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‘भारतीय सभ्यता खुद को F%ck करे’: पति को बेचना चाहती है ये इंस्टाग्राम क्रिएटर, वीडियो में कहा – कम कपड़े पहन कर बुड्ढों को चिढ़ाने में मजा आता है

इंस्टाग्राम पर एक युवती है, जिसका नाम मन्नत T कुल्हारिया है। वो सोशल मीडिया पर खासी चर्चा का विषय बन रही है, क्योंकि उसने ‘पितृसत्ता’ को खत्म करने की आड़ में कुछ ऐसी बातें कही हैं जो शायद ही किसी को पसंद आए। एक वीडियो में वो अपने पति को ही बेचने की बातें कर रही है, जिस पर लोगों ने कहा कि अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को लेकर ऐसा कहे तो आम जनता की क्या प्रतिक्रिया होगी? वहीं एक वीडियो में वो अपनी दादी को ही भला-बुरा कह रही है।

मन्नत कुल्हारिया इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई एक रील में कहती है, “मेरे को पता है क्या समझ में आया। मैं न जैसे, जैसे ‘जुदाई’ फिल्म में श्रीदेवी अपने अनिल कपूर को बेच देती है, उसी तरह मैं भी बेच आऊँगी अपने पति को। खूब पैसे मिलेंगे। गाइज, इंतजाम हो गया है मेरी ज़िन्दगी का – पति बेच आऊँगी मैं।” इस दौरान उसकी एक दोस्त बगल में धीमे-धीमे गाली भी बकती रहती है। वो कहती है कि आधे-आधे पैसे कर लेंगे, वैसे भी उसके लिए तो बोली लगेगी।

वहीं एक अन्य वीडियो में इंस्टाग्राम पर सक्रिय मन्नत T कुल्हारिया कहती है, “भाई, मैंने एक चीज नोटिस की है। मुझे पुरानी सोच वाले, रूढ़िवादी सोच वाले बुड्ढों को अपनी ड्रेसिंग सेन्स से चिढ़ाने में बड़े मजे आते हैं भाई। जैसे, मेरी दादी चिढ़ गईं। वो कहती हैं – हमारी भारतीय सभ्यता, पता न क्या फ़ालतू बातें हैं। दिमाग खराब कर दिया भाई बुड्ढी ने। मैं वही पहनूँगी जो मैं पहनना चाहती हूँ। क्या बोलोगे? मैं अच्छी दिखती हूँ। भारतीय सभ्यता खुद को फ% करे।”

इस वीडियो में मन्नत T कुल्हारिया मिडिल फिंगर, यानी अपने हाथ की बीच की उँगली भी दिखाती है। वीडियो के अंत में वो ‘माँ चु%ओ’ की गाली भी देती है। वो कहती है कि वो अपना ध्यान रखने के लिए पर्याप्त है। मन्नत कुल्हारिया के इंस्टाग्राम पर 72,000 के करीब फॉलोवर्स हैं। उसने 75 तस्वीरें/वीडियो अपने हैंडल से डाल रखे हैं। उसने अपने इंस्टाग्राम के बायो में खुद को ‘निहायत ही बदतमीज और बकचो$’ बताया है। अब उसकी सोच को लेकर सोशल मीडिया में उसकी आलोचना हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर त्वरित सुनवाई से किया इनकार, CJI बोले – ईमेल भेजो: हफ्ते में 5 बार लीगल टीम से बैठक की माँग भी रद्द

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को न्यायपालिका से एक बार फिर से झटका मिला है। शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल की माँग को ED-CBI मामलों की स्पेशल जज कावेरी बावेजा की अदालत ने खारिज कर दिया। असल में अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि उन्हें सप्ताह में 5 बार उनकी लीगल टीम से मिलने का मौका दिया जाए। फ़िलहाल वो हफ्ते में 2 बार ऐसा कर सकते हैं। लेकिन, कोर्ट ने उनकी इस माँग को सिरे से अस्वीकार कर दिया है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस बात को लेकर अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रहा कि वो सप्ताह में 2 बार अपनी लीगल टीम के साथ बैठक का इस्तेमाल सिर्फ सुनवाइयों के संबंध में चर्चा करने के लिए कर रहा है। जाँच एजेंसियों द्वारा दी गई रिपोर्ट्स से पता चला है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने एक वकील के माध्यम से दिल्ली के जल मंत्रालय के लिए कुछ निर्देश भेजवाए, जिनके आधार पर सरकार ने कुछ फैसले लिए। हालाँकि, उस वकील का नाम नहीं खोला गया है।

ये सब लीगल मीटिंग की आड़ में किया गया। जज कावेरी बावेजा ने माना कि अरविंद केजरीवाल ने सप्ताह में लीगल टीम के साथ 2 बार बैठक का इस्तेमाल सुनवाइयों को लेकर चर्चा की बजाए अन्य चीजों के लिए किया। अरविंद केजरीवाल ने 30-35 मामले लंबित होने की बात करते हुए कहा था कि उन्हें सप्ताह में 5 बार अपनी लीगल टीम से मिलना है, हालाँकि, कोर्ट ने ये नहीं माना कि 2 बैठकें अपर्याप्त हैं। कोर्ट ने उनकी इस माँग को सनक भरा भी करार दिया।

कोर्ट ने कहा कि अगर वो इस माँग को मान लेता है तो जेल में बंद अन्य कैदी जिनके ज्यादा मामले लंबित हैं वो हफ्ते में 5 दिन से भी ज्यादा बार अपनी लीगल टीम के साथ बैठक की माँग करने लगेंगे। जज कावेरी बावेजा ने अमानतुल्लाह खान के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि कोई जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं है। बताते चलें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी ED द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी को अवैध ठहराने से इनकार कर दिया, जिसके खिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए।

मुख्य न्यायधीश DY चंद्रचूड़ के सामने बुधवार (10 अप्रैल, 2024) को ये मामला लाया गया। कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बतौर अधिवक्ता पेश होते हुए कहा कि अविश्वसनीय दस्तावेजों के आधार पर दिल्ली CM को गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, CJI ने अर्जेन्ट सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आप हमें ईमेल भेजिए, हम इसे देखेंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि एक मुख्यमंत्री के लिए अलग से नियम नहीं हो सकता, अरविंद केजरीवाल शराब नीति बनाने में हिस्सेदार थे, उन्होंने घूस माँगा और अपराध से हुई आय का इस्तेमाल भी किया।

CAA पर गुमराह कर रहीं ममता बनर्जी, नागरिकता के लिए खुलकर आवेदन करें शरणार्थी: बंगाल में बोले अमित शाह – ये संदेशखाली के दोषियों को दंड देने का चुनाव

