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मो. मिराज ने गर्लफ्रेंड रेशमा कुमारी से अपने अब्बा पर करवाया था रेप का केस: मास्टरमाइंड का खेल खत्म

बिहार के दानापुर कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान कुख्यात अपराधी मोहम्मद मिराज ने भागने का प्रयास किया और गोलीबारी में कॉन्सटेबल प्रभाकर की गोली लगने से मौत हो गई। इस घटना की मास्टरमाइंड मिराज की बीबी रेशमा निकली। मिराज को छुड़ाने के लिए रेशमा कुमारी ने ही पूरा प्लान तैयार किया था। इसके लिए उसने मिराज के साथियों गौतम और मुनव्वर की मदद ली। पुलिस ने रेशमा और मुनव्वर को गिरफ्तार कर लिया जबकि गौतम फरार है।

बुधवार (जुलाई 10, 2019) को दानापुर कोर्ट में मिराज के पेशी पर आने से पहले रेशमा ने उसे छुड़ाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। दो बदमाशों के साथ वह कोर्ट परिसर में पहले से ही मौजूद थी। घटना के कुछ समय पहले वह कोर्ट के बाहर गेट पर पहुँची और मिराज को कैदी वाहन के पास लाए जाने का इंतजार करने लगी।

जानकारी के मुताबिक, मिराज को जब कैदी वाहन की तरफ ले जाया जा रहा था तो रेशमा ने साथियों को फायरिंग का इशारा किया। इशारा पाते ही बदमाशों ने कोर्ट के मेन गेट पर फायरिंग की और मिराज भागकर गेट पर पहुँच गया। इस दौरान रेशमा ने साथियों को मिराज को लेकर भागने का संकेत दिया। इसके लिए कोर्ट के बाहर पहले से ही गाड़ी तैयार थी। बचाव के लिए साथियों ने मिराज को पिस्टल थमा दी।

मिराज के गेट के तरफ भागते ही सिपाही उसकी तरफ दौड़े। इसी दौरान मिराज ने कॉन्सटेबल प्रभाकर राज के ऊपर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई। तभी वहाँ पर सिपाही मनोज भी पहुँचा और उसने मिराज को गिरफ्तार कर लिया। मिराज, रेशमा व मुनव्वर आलम को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया।

मिराज एक कुख्यात अपराधी है। उसका पूरा गैंग वाहन लुटेरा है। मिराज पर दो अन्य लड़कियों के साथ प्रेम का नाटक करने और फिर दुष्कर्म कर उनकी हत्या का भी आरोप है। इतना ही नहीं मिराज ने अपने पिता को फँसाने के लिए भी रेशमा का इस्तेमाल किया था। उसने अपने पिता पर रेशमा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था और रेशमा (तब वो उसकी गर्लफ्रेंड थी) ने इस संबंध में FIR दर्ज करवाई थी।

मिराज अपने पिता अख्तर के नाम पर सिम कार्ड खरीदकर लड़कियों को फँसाता था और लोगों को धमकी देता था। पटना में चैन स्नैचिंग में भी उसका गिरोह सक्रिय है।

कुत्तों का तबादला: कमलनाथ ने की रीमा और जया की छुट्टी, डफी-सिकंदर-रेणु को बुलाया

यूँ ही MP अजब-गजब नहीं है! मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार बनने के बाद से ही अफ़सरों के तबादलों का दौर चल रहा है। अब कुत्ते भी इसमें शामिल हो गए हैं। शुक्रवार (12 जुलाई) को राज्य के पुलिस विभाग ने खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग) के तबादले का आदेश जारी किया गया। पीटीएस डॉग की 23वीं वाहिनी के कुल 46 कुत्तों का उनके हैंडलर्स समेत ट्रांसफर कर दिया गया है। इनमें स्निफर, नार्को और ट्रैकर डॉग्स शामिल हैं।

