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मोदी सरकार की वापसी से झूमा शेयर बाज़ार, सेंसेक्स 40000 के पार

सेंसेक्स की तेज़ रफ़्तार पीएम मोदी के जीत का स्वागत करती नज़र आ रही है। शुरूआती रूझानों में बीजेपी को बहुमत मिलते देख सेंसेक्स 40,000 के लेवल को पार कर गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब सेंसेक्स ने 40,000 के लेवल को पार किया है, वहीं निफ़्टी पहली बार 12,000 के लेवल को पार कर चुका और बीएसई के मिडकैप और स्मालकैप में 1 फ़ीसदी की बढ़त हुई है। सेंसेक्स में 600 अंकों से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है, इससे बाज़ार में ख़ुशी की लहर देखी जा रही है।

कल (22 मई) सेंसेक्स 140 अंको की बढ़त के साथ 39,110 और निफ़्टी क़रीब 20 अंको की बढ़त के साथ 11,737 के स्तर पर बंद हुआ था।

बता दें कि बीते रविवार (19 मई) को एग्जिट पोल के नतीजे आए थे। इनमें मोदी सरकार की वापसी की उम्‍मीद जताई गई थी। इसके बाद सोमवार को सेंसेक्‍स 1421 की बढ़त के साथ 39,352 के स्‍तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 421 अंक मज़बूत होकर 11,828 के स्‍तर पर रहा। निफ्टी में यह एक दिन में अंकों के हिसाब से दूसरी सबसे बड़ी तेजी थी। वहीं, सेंसेक्‍स 10 साल के उच्‍चतम स्‍तर की बढ़त पर बंद हुआ था। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी सरकार की वापसी के संकेतों के बाद बाज़ार ने पिछले 10 वर्षों की लंबी छलांग लगाई।

2014 में चुनावी नतीजों वाले भी दिन भी हुआ था इज़ाफ़ा

वहीं, अगर साल 2014 के चुनावी नतीजों वाले दिन की बात करें बात करें तो शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,470 अंकों की जबरदस्त उछाल के साथ 25,375 के स्तर पर पहुँच गया था। हालाँकि, बाद में बिकवाली की वजह से मार्केट की चाल सुस्‍त पड़ गई और सेंसेक्स 23,873.16 के स्तर पर पहुँच गया था। दिन में कारोबार के अंत में निवेशकों की पूंजी में 1 लाख करोड़ का ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ था और यह 80.64 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया था।

2004 में, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी के दूसरे कार्यकाल की उम्मीद नज़र आ रही थी, उस दौरान भी बाज़ारों में बढ़त देखी गई थी, लेकिन परिणाम सामने आने के तुरंत बाद ही बाज़ार में गिरावट आ गई थी।

जीत की सुनामी का जश्न: पीएम मोदी के आवास पर पहुँचेंगे 20000 BJP कार्यकर्ता

लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना जारी है। मतों की गिनती के साथ ही अब स्थिति लगभग साफ हो चुकी है। बीजेपी प्रचण्ड बहुमत से सत्ता बनाए रखने में सफल रही है। लोकसभा चुनाव के बाद हुए एग्जिट पोल्स में लगभग सभी ने भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर दिखाया था। और अब विपक्ष की तमाम दलीलों के बाद भी पिक्चर स्पष्ट है।

परिणाम से उत्साहित भाजपा नेताओं ने पार्टी की जीत सुनिश्चित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर भव्य स्वागत के लिए 20,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को स्वागत और जीत का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया है। इसके आलावा पार्टी मुख्यालय में भी भव्य जश्न की तैयारी की गई है।

इसके आलावा इस बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी के ममता के गढ़ में सेंध लगाने पर भी ज़बरदस्त उत्साह का माहौल है।

बता दें कि पार्टी ने सभी विजेता प्रत्याशियों को 25 मई तक दिल्ली में उपस्थित होने के लिए भी कहा है। लगभग सभी मीडिया संस्थानों के एग्जिट पोल्स में भाजपा नीत राजग गठबंधन को 542 लोकसभा सीटों में से 300 से अधिक सीटों पर जीत हासिल होने का अनुमान लगाया गया था। कुछ एग्जिट पोल में 350 से भी अधिक सीटों का अनुमान लगाया गया था। और बीजेपी इस लक्ष्य के करीब पहुँचती जा रही है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मीटिंग में कहा था कि भाजपा दूसरी बार सरकार बनाएगी, वह भी पूर्ण बहुमत के साथ। भाजपा को यह जीत उसके बीते पाँच सालों के विकास कार्यों के बदौलत हासिल हुई है।

