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चुनाव परिणामों को लेकर AAP नेता ने दी दंगों, गृह युद्ध की धमकी

ग्रेटर कैलाश से आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भरद्वाज ने लोकसभा निर्वाचन 2019 के नतीजों पर गृह युद्ध और भारी संख्या में दंगों की धमकी दी है। इसका ठीकरा भी उन्होंने निर्वाचन आयोग के ही सर फोड़ने की कोशिश की है। इसी मामले के लिए उन्होंने आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की भी घोषणा की थी जो अभी तक हुई नहीं है।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि अगर निर्वाचन आयोग पहले जीतने और हारने वाले की घोषणा कर देगा और इसके बाद VVPAT वाला मिलान करेगा (और इस मिलान में कहीं नतीजा उलट गया तो) तो इससे पहले हार और जीत चुके नेताओं और उनके समर्थकों के नए नतीजों को न मानने की आशंका है। इस निर्णय से देश में गृहयुद्ध और भारी संख्या में दंगे होंगे।

कपिल मिश्र और तेजस्वी सूर्या ने लिया आड़े हाथों

सौरभ भरद्वाज के इस बयान को सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के ही विधायक कपिल मिश्र और भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने उन्हें सोशल मीडिया पर घेरते हुए इस बयान की आलोचना की है।

दंगों की धमकी दे रहे नेताओं की बाढ़

19 मई को मतदान समाप्त होने और एग्जिट पोल के नतीजों में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के अनुमान के बाद से विपक्षी नेताओं में हिंसा की धमकी की बाढ़ सी आ गई है। पहले रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मनमुताबिक परिणाम न आने पर सड़कों पर खून बहाने की धमकी दी, फिर सीताराम येचुरी ने कानून व्यवस्था की चिंता की आड़ लेकर यही प्रयास किया, और अंत में गृह मंत्रालय को कल परिणामों की घोषणा के समय भारी हिंसा की आशंका को देखते हुए सभी राज्यों को हाई अलर्ट जारी करना पड़ा।


‘सबसे बड़े दलित नेता’ उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट पर लगाया धाँधली का आरोप, EVM से हैं नाराज़

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने अपनी पार्टी व विपक्ष की परम्पराओं को आगे बढ़ाते हुए अब सीधा सुप्रीम कोर्ट पर ही हमला बोला है। उदित राज ने ट्विटर के माध्यम से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट आख़िर क्यों नहीं चाहता कि सारे ईवीएम के साथ वीवीपैट पर्चियों का मिलान हो? इसके बाद उन्होंने देश की शीर्ष अदालत पर ही कथित धाँधली में शामिल होने का आरोप लगा दिया। उदित राज ने साथ ही मतगणना की प्रक्रिया को और लम्बी खींचने की पैरवी करते हुए कहा कि ऐसे भी इतने महीनों से सरकारी काम-काज ठप्प पड़ा है, 2-3 दिन और सही। उदित राज का विवादस्पद बयान देने का पुराना रिकॉर्ड रहा है और कॉन्ग्रेस में शामिल होने के बाद वह नित नए रिकार्ड्स बना रहे हैं।

इससे पहले उदित राज ने कहा कि चुनाव आयोग बिक चुका है और लोगों को सड़क पर निकल कर आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने देश को ‘अंग्रेजों के ग़ुलाम’ से बचाने की अपील की। इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा भी ख़ूनख़राबे की धमकी दे चुके हैं। वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने भी क़ानून व्यवस्था बिगड़ने की धमकी दी है। कुशवाहा के बिगड़े बोल पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि ‘जैसे को तैसा‘ जवाब दिया जाएगा। नेताओं द्वारा ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग व सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी माँगे ठुकराए जाने के बाद लगातार धमकी भरे बयान दिए जा रहे हैं।

विपक्ष की माँग थी कि सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़, प्रति विधानसभा पाँच बूथ के ईवीएम और वीवीपैट का मिलान किया जाना है। विपक्ष लगातार अपनी माँग पर अड़ा हुआ है और चुनाव आयोग से मतगणना प्रक्रिया में बदलाव करने को कह रहा है, जिसे नकार दिया गया है।

