भारतीय मूल के अमेरिकी पवन दावुलुरी को मल्टीनेशनल कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईआईटी मद्रास से पढ़े पवन दावुलुरी को माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज और सरफेस (Windows & Surface) का हेड बनाया गया है। ये जिम्मेदारी पहले पानोस पनय संभाल रहे थे, लेकिन उन्होंने अमेजन में शामिल होने के बाद माइक्रोसॉफ्ट की सारी जिम्मेदारियाँ छोड़ दी थी। ऐसे में अब पवन के पास विंडोज और सरफेस दोनों की ही जिम्मेदारी आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब वो राजेश झा को रिपोर्ट करेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट में विंडोज और सरफेस ग्रुप्स को अलग-अलग रखा गया था, लेकिन अब उन्हें फिर से एक कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पवन दावुलुरी 23 साल से माइक्रोसॉफ्ट में काम कर रहे हैं। उन्होंने मद्रास आईआईटी से पढ़ाई की है। उन्होंने बी.टेक के बाद अमेरिका की मेरीलैंड यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की औऱ तभी से माइक्रोसॉफ्ट के साथ जुड़ गए थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पवन दावुलुरी राजेश झा को रिपोर्ट करेंगे। राजेश झा माइक्रोसॉफ्ट के एक्सपीरियंस एंड डिवाइसेस के हेड हैं। पवन दावुलुरी की नियुक्ति के बारे में राजेश झा के इंटरनल मेल से ही पता चला था। उन्होंने ही माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारियों को भेजे इंटरनल मेल में इस बात की जानकारी दी थी कि अब विंडोज-सरफेज डिवीजन के हेड पवन दावुलुरी होंगे। विंडोज टीम एआई, सिलिकॉन और माइक्रोसॉफ्ट एआई टीम के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगी।
पवन दावुलुरी अब वैश्विक कंपनियों में लीडरशिप के उस ग्रुप में शामिल हो गए हैं, जिसमें गिने-चुने भारतीय अमेरिकी कंपनी में लीडरशिप के रोल में हैं। इसमें सत्या नडेला और सुंदर पिचाई जैसे नाम शामिल हैं। पवन को माइक्रोसॉफ्ट के विंडो और सरफेस में हेड बनने के बाद कितनी सैलरी मिलेगी अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर महेश पंचाग्नुला ने ईटी से बातचीत में कहा, “हमें पवन जैसे पूर्व छात्रों को माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों में नेतृत्व के पदों पर काम करते हुए देखकर खुशी हो रही है, जो हमारे दैनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह देखना सौभाग्य की बात है कि जो छात्र यहाँ से निकले हैं, वो वैश्विक कंपनियों में लीडरशिप पोस्ट पर हैं।”
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में नेपाल सीमा के पास से सशत्र सीमा बल (SSB) और पुलिस ने 2 चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों अवैध तौर पर भारत में घुसने का प्रयास कर रहे थे। गिरफ्तार चीनियों में एक महिला और दूसरा पुरुष है। दोनों के पास से चीन और नेपाली सिम के अलावा कई अन्य सामान बरामद हुए हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर के जेल भेज दिया है। मामले की जाँच की जा रही है। यह गिरफ्तारी मंगलवार (26 मार्च, 2024) को हुई है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला सिद्धार्थनगर के थानाक्षेत्र मोहाना का है। पुलिस ने बताया कि मंगलवार को अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत टीम गश्त कर रही थी। इस गश्ती दल में पैरामिलिट्री SSB के जवान भी शामिल थे। तभी बभनी तिराहे के पास से 1 महिला सहित 2 संदिग्ध लोग नेपाल के रास्ते भारत की सीमा में घुसते नजर आए। पुलिस ने इन्हे रोक कर पूछताछ की तो पुरुष का नाम झोउ पुलिन (ZHOU PULIN) और महिला का नाम युवान युहान (YUAN, YUHAN) निकला। झोउ पुलिन चीन के सिचुआन प्रांत का निवासी है जबकि युआन युहान जोंगकिंग जिले की रहने वाली है।
— Siddharthnagar Police (@siddharthnagpol) March 26, 2024