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रचार के लिए गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल पहुँचे। उन्होंने बालुरखाट में जनसभा को संबोधित किया और ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी शरणार्थियों को डरा रही हैं और उन्हें गलत जानकारी दे रही हैं। हकीकत ये है कि सीएए कानून से सभी को नागरिकता मिलेगी। इस दौरान बालुरघाट की जनता से कहा कि आप लोग ईवीएम का बटन इतनी तेजी से दबाना कि बटन बालुरघाट में दबे और करंट कोलकाता में ममता बनर्जी को लगे।

कोलकाता में लगना चाहिए करंट

दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट में जनसभा को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “माताओं बहनों से कहने आया हूँ कि ये संदेशखाली वालों को दंड देने का चुनाव है। आप कमल के निशान पर बटन दबाएँगे क्या? बटन तो जरूर दबाना, लेकिन इतनी जोर से दबाना कि बटन बालुरघाट में दबे और करंट कोलकाता में ममता दीदी को लगे।”

जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस, टीएमसी और कम्युनिस्ट पार्टी वाले 70 वर्षों से राम मंदिर को लटका रहे थे, अटका रहे थे, भटका रहे थे। मोदी सरकार के दौरान राम मंदिर मुद्दे का फैसला भी आ गया, भूमि पूजन भी हो गया और राम मंदिर का निर्माण भी हो गया। 500 साल बाद, रामलला अपने भव्य मंदिर में रामनवमी को अपना जन्मदिन मनाएँगे।

लोगों को गुमराह कर रही हैं ममता बनर्जी

गृहमंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा, “हमने सीएए का कानून पारित किया है। ममता दीदी बंगाल के लोगों को गुमराह कर रही हैं। ये कह रही हैं कि अगर आपने एप्लीकेशन दिया तो आपकी नागरिकता चली जाएगी। मैं आज आपसे कहने आया हूँ। बिना डरे जितने भी शरणार्थीं हैं, एप्लीकेशन भरें, सभी को नागरिकता दी जाएगी। ममता दीदी, आप चाहे जितना भी विरोध करें, हम सभी शरणार्थियों को नागरिकता देंगे। ये हमारा वादा है।”

उन्होंने आगे कहा, “ये मोदी सरकार का कानून है, जिसे कोई बदल नहीं सकता। वो (ममता बनर्जी) रोहिंग्याओं का रेड कारपेट बिछाकर स्वागत करती हैं, और असली शरणार्थियों को मिसलीड करती हैं। बंगाल में आए सभी शरणार्थियों को बिना डर के नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए।”

एनआईए से धमाकों के आरोपितों को बचाना चाहती हैं ममता दीदी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “2022 में भूपतिनगर में एक बम धमाका हुआ था, जिसमें 3 लोग मारे गए थे। मुझे एक बात बताएँ कि बम धमाका करने वालों को मजबूती से जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहिए या नहीं? हाईकोर्ट ने इसकी जाँच एनआईए को सौंपी और ममता दीदी एनआईए के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपियों को बचाना चाहती हैं। पूरा देश विकास की राह पर आगे बढ़ गया है लेकिन हमारा बंगाल पिछड़ गया है।” उन्होंने आगे कहा, “ममता दीदी, आप एक महिला मुख्यमंत्री हैं… आप संदेशखाली जैसी शर्मनाक घटना पर भी राजनीति कर रही हैं। सालों तक आपकी नाक के नीचे महिलाओं पर अत्याचार होता रहा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडे अत्याचार करते रहे। जब ED आरोपियों को गिरफ्तार करने गई तो ईडी पर पथराव हुआ… बंगाल की महिलाएँ देख रही हैं कि आप संदेशखाली घटना के आरोपितों के साथ हैं…”

इस दौरान अमित शाह ने कहा कि देशभर के गरीबों का 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का खर्चा मोदी जी उठा रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ममता दीदी ने यहाँ आयुष्मान योजना को लागू ही नहीं किया है। एक बार ममता सरकार को उखाड़ दो, सभी का 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त हो जाएगा।

दो पड़ोसियों के बीच विवाद, शिकार बनी 3 साल की बच्ची: सायरा बानो ने ईद से पहले रफीकन का कोख उजाड़ा, गला घोंटकर मारा फिर बोरे में भर फेंक दी लाश

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में ईद से पहले 3 साल की एक मुस्लिम बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है। हत्या का आरोप मृतका की पड़ोसन सायरा बानो पर लगा है। पीड़िता और और अरोपित एक ही समुदाय से हैं। हत्या की वजह मृतका के अब्बा और आरोपित के बीच दोस्ताना संबंधों से दोनों परिवारों के बीच उपजी आपसी मनमुटाव बताया जा रहा है।

पुलिस ने आरोपित महिला को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, बच्ची रविवार (7 अप्रैल 2024) से लापता थी और उसका शव 2 दिन बाद 9 अप्रैल को बरामद हुआ। यह मामला रामपुर जिले के थाना क्षेत्र विलासपुर का है। यहाँ 7 अप्रैल को बच्ची के अब्बा दानिश ने पुलिस में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

शिकायत में उसने कहा कि रविवार को उसकी 3 साल की बेटी अनायजा दोपहर 11 बजे दुकान में टॉफी लेने गई थी। वह घर लौटी, लेकिन 12:30 बजे वह अचानक घर से गायब हो गई। काफी खोजबीन के बाद पीड़िता नहीं मिली। बच्ची के अब्बा ने तब किसी अज्ञात व्यक्ति पर लड़की को बहला-फुसला कर साथ ले जाने की आशंका जताई थी।

शिकायत पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 के तहत केस दर्ज करके बच्ची की तलाश शुरू कर दी थी। इस बीच मंगलवार (9 अप्रैल) की सुबह बच्ची का शव उसके घर के बगल वाली खाली प्लॉट में पड़ा मिला। लाश को बोरे में बाँधकर फेंका गया था। बोरे से बच्ची के कुछ अंग बाहर निकल आए थे। लाश पर दाँतों से काटे जाने के निशान भी मौजूद थे।

शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने CCTV फुटेज सहित कई अन्य सबूत जुटाए। इसके आधार पर पुलिस ने 10 अप्रैल 2024 को इसी गाँव की रहने वाली 20 वर्षीय मुस्लिम लड़की शायरा बानो को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। शुरू में उसने टाल-मटोल करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती के बाद उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

