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सुकन्या समृद्धि योजना ‘ग़ैर-इस्लामिक’ घोषित: फ़तवा जारी, 200 से अधिक इस्लामिक जानकारों की सहमति

केंद्र की सुकन्या समृद्धि योजना को 200 से अधिक इस्लामिक जानकारों (मुफ्ती) ने ‘ग़ैर-इस्लामिक’ घोषित किया है। इस योजना के तहत बैंक में बालिकाओं के नाम पर उनके माता-पिता द्वारा खाता खुलवाया जाता है। शरिया के अनुसार यह योजना एक ग़ैर-इस्लामिक योजना है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH) के मीडिया प्रभारी अजिमुल्लाह सिद्दीकी के अनुसार, सुकन्या समृद्धि योजना ब्याज पर आधारित है, इसलिए यह योजना ग़ैर-इस्लामी है।

मोदी सरकार ने 2015 में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं’ अभियान के तहत यह योजना शुरू की थी। सुकन्या समृद्धि योजना केंद्र सरकार की ख़ास योजना है। इस योजना के तहत 10 साल तक की बच्चियों का बैंक खाता मात्र 250 रुपए में किसी पोस्ट ऑफिस या कमर्शियल ब्रांच की अधिकृत शाखा में उनके माता-पिता द्वारा खुलवाया जाता है। इस योजना के तहत खुलवाए गए खातों में जमा राशि पर 8.6% सालाना ब्याज (वर्तमान दर) दिया जाता है। शरिया के अनुसार, इस योजना के तहत मिलने वाला ब्याज ही इसे ग़ैर-इस्लामी बनाता है।

हालाँकि, विभिन्न मोबाइल ऐप के माध्यम से वित्तीय लेनदेन, जैसे कि PayTM या यहाँ तक ​​कि एक मोबाइल ऐप के माध्यम से टैक्सी बुक करने को भी शरिया के अनुसार वैध माना जाता है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया कि वैध वस्तुओं के विज्ञापन के लिए Google AdSense का उपयोग करना भी वैध है, जबकि Google AdSense के ज़रिए फिल्मों और अवैध कार्यक्रमों को बढ़ावा देना वैध नहीं है।

जमीयत उलेमा ए हिन्द के मीडिया प्रभारी अजीमुल्लाह सिद्दीकी ने बताया कि इस हफ़्ते की शुरुआत में संगठन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में बच्चियों के लिए चलाई जा रही छोटी बचत योजना पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कमाल फारुकी ने कहा कि बैंक के पास पूँजी के माध्यम से ब्याज अर्जित करना ‘ग़ैर-इस्लामी’ है।

दारुल उलूम देवबंद का ‘फतवा विभाग’ अक्सर ‘ग़ैर-इस्लामिक’ घोषित करने के लिए चर्चा में रहता है। पिछले साल इसने सीसीटीवी कैमरों को ‘ग़ैर-इस्लामिक’ घोषित किया था। इससे पहले, ऐसी ख़बर आई थी कि उन जगहों में ‘निकाह’ आयोजित नहीं किया जाएगा, जहाँ संगीत और नृत्य हो रहा या डीजे बज रहा हो। यह इस्लाम के ख़िलाफ़ है, इस तरह के निक़ाह का बहिष्कार किया जाएगा। दारुल उलूम देवबंद ने दुकानदारों द्वारा चूड़ियाँ पहनने को लेकर भी मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया था क्योंकि अजनबी पुरुषों द्वारा महिलाओं का हाथ छूना ‘एक बड़ा पाप’ है।

देवबंद के मौलवियों ने एक बार जीवन बीमा के ख़िलाफ़ भी फतवा जारी किया था, क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि जीवन और मृत्यु अल्लाह के हाथ में है और कोई भी बीमा कंपनी किसी व्यक्ति की लंबी उम्र की गारंटी नहीं दे सकती है।

इसके अलावा कुछ दिनों पहले दारुल उलूम देवबंद से जुड़े एक मौलवी ने फुटबॉल देखने वाली महिलाओं के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया, क्योंकि पुरुषों को नंगे घुटनों में खेलते हुए देखना महिलाओं के लिए मना है।

अतीत में फेसबुक और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया वेबसाइटों पर स्वयं और परिवार की तस्वीरें पोस्ट करने के ख़िलाफ़ भी फतवे जारी किए गए थे। नए साल के जश्न और डिजाइनर बुर्के भी इसी फतवे में शामिल थे।

15 साल की मुस्लिम लड़की को भगवान कृष्ण के रूप में तैयार करने और गीता का पाठ करने के ख़िलाफ़ भी फ़तवा जारी किया गया था। एक देवबंद उलेमा ने कथित तौर पर भगवान कृष्ण के रूप में तैयार लड़की पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की थी और इसे इस्लाम विरोधी तक करार दिया था।

