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लालकृष्ण आडवाणी के घर जाकर उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, स्वास्थ्य कारणों से फैसला: 83 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में हैं BJP के वयोवृद्ध नेता

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर जाकर उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करेंगी। वयोवृद्ध भाजपा नेता के स्वास्थ्य को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। लालकृष्ण आडवाणी कई महीनों से किसी सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी वो स्वास्थ्य कारणों से ही अयोध्या नहीं जा पाए थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उनके घर पर ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें ‘भारत रत्न’ से नवाजेंगी।

इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा भी वहाँ मौजूद रहेंगे। इसके लिए रविवार (31 मार्च, 2024) की तारीख़ मुक़र्रर की गई है। लालकृष्ण आडवाणी मात्र 14 वर्षों की उम्र में 1941 में ही RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल हो गए थे। 1951 में उन्हें जनसंघ ने राजस्थान में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी और 6 वर्षों तक घूम-घूम कर उन्होंने जनता से संवाद बनाया। 1967 में दिल्ली महानगरपालिका परिषद का अध्यक्ष चुने जाने के साथ उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा।

लालकृष्ण आडवाणी का सार्वजनिक जीवन 7 दशकों से भी अधिक का रहा है। 96 वर्ष की उम्र में भी वो लिखने-पढ़ने में रुचि रखते हैं। लालकृष्ण आडवाणी लोकसभा में गाँधीनगर और नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं उन्हें दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी चुना गया था। 3 बार उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सँभाली। जब उन्हें ‘भारत रत्न’ दिए जाने की घोषणा हुई, तब वो काफी भावुक हो गए थे और उनकी आँखों में आँसू थे।

वहीं 29 मार्च को कर्पूरी ठाकुर, PV नरसिम्हा राव, MS स्वामीनाथन और चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। उनके परिवार इन दिवंगत हस्तियों की जगह ये सम्मान ग्रहण करेंगे। लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ मिलना इसीलिए भी विशेष है, क्योंकि क्योंकि राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका अतुलनीय योगदान है। उनकी ही रथयात्रा के बाद ये आंदोलन जन-आंदोलन बना था। उन्हें बिहार में लालू यादव की सरकार ने गिरफ्तार करवा दिया था, जिसके बाद केंद्र में VP सिंह की सरकार गिर गई थी।

संदेशखाली की जो बनीं आवाज, उनका बैंक डिटेल से लेकर फोन नंबर तक सब किया लीक: NCW से रेखा पात्रा ने की TMC नेता की शिकायत, कहा- यह निजता पर हमला

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार रेखा पात्रा ने अपनी ‘निजता के उल्लंघन’ के आरोप में तृणमूल कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार देबांगशु भट्टाचार्य के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दी है। इसके साथ उन्होंने एक पत्र राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी लिखा है।

अपनी शिकायत में रेखा पात्रा ने आरोप लगाया है कि तामलुक लोकसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार एवं पार्टी के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ प्रमुख भट्टाचार्य ने उनकी व्यक्तिगत जानकारी और बैंक खाते का विवरण सार्वजनिक किया।

रेखा पात्रा के वकील ने दायर करवाई गई शिकायत में कहा, “हाल ही में, तामलुक के टीएमसी उम्मीदवार देबांगशु भट्टाचार्य के फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट के माध्यम से, मेरी मुवक्किल के निजी विवरण, जैसे फोन नंबर, बैंक खाता विवरण, स्वास्थ्य साथी योजना विवरण, साथ ही दुआरे सरकार योजना का विवरण साझा किया, जो मेरी मुवक्किल की निजता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।”

बता दें कि देबांगशु भट्टाचार्या टीएमसी के सोशल मीडिया सेल के हेड हैं जिन्होंने 2021 में ‘खेला होबे’ गाने को कंपोज किया था। इस बार वह भाजपा प्रत्याशी अभिजीत गंगोपाध्याय के खिलाफ टीएमसी की ओर से उतारे गए हैं।

