहीं बल्कि 14 दिनों तक धरना दिया था और उनका धरना ख़त्म कराने के लिए ख़ुद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आना पड़ा था।

5 वर्षों तक राजनाथ सिंह देश के गृह मंत्री रहे और उनके कार्यकाल के दौरान भी यह जाँच अहम प्रक्रियाओं से गुजरी लेकिन हत्यारा कोई नहीं! उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोषियों को न बख्शने की बात करते हैं और क़ानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पुलिस को उन्होंने सशक्त किया है लेकिन हत्यारा कोई नहीं! सीबीआई जैसी एजेंसियाँ कथित बाहुबलियों और बड़ी मछलियों पर हाथ डालने से न हिचकने का दावा करती हैं लेकिन हत्यारा कोई नहीं! 15 वर्षों तक 7 आरोपितों पर मामला चलता है और विभिन्न संस्थाएँ अपने-अपने स्तर से जाँच करती हैं लेकिन हत्यारा कोई नहीं! उस समय की सपा सरकार का दौर गया, मनोज सिन्हा 5 साल मंत्री रहे लेकिन हत्यारा कोई नहीं!

कृष्णानंद राय हत्याकांड: नहीं मिला न्याय

तो फिर 400 राउंड गोलियाँ किसने चलाई? नहीं पता चल पाएगा। शायद इसलिए नहीं चल पाएगा क्योंकि सलमान ख़ान ने हिरन मारा या नहीं, यही मामला 20 वर्षों से अटका पड़ा है। 1998 में एक काला हिरन का शिकार कर लिया जाता है और ग्लैमर वर्ल्ड के आरोपितों के ख़िलाफ़ दो दशक तक चली जाँच के बाद भी मामले में क्या डेवलपमेंट्स हुए हैं, कुछ भी क्लियर नहीं है। ऐसे कैसे मिलेगा न्याय? जिस देश की न्याय व्यवस्था एक जानवर के शिकारी को सज़ा देने में नाकाम रही है, उससे एक नेता के कातिलों को सज़ा दिलाने की उम्मीद ही बेमानी है। सवाल सिर्फ़ विधायक का नहीं है बल्कि उनके साथ मारे गए 6 अन्य लोगों का भी है।

हो सकता है विधायक का परिवार संपन्न रहा हो और न्याय के लिए वह आगे की प्रक्रिया में जा सकता है लेकिन उनके साथ मारे गए उनके 6 सहयोगियों के परिजनों की आशाएँ भी इसी मामले से जुड़ी हैं। विधायक की पत्नी अलका राय ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि प्रदेश में सुनवाई होने से जवानों की जान को ख़तरा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया, तभी मामला प्रदेश से बाहर ट्रांसफर किया गया। इससे समझा जा सकता है कि कृष्णनंदन राय के हत्यारों के पीछे कितनी बड़ी ताक़तें काम कर रही थीं। जिसके कारण मामले को यूपी से दिल्ली भेजा जा सकता है, वो कुछ भी कर सकते हैं, कम से कम सज़ा से तो बच ही सकते हैं!

गाज़ीपुर की जनता भी उन्हें भूल जाएगी। ऐसा ही होता आया है। भले ही उनकी शवयात्रा में 5 किलोमीटर लम्बी लाइन लगी हो, जनता क्यों इस पचड़े में पड़ना चाहेगी क्योंकि उसे भी पता है कि जो अदालत और जाँच एजेंसियों को धता बता सकता है वो कुछ भी कर सकता है। क्या कृष्णनंदन राय ने ख़ुद को ही गोली मार ली? क्या उन्होंने 67 बुलेट्स ख़ुद अपने और अपने सहयोगियों के शरीर में घुसेड़ दिए? अफसोस, इन सवालों के जवाब शायद फाइलों में धूल फाँकते रह जाएँगे न्याय के इंतजार में।

कॉन्ग्रेस MLA और पूर्व CM के बेटे ने इंजीनियर पर कीचड़ उड़ेला, पुल की रेलिंग से बाँधा