20 किलो की ‘कंकाल’: पति और सास की हैवानियत, दूधमुँहे बच्चों पर भी नहीं खाया तरस

30 मार्च को केरल के कोल्लम में तुषारा नाम की एक 27 वर्षीय युवती को दहेज के कारण भूख से तड़पा-तड़पा कर मार दिया गया। इस मामले में रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह है कि जिस समय युवती की मौत हुई, उस वक्त उसका वजन केवल 20 किलो था। महिला की अस्पताल में मौत के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी।

पुलिस के अनुसार महिला के पति (चंदूलाल) और सास (गीतालाल) द्वारा उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। जिसके चलते दोनों ने तुषारा को खाना भी देना बंद कर दिया था। लंबे समय से महिला को केवल भीगे चावल और चीनी का पानी दिया जा रहा था। आज (अप्रैल 1, 2019) राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले से जुड़ी खबरों का संज्ञान लेते हुए केरल के पुलिस महानिदेशक को इस मामले में सख्त और तत्काल कार्रवाई करने के लिए एक पत्र भी जारी किया है।

पुलिस की मानें तो महिला का शरीर कंकाल जैसा दिखने लगा था, जिसमें मुश्किल से ही कोई मांस बचा था। रिश्तेदारों के आरोप हैं कि उसे इस प्रकार प्रताड़ित करने के पीछे दहेज मुख्य कारण था।

तुषारा की माँ विजयलक्ष्मी का कहना है कि उनकी बेटी को पिछले पाँच साल से परेशान किया जा रहा था और घर के किसी सदस्य से भी नहीं मिलने दिया जाता था। तुषारा की माँ कहती हैं कि उन्होंने पुलिस में इस बात की सूचना इसलिए नहीं दी थी क्योंकि उन्हें डर था कि वे लोग उसे मार देंगे। चंदूलाल के पड़ोसी का आरोप है कि महिला पर मानसिक और शारीरिक रूप से अत्याचार किया जाता था।

यहाँ बता दें कि महिला का विवाह 2013 में हुआ था। शादी के समय महिला के घरवालों ने कुछ सोने के गहने, रुपए लड़के के परिवार वालों को दिए थे और 2 लाख रुपए बाद में देने का वादा किया था। महिला के दो बच्चे हैं, एक की उम्र तीन साल है और एक की डेढ़ साल है।

Money Laundering: राहुल गाँधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा को ज़मानत, लेकिन कोर्ट ने लगाई #शर्त

मनी लॉन्डरिंग के मामले में सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को अदालत से ज़मानत मिल गई है। हालाँकि स्पेशल सीबीआई अदालत ने अग्रिम ज़मानत देते हुए वाड्रा को बिना अनुमति देश नहीं छोड़ने को कहा। वाड्रा के क़रीबी मनोज अरोड़ा को भी ज़मानत दे दी गई है। ये दोनों अभी अंतरिम ज़मानत पर बाहर थे। हालाँकि, स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने ज़मानत के लिए शर्तें भी रखी हैं। ये दोनों ही आरोपित बिना अदालत की पूर्व अनुमति के देश छोड़ कर नहीं जा सकते। दोनों को ही जब भी बुलाया जाएगा, उन्हें आकर जाँच में सहयोग करना पड़ेगा। इसके अलावा कोर्ट ने उन्हें सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करने व गवाहों को न बरगलाने के भी आदेश दिए।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी को कोर्ट ने 5 लाख रुपए के निजी मुचलके पर ज़मानत दी है। बता दें कि ज़मीन ख़रीद और शेल कंपनियों के जरिए विदेशों में (लंदन और दुबई) संपत्ति खरीदने के मामले में वाड्रा से अब तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) कई बार लंबी पूछताछ भी कर चुका है।

दुबई के जुमैरा में ई-74 नामक एक विला है, जिसकी क़ीमत ₹14 करोड़ बताई जा रही है। इसी विला को लेकर ED ने उनसे जानकारियाँ माँगी थी। दुबई की कम्पनी स्काईलाइट्स इंवेस्टमेंट्स से वाड्रा के संबंधों को लेकर भी उनसे सवाल किए गए थे। एजेंसी का मानना है कि वाड्रा ने इस कम्पनी में भारी मात्रा में नकदी जमा कराया था। वाड्रा की एक कम्पनी का नाम भी स्काईलाइट्स हॉस्पिटैलिटी है। जाँच अधिकारी इसे महज़ संयोग नहीं मान रहे।

वाड्रा से सीसी थम्पी नमक व्यक्ति से अपना सम्बन्ध स्पष्ट करने को भी कहा गया था। बता दें कि थम्पी स्काईलाइट्स इन्वेस्टमेंट का शेयरहोल्डर था। ED को शक है कि ये कोई शेल कम्पनी है। थम्पी ने ही जून 2010 में भगोड़े हथियार कारोबारी संजय भंडारी से लंदन का फ्लैट ख़रीदा था। पूछताछ के दौरान वाड्रा ने स्काईलाइट्स इंवेस्टमेंट्स के साथ किसी प्रकार के सम्बन्ध होने की बात को नकार दिया। अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान वाड्रा घबराए से लग रहे थे।

