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राजू पाल की हत्या में 6 को उम्रकैद, 1 को 4 साल जेल: अतीक-अशरफ भी थे नामजद, इसी कांड का गवाह था उमेश पाल

बहुजन समाज पार्टी के तत्कालीन विधायक राजू पाल हत्याकांड मामले में लखनऊ की सीबीआई अदालत ने 6 दोषियों को उम्रकैद और एक को 4 साल की सजा सुनाई है। लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने आबिद, जावेद, अब्दुल, गुल हसन, इसरार और रंजीत पाल को उम्रकैद और फरहान को 4 साल की सजा सुनाई। इस मामले में माफिया डॉन अतीक अहमद और अशरफ भी नामजद आरोपित थे, जिनकी प्रयागराज में हत्या हो गई थी। इसलिए उनका नाम हटा दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसपी एमएलए राजू पाल की प्रयागराज में साल 2005 में दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उन्हें धूमनगंज में मौत के घाट उतारा गया था। इस हत्याकांड को राजनीतिक दुश्मनी के चलते अंजाम दिया गया था। विधानसभा चुनाव में अशरफ को हराने के चलते राजू पाल की प्रयागराज में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से सिर्फ 9 दिन पहले राजू पाल और पूजा पाल की शादी हुई थी। पूजा पाल 2007 से 2017 तक विधायक रही, और साल 2022 में वो सपा के टिकट पर फिर से विधायक चुनी गई हैं।

इस तिहरे हत्याकांड की जाँच पहले पुलिस, सीबी सीआईडी और आखिर में सीबीआई ने की। सीबीआई की तरफ से अतीक अहमद उसके भाई समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इसरार अहमद, रंजीत पाल, जावेद, गुलशन और अब्दुल कवि को हत्या करने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। वहीं फरहान को अवैध असलहा रखने के मामले में 4 साल की कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

कार को ओवरटेक कर शरीर में उतारी गई 19 गोलियाँ

बता दें कि राजू पाल ने साल 2004 में विधानसभा उप-चुनाव में अशरफ को हराया था। इसके बाद दोनों गुटों में ठन गई थी। चुनावी नतीजों के तीन माह के अंदर ही 25 जनवरी को राजू पाल की गाड़ी को जीटी रोड पर ओवरटेक करके रोक लिया गया था। उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई गई थी। इस हत्याकांड में स्कॉर्पियो सवार 5 हमलावरों ने राजू पाल और उनके सहयोगियों पर अंधाधुँध गोलीबारी की थी।

इस हमले में राजू पाल को 19 गोलियाँ लगी। उनके साथ गाड़ी में मौजूद रहे संदीप यादव और देवीलाल की भी जान चली गई थी, जबकि राजू पाल के साथ गाड़ी में आगे की सीट पर बैठी रुखसाना घायल हो गई। इस मामले में उमेश पाल चश्मदीद गवाह थे, बाद में उनकी भी हत्या कर दी गई। वहीं, इस हत्याकांड में नामजद अतीक और अशरफ को पुलिस हिरासत के दौरान प्रयागराज में मार दिया गया।

‘प्यार से डिनर कराया, दोनों मेड फॉर कैमरा आदमी’: जब मुख्तार-अतीक ‘साहब’ के ‘तहजीब’ पर मर मिटे थे राजदीप सरदेसाई, तंदूरी चिकन का स्वाद आ गया था याद

उत्तरप्रदेश से पिछले एक साल में दो गैंगस्टर का खात्मा हुआ। एक का नाम मुख्तार अंसारी है और दूसरे का अतीक अहमद। दोनों के दहशत के कई किस्से हर जगह मौजूद हैं। बताया जाता है कि मुख्तार के मन में पिछले साल से अपनी मौत का खौफ बसा था क्योंकि उसने अतीक की हत्या की खबर सुन ली थी। 28 मार्च को पता चला कि उसे भी हार्ट अटैक आ गया और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इन दोनों गैंगस्टरों के बारे में पूछने पर जहाँ हर कोई इनके दहशत की कहानियाँ सुनाता है तो वहीं कुछ ऐसे भी दिखते हैं जो इन्हें रॉबिनहुड आदि कहकर इनका महिमामंडन करने से पीछे नहीं हटते। राजदीप सरदेसाई उन्हीं लोगों की लिस्ट में आते हैं जिन्हें मुख्तार और अतीक के कुकर्मों से ज्यादा उनके हाथ का बना चिकेन याद आता है।

राजदीप ने इस किस्से का जिक्र पिछले साल द लल्लनटॉप को इंटरव्यू देते समय किया था। वेबसाइट और यूट्यूब चैनल द लल्लन टॉप के नेतानगरी कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने माफियाओं के साथ अपनी मुलाकात को याद किया था और बताया था कि दोनों कितना बढ़िया खाना बनाते थे। अब मुख्तार की मौत के बाद उनकी वीडियो फिर चर्चा में है।