आदेश के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ के बंगले की सुरक्षा के लिए छिंदवाड़ा से सिकंदर, डफी और रेणु डॉग को बुलाया गया है। अब तक बंगले की सुरक्षा कर रही रीमा और जया (डॉग्स) का ट्रांसफर कर दिया गया है। दोनों ने दो साल तक सीएम के बंगले पर अपनी सेवा दी।

कमलनाथ सरकार के इस फ़ैसले पर विपक्ष ने निशाना साधा है। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लुणावत ने चुटकी लेते हुए ट्वीट किया, “वाह री कमलनाथ सरकार तबादला उद्योग में कुत्तों को भी नहीं छोड़ा। मध्यप्रदेश में डॉग स्क्वाड के ट्रांसफर।” 

वहीं, बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने लिखा, “हाय रे बेदर्दी कांग्रेस सरकार कुत्तों को तो छोड़ देते … ! पुलिस विभाग ने किए कुत्तों के थोकबंद तबादले। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का वश चले और कोई माल देने वाला मिल जाए तो वो जमीन और आसमान का स्वयं के व्यय पर तबादला कर दे।”

इसके अलावा, कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कथित रूप से राज्य में कॉन्ग्रेस मंत्रियों के घरों के नवीनीकरण पर 38 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च करने का मामला भी सामने आया है।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने भोपाल में मुख्यमंत्री के आवास सहित मंत्रियों के निवास का नवीनीकरण करने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि भोपाल में सीएम का आवास दिसंबर 2018 से खाली पड़ा है, क्योंकि कमलनाथ अभी वहाँ शिफ्ट नहीं हुए हैं।

बीजेपी विधायक नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में दिए गए एक लिखित जवाब का हवाला देते हुए कहा है कि राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा 28 नए मंत्रियों के आधिकारिक बंगलों के नवीनीकरण के लिए 38.47 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

मोदी 2.0: 100 दिन में 167 बड़े काम, उच्च शिक्षण संस्थानों में 3 लाख बहाली

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन के एजेंडा तय हो गया है। इसके लिए 167 ‘परिवर्तनकारी विचारों’ की सूची तैयार की गई है। इन कार्यों को सरकार के सौ दिन पूरे होने यानी 15 अक्टूबर के भीतर लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में खाली पड़े 3 लाख फैकेल्टीज पदों को भरने की कवायद भी शामिल है।

जानकारी के मुताबिक 10 जुलाई को सभी सचिवों को भेजे गए पत्र में कैबिनेट सचिव प्रदीप सिन्हा ने कहा है, “सचिवों के क्षेत्रीय समूह की सिफारिशों के आधार पर और मंत्रियों के समूह द्वारा इन पर विचार करने के बाद सरकार के 100 दिवसीय कार्यक्रम के रूप में 167 ट्रांसफॉर्मिंग आइडियाज को लागू करने का निर्णय लिया गया है।”

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक मंत्रालय द्वारा कई चरणों में प्रजेंटेशन देने और इन पर उच्च स्तरीय विवेचना के बाद 100 दिनों के भीतर पूरा किए जाने वाले महत्तवपूर्ण कार्यों की सूची तैयार की गई है। इन कार्यों की सीधी निगरानी संबंधित मंत्रालयों के सचिव करेंगे। वे हर शुक्रवार को शाम 5 बजे तक कार्य की स्टेटस रिपोर्ट कैबिनेट सेक्रेट्री को भेजेंगे। मंत्रालयों को कार्य की प्रगति दर्शाने वाले डैशबोर्ड्स लगाने को भी कहा गया है ताकि इनपर सबकी नजर रहे।

खबरों के अनुसार इस सूची में चुने गए प्रमुख परियोजनाओं में अधिकतर प्रशासनिक सुधारों के कार्यक्रम शामिल हैं। सरकार का जोर इस बार केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी व्यवस्था (Centralised Public Grievance Redress ) को सुधारने पर है। इसके अलावा सरकार की योजना नेशनल ई-सर्विसेज डिलीवरी असेसमेंट और केंद्रीय सचिवालय कार्यालय नियमावली प्रक्रिया शुरू करने की भी है।