वाड्रा और उसकी माँ से बीकानेर ज़मीन ख़रीद में अनियमितताओं को लेकर सवाल किए जाएँगे। आरोप है कि वाड्रा ने बीकानेर जिले के कोलायत में 79 लाख रुपए में 270 बीघा जमीन खरीदकर तीन साल बाद उसे 5.15 करोड़ रुपए में बेच दी थी। रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ कई राज्यों में जमीन खरीद में अनियमितता बरतने के केस चल रहे हैं।

Seema-The Untold Story: 1962 में चीनी आक्रमण और सरकारी उदासीनता को दर्शाती फिल्म

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता हिरेन बोरा द्वारा बनाई गई असमिया भाषा की फिल्म सीमा- द अनटोल्ड स्टोरी ने सिनेमाघरों में धूम मचा दी है। ये फिल्म 29 मार्च को रिलीज हुई। इस फिल्म में 1962 में चीन द्वारा किए गए आक्रमण के दौरान असम के तेजपुर के लोगों की स्थिति को दर्शाया गया है। इसमें दिखाया गया है कि उस समय किस तरह डर गए थे और उन्होंने अपना बचाव किस तरह से किया था।

बता दें कि, फिल्म निर्माता हिरेन बोरा का होमटाउन तेजपुर है और जिस समय ये आक्रमण हुआ था, उस समय बोरा 12 साल के थे। उस घटना को इन्होंने अपनी आँखों से देखा है। चीनी आक्रमण के लगभग 6 दशक बाद, बोरा ने इस फिल्म के जरिए उस समय के भयावह स्थिति को दिखाने का प्रयास किया है। हिरेन का कहना है कि इस फिल्म के जरिए उन्होंने उस तेजपुर को श्रद्धांजलि दी है, जहाँ पर उनका बचपन बीता है। इस फिल्म में निपॉन गोस्वामी, अरुण नाथ और जहाँआरा बेगम जैसे कलाकारों ने मुख्य किरदार निभाए हैं। वहीं, जाने-माने अभिनेता जॉर्ज बेकर ने ब्रिटिश पत्रकार विलियम स्मिथ की प्रमुख भूमिका निभाई है।

हिरेन 1962 की घटना को याद करते हुए कहते हैं कि हालाँकि तेजपुर से उनकी काफी यादें जुड़ी हैं, लेकिन एक ऐसी याद है जो वहाँ से दूर जाने के बाद आज भी उनके जेहन में जिंदा है। बोरा बताते हैं कि तेजपुर में उस समय हाहाकार मच गया, जब 1962 में असम के एक छोटे से शहर तेजपुर में युद्ध की आशंका पैदा हुई। चीनी सैनिक तेजी से भारत में अपना रास्ता बनाकर लगभग 150 किमी दूर बोमडिला पहुँच गए थे। हालाँकि चीन ने युद्धविराम की घोषणा कर दी, मगर लोगों के मन में भय पहले से ही पैदा हो गया था। जब स्थिति को काबू करने में प्रशासन भी असफल हो गई, तो लोगों ने युद्ध के डर से भागना शुरू कर दिया।

हिरेन बोरा बताते हैं कि उनके दादा जी ने अपने बेटों को परिवार के साथ वहाँ से निकलकर पास के नागाँव जाने के लिए कहा। मगर उन्होंने खुद वहाँ पर रहकर अपने शहर की रक्षा करने का फैसला किया। हिरेन कहते हैं कि उनके दादाजी इस दौरान अकेले नहीं थे। कुछ और भी लोग थे वहाँ पर, जिनमें से कुछ लोगों के पास तो बचने का विकल्प नहीं था, तो कुछ लोग तेजपुर से लगाव की वजह से वहाँ रुक गए थे। हिरेन को इस बात का अफसोस है कि 1962 का चीनी आक्रमण पूर्वोत्तर भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना होने के बावजूद इसे ना तो लोकप्रिय संस्कृति में, ना ही किताबों में चित्रित किया गया और ना ही फिल्मों में दिखाया गया।  

चिंतन: निराशावादी और विरोधाभासी है वामपंथ, समाज के विपरीत है इसकी अवधारणा

हेगेल के सिद्धांत के मुताबिक मानव मस्तिष्क की जीवन प्रक्रिया, अर्थात चिंतन की प्रक्रिया, जिसे हम ‘विचार’ के रूप में जानते हैं, एक विषय या कर्ता है, और वास्तविक दुनिया केवल इस विचार का प्रतिबिंब है।
एक अन्य संदर्भ में हेगेल ने विचारों को दुनिया के सृजनकर्ता के रूप में माना। लेकिन मार्क्स के अनुसार भौतिक दुनिया मानव मस्तिष्क में प्रतिबिंबित होती है, और फिर विचार बनते हैं। यानी कि कम्युनिज्म या वामपंथ का पूरा सिद्धांत “विचारों” पर केंद्रित है, बिना किसी विचारधारा के। साम्यवाद केवल ‘विचार’ की बात करता है, ‘विचारहीनता’ या ‘सोचने की प्रक्रिया’ की नहीं।