48 मिनट के बाद वाले स्लॉट के बाद उन्होंने कहना शुरू किया, “वर्ष 1996 में यूपी विधानसभा चुनाव के वक्त मैं दो महाशय से मिला। एक थे मुख्तार अंसारी और दूसरे अतीक अहमद। एक बात दोनों की हमेशा याद रहेगी। दोनों ने मुझे बहुत अच्छा डिनर खिलाया।”

राजदीप ने आगे दोनों माफियाओं की तारीफ करते हुए कहा कभी उन्हें महाशय कहा, कभी साहब कहा तो कभी बेहतरीन कुक बताया। वीडियो में सुना जा सकता है वह कहते हैं, “ये जो डॉन होते हैं, जब आप इनके बारे में पढ़ते हैं तो आपको लगता होगा कि डॉन बहुत भयानक होंगे, डराएँगे लेकिन दोनों ने बड़े सभ्य तरीके से व्यवहार किया। मेरी पत्नी सागरिका भी अतीक अहमद से मिली। अतीक ने मेरी पत्नी सागरिका के साथ डिसेंट मैनर में मुलाकात की और तहजीब के साथ बात की।”

राजदीप ने कहा कि उन्होंने अतीक अहमद से मुलाकात के समय उनको याद दिलाया कि वो जिस लोकसभा (फुलपुर) से जीते हैं वह देश के पहले प्रधानमंत्री का पहला संसदीय क्षेत्र रहा था। इस पर अतीक हँसा और फिर नेहरू की प्रतिमा के सामने पोज देकर फोटो खिंचवाई।

राजदीप इतना इंटरेस्ट लेकर अतीक और मुख्तार अंसारी की बात बताते हैं कि उनके क्रिमिनल रिकॉर्ड से हटकर वो दर्शकों को ये समझाने लगते हैं कि दोनों भले ही गैंगस्टर थे लेकिन वो लोग फोटो फ्रेंडली थे। राजदीप दो गैंगस्टरों के लिए कहते सुनाई पड़ते हैं- “अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी कैमरे के लिए बने थे।”

एक घंटे के कार्यक्रम में मुख्तार अंसारी को 52वें मिनट पर मुख्तार अंसारी द्वारा खिलाया गया तंदूरी चिकन याद आता है। राजदीप कहते हैं, वेरी गुड तंदूरी चिकन। मैंने मुख्तार अंसारी से कहा मुख्तार अंसारी अच्छा खाना पकाते हैं।” इसके बाद सौरभ द्विवेदी उन्हें टोकते भी हैं कि वो भ्रमित हो रहे हैं, लेकिन राजदीप को देख ऐसा बिलकुल नहीं लगता कि उन्हें गैंगस्टरों से जुड़े ऐसे किस्से याद करने का कोई मलाल है। वो ऐसे दिखाते हैं कि ये अपराधी जैसी बातें तो सबको पता ही है वो क्रिमिनल है। लेकिन ये जानकारी भी तो होना चाहिए।

‘अच्छे दिन’ की आस में कॉन्ग्रेस में गए कन्हैया कुमार और पप्पू यादव, लालू यादव ने जमीन ही कर दी साफ: बेगूसराय लेफ्ट को, पूर्णिया-सुपौल-मधेपुरा सब RJD का

बिहार में महागठबंधन का सीट बँटवारा फाइनल हो गया है। राजद 26 सीटों पर लड़ेगी, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी को 9 सीटें मिली हैं। बाकी की सीटें वामपंथियों के हिस्से गई हैं। इसमें सबसे अधिक CPI(ML) को 2 सीटें, CPI-CPM को एक-एक सीट दी गई है। इसमें सबसे अधिक नुकसान पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को हुआ है। पप्पू यादव जिस पूर्णिया से ताल ठोक रहे थे वो राजद के हिस्से चली गई है। वहीं जिस बेगूसराय से कन्हैया कुमार ने 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा था वो वामपंथियों के हिस्से चली गई है।

बता दें कि जहाँ कन्हैया कुमार लेफ्ट छोड़ कर कॉन्ग्रेस में आ चुके हैं, वहीं पप्पू यादव ने तो हाल ही में अपनी ‘जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक)’ का कॉन्ग्रेस में विलय कर दिया था। राजद के हिस्से ये सीटें गई हैं – गया, नवादा, जहानाबाद, औरंगाबाद, बक्सर, पाटलिपुत्र, मुंगेर, जमुई, बाँका, वाल्मीकिनगर, पूर्वी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी, वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, उजियारपुर, दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, हाजीपुर।

पप्पू यादव के लिए मुश्किलें इसीलिए खड़ी हो गई हैं क्योंकि जिस पूर्णिया से वो 1991, 1996 और 2004 में सांसद बने थे, और जहाँ से वो इस बार लड़ने की पूरी तैयारी में हैं – वो सीट राजद के हिस्से चली गई है। कोसी बेल्ट की एक अन्य सीट मधेपुरा जहाँ से पप्पू यादव 2004 और 2014 में सांसद रह चुके हैं, वो भी राजद ने कॉन्ग्रेस को नहीं दी। अब कोसी बेल्ट की ही तीसरी सीट पर आते हैं – सुपौल (पूर्व में सहरसा)। यहाँ से 2004 में पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन 2004 और 2014 में सांसद बनी थीं। ये सीट भी राजद ने झटक ली है।

