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बड़बोलेपन पर मोदी का अपने ही सांसदों पर कटाक्ष, बोले ‘छपास’ और ‘दिखास’ से बचिए

भाजपा संसदीय दल द्वारा नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा और एनडीए के संसदीय साथियों को संबोधित किया। संदेश में उन्होंने जनता के प्रति सभी उपस्थित सांसदों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया और सांसदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी आश्वासन दिया।

नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत के लोकतांत्रिक जीवन में, चुनावी परंपरा में देश की जनता ने एक नए युग का आरंभ किया है। हम सब उसके साक्षी हैं। भारत के लोकतंत्र को हमें समझना होगा। भारत का मतदाता, भारत के नागरिक के नीर, क्षीर, विवेक को किसी मापदंड से मापा नहीं जा सकता है। हम कह सकते हैं सत्ता का रुतबा भारत के मतदाता को कभी प्रभावित नहीं करता है। सत्ताभाव भारत का मतदाता कभी स्वीकार नहीं करता है।

2014 से 2019 तक देश हमारे साथ चला है, कभी-कभी हमसे दो कदम आगे चला है, इस दौरान देश ने हमारे साथ भागीदारी की है। ये देश परिश्रम की पूजा करता है, ये देश ईमान को सर पर बिठाता है। यही इस देश की पवित्रता है।

मोदी ने पार्टी के बड़बोले नेताओं पर कटाक्ष करते हुए उन्हें बड़ी नसीहत देते हुए कहा, “मैं कहता हूँ कि छपास (छपने का मोह) और दिखास (टीवी पर दिखने के मोह) से बचना चाहिए। इससे बचकर चलें तो खुद भी बचेंगे और दूसरों को भी बचाएँगे। कुछ लोग बड़बोलेपन में कुछ भी बोल देते हैं। मीडिया के लोगों को भी पता होता है कि यह 6 नमूने है, उनके घर के पास पहुँच जाओ कुछ भी बोलेगा।

मोदी ने कहा, “मेरे जीवन के कई पड़ाव रहे, इसलिए मैं इन चीजों को भली-भांति समझता हूँ, मैंने इतने चुनाव देखे, हार-जीत सब देखे, लेकिन मैं कह सकता हूँ कि मेरे जीवन में 2019 का चुनाव एक प्रकार की तीर्थयात्रा थी।”

2019 का चुनाव समता और ममता के भाव से सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बन गया: नरेंद्र मोदी

“मुझे संसदीय दल का नेता चुनने के लिए बीजेपी और एनडीए के सभी सांसदों का धन्यवाद” भारत के संविधान को प्रणाम करने के बाद इन्हीं शब्दों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने भाषण की शुरुआत की। भाजपा संसदीय दल द्वारा नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा और एनडीए के संसदीय साथियों को संबोधित किया। संदेश में उन्होंने जनता के प्रति सभी उपस्थित सांसदों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया और सांसदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत केंद्रीय और राज्य के चुनाव आयोग और सुरक्षाबलों का इस चुनाव के आयोजन के लिए धन्यवाद के साथ की। नरेंद्र मोदी ने कहा, “सेंट्रल हॉल की यह घटना असामान्य घटना है। हम आज नए भारत के हमारे संकल्प को एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने के लिए एक नई यात्रा को यहाँ से आगे बढ़ाने वाले हैं”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की कुछ प्रमुख बातें

