TV9 भारतवर्ष नाम का एक न्यूज़ चैनल अपने फेक और फर्जी मीडिया रिपोर्ट्स के कारण हर दिन नए अध्याय जोड़ रहा है। हाल ही में TV9 भारतवर्ष द्वारा एक वीडियो दिखाया गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की अर्थव्यवस्था पर बातचीत करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए थे।
TV9 भारतवर्ष द्वारा ‘कॉन्ग्रेस-वादी’ पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज की एक ऐसी रिपोर्ट शेयर की गई जिसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह से मिलने उनके निवास पर गए थे। इस रिपोर्ट में इस मीटिंग की ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्टिंग का भी दावा किया गया था।
यह न्यूज़ रिपोर्ट कल ही सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनल पर जारी की गई। इसमें पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज ने दावा किया है कि पीएम मोदी और मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था पर चर्चा की। हालाँकि, दुखद घटना यह है कि अब यह वीडियो डिलीट कर दिया गया है।
क्या है सच्चाई?
ट्विटर यूज़र अंकुर सिंह ने इस वीडियो की सच्चाई सामने लाते हुए बताया कि TV9 भारतवर्ष ने यह निहायत ही झूठा दावा 2014 के एक पुराने वीडियो के द्वारा किया है। इसके साथ ही अपने ट्वीट में अंकित ने यह भी लिखा है कि राहुल गाँधी की चहेती पत्रकार सुप्रिया भरद्वाज 2014 के एक पुराने वीडियो क्लिप को एक्सक्लूसिव बताकर फेक न्यूज़ चलाने का काम कर रही हैं।
Fake news peddler @TV9Bharatvarsh cooked up entire story of Modi meeting Manmohan Singh using a 2014 clip.
पीएम मोदी भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कई बार मिलते रहे हैं। मई 2015 में मनमोहन सिंह भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने 7 RCR गए थे। हालाँकि, TV9 भारतवर्ष द्वारा शेयर की गई वीडियो क्लिप मई 2014 की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण के अगले दिन मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी से मिलने उनके उनके आवास पर गए थे। यह मात्र एक शिष्टाचार भेंट थी। यह वीडियो क्लिप उसी दिन की थी, जो कि पीएम मोदी के ही यूट्यूब चैनल पर शेयर की गई थी।
सिर्फ TV9 भारतवर्ष ही नहीं, कॉन्ग्रेस के ही एक एडवोकेट और सचिव जीतेन्द्र बघेल द्वारा भी 2014 का यही वीडियो ये कहते हुए शेयर किया गया कि पीएम मोदी मनमोहन सिंह के घर उनसे यह पूछने गए थे कि “भारत की GDP कैसे बढ़ाई जाए?”
जीतेन्द्र बघेल के इस झूठे दावे की पोल @pokershash नाम के ट्विटर यूज़र ने खोली-
2014 का विडीओ है। थोड़ा कम झूठ फैलाओ। और कांग्रेस जैसे गँवार ही बजट से GDP को जोड़ सकते है ??? pic.twitter.com/EuwbBHumaR
यह हास्यास्पद है कि अपने फेक नैरेटिव को दिशा देने के लिए हर समय लालायित रहने वाले मीडिया गिरोहों की तरह ही TV9 भारतवर्ष न्यूज़ चैनल एक 5 साल पुराने वीडियो को ताजा और एक्सक्लूसिव बताकर आज शेयर करता है। शायद यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा हो कि मनमोहन सिंह एक विशेषज्ञ हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था को अन्य किसी भी अर्थशास्त्री से ज्यादा जानते हों। लेकिन इसके लिए एक शिष्टाचार भेंट के वीडियो का सहारा लेना मीडिया की विश्वसनीयता को ही दर्शाता है।
द वायर वालों को विचारों की कितनी कमी पड़ रही है, यह उनके लेखों को देखकर साफ हो रहा है। जनेऊ को हौव्वा बनाने से शुरू हुआ इनका मानसिक स्खलन इतना नीचे जा पहुँचा है कि अब ये कातिलों से लेकर गबन के आरोपियों का बचाव केवल इस आधार पर करना चाहते हैं कि फलाना मोदी के खिलाफ बोला था, ‘एंटी-RSS’ था, तो अगर इसे जेल भेजा गया तो सरकार के खिलाफ बोलने वालों में ‘डर का माहौल’ बन जाएगा।
चोरकटई से इंकार नहीं कर पा रहे अपने साथियों की
