मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ ने अपने चुनावी हलफ़नामे में ₹600 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है। नकुल मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार हैं।
उनके नामांकन पत्र के अनुसार, नकुल के पास ₹615,93,17,741 की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास कुल ₹2,30,31,907 हैं। इसके अलावा, नकुल के पास लगभग ₹41.77 करोड़ (मौजूदा बाजार मूल्य) से अधिक की अचल संपत्ति है।
हलफ़नामे में, नकुल ने पिछले 5 वित्तीय वर्षों के दौरान दर्शाए गए अपने आयकर रिटर्न में उन्होंने अपनी वार्षिक आय घोषित की है। 2013-14 में, उनकी आय ₹98 लाख से बढ़कर अगले वित्तीय वर्ष के अंत तक ₹3.37 करोड़ हो गई। वित्तीय वर्ष 2016-17 में सबसे अधिक वृद्धि हुई, जहाँ उनकी आय ₹1.50 करोड़ से ₹13.34 करोड़ हो गई। नकुल की आय अगले वर्ष (2018) ₹2.76 करोड़ गिर गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब नकुल ने आय में वृद्धि की सूचना दी थी उसी वित्तीय वर्ष में विमुद्रीकरण हुआ था।
नकुल की पत्नी, प्रिया नाथ ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में अपने पति की आय में भारी उछाल की सूचना दी। 2018 में उनके पिछले साल की आय जो कि ₹22.63 लाख थी वो बढ़कर ₹4 करोड़ से अधिक हो गई।
कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के पास TV-18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड के ₹3.52 लाख के शेयर हैं जिसके द्वारा CNBC-TV-18, CNBC आवाज, CNBC-टीवी 18 प्राइम HD, CNN-न्यूज 18, न्यूज 18 इंडिया और IBN लोकमत जैसे विभिन्न समाचार चैनल चलाए जाते हैं। दूसरी ओर, उनकी पत्नी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश किया है।
हाल के दिनों में मध्य प्रदेश में आयकर विभाग द्वारा 50 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान नकुल के पिता, कमलनाथ की काफ़ी किरकिरी हो चुकी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी, रतुल पुरी (कमलनाथ का भतीजा), अमीरा समूह और मोजर बेयर के स्थानों पर तलाशी ली गई। भोपाल, इंदौर, गोवा और दिल्ली में 35 स्थानों पर भी तलाशी ली गई।
आयकर विभाग ने सोमवार को कहा कि उसने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके अन्य करीबी सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान लगभग ₹281 करोड़ की बेहिसाब नकदी के रैकेट का पता लगाया।
इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली गठबंधन की जीत हुई है। उनकी दक्षिणपंथी ‘Likud Party’ को 35 सीटें मिली हैं। हालाँकि, उनके प्रतिद्वंदी बेनी गांट्ज़ की पार्टी को भी इतनी ही सीटें मिली है लेकिन अन्य दक्षिणपंथी पार्टियों के सहयोग से 69 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर से अपने ‘शक्तिशाली’ देश का नेतृत्व करने को तैयार हैं। बेनी इजराइली सेना के प्रमुख रहे हैं। 120 सदस्यीय ‘Knesset में’ बहुमत के लिए 61 सीटों की ज़रूरत होती है। नेतन्याहू की पार्टी को 2014 में हुए चुनाव से इस बार 5 सीटें अधिक मिली है। सभी दक्षिणपथी पार्टियों के गठबंधन को मिला दें तो उनकी सीटों की संख्या 65 पहुँच जाती है।
इसके साथ ही इस साल के अंत तक नेतन्याहू इजराइल के सबसे लम्बे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री हो जाएँगे। वो इजराइल के संस्थापक पितृपुरुष डेविड बेन-गुरियन को पीछे छोड़ देंगे। नेतन्याहू पर हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे लेकिन उनकी जीत से पता चलता है कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता कम नहीं हुई है। नेतन्याहू ने जीत की ख़ुशी में समर्थकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भले ही ये दक्षिणपंथी सरकार है लेकिन वो सभी के प्रधानमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि वो राइट, लेफ्ट, Jews, Non-Jews- इन सभी के पीएम होंगे। उन्होंने पिछले चुनाव से भी ज्यादा सीटें देने के लिए इजराइल की जनता का धन्यवाद किया।
शुरुआती एग्जिट पोल्स में सेंटर-लेफ्ट बेनी की जीत की सम्भावना दिख रही थी लेकिन चुनाव परिणाम आने पर पता चला की ये काँटे की टक्कर थी। नेतन्याहू को दक्षिणपंथी, राष्ट्रवादी व धार्मिक पार्टियों का समर्थन मिला है। नेतन्याहू को प्यार से वहाँ की जनता उनके निकनेम ‘बीबी’ से पुकारती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें ट्विटर पर बीबी कहकर ही सम्बोधित करते हैं। जब पीएम मोदी 2017 में इजराइल गए थे तो पीएम नेतन्याहू ने कहा था कि उन्होंने इसके लिए 70 वर्ष का बहुत लम्बा इंतजार किया है। बता दें कि मोदी इजराइल का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।