  • आज एनडीए के सभी वरिष्ठ साथियों ने मुझे आशीर्वाद दिया है। आप सबने मुझे नेता के रूप में चुना है, मैं इसे व्यवस्था का हिस्सा मानता हूँ। मैं भी आपमें से एक हूँ, आपके बराबर हूँ, हमें कंधे से कंधा मिलाकर चलना है।
  • भारत के लोकतंत्र को हमें समझना होगा। भारत का मतदाता, भारत के नागरिक के नीर, क्षीर, विवेक को किसी मापदंड से मापा नहीं जा सकता है। हम कह सकते हैं सत्ता का रुतबा भारत के मतदाता को कभी प्रभावित नहीं करता है। सत्ताभाव भारत का मतदाता कभी स्वीकार नहीं करता है।
  • विनोबा भावे कहते थे कि चुनाव बाँट देता है, दीवार खड़ी कर देता है, लेकिन 2019 के चुनाव ने सभी दीवारें गिरा दी हैं।
  • विश्वास की डोर जब मजबूत होती है तो प्रो-इनकम्बेंसी की लहर चलती है।
  • पूरी दुनिया में भारतीयों ने विजय उत्सव मनाया।
  • देश की राजनीति में जो बदलाव आया है, आप सभी ने इसका नेतृत्व किया है। आप सभी का अभिनंदन, लेकिन जो सदस्य पहली बार चुनकर आए हैं उनका विशेष अभिनंदन है।
  • जनप्रतिनिधियों के लिए कोई पराया नहीं हो सकता, दिलों को जीतने जीतने की कोशिश करें।
  • आम तौर पर चुनाव बाँट देता है, दूरियाँ पैदा करता है, दीवार बना देता है, खाई पैदा कर देता है। लेकिन 2019 के चुनाव ने दीवारों को तोड़ने का काम किया है। दिलों को जोड़ने का काम किया है।
  • 2019 का चुनाव सामाजिक एकता का आंदोलन बन गया, समता भी, ममता भी, समभाव भी, ममभाव भी। इस वातावरण ने इस चुनाव को एक नई ऊँचाई दी।

परिणाम के एक दिन बाद ही तृणमूल के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी

लोकसभा चुनाव खत्म होने और नतीजे सामने आने के बाद भी पश्चिम बंगाल में हिंसा लगातार जारी है। जानकारी के अनुसार, नादिया में भाजपा के एक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने इस खबर को साझा करते हुए इस हत्या का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की इस रक्त और हिंसा की राजनीति का जवाब जनता मौजूदा सरकार को जड़ से उखाड़ कर देगी। बीजेपी बंगाल के ट्विटर ने भी यही आरोप लगाया है कि भले ही चुनाव खत्म हो गया है, लेकिन टीएमसी द्वारा जारी हिंसा से कोई राहत नहीं मिली है।

खबर के अनुसार, जिस भाजपा कार्यकर्ता संतु घोष की गोली मारकर हत्या की गई है, वो हाल ही में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। ये घटना शुक्रवार (मई 24, 2019) की रात की है। गोली लगने के बाद संतु घोष को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पिछले कई सालों से भाजपा कार्यकर्ता की हत्या के मामले सामने आते रहे हैं। 23 मई की शाम, चुनाव नतीजों के ठीक बाद भी बीजेपी कार्यकर्ताओं को पीटने की घटना की सामने आई थी। चुनावों के अंतिम चरण के एक रात पहले भी भाजपा नेता अर्जुन सिंह को टीएमसी के गुंडों ने गोली मार दी थी। इस दौरान बम भी फेंके गए और दो वाहनों में आग भी लगा दी गई। पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान व्यापक हिंसा के बाद, चुनाव आयोग को राज्य में सातवें चरण के चुनाव के लिए चुनाव प्रचार के समय सीमा में कटौती करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े।

लोकसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली बीजेपी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल और केरल में मारे गए कार्यकर्ताओं को जीत समर्पित की थी।

दुष्प्रचार से बाज नहीं आ रहा The Wire, समुदाय विशेष के मोदी-समर्थक लोगों को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश

मोदी की भीमकाय जीत से शायद विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने सबक ले लिया है (शायद इसीलिए अब तक किसी ‘सेक्युलर’ पार्टी ने इफ्तार पार्टी नहीं दी है), लेकिन द वायर जैसे प्रपोगंडाबाजों ने न सुधरने की कसम खा रखी है। पहले पाँच साल न केवल यह समाचार प्रपोगंडा पोर्टल मोदी को गाली देता रहा बल्कि लोगों को यह भी फुसफुसाता-उकसाता रहा कि भाजपा और मोदी को वोट देने वालों का सामाजिक  बहिष्कार किया जाना चाहिए। हिन्दुओं पर जब इसका असर नहीं हुआ, और भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापिस है, तो अब यही सोशल मॉब-लिंचिंग मोदी-समर्थकों की करने की कोशिश हो रही है ताकि उन्हें चुप कराया जा सके, और समुदाय विशेष को डराना बदस्तूर जारी रहे।

