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‘बखिया उधेड़ देंगे आपकी’ : पतंजलि मामले में जस्टिस अमानुल्लाह की टिप्पणी पर बवाल, पूर्व न्यायधीशों ने याद दिलाई शब्दों की गरिमा

भ्रामक प्रचार करने के आरोप में पतंजलि और बाबा रामदेव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई चर्चा में है। कारण है जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की सख्त टिप्पणी। 10 अप्रैल को बाबा राम देव और पतंजलि के एमडी बाल कृष्ण द्वारा जब बिन शर्त के लिए माफी माँगने के लिए हलफनामा दायर किया गया तो कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने उत्तराखंड के राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था- “हम आपकी बखिया उधेड़ देंगे।”

जस्टिस अनानुल्लाह की टिप्पणी से अब पूर्व जज नाराज हैं। उनका कहना है कि अदालती कार्यवाही ने संयम के मानदंड स्थापित किए हैं, लेकिन जो भाषा जस्टिस ने सुनवाई के समय प्रयोग की वो सड़क पर मिलने वाली धमकी जैसी है। पूर्व जजों और पूर्व मुख्याधीशों ने सलाह दी है कि जस्टिस अमानुल्लाह को खुद को आवश्यक न्यायिक आचरण से परिचित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो निर्णयों को देखना अच्छा होगा। ये कृष्णा स्वामी बनाम भारत संघ (1992) और सी रविचंद्रन अय्यर बनाम जस्टिस ए एम भट्टाचार्जी (1995) ) केस हैं।

कृष्णा स्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संवैधानिक अदालत के जजों का आचरण समाज में सामान्य लोगों से कहीं बेहतर होना चाहिए। न्यायिक व्यवहार के मानक, बेंच के अंदर और बाहर दोनों जगह, सामान्य रूप से ऊँचे होते हैं… ऐसा आचरण जो चरित्र, अखंडता में जनता के विश्वास को कमजोर करता है या जज की निष्पक्षता को कम बनाता है, उसे त्याग दिया जाना चाहिए। जज से यह अपेक्षा की जाती है कि वह स्वेच्छा से उच्च जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्तता की पुष्टि करते हुए आचरण के संपूर्ण मानक स्थापित करेगा।

दूसरा मामला, रविचंद्रन केस का है जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “न्यायिक कार्यालय मूलतः एक सार्वजनिक ट्रस्ट है। इसलिए, समाज यह उम्मीद करने का हकदार है कि एक न्यायाधीश उच्च निष्ठावान, ईमानदार व्यक्ति होना चाहिए और उसके पास नैतिक शक्ति, नैतिक दृढ़ता और भ्रष्ट या द्वेषपूर्ण प्रभावों के प्रति अभेद्य होना आवश्यक है। उससे न्यायिक आचरण में औचित्य के सबसे सटीक मानक रखने की अपेक्षा की जाती है। कोई भी आचरण जो अदालत की अखंडता और निष्पक्षता में जनता के विश्वास को कमजोर करता है, न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावकारिता के लिए हानिकारक होगा…”

बता दें कि जस्टिस अमानुल्लाह की तरह 2005 में जस्टिस बीएन अग्रवाल की पीठ ने भी ऐसी टिप्पणी की थी। उस समय बिहार के तत्कालीन राज्यपाल, वरिष्ठ राजनेता बूटा सिंह, बार-बार बेदखली के आदेशों की अनदेखी करते हुए, दिल्ली में एक सरकारी बंगले पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर रहे थे। तब जज ने कहा था, “बिहार के राज्यपाल दिल्ली में बंगला लेकर क्या कर रहे हैं? उन्हें यहां बंगला आवंटित नहीं किया जा सकता। उन्हें बाहर फेंक दीजिए।” इसके अलावा नुपूर शर्मा वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और पारदीवाला ने कहा था कि नूपुर शर्मा की ‘फिसली जुबान’ ने पूरे देश में आग लगा दी है और उन्हें पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए।

भ्रष्ट लोगों के खिलाफ चलता है ED का चाबुक, महज 3% नेताओं पर केस, 97% पर क्यों बात नहीं करता विपक्ष? इंटरव्यू में PM मोदी ने उघेड़ी विपक्ष की बघिया

देश में ईडी का डंका भ्रष्ट लोगों के खिलाफ चलता रहा है। कुल 3 प्रतिशत लोग ही नेता हैं, जिनके खिलाफ ईडी ने कार्रवाई की है। 97 प्रतिशत लोगों का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं, विपक्ष उनके बारे में क्यों नहीं बात करता? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईडी भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है और ये कार्रवाई चलती रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई कहे जाने जैसी बातों को गलत बताया है।