वहीं, रेखा पात्रा की बात करें तो उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की सासंद नुसरत जहाँ के खिलाफ बशीरहाट से उतारा है। उनके नामांकन दाखिल करने के बाद टीएमसी नेता की वॉल पर रेखा की डिटेल शेयर करने वाला पोस्ट सामने आया। इसे देख भाजपा नेताओं ने आवाज उठाई। ओछी हरकत का विरोध करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी को थोड़ी शर्म आनी चाहिए। उन्होंने एक महिला उम्मीदवार की जानकारी को शेयर कर दिया है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस संबंध में चुनाव आयोग से फौरन एक्शन लेने को कहा ताकि बंगाल के लोगों का पर्सनल डाटा सुरक्षित रह सके और कोई इसका गलत इस्तेमाल न करे।

कभी इस्लामी आतंकवाद से त्रस्त, आज ₹2 लाख करोड़ की इकोनॉमी: 1600+ आतंकी ढेर, 370 हटाने के बाद GDP दोगुनी… जानिए मोदी राज में कितना बदला जम्मू-कश्मीर

आज से कुछ साल पहले तक जम्मू कश्मीर से आतंक की खबरों का सामने आना रोज की बात हो चुका था। रोज किसी ना किसी इलाके में आतंकी हमला और फिर आम नागरिकों और सुरक्षाबलों के जवानों का मारा जाना बदस्तूर जारी था। इस आतंक के कारण जम्मू कश्मीर का आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान हो रहा था। हालाँकि, मोदी सरकार के बीते कुछ सालों में यह स्थिति बदल गई है। राज्य के सुरक्षा हालात और आर्थिक स्थिति में लगातार 2014 के बाद से बदलाव आया है।

जम्मू कश्मीर में आतंक की घटनाएँ अब दहाई आँकड़ों में सिमट गई हैं जबकि कश्मीर घाटी से अब बेहद कम युवा आतंक की तरफ रुख कर रहे हैं। इन सबके अलावा राज्य के टूरिज्म में जबरदस्त बढ़ावा मिला है। इससे राज्य की अर्थव्यस्था भी बढ़ी है। इन सबके पीछे सरकार की आतंक पर मजबूत कार्रवाई, अनुच्छेद 370 का हटना और साथ ही विकास कार्यों को चालू करना जैसे कारण प्रमुख हैं।

अनुच्छेद 370 के बाद आतंक में आई कमी

मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय लिया था। इससे पहले जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाएँ लगातार हो रही थीं। जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकी लगातार लोगों का खून बहा रहे थे। सेना और अर्धसैनिक बलों के प्रयासों से यह लगातार घटता जा रहा है। गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आँकड़े के अनुसार, वर्ष 2018 में जम्मू कश्मीर में आतंक की 614 वारदात हुई थीं। यह 2019 में घट कर 594 हो गईं। इसके बाद इनमें लगातार गिरावट जारी रही है।

आँकड़ों के अनुसार, जम्मू कश्मीर में 2020 में आतंक की 220 घटनाएँ हुईं। यह घटनाएँ 2023 में घट कर 43 पर आ गईं। यानी 2018 के दौरान जहाँ औसतन हर महीने 51 घटनाएँ हो रही थी जो कि 2023 में औसतन 3 पर आ गईं। मोदी सरकार के अंतर्गत आतंक की घटनाओं में इस गिरावट के पीछे सेना का आंतकियों की घुसपैठ रोकना, जमीन पर आतंकियों के फंड जुटाने और माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई करना और जम्मू कश्मीर पुलिस को मजबूत करने जैसे कारण महत्वपूर्ण रहे।

आतंकी हमलों से होने वाला नुकसान भी कम

जम्मू कश्मीर आतंकी हमलों के कारण सुरक्षा बलों के साथ ही आम नागरिकों की जान भी जाती रही है। जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों में देश ने बड़ी संख्या में जवानों को खोया है। यह स्थिति भी बदलने लगी है। गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आँकड़े बताते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने से पहले यानी 2019 में देश ने 80 जवान जम्मू कश्मीर में खोए थे। यह इसी दौरान 39 आम नागरिकों को भी आतंक की भेंट चढ़ना पड़ा था। हालाँकि, आतंक पर लगातार कार्रवाई की वजह से यह स्थिति बदल गई।