सबसे महत्वपूर्ण और गौरतलब बात यह है कि पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपने संगी-साथियों के कुकर्मों से ना नहीं कर पा रहा है। इसे उस समय से तो ‘इम्प्रूवमेंट’ मान ही सकते हैं जब मोदी के दानवीकरण की ‘चीफ आर्किटेक्ट’ तीस्ता सीतलवाड़ को निर्दोष साबित करने के लिए मीडिया गिरोह पन्ने-पर-पन्ना काला करने में लगे रहते थे। लेकिन दोगलई और मोदी से नफरत इनकी नसों में शायद खून की जगह बह रहे हैं। वो भी इतने ‘ब्लड प्रेशर’ से कि वायर के संस्थापक-सम्पादक सिद्धार्थ भाटिया लिखते हैं कि हालाँकि सीबीआई (‘मानवाधिकार’ गिरोह के वकील आनंद ग्रोवर के खिलाफ विदेश से नियम तोड़कर पैसा लेने का केस दर्ज किया), सेबी (प्रणय रॉय को जालसाजी के आरोप में दो साल आर्थिक बाजार से तड़ीपार किया), प्रवर्तन निदेशालय (राघव बहल के खिलाफ आर्थिक अनियमितता का केस दर्ज किया) और कोर्ट (संजीव भट्ट को हत्या के मामले में उम्र-भर के लिए जेल भेजा) मोदी सरकार के अंतर्गत काम नहीं करते, “लेकिन” यह भी सच है कि बहल, भट्ट और प्रणय रॉय (और उनकी पत्नी राधिका रॉय) मोदी के खिलाफ काम करते थे।
यहीं इनकी असली नीयत, असली चेहरा इसी “लेकिन” में दिख जाता है। बिना कुछ कहे न केवल आरोपित-चूँकि-मोदी-विरोधी-हैं-इसलिए-गबन-से-लेकर-क़त्ल-तक-माफ़-है का संदेश आपके दिमाग में बैठा देते हैं, बल्कि उसके बाद नीचे खुद ही ऊपर जिन प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई वगैरह को ‘क्लीन चिट’ देते हैं, बमुश्किल दस वाक्यों के भीतर-भीतर उन पर भी फिर से हमला शुरू कर देते हैं। हमें यह बताने के बहाने कि सेबी और ईडी ने ‘आश्चर्यजनक तेज़ी से’ रॉय दम्पति और राघव बहल पर कार्रवाई की, अप्रत्यक्ष रूप से पाठक के कान में ‘ये मोदी के इशारे पर हो रहा है’ का मंत्र फूँका जाता है।
राघव बहल का मामला दबाने की कोशिश
वायर के ‘पप्पा’ सिद्धार्थ भाटिया ‘समुदाय विशेष’ के अपने सहोदर राघव बहल के मामले को हल्का करने की भरसक कोशिश करते हैं। बताते हैं कि “महज़ दो करोड़ के लिए ईडी पूरे दल-बल के साथ राघव बहल के पीछे लग गया है, जबकि यह एक ‘रूटीन’ टैक्स इंक्वायरी हो सकती थी।”
‘महज़’ दो करोड़? महज़? दो करोड़ महज़ होते हैं? वो भी उस विचारधारा (शैम्पेन सोशलिज़म) के अलमबरदारों के लिए, जो दिन-रात इस देश के अमीरों के पैसे से डाह पालते नहीं थकते? जिन्होंने हर समय दूसरों की समृद्धि के लिए उन्हें शर्मसार करने में, ‘गैर-बराबरी’ के नाम पर सबके हाथ में कटोरा दे देने की वकालत की हो, वह पत्रकारिता का समुदाय विशेष अपनी काली कमाई के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर उस धनराशि को ‘महज़’ बता रहा है? और चाहता है कि अफसर और जाँच करने वाला विभाग भी उनके हिसाब से तय हों?
यही काम सिद्धार्थ भाटिया सेबी और रॉय दम्पति के मामले में करते हैं। पता है कि सेबी के फैसले में कोई नुक्ता-चीनी हो नहीं सकती, क्योंकि सेबी ने तसल्लीबख्श सबूत अपने फैसले के समर्थन में रख ही दिए हैं। तो अब सेबी के उनका मामला हाथ में लेने पर ही सवाल उठाया जा रहा है। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या सेबी के पास और मामले नहीं थे लंबित, जो प्रणय रॉय के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाया गया? केवल इसलिए कि वह एंटी-मोदी हैं? क्या एंटी-मोदी लोगों के मामले अदालतें, पुलिस, जाँच एजेंसियाँ तभी उठाएँ जब बाकी सारे मामले खतम हो जाएँ? ऐसा क्यों? क्या मोदी के खिलाफ हो जाना कोई लाइसेंस है अपराध करने का?
हार्ड कौर पर देशद्रोह योगी नहीं, 26/11 के कारण है
आगे भाटिया बताते हैं कि गालीबाज गायिका हार्ड कौर पर योगी को गाली देने के कारण देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह सीधे-सीधे झूठ है। हार्ड कौर को देशद्रोह मामले में नामजद इसलिए किया गया कि उन्होंने कथित तौर आरएसएस को हेमंत करकरे का हत्यारा कहा- जिसका मतलब यह था कि उन्होंने देश के दुश्मन हाफिज़ सईद को, फाँसी पर लटकाए गए जिहादी कसाब को 26/11 का दोषी होने से मुक्त करने की कोशिश की। अगर यह देशद्रोह नहीं है कि इस देश के ऊपर हुए इतिहास के भीषणतम जिहाद के घोषित और साबित मुजरिमों को कोई नागरिक बेगुनाह साबित करने का दुष्कृत्य करे, तो और क्या हो सकता है देशद्रोह?