समाचार पत्र हिन्दुस्तान के साथ साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा, ‘ईडी के पास भ्रष्टाचार के जितने मामले हैं, उनमें से केवल तीन फीसदी ही राजनीति से जुड़े व्यक्तियों के हैं। बाकी 97% मामले अधिकारियों और अन्य अपराधियों से संबंधित हैं। इनके विरुद्ध भी कार्रवाई हो रही है। जिन लोगों को भ्रष्ट व्यवस्था में फायदा दिखता है, वो लोगों के सामने गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ईडी ने भ्रष्ट अफसरों, नौकरशाहों, आतंकी फंडिंग से जुड़े अपराधियों, ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की है। ईडी ने हजारों करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की है। ये कार्रवाई रुकने वाली नहीं है, बल्कि जारी रहेगी। पीएम मोदी ने बताया कि साल 2014 से पहले ईडी ने सिर्फ 5 हजार की संपत्ति अटैच की थी, जबकि पिछले 10 सालों में 1 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्तियाँ अटैच की गई हैं। वहीं, साल 2014 से पहले ईडी ने सिर्फ 34 लाख की नकदी बरामद की थी, ये बरामदगी पिछले 10 साल में 2200 करोड़ रुपए हो गई है।

पीएम मोदी कहा कि अगर इन पैसों को गरीबों के कल्याण में लगाया जाता, तो बहुत सारे लोगों को लाभ होता। इन पैसों से युवाओं को रोजगार मिल सकता था, तो कई इन्फ्रा परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता था। भ्रष्टाचार की वजह से देश के लोगों को परेशानी होती है। पीएम मोदी ने कहा कि वो भ्रष्टाचारियों को छोड़ने वाले नहीं है।

बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार के डीबीटी योजना के माध्यम से 10 करोड़ से ज्यादा फर्जी नाम वालों को हटाया है। ऐसे लोग दुनिया में आए ही नहीं, फिर भी कागजों पर उनके नाम से कोई पैसा बना रहा था। इससे करीब 3 हजार करोड़ रुपए बचे। अब बताइए, विपक्ष नरेटिव बना रहा है कि ईडी सिर्फ राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। ये सच नहीं है। ईडी ने सभी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ है। जो लोग गलत हैं, वो डर रहे हैं।

सावन में मटन, नवरात्रि में मछली… PM मोदी ने राहुल-तेजस्वी को घेरा: कहा- इनकी सोच मुगलिया, पूछा- वीडियो दिखाकर किसे खुश कर रहे

पीएम नरेन्द्र मोदी ने जम्मू के उधमपुर में कॉन्ग्रेस-राजद नेताओं पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने नवरात्रि-सावन में मांस खाने की वीडियो पोस्ट करने को मुगलों जैसी मानसिकता बताया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल ना होने को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं।

पीएम मोदी जम्मू के उधमपुर से लोकसभा प्रत्याशी केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने पहुँचे हैं। यहाँ प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर के विकास और बदलती परिस्थितयों समेत कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

पीएम मोदी ने यहाँ कहा, “ये लोग सावन में एक सजायाफ्ता अपराधी के घर जाकर मांस बनाकर मौज ले रहे हैं। उसका वीडियो भी बनाते हैं और देश के लोगों को चिढ़ाते हैं। कानून और मोदी किसी को कुछ खाने से नहीं रोकते। इन लोगों की मंशा दूसरी होती है।”

उन्होंने इस कृत्य की तुलना मुगलों के हिन्दू मंदिर ध्वंस करने से की। उन्होंने कहा,”जैसे मुग़ल जब आक्रमण करते थे तो राजा को पराजित करने में संतोष नहीं होता था। जब तक मंदिर तोड़ते नहीं थे, उनको संतोष नहीं होता था। उनको इसमें मजा आता था। ऐसे ही सावन के महीने में मटन की वीडियो दिखा कर देश के लोगों को चिढ़ाना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी का एक वीडियो सावन के महीने में सामने आया था जहाँ वह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साथ मांस खा रहे थे। इसके अलावा हाल ही में नवरात्रि के दौरान उनके ही बेटे तेजश्वी यादव के हेलीकाप्टर में मछली खाने का वीडियो सामने आया था।

उधमपुर में पीएम मोदी ने पूछा कि नवरात्रि के दिनों में मांस खाने का वीडियो दिखा कर किसे खुश किया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि उनके इस बयान के बाद उनको गालियाँ दी जाएँगी। पीएम मोदी ने कहा कि लोग यह सब काम इसीलिए करते हैं कि भारत की मान्यताओं पर हमला हो। पीएम मोदी ने इसे मुगलिया सोच और तुष्टिकरण की राजनीति बताया। पीएम मोदी का यह वक्तव्य यहाँ सुना जा सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता ठुकरा दिया। पीएम मोदी ने पूछा कि कॉन्ग्रेस ने किस दबाव में यह काम किया। उन्होंने कहा कि यह लोग राम मंदिर को चुनावी मुद्दा बताते हैं, देश के लिए यह आस्था-विश्वास का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी सरकार के समय दिन रात राम मंदिर का विरोध किया।

पीएम मोदी ने यहाँ कहा, “ये चुनाव सिर्फ सांसद चुनने का नहीं है, बल्कि ये चुनाव देश में एक मजबूत सरकार बनाने का चुनाव है। और सरकार जब मजबूत होती है, तो जमीन पर चुनौतियों के बीच भी, चुनौतियों को चुनौती देते हुए काम करके दिखाती है।”

यहाँ पीएम मोदी ने शाहपुर कंडी बाँध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने इस बाँध का प्रोजेक्ट लटकाए रखा। मोदी सरकार में पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोका गया। पीएम मोदी ने कहा कि जितना नुकसान जम्मू कश्मीर का परिवारवादी पार्टियों ने किया उतना किसी ने नहीं किया।