हाल ही में उदित राज ने ट्विटर पर लिखा कि केरल में भाजपा आज तक एक भी सीट इसीलिए नहीं जीत पाई क्योंकि वहाँ के लोग अंधभक्त न होकर शिक्षित हैं। इसके बाद उनकी ख़ासी आलोचना हुई थी। ट्विटर पर लोगों ने पूछा था कि क्या उदित राज को 2014 में जिताने वाली दिल्ली की जनता भी अशिक्षित थी? गुरुवार (मई 23, 2019) को लोकसभा चुनाव के परिणाम आने वाले हैं और विपक्ष के नेता अपने पक्ष में परिणाम न आने की आशंका से नाराज़ हैं।

ब्रह्मोस का सुखोई MKI-30 से सफल परीक्षण, दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों को निर्यात की तैयारी

रक्षा मंत्रालय द्वारा आज शाम जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वायु सेना ने ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का आज सफल परीक्षण किया है। सुखोई एमकेआई-30 से दागी गई यह मिसाइल विज्ञप्ति के मुताबिक जमीन पर स्थित अपने निर्धारित लक्ष्य को भेदने में सफल रही। मिसाइल की डिजाइनिंग और विकास भारत-रूस के संयुक्त तत्वाधान में बनी कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) ने किया है। परीक्षण में नौसेना ने भी फायरिंग रेंज को खाली रखते हुए सहयोग किया।

पिछले साल अपनी श्रेणी की पहली बनी थी वायु सेना

पिछले ही साल भारतीय वायु सेना ने 2.5 टन की इस सुपरसोनिक (आवाज़ की गति से तेज चलने वाली) मिसाइल को 2.8 मैक (ध्वनि के अनुपात में गति नापने की इकाई) से हवा से पानी की सतह पर टेस्ट फायर किया गया था। 22 नवंबर, 2017 को ऐसा कर, ऐसी हवा से सतह पर हमला करने में सक्षम क्रूज़ मिसाइल से ऐसी क्षमता पाने वाली पहली वायु सेना बनी थी।

मिसाइल की शुरुआत से ही वायु सेना इसके विकास के हर कदम पर इसमें शामिल रही है। उसके इंजीनियरों ने मिसाइल का सॉफ्टवेयर भी बनाया था। HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने मिसाइल के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल हिस्सों पर काम किया था।

दूसरे देश भी दिखा रहे रुचि  

BAPL के मुख्य मानव संसाधन महाप्रबंधक (चीफ जनरल मैनेजर, एचआर) कमोडोर एसके अय्यर ने पिछले हफ्ते यह जानकारी मीडिया को दी थी कि इस मिसाइल को खरीदने में कई दक्षिणपूर्वी एशियाई और खाड़ी देशों ने रुचि दिखाई है। उन्होंने यह जानकारी IMDEX 2019 प्रदर्शनी में भागीदारी के दौरान दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों को यह मिसाइल निर्यात किए जाने में केंद्र सरकार और उन देशों के बीच सहमति बनने की देर है।

मतगणना के दिन हिंसा की आशंका पर गृह मंत्रालय ने राज्यों के DGP को किया अलर्ट

लोकसभा चुनाव का परिणाम कल (मई 23, 2019) को आने वाला है। एग्जिट पोल के हिसाब से बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। ऐसे में विपक्ष के कई नेताओं के खून खराबे के बयान के मद्देनज़र, और गृह मंत्रालय के आन्तरिक रिपोर्ट के आधार पर, राज्यों के DGP और मुख्य सचिव को कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।

गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आदेश में राज्यों को कहा गया कि वे मतगणना के दौरान स्ट्रॉग रूम और मतगणना के स्थानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय करें। लोकसभा चुनाव के मतों की गणना 23 मई को सुबह 8 बजे से होगी।