यानी, पप्पू यादव के लिए न पूर्णिया छोड़ा गया, न सुपौल और मधेपुरा। कॉन्ग्रेस को जो सीटें दी गई हैं, वो हैं – किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पश्चिम चम्पारण, पटना साहिब, सासाराम और महराजगंज। CPI(ML) आरा, काराकाट और नालंदा से लड़ेगी। वहीं बेगूसराय से CPI और खगड़िया से CPM ताल ठोकेगी। ऐसे में कन्हैया कुमार के लिए संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने 2019 में बेगुसराई से CPI के टिकट पर लड़ते हुए 2.70 लाख वोट्स (22%) बटोरे थे।

JNU छात्र संघ के अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार को राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा में भी खासा सक्रिय देखा गया। कॉन्ग्रेस आलाकमान के नेताओं के साथ उन्हें अक्सर देखा जाता है। इसके बावजूद बेगूसराय सीट से उनके कॉन्ग्रेस के टिकट पर लड़ने की संभावनाएँ खत्म हो गई हैं। कन्हैया कुमार JNU में भी लेफ्ट की ही राजनीति करते थे। कन्हैया कुमार ने सितंबर 2021 में कॉन्ग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी। बिहार में NDA पहले ही अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है। भाजपा 17, जदयू 16, चिराग पासवान की LJP (रामविलास) 5 उपेंद्र कुशवाहा की RLJP 1 और जीतन राम माँझी की HAM 1 सीट पर चुनाव लड़ रही है।

‘साले, चम$, तुम्हारी धर्मशाला निर्माण की कैसे हिम्मत पड़ गई’: अकरम, मुस्तकीम और साजिद को रामपुर की कोर्ट ने सुनाई सजा, दलित श्रमिकों पर किया था हमला

उत्तर प्रदेश के रामपुर की अदालत ने अकरम, मुस्तकीम और साजिद को अनुसूचित जाति के मजदूरों पर खतरनाक हथियारों से हमला करने और उन्हें गंभीर चोटें पहुँचाने का दोषी ठहराया है। जिन मजदूरों पर हमला किया गया, वे नवंबर 2015 में स्थानीय लोगों के समर्थन से अपने इलाके में मरम्मत का काम कर रहे थे, जब दोषी डंडों और लाठियों के साथ उनके पास आए और कहा, “तुम सालों… च*** (एक जातिवादी गाली)! धर्मशाला बनाने की हिम्मत तुम्हारी कैसे हुई? ये हमारी जगह है।”

अदालत के आदेश के मुताबिक, “मुस्लिम” नाम के चौथे व्यक्ति और साजिद ने मजदूर पर डंडों से हमला किया, जिसमें अतर सिंह लहूलुहान हो गया। अतर सिंह की बाद में मौत हो गई। हालाँकि मुकदमे के दौरान मुस्लिम नाम के आरोपित की मौत हो गई, इसकी वजह से उसका नाम केस से अलग कर दिया गया। इस मामले में एससी समाज के लोगों पर धर्मशाला की मरम्मत के समय हमला किया गया। हमलावरों ने कहा कि ये जमीन हमारी है और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इस पर धर्मशाला बनाने की।

अदालत ने अकरम, मुस्तकीम और साजिद को भारतीय दंड संहिता (धारा 323, 324 और 504) के साथ-साथ धारा 3 और 4 के तहत खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल से स्वेच्छा से चोट पहुँचाने और शांति में बाधा डालने के लिए और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दोषी ठहराया और 6.5 साल (कुल) कारावास की सजा सुनाई गई। हालाँकि हत्या के प्रयास (धारा 307 के तहत) के अपराध से तीनों को बरी कर दिया गया है। अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि दोषियों को न्यूनतम सजा दी जानी चाहिए क्योंकि वे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं और अगर दोषियों को सलाखों के पीछे रखा गया तो वे भूखे मर जाएँगे।

विशेष न्यायाधीश पीएन पांडे ने कहा कि अकरम को हत्या के अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जाएगा क्योंकि उसका इरादा एक मजदूर के भाई अतर सिंह को मारने का नहीं था। उसने भले ही तेज धार वाला हथियार इस्तेमाल किया, लेकिन उसने इससे गला नहीं काटा। मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक, तेज हथियार का इस्तेमाल हत्या के इरादे से नहीं किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय दंड संहिता के तहत गंभीर चोट पहुँचाने के लिए दोषी ठहराया गया।

