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आतंकी कोई नियम-कानून से हमला नहीं करते, उनको जवाब भी नियम-कानून मानकर नहीं दिया जाएगा: विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा आतंकियों में यह सोच नहीं आनी चाहिए कि हम सीमा के दूसरी तरफ बैठे हैं तो हमें कोई छू नहीं सकता। विदेश मंत्री जयशंकर ने 26/11 मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई ना किए जाने को लेकर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकी अपनी ही भाषा में जवाब पाएँगे।

यह टिप्पणियाँ उन्होंने शुक्रवार (12 अप्रैल, 2024) को महाराष्ट्र के पुणे में अपनी किताब ‘व्हाई भारत मैटर्स’ के मराठी अनुवाद के लॉन्च के मौके पर कहीं। यहाँ वह एक बातचीत कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे।

उन्होंने कहा, “मुंबई में 26/11 हमले के बाद UPA सरकार ने हमलों के बाद खूब चर्चा की और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि पाकिस्तान पर हमला करने की कीमत, उस पर हमला ना करने की कीमत से ज्यादा होगी। कुछ मुंबई जैसा होता है, और आप उस पर जवाब नहीं देते तो अगला ऐसा हमला आप कैसे रोकेंगे।”

उन्होंने सीमा पार आतंकियों के मारे जाने को लेकर कहा, “आतंकियों के मन में यह ख्याल नहीं आना चाहिए कि अगर वह सीमा के उस पार बैठे हैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं हो सकता। आतंकी कोई नियम कानून नहीं मानते, उनका सफाया करने में भी कोई नियम क़ानून माना नहीं जा सकता।”

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों को चलाना सबसे मुश्किल काम है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज से नहीं और ना ही मुंबई हमलों के समय से बल्कि 1947 से ही भारत में आतंकी हमले कर रहा है। उन्होंने इसके लिए 1947 में जम्मू-कश्मीर पर किए गए हमले का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “कश्मीर में पाकिस्तान से हमलावर आए, यह आतंकी थे। इन लोगों ने शहर जलाए, लूटे, लोगों को मारा। पाकिस्तान की फ़ौज ने इन्हें कश्मीर में आगे भेज दिया और कहा कि हम तुम्हारे पीछे पीछे आते हैं।” जयशंकर ने कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने पर भी प्रश्न खड़े किए।

उन्होंने कहा कि जब इन कबायलियों ने हमले किए तब हमने क्या किया, हम संयुक्त राष्ट्र पहुँच गए जहाँ इस मामले में आतंकी हमले का कोई जिक्र ही नहीं है। उन्होंने कहा कि कबायली हमले के बाद जब सेना भेजी गई तो उसने कश्मीर समस्या का लगभग समाधान कर दिया था लेकिन हमने उसे रोक कर संयुक्त राष्ट्र में मामला उठाया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने इसी कार्यक्रम में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की नीतियों पर प्रश्न उठाए। जयशंकर ने कहा कि जब चीन ने 1950 में तिब्बत कब्जाया था, तब नेहरू को सरदार वल्लभ भाई पटेल चेताया था और कहा था कि उन्हें चीन की मंशा ठीक नहीं लगती। जयशंकर ने कहा कि नेहरू ने इन चिंताओं को दरकिनार कर दिया और कहा कि चीनी लोग भी एशियाई हैं और हमारे भाई है इसलिए वह भारत पर हमला नहीं करेंगे।

जयशंकर ने कहा कि चीन को लेकर जहाँ सरकार वल्लभभाई पटेल की सोच एकदम धरातल से मेल खाती हुई और यथार्थवादी थी तो नेहरू एक वामपंथी और आदर्शवादी थे।

‘लालू यादव ने मुस्लिमों का हक़ मारा’: अररिया में मंच पर ही फूट-फूट कर रोने लगे सरफ़राज़ आलम, कटिहार में अशफाक करीम का इस्तीफा – दोनों रहे हैं सांसद

बिहार में मुस्लिम नेताओं में राजद के प्रति नाराज़गी देखने को मिल रही है। बता दें कि लालू यादव की पार्टी ने अब तक 22 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसमें सिर्फ 2 मुस्लिम हैं। जबकि यादव समाज के 8 नेताओं को टिकट दिया गया है। पूर्व सांसद सरफ़राज़ आलम और अशफाक करीम ने तो खुल कर नाराज़गी जताई है। राजद समर्थक अक्सर MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण की बात करते रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर जातिवाद टूट जाता है।