आरोपित सायरा बानो ने बताया कि उसके और बच्ची के अब्बा के बीच दोस्ताना संबंध है। इस वजह से मृतका की माँ से उसका मनमुटाव चल रहा था। इस संबंध को लेकर मृतक बच्ची की माँ के साथ उसका वाद-विवाद भी हो चुका है। घटना के दिन मृतक बच्ची सायरा बानो के घर टॉफी लेने गई थी। इस दौरान वह महिला बच्ची को अपने साथ लेकर छत पर चली गई।

छत लेकर जाकर सायरा बानो ने तीन साल की इस मासूम बच्ची का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने शव का हाथ बाँध कर उसे बोर में भर दिया। बाद में सायरा बानो ने शव को अपने घर के पीछे खाली पड़े प्लॉट में फेंक दिया। पुलिस ने हत्या की वजह आरोपित महिला सायरा बानो की जलन और घृणा बताया है।

मृतका के शव पर मिले दाँतों के निशानों को लेकर रामपुर के पुलिस अधीक्षक ने आशंका जताई है कि वो किसी जानवर द्वारा शव को खाए जाने के निशान हो सकते हैं। हालाँकि, इस बावत उन्होंने जाँच जारी होने की बात भी कही। सायरा बानो शादीशुदा है और उसके शौहर का नाम सगीर अहमद है। पुलिस के मुताबिक, घटना को अकेले सायरा बानो ने ही अंजाम दिया है।

अक्साई चीन पर जो थे नेहरू के विचार, कच्चातिवु पर दिग्गी राजा ने वही दोहराया: देश की अखंडता को ठेंगा दिखाती कॉन्ग्रेस, मछुआरों के मुद्दे इनके लिए ‘बेकार की बातें’

भारत-चीन के बीच युद्ध भले ही अक्टूबर 1962 में शुरू हुआ, लेकिन इसकी पटकथा काफी पहले से लिखी जानी शुरू हो गई थी। लद्दाख में 1959 में भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसा हुई थी। चीन ने प्रस्ताव रखा था कि मैकमोहन लाइन के दोनों तरफ 20 किलोमीटर तक दोनों देशों की सशस्त्र जवान पीछे जाएँ, जिसे भारत ने नकार दिया था। उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जो बयान दिया था, दिग्विजय सिंह ने अपने नए बयान से उसी विरासत को आगे बढ़ाया है।

दिग्विजय सिंह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, लगातार 10 साल मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। कुछ दिनों पहले कच्चातिवु द्वीप को लेकर विवाद सामने आया था। RTI से खुलासा हुआ था कि कैसे इंदिरा गाँधी के काल में कॉन्ग्रेस सरकार ने इस द्वीप को श्रीलंका को दे दिया था। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाया। दिग्विजय सिंह ने इस पर कहा है कि वहाँ कोई नहीं रहता है। ये कॉन्ग्रेस की उसी संवेदनहीनता का परिचायक है, जिसका पालन नेहरू से लेकर दिग्विजय तक उसके नेता करते रहे हैं।

इससे पता चलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी भारत की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति जरा सी भी गंभीर नहीं है। मोदी सरकार में उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास से लेकर जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त कर लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने तक, या फिर पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में BSF को अधिक शक्ति देने तक, मोदी सरकार लगातार भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने में लगी हुई है। वहीं कॉन्ग्रेस के समय कभी पाकिस्तान, कभी चीन तो कभी श्रीलंका तक ने भारत की जमीनें हड़पीं।

तमिलनाडु में इस बार पूरा जोर लगा रही भाजपा

तमिलनाडु में इस बार भाजपा जोर-शोर से मेहनत कर रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सालेम में रैली की, जहाँ वो मुस्लिमों द्वारा घर में घुस कर 2013 में भाजपा नेता ऑडिटर रमेश की हत्या पर श्रद्धांजलि देते हुए भावुक हो गए, फिर उन्होंने राजधानी चेन्नई में भव्य रोडशो किया। रोडशो के अगले ही दिन वेल्लोर और मेट्टुपलायम में सभाएँ की। पीएम मोदी ने नई संसद में चोल राजवंश के राजदंड ‘सेंगोल’ को भी स्थापित कर के तमिलनाडु की संस्कृति को वैश्विक पहचान दी है।

इसमें बहुत कुछ नया नहीं है, क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्टूबर 2019 में भारत आए थे तो पीएम मोदी के साथ उन्होंने मल्ल्पुरम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। उत्तर प्रदेश में काशी-तमिल संगमम और गुजरात में सौराष्ट्र-तमिल संगमम भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही दिमाग की उपज है जो तमिल संस्कृति को भारत के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ता है। तमिलनाडु की 9 क्षेत्रीय (DMK/AIADMK नहीं) दलों से गठबंधन कर भाजपा ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है।

पार्टी वहाँ कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती, यही कारण है कि सेन्ट्रल चेन्नई से तमिलसाई सुन्दरराजन को राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर लड़ाया जा रहा है। और हाँ, इस बार राज्य में अन्नामलाई फैक्टर भी है। IPS अधिकारी रहे अन्नामलाई राज्य में भाजपा के लिए जम कर पसीना बहा रहे हैं और खुद कोयम्बटूर से चुनाव लड़ रहे हैं। दरअसल, उन्होंने ही एक RTI दायर की थी। उससे ही खुलासा हुआ कि कॉन्ग्रेस राज में कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को दे दिया गया था।

कच्चातिवु द्वीप और भारतीय मछुआरों की समस्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाते हुए बताया था कि कैसे भारतीय मछुआरे अब उस द्वीप के आसपास जाते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। 1974 में श्रीलंका और इंदिरा गाँधी सरकार के बीच हुए करार के तहत इस द्वीप को श्रीलंका को दे दिया गया था। भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमाओं के विवाद के समाधान की आड़ में ये सब किया गया था। केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर भी बता चुके हैं कि कैसे पिछले 2 दशक में न सिर्फ 6184 भारतीय मछुआरों को हिरासत में लिया है, बल्कि 1175 नावों को भी जब्त किया है।

भारत में मछली पकड़ने की तकनीक है, पानी में जाल डाला जाता है और फिर मछलियाँ उसमें आ जाती हैं और पानी छन जाता है। हालाँकि, 2017 में श्रीलंका ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। भारतीय मछुआरे समुद्री संसाधनों को खत्म कर रहे हैं, ये आरोप लगाया गया। कहा गया कि इससे समुद्री जीवन खत्म हो रहा है। श्रीलंका भी कच्चातिवु द्वीप का कुछ खास इस्तेमाल नहीं कर रहा है। श्रीलंका के थिंक-टैंक ‘PathFinder’ का मानना है कि भारत में चुनावी लाभ के लिए ये मुद्दा उठाया गया है।