इन धाराओं में अदालत ने सुनाई सजा

अभियुक्त मुस्तकीम, साजिद और अकरम प्रत्येक को धारा 323 सहपठित 34 आईपीसी के अपराध के लिए 06 (छह) महीने के साधारण कारावास और प्रत्येक को 500/- (पाँच सौ) रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई जाती है। जुर्माना अदा न करने पर 05 (पाँच) दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियुक्त मुस्तकीम, साजिद और अकरम प्रत्येक को 02 (दो) वर्ष के साधारण कारावास और 2000/- (दो हजार) रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। आईपीसी की धारा 324 के साथ पठित धारा 324 के अपराध के लिए प्रत्येक। जुर्माना अदा न करने पर 15 (पंद्रह) दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियुक्त मुस्तकीम, साजिद और अकरम प्रत्येक को धारा 504 आईपीसी के अपराध के लिए 01 (एक) वर्ष के साधारण कारावास और 1000/- (एक हजार) रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई जाती है। जुर्माना अदा न करने पर 07 (सात) दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियुक्त मुस्तकीम, साजिद और अकरम प्रत्येक को धारा 3 (1) के अपराध के लिए 02 (प्रत्येक को दो वर्ष का साधारण कारावास और 2,000/- (दो हजार) रुपये का जुर्माना) की सजा सुनाई जाती है।

एससी एवं एसटी (अत्याचार) अधिनियम में जुर्माना नहीं देने पर 15 (पंद्रह) दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

8 दिन में तीसरी बार ‘CM की कुर्सी’ पर दिखीं सुनीता, किया ‘केजरीवाल को आशीर्वाद’ अभियान का ऐलान: मैसेज भेजने के लिए दिए नंबर, INDI गठबंधन का प्रदर्शन रद्द

शराब घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुरुवार (21 मार्च, 2024) को गिरफ्तार किया गया। वो 1 अप्रैल तक ED की कस्टडी में रिमांड पर रहेंगे। पहले उन्हें एक सप्ताह के लिए कस्टडी में भेजा गया था, फिर इसे 4 दिन बढ़ा दिया गया। अब उनकी उपस्थिति में उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने बिना किसी पद के पार्टी की कमान सँभाल रखी हैं। अरविंद केजरीवाल वाली कुर्सी पर बैठ कर उन्होंने फिर से एक संबोधन दिया है। पीछे दोनों तरफ तिरंगा झंडा लगा हुआ है, एक तरफ भगत सिंह तो दूसरी तरफ भीमराव आंबेडकर की तस्वीर है।

सुनीता केजरीवाल ने इस दौरान लोगों को अरविंद केजरीवाल का वो भाषण सुनने की अपील की, जो उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट में दिया था। इस दौरान उन्होंने ED पर ही वसूली रैकेट चलाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके घर मंत्री-सचिव लोग आते रहते हैं, खुसुर-पुसुर करते रहते हैं, दस्तावेजों का अदन-प्रदान करते हैं, ऐसे में उन्हें क्या पता कि कौन क्या कर रहा है। अरविंद केजरीवाल ने ये भी कहा था कि ED उन्हें फँसा कर AAP को खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है।

सुनीता केजरीवाल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जो कुछ कोर्ट के सामने कहा उसके लिए बड़ी हिम्मत चाहिए, वो एक सच्चे राष्ट्रभक्त हैं, बिलकुल ऐसे ही हमारे स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों की तानाशाही से लड़ते थे। सुनीता ने कहा कि पिछले 30 वर्षों से वो उनके साथ हैं, देशभक्ति उनके रोम-रोम में भरी है, उन्होंने तानाशाही ताकतों को ललकारा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वो इस लड़ाई में अपने ‘भाई’/’बेटे’ का साथ नहीं देंगे? इस दौरान उन्होंने 8297324624 व्हाट्सएप्प नंबर भी जारी किया।

उन्होंने कहा, “हम एक अभियान शुरू कर रहे हैं – केजरीवाल को आशीर्वाद। इस व्हाट्सएप्प नंबर पर आप अपने अरविंद को आशीर्वाद दे सकते हैं, शुभकामनाएँ-दुआएँ-प्रार्थना दे सकते हैं। कई माताओं-बहनों ने उनके लिए मन्नत माँगी है, वो भी लिख कर भेजें। कइयों ने अरविंद केजरीवाल के लिए व्रत रखा है। ये सब लिख कर भेजिए। जो मन में आए, सब भेजिए। हर परिवार का हर सदस्य लिख कर भेजे, मैं आप सबके मैसेज उनको देकर आऊँगी और सब उन तक पहुँचेगा, उन्हें बहुत अच्छा लगेगा। आप किसी भी पार्टी से हों, कोई भी हों, सभी महिलाएँ-बच्चे-बुजुर्ग अमीर-गरीब सब उन्हें कुछ न कुछ लिख कर भेजें।”

उधर शुक्रवार (29 मार्च, 2024) को भाजपा दफ्तरों के सामने प्रस्तावित I.N.D.I. गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को रद्द कर दिया गया है। दिल्ली में शिक्षा, PWD और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय सँभाल रहीं आतिशी मार्लेना सिंह ने कहा कि अब ये विरोध प्रदर्शन 31 मार्च को होगा। कई वरिष्ठ नेताओं के इस विरोध प्रदर्शन में आने की सूचना थी, लेकिन अब ये रद्द हो गया है। रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन की योजना है। हालाँकि, अभी तक साफ़ नहीं है कि कौन सी पार्टियाँ और नेता इसमें शामिल होंगे।

17 साल की अंकिता को जिंदा जलाने वाले शाहरुख-नईम को उम्रकैद, NCPCR अध्यक्ष बोले- राजधर्म निभाए झारखंड सरकार, मौत की सजा के लिए करे अपील