उल्लेखनीय है कि इन कार्यों की सूची में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को देशभर में रिक्त पड़े 3 लाख फैकल्टीज़ के पद भरने की भी जिम्मेदारी दी गई है और संस्कृति मंत्रालय को नेहरू स्मारक एवं पुस्तकालय में देश के प्रधानमंत्रियों का म्यूजियम ढाँचा तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही लाल किले में तीन नए बैरक म्यूजियम के उद्घाटन समेत महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह से संबंधित कार्यों को भी पूरा करने की जिम्मेदारी तय की गई है।

मोदी सरकार के 100 दिन प्लान का उद्देश्य बिना समय गँवाए तय कार्यों को पूरा करना है। एक अधिकारी के मुताबिक जिस समय राजनीति से जुड़े लोग और मंत्री चुनाव के लिए प्रचार में जुटे थे, उसी समय हर मंत्रालय और हर विभाग को पीएमओ ने 100 दिन का प्लान बनाने की जिम्मेदारी दी थी।

मेदिना होटल में विस्फोटकों से लदी कार लेकर घुसा अलकायदा का आतंकी, 26 लोगों की दर्दनाक मौत

दक्षिण सोमालिया के एक होटल में अल शबाब आतंकवादी संगठन द्वारा किए गए एक आत्मघाती विस्फोट और उसके बाद अंधाधुंध फायरिंग में 26 लोगों की मौत हो गई है। द गार्जियन के अनुसार, जिस होटल में हमला हुआ, वहाँ पर काफी राजनेता और बड़ी हस्तियाँ मौजूद थीं, जो जल्द ही होने वाले धार्मिक चुनावों में हिस्सा लेने वाले थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने किसमायो शहर के लोकप्रिय मेदिना होटल में विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी घुसा दी। इसके बाद आधुनिक हथियारों से लैस कई बंदूकधारी आतंकी गोलीबारी करते हुए होटल में घुस गए। अलकायदा से जुड़े समूह अल शबाब ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। वह पहले भी कई आतंकवादी हमलों को अंजाम दे चुका है।

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हुसैन मुख़्तार का कहना है- “बहुत बड़ा धमाका हुआ। घटनास्थल पर अफ़रा-तफ़री मच गई। मैंने कुछ लाशें देखीं। आस-पास की बिल्डिंग्स से लोग निकलकर भाग रहे थे।”

सोमालिया स्थित किसमायो शहर

हालाँकि, सोमालिया में सुरक्षाबलों ने रात से जारी आतंकवादी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है। पुलिस अधिकारी ने कहा, “ऑपरेशन अब खत्म हो गया है। इस हमले में अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोगों को इलाके से निकाला जा रहा है। चारों हमलावरों को भी हमने मार गिराया है।” सुरक्षा अधिकारी अब्दी धुहुल ने कहा, “हमने एक पूर्व स्थानीय प्रशासन मंत्री और एक नेता समेत सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। अभी हमला समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।”

खिड़की से शादीशुदा GF के घर में घुस रहा था नियाज शेख, 9वीं मंजिल से गिरकर मौत

मुंबई में शादीशुदा प्रेमिका से मिलने के चक्कर में एक युवक की जान चली गई। 19 वर्षीय नियाज शेख खिड़की के रास्ते 9वीं मंजिल पर स्थित प्रेमिका के घर में घुसने की कोशिश कर रहा था। अचानक उसकी नजर महिला के पति पर पड़ गई। उसने लौटने का फैसला किया। इसी दौरान पैर फिसलने से वह जमीन पर गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

घटना मंगलवार (जुलाई 9, 2019) रात की है। बिल्डिंग के वॉचमैन ने रात के तक़रीबन 2:30 बजे खून से लथपथ शव देख पुलिस को सूचना दी। नियाज को नायर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने ऐक्सिडेंटल डेथ का केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि नियाज एक प्राइवेट क्लीनिक में लैब असिस्टेंट के तौर पर काम करता था और दसवीं में पढ़ता था।