मोदी सरकार जम्मू कश्मीर

2023 आते-आते जम्मू कश्मीर से आने वाली ऐसी खबरों पर ब्रेक लगा है। 2023 में जम्मू कश्मीर में 13 नागरिकों और 25 सुरक्षा बलों के जवानों को आतंक के चलते जान गँवानी पड़ी है। यह आँकड़ा बीते कुछ वर्षों में सबसे कम है। आतंकी हमलों में कमी के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अब सीमा पार से ज्यादा आतंकी देश में नहीं घुस पा रहे और साथ ही घाटी से नए आतंकी तैयार नहीं हो रहे। इससे जम्मू कश्मीर में आतंकियों की मौजूदगी में भी कमी आई है।

एक आँकड़ा बताता है कि वर्ष 2018 में जम्मू कश्मीर में सबसे अधिक 257 आतंकी मारे गए थे। इनमे से बड़ी संख्या में वह आतंकी थे जो सीमा पार पाकिस्तान से देश में आए थे। सेना के लगातार आतंकियों का सफाया करने के कारण यह संख्या घट 2023 में मात्र 72 पर आ गई। इससे साफ़ हुआ कि जम्मू कश्मीर में आतंकियों की मौजूदगी घटी है। राज्य में पथराव की घटनाएँ भी खत्म हो चुकी हैं। वर्ष 2016 में राज्य में 2650 से अधिक पत्थरबाजी की घटनाएँ हुई थी, 2023 में यह घटनाएँ नगण्य हो गईं।

मोदी सरकार जम्मू कश्मीर

मोदी सरकार में आतंक घटा, फला-फूला कश्मीर

मोदी सरकार में जम्मू कश्मीर में आतंक के घटने का सबसे बड़ा असर यहाँ सामान्य जनजीवन पर पड़ा है। जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था में इस कारण से काफी तेजी आई है। सरकार की योजनाओं ने भी लोगो के जीवन में बड़ा प्रभाव डाला है। आँकड़ा बताता है कि यहाँ की सुरक्षा स्थिति सुधरने के कारण 2023 में जम्मू कश्मीर में 2.11 करोड़ पर्यटक आए। यह संख्या 2015 में मात्र 1.33 करोड़ थी थी। इस प्रकार देखा जाए तो पर्यटकों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

राज्य अर्थव्यवस्था में भी बड़ा बदलाव बीते वर्षों में देखने को मिला है। जम्मू कश्मीर के आर्थिक सर्वे के मुताबिक़, 2014-15 में राज्य की अर्थव्यस्था का आकार ₹98366 करोड़ था। यह अब बढ़ कर ₹2.25 लाख करोड़ हो चुका है। यानी राज्य की अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के बीते लगभग 10 वर्षों में दोगुनी से भी अधिक बढ़ी है।

राज्य के लोगों को भी इस दौरान काफी सुविधाएँ मिली हैं। जम्मू कश्मीर में जल जीवन मिशन के तहत अब 77% जनसंख्या सीधे नल से जल पा रही है। आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के 14 लाख से अधिक घरों में सीधे नल से जल पहुँच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में 47 हजार से अधिक घरों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 21 हजार से अधिक घर पूरी तरीके से बन भी चुके हैं। सरकार यहाँ अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक पैसा घर बनाने के लिए दे रही है। राज्य में दो नए AIIMS भी मोदी सरकार ने बनाए हैं।

सुरक्षा की स्थिति सुधरने से कश्मीर में अब बड़े आयोजन हो रहे हैं। हाल ही में श्रीनगर में हुआ G20 का आयोजन हो या फिर डल झील के किनारे हुई फार्मूला-4 रेस, यह दिखाती है कि राज्य में अब बाहर के लोग आने से डरते नहीं है। यह यहाँ की बदलती स्थिति का परिचायक है।

‘धरती का बोझ खत्म हुआ, अनाथ हुए परिवारों-बच्चों के लिए खुशी की बात’: मुख्तार अंसारी की मौत के बाद अलका राय ने बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन, साथ में बेटा भी

माफिया मुख़्तार अंसारी गुरुवार (28 मार्च, 2024) को बाँदा जेल में हार्ट अटैक आया, अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मुख़्तार अंसारी पर 60 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें नवंबर 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या भी शामिल है। कृष्णानंद राय ने 2002 के विधानसभा चुनाव में मुख़्तार के भाई अफजाल अंसारी को हरा कर जीत दर्ज की थी। उनकी हत्या के लिए 400 राउंड गोलीबारी की गई थी। इस नरसंहार में कुल 7 लोग मारे गए थे।

