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मतदान बाद EVM को लाल चुनरी से सील कर उसे पवित्र धागे से बाँधा जाए: विपक्ष का छोटा पंडित

ईवीएम की महिमा अपरम्पार है। ईवीएम महान है। ईवीएम आज किसी भी समयकाल में सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसे लेकर तरह-तरह के दावे हो रहे हैं। इन दावों को सुन कर लगता है कि जैसे ये मशीन न होकर कोई किसी रोबोट रूपी देवता का अवतार हो। जैसे भवान विष्णु ने राम के रूप में धरती पर क़दम रखा था और उनके विश्वस्त शेषनाग ने लक्षमण के नाम से अवतरित होकर उनके छोटे भाई का किरदार अदा किया था, ठीक वैसे ही मोदी और ईवीएम का भी कोई रिश्ता है। हो सकता है मोदी भी किसी ऐसे देवता के अवतार हों, जिनके विश्वस्त और वफ़ादार ने ईवीएम का रूप लेकर धरा पर क़दम रखा हो। मोदी और ईवीएम के रिश्ते समझने के लिए विपक्षी नेताओं के दावों, बयानों और डर को समझना पड़ेगा। मोदी न तो वैज्ञानिक हैं और न ही कोई तकनीकी विशेषज्ञ, फिर भी ईवीएम उनके इशारों पर नाचता है।

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार अभी देश के सबसे वरिष्ठ, अनुभवी और माहिर नेताओं में से एक रहे हैं। अगर वो कुछ कहते हैं तो ध्यान से सुना जाना चाहिए। पिछले पॉंच दशकों से भी अधिक समय से देश की चुनावी राजनीति में सक्रिय पवार ने बारामती में वोट गिराने के बाद एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि एक्सपेरिमेंट के तौर पर हैदराबाद में ‘कुछ लोगों’ ने उनके सामने एक ईवीएम रखा और वोट डालने को कहा। जब उन्होंने अपनी पार्टी का बटन दबाया तो वोट भाजपा को चला गया। अब ‘कुछ लोगों’ ने पवार के सामने ‘क्या’ पेश किया था, ये तो वो ही लोग जानें, लेकिन एक बात तो साफ़ है कि पवार को दक्षिण मुंबई संसदीय क्षेत्र में ऐसी कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा होगा।

पवार ने साउथ मुंबई लोकसभा क्षेत्र में मतदान किया। यहाँ न तो एनसीपी के प्रत्याशी खड़े हैं और न ही भाजपा के। इस सीट पर लड़ाई शिवसेना के अरविन्द गणपत सावंत और कॉन्ग्रेस के मिलिंद देवड़ा में है। पवार को निश्चिन्त रहना चाहिए क्योंकि साउथ मुंबई में उनका वोट भाजपा को जा ही नहीं सकता है। आगे बढ़ते हैं। कभी वाईफाई से ईवीएम हैक करने की बात कही गई, तो कभी ब्लूटूथ से ईवीएम को नियंत्रित करने की अफवाह उड़ी। क्या अगर कोई व्यक्ति अपने ब्लूटूथ डिवाइस का नाम ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ रख लेना तो यह माना जाए कि वह यहाँ दिल्ली के साकेत में अपने चार बाई चार के कमरे में बैठे-बैठे अमेरिका के राष्ट्रपति को अपनी उँगलियों पर नचा रहा है?

अगर नियंत्रण करने की ही बात है तो उसके लिए वाईफाई और ब्लूटूथ की ज़रूरत नहीं होती। सोनिया और मनमोहन को ही उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है। ऐसी हैकिंग आज तक नहीं देखी गई। कुछ दिनों बाद हो सकता है कि विपक्ष को ये भी लगने लगे कि मोदी तंत्र साधना कर के ईवीएम को हैक कर रहे हैं। इधर मोदी ने केदारनाथ की गुफा से ध्यान लगाया और उधर ईवीएम के सारे वोट भाजपा को ट्रांसफर। खटैक! तो फिर ऐसे हालात में विपक्ष को क्या करना चाहिए? उपाय क्या है? जब आरोप फ़िल्मी लग रहे हैं तो उपाय भी फ़िल्मी ही होना चाहिए। कहते हैं मंत्र-तंत्र में हर समस्या का समाधान है। क्या पता मोदी ने ईवीएम के भीतर कोई पिशाच छोड़ दिया हो?