मंच पर फूट-फूट कर रोने लगे सरफ़राज़ आलम

बिहार के अररिया में पूर्व लोकसभा सांसद सरफ़राज़ आलम मंच पर ही रोने लगे। वहाँ मौजूद समर्थकों ने किसी तरह उन्हें सँभाला। सरफ़राज़ आलम पर अररिया सहित कई जिलों में कई मुक़दमे दर्ज हैं। अब उन्होंने लालू यादव पर टिकट बेचने का आरोप लगाया है। जदयू विधायक रहे सरफ़राज़ आलम पर राजधानी एक्सप्रेस में एक जोड़े के साथ बदतमीजी का भी आरोप है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वो मंच पर लगातार रोए जा रहे हैं और लोग उन्हें चुप करा रहे हैं।

अररिया से उनके छोटे भाई शाहनवाज़ आलम को टिकट दिया गया है। इन दोनों के पिता तस्लीमुद्दीन 8 बार विधायक रहे हैं। सीमांचल में उनका अच्छा प्रभाव था। वो पूर्णिया, अररिया और किशनगंज से 5 बार सांसद बने थे। वहीं जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र से सरफ़राज़ 4 बार और शाहनवाज दूसरी बार विधायक बने हैं। उन्होंने AIMIM के टिकट पर अपने बड़े भाई को ही हराया था, फिर राजद में शामिल हो गए थे। अब फिर से दोनों भाइयों में अदावत देखने को मिल रही है।

पूर्व राज्यसभा सांसद अशफाक करीम का RJD से इस्तीफा

उधर पूर्व राज्यसभा सांसद अशफाक करीम ने लालू यादव की पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजद सुप्रीमो पर मुस्लिमों का हक़ मारने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजद ने जनसंख्या के हिसाब से मुस्लिमों को सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं दी, ऐसे में पार्टी के साथ काम करना असंभव है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लालू यादव को लिखा है कि आपने ‘जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ की बात की, लेकिन मुस्लिमों का हक़ मारा गया।

उन्होंने राजद की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अशफाक करीम कटिहार स्थित अल-करीम यूनिवर्सिटी के कुलपति भी हैं। उन्होंने कटिहार मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना की है, जिसके वो मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। अशफाक करीम ‘कोसी बेदारी मोर्चा’ भी चलाते हैं। वो मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के नाम पर घूस लेने और आर्म्स एक्ट के मामले में जेल भी जा चुके हैं। 2018 में उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया था। अशफाक करीम के जाने से कोसी क्षेत्र में राजद को नुकसान होगा।

पाकिस्तान में एक और हिन्दू मंदिर किया गया ध्वस्त: अब इसकी जगह बनेगा शॉपिंग मॉल, पहले भी हो चुका था हमला

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य में एक हिन्दू मंदिर को तोड़ दिया गया। इस मंदिर को तोड़ अब इस जगह पर एक बड़ी इमारत खड़ी की जा रही है। इस मंदिर को गिराने की अनुमति पाकिस्तान की सरकार ने ही दी है। यह मंदिर पिछले लगभग 70 वर्षों से बंद था।

पाकिस्तान की समाचार वेबसाइट डॉन के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में अफगानिस्तान सीमा पर स्थित लंडी कोटल शहर में यह हिन्दू मंदिर तोड़ा गया है। यह मंदिर लंडी कोटल में बीच बाजार में स्थित था। यह मंदिर 1947 से ही वीरान था।

1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय यहाँ रहने वाले हिन्दू भारत चले आए थे। इसके बाद मंदिर को बंद कर दिया गया था। बताया गया कि इस मंदिर पर 1992 में कुछ कट्टरपंथियों ने भी हमला किया था और एक हिस्सा तोड़ दिया था।

मंदिर की स्थिति दयनीय थी और काफी प्राचीन होने के बाद भी पाकिस्तान की सरकार ने इसके संरक्षण के कदम ना उठा कर इसे गिराने की मंजूरी दे दी। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मंदिर की जगह एक बड़ी इमारत बनाने को लेकर सरकार ने कोई आपत्ति नहीं जाहिर की।

यहाँ तक कि सरकार ने यह मानने से इनकार कर दिया कि इस जगह पर कोई मंदिर भी था। मंदिर की जगह पर कौन नई इमारत बनवा रहा है, इस बात की भी जानकारी ना सरकारी अधिकारियों ने दी और ना ही इस साईट पर काम करने वाले मजदूरों ने।

राजस्व विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि लंडी कोटल की पूरी बाजार का इलाका सरकार के स्वामित्व वाला है लेकिन इसमें मंदिर का कहीं कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी कारण से बिल्डर को यहाँ एक बड़ी इमारत बनाने की अनुमति दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के संरक्षण की जिम्मेदारी औकफ बोर्ड की होती है। हालाँकि, लंडी कोटल खैबर जिले में स्थित है जो कि एक कबीलाई इलाका है और यहाँ बोर्ड का ना ही कोई दफ्तर है और ना ही कोई कर्मचारी है।

