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जिसे जेल में मछली खिलाने के लिए खुदवा ली गई थी तालाब, उसे सुबह की नमाज़ के बाद किया जाएगा सुपुर्द-ए-ख़ाक: मुख़्तार अंसारी के शव वाले काफिले में 26 वाहन, बेटा पहुँचा सुप्रीम कोर्ट

मऊ से 5 बार विधायक रहे माफिया मुख़्तार अंसारी की मौत के 1 दिन बाद उसका बेटा उमर और बहू निखत बाँदा से शव लेकर गाजीपुर पहुँचे। चित्रकूट, कौशाम्बी और भदोही के रास्ते से काफिला गुजरा, जिसमें पुलिस की गाड़ियाँ भी बड़ी संख्या में थीं। शनिवार (30 मार्च, 2024) की सुबह उसे सुबह की नमाज के बाद सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बाँदा मेडिकल कॉलेज में दोपहर के 2 बजे उसका पोस्टमॉर्टम शुरू हुआ था। ढाई घंटे बाद परिवार को शव सौंप दिया गया। इसके बाद शव 400 किलोमीटर के सफर के लिए निकल गया।

मुख़्तार अंसारी के शव वाले काफिले में 26 गाड़ियाँ शामिल थीं, जिनमें 2 वज्र-वाहन भी थे। उधर मुख़्तार अंसारी के मौत के मामले में परिवार अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। जेल में बंद अब्बास अंसारी ने माँग की है कि वो अपने अब्बा के जनाजे में शामिल होना चाहता है। उसने सुप्रीम कोर्ट से जल्द से जल्द सुनवाई की माँग की है। शुक्रवार को गुड फ्राइडे की वजह से छुट्टी थी, जिस कारण उसने वेकेशन बेंच से सुनवाई की अपील की है। रानी दुर्गावती मेडिकल मॉडल में मुख़्तार अंसारी के शव का पोस्टमॉर्टम हुआ, वहीं कालीबाग कब्रिस्तान में उसे दफ़न किया जाएगा।

शव को दफ़नाने के लिए सुबह 10 बजे का समय मुक़र्रर किया गया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस मुद्दे पर कहा है कि जिन्होंने माफियाओं को राजनीतिक लाभ के लिए संरक्षण दिया, वो कुछ भी बयान देते रहें। उन्होंने कहा कि न्यायिक जाँच में कोई दिक्कत नहीं है, सच जानने का हक़ सबको है। उन्होंने जिक्र किया कि कैसे आजकल 25 वर्ष के युवा को भी हार्ट अटैक आ जाता है। उन्होंने पूछा कि मुख़्तार अंसारी किस कारण इतने वर्षों से जेल में था और उसे कौन संरक्षण देता था? पोस्टमॉर्टम में पुष्टि हुई है कि मुख़्तार अंसारी की मौत हार्ट अटैक से हुई।

उधर पाबंदियों के बावजूद मुख़्तार अंसारी के घर के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हैं। मुख़्तार अंसारी को वहीं दफनाया जाएगा, जहाँ उसके अम्मी-अब्बू की कब्र है। पुलिस ने सावधानी बरतते हुए मोहम्मदाबाद से मुस्लिम बहुल कमसरा को जोड़ने वाले बारा फिरोजपुर पीपा पुल को बंद कर दिया है। यहाँ एक दर्जन बड़े गाँवों में 50,000 मुस्लिम रहते हैं। इस पुल से मुख़्तार अंसारी के घर की दूरी मात्र 7 किलोमीटर है। बता दें कि कभी मुख़्तार अंसारी का रुतबा ऐसा था कि गाजीपुर जेल में उसे मछलियाँ खिलाने के लिए तालाब तक खुदवा ली गई थी, बड़े-बड़े अधिकारी उसके साथ बैडमिंटन खेलने आते थे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने AAP नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ CBI जाँच की अनुमति दी, जेल में बंद कैदी से ₹10 करोड़ की वसूली का मामला: I.N.D.I. गठबंधन ने बुलाई रैली

जहाँ एक तरफ शराब घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ED (प्रवर्तन निदेशालय) की गिरफ्त में हैं, वहीं अब पूर्व मंत्री व AAP नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने CBI जाँच की अनुमति दे दी है। ये फैसला ऐसे समय में आय है, जब विपक्षी नेता रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के खिलाफ विरोधी प्रदर्शन करने वाले हैं। सत्येंद्र जैन के खिलाफ ताज़ा कार्रवाई ‘प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (PoC) एक्ट’ के तहत की गई है।