हिरेन गोहैन पर वही मामला है, जो कन्हैया कुमार पर है
आगे भाटिया हिरेन गोहैन के मामले का ज़िक्र करते हैं कि उन पर भी देशद्रोह का मामला चल रहा है। इसे वह मोदी के देशद्रोह कानून के दुरुपयोग का सबूत दिखाते हैं। अगर इस मामले में वायर के ही लिंक पर क्लिक करिए तो साफ़ पता चलेगा कि उन पर मामला इसीलिए चल रहा है कि उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक में असम को भारत से अलग करने के नारे लगे थे। ठीक यही मामला कन्हैया कुमार पर चल रहा है। ऐसे में सरकार अगर गोहैन पर मामला न चलाती तो क्या यह कन्हैया कुमार के साथ नाइंसाफी न होती?
सलाह
पत्रकारिता के समुदाय विशेष को सुधरना तो इन्हें तब तक नहीं है, जब तक भगवन खुद उन्हें सद्बुद्धि देने अवतरित न हो जाएँ। केवल एक सलाह दी जा सकती है- मोदी से नफरत करिए, खुल के करिए (क्योंकि अब जब वही खून की जगह आपकी रगों में बह रहा है, तो क्या किया जा सकता है?), पेट भर के करिए। लेकिन नफरत में इतने अंधे मत हो जाइए कि आज गबन वालों के पक्ष में आप खड़े हैं, कल संजीव भट्ट पर आरोपित हत्या का कोई औचित्य निकाल लाइए, और परसों 26/11 या पठानकोट या पुलवामा हमले के पक्ष में खड़े हो जाइएगा। नफरत को दिमाग पर हावी होने से रोकिए। उसे दिल के अजीर्ण तक सीमित करिए।
बांग्लादेश का आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) पश्चिम बंगाल में अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर कहा है कि जेएमबी पश्चिम बंगाल के बर्दवान और मुर्शिदाबाद जिलों में अपनी जिहादी गतिविधियों और आतंकी भर्तियों का काम कर रहा है। गृहराज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस संबंध में इनपुट्स पर कार्रवाई करने की सलाह के साथ पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ जानकारी नियमित रूप से साझा की जा रही है।
Minister of State for Home Affairs: There are inputs of Jamaat-ul-Mujahideen Bangladesh using some Madrasas in Burdwan&Murshidabad for radicalization & recruitment. Relevant inputs are regularly shared with State Govts & agencies concerned with advice to take appropriate action. https://t.co/YhPlzj7Jva
गृह मंत्रालय के अनुसार, उनके पास खुफिया रिपोर्ट है कि बर्दवान और मुर्शिदाबाद में मदरसों का उपयोग करके जमात मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) आतंकियों की भर्ती कर रहा है। केंद्र ने इसी साल मई में ‘जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश’, ‘जमात-उल-मुजाहिदीन भारत’ और ‘जमात-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ तथा इसके सभी स्वरूपों को आतंकवादी संगठन की लिस्ट में शामिल किया है। ये मदरसों के माध्यम से दहशतगर्दी फैलाने का काम करती है।
मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को लोकसभा में भाजपा के सांसद खगेन मुर्मु तथा डॉ सुकांत मजूमदार के सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के पहले, लोकसभा चुनाव के दौरान तथा उसके बाद भी हिंसा की कई घटनाओं की सूचना मिली। जिसमें कई लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए थे।
West Bengal: Yesterday, STF Kolkata arrested one Abdul Rahim, a resident of Murshidabad, West Bengal. He is a member of Jammat-ul-Mujaheedin Bangladesh (JMB) & an active member of JMB Dhulian Module, responsible for 2018 Bodh Gaya Blast.