पुलिस ने इनकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान इनके पास से 1-1 चीनी पासपोर्ट, नेपाल के 2 वीजा, एप्पल और हॉनर कम्पनी के 2 मोबाइल फोन, नेपाल और चीन के 2-2 सिम, 2 बैगों में कुल 9 कार्ड बरामद हुए। पुलिस टीम ने इन दोनों से पूछताछ की। बाद में इन पर मोहाना थाने में धारा 14 (A) के तहत FIR दर्ज कर ली गई। दोनों को गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया गया है जहाँ से इन्हे जेल भेज दिया गया है। सिद्धार्थनगर के एडिशनल एसपी ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया है कि दोनों चीनियों के पास भारत में इंट्री करने का कोई वैध कागज नहीं था। पुलिस आगे की जाँच व कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र सत्यम सुराणा के खिलाफ स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन के दौरान नफरती अभियान चलाया जा रहा है। ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि वो पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में हो रहे विकास की पैरवी करते हैं। सत्यम सुराणा वही भारतीय छात्र हैं जो पिछले साल खालिस्तानियों द्वारा फेंके गए तिरंगे को उठाने की वजह से चर्चा में आए थे और अब वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में चल रही घृणित राजनीति के शिकार हैं।
हाल में सत्यम ने इसकी जानकारी अपने एक पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने 26 मार्च को जारी एक वीडियो में बताया कि वो जनरल सेक्रेट्री पद का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ नफरती और बदनामी भरा कैंपेन चलाया जाना शुरू हो गया है। उनके अनुसार, ऐसा अभियान चुनाव वोटिंग से ठीक 12 घंटे पहले बहुत ही सुनियोजित ढंग से शुरू हुई है। इस दौरान उन्हें बीजेपी से जुड़ा बताया गया और फासीवादी तक कहा गया है।
सत्यम सुराणा ने इसकी जानकारी अपने ट्वीट में दी। उन्होंने लिखा, “आजकल लोग भारत विरोधी इसलिए हैं क्योंकि वो मोदी विरोधी ह,। इन लोगों ने मुझे प्रताड़ित करने का प्रयास किया। मुझे खारिज किया क्यों मैं पीएम मोदी और भाजपा को सपोर्ट करता हूँ, राम मंदिर के लिए आवाज उठाता हूँ। भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में हुए विकास की बात करता हूँ, आतंकवाद के खिलाफ बोलता हूँ और भारत के पक्ष में बात रखता हूँ।”
People are now Anti-India because they are Anti-Modi‼️
They attempted to harass me. I was cancelled, I was slurred.
Why? – Because I supported PM Modi. – Because I supported BJP. – Because I spoke up for the truth when the Ram Mandir was built. – Because I supported the… pic.twitter.com/OArzoof3aN
उन्होंने पोस्ट में अपने खिलाफ चलाए जा रहे नफरती अभियान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एलएसई चुनाव फरवरी और मार्च की शुरुआत में घोषित किए गए थे। इस दौरान उन्होंने अपना नामांकन महासचिव पद के लिए दाखिल किया। लेकिन, जब बारी कैंपेन की आई तो उन्होंने देखा कि 14-15 मार्च को, उनके पोस्टरों को फाड़ दिया गया था। उन्होंने इस हरकत की शिकायत अधिकारियों से की। बाद में उनके पोस्टर में उनके चेहरे पर क्रॉस के निशान लगा दिए गए और लिखा गया- “सत्यम के अलावा कोई भी।”
सत्यम बताते हैं कि इस तरह से उनका चुनावों में बहिष्कार करवाया जा रहा है। 17 मार्च को LEC के सभी ग्रुपों में मैसेज सर्कुलेट किए गए। दावा किया गया कि वह भारतीय जनता पार्टी के समर्थक हैं और फासीवादी, इस्लामोफोबिक, ट्रांसफोबिक हैं। इसके अलावा मैसेजों में ये भी लिखा था कि भारत सरकार और मौजूदा प्रतिष्ठान बहुत देशद्रोही और विवादस्पद हैं।
सत्यम कहते हैं कि उन्हें शुरू में उनके घोषणापत्र के कारण बहुत समर्थन मिला था क्योंकि उसमें सारी जरूरी मुद्दे उठाए गए थे और वो बिलकुल राजनीतिक नहीं था, लेकिन उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण एजेंडे के साथ उनकी बदनामी करने वालों ने सारी मेहनत को बर्बाद कर दिया।
सत्यम कहते हैं कि उनकी वाली पोस्ट पर तीन लोग खड़े हैं लेकिन ऐसा अभियान सिर्फ उनके खिलाफ शुरू हुआ। वह बताते हैं कि जब मैसेज आने शुरू हुए तो टीम की पूरी नैतिक चेतना चकनाचूर हो गई। उन्होंने अपने साथ हुई पिछली घटना का भी जिक्र किया।
सत्यम ने भारतीय उच्चायोग के सामने हुए तिरंगा प्रकरण को याद करते हुए बताया, “अक्टूबर की शुरुआत में, मैं खबरों में था क्योंकि मैंने खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों के बीच भारतीय उच्चायोग के बाहर राष्ट्रीय ध्वज उठाया था। मुझे मीडिया कवरेज पाने का सौभाग्य मिला। राष्ट्रीय मीडिया चैनलों ने मेरा इंटरव्यू भी लिया था।” लेकिन उसकी दौरान सत्यम द्वारा खालिस्तानियों पर किया गया पोस्ट अब उन्हें निशाना बनाने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।