मामला 10 करोड़ रुपए की रंगदारी से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि उन्होंने जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर से 10 करोड़ रुपए की वसूली की। सुकेश चंद्रशेखर का नाम अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस से जुड़ा था। साथ ही वो शराब घोटाले में भी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान दे चुका है। वसूली के समय सुकेश चंद्रशेखर तिहार जेल में बंद था। उप-राज्यपाल (LG) VK सक्सेना ने पिछले ही महीने इस मामले की जाँच CBI से कराए जाने की सिफारिश केंद्र को भेजी थी।

सत्येंद्र जैन को मई 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। रविवार (31 मार्च, 2024) को दिल्ली के रामलीला मैदान में I.N.D.I. गठबंधन की रैली होनी है, जिसके लिए चुनाव आयोग से उन्हें अनुमति भी मिल गई है। इसमें कई बड़े विपक्षी नेता शामिल होंगे। उधर अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता ने एक व्हाट्सएप्प नंबर लॉन्च कर के ‘केजरीवाल को आशीर्वाद’ अभियान जारी किया है और अपने पति को सच्चा राष्ट्रभक्त बताते हुए उनकी तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से की है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ‘मैं भी केजरीवाल’ वाला पैम्पलेट घर-घर लोगों में बाँट कर उन्हें रैली में आने के लिए कहा है। वहीं दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी का कहना है कि ED अरविंद केजरीवाल के फोन का पासवर्ड चाहती है, ताकि लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर AAP की रणनीति वो समझ सकें। जहाँ तक सत्येंद्र जैन की बात है, जेल में लजीज व्यंजनों का आनंद लेते हुए और एक कैदी से देह दबवाते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ था।

हिन्दू लड़की को फँसाने के लिए इंस्टाग्राम पर आदिल बन गया ‘आर्य पटेल’, जमानत याचिका ख़ारिज कर बोला कोर्ट – ये आज की पीढ़ी के लिए आँख खोलने वाला मामला

भरुच लव जिहाद मामले में सेशन कोर्ट ने आदिल अब्दुल पटेल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। करीब तीन माह पहले आदिल अब्दुल पटेल को पकड़ा गया गया था। इस मामले में कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए इसे ‘आज की पीढ़ी की लिए आँख खोल देने वाला केस’ बताया है। कोर्ट ने माना है कि आदिल अब्दुल पटेल ने एक योजना के तहत फर्जी आईडी बनाई और हिंदू लड़की को फँसाया। करीब चार साल तक उसने ऐसा किया। अगर आदिल को जमानत पर छोड़ दिया जाता है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।

ये मामला जनवरी में सामने आया था। जब भरुच की लड़की ने चावज गाँव के आदिल अब्दुल पटेल की बदमाशी को पकड़ा था, जो उसे 4 साल से गलत नाम-पहचान के साथ प्रेम संबंध रखे हुए था। लेकिन जब लड़की को सच्चाई का पता चला, तो वो उसके गाँव पहुँच गई और आदिल को जमकर पीटने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया था। इसके बाद भरूच ग्रामीण पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई थी और आदिल को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

आदिल ने मार्च 2024 में जमानत याचिका दाखिल की थी। आदिल ने दावा किया कि उसे फंसाने के लिए फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई है। ऐसे में जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो उसे जमानत दे दी जाए। उधर, सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का विरोध किया। मामले की जानकारी देते हुए बताया गया कि आदिल ने इंस्टाग्राम पर गलत आईडी बनाकर लड़की से दोस्ती की और मुस्लिम होने के बावजूद खुद को हिंदू युवक ‘आर्य पटेल’ बताया। इतना ही नहीं, सहानुभूति पाने के लिए उनके साथ रहने के बावजूद उसने यह झूठ भी फैलाया कि उसके माता-पिता की सालों पहले एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी।