वह महिलाएँ केवल अपनी नहीं, कम-से-कम समुदाय के 70,000 लोगों की प्रतिनिधि हैं  

द वायर के इस गंदले प्रपोगंडे में केवल एक बात तथ्य के आधार पर काटे जाने लायक है, और वह उनका यह दावा कि जिन दो महिलाओं पर उन्होंने यह लेख लिखा, वह अपने अलावा समुदाय के वाराणसी के किसी आदमी की नुमाइंदगी नहीं करतीं। इसका जवाब यूँ दिया जा सकता है:

बनारस में इस बार कुल 10 लाख के करीब वोट पड़े, जिसमें से 6.74 लाख मोदी के खाते में गए। बनारस में समुदाय विशेष का जनसांख्यिक अनुपात करीब 30 प्रतिशत है। यानि वोट देने वालों में लगभग तीन लाख मजहब विशेष से थे। अब, लोकसभा निर्वाचन की घोषणा के पहले, लोकनीति-सीएसडीएस ने एक सर्वेक्षण किया था जिसमें समुदाय के 26 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार को एक और कार्यकाल दिए जाने से सहमति जताई थी। इसे अगर बनारस की समुदाय विशेष की संख्या पर लागू करें तो कम-से-कम 70,000 की संख्या बनती है मजहब के मोदी-समर्थकों की। यानि वह महिलाएँ 70,000 लोगों की नुमाइंदगी कर रहीं थीं।

और सत्तर हजार लोगों की नुमाइंदगी को, उनकी आवाज़ और उनके मत को सिरे से ख़ारिज करने के लिए वायर केवल समुदाय के दो लोगों की बात सामने रखता है, और उसके आधार हेडलाइन बना देता है कि यह दो मोदी-समर्थक मजहबी महिलाएँ मीडिया का बनाया शिगूफा हैं। लेकिन बात केवल 70,000 बनाम 2 जितनी सीधी नहीं है। अगर लेख को पढ़ेंगे- और सरसरी निगाह की बजाय ध्यान से पढ़ेंगे, तो पंक्तियों के बीच में स्टॉकिंग, धमकी, सब दिखेंगे, ‘फैक्ट्स’ के आवरण में, धमकियों की तलवार subtext में लिए

खोजी पत्रकारिता के नाम पर स्टॉकिंग

यह सच है कि कई बार खोजी पत्रकारिता और किसी के निजी जीवन में बेजा ताक-झाँक में अंतर बताना मुश्किल हो जाता है, लेकिन द वायर इस लाइन के इर्द-गिर्द नहीं टहलता, बल्कि मर्यादा की सीमा तोड़कर मीलों आगे निकल जाता है। शुरुआत होती है ANI के वीडियो में दिखाई जा रही दो महिलाओं के वर्णन से, जो भाजपा की मजहब विशेष में सुधारवादी नीतियों का बखान करतीं दिखीं थीं मार्च 2017 में। और फिर वायर उनके एक-एक ‘पाप’, जैसे ट्रिपल तलाक से बचने के लिए हनुमान चालीसा पढ़ना, मोदी के लिए राखी बनाना, राम आरती करना, आदि का ‘कच्चा चिट्ठा’ खोल के रख देता है।

यही नहीं, बनारस में उनके घर पहुँचने के लिए किस मोहल्ले जाकर किससे पूछना होगा, इसकी भी विस्तृत जानकारी इस आलेख में है। यह पत्रकारिता नहीं है- स्टॉकिंग है। उनके जरिए मोदी का खुल कर समर्थन करने वाले लोग समुदाय में बढ़ रहे तबके को यह चेतावनी है कि संभल जाओ, मुँह बंद कर लो, वरना तुम्हारा भी पता कट्टरपंथियों को दे देंगे। यह ‘डॉक्सिंग’ का ऑफलाइन संस्करण है। इसी आवरण में लिपटी गुंडागर्दी को नंगा करते हुए ANI की सम्पादिका स्मिता प्रकाश ने ट्वीट कर सवाल उठाए, और उन मजहबी महिलाओं के निजी और सामाजिक जीवन में हस्तक्षेप को ललकारा:

नैरेटिव जर्नलिज़्म का दुरुपयोग  

कहने को कोई कह सकता है कि यह सब तो मामूली बातें हैं- वह महिलाएँ आख़िरकार समुदाय विशेष के लगभग तीस प्रतिशत लोगों वाले बनारस में रहतीं ही हैं, उनकी गतिविधियाँ आखिर ANI समेत कई समाचार माध्यमों में चल ही रहीं थीं, तो वायर के लिख देने से क्या बदल गया? तो साहब, जवाब होगा कथानक, यानि नैरेटिव। नैरेटिव बदला। अब तक मीडिया में इन महिलाओं की चर्चा हो रही थी सम्मानजनक रूप से, इन्हें प्रशासनिक से लेकर सामाजिक समर्थन प्राप्त था। और इसी ताकत के दम पर न केवल वे मजहब में, समुदाय विशेष में सकारात्मक बदलाव की वाहक बन रहीं थीं बल्कि उनकी बढ़ती सामाजिक शक्ति और प्रभाव को देखते हुए उनसे नहीं जुड़े समुदाय के लोगों में भी यह संदेश जा रहा था कि वक्त बदल गया है, अगर ताकत चाहिए, देश-समाज से लेकर गली-मोहल्ले तक अगर प्रभावशाली बनना है तो आगे की राह कट्टरपंथ और मदरसों से नहीं, आधुनिक शिक्षा और देशभक्ति के चौराहों से होकर गुजरती है। द वायर ने इसके ठीक उल्टा संदेश दिया।

बिना कुछ बोले, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर ऐसा कपटी ताना-बाना बुना कि पढ़ने पर पहली बारगी में यह महिलाएँ कोई समुदाय विशेष की बच्चियों (और बच्चों) को शिक्षा देने, बाल-मजदूरी और बाल-विवाह से बचाने, ट्रिपल तलाक से लड़ने वाली सुधारक नहीं, भाजपा और संघ के तलवे चाटने वाली कठपुतलियाँ प्रतीत होतीं हैं। यही नैरेटिव जर्नलिज़्म की ताकत है- बिना अपने मुँह से झूठ बोले सामने वाले के मन में अपना एजेंडा बैठा देना, किसी को हिंसा के लिए उकसा देना तो किसी को धमका देना कि जब चाहें ऐसा ही कुछ लिख देंगे कि शहर भर के नाराज मजहबी भीड़ तुम पर टूट पड़ेगी।

लेकिन द वायर यह भूल रहा है कि ‘ये नया भारत है’ केवल एक सियासी नारा भर नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत है- और मोदी को टूट कर मिला वोट इस बदलाव की केवल एक बानगी है। हिन्दू तो अब बदल ही रहा है, बदल गया है बल्कि, और उनमें भी सुधारवादी आवाज़ें, प्रगतिशील आवाज़ें अब वायर द्वारा सामाजिक-बौद्धिक रूप से, और उसके माई-बापों द्वारा आर्थिक रूप से, पाले जाने वाले मुल्ला-मौलवियों, कट्टरपंथियों की गुलामी और नहीं सहेंगी। इस नए भारत में नफरती चिंटुओं और अनर्गल प्रलाप वाली पत्रकारिता नहीं चलेगी, फर्जी भय का नैरेटिव भी नहीं चलेगा, सो बेहतर होगा वायर प्रपोगंडाबाजी छोड़ या तो सच्चाई प्रतिबिम्बित करने वाली पत्रकारिता सीखने की जहमत उठाए, या दुकान समेटने की तैयारी करे- और यह subtext में छुपी धमकी नहीं, नेक नीयत वाली सलाह है।

दूसरे समुदाय के समर ने भाईयों संग लात-घूँसे, सरिये से कपड़ा व्यापारी को पीटा, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो समुदायों के बीच आपसी विवाद होने की ख़बर सामने आई है। यह घटना भगत सिंह नामक मार्केट में एक कपड़े की दुकान की है, जहाँ आधा दर्जन समुदाय विशेष के लोगों ने कपड़ा व्यापारी की जमपर पिटाई की है। उनकी गुंडागर्दी इस क़दर बढ़ गई कि उन्होंने कपड़ा व्यापारी और सेल्समेन को पीटने के लिए लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो UttarPradesh.ORG के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया, जो अब वायरल हो चुका है।