वहीं, कोलकाता एसटीएफ ने सोमवार (जुलाई 1, 2019) को अब्दुल जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) और जेएमबी धूलियन मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य अब्दुल रहीम को गिरफ्तार किया है। अब्दुल रहीम मॉड्यूल 2018 बिहार के बोधगया में हुए विस्फोट के लिए जिम्मेदार है। ये पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक युवक को किसी निजी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था, उसकी कब्र खोद दी गई थी, लेकिन दफनाए जाने से ठीक पहले वो जिन्दा हो गया। मुहम्मद फुरकान नाम के इस युवक की कब्र खोद ली गई थी और जब उसे दफनाया जाने वाला था, तभी परिवार के कुछ सदस्यों ने उसके शरीर में हरकत देखी। इसके बाद रोना-धोना बंद हो गया और हैरान परिजन मुहम्मद फुरकान को अस्पताल ले गए जहाँ उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है। यदि थोड़ी देर तक और उसके शरीर में हरकत न दिखाई देती तो उसे जीवित ही दफन कर दिया जाता।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ में मृत घोषित किया जा चुका एक व्यक्ति दफनाए जाने से ठीक पहले जिंदा हो उठा। 20 वर्षीय फुरकान को एक दुर्घटना के बाद 21 जून को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार (जुलाई 01, 2019) को उसे मृत घोषित कर दिया गया और उसके शव को एंबुलेंस से उसके घर पहुँचा दिया गया।
फुरकान के बड़े भाई मोहम्मद इरफान ने कहा, “फुरकान की मौत से बेहद दुखी हम लोग उसे दफनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी किसी ने उसके शरीर में हरकत देखी। हम फौरन फुरकान को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने कहा कि वह जिंदा है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया।”
इरफान ने कहा, “इससे पहले हम निजी अस्पताल को 07 लाख रुपए का भुगतान कर चुके थे और जब हमने उन्हें बताया कि अब हमारे पास पैसे नहीं हैं तो उन्होंने सोमवार को फुरकान को मृत घोषित कर दिया।” लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, “हमने मामले का संज्ञान लिया है और इसकी पूरी जाँच की जाएगी।”
फुरकान का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कहा, “मरीज की हालत गंभीर है लेकिन वह निश्चित रूप से ब्रेन डेड नहीं है। उसकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर और दिमाग काम कर रहा है। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर खुद को तिरंगा टीवी का कर्मचारी बताने वाले कुछ लोगों ने दावा किया है कि उन्हें चैनल ने बिना किसी स्पष्ट कारण बताए बर्खास्त कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर तिरंगा टीवी के ये पूर्व कर्मचारी अपनी बात कपिल सिब्बल तक पहुँचाने के लिए एक ही संदेश को अपने-अपने ट्विटर अकॉउंट से शेयर कर रहे हैं।
इस संदेश में कर्मचारियों ने कपिल सिब्बल से गुहार लगाते हुए लिखा है, “तिरंगा टीवी के हम जैसे कर्मचारियों को बिना किसी स्पष्ट कारण के सिर्फ़ एक महीने की सैलरी देकर बर्खास्त कर दिया गया है। हम आपसे मिलना चाहते हैं, क्योकि प्रबंधन में से कोई भी हमें कुछ नहीं बता रहा है।”
कपिल सिब्बल के लिए लिखे गए इस संदेश में कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी, प्रकाश जावडेकर, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, शेखर गुप्ता और भाजपा को भी टैग किया गया है।
प्रकाश नाम के युवक द्वारा शेयर किए गए इस संदेश को 3 घंटों में 88 लाइक के साथ 105 बार रिट्वीट किया जा चुका है। जबकि सुशील इम्मैनुअल कोटियान नामक पत्रकार के ट्विटर अकाउंट से इस संदेश को 2 घंटे के भीतर 343 लाइक मिले हैं और 301 बार इसे रिट्वीट किया जा चुका है।
— Sushil Immanuel Kotian (@kotiansushil) July 2, 2019
कोटियान के ट्वीट पर कुछ लोगों ने उनसे सवाल भी किया है कि आखिर उन्होंने तिरंगा टीवी ज्वॉइन ही क्यों किया था, जिस पर ‘fired employee tiranga tv’ नाम के ट्विटर अकॉउंट ने जवाब देते हुए कहा है कि कपिल सिब्बल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि चैनल दो साल के लिए चलेगा, तो वह यहाँ आ गए। लेकिन अब करोड़ों कमाने के बावजूद चैलन उन्हें नियमानुसार तीन महीने की सैलरी देने से मना कर रहा है।
Kapil sibal gave assurance channel would run for two years so we all came. Now they arent even ready to pay industry norm of three months despite his earning crores. @KapilSibal@newslaundry@OpIndia_com@INCIndia@BJP4India
— Fired Employees Tiranga TV (@FiredTv) July 2, 2019
कपिल सिब्बल दरअसल तिरंगा TV में कथित तौर पर मालिकाना हक रखते हैं। साथ में वो वकील भी हैं। और कॉन्ग्रेस के नेता तो खैर हैं ही। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तो उन्होंने ‘मालिक’ सिब्बल को ही टैग करके अपनी समस्या से अवगत कराया। देखना दिलचस्प होगा कि सिब्बल अपने इस कर्मचारी को मालिक जैसा जवाब देते हैं या वकील बन इनकी समस्या को सुलझाते हैं!