सरकारी वकील ने कहा कि ऐसे आरोपितों की कार्यप्रणाली पर विचार किया जाना चाहिए। अगर उसे जमानत पर रिहा किया गया तो वह दोबारा यह हरकत कर सकता है और अन्य मासूम लड़कियाँ भी इसका शिकार बन सकती हैं। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि चूँकि आरोपित और पीड़िता दोनों एक ही गाँव के हैं, इसलिए रिहा होने पर आरोपित सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। सरकार की दलील थी कि आरोपी ने गंभीर अपराध किया है और ऐसी हरकत दोबारा न हो, इसके लिए समाज में कड़ा संदेश देने की जरूरत है।

कोर्ट ने माना-आदिल ने फर्जी आईडी बनाई

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वे मामले की खूबियों पर नहीं जा रहे हैं और सबूतों पर चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इस पर सुनवाई के दौरान चर्चा की जाएगी। लेकिन रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह स्पष्ट है कि आरोपित ने गलत आईडी बनाकर पीड़ित से संपर्क किया था। कोर्ट ने साफ कहा कि व्यक्तिगत रूप से मिलने के बाद भी आरोपित ने अपना असली नाम बताने के बजाय अपनी पहचान ‘आर्य पटेल’ बताई।

कोर्ट ने कहा, “आरोपित पहले से ही पीड़िता को गुमराह कर रहा था और उसने उसे प्रपोज किया था, जबकि वह शादीशुदा था और अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। दोनों पहले एक-दूसरे को नहीं जानते थे और आरोपित ने पीड़िता से संपर्क करने के लिए गलत नाम अपनाया और कुछ हद तक सफल रहा। इस तरह के कृत्य की निंदा की जानी चाहिए।”

रिहा किया गया तो ऐसे तत्वों को बढ़ावा मिलेगा: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि आदिल की कार्यप्रणाली को देखते हुए भी अगर उसे जमानत दे दी जाती है, तो ऐसा करने वालों को प्रोत्साहन मिले। वहीं, अगर इस आरोपित को बरी कर दिया जाता है, तो इससे उन तत्वों को लाइसेंस मिल जाएगा जो मासूम लड़कियों का शोषण करने का मौका तलाश रहे हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा, ”इस मामले में आरोपी ने न सिर्फ दूसरे धर्म की पीड़िता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है बल्कि अपनी पत्नी के साथ भी गलत किया है।” कोर्ट ने इस केस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह मामला आज की पीढ़ी के लिए आँखें खोलने वाला हो सकता है, जो दूसरे व्यक्ति के बारे में कुछ भी जाने बिना बिना सोचे-समझे सोशल मीडिया पर ऐसे प्रपोजल एक्सेप्ट कर लेते हैं।”

अदालत के आदेश की कॉपी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने साक्ष्यों, आरोपित की कार्यप्रणाली और तथ्यों पर विचार करते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। आदिल अभी भी जेल में रहेगा। यह आदेश 26 मार्च को दिया गया था। कोर्ट के आदेश की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

लालकृष्ण आडवाणी के घर जाकर उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, स्वास्थ्य कारणों से फैसला: 83 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में हैं BJP के वयोवृद्ध नेता

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर जाकर उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करेंगी। वयोवृद्ध भाजपा नेता के स्वास्थ्य को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। लालकृष्ण आडवाणी कई महीनों से किसी सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी वो स्वास्थ्य कारणों से ही अयोध्या नहीं जा पाए थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उनके घर पर ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें ‘भारत रत्न’ से नवाजेंगी।

इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा भी वहाँ मौजूद रहेंगे। इसके लिए रविवार (31 मार्च, 2024) की तारीख़ मुक़र्रर की गई है। लालकृष्ण आडवाणी मात्र 14 वर्षों की उम्र में 1941 में ही RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल हो गए थे। 1951 में उन्हें जनसंघ ने राजस्थान में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी और 6 वर्षों तक घूम-घूम कर उन्होंने जनता से संवाद बनाया। 1967 में दिल्ली महानगरपालिका परिषद का अध्यक्ष चुने जाने के साथ उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा।

लालकृष्ण आडवाणी का सार्वजनिक जीवन 7 दशकों से भी अधिक का रहा है। 96 वर्ष की उम्र में भी वो लिखने-पढ़ने में रुचि रखते हैं। लालकृष्ण आडवाणी लोकसभा में गाँधीनगर और नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं उन्हें दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी चुना गया था। 3 बार उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सँभाली। जब उन्हें ‘भारत रत्न’ दिए जाने की घोषणा हुई, तब वो काफी भावुक हो गए थे और उनकी आँखों में आँसू थे।