लंडी कोटल में तैनात अन्य अधिकारियों ने भी मंदिर तोड़ कर इमारत खड़ी किए जाने को लेकर अनभिज्ञता जताई है और दोष एक दूसरे के मत्थे मढ़ने का प्रयास किया। एक अधिकारी ने जानकारी ना होने की बात कही तो दूसरे ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का पालन हुआ है। हालाँकि, मंदिर के तोड़ने के विषय में संतोषजनक जवाब कोई नहीं दे पाया।

डॉन से बात करते हुए पाकिस्तान हिन्दू मैनेजमेंट कमिटी के हारून सरब्दियाल ने कहा कि मंदिर को संरक्षित करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की थी। उन्होंने बताया कि जिले के कई विभाग इस जिम्मेदारी से बंधे हुए हैं कि वह मंदिर का संरक्षण करें। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसे ही चलता रहा तो हिन्दुओं के सभी मंदिर नष्ट हो जाएँगे।

हत्या की धमकी, माँ की गाली, एजेंडे के लिए नवरात्रि का इस्तेमाल… अमेरिका ने हिन्दू विरोधी एक्टिविस्ट को जेल में ठूँसा, PM मोदी के लिए भी कह चुकी हैं अपशब्द

अक्सर देखा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले मानसिक रूप से भी कुंठाग्रस्त प्रतीत होते हैं। अब एक मामला अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित बेकर्सफील्ड से सामने आया है, जहाँ रिद्धि पटेल नाम की फिलिस्तीन समर्थक ने वहाँ के मेयर को ही हत्या की धमकी दे डाली। अब शुक्रवार (12 अप्रैल, 2024) को उन्हें कोर्ट में पेश होना पड़ा। सुनवाई के दौरान वो रोने लगीं। उन्होंने सिटी काउंसिल के उन सभी सदस्यों को हत्या की धमकी दी थी, जो फिलिस्तीन के स्टैंड के खिलाफ हैं।

उन्होंने बैठक में सिटी काउंसिल के सदस्यों को माँ की गाली देते कहा था कि हर पीड़ित को अपने अत्याचारी के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन का अधिकार है और अच्छा होगा कि कोई गिलोटिन (सिर काटने का यंत्र) लाकर तुम सबका गला काट दे। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने बैठक में कभी मेटल डिटेक्टर नहीं देखा, इतनी पुलिस फ़ोर्स नहीं देखी, ये सब इसीलिए किया जा रहा है ताकि फिलिस्तीनियों को अपराधी साबित किया जा सके।

मेयर करेन गोह ने इसके बाद कहा कि आपने जो कहा है वो एक धमकी है, इसीलिए पुलिस अब आपको बाहर ले जाएगी और मामले को देखेगी। रिद्धि पटेल पर गुंडागर्दी के 16 मामले लगाए गए हैं और उन्हें 1 मिलियन डॉलर (83.61 लाख रुपए) की जमानत पर जेल में रखा गया है। उन्हें अब 16, 24 और 25 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया जाएगा। रिद्धि पटेल को ‘सेंटर ऑफ रेस, पावर्टी एन्ड एनवायरनमेंट’ संस्था से जुड़ी रही हैं। CRPE कम आय वाले समुदायों को क़ानूनी सहायता देने का दावा करता है।

सिटी काउंसिल की बैठक में सदस्यों को उन्होंने डरावना बताते हुए कहा था कि दुनिया में क्या हो रहा है इसका इनलोगों को कोई अंदाज़ा नहीं है। इस दौरान उन्होंने हिंसक क्रांति को सही साबित करने के लिए नवरात्रि का इस्तेमाल किया और कहा कि ग्लोबल साउथ में भी ये त्योहार मनाया जाता है। रिद्धि पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और ‘हिन्दू फासीवाद’ को ‘फक यू’ कहते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। वो फिलिस्तीन के समर्थन में अक्सर प्रदर्शन करती रही हैं।

किसानों को MSP की कानूनी गारंटी देने का कॉन्ग्रेसी वादा हवा-हवाई! वायर के इंटरव्यू में खुली पार्टी की पोल: घोषणा पत्र में जगह मिली, लेकिन नहीं है कोई फॉर्मूला

कॉन्ग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने घोषणापत्र में कई अव्यावहारिक वादे किए हैं, हालाँकि उसका सबसे बड़ा वादा किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देना है, खासकर उन 23 फसकों पर एमएमसी की गारंटी, जिनकी माँग किसान आंदोलन के दौरान की जा रही थी। लेकिन कॉन्ग्रेस इन गारंटियों को लेकर कितनी गंभीर है और इन गारंटियों को लेकर उसने कितने गंभीर तरीके से काम किया है, इसकी पोल तब खुल गई, जब कॉन्ग्रेस के ‘डाटा एनलिस्ट डिपार्टमेंट’ के हेड प्रवीण चक्रवर्ती ‘द वायर’ के साथ एक इंटरव्यू में शामिल हुए। वो राहुल गाँधी द्वारा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से 23 फसलों की एमएसपी की गारंटी की बात से पीछे हटते दिखे।