झारखंड के दुमका में हिन्दू बालिका अंकिता को पेट्रोल डाल कर जला देने वाले शाहरुख और नईम को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर ₹25000 का जुर्माना भी लगाया है। इन दोनों ने मिलकर अगस्त 2022 में 17 वर्षीय हिन्दू बालिका अंकिता को सोते समय पेट्रोल डाल जला दिया था।

अंकिता के हत्यारों को यह सजा जिला अदालत ने सुनाई है। दुमका के जिला एवं अपर सत्र सह विशेष न्यायाधीश POCSO रमेश चंद्रा की ने शाहरुख और नईम उर्फ़ छोटू को सजा सुनाने के साथ ही उन पर ₹25000 का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना ना देने की दशा में इन दोनों को एक वर्ष की सजा अतिरिक्त काटनी होगी।

इस मामले में कोर्ट में सुनवाई के दौरान 51 गवाहों ने घटना का विवरण दिया था। दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश होने के लिए नहीं लाया गया था बल्कि उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। मामले में दोनों को सेंट्रल जेल में बंद किया गया है। शाहरुख और नईम को धारा 302 और 120बी के तहत यह सजा सुनाई गई है।

इस मामले में पर देश के बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के मुखिया प्रियंक कानूनगो ने कहा, “इन अपराधियों के समर्थन में बांग्लादेश के कट्टर इस्लामिक संगठनों ने सोशल मीडिया कैंपेन चलाया था। आयोग द्वारा इस मामले की जाँच रिपोर्ट में इन अपराधियों के अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिया होने का संदेह व्यक्त किया गया था, दुर्भाग्य से राज्य सरकार ने इस मामले में कोई पुख़्ता जाँच नहीं की और ना ही न्यायालय को इस तथ्य से अवगत करवाया।” उन्होंने कहा कि सरकार को राजधर्म निभाते हुए इनके खिलाफ हाईकोर्ट में मृत्युदंड के लिए अपील करे।

नईम और शाहरुख को इस मामले में 19 मार्च, 2024 को दोषी ठहराया गया था। इस मामले की एसपी की अध्यक्षता में गठित 12 सदस्यीय एसआइटी ने जाँच की थी। इसके बाद केस में 112 पेज की चार्जशीट दाखिल हुई थी और बाद में चार्ज फ्रेम करके गवाहों के बयान लिए गए थे। करीबन डेढ़ साल की लंबी बहस के बाद 19 मार्च 2024 को इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई और आखिरकार शाहरुख-नईम दोषी ठहराए गए

हिंदू लड़की को शाहरुख ने सोते में जलाया

बता दें कि झारखंड के दुमका में हिंदू लड़की के ऊपर हमला 23 अगस्त 2022 की सुबह हुआ था। खुद लड़की ने गंभीर अवस्था में पुलिस को अपने साथ घटित घटना की सारी जानकारी दी थी। इस दौरान उसने अपने ऊपर बनाए जा हे धर्मांतरण के दबाव का खुलासा भी किया था। उसने बताया था कि बगल वाला शाहरुख उसे आए दिन तंग करता था। उसे दोस्ती के लिए कहता था। लेकिन लड़की ने जब बात नहीं मानी, उसे डाँटा, तो उसने उसे जान से मारने की धमकी दी।

लड़की ने हमले से एक दिन पहले शाहरुख की शिकायत अपने पिता से भी की थी। इसके बाद वो सोने चली गई थी। लेकिन अगली सुबह जब उसकी आँख खुली तो उसकी पीठ जल रही थी। शाहरुख खिड़की से उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगाकर चला गया था। लड़की फौरन भागते हुए अपने पिता के पास गई थी लेकिन आग इतनी ज्यादा लग गई थी कि बड़ी मुश्किल से उसे बुझाया गया।

उसे अस्पताल लेकर पहुँचे तो पता चला कि वो 90 फीसदी जल चुकी थी। वो डॉक्टरों से पूछ रही थी कि उसे बता दिया जाए कि वो बचेगी या नहीं। डॉक्टर अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे, घरवाले भी उम्मीद में थे शायद उनकी बच्ची बच जाए लेकिन शरीर ज्यादा जल जाने की वजह से वो रिकवर नहीं हो पाई और उसका देहांत हो गया। जाते-जाते उसकी बस यही इच्छा थी कि उसे इंसाफ मिले। लड़की ने रोते हुए कहा था– “जिस तरह मैं मर रही हूँ वैसी ही मौत वो भी मरे।”

इस बीच पुलिस ने शाहरुख को अरेस्ट किया। लेकिन उसके चेहरे पर न डर था और न ही कोई मलाल। उलटा वो हँस रहा था और सीना चौड़ा करके मूँछों पर ताव देकर चल रहा था। वहीं नईम के बारे में पता चला था कि उसने हिंदू लड़की को लेकर ये कहा था कि अगर वो बात नहीं करती है तो उसके साथ यही होना चाहिए।