गृह मंत्रालय का अलर्ट ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “वोट की रक्षा के लिए जरूरत पड़े तो हथियार भी उठाना चाहिए।” केंद्रीय मंत्री और बिहार में बीजेपी के सहयोगी राम विलास पासवान ने कुशवाहा की चेतावनी पर जैसे को तैसा वाली जवाबी कार्यवाही की बात कही है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले पाँच साल तक देश में शांतिपूर्ण माहौल के मद्देनज़र, इस समय एग्जिट पोल से विपक्ष में उपजी हताशा को ध्यान में रखकर, किसी तरह की हिंसा को रोकने के लिए, पहले से ही सावधानी बरतने की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है।

लोकतंत्र में ‘खतम सिंह’ विपक्ष की वजह से सिर्फ व्यंग्य ही सच हो रहे हैं और दावे गलत

लोकतंत्र के त्यौहार का आखिरी चरण यानी, काउंटिंग और नतीजे आने में 24 घंटे से भी कम समय बाकी है। यदि एग्जिट पोल की मानें तो कॉन्ग्रेस मुक्त भारत जैसे नारे देने वाले नरेंद्र मोदी इस लक्ष्य में लगभग सफल होते दिख रहे हैं। लेकिन, देश को कॉन्ग्रेस मुक्त करने में जो भूमिका खुद कॉन्ग्रेस ने निभाई है, उसका मूल्य भाजपा शायद ही कभी अदा कर पाएगी।

हालात ये हैं कि आज के समय में इस देश में विपक्ष का योगदान मात्र मजाक परोसने तक सीमित हो चुका है। साधारण शब्दों में कहें तो विपक्ष यानी, कॉन्ग्रेस यानी भरपूर हास्य और मनोरंजन का पर्याय बन कर रह गई है।

अगर हम याद करें तो एक ओर जहाँ भाजपा लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिर्फ और सिर्फ जनता के मुद्दों को प्रमुख मानती रही वहीं, दूसरी ओर विपक्ष अपनी सारी ऊर्जा मोदी घृणा में व्यर्थ करती नजर आई। आखिरकार नतीजा ये निकला कि मोदी एक महामानव के रूप में स्थापित हो गए और विपक्ष मात्र एक ट्रोल और हास्य का विषय बनकर सिमटता ही चला गया।

यूट्यूब पर अपने व्यूअर्स की संख्या पर स्खलित हो रहे निष्पक्ष पत्रकारों के मुखिया से लेकर विपक्ष के मुखिया अगर इतने नालायक, निकम्मे, निठल्ले और एक नंबर के लपड़झंडू साबित हो रहे हैं तो इसके पीछे मात्र उनकी दिन-रात की मेहनत ही है। दिन-रात संस्थाओं को कोसना, सुई से लेकर सब्बल तक में मोदी और अम्बानी करना, मोदी की विदेश यात्राओं से लेकर उनके सोशल मीडिया एकाउंट्स की ताक-झाँक करना, इन चार-पाँच सालों में इन सबके पास इतना वक़्त ही कहाँ बचता था कि वो वास्तविक मुद्दों को तलाश पाते।

मोदी सरकार के दौरान असहिष्णुता से लेकर फर्जी बेरोजगारी का नैरेटिव तैयार करने में, पहले कॉन्ग्रेस और आखिर में महागठबंधन की गोदी में जाकर बैठे ट्रोलाचार्य रवीश कुमार से लेकर नाकाम कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी तक, सबका लक्ष्य नरेंद्र मोदी ही नजर आए। विधानसभा चुनावों में जब-जब कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी की जीत हुई, तब-तब लोकतंत्र की जीत बताई गई। निष्पक्ष पत्रकार रवीश कुमार का वश चलता तो 3 राज्यों, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भाजपा की हार पर अपने प्राइम टाइम शो के दौरान ही मारे ख़ुशी के दर्शकों को 2-4 बंदरगुलाटी मार कर दिखा देते। ज्यूँ-त्यूँ, बड़ी मुश्किलों से वो खुद को निष्पक्ष दिखा पाए।

यही हाल मीडिया और विपक्ष का तब था जब दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की प्रत्याशित जीत हुई। रवीश कुमार का अपनी कुटिल और धूर्त मुस्कान के साथ पहला सवाल अपने प्राइम टाइम में यही था, “क्या ये नरेंद्र मोदी की हार है? क्या मोदी अपनी हार स्वीकार करने के लिए आएँगे?”