ऐसे में सत्यम कहते हैं, “देखिए, भारत मेरा देश है। मैं अपने देश की वकालत करूँगा। ब्रिटेन में छात्र संघ चुनावों के लिए भारतीय राजनीति कैसे प्रांसगित है? मेरे विचार और मेरी सरकार का समर्थन पूरी तरह से मेरी निजी राय का मसला है।”
उन्होंने बताया कि उप-मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के साथ उसकी एक फोटो का इस्तेमाल उन्हें भाजपा से जुड़ा दिखाने के लिए फैलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ये एक सुनियोजित हमला है जिसे वो लोग चला रहे हैं जो भारत में मौजूद बीजेपी सरकार के खिलाफ हैं। सत्यम कहते हैं कि जिन लोगों ने उन्हें निशाना बनाया, वे उस समूह का हिस्सा हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं और इसलिए इस तरह का झूठा और दुर्भावनापूर्ण प्रचार फैला रहे हैं।
बता दें कि ये कोई पहला मामला नीं है जब भारतीय छात्र के साथ ऐसा नफरती अभियान विदेश में चलाया गया हो। इससे पहले करण कटारिया ने भी नस्लीय भेजभाव लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में झेला था और उससे पहले रश्मि सामंत को भी ऑक्सफोर्ड में ऐसे तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया था।
शराब घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वो फ़िलहाल ED (प्रवर्तन निदेशालय) की कस्टडी में रिमांड पर हैं। AAP के लीगल सेल ने इस कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि जो वकील विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वो करें, लेकिन अपने जोखिम पर। बता दें कि बुधवार (27 मार्च, 2024) को AAP के लीगल सेल ने दिल्ली की सभी जिला अदालतों में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।
इसी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कद कार्रवाई की चेतावनी दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने इस पर सवाल उठाया कि आखिर अदालत परिसर में कैसे विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा सकता है। दोनों जजों ने कहा कि अगर कोर्ट परिसर में प्रदर्शन किया जाता है तो इसके परिणाम काफी भयंकर होंगे। एक वकील ने AAP के लीगल सेल द्वारा प्रदर्शन के खिलाफ शिकायत का जिक्र किया था, जिस पर ये टिप्पणी आई।
अपने रिस्क पर प्रदर्शन करें वकील: दिल्ली हाईकोर्ट
उक्त वकील ने आधी रात को शिकायत की प्रति ईमेल की थी और इस पर त्वरित सुनवाई की माँग की थी। कोर्ट ने कहा कि 1 दिन बाद इस पर सुनवाई होगी, लेकिन साथ ही प्रदर्शनकारी वकीलों को चेताया भी। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित नियम का पालन किया जाएगा। साथ ही कहा कि अदालत को बाधित नहीं किया जा सकता है, कोर्ट को नहीं रोका जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अदालत में रुकने से नहीं रोका जा सकता।
Advocate Vaibhav Singh has written to the Chief Justice of Delhi High Court against the call for protest in Delhi Courts by the legal cell of Aam Aadmi Party over ED arrest of CM Arvind Kejriwal
" A protest cannot be called in the court. It violates the right to fair litigation… pic.twitter.com/9KcT9eP9Et
अधिवक्ता वैभव सिंह ने ये शिकायत दर्ज कराई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन को लेकर कहा, “आप कोर्ट तक पहुँचने के किसी के मूलभूत अधिकारों को नहीं छीन सकते। यही स्थापित कानून है। अगर कोई ऐसा करता है तो वो अपने जोखिम पर करेगा और ज़रूरत पड़ी तो हम कार्रवाई करेंगे।” BCI (बार काउंसिल ऑफ इंडिया) भी AAP के लीगल सेल को आगाह कर चुका है कि वो प्रदर्शन न करें। संस्था ने कहा कि न्यायपालिका के फैसले का इंतज़ार करना चाहिए, तब तक विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
केजरीवाल कोर्ट में बताएँगे कहाँ है तथाकथित शराब घोटाले का पैसा: पत्नी सुनीता
