Home Blog Page 5885

‘लतखोर’ और अजूबा हो गए हैं ‘धरनामंत्री’ केजरीवाल, योगी आदित्यनाथ की निंदनीय टिप्पणी

“सबसे बड़ा अजूबा दिल्ली के मुख्यमंत्री स्वयं हो गए हैं, पता ही नहीं लगता कि वे मुख्यमंत्री हैं या धरना मंत्री। क्या मुख्यमंत्री को धरने पर बैठना चाहिए? जब कोई कोई सुधरता नहीं तो इसलिए ही उसे कहते हैं ‘लतखोर’। व्यक्ति फिर उसी तरीके से उसे जवाब देता है। वही यहाँ हो रहा है।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (मई 07, 2019) को दिल्ली में एक चुनावी सभा में यह विवादित बयान दिया है जिससे अरविन्द केजरीवाल समर्थकों में खासा नाराजगी देखने को मिल रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विवादित बयान देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘लतखोर’ और ‘धरनामंत्री’ कह डाला। उन्होंने केजरीवाल से सवाल करते हुए कहा कि AAP प्रमुख शहर की सरकार के मुखिया हैं अथवा धरना और प्रदर्शन के नेता हैं? पूर्वी दिल्ली से भाजपा के उम्मीदवार गौतम गंभीर के समर्थन में मंगलवार को दिल्ली में रैली को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि वह दिल्ली में हमारी जीत का खाता खोलेंगे, जैसे वह क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए खाता खोलते थे।’’

यूपी सीएम ने कहा, “आज उत्तर प्रदेश में सभी जनपदों में बिजली है। पूरी सुरक्षा की व्यवस्था है। लेकिन पहले जो बीमारी उत्तर प्रदेश में थी, अब वह बीमारी आम आदमी पार्टी दिल्ली में लेकर आ गई है। जो आम आदमी पार्टी पानी पी-पीकर भ्रष्टाचार के लिए कॉन्ग्रेस को गाली देती थी, आज उस भ्रष्टाचार में स्वंय डूब गई है। बहन-बेटियों की सुरक्षा का खतरा AAP की गलत नीतियों की वजह से बढ़ा है। आप देख सकते हैं कि इनके मंत्री, विधायक रोज किसी न किसी घटना में शामिल होते हुए दिखाई देते हैं। सबसे बड़ा अजूबा तो दिल्ली के मंत्री ही हो गए हैं। पता ही नहीं चलता कि वे मुख्यमंत्री हैं या धरना मंत्री। विकास की कोई योजना आती है, तो वे धरने पर बैठ जाते हैं। जब कोई कोई सुधरता नहीं तो इसलिए ही उसे कहते हैं ‘लतखोर’। व्यक्ति फिर उसी तरीके से उसे जवाब देता है। वही यहाँ हो रहा है।”

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया। उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है, कुत्ते की मौत मरेगा जैसे ओसामा मरा था। यह मोदी जी की वजह से है, जब पाकिस्तान की बॉर्डर के अंदर आतंकियों के खिलाफ आपरेशन हुए तो कॉन्ग्रेस ने पूछा सबूत कहाँ है? आतंकवाद पर भी कॉन्ग्रेस पाकिस्तान की बोली बोलती नज़र आई।”

जब राजीव गाँधी ने निजी मनोरंजन के लिए युद्धपोत ‘विराट’ का किया इस्तेमाल, साथ में थे ससुराल के लोग

प्रधानमंत्री मोदी ने जब आज रामलीला मैदान की रैली में यह जानकारी दी कि भारत के मुख्य युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल राजीव गाँधी ने अपने निजी मनोरंजन और छुट्टियों के लिए किया तो बहुत लोगों को लगा कि यह एक जुमला है। लेकिन भाषण के थोड़ी ही देर में इंटरनेट पर इंडिया टुडे की एक स्टोरी शेयर की गई जिसमें राजीव गाँधी के कथित मनोरंजक छुट्टियों की पूरी जानकारी विस्तृत रूप से दी गई है।

इंडिया टुडे मैगजीन की जनवरी 31, 1988 की एक रिर्पोट के अनुसार, अनिता प्रताप ने इस पूरे ‘हॉलीडे’ का ब्यौरा दिया है। उन्होंने लिखा है कि राजीव गाँधी की पूरी कोशिश थी कि प्रेस उनसे दूर रहे लेकिन इंडियन एक्सप्रेस एवं बाकी मीडिया के फ़ोटोग्राफ़र ने कई तस्वीरें निकाल लीं। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नौसेना के युद्धपोत का इस्तेमाल हुआ, जो कि आश्चर्यजनक बात है।