हालाँकि, मछुआरों की गिरफ़्तारी के आँकड़े इसकी पुष्टि करते हैं कि ये द्वीप अगर भारत में रहता तो हमारे मछुआरों को फायदा होता। इंदिरा गाँधी ने दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तों की दुहाई देते हुए कहा था कि इस आइलैंड का मुद्दा उठाना ठीक नहीं है। आपको पता है उनका क्या मानना था? इंदिरा गाँधी इस द्वीप को केवल एक पत्थर मानती थीं, जिसका कोई रणनीतिक महत्व नहीं है। हालाँकि, उस समय भारतीय मछुआरों की इसकी इजाजत दी गई थी कि वो इस द्वीप पर रुक कर अपने जाल को धूप में सूखा सकें, यहाँ आराम कर सकें।

लेकिन, 1976 में एक और करार हुआ और भारतीय मछुआरों का ये अधिकार भी जाता रहा। भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के तलाईमन्नार के बीच की दूरी मात्र 12 किलोमीटर है, ऐसे में मछुआरों के लिए नया संकट खड़ा हो गया। सदियों से उनका जीवन-यापन इसी पर निर्भर था। श्रीलंका में जब गृह युद्ध हुआ तब वहाँ की नौसेना ने नावों पर बिना किसी भेदभाव के वार किया, जिसका निशाना भारतीय मछुआरे भी बने। बीच में वहाँ के उग्रवादी संगठन LTTE और श्रीलंकाई मछुआरों ने भी भारतीय मछुआरों पर हमला किया।

दिग्विजय सिंह का बयान, नेहरू वाली विरासत को ही बढ़ा रहे आगे

दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के राजगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वो अपने क्षेत्र में ‘वादा निभाओ यात्रा’ निकाल रहे हैं। दिग्विजय सिंह 1984 और 1991 में इस सीट से जीत चुके हैं। इसी सीट के अंतर्गत आने वाले राघोगढ़ से 4 बार MLA रहे हैं। पिछले 3 बार से उनके बेटे जयवर्धन यहाँ से विधायक हैं। चौचौड़ा से भी वो एक बार विधायक रहे हैं। फ़िलहाल वो लगातार दूसरी बार राज्यसभा सांसद हैं। उनके भाई लक्ष्मण सिंह भी चाचौड़ा से MLA हैं, राघोगढ़ से 2 बार विधायक रहे हैं और इसी राजगढ़ सीट से लगातार 5 चुनाव जीत चुके हैं।

दिग्विजय सिंह गाँधी परिवार के करीबी सलाहकारों में से भी एक रहे हैं। कच्चातिवु वाले मुद्दे पर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “एक बात सुन लीजिए। उस द्वीप पर कोई रहता है क्या? मैं ये पूछना चाहता हूँ।” जब मछुआरों की समस्या के बारे में उनसे बात की गई तो वो कहने लगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेकार की बाते कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे नेहरू वाली मानसिकता करार दिया, जब उन्होंने अक्साई चीन को लेकर कहा था कि यहाँ घास का एक तिनका भी नहीं उगता।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस नेता देश की बजाए एक परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कहते हैं कि जम्मू कश्मीर की चर्चा राजस्थान में नहीं होनी चाहिए, राहुल गाँधी और A राजा कहते हैं कि भारत देश नहीं बल्कि अलग-अलग राज्यों का समूह है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस के कृत्य में DMK द्वारा साथ देने का भी आरोप लगाया। 1974 में तमिलनाडु में करूणानिधि की ही सरकार थी।

जवाहरलाल नेहरू ने अक्साई चीन को लेकर दिखाई थी यही मानसिकता

जवाहरलाल नेहरू ने अक्साई चीन पर चीन के कब्जे को सही ठहराया था। नेहरू चीन को लेकर आकर्षित थे, उन्होंने वहाँ का दौरा कर के ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा भी दिया और UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) की सीट तक सौंप दी, लेकिन बदले में मिला तो युद्ध और अतिक्रमण। चीन ने बार-बार नेहरू का भी अपमान किया, उन्हें अंग्रेजों-अमेरिका का नौकर तक बता दिया। भूटान और तिब्बत को लेकर चीन लगातार भारत को धमकी देता रहा, कॉन्ग्रेस शासन नज़रअंदाज़ करता रहा सब कुछ।

8 दिसंबर, 1959 को जवाहरलाल नेहरू ने संसद में कहा था कि भारत की सीमाओं को लेकर खुद वो निश्चित नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि भारत की सेना हाथ पर हाथ धरे बैठी थी। 1957 की शुरुआत में कुमाऊँ रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल RS बसेरा और हवलदार दीवान सिंह ने याक चराने वालों के समूह में शामिल होकर पता लगाया कि चीन अक्साई चीन में सड़कें बनवा रहा है। इस गुप्त रिपोर्ट के टेबल पर आने के बावजूद जवाहरलाल नेहरू निश्चिंत बने रहे।

तिब्बत को लेकर भी भारत ने चीन को एकदम से आक्रामक रवैया अपनाने दिया। तिब्बत ने नेहरू को ‘चोग्याल’ (राजा) के रूप में देखा था और उसे लगता था कि वो उसकी समस्याएँ सुलझाएँगे। उस समय भारतीय वायुसेना को भी चीन की वायुसेना से मजबूत माना जाता था। नई सड़कें बना कर चीनी सेना भारतीय सीमा में तेज़ी से घुस सकती थी। इतिहास बताता है कि JL नेहरू से लेकर दिग्गी राजा तक, कॉन्ग्रेस देश की अखंडता के प्रति गंभीर नहीं रही है और उसने हमारी सीमाओं का नुकसान ही किया है।

मोदी सरकार में सुरक्षित हुईं सीमाएँ, उत्तर-पूर्व से लेकर कश्मीर तक काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से कहते रहे हैं कि भारत की सीमा पर स्थित गाँवों को ‘अंतिम गाँव’ कहने की बजाए उन्हें देश का ‘पहला गाँव’ कहा जाना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में भारत स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर धड़ाधड़ अत्याधुनिक सड़कें बना रहा है। LGG-डामटेंग-यांग्त्से मार्ग हो या फिर सेला टनल, निर्माण कार्य जारी है। भारत-तिब्बत-चीन-म्यांमार सीमा पर 1748 किलोमीटर के 2 लेन हाइवे बनाने के लिए 6000 करोड़ रुपए हाल ही में आवंटित किए गए हैं।