वहीं 29 मार्च को कर्पूरी ठाकुर, PV नरसिम्हा राव, MS स्वामीनाथन और चौधरी चरण सिंह को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। उनके परिवार इन दिवंगत हस्तियों की जगह ये सम्मान ग्रहण करेंगे। लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ मिलना इसीलिए भी विशेष है, क्योंकि क्योंकि राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका अतुलनीय योगदान है। उनकी ही रथयात्रा के बाद ये आंदोलन जन-आंदोलन बना था। उन्हें बिहार में लालू यादव की सरकार ने गिरफ्तार करवा दिया था, जिसके बाद केंद्र में VP सिंह की सरकार गिर गई थी।

संदेशखाली की जो बनीं आवाज, उनका बैंक डिटेल से लेकर फोन नंबर तक सब किया लीक: NCW से रेखा पात्रा ने की TMC नेता की शिकायत, कहा- यह निजता पर हमला

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार रेखा पात्रा ने अपनी ‘निजता के उल्लंघन’ के आरोप में तृणमूल कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार देबांगशु भट्टाचार्य के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दी है। इसके साथ उन्होंने एक पत्र राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी लिखा है।

अपनी शिकायत में रेखा पात्रा ने आरोप लगाया है कि तामलुक लोकसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार एवं पार्टी के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ प्रमुख भट्टाचार्य ने उनकी व्यक्तिगत जानकारी और बैंक खाते का विवरण सार्वजनिक किया।

रेखा पात्रा के वकील ने दायर करवाई गई शिकायत में कहा, “हाल ही में, तामलुक के टीएमसी उम्मीदवार देबांगशु भट्टाचार्य के फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट के माध्यम से, मेरी मुवक्किल के निजी विवरण, जैसे फोन नंबर, बैंक खाता विवरण, स्वास्थ्य साथी योजना विवरण, साथ ही दुआरे सरकार योजना का विवरण साझा किया, जो मेरी मुवक्किल की निजता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।”

बता दें कि देबांगशु भट्टाचार्या टीएमसी के सोशल मीडिया सेल के हेड हैं जिन्होंने 2021 में ‘खेला होबे’ गाने को कंपोज किया था। इस बार वह भाजपा प्रत्याशी अभिजीत गंगोपाध्याय के खिलाफ टीएमसी की ओर से उतारे गए हैं।

वहीं, रेखा पात्रा की बात करें तो उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की सासंद नुसरत जहाँ के खिलाफ बशीरहाट से उतारा है। उनके नामांकन दाखिल करने के बाद टीएमसी नेता की वॉल पर रेखा की डिटेल शेयर करने वाला पोस्ट सामने आया। इसे देख भाजपा नेताओं ने आवाज उठाई। ओछी हरकत का विरोध करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी को थोड़ी शर्म आनी चाहिए। उन्होंने एक महिला उम्मीदवार की जानकारी को शेयर कर दिया है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस संबंध में चुनाव आयोग से फौरन एक्शन लेने को कहा ताकि बंगाल के लोगों का पर्सनल डाटा सुरक्षित रह सके और कोई इसका गलत इस्तेमाल न करे।

कभी इस्लामी आतंकवाद से त्रस्त, आज ₹2 लाख करोड़ की इकोनॉमी: 1600+ आतंकी ढेर, 370 हटाने के बाद GDP दोगुनी… जानिए मोदी राज में कितना बदला जम्मू-कश्मीर

आज से कुछ साल पहले तक जम्मू कश्मीर से आतंक की खबरों का सामने आना रोज की बात हो चुका था। रोज किसी ना किसी इलाके में आतंकी हमला और फिर आम नागरिकों और सुरक्षाबलों के जवानों का मारा जाना बदस्तूर जारी था। इस आतंक के कारण जम्मू कश्मीर का आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान हो रहा था। हालाँकि, मोदी सरकार के बीते कुछ सालों में यह स्थिति बदल गई है। राज्य के सुरक्षा हालात और आर्थिक स्थिति में लगातार 2014 के बाद से बदलाव आया है।