दिल्ली के चाँदनी चौक पर हिंसक मजहबी भीड़ ने एक दुर्गा मंदिर पर हमला किया और तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद लोग अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस बीच, दिल्ली के फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम का एक वीडियो सामने आया है। 4 मिनट के इस वीडियो में, इमाम ने मंदिर में की गई तोड़फोड़ की घटना का उल्लेख करते हुए इसे ‘छोटा सा वाकया’ (छोटी सी घटना) बताया है। उनका कहना है कि इस छोटे से वाकये पर सियासत नहीं करनी चाहिए। इमाम ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोग मंदिर के नाम पर अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
मुफ्ती अपने इस बयान में कह रहे हैं कि मंदिर किसने तोड़ा, इसमें कितना नुकसान हुआ, इसके बारे में तो विस्तृत जाँच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। साथ ही, शाही इमाम ने यह भी कहा कि वो अपने मजहब के स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए के सदस्यों से नुकसान की भरपाई करने की अपील करते हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि बेहतर तो ये होगा कि आरडब्ल्यूए के सदस्य और स्थानीय प्रभावशाली लोग संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करके मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करें।
इमाम ने पूर्व भाजपा प्रमुख लालकृष्ण आडवाणी द्वारा रथ यात्रा का भी जिक्र किया। इमाम ने दावा किया कि जब आडवाणी की रथ यात्रा फतेहपुर मस्जिद के पास से गुजर रही थी, तब कुछ लोगों द्वारा मस्जिद पर पथराव किया गया था और नायब इमाम पर त्रिशूल से हमला किया गया था। इमाम का कहना है कि इस तरह के हमलों के बावजूद, उनके समुदाय ने शांति बनाए रखी थी और कभी प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि समुदाय विशेष ने शांतिपूर्ण बातचीत करके मुद्दों को हल किया था।
दिल्ली के चाँदनी चौक क्षेत्र में स्थित दुर्गा मंदिर में दूसरे समुदाय द्वारा की गई तोड़-फोड़ के बाद मीडिया अचानक से उपदेशक की भूमिका में आ गया है। यह नहीं पूछा जा रहा है कि इस मामले में कितने आरोपितों की गिरफ़्तारी की गई और पुलिस ने क्या एक्शन लिया? मीडिया के लिए फतेहपुरी मस्जिद के मुफ़्ती द्वारा इस घटना की निंदा करना ज्यादा मायने रखता है। मीडिया इस घटना को लेकर असदुद्दीन ओवैसी के बयान दिखाने में व्यस्त है। मंदिर में किन लोगों ने तोड़-फोड़ मचाई, प्रतिमाएँ विखंडित की और भड़काऊ नारेबाजी की- यह स्पष्ट है। लेकिन फिर भी मीडिया आज सांप्रदायिक सौहार्द की बातें चला रहा है। भाईचारे की बात करना अच्छी बात है लेकिन दो अलग-अलग मौक़ों पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा।
He is the Mufti of Fatehpuri masjid in Old Delhi and a very important leader. He’s condemned the temple attack & appealed for rebuildinghttps://t.co/BIgUJsTgZv
आगे बढ़ने से पहले एक बार पूरे घटनाक्रम पर एक नज़र डाल लेते हैं। कई ताज़ा डेवलपमेंट्स हुए हैं और आपको शुरू से अंत तक इसे समझना ज़रूरी है। दरअसल, इतना सबकुछ होने के बाद भी स्थानीय हिन्दुओं ने शांति बनाए रखी और भावनाएँ आहत होने के बावजूद अपनी तरफ से किसी भी प्रकार के विवाद को जन्म नहीं दिया, यह अच्छी बात है। चावड़ी बाज़ार के हौज काजी में स्थित मंदिर में रविवार (जून 30, 2019) की रात दूसरे समुदाय के कुछ लोग घुस आए और उन्होंने तोड़-फोड़ मचाई। उन्होंने भगवान शिव, भगवान गणेश व अन्य देवताओं की प्रतिमाओं को विखंडित कर दिया।
घटना का वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें देखा जा सकता है कि मंदिर में प्रतिमाओं के आगे लगे गिलास तक को नहीं बख़्शा गया और उसे भी तोड़ डाला गया। इसके बाद दूसरे समुदाय के लोगों ने भड़काऊ एवं उत्तेजक नारे लगाए। उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्ला कर जता दिया कि ये महज एक छोटा सा विवाद नहीं है बल्कि एक मज़हबी उन्माद से ग्रस्त होकर सुनियोजित तरीके से किया गया कार्य है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, पार्किंग को लेकर हुए झगड़े ने बड़ा रूप ले लिया और फलस्वरूप ये घटना घटी। इसके बाद सोशल मीडिया पर गिरोह विशेष के जाने-पहचाने चेहरे सक्रिय हो गए और देखिए उन्होंने क्या किया?