जो डर दूसरों में भरा, उसी डर से खुद मरा मुख्तार अंसारी: पूर्व DSP शैलेंद्र सिंह, माफिया पर POTA लगाने वाले पुलिस अधिकारी को ही मुलायम सरकार ने जेल में ठूँस दिया था

मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में हार्ट अटैक आने से हुई मौत के बाद अब पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह का बयान आया है। शैलेंद्र वही पूर्व अधिकारी हैं जिन्होंने 20 साल पहले मुख्तार के खिलाफ केस किया था और बाद में उन्हें खुद ही जेल जाना पड़ा था। अंसारी की मौत की खबर सुन पूर्व डीएसपी कहते हैं मुख्तार अंसारी ने जो डर दूसरों के मन में कायम किया था, वही डर उस पर भी हावी हो गया था। अंत में हार्ट अटैक से उसकी मृत्यु हो गई।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पूर्व अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया, “20 साल पहले साल 2004 में मुख्तार अंसारी का साम्राज्य चरम पर था। वह उन इलाकों में खुली जीप में घूमता था जहाँ कर्फ्यू लगा हुआ था। उस समय मैंने मुख्तार से एक लाइट मशीन गन (LMG) बरामद की थी। मुख्तार से एलएमजी की वह पहली बरामदगी थी। उसके बाद आज तक कोई ऐसी रिकवरी नहीं हुई। मैंने उस पर POTA(आतंकवाद निवारण अधिनियम ) के तहत केस दर्ज किया, लेकिन मुलायम सरकार उसे किसी भी कीमत पर बचाना चाहती थी।”

शैलेंद्र सिंह बताते हैं, “मुलायम सरकार द्वारा अधिकारियों पर दबाव डाला गया, आईजी-रेंज, डीआईजी और एसपी-एसटीएफ का तबादला कर दिया गया। यहाँ तक कि मुझे 15 के भीतर इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन मैंने अपने इस्तीफे में अपना कारण साफ लिखा और जनता के सामने रखा कि यह वही सरकार है जिसे आपने चुना था, जो माफियाओं को संरक्षण दे रही है और उनके आदेश पर काम कर रही है।”

उन्होंने बताया, “पुरानी सरकारों में हालात बहुत ही खराब थी। धीरे-धीरे लगाम लग रही है। कोर्ट फैसले दे रहे हैं जबकि दो दशक से निर्णय नहीं हो पा रहे थे। बेशक हालात अब बदले हैं। शायद हम नौकरी में रहे होते यह पक्ष कोई देख नहीं पाता कि पुलिस पर किस तरह का दबाव होता था। उस समय मैंने अपनी जान जोखिम में डाली थी। मुझे नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। उस समय मैं सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद अगर कहीं प्राइवेट जॉब भी करता तो कंपनी पर मुझे निकलवाले के लिए कॉल आ जाते थे। किराए पर मकान नहीं मिलता था। रात में सामान कहीं रख दिया तो सुबह खाली करना पड़ता था।”

शैलेंद्र सिंह कहते हैं, “मुख्तार अंसारी ने जो डर दूसरों के मन में कायम किया था, वही डर उस पर भी हावी हो गया था। अंत में हार्ट अटैक से उसकी मृत्यु हो गई। ऊपर वाले के यहाँ देर है, अंधेर नहीं। जो जैसा करता है, वैसा भरता है।”

मुख्तार अंसारी की मौत पर शैलेंद्र सिंह ने आजतक से भी बात की। उन्होंने कहा- “जिस तरीके की खबरें आ रही थीं कि मुख्तार अंसारी डरे हुए हैं, वह कोर्ट से अपने बचाव आदि की गुहार लगा रहे हैं और फिर उनकी मौत हो गई, तो ऐसा है कि आदमी अपने अंत समय में डर जाता है, उसके पाप उसके सामने आते हैं तो उसी डर की की वजह से उन्हें ये अटैक आया है। आपके कर्म आपके सामने आते ही हैं और कुछ गलत किया हुआ होता है तो उसकी हाय का नतीजा सामने आता ही है।”

बता दें कि पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने जब मुख्तार अंसारी के खिलाफ आवाज उठाई थी उस समय उनकी नौकरी को 10-11 साल ही हुए थे, लेकिन माफिया राज से प्रताड़ित होकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी जब उनकी नौकरी के 20-22 साल बचे थे। मुख्तार के खिलाफ आवाज उठाने के मामले में उनकी सराहना तो दूर उलटा उनके ऊपर इस मामले में मुलायम सरकार में केस दर्ज हुआ था और उन्हें ही दोषी दिखाते हुए जेल में डाल दिया गया था। साल 2021 में जब उनके ऊपर से सारे मामले हटे तब शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जब वो जेल में गए थे तब योगी आदित्यनाथ ने उनके परिवार से फोन करके कहा था, “जब मैं आऊँगा तो न्याय करूँगा।” शैलेंद्र सिंह ने भावुक होते हुए कहा था- “मेरा परिवार योगी आदित्यनाथ का आभारी रहेगा।”