जैसा कि परंपरागत फिलोसफी में माना जाता है, विचार अल्पकालिक रहते हैं, सभी विचारों को बदला जा सकता और वे खुद भी प्रतिक्षण विलुप्त होते रहते हैं। इसके विपरीत, “विचार प्रक्रिया” कभी समाप्त नहीं होती है और यह लगभग दसियों या सैकड़ों अन्य विचारों को हर विचार के लिए संसाधित करती है, जो मर जाती है। कम्युनिज्म ये नोटिस ही नहीं करता है कि “इस दुनिया के प्रति हमारी प्रतिक्रिया ही हमारे विचारों को जन्म देती है”।

उदाहरण के लिए, अगर मैं फूल देखता हूँ- यहाँ ‘देखना’ एक विचार नहीं है और अगर मैं देख रहा हूँ तो कोई विचार नहीं उठेंगे। लेकिन जब बहुत ही तत्परता से मैं कहता हूं कि ‘फूल बहुत सुंदर है’, तो विचार पैदा होता है। अगर मैं केवल तभी देखूँ तो सुंदरता की भावना होगी, लेकिन विचार पैदा नहीं होगा। लेकिन जैसे ही हम इसे अनुभव करते हैं, हम इसे एक शब्द देना शुरू करते हैं। यह विचार ज्ञान को शब्द देने के रूप में जन्म लेता है, यहीं प्रतिक्रिया, शब्द देने की आदत, दर्शन को धारणा देती है। सनसनी दब जाती है, दर्शन उदास हो जाता है, पर शब्द मन में तैरते रहते हैं। ये शब्द एकमात्र विचार हैं!

मार्क्सवाद समाज को दो भागों में वर्गीकृत करता है, जो कि शोषण कर रहे हैं और जो शोषित हैं। यह उन परिभाषाओं के विपरीत है, जिन पर ‘समाज’ मौजूद है। और ये उन सभी सिद्धांतो को भी ख़ारिज करता है जो एक व्यक्ति या संस्था की सफलता और खुशी के उपायों का अनुमान लगाते हैं। तो, मूल रूप से कम्युनिज्म ये भविष्यवाणी करता है कि ‘समाज में कोई भी सफल नहीं है या कुछ अच्छा भला नहीं होता है।

और फिर यह कम्युनिस्टों द्वारा लिखी गई बहुत लोकप्रिय स्लोगन के विपरीत है, जो हर किसी को उसकी क्षमताओं के अनुसार देने और उनकी जरूरतों के अनुसार प्राप्त करने की वकालत करता है। इस प्रकार, किसी समाज की आवश्यकताओं को एक व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताओं से ऊपर और उससे आगे रखा जाएगा, कम्युनिज्म अपनी इस एकमात्र थ्योरी को भी विरोधाभास की नजर से देखने लगता है।

इसलिए, एक आभासी विचारधारा पर आधारित कम्युनिज्म, नवाचार को पूरा करने पर या विचारों की प्रकृति निर्धारित करने वाली विचार प्रक्रिया पर काम नहीं करता। मैं समझता हूँ कि वामपंथ के पीछे छिपे पागलपन और विवेकशीलता का निर्धारण करने के लिए इतना ही काफ़ी है।

(उपर्युक्त चिंतन अमेरिकी लेखक और FBI के अधिकारी रहे W. Cleon Skousen की पुस्तक “The Naked Communist” को आधार बनाकर लिखा गया है। वामपंथियों ने इस पुस्तक को राइट विंग वालों का हथकंडा बताकर रिजेक्ट कर दिया था।)

बेगूसराय: गिरिराज के पहुँचते ही कन्हैया गैंग के छूटे पसीने, चोखा-भुजिया के बीच का अंतर भूले जिग्नेश

बेगूसराय राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की भूमि है। इस क्षेत्र पर इस बार पूरे देश की मीडिया की नज़रें हैं क्योंकि यहाँ मुक़ाबला भाजपा की मूल विचारधारा के प्रखर समर्थक गिरिराज सिंह बनाम वामपंथी कन्हैया के बीच होने वाला है। कन्हैया कुमार पर जेएनयू में देशद्रोही नारे लगाने का भी आरोप है। अदालत में पेश होते समय वकीलों ने उनकी पिटाई भी की थी। इस चुनाव की सबसे बड़ी बात है कि इसमें एक तरफ तो खादी के लाल कुर्ते और एक पैर के टखने तक उठी हुई धोती पहने मिट्टी से जुड़े गिरिराज हैं तो दूसरी तरफ दिल्ली और मुंबई के पाँच सितारा होटलों और इलीट जमावड़ों के जाने-पहचाने चेहरों द्वारा समर्थित कन्हैया कुमार हैं। एक तरफ भगवा तो दूसरी तरफ लाल सलाम। एक तरफ मीडिया के एक गिरोह द्वारा विवादित माने जाने वाले सिंह तो दूसरी तरफ लिबरल्स और सेकुलर्स के नए पोस्टर बॉय कन्हैया।