‘चुनाव के बाद केंद्रीय बल चले जाएँगे, TMC के साथ रहना होगा’: ममता के विधायक ने जनता को खुलेआम धमकाया, BJP समर्थकों को कह चुके हैं ‘नमकहराम’

लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक हमीदुल रहमान 11 अप्रैल को जनता को सरेआम धमकाते हुए मिले। गरुवार (11 अप्रैल 2024) को उत्तर दिनाजपुर जिले के माझियाली गाँव में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान लोगों से कहा कि केंद्रीय अर्धसैनिक बल 26 तारीख तक सिर्फ बंगाल में रहेगा उसके बाद तो टीएमसी के साथ ही उन्हें रहना होगा।

रहमान ने जनता को धमकाते हुए कहा, “अपना वोट बर्बाद करने की या कोई हरकत करने की हिम्मत मत करना। केंद्रीय बल 26 तारीख को चला जाएगा और आप लोग हमारे बलों के साथ ही रह जाएँगे। उस समय फिर जो होगा उसकी शिकायत मत करना वो तुम्हारी अपनी किस्मत होगी।”

हमीदुल रहमान ने मतदाताओं को साल 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद की याद और 2023 में हुए पंचायत चुनावों के बाद की याद दिलाई जब टीएमसी ने चुनाव जीतने के बाद ‘खेला होबे’ के नाम पर जगह-जगह भाजपा समर्थकों, कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की थी।

बता दें कि इससे पहले भाजपा समर्थकों को इन्हीं हमीदुल रहमान ने ‘नमकहराम’ कहा था। उन्होंने घोषणा की थी कि चुनाव के बाद इन लोगों से वह सख्ती से निपटेंगे। रहमान ने कहा था, “हमारे पूर्वजों ने कहा है कि उन लोगों को धोखा मत दो जो तुम्हें खाना खिलाते हैं…चुनाव के बाद, हमें उन लोगों से मिलना होगा जो हमें धोखा देंगे। बेईमान लोगों के साथ खेला होबे (हिंसा का खेल खेला जाएगा)। हम चाहते हैं कि दीदी (इसका जिक्र करते हुए) सीएम बनें।” उनके इस बयान के बाद भाजपा ने शिकायत दर्ज कराई थी।

गौरतलब है कि एक ओर टीएमसी विधायक सामान्य जनता को खुलेआम धमका रहे हैं और दूसरी ओर राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले होने शुरू हो गए हैं। 24 मार्च को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग उपखंड के माथेर दिघी गाँव में तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों की भीड़ ने कई भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा के कैनिंग पुरबा मंडल नंबर 3 के मंडल अध्यक्ष और कई अन्य कार्यकर्ताओं की पिटाई की थी। इस हमले का आरोप भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने हुसैन शेख नामक व्यक्ति पर लगाया है, जो टीएमसी विधायक शौकत मोल्ला का करीबी सहयोगी बताया जाता है। उन्होंने चुनाव आयोग से शेख के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।

उससे पहले 23 मार्च की सुबह एक भाजपा कार्यकर्ता शांतनु घोराई का शव उसके घर के पास धान के खेत में पाया गया था। यह घटना पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर उपखंड के पिंगला गाँव में हुई थी। कार्यकर्ता के पिता ने टीएमसी पर हत्या का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया था कि शांतनु को भाजपा का समर्थन करने पर धमकी आती थी। उसकी हड्डी तोड़ने और जान से मारने की बात होती थी।

बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट: NIA ने बंगाल से मुस्सविर हुसैन और अब्दुल ताहा को पकड़ा, इन्होंने ही किया था धमाका-प्लानिंग

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे धमाका मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पश्चिम बंगाल से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह दोनों धमाके के मुख्य आरोपित आतंकी अब्दुल मतीन ताहा और मुस्सविर हुसैन शाजेब हैं। इन दोनों से पूछताछ की जा रही है।

यह जानकारी सामने आई है कि NIA ने इन दोनों को कोलकाता के नजदीक किसी जगह से गिरफ्तार किया है। यह दोनों लम्बे समय से फरार थे। NIA ने इनके ऊपर ₹10-10 लाख इनाम रखा हुआ था। बताया गया कि यह दोनों यहाँ अपनी पहचान बदल कर रह रहे थे। इससे पहले इनके चेन्नई में छुपे होने की जानकारी सामने आई थी। इन दोंनो के नाम बदल कर यात्रा और होटल में रुकने का भी खुलासा हुआ था।

NIA ने बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे धमाका मामले में एक आरोपित मुजम्मिल शरीफ को गिरफ्तार किया था। इस पर आरोप है कि इसने आतंकी अब्दुल मतीन ताहा और मुवस्सिर हुसैन को छुपने और शहर छोड़ कर भागने में सहायता की थी। उसने बम बनाने के लिए भी सामान इन आतंकियों को उपलब्ध करवाया था। वह अभी NIA की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ चल रही है।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाके की योजना बनाने वाले आतंकी अब्दुल मतीन ताहा ने हिन्दू नाम विग्नेश डी और सुमित अपनाए हुए थे। इनका उपयोग वह अलग अलग जगह जाने और रहने में करता था। रामेश्वरम कैफे जाकर धमाके को अंजाम देने वाला मुस्सविर हुसैन, मोहम्मद जुनैद सैयद नाम के पहचान पत्रों पर फर्जी दस्तावेज बनाए हुए था।