‘AI कोई मैजिक टूल नहीं, डीपफेक से लग सकती है देश में आग’: बिल गेट्स से बोले PM मोदी, गिफ्ट किए तमिलनाडु के मोती से लेकर कश्मीर के केसर तक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने माइक्रोसॉफ्ट संस्थापक और विश्व की नामचीन हस्ती बिल गेट्स के साथ एक लम्बी बातचीत की है। इस दौरान पीएम मोदी ने गेट्स को भारत की तकनीकी क्षेत्र में प्रगति से अवगत करवाया है। उन्होंने गेट्स को नमो एप भी दिखाया जिसमें AI तकनीक का जबरदस्त इस्तेमाल है। बातचीत में पीएम मोदी और बिल गेट्स ने डीपफेक पर भी चिंता जाहिर की है। 45 मिनट लम्बी इस लम्बी बातचीत में उन्होंने भारत की डिजिटल यात्रा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।

बिल गेट्स ने पीएम मोदी से पूछा कि भारत AI को कैसे देखता है। पीएम मोदी ने इस पर कहा, “अगर हम AI को अपने आलसीपन को बचाने के लिए करते हैं तो यह इसके साथ अन्याय होगा। हमें AI के साथ मुकाबला करना होगा। हमें उससे आगे जाना होगा “

पीएम मोदी ने AI का टेस्ट लेने की एक घटना का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि भारत से अन्तरिक्ष में जाने वाले अन्तरिक्षयात्रियों से बातचीत के दौरान उन्होंने AI का टेस्ट ललिया था जिसकी कमियाँ उन्होंने बताई थी। पीएम मोदी ने AI के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता व्यक्त की। आप इस बातचीत को यहाँ देख सकते हैं।

उन्होंने कहा, ” हमें AI को मैजिक टूल नहीं समझना होगा। अगर AI को बिना ट्रेन किए हुए लोगों के हाथ में दे दी जाए तो उसके दुरूपयोग की बड़ी संभावना है। मैंने AI से जुड़े लोगों को सुझाव दिया है कि जो भी चीज AI से जनरेट की जाए, उस पर स्पष्ट रूप से AI जनरेटेड लिखा हो।” पीएम ने डीपफेक को लेकर कहा, “भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में अगर कोई डीपफेक का उपयोग करते हुए कुछ गलत चीज बना दे तो आग लग जाएगी। इसीलिए जरुरी है कि कंटेंट पर AI जनरेटेड और सोर्स स्पष्ट रूप से लिखा हो।”

पीएम मोदी ने भारत की डिजिटल यात्रा को दर्शाने वाले नमो एप को भी बिल गेट्स को दिखाया। बिल गेट्स इसमें उपयोग की गई तकनीक पर काफी आश्चर्यचकित हुए। पीएम मोदी ने नमो एप में डाला गया फोटो बूथ फीचर बिल गेट्स को दिखाया। इस फीचर का गेट्स ने इस्तेमाल भी किया। इसने उनकी पीएम मोदी के साथ सभी पुरानी फोटो दिखा दी। पीएम मोदी ने बिल गेट्स से भारत की डिजिटल यात्रा, ड्रोन दीदी स्कीम, G20 का आयोजन, कोविड वैक्सीन समेत नवीनीकृत ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए कामों की भी चर्चा की।

पीएम मोदी को इस बातचीत के बाद बिल गेट्स ने कुछ पुस्तकें भेंट की जो कि पोषण से सम्बंधित थीं। पीएम मोदी ने उन्हें ‘वोकल फॉर लोकल’ की तर्ज पर टेराकोटा से बनी हुई दो आकृतियाँ भेंट की। इसके साथ ही पीएम मोदी ने गेट्स को कुछ मोती भेंट किए जो कि तमिलनाडु से आए थे। इसके अलावा पीएम ने गेट्स को कश्मीर का पश्मीना स्कार्फ और केसर भेंट की। गेट्स ने इन गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद किया और कहा कि उन्हें यह मुलाक़ात याद रहेगी।

‘गोरखनाख बाबा का आशीर्वाद’: जिन पर मुख्तार अंसारी ने चलवाई थी 400 राउंड गोलियाँ-मरने के बाद कटवा ली थी शिखा… उनके घर माफिया की मौत पर आतिशबाजी

मऊ के गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उन लोगों के घर में जश्न का माहौल है जिन्होंने माफिया की गुंडागर्दी के चलते अपने अपनों को खोया। इसी क्रम में भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय, जिन्हें मुख्तार अंसारी ने मौत के घाट उतरवाया था, उनके घर कल (28 मार्च 2024) रात आतिशबाजी हुई। आतिशबाजी की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने मुख्तार अंसारी की मृत्यु की खबर सुनने के बाद कहा, “ये बाबा गोरखनाथ का आशीर्वाद है कि आज उनके दरबार से ये न्याय सुनने को मिला है। रमजान के पावन महीने में अल्लाह का भी ये न्याय मान सकता हूँ कि ऐसे अपराधी का पृथ्वी से अंत हुआ है।”