अगस्त 2023 में सामने आया था कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 507 किलोमीटर, लद्दाख में 553 किलोमीटर और उत्तराखंड में 343 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया है। कई ऐसे टनल बनाए जा रहे हैं जो हर मौसम में आवागमन के लिए चालू रहें। जिन राज्यों की सीमाएँ दूसरे देशों से मिलती हैं, वहाँ BSF को गिरफ़्तारी, जब्ती और तालशी के अधिकार का दायरा बढ़ा कर 50 किलोमीटर कर दिया गया। कॉन्ग्रेस ने इसका भी विरोध किया था।

एक ‘राहुल जी’ की नजर को बेताब, दूजी टिकट की आस में बौराई… प्रज्ञा मिश्रा और नेहा सिंह राठौर ई का बा

सोशल मीडिया के समय में प्रोफेशन को आड़ बनाकर अपना प्रोपगेंडा चलाना या कुंठा निकालना कोई नया नहीं रहा.. इस बात को समझने के लिए दो लोगों का उदाहरण लिया जा सकता है। पहली खुद को पत्रकार बताने वाली प्रज्ञा मिश्रा और दूसरी खुद को लोकगायिका कहने वाली नेहा सिंह राठौड़।

इनकी फैन फॉलोइंग देखकर आपको समझ आएगा कि ये अपने-अपने प्रोफेशन के नाम पर आज जनता के बीच इतनी मशहूर हो गई हैं कि इन पर चर्चा हो, लेकिन टाइमलाइन देखने पर पता चलेगा कि ये अपने असली काम को छोड़कर सिर्फ जनता के बीच चुनिंदा पार्टियों का नैरेटिव बनाने में और अपना प्रचार करने में व्यस्त हैं।

प्रज्ञा मिश्रा की पत्रकारिता का अर्थ सिर्फ मोदी का विरोध

प्रज्ञा मिश्रा पत्रकार बनकर जब कैमरे पर आती हैं तो उनसे अपेक्षा की जाती होगी कि वो निष्पक्ष होकर रिपोर्टिंग करें, चाहे वो किसी पार्टी के अच्छे काम पर हो या फिर बुरे। हालाँकि असल में ऐसा होता नहीं है।

जो प्रज्ञा राहुल गाँधी की एक झलक दिखने पर जोर-जोर से फैन्स की तरह चिल्लाती हैं, वही प्रज्ञा जब माइक उठाकर ग्राउंड पर उतरती हैं जो उन्हें जनता के रूप में सिर्फ पीएम मोदी की आलोचना करने वाले लोग ही चाहिए होते हैं। वो जितना चिल्लाकर ये पीएम मोदी के कार्यों को बताने वाली मीडिया संस्थानों पर सवाल उठाती हैं, उतनी ही वह चुप तब हो जाती हैं जब प्रियंका गाँधी उनके कंधे पर हाथ रख दें।

उनके चैनल को देखने पर पता चलेगा कि वो या तो ग्राउंड पर मोदी विरोधियों का पक्ष दमदार ढंग से रखती हैं या फिर अगर कोई मोदी समर्थक मिल जाए तो उसे अंधभक्त कह देती हैं। उनके इस रवैये से तो यही साफ होता है कि उन्हें हर हाल में सिर्फ मोदी सरकार का विरोध ही करना है चाहे जनता उनके पक्ष में कितना ही बोल ले।

अभी 24 घंटे पहले उलटा चश्मा पर डाली गई प्रज्ञा मिश्रा की वीडियो का उदाहरण देखिए। इसमें भी प्रज्ञा पत्रकार होने की बजाय विश्लेषक बनी हुई हैं। एक ऐसी विश्लेषक जो समझा रही हैं कि पीएम मोदी द्वारा किए गए 400 पार का दावा नहीं किया जाना चाहिए था क्योंकि क्रिकेटर भी जब खेलता है तो रन पहले नहीं बताता, सिर्फ अच्छा खेलता है…मगर मोदी जी तो पहले से ही अपने ‘रन’ बता रहे हैं।

प्रज्ञा मिश्रा के चैनल पर डली हालिया वीडियो का कंटेंट

प्रज्ञा मिश्रा की खास बात यह है कि वो ऐसा ज्ञान पीएम मोदी के लिए ही देते हुए मिलती हैं। उनके चैनल पर बाकी पार्टियों से जुड़ी वीडियोज को अगर आप देखेंगे तो पता चलेगा कि जिन प्रज्ञा को पीएम मोदी द्वारा अपना प्रचार किए जाने से समस्या है।

वहीं प्रज्ञा विपक्ष की पार्टियों के लिए माहौल अपने चैनल से बना रही हैं। चैनल पर पीएम मोदी के साथ-साथ समर्थकों को भी नेगेटिव छवि में दिखाने का प्रयास चल रहा है और समाजवादी पार्टी से लेकर आम आदमी पार्टी के समर्थकों को मोदी सरकार के विरोध में आवाज उठाने के लिए मंच दिया जा रहा है।

नेहा सिंह राठौड़ की गायिकी में राजनीति का छौंक

इसी तरह नेहा सिंह राठौड़… अगर आप नेहा को सोशल मीडिया के माध्यम से जानते हैं तो आपको याद होगा कि इन्होंने ‘यूपी में का बा’ जैसे गीतों से अपनी पहचान बनाई थी। वीडियो में भाजपा सरकार की आलोचना थी तो विपक्षियों ने इसे इतना वायरल किया था कि धीरे-धीरे नेहा राठौड़ का विपक्ष फेवरेट होता गया।

व्यूज और लाइक ने उन्हें समझा दिया कि सामान्य गीतों से सिर्फ चंद लोगों तक पहुँचा जाएगा लेकिन लोकगायिकी में राजनीति का तड़का लगाकर अगर वीडियो बनाई तो पहचान और रीच बड़े-बड़े नेताओं तक जाएगी। नतीजतन अब अगर उनका यूट्यूब चैनल आप खोलकर देखेंगे तो समझ आएगा कि उनकी लोकगायिकी अब सिर्फ मोदी विरोधी गीतों में बदलकर रह गई हैं।

नेहा की राजनीतिक महत्वकांक्षाएँ पिछले दिनों एक इंटरव्यू के जरिए भी देखने को मिली थीं जब उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि अगर उन्हें कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ने का मौका देगी तो वो क्या करेंगी, नेहा ने न केवल इस बात का जवाब उत्सुकता के साथ दिया था बल्कि जब खबर आई थी मनोज तिवारी के खिलाफ वह कॉन्ग्रेस प्रत्याशी बनाई जा सकती हैं उस पर भी उन्होंने कहा था कि उन्हें ये सब सुनकर अच्छा लग रहा है। इसके बाद आप देखेंगे कि अचानक से पिछले कुछ दिनों में नेहा ने प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए कई वीडियोज डाली हैं।