द्वीप के उस हिस्से को बहुत ही सावधानी से चुना गया था जहाँ मीडिया की पहुँच आसान नहीं थी। मीडिया को दूर रखने का भरपूर प्रयास किया गया था। लेकिन द्वीप का वह छोटा हिस्सा 26 दिसंबर 1987 को तब सुर्खियों में आया, जब राजीव के बेटे राहुल गाँधी ने चार दोस्तों के साथ नारंगी और सफेद रंग की लक्षद्वीप प्रशासन के हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी। मीडिया को दूर रखने के लाख प्रयासों के बावजूद भी आमंत्रितों की सूची ने खुद ही खबर बना दी।

मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया और उनके बच्चे अभिषेक और श्वेता भी मौजूद थे। अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी, जिनकी विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के संदिग्ध उल्लंघन के लिए जाँच की जा रही थी, वह भी साथ में गई थी। इसके आलावा अन्य भारतीय मेहमानों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी थीं। दो अन्य विदेशियों ने भी इस पार्टी की शान बढ़ाई।

आज कल राजीव गाँधी गलत कारणों से इस लोकसभा चुनाव का हिस्सा बन गए हैं। राहुल गाँधी के ‘चौकीदार चोर है’ नारे के जवाब में जब से मोदी ने राजीव गाँधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर वन’ कहा है, तब से मधुमक्खियों के छाते में ढेला मारने जैसी स्थिति हो गई है। लगातार बयानबाज़ी चल रही है जिसमें कॉन्ग्रेस और उसके समर्थक राजीव गाँधी को महान बताने में लगे हुए हैं, वहीं भाजपा वाले हर रोज राजीव गाँधी के कोई कारनामे को बाहर ले आते हैं।

51 दिनों तक 16 साल की नाबालिग लड़की को बंधक बनाकर करते रहे बलात्कार

नोएडा में तीन युवकों ने 16 साल की एक लड़की को बंधक बना लिया और 51 दिनों तक उसके साथ गैंगरेप करते रहे। नोएडा के मामूरा इलाके में रहने वाली एक किशोरी को उसके पड़ोस में रहने वाले दो युवकों ने किसी अनजान जगह ले जाकर उसे बंदी बना लिया। 51 दिन बाद किसी तरह लड़की वहाँ से भागने में कामयाब रही।

नोएडा पुलिस के अनुसार पीड़िता पढ़ी-लिखी नहीं है और वह बता नहीं पा रही है कि युवकों ने उसे कहाँ बंधक बनाकर रखा था। हालाँकि, वह उन दो लड़कों को पहचान सकती है। किशोरी के परिजनों ने बताया कि बार-बार कोशिश करने के बावजूद पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कर रही थी, एसपी (क्राइम) के पास जाने के बाद FIR दर्ज की गई।

किशोरी के पिता द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक, छोटू और सूरज दोनों उनके घर गए और बेटी का विश्वास जीतकर उसे अगवा कर ले गए। यह घटना मार्च के पहले सप्ताह में हुई थी। लड़की के पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं और आरोपी लड़कों में छोटू मध्य प्रदेश के छतरपुर, और सूरज, महोबा का रहने वाला है।

भागने की कोशिश करने पर जान से मारने की धमकी देते थे

शिकायत के अनुसार, “अगवा की गई किशोरी को एक कमरे में बंधक बनाकर रखा गया था, जहाँ उसके साथ 2 मार्च से लेकर 22 अप्रैल तक कई बार रेप किया गया। पीड़िता ने भागने की कोशिश करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। उनकी गैरमौजूदगी में आदित्य किशोरी के साथ मारपीट करता था, वह नोएडा सेक्टर 135 में रहता है।” शिकायतकर्ता पिता ने बताया है कि तीसरा आरोपित आदित्य, बाँदा जिले का रहने वाला है।

22 अप्रैल को पीड़िता किसी तरह वहाँ से भाग निकलने में कामयाब हुई और अपने माता-पिता के पास पहुँची। इस मामले में पुलिस अधिकारी का कहना है कि शुरुआत में किशोरी के पिता ने आरोपित के साथ कथित तौर पर समझौता कर लिया था, लेकिन बाद में पिता ने कहा कि समझौता दबाव में किया गया था। पड़ोसियों ने कहा कि पुलिस शिकायत से उनकी बदनामी होगी और बहकावे में आकर उन्होंने लिखित समझौते पर दस्तखत कर दिए थे। फेज-3 एसएचओ अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस के सामने किसी कागजात पर दस्तखत नहीं किए गए थे, पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और जल्द ही किशोरी का बयान लिया जाएगा। 