नेता पुत्रों की दबंगई का एक और वीडियो सामने आया है। इसमें महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र से कॉन्ग्रेस विधायक नीतेश राणे अपने समर्थकों के साथ एक इंजीनियर को धमकाते, उस पर कीचड़ उड़ेलते और उसे पु​ल की रेलिंग से बाँधते नजर आ रहे हैं। नीतेश के पिता नारायण राणे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बीते साल सितंबर में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और फिलहाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीब बताए जा रहे हैं। हालाँकि औपचारिक तौर पर नारायण राणे अभी भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं।

नीतेश की दबंगई के शिकार बने इंजीनियर प्रकाश शेडकर मुंबई-गोवा हाइवे पर कनकावली के करीब बारिश के कारण बने गड्ढों का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान नीतेश अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुँचे। वीडियो में देखा जा सकता है कि नीतेश इंजीनियर को धमका रहे हैं और इसी दौरान उनके समर्थक बाल्टी भर कीचड़ इंजीनियर पर उड़ेल देते हैं। इसके बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ तो एक नदी पर बने पुल की रेलिंग में इन लोगों ने इंजीनियर को बाँध दिया।

सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने वाले नीतेश पहले विधायक नहीं हैं। बीते दिनों मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय और उनके समर्थकों का भी इसी तरह का वीडियो सामने आया था। इसमें आकाश इंदौर नगर निगम के अधिकारी को बल्ले से मारते दिखे थे। बाद में उनकी गिरफ्तारी भी हुई और फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। आकाश मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं। आकाश की इस हरकत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नाराजगी जता चुके हैं।

कट्टा पकड़वाने पर ₹1,000, पिस्टल पर ₹5,000: देखें UP पुलिस द्वारा जारी की गई रेट लिस्ट

उत्तर प्रदेश पुलिस अपराध और जुर्म से निपटने के सबसे क्रिएटिव तरीके ईजाद करने में शायद सबसे आगे चल रही है। इस बार एक और पहल कर के UP के बलरामपुर जिले में पुलिस ने आम आदमी को रोजगार का मौका उपलब्ध कराया है। अगर आप घर बैठे अपराध से लड़कर पुलिस की मदद करने का सपना देखते हैं और साथ में पैसा भी कमाना चाहते हैं तो यह मौका आपके लिए है। पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा द्वारा जारी एक पैम्फलेट के मुताबिक ‘मुखबिर रोजगार योजना‘ शुरू की गई है। पुलिस पैम्फलेट में विभिन्न प्रकार की सूचनाओं के लिए इनाम राशि भी सूचीबद्ध की गई है। 

क्या है ये मुखबिर योजना?

इस योजना के अंतर्गत अपराधियों और उनकी गतिविधियों की जानकारी देने वालों को पुरस्कार के रूप में धनराशि दी जाएगी। पुलिस ने अलग-अलग मुखबरी का अलग-अलग इनाम तय किया है। इसके मुताबिक चोरी का पता लगाने में मदद करने पर 1,000 रुपए और कट्टा बरामद करवाने में भी 1,000 रुपए मिलेंगे।

अगर आप ज्यादा रुपए कमाना चाहते हैं तो आपको 5,000 रुपए कमाने के लिए बिना लाइसेंस वाली रिवॉल्वर या पिस्तौल की सूचना देनी होगी। पुलिस जब रिवॉल्वर पकड़ लेगी तो 5,000 रुपए का इनाम देगी। सुरक्षा के लिहाज से इस तरह की सूचना को पुलिस अधीक्षक को उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर पर दी जा सकती है।

मुखबिर रोजगार योजना’ रेट लिस्ट

सूचना देने वाले की पहचान रखी जाएगी गुप्त

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाएगी। अगर सूचना सही पाई जाती है तो पुरस्कार की राशि नगद या खाते में डाली जाएगी। पुलिस द्वारा शुरू की गई यह पहली योजना मानी जा रही है। मुखबिरों को पैसा अब तक गुप्त कोष से दिया जाता है जो हर जिले में पुलिस प्रमुख के पास होता है। वर्मा के अनुसार, “हम आम लोगों तक पहुँच बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिनके पास आसपास के क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी हो सकती है। इसके नतीजे भी आने शुरू हो गए हैं। हम पहले ही इस योजना के माध्यम से आधा दर्जन मामलों पर काम कर चुके हैं, जो अब गाँव और जिले के ग्रामीण अंदरूनी इलाकों में लोकप्रिय हो रही है।”