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, यह घटना लोकसभा चुनाव की मतगणना के पहले दिन बुधवार की रात की है। किसी पुराने विवाद को मुद्दा बनाकर दूसरे सम्प्रदाय के लोग कपड़ा व्यापारी की दुकान में जबरन घुसे और फिर लोहे की सरियों और लात-घूँसों से व्यापारी और दुकान में उपस्थित सेल्समैन के साथ मारपीट शुरू कर दी। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करवाया।

एक अन्य ख़बर के अनुसार, भगत सिंह मार्किट में देव कलेक्शन के नाम से देवराज की कपड़े की दुकान है। इस दुकान पर सचिन नाम का एक लड़का काम करता है। किसी बात को लेकर सचिन और दूसरे समुदाय के समर से विवाद हो गया और बात मार-पिटाई तक पहुँच गई। अगले दिन समर अपने भाईयों के साथ उसी दुकान में जा पहुँचा और गुंडागर्दी शुरू कर दी। इस बीच बीच-बचाव के लिए आगे आए अन्य व्यापारियों को भी समर और उसके भाईयों ने मारा-पीटा।

घटना का एक वीडियो शुक्रवार (24 मई) को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। मारपीट की इस घटना से पूरे क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल बना हुआ है। घटनास्थल पर पुलिस के पहुँचने से पहले ही हमलावर वहाँ से भाग गए। सीओ कोतवाली दिनेशचंद्र मिश्रा ने बताया कि मामला दो पक्षों में आपसी विवाद का है। फ़िलहाल, पुलिस ने इसकी जाँच शुरू कर दी है और साथ ही वहाँ पीएसी और पुलिस की तैनाती भी कर दी है।

Breaking News: NDA संसदीय दल के नेता चुने गए नरेंद्र मोदी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी संसदीय दल के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव का राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने समर्थन किया। इसके बाद औपचारिक रूप से अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने जाने की घोषणा की।

बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने पार्टी संरक्षक लालकृष्ण आडवाणी से आशीर्वाद लिया।

लोकसभा चुनाव में एनडीए को ऐतिहासिक बहुमत मिला है। एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। जानकारी के मुताबिक, नरेंद्र मोदी 30 मई को शपथ ले सकते हैं। शपथ से पहले पीएम अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाएँगे, लेकिन उससे पहले वह अपने गृह राज्य गुजरात जाएँगे। यहाँ मोदी अपनी माँ से जीत का आशीर्वाद लेने भी जाएँगे। इससे पहले शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंपा था। इस इस्तीफे को राष्ट्रपति कोविंद ने मंजूर कर लिया और लोकसभा को भंग कर दिया। राष्ट्रपति ने 16वीं लोकसभा भंग कर दी है।

इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए एनडीए गठबंधन के सभी दलों के नेता पहुँचे हैं। अमित शाह, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह समेत सभी नेता मौजूद हैं।

यह बैठक संसद के सेंट्रल हॉल में शाम 5 बजे शुरु हुई। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा 303 सीटें मिली हैं और राजग (एनडीए) गठगबंधन को 353 सीटें हासिल हुई है। बैठक में शामिल होने के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी पहुँचे।

लोकसभा चुनाव में करारी हार से दुखी ममता बनर्जी ने की इस्तीफे की पेशकश

लोकसभा चुनाव नतीजों में टीएमसी की करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वो अब मुख्यमंत्री के रूप में कार्य जारी नहीं रखना चाहती हैं और पार्टी अध्यक्ष के रुप में अपनी सेवा देना चाहती हैं।

ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की पेशकश कर दी है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने यह निर्णय लिया है। हालाँकि, खबरों के मुताबिक ममता बनर्जी की इस्तीफा बैठक में स्वीकार नहीं किया गया है।
टीएमसी पार्टी की आपात बैठक में ममता बनर्जी ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बल ने उनके खिलाफ कार्रवाई की, एक आपात स्थिति पैदा की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम के बीच भेदभाव किया गया साथ ही वोटों की हेराफेरी हुई। ममता दीदी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत की, लेकिन कोई भी कदम नहीं उठाया गया।

बता दें कि भाजपा ने इस चुनाव में बंगाल में बड़ी सेंध लगाई है और 42 में से 18 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। इस हार की वजह से ममता बनर्जी बौखलाई हुई हैं।

Fact Check: राहुल गाँधी ने साढ़े 8 लाख वोट से जीतकर 542 सीटों में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड बनाया?