अलवर गैंगरेप मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार को जारी किया नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अलवर, राजस्थान दुष्कर्म प्रकरण का संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट माँगी है। वहीं, आयोग ने प्रदेश सरकार को आदेश देते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की 6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करें।

बता दें कि राजस्थान के अलवर में एक बेहद ही शर्मनाक घटना में 5 युवकों ने पति के सामने ही पत्नी के साथ कथित तौर पर गैंगरेप को अंजाम दिया। आरोपित युवकों ने गैंगरेप के बाद दलित जाति की पीड़ित युवती का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। यह घटना राजस्थान के अलवर जिले के थानागाजी इलाके की है।

विगत 26 अप्रैल को पीड़िता अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर दोपहर 3 बजे तालवृक्ष जा रही थी, तभी थानागाजी-अलवर बाइपास रोड पर उनकी बाइक के सामने 5 युवकों ने अपनी मोटरसाइकिलें लगा दीं। इसके बाद वे महिला एवं उसके पति को रेत के टीलों की तरफ ले गए। वहाँ उन्होंने पति के साथ मारपीट की और दंपति को बंधक बना लिया।

पाँचों युवकों ने इसके बाद दोनों पति-पत्नी के कपड़े उतरवाए। पति के साथ मारपीट की। पीड़िता के साथ भी मारपीट की और रेप की कोशिश की। शुरुआत में जब पीड़िता ने रेप की कोशिश का विरोध किया तो उसके पति को और मारा गया। अंततः पीड़िता ने अपने पति की रक्षा के लिए हार मान ली। इसके बाद उन दरिंदों ने 3 घंटे तक बारी-बारी से पीड़िता के साथ रेप किया। 11 वीडियो क्लिप भी बनाए। 

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है। पुलिस ने छोटेलाल, जीतू और अशोक सहित 5-6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। 26 अप्रैल की घटना को चार दिनों बाद 30 अप्रैल को पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। पुलिस ने IPC और SC/ST ऐक्ट की धाराओं 147, 149, 323, 341, 354B, 376(D) & 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

मोदी का मुखौटा पहने लड़के को थानेदार ने बुरी तरह से मारा थप्पड़

धनबाद से एक वीडियो सामने आया है। इसमें सड़क किनारे खड़े एक लड़के को बैंक मोड़, धनबाद के थानेदार सुरेंद्र सिंह थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। थानेदार के थप्पड़ से लड़के का मोबाइल और मुखौटा नीचे गिर गया। बाद में दूसरे पुलिसकर्मी ने उसे उसका मोबाइल उठा कर दिया। जब थानेदार ने लड़के को झापड़ मारा, उस समय आसपास खड़े लोग उस लड़के का मज़ाक उड़ाते देखे जा सकते हैं। वीडियो में लोग उस लड़के को ‘चौकीदार चोर है’ बोलने को कह रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति की आवाज़ आती है- “करिए, करिए। जो करना है करिए।” नीचे ट्विटर पर शेयर की गई वीडियो में आप इस घटना को देख सकते हैं।

बता दें कि वो लड़का सड़क किनारे खड़ा था, वहाँ से राहुल गाँधी का काफ़िला गुजरने वाला था। पुलिस बार-बार उस लड़के को वहाँ से हटने को कह रही थी। थानेदार ने कहा कि विधि-व्यवस्था के लिहाज से उस लड़के पर ‘हल्का बल प्रयोग’ किया गया।

हिंदुस्तान अख़बार के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

सोशल मीडिया पर वीडियो को देखने के बाद धनबाद पुलिस के उस थानेदार के प्रति गुस्सा ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास से उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की माँग की। लोगों ने कहा कि किसी बच्चे पर इस तरह से बल प्रयोग करना सरासर ग़लत है। वीडियो पोस्ट करने वाले ट्विटर यूजर ने दावा किया कि पुलिस ने महिला भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ भी गाली-गलौज किया।

बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी कल मंगलवार (मई 7, 2019) को झारखण्ड के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने चाईबासा में भी जनसभा को सम्बोधित किया। चाईबासा में राहुल गाँधी की सभा में कम भीड़ को देखते हुए नाराज कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसका आरोप मुख्यमंत्री रघुवर दास पर मढ़ा। राहुल गाँधी ने धनबाद में 35 मिनट का रोड शो कर कीर्ति झा आज़ाद के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। राहुल गाँधी को उस समय असहज स्थिति झेलनी पड़ी, जब उनके रोड शो के दौरान भाजपा समर्थक मोदी का मुखौटा पहनकर खड़े हो गए। हालाँकि, विरोध के बावजूद उनकी रैली और रोड शो को पूरा कराया गया।

मुखबिरी के शक में नक्सली आतंकियों ने की ग्रामीण की गोली मारकर हत्या

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बौखलाए नक्सलियों ने एक ग्रामीण को निशाना बनाया है। बीती रात नक्सलियों ने मुखबिरी के शक में कांकेर जिले में ग्रामीण की गोली मारकर की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, पखाँजूर के समीप छोटे बेठिया थाना क्षेत्र रेंगावाही गाँव के निवासी संतु गोटा को नक्सलियों ने मुखबिरी करने के सन्देह में गोली मार दी। 

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 से 20 हथियारबंद नक्सलियों ने ग्रामीण संतु गोटा को घर से जबरन निकालकर अगवा कर लिया और जंगल में ले गए। जब परिजनों ने इसका विरोध किया तो नक्सलियों ने कहा कि वह बातचीत करके छोड़ देंगे। लेकिन तभी से वह गायब हो गए। बुधवार (मई 08, 2019) को तीन दिन बाद ग्रामीण का शव रेंगावाही गाँव के सड़क के किनारे मिला। मृतक के शव पर डंडे के निशान भी पाए गए हैं।

उसके सीने के बीचो-बीच में नक्सलियों ने गोली मारी है। मृतक के बारे में जानकारी मिलते ही घर में मातम छा गया। जिसके बाद परिजनों ने इसकी जानकारी नजदीकी पुलिस थाने में दी। मृतक के शव को पखांजुर हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षाबलों ने सर्चिंग बढ़ा दी है। गौरतलब है कि इलाके में लगातार नक्सलियों का आतंक जारी है।

वाजपेयी की आलोचना, राजीव गाँधी को दण्डवत प्रणाम: यौन शोषण आरोपित ‘बड़े’ पत्रकार का दोमुँहापन

विनोद दुआ पत्रकारिता के क्षेत्र में एक बड़ा नाम है, पुराना नाम है। विनोद दुआ का नाम है या फिर वो बदनाम हैं, इसका निर्णय तो जनता कर ही रही है, लेकिन इस बीच हम उनके ऐसे दोहरे रवैये को जनता के समक्ष रखना चाहते हैं, जिसे आपको देखना, सुनना व जानना चाहिए। यौन शोषण के आरोपित विनोद दुआ की बेटी मल्लिका दुआ भी तब तक पीड़ित महिलाओं के लिए ख़ूब आवाज़ उठा रही थीं, जब तक ख़ुद उनके पिता ही उसमें न फँस गए। लेकिन, उसके बाद उन्होंने अपने पिता का बचाव किया और उनके ख़िलाफ़ एक शब्द भी नहीं कहा। इससे पता चलता है कि विनोद दुआ की लेगेसी सही हाथों में है। ताज़ा विवाद 2 दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्रियों को लेकर उनके द्वारा कही गई बातों से उपजा है।

दरअसल, जब अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ था, तब उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर वामपंथी कविता कृष्णन समेत कई लोगों ने भद्दी टिप्पणियाँ की थीं। विनोद दुआ ने अटल बिहार वाजपेयी के निधन के बाद कहा था कि हमारे देश में मृत व्यक्ति को अचानक से महान बना देने का एक चलन है, जो कि एक प्रकार का पाखंड है। इन्होंने वाजपेयी को दी जा रही श्रद्धांजलि की चर्चा करते हुए कहा था कि उन्हें ‘जिस तरह की’ श्रद्धांजलियाँ दी जा रही हैं, उसे पॉलिटिकली करेक्ट समझा जाता है। इसके आगे विनोद दुआ ने सच्ची श्रद्धांजलि की परिभाषा बताते हुए कहा था कि असली श्रद्धांजलि तभी हो सकती है जब निधन के बाद किसी की अच्छाइयों के साथ-साथ बुराइयों की भी चर्चा की जाए।