भूल-भुलैया फ़िल्म में ‘छोटा पंडित’ ने महल में भूत को कंट्रोल करने के लिए एक कमरे को विशेष मन्त्रों द्वारा सील करने की कोशिश की थी। विपक्षी नेताओं को भी कोई ऐसा ही तांत्रिक हायर करना चाहिए, छोटा पंडित की तरह। चुनाव आयोग से माँग की जानी चाहिए कि ईवीएम को मतदान के तुरंत बाद लाल चुनरी में लपेट कर उसे विशेष लॉकेट और पवित्र धागों का प्रयोग कर के सील करना चाहिए, ताकि मोदी द्वारा हायर किए गए भूत-पिशाच वोटों की हेराफेरी न कर सकें। या फिर विज्ञान में विश्वास रखने वाले विपक्ष के नेता भूल-भुलैया के अक्षय कुमार की तरह विदेश से किसी मनोचिकित्सक को बुलाना चाहिए, जो ईवीएम में से इन गड़बड़ियों को दूर कर सके।

चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर अगर आपको विश्वास नहीं है तो कुछ लीक से हटकर उपाय करने पड़ेंगे। अगर ईवीएम सेक्युलर है और वामपंथियों को मंत्र-तंत्रों में विश्वास नहीं है तो अजमेर शरीफ दरगाह से ताबीज़ लाकर उसे बाँधा जा सकता है। चुनाव आयोग को एक ज्ञापन दिया जाना चाहिए कि प्रत्येक ईवीएम को प्रयोग किए जाने से पहले जामा मस्जिद के इमाम और देवबंद के मुफ़्ती से सभी मशीनों का प्रमाणीकरण कराना चाहिए, इससे मतगणना के समय किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ कर सम्बंधित फतवा जारी किया जा सकता है। अधिक सेक्युलर वामपंथी यह माँग कर सकते हैं कि चुनाव से पहले मतदानकर्मियों द्वारा ईवीएम लेकर चर्च में ‘वैसा वाला’ पागलपन किया जाए, जिसके वीडिओज़ अक्सर वायरल होते रहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन्हें बार-बार निराश किया जा रहा है। ‘सबसे बड़े दलित नेता’ उदित राज ने तो सुप्रीम कोर्ट को ही खरी-खोटी सुनाई है। चुनाव आयोग तो भला कई दिनों से इनकी गालियाँ खा रहा है। जिस चुनाव आयोग की विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा होती है, उसी चुनाव आयोग की अपने ही देश में हर मिनट आलोचना हो रही है, आरोप लगाए जा रहे हैं और अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा लाख समझाने के बावजूद विधानसभा में खिलौनों को हैक कर ईवीएम को हैक करने का दावा करने वाले नेता अड़े हुए हैं। फिर उपाय ही क्या बचता है? नकाबपोश सूजा ईवीएम को लेकर अजीबोगरीब दावे कर ईवीएम एक्सपर्ट बन बैठा है।

अगर इतनी गंभीर और तथ्यपरक बातें उन्हें समझ नहीं आ रही हैं तो इसका सीधा अर्थ है कि विपक्षी नेताओं को लगता है कि कुछ अजीब हुआ है। हो सकता है उन्होंने ‘तिरंगा’ फ़िल्म देख रखी हो। गैंडास्वामी की मिसाइलों का फ्यूज निकाल कर राजकुमार ने दुश्मन के इरादों को तबाह कर दिया था। कहीं मोदी भी कुछ ऐसा ही तो नहीं कर रहे? कहीं वो मतदान के बाद डायरेक्ट ईवीएम के सारे फ्यूज ही तो नहीं निकाल लेते हैं, तिरंगा वाले राजकुमार की तरह। या फिर ऐसे विपक्षी नेता, जिन्हें वीवीपैट पर भी विश्वास नहीं है और वो अलग ही लेवल पर पहुँच चुके हैं, उनके लिए आयोग को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।

ऐसे नेताओं को ईवीएम का नट-बोल्ट खोलने के लिए पेचकस और पिलास दे देना चाहिए ताकि वे वोट देने के बाद ईवीएम को खोलें और अंदर झाँक कर देख सकें कि आख़िर उनका वोट गया कहाँ, किस पार्टी को गया। ये नेता वोट देने के बाद ईवीएम को खोलेंगे, झाँक कर देख लेंगे कि उनका वोट इच्छित पार्टी को गया है या नहीं और फिर उसे वापस पेचकस से कस सकते हैं। नेताओं को लगता है कि ईवीएम के भीतर तार हैं और वो तार सीधे मोदी से जुड़े हुए हैं। कहावत सच्चाई का रूप ले रही है। छोटा पंडित वाला उपाय किया जाए, मजार से ताबीजें लाई जाए या फिर ये तिरंगा वाला मामला है, ये तो समय विपक्षी नेताओं को ही तय करना चाहिए।