रिपोर्टों के मुताबिक, जिस बिल्डिंग में यह घटना घटी नियाज वहीं 15वीं मंजिल पर रहता था। नियाज 2 साल पहले बिहार से मुंबई आया था और अपने मामा के साथ रहता था। बिल्डिंग की 9वीं मंजिल पर रहने वाली 24 वर्षीय शादीशुदा महिला से उसे प्रेम हो गया। काफी दिनों से उनका प्रेम-प्रसंग चल रहा था। एक दिन मामा ने उसे महिला के घर जाते देख लिया था। इसके बाद नियाज ने दरवाजे की जगह खिड़की से महिला के घर आना-जाना शुरू कर दिया।

मंगलवार की रात भी वह खिड़की के रास्ते महिला से मिलने पहुँचा था। लेकिन, बारिश के कारण खिड़की गीली थी, जिसकी वजह से उसका पैर फिसल गया और वह नीचे गिर पड़ा। महिला का कहना है कि उसने कुछ गिरने की आवाज तो सुनी, लेकिन पति के डर से नीचे झाँक कर नहीं देखा।

विदेशी फोटो से फैलाया प्रोपेगेंडा, सरदार पटेल की स्टैच्यू से तुलना: AAP की मार्लेना का नया अंदाज

आम आदमी पार्टी की आतिशी मार्लेना को कैलिफोर्निया और दिल्ली के ओखला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के बीच का अंतर शायद नहीं मालूम। अगर मालूम होता तो प्रोपेगेंडा नहीं फैलातीं। आतिशी मार्लेना ने इंस्टाग्राम पर एक इमेज पोस्ट किया। इमेज में दाईं ओर एक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट है और बाईं ओर स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी। इस पोस्ट को उन्होंने शीर्षक दिया- “Vision and priority matters.”

इंस्टाग्राम पर आतिशी द्वारा पोस्ट की गई इमेज

मार्लेना ने बताया कि कैसे विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा मतलब गुजरात स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लागत 3,500 करोड़ रुपए है, जबकि दिल्ली के ओखला में भारत के सबसे बड़े सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की लागत 1,161 करोड़ रुपए है। इसके अलावा अपनी पोस्ट में उन्होंने जल संकट के बारे में भी कुछ बातें लिखीं।

लेकिन, तथ्यों की जाँच करने वाली वेबसाइट fact-hunt के अनुसार, मार्लेना ने जो इमेज इंस्टाग्राम पर पोस्ट की है, वो वास्तव में कैलिफोर्निया की है।

कैलीफोर्निया में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (इमेज: facthunt.in)

एक और सच्चाई यह है कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी का निर्माण 2,989 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर किया गया था न कि 3,500 करोड़ रुपए में, जिसका दावा मार्लेना ने अपनी पोस्ट में किया। वहीं, तथ्य बताते हैं कि ओखला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण अभी बाक़ी है। इसकी आधारशिला 8 जुलाई 2019 को केंद्रीय जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रखी थी।

मार्लेना ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि जिस इमेज को आधार बनाकर वो भ्रम की स्थिति बना रही हैं, वास्तव में वो ख़ुद ही सही तथ्यों से अवगत नहीं हैं। कैलीफोर्निया की इमेज को वो डिस्क्लेमर के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकती थीं, जिससे यह संदेश दिया जा सकता था कि ओखला का सीवर प्लांट इसी तर्ज पर बनाने की कोशिश की जाएगी, जिसका निर्माण कार्य अभी बाकी है।

इसके अलावा, यह परियोजना 2022 तक चालू रहने की उम्मीद है। मार्लेना ने इस तथ्य का भी उल्लेख नहीं किया कि ओखला सीवेज ट्रीटमेट प्लांट केंद्र सरकार द्वारा 85% वित्त पोषित है।