अभी कुछ दिनों पहले पीएम मोदी ने पूर्व पीएम राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी नंबर 1 कहा था। इसके बाद सियासी तूफ़ान खड़ा हो गया और कॉन्ग्रेस ने मोदी पर व्यक्तिगत व भद्दी टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दी। तरह-तरह के विपक्षी नेताओं व कथित बुद्धिजीवियों ने कहा कि राजीव गाँधी के बारे में ऐसा कोई भी बयान देना ग़लत है क्योंकि वो मर चुके हैं। इनमें विनोद दुआ भी शामिल हो गए हैं। तमाम तरह के लोग जो वाजपेयी के निधन के बाद उनकी बुराइयाँ गिनने के इच्छुक थे, उन्होंने राजीव गाँधी, उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और सिख दंगों में उनकी भूमिका के आरोपों पर कुछ भी बोलने से नाराज़ हैं। विनोद दुआ के लिए, राजीव गाँधी के बारे में कुछ बोलने का अर्थ हुआ- ‘कुर्सी के लिए नीचे गिरना’।

विनोद दुआ ने ताज़ा वीडियो में कहा कि हमारे ‘प्रधानसेवक’ ने कुर्सी पाने की लालसा में गिरते हुए दिवंगत पीएम राजीव गाँधी के बारे में ऐसी टिप्पणी की, जो ग़लत है। विनोद दुआ ने अपने वाजपेयी के समय के स्टैंड को बदलते हुए आगे कहा कि हमारे यहाँ एक नियम है कि जो दिवंगत हो चुके हैं, जिनका निधन हो चुका है, उनके बारे में ऐसा न बोला जाए। यौन शोषण के आरोपित पत्रकार दुआ के लिए जो उस समय ‘पाखंड’ था, वो अब ‘नियम’ बन चुका है। वाजपेयी के निधन के तुरंत बाद उनकी बुराइयाँ गिना कर उन्हें ‘सच्ची श्रद्धांजलि’ देने वाले दुआ राजीव गाँधी पर भ्रष्टाचार से लेकर सिख दंगों में उनकी भूमिका को लेकर लगे आरोपों की चर्चा से खिन्न हैं। दुआ जैसे लोगों के लिए ही शायद दोमुँहे साँप वाली कहावत बड़े-बुजुर्ग लिख गए हैं।

अगर कॉन्ग्रेस मौजूदा PM को गाली देगी तो पूर्व PM के कार्यों को मैं भी गिनाऊँगा: मोदी

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए ताबड़तोड़ चुनाव-प्रचार जारी है। ऐसे में हरियाणा के कुरुक्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (मई 8, 2019) को विपक्ष की ‘गाली पॉलिटिक्स’ से लेकर ममता बनर्जी के कई आरोपों का अपने ही स्टाइल में जवाब दिया। कुरुक्षेत्र में चुनावी रैली के बाद टाइम्स नाउ से खास बातचीत में PM ने कहा कि मौजूदा प्रधानमंत्री के लिए यदि अपशब्द कहे जाएँगे, गालियाँ दी जाएँगी, झूठे आरोप लगाए जाएँगे तो पूर्व प्रधानमंत्रियों के भ्रष्टाचार का भी लेखा-जोखा लिया जाएगा। झूठ का जवाब सच से दिया जाएगा।

टाइम्स नाउ की पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि विपक्ष के हमलों पर आप क्या कहेंगे? इस सवाल का जवाब देते हुए मोदी ने कहा, “जब मैं 2014 का चुनाव लड़ रहा था तो मुझे कम गालियाँ सुनने को मिलती थीं। अब विपक्ष का हमला बढ़ गया है। गालियों को पचाने का मेरी पाचन शक्ति (डाइजेशन पावर) बढ़ गई है। 2019 में गालियों को पचाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।”

अगला सवाल ममता के मोदी को अपना प्रधानमंत्री न मानने को लेकर था। यहाँ तक कि फानी चक्रवात के बाद ममता बनर्जी ने मोदी का फोन तक उठाने से इनकार कर दिया था। पत्रकार ने सवाल किया कि ‘ममता बनर्जी ने आपको प्रधानमंत्री मानने से इंकार कर दिया है’, इस पर मोदी ने तंज किया, “उन्हें पाकिस्तान का प्रधानमंत्री पीएम लगता है लेकिन भारत का पीएम उन्हें प्रधानमंत्री नहीं लगता। इसका जवाब देश की जनता देगी।”

हाल ही में कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका ने मोदी की तुलना महाभारत के दुर्योधन से कर दी थी तो इस पर उनका जवाब था, “मैं इसका जवाब मौन रहके दूँगा।”