द वायर के ‘पत्रकार’ करन थापर के इंटरव्यू में पहुँचे प्रवीण चक्रवर्ती के पास प्रदर्शनकारी किसानों की माँगों को लेकर किए गए कॉन्ग्रेस की गारंटी के वादे पर कोई जवाब नहीं था। किसान सरकार से 23 फसकों पर एमएसपी पर कानूनी गारंटी माँग रहे हैं। वो भी स्वामीनाथन आयोग की सिफारियों (C2+50% फॉर्मूला) के आधार पर। प्रवीण चक्रवर्ती ने बड़ी बेशर्मी से कह दिया कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने ऐसा कोई वादा अपने घोषणा पत्र में नहीं किया है। यही नहीं, वो ये भी नहीं बता पाए कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आती है, तो वो किन खास फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देगी।

राहुल गाँधी द्वारा स्वामीनाथन आयोग (जो एमएसपी के फार्मूले के रूप में सी2+50% का हवाला देता है) को लागू करने की गारंटी लेने के बावजूद प्रवीण चक्रवर्ती ने किसानों की इनपुट लागत का 1.5 गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस के घोषणापत्र (पेज 17) का हवाला देते हुए साफ कहा कि फसलों की एमएसपी पर कानूनी गारंटी के बारे में विस्तार से घोषणापत्र में जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने इतना लिखा है कि “कांग्रेस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार, हर साल सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देगी।”

इस दौरान जब करन थापन ने प्रवीण चक्रवर्ती से कहा कि अगर सरकार सभी 23 फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देती है, तो इससे खाद्य महंगाई 25-30% पढ़ जाएगी। इस बात पर कॉन्ग्रेस के डाटा एनलिस्ट डिपार्टमेंट के हेड ने कहा, “आपका दावा काल्पनिक है, क्योंकि मेनिफेस्टों में 23 गिनती का कोई जिक्र नहीं है। न ही स्वामीनाथन आयोग या किसी फॉर्मूले का जिक्र है।”

इस दौरान जब करन थापर ने पूछा कि ”कॉन्ग्रेस कितनी फसलों पर एमएसपी की गारंटी देगी अगर सभी 23 पर नहीं देगी तो?” इस पर प्रवीण चक्रवर्ती ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ‘इस पर विस्तार से बहस की जरूरत है।’ थापर ने इस दौरान चक्रवर्ती को ‘प्रदर्शनकारी किसानों’ की माँग पर पार्टी के आश्वासन को याद दिलाया तो चक्रवर्ती उखड़ पड़े। उन्होंने कहा, “किसान एमएसपी पर कानूनी गारंटी चाहते थे, उन्हें कानूनी गारंटी दी गई है। कौन सी फसले होंगी, कौन सा फॉर्मूला होगा, कौन सी नई फसलों को उस लिस्ट में शामिल किया जाएगा और कौन सी मौजूदा फसलों को हटाया जाएगा, इस पर फैसला अभी लिया जाना बाकी है।”

थापन ने जोर देकर कहा, “एक घोषणापत्र विशिष्ट और सटीक होना चाहिए। आपने पहले तर्क दिया कि आप लागत निर्धारण नहीं कर सकते, हमने समझाया है कि लागत निर्धारण क्यों आवश्यक था। आपको जानकारियों का अभाव है। आप को ये नहीं पता है कि कितनी फसलों को एमएसपी में शामिल किया जाएगा, अब आप फॉर्मूले पर भी गोलमोल जवाब दे रहे हैं कि सी2+50% फॉर्मूला नहीं, कोई और फॉर्मूला हो सकता है।”

सवाल का जवाब देने के बजाय, प्रवीण चक्रवर्ती ने भाजपा पर अपने घोषणापत्र में विशिष्ट बातें नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमारे लोग (कॉन्ग्रेस) बजट नहीं बना रहे हैं। हमारे पास बहुत सारी जानकारी है ही नहीं।

करण थापर ने जोर देकर कहा, “मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि क्या आप सभी 23 फसलों पर एमएसपी की गारंटी देंगे, आपका जवाब था कि हम ऐसा कर सकते हैं, फिर आप बोल रहे हैं कि शायद हम नहीं कर सकते। आपने ही कहा कि एमएमसपी का फॉर्मूला C2+50% नहीं हो सकता। आप एमएसपी पर गारंटी को लेकर दो तरह की बातें कर रहे हैं।”

राहुल गाँधी ने फरवरी में दी थी गारंटी

बता दें कि इस साल फरवरी में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने एक ट्वीट में लिखा था, “किसान भाइयों आज ऐतिहासिक दिन है! कॉन्ग्रेस ने हर किसान को फसल पर स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी देने का फैसला लिया है। यह कदम 15 करोड़ किसान परिवारों की समृद्धि सुनिश्चित कर उनका जीवन बदल देगा। न्याय के पथ पर यह कॉन्ग्रेस की पहली गारंटी है।”