नेहा सिंह राठौड़ के चैनल पर डली हालिया वीडियोज का कंटेंट

नेहा राठौड़ और प्रज्ञा मिश्रा के लिए अब मोदी विरोधी होना ही उनके प्रोफेशन को जस्टिफाई करना रह गया है। अगर वो ऐसा नहीं करते और सिर्फ पत्रकारिता और लोकगायिकी पर ही ईमानदारी से आगे बढ़ते हैं तो या तो उनकी फैन फॉलोइंग कम हो जाएगी या उनकी प्रासंगिकता। दोनों को मालूम है कि प्रोपगेंडा का छौंक ही उनके करियर को महका सकता है, यही वजह है कि चुनावों से पहले वो इसमें कोई कमी नहीं होने दे रहीं।

वैसे मोदी और हिंदू विरोध से दाल-रोटी का जुगाड़ करने वाली प्रज्ञा मिश्रा और नेहा सिंह राठौर अकेली नहीं हैं। पर इनकी प्रोपेगेंडाबाजी से भी खतरनाक उनकी वह मानसिकता जिसमें अपनी आलोचना होने पर दोनों महिला वाला विक्टिम कार्ड प्ले करने लगती हैं। इससे ये दोनों हर उस महिला को कठघरे में खड़ा कर देती हैं जो सशक्त हैं, जो सशक्त भारत के स्वप्न की सहभागी बनना चाहती हैं। जिन्हें खुले में शौच से स्वतंत्रता मिली है। जो अब रसोई में धुआँ पीने को अभिशप्त नहीं हैं।

भारत ने नहीं, चीन ने की थी कनाडा के चुनावों में दखलंदाजी: अपनी ही एजेंसी ने पकड़ा झूठ, अब पीएम जस्टिन ट्रूडो की होगी पेशी

कनाडा के चुनावों में भारत द्वारा हस्तक्षेप किया गया, ऐसा कनाडा की सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया था, जिसके बाद कनाडा की सरकार ने इन आरोपों की जाँच कराई। इन आरोपों की आंतरिक जाँच के बाद पता चला है कि भारत ने कनाडा के अंदरुनी मामलों में कोई रुचि नहीं दिखाई है। वहीं, जाँच में चीन का नाम जरूर सामने आ गया है। पता चला है कि साल 2019 और 2021 में कनाडा के चुनावों में चीन ने हस्तक्षेप किया था और काफी पैसा भी खर्च किया था। यही नहीं, चीनी ने चीनी मूल के लोगों पर ट्रूडो के पक्ष में वोटिंग के लिए दबाव भी डाला था।

कुछ समय पहले कनाडा के सरकारी मीडिया सीबीसी ने कनाडा की सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस के दावे से कहा था कि भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने 2019 और 2021 में कनाडा के संघीय चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालाँकि भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कनाडा के चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों से जुड़ी आधिकारिक जाँच में ये बात सामने आई है कि हस्तक्षेप करने वाला देश भारत नहीं, बल्कि चीन है। कनाडा की इंटेलिजेंस एजेंसी ने पाया कि चीन ने पिछले दो चुनावों में हस्तक्षेप किया था।

बता दें कि 2019 और 2021 के जिन चुनावों की बात हो रही है उसमें पीएम जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी को जीत हासिल हुई थी। जब से चीन की इस चुनाव में भूमिका की खबर आई है, तब से कनाडा में विपक्ष नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स से नाखुश विपक्षी विधायकों के दबाव में ट्रूडो ने विदेशी हस्तक्षेप की जाँच के लिए एक आयोग का गठन किया है।

ट्रूडो ने बनाया आयोग, अब खुद की होगी पेशी

ट्रूडो ने भारत पर आरोपों की जाँच के लिए जिस आयोग का गठन किया था, अब उसी के सामने उनकी पेशी होगी और अपना बयान दर्ज कराना होगा। गौरतलब है कि इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय से जब सवाल पूछा गया था, तो भारत ने कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने फरवरी माह में कहा था, “हमने कनाडाई आयोग की जाँच से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं। हम कनाडा के चुनावों में भारतीय हस्तक्षेप के आधारहीन आरोपों को दृढ़ता से खारिज करते हैं।”

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से भारत और कनाडा के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। यहाँ तक कि दोनों देशों ने वीजा सेवाओं को भी बंद कर दिया था। हालाँकि अब धीरे-धीरे दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों को सामान्य की तरफ ले जाने का प्रयास किया है, साथ ही दोनों ही देशों में दूतावास पूरी क्षमता के साथ काम करने लगे हैं।

जेल में CM केजरीवाल, दिल्ली सरकार में भगदड़: मंत्री राजकुमार का इस्तीफा, कहा- जो राजनीति बदलने आए थे वे खुद बदल गए, AAP को बताया भ्रष्ट-दलित विरोधी

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री राज कुमार आनंद बुधवार (10 अप्रैल, 2024) को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने अपने मंत्रिपद से भी इस्तीफ़ा दिया है। राज कुमार आनंद ने इसकी जानकारी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी है।

राज कुमार आनंद ने कहा कि आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के विरोध के आन्दोलन से हुआ था, लेकिन यह आज खुद भ्रष्टाचार के दलदल में फँसी है। उन्होंने कहा कि इस सरकार में काम नहीं कर सकते, यह उनके लिए असहज हो गया है। उन्होंने कहा कि वह इस भ्रष्ट आचरण में अपना नाम नहीं जुड़वाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि वह राजनीति में सेवा के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि वह जो कुछ हैं सब कुछ बाबा भीमराव आम्बेडकर की वजह से हैं। राज कुमार आनंद ने आम आदमी पार्टी पर दलित विरोधी होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह उस पार्टी में नहीं रह सकते हैं जहाँ दलितों का प्रतिनिधित्व नहीं है।

आनंद ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर भी प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल से उनका सम्बन्ध इस बात पर हुआ था क्योंकि वह राजनीति बदलने वाले थे। उन्होंने कहा कि राजनीति तो नहीं बदली लेकिन राजनेता बदल गए हैं। आनंद ने बताया है उन्होंने अपना इस्तीफ़ा मुख्यमंत्री केजरीवाल को भेज दिया है।

राज कुमार आनंद दिल्ली के पटेल नगर से आम आदमी पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए थे। उन्हें पार्टी ने 2020 में पटेल नगर से मौक़ा दिया था, इस चुनाव में उन्होंने 60% से अधिक वोट बटोरे थे। उन्हें केजरीवाल सरकार में समाज कल्याण, अनुसूचित जाति/जनजाति, गुरुद्वारा चुनाव, सहकारी समिति मामलों के कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