UP पुलिस का खौफ: किडनैपर ने पुलिस को देखकर खुद को मार ली गोली

कभी सपा के जंगलराज में भागीदार के रूप में बदनाम रही यूपी की पुलिस ने अपराधियों में आज कैसा खौफ बैठा दिया है, इसकी एक बानगी अभी-अभी सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में एक बिजनेसमैन के बच्चे को अगवा करने वाले अपराधी ने उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में आने के डर से खुद को गोली मार ली है। अपराधी उस बिजनेसमैन का ही पूर्व ड्राइवर बताया जा रहा है।

ट्वीट करने वाले राज शेखर झा टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार हैं। उनके अनुसार बिजनेसमैन से ₹3 करोड़ की फिरौती माँगी गई थी। उन्होंने पुलिस को इत्तला कर दी, और पुलिस ने उस किडनैपर को ढूँढ़ निकाला। बच्चे को उसके परिवार के पास सुरक्षित पहुँचा दिया गया है।

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ के प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद से यूपी की कानून व्यवस्था में काफी सुधार आया है। पुलिस के 63 दुर्दांत अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराने और 650 को घायल करने के बाद लगभग 10,000 ने अपनी जमानत रद्द करा कर जेल लौटने में ही भलाई समझी।

90 करोड़ वोटर लेकिन गायब हो गए 400 करोड़ के वोट – मीडिया गिरोह मिर्गी के कगार पर

हमने एग्जिट पोल के दिन ही बताया था कि कैसे आसन्न हार के डर से नेताओं से ज्यादा पत्रकारिता के समुदाय विशेष के मुँह से झाग निकलना शुरू हो गया है। और अब जबकि मतदान का परिणाम घोषित होने में बमुश्किल एक दिन बचा है, तो इनकी हालत और गंभीर होती जा रही है। झूठा नैरेटिव बनाना तो इनकी फितरत ही है, लेकिन अब यह आँकड़े भी अनर्गल बनाने पर उतारू हो गए हैं। सबा नकवी ने 20 लाख EVM मशीनें गायब होने का दावा करते हुए शेयर किया:

आज गणित भूले हैं, कल क्या भाषा भी भूल कर अब्बा-जब्बा-डब्बा करेंगे ये लोग?

यह रिपोर्ट ‘जनता का रिपोर्टर’ नामक प्रोपेगैंडा ब्लॉग की है, जिस पर अकसर आम आदमी पार्टी का अघोषित मुखपत्र होने के आरोप लगते हैं। अब बाकी सब चीज़ें छोड़ कर खाली 20 लाख के दावे को देखें। 1 EVM में 2,000 वोट रिकॉर्ड करने की क्षमता होती है। यानी 20 लाख EVM निर्वाचन आयोग के पास होने का अर्थ हुआ 20,00,000 X 2,000 यानी कि 400 करोड़ वोट!

अब जरा सबा नकवी बताएँगी कि निर्वाचन आयोग कुल 90 करोड़ की वोटिंग आबादी, जिसमें से एक-तिहाई कभी भी वोट डालने नहीं निकले (अब तक का उच्चतम मतदान प्रतिशत 67 प्रतिशत के आसपास है), में भला क्यों कुल वोटरों की संख्या के साढ़े चार गुना EVM का इंतजाम करेगा। मोदी विरोध में यह लोग दिमाग से इतने पैदल हो चुके हैं कि प्राइमरी स्कूल स्तर की गणित भी सर के ऊपर से उड़ रही है। पत्रकारिता के समुदाय विशेष को सच में हिमालय जाकर अपनी मानसिक स्थिति का इलाज कराना चाहिए।

22 विपक्षी पार्टियों को चुनाव आयोग का झटका, VVPAT मिलान में नहीं होगा कोई बदलाव

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल के आँकड़ों से डरी-सहमी असंतुष्ट विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाए जाने को लेकर बुधवार को चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला दिया। चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों को उस माँग को खरिज कर दिया जिसमें वोटों की गिनती से पहले वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग की गई थी। चुनाव आयोग ने कहा कि वीवीपैट के मिलान की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। हर विधानसभा की 5 वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से मिलान होगा।

ईवीएम एवं वीवीपीएटी के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कॉन्ग्रेस सहित 22 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को चुनाव आयोग से यह आग्रह किया था कि मतगणना से पहले चुनिंदा मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान की माँग की थी।