कॉन्ग्रेस के ‘डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट’ के हेड द्वारा एमएसपी वादों पर कोई ठोस जवाब नहीं देने का फैसला दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस अपने ही वादों और योजनाओं को वास्तविक रूप से लागू करने को लेकर कितनी गंभीर है। वो भी तब, जब उसके नेता राहुल गाँधी अपनी गारंटियों में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की बात कह रहे हैं।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

रमज़ान के दौरान फ़्रांस में बड़े पैमाने पर हिंसा: रिपोर्ट में कहा गया- कुरान के नियमों का पालन नहीं करने वालों को निशाना बना रहे कट्टरपंथी मानसिकता के लोग

रमज़ान के महीने में फ्रांस में हिंसा का माहौल रहा। हाल ही में हुए घातक हमलों से यूरोपीय देश में बढ़ते कट्टरवाद और उग्रवाद की चिंताजनक प्रवृत्ति का पता चलता है। इस्लामवादियों द्वारा गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। यूरोपीय कंजर्वेटिव की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “रमजान में तनाव बढ़ गया है, जो कुरान के सम्मान को लेकर एक-दूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा का कारण बन जाता है।”

फ्रांस के बोर्डो में 10 अप्रैल को एक व्यक्ति द्वारा छुरा घोंपने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। चाकू से हमला स्थानीय समयानुसार शाम 7:50 बजे वॉटर मिरर पूल में हुआ। ‘द टाइम्स’ के मुताबिक, आरोपित की पहचान एक अफगान प्रवासी के रूप में हुई है। वह रमजान के दौरान घटना के पीड़ितों को शराब पीते देखकर गुस्सा हो गया था।

ईद-अल-फितर से एक दिन पहले 9 अप्रैल को अचेनहेम (बास-राइन) में चार नाबालिगों ने एक 13 वर्षीय लड़की पर हमला किया। अपने कॉलेज जाने के लिए बस में यात्रा करते समय उसके स्कूल के आरोपित उसके पास आए और उस पर रमज़ान में रोज़े का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाकर पीटने लगे।

इसी तरह 5 अप्रैल को दक्षिणी पेरिस के उपनगरीय इलाके में बालाक्लाव पहने युवाओं के एक समूह द्वारा पीटे जाने के एक दिन बाद शम्सुद्दीन नाम के एक 15 वर्षीय लड़के की मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जाँच और आरोपितों के बयानों के अनुसार, चार आरोपितों में दो भाई थे। उन्हें अपनी बहन और परिवार की प्रतिष्ठा को लेकर डर सता रहा था।

यूरोपीय चुनावों के लिए लेस रिपब्लिकंस सूची में नंबर दो पर सेलीन इमार्ट ने उल्लेख किया कि उनके क्षेत्र के एक मिडिल स्कूल में एक छात्र ने अपने शिक्षक को पानी पीने से रोका, क्योंकि रमज़ान चल रहा था। उन्होंने CNews को दिए इंटरव्यू में कहा, “डर से वह टीचर हार मान ली। आइए अपने उन शिक्षकों का समर्थन करें, जो अधिकार और ज्ञान प्रसारित करने से डरते हैं!”

इसी तरह, 3 अप्रैल को मोंटपेलियर के ऑर्थर-रिंबाउड कॉलेज में गैर-इस्लामी व्यवहार के लिए समारा नाम की 14 वर्षीय लड़की पर हिंसक हमला किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए तीन नाबालिगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कथित तौर पर इस मामले ने पूरे देश में राजनीतिक हंगामा मचा दिया है।

हमले के बाद लड़की कोमा में चली गई थी। हालाँकि, अब वह इससे बाहर है। आरोपित लड़की उसी स्कूल की छात्रा है। उन्होंने लड़की को मारने की बात कबूली है। पीड़िता की माँ ने कहा, “मैं वास्तव में समारा पर लगातार हमला करने के इन बच्चों के कारणों को नहीं समझ पा रही हूँ, लेकिन कुछ तो बात है। मुझे लगता है कि समारा शायद कुछ छात्रों की तुलना में थोड़ी अधिक मुक्त है।”

पीड़िता की माँ ने कहा कि समारा कुछ मेकअप करती है, जबकि आरोपित हिजाब/बुर्का पहनती है। पीड़िता की माँ ने कहा, “दिन भर वह उसे काफिर कहती रही, जिसका अरबी में मतलब गैर-मुस्लिम होता है। मेरी बेटी यूरोपीय शैली में कपड़े पहनती है। दिन भर अपमान होता था, उसे कहबा कहा जाता था, जिसका अरबी में मतलब होता है c**t। यह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से असहनीय था।”