लगभग पाँच चरण के मतदान सम्पन्न हो चुके हैं, अभी तक के रुझानों के अनुसार बीजेपी बढ़त बनाए हुए है। इसी को मद्देनज़र रखते हुए जब पूछा गया कि उन्हें क्यों लगता है उनकी सरकार 2019 में दोबारा आएगी? इस पर मोदी ने भरोसा जताया कि “मैंने पाँच सालों तक देश का भ्रमण किया है। मैं देश की जनता से जुड़ा हुआ हूँ। हमारा काम बोलता है। 2019 में चुनाव प्रचार के दौरान पहली बार देश में सरकार के पक्ष में (प्रो इन्कम्बैंसी) लहर है। भाजपा इस बार 282 से ज्यादा सीट जीतेगी। हमारे सहयोगियों की सीटें भी बढ़ेंगी। हमारा वोट शेयर भी बढ़ेगा। यह चुनाव सफलताओं से भरा होगा।”

चुनाव प्रचार में अब जब मुद्दे गायब होने लगे हैं और विपक्ष ने पुराने राग फिर से छेड़ना शुरू कर दिया है। फिर से मोदी को गाली देने का चलन बढ़ गया है। विपक्ष विकास के मुद्दे से कतराने लगा है। तब पत्रकार ने मोदी से पूछा कि इस चुनाव में मुद्दे क्या हैं? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, “चुनाव में मुख्य मुद्दा विकास है लेकिन विपक्ष इससे कन्नी काट रहा है। विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह विकास के मुद्दे पर आए लेकिन वह इससे भाग रहा है। हम चुनावों में आतंकवाद की चर्चा करते हैं। आतंकवाद जब पड़ोस से आएगा तो क्या इस पर चुप रहना चाहिए?”

राहुल के ‘चौकीदार चोर है’ के जवाब में हाल ही में मोदी ने राजीव गाँधी पर वॉर करते हुए उन्हें उनके पूर्व के कामों के आधार पर ललकारा, उसी बयान को आधार बना जब उनसे पूछा गया कि आपके ‘भ्रष्टाचारी नंबर-1’ बयान पर कॉन्ग्रेस हमलावर है। आप क्या कहेंगे? इस सवाल के जवाब में मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘नामदार’ ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि हम किसी भी प्रकार से मोदी की छवि ध्वस्त करना चाहते हैं। मैंने चुनौती दी है कि अगर कॉन्ग्रेस मौजूदा प्रधानमंत्री को गाली देगी तो पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यों का भी लेखा-जोखा लिया जाएगा। 1984 में सिखों के कत्लेआम, भोपाल गैस कांड, बोफोर्स में भ्रष्टाचार पर कॉन्ग्रेस को जवाब देना ही होगा।”

पत्रकार ने आगे पूछा हमेशा मसूद अजहर का बचाव करने वाला चीन अपना रुख बदलने को कैसे तैयार हुआ? इस पर मोदी ने कहा, “आतंकवाद के संबंध में भारत की बात अब दुनिया मानने लगी है। दुनिया आज कश्मीर के पुराने गाने सुनने को तैयार नहीं है। हमने भारत की सच्चाई से लोगों को अवगत कराया है। एक समय ऐसा था जब रूस भारत के साथ होता था और दुनिया कमोबेश पाकिस्तान के साथ हुआ करती थी लेकिन आज आतंकवाद सहित वैश्विक मुद्दों पर दुनिया हमारे साथ है। हम अपनी बात दुनिया को समझाने में सफल हुए हैं।”

भोपाल में दिग्विजय हिन्दू वोटरों को लुभाने के लिए कम्प्यूटर बाबा के नेतृत्व में हठयोग का अनुष्ठान करवा रहे हैं। हालाँकि, कभी हिंदुत्व को भगवा आतंक से जोड़ने का षड़यंत्र रचने वाले दिग्विजय का यह रूप उनकी बेबसी को दर्शाता है। जब टाइम्स नाउ की पत्रकार ने पूछा कि भोपाल में दिग्विजय सिंह ने हजारों साधु-संतों को उतार दिया, इस बारे में आप क्या कहेंगे? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, “दिग्विजिय सिंह ने भारत की पाँच हजार साल पुरानी परंपरा को आतंकवादी करार दिया। वह जाकिर नाइक को भी ला सकते हैं।”

मोदी 2014 Vs मोदी 2019: चुनाव प्रचार और रैली के मामले में 68 साल की उम्र में भी Josh High