अमरनाथ यात्रा में बाधा बने अलगाववादी, रोकी गई जम्मू से श्रद्धालुओं की आवाजाही

अलगाववादियों द्वारा बुलाए गए बंद के कारण शनिवार (जुलाई 13, 2019) को अमरनाथ यात्रा को एक दिन के लिए रोक दिया गया। तीर्थयात्रियों को जम्मू से कश्मीर घाटी की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने बताया कि अलगाववादियों के प्रदर्शनों को देखते हुए कानून-व्‍यवस्‍था और अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर ऐहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। 

अलगाववादियों ने यह बंद वर्ष 1931 में 13 जुलाई को श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में मारे गए करीब 22 लोगों के विरोध में किया है। बता दें कि साल 1913 में इसी दिन डोगरा महाराजा की सेनाओं द्वारा श्रीनगर सेंट्रल जेल के बाहर गोलीबारी हुई थी, जिसमें करीब 22 लोग मारे गए थे। अलगाववादी हर साल 13 जुलाई को शहीद दिवस के तौर पर मनाते हैं। जम्मू के लोग इस आयोजन का विरोध करते हैं, क्योंकि यह मामला तत्कालीन महाराजा हरि सिंह के खिलाफ विद्रोह से जुड़ा है। वहीं, राज्य सरकार इस दिन को 1947 में आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान के तौर पर मनाती है।

अलगाववादियों के बंद को देखते हुए यात्रा मार्ग समेत अन्‍य संवेदनशील स्‍थानों पर सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्‍त किए गए हैं। भारतीय सेना लगातार चप्पे-चप्पे पर नजर जमाए हुए है। कई इलाकों में ड्रोन से नजर रखी जा रही है। बंद के कारण सड़कें सुनसान हैं। गौरतलब है कि 1 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ की वार्षिक तीर्थयात्रा में 1.50 लाख से अधिक तीर्थयात्री अब तक बाबा बर्फानी का दर्शन कर चुके हैं। 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन अमरनाथ यात्रा समाप्त होगी।

मुस्लिमों पर अत्याचार: पाकिस्तान सहित 37 देशों ने कहा – सही कर रहा है चीन

चीन पर शिनजियांग में दस लाख मुस्लिमों को हिरासत में लेने और उइगरों को सताए जाने का आरोप है। इसी संदर्भ में 22 देशों के राजदूतों ने चीन की नीतियों की आलोचना करते हुए इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद को एक पत्र लिखा। दरअसल, उइगर एक तुर्की-मुस्लिम जातीय समूह हैं, जो मुख्यतः चीन के प्रशासनिक क्षेत्र शिनजियांग में रहते हैं। इसके अलावा मंगोलिया, रूस, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में भी इनकी थोड़ी-बहुत आबादी है। चीन के शिनजियांग स्वायत्त क्षेत्र में अधिकारियों और स्थानीय उइगर आबादी के बीच संघर्ष का एक लंबा इतिहास रहा है।

मानवाधिकार निगरानी संस्था (ह्यूमन राइट्स वॉच) के अनुसार, 22 पश्चिमी देशों ने एक बयान जारी कर चीन से अनुरोध किया है कि वो पश्चिम शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बड़े स्तर पर मनमाने ढंग से की गई नज़रबंदी समेत अन्य उल्लंघनों को ख़त्म करे। इस पत्र पर ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्ज़ियम, कनाडा, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, आयरलैंड, जापान, लातविया, लिथुआनिया, लग्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड और ब्रिटेन हैं। ध्यान देने की बात यह है कि इन देशों में एक भी ऐसा मुस्लिम देश शामिल नहीं है, जिसने चीन के ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया-स्वरूप इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हों।

वहीं दूसरी तरफ़ सऊदी अरब, रूस और 35 अन्य देशों ने पश्चिमी देशों की आलोचना के विपरीत शुक्रवार को शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में चीन की नीतियों का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में इन 35 देशों को चीन की शिनजियांग नीति से कोई परहेज़ नहीं है बल्कि इसके उलट वे उइगर मुस्लिमों को “उग्रवाद से दूर करने (deradicalization) और व्यवसायिक शिक्षा देने” वाली चीन की नीतियों के समर्थन में हैं।