पीड़िता की माँ ने यह भी खुलासा किया कि जून 2023 में आरोपित को दो दिनों के लिए स्कूल से निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि उसने सोशल मीडिया नेटवर्क पर उसकी बेटी की तस्वीरें पोस्ट की थी। इतना ही नहीं, उसने उसकी बेटी के साथ बलात्कार करने के लिए लोगों से आह्वान किया था।

इसी साल मार्च में पेरिस स्थित एक स्कूल के प्रिंसिपल ने एक छात्रा को स्कूल परिसर में हिजाब/बुर्का हटाने के लिए कहा था। इसके बाद प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी मिली थी, जिससे डरकर उसने इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि फ्रांस में साल 2004 से हिजाब या धार्मिक संबद्धता दिखाने वाले चिन्ह या पोशाक पहनने पर प्रतिबंध है।

यूरोपियन कंजर्वेटिव के मुताबिक, फ्रांस की मीडिया ऐसे हमलों से इनकार करता रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “बोर्डो में हत्या के बाद प्रेस ने चाकूबाजी में आतंकवादी मकसद की अनुपस्थिति पर जोर दिया।”

इंदौर लव जिहाद: पहचान छिपाकर अमान ने हिंदू लड़की को फँसाकर जबरन बनाया संबंध, अब मुस्लिम बनने का डाल रहा दबाव

इंदौर में लव जिहाद का नया मामला सामने आया है, जहाँ अमान नाम के युवक ने हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फंसा लिया और जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। शादी की बात करने पर उसने धर्म परिवर्तन की शर्त रख दी, जिसके बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित हिंदू युवती की उम्र 21 साल है और वो एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला इंदौर के तुकोगंज थाना क्षेत्र का है, जहाँ बुधवार (10 अप्रैल 2024) को इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करने वाली 21 साल की हिंदू लड़की ने शिकायत दी, कि उसे अमान नाम के मुस्लिम युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और अब वो धर्मपरिवर्तन का दबाव डाल रहा है। उसने शुरु में अपनी पहचान भी छिपाई थी। नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमान ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू पहचान के साथ युवती को प्रेम जाल में फंसाया था। उसने खुद को पहले हिंदू बताया था, लेकिन जब साल 2022 में युवती को उसकी असलियत का पता चला तो उसने उससे दूरी बना ली थी।

तुकोगंज थाना प्रभारी जितेंद्र यादव ने बताया कि आरोपित युवक अमान शिवशक्ति नगर का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि युवती ने अमान पुत्र कलीम जाठू के खिलाफ शिकायत की है। युवती इवेंट मैनेजमेंट का काम करती है। करीब ढाई वर्ष पूर्व अमान से परिचय हुआ था। 2022 में उसके बारे में जानकारी मिली तो युवती ने दूरी बनाई। इसी वर्ष वैलेंटाइन डे पर अमान घर आया और कहा कि वह शादी करना चाहता है। उसने धर्म परिवर्तन की शर्त रखी और कहा कि उसे धर्म बदलना पड़ेगा। युवती के साथ जबरदस्ती संबंध बनाए और धमकाया। जान से मारने की धमकी भी दी।

युवती ने बुधवार (10 अप्रैल 2024) को हिंदू संगठन के पदाधिकारियों की मदद ली और थाने पहुंची। देर रात पुलिस ने अमान के विरुद्ध धमकी, दुष्कर्म और मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनिमय के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने गुरुवार (11 अप्रैल 2024) को अमान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

चार दिन में दूसरा मामला

जी न्यूज के मुताबिक, इंदौर में लव जिहाद का ये 4 दिन में दूसरा मामला है। पहले मामले में इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में एक हिंदू महिला ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी शादी 16 साल पहले मुस्लिम समुदाय के सादिक नाम के युवक से हुई थी। शादी के बाद दोनों के चार बच्चे हैं और दोनों पिछले 3 साल से अलग रह रहे थे। इसके बाद भी सादिक लगातार महिला के घर आकर उसे और बच्चों को पीटता था।

इस मामले में महिला ने आरोप लगाया है कि आरोपित उसकी बेटी के फेसबुक अकाउंट पर अश्लील पोस्ट करता है। जब महिला ने इस बारे में उससे मोबाइल पर बात की तो आरोपी ने जान से मारने की धमकी देते हुए धर्म परिवर्तन की बात कही। महिला ने आरोपी सादिक के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पीड़िता ने कहा कि आरोपी युवक कहता था कि धर्म बदल लो नहीं तो गोली मार दूँगा। पीड़ित हिंदू महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने व ब्लैकमेलिंग के मामले में केस दर्ज कर आरोपित सादिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

इजरायल और ईरान के बीच जंग के हालात: भारतीयों के लिए सरकार ने जारी की एडवाइजरी, दूतावास से संपर्क में रहने को कहा