जैसे ही पार्किंग वाली बात सामने आई, गिरोह विशेष ने दलील देनी शुरू कर दी कि यह तो अब सांप्रदायिक घटना नहीं है, जैसा कि बताया जा रहा है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई कि पार्किंग को लेकर हुए झगड़े को सांप्रदायिक है और मज़हबी उन्माद में हुई घटना बताया जा रहा है।
दरअसल, रविवार को आस मोहम्मद ने एक दुकान के बाहर अपनी स्कूटी पार्क करनी चाही, इसके बाद ईमारत के मालिक संजीव गुप्ता ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद मोहम्मद वहाँ से चला गया लेकिन कुछ ही देर बाद वह लौट भी आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मोहम्मद के साथ उसके समाज के और भी कई लोग थे, जिन्होंने संभवतः शराब पी रखी थी। उन्होंने गुप्ता की पिटाई की। यहाँ तक ये आपसी विवाद का मामला था जिसमें मोहम्मद द्वारा अपने ईमारत के सामने स्कूटी खड़ी की जाने पर गुप्ता ने आपत्ति जताई और बदले में मोहम्मद ने ‘अपने लोगों’ के साथ मिल कर गुप्ता को मारा-पीटा।
But Jharkhand was burning after a thief, well, alleged, was allegedly beaten up and fake skull cap case came on Gurugram? And it was all communal.
लेकिन, इसके बाद जो भी हुआ, वह मज़हबी उन्माद में किया गया वही कार्य था, जो पाकिस्तान जैसे देशों में होता रहा है। इसके बाद वही किया गया, जो कश्मीर घाटी के अलगावादी और आतंक समर्थक करते हैं। शायद इस विवाद का मंदिर से कुछ लेना-देना नहीं था लेकिन जिस समय मंदिर पर आक्रमण किया गया और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डाली गई, उसी क्षण इस घटना ने मज़हबी विवाद का रूप ले लिया। और हाँ, जिस तरह ‘अल्लाहु अकबर’ कह कर आत्मघाती हमले करने वाले आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता, यही नारे लगा कर मंदिर को तोड़ने वाले लोगों का भी कोई धर्म नहीं था।
यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया। यह कोई अचानक से हुई घटना नहीं थी। व्हाट्सप्प ग्रुप में कई भड़काऊ और उत्तेजक मैसेज शेयर किए गए। इसे कई लोगों तक पहुँचाया गया। समुदाय विशेष के एक व्यक्ति को मार डाले जाने की अफवाह फैलाई गई ताकि समुदाय के भीतर एक प्रकार का गुस्सा पैदा हो। यह सब जान कर लगता है कि किसी बड़ी सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी वारदात की तैयारी चल रही थी। आज मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय सांसद डॉक्टर हर्षवर्धन ने मौके का जायजा लिया और ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा:
“आज सुबह चाँदनी चौक के लाल कुँआ स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर के दर्शन किए। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से हुई तोड़फोड़ से मन व्यथित हुआ है। मैंने स्थानीय लोगों से बात कर मामले की पूरी जानकारी ली और उन्हें आश्वस्त किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दौरे पर मेरे साथ रहे डीसीपी व अन्य पुलिसकर्मियों को मैंने मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले असामाजिक तत्त्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि दोषियों को चंद घंटों में पकड़ लिया जाएगा। सभी से धैर्य व शांति बनाये रखने की अपील करता हूँ। क्षेत्र में कोई अन्य अप्रिय घटना न घटे इसके लिए किए गए सुरक्षा बंदोबस्त की भी समीक्षा की। संसद में व्यस्तता के कारण कल क्षेत्र का दौरा नहीं कर सका लेकिन पल-पल की जानकारी लेता रहा।”
डॉक्टर हर्षवर्धन ने प्राचीन दुर्गा मंदिर में दर्शन के बाद स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों से मुलाकात कर हौज काज़ी थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विश्वास जताया कि पुलिस अपेक्षित कार्रवाई करने में कोताही नहीं बरतेगी। लेकिन, अगर हम समुदाय विशेष के संगठनों व लोगों द्वारा किए जा रहे हालिया प्रदर्शनों को गौर से देखें तो पता चलता है कि कश्मीर की पत्थरबाज़ी का ट्रेंड इसके सिर चढ़ कर बोल रहा है। अलीगढ और मेरठ में तबरेज अंसारी की हत्या के विरुद्ध प्रदर्शन के नाम पर पुलिस से झड़प की गई और पत्थरबाज़ी की गई। जब ईद के दिन दिल्ली में मस्जिद के पास कार गुज़र गई, तब पत्थरबाज़ी की गई।