नेतन्याहू ने सुरक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था और ये जनता के बीच प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी लेफ्टिनेंट जनरल बेनी गांट्ज़ ने नवंबर ब्लू वाइट पार्टी का गठन किया था। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा था कि इजराइल रास्ता भटक चुका है और वो देश में फिर से एकता स्थापित करेंगे। नेतन्याहू ने अपने चुनावी प्रतिद्वंद्वियों को ‘कमज़ोर लेफ्टिस्ट्स’ बताया था। उनके ख़िलाफ़ तीन पूर्व सेना प्रमुखों का गुट था। उन्होंने विपक्ष और मीडिया द्वारा अपने ख़िलाफ़ लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों को ‘Witch Hunt’ बताया था। जनता ने ‘किंग बीबी’ के नारे लगाकर उनकी जीत का उत्सव मनाया।
बता दें कि अभी आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में भारत और इजराइल के सम्बन्ध काफ़ी अच्छे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार बढ़कर क़रीब 9 बिलियन डॉलर हो गया है। मिडिल ईस्ट में भी भारत अपना अहम किरदार निभाने के लिए तैयार है और इसके लिए इजराइल से उनके अच्छे संबंधों का फ़ायदा मिल सकता है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि इजराइल और भारत के अच्छे संबंधों को फिलीस्तीन अपने लिए फ़ायदे के तौर पर देखता है।
चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक की रिलीज पर रोक लगा दी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित फ़िल्म 12 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी। इसमें अभिनेता विवेक ओबेरॉय पीएम मोदी के किरदार में नज़र आने वाले हैं। इसमें नरेंद्र मोदी के बचपन से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के सफ़र को दर्शाया गया है। फ़िल्म के ट्रेलर को वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट यूट्यूब पर क़रीब ढाई करोड़ लोगों द्वारा देखा जा चुका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर सेंसर बोर्ड फ़िल्म को पास कर देती है तो इसके रिलीज में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनज़र आयोग ने फ़िल्म की रिलीज रोक दी है।
सुरेश ओबेरॉय द्वारा प्रोड्यूस की गई इस फ़िल्म का फर्स्ट लुक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा जारी किया गया था। विपक्षी दल लगातार कहते रहे हैं कि ये फ़िल्म चुनाव को प्रभावित करने के लिए रिलीज की जा रही है लेकिन विवेक ओबेरॉय ने विपक्षी दलों के इन आरोपों को खारिज कर दिया था। आयोग ने कहा कि जबतक आम चुनाव ख़त्म नहीं हो जाते, तबतक ये फ़िल्म रिलीज नहीं होगी।
अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने एक साक्षात्कार में इस बात को स्वीकार किया था कि वो पीएम नरेंद्र मोदी पर विश्वास करते हैं और आज के समय में देश को उनके जैसे नेता की ही आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि मोदी के चाय वाले बनने से लेकर एक विश्व नेता बनने तक की कहानी हर दूसरे वैश्विक नेता के लिए प्रेरणादायक है। फ़िल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की अवधि 2 घंटे 10 मिनट और 53 सेकेंड है। मंगलवार (अप्रैल 9, 2019) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दी थी। फिल्म को सुप्रीम कोर्ट और सेंसर बोर्ड दोनों ही संस्थाओं से हरी झंडी मिल गई थी।
कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘पीएम नरेंद्र’ मोदी को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘फ्लॉप आदमी’ के जीवन पर बनी फिल्म में ‘फ्लॉप हीरो’ ने काम किया है। कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि फिल्म ‘जीरो’ साबित होने वाली है।
कल यानी बृहस्पतिवार को देश में आम चुनावों का पहला चरण का मतदान होना है। मतदान के लिए चुनाव आयोग काफी समय पहले से तैयारी शुरु कर देता है, जिनमें वोटर लिस्ट तैयार की जाती है और आवश्यक भूल-चूक में सुधार किया जाता है। गाजियाबाद के कौशांबी में इस मामले में बड़ी चूक देखने को मिली है। मामला यह है कि कौशांबी में रहने वाले पूर्व चुनाव आयुक्त का नाम ही वोटर लिस्ट से गायब है।
भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त जीवीजी कृष्णमूर्ति कौशांबी के मलयगिरी टावर में बीते 27 वर्षों से रह रहे हैं। NBT की एक खबर के अनुसार, बीते 8 सालों से विधानसभा चुनाव हो या फिर नगर निगम के चुनाव हर बार जीवीजी कृष्णमूर्ति का नाम वोटर लिस्ट से गायब रहता है।
इस बात की शिकायत के बाद कृष्णमूर्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया जाता था। लेकिन इस बार इस गलती में सुधार होने की संभावना कम नजर आ रही है। आम चुनाव से सिर्फ 2 दिन पहले इस इलाके की वोटर लिस्ट जारी की गई है। ऐसे में इतने कम समय में गलती में सुधार हो पाना अब मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन काम नजर आ रहा है। प्रशासन द्वारा एक BLO को पूर्व चुनाव आयुक्त के घर भेजा गया है। जीवीजी कृष्णमूर्ति इन दिनों बीमार चल रहे हैं।