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस उम्र में भी चुनाव प्रचार के मामले में युवा नेताओं तक को टक्कर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री इस वर्ष अपनी रैलियों से ख़ुद को ही चुनौती दे रहे हैं। 17 मई को इस लोकसभा चुनाव के सातों चरणों के चुनाव प्रचार ख़त्म हो जाएँगे और तब तक प्रधानमंत्री कुल 130 रैलियाँ कर चुके होंगे। हालाँकि, नरेंद्र मोदी ने सितम्बर 2013 से मई 10, 2014 तक 425 रैलियाँ की थी। इस वर्ष उन्होंने 28 मार्च को उत्तर प्रदेश स्थित मेरठ में अपनी रैली के साथ चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। इस उम्र में भी मोदी एक दिन में औसतन 2 रैलियाँ कर रहे हैं, जिसकी तुलना उनके 2014 के परफॉरमेंस से की जा सकती है। कुछ दिन तो ऐसे होते हैं, जब प्रधानमंत्री मोदी 3 रैलियों को सम्बोधित करते हैं, वो भी 3 अलग-अलग राज्यों में।

जैसे कि अप्रैल का उदाहरण लीजिए। इस दिन पीएम मोदी ने बिहार के फारबिसगंज, पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर और उत्तर प्रदेश के एटा में रैलियाँ की, यानी एक दिन में तीन अलग-अलग राज्यों में तीन रैलियाँ। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि प्रधानमंत्री 17 मई तक इस चुनाव में 130 रैलियों को सम्बोधित कर चुके होंगे। एचटी के इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक, मोदी के 2019 चुनाव प्रचार अभियान की बात करें तो उन्होंने अबतक 107 रैलियाँ सम्बोधित की हैं और उनके द्वारा 2 दर्जन और रैलियाँ सम्बोधित की जाने की संभावना है। अभी 2 चरणों का लोकसभा चुनाव बाकी है और 5 चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है।

नरेंद्र मोदी ने बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में प्रमुख रैलियों को सम्बोधित की। 4 मई को 5वें चरण के लिए चुनाव प्रचार की अंतिम तारीख़ थी और उस दिन प्रधानमंत्री ने बिहार में 1 और उत्तर प्रदेश में 2 रैलियों को सम्बोधित किया। बिहार के वाल्मिकीनगर और उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ और बस्ती में उनकी जनसभाएँ हुईं। उनकी रैलियाँ मार्च में शुरू हुईं लेकिन उन्होंने किसी भी क्षेत्र को नहीं छोड़ा। पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत से लेकर उत्तर-पूर्वी राज्यों तक, मोदी ने हर जगह जनसभाएँ की। बंगाल, बिहार और यूपी में सातों चरणों में चुनाव हो रहे हैं। हिमाचल की 4 सीटों पर 19 मई को अंतिम चरण में चुनाव होंगे।

2014 में मोदी के गहन प्रचार अभियान का कमाल ही था कि भाजपा पिछले 32 वर्षों में अपने दम पर बहुमत पाने वाली पहली पार्टी बनीं। इस बार मोदी के प्रचार अभियान को लेकर 2 से 3 संसदीय क्षेत्रों के कई समूह तैयार किए गए हैं, जहाँ मोदी रैली करते हैं और वहाँ उन सभी संसदीय क्षेत्रों के भाजपा प्रत्याशी मंच पर उपस्थित रहते हैं। भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव का कहना है कि पिछले 5 वर्षों में मोदी की लोकप्रियता में और इज़ाफ़ा ही हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि 2019 के मोदी के टक्कर में एक ही व्यक्ति है, और वो हैं 2014 वाले मोदी।

भारत में जनता हमेशा अपने नायकों को अपने सामने देखना चाहती है, चाहे वो फ़िल्मी हीरो हों या मोदी जैसे लोकप्रिय बड़े नेता। उन्हें टीवी पर देखने और सामने मंच पर देखने में अलग-अलग बातें हैं। नरेंद्र मोदी अपनी एक रैली से किसी भी संसदीय क्षेत्र का चुनावी गणित बदलने की क्षमता रखते हैं और इस उम्र में भी उनका ये अथक प्रयास प्रेरणादायक है।

सैटलाइट इमेज से ख़ुलासा: चीन ने ढाह दी 36 मस्जिदें, शिनजियांग में रोज़ा रखने पर भी प्रतिबन्ध