दरअसल, मुख़्तार अंसारी ने उनके करीबियों की हत्या का सिलसिला इससे महीनों पहले शुरू कर दिया था और एक-एक कर कई लोग मारे गए थे। अब मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर भगवान शिव का दर्शन किया। उनके साथ उनके बेटे पीयूष कुमार राय भी थे। पीयूष कुमार राय ने कहा कि जो फैसला न्याय के मंदिर में अधूरा रह गया था, आज भगवान के मंदिर में वो फ़ैसला हो गया है।

उन्होंने अपराधी के अपराध के बही-खाते का अंत होने की बात करते हुए वीडियो शेयर कर जानकारी दी कि मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद गाजीपुर में दीवाली जैसा माहौल है। उन्होंने कहा कि भगवान के घर में देर है, अंधेर नहीं। वहीं उनकी माँ अलका राय ने कहा कि उन्हें बाबा विश्वनाथ पर पूरा भरोसा था, उनकी कृपा से आज उन्हें न्याय मिला है। अलका राय ने कहा कि जितने भी परिवार या बच्चे अनाथ हुए हैं, बड़ी ख़ुशी की बात है कि ऐसे अपराधी का अंत हुआ है, धरती का बोझ खत्म हुआ है।

अलका राय ने बताया कि वो हमेशा बाबा के दरबार में न्याय के लिए आती थीं। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद परिवार ने होली नहीं मनाई थी, लेकिन आज का दिन उनके लिए होली जैसा है। अलका राय ने इस दौरान विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे साजिश के आरोपों को नकार दिया। वहीं पीयूष कुमार ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के लिए एक अपराधी में मजहब ढूँढा जा रहा है। उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में ईश्वर का ये फैसला आया है।

मजाक-मजाक में दोस्त ने गुदाद्वार में कम्प्रेशर से भर दी हवा, आँत फटने से हो गई मौत: बेंगलुरु में मैकेनिक गिरफ्तार

बेंगलुरु में एक 24-वर्षीय युवक के लिए एक ‘शरारत’ जानलेवा बन गई। मजाक-मजाक में दोस्त ने उसके प्राइवेट पार्ट पर एयर कंप्रेसर लगा दिया, जिससे वो सर्विस के बाद बाइक को सुखा रहा था, लेकिन इससे उसके मलाशय में हवा भर गई और आंत फट गई। इस घटना से तुरंत उसके प्राइवेट पार्ट से खून बहने लगा और अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने सर्विस सेंटर के कर्मचारी को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का है, जहाँ सोमवार को योगेश (24 वर्ष) नाम का युवक अपनी बाइक सर्विस कराने अपने दोस्त मुरली (23 वर्ष) की गराज पर गया था। दोनों बाइक सर्विस के दौरान ही मजाक रहे थे। उसी दौरान मुरली ने कंप्रेसर से हवा योगेश के चेहरे की ओर घुमा दिया। इससे योगेश झुक गया, तो उसने मजाक में ही कंप्रेसर का रुख उसके पीछे की तरफ प्राइवेट पार्ट के सामने कर दिया।

कंप्रेसर का प्रेसर इतना ज्यादा था कि वो उसके प्राइवेट पार्ट को चीरता हुआ उसके मलाशल में चला गया। योगेश घायल होकर तुरंत गिर गया और वहाँ भगदड़ मच गई। इसके तुरंत बाद उसे अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिव बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। मजाक-मजाक में योगेश की जान जाने से लोग हैरान हैं। हालाँकि इस मामले में पुलिस ने हत्या नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है और आरोपित मुरली को गिरफ्तार कर लिया है।

पिछले साल गुजरात में भी हुई थी ऐसी ही घटना

कर्नाटक की राजधानी से आए इस मामले पर लोग हैरानी जता रहे हैं। ऐसी ही एक घटना पिछले साल नवंबर में गुजरात में हुई थी। जहाँ अहमदाबाद के वटवा जीआईडीसी स्थित कंपनी में 19 साल के पंकज राय की जान चली गई थी। उस मामले में उसके दोस्त प्रकाश ने मजाक-मजाक में ही उसके प्राइवेट पार्ट में कंप्रेसर से हवा भर दी थी, जिसकी वजह से पंकज का पेट फूल गया था और उसकी आँतों के साथ ही मलाशय फटने से उसके मौत हो गई थी।