ईरान-इजरायल में तनाव के बीच भारत सरकार ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है और दोनों देशों की यात्रा से बचने के लिए कहा है। सरकार ने दोनों देशों में मौजूद अपने नागरिकों से दूतावास के संपर्क में बने रहने की भी सलाह दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अगले दो दिनों के भीतर दोनों ही देशों के बीच भारी जंग छिड़ सकती है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (12 अप्रैल 2024) की शाम ये एडवाइजरी जारी की और कहा कि भारतीय नागरिक अगली सूचना तक ईरान और इजराइल की यात्रा न करें। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर जारी बयान में कहा है, “ईरान या इजराइल में रहने वाले भारतीय वहाँ के दूतावासों से फौरन संपर्क करें और अपना रजिस्ट्रेशन करवाएँ। सभी अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और कम से कम बाहर निकलें।”

भारत सरकार ने ट्रैवल एडवाइजरी उस समय जारी की है, जब एक अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया है कि ईरान अगले दो दिन में इजराइल पर हमला कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को अमेरिकी इंटेलिजेंस के हवाले से ये दावा किया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ईरान द्वारा जानकारी दिए गए एक व्यक्ति का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान अगले 48 घंटों के भीतर इजरायल पर हमला बोल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान इजरायल पर हमले के राजनीतिक जोखिमों का आकलन कर रहा है।

बता दें कि दोनों देशों के बीच तनाव तब अपने चरम पर पहुँच गया, जब एक हमले में सीरिया में ईरानी वाणिज्य दूतावास की एक इमारत ध्वस्त हो गई थी। ईरान ने उस हमले के लिए इजरायल को दोषी ठहराया था जिसमें उसके एक शीर्ष सैन्य कमांडर और छह अधिकारी मारे गए थे। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से संपर्क किया था।

इस मामले में अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा है कि विवाद को बढ़ावा देना किसी के भी हित में नहीं है। वहीं, गुरुवार (11 अप्रैल 2024) को अमेरिका ने इजरायल में काम करने वाले अपने नागरिकों और खासकर डिप्लोमैट्स के लिए एडवाइजरी जारी किया। अमेरिका ने अपनी एम्बेसी के स्टाफ को यरुशलम, तेल अवीव या बीरशेबा शहर से बिना सावधानी के बाहर न जाने को कहा है।

जर्मनी में बैठकर खालिस्तानी आतंकियों की करता था भर्ती और फंडिंग: ‘KZF’ के सरगना को पंजाब पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा

पंजाब पुलिस की स्पेशल ऑपरेटिव सेल ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के बड़े आतंकवादी को दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। वो जर्मनी में रहकर खालिस्तानी आतंकियों की भर्ती करता था और खालिस्तानी आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग की व्यवस्था करता था। पंजाब पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन सेल, अमृतसर ने ये ऑपरेशन चलाया। गिरफ्तार किए गए खालिस्तानी आतंकी का नाम प्रभप्रीत सिंह सिद्धू है। उस पर साल 2020 से ही नजर रखी जा रही थी।

पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने इस गिरफ्तारी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के ऑपरेटिव प्रभप्रीत सिंह सिद्धू को राज्य विशेष ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) अमृतसर ने दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे से बुधवार (10 अप्रैल 2024) को गिरफ्तार किया गया। उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने उसे 15 अप्रैल तक की रिमांड पर भेज दिया।

पंजाब पुलिस के डीजीपी के एक्स हैंडल पर भी इसकी जानकारी दी गई है। इसपर लिखा है, “एक बड़ी सफलता में एसएसओसी, अमृतसर ने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के संचालक प्रभप्रीत सिंह जर्मनी को दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। वह जर्मनी से आतंकवादी भर्ती, फंडिंग और सहायता मॉड्यूल चला रहा था। पंजाब पुलिस पूरे केजेडएफ नेटवर्क और वेब से जुड़े अन्य सहयोगियों का पता लगाने के लिए काम कर रही है। पंजाब पुलिस राज्य में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है”

खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के ऑपरेटिव की गिरफ्तारी के बारे में बताते हुए डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “साल 2020 में एसएसओसी अमृतसर को खुफिया सूचना मिली थी कि खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का आतंकवादी जगदीश सिंह भूरा पंजाब में कुछ हाई-प्रोफाइल लोगों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है और इस काम को पूरा करने के लिए उसने भारत में मौजूद अपने साथियों को हथियार और पैसे दिए हैं। पंजाब पुलिस ने इस ग्रुप से जुड़े 4 आतंकियों को तुरंत गिरफ्तार कर पूरे मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया था। उन आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया था। उस केस में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13, 17, 18, 18-बी और 20 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत 19 दिसंबर 2020 को एफआईआर संख्या 18 दर्ज की गई थी।”