NIA ने इन दोनों भगोड़े आतंकियों की तस्वीर जारी करके इनके विषय में जानकारी देने को कहा था। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब थे। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही एजेंसी उनको पकड़ने का प्रयास कर रही थी।

सज्जाद ने कुल्हाड़ी से बीवी और 7 बच्चों (4 बेटी+3 बेटा) को काट डाला, क्योंकि नहीं भर पा रहा था सबके पेट: मरने वाले बच्चों की उम्र 8 महीने से 10 साल के बीच

पाकिस्तान के लाहौर में गुरुवार (11 अप्रैल 2024) को एक शख्स ने अपनी पत्नी और 7 बच्चों को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतार दिया। आरोपित शख्स का कहना है कि वो अपने परिवार का लालन-पालन करने में असमर्थ था इसलिए उसने ऐसा किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हत्यारे का नाम सज्जाद खोखर है। उसने अपनी 42 साल की बीवी कौसर और उसके सात बच्चों को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतारा। इन सात बच्चों में 4 बेटियाँ और 3 बेटे थे। इनकी उम्र 8 महीने से 10 साल तक की थी।

पंजाब पुलिस का कहना है कि व्यक्ति मानसिक तौर पर परेशान था क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और अक्सर वह अपनी पत्नी से लड़ाई लड़ता रहता था। पुलिस ने आरोपित सज्जाद को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने पुलिस के आगे अपना गुनाह भी कबूला है और ऐसा करने के पीछे का कारण भी बताया है।

पुलिस ने कहा कि सज्जाद अपने परिवार वालों को खिला नहीं पा रहा था इसलिए उसने ये हत्या की। गुनाह करने के कुछ घंटे बाद ही आरोपित ने खुद को पुलिस के आगे सरेंडर भी कर दिया। इस मामले में पंजाब की मुख्यमंत्री बनीं मरियम नवाज शरीफ ने अपनी संवेदनाएँ प्रकट की हैं।

बता दें कि पाकिस्तान में बीवी और इतने बच्चों की हत्या की ये कोई पहली खबर नहीं है। इससे पहले साल 2019 की एक घटना सामने आई थी। जब मोहम्मद अजमल ने अपनी बीवी समेत 6 बच्चों, सास और दो सालियों को मारा डाला था। इसी तरह 2022 में आई एक खबर के अनुसार, पाकिस्तान में एक शख्स ने अपनी बीवी को 6 बच्चों के सामने मारकर उसे उबाल दिया था।

लखनऊ से गायब हो गए मौलाना मंजर अली, खोजते-खोजते 2 बीवी थाने पहुँची, गोंडा में तीसरी बीवी के पास मिले: किसी को नहीं थी 3 निकाह की खबर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। यहाँ एक मौलाना की गुमशुदगी की जाँच का अंत तीसरे निकाह के खुलासे के रूप में हुआ। मौलाना की गुमशुदगी की FIR उनकी दो बेगमों ने करवाई थी। पता चला कि मौलाना के तीन बीवियाँ हैं। पुलिस ने मौलाना को गोंडा से सकुशल बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार, लखनऊ के सआदतगंज की रहने वाली एक महिला ने 19 फरवरी को अपने पति मौलाना मंजर अली की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस के पास दर्ज करवाई। महिला ने कहा कि उनके पति अचानक ही 16 फरवरी, 2024 को घर से कहीं गायब हो आगे और लौटे नहीं हैं। उनका कोई अता पता नहीं है।

पुलिस ने इसके बाद मौलाना की तलाश चालू की। इतने में ही एक और महिला भी थाने पहुँच कर मौलाना के बारे में पता लगाने लगी। महिला ने भी यही दावा किया कि उसके पति मौलाना मंजर अली कई दिनों से गायब हैं और उनका कोई सुराग नहीं लग रहा। पुलिस ने इसके बाद दोनों घटनाओं की समानताओं के बारे में जाँच की।

पुलिस जाँच में सामने आया कि दोनों महिलाओं द्वारा जिन मंजर अली के गायब होने की बात की जा रही है, वह एक ही आदमी हैं। उन्होंने दो निकाह कर रखे हैं और इसकी जानकारी उनकी दोनों ही बीवियों को नहीं है। पुलिस ने इसके बाद मौलाना का फ़ोन और उनकी अन्य जानकारियों के साथ तलाश चालू की।

पुलिस की तलाश में इस पूरी कहानी में एक और मोड़ आ गया। मौलाना मंजर अली को पुलिस ने सकुशल उत्तर प्रदेश के ही गोंडा से बरामद कर लिया लेकिन इसमें एक और खुलासा भी हुआ। मौलाना मंजर अली को पुलिस ने गोंडा से एक अन्य महिला के साथ तलाशा जो कि उनकी तीसरी बेगम निकली, इसी के साथ पता चला कि मौलाना की दो नहीं बल्कि तीन बीवियाँ हैं।