ये कुछ उदाहरण तब के हैं, जब भाजपा या ये कहें कि मोदी सरकार के दौरान भाजपा की हार हुई। इसी बीच यदा-कदा, जब भाजपा ने विधानसभा चुनाव और उपचुनाव जीते, तब तुरंत मीडिया चैनल्स से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच शोक सभाएँ और विलाप देखने को मिले।

ग़दर : एक EVM कथा

हक़ीक़त यही है कि भाजपा की जीत के बाद विपक्ष ने अपनी हार कभी स्वीकार नहीं की। जनादेश से मिली हुई हार को स्वीकार ना करते हुए विपक्ष हमेशा EVM की गड़बड़ियों और आसमानी मुद्दों को जिम्मेदार ठहरा कर जनता के जनादेश का तिरस्कार ही करता नजर आया। मोदी सरकार की नीतियों से लाभ ले रहे लोग जब मतदान करने जा रहे थे, उस वक़्त कॉन्ग्रेस सस्ते कॉमेडियंस को तलाशकर मोदी पर भद्दे, घटिया और निम्नस्तरीय चुटकुलों द्वारा जनता का मन जीतने का प्रयास करते नजर आए। सत्तापरस्त कॉन्ग्रेस की छटपटाहट और व्याकुलता मात्र इन 5 सालों में ही बेनक़ाब होकर बाहर आई है।

कॉन्ग्रेस जनादेश को EVM से छेड़छाड़ बताकर लगातार जनादेश का अपमान करती नजर आई। विपक्ष ने मोदी सरकार की छवि ख़राब करने के लिए डिक्शनरी के उन पन्नों के मुहावरों को भुनाने का प्रयास किया, जिन पर कॉन्ग्रेस के राज्य में दीमक लग चुके थे। नतीजा ये रहा कि नालायक विपक्ष द्वारा तैयार किए गए फासिस्ट, भक्त, दलित पर अत्याचार, अल्पसंख्यकों में डर का माहौल, EVM हैक, बिकी हुई मीडिया, कट्टर हिन्दू जैसे नैरेटिव नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करने के बजाए उन्हें महामानव बनाते चले गए। इससे यही साबित हुआ कि जनता समझ चुकी है कि कॉन्ग्रेस मुद्दों की कमी से जूझ रही है और ये नैरेटिव ही उसके पास होने वाली दुर्गति से बचने का एकमात्र तरीका बाकी रह गया है।

इस निठल्ले विपक्ष की ही मेहरबानी है कि एग्जिट पोल के बाद सबसे ज्यादा व्यंग्य और हास्य ही लोगों को पसंद आ रहे हैं और उन्हीं व्यंग्य के माध्यम से की जाने वाली भविष्यवाणियाँ सच साबित होती जा रही हैं। यह दुर्भाग्य है कि विपक्ष द्वारा असहिष्णुता, सेक्युलर, लोकतंत्र, सुप्रीम कोर्ट आदि नामों को मजाक का एक जरिया बनाकर रख दिया है। कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट्स की मानें तो राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जो भाजपा की हार थी, वो हार भी अब भाजपा की साजिश साबित की जाने लगी है। इन सभी उदाहरणों को इकठ्ठा करते हुए आप सोचिए कि मोदी को आखिर इतना ताकतववार अगर विपक्ष ने नहीं तो फिर किसने बनाया है?

विपक्ष के अनुसार मोदी जब और जो चाहें वैसा कर सकते हैं। मेरा मानना है कि “मोदी है तो मुमकिन है” जैसे चुनावी नारे भी भाजपा को चुपके से कॉन्ग्रेस ने ही उपलब्ध कराए हैं। विपक्ष को जब इतना विश्वास मोदी में है ही तो शायद यह सही समय है जब उन्हें नरेंद्र मोदी के सामने घुटने टेक कर आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। साथ ही, यह कहना चाहिए कि प्रभु हम भी आपकी शरण में हैं आप ही सर्वशक्तिमान हैं… और टंटा ही ख़तम!

