Home Blog Page 1033

अजय बन अब्दुल ने नेपाली नाबालिग को फँसाया, अब्बू-भाई और जीजा-मामा संग मिलकर किया रेप: इस्लाम अपनाने का दबाव, मांस खाने को किया मजबूर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। नेपाल की रहने वाली एक लड़की ने अब्दुल सलाम पर हिन्दू बनकर उससे शादी करने और बाद में इस्लाम कबूलने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने जबरन मांस खिलाने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने 6 नामजद और 2 अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज करके अब्दुल सलाम को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर जिले के थाना क्षेत्र बुढ़ाना का है। यहाँ नेपाल के कपिलवस्तु जिले की रहने वाली एक 26 वर्षीया हिंदू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह साल 2015 से दक्षिण दिल्ली के सुल्तानपुर में रह रही थी। उस समय वह नाबालिग थी। यहीं पर उसे अब्दुल सलाम मिला था। उसने अपना नाम अजय बताया था।

पीड़िता ने बताया कि अजय ने उससे दोस्ती की और प्यार का नाटक करने लगा। बाद में उसने शादी का झाँसा देकर नाबालिग की उम्र में उसके साथ रेप किया। पीड़िता का कहना है कि दूसरे देश से आने और अकेली रहने की वजह से पीड़िता अजय बने अब्दुल सलाम की इस हरकत का विरोध नहीं कर पाई। उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर अब्दुल सलाम ने उससे कई बार रेप किया।

पीड़िता ने आगे बताया कि बार-बार की रेप की वजह से वह कई गर्भवती भी हुई, लेकिन अब्दुल ने उसका हर बार गर्भपात करवा दिया। पीड़िता ने उस पर शादी का दबाव बनाया तो अब्दुल सलाम ने 6 अगस्त 2019 को दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में उससे शादी कर ली। इस शादी में पीड़िता से कोरे कागज पर दस्तखत करवाए गए। साल 2021 में पीड़िता एक बेटी की माँ बनी।

पीड़िता का कहना है कि जब वह अस्पताल में भर्ती हुई तो उसे पता चला कि अजय वास्तव में अब्दुल सलाम है और मुस्लिम है। तब अब्दुल सलाम ने पीड़िता और उसकी बेटी की हत्या की धमकी देकर मुँह बंद रखने को कहा। बेटी के जन्म के 7 महीने बाद अब्दुल सलाम पहली बार पीड़िता को अपने गाँव ले गया। जौला नाम का यह गाँव मुजफ्फरनगर के थाना क्षेत्र बुढ़ाना में पड़ता है।

ऑपइंडिया के मौजूद FIR की कॉपी के मुताबिक, यहाँ अब्दुल के अलावा उसके अब्बा इदरीस, भाई आसिफ एवं आमिल, मामा और 2 बहनोई ने पीड़िता से बारी-बारी से रेप किया। विरोध करने पर पीड़िता और उसकी बेटी की हत्या की धमकी दी जाती थी। कुछ दिनों बाद इन सभी आरोपितों ने पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसे जबरन मांस खिलाया जाता था।

पीड़िता का कहना है कि बीच-बीच में वह दिल्ली जाती थी तो अब्दुल उसे वापस अपने गाँव बुला लेता था और अपने घरवालों से रेप करवाता था। नवम्बर 2023 से अब्दुल सलाम पीड़िता से दूरी बनाने लगा। पीड़िता ने पता लगाया कि उसने किसी दूसरी लड़की से निकाह कर लिया है और ज्यादातर गाँव में रहने लगा। पीड़िता इसकी पड़ताल करने अब्दुल के गाँव गई तो वहाँ उसके साथ मारपीट की गई।

आखिरकार पीड़िता ने एक वीडियो जारी करके अपनी व्यथा लोगों को बताई और अब्दुल सलाम सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठनों तक मामला पहुँचने के बाद वो पीड़िता से मिले और शिकायत दर्ज कराने के लिए उसे अपने साथ लेकर थाने गए। आखिरकार अब्दुल सलाम, इदरीस, आसिफ, आमिल, अब्दुल, शमशेर को नामजद करते हुए 2 अन्य अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई।

पुलिस ने इन सभी आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 493, 494, 419, 376, 313, 504 और 506 के अलावा पॉक्सो एक्ट व उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत मामला दर्ज कर लिया। वहीं, मुजफ्फरनगर पुलिस ने 8 अप्रैल को X पर बताया कि अब्दुल सलाम को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

‘राम मंदिर का न्योता ठुकराने वालों को सज़ा दीजिए’: महाराष्ट्र में बोले PM मोदी – जब मुझ पर बढ़ जाएँ गालियाँ तो समझ जाइए चुनाव का रुझान, मेरा हर पल देश के नाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (10 अप्रैल, 2024) को तमिलनाडु में ताबरतोड़ रैलियों के बाद महाराष्ट्र के रामटेक पहुँचे। वहाँ उन्होंने ‘मोदी-मोदी’ के नारों के बीच कहा कि आपका ये जोश, संदेश दे रहा है – फिर एक बार मोदी सरकार। पीएम मोदी ने जनता से कहा कि सिर्फ एक सांसद नहीं चुनना है, आपको अगले एक हजार साल के भारत की नींव मजबूत करने के लिए मतदान करना है। उन्होंने जनता से कहा कि आपको विकसित भारत के संकल्प के लिए मतदान करना है।

रामटेक में पीएम मोदी ने कहा कि आजकल जो मीडिया वाले चुनाव को लेकर लगातार सर्वे दिखा रहे हैं, इस सर्वे में NDA की बंपर जीत दिखाई दे रही है, लेकिन उनका मानना है कि जब मोदी पर गालियाँ बढ़ जाएँ तो रूझान समझ जाइए- फिर एक बार मोदी सरकार। बकौल पीएम मोदी, विपक्ष के पास गालियाँ देने के अलावा कोई आइडिया नहीं है, क्योंकि ये I.N.D.I गठबंधन वाले कभी गरीब को आगे बढ़ते नहीं देख सकते। लेकिन ये मोदी देश की जनता की सेवा के संकल्प से पीछे नहीं हटेगा।