ऐसे में इस पूरे वाकये में सामने आया कि मौलाना ने तीन निकाह कर रखे थे और उनकी तीनों ही बीवियों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मौलाना ने बताया कि वह लखनऊ वाली अपनी दोनों बीवियों से परेशान थे इसीलिए गोंडा तीसरी के पास चले आए थे। मौलाना मंजर अली को अभी पुलिस ने उनकी बीवियों के हवाले कर दिया है।

‘इस्लाम के खिलाफ न उठे आवाज, इसलिए फैलाई गई मेरी मौत की खबर’: जिंदा है वो जिसने जलाया कुरान, कहा- नॉर्वे में है मूर्खों की सरकार

नॉर्वे में मस्जिद के सामने कुरान जलाने वाले साल्वान मोमिका की मौत की खबरें झूठी थीं। खुद साल्वान ने एक्स पर ट्वीट करके इन खबरों का खंडन किया है। अपने ट्वीट में साल्वान ने कहा है कि उनकी मौत की खबर इसलिए फैलाई गई थी ताकि कभी कोई इस्लाम की आलोचना न करे। इसके साथ उन्होंने एक फोटो भी डाली है जिसमें वो ठेंगा दिखा रहे हैं। वहीं फोटो के साथ डाले गए पोस्ट में नॉर्वे प्रशासन की आलोचना है।

अपने एक्स अकॉउंट पर उन्होंने लिखा, “जिन न्यूजपेपर और न्यूज साइट ने मेरी मौत की खबर प्रकाशित की हैं वो फर्जी है और उसका मकसद सिर्फ उन लोगों को डराना है जो इस्लाम पर संदेह करते हैं या उनकी आलोचना करते हैं। इसलिए मैं बस कहना चाहता हूँ कि ये तुम्हारी अफवाह फैलाने वाली और फर्जी मीडिया हमें बिलकुल नहीं डरा सकती। मैं जिंदा हूँ और तब तक सरेंडर नहीं करूँगा जब नॉर्वे प्रशासन अन्याय करेगा।”

साल्वान कहते हैं, “इन लोगों ने पहले मुझे किसी से भी बात करने से रोका, उसके बाद मुझे कोर्ट ले गए। जहाँ कोर्ट ने मुझ पर इल्जाम लगाए- ‘तुम इसलिए हिरासत में लिए गए हो क्योंकि तुम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो।’ बेवकूफ जज को शायद इस्लाम से ज्यादा प्यार था, इसलिए मैंने कहा कि न ही जेल और न ही तुम्हारी कोर्ट मुझे डरा सकती है। ऐसा लगता है कि तुम इस्लाम से खुश हो कि वो तुम्हारे देश को कब्जा रहे हैं और तुम्हारी बेटियों का रेप हो रहा है। इसके बाद पुलिस मुझे कोर्ट के बाहर ले गई और मुझे एक जेल में रखा गया जो मानवाधिकार संगठन के सुपरविजन से बाहर था। इन्होंने मुझे मीडिया और प्रेस किसी से बात नहीं करने दी।”

अपने अगले ट्वीट में साल्वान ने कहा, “नॉर्वे में मेरे साथ जो हुआ वह मुझे सद्दाम हुसैन के दमनकारी तानाशाही शासन की याद दिलाता है…जब उन्होंने मुझे गिरफ्तार किया तो मुझसे कहा गया, ‘आप नॉर्वे की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।’ यह सब केवल इसलिए कहा गया क्योंकि मैंने अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग किया था, अपनी राय व्यक्त की थी और कुरान को जलाया था। अब जिस पुस्तक को मैं लिख रहा हूँ उसमें नॉर्वे का उल्लेख ‘जन्नत’ के रूप में करूँगा। जहाँ मूर्ख हैं और मूर्खों का शासन है जो इस्लाम से प्यार करते हैं।”

गौरतलब है कि साल्वान मोमिका पहले ईरान की फ़ौज के पूर्व नेता थे। बाद में वो इस्लाम के सबसे बड़े आलोचकों में से एक बन गए। साल 2023 के जून में स्टॉकहोम में साल्वॉन मोमिका ने सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान जलाया था, जिसके वीडियो और तस्वीरें चारों तरफ वायरल हुई थीं। किसी ने उनका समर्थन किया था, किसी ने उनके लिए सिर तन से जुदा की माँग की थी और फिर सोशल मीडिया पर खबर आई थी कि साल्वान की लाश मिली है। हालाँकि मीडिया में या नॉरवे प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई थी।

‘TMC को वोट नहीं दोगे तो उँगली काट देंगे’: संदेशखाली में धमकी के साथ बाँटी जा रही ‘सरकारी साड़ी’, BJP कार्यकर्ता का घर फूँके जाने का भी आरोप

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में स्थितियाँ सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। एक भाजपा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से जुड़े गुंडों ने उसका घर जलाकर राख कर दिया। TMC कार्यकर्ताओं पर महिलाओं को साड़ी बाँटने और वोट के लिए धमकाने का भी आरोप लगा है।

भाजपा कार्यकर्ता सुब्रत मंडल ने आरोप लगाया है कि TMC कार्यकर्ताओं ने बुधवार (10 अप्रैल, 2024) की रात को उनके खुलना गाँव में स्थित घर को आग लगा दी। इस घटना के बाद घर पूरी तरीके से जल कर राख हो गया। गाँववालों ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो गई और घर का तिनका तिनका जल उठा। हालाँकि, TMC नेताओं ने इस घटना में हाथ होने से इनकार किया है। सुब्रत के घर से सामने आई तस्वीरों से दिखता है कि आगजनी के बाद केवल कुछ बाँस के खम्भे बचे हैं।