‘अब्बा ने 10 दिनों से नहीं किया था पैखाना, दिल्ली AIIMS के डॉक्टर करें पोस्टमॉर्टम’: मुख्तार अंसारी के बेटे की डिमांड, मौत की न्यायिक जाँच का आदेश

गाजीपुर, मऊ और वाराणसी में आतंक का पर्याय रहे माफिया मुख़्तार अंसारी की गुरुवार (28 मार्च, 2024) को बाँदा जेल में हार्ट अटैक आया, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब अगले दिन उसके शव के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की गई है। 5 डॉक्टरों की टीम ने गैंगस्टर के शव का पोस्टमॉर्टम किया। साथ ही विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। हालाँकि, उसके बेटे उमर ने माँग की थी कि दिल्ली AIIMS में ये प्रक्रिया पूरी कराई जाए, क्योंकि उसे स्थानीय चिकित्सा प्रणाली प्रशासन व सरकार पर भरोसा नहीं है।

उमर अंसारी ने लिखा था कि उसके अब्बा ने आरोप लगाया था कि जेल में धीमा ज़हर दिया जा रहा है। उसने लिखा कि जब वो बाँदा जिला अस्पताल में अपने अब्बा को देखने पहुँचा था तब उसे अंदर नहीं जाने दिया, जिसमें उसे साजिश नज़र आ रही है। बकौल उमर अंसार, मुख़्तार ने उसे मौत वाले दिन फोन पर ये भी बताया था कि 10 दिन से उसे शौच नहीं हुआ है और कहा था – “उमर बेटा, मैं बचूँगा नहीं”। साथ ही उसने आरोप लगाया है कि उसके अब्बा की हालत गंभीर होने की सूचना उसे न अस्पताल ने दी, न जेल प्रशासन ने।

वहीं मुख़्तार अंसारी की मौत की अब न्यायिक जाँच भी होगी। बाँदा के चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट भगवान दास गुप्ता की अदालत ने एडिशनल CJM गरिमा सिंह से कहा है कि वो मुख़्तार अंसारी की मौत की जाँच कर के 1 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपें। बाँदा के जिलाधिकारी ने भी इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं और 3 सदस्यीय कमिटी गठित की है। मौत वाली रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी DGP के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें ताज़ा हालात पर चर्चा की गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर मंथन हुआ।

मुख़्तार अंसारी पर 60 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से एक भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या वाला मामला भी था। उनकी पत्नी अलका राय ने अब काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की है। जुमे की नमाज को लेकर मऊ और गाजीपुर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर के रखी गई है। उन्होंने बताया कि उनके पति की हत्या के बाद परिवार ने कभी होली नहीं मनाई, आज का दिन उनके लिए होली है। मुख़्तार अंसारी 5 बार मऊ से विधायक रहा था।

‘जो बहन-बेटी का भाव लगाएँ वो…’ : मंडी में ‘राष्ट्रवादी आवाज’ बनकर कंगना रनौत ने किया मेगा रोड शो, माँ ने भी सुप्रिया श्रीनेत को सुनाया

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत मंडी से इस बार चुनावी मैदान में हैं। आज उन्होंने मंडी में अपना रोडशो भी किया। इस रोड शो के दौरान उन्होंने मंडी की जनता के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनता उन्हें हिरोइन नहीं बल्कि अपनी बहन-बेटी समझें। विपक्ष को लेकर वह बोली जो लोग बहन-बेटी का भाव तय करें वो मंडी की जनता के नहीं हो सकते

कंगना ने रोड शो के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “यह मत सोचना कि कंगना हीरोइन है, वह स्टार है। कंगना को अपनी बहन, अपनी बेटी समझो। सब मेरा परिवार हैं। इस बार मंडी की जनता दिखा देगी कि हमलोगों के दिल में क्या है।”

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “आप यहाँ बड़ी भीड़ देख सकते हैं। बहुत सारे लोग यहाँ आए हैं। उन सभी को गर्व है कि मंडी की बेटी, मंडी की राष्ट्रवादी आवाज इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगी। इस चुनाव में बीजेपी के लिए विकास ही मुख्य मुद्दा है।” कंगना बोलीं, “हमारे नेता नरेंद्र मोदी जिस तरह से हमें गाइड करेंगे, उस दिशा में हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे। मंडी की जनता दिखा देगी कि उनके दिल में क्या है।”