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र में कहा कि I.N.D.I गठबंधन वाले सिर्फ देश को बाँटने में लगे हैं, क्योंकि इन्हें मालूम है कि देश की जनता एकजुट रहेगी तो इनकी राजनीति खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसी कारण वो महाराष्ट्र की जनता और देशवासियों से कह रहे हैं कि एकजुट होकर देश के नाम पर वोट दीजिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार रामनवमी पर अयोध्या में हमारे रामलला टेंट में नहीं, बल्कि भव्य मंदिर में दर्शन देंगे। 500 साल बाद ये पल आ रहा है, इसलिए रामटेक को, पूरे महाराष्ट्र को, पूरे देश को अद्भुत आनंद हो रहा है।

साथ ही पीएम मोदी ये बताना भी नहीं भूले कि I.N.D.I गठबंधन वाले प्राण प्रतिष्ठा के न्योता को भी ठुकरा दिया था, इसीलिए इस बार I.N.D.I गठबंधन वालों को उनकी पापों की सजा मिलनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास’ का हमारा मंत्र, संविधान की सच्ची भावना है, लेकिन परिवारवादी पार्टियों ने हमेशा संविधान की इस भावना का अपमान किया। बकौल पीएम मोदी, सामाजिक न्याय का झूठ बोलकर ये लोग अपने ही परिवार को आगे बढ़ाते रहे, इनके शासन में दशकों तक SC-ST-OBC परिवार मूल सुविधाओं से वंचित थे।

महाराष्ट्र के रामटेक में नरेंद्र मोदी ने कहा, “गरीबों की चिंता और उन्हें सुविधाएँ देने काम इस गरीब का बेटा मोदी ने किया है। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष कहते हैं कि मोदी जहाँ जाते हैं तो 370 की बात करते रहते हैं। वो कहते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाने से देश को फायदा क्या हुआ? ये भी कॉन्ग्रेस की दलित, आदिवासी, महिला विरोधी और वोटबैंक की राजनीति का जीता-जागता प्रमाण है। अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर में इन सभी वर्गों को पहली बार संवैधानिक अधिकार मिला है। कॉन्ग्रेस और I.N.D.I गठबंधन ने हिंदुस्तान के मुकुट को, वहाँ के लोगों को, वहाँ के महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा था।”

पीएम मोदी ने कहा कि बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर ने एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं को जो अधिकार दिए, वो जम्मू-कश्मीर के लोगों को नहीं दिए गए। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार ने करीब 600 करोड़ रुपए की दाल एमएसपी पर खरीदी थी, उनकी सरकार ने 10 सालों में करीब सवा लाख करोड़ रुपए दलहन और तिलहन किसानों को MSP के रुप में दिए हैं। उन्होंने कहा कि फर्क साफ दिखता है।

पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले 5 साल में हमें देश को, महाराष्ट्र को बहुत आगे ले जाना है। इसके लिए मैं गारंटी देता हूँ – आपका सपना, मोदी का संकल्प है। मेरा हर पल देश के नाम, हर पल आपके नाम।” इस रैली में पीएम मोदी को कई बार मोदी-मोदी के नारों के कारण भाषण बीच में रोकना पड़ा। इस दौरान एक बच्ची भगवान राम की वेशभूषा में आई थी, जिसे पीएम मोदी ने नोटिस किया और हाथ हिला कर अभिवादन स्वीकार किया।

न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए उमर खालिद के पक्ष में नैरेटिव चलाया जा रहा था: दिल्ली दंगों के सरगना की जमानत याचिका पर सुनवाई के वक्त सामने आई सच्चाई

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद की जमानत पर बुधवार (10 अप्रैल 2024) को सुनवाई हुई। इस दौरान सरकारी वकील ने कहा कि उमर खालिद के पक्ष में न्यायपालिका को प्रभावित करने के लिए मीडिया घरानों, एक्टिविस्ट और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) द्वारा मीडिया और सोशल मीडिया पर झूठी कहानी गढ़ी जा रही है।

इसके एक दिन पहले, अभियोजक ने स्पष्ट रूप से बताया था कि जब खालिद जेल में नहीं था तो वह एक कहानी स्थापित करने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग कर रहा था। जब दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत पर सुनवाई होती थी, तब वह सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था और अपने प्रभावशाली संपर्कों का उपयोग करके कहानी सेट करता था।

कोर्ट में 9 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (SPP) अमित प्रसाद ने उमर खालिद के साथ स्वरा भास्कर, सुशांत सिंह, ऑल्टन्यूज़, योगेन्द्र यादव, संजुक्ता बसु, पूका भट्ट जैसे कई प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच व्हाट्सएप चैट का खुलासा किया, ताकि कोर्ट को बताया जा सके वह न्यायपालिका को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए कैसे झूठी कहानी गढ़ने की साजिश रच रहा था।

उन्होंने द वायर की अरफा खानम शेरवानी के साथ एसक्यूआर इलियासी के साक्षात्कार का उदाहरण भी दिया था, जहाँ उन्होंने कई झूठे और भ्रामक बयान दिए थे। साक्षात्कार के दौरान इलियासी ने उमर खालिद की जमानत की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में 14 स्थगनों का उल्लेख किया, लेकिन आसानी से उस हिस्से को छोड़ दिया कि 14 में से सात स्थगन खालिद द्वारा माँगे गए थे।

वहीं, बुधवार (10 अप्रैल 2024) की सुनवाई में एसपीपी ने कहा कि जब उमर खालिद जेल से बाहर था तब भी वह अपने पक्ष में कहानी बदलने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों का इस्तेमाल कर रहा था। अब वह जेल में है, तब भी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सोशल मीडिया और मीडिया में न्यायपालिका को प्रभावित करने के लिए अन्य लोगों द्वारा झूठ का जहर घोला जा रहा है।

अभियोजक ने तीस्ता सीतलवाड, आकार पटेल, एमनेस्टी इंटरनेशनल, अज़हर खान, कौशिक राज और स्वाति चतुर्वेदी जैसे कई नाम लिए, जो उमर खालिद की झूठी कहानी को स्थापित करने में मदद कर रहे हैं। अभियोजक ने आगे उल्लेख किया कि ये व्यक्ति और संस्थाएँ उनके समर्थन में हैशटैग चलाते हैं और झूठी कहानी को पेश करते हैं।