TMC नेताओं का कहना है कि इस आगजनी में उनका कोई रोल नहीं है और सुब्रत मंडल के घर में आग पारिवारिक विवाद के चक्कर में लगी है। TMC नेता सुरेश मंडल ने कहा है कि घर पारिवारिक विवाद की वजह से जला और इसे अब साम्प्रदायिक रंग दिया जा रहा है। TMC नेताओं का कहना है कि इस मामले में पुलिस की जाँच से सब सामने आ जाएगा।

आगजनी के कारण घर खोने वाले सुब्रत मंडल ने यह भी आरोप लगाया है कि TMC सरकार ने उन्हें सभी सुविधाओं से वंचित कर रखा है क्योंकि वह भाजपा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका घर जलाने के पीछे उनका TMC की सदस्यता ना लेना है।

साड़ी बाँट महिलाओं को धमका रहे TMC कार्यकर्ता

जहाँ एक ओर पूरा देश संदेशखाली में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार पर चकित है तो वहीं TMC नेताओं की गुंडागर्दी अब भी नहीं रुक रही है। रिपब्लिक बांग्ला ने बताया है कि TMC कार्यकर्ता संदेशखाली में महिलाओं को साड़ी बाँट कर उनसे वोट की माँग कर रहे हैं। महिलाओं को चेताया जा रहा है कि अगर वह TMC को वोट नहीं देती तो उन्हने इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

बताया गया है कि TMC कार्यकर्ता संदेशखाली की इन महिलाओं को हरे रंग की साड़ी रात के अँधेरे में बाँट रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह साड़ियाँ भी TMC की तरफ से नहीं खरीदी गई हैं। यह साड़ियाँ पश्चिम बंगाल की आपदा राहत अथॉरिटी द्वारा खरीदी हुई साड़ियाँ हैं। इन्ह्ने बाढ़ में राहत सामग्री के रूप में खरीदा गया था। इन पर स्पष्ट रूप से इस बात की मोहर लगी हुई है। मोहर दिखाती है कि यह साड़ियाँ 2019 में खरीदी गईं थी। इससे साफ़ होता है कि यह पाँच वर्षों से किसी गोदाम में पड़ी हुई थीं और अब वोटरों के लिए निकाली गई हैं।

रिपब्लिक बांग्ला से बात करते हुए संदेशखाली की महिलाओं ने कहा कि TMC कार्यकर्ता रात में उनके पास साड़ियाँ लेकर आते हैं और उनको TMC के चुनाव चिन्ह पर वोट देने को कहते हैं। TMC कार्यकर्ताओं पर महिलाओं ने धमकाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि TMC कार्यकर्ता उनको धमकी देते हैं कि TMC को वोट ना देने पर उनकी उंगलियाँ काट दी जाएँगी, उन्हें मार दिया जाएगा। यह सारा काम अँधेरे में होते हैं।

महिलाओं का आरोप है कि उनके पास आने वाले लोग गुंडे शेख शाहजहाँ के लोग हैं और वह अभी TMC के इस पूर्व नेता से डरते हैं। उनका कहना है कि वह तभी एकदम निश्चित होकर वोट दे सकती हैं जब शाहजहाँ के खिलाफ सही से CBI जाँच हो।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के बशीरहाट जिले में पड़ने वाले संदेशखाली से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। कई महिलाओं ने यहाँ के TMC नेता शेख शाहजहाँ और उसके गुंडों पर यौन शोषण, जमीन कब्जाने और मारने पीटने के आरोप लगाए थे। इस मामले में कुछ FIR भी दर्ज हुई थीं। शेख शाहजहाँ को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। उसके खिलाफ ED और सीबीआई दोनों ही एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं।

विकिपीडिया पर इतिहास से छेड़छाड़ : पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगिंदर मंडल के भारत लौटने की वजह छिपाई, हिंदू विरोधी दंगों और दलित उत्पीड़न की बात हटाई

इंटरनेट पर मुफ्त के ज्ञान के सबसे बड़े स्रोतों में से एक विकिपीडिया पर वामपंथियों का कब्जा सारी दुनिया जानती है। विकिपीडिया पर प्रकाशित लेख अधिकांशत: वामपंथ या फिर इस्लामिक विचारधारा की तरफ झुकाव वाले होते हैं। इन्हें राष्ट्रवादियों से खास चिढ़ होती है। इसीलिए विकिपीडिया के कई लेखों में तथ्यात्मक गलतियों का भंडार मिलता है। विकिपीडिया का इस्लामिक झुकाव तो है ही, हिंदू विरोधी विचारों को भी इस पर खूब बढ़ावा मिलता है। हिंदुओं को बदनाम करने का मौका ये प्लेटफॉर्म बिल्कुल भी नहीं छोड़ता। ऐसा ही एक मामला पाकिस्तान के पहले कानून एवं श्रम मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल के विकिपीडिया पेज से जुड़ा सामने आया है।