इन 35 देशों में शामिल सऊदी अरब और रूस के साथ-साथ कई अफ्रीकी देशों, उत्तर कोरिया, वेनेजुएला, क्यूबा, ​​बेलारूस, म्यांमार, फिलीपींस, सीरिया, पाकिस्तान, ओमान, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन समेत कई इस्लामिक मुल्कों के राजदूतों ने चीन की नीतियों के समर्थन में पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

शिनजियांग में उइगर मुस्लिम आबादी के ख़िलाफ़ कठोर नीतियों को अपनाने के लिए चीन संयुक्त राष्ट्र की निंदा का सामना कर रहा है। ख़बर यह भी है कि चीन अपने क़ैदखानों में उइगर मुस्लिमों को कथित रूप से उनकी परंपराओं को भूलने, इस्लामी प्रथाओं की निंदा करने और शी जिनपिंग की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफ़ादार बनने को मजबूर करता है। हालाँकि चीन इस तरह के मानवाधिकार उल्लंघनों से इनकार करता है और इन्हें चरमपंथ से लड़ने और रोज़गार योग्य कौशल सिखाने के उद्देश्य वाले प्रशिक्षण स्कूल बताता है।

पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब जैसे कई इस्लामिक देश ऐसे देश हैं जिन्होंने मुस्लिमों पर हो रहे इन कथित अत्याचारों पर चुप्पी साध रखी है। इसकी वजह शायद चीन का इन देशों में भारी निवेश है। चीनी निवेश इन देशों को आर्थिक संकट से उबारने में बहुत महत्वपूर्ण है। इसी के चलते ये इस्लामिक देश चीन की नीतियों का विरोध करने की बजाए उसके समर्थन में खड़े नज़र आते हैं।

बिजनौर: प्यार-धर्म परिवर्तन-बलात्कार के बाद फराज ने आखिर में हड़प लिए ₹5 लाख

दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने बिजनौर जिले के शख्स पर आरोप लगाया है कि उसने महिला को पहले प्रेमजाल में फँसाया और फिर फर्जी निकाह के लिए धर्म परिवर्तन करवा दिया। इस सबके बाद महिला से 5 लाख रुपए हड़पे और असलियत सामने आने पर बलात्कार कर के छोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में दो नामजद और तीन अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया है।

मीडिया खबर के मुताबिक दिल्ली के गोविंदपुरी में रहने वाली एक महिला का 3 साल पहले बिजनौर के नगीना में आना-जाना था। इसी बीच उसकी मुलाकात फराज नाम के युवक से हुई। फराज ने महिला से खुद की पहचान एक प्रॉपर्टी डीलर के रूप में करवाई और फिर अपना मोबाइल नंबर उसे देकर उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया। इसके बाद फराज उसे फोन करता और दोनों के बीच घंटों तक बातें होती थी।

प्रकाशित खबर का फोटो

एक दिन फराज ने उसे फोन करके नगीना बुलवाया और प्यार का झाँसा देकर उससे निकाह करने की बात कही। महिला उसके इस जाल में फँसती गई और निकाह के लिए हाँ कर दिया। फराज ने अक्टूबर, 2016 में मौलवी को बुलवाकर अपने तीन दोस्तों के सामने पहले उसका धर्म परिवर्तन करवाया फिर मौलाना से फर्जी निकाह पढ़वा दिया। इसके बाद उसने महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए और 5 लाख रुपए भी लिए। कुछ दिन तक सब ठीक चलता रहा, लेकिन कुछ दिन बाद वह महिला से दूरियाँ बनाने लगा।