बता दें कि विपक्षी नेताओं की बैठक में कॉन्ग्रेस से अहमद पटेल, अशोक गहलोत, गुलाम नबी आजाद और अभिषेक मनु सिंघवी, माकपा से सीताराम येचुरी, तृणमूल से डेरेक ओब्रायन, तेदेपा से चंद्रबाबू नायडू, आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, सपा से रामगोपाल यादव, बसपा से सतीश चंद्र मिश्रा एवं दानिश अली, द्रमुक से कनिमोई, राजद से मनोज झा, राकांपा से प्रफुल्ल पटेल एवं माजिद मेमन और कई अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए थे। जिनकी माँग को चुनाव आयोग ने ख़ारिज कर दिया।

इससे पहले मंगलवार को चुनाव आयोग ने मतदान के बाद ईवीएम को मतगणना स्थलों तक पहुँचाने में गड़बड़ी और उनके दुरुपयोग को लेकर विभिन्न इलाकों से मिली शिकायतों को शुरुआती जाँच के आधार पर गलत बताते हुए कहा था कि मतदान में प्रयोग की गई ईवीएम और वीवीपैट मशीनें ‘स्ट्रांग रूम’ में पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इस बीच चुनाव आयोग के दिल्ली स्थित मुख्यालय में ईवीएम संबंधी शिकायतों के तत्काल निस्तारण के लिए एक कंट्रोल रूम ने भी मंगलवार से काम करना शुरु कर दिया।

आयोग द्वारा जारी बयान के मुताबिक, निर्वाचन सदन से संचालित कंट्रोल रूम चुनाव परिणाम आने तक 24 घंटे कार्यरत रहेगा। इसके जरिए ईवीएम की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि इससे पहले, चुनाव आयोग ने मतदान में इस्तेमाल की गई मशीनें, 23 मई को हो रही मतगणना से पहले नई मशीनों से बदलने के आरोपों और शिकायतों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताकर खारिज कर दिया था।

BREAKING: IAF-राफेल की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम में सेंध की कोशिश, पेरिस की वारदात

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रविवार रात को भारतीय वायुसेना के राफ़ेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम में घुसपैठ की केशिश की गई है। यह कोशिश पेरिस के इलाक़े में हुई जिस पर भारतीय रक्षा मंत्रालय अपनी नजर रखे हुए है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, एक भारतीय टीम जिसका नेतृत्व ग्रुप कैप्टन रैंक के अफ़सर कर रहे हैं, वो भारतीय वायु सेना के लिए निर्माणाधीन 36 राफ़ेल जेट के प्रोडक्शन और भारतीय लोगों की ट्रेनिंग की देख-रेख कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय को इसकी जानकारी दे दी गई है।

‘चौकीदार’ बने सपा-बसपा के कार्यकर्ता, टेंट लगा कर और दूरबीन लेकर कर रहे हैं रतजगा

भाजपा नेताओं ने जब से अपने नाम के आगे चौकीदार लगाना शुरू किया है, तब से इस शब्द के चर्चे चारों तरफ हैं। ट्विटर पर ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने नाम में चौकीदार लगाने के बाद लाखों भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने नाम में चौकीदार शब्द जोड़ लिया। लेकिन ख़बरों के मुताबिक, असली चौकीदारी तो सपा और बसपा के कार्यकर्ता कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सातवें और अंतिम चरण के मतदान के बाद चुनाव संपन्न हुए। उसके बाद ईवीएम को वज्रगृहों (Strongrooms) में रखा जाता है। ईवीएम बदलने से लेकर उसमें छेड़छाड़ करने तक की कई अफवाहों के बाद यूपी महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने चौकीदार का काम अपने ज़िम्मे ले लिया है और वे ईवीएम वज्रगृहों के आसपास मंडरा रहे हैं।

वज्रगृहों के आसपास सपा-बसपा कार्यकर्तागण टेंट बना कर पहरेदारी कर रहे हैं। उनके पास दूरबीन भी है, जिससे वह वहाँ आने-जाने वालों पर दूर से ही नज़र रख रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, मेरठ में ऐसे ही एक वज्रगृह के पास तनाव का माहौल है। यहाँ दो टेंट बनाए गए हैं और सपा-बसपा समर्थक 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट बना कर वज्रगृह की चौकीदारी का ज़िम्मा संभाल रहे हैं (आधिकारिक या सरकारी तौर पर नहीं)। उन्हें डर है कि ईवीएम को बदला जा सकता है और इनमें गड़बड़ियाँ की जा सकती हैं, इसीलिए ये चौकन्ने हैं।