‘भारतीय सभ्यता खुद को F%ck करे’: पति को बेचना चाहती है ये इंस्टाग्राम क्रिएटर, वीडियो में कहा – कम कपड़े पहन कर बुड्ढों को चिढ़ाने में मजा आता है

इंस्टाग्राम पर एक युवती है, जिसका नाम मन्नत T कुल्हारिया है। वो सोशल मीडिया पर खासी चर्चा का विषय बन रही है, क्योंकि उसने ‘पितृसत्ता’ को खत्म करने की आड़ में कुछ ऐसी बातें कही हैं जो शायद ही किसी को पसंद आए। एक वीडियो में वो अपने पति को ही बेचने की बातें कर रही है, जिस पर लोगों ने कहा कि अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को लेकर ऐसा कहे तो आम जनता की क्या प्रतिक्रिया होगी? वहीं एक वीडियो में वो अपनी दादी को ही भला-बुरा कह रही है।

मन्नत कुल्हारिया इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई एक रील में कहती है, “मेरे को पता है क्या समझ में आया। मैं न जैसे, जैसे ‘जुदाई’ फिल्म में श्रीदेवी अपने अनिल कपूर को बेच देती है, उसी तरह मैं भी बेच आऊँगी अपने पति को। खूब पैसे मिलेंगे। गाइज, इंतजाम हो गया है मेरी ज़िन्दगी का – पति बेच आऊँगी मैं।” इस दौरान उसकी एक दोस्त बगल में धीमे-धीमे गाली भी बकती रहती है। वो कहती है कि आधे-आधे पैसे कर लेंगे, वैसे भी उसके लिए तो बोली लगेगी।

वहीं एक अन्य वीडियो में इंस्टाग्राम पर सक्रिय मन्नत T कुल्हारिया कहती है, “भाई, मैंने एक चीज नोटिस की है। मुझे पुरानी सोच वाले, रूढ़िवादी सोच वाले बुड्ढों को अपनी ड्रेसिंग सेन्स से चिढ़ाने में बड़े मजे आते हैं भाई। जैसे, मेरी दादी चिढ़ गईं। वो कहती हैं – हमारी भारतीय सभ्यता, पता न क्या फ़ालतू बातें हैं। दिमाग खराब कर दिया भाई बुड्ढी ने। मैं वही पहनूँगी जो मैं पहनना चाहती हूँ। क्या बोलोगे? मैं अच्छी दिखती हूँ। भारतीय सभ्यता खुद को फ% करे।”

इस वीडियो में मन्नत T कुल्हारिया मिडिल फिंगर, यानी अपने हाथ की बीच की उँगली भी दिखाती है। वीडियो के अंत में वो ‘माँ चु%ओ’ की गाली भी देती है। वो कहती है कि वो अपना ध्यान रखने के लिए पर्याप्त है। मन्नत कुल्हारिया के इंस्टाग्राम पर 72,000 के करीब फॉलोवर्स हैं। उसने 75 तस्वीरें/वीडियो अपने हैंडल से डाल रखे हैं। उसने अपने इंस्टाग्राम के बायो में खुद को ‘निहायत ही बदतमीज और बकचो$’ बताया है। अब उसकी सोच को लेकर सोशल मीडिया में उसकी आलोचना हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर त्वरित सुनवाई से किया इनकार, CJI बोले – ईमेल भेजो: हफ्ते में 5 बार लीगल टीम से बैठक की माँग भी रद्द

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को न्यायपालिका से एक बार फिर से झटका मिला है। शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल की माँग को ED-CBI मामलों की स्पेशल जज कावेरी बावेजा की अदालत ने खारिज कर दिया। असल में अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि उन्हें सप्ताह में 5 बार उनकी लीगल टीम से मिलने का मौका दिया जाए। फ़िलहाल वो हफ्ते में 2 बार ऐसा कर सकते हैं। लेकिन, कोर्ट ने उनकी इस माँग को सिरे से अस्वीकार कर दिया है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस बात को लेकर अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रहा कि वो सप्ताह में 2 बार अपनी लीगल टीम के साथ बैठक का इस्तेमाल सिर्फ सुनवाइयों के संबंध में चर्चा करने के लिए कर रहा है। जाँच एजेंसियों द्वारा दी गई रिपोर्ट्स से पता चला है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने एक वकील के माध्यम से दिल्ली के जल मंत्रालय के लिए कुछ निर्देश भेजवाए, जिनके आधार पर सरकार ने कुछ फैसले लिए। हालाँकि, उस वकील का नाम नहीं खोला गया है।

ये सब लीगल मीटिंग की आड़ में किया गया। जज कावेरी बावेजा ने माना कि अरविंद केजरीवाल ने सप्ताह में लीगल टीम के साथ 2 बार बैठक का इस्तेमाल सुनवाइयों को लेकर चर्चा की बजाए अन्य चीजों के लिए किया। अरविंद केजरीवाल ने 30-35 मामले लंबित होने की बात करते हुए कहा था कि उन्हें सप्ताह में 5 बार अपनी लीगल टीम से मिलना है, हालाँकि, कोर्ट ने ये नहीं माना कि 2 बैठकें अपर्याप्त हैं। कोर्ट ने उनकी इस माँग को सनक भरा भी करार दिया।

कोर्ट ने कहा कि अगर वो इस माँग को मान लेता है तो जेल में बंद अन्य कैदी जिनके ज्यादा मामले लंबित हैं वो हफ्ते में 5 दिन से भी ज्यादा बार अपनी लीगल टीम के साथ बैठक की माँग करने लगेंगे। जज कावेरी बावेजा ने अमानतुल्लाह खान के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि कोई जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं है। बताते चलें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी ED द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी को अवैध ठहराने से इनकार कर दिया, जिसके खिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए।

मुख्य न्यायधीश DY चंद्रचूड़ के सामने बुधवार (10 अप्रैल, 2024) को ये मामला लाया गया। कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बतौर अधिवक्ता पेश होते हुए कहा कि अविश्वसनीय दस्तावेजों के आधार पर दिल्ली CM को गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, CJI ने अर्जेन्ट सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आप हमें ईमेल भेजिए, हम इसे देखेंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि एक मुख्यमंत्री के लिए अलग से नियम नहीं हो सकता, अरविंद केजरीवाल शराब नीति बनाने में हिस्सेदार थे, उन्होंने घूस माँगा और अपराध से हुई आय का इस्तेमाल भी किया।