महिला को इस दौरान कहीं से पता चला कि फराज ने जो उससे निकाह किया है वो फर्जी है और वह इस तरह लड़कियों को फँसाकर उन से पहले भी रूपए हड़प चुका है। जिसके बाद वह जुलाई 07, 2019 को नगीना में स्थित फराज के घर पहुँची, जहाँ फराज ने फिर से महिला का बलात्कार किया। इसके बाद फराज ने महिला को दिल्ली चलने के नाम पर को बस अड्डे भेज दिया, लेकिन खुद वहाँ नहीं गया। फराज ने महिला को धमकी भी दी कि यदि उसने इस मामले की शिकायत पुलिस से की तो वह उसकी अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा।

हिंदुस्तान की खबर के अनुसार थाना प्रभारी राजेश तिवारी ने बताया कि पीड़ित महिला की शिकायत पर फराज और फर्जी निकाह पढ़ने वाले मौलाना समेत तीन अन्य के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी करने धर्म परिवर्तन कराने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के कार्रवाई शुरू कर दी है।

‘छोटे शहरों और गाँवों में खौफ का माहौल’: मॉब लिंचिंग पर सलमान खुर्शीद का विवादित बयान

देश में पिछले कुछ वक्त में मॉब लिंचिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं, इसके बाद से ही इस मामले पर राजनीति जारी है। इसे लेकर भाजपा और कॉन्ग्रेस कई बार आमने-सामने हो चुकी हैं। अब इस मामले पर कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने विवादित बयान दिया है। खुर्शीद के इस बयान पर एक बार फिर से ये मामला गरमा सकता है और सियासत तेज हो सकती है। 

दरअसल, मॉब लिंचिग पर बयान देते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि दिल्ली से बाहर रह रहे लोग डर के साए में जी रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि दिल्ली के उन इलाकों में डर का कोई माहौल नहीं है, जहाँ हम रहते हैं या काम करते हैं, लेकिन हाँ छोटे शहरों और गाँवों में इसका डर जरूर है। इस डर को दूर करने की जिम्मेदारी हर भारतीय की है।”

कॉन्ग्रेस नेता की यह टिप्‍पणी यूपी के उन्‍नाव में मदरसा छात्र और स्थानीय युवकों के बीच हुई झड़प के बाद आई है। इस मामले में कहा गया कि बजरंग दल के सदस्‍यों ने मदरसा के कुछ छात्रों की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी, क्‍योंकि उन्‍होंने ‘जय श्री राम’ के नारे नहीं लगाए। शहर के काजी निसार अहमद मिस्बाही ने आरोप लगाया कि मदरसा के छात्र क्रिकेट खेल रहे थे, तभी बजरंग दल से जुड़े कुछ छात्र वहाँ पहुँचे और जबरन जय श्री राम बुलवाने की कोशिश की। जब उन छात्रों ने मना किया तो उनकी पिटाई कर दी। निसार अहमद ने इस मारपीट को मॉब लिंचिंग से जोड़ने की कोशिश भी की। हालाँकि पुलिस द्वारा इस मामले की जाँच के बाद स्पष्ट हुआ कि मजहबी नारे लगवाने के लिए मजबूर करने वाली बात एकदम मनगढ़ंत और झूठी थी।

कानून-व्यवस्था के महानिरीक्षक प्रवीण कुमार ने उन्नाव में क्रिकेट खेलने को लेकर दो पक्षों में हुई मारपीट की घटना को लेकर बताया कि इस मामले की जाँच में पता चला है कि मदरसे के बच्चों से धार्मिक नारे नहीं लगवाए गए थे। यह विवाद दो पक्षों के बीच क्रिकेट मैच के दौरान झगड़े के कारण शुरू हुआ था। प्रवीण कुमार का कहना है कि ऐसे झूठे आरोप लगाकर मेरठ और आगरा में भी शांति भंग करने का प्रयास किया गया, लेकिन जिला और पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते यह नाकाम हो गया। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी भी देश के कई राज्यों में मॉब लिंचिंग को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए भुनाने की कोशिश हो चुकी है, जबकि मॉब लिंचिंग के ज्यादातर मामले गलत ही साबित हुए हैं।