क्या किसी ने भी पीड़ित संजीव गुप्ता की पत्नी का दर्द जानना चाहा? जिस तरह से मारे गए आतंकियों के परिजनों के घर कैमरा दौड़ता है, क्या गिरोह विशेष ने पीड़ित की पत्नी के बयानों को हाइलाइट किया? नहीं। अभी भी डरी-सहमी बबिता गुप्ता इसी तनाव में डूबी हैं कि उनका परिवार इस ज़हर घुले माहौल में कैसे रह पाएगा? उनके घर में शराब की बोतलें और पत्थर पड़े हुए थे। दुर्गा मंदिर गली में बचे 30 हिन्दू परिवारों के भविष्य की चिंता क्या किसी पत्रकार को है? स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तो वहाँ इलाक़े में नाममात्र हिन्दू परिवार बचे हैं और ऊपर से उनके पूजा स्थलों को भी नहीं छोड़ा जा रहा।
मंदिर में आग लगाए जाने की बात भी सामने आई है। मंदिर के पर्दों को जला डाला गया। गली के लोग अभी भी दहशत के साये में हैं लेकिन नहीं, सांप्रदायिक विवाद है ही नहीं। ये तो पार्किंग का मामला है। मंगलवार के ‘नवभारत टाइम्स’ समाचारपत्र पर ग़ौर फरमाइए- “पुरानी दिल्ली में तनाव, पर मज़हब ने सिखाया आपस में बैर न रखना“, यह ख़बर कम और ख़बर को दबाने की कोशिश ज्यादा लगती है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि मस्जिदों में अगर कोई चींटी भी चीनी खाने आ जाए तो इसे अल्पसंख्यक हितों पर हमले के रूप में प्रचारित किया जाता है। मुख्यधारा की तरह गिरोह विशेष के अन्य मीडिया संस्थानों ने भी इसे पार्किंग को लेकर हुआ तनाव बताया।
मुख्यधारा की मीडिया ने भी घटना से ज्यादा घटना को छिपाने में विश्वास जताया
गिरोह विशेष की हमेशा कोशिश यह क्यों रहती है कि किसी सामान्य घटना को भी मजहब विशेष के ख़िलाफ़ वीभत्स अपराध के रूप में पेश किया जाए और एक समाज द्वारा इस्लामी नारे लगाते हुए हिन्दू पूजा स्थलों को तोड़ डाला जाए, फिर भी उसे छिपाया जाए? सवाल दिल्ली पुलिस से भी है कि जब घटना का वीडियो पूरी तरह वायरल हो चुका था और आरोपितों की पहचान मुश्किल नहीं थी, तब भी तुरंत कोई गिरफ़्तारी क्यों नहीं की गई?
एक और सुलगता हुआ सवाल है जो सोशल मीडिया से जुड़ा है। जब एक चोर को भीड़ ने मार डाला और उसका फायदा उठाते हुए कुछेक शरारती तत्वों ने उससे जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाना चाहा तो ट्विटर पर ‘No To Jai Shri Ram’ ट्रेंड कराया गया और इसे गिरोह विशेष का ख़ासा समर्थन मिला। जरा सोचिए, अगर ‘अल्लाहु अकबर’ बोल कर निर्दोष नागरिकों को मार डालने वाले आतंकियों के ख़िलाफ़ अगर ‘No To Allahu Akbar’ ट्रेंड करने लगे तो क्या यही लोग इसे अल्पसंख्यकों की आस्था पर हमले के रूप में नहीं देखेंगे? तब यह कहा जाएगा कि मज़हब विशेष की आस्था को निशाना बना कर ‘डर का माहौल’ पैदा किया जा रहा है। बहुसंख्यक हिंदुओं के इस देश में उनके भगवान राम को नकारने वाला ट्रेंड चलाए जाते हैं, वो भी 2-4 शरारती तत्वों की हरकतों के आधार पर।
आरोपितों की पहचान छिपाई जाती है, घटना की असली वजह छिपाई जाती है, पीड़ितों की पहचान छिपाई जाती है- यह सब एक ख़ास मामले में ही क्यों होता है जब आरोपित खास मजहब के हों और पीड़ित हिन्दू हों? मज़हबी एकता और भाईचारे का सन्देश तब क्यों नहीं दिया जाता जब भीड़ द्वारा किसी चोर की हत्या कर दी जाती है मुस्लमान निकलता है तो उसे लेकर हंगामा किया जाता है? क्या पुलिस भी खास आरोपितों के मामले में अतिरिक्त एहतियात बरतती है और त्वरित कार्रवाई से हिचकती है? वहीं अगर मामले इसके उलट हो या फिर ऐसा प्रतीत हो कि मामला इसके उलट है तो तुरंत एक पब्लिक परसेप्शन बनाया जाता है और त्वरित कार्रवाई होती है। यह सब कब तक चलेगा?