आज जब जीत का आँकड़ा धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। बीजेपी की धमाकेदार इंट्री हो रही है। लेकिन सबसे मजेदार दौर देखने को मिला जब EVM राग छेड़कर महागठबंधन से लेकर लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने हार के प्रति वो कितने आश्वस्त हैं, इसका परिचय दिया।

मतगणना के दौरान हुई हिंसा, तो उपेंद्र कुशवाहा होंगे जिम्मेदार: बिहार पुलिस

लोकसभा चुनाव के लिए डाले गए वोटों की गिनती जारी है। इस दौरान किसी तरह का कोई उपद्रव न हो, इसके लिए पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पुलिस मुख्यालय ने बिहार के सभी जिलों के एसपी को अलर्ट भेजा है। इसके साथ ही बुधवार (मई 22, 2019) को एडीजी कुंदन कृष्णन ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के हिंसा भड़काने वाले विवादास्‍पद बयान की जाँच हो रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस कुशवाहा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी और अगर इस बयान से किसी तरह की हिंसा हुई, तो इसके जिम्मेदार उपेंद्र कुशवाहा होंगे।

गौरतलब है कि एग्जिट पोल सामने आने के बाद महागठबंधन में बौखलाहट चरम पर दिखा। रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार (मई 21, 2019) को पटना में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बयान देते हुए कहा था कि बूथ लूट के बाद रिजल्ट लूट की तैयारी है। अगर ऐसा हुआ, तो सड़कों पर खून बह सकता है। उन्होंने आम जनता व अपने नेताओं से अपील करते हुए कहा कि रिजल्ट लूट को रोकने के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठा लें। उनके इस बयान पर एक तरफ जहाँ राजनीतिक महकमे में बवाल मचा हुआ है, तो वहीं अब पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया है।

जानकारी के मुताबिक, कुशवाहा के इस विवादित बयान के समर्थन में उतरे भभुआ के पूर्व विधायक और लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने हथियार लहराते हुए यहाँ तक कह दिया था कि वो लोकतंत्र को बचाने के लिए गोली चलाने को तैयार हैं। उन्हें बस महागठबंधन के नेता के आदेश का इंतजार है। पुलिस ने इस मामले पर भी संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया है और रामचंद्र के कैमूर स्थित आवास पर छापा मारा। इस दौरान रामचंद्र द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में लहराए गए हथियार को बरामद कर लिया गया, लेकिन वो घर पर नहीं मिले।

इस मामले में एडीजी कृष्णन ने कहा कि उनके पास बंदूक का लाइसेंस है या नहीं, इसके जाँच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उसका हथियार अवैध पाया जाता है, तो उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा और हथियार जब्त करने के साथ ही लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

केक, कमल बर्फी और लड्डू के साथ मनाया जाएगा BJP कार्यालय में जश्न

रुझान आने के साथ ही चुनाव के नतीजों की तस्वीर साफ़ होती जा रही हैं। खबरों के मुताबिक देश में एक बार फिर से मोदी सरकार आने वाली है। इसके अलावा भाजपा भी लंबे समय से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। यही कारण है कि नतीजे आने से पहले ही भाजपा ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए कुछ खास तैयारियाँ की हैं।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक पार्टी के सह प्रभारी नीलकांत बख्शी ने बताया कि पंत मार्ग स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय के अंदर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगवाई गई है। जीत को सेलीब्रेट करने के लिए बंगाली मार्केट की मशहूर बंगाली पेस्ट्री शॉप से खास केक और लड्डू बनवाए जा रहे है। 7 किलो का बड़ा केक बनने का ऑर्डर दिया गया है।

खबर के मुताबिक परिणाम घोषित होने के बाद मनोज तिवारी इस 7 किलो के केक को लेकर पार्टी के मुख्यालय पहुँचेंगे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस केक को काटेंगे। इसके अलावा इसी तरह के 4-5 किलो के 9 केक और बनवाए जा रहे हैं। इन्हें भी प्रदेश के कार्यालय में काटा जाएगा।

पार्टी प्रवक्ता प्रवीण कुमार के अनुसार चांदनी चौक की मशहूर स्वीट शॉप से विशेष प्रकार की 50 किलो कमल बर्फी बनाने का ऑर्डर भी दिया गया है। इस बर्फी की खासियत होगी कि इसका आकार पार्टी के चुनाव चिह्न कमल फूल की तरह होगा। इसका रंग केसरिया और हरा रंग होगा। इस मिठाई को चांदनी चौक के व्यापारियों के बीच बाँटा जाएगा।

वोटों की गिनती से पहले कॉन्ग्रेस ने की थी EVM, गाँधी और अम्बेदकर की पूजा

आज (गुरुवार 23 मई, 2019) को लोकसभा निर्वाचन के वोटों की गिनती शुरू होने से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने EVM, गाँधी और अम्बेदकर की पूजा की। रिपब्लिक के हवाले से खबर है कि राहुल गाँधी के घर में निर्वाचन जीतने के लिए हवन किया गया।

हवन में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा, उनका सुपुत्र रेहान, सोनिया गाँधी उपस्थित रहे। सभी ने भारतीय संविधान के पिता कहे जाने वाले बाबासाहेब भीमराव अम्बेदकर के चित्र और ईवीएम के चित्र की पूजा की और प्रार्थना की कि इस हवन के द्वारा हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे ईवीएम पर कृपा बरसाएँ ताकि उसका स्वास्थ्य ठीक रहे, उसकी लंबी आयु हो।

हवन में कथित रूप से चाय के एक कंटेनर से राफेल जेट भी बनाया गया था। राहुल गाँधी के घर के बाहर पर्चे भी बाँटे गए जिनपर यह लिखा था कि प्रियंका गाँधी ‘ब्रह्मास्त्र’ हैं।    

मोदी ने गुजरात में लोगों को मरने दिया: Pak मीडिया में प्रोपेगेंडा वेबसाइट Scroll का लेख

‘स्क्रॉल’ की पत्रकार का लेख पाकिस्तानी मीडिया ने उठाया है। कुछ दिन पहले पाकिस्तानी पक्ष ने कुलभूषण जाधव के विरुद्ध दलीलें देने के लिए ‘द क्विंट’ के लेख का ज़िक्र किया था। इन दोनों पोर्टलों को पाकिस्तान से प्रेम है या नहीं लेकिन पाकिस्तान को इनसे ज़रूर प्रेम है। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान ‘डॉन’ को स्क्रॉल का लेख इतना अच्छा लगा कि उसने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया। आइए देखते हैं कि इस लेख में ऐसा क्या था कि पाकिस्तान को इतना अच्छा लगा। दरअसल, सीधे देखने पर पता चलता है कि मोदी के जीतने के पाँच कारण गिनाए गए हैं और यह एक पॉजिटिव विश्लेषण लगता है, लेकिन जैसे ही आप अन्दर उन कारणों को पढ़ना शुरू करते हैं, आपको पता चल जाता है कि इस लेख का उद्देश्य क्या है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि लेख की शुरुआत गुजरात दंगे से की गई है।

इस लेख में किसी भेरू लाल नामक व्यक्ति के हवाले से लिखा गया है कि मोदी ने गुजरात में दंगे होने दिए और कुछ नहीं किया। भेरू लाल के हवाले से लिखा गया है कि राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूसरे समुदाय के लोगों को मरने दिया। भेरू लाल को उदयपुर का एक भील आदिवासी बताया गया है। इस लेख में स्क्रॉल की पत्रकार सुप्रिया शर्मा ने मोदी की जीत का पहला कारण उनकी लोकप्रियता को बताया है। लेकिन, अगर सब कुछ सीधा रहता तो पाकिस्तानी मीडिया ने इस लेख को नहीं उठाया होता। इसमें दावा किया गया है, “मेट्रो सिटी के इलीट लोग मोदी के बेअदबी भरे भाषणों से नाराज़गी जताते हैं।” इलीट वर्ग के हवाले से मोदी के भाषण में नाटकीयता, विचलन और अशुद्धियाँ होने का दावा किया गया है।

इस लेख में दावा किया गया है कि ‘वोटर ऐसा समझते हैं‘ कि मोदी का एयर स्ट्राइक का ‘दावा’ सही है और और इसीलिए वे मोदी से ख़ुश हैं। इस लेख में कहीं भी एयर स्ट्राइक सच में हुआ, इसकी चर्चा नहीं की गई है और इसे मोदी का दावा बताया गया है। तीसरा कारण विकास बताया गया है। लेकिन, इसमें भी नियम एवं शर्तें लगाई गई हैं। मोदी ने विकास किया, ये लिखने के बजाए लिखा गया है कि मोदी ने विकास के आईडिया में मतदाताओं को निवेशित रखा। दलितों और आदिवासियों में मोदी सरकार के प्रति गुस्सा होने का दावा किया गया है। सुप्रिया शर्मा द्वारा लिखे गए इस लेख में एक और गंभीर दावा किया गया है।

अजीब सा चुनावी विश्लेषण करते हुए पाकिस्तानी मीडिया द्वारा प्रकाशित किए गए स्क्रॉल के इस लेख में सुप्रिया शर्मा का दावा है कि जिस तरह 2014 में भाजपा को बिना समुदाय विशेष के समर्थन के पूर्ण बहुमत मिला, 2019 की जीत में दलितों और आदिवासियों के मतों की कोई महत्ता नहीं रह जाएगी। शर्मा ने भेरू लाल से अजीब प्रोपगंडा वाला सवाल पूछा कि वो समुदाय विशेष से घृणा क्यों करते हैं? भेरू लाल को राजपूतों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात भी कही गई है। पाँचवे कारण के अंतर्गत इस लेख में लिखा गया, “मीडिया ने सरकार के बहुसंख्यकवादी प्रकृति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।” पाकिस्तानी मीडिया के इस ‘स्क्रॉल प्रेम’ का कारण अब आप समझ चुके होंगे।

नीचे से लीड कर रहे हैं प्रकाश राज, मतदान केंद्र छोड़ कर भागे

प्रकाश राज मतदान केंद्र छोड़ कर भाग खड़े हुए हैं। प्रकाश राज ने बंगलोर सेंट्रल से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ताज़ा मतगणना में वो शीर्ष 10 में भी नहीं हैं। प्रकाश राज को अभी तक की मतगणना के अनुसार 12,000 से भी कम मत प्राप्त हुए हैं। उन्होंने पहले राउंड के आँकड़े जारी होने के तुरंत बाद मैदान छोड़ दिया।

अगर बंगलोर सेंट्रल संसदीय क्षेत्र की बात करें तो कॉन्ग्रेस के रिजवान अरशद सबसे आगे चल रहे हैं और भाजपा के पीसी मोहन दूसरे स्थान पर हैं। दोनों के बीच लगभग 24,000 मतों का फासला है। नीचे देखें, किस उम्मीदवार को अब तक कितने वोट मिले हैं।

प्रकाश राज के लिए अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी प्रचार किया था। वह अपनी जीत के प्रति इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र की बजाए दिल्ली और बेगूसराय में प्रचार शुरू कर दिया था। कन्हैया कुमार और अरविन्द केजरीवाल के लिए उन्होंने चुनाव प्रचार किया था। फिलहाल मतगणना केंद्र से वह भाग खड़े हुए हैं।

कॉन्ग्रेस-जेडी(S) गठबंधन एक भूल: रोशन बेग के बाद एक और कर्नाटक कॉन्ग्रेस MLA ने किया विद्रोह

कर्नाटक में चिक्कबल्लापुरा से कॉन्ग्रेस विधायक के. सुधाकर ने अपनी ही पार्टी के ख़िलाफ़ बिगुल फूँकने का काम किया है। उन्होंने पार्टी के ख़िलाफ़ जाते हुए जनता दल (सेक्युलर) के साथ हुए गठबंधन को एक ऐतिहासिक गड़बड़ी करार दिया और कहा कि गठबंधन के कारण कॉन्ग्रेस पार्टी कई निर्वाचन क्षेत्रों में हार सकती है।

कॉन्ग्रेस विधायक ने द न्यूज़ को बताया, “जेडी (एस) के साथ गठबंधन करना हमारे लिए ऐतिहासिक गड़बड़ी है। यह हमें महँगी पड़ेगी और इसका नतीजा आप 23 मई को देखेंगे। अगर कॉन्ग्रेस विपक्ष में होती, तो हम 50% से अधिक वोट शेयर जीत लेते। हम इस बार दक्षिणी कर्नाटक में तटीय और मराठा क्षेत्र में भी हार जाएँगे। ग़ौरतलब है कि हम हार जाएँगे।”

उन्होंने कहा कि जेडी (एस) के साथ गठबंधन एक ‘अपवित्र गठबंधन’ था और कॉन्ग्रेस ने केवल 37 विधायकों के साथ पार्टी को सब कुछ दे दिया। उन्होंने गठबंधन को नैतिक रूप से ग़लत बताया।

सुधाकर ने एक्जिट पोल के बाद ईवीएम में छेड़छाड़ के मुद्दे को उठाने पर भी सवाल उठाया। अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए उन्होंने ट्विटर का सहारा लिया और लिखा कि वह इस उलझन में हैं कि एग्जिट पोल की बातचीत में ईवीएम मुद्दे को क्यों लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजे मतदान के अंत में मतदाताओं की भावना को दर्शाते हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि एग्जिट पोल का ईवीएम से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि वे मतदान के दिन आयोजित किए जाते हैं। सुधाकर ने कहा, “मैंने केवल एग्जिट पोल के बारे में ही बात की है। इस पर कुछ लोगों का राय अलग हो सकती है। एग्जिट पोल के बारे में उन्होंने कहा, “कभी-कभी वे सही भविष्यवाणी करते हैं और वे ग़लत हो जाते हैं, इसलिए आप इसके लिए ईवीएम को कैसे दोष दे सकते हैं?”

इससे पहले, कर्नाटक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रोशन बेग ने कर्नाटक राज्य विधानसभा में विभागों को बेचने का आरोप लगाकर विवाद खड़ा कर दिया था। एग्जिट पोल के बाद बेग ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल को ‘मसखरा’ कहा था और राज्य में पार्टी के संभावित भविष्य के लिए ‘सिद्धारमैया के अहंकार’ और पार्टी अध्यक्ष गुंडू राव के ‘फ्लॉप शो’ को दोषी ठहराया था।

बेग को कॉन्ग्रेस-जद (एस) गठबंधन के ख़िलाफ़ उनके बयानों के लिए कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति (KPCC) द्वारा कारण बताओ नोटिस दिया गया था। हालाँकि, उन्होंने यह कहते हुए नोटिस पढ़ने से इनकार कर दिया था कि यह उन लोगों के आदेश पर भेजा गया था जिनकी अक्षमताओं पर उन्होंने प्रकाश डाला था।

नींद से जागे ‘उपन्यासकार’ रामचंद्र गुहा, कहा अब तो कॉन्ग्रेस में वंशवाद ख़त्म करो

जैसा कि लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने यह अंदेशा जताया था कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बन सकती है। कई तथाकथित बुद्धिजीवियों ने विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच हो रहे मुक़ाबले पर तीखी टिप्पणियाँ की थी। योगेंद्र यादव ने कहा था कि कॉन्ग्रेस को मर जाना चाहिए। स्वयंभू विद्वान, फिक्शन राइटर और ‘उपन्यासकार’, और अपनी कल्पना को इतिहास के रूप में लिखने एवं नेहरू के प्रति निष्ठा रखने वाले रामचंद्र गुहा ने अब कॉन्ग्रेस पार्टी को गाँधी वंश से मुक्त होने के लिए कहा है।

गुहा ने कहा कि नया भारत निचले पायदान पर कम सामंती है और शीर्ष पर अधिक अधिनायकवादी। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बात अस्वीकार्य लगती है कि पाँचवीं पीढ़ी के राजवंश को भारत की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने के लिए केवल इस बात पर ग़ौर किया गया कि वो किसका बेटा और पोता है।

गुहा ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी को ज़िंदा रहने के लिए अपनी राजवंश की छवि को ख़त्म करना पड़ेगा। यहाँ तक ​​कि कॉन्ग्रेस के निष्ठावान राजदीप सरदेसाई ने भी एग्जिट पोल के आंकड़ों के बाद ईवीएम फ़र्जीवाड़े की झूठी ख़बर उठाने के लिए विपक्षी नेताओं की खिंचाई की थी।

राजदीप ने तर्क दिया था कि विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और विशुद्ध रूप से राजनीतिक कारणों से बनाए गए हैं। वाराणसी को वीवीआईपी निर्वाचन क्षेत्र में बदलने के लिए पीएम मोदी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि घाटों की अधिकता, शहर की सड़कों में सुधार, चौड़ी सड़कों और वाराणसी में बिजली की बाधित आपूर्ति का श्रेय पीएम मोदी को दिया जाना चाहिए।

कामरा और ट्रोल राठी जैसों के घटे दाम, कॉन्ग्रेस ने ‘न्याय’ से 5 रुपया/चुटकुला देने का किया वादा

चुनाव के नतीजों के साथ ही देशभर  कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ मतदाताओं ने जो अ’न्याय’ किया है, उसके रुझान आने शुरू हो चुके हैं। इस रुझान से भले ही निष्पक्ष पत्रकार और राहुल गाँधी असंतुष्ट हों, लेकिन देश का एक वर्ग ऐसा भी है जिसकी खुशियाँ छुपाए नहीं छुप रही है। ये वो लोग हैं जिन्हें कॉन्ग्रेस ने पिछले 5 साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सस्ते, घटिया और निहायत ही वाहियात चुटकुले बनाने के लिए रोजगार दिया था।

सूत्रों के मुताबिक़ 5 साल रोजगार की कमी का रोना रोने वाले कुणाल कामरा और स्टूडियो में निष्पक्ष पत्रकार जिस तरह से कॉमेडियंस बनकर उभरे हैं, उनके लिए आने वाले 5 साल में भी कॉमेडी करने के भरपूर अवसर आने वाले हैं। कॉन्ग्रेस का कहना है कि वो विपक्ष में रहकर भी लोगों को रोजगार देना चाहती है और वो अपने इस कार्य को पूरा कर के रहेगी। हालाँकि, आँकड़ों में बात कर के अपनी विश्वसनीय साबित करने वाले NDTV और BBC के ट्रोल पत्रकार और लिबरल गिरोह के कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने कॉन्ग्रेस को बताया कि उनके ऐसा करने से रोजगार का क्रेडिट भी मोदी सरकार को ही जाएगा और इस कारण उन्हें मोदी सरकार के दौरान बेरोजगारी के झूठे आँकड़ों को फैक्ट बनाकर बताने में परेशानी होगी।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा है कि इन लोगों ने लगातार कॉन्ग्रेस पार्टी की मदद की है, और कॉन्ग्रेस का यह फ़र्ज़ है कि कम पार्टी फण्ड के बावजूद, राहुल गाँधी के कुछ विदेशी यात्राओं के पैसे बचा कर हर सस्ते कॉमेडियन को प्रति चुटकुला 5 रुपए सीधे उनके खाते में डाल दिए जाएँगे।

राहुल गाँधी ने किया कॉमेडियंस से प्रत्यक्ष रूप से कॉमेडी करने का वायदा

देखा जाए तो देश में कॉन्ग्रेस ही अकेली पार्टी है, जिसने कुणाल कामरा जैसों की कॉमेडी में गंभीरता तलाश ली थी। लेकिन राहुल गाँधी के होते हुए भी कॉन्ग्रेस को सस्ते कॉमेडियंस आउटसोर्स करने पड़े ये बात चौंका देने वाली थी। गोदी मीडिया ने जब राहुल गाँधी से इस बारे में सवाल किया, तो उनका जवाब था, “देखिए भाई साहब, मैं फ्रेंक्ली कहता हूँ, आप लिख के ले लीजिए, मैं कॉमेडियंस के साथ पूरा न्याय करूँगा। मैं नहीं चाहता था कि  देश के और किसी कॉमेडियन को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौक़ा ना मिले इसलिए मैं खुलकर सामने नहीं आया। लेकिन, अब जब कुणाल कामरा जैसे लोग कॉमेडी कर के बहुमत नहीं दिला पा रहे हैं, तो मुझे अब ये जिम्मेदारी अपने हाथों में लेनी ही होगी। मैं ये मजा पूरे देशवासियों को देना चाहता हूँ।”

देश में सबसे पहले कौन लेकर आया था कॉमेडी?

देश में सबसे पहले कॉमेडी को किसने जन्म दिया था के सवाल पर राहुल गाँधी ने बताया, “ऑफ़कोर्स राजीव गाँधी ने”

जब कॉन्ग्रेस को नरेंद्र मोदी को हराने के लिए वास्तव में अपनी मेहनत और ऊर्जा मुद्दों पर लगानी थी, तब वो सस्ते कॉमेडियंस का गंभीरता से लेते हुए उन्हें 100 प्रतिशत रोजगार की गेरेंटी देती रही। कॉमेडी के नाम पर खुद कॉमेडी AIB जैसों के पतन का सबसे बड़ा फायदा कुणाल कामरा को हुआ। कॉन्ग्रेस ने कुणाल कामरा को अपनी पार्टी का प्रवक्ता बनाकर उन्हीं के जैसे दूसरे ऐसे कॉमेडियंस को उम्मीद दी, जो सोशल मीडिया पर दिन-रात मोदी समर्थकों को भक्त बताते नजर आते हैं।