कुछ भविष्यवाणियाँ जो, या तो सच साबित हो चुकी हैं या फिर सच साबित होने के कगार पर हैं

राजदीप भी पलट गए? विपक्ष के EVM दावे को फ़रेब कहा… एट टू राजदीप?

एग्जिट पोल के बाद से विपक्ष ने एक तरह से अपनी हार स्वीकार कर ली है और हार का ठीकरा फोड़ने के लिए व बीजेपी की संभावित जीत को, मतदाताओं के मत को, धता बता कर EVM का राग अलापना शुरू कर दिया है।

इसमें मीडिया गिरोह के कुछ पत्रकार भी ऐसे राजनीतिक पार्टियों के झूठ में सुर मिला रहे हैं। जबकि इन्हें ठीक से पता है कि इनका यह आरोप बोगस और झूठ के पुलिंदे के सिवा कुछ नहीं है।

खैर अब राजदीप जैसे कुछ उनके गिरोह के पत्रकार भी यह खुलकर स्वीकार करने लगे हैं कि इन नेताओं की अपील निराधार है। साथ ही, राजदीप ने आजतक के ही यूट्यूब चैनल दिल्ली तक को दिए एक शॉर्ट इंटरव्यू में कहा भी कि नेताओं को ऐसे झूठे आरोप लगाने से पहले सोचना चाहिए कि इस तरह से अपनी राजनीति के लिए ये जनता के मन में संदेह के बीज बो रहे हैं। जबकि पिछले चुनावों में जब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इन पार्टियों के नेताओं ने जीत दर्ज की तो EVM ठीक थी। और अब जब जनता द्वारा नकारे जाने के आसार नज़र आ रहे हैं। तो वही EVM खराबी के राग फिर से छेड़ा जाने लगा।

जबकि चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है कि जो EVM दिखाई दे रहे है वो रिज़र्व EVM है, जिनका मतगणना में इस्तेमाल नहीं हुआ है। ऐसा नहीं है कि यह सब नया है सबको पता है पर चूँकि EVM हैंकिंग वाला नैरेटिव काम नहीं किया तो नए नैरेटिव कि EVM बदला जा रहा है, को जान बूझकर हवा दे रहे हैं।

हालाँकि, राजदीप ने यह भी जोड़ा कि चुनाव आयोग को कम से कम 50 % तक VVPAT मिलान की अनुमति दे देनी चाहिए। ताकि जो संदेह पैदा किया जा रहा है वह ख़त्म हो सके। जबकि इस माँग को सुप्रीम कोर्ट भी ख़ारिज कर चुका है।

एक दूसरे वीडियो में राजदीप अपने बनारस के ग्राउंड रिपोर्टिंग के आधार पर बनारस के मोदी काल के परिवर्तन पर बात कर रहे हैं। उन्हें साफ कहते सुना जा सकता है बनारस में काफी परिवर्तन आया है, चौड़ी सड़कें, घाटों की साफ-सफाई से लेकर कई मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने बनारस से मोदी के वॉकओवर की घोषणा कर दी।

राजदीप ने यहाँ तक कहा कि मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने की वजह से वाराणसी की सीट VVIP संसदीय सीट में बदल चुकी है। जिसका असर वहाँ पर हो रहे परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।

कुशवाहा के ख़ूनख़राबे वाले बयान के बाद सीताराम येचुरी ने दी क़ानून व्यवस्था बिगड़ने की धमकी

उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने भी इच्छित नतीजे न आने के बाद क़ानून व्यवस्था बिगड़ने की धमकी दी है। सीताराम येचुरी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ काम कर रहा है। दरअसल, चुनाव आयोग ने मतगणना की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से मना कर दिया। चुनाव आयोग द्वारा विपक्ष की माँगों को खारिज़ करते हुए मतगणना प्रक्रिया में बदलाव से इनकार करने के बाद वामपंथी नेता सीताराम येचुरी भड़क उठे और उन्होंने ट्वीट कर लिखा:

“यह चुनाव शुरू होने से पहले वीवीपैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के ख़िलाफ़ है। अगर चुनाव की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनावी प्रक्रिया इतने लम्बे समय तक खींची गई, तो चुनाव आयोग पहले सैम्पल को टेस्ट करने से इनकार क्यों कर रहा है? वीवीपैट और ईवीएम पर्चियों का मिलान मतगणना शुरू होने से पहले की जानी चाहिए। ट्रेंड्स जारी हो जाने के बाद ये प्रकिया निष्फल हो जाएगी। इसके कारण प्रभावित उम्मीदवार विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसके कारण क़ानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।”

सीताराम येचुरी की पार्टी सीपीएम ने भी चुनाव आयोग के निर्णय पर निराशा जताई है। बता दें कि विपक्ष की माँगों को सुप्रीम कोर्ट भी ठुकरा चुका है। वीवीपैट को लेकर एक एनजीओ द्वारा दाखिल किए गए पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा था कि वे लोकतंत्र का मज़ाक बना रहे हैं। अदालत ने पहले कहा था कि प्रति विधानसभा पाँच पोलिंग बूथों के ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों के साथ मिलान किया जाएगा। बाद में एनजीओ द्वारा दाखिल की गई याचिका को कोर्ट ने अनैतिक करार दिया। अदालत का मानना था कि जब उन्होंने फ़ैसला दे ही दिया, फिर इस तरह के पीआईएल दाखिल करने का औचित्य ही क्या है?

विपक्ष के नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल बना कर चुनाव आयोग से मुलाक़ात की थी। इच्छित परिणाम न आने पर रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी ख़ूनख़राबे की धमकी दी है। उपेंद्र कुशवाहा की इस धमकी पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि जैसे को तैसा (Tit For Tat) जवाब दिया जाएगा। लोजपा सुप्रीमो पासवान ने कहा कि राजग के लोग भी तैयार हैं। ऐसा उन्होंने राजग के घटक दलों की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेते हुए कहा।

VVIP चॉपर घोटाला: जिसके पास है ₹3600 करोड़ की खरीद-फरोख्त का कच्चा चिट्ठा, ED ने दायर किया आरोप पत्र

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 22 मई को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले में गिरफ़्तार एक कथित रक्षा एजेंट सुषेन मोहन गुप्ता के ख़िलाफ़ दिल्ली की अदालत में एक पूरक आरोप पत्र दायर किया है।

ख़बर के अनुसार, एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष श्री गुप्ता के ख़िलाफ़ पूरक आरोप पत्र दायर किया। उन्हें ED ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया था।

ED ने कहा था कि इस मामले में श्री गुप्ता की भूमिका राजीव सक्सेना द्वारा किए गए ख़ुलासे के आधार पर सामने आई थी, जिसे UAE से निकाले जाने और नई दिल्ली में एजेंसी द्वारा गिरफ़्तार किए जाने के बाद इस मामले में अपनी सहमति दे दी थी।

ऐसा संदेह है कि श्री गुप्ता के पास अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलिकॉप्टरों की ख़रीद के लिए 3,600 करोड़ रुपए के सौदे के भुगतान का विवरण मौजूद है।

कॉन्ग्रेस के सर्वे में NDA को बढ़त, 140 सीटों पर सिमटा हाथ छाप… फिर भी राहुल कह रहे ‘फर्जी Exit Poll’