CAA पर गुमराह कर रहीं ममता बनर्जी, नागरिकता के लिए खुलकर आवेदन करें शरणार्थी: बंगाल में बोले अमित शाह – ये संदेशखाली के दोषियों को दंड देने का चुनाव

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रचार के लिए गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल पहुँचे। उन्होंने बालुरखाट में जनसभा को संबोधित किया और ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी शरणार्थियों को डरा रही हैं और उन्हें गलत जानकारी दे रही हैं। हकीकत ये है कि सीएए कानून से सभी को नागरिकता मिलेगी। इस दौरान बालुरघाट की जनता से कहा कि आप लोग ईवीएम का बटन इतनी तेजी से दबाना कि बटन बालुरघाट में दबे और करंट कोलकाता में ममता बनर्जी को लगे।

कोलकाता में लगना चाहिए करंट

दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट में जनसभा को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “माताओं बहनों से कहने आया हूँ कि ये संदेशखाली वालों को दंड देने का चुनाव है। आप कमल के निशान पर बटन दबाएँगे क्या? बटन तो जरूर दबाना, लेकिन इतनी जोर से दबाना कि बटन बालुरघाट में दबे और करंट कोलकाता में ममता दीदी को लगे।”

जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस, टीएमसी और कम्युनिस्ट पार्टी वाले 70 वर्षों से राम मंदिर को लटका रहे थे, अटका रहे थे, भटका रहे थे। मोदी सरकार के दौरान राम मंदिर मुद्दे का फैसला भी आ गया, भूमि पूजन भी हो गया और राम मंदिर का निर्माण भी हो गया। 500 साल बाद, रामलला अपने भव्य मंदिर में रामनवमी को अपना जन्मदिन मनाएँगे।

लोगों को गुमराह कर रही हैं ममता बनर्जी

गृहमंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा, “हमने सीएए का कानून पारित किया है। ममता दीदी बंगाल के लोगों को गुमराह कर रही हैं। ये कह रही हैं कि अगर आपने एप्लीकेशन दिया तो आपकी नागरिकता चली जाएगी। मैं आज आपसे कहने आया हूँ। बिना डरे जितने भी शरणार्थीं हैं, एप्लीकेशन भरें, सभी को नागरिकता दी जाएगी। ममता दीदी, आप चाहे जितना भी विरोध करें, हम सभी शरणार्थियों को नागरिकता देंगे। ये हमारा वादा है।”

उन्होंने आगे कहा, “ये मोदी सरकार का कानून है, जिसे कोई बदल नहीं सकता। वो (ममता बनर्जी) रोहिंग्याओं का रेड कारपेट बिछाकर स्वागत करती हैं, और असली शरणार्थियों को मिसलीड करती हैं। बंगाल में आए सभी शरणार्थियों को बिना डर के नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए।”

एनआईए से धमाकों के आरोपितों को बचाना चाहती हैं ममता दीदी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “2022 में भूपतिनगर में एक बम धमाका हुआ था, जिसमें 3 लोग मारे गए थे। मुझे एक बात बताएँ कि बम धमाका करने वालों को मजबूती से जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहिए या नहीं? हाईकोर्ट ने इसकी जाँच एनआईए को सौंपी और ममता दीदी एनआईए के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपियों को बचाना चाहती हैं। पूरा देश विकास की राह पर आगे बढ़ गया है लेकिन हमारा बंगाल पिछड़ गया है।” उन्होंने आगे कहा, “ममता दीदी, आप एक महिला मुख्यमंत्री हैं… आप संदेशखाली जैसी शर्मनाक घटना पर भी राजनीति कर रही हैं। सालों तक आपकी नाक के नीचे महिलाओं पर अत्याचार होता रहा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडे अत्याचार करते रहे। जब ED आरोपियों को गिरफ्तार करने गई तो ईडी पर पथराव हुआ… बंगाल की महिलाएँ देख रही हैं कि आप संदेशखाली घटना के आरोपितों के साथ हैं…”

इस दौरान अमित शाह ने कहा कि देशभर के गरीबों का 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का खर्चा मोदी जी उठा रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ममता दीदी ने यहाँ आयुष्मान योजना को लागू ही नहीं किया है। एक बार ममता सरकार को उखाड़ दो, सभी का 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त हो जाएगा।

दो पड़ोसियों के बीच विवाद, शिकार बनी 3 साल की बच्ची: सायरा बानो ने ईद से पहले रफीकन का कोख उजाड़ा, गला घोंटकर मारा फिर बोरे में भर फेंक दी लाश

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में ईद से पहले 3 साल की एक मुस्लिम बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है। हत्या का आरोप मृतका की पड़ोसन सायरा बानो पर लगा है। पीड़िता और और अरोपित एक ही समुदाय से हैं। हत्या की वजह मृतका के अब्बा और आरोपित के बीच दोस्ताना संबंधों से दोनों परिवारों के बीच उपजी आपसी मनमुटाव बताया जा रहा है।

पुलिस ने आरोपित महिला को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, बच्ची रविवार (7 अप्रैल 2024) से लापता थी और उसका शव 2 दिन बाद 9 अप्रैल को बरामद हुआ। यह मामला रामपुर जिले के थाना क्षेत्र विलासपुर का है। यहाँ 7 अप्रैल को बच्ची के अब्बा दानिश ने पुलिस में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

शिकायत में उसने कहा कि रविवार को उसकी 3 साल की बेटी अनायजा दोपहर 11 बजे दुकान में टॉफी लेने गई थी। वह घर लौटी, लेकिन 12:30 बजे वह अचानक घर से गायब हो गई। काफी खोजबीन के बाद पीड़िता नहीं मिली। बच्ची के अब्बा ने तब किसी अज्ञात व्यक्ति पर लड़की को बहला-फुसला कर साथ ले जाने की आशंका जताई थी।

शिकायत पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 के तहत केस दर्ज करके बच्ची की तलाश शुरू कर दी थी। इस बीच मंगलवार (9 अप्रैल) की सुबह बच्ची का शव उसके घर के बगल वाली खाली प्लॉट में पड़ा मिला। लाश को बोरे में बाँधकर फेंका गया था। बोरे से बच्ची के कुछ अंग बाहर निकल आए थे। लाश पर दाँतों से काटे जाने के निशान भी मौजूद थे।

शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने CCTV फुटेज सहित कई अन्य सबूत जुटाए। इसके आधार पर पुलिस ने 10 अप्रैल 2024 को इसी गाँव की रहने वाली 20 वर्षीय मुस्लिम लड़की शायरा बानो को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। शुरू में उसने टाल-मटोल करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती के बाद उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

आरोपित सायरा बानो ने बताया कि उसके और बच्ची के अब्बा के बीच दोस्ताना संबंध है। इस वजह से मृतका की माँ से उसका मनमुटाव चल रहा था। इस संबंध को लेकर मृतक बच्ची की माँ के साथ उसका वाद-विवाद भी हो चुका है। घटना के दिन मृतक बच्ची सायरा बानो के घर टॉफी लेने गई थी। इस दौरान वह महिला बच्ची को अपने साथ लेकर छत पर चली गई।

छत लेकर जाकर सायरा बानो ने तीन साल की इस मासूम बच्ची का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने शव का हाथ बाँध कर उसे बोर में भर दिया। बाद में सायरा बानो ने शव को अपने घर के पीछे खाली पड़े प्लॉट में फेंक दिया। पुलिस ने हत्या की वजह आरोपित महिला सायरा बानो की जलन और घृणा बताया है।

मृतका के शव पर मिले दाँतों के निशानों को लेकर रामपुर के पुलिस अधीक्षक ने आशंका जताई है कि वो किसी जानवर द्वारा शव को खाए जाने के निशान हो सकते हैं। हालाँकि, इस बावत उन्होंने जाँच जारी होने की बात भी कही। सायरा बानो शादीशुदा है और उसके शौहर का नाम सगीर अहमद है। पुलिस के मुताबिक, घटना को अकेले सायरा बानो ने ही अंजाम दिया है।

अक्साई चीन पर जो थे नेहरू के विचार, कच्चातिवु पर दिग्गी राजा ने वही दोहराया: देश की अखंडता को ठेंगा दिखाती कॉन्ग्रेस, मछुआरों के मुद्दे इनके लिए ‘बेकार की बातें’

भारत-चीन के बीच युद्ध भले ही अक्टूबर 1962 में शुरू हुआ, लेकिन इसकी पटकथा काफी पहले से लिखी जानी शुरू हो गई थी। लद्दाख में 1959 में भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसा हुई थी। चीन ने प्रस्ताव रखा था कि मैकमोहन लाइन के दोनों तरफ 20 किलोमीटर तक दोनों देशों की सशस्त्र जवान पीछे जाएँ, जिसे भारत ने नकार दिया था। उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जो बयान दिया था, दिग्विजय सिंह ने अपने नए बयान से उसी विरासत को आगे बढ़ाया है।

दिग्विजय सिंह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, लगातार 10 साल मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। कुछ दिनों पहले कच्चातिवु द्वीप को लेकर विवाद सामने आया था। RTI से खुलासा हुआ था कि कैसे इंदिरा गाँधी के काल में कॉन्ग्रेस सरकार ने इस द्वीप को श्रीलंका को दे दिया था। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाया। दिग्विजय सिंह ने इस पर कहा है कि वहाँ कोई नहीं रहता है। ये कॉन्ग्रेस की उसी संवेदनहीनता का परिचायक है, जिसका पालन नेहरू से लेकर दिग्विजय तक उसके नेता करते रहे हैं।

इससे पता चलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी भारत की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति जरा सी भी गंभीर नहीं है। मोदी सरकार में उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास से लेकर जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त कर लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने तक, या फिर पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में BSF को अधिक शक्ति देने तक, मोदी सरकार लगातार भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने में लगी हुई है। वहीं कॉन्ग्रेस के समय कभी पाकिस्तान, कभी चीन तो कभी श्रीलंका तक ने भारत की जमीनें हड़पीं।

तमिलनाडु में इस बार पूरा जोर लगा रही भाजपा

तमिलनाडु में इस बार भाजपा जोर-शोर से मेहनत कर रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सालेम में रैली की, जहाँ वो मुस्लिमों द्वारा घर में घुस कर 2013 में भाजपा नेता ऑडिटर रमेश की हत्या पर श्रद्धांजलि देते हुए भावुक हो गए, फिर उन्होंने राजधानी चेन्नई में भव्य रोडशो किया। रोडशो के अगले ही दिन वेल्लोर और मेट्टुपलायम में सभाएँ की। पीएम मोदी ने नई संसद में चोल राजवंश के राजदंड ‘सेंगोल’ को भी स्थापित कर के तमिलनाडु की संस्कृति को वैश्विक पहचान दी है।

इसमें बहुत कुछ नया नहीं है, क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्टूबर 2019 में भारत आए थे तो पीएम मोदी के साथ उन्होंने मल्ल्पुरम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। उत्तर प्रदेश में काशी-तमिल संगमम और गुजरात में सौराष्ट्र-तमिल संगमम भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही दिमाग की उपज है जो तमिल संस्कृति को भारत के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ता है। तमिलनाडु की 9 क्षेत्रीय (DMK/AIADMK नहीं) दलों से गठबंधन कर भाजपा ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है।

पार्टी वहाँ कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती, यही कारण है कि सेन्ट्रल चेन्नई से तमिलसाई सुन्दरराजन को राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर लड़ाया जा रहा है। और हाँ, इस बार राज्य में अन्नामलाई फैक्टर भी है। IPS अधिकारी रहे अन्नामलाई राज्य में भाजपा के लिए जम कर पसीना बहा रहे हैं और खुद कोयम्बटूर से चुनाव लड़ रहे हैं। दरअसल, उन्होंने ही एक RTI दायर की थी। उससे ही खुलासा हुआ कि कॉन्ग्रेस राज में कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को दे दिया गया था।

कच्चातिवु द्वीप और भारतीय मछुआरों की समस्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाते हुए बताया था कि कैसे भारतीय मछुआरे अब उस द्वीप के आसपास जाते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। 1974 में श्रीलंका और इंदिरा गाँधी सरकार के बीच हुए करार के तहत इस द्वीप को श्रीलंका को दे दिया गया था। भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमाओं के विवाद के समाधान की आड़ में ये सब किया गया था। केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर भी बता चुके हैं कि कैसे पिछले 2 दशक में न सिर्फ 6184 भारतीय मछुआरों को हिरासत में लिया है, बल्कि 1175 नावों को भी जब्त किया है।