जम्मू कश्मीर में आतंक की घटनाएँ अब दहाई आँकड़ों में सिमट गई हैं जबकि कश्मीर घाटी से अब बेहद कम युवा आतंक की तरफ रुख कर रहे हैं। इन सबके अलावा राज्य के टूरिज्म में जबरदस्त बढ़ावा मिला है। इससे राज्य की अर्थव्यस्था भी बढ़ी है। इन सबके पीछे सरकार की आतंक पर मजबूत कार्रवाई, अनुच्छेद 370 का हटना और साथ ही विकास कार्यों को चालू करना जैसे कारण प्रमुख हैं।

अनुच्छेद 370 के बाद आतंक में आई कमी

मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय लिया था। इससे पहले जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाएँ लगातार हो रही थीं। जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकी लगातार लोगों का खून बहा रहे थे। सेना और अर्धसैनिक बलों के प्रयासों से यह लगातार घटता जा रहा है। गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आँकड़े के अनुसार, वर्ष 2018 में जम्मू कश्मीर में आतंक की 614 वारदात हुई थीं। यह 2019 में घट कर 594 हो गईं। इसके बाद इनमें लगातार गिरावट जारी रही है।

आँकड़ों के अनुसार, जम्मू कश्मीर में 2020 में आतंक की 220 घटनाएँ हुईं। यह घटनाएँ 2023 में घट कर 43 पर आ गईं। यानी 2018 के दौरान जहाँ औसतन हर महीने 51 घटनाएँ हो रही थी जो कि 2023 में औसतन 3 पर आ गईं। मोदी सरकार के अंतर्गत आतंक की घटनाओं में इस गिरावट के पीछे सेना का आंतकियों की घुसपैठ रोकना, जमीन पर आतंकियों के फंड जुटाने और माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई करना और जम्मू कश्मीर पुलिस को मजबूत करने जैसे कारण महत्वपूर्ण रहे।

आतंकी हमलों से होने वाला नुकसान भी कम

जम्मू कश्मीर आतंकी हमलों के कारण सुरक्षा बलों के साथ ही आम नागरिकों की जान भी जाती रही है। जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों में देश ने बड़ी संख्या में जवानों को खोया है। यह स्थिति भी बदलने लगी है। गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आँकड़े बताते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने से पहले यानी 2019 में देश ने 80 जवान जम्मू कश्मीर में खोए थे। यह इसी दौरान 39 आम नागरिकों को भी आतंक की भेंट चढ़ना पड़ा था। हालाँकि, आतंक पर लगातार कार्रवाई की वजह से यह स्थिति बदल गई।

मोदी सरकार जम्मू कश्मीर

2023 आते-आते जम्मू कश्मीर से आने वाली ऐसी खबरों पर ब्रेक लगा है। 2023 में जम्मू कश्मीर में 13 नागरिकों और 25 सुरक्षा बलों के जवानों को आतंक के चलते जान गँवानी पड़ी है। यह आँकड़ा बीते कुछ वर्षों में सबसे कम है। आतंकी हमलों में कमी के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अब सीमा पार से ज्यादा आतंकी देश में नहीं घुस पा रहे और साथ ही घाटी से नए आतंकी तैयार नहीं हो रहे। इससे जम्मू कश्मीर में आतंकियों की मौजूदगी में भी कमी आई है।

एक आँकड़ा बताता है कि वर्ष 2018 में जम्मू कश्मीर में सबसे अधिक 257 आतंकी मारे गए थे। इनमे से बड़ी संख्या में वह आतंकी थे जो सीमा पार पाकिस्तान से देश में आए थे। सेना के लगातार आतंकियों का सफाया करने के कारण यह संख्या घट 2023 में मात्र 72 पर आ गई। इससे साफ़ हुआ कि जम्मू कश्मीर में आतंकियों की मौजूदगी घटी है। राज्य में पथराव की घटनाएँ भी खत्म हो चुकी हैं। वर्ष 2016 में राज्य में 2650 से अधिक पत्थरबाजी की घटनाएँ हुई थी, 2023 में यह घटनाएँ नगण्य हो गईं।

मोदी सरकार जम्मू कश्मीर

मोदी सरकार में आतंक घटा, फला-फूला कश्मीर

मोदी सरकार में जम्मू कश्मीर में आतंक के घटने का सबसे बड़ा असर यहाँ सामान्य जनजीवन पर पड़ा है। जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था में इस कारण से काफी तेजी आई है। सरकार की योजनाओं ने भी लोगो के जीवन में बड़ा प्रभाव डाला है। आँकड़ा बताता है कि यहाँ की सुरक्षा स्थिति सुधरने के कारण 2023 में जम्मू कश्मीर में 2.11 करोड़ पर्यटक आए। यह संख्या 2015 में मात्र 1.33 करोड़ थी थी। इस प्रकार देखा जाए तो पर्यटकों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