बता दें कि पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल ने पाकिस्तान में हिंदुओं के कल्तेआम और हिंदू विरोधी दंगों के साथ ही पाकिस्तान के मुस्लिमों के दबदबे वाले प्रशासन में दलित विरोध पूर्वाग्रहों के कारण साल 1950 में इस्तीफा दे दिया और वो भारत आ गए। जोगेंद्र नाथ मंडल भारत क्यों आए, ये वाकया काफी मशहूर है। उन्होंने 9 अक्टूबर 1950 को लंबा इस्तीफा पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ दंगों और दलित उत्पीड़क नीतियों को इसकी वजह बताया था।

हालाँकि, अब विकिपीडिया ने इस प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटनाक्रम से छेड़छाड़ की कोशिश की है। विकिपीडिया के पेज पर दावा किया गया है कि पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री और श्रम मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल कोलकाता में अपने बीमार बेटे के लिए भारत आए थे। विकिपीडिया के इस लेख में दावा किया गया है, “जोगेंद्र नाथ मंडल साल 1950 में भारत वापस लौटने के लिए मजबूत हो गए। आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में अपने खिलाफ जारी हुए गिरफ्तारी वारंट की वजह से ये कदम उठाया। हालाँकि वो भारत इसलिए आए, क्योंकि उनका इकलौता बेटा जगदीशचंद्र मंडल, जो उस समय कोलकाता में पढ़ रहा था, वो बीमार पड़ गया था और मंडल उसकी देखभाल के लिए वापस लौट आए थे।”

ये मामला अर्थशास्त्री और आईआईएम कोझिकोड के प्रोफेसर कौशिक गंगोपाध्याय ने एक्स पर उठाया। उन्होंने 11 अप्रैल को कोलकाता स्थित भारतीय पर्यावरण और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. मोहित रे का एक लेख पोस्ट किया, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि विकिपीडिया के लेखों में किस तरह से इतिहास को बदला जा रहा है।

इस लेख का शीर्षक है: ‘इस्लामिक और सेकुलर उदारवादियों को खुश करने के लिए विकिपीडिया कैसे झूठ फैलाता है: एक केस स्टडी’। इस पोस्ट में पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री के इस्तीफे का उल्लेख किया गया है, जिसमें लिखा है, “काफी सोच विचार और आंतरिक संघर्ष के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि पाकिस्तान में हिंदुओं के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। यहाँ उनका भविष्य अंधकारमय है क्योंकि उन पर धर्म परिवर्तन या फिर मौत में से एक चुनने का दबाव है। अधिकतर उच्च वर्ग के संपन्न हिंदू और राजनीतिक रूप से जागरुक दलितों ने पूर्वी बंगाल को त्याग दिया है। जो हिंदू पाकिस्तान में किसी भी मजबूरी वश रह जाएँगे, मुझे डर है कि एक न एक दिन प्लानिंग के तहत उन्हें या तो इस्लाम में कन्वर्ट करा दिया जाएगा, या फिर उनका सफाया कर दिया जाएगा।”

हाालँकि विकिपीडिया संपादन, जो Achintya2023 ने किया, उसने इन जानकारियों को पूरी तरह से छिपा दिया और दावा किया कि मंडल अपने बीमार बेटे जगदीशचंद्र मंडल को देखने के लिए भारत आए थे। हालाँकि विकिपीडिया का लेख पाकिस्तान में दलितों या अनुसूचित जातिओं के उत्पीड़न को लेकर चिंता का तो उल्लेख करता है, लेकिन मंडल द्वारा उनके पत्र में लिखे गए हिंदुओं के नरसंहार की बात पूरी तरह से छिपा जाता है।

कौशिक गंगोपाध्याय ने कहा कि बांग्ला विकिपीडिया में इससे भी ज्यादा बेईमानी की गई है। “बंगाली विकिपीडिया में बेईमानी और भी नीचे चली गई है, जिसमें पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार और नरसंहार को तो छुपा दिया गया है, लेकिन सामाजिक अन्याय और पक्षपातपूर्ण रवैये के आधे-अधूरे सच का उल्लेख किया गया है।” बेटे की बीमारी का दावा जोड़ते हुए विकीपीडिया संपादक ने द डिक्लाइन ऑफ द कास्ट क्वेश्चन: जोगेंद्रनाथ मंडल और बंगाल में दलित राजनीति की हार नामक पुस्तक का हवाला दिया। यह पुस्तक इतिहासकार और प्रोफेसर द्वैपायन सेन द्वारा लिखी गई है।

ऑपइंडिया ने किताब को देखा और पाया कि दावा करने के लिए किताब को गलत तरीके से कोट किया गया है। हालाँकि इसमें ये जरूर कहा गया है कि जोगेंद्र नाथ मंडल अपने बेटे को देखने के लिए कलकत्ता आए थे जो उस समय शहर में पढ़ रहा था, लेकिन यह दावा नहीं करता है कि यही उनके भारत लौटने की वजह था। किताब बताती है कि उन्होंने इसे भारत आने के लिए सिर्फ एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया था, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि अगर उन्होंने भारत लौटने का इरादा जाहिर किया तो उन पर हमला किया जाएगा।