भारत में मछली पकड़ने की तकनीक है, पानी में जाल डाला जाता है और फिर मछलियाँ उसमें आ जाती हैं और पानी छन जाता है। हालाँकि, 2017 में श्रीलंका ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। भारतीय मछुआरे समुद्री संसाधनों को खत्म कर रहे हैं, ये आरोप लगाया गया। कहा गया कि इससे समुद्री जीवन खत्म हो रहा है। श्रीलंका भी कच्चातिवु द्वीप का कुछ खास इस्तेमाल नहीं कर रहा है। श्रीलंका के थिंक-टैंक ‘PathFinder’ का मानना है कि भारत में चुनावी लाभ के लिए ये मुद्दा उठाया गया है।

हालाँकि, मछुआरों की गिरफ़्तारी के आँकड़े इसकी पुष्टि करते हैं कि ये द्वीप अगर भारत में रहता तो हमारे मछुआरों को फायदा होता। इंदिरा गाँधी ने दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तों की दुहाई देते हुए कहा था कि इस आइलैंड का मुद्दा उठाना ठीक नहीं है। आपको पता है उनका क्या मानना था? इंदिरा गाँधी इस द्वीप को केवल एक पत्थर मानती थीं, जिसका कोई रणनीतिक महत्व नहीं है। हालाँकि, उस समय भारतीय मछुआरों की इसकी इजाजत दी गई थी कि वो इस द्वीप पर रुक कर अपने जाल को धूप में सूखा सकें, यहाँ आराम कर सकें।

लेकिन, 1976 में एक और करार हुआ और भारतीय मछुआरों का ये अधिकार भी जाता रहा। भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के तलाईमन्नार के बीच की दूरी मात्र 12 किलोमीटर है, ऐसे में मछुआरों के लिए नया संकट खड़ा हो गया। सदियों से उनका जीवन-यापन इसी पर निर्भर था। श्रीलंका में जब गृह युद्ध हुआ तब वहाँ की नौसेना ने नावों पर बिना किसी भेदभाव के वार किया, जिसका निशाना भारतीय मछुआरे भी बने। बीच में वहाँ के उग्रवादी संगठन LTTE और श्रीलंकाई मछुआरों ने भी भारतीय मछुआरों पर हमला किया।

दिग्विजय सिंह का बयान, नेहरू वाली विरासत को ही बढ़ा रहे आगे

दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के राजगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वो अपने क्षेत्र में ‘वादा निभाओ यात्रा’ निकाल रहे हैं। दिग्विजय सिंह 1984 और 1991 में इस सीट से जीत चुके हैं। इसी सीट के अंतर्गत आने वाले राघोगढ़ से 4 बार MLA रहे हैं। पिछले 3 बार से उनके बेटे जयवर्धन यहाँ से विधायक हैं। चौचौड़ा से भी वो एक बार विधायक रहे हैं। फ़िलहाल वो लगातार दूसरी बार राज्यसभा सांसद हैं। उनके भाई लक्ष्मण सिंह भी चाचौड़ा से MLA हैं, राघोगढ़ से 2 बार विधायक रहे हैं और इसी राजगढ़ सीट से लगातार 5 चुनाव जीत चुके हैं।

दिग्विजय सिंह गाँधी परिवार के करीबी सलाहकारों में से भी एक रहे हैं। कच्चातिवु वाले मुद्दे पर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “एक बात सुन लीजिए। उस द्वीप पर कोई रहता है क्या? मैं ये पूछना चाहता हूँ।” जब मछुआरों की समस्या के बारे में उनसे बात की गई तो वो कहने लगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेकार की बाते कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे नेहरू वाली मानसिकता करार दिया, जब उन्होंने अक्साई चीन को लेकर कहा था कि यहाँ घास का एक तिनका भी नहीं उगता।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस नेता देश की बजाए एक परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कहते हैं कि जम्मू कश्मीर की चर्चा राजस्थान में नहीं होनी चाहिए, राहुल गाँधी और A राजा कहते हैं कि भारत देश नहीं बल्कि अलग-अलग राज्यों का समूह है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस के कृत्य में DMK द्वारा साथ देने का भी आरोप लगाया। 1974 में तमिलनाडु में करूणानिधि की ही सरकार थी।

जवाहरलाल नेहरू ने अक्साई चीन को लेकर दिखाई थी यही मानसिकता

जवाहरलाल नेहरू ने अक्साई चीन पर चीन के कब्जे को सही ठहराया था। नेहरू चीन को लेकर आकर्षित थे, उन्होंने वहाँ का दौरा कर के ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा भी दिया और UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) की सीट तक सौंप दी, लेकिन बदले में मिला तो युद्ध और अतिक्रमण। चीन ने बार-बार नेहरू का भी अपमान किया, उन्हें अंग्रेजों-अमेरिका का नौकर तक बता दिया। भूटान और तिब्बत को लेकर चीन लगातार भारत को धमकी देता रहा, कॉन्ग्रेस शासन नज़रअंदाज़ करता रहा सब कुछ।

8 दिसंबर, 1959 को जवाहरलाल नेहरू ने संसद में कहा था कि भारत की सीमाओं को लेकर खुद वो निश्चित नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि भारत की सेना हाथ पर हाथ धरे बैठी थी। 1957 की शुरुआत में कुमाऊँ रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल RS बसेरा और हवलदार दीवान सिंह ने याक चराने वालों के समूह में शामिल होकर पता लगाया कि चीन अक्साई चीन में सड़कें बनवा रहा है। इस गुप्त रिपोर्ट के टेबल पर आने के बावजूद जवाहरलाल नेहरू निश्चिंत बने रहे।