यहाँ की लड़ाई दिलचस्प है। हमारे विश्लेषणों में पिछले चुनावों के आँकड़ों के आधार बताया जा चुका है कि कन्हैया कुमार के दूसरे नंबर पर भी रहने के चांस नहीं हैं। ऐसे में, जहाँ समीकरणों और जनता के रुख की बात होती रहेगी, वहाँ यह जानना ज़रूरी है कि गिरिराज और कन्हैया को समर्थन कहाँ-कहाँ से मिल रहा है। दोनों के आसपास कैसे लोगों का जमावड़ा है, दोनों के प्रचार अभियान में क्या अंतर है और दोनों ही में से कौन ज़मीन पर है और कौन हवा में? नीचे हम इसी बातों पर चर्चा करते हुए बेगूसराय की चुनावी स्थिति की पड़ताल करेंगे।

कन्हैया के हवा-हवाई इलीट समर्थक

रविवार (मार्च 31, 2019) को अभिनेत्री शबाना आज़मी ने ट्विटर पर एक फोटो पोस्ट किया। इस फोटो में कन्हैया कुमार के साथ मुट्ठी में कलम दबाए लोग हैं और इसपर वामपंथी प्रतीकों की भरमार है। इसपर ‘लाल सलाम’ भी लिखा हुआ है। मज़े की बात तो यह कि खुलेआम पार्टी और नेता विशेष की आराधना करनेवाले ये सेलिब्रिटीज राजनीतिक रूप से न्यूट्रल होने की बात कह कूल बनने की भी कोशिश करते हैं। कल को अगर शबाना आज़मी निष्पक्षता के दावे करती हैं तो क्यों न वामपंथी पार्टियों के समर्थक के रूप में उनके बयानों को आँका जाए? शबाना आज़मी ने ‘द वायर’ में कन्हैया कुमार द्वारा लिखे लेख को भी ट्वीट किया और उनके समर्थन में लिखने वाले लोगों के ट्वीट्स को भी जम कर रीट्वीट किया।

शबाना आज़मी के नाम पर शायद बेगूसराय में एक भी वोट न मिले। बिहार की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि यहाँ लालू यादव जैसे ज़मीन से जुड़े दिग्गज नेता भी सांसद का चुनाव हार सकते हैं तो बाकि हवा-हवाई नेताओं की बात ही क्या! शबाना आज़मी आजकल स्कॉटलैंड में एक फ़िल्म फेस्टिवल के दौरे की तैयारी कर रही हैं। उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर मोदी का मज़ाक उड़ाने वाले और कन्हैया के समर्थन में किए जाने वाले पोस्ट्स देखर यह समझा जा सकता है कि उनका राजनीतिक झुकाव किस तरफ है। उन्होंने कन्हैया को आशा, बुद्धिमता और सत्य का प्रतीक बताते हुए उनकी ‘अच्छी लड़ाई’ के लिए उन्हें शुभकामनाएँ दी।

इसी तरह एक और वामपंथी समर्थक हैं स्वरा भास्कर। स्वरा ने भी कन्हैया कुमार का समर्थन करते हुए कार्ल मार्क्स के शब्दों का सहारा लिया। उन्होंने कन्हैया को सिद्धांतवादी राजनेता बताते हुए उन्हें एक सराहनीय वक्ता बताया। उनके इस ट्वीट से बिहार या बेगूसराय के किसी गाँव में भी शायद ही कोई असर पड़े लेकिन स्वरा का राजनीतिक झुकाव भी छिपा नहीं रहा। यह साबित करता है कि सभी लिबरल्स अब एकजुट होकर कन्हैया कुमार के समर्थन में उतर आए हैं और सोशल मीडिया पर दिल्ली और मुंबई से उनके समर्थन में ट्वीट्स किए जा रहे हैं।

इसी तरह निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी भी गुजरात से चुनाव प्रचार करने आए। उनके वोट माँगने के अंदाज़ से पता नहीं चल रहा था कि वो पिकनिक मनाने आए हैं या चुनाव प्रचार करने? जिग्नेश मेवानी और शबाना आज़मी के बीच एक समानता है। जिग्नेश को भुजिया और चोखा के बीच का अंतर नहीं पता जबकि शबाना आज़मी को पोहा और उपमा के बीच का अंतर नहीं पता। अब चोखा और भुजिया के प्रेमी बिहार वाले ऐसे लोगों को शायद ही वोट दें, जिन्हे इन दोनों के बीच का अंतर नहीं पता।