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि जाँच के दौरान गिरफ्तार आतंकियों ने खुलासा किया कि वे वांछित आतंकवादी जगदीश सिंह भूरा और उसके करीबी प्रभप्रीत सिंह के निर्देश पर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों ने यह भी खुलासा किया है कि वे हाई प्रोफाइल लक्ष्यों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। चूँकि प्रभप्रीत जर्मनी में रह रहा था, इसलिए पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर के बाद उसके खिलाफ लुक ऑउट सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद बुधवार को जब वो आईजीआई एयरपोर्ट पहुँचा, तो उसे इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया और एसएसओसी, अमृतसर को सूचना दी। इसके बाद हमारी टीम ने उसे आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने बताया कि प्रभप्रीत साल 2017 में वीजा के लेकर पोलैंड गया था, लेकिन वहां से वो 2020 में जर्मनी चला गया और उसने राजनीतिक शरण की माँग की थी। वहीं से वो खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के जगदीश सिंह भूरा के संपर्क में आया, जो बेल्जियम में रहता था और फिर खालिस्तानी संगठन से जुड़ गया। अभी कोर्ट ने 15 अप्रैल तक के लिए उसकी हिरासत को मंजूर किया है, उससे पूछताछ की जा रही है।

बता दें कि खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का नाम भारत के बाहर भी कई हमलों में आ चुका है। इस संगठन ने ऑस्ट्रिया के विएमा में स्थित गुरुद्वारा रविदास पर हमला किया थास जिसमें डेरा सच खंड के मुखिया रामा नंद की हत्या कर दी गई थी और 17 अन्य लोग घायल हो गए थे। इस घटना के बाद पंजाब और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में तनाव फैल गया था। साल 2005 में ही यूरोपीय यूनियन इस संगठन पर बैन लगा चुका है।

पेरिस ओलंपिक से पहले मैरी कॉम का इस्तीफा, कहा- मैं ऐसा नहीं करती, पर मेरे पास विकल्प नहीं: बोलीं पीटी उषा- जल्द होगी नए शेफ-डी-मिशन की नियुक्ति

प्रसिद्ध मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय अभियान के प्रमुख (शेफ-डी-मिशन) के पद से इस्तीफा दे दिया है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) की अध्यक्ष पीटी उषा ने इसकी पुष्टि की है और कहा है कि उचित परामर्श के बाद उनके स्थापन पर किसी एक व्यक्ति का नाम रखा जाएगा।

लगभग 41 साल की मैरी कॉम ने कहा कि उनके पास अब कोई विकल्प नहीं है। बता दें कि शेफ डी मिशन किसी भी ओलंपिक में देश के दल का सबसे अहम प्रशासनिक सदस्य होता है। खिलाड़ियों से जुड़ी सारी सुविधाओं के इंतजाम की जिम्मेदारी उसी पर होती है। किसी तरह की विवाद होने की स्थिति में भी खिलाड़ियों की तरफ से वही पक्ष रखता है।

मैरीकॉम ने भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा को पत्र लिखकर अपने निर्णय के बारे में लिखा। पीटी उषा को लिखे गए पत्र में मैरी कॉम ने कहा, “किसी भी रूप में देश की सेवा करना गर्व की बात है। मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार थी, लेकिन मुझे खेद है कि मैं यह जिम्मेदारी नहीं उठा सकूँगी। मैं निजी कारणों से पीछे हट रही हूँ।”

इस पद के लिए 21 मार्च को घोषित हुईं मैरी कॉम ने आगे कहा, “इस तरह पीछे हटने से मैं शर्मिंदा हूँ। मैं ऐसा करती नहीं हूँ, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। मैं ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे अपने खिलाड़ियों की हौसला अफजाई के लिए हमेशा रहूँगी।” मैरी कॉम 26 जुलाई से 11 अगस्त 2024 तक होने वाले ओलंपिक खेलों में भारतीय दल की अभियान प्रमुख के लिए चुनी गई थीं।

मैरी कॉम के इस निर्णय पर पीटी उषा ने एक बयान में कहा, “हमें दुख है कि ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज और भारतीय ओलंपिक संघ एथलीट आयोग की प्रमुख मैरी कॉम निजी कारणों से पद से हट गई हैं। हम उनके फैसले और निजता का सम्मान करते हैं। उनके विकल्प के बारे में जल्दी ही घोषणा की जाएगी।”

पीटी ऊषा ने आगे कहा, “मैं उनके अनुरोध को समझती हूँ और उनके फैसले का सम्मान करती हूँ। मैंने उनसे (मैरी कॉम से) कहा है कि भारतीय ओलंपिक संघ और मेरा सहयोग हमेशा उनके साथ है। मैं सभी से उनकी निजता का सम्मान करने का अनुरोध करती हूँ।” बताते चलें कि मैरी कॉम 6 बार की विश्व चैम्पियन मुक्केबाज हैं।