तिब्बत को लेकर भी भारत ने चीन को एकदम से आक्रामक रवैया अपनाने दिया। तिब्बत ने नेहरू को ‘चोग्याल’ (राजा) के रूप में देखा था और उसे लगता था कि वो उसकी समस्याएँ सुलझाएँगे। उस समय भारतीय वायुसेना को भी चीन की वायुसेना से मजबूत माना जाता था। नई सड़कें बना कर चीनी सेना भारतीय सीमा में तेज़ी से घुस सकती थी। इतिहास बताता है कि JL नेहरू से लेकर दिग्गी राजा तक, कॉन्ग्रेस देश की अखंडता के प्रति गंभीर नहीं रही है और उसने हमारी सीमाओं का नुकसान ही किया है।

मोदी सरकार में सुरक्षित हुईं सीमाएँ, उत्तर-पूर्व से लेकर कश्मीर तक काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से कहते रहे हैं कि भारत की सीमा पर स्थित गाँवों को ‘अंतिम गाँव’ कहने की बजाए उन्हें देश का ‘पहला गाँव’ कहा जाना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में भारत स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर धड़ाधड़ अत्याधुनिक सड़कें बना रहा है। LGG-डामटेंग-यांग्त्से मार्ग हो या फिर सेला टनल, निर्माण कार्य जारी है। भारत-तिब्बत-चीन-म्यांमार सीमा पर 1748 किलोमीटर के 2 लेन हाइवे बनाने के लिए 6000 करोड़ रुपए हाल ही में आवंटित किए गए हैं।

अगस्त 2023 में सामने आया था कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 507 किलोमीटर, लद्दाख में 553 किलोमीटर और उत्तराखंड में 343 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया है। कई ऐसे टनल बनाए जा रहे हैं जो हर मौसम में आवागमन के लिए चालू रहें। जिन राज्यों की सीमाएँ दूसरे देशों से मिलती हैं, वहाँ BSF को गिरफ़्तारी, जब्ती और तालशी के अधिकार का दायरा बढ़ा कर 50 किलोमीटर कर दिया गया। कॉन्ग्रेस ने इसका भी विरोध किया था।

एक ‘राहुल जी’ की नजर को बेताब, दूजी टिकट की आस में बौराई… प्रज्ञा मिश्रा और नेहा सिंह राठौर ई का बा

सोशल मीडिया के समय में प्रोफेशन को आड़ बनाकर अपना प्रोपगेंडा चलाना या कुंठा निकालना कोई नया नहीं रहा.. इस बात को समझने के लिए दो लोगों का उदाहरण लिया जा सकता है। पहली खुद को पत्रकार बताने वाली प्रज्ञा मिश्रा और दूसरी खुद को लोकगायिका कहने वाली नेहा सिंह राठौड़।

इनकी फैन फॉलोइंग देखकर आपको समझ आएगा कि ये अपने-अपने प्रोफेशन के नाम पर आज जनता के बीच इतनी मशहूर हो गई हैं कि इन पर चर्चा हो, लेकिन टाइमलाइन देखने पर पता चलेगा कि ये अपने असली काम को छोड़कर सिर्फ जनता के बीच चुनिंदा पार्टियों का नैरेटिव बनाने में और अपना प्रचार करने में व्यस्त हैं।

प्रज्ञा मिश्रा की पत्रकारिता का अर्थ सिर्फ मोदी का विरोध

प्रज्ञा मिश्रा पत्रकार बनकर जब कैमरे पर आती हैं तो उनसे अपेक्षा की जाती होगी कि वो निष्पक्ष होकर रिपोर्टिंग करें, चाहे वो किसी पार्टी के अच्छे काम पर हो या फिर बुरे। हालाँकि असल में ऐसा होता नहीं है।

जो प्रज्ञा राहुल गाँधी की एक झलक दिखने पर जोर-जोर से फैन्स की तरह चिल्लाती हैं, वही प्रज्ञा जब माइक उठाकर ग्राउंड पर उतरती हैं जो उन्हें जनता के रूप में सिर्फ पीएम मोदी की आलोचना करने वाले लोग ही चाहिए होते हैं। वो जितना चिल्लाकर ये पीएम मोदी के कार्यों को बताने वाली मीडिया संस्थानों पर सवाल उठाती हैं, उतनी ही वह चुप तब हो जाती हैं जब प्रियंका गाँधी उनके कंधे पर हाथ रख दें।

उनके चैनल को देखने पर पता चलेगा कि वो या तो ग्राउंड पर मोदी विरोधियों का पक्ष दमदार ढंग से रखती हैं या फिर अगर कोई मोदी समर्थक मिल जाए तो उसे अंधभक्त कह देती हैं। उनके इस रवैये से तो यही साफ होता है कि उन्हें हर हाल में सिर्फ मोदी सरकार का विरोध ही करना है चाहे जनता उनके पक्ष में कितना ही बोल ले।

अभी 24 घंटे पहले उलटा चश्मा पर डाली गई प्रज्ञा मिश्रा की वीडियो का उदाहरण देखिए। इसमें भी प्रज्ञा पत्रकार होने की बजाय विश्लेषक बनी हुई हैं। एक ऐसी विश्लेषक जो समझा रही हैं कि पीएम मोदी द्वारा किए गए 400 पार का दावा नहीं किया जाना चाहिए था क्योंकि क्रिकेटर भी जब खेलता है तो रन पहले नहीं बताता, सिर्फ अच्छा खेलता है…मगर मोदी जी तो पहले से ही अपने ‘रन’ बता रहे हैं।

प्रज्ञा मिश्रा के चैनल पर डली हालिया वीडियो का कंटेंट

प्रज्ञा मिश्रा की खास बात यह है कि वो ऐसा ज्ञान पीएम मोदी के लिए ही देते हुए मिलती हैं। उनके चैनल पर बाकी पार्टियों से जुड़ी वीडियोज को अगर आप देखेंगे तो पता चलेगा कि जिन प्रज्ञा को पीएम मोदी द्वारा अपना प्रचार किए जाने से समस्या है।

वहीं प्रज्ञा विपक्ष की पार्टियों के लिए माहौल अपने चैनल से बना रही हैं। चैनल पर पीएम मोदी के साथ-साथ समर्थकों को भी नेगेटिव छवि में दिखाने का प्रयास चल रहा है और समाजवादी पार्टी से लेकर आम आदमी पार्टी के समर्थकों को मोदी सरकार के विरोध में आवाज उठाने के लिए मंच दिया जा रहा है।