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में इस्लाम नहीं कबूल करने पर एक शादीशुदा हिंदू महिला को बंधक बनाने और दो साल तक बलात्कार करने की घटना सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुज्जफर लतीफ पटेल और गुलशन शेख ने पीड़िता को जिंदा जलाने तथा उसके पिता की हत्या करने की धमकी देकर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पीड़िता के मुताबिक मुज्जफर लतीफ पटेल ने एक सड़क से गुजरते वक्त उसे जबरन रोका और उसे तथा उसके पिता को हत्या की धमकी दी। इसके बाद उसे जबरन गुलशन शेख के घर ले गया और बंधक बनाकर रख लिया।
https://youtu.be/D-of6Dt4Vxk
पीड़िता के मुताबिक इसके बाद आरोपी उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव देने लगा। दोनों आरोपी धमकी देकर बीते दो साल से उसके साथ बलात्कार कर रहे थे। जब उसने इस्लाम कबूलने की बात नहीं मानी तो गुलशन शेख ने उस पर लतीफ के साथ शादी करने का दबाव बनाया। इससे इनकार करने पर आरोपितों ने केरोसिन छिड़ककर उसे जलाने तथा उसके पिता की हत्या करने की धमकी दी।
किसी तरह पीड़िता उनके चंगुल से भागने में कामयाब रही और सीधे राहुर पुलिस स्टेशन पहुँची। राहुर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
श्रीरामपुर के पुलिस अधीक्षक राहुल मदाने ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सब-इंस्पेक्टर सतीश सिरसाथ मामले की जाँच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं और मामले की पड़ताल जारी है।
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को लगे झटके के बाद सियासी घमासान तेज होता जा रहा है और बयानबाजी का दौर चरम पर है। इस बीच वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक आनंद सिंह और रमेश जरकीहोली के विधानसभा से इस्तीफा देने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का हाथ बताया है।
सिद्धारमैया ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “इसमें अमित शाह और प्रधानमंत्री सीधे तौर पर शामिल हैं। वो ताकत और पैसे का प्रलोभन दे रहे हैं। वो इस सरकार को गिराना चाहते हैं, लेकिन वो इसमें सफल नहीं होंगे। कर्नाटक सरकार को कोई खतरा नहीं है। दोनों विधायक भाजपा में शामिल नहीं होंगे।”
Siddaramaiah on Congress MLAs Anand Singh&Ramesh Jarkiholi resign from assembly: Amit Shah is directly involved in this, PM also. They are offering power and money. They want to pull down this Govt but will not succeed. No threat to Karnataka Govt. The two MLAs will not join BJP pic.twitter.com/pNXR0iN1Ps
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (जुलाई 1, 2019) को कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के दो विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई। पहले बेल्लारी जिले के विजयनगर से कॉन्ग्रेस सांसद आनंद सिंह ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद एक और कॉग्रेस विधायक रमेश जरकिहोली ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को अपना त्यागपत्र सौंपा। उनके इस्तीफे ने एक बार फिर उन अटकलों को बल देने का काम किया कि पार्टी के अंदर बगावत शुरू हो गई है।
दोनों विधायकों के इस्तीफा देने के बाद कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने बंगलुरु में अपने आवास पर बैठक बुलाई। वहीं, कर्नाटक बीजेपी के नेता व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने मंगलवार (जुलाई 2, 2019) को कॉन्ग्रेस के दोनों विधायकों के इस्तीफे पर बात करते हुए कहा कि भाजपा का इस इस्तीफे से कोई लेना देना नहीं है । उन्होंने कहा,“मैं पहले भी कहा चुका हूँ कि 20 से अधिक विधायक गठबंधन सरकार से असंतुष्ट हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार को कमजोर करने अथवा गिराने का कोई प्रयास नहीं करेगी, लेकिन यदि सरकार स्वयं गिरती है तो इसमें वो कोई मदद नहीं कर सकते।
उत्तरप्रदेश में तीन तलाक का एक और मामला सामना आया है। यहाँ प्रदेश के सीतापुर इलाके में शराब पीने से मना करने पर बौखलाए पति ने अपनी पत्नी को तीन तलाक देकर, उसकी पिटाई की और फिर उसे घर से निकाल दिया।
मीडिया खबरों के अनुसार यह मामला सीतापुर कोतवाली लहरपुर क्षेत्र के लोखरिया पुर गाँव का है। जहाँ एक मुस्लिम महिला ने जब अपने पति को शराब पीने से रोका, तो उसे बदले में तीन तलाक कह दिया गया और साथ ही उसकी लात-घूसों व लाठी-डंडों से पिटाई भी हुई। इसके बाद उसे बेघर कर दिया गया।
शर्म करो मुस्लिम भाइयों… छोटी-छोटी बातों पर तलाक़ तलाक़ तलाक़ चिल्लाने वाले मुस्लिम समुदाय… धर्म की आड़ में महिलाओं की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करते है… https://t.co/3hYSBd4hLc
अब पीड़ित महिला अपने 2 बच्चों के साथ दर-दर भटकने के लिए मजबूर हो रखी है। उसने कोतवाली लहरपुर में शिकायत दर्ज करके न्याय की गुहार लगाई है।
हालाँकि पुलिस द्वारा मामले को दर्ज कर लिया गया है, लेकिन महिला का कहना है कि वह थाने से तभी जाएगी जब उसके पति की गिरफ्तारी होगी।
अमर उजाला की खबर के अनुसार महिला ने बताया है कि उसका पति रोज रात को नशे में बुरी तरह धुत होकर घर पहुँचता था और उसे प्रताड़ित करता था। शराब पीने की आदत से उनके घर में कलह होती थी। शुक्रवार (जून 28, 2019) की रात भी वह नशे में ही घर पहुँचा था, ऐसे में जब उसकी पत्नी ने उसे नशा करने से मना किया तो बौखलाए पति ने उसे तलाक दे दिया और मार-पिटाई करके घर से भगा दिया।