आनंद ने आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद किसी अन्य पार्टी में जाने की खबरों का भी खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं। राज कुमार आनंद के बारे में दिल्ली सरकार का पेज बताता है कि वह अम्बेडकर पाठशाला जैसे समाज कल्याण के काम करते रहे हैं।

दिल्ली सरकार के बड़े मंत्री का इस्तीफ़ा मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। उन्हें 15 अप्रैल, 2024 तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लगाई थी।

‘उल्टा लटका देते हैं मिर्ची का छौंका’: कठुआ में CM योगी ने बताया UP में कैसे खत्म की गुंडागर्दी, बोले- अब पटाखा फूटने पर भी सफाई देने लगता है पाकिस्तान

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जम्मू के कठुआ में एक जनसभा को सम्बोधित किया। बुधवार (10 अप्रैल 2024) को सम्बोधित की गई इस जनसभा में उत्तर प्रदेश से गुंडागर्दी खत्म कर देने की बात कही। सीएम योगी ने आर्टिकल 370 को खत्म करना पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी का सबूत बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉन्ग्रेसियों को ‘एक्सीडेंटल हिन्दू’ कहते हुए उन पर कश्मीर को लावारिस छोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों की भी चर्चा की। बताते चलें कि भाजपा ने जम्मू लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है।

‘सच्चे दरबार की जय’, ‘बर्फानी बाबा की जय’, ‘माता त्रिपुरसुंदरी की जय’ और ‘वन्दे मातरम’ से योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत की। सभा में मौजूद लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से योगी का अभिवादन किया। कानून व्यवस्था के मामले में उत्तर प्रदेश को नजीर बताते हुए उन्होंने कहा, “आज कोई उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी करता है तो हम उसे उल्टा लटका देते हैं। अगर कोई नहीं समझता है तो उसे नीचे से मिर्ची का छौंक लगा देते हैं।”

योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी और जनरल जोरावर सिंह को भी याद किया। उन्होंने धारा 370 को कश्मीर का दुर्भाग्य बताते हुए सीएम योगी ने इसे भारत के विकास में बाधक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि धारा 370 कश्मीर में आतंकवाद की जड़ थी, जिसे पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मिलकर खत्म कर दिया है।

भारत के विभाजन को योगी आदित्यनाथ ने कॉन्ग्रेस की सत्ता की भूख बताया। भाजपा के कार्य को उन्होंने राष्ट्रधर्म बताया। इसके साथ ही भारत की एकता और अखंडता को सर्वोपरि बताया। पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए सीएम योगी ने कहा कि वह दुनिया भर में भीख का कटोरा लेकर घूम रहा है। भाजपा सरकार में सीमाओं को सुरक्षित बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि अब घुसपैठ करने की हिम्मत किसी की नहीं है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “अब कहीं पटाखा भी फूट जाता है तो पाकिस्तान सफाई देने लगता है कि इसमें मेरा हाथ नहीं है, क्योंकि उसे मालूम है कि अगर कुछ हो गया तो उसे लेने के देने पड़ेंगे।” योगी का दावा है कि नक्सलवाद नाम की समस्या का भी समाधान हो चुका है। कॉन्ग्रेस के लोगों को योगी आदित्यनाथ ने एक्सीडेंटल हिन्दू बताया।

बदलाव की बात करते हुए सीएम ने कहा, “इससे पहले लोग अपने आपको हिन्दू कहने में भी संकोच करते थे। अयोध्या का नाम लेने में तो लोग डरते थे। आज लोग अयोध्या जाएँ तो उन्हें लगेगा कि ये त्रेता युग का अयोध्या उतर आया है।” उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी पर भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाने और बार-बार हिन्दू आस्था को कुचलने का आरोप लगाया।

आधी-अधूरी इमारतें, बैंको का डूबता पैसा, सीमा पर फँसते ट्रक: मोदी सरकार ने GST-RERA जैसे सुधारों से बदल दी तस्वीरें

1991 में भारत बदलना चालू हुआ। खराब आर्थिक स्थिति की वजह भारत को अपना बाजार विश्व के लिए खोलना पड़ा। इन्हें आर्थिक सुधार कहा गया। आर्थिक सुधार की गति को देख कर कहा गया, “आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को कभी भी वापस बदला नहीं जा सकता” (The process of economic reforms is irreversible)। सुधारों की भी अपनी गति और साथ ही दुर्गति होती है। ऐसा ही हुआ। पीवी नरसिंह राव के समय में शुरू हुआ बदलाव का यह रथ 2014 तक आते-आते लगभग रुक गया।

देश में कई मोर्चों पर गड़बड़ियाँ होना चालू हुई। आर्थिक तरक्की के साथ ही गड़बड़ियाँ भी चालू हुईं। देश के बड़े शहरों में ऊँची ऊँची बिल्डिंग बनना चालू हुई, इनमें से बड़ी संख्या मात्र ढाँचा बन कर रह गईं, इनके लिए पैसा देने वाले लोग सड़कों पर आ गए।

बैंकों से कर्जा लेकर भाग जाने और ना लौटाने के कारण उनकी हालत खराब हो गई। देश का कर ढाँचा बिगड़ गया। हर राज्य में अलग-अलग तरह के टैक्स आ गए, इससे आम आदमी टैक्स के जाल में फंस गया। आर्थिक तरक्की की रफ़्तार को जारी रखने के लिए बाहर की कम्पनियों को प्रोत्साहन देने वाली कोई भी योजनाएँ नहीं लाईं गईं।

इस मकड़जाल के चलते देश की रफ़्तार धीमी पड़ने लगी। आर्थिक ढाँचा चरमराने लगा और भारत को विश्व की पाँच सबसे पस्त हालत अर्थव्यवस्थाओं में गिना गया। 2014 में देश में कॉन्ग्रेस की सत्ता पलट गई। भ्रष्टाचार विरोधी लहर और अपनी पॉपुलैरिटी की लहर पर सवार होकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्ण बहुमत वाली सरकार में प्रधानमंत्री बने।

मोदी सरकार के 10 वर्ष लगभग पूरे हो चुके हैं, देश में आम चुनावों का माहौल है। राजनीतिक दल अपने अपने हिसाब से अपना प्रचार कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस कुछ नई योजनाओं के आठ इस रण में उतरी है जिनमे वामपंथ की साफ़ छाप दिखती है, भाजपा अपने काम गिना रही है। आर्थिक सुधार के मोर्चे पर देखा जाए तो मोदी सरकार ने कई बदलाव देश में किए हैं।