ज़मीन केंद्रित है गिरिराज सिंह का प्रचार अभियान

जिग्नेश मेवानी से प्रचार करवा कर दलित वोटों की जुगत में लगे कन्हैया कुमार को गिरिराज सिंह ने करारा जवाब दिया। उन्होंने जिग्नेश पर गुजरात से बिहारियों को मार-मार कर भगाने व बिहारी माँ-बेटियों को परेशान करने का आरोप लगाया। जिग्नेश ने जवाब में उनपर मानहानि का केस ठोकने की धमकी दी। साथ ही उन्होंने कन्हैया कुमार से पूछा कि उन्होंने भारतीय सेना को बलात्कारी क्यों कहा था? गिरिराज सिंह ने अपने प्रचार अभियान का श्रीगणेश सिमरिया से किया। सिमरिया गाँव दिनकर की जन्मस्थली है। यहाँ स्थित काली मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ गिरिराज सिंह ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की।

इसके बाद गिरिराज सिंह ने व्यवसायियों से मुलाक़ात की, वकीलों से मिले और संगठन कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठकें की। कन्हैया कुमार ने क्षेत्रीयता की राजनीति करते हुए गिरिराज सिंह को बाहरी बताया। जवाब में गिरिराज सिंह कन्हैया को उनके घर में ही जवाब देने के लिए उनके गाँव बीहट पहुँच गए। वहाँ स्थित दुर्गा मंदिर में समर्थकों सहित पूजा-अर्चना के साथ उन्होंने कन्हैया को उनके ही गाँव में घेरा। ख़बरों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में थिएटर आर्टिस्ट्स, दिग्गज वामपंथी नेतागण, सेलिब्रिटीज सहित कई हस्तियाँ कन्हैया कुमार के लिए चुनाव प्रचार में कूदने वाली है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि 29 अप्रैल को यहाँ होने वाली वोटिंग में ऊँट किस करवट बैठता है।

गिरिराज सिंह ने दिवंगत अजेय सांसद भोला सिंह की पत्नी से भी मुलाकात की और चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले आशीर्वाद लिया। भोला सिंह की पत्नी के पाँव छूते हुए गिरिराज के फोटो को सोशल मीडिया पर बेगूसराय वासियों ने ख़ूब शेयर किया। भोला सिंह यहाँ के लोकप्रिय सांसद थे और 2014 में उन्हें यहाँ भारी जीत मिली थी। एक तरफ गिरिराज स्थानीय मुद्दों को उठा रहे हैं, स्थानीय नेताओं, नागरिकों व हस्तियों को साथ ला रहे हैं तो दूसरी तरफ कन्हैया मुम्बइया सेलिब्रिटीज के दम पर चुनाव में उतरे हैं।

पाउडर के बाद अब Johnson & Johnson का शैंपू भी हुआ फेल, पाए गए हानिकारक पदार्थ

हाल ही में खबर आई थी बच्चों के लिए हैल्थ केयर प्रोड्क्ट्स बनाने वाली कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर में हानिकारक पदार्थ हैं। जिसके कारण कैंसर जैसी बड़ी बीमारियाँ भी हो सकती हैं। लेकिन अब पाउडर के बाद इस कंपनी का शैम्पू भी स्टैंडर्ड क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गया है

दरअसल, राजस्थान ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन ने जॉनसन एंड जॉनसन शैम्पू के 2 बैच में हानिकारक पदार्थ होने की बात का खुलासा किया है। राजस्थान ड्रग रेगुलेटर ने इस शैम्पू के 2 बैच – ‘BB58204’ और ‘BB58177’ को टेस्ट किया था, जिसमें हानिकारक फार्मेल्डिहाइड मौजूद होने की रिपोर्ट हैं। हालाँकि इन शैम्पू की एक्सपायर डेट 2021 है। लेकिन इनके इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश दे दिया गया है।

राजस्थान के ड्रग्स कंट्रोलर ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DCGI) को लिखे एक पत्र में कहा है, “कृपया समय-समय पर बाजार में उपलब्ध उक्त निर्माताओं के अन्य बैचों और दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करें।”

इसके अलावा राजस्थान ड्रग्स वॉचडॉग ने ड्रग्स ऑफिसर से नोटिस में कहा है कि इन स्टॉक्स को किसी के भी द्वारा इस्तेमाल न किया जाए। इसके साथ ही आदेश दिया गया है कि इन्हें मौजूदा स्टॉक मार्केट से भी हटाया जाए। यहाँ बता दें कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत राजस्थान ड्रग रेगुलेटर चाहे तो वो कंपनी पर मुकदमा भी चला सकती है।

कंपनी ने अपने प्रोडक्ट के पक्ष में बात रखते हुए जॉनसन एंड के जॉनसन के बेबी शैम्पू में फार्मेल्डिहाइड होने की रिपोर्ट से इनकार किया। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि वे शैंपू में हानिकारक फार्मेल्डिहाइड होने की रिपोर्ट को नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि सरकार ने उन्हें टेस्ट से जुड़ी जानकारी नहीं दी हैं और न ही बताया है कि किस तरीके से ये टेस्ट हुआ।