बसपा जिलाध्यक्ष सुभाष प्रधान ने TOI को बताया कि उन्होंने 11 अप्रैल को पोलिंग ख़त्म होने के कुछ ही घंटों बाद वहाँ टेंट स्थापित किया और तभी से वे निगरानी पर लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि निगरानी दल के मुख्य समूह में महागठबंधन में शामिल तीनों दलों (सपा, बसपा, रालोद) के 18 कार्यकर्ता शामिल हैं। उन्हें पास दिया गया है, जिसके कारण वे ईवीएम वज्रगृह के पास लगे बैरिकेड्स के पास जा सकते हैं। टेंट्स के भीतर बैठने व आराम करने के लिए गद्दियाँ रखी गई हैं। गर्मी के कारण कूलर भी लगाया गया है। टेंट में चुनाव को लेकर लगातार चर्चाएँ चल रही हैं।

अव्वल तो यह कि इन्होंने सीसीटीवी भी लगा रखे हैं। एक अतिरिक्त टेंट में मॉनिटर स्क्रीन लगाया गया है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज पर लगातार नज़र रखी जा रही है और हर आने-जाने वालों पर गौर किया जा रहा है। अगर उन्हें आसपास कुछ भी ‘संदिग्ध’ दिखता है तो वे स्थानीय सीनियर पार्टी नेताओं को सूचित करते हैं, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों से शिकायत की जाती है। नाइट विजन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर के रात में भी आसपास की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है। ये टेंट्स ईवीएम वज्रगृहों से 200 मीटर की दूरी पर हैं, इसीलिए दूरबीन का प्रयोग किया जा रहा है।

पिछले कुछ दिनों में ईवीएम को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। लोग ईवीएम से भरी गाड़ियों के वीडियो पोस्ट कर दावा कर रहे हैं कि भाजपा ईवीएम बदल रही है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने ऐसे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि ईवीएम को लेकर सारी जानकारियाँ प्रत्याशियों को पहले ही दे दी जाती हैं, अतः ये संभव नहीं है।

बरखा दत्त का दु:ख : ‘मेनस्ट्रीम मीडिया अब चुनावों को प्रभावित नहीं कर पाएगा’

अनुभवी पत्रकार बरखा दत्त ने कॉन्ग्रेस मीडिया पैनलिस्ट शमा मोहम्मद के साथ अपनी हालिया बातचीत में इस बात पर अपना ग़़ुस्सा और पीड़ा व्यक्त की कि मुख्यधारा का मीडिया अब चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाएगा।

कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल समर्थित HTN तिरंगा टीवी पर शमा मोहम्मद और AAP नेता योगेंद्र यादव के साथ बातचीत करते हुए, बरखा ने कहा कि चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने में सक्षम होने के मामले में मीडिया बिल्कुल अप्रासंगिक हो रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मीडिया के साथ जुड़ने के लिए सभी राजनेताओं ने चीखने-चिल्लाने के लिए अपने स्वयं के तंत्र को विकसित कर लिया है। मैं आपसे वादा करती हूँ कि यह कहने पर एक पत्रकार के रूप में मुझे ख़ुशी नहीं होगी। लेकिन मेरा मानना ​​है कि मुख्यधारा का मीडिया आज इस देश में एक मतदाता के वोट को प्रभावित करने में सक्षम होने के लिए पूरी तरह से अप्रासंगिकता की ओर बढ़ रहा है।” अपनी बात को दोहराते हुए बरखा ने कहा, “मैं सचमुच इस पर विश्वास करती हूँ।”

‘मतदाताओं पर प्रभाव’ के अलावा, राजनेताओं को प्रभावित करने और उनकी पैरवी करने का भी आरोप पत्रकारों पर है।

जुलाई 2009 में, लीक हुए ऑडियो टेप, जिन्हें ‘राडिया टेप्स’ के नाम से जाना जाता है, उससे पता चला था कि नैरेटिव कैसे सेट किया जाता है। बरखा दत्त और नीरा राडिया के बीच हुई बातचीत के टेप के अनुसार, राडिया केंद्रीय आईटी और संचार मंत्री के पद पर दयानिधि मारन की फिर से नियुक्ति के ख़िलाफ़ पैरवी कर रही थीं और बरखा ने सक्रिय रूप से गतिरोध समाप्त करने और केंद्र में सरकार बनाने के लिए दोनों दलों के बीच सक्रियता से मध्यस्थता की थी।

पैनल इस बात पर चर्चा कर रहा था कि क्या एग्जिट पोल (2019), जो नरेंद्र मोदी के लिए एक शानदार जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं, सही हैं और क्या वह रिकॉर्ड जीत के लिए तैयार हैं? बरखा ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि अगर एक्जिट पोल के आँकड़ें सही साबित हुए, तो यह कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘अस्तित्व पर संकट’ साबित हो सकता है। बरखा कॉन्ग्रेस के पैनलिस्ट शमा मोहम्मद से बात कर रही थीं जिसमें कॉन्ग्रेस द्वारा तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़) की जीत का ज़िक्र किया और कहा कि वो बहुत कम अंतर से जीते हुए राज्य थे।