बता दें कि एक ओर कंगना रनौत जोर शोर से अपना प्रचार करने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर उनकी माँ आशा ने सुप्रिया श्रीनेत द्वारा की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी के लिए अपशब्द सुनकर बुरा लगा। कंगना की माँ सुप्रिया श्रीनेत ने कहा- “उनके भी घर में बेटियाँ और बहुएँ हैं। अगर वह ऐसा बोलती हैं तो उन्हें सोचना होगा कि उन्हें अपने घर की बहू-बेटियों के लिए कैसा लगेगा। जैसा उन्हें लगेगा वही दर्द मुझे है।”

कंगना ने कहा, “कॉन्ग्रेस से मेरा नॉमिनेशन बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने अपनी कुराजनीति शुरू कर दी। उनके शीर्ष नेता कहने लगे ये जो शक्ति है इसे मुझे नष्ट करना है। उनकी प्रवक्ता मंडी की लड़कियों के क्या भाव चल रहे हैं। इस तरह की नीच और अभद्र बातें सुनकर किसका दिल नहीं घबराएगा।”

वह बोलीं, इस मंडी का नाम ऋषि मांडव के नाम पर रखा गया था। यहाँ ऋषि पराशर ने इतनी तपस्या की थी। यहाँ शिवरात्रि का सबसे बड़ा मेला होता है। इस मंडी के बारे में सोचना कितनी नीचता की बात है। उन्होंने मंडी की जनता से कहा कि जो लोग बेटी-बहनों का भाव लगाएँ वो आपके कभी नहीं हो सकते।

चाहे कर लो जितना प्रलाप, अरुणाचल प्रदेश हमेशा से हमारा हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा: चीन को भारत का दो टूक जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन जितना चाहे अरुणाचल पर प्रलाप कर सकता है, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सदैव से भारत का हिस्सा है और आगे भी रहेगा। विदेश मंत्रालय ने चीन को यह जवाब हाल ही चीन के अरुणाचल को लेकर शोर मचाने के बाद दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन की अरुणाचल को लेकर टिप्पणियों के विषय में पूछे जाने पर कहा, “हम इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दें, हमने पहले भी इस मामले में बयान जारी किए हैं। चीन जितनी बार चाहे अपने फर्जी दावे इस बारे में कर सकता है, इससे हमारे इस स्टैंड में कोई बदलाव नहीं आएगा कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का हिस्सा था, है और रहेगा।”

विदेश मंत्रालय का यह बयान चीन के अरुणाचल प्रदेश को लेकर दावों के बाद आया है। यह दावे पीएम मोदी के अरुणाचल दौरे के बाद चालू हुए थे। चीन के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर फर्जी दावे किए हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में पीएम मोदी ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण सेला सुरंग समेत तमाम परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया था। सेला दुनिया की सबसे ऊँचाई पर बनी सुरंग है। पीएम मोदी ने इस दौरान पूर्वोत्तर में किए गए अन्य विकास कार्यों का भी ब्यौरा दिया था।

पीएम मोदी के इस दौरे के बाद चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल झांग ज़ियाओगांग ने कहा था कि जिजांग (तिब्बत का भाषा में नाम) का दक्षिण का क्षेत्र चीन का पारम्परिक रूप से हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश को अवैध रूप से स्थापित किया है और बीजिंग इसे कभी नहीं मानेगा।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब चीन अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ या उस पर अपना दावा जताता आया हो। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के इलाकों में घुसपैठ करता है और उसे तिब्बत का एक हिस्सा बताता है। वह अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को ‘नत्थी वीजा’ देता है। चीन ने 1950 के दशक में बौद्धों को भगा कर तिब्बत पर कब्जा कर लिया था और अब उसका दावा है कि अरुणाचल उसी तिब्बत का एक हिस्सा है। भारत ने चीन को हमेशा इस मामले में कड़ा जवाब दिया है।