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आ चुके हैं। जनता कॉन्ग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गाँधी को खदेड़कर भगा चुकी है, लेकिन लग ये रहा है कि जनता के सन्देश को कॉन्ग्रेस अभी भी स्वीकार कर पाने में असमर्थ है। इसीलिए अभी भी कॉन्ग्रेस की आई टी सेल और व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी अपने युवराज को मसीहा बनाने के कार्यक्रम में तत्परता से जुटी हुई है।

दावा : राहुल गाँधी की जीत 542 सीटों में सबसे बड़ी जीत है

लोकसभा चुनाव 2019 में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी जहाँ उत्तर प्रदेश के अमेठी सीट पर स्मृति इरानी से हार गए, वहीं केरल की वायनाड सीट पर उन्हें लाखों वोट से जीत मिली। हालाँकि, अब सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि राहुल गाँधी को वायनाड से 8 लाख 54 हजार 297 वोटों से जीत मिली है, जो कि लोकसभा की 542 सीटों में सबसे बड़ी जीत है।

फेसबुक पेज ‘Ramesh Sharma, Sanganer’ पर 24 मई को राहुल गाँधी की एक फोटो पोस्ट की गई, जिसके साथ कैप्शन लिखा गया, “कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी वायनाड से रिकॉर्ड 8 लाख 54 हजार 297 वोट से जीते। 542 सीटों में से ये सबसे बड़ी जीत है।”

यही पोस्ट फेसबुक पर राहुल गाँधी के भक्तों द्वारा बड़ी मात्रा में शेयर किया जा रहा है ताकि चुनाव में हुई फजीहत के बीच राहुल गाँधी की लहर को जैसे-तैसे कायम किया जा सके।

क्या है सच?

सोशल मीडिया पर किए जा रहे इस रिकॉर्ड के दावे की सच्चाई ये है कि ना तो राहुल गाँधी 542 सीटों में से सबसे ज्यादा मार्जिन से जीतने वाले नेता हैं और न ही उन्होंने वायनाड में 8 लाख 54 हजार 297 वोटों से जीत हासिल की है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, केरल की वायनाड सीट पर राहुल गाँधी को कुल 7 लाख 6 हजार 367 वोट मिले हैं। इनमें से 7 लाख 5 हजार 34 EVM वोट हैं और 1333 पोस्टल वोट। राहुल गाँधी को कुल वोट का 64.67% मिला है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रत्याशी को 25.14% वोट मिले।

रही बात रिकॉर्ड की तो लोकसभा चुनाव 2019 में गुजरात के नवसारी सीट से बीजेपी के प्रत्याशी सीआर पाटिल को सबसे ज्यादा 9 लाख 69 हजार 430 वोट मिले हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पटेल धर्मेशभाई भीमाभाई को 6 लाख 89 हजार 668 वोट से हराया है। सीआर पाटिल को कुल वोट का 74.37% हासिल हुआ।

निष्कर्ष

राहुल गाँधी के भक्तों द्वारा सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे में कोई लहर नहीं है। पूरे देश में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाला दावा पूरी तरह गलत है। 542 सीटों पर हुए चुनाव में सबसे ज्यादा वोट बीजेपी प्रत्याशी सीआर पाटिल को मिले हैं।

केजरीवाल के हारने की ‘खुशी’ में हुआ भंडारे का आयोजन, लोगों ने कहा Amazing!

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों ने भाजपा और उसके सहयोगी दलों को छोड़कर लगभग हर राजनैतिक पार्टी को निराश किया। बिहार से लेकर बंगाल तक कई नेताओं की जमानत जब्त हो गई। यही हाल आम आदमी पार्टी के नेताओं का भी हुआ। दिल्ली और पंजाब मिलाकर आम आदमी पार्टी को सिर्फ़ एक सीट मिली। लोगों के मुताबिक पार्टी की ये दशा केजरीवाल के घमंड के कारण हुई है।