उधर अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने कहा है कि गुरुवार को उनके पति अदालत को बताएँगे कि दिल्ली शराब घोटाले का पैसा कहाँ लगा है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने 2 दिन पहले ही जल मंत्री आतिशी को सन्देश भेजा था कि लोगों की सीवर की समस्या का समाधान हो, क्या गलत किया। सुनीता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को इससे बेहद पीड़ा हुई है कि इस आदेश का विरोध हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तथाकथित शराब घोटाले का एक पैसा किसी भी छापे में नहीं मिला है।
सुनीता केजरीवाल ने कहा, “इस तथाकथित शराब घोटाले का ये पैसा है कहाँ? अरविंद जी ने कहा है कि 28 मार्च को कोर्ट के सामने इसका खुलासा करेंगे, सारे देश को सच-सच बताएँगे और इसका सबूत भी देंगे। अरविंद जी सबसे सच्चे, देशभक्त, निडर और साहसी व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा है कि मेरा शरीर जेल में है लेकिन आत्मा आप सबके बीच है। आँखें बंद करो तो मुझे अपने आसपास महसूस करोगे।” सुनीता केजरीवाल ने एक बार फिर से अपने पति वाली कुर्सी पर बैठ कर ही ये संबोधन दिया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (27 मार्च, 2024) को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के गोवा प्रभारी दीपक सिंगला के ठिकानों पर छापेमारी की है। ED ने इसी के साथ पंजाब के वर्तमान आबकारी कमिश्नर वरुण रूजम के घर चंडीगढ़ में भी छापा मारा।
माना जा रहा है कि ED ने दीपक सिंगला के यहाँ यह छापेमारी दिल्ली शराब घोटाला मामले में की है। इसी मामले में दिल्ली के CM केजरीवाल गिरफ्तार हुए हैं। जिन दीपक सिंगला के यहाँ ED ने छापेमारी की है वह दिल्ली के विश्वास नगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। वह दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी के सह प्रभारी भी हैं। वह पार्टी के गोवा और महाराष्ट्र के प्रभारी हैं।
#WATCH | The Enforcement Directorate is conducting raids at multiple locations in Delhi and NCR among places including the residence of AAP leader Deepak Singla: Sources pic.twitter.com/Q1pJ34Ms7r
बताया जा रहा है कि सिंगला पर उनके गोवा कनेक्शन को लेकर ही छापेमारी की गई है। शराब घोटाले में ED ने कहा है कि दिल्ली में शराब नीति में की गई गड़बड़ी से जो पैसे मिले वह गोवा में विधानसभा चुनाव प्रचार में लगाए गए। बताया गया है सिंगला गोवा में AAP के चुनाव प्रभारी थे इसीलिए उन पर यह जाँच हो रही है।
दीपक सिंगला द्वारा 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में दायर किए गए हलफनामे के अनुसार, उनके पास ₹10 करोड़ की संपत्ति है। उनके ऊपर ₹250 करोड़ से अधिक का कर्ज भी था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पास दिल्ली में मिठाई की दुकानें हैं।
सिंगला से पहले आम आदमी पार्टी के विधायक गुलाब सिंह यादव पर भी ED ने छापेमारी की थी। यादव गुजरात के प्रभारी हैं। सिंगला के अलावा ED ने चंडीगढ़ में पंजाब के कर एवं आबकारी कमिश्नर वरुण रूजम के ठिकानों पर भी छापेमारी की है। उनके ऊपर यह छापेमारी की गुआवा ऑर्चर्ड मामले में की गई है। बताया गया है कुछ लोगों ने पंजाब सरकार से अधिक मुआवजा लेने के लिए एक जमीन पर अमरुद के पेड़ लगाए और इससे सरकार को ₹130 करोड़ का चूना लगा।
गौरतलब है कि यह छापेमारियाँ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की शराब घोटाला मामले में गिरफ्तारी के बाद हो रही हैं। अरविन्द केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने अपनी गिरफ्तारी और ED को मिली रिमांड को लेकर याचिका दायर की है। इस मामले पर सुनवाई हो रही है।
लोकसभा चुनाव 2024 से कुछ दिनों पहले 2017 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ऑनलाइन ने INDI गठबंधन को समर्थन देने की घोषणा की है। ‘RSS ऑनलाइन’ के मुखिया जनार्दन मून उसके चेले अब्दुल पाशा ने 25 मार्च, 2024 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि भाजपा को इन चुनावों में हराना है इसलिए वह INDI गठबंधन और कॉन्ग्रेस को समर्थन देंगे।
जनार्दन मून ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा “भाजपा पिछले दस साल से देश की सत्ता में है लेकिन वह संविधान का अपमान कर रही है। इसके सभी फैसलों ने संविधान का अपमान किया है। कोई देश इस तरीके से नहीं चलता। सरकार जानबूझकर विपक्षी पार्टी के नेताओं को निशाना बनाती है और उन्हें भ्रष्ट घोषित करती है। वह विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करती