राज्य अर्थव्यवस्था में भी बड़ा बदलाव बीते वर्षों में देखने को मिला है। जम्मू कश्मीर के आर्थिक सर्वे के मुताबिक़, 2014-15 में राज्य की अर्थव्यस्था का आकार ₹98366 करोड़ था। यह अब बढ़ कर ₹2.25 लाख करोड़ हो चुका है। यानी राज्य की अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के बीते लगभग 10 वर्षों में दोगुनी से भी अधिक बढ़ी है।

राज्य के लोगों को भी इस दौरान काफी सुविधाएँ मिली हैं। जम्मू कश्मीर में जल जीवन मिशन के तहत अब 77% जनसंख्या सीधे नल से जल पा रही है। आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के 14 लाख से अधिक घरों में सीधे नल से जल पहुँच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में 47 हजार से अधिक घरों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 21 हजार से अधिक घर पूरी तरीके से बन भी चुके हैं। सरकार यहाँ अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक पैसा घर बनाने के लिए दे रही है। राज्य में दो नए AIIMS भी मोदी सरकार ने बनाए हैं।

सुरक्षा की स्थिति सुधरने से कश्मीर में अब बड़े आयोजन हो रहे हैं। हाल ही में श्रीनगर में हुआ G20 का आयोजन हो या फिर डल झील के किनारे हुई फार्मूला-4 रेस, यह दिखाती है कि राज्य में अब बाहर के लोग आने से डरते नहीं है। यह यहाँ की बदलती स्थिति का परिचायक है।

‘धरती का बोझ खत्म हुआ, अनाथ हुए परिवारों-बच्चों के लिए खुशी की बात’: मुख्तार अंसारी की मौत के बाद अलका राय ने बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन, साथ में बेटा भी

माफिया मुख़्तार अंसारी गुरुवार (28 मार्च, 2024) को बाँदा जेल में हार्ट अटैक आया, अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मुख़्तार अंसारी पर 60 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें नवंबर 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या भी शामिल है। कृष्णानंद राय ने 2002 के विधानसभा चुनाव में मुख़्तार के भाई अफजाल अंसारी को हरा कर जीत दर्ज की थी। उनकी हत्या के लिए 400 राउंड गोलीबारी की गई थी। इस नरसंहार में कुल 7 लोग मारे गए थे।

दरअसल, मुख़्तार अंसारी ने उनके करीबियों की हत्या का सिलसिला इससे महीनों पहले शुरू कर दिया था और एक-एक कर कई लोग मारे गए थे। अब मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर भगवान शिव का दर्शन किया। उनके साथ उनके बेटे पीयूष कुमार राय भी थे। पीयूष कुमार राय ने कहा कि जो फैसला न्याय के मंदिर में अधूरा रह गया था, आज भगवान के मंदिर में वो फ़ैसला हो गया है।

उन्होंने अपराधी के अपराध के बही-खाते का अंत होने की बात करते हुए वीडियो शेयर कर जानकारी दी कि मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद गाजीपुर में दीवाली जैसा माहौल है। उन्होंने कहा कि भगवान के घर में देर है, अंधेर नहीं। वहीं उनकी माँ अलका राय ने कहा कि उन्हें बाबा विश्वनाथ पर पूरा भरोसा था, उनकी कृपा से आज उन्हें न्याय मिला है। अलका राय ने कहा कि जितने भी परिवार या बच्चे अनाथ हुए हैं, बड़ी ख़ुशी की बात है कि ऐसे अपराधी का अंत हुआ है, धरती का बोझ खत्म हुआ है।

अलका राय ने बताया कि वो हमेशा बाबा के दरबार में न्याय के लिए आती थीं। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद परिवार ने होली नहीं मनाई थी, लेकिन आज का दिन उनके लिए होली जैसा है। अलका राय ने इस दौरान विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे साजिश के आरोपों को नकार दिया। वहीं पीयूष कुमार ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के लिए एक अपराधी में मजहब ढूँढा जा रहा है। उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में ईश्वर का ये फैसला आया है।