कॉन्ग्रेस ने करोड़ों हिन्दुओं पर लगाया आतंकवाद का दाग, अंग्रेजों ने भी नहीं किया था ऐसा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कॉन्ग्रेस शासन काल में उछाले गए ‘हिन्दू आतंकवाद’ को लेकर पार्टी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वर्धा में आयोजित रैली में ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को भी आड़े हाथों लिया। पीएम ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:

“वोट-बैंक की राजनीति के लिए एनसीपी और कॉन्ग्रेस किसी भी हद तक जा सकती हैं। इस देश के करोड़ों लोगों पर हिंदू आंतकवाद का दाग लगाने का प्रयास कॉन्ग्रेस ने ही किया है। सुशील कुमार शिंदे जब भारत सरकार में मंत्री थे, तो उन्होंने इसी महाराष्ट्र की धरती से हिंदू आतंकवाद की चर्चा की थी। कुछ दिन पहले कोर्ट का फैसला आया है और इस फैसले से कॉन्ग्रेस की साज़िश की सच्चाई देश के सामने आई है।”

“कॉन्ग्रेस ने हिन्दुओं का जो अपमान किया है, कोटि-कोटि जनता को दुनिया के सामने नीचा दिखाने का जो पाप किया है, ऐसी कॉन्ग्रेस को माफ़ नहीं किया जा सकता है। आप मुझे बताइए, जब आपने हिन्दू आतंकवाद शब्द सुना तो आपको गहरी चोट पहुँची थी कि नहीं। हज़ारों साल के इतिहास में हिन्दू कभी आतंकवाद करे, ऐसी एक भी घटना नहीं है। अंग्रेजी इतिहासकारों ने भी कभी ‘हिन्दू हिंसक हो सकता है’ इस बात का जिक्र तक नहीं किया।”

प्रधानमंत्री ने कॉन्ग्रेस पर भारत की पाँच हज़ार वर्ष से भी पुरानी संस्कृति का अपमान करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस के इस ‘पाप’ की याद दिलाते हुए जनता से यह याद रखने को कहा कि ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों को किसने उछाला था? पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जिसे आतंकी कहा, वो शांतिप्रिय समाज अब जाग चुका है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का जिक्र करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने पूरे विश्व को परिवार मानने वाले समाज को आतंकवादी बताया।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कॉन्ग्रेस को इसी मुद्दे पर घेरा। यूपी के नगीना में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए शाह ने कहा:

“समझौता ब्लास्ट को हिन्दू आतंकवाद बोलकर कॉन्ग्रेस ने अपने वोट बैंक के लिए पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द के प्रतीक हिन्दू धर्म को बदनाम किया। आतंकवाद को हिंदू धर्म के साथ जोड़ने का पाप कॉन्ग्रेस ने किया। राहुल बाबा, आपको पता नहीं है हम तो चींटियों को भी आटा खिलाने वाले लोग हैं। कॉन्ग्रेस ने इसके साथ ही पाक प्रेरित लश्कर-ए-तैयबा के ब्लास्ट करने वाले असली गुनहगारों को छोड़कर देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया।”

राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव लड़ने और मुस्लिम तुष्टिकरण के जवाब में भाजपा अध्यक्ष शाह और पीएम मोदी द्वारा चुनावी मौसम में कॉन्ग्रेस की करतूत याद दिलाना भाजपा की आगामी रणनीति के बारे में बहुत कुछ कहता है। पार्टी ने अब कॉन्ग्रेस द्वारा हिन्दुओं को लेकर कही गई बातों को नए सिरे से उठाना शुरू कर दिया है। दोनों बड़े नेताओं के इस बयान के बाद कई अन्य भाजपा नेताओं ने भी ‘हिन्दू आतंकवाद’ को लेकर कॉन्ग्रेस को निशाना बनाया और जनता को ये सब याद दिलाने की कोशिश की।

गाली के बाद डिलीवरी एजेंट ने की सेक्स की माँग, Swiggy ने कहा – ‘Sorry, ये लो ₹200’

बेंगलुरु में Swiggy की अजीबोगरीब माफी का मामला सामने आया है। ऑन-डिमांड खाना पहुँचाने वाली कंपनी Swiggy के डिलीवरी एजेंट ने तथाकथित तौर पर एक महिला को गाली दी, उसके साथ अश्लील और अभद्र आचरण किया। महिला का आरोप है कि शिकायत करने पर कंपनी ने उसे एक “Sorry” नोट और ₹200 का कूपन दे कर मामला रफा-दफा करने का प्रयास किया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक नेहा (नाम परिवर्तित) ने इसे नाकाफी मानते हुए कंपनी से उक्त व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