नेहा सिंह राठौड़ की गायिकी में राजनीति का छौंक

इसी तरह नेहा सिंह राठौड़… अगर आप नेहा को सोशल मीडिया के माध्यम से जानते हैं तो आपको याद होगा कि इन्होंने ‘यूपी में का बा’ जैसे गीतों से अपनी पहचान बनाई थी। वीडियो में भाजपा सरकार की आलोचना थी तो विपक्षियों ने इसे इतना वायरल किया था कि धीरे-धीरे नेहा राठौड़ का विपक्ष फेवरेट होता गया।

व्यूज और लाइक ने उन्हें समझा दिया कि सामान्य गीतों से सिर्फ चंद लोगों तक पहुँचा जाएगा लेकिन लोकगायिकी में राजनीति का तड़का लगाकर अगर वीडियो बनाई तो पहचान और रीच बड़े-बड़े नेताओं तक जाएगी। नतीजतन अब अगर उनका यूट्यूब चैनल आप खोलकर देखेंगे तो समझ आएगा कि उनकी लोकगायिकी अब सिर्फ मोदी विरोधी गीतों में बदलकर रह गई हैं।

नेहा की राजनीतिक महत्वकांक्षाएँ पिछले दिनों एक इंटरव्यू के जरिए भी देखने को मिली थीं जब उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि अगर उन्हें कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ने का मौका देगी तो वो क्या करेंगी, नेहा ने न केवल इस बात का जवाब उत्सुकता के साथ दिया था बल्कि जब खबर आई थी मनोज तिवारी के खिलाफ वह कॉन्ग्रेस प्रत्याशी बनाई जा सकती हैं उस पर भी उन्होंने कहा था कि उन्हें ये सब सुनकर अच्छा लग रहा है। इसके बाद आप देखेंगे कि अचानक से पिछले कुछ दिनों में नेहा ने प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए कई वीडियोज डाली हैं।

नेहा सिंह राठौड़ के चैनल पर डली हालिया वीडियोज का कंटेंट

नेहा राठौड़ और प्रज्ञा मिश्रा के लिए अब मोदी विरोधी होना ही उनके प्रोफेशन को जस्टिफाई करना रह गया है। अगर वो ऐसा नहीं करते और सिर्फ पत्रकारिता और लोकगायिकी पर ही ईमानदारी से आगे बढ़ते हैं तो या तो उनकी फैन फॉलोइंग कम हो जाएगी या उनकी प्रासंगिकता। दोनों को मालूम है कि प्रोपगेंडा का छौंक ही उनके करियर को महका सकता है, यही वजह है कि चुनावों से पहले वो इसमें कोई कमी नहीं होने दे रहीं।

वैसे मोदी और हिंदू विरोध से दाल-रोटी का जुगाड़ करने वाली प्रज्ञा मिश्रा और नेहा सिंह राठौर अकेली नहीं हैं। पर इनकी प्रोपेगेंडाबाजी से भी खतरनाक उनकी वह मानसिकता जिसमें अपनी आलोचना होने पर दोनों महिला वाला विक्टिम कार्ड प्ले करने लगती हैं। इससे ये दोनों हर उस महिला को कठघरे में खड़ा कर देती हैं जो सशक्त हैं, जो सशक्त भारत के स्वप्न की सहभागी बनना चाहती हैं। जिन्हें खुले में शौच से स्वतंत्रता मिली है। जो अब रसोई में धुआँ पीने को अभिशप्त नहीं हैं।

भारत ने नहीं, चीन ने की थी कनाडा के चुनावों में दखलंदाजी: अपनी ही एजेंसी ने पकड़ा झूठ, अब पीएम जस्टिन ट्रूडो की होगी पेशी

कनाडा के चुनावों में भारत द्वारा हस्तक्षेप किया गया, ऐसा कनाडा की सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया था, जिसके बाद कनाडा की सरकार ने इन आरोपों की जाँच कराई। इन आरोपों की आंतरिक जाँच के बाद पता चला है कि भारत ने कनाडा के अंदरुनी मामलों में कोई रुचि नहीं दिखाई है। वहीं, जाँच में चीन का नाम जरूर सामने आ गया है। पता चला है कि साल 2019 और 2021 में कनाडा के चुनावों में चीन ने हस्तक्षेप किया था और काफी पैसा भी खर्च किया था। यही नहीं, चीनी ने चीनी मूल के लोगों पर ट्रूडो के पक्ष में वोटिंग के लिए दबाव भी डाला था।

कुछ समय पहले कनाडा के सरकारी मीडिया सीबीसी ने कनाडा की सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस के दावे से कहा था कि भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने 2019 और 2021 में कनाडा के संघीय चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालाँकि भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कनाडा के चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों से जुड़ी आधिकारिक जाँच में ये बात सामने आई है कि हस्तक्षेप करने वाला देश भारत नहीं, बल्कि चीन है। कनाडा की इंटेलिजेंस एजेंसी ने पाया कि चीन ने पिछले दो चुनावों में हस्तक्षेप किया था।

बता दें कि 2019 और 2021 के जिन चुनावों की बात हो रही है उसमें पीएम जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी को जीत हासिल हुई थी। जब से चीन की इस चुनाव में भूमिका की खबर आई है, तब से कनाडा में विपक्ष नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स से नाखुश विपक्षी विधायकों के दबाव में ट्रूडो ने विदेशी हस्तक्षेप की जाँच के लिए एक आयोग का गठन किया है।

ट्रूडो ने बनाया आयोग, अब खुद की होगी पेशी

ट्रूडो ने भारत पर आरोपों की जाँच के लिए जिस आयोग का गठन किया था, अब उसी के सामने उनकी पेशी होगी और अपना बयान दर्ज कराना होगा। गौरतलब है कि इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय से जब सवाल पूछा गया था, तो भारत ने कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने फरवरी माह में कहा था, “हमने कनाडाई आयोग की जाँच से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं। हम कनाडा के चुनावों में भारतीय हस्तक्षेप के आधारहीन आरोपों को दृढ़ता से खारिज करते हैं।”

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से भारत और कनाडा के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। यहाँ तक कि दोनों देशों ने वीजा सेवाओं को भी बंद कर दिया था। हालाँकि अब धीरे-धीरे दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों को सामान्य की तरफ ले जाने का प्रयास किया है, साथ ही दोनों ही देशों में दूतावास पूरी क्षमता के साथ काम करने लगे हैं।