अन्य लोगों के नाम भी हैं लिस्ट से गायब
कौशांबी में रहने वाले लोगों का आरोप है कि इलाके के 60% लोगों का नाम या तो वोटर लिस्ट से गायब है या फिर उनमें कोई गड़बड़ी है। कौशांबी में करीब 9800 मतदाता हैं, जिनमें से 4500 के नाम वोटर लिस्ट में या तो गलत हैं या फिर काटे गए हैं। मंगलवार (अप्रैल 09, 2019) को जारी वोटर लिस्ट में इस गलती का पता चला है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से मिलकर इसकी शिकायत की।
वोटर लिस्ट में इस गड़बड़ी पर कौशांबी के पार्षद मनोज गोयल ने जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी जताई है। उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
लोकसभा चुनावों में मतदान के पहले चरण में अब 24 घण्टे से भी कम का समय बाकी बचा है। कल 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर मतदान होंगे। निर्वाचन नियमों के अनुसार मतदान प्रक्रिया खत्म होने के 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार रुक जाता है। जिसके मुताबिक इन 20 राज्यों में प्रचार का हल्ला अब शांत हो चुका है। अब देखना है कि प्रत्याशियों द्वारा की मेहनत का जनता उन्हें 23 मई को क्या परिणाम सौंपती है।
कल (अप्रैल 11, 2019) को जिन 20 राज्यों की 91 सीटों पर मतदान होना है। उनमें आंध्र प्रदेश की 25, तेलंगाना की 17, उत्तर प्रदेश की 8, महाराष्ट्र की 7, उत्तराखंड की 5, असम की 5, बिहार की 4, ओडिशा की 4, अरुणाचल प्रदेश की 2, पश्चिम बंगाल की 2, जम्मू कश्मीर की 2, छत्तीसगढ़ की 1, मेघालय की 1, मिजोरम की 1, मणिपुर की 1, नगालैंड की 1, सिक्किम की 1, त्रिपुरा की 1, लक्षद्वीप की 1, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की 1 सीटें शामिल हैं।
२०१९ लोक सभा चुनाव का पहला चरण ११ अप्रैल को मतदान गाज़ियाबाद नॉएडा , गौतमबुद्ध नगर में सरकारी गैर सरकारी संस्थानो की छुट्टी रहेगी और कारखानों की व मज़दूरों का अबकाश रहेगा चुनाव आयोग का कहना है इससे वोट प्रतिशत बढ़ेगा ”मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अऱोडा ने घोषणा की #chunaavaayuktpic.twitter.com/snX85mZgaN
बताते चलें कि यूपी की 8 सीटों के लिए 16633 मतदान केंद्रों पर 96 उम्मीदवार एक-दूसरे को टक्कर देने के लिए खड़े हैं। यहाँ पर मुख्य मुकाबला भाजपा, कॉन्ग्रेस और बसपा-सपा तथा-रालोद के महागठबंधन के बीच होगा।
वहीं उत्तराखंड में भी 5 सीटों पर 52 उम्मीदवार के बीच चुनावी संग्राम होगा। यहाँ पर मुख्य मुकाबला भाजपा, कॉन्ग्रेस और बसपा के मध्य 11235 मतदान केंद्रों पर होगा। बंगाल की 2 सीटों पर 18 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में हैं। यहाँ भाजपा, कॉन्ग्रेस, टीएमसी के अलावा मुख्य मुकाबले में वाम दल भी शामिल है। छत्तीसगढ़ में 1 सीट पर 7 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहाँ पर कॉन्ग्रेस, भाजपा और बसपा के बीच मुख्य लड़ाई है।
बिहार की 4 सीटों पर 44 उम्मीदवार खड़े हैं। यहाँ पर मुख्य दलों में भाजपा जेडीयू और कॉन्ग्रेस-राजद का गठबंधन है। वहीं जम्मू कश्मीर में 2 सीटों पर 33 प्रत्याशी जीत की आस लगाए बैठे हैं। यहाँ पर पीडीपी, कॉन्ग्रेस और जेकेएनसी का गठबंधन है।
Times Of India, देश के प्रमुख प्रकाशनों में से एक है, जिसे अक्सर फेक न्यूज़ फैलाते पाया गया है। एक बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ जिसमें एक ख़बर को ग़लत तरीके से प्रचारित करने का प्रयास किया गया। मेरठ लॉ स्कूल की एक 22 वर्षीया छात्रा के संबंध में टाइम्स ने अपनी ख़बर में फिर से आधी-अधूरी जानकारी दी।
Times Of India के पत्रकार पीयूष राय ने मेरठ लॉ स्टूडेंट की एक ख़बर की जिसमें बताया गया कि बीजेपी की टोपी पहनने से मना करने के बाद एक छात्रा को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया। अपनी इस झूठी ख़बर के ज़रिए पत्रकार ने भाजपा को निशाना बनाने को कोशिश की। उन्होंने आगे दावा किया कि जिन ‘कथित’ छात्रों ने उमाम खानम को कथित तौर पर ‘बीजेपी की टोपी पहनने से मना’ किया था, उन्हें भी निष्कासित कर दिया गया।
The Times Of India report
हालाँकि, Times Of India के पत्रकार द्वारा किए गए सभी दावे पूरी तरह से झूठे हैं। पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए कॉलेज का दौरा किया, जहाँ उन्होंने साथी सहपाठियों और कॉलेज के छात्रों से केवल यह जानने का प्रयास किया कि पत्रकार पीयूष राय द्वारा किए गए दावे जिनमें दोनों छात्रों के निष्कासन की बात कही गई थी वो कितने सच्चे और कितने झूठे हैं।