मजाक-मजाक में दोस्त ने गुदाद्वार में कम्प्रेशर से भर दी हवा, आँत फटने से हो गई मौत: बेंगलुरु में मैकेनिक गिरफ्तार

बेंगलुरु में एक 24-वर्षीय युवक के लिए एक ‘शरारत’ जानलेवा बन गई। मजाक-मजाक में दोस्त ने उसके प्राइवेट पार्ट पर एयर कंप्रेसर लगा दिया, जिससे वो सर्विस के बाद बाइक को सुखा रहा था, लेकिन इससे उसके मलाशय में हवा भर गई और आंत फट गई। इस घटना से तुरंत उसके प्राइवेट पार्ट से खून बहने लगा और अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने सर्विस सेंटर के कर्मचारी को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का है, जहाँ सोमवार को योगेश (24 वर्ष) नाम का युवक अपनी बाइक सर्विस कराने अपने दोस्त मुरली (23 वर्ष) की गराज पर गया था। दोनों बाइक सर्विस के दौरान ही मजाक रहे थे। उसी दौरान मुरली ने कंप्रेसर से हवा योगेश के चेहरे की ओर घुमा दिया। इससे योगेश झुक गया, तो उसने मजाक में ही कंप्रेसर का रुख उसके पीछे की तरफ प्राइवेट पार्ट के सामने कर दिया।

कंप्रेसर का प्रेसर इतना ज्यादा था कि वो उसके प्राइवेट पार्ट को चीरता हुआ उसके मलाशल में चला गया। योगेश घायल होकर तुरंत गिर गया और वहाँ भगदड़ मच गई। इसके तुरंत बाद उसे अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिव बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। मजाक-मजाक में योगेश की जान जाने से लोग हैरान हैं। हालाँकि इस मामले में पुलिस ने हत्या नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है और आरोपित मुरली को गिरफ्तार कर लिया है।

पिछले साल गुजरात में भी हुई थी ऐसी ही घटना

कर्नाटक की राजधानी से आए इस मामले पर लोग हैरानी जता रहे हैं। ऐसी ही एक घटना पिछले साल नवंबर में गुजरात में हुई थी। जहाँ अहमदाबाद के वटवा जीआईडीसी स्थित कंपनी में 19 साल के पंकज राय की जान चली गई थी। उस मामले में उसके दोस्त प्रकाश ने मजाक-मजाक में ही उसके प्राइवेट पार्ट में कंप्रेसर से हवा भर दी थी, जिसकी वजह से पंकज का पेट फूल गया था और उसकी आँतों के साथ ही मलाशय फटने से उसके मौत हो गई थी।

‘अब्बा ने 10 दिनों से नहीं किया था पैखाना, दिल्ली AIIMS के डॉक्टर करें पोस्टमॉर्टम’: मुख्तार अंसारी के बेटे की डिमांड, मौत की न्यायिक जाँच का आदेश

गाजीपुर, मऊ और वाराणसी में आतंक का पर्याय रहे माफिया मुख़्तार अंसारी की गुरुवार (28 मार्च, 2024) को बाँदा जेल में हार्ट अटैक आया, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब अगले दिन उसके शव के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की गई है। 5 डॉक्टरों की टीम ने गैंगस्टर के शव का पोस्टमॉर्टम किया। साथ ही विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। हालाँकि, उसके बेटे उमर ने माँग की थी कि दिल्ली AIIMS में ये प्रक्रिया पूरी कराई जाए, क्योंकि उसे स्थानीय चिकित्सा प्रणाली प्रशासन व सरकार पर भरोसा नहीं है।

उमर अंसारी ने लिखा था कि उसके अब्बा ने आरोप लगाया था कि जेल में धीमा ज़हर दिया जा रहा है। उसने लिखा कि जब वो बाँदा जिला अस्पताल में अपने अब्बा को देखने पहुँचा था तब उसे अंदर नहीं जाने दिया, जिसमें उसे साजिश नज़र आ रही है। बकौल उमर अंसार, मुख़्तार ने उसे मौत वाले दिन फोन पर ये भी बताया था कि 10 दिन से उसे शौच नहीं हुआ है और कहा था – “उमर बेटा, मैं बचूँगा नहीं”। साथ ही उसने आरोप लगाया है कि उसके अब्बा की हालत गंभीर होने की सूचना उसे न अस्पताल ने दी, न जेल प्रशासन ने।