चीन में मुस्लिमों पर की जा रही कार्रवाई रमजान महीने में थमने का नाम नहीं ले रही है। इस्लाम के इस पवित्र महीने में चीन स्थित टकलामकान रेगिस्तान में हज़ारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग आया करते थे। यहाँ कुछ ऐसी मस्जिदें स्थित थीं, जहाँ 8 वीं शताब्दी के एक इस्लामिक योद्धा की याद में लोग नमाज़ पढ़ते थे। लेकिन, इस साल यह स्थल खाली पड़ा हुआ है। ‘द गार्डियन’ के एक ख़ुलासे के अनुसार, चीनी मुसलामानों के लिए हज की तरह महत्व रखने वाला ये स्थल आज खाली इसीलिए पड़ा हुआ है क्योंकि इसे ढाह दिया गया है। चीन ने इमाम आसीन दरगाह के गुम्बद को छोड़ कर इसके बाकी हिस्से को मिट्टी में मिला दिया है। यहाँ लगे झंडे और चढ़ावे गायब हो गए हैं।

2010 में कुछ यूँ गुलजार था ईमान वसीम दरगाह (साभार: द गार्डियन)

2016 से अब तक अकेले शिनजियांग प्रांत में ही 25 से अधिक मस्जिदों को तोड़-फोड़ दिया गया है। ‘द गार्डियन’ ने कुछ अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर चीन की 100 मस्जिदों को ट्रैक किया। इसमें उसने पाया कि 91 में से 31 मस्जिदों को बड़ी क्षति पहुँचाई गई है, वो भी 3 वर्षों के भीतर। इनमें से 15 मस्जिदों को तो गायब ही कर दिया गया, वहीं कुछ के गुम्बद गायब हैं तो कुछ की मीनारों का अता-पता नहीं है। कुछ मस्जिदों से उनका गेटहाउस ही गायब है। इसके अलावा 9 अन्य छोटे-मोटे मस्जिदों को भी ख़ासा नुकसान पहुँचाया गया है। चीन ने चुन-चुन कर उन मस्जिदों को ज्यादा तबाही पहुँचाई है, जहाँ उइगर मुसलमान भारी संख्या में जाया करते थे।

करगिलिक मस्जिद की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें (साभार: द गार्डियन)

रेगिस्तान में जाफरी सदैव नामक इस्लामिक शख़्सियत की याद में एक मस्जिद था। यहाँ आने के लिए मुस्लिम 70 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक दुर्गम यात्रा किया करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने ही इस प्रान्त में आकर इस्लाम धर्म को फैलाया था, इसका प्रचार-प्रसार किया था। न सिर्फ़ यहाँ स्थित मस्जिद और दरगाह, बल्कि मुस्लिम आगुन्तकों के लिए ठहरने वाले स्थल को भी तोड़ डाला गया है। दक्षिण शिनजियांग में करगिलिक मस्जिद इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मस्जिद था। यहाँ हर सप्ताह मुस्लिम नमाज़ पढ़ने के लिए जमा होते थे। अब इसका कोई अता-पता नहीं है। ऐसा लगता है, जैसे यहाँ कुछ रहा ही न हो।

होतन के पास युटियन एटिका (Yutian Aitika) नामक एक मस्जिद था, जिसका इतिहास काफ़ी पुराना है। ये पिछले 800 वर्षों से यहाँ स्थित था। ये भी अपने इलाक़े का सबसे बड़ा मस्जिद था। अब इसी जगह बस कुछ खँडहर बचा है। चीन का मानना है कि वह सभी धर्मों के क्रियाकलापों को पूरी स्वतन्त्रता देता है लेकिन लोगों का कहना है कि चीन इस्लाम का चीनीकरण करने के लिए एक अभियान चला रहा है, जिसके तहत मस्जिदें तोड़ी जा रही हैं और उइगर मुस्लिमों को गिरफ़्तार कर प्रताड़ित किया जा रहा है। राहिले दावुत, जो चीन में स्थित मस्जिदों एवं दरगाहों के बारे में लिख रहे थे, वो अचानक से गायब हो गए।

राहिले का कहना था कि जिस तरह से चीन की नीतियाँ चल रही हैं, उससे लगता है कि कुछ दिनों बाद उइगर मुस्लिमों को अपने इतिहास एवं संस्कृति का ज्ञान ही नहीं रहेगा। उधर चीन ने शिनजियांग में रमजान महीना शुरू होते ही सरकारी अधिकारियों, छात्रों और बच्चों के रोज़ा रखने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इन सब ख़बरों के बीच पाकिस्तान भी चुप है और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ऐसे सवालों को टाल जाते हैं या गोलमोल जवाब देकर चलते बनते हैं।