भारत लौटने के बाद मंडल ने दावा किया कि वह खुद बीमार पड़ गए और प्रधान मंत्री लियाकत अली खान को पत्र लिखकर अपने मंत्रालय को किसी और को देने के लिए कहा। बाद में मंडल ने लियाकत अली खान को एक लंबा इस्तीफा भेजा, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को छोड़ने की वजहों का विस्तार से जिक्र किया। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है और पाकिस्तान में दलितों के लिए जो वादे किए गए थे, उन्हें भी पूरे नहीं किए गए।

इस किताब में भारत आने से पहले मंडल के कराची में रहने के दिनों की भी जानकारी है। इसमें बताया गया है कि मंडल पाकिस्तानी सरकार के विश्वासघात से निराश हो गए थे, क्योंकि पाकिस्तानी सरकार ने दलितों के कल्याण के लिए किए गए वादों को कभी पूरा नहीं किया। एक तरफ अंबेडकर ने भारत विभाजन की विभीषिका के दौरान पाकिस्तान के सभी दलितों को भारत आने का आह्वान किया था, तो मंडल ने मुस्लिम-दलित एकता की उम्मीद में इसका विरोध किया था। 1948 में कराची में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान भी उन्होंने हिंदुओं से पाकिस्तान में रहने की अपील की थी।

जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान में दलितों और हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा का विरोध करते रहे, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने उनकी अपीलों को नजरअंदाज ही किया। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे, तो उस समय भी दलितों की चिंता उन्हें हो रही थी। वो बड़ी दुविधा में फंसे थे, क्योंकि एक तरफ वो दलितों को पाकिस्तान छोड़ने के लिए कह नहीं पा रहे थे, चूँकि वो खुद पाकिस्तान के कानून मंत्री थे, तो दूसरी तरफ वो पाकिस्तान में दलितों की सुरक्षा की गारंटी भी नहीं ले पा रहे थे।

उनके इस्तीफे से ये बात साफ है कि वो पाकिस्तान में मंत्री होते हुए भी हिंदू विरोधी दंगों, नीतियों को नहीं रोक पा रहे थे, तो दलितों के अंधकारमय होते भविष्य को बचाने में भी खुद को असमर्थ पा रहे थे। यही वजह है कि वो इस्तीफा देकर भारत लौटने के बारे में विचार कर रहे थे। हालाँकि ये आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें शक था कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद अगर उन्होंने प्रधानमंत्री का विरोध करते हुए उनकी इच्छा के खिलाफ जाकर इस्तीफा दिया, तो उनके खिलाफ हिंसा हो सकती थी। हो सकता था कि वो अपने घर में ही सुरक्षित नहीं रह पाते।

यही वजह रही कि मंडल अपने बेटे की बीमार का बहान लेकर कोलकाता आ गए और फिर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को कुछ समय बाद अपना इस्तीफा भेज दिया। ऐसे में ये बात साफ है कि उन्होंने पाकिस्तान से खुद को सुरक्षित निकालने के लिए अपने बेटे की बीमारी का बहाना किया और पाकिस्तान सरकार की हिंदू और दलित विरोधी नीतियों की वजह से पाकिस्तान को छोड़ दिया।

पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री रहे जोगेंद्र नाथ मंडल ने अपने इस्तीफे में मुस्लिम लीग द्वारा 16 अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे, अक्टूबर 1946 के नोआखाली दंगे, पाकिस्तान की हिंदू विरोधी नीति, 10 फरवरी 1950 को ढाका के हिंदू विरोधी दंगों, जिसमें 10 हजार लोगों की जान गई, उनका उल्लेख किया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में ये भी बताया था कि पूर्वी पाकिस्तान से हिंदुओं को साफ करने की सरकार की योजना, देश में हिंदुओं का निराशाजनक भविष्य, हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन, नागरिक स्वतंत्रता को खत्म करने वाले कानून आदि की वजह से उन्होंने पाकिस्तान की सरकार और देश को छोड़ा।

जोगेंद्र नाथ मंडल ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि पीएम लियाकत अली खान ने उन्हें झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने लिखा, “मैं अब अपनी अंतरात्मा पर झूठे दिखावे और झूठ का बोझ नहीं उठा सकता, ऐसे में मैंने आपके मंत्री के रूप में अपना इस्तीफा देने का फैसला किया है।”

ये पूरा मामले ये बताने के लिए काफी है कि विकिपीडिया के लेख में पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल के पाकिस्तान छोड़कर भारत वापस आने की वजहों के बारे में गलत जानकारी दी गई है और लेख में ऐतिहासिक तथ्यों में फेरबदल किया गया है। ये हो सकता है कि वो अपने बीमार बेटे को देखने के लिए भारत आए हों, लेकिन पाकिस्तान छोड़ने की इकलौती वजह उनके बेटे की बीमारी नहीं थी। उन्होंने साफ तौर पर अपने इस्तीफे में लिखा है कि उन्होंने हिंदू विरोधी नीतियों और दलितों के लिए किए गए वादों को पूरा न करने के कारण पाकिस्तान और पाकिस्तानी सरकार को छोड़ा। जबकि विकिपीडिया के लेख में पाकिस्तान में हिंदुओं के बारे में उनकी चिंताओं पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली गई है।

ये लेख मूल रूप से राजू दास द्वारा अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।