दिल्ली से लेकर पंजाब में लोगों के भीतर उनके प्रति कड़ी नाराज़गी देखने को मिलती थी। जनता को तो छोड़ दीजिए उनकी अपनी पार्टी के नेता ही उनके रवैये के कारण उनसे मुँह मोड़ने लगे थे। केजरीवाल के प्रति गुस्सा सोशल मीडिया पर तो देखने को मिलता ही था लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा था कि केजरीवाल से जनता इतनी खिन्न है कि उनकी हार की खुशी में भंडारा करवा देगी।

जी हाँ! दिल्ली में केजरीवाल की हार पर भंडारे का आयोजन किया गया। सोशल मीडिया पर जैसे ही एक यूजर ने इस भंडारे की तस्वीर को ट्वीट किया बाकी लोगों ने मजे लेने शुरू कर दिए। भंडारे के पोस्टर पर लिखा था कि दिल्ली व पंजाब के मतदाताओं ने केजरीवाल के घमंड को किया चकनाचूर।

पोस्टर के मुताबिक भंडारे का आयोजन कराने वाली समाज सेविका सिमरनजीत कौर बेदी हैं। हालाँकि सिर्फ़ इस पोस्टर से भंडारे के आयोजन की खबर की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं होती है, लेकिन तस्वीर को देखते ही सोशल मीडिया पर लोग इसपर चुटकी ले रहे हैं। पोस्टर में केजरीवाल के भ्रष्ट होने के मामले को उठाया गया है। इसमें लिखा है कि भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर दिल्ली की सत्ता में आए केजरीवाल खुद भ्रष्ट हो गए हैं।

इस ट्वीट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। किसी ने कहा कि भंडारे का प्रसाद केजरीवाल को जरूर पहुँचा देना। तो किसी ने केजरीवाल के शब्दों को रिट्वीट कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था, “Just amazing response. Unbelievable. कुछ अद्भुत ही हो रहा है। Its all divine” इस पोस्ट पर अभी तक 273 रिट्वीट हो चुके हैं और हजार से ज्यादा लोगों ने इसे लाइक किया है।

EVM 100% सही पाए गए: 20,625 VVPAT से मिलान करने पर कोई गड़बड़ी नहीं

लोकसभा चुनाव-2019 के दौरान EVM की विश्वसनीयता पर भी विपक्षी दलों की तरफ से कई सवाल उठाए जा रहे थे। लगभग सभी विपक्षी दलों ने अपनी हार के लिए EVM को ही मुख्य दोषी बताने की कोशिश की थी। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों की मिलान की माँग भी की थी।

बता दें कि सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के अनुसार, 20,625 वीवीपैट में से एक में भी EVM मशीन के मिसमैच होने की कोई सूचना नहीं मिली। इस साल लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ मतदाताओं को अपना मत देना था, जिसके लिए चुनाव आयोग ने कुल 22.3 लाख बैलेट यूनिट, 16.3 लाख कंट्रोल यूनिट और 17.3 लाख वीवीपैट का उपयोग किया था।

इस बार सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, 17.3 लाख वीवीपैट में से 20,625 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान किया गया। जबकि पिछली बार महज 4125 वीवीपैट का ही ईवीएम से मिलान किया गया था। चुनाव आयोग के आँकड़ों से स्पष्ट है कि ईवीएम और वीवीपैट का मिलान पूरी तरह से सही निकला और विपक्ष की शंका गलत साबित हुई है।

बता दें कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने हर लोकसभा सीट के कम से कम 5 पोलिंग बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट के मिलान की व्यवस्था का आदेश दिया था। ईवीएम में पड़े वोटों की सही जानकारी और रिकॉर्ड के लिए वीवीपैट की व्यवस्था 2013-14 में शुरू की गई थी।

बता दें कि देश की 543 में से 542 लोकसभा सीटों पर चुनाव सम्पन्न कराए गए थे जबकि एक सीट (वेल्लोर) पर धन बल के अत्यधिक इस्तेमाल को देखते हुए चुनाव रद्द कर दिया गया था। वेल्लोर सीट पर अभी चुनाव की नई तारीख की घोषणा आयोग ने नहीं की है।

वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल तीन 3 जून 2019 को समाप्त हो रहा है। इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार (मई 24, 2019) को 16वीं लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर दी है। नए सदन का गठन 3 जून से पहले हो जाना चाहिए।