Here’s my report of alleged molestation case of a Muslim student at a Meerut law college
Few quick points: 1) No eyewitness so far 2) 35/50 students hv given a written statement refuting complainant 3) They say it’s triggered by “ideological differences”https://t.co/JPDT8fFiGU
अपनी ‘धर्मनिरपेक्ष’ पत्रकारिता को आगे बढ़ाने की कोशिश में, पत्रकार पीयूष ने आगे आरोप लगाया कि 22 वर्षीया उमाम खानम को कॉलेज द्वारा निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उसने कॉलेज ट्रिप में भाजपा की टोपी पहनने से इनकार कर दिया था जिसके लिए उसे अन्य छात्रों द्वारा परेशान भी किया गया। पीयूष राय के झूठे आरोपों को उस समय मुँह की खानी पड़ी जब ट्रिप पर गए अन्य छात्रों के साथ-साथ टीचर्स ने पत्रकार के दावों का खंडन किया और यह स्पष्ट रूप से कहा कि न तो बस में मौजूद छात्र शराब के प्रभाव में थे और न ही कोई भाजपा की टोपी पहने हुए थे।
इसके अलावा, कॉलेज के अधिकारियों ने उमाम खानम द्वारा की गई शिकायतों को देखने के लिए एक समिति बनाई। कॉलेज ने उन दो छात्रों को भी तुरंत निलंबित कर दिया, जिन पर कथित उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था। हालाँकि, घटना के एक सप्ताह बाद भी, समिति द्वारा एक भी बैठक नहीं की जा सकी क्योंकि न तो पीड़िता और न ही अभियुक्त या उनके माता-पिता अपना बयान देने के लिए समिति के सामने उपस्थित हुए। इसलिए, कॉलेज ने 22 वर्षीया छात्रा को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया।
OpIndia.com ने कॉलेज की एक छात्रा से बात की गई उसके अनुसार, शिक़ायत करने वाली उमाम खानम को कथित रूप से झूठे आरोप लगाने के लिए निलंबित कर दिया गया। सभी सबूत उसके ख़िलाफ़ थे और उसके पास कोई सबूत नहीं था जिससे उसके द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित हो सकें।
2 अप्रैल को, उमाम खानम ने एक विवाद शुरू कर दिया था जब उसने अपने साथी छात्रों और अपने फैकल्टी के सदस्यों के ख़िलाफ़ परेशान किए जाने संबंधी गंभीर आरोप लगाए थे। अपने ट्वीट्स में खानम ने दावा किया था कि परेशान करने वाले छात्र शराब के नशे में थे।
खानम ने आरोप लगाया कि छात्रों ने उसे बीजेपी की टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। इसी के लिए उसे परेशान किया गया क्योंकि खानम ने वो टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। खानम ने अपने ट्वीट में यह भी लिखा कि जब वो छात्र उसे टोपी पहनने के लिए मजबूर कर रहे थे और परेशान कर रहे थे तो वहाँ मौजूद पुरुष अध्यापकों ने इस तथ्य को नज़रअंदाज़ किया।
हालाँकि, छात्रों के साथ ट्रिप पर जाने वाले शिक्षकों ने सभी आरोपों का खंडन किया था और ट्रिप के दौरान ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया, जिसके आरोप 22 वर्षीया लॉ स्टूडेंट उमाम खानम ने लगाए थे।
स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा की एक ग्राउंड रिपोर्ट में इस घटना से संबंधित एक और रोचक जानकारी सामने आई है क्योंकि लगभग 35 छात्र, जो कथित पीड़िता खानम के सहपाठी भी थे, ने स्पष्ट तथ्यों द्वारा समर्थित कहानी यानी इस घटना पर अपना पक्ष साझा किया।
कई अन्य छात्र भी स्वराज्य के लिए अपनी गवाही देने के लिए आगे आए कि कैसे उमाम एक ‘धार्मिक कट्टरपंथी’ है जिसने ‘शेहला राशिद और अरफा ख़ानम की गुड बुक में शामिल होने के लिए’ ऐसा किया।
उमाम खानम की सहपाठी ने साझा किया था स्क्रीनशॉट
उमाम की सहपाठी ज्योति सिंह ने उमाम खानम के खिलाफ अपने दावों को मजबूत करने के लिए उमाम के सोशल मीडिया पोस्ट के कई स्क्रीनशॉट भी लिए। उमाम ने एक दिन में तीन सौ ट्वीट डिलीट किए। हम उनमें से कई के स्क्रीनशॉट लेने में कामयाब रहे। ज्योति ने होली से जुड़ी एक और घटना साझा की। “अमित और अंकुर ने उस पर रंग लगाया। जब तक रंग सफेद और हरा था, वह ठीक थी। जिस क्षण उन्होंने उस पर केसरिया रंग डाला, और उन्होंने अनजाने में ऐसा किया, उसने कहा कि यह ठीक नहीं किया गया और रोना शुरू कर दिया।
ज्योति ने कहा, “वह हमेशा अपने धर्म के बारे में बात करती रही है। एक बार हमारे एक सीनियर जो कि एक मुस्लिम हैं और बहुत धर्मनिरपेक्ष हैं, ने कहा कि वह किसी भी धर्म में विश्वास नहीं करते, उस दिन उमाम इतना पागल हो गई कि वह वहाँ से बाहर निकल गई और आज तक, वह उनसे बात नहीं करती है।”
स्वराज्य टीम ने घटना के उसके पक्ष को सुनने के लिए उमाम तक पहुँचने की कोशिश की, जिसने कहा कि वह केवल फोन पर बात कर सकती है क्योंकि वह कॉलेज नहीं जाएगी।
जब इस बारे में सवाल किया गया कि कोई चश्मदीद गवाह क्यों नहीं है, तो उमाम ने कहा कि वह अपनी शिकायत पर अडिग है। यह पूछने पर कि उसके सहपाठी उसके खिलाफ अभियान क्यों चला रहे हैं, उमाम ने कहा कि उसके खिलाफ एक साजिश चल रही है। रिपोर्टर ने उमाम के ट्वीट्स और लिखित कम्प्लेन में विसंगति पर सवाल उठाया और पूछा कि लिखित शिकायत कम्प्लेन में उसकी मुस्लिम पहचान का कोई उल्लेख नहीं था, उसने कहा कि वह ऐसा महसूस करती है और अपनी शिकायत पर अडिग है। हालाँकि, उमाम ने यह पता चलने के बाद कॉल काट दिया कि रिपोर्टर स्वराज्य के लिए काम करती है।
एक अन्य छात्र ने यह भी कहा कि उमाम एक धार्मिक कट्टरपंथी है। उन्होंने कहा है कि उमाम बहुत ही रूढ़िवादी है, उसने दाऊद इब्राहिम को भारत के ‘बाप’ के रूप में संदर्भित किया था और चाहती थी कि मोदी को भी लिंच किया जाए। उनके सहपाठियों में से एक ने यह भी कहा कि उमाम ने शरिया कानूनों का समर्थन किया था, गौ-मूत्र पर चुटकुलों का समर्थन किया था और हर किसी को अंध भक्त और हिंदुत्व टाइप कहा था जो उससे असहमत थे।
सत्तारूढ़ भाजपा और हिंदुओं को निशाना बनाने की जल्दबाजी में, टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार ने भाजपा को बदनाम करने के लिए ऐसी घटिया प्रोपेगेंडा का सहारा लिया है कि यात्रा के दौरान किसी तरह की उत्पीड़न की रिपोर्टिंग में बुनियादी पत्रकारिता की नैतिकता का पालन किए बिना या कम से कम दूसरे को सुने बिना ही ऐसी फर्ज़ी कहानी छाप दी।
12 अप्रैल को रिलीज हो रही फ़िल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ को रोकने के लिए कॉन्ग्रेस पूरी जद्दोजहद कर रही है। इसके लिए निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को लीगल नोटिस भी भेजा गया है। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री और उनके नाती संजय नाथ सिंह फ़िल्म के समर्थन में खड़े हैं। ट्रेलर लॉन्च के मौके पर संजय नाथ सिंह ने कहा भी था कि लाल बहादुर शास्त्री का पार्थिव शरीर जब दिल्ली लाया गया था तब किसी ने आकर उनके मुँह पर चन्दन मल दिया था। विवेक अग्निहोत्री और उनकी पत्नी अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने इस पर कुछ सुलगते हुए सवाल भी दागे थे। विवेक अग्निहोत्री ने ऑपइंडिया को इंटरव्यू देते हुए कई सवालों के जवाब दिए थे। उसमें उन्होंने कहा था कि वामपंथियों को ‘द ताशकंद फाइल्स’ ज़रूर देखनी चाहिए।
ट्रेलर लॉन्च के मौके पर पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के बड़े बेटे अनिल शास्त्री ने अपने पिता की तुलना वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुलना की थी। हाल ही में ऑपइंडिया ने ‘द ताशकंद फाइल्स’ का रिव्यु भी प्रकाशित किया था, जिसमें फ़िल्म के सभी आयामों की समीक्षा करते हुए बताया गया था कि ये वास्तविकता पर आधारित फ़िल्म है जिसमें तथ्यों से छेड़छाड़ नहीं की गई है। फ़िल्म में इंदिरा गाँधी का नाम नहीं लिया गया है और तथ्यों को दर्शकों के समक्ष रखते हुए चीजें उनके विवेक पर छोड़ दी गई हैं। लेकिन, बेचैन कॉन्ग्रेस इसकी रिलीज रुकवाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। ऊपर आप निर्देशक अग्निहोत्री को भेजी गई लीगल नोटिस को डाउनलोड कर के पढ़ सकते हैं।
NEWS ALERT: Shastri ji’s murder mystery #TheTashketFiles under legal threat by Congressmen.
I appeal to every citizen who wants the truth of Shastri ji’s mysterious death out to support us. https://t.co/67Xsy0X7p9
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) April 10, 2019
लीगल नोटिस मिलने के बाद विवेक अग्निहोत्री ने ऑपइंडिया को एक्सक्लूसिव बयान देते हुए कहा:
“जैसा कि आप जानते हैं, हमारी फ़िल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ 12 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। कल रात हमें एक क़ानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें प्रमुख कॉन्ग्रेस सदस्य और पार्टी के पूर्व सचिव द्वारा फ़िल्म की रिलीज रोकने की माँग की है। नोटिस भेजने वाले कॉन्ग्रेस के सुप्रीम गाँधी परिवार के सहयोगी हैं और रिश्ते में दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते हैं। ये आश्चर्य की बात है क्योंकि 7 अप्रैल को पीवीआर में आयोजित फ़िल्म के दिल्ली प्रीमियर में उन्होंने ‘द ताशकंद फाइल्स’ देखी थी और फ़िल्म की प्रशंसा भी की थी।
उन्होंने मेरे से मुलाक़ात कर व्यक्तिगत रूप से फ़िल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ को सराहा था। मुझे पता चला है कि ये सब कॉन्ग्रेस की सुप्रीम फैमिली द्वारा करवाया जा रहा है। उन्हें ऐसा करने के लिए मज़बूर किया जा रहा है। शास्त्रीजी के पोतों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, शीर्ष परिवार द्वारा। आख़िर कॉन्ग्रेस नेता ऐसा क्यों कर रहे हैं? आख़िर वो क्यों फ़िल्म की रिलीज रोकना चाहते हैं? आख़िर क्यों वो लोग मुझे चुप कराना चाहते हैं?
मुझे लगातार धमकाया जा रहा है। फ़िल्म की रिलीज बाधित करने की धमकी दी जा रही है। यह एक दुर्लभ फ़िल्म है, जिसमें एक युवा पत्रकार ‘Right To Truth’ की चाह में विजेता बनकर उभरती हैं। वो लोग ऐसी फ़िल्म से क्यों डर रहे हैं जो नागरिकों के ‘Right To Truth’ की आवाज़ को उठाती है? मैं सभी पत्रकारों से निवेदन करता हूँ कि आप उन से पूछो कि उनको इस फ़िल्म से क्या दिक्कत है? इस फ़िल्म में ऐसा क्या है, जो वो इतने डरे हुए हैं?”
विवेक अग्निहोत्री को भेजे गए लीगल नोटिस का एक अंश
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आज बुधवार (अप्रैल 10, 2019) को निर्देशक विवेक अग्निहोत्री द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फ़िल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ में मिथुन चक्रवर्ती, श्वेता बासु प्रसाद और नसीरुद्दीन शाह सहित कई बड़े अभिनेता-अभिनेत्री हैं। फ़िल्म को समीक्षकों द्वारा भी सराहा गया है।
बीते कुछ समय में कॉन्ग्रेस पार्टी की बिगड़ी स्थिति किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ जहाँ चुनावों के मद्देनजर आए दिन भाजपा में किसी न किसी नेता के शामिल होने की खबरें आती हैं, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी से बड़े-बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने की खबरें भी सुनने को मिलती है। कॉन्ग्रेस की कमियों के कारण उसका दामन छोड़ने की लिस्ट में कई कद्दावर नेताओं के नाम भी शामिल हैं। इसमें एक नाम आँध्र प्रदेश में तीन बार विधायक रह चुके कोटला जयसूर्या प्रकाश रेड्डी का भी है। जयसूर्या, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कोटला विजय भास्कर रेड्डी के बेटे हैं। उन्होंने हाल ही में कॉन्ग्रेस को छोड़ कर टीडीपी का हाथ थामा है। और एक बार फिर वह करनूल से अपनी किस्मत आजमाने को तैयार हैं।
जयसूर्या प्रकाश के इस फैसले के बाद और चुनावों से ठीक पहले उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में कॉन्ग्रेस छोड़ने के पीछे की वजह बताई। इस साक्षात्कार में जयसूर्या ने बताया कि उन्हें करनूल के किसानों की चिंता है। उन्होंने कहा कॉन्ग्रेस की छोटी-छोटी गलतियों के कारण राज्य में अब पार्टी का कोई अस्तित्व ही नहीं बचा है। जयसूर्या ने कहा कि उन्होंने पार्टी की हालत सुधारने की कोशिश लगभग साढ़े 4 साल तक की। लेकिन जब कोई भी उम्मीद नहीं बची… तब उन्होंने दुखी होकर कॉन्ग्रेस के साथ अपनी राजनीतिक सफर पर विराम लगाने की सोची, साथ ही राजनीति से भी संन्यास लेने का मन बना लिया था। लेकिन लोगों ने उन्हें राजनीति छोड़ने से मना किया। बाद में उन्होंने चंद्र बाबू नायडू से मिलकर टीडीपी जॉइन की।
कॉन्ग्रेस छोड़ने वाले सवाल पर उन्होंने आँध्र प्रदेश के विभाजन का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के लोगों को अब भी लगता है कि कॉन्ग्रेस ने आँध्र प्रदेश के साथ अन्याय किया है। लंबे समय से कॉन्ग्रेस से जुड़े रहने के बावजूद जयसूर्या खुद स्वीकारते हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोग अब खुलेआम ‘नो कॉन्ग्रेस’ कहते हैं। रेड्डी बताते हैं कि लोग उनकी छवि को हाथ (कॉन्ग्रेस) का पर्याय समझते हैं। जिसकी उन्हें बहुत चिंता है। वो उन्हें समझाने की कोशिश में जुटे हुए हैं कि उन्होंने पार्टी बदल ली है।
इस साक्षात्कार में रेड्डी ने कहा कि कॉन्ग्रेस की नीतियाँ बिल्कुल भी सही नहीं हैं। कॉन्ग्रेस को लगता है कि उन्हें काम करने की क्या जरूरत है। लोग इंतजार करेंगे और 10 साल बाद खुद उनके पास वापस लौट आएँगे।
इस साक्षात्कार में रेड्डी ने पार्टी बदलने के कारण अपने नाम की विश्वसनीयता पर पड़े प्रभाव को लेकर कहा कि जनता बुद्धिमान है। जनता को मालूम है कि उन्होंने टीडीपी इसलिए जॉइन की है ताकि वो किसानों का भला कर सकें। उनका कहना है कि 85 प्रतिशत करनूल के लोग खेती पर आश्रित हैं। उनकी मानें तो उन्होंने ये फैसला अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं से बातचीत के बाद लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी बदलने के सिवा उनके पास कोई विकल्प नहीं था और अब कॉन्ग्रेस के लौटने के चांस नहीं हैं।
जयसूर्या से जब यह पूछा गया कि क्या उन्होंने पिछले साढे़ चार सालों में राहुल गाँधी या सोनिया गाँधी से मिलकर अपनी परेशानी बताने का प्रयास किया? तो जयसूर्या ने बड़ा ही तालमेल बिठा के जवाब देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उन्होंने सितंबर 2018 में करनूल में राहुल गाँधी को रैली संबोधित करने के लिए बुलाया था। उन्होंने नेता के रूप में राहुल को और उनके परिवार को अच्छा बताया, लेकिन साथ मे ये बार-बार कहा कि आँध्र प्रदेश के विभाजन के बाद से कुछ ऐसी चीजें हुई हैं, जिसने लोगों को ‘नो कॉन्ग्रेस’ कहने पर मजबूर कर दिया है। उनकी मानें तो कॉन्ग्रेस को आँध्र प्रदेश में लौटने में अब कम से कम 15 साल लगेंगे।
यहाँ बता दें कि साल 2013 में कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए तेलंगाना को आँध्र प्रदेश से अलग कर दिया था। जिसे लेकर वहाँ के लोगों में खासी नाराजगी है। जयसूर्या का यह इंटरव्यू साबित करता है कि आँध्र प्रदेश में न केवल जनता बल्कि वहाँ के नेता भी पार्टी से असंतुष्ट हैं।
चारा घोटाला में दोषी पाया गया और राँची में सजा काट रहा बिहार का पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के वकील ने ज़मानत के लिए कोर्ट में गुहार लगाई। लालू की ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसका वकील कपिल सिब्बल CJI रंजन गोगोई के समक्ष पेश हुए। कपिल सिब्बल ने अदालत में लालू की तरफ से ज़िरह की। इस से पहले सिब्बल अनिल अम्बानी के लिए भी पैरवी कर चुके हैं। एक ही दिन में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनिल अम्बानी पर तथाकथित राफेल घोटाले में शामिल होने का आरोप भी लगाया था और फिर एरिक्शन मामले में उसी दिन अम्बानी की तरफ से अदालत में पेश भी हुए थे। सिब्बल राम मंदिर के विरोधी पक्ष की तरफ से भी अदालत में पैरवी कर चुके हैं।
सिब्बल के माध्यम से लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, “अगर मुझे ज़मानत पर रिहा किया तो मैं भाग नहीं जाऊँगा। मेरे निवेदन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर मुझे ज़मानत पर रिहा किया जाता है तो इसमें ख़तरा ही क्या है?” लालू की इस अपील के जवाब में सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, “कोई ख़तरा नहीं है सिवाए इसके कि तुम दोषी करार दिए जा चुके हो। हम ऐसा नहीं सोचते कि तुमको ज़मानत पर रिहा किया जाएगा। तुम्हारी ‘Special Leave Petition’ को खारिज किया जाता है।“
“We dont think we will release you on bail, SLP stands dismissed”, Supreme Court rejects bail plea by Lalu Prasad Yadav in fodder scam. @laluprasadrjd
इससे पहले सीबीआई ने लालू यादव की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि उसे किसी भी क़ीमत पर अपनी राजनीतिक गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सीबीआई ने कहा कि अगर लालू यादव को मिली सारी सज़ाओं को एक साथ रखें तो उसको मिली सजा कुल 27.5 वर्ष हो जाती है। सीबीआई ने कहा कि लालू द्वारा बिहार का मुख्यमंत्री रहते की गई कुटिल और बेईमान हरकतों ने पूरे देश की अंतश्चेतना को हिला कर रख दिया था।
सीबीआई ने कहा कि लालू स्वास्थ्य कारणों का बहाना बनाते हुए ज़मानत की माँग कर अदालत को गुमराह कर रहा है। वैसे भी देखा जाए तो लालू अपना अधिकतर सज़ा-काल राँची स्थित अस्पताल RIMS में ही गुज़र रहा है, जहाँ उससे मिलने कई विपक्षी नेता भी पहुँचते रहते हैं। अभी हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद सुप्रीमो लालू यादव पर बड़ा आरोप लगते हुए कहा था कि वह जेल से ही चुनाव को प्रभावित कर रहा है। इसके बाद सूचना मिलते ही सिटी एसपी व सदर डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस ने लालू यादव के पेइंग वार्ड की गहन तलाशी ली थी। झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी कहा था कि लालू से मिलने आने वाले लोगों के लिए जेल के नियम ताक पर नहीं रखे जा सकते।
जनवरी में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी लालू से मिलने पहुँचे थे। जदयू के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा से अयोग्य करार दिए गए शरद यादव भी लालू से मिले। फरवरी में पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश साहनी ने लालू के साथ बैठक की। सजा के बावजूद लालू यादव उम्मीदवार चुनने से लेकर पार्टी के आंतरिक निर्णयों तक, सभी चीजों पर नेताओं से मिलकर सलाह देता है और अपनी राजनीति चला रहा है। पिछले कुछ सप्ताह में विधायक भोला यादव और वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, डी राजा ने भी लालू से मुलाक़ात की।
सुपरस्टार रजनीकांत ने भाजपा के घोषणापत्र की प्रशंसा की है। बता दें कि भाजपा द्वारा ज़ारी किए गए ‘संकल्प पत्र’ में कहा गया है कि जल प्रबंधन के लिए एक नया मंत्रालय बनाया जाएगा। सामाजिक मुद्दों पर हमेशा से मुखर रजनीकांत ने भाजपा द्वारा नदियों को जोड़ने की घोषणा का स्वागत किया है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में लिखा है कि नया जल प्रबंधन मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में देश की बड़ी नदियों को जोड़ने का अटल जी का सोचा हुए महत्वकांक्षी कार्यक्रम को द्रुत गति से आगे बढ़ाएगा, जिससे कि पीने योग्य पानी और सिंचाई समस्या का समाधान हो। साथ ही भाजपा ने ‘जल जीवन मिशन’ के तहत ‘नल से जल’ कार्यक्रम के माध्यम से 2024 तक हर घर को नल का पानी उपलब्ध कराने की बात कही है।
भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में जल शक्ति
जल के क्षेत्र में इस तरह के कार्यों की घोषणा से ख़ुश 69 वर्षीय सुपरस्टार ने कहा कि वो अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल से ही नदियों को जोड़ने (Interlinking of the Rivers) वाली परियोजना के लिए वकालत करते आए हैं। उन्होंने कहा कि अटल जी ने उनकी इस सलाह को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा “भाजपा ने इस योजना को चालू करने की बात कही है। अगर ऐसा होता है तो जनता ख़ुश होगी।” रजनीकांत ने कहा कि इससे किसानों को तो फ़ायदा होगा ही, साथ ही ग़रीबी मिटाने में भी ये सहायक सिद्ध होगा।
Rajinikanth in Chennai: I have been advocating the project of interlinking of rivers since the time AB Vajpayee was the PM, he had accepted my idea. BJP in their 2019 manifesto has promised to undertake the project. People will be happier if this is done. #TamilNadupic.twitter.com/n6qOLCkuvj
पिछले 6 महीनों में अपनी दो फ़िल्मों (2.0, पेट्टा) से भारतीय सिनेमा को एक हज़ार करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दे चुके रजनीकांत के इस बयान को उन 600 कलाकारों के बयान पर भारी माना जा रहा है, जिन्होंने भाजपा के ख़िलाफ़ वोट देने की अपील की है। हालाँकि, रजनीकांत ने आगामी चुनाव में किसी भी पार्टी का समर्थन न करने की भी बात कही है लेकिन उन्होंने राज्य की जनता से उसी पार्टी को वोट देने को कहा जो जल संकट का स्थायी हल निकाल सके।
जिन 600 फ़िल्मी लोगों ने सिक्यूलर धर्म निभाते हुए, मोदी जी को वोट न देने की अपील की है, उनका स्वागत है
इससे साबित होता है कि देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी अपने चरम पर है
और उसी आज़ादी के तहत सुपरस्टार रजनीकांत ने भाजपा के संकल्प पत्र का समर्थन भी किया है. यह और भी खुशी की बात है
— Chowkidar Vikash Preetam (@VikashPreetam) April 10, 2019
बता दें कि अमोल पालेकर और नसीरुद्दीन शाह सहित 600 कलाकारों, लेखकों और थिएटर से जुड़े लोगों ने पत्र लिखकर भाजपा को सत्ता से बाहर करने की अपील की है। संयुक्त बयान में इन कलाकारों ने कहा:
“आज भारत का विचार ख़तरे में है। आज गीत, नृत्य और हँसी ख़तरे में है। आज हमारा प्रिय संविधान ख़तरे में है। सरकार ने उन संस्थानों का दम घोंट दिया है जहाँ तर्क, बहस और असंतोष पर बात हो सकती थी। लोकतंत्र का सबसे कमज़ोर व्यक्ति हाशिए पर है। उसे सशक्त बनाना होगा। किसी भी लोकतंत्र में सवाल, बहस होनी चाहिए। लोकतंत्र जीवंत विपक्ष के बिना काम नहीं कर सकता। लेकिन मौजूदा सरकार इस सब को नष्ट कर रही है।”
अगर प्रोफेसनल फ्रंट पर बात करें तो रजनीकांत अभी अपनी फ़िल्म ‘दरबार’ की तैयारी में व्यस्त हैं। अक्षय कुमार की ‘हॉलिडे’ और आमिर खान की ‘गजनी’ का निर्देशन कर चुके प्रसिद्ध निर्देशक एआर मुर्गदास इस फ़िल्म के डायरेक्टर हैं। दक्षिण भारत की लोकप्रिय अभिनेत्री नयनतारा इस फ़िल्म में उनके साथ काम करेंगी। नयनतारा उनके साथ ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ‘चंद्रमुखी (2006)’ में भी काम कर चुकी हैं। कल इस फ़िल्म का फर्स्ट लुक जारी किया गया, जो दिन भर सोशल मीडिया में टॉप पर ट्रेंड होता रहा। इस फ़िल्म में रजनी 25 वर्षों बाद एक पुलिस अधिकारी के किरदार में दिखेंगे।