वहीं मुख़्तार अंसारी की मौत की अब न्यायिक जाँच भी होगी। बाँदा के चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट भगवान दास गुप्ता की अदालत ने एडिशनल CJM गरिमा सिंह से कहा है कि वो मुख़्तार अंसारी की मौत की जाँच कर के 1 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपें। बाँदा के जिलाधिकारी ने भी इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं और 3 सदस्यीय कमिटी गठित की है। मौत वाली रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी DGP के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें ताज़ा हालात पर चर्चा की गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर मंथन हुआ।

मुख़्तार अंसारी पर 60 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से एक भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या वाला मामला भी था। उनकी पत्नी अलका राय ने अब काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की है। जुमे की नमाज को लेकर मऊ और गाजीपुर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर के रखी गई है। उन्होंने बताया कि उनके पति की हत्या के बाद परिवार ने कभी होली नहीं मनाई, आज का दिन उनके लिए होली है। मुख़्तार अंसारी 5 बार मऊ से विधायक रहा था।

‘जो बहन-बेटी का भाव लगाएँ वो…’ : मंडी में ‘राष्ट्रवादी आवाज’ बनकर कंगना रनौत ने किया मेगा रोड शो, माँ ने भी सुप्रिया श्रीनेत को सुनाया

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत मंडी से इस बार चुनावी मैदान में हैं। आज उन्होंने मंडी में अपना रोडशो भी किया। इस रोड शो के दौरान उन्होंने मंडी की जनता के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनता उन्हें हिरोइन नहीं बल्कि अपनी बहन-बेटी समझें। विपक्ष को लेकर वह बोली जो लोग बहन-बेटी का भाव तय करें वो मंडी की जनता के नहीं हो सकते

कंगना ने रोड शो के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “यह मत सोचना कि कंगना हीरोइन है, वह स्टार है। कंगना को अपनी बहन, अपनी बेटी समझो। सब मेरा परिवार हैं। इस बार मंडी की जनता दिखा देगी कि हमलोगों के दिल में क्या है।”

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “आप यहाँ बड़ी भीड़ देख सकते हैं। बहुत सारे लोग यहाँ आए हैं। उन सभी को गर्व है कि मंडी की बेटी, मंडी की राष्ट्रवादी आवाज इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगी। इस चुनाव में बीजेपी के लिए विकास ही मुख्य मुद्दा है।” कंगना बोलीं, “हमारे नेता नरेंद्र मोदी जिस तरह से हमें गाइड करेंगे, उस दिशा में हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे। मंडी की जनता दिखा देगी कि उनके दिल में क्या है।”

बता दें कि एक ओर कंगना रनौत जोर शोर से अपना प्रचार करने में जुटी है तो वहीं दूसरी ओर उनकी माँ आशा ने सुप्रिया श्रीनेत द्वारा की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी के लिए अपशब्द सुनकर बुरा लगा। कंगना की माँ सुप्रिया श्रीनेत ने कहा- “उनके भी घर में बेटियाँ और बहुएँ हैं। अगर वह ऐसा बोलती हैं तो उन्हें सोचना होगा कि उन्हें अपने घर की बहू-बेटियों के लिए कैसा लगेगा। जैसा उन्हें लगेगा वही दर्द मुझे है।”

कंगना ने कहा, “कॉन्ग्रेस से मेरा नॉमिनेशन बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने अपनी कुराजनीति शुरू कर दी। उनके शीर्ष नेता कहने लगे ये जो शक्ति है इसे मुझे नष्ट करना है। उनकी प्रवक्ता मंडी की लड़कियों के क्या भाव चल रहे हैं। इस तरह की नीच और अभद्र बातें सुनकर किसका दिल नहीं घबराएगा।”

वह बोलीं, इस मंडी का नाम ऋषि मांडव के नाम पर रखा गया था। यहाँ ऋषि पराशर ने इतनी तपस्या की थी। यहाँ शिवरात्रि का सबसे बड़ा मेला होता है। इस मंडी के बारे में सोचना कितनी नीचता की बात है। उन्होंने मंडी की जनता से कहा कि जो लोग बेटी-बहनों का भाव लगाएँ वो आपके कभी नहीं हो सकते।