नेहा ने इस घटना के बारे में फेसबुक पर लिखते हुए बताया कि यह घटना गत बृहस्पतिवार की है। नेहा ने Swiggy से खाने का ऑर्डर दिया था। जब खाना लेने नेहा बाहर निकलीं तो डिलीवरी एजेंट ने कुछ कहा जिसे वह ठीक से सुन नहीं पाईं। एजेंट ने जब दोहराया तो नेहा को समझ में आया कि वह उनसे सेक्स की माँग कर रहा है और गाली दे रहा है।

नेहा ने लिखा, “मैं स्तब्ध रह गई… मुझे उससे literally खाना छीन कर दरवाज़ा बंद करना पड़ा। पर खाना खाना तो दूर, मुझसे उस खाने की ओर देखा भी नहीं जा रहा था।।”

नेहा ने जाहिर तौर पर Swiggy की उपभोक्ता सेवा (customer service) से इसकी शिकायत की, और जवाब में कंपनी ने उन्हें एक “Sorry” नोट और ₹200 के कूपन दिए। तभी नाराज़ होकर नेहा ने फेसबुक पर शिकायत करने का फैसला लिया।

फेसबुक पर कंपनी ने अपने ढीले रवैये से नेहा को हुए दुखद अनुभव के लिए माफी माँगी है और आगे कार्रवाई करने के लिए उनसे मामले से जुड़े तथ्य और विवरण देने का आग्रह किया है।

बेंगलुरु में खाना डिलीवर करने वाली कंपनियों के डिलीवरी एजेंट की बदतमीजी के मामले रह-रह कर सामने आते रहते हैं। पिछले ही साल एक महिला डीजे ने भी रात को खाना पहुँचाने आए एजेंट की बदतमीजी की शिकायत की थी।  

ऐसे में जब यह कंपनियाँ अपना दायरा बढ़ाने को लेकर इतनी उत्सुक हैं तो इन पर सरकार और समाज दोनों को यह दबाव बनाना चाहिए कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर इनके इंतजामों और शिकायत निवारण तंत्र (grievance redressal systems) में भी सुधार उतनी ही तेजी से हो जितनी तेजी से यह व्यापार बढ़ाना चाहती हैं।

कॉन्ग्रेस के सहयोगी डीएमके नेता के ठिकानों पर IT विभाग की छापेमारी, लाखों रुपए बरामद

आयकर विभाग (IT) के अधिकारियों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक के वरिष्ठ नेता दुरईमुर्गन के ठिकानों पर छापा मारा। बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव कॉन्ग्रेस और डीएमके मिलकर लड़ेंगे।

ख़बर के अनुसार, वेल्लोर में डीएमके लीगल सेल के अधिकारियों द्वारा विरोध करने के बावजूद आयकर अधिकारियों ने छापे मारे। डीएमके लीगल सेल के अधिकारियों ने कर विभाग के इलेक्शन सर्विलांस, ज़िला स्टेटिक सर्विलांस और फ्लाइंग स्क्वॉड की टीमों को बिना वारंट तलाशी लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

आईटी अधिकारियों ने दुरई मुरुगन के वेल्लोर निवास पर शनिवार (30 मार्च) को सुबह 10 बजे तक छापे मारे, जिनके बेटे डीएम कथिर आनंद वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे हैं। मुरुगन और उनके बेटे काथिर आनंद के स्वामित्व वाली जगहों जिनमें उनके आवास, किंग्स्टन इंजीनियरिंग कॉलेज और दुरई मुरुगन बी.एड कॉलेज आदि शामिल हैं वहाँ छापे मारे गए।

आईटी विभाग ने कहा कि तलाशी के दौरान 10 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी ज़ब्त की गई है। इसके अलावा निवास स्थान से लगभग 19 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। शनिवार को आईटी विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि चुनावी हलफ़नामे में 6 लाख रुपए नकदी घोषित करने का बाद, अतिरिक्त 10 लाख रुपए ज़ब्त किए गए हैं।

आयकर विभाग ने वेल्लोर में एक सीमेंट गोदाम से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार, 29-30 मार्च की मध्यरात्रि को दुरीमुरुगन कॉलेज से नकदी को यहाँ स्थानांतरित कर दिया गया था।

इस बीच, दुरई मुरुगन ने आईटी छापे को पूरी तरह से विशुद्ध राजनीतिक करार दिया है। मुरुगन ने कहा कि इसका उद्देश्य चुनाव में उनके बेटे की जीत में बाधा डालना है। मीडिया से बात करते हुए, दुरई मुरुगन ने कहा कि यह पूरी तरह से राजनीति है। यदि आईटी विभाग को इस तरह की छापेमारी करनी थी तो उन्हें यह छापेमारी पिछले महीने ही करनी चाहिए थी। वो इस समय क्यों की गई, हम क़ानूनी रूप से इसका सामना करेंगे।

हालाँकि, आईटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि उन्हें वेल्लोर के ज़िला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बुलाया गया था और राज्य पुलिस प्रमुख द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन प्राप्त करने के बाद ही छापेमारी की गई।