GST: मकड़जाल जाल खत्म, एक देश एक टैक्स

मोदी सरकार के सबसे बड़े बदलावों में सबसे ऊपर वस्तु एवं सेवा कर (GST) का ही नाम रखा जाना चाहिए। देश की आजादी के लगभग 55 वर्ष बाद लाया गया यह कानून देश में टैक्स के मकडजाल को सुलझा रहा है। GST से पहले देश में केन्द्र स्तर पर केन्द्रीय बिक्री कर, एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर और अन्य कई कर लगाए जाते थे, राज्यस्तर पर भी मनोरंजन कर, लॉटरी, और लग्जरी कर जैसे टैक्स लगते थे। इनके अपने अलग अलग विभाग थे। यदि किसी वस्तु पर एक से अधिक टैक्स लगता तो करदाता को उन विभागों के चक्कर काटने होते।

GST से पहले माल की आवाजाही भी बड़ी समस्या थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, GST लाए जाने से पहले माल लाने ले जाने वाला एक ट्रक अपना 20% समय मात्र राज्यों के चेकपॉइंट पर ही बिता देता था। टैक्स चुकाना भी एक समस्या थी क्योंकि या भी बड़े पैमाने पर ऑफलाइन तरीके से होता था। GST से यह तस्वीर बदली है।

1 जुलाई 2017 को लाए गए GST में 17 अलग-अलग तरह के करों को समाहित कर दिया गया। GST के लिए एक एकीकृत पोर्टल भी लाया गया। यहाँ आसानी ने GST जमा किया जा सकता था। GST के कारण सरकार को भी बम्पर कमाई होना चालू हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार को ₹20.18 लाख करोड़ की कमाई हुई। इसकी तुलना अगर GST से पहले के समय से की जाए तो यह 2016-17 के दौरान मात्र ₹3.19 लाख करोड़ था। यानी GST के बाद इसमें लगभग 6 गुने की वृद्धि हुई है।

सरकारी बैंकों का एकीकरण

मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी तब देश के सरकारी बैंक बुरी हालत में थे। अधिकांश बैंकों को हर वर्ष केंद्र सरकार से पैसा लेकर काम चलाना पड़ता था। बैंकों द्वारा दिए गए कर्जे का बड़ा हिस्सा NPA हो गया था। सरकारी बैंकों की संख्या बड़ी होने के कारण इनका प्रबन्धन भी मुश्किल हो रहा था और अलग अलग जगह पूँजी होने के कारण यह एक बड़ा निर्णय भी नहीं ले पाते थे। मोदी सरकार ने इन्हें एकीकृत करने का निर्णय लिया। मोदी सरकार ने योजना बनाई कि यदि देश में कुछ ही बड़े बैंक हों तो उनका प्रशासन और नियमन आसान होगा।

मोदी सरकार ने देश के 27 सरकारी बैंकों को कम करके 12 करने की योजना चालू की। यह संख्या वर्तमान में 12 है, इसका सबसे आखिरी चरण 2020 में पूरा हुआ था। सरकार की योजना है कि इन्हें अब केवल 4 पर ही लाया जाए। सरकार इन सभी बैंकों को विश्व स्तरीय बैंक बनाना चाहती है। बैंकों में सुधार का परिणाम है कि बीते दो वर्षों के बजट में केंद्र सरकार को इन्हें चलाने के लिए नई पूँजी नहीं देनी पड़ी है। बैंकों का NPA भी कम हो कर 3% हो चुका है। यह 2018 में 11% से ऊपर था।

RERA- घर का सपना पूरा

मोदी सरकार द्वारा किए गए बड़े आर्थिक सुधार में से एक RERA भी है। रियल एस्टेट क्षेत्र में स्पष्ट नियमन लाने वाला यह क़ानून लाखों भारतीयों को घर दिलाने में सफल रहा है। RERA कानून के पहले बिल्डरों की बेईमानियाँ चरम पर थी।

बड़े प्रोजेक्ट्स में अपना फ्लैट खरीदने वाले लोग जीवन भर की कमाई उन बिल्डर को देते थे, कभी कभार घर मिल जाता था। कई मामलों में बिल्डर या तो दिवालिया हो जाता था, मकान देने की तारीख आगे बढ़ाता था या फिर जानबूझ कर उनका पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगाता था। इससे शहरों में आधे तैयार ढांचों की तस्वीरों से अखबार पटा रहता था।

2016 में मोदी सरकार द्वारा पास किया गया RERA कानून इन सभी गडबडियों पर रोक लगाता है। RERA के अंतर्गत मकान खरीदने वाले लोगों से मिला 70% पैसा बिल्डर को अलग खाते में रखना होता है। किसी मकान की लंबाई चौड़ाई क्या होगी, इसका निर्धारण भी अब सामान्य तरीके से होता है। यह पहले अलग अलग बिल्डर के आधार पर होता था। यह भी नियम लाया गया है कि बिल्डर किसी भी ग्राहक से 10% से अधिक राशि पहले ही नहीं माँग सकता। ऐसे में इस क्षेत्र में पारदर्शिता आई है और लोगों को अपना घर भी समय से मिल रहा है।

PLI योजना: ताकि विश्व भारत में बनाए

देश में आर्थिक सुधार के अलावा मोदी सरकार ने यह भी प्रयास किया है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा निर्माण हो और साथ विदेशी निवेश भी आए। मोदी सरकार ने देश में निर्माण करने वाली कम्पनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के जरिए बढ़ाने की योजना तैयार की है। वह उत्पाद, जो भारत में नहीं बनते, उनके क्षेत्र में निर्माण पर मोदी सरकार इन कम्पनियों को 4-6% की सब्सिडी दे रही है। इस PLI का असर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में देखने को मिला है।

वर्तमान में देश में उपयोग होने वाले लगभग 97% स्मार्टफ़ोन भारत में ही बन रहे हैं। एप्पल जैसी बड़ी कम्पनी भी भारत में आकर अब आईफोन बना रही है और विश्व में भी पहुँचा रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में बिकने वाला हर सातवाँ आइफोन अब भारत में बना हुआ है। एप्पल ने 14 बिलियन डॉलर (₹1.1 लाख करोड़ से अधिक) के आइफोन भारत में वर्ष 2023-24 में बनाए। भारत का 2023-24 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 20 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.7 लाख करोड़) पार होने वाला है।

इसके अलावा भी कई मूलभूत सुधार हैं जो कि मोदी सरकार ने किए हैं। यह सुधार आर्थिक तरक्की में तेजी लाने में काफी सहायक रहे हैं।