शमा मोहम्मद ने कॉन्ग्रेस का बचाव करने की कोशिश करते हुए कहा कि 2014 तक, “बरखा और कुछ अन्य” को छोड़कर कोई भी ‘मीडिया’ नहीं था। वह कहती हैं, ”विपक्ष द्वारा हमसे पूछताछ की गई। हमसे नीतिगत पक्षाघात के लिए पूछताछ की गई। भ्रष्टाचार के आरोपों के ख़िलाफ़ हमसे पूछताछ की गई। निर्भया के लिए हमसे पूछताछ की गई। हमारे पास कठुआ एक मुद्दा था जो निर्भया के लगभग बराबर था। क्या कुछ लोगों के अलावा किसी ने सवाल किया? उन्होंने (मोदी) इसके ख़िलाफ़ एक शब्द भी नहीं कहा। हमसे पूछा गया कि मनमोहन सिंह चुप क्यों थे? शीला दीक्षित चुप क्यों थी? श्रीमती गाँधी ने हवाई अड्डे पर निर्भया की अगवानी की। कठुआ के लिए क्या किया गया?”

कॉन्ग्रेस के पैनलिस्ट यह भूल गए कि 2014 में, कॉन्ग्रेस सत्ता पक्ष थी, न कि विपक्ष। इसलिए, नीतिगत पक्षाघात और भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सवाल ‘विपक्ष’ पर नहीं, बल्कि वास्तव में पार्टी को सत्ता में लाने के लिए थे। इसके बाद शमा मोहम्मद क्रूर बलात्कार के मामलों का राजनीतिकरण करती हैं और वो दोनों मामलों की तुलना करने से भी नहीं चूकतीं।

शमा मोहम्मद ने उत्तर भारतीय राज्यों में कॉन्ग्रेस के ख़राब प्रदर्शन की वजह दक्षिण भारत के लोगों की तरह शिक्षित नहीं होना बताया था। इससे यह बात साफ़ है कि वो उत्तर भारत के लोगों को दक्षिण भारत के लोगों से कमतर समझती हैंं।

36 दलों के नेताओं ने दिल्ली पहुँच BJP का किया समर्थन, ₹100 लाख करोड़ निवेश का लिया संकल्प

मतगणना से ठीक पहले राजग के सभी घटक दलों ने एक मंच पर आकर शक्ति प्रदर्शन किया है। इन दलों में उत्तर-पूर्व के वो दल भी शामिल हैं, जिन्होंने राजग के समर्थन से मोर्चा (नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) बनाया हुआ है। राजधानी दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सहयोगी दलों के लिए होटल अशोक में डिनर का आयोजन किया, जिसमें 36 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने शिरकत की। 3 अन्य पार्टियों ने पत्र भेज कर समर्थन जताया। इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सम्मिलित हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल की प्रशंसा की गई और सभी दलों ने राजग सरकार की योजनाओं को लेकर संतुष्टि जताई। एग्जिट पोल्स में राजग को बहुमत मिलता दिख रहा है।

पहले कहा जा रहा था कि इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल नहीं होंगे लेकिन भाजपा ने शिवसेना, जदयू और अकाली दल, तीनों बड़े घटक दलों के अध्यक्षों की मौजूदगी से यह जताने की कोशिश की कि राजग में सब कोई साथ हैं। नीतीश कुमार, उद्धव ठाकरे और प्रकाश सिंह बादल की मौजूदगी से भाजपा को आत्मबल मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजग गठबंधन भारत की विविधता का प्रतीक है और उसका सम्मिलित अजेंडा भारत का विकास है। पीएम ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए राष्ट्र के विकास की बात कही। राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैठक में चर्चा की गई बातों की जानकारी दी।

राजग की बैठक में कई संकल्प लिए गए, जिसे भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘संकल्प पत्र‘ के रूप में जारी किया गया। संकल्प पत्र में कहा गया कि विपक्षी दलों के शासनकाल के दौरान आतंकी हमले और इनकी पुनरावृत्ति इतिहास बन कर रह गई है। मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने वाले निर्णय को लेकर भी राजग गठबंधन ने ख़ुद की पीठ थपथपाई। संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष द्वारा हमले किए जाने को लेकर चिंता जताई गई। गठबंधन ने पश्चिम बंगाल और केरल हुई राजनीतिक हिंसा की निंदा की। इस संकल्प पत्र में कहा गया है:

“आने वाले वर्षों में, हमने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 100 लाख करोड़ रुपए की पूंजी निवेश की योजना बनाई है, जिसमें 25 लाख करोड़ रुपए खेती और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समर्पित होंगे। हम चाहते हैं कि भारत तेजी से विकास के लिए आधुनिक और पर्याप्त बुनियादी ढाँचे के साथ दुनिया में सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम बन जाए। इन क़दमों के साथ भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।”

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर राजग को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलता है तो ओडिशा में बीजद, आंध्र में आईएसआर और तेलंगाना में टीआरएस जैसी पार्टियाँ भाजपा को अपना समर्थन दे सकती हैं। फोनी तूफ़ान के बाद हुए राहत कार्यों की समीक्षा के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पीएम मोदी के बीचा अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली थी। तेलंगना के मुख्यमंत्री केसीआर ने अभी तक कॉन्ग्रेस को समर्थन नहीं दिया है और वह तीसरे मोर्चे की ही वकालत करते रहे हैं। आंध्र में बड़ी ताक़त बन कर उभरे जगन मोहन रेड्डी द्वारा शरद पवार का फोन कॉल न उठाया जाना भी चर्चा का विषय है।

‘Tit For Tat’ होगा, एकदम तैयार हैं: कुशवाहा के ख़ून बहाने की धमकी पर बोले रामविलास पासवान

लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बिगड़े बोल पर प्रतिक्रया देते हुए कहा, “जैसे को तैसा।” रामविलास पासवान और राजनाथ सिंह राजग के 36 घटक दलों की बैठक बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। एक न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर ने जब केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री रामविलास पासवान से ‘विपक्ष द्वारा हिंसा फैलाने की साज़िशों’ को लेकर सवाल पूछा तो रामविलास पासवान ने कहा कि वे भी तैयार हैं। पासवान ने फिर मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि राजग के नेता भी मिठाई और फूल लेकर जीत की ख़ुशी मनाने के लिए तैयार बैठे हैं। जब रामविलास पासवान ये बातें बोल रहे थे, तब केंद्र गृह मंत्री राजनाथ सिंह उनका हाथ थामे खड़े थे।

बता दें कि रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार (मई 22, 2019) को धमकी भरे अंदाज़ में कहा था कि लोगों में इस समय आक्रोश है और ऐसे में अगर ‘रिजल्ट लूटने’ की घटना हुई तो सड़कों पर खून बहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से हथियार उठाने के लिए तैयार रहने को भी कहा है। साथ में उन्होंने कहा था कि अगर ऐसी कोई हिंसा होती है तो उसके लिए बिहार और केंद्र की सरकार जिम्मेदार होंगे। राजग की बैठक के बाद विपक्षी नेताओं की तरफ़ से आ रहे ऐसे ही बयानों को लेकर दोनों केंद्रीय मंत्रियों (रामविलास पासवान और राजनाथ सिंह) से सवाल पूछे गए।

ज्ञात हो कि राजधानी दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सहयोगी दलों के लिए होटल अशोक में डिनर का आयोजन किया, जिसमें 36 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने शिरकत की। 3 अन्य पार्टियों ने पत्र भेज कर समर्थन जताया। इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल की प्रशंसा की गई और सभी दलों ने राजग सरकार की योजनाओं को लेकर संतुष्टि जताई।

रामविलास पासवान बिहार में भाजपा के अहम सहयोगी हैं। राज्य में भाजपा ने चुनाव से पहले नीतीश कुमार की जदयू और पासवान की लोजपा के साथ सीटों का समझौता सफलतापूर्वक पूरा किया। उपेंद्र कुशवाहा ने 4 वर्ष सरकार में शामिल होकर अंत में राजग से किनारा कर लिया। वह अभी बिहार में विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं। पाँच पार्टियों की इस गठबंधन में कॉन्ग्रेस, राजद, वीआईपी, हम (HAM) और रालोसपा शामिल हैं। एग्जिट पोल में राजग एक बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है, जबकि महागठबंधन चारों खाने चित हो जाएगा।

‘माँ’ की लाश, बगल में 1 साल की बच्ची और 4 दिन की ‘जंग’: चमत्कार है गुड़िया का बचना