चीनी रक्षा मंत्रालय की इस टिप्पणी के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट रूप से जवाब दिया था। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ” हमारे ध्यान में चीनी प्रवक्ता द्वारा की गई टिप्पणियाँ आई हैं। चीनी रक्षा अरुणाचल प्रदेश को लेकर बेतुके दावे कर रहा है। इस बारे में बार-बार एक ही तरह के दावे दोहराने से इस दावे को कोई सच नहीं मान लेगा। अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा ही रहेगा। अरुणाचल प्रदेश के निवासियों को हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का लाभ लगातार मिलता रहेगा।”

गौरतलब है कि चीन लद्दाख और उत्तराखंड वाले क्षेत्र में भी लगातार सीमा पर गड़बड़ी करता रहता है। वह लगातार इन हिस्सों को अपना बताने का दावा करता है। हालाँकि, भारत ने उसके सभी दावे नकारते हुए इन सभी इलाकों में सेना की मजबूत तैनाती कर रखी है।

अतीक की तरह ही फरार है मुख्तार अंसारी की भी बीवी, शौहर की मौत के बाद भी कोई अता-पता नहीं: अफ़्शाँ पर दर्ज हैं 13 मामले, ₹75000 का इनाम

बाँदा जेल में बंद गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी की गुरुवार (28 मार्च, 2024) को हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। मुख़्तार अंसारी पर 60 से भी अधिक मामले दर्ज थे। उसका भाई अफजाल अंसारी भी कई मामलों में आरोपित है। उसका बेटा अब्बास अंसारी जेल में बंद है। वहीं उसकी बीवी अफ़्शाँ अंसारी भी फरार चल रही है, ठीक वैसे ही जैसे गैंगस्टर अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार है। बता दें कि अतीक अहमद की भी अप्रैल 2023 में हत्या कर दी गई थी। दोनों पूर्वांचल के सबसे बड़े गुंडे माने जाते थे।

अवैध जमीन कब्जा के मामले में फरार है मुख़्तार अंसारी की बीवी अफ़्शाँ

मुख़्तार अंसारी को सुपुर्द-ए-ख़ाक करने की तैयारी है लेकिन उसकी बीवी का कोई अता-पता नहीं है। उस पर पुलिस ने 75,000 रुपए का इनाम भी रखा हुआ है। उस पर 13 मुकदमे दर्ज हैं, गैंगस्टर एक्ट का भी मामला चल रहा है। अफ़्शाँ पर गाजीपुर और मऊ से लेकर लखनऊ तक अवैध जमीन कब्जे के आरोप हैं। जबरन रजिस्ट्री का मामला भी चल रहा है। ये सब निकाह के बाद दर्ज हुए हैं। 2005 में मुख़्तार अंसारी के जेल जाने के बाद बीवी अफ़्शाँ ने गिरोह में अपना दखल बढ़ा दिया था।

गाजीपुर स्थित यूसुफपुर मोहम्मदाबाद के दर्जी मोहल्ला की रहने वाली अफ़्शाँ पर आरोप है कि उसने मऊ के दक्षिणी टोला स्थित रैनि गाँव के पास ‘विकास कंस्ट्रक्शन’ नामक फर्म बना कर जमीन ली थी। उस पर गोदाम बना दिया गया था। उस गोदाम को FCI को किराए पर दे दिया गया था। अफ़्शाँ के दोनों भाई अनवर शहजाद और आतिफ रज़ा समेत इस मामले में 5 आरोपित हैं। जाँच में पाया गया कि दलितों की जमीन जबरन कब्जाई गई। जून 2021 में इसे कब्ज़ा मुक्त कराया जा चुका है।

बाकी चारों आरोपित कोर्ट में पेश हो चुके हैं, लेकिन अफ़्शाँ अंसारी तभी से फरार है। गाजीपुर में उसके ठिकानों पर कई बार छापेमारी भी हुई, लेकिन वो नहीं मिली। गजल होटल लैंड डील और नंदगंज में सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप उस पर पहले से थे ही। मुख़्तार अंसारी का एक अन्य बेटा उमर भी जमानत पर बाहर है। उसकी बहू निकहत बानो भी शौहर अब्बास को जेल से भगाने के आरोप में जेल जा चुकी है। मुख़्तार अंसारी का परिवार अब तक 16 लोकसभा-विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुका है।

अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार

हाल ही में शाइस्ता परवीन का खास गुर्गा बल्ली पंडित को धर-दबोचने में प्रयागराज पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली, लेकिन अतीक अहमद की बीवी का कोई अता-पता नहीं चला। शाइस्ता परवीन का नाम उमेश पाल हत्याकांड में आया था, जो विधायक राजू पाल हत्याकांड में गवाह था। राजू पाल की जनवरी 2005 में हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया था। फ़िलहाल कौशाम्बी के चैल से उनकी पत्नी पूजा पाल MLA हैं। उमेश पाल इसी हत्याकांड में गवाह थे।

फरवरी 2023 में उमेश पाल की हत्या हुई थी। इस मामले का एक अन्य अभियुक्त बमबाज गुड्डू मुस्लिम भी अब तक फरार है। शाइस्ता परवीन पर 50,000 रुपए का इनाम घोषित है। अशरफ की बीवी जैनब फातिमा भी फरार है। धूमनगंज के हटवा गाँव में इनके होने की सूचना के बाद इसी महीने छापेमारी भी हुई है, लेकिन पुलिस खाली हाथ रही। हटवा अशरफ का ससुराल है। शाइस्ता परवीन अपने शौहर के जनाजे में भी नहीं आई थी।

पाकिस्तान में चीन की कंपनी ने रोका काम, 2000 मजूदरों की रोजी-रोटी छिनी: फिदायीन हमले में 5 चीनी इंजीनियरों की हो गई थी मौत

चीन की एक कम्पनी ने पाकिस्तान के एक बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का काम रोक दिया है। चीन के इस फैसले से प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 2000 पाकिस्तानी बेरोजगार हो गए हैं। यह फैसला हाल ही में पाकिस्तान में चीन के इंजीनियरों पर हुए आत्मघाती हमले के बाद लिया गया है। इस हमले में पाँच चीनी इंजीनियर मारे गए थे।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य में बने तरबेला बाँध की क्षमता बढ़ाने का वर्तमान में काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट को तरबेला T5 एक्स्टेंशन नाम दिया गया है। इस पर चीन की सरकारी पावर कंस्ट्रक्शन कम्पनी ऑफ़ चाइना (PCCC) काम कर रही है। 1530 मेगावाट क्षमता बिजली पैदा करने वाला यह प्रोजेक्ट 2026 तक पूरा किया जाना है। इसके लिए विश्व बैंक और एशियन बैंक पैसा दे रहा है। इस प्रोजेक्ट पर चीन के इंजीनियर और मैनेजर काम करते हैं।

इस प्रोजेक्ट के लिए 2000 पाकिस्तानियों को भी यहाँ लगाया गया था। हालाँकि, अब इस कम्पनी ने यहाँ काम रोकने का फैसला लिया है। इससे एक झटके में यह 2000 लोग बेरोजगार हो गए। कम्पनी ने इन लोगों को तुरंत निकालने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे का कारण खैबर पख्तूनख्वा में 26 मार्च, 2024 को चीनी इंजीनियरों पर हुआ हमला माना जा रहा है।

यह इंजीनियर खैबर पख्तूनख्वा के ही दासू बाँध प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। इनकी बस को विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी ने टक्कर मार दी थी, जिसके कारण इनकी मौत हो गई थी। इस हमले में कुल 6 लोग मारे गए थे। हमले के वक्त सभी इंजीनियर इस्लामाबाद से खैबर पख्तूनख्वा के दासू जा रहे थे। 

इस धमाके की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली थी। हालाँकि, इस हमले का शक बलोच लड़ाकों पर जताया गया था। इससे पहले भी पाकिस्तान में चीनी नागरिक निशाना बनते आए हैं। 2021 में भी इसी दासू बाँध में हुए एक हमले में 9 चीनी नागरिक मारे गए थे। इस हमले के बाद भी चीन ने अपने नागरिकों की यहाँ उपस्थिति कम करने को लेकर कदम उठाए थे।

2022 में भी चीन के तीन नागरिकों को एक महिला आत्मघाती हमलावर ने मार दिया था। यह हमलावर बलोच लिबरेशन आर्मी से जुडी हुई थी। हमले में मारे गए चीनी नागरिक पाकिस्तान में चीनी भाषा पढ़ाने का काम करते थे। इस हमले का एक वीडियो भी वायरल हुआ था।