इसी तरह भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद की पत्नी व मोहम्मदाबाद से पूर्व विधायक अलका राय ने इस संबंध में खुशी जाहिर की। अलका राय ने अपने फेसबुक पर बेटे पीयूष राय के किए गए पोस्ट को शेयर किया। इसमें लिखा था- “कर्म के दायरे से जब तुम उतरोगे, तो उसकी सजा तुम्हें तड़पने तक नहीं छोड़ेगी।”

बता दें कि पूर्वांचल का बहुचर्चित कृष्णानंद हत्याकांड 29 नवंबर 2005 को हुआ था जिसमें मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा 29 अप्रैल 2023 को सुनाई गई थी। इस हत्याकांड के बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि इसमें हत्याकांड में 400 राउंड गोलियाँ चली थीं, जिसमें 2 पुलिसकर्मियों सहित कुल 7 लोगों की जान गई थी। कृष्णानंद के परिवार ने बताया था कि कृष्णानंद की हत्या के समय उनकी शिखा भी काटी गई थी।

आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस को ₹1700 करोड़ का नोटिस थमाया, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी खारिज कर दी थी पार्टी की याचिका: टैक्स असेसमेंट को दी थी चुनौती

आयकर विभाग ने गुरुवार (28 मार्च, 2024) को कॉन्ग्रेस को ₹1700 करोड़ का रिकवरी नोटिस भेजा है। यह नोटिस वर्ष 2017-18 से लेकर 2020-21 के लिए भेजा गया है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस की आयकर विभाग के खिलाफ याचिका खारिज कर दी।

आयकर विभाग द्वारा भेजी गई इस नोटिस में टैक्स के साथ ही जुर्माना और और ब्याज भी जोड़ा गया है। कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने कहा कि यह नोटिस उन्हें मिल गया है लेकिन इससे सम्बंधित कुछ दस्तावेज उन्हें नहीं मिले हैं।

इससे पहले गुरुवार को ही दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कॉन्ग्रेस को राहत देने से इनकार कर दिया। यह नोटिस उसी के बाद भेजा गया। दिल्ली हाई कोर्ट में कॉन्ग्रेस ने एक याचिका दायर करके 2017-18 से लेकर 2020-21 तक के टैक्स वसूलने को लेकर नोटिस भेजने का विरोध किया था।

दिल्ली हाई कोर्ट की यशवंत शर्मा और पुरुशेन्द्र कुमार की दो सदस्यीय बेंच ने यह याचिका खारिज की। इसे पहले वर्ष 2014-15 से लेकर 2016-17 तक के टैक्स के वसूलने को लेकर भी कॉन्ग्रेस ने याचिका लगाई थी, उसे भी कोर्ट ने खारिज किया था। नई याचिका भी इसी पुराने आधार पर ही खारिज हुई।

कोर्ट ने पिछले आदेश में कहा था कि कॉन्ग्रेस ने याचिका का रास्ता तब अपनाया जब टैक्स असेसमेंट की अंतिम तारीख नजदीक आ गई। कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रथम दृष्टया यह लगता है कि आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस के खिलाफ पक्के सबूत इकट्ठा किए हैं। इसी के साथ पुरानी याचिका पर भी कॉन्ग्रेस को कोई राहत नहीं मिली थी।

यह भी बताया जा रहा है कि 2014-15 से लेकर 2020-21 के अलावा अब 2021-22 से लेकर 2023-24 तक के टैक्स असेसमेंट का इन्तजार कर रही है। यह असेसमेंट 31 मार्च, 2024 के बाद जारी किया जा सकता है। इसके बाद कुल मिलाकर पार्टी के ऊपर 10 वर्षों के टैक्स असेसमेंट का भार होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस के खातों से ₹135 करोड़ की रिकवरी की थी। कॉन्ग्रेस से यह रिकवरी 2018-19 के लिए की गई थी। दरअसल, कॉन्ग्रेस ने वर्ष की आयकर भरने की अंतिम तारीख के एक महीने बाद अपने कागज जमा किए थे और साथ ही उन नियमों का उल्लंघन किया था जिसके अंतर्गत इसे आयकर भरने से छूट मिलती।

कॉन्ग्रेस ने इस वर्ष के आयकर दस्तावेजों में दिखाया था कि इसे चंदे में ₹14 लाख रूपए नकद में मिले। यह नियमों के विरुद्ध है। नियम है कि कोई भी पार्टी ₹2000 से अधिक का चंदा नकद में नहीं ले सकती। कॉन्ग्रेस ने इस नियम का उल्लंघन किया जिसके कारण इसे टैक्स में छूट नहीं मिली। इसके खिलाफ पार्टी ने याचिका भी दाखिल की थी।

कॉन्ग्रेस ने आयकर विभाग की इन नोटिस और रिकवरी की कार्रवाई पर आरोप लगाया है कि सरकार चुनाव से पहले उनके खाते सीज कर रही है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी के पास चुनाव लड़ने को भी फंड नहीं है, इसीलिए वह प्रचार आदि में भी पैसा नहीं खर्च पा रही। हालाँकि, आयकर विभाग का कहना है कि वह मात्र अपनी रिकवरी कर रहा है और उसने कोई भी खाते फ्रीज नहीं किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर कहा कि कॉन्ग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना रही है।