बागपत के अस्पताल में भर्ती एक साल की गुड़िया का जीवन किसी वरदान से कम नहीं। बच्ची के सिर पर पट्टी बँधी है। वो पिछले चार दिनों से भूख-प्यास की जंग जीतकर अस्पताल तक लाई गई। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, इस बच्ची को अस्पताल में लाए हुए चार दिन हो गए हैं। इसकी माँ कौन है, नहीं पता। यह बच्ची खुद कौन है, नहीं पता। कहानी बहुत मार्मिक है इस बच्ची की।

उत्तर प्रदेश के बागपत के एक खेत में एक महिला की लाश मिली। लाश चार दिन पुरानी, सड़ी-गली। लाश के पास ही यह एक साल की बच्ची चार दिनों तक भूख-प्यास से लड़ती रही। इस बीच दो दिनों की बारिश भी झेली, बादलों की गर्जना भी। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि मृतका शायद इस बच्ची की माँ है। पुलिस के अनुसार, बच्ची और माँ पर किसी नुकीली चीज से हमला किया गया था।

ख़बर के अनुसार, जब मृतका का शरीर सड़ने-गलने लगा, बारिश थम गई लेकिन भूख-प्यास हावी हुआ तो यह बच्ची रेंगते हुए, माँ का मोह छोड़ते हुए खेत से बाहर एक मंदिर के पास जा पहुँची। यहाँ कुछ भक्तों की नज़र इस बच्ची पर गई। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी और बच्ची को अस्पताल तक पहुँचाया।

फ़िलहाल, बच्ची और माँ की पहचान का ख़ुलासा नहीं हो सका है, इसलिए अस्पताल के कर्मचारियों ने इस मासूम बच्ची को ‘गुड़िया’ नाम दे दिया। बड़ौत पुलिस स्टेशन की महिला कॉन्स्टेबल, रेखा नागर को इस बच्ची की देखभाल का ज़िम्मा सौंपा गया है।

रेखा नागर ने बताया, “मैं सुबह लगभग 10 बजे आती हूँ और रात को 9 बजे तक जाती हूँ। गुड़िया एक बहादुर और प्यारी बच्ची है। वह बच गई है और हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह बेहतर हो जाएगी। गुड़िया को पहले दिन लाने के बाद से उसकी स्थिति में सुधार हुआ है।” रेखा नागर खुद भी माँ हैं। उनका एक 5 साल का बच्चा भी है।

बागपत के आस्था मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि गुड़िया के माथे के बाएँ हिस्से में किसी नुकीली चीज से चोट के कारण घाव हो गया था। आस्था अस्पताल के डॉक्टर अजय गर्ग ने कहा, “हमने एक सीटी स्कैन किया और पाया कि बच्ची की सिर की हड्डी की संरचना को भी नुकसान पहुँचा है। यह एक प्रकार की चोट है, जिसे देखकर लगता है कि उसके सिर पर चोट की गई हो। सिर के घाव में संक्रमण के कारण, हम उसमें टाँके नहीं लगा सके। लेकिन, हमे उम्मीद है कि चोट जल्द ठीक हो जाएगी।”

इसके अलावा डॉक्टरों ने यह बताया कि बच्ची के शरीर में कीड़ों की वजह से संक्रमण हो गया था। नर्सों के अनुसार, वह भर्ती होने के बाद कई घंटों तक बेहोश रही और जागने के तुरंत बाद वह दूध और पानी की पूरी बोतल पी गई। इससे पता चलता है कि वो बहुत भूखी-प्यासी थी। डॉक्टरों ने बच्ची के घाव को ठीक करने के बाद एंटीबायटिक दवाओं का इस्तेमाल करके फैले संक्रमण का इलाज करने की योजना बनाई है, क्योंकि कीड़ों की वजह से गुड़िया को काफी नुकसान पहुँचा है।

कई लोग इस मासूम बच्ची को गोद लेना चाहते हैं। इसके लिए वो बाल कल्याण आयोग से भी संपर्क कर रहे हैं।

पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मृतका और बच्ची की पहचान का ख़ुलासा अब तक नहीं हो सका है। पुलिस ने अपनी कोशिशों में 25 गाँवों में पूछताछ की और ग्राम प्रधानों को महिला की तस्वीर भी दिखाई बावजूद इसके उन्हें कोई क़ामयाबी नहीं मिल सकी। दिल्ली से दो व्यक्ति एक बच्चे के बारे में पूछ रहे थे, लेकिन गुड़िया उनके बताए विवरण से मेल नहीं खाती है। महिला की हत्या की जाँच करने वाले अधिकारी धर्मेंद्र संधू ने बताया कि स्थानीय मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुपों पर बच्ची के संबंध में संदेश भेजे गए हैं। ताकी जल्द से जल्द इनकी पहचान उजागर हो सके।