देश में इस समय भाजपा और मोदी की ‘लहर’ किस कदर चल रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कॉन्ग्रेस के द्वारा कराया गया एग्जिट पोल भी कह रहा है, “आएगा तो मोदी ही!” और इतने के बावजूद राहुल गाँधी एग्जिट पोल्स को फर्जी बता कर अपने समर्थकों को अंतिम ढाँढ़स बँधा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस का खुद का एग्जिट पोल भाजपा-नीत एनडीए को 272 के बहुमत के आँकड़े के करीब 230 के आस-पास सीटें दे रहा है। भाजपा को भी 200 के करीब सीटें मिलने की उम्मीद है। इसके उलट पूरा यूपीए मिल कर भी इस सर्वे में 200 का आँकड़ा नहीं छू पा रहा है। कॉन्ग्रेस खुद 140 पर सिमटती हुई नजर आ रही है।

सारे एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में

19 मई को अंतिम चरण का मतदान ख़त्म होने के बाद जारी हुए सारे-के-सारे एग्जिट पोल भाजपा की ही सरकारें अनुमानित कर रहे हैं। अधिकाँश में एनडीए खुद ही बहुमत के आँकड़े को आराम से पार कर 300 के करीब भी पहुँच ही रहा है। इस बीच निराश और हताश विपक्ष ने निर्वाचन आयोग और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से लेकर हिंसा की धमकी तक की प्रतिक्रियाएँ दी हैं।

AAP नेता संजय सिंह का अर्नब गोस्वामी पर फूटा ग़ुस्सा- पागलखाने जाएँ, जेल जाएँ या डूब मरें!

लोकसभा चुनाव 2019 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने राजनीतिक ‘प्रवचन’ में शालीनता की सारी हदें पार करते हुए अपनी एक अलग पहचान बना ली है। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने में अब 24 घंटे से भी कम का समय रह गया है। लेकिन, AAP पार्टी के नेता अपनी हताशा के चरम पर जा पहुँचे हैं।

AAP के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने आज रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की एक वीडियो क्लिप ट्विटर पर शेयर की। इसमें अर्नब EVM हैकिंग को लेकर विपक्षी दलों पर तंज कसते नज़र आए।

इस वीडियो में अर्नब गोस्वामी ने मसखरी के अंदाज़ में AAP नेताओं का भी मजाक उड़ाया कि AAP पार्टी को दिल्ली में 100 सीटें भी नहीं मिल सकतीं।

अर्नब के इस मसखरी भरे अंदाज़ पर AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने जवाब दिया और लिखा, “इस अर्नब को तुरंत आगरा ले जाओ यार, “Very Serious Case.”

इस पर, आरजेडी सांसद ने चुटकी लेते हुए लिखा कि आगरा के पागलखाने में सीमित जगह है। इस पर संजय सिंह ने जवाबी टिप्पणी करते हुए लिखा, “फिर कुछ भी करिए सर अंडमान ही लेते जाइए या हिंद महासागर में छोड़ आइए।” आपकी जानकारी के लिए यहाँ बता दें कि अंडमान सेलुलर जेल के लिए प्रसिद्ध है और हिंद महासागर शब्द का इस्तेमाल डूब जाने के लिए किया गया है।

संजय सिंह अक्सर न्यायपालिका के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करते रहते हैं। हाल ही में AAP को बड़ा झटका तब लगा था, जब सुप्रीम कोर्ट ने AAP के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, क्योंकि शीर्ष अदालत ने पाया कि संजय सिंह द्वारा न्यायपालिका के ख़िलाफ़ दिए गए उनके पहले के बयान अपमानजनक थे।

दिल्ली में सत्ता के बँटवारे के फ़ैसले के बाद संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए, सिंह ने हिन्दी में ट्वीट किया था, “क्या सुप्रीम कोर्ट मोदी जी के हितों के ख़िलाफ़ फ़ैसला नहीं सुनाता? केंद्र सरकार ने राफ़ेल (सौदा) में भ्रष्टाचार पर अदालत में झूठ बोला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट चुप था। क्या सुप्रीम कोर्ट ने CBI पर कोई फ़ैसला दिया था या वो मजाक था? दिल्ली के करोड़ों लोगों की भावनाओं के साथ खेला गया। क्या यह सुप्रीम कोर्ट या तहसील का स्थानीय न्यायालय है?” एक अलग ट्वीट में उन्होंने पूछा था कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गरिमा खो दी है?