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दिल्ली में पूरा का पूरा मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को शिफ्ट हो गया: अरविंद केजरीवाल

राजधानी दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों पर 12 मई को मतदान हुआ। इस मतदान को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि इस मतदान के दौरान आखिरी समय में सारे मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस की तरफ चले गए।

केजरीवाल चुनाव प्रचार के लिए शुक्रवार (मई 17, 2019) को पंजाब के राजपुरा पहुँचे थे, जहाँ पर 19 मई को मतदान होना है। यहाँ आम आदमी पार्टी 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इस दौरान जब इंडियन एक्सप्रेस ने उनसे पूछा कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में कितनी सीटें मिल रही हैं, तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि ये देखने वाली बात होगी कि क्या होता है। केजरीवाल ने आगे कहा कि चुनाव के 48 घंटे पहले तक उन्हें ऐसा लग रहा था कि सातों सीटें आम आदमी पार्टी को जाएँगी, मगर आखिरी वक्त पर पूरे मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस की तरफ शिफ्ट हो गए। उन्होंने कहा कि मतदान के एक दिन पहले वो ये पता लगाने की कोशिश में लगे थे कि आखिर हुआ क्या है और फिर उन्हें पता चला कि पूरा का पूरा मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को शिफ्ट हो गया जो कि 12 से 13 फीसदी हैं।

अगले साल आम आदमी पार्टी को राजधानी दिल्ली की सत्ता में आए हुए 5 साल पूरे हो जाएँगे। वो दिल्ली में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर काफी आशान्वित नज़र आए। उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा, “दिल्ली में काम बोलता है। लोग हमारे काम के आधार पर वोट देंगे।” केजरीवाल से जब ये पूछा गया कि क्या पार्टी फिर से पुराने चेहरों को ही दोबारा मौका देगी, तो केजरीवाल ने कहा कि ये फैसला हर किसी के परफॉर्मेंस का आकलन करने के बाद लिया जाएगा।

वहीं, जब उनसे लोकसभा चुनाव के नतीजों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं होती है, तो मोदी की सरकार वापस नहीं आएगी। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि वो लोग ऐसा करेंगे या नहीं। आगे केजरीवाल ने यह भी साफ किया कि अगर केंद्र में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार नहीं आती है और आम आदमी पार्टी को पर्याप्त सीटें मिलती है, तो हम दिल्ली को संपूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की शर्त पर सरकार को समर्थन देंगे।

14 साल बाद NCERT बदलेगा स्कूली पाठ्यक्रम, जनता ने दिए थे 1 लाख सुझाव

स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में 14 साल बाद नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क की समीक्षा बहुत जल्द की जाएगी। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एनसीईआरटी के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने खुद अखबार से हुई बातचीत में इसका खुलासा किया है।

खबर के मुताबिक ऋषिकेश बताते हैं कि साल 2005 में जारी हुए पिछले एनसीएफ की समीक्षा का प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है। इसे लेकर कमिटी भी बहुत जल्द बनाई जाएगी। बता दें एनसीएफ का काम देश में टीचिंग प्रैक्टिस पर दिशा निर्देश देते हुए स्कूल में पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रम बनाने और पाठ्यपुस्तकों के लेखन की रूपरेखा बनाने का होता है।

एनसीईआरटी निदेशक के मुताबिक उन्होंने पाठ्यपुस्तकों को तर्कसंगत बनाने पर जो कार्य किए हैं, वही 2005 में जारी हुए एनसीएफ की समीक्षा का आधार बनेंगे। उनके मुताबिक समाज में बदलाव की जरूरत है और उनका फोकस ‘एक्पेरिमेंटल लर्निंग’ पर है।

नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद इसे मामले को लेकर आधिकारिक घोषणा होगी। निदेशक सेनापति का कहना है कि इस मामले पर अभिभावकों, छात्रों और बुद्धिजीवियों द्वारा 1 लाख सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों बारीकी से विश्लेषण होगा। इस प्रक्रिया में एक साल तक लग सकता है ।

इसके अलावा साल के अंत तक एनसीईआरटी 42 लाख सरकारी एलीमेंट्री स्कूल के टीचर्स के लिए बड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भी विचार कर रहा है। इससे पहले इस तरह का एक प्रोग्राम त्रिपुरा में आयोजित किया जा चुका है जहाँ 3-4 महीने के भीतर 31000 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया था।

मोदी-शाह प्रेस कॉन्फ़्रेंस, रवीश-राजदीप, राहुल गाँधी की बचकानी हरकतें, और सोनिया का मिशन 272

इस वीडियो में हमने पिछले दिनों की कुछ खबरों पर चर्चा की है जिसमें आज हुए BJP प्रेस कॉन्फ्रेंस, राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, मीडिया के समुदाय विशेष के लोगों के ट्रोल बन कर सिमट जाने की बात और सोनिया गाँधी के मिशन 272 की बात शामिल है।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार की पत्नी का स्विस बैंक में एकाउंट, खुद ₹1.53 करोड़ की चल संपत्ति के मालिक

गुरदासपुर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सुनील कुमार जाखड़ ने अपने चुनावी हलफनामे में ₹1.53 करोड़ की चल सम्पत्ति के अलावा एक स्विस बैंक में पत्नी के नाम पर करीब ₹7 करोड़ जमा होने की जानकारी दी है। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत बलराम जाखड़ के बेटे ने विभिन्न बैंक खातों में ₹1.23 करोड़ जमा होने की जानकारी दी है।

हलफनामे के अनुसार, उन्होंने स्विजरलैंड के ज्यूरिख स्थित ‘ज़ुरखर कैंटोनल बैंक में पत्नी सिल्विया जाखड़ के नाम पर ₹7.37 करोड़ जमा होने की जानकारी दी है। ‘ज़ुरखर कैंटोनल बैंक’ की वेबसाइट के अनुसार वह स्विजरलैंड का सबसे बड़ा बैंक है। वर्तमान में सुनील जाखड़ के पास ₹4.49 लाख रुपए नकद और उनकी पत्नी के पास ₹1.38 लाख रुपए नगद है।

उन्होंने हलफनामे में बताया कि उनके पास ₹2.88 करोड़ की अचल संपत्ति (जो स्वयं अर्जित और विरासत में मिली सहित) और उनकी पत्नी के पास ₹12.06 करोड़ की सम्पत्ति है। जाखड़ गुरदासपुर से मौजूदा सांसद हैं, जिनका मुकाबला अभिनेता से राजनेता बने अजय सिंह धर्मेन्द्र देओल (सनी देओल) से है। उन्हें भाजपा ने टिकट दिया है।

₹87.18 करोड़ है अजय सिहं धर्मेन्द्र देओल की संपत्ति

बॉलीवुड अभिनेता अजय सिंह धर्मेन्द्र देओल (सनी देओल) ने सपत्नी अपनी कुल संपत्ति की घोषणा करते हुए इसे
₹87.18 करोड़ बताई है। संपत्ति और देनदारियों पर उनके हलफनामे से यह पता चलता है कि 2017-18 में उनकी कुल आय ₹63.82 लाख, 2016-17 में ₹96.29 लाख और 2015-16 में ₹2.25 करोड़ थी। उन्होंने सपत्नी अपनी संपत्ति ₹87.18 करोड़ बताई है।

राहुल ने स्वीकारा कि कुछ पत्रकार ‘उनके साइड के हैं’ जो मोदी से कड़े सवाल पूछते हैं

वैसे तो तमाम पत्रकारों ने खुद ही अपने व्यवहार से अपनी ‘पक्षकारिता’ साबित की है लेकिन आज राहुल गाँधी की स्वीकृति ने उस पर मुहर भी लगा दी। राहुल गाँधी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वयं स्वीकार किया कि कुछ पत्रकार उनके साइड के हैं जो विरोधियों से कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से कठिन सवाल पूछने का काम करते हैं।

आज एक तरफ जहाँ बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी तो ठीक उसी समय राहुल गाँधी भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उसी समय राहुल ने कहा, “मैंने अभी सुरजेवाला जी से कहा, उधर मोदी जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही है तो जरा कुछ अपने पत्रकार भी भेज दीजिए जो हमारी तरफ से भी 1-2 सवाल पूछ लें, तो सुरजेवाला ने बताया कि दरवाजे वहाँ बंद कर दिए गए हैं।”

संभवतः यहाँ उन्ही पत्रकारों की बात हो रही है जो खुलेआम ‘पक्षकार’ होने के बाद भी ‘न्यूट्रल’ पत्रकार बने हुए हैं। ऐसे पक्षकार लगातार कॉन्ग्रेस की तरफ से पैडलिंग करते पाए जाते हैं जिन्हें राहुल गाँधी ने आज खुलेआम स्वीकार कर इस हकीकत को मान्यता प्रदान कर दी।

राहुल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि देखिए कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी खुद स्वीकार रहे हैं कि पार्टी के ‘पाले हुए’ कुछ पत्रकार है जो कॉन्ग्रेस के लिए काम करते हैं।

हमने पहले भी कई बार रिपोर्ट किया गया है कि कैसे कुछ कॉन्ग्रेसी ‘पक्षकार’ फेक न्यूज़ फैलाते, कॉन्सिपिरेसी थ्योरीज़ गढ़ते और यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस के इलेक्शन कैम्पेन से लेकर स्ट्रैटजी प्लानिंग में भी खुलेआम अपने चवन्नी छाप विचार रखकर भी ‘निष्पक्ष’ बने हुए हैं।

मोदी ने राहुल का नाम लेकर कहा, ‘दया मत दिखाओ, मेरे माता-पिता की जो भी खबर है, ले आओ’

अक्सर देखने को मिलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी कभी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले पड़ रहे होते हैं, तो कभी वो रैलियों में उनके नाम की माला जपते देखे जाते हैं। जबकि, इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शायद ही कभी राहुल गाँधी का नाम अपनी जुबान से लेते हैं। एक ओर राहुल गाँधी की मीडिया वार्तालाप से लेकर जनसभाएँ भी जहाँ नरेंद्र मोदी के नाम से शुरू होती हैं, वहीं नरेंद्र मोदी नामदार को लेकर बेखबर ही नजर आते हैं।

हाल ही में राहुल गाँधी ने एक बेहद भावुक भाषण में अपना दुःख व्यक्त करते हुए कहा, “मैं मर जाऊँगा, लेकिन नरेन्द्र मोदी के माँ-बाप के बारे में कभी बात नहीं करूंगा।” हालाँकि, इस पर उन्हें जनता ने सोशल मीडिया जवाब देते हुए कहा था कि बोफोर्स घोटाले में नरेंद्र मोदी के माता-पिता नहीं, बल्कि राजीव गाँधी ही मुख्य आरोपित थे, तो ऐसे में वो नरेंद्र मोदी के माँ-बाप पर आखिर कौन-सी टिप्पणी करना चाहते हैं?

आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘न्यूज़ 24’ समाचार चैनल को इंटरव्यू देते हुए पहली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का नाम लिया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं राहुल गाँधी से आग्रह करता हूँ, अगर मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो तो आकर बताइये। मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं।” उन्होंने ने कहा, “मैं चुनाव आयोग से आग्रह करूँगा की राहुल जी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने दी जाए, जहाँ वो मेरे माता-पिता के बारे में जो भी बोलना चाहते हैं, वो आकर कहें।”

‘मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं है’

समाचार चैनल को इंटरव्यू देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “श्रीमान राहुल गाँधी जी, आप कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं, आपको 4-5 पीढ़ी का सार्वजनिक राजनीतिक जीवन का अनुभव है। मैं आज सार्वजनिक रूप से आप से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो, व्यक्तिगत जीवन में गलत किया हो, सामाजिक जीवन में गलत किया हो, तो खुलकर बाहर आकर बताइये। मुझ पर दया करने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपके माता-पिता पर न मुझे कुछ कहने का अधिकार है और न इस देश के नागरिक का अधिकार है। लेकिन इस देश के पूर्व प्रधानमंत्री के संबंध में, इस देश के राज परिवार के संबंध में, सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोगों को देश में चर्चा करने का हक है।”

इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने कठोर शब्दों में कहा, “मैं नहीं चाहूँगा कि मेरे देश में मेरे माता-पिता ने कुछ गलत किया हो और माफ़ कर दे। दया जैसे शब्द बोलकर आप मेरे संस्कार और जमीर को चोट पहुँचा रहे हो। हाँ, उन्होंने मुझे जन्म दिया, ये अगर उन्होंने गलत किया तो आपको खुलकर कहने का अधिकार है।”

‘कॉन्ग्रेस के सामने बस नामदार को बचाने की समस्या है’

प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि बीजेपी यह चुनाव पिछले बार से बड़े बहुमत के साथ जीतेगी। इस इंटरव्यू में विपक्ष पर कड़ा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के सामने यह समस्या है कि चुनाव की मार के बाद वो नामदार को कैसे बचाएँगे। मेरे दिमाग में चुनाव नतीजे के बाद देश को किस दिशा में ले जाना और कितनी तेजी से ले जाना है, बस यही चलता रहता है, इसके अतिरिक्त मैं कुछ नहीं सोचता।”

फ़ैक्ट-चेक के नाम पर विद्यासागर कॉलेज की हिंसा पर AltNews ने फैलाया झूठ

मंगलवार (14 मई) को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हिंसा की ख़बरों के बाद कोलकाता में हड़कंप का माहौल बन गया। इस हिंसा में विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया। जैसे-जैसे यह मुद्दा बढ़ता गया, वैसे-वैसे इस मामले को लेकर सियासी-खेल भी परवान चढ़ता गया।

जहाँ एक तरफ़, ममता बनर्जी ने बंगाली क्षेत्रीय अराजकतावाद का आह्वान किया, वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल पर हिंसा का आरोप लगाने और मूर्ति तोड़ने के सबूत पेश किए। AltNews ने इसी ख़बर का फ़ैक्ट-चेक करने का दावा किया।

अपने फ़ैक्ट-चेक में, AltNews ने एक ऐसे वीडियो को दिखाया गया जिसमें केवल भाजपा कार्याकर्ता कॉलेज परिसर के अंदर पत्थर फेंकते दिखे। जबकि सच्चाई यह है कि इस हमले की शुरूआत तृणमूल कॉन्ग्रेस ने की थी। इस वीडियो के माध्यम से AltNews ने यह दावा किया कि कॉलेज के अंदर से कोई पत्थर बाहर नहीं फेंका गया।

वहीं, फ़ैक्ट-चेक करने वाली वेबसाइट फ़ैक्ट हंट द्वारा उसी वीडियो को दिखाया गया जिसमें यह स्पष्ट है कि कॉलेज के अंदर से भी पत्थर बाहर फेंके जा रहे थे, यानी कि हमले की शुरूआत कॉलेज के अंदर से की गई थी। फ़ैक्ट हंट का यह वीडियो लगभग 1 मिनट 12 सेकंड का था, जबकि AltNews ने जिस वीडियो को दिखाकर फ़ैक्ट-चेक किया, असल में वो पूरा वीडियो न होकर मात्र 36 सेकंड का था। इसमें AltNews ने बड़ी आसानी से सच्चाई को नज़रअंदाज़ किया और फ़ैक्ट-न्यूज़ के नाम पर बीजेपी को दोषी ठहराने का भरसक प्रयास किया।

सच्चाई सामने आने पर AltNews को ग़लती स्वीकारते हुए अपने लेख को अपडेट करना पड़ा और यह लिखना पड़ा कि पत्थरबाजी कॉलेज के अंदर से भी हुई थी। AltNews ने इस पत्थरबाजी को ‘प्रतिशोध’ का नाम दिया और ऐसा प्रचारित किया कि पथराव की शुरूआत भाजपा के कार्यकर्ताओं ने की थी।


AltNews ने अपने पूरे फ़ैक्ट-चेक में यही सिद्ध करने की कोशिश की कि विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़ने वाले लोग केवल बीजेपी के ही कार्यकर्ता थे।

यह बड़ी हैरानी वाली बात है कि AltNews के इस फ़ैक्ट-चेक का आधार केवल भगवा वस्त्र है। उनके लिए भगवा पहनने वाले सभी लोग केवल भाजपा कार्यकर्ता ही हो सकते हैं। AltNews के पास इतना दिमाग नहीं है कि वो यह भी सोच सकें कि लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए तृणमूल के गुंडे भी भगवा पहनकर अराजकता फैला सकते हैं।

इस मामले में कौन दोषी है, कौन दोषी नहीं है, यह पता करना पुलिस का काम है, न कि किसी तथाकथित फ़ैक्ट-चेक कंपनी का। AltNews के फ़ैक्ट चेक को देखकर लगता है कि वो टीवी पर आने वाले CID सीरियल को बहुत देखते हैं जहाँ वो ACP प्रद्युम्न और उनकी टीम से काफ़ी प्रेरित हैं। AltNews के संस्थापक और उसकी टीम को गंभीर होकर यह सोचना चाहिए कि यह कोई जासूसी सीरियल नहीं है, बल्कि असल घटना है जिसका दुष्प्रचार कतई नहीं किया जाना चाहिए।

AltNews के सह-संस्थापकों को प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने जैसे अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए झूठी ख़बरे फैलाने के लिए जाना जाता है। हाल ही में, प्रतीक सिन्हा ने नरेंद्र मोदी के दोषी सांसदों और विधायकों को जेल भेजने के चुनावी वादे के बारे में झूठ बोला था।

इससे पहले AltNews ने पत्रकार बरखा दत्त के फ़ैक्ट-चेक के क्लिप्ड वीडियो की माँग की। लेकिन दिलचस्प रूप से, उन बिंदुओं को छोड़ दिया, जहाँ वास्तव में घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का संदर्भ था। AltNews ने आर्मी से सेवानिवृत्त प्रमुख का भी फैक्ट चेक किया, लेकिन बिना सोचे-समझे आर्मी चीफ़ के पक्ष को नज़रअंदाज़ कर दिया। इसके बाद AltNews ने एक फ़ेक इमेज का फैक्ट चेक करके उसे प्रसारित किया, वो भी बिना सही जानकारी दिए। AltNews के सह-संस्थापक बड़ी आसानी से झूठ फैला कर अपना मंतव्य सिद्ध कर लेते हैं। ऐसा ही उन्होंने कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा की एक फ़ेक इमेज साझा करके की थी।

कई युवाओं द्वारा भारत-विरोधी नारे लगाने की ख़बरों को ख़ारिज करने के लिए वेबसाइट ने कुछ अजीबो-गरीब विश्लेषण किया। जबकि बिहार के डीजीपी ने AltNews के दावों को एक सिरे से ख़ारिज कर दिया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि AltNews के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा के चेहरे पर एक शिकन भी देखने को नहीं मिलती जब वो अपने फै़क्ट-चेक के फ़र्ज़ी होने के तथ्य से अवगत हो जाते हैं। AltNews और इसके सहयोगियों ने अतीत में भी बिना किसी सबूत के एक प्रत्यक्षदर्शी की बातों को ख़ारिज कर दिया क्योंकि यह उनके कथन के अनुकूल था। उनके द्वारा खुदरा FDI पर बीजेपी के रुख़ के बारे में और ख़ुद OpIndia.com के बारे में भी झूठ फैलाया गया।

80 भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हुई, आपने कोई सवाल नहीं उठाया: अमित शाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी मुख्यालय में आज (मई 17, 2019) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान अमित शाह ने दावा किया कि देश में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी 300 से ज्यादा सीटें जीतेगी और केंद्र में एनडीए की सरकार बनेगी। इसके साथ ही अमित शाह ने दावा किया कि 2014 में जिन 120 सीटों पर उनकी पार्टी नहीं जीती थी, उनमें से 80 सीटों पर इस बार जीत होगी। उन्होंने कहा कि इस बार पार्टी इन 80 सीटों पर पूरी मजबूती से लड़ी है।

अमित शाह ने कहा कि लोगों के जीवन स्तर को उठाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सराहनीय प्रयास किए और इसमें बड़ी सफलता पाई है। अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रयोग को दुनिया ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने 133 नई योजनाएँ लागू की और उसे जमीनी स्तर तक पहुँचाने का प्रयास किया। किसानों, दलितों , आदिवासियों और महिलाओं के लिए नई योजनाएँ लाई गईं और इन वर्गों के भीतर आत्मविश्वास जगा है।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जनता ने नई सरकार बनना तय कर लिया है। पाँच साल बाद एक बार फिर से पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनकर आएगी। पीएम ने कहा कि काफी लंबे अरसे बाद ऐसा होगा, जब देश में लगातार दूसरी बार कोई पूर्ण बहुमत वाली सरकार आएगी। उन्होंने कहा कि देशवासियों ने पाँच साल में जो उन्हें आशीर्वाद दिया है, वो उसके लिए धन्यवाद देने के लिए आए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि साल 2014 में आईपीएल बाहर कराना पड़ा था। मगर इस बार ऐसा नहीं है। जब सरकार सक्षम होता है, तो देश में रमजान भी होता है, आईपील भी चलता है और बच्चों का एग्जाम भी होता है।

वहीं, राजनीति के स्तर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि भाजपा की ओर से कभी भी राजनीति को गंदा करने का काम नहीं किया गया। उन्होंने पूछा कि ममता बनर्जी के राज बंगाल में ही क्यों हिंसा होती है? मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्हें ममता से ज़्यादा दुःख मीडिया की चुप्पी पर है जो भाजपा के 80 कार्यकर्ताओं की हत्या पर भी ममता से सवाल नहीं पूछते। कहीं और हिंसा क्यों नहीं हो रही है? पिछले चुनाव में हमारे पर 9 करोड़ कार्यकर्ता थे, अब 11 करोड़ हैं।

राफेल के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि अगर राहुल गाँधी के पास पुख्ता सबूत थे, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं दिए? राहुल को सभी तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करना चाहिए था। इस पर पीएम ही जवाब दें, ये जरूरी नहीं है। कॉन्ग्रेस पर भी कई आरोप लगे हैं, तो क्या उन्होंने जवाब दिया? इसके साथ ही उन्होंने साध्‍वी प्रज्ञा को उम्‍मीदवार बनाने जाने पर कहा कि यह भगवा आतंकवाद की मुहिम चलाने वालों के खिलाफ एक सत्‍याग्रह है।

बनारस के लोगों ने राजदीप का मुँह किया बंद, कहा, ‘कॉन्ग्रेस का कोई एक काम बता दो’

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का चुनाव प्रचार जारी है। इस चरण में प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी वाली वाराणसी पर भी 19 मई को चुनाव होना है। ऐसे में कई पत्रकार बनारस में डेरा डाले हुए हैं। इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई वाराणसी में प्रियंका गाँधी का रोड शो कवर करने गए थे, ऐसे में उन्होंने जब बनारस की नब्ज़ टटोली तो माहौल ‘मोदीमय’ दिखा। हालाँकि, उन्होंने अपने तरीके से कई जगह ट्विस्ट देने की कोशिश की, पर घूम-फिरकर माहौल ‘आएगा तो मोदी ही’ टाइप रहा।

वाराणसी से ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान, राजदीप दशाश्वमेध घाट, काशी की राजनीतिक धुरी अस्सी पर पप्पू चाय के पॉपुलर अड्डे से लेकर बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के विश्वनाथ मंदिर पहुँचते हैं। बनारस के लोगों को कई बार अपनी तरफ से याद दिलाने की कोशिश करते हैं कि कभी बनारस कॉन्ग्रेस का गढ़ हुआ करता था। क्या आप चाहते हैं कि प्रियंका यहाँ से चुनाव लड़े जबकि उन्हें ठीक से पता है न वह लड़ेंगी और न ही अब संभव है। यहाँ तक कि यह भी पूछ लिया कि क्या आप उसे वोट देना चाहेंगे जो पार्टी और नेता रोजगार देने के ‘वादे’ कर रही है। लगभग एक ही सवाल बार-बार दोहराया गया कि आखिर मोदी ने ऐसा क्या कर दिया बनारस में? कितना बदला है बनारस? अपनी मस्ती और हाज़िरजवाबी के लिए जाना जाने वाले बनारस ने भी जम कर उनकी फिरकी ली और अपना मन भी उड़ेल कर रख दिया जो उनके लिए और कॉन्ग्रेस के लिए अच्छी ख़बर नहीं है, पर जो है सो है।

सबसे मजेदार वाकया अस्सी पर पप्पू की चाय के दुकान का है। शायद राजदीप ने वहाँ इंट्री यह सोचकर की थी कि यहाँ उन्हें मोदी विरोध की लहर दिखाई दे जाए, पर मामला उल्टा हो गया। राजदीप ने जैसे ही पूछा कि आखिर पिछले पाँच सालों में बनारस में ऐसा क्या हुआ? क्या मोदी राज में बनारस में कोई डेवलपमेंट हुआ? लोगों ने BHU से लेकर बुद्ध की प्रथम प्रवचन स्थली सारनाथ तक शानदार रोड के साथ, हेरिटेज लाइट, तारों के जंजाल से मुक्ति, रामनगर-सामने घाट पुल से लेकर, महात्मा गाँधी और मालवीय जी ने कभी कहा था कि जहाँ स्वयं काशी विश्वनाथ विराजमान है उस गली में भी इतना कूड़ा-करकट की याद दिलाते हुए विश्वनाथ हेरिटेज कॉरिडोर से लेकर बनारस की गली और घाटों तक की बढ़िया सफाई व्यवस्था की चर्चा कर डाली। राजदीप को बता दिया कि बनारस में अब महामना को समर्पित अपना विश्वस्तरीय कैंसर हॉस्पिटल भी मरीजों की सेवा के लिए तैयार है।

फिर भी राजदीप ने उनकी तरफ गूगली फेंकी कि जितना काम नहीं हो रहा है उससे ज़्यादा प्रचार हो रहा है। जैसे अभी जो कुछ गिनाया गया वह काम नहीं बल्कि कुछ और हो क्योंकि अभी तक कहीं भी किसी ने कॉन्ग्रेस का नाम तक नहीं लिया था। ‘कमलापति त्रिपाठी के समय कॉन्ग्रेस का गढ़ रहा है बनारस’ कि जैसे ही उन्होंने याद दिलाकर इन उपलब्धियों को कमतर साबित करने की कोशिश की तो किसी ने उन्हीं से पूछ लिया कि आप तो वरिष्ठ पत्रकार हैं आप ही बता दीजिए कोई एक काम जो बनारस में कॉन्ग्रेस ने किया हो? थोड़ी देर के लिए राजदीप गच्चा खा गए कि अब करे तो करें क्या! आगे इस पर डिटेल में बात होगी।

वैसे ऐसे पत्रकारों की समस्या और एकमात्र उपलब्धि यही रही है कि मोदी विरोध से ही ये तथाकथित बड़े पत्रकार बने हैं और ऊपर से ‘पक्षकार’ होने के बावजूद भी ‘निष्पक्षता’ का चोला ओढ़ लिया। खैर, अब इन्हें ठीक से पता है कि कॉन्ग्रेस सत्ता में वापस आ नहीं रही तो ये जाएँ तो जाएँ कहाँ? यहाँ मामला उल्टा पड़ता देख बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के छात्रों से बीजेपी विरोध का माहौल बनाना चाहा, शुरूआती स्तर पर बात बनती नज़र आई तो आँखों में चमक दिखी लेकिन जल्द ही सब अरमान बनारसी झोंके में बह गए, जब वहाँ के छात्रों ने न सिर्फ बनारस बल्कि सम्पूर्ण पूर्वांचल के विकास की तस्वीर साझा कर दी। वहाँ किसी को राहुल और प्रियंका से कोई उम्मीद नज़र नहीं आई। शुरूआती थोड़े से असंतोष के साथ मेजोरिटी में छात्र भी मोदी मय ही नज़र आए तो राजदीप ने वहाँ भी ट्विस्ट देना चाहा कि क्या देश में मोदी के नाम पर ध्रुवीकरण नहीं हो रहा है?

छात्रों ने उनके इस सवाल को मोदी-मोदी के नारों के साथ हवा में उड़ा दिया और ये साफ बता दिया कि वर्तमान में जहाँ एक तरफ परिवारवाद हावी है और राहुल के बाद उनका भांजा अगला पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए तैयार किया जा रहा है, वहाँ बीजेपी एक बढ़िया विकल्प है। परिवर्तन की बात करने वाले राहुल पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया या किसी अन्य को पार्टी अध्यक्ष बना के दिखाएँ, फिर देश की बात करें। राजदीप का मामला BHU में भी नहीं जमा। सारा एजेंडा धरा का धरा रह गया।

चलिए वापस लौटते हैं पप्पू की दुकान पर, बनारस में ग्राउंड रिपोर्टिंग करते वक़्त राजदीप ने जो अभी तक मोदी के खिलाफ न जाने कितने नेगेटिव कमेंट कर खुद को सुर्ख़ियों में रखा। बनारस में भी बार-बार कॉन्ग्रेस से तुलना कर मोदी के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करवाने की पुरजोर कोशिश की, पर बनारस ने बता दिया कि कैसे मोदी ने मात्र पाँच सालों में कॉन्ग्रेस के पचास सालों से ज़्यादा बनारस में विकास किया। चाहे वह मामला साफ-सफाई का हो, चौड़ी सड़कों का, अंडरग्राउंड पावर केबल का, गंगा की साफ-सफाई का हो, जाम से मुक्ति के लिए फ्लाईओवर के जाल का या बेहतर और ज़्यादा उन्नत हॉस्पिटल का…. लेकिन सरदेसाई ने इन सबको नकारते हुए उन्हें प्रोवोक किया ताकि कोई तो मोदी के खिलाफ नेगेटिव कमेंट करे जिसे ये मोदी विरोधी लहर के रूप में काशी का मूड बताकर प्रोजेक्ट कर सकें।

देसाई ने आखिरी पैतरें के रूप में अभी तक कही हर बात को नकारते हुए फिर बड़ी धूर्तता के साथ पूछा यह सब तो ठीक है पर जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हुआ। प्रचार पर ध्यान ज़्यादा रहा मोदी जी का, जमीन पर कम। क्या आप चाहते हैं कि मोदी प्रचार कम और काम ज़्यादा करें? इस पर पप्पू की दुकान पर ही एक व्यक्ति ने बहुत झन्नाटेदार जवाब दिया कि आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे सचिन ने अपने जीवन में 100 सेंचुरी ही मारा तो आगे क्या? छोड़िए, राजदीप जी आप बड़े पत्रकार हैं पहले भी कई बार बनारस आ चुके हैं। मैं तो बनारस में मोदी जी का 50 काम गिना दूँगा। आप बताइए कि कॉन्ग्रेस ने क्या किया है बनारस के लिए कोई एक उपलब्धि बता दीजिए।

सरदेसाई पर इस तरह से सीधा अटैक करने के बाद, कॉन्ग्रेस के लिए तमाम तरह से जीवन भर पैडलिंग करने के बावजूद, राजदीप के पास ऐसा एक भी काम नहीं था कॉन्ग्रेस का जिसे वो बनारस की जनता को गिना सकें। वहाँ बैठे बनारसियों ने उन्हें पानी पीला दिया और दुकान पर बैठे लोगों ने इस सन्नाटे को चीरने के लिए माहौल मोदी मय कर दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि बनारस किसी के भड़कावे में नहीं आने वाला, वह विकास के साथ है, मोदी के साथ है। इस जवाब के साथ मामला बनता न देख सरदेसाई का काफिला कहीं और निकल लिया मोदी विरोध की संजीवनी तलाश करने।

BJP नेता ने गाँधी को कहा ‘पाकिस्तान का राष्ट्रपिता’, पार्टी ने किया सस्पेंड

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता बताने पर भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के प्रवक्ता और मीडिया सेल के प्रमुख अनिल सौमित्र को सभी पदों से सस्पेंड कर दिया है और साथ ही उन्हें सात दिनों के अंदर जवाब देने के लिए भी कहा है। दरअसल, सौमित्र ने अपने फेसबुक पोस्ट में विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था, “महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता थे, लेकिन पाकिस्तान राष्ट्र के। भारत राष्ट्र में तो उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए। कुछ लायक तो कुछ नालायक।”

इसके साथ ही अनिल सौमित्र अपने पोस्ट में लिखते हैं कि कॉन्ग्रेस ने महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता बताया। राष्ट्र का कोई पिता नहीं होता, पुत्र होता है। चर्च में फादर होते हैं, कॉन्ग्रेस ने उसका हिंदी रुपांतरण कर पिता कर दिया। सौमित्र ने आगे लिखा कि हम गाँधी जी के विचारों को बढ़ाने वाले लोग हैं। संघ के स्वयंसेवक के रुप में हम प्रतिदिन उनका नाम लेते हैं।

बता दें कि, इससे पहले भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था। इस बयान से उपजे विवाद पर अमित शाह ने कहा कि इस तरह के बयान से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से ये भी कहा कि हालाँकि इन तीनों नेताओं ने बयान वापस लेते हुए माफी माँग ली है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तीनों नेताओं को नोटिस भेजकर 10 दिनों के अंदर जवाब माँगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़े शब्दों में प्रज्ञा के बयान की निंदा की है। पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा कि भले ही प्रज्ञा ने माफी माँग ली है, लेकिन वो कभी उन्हें दिल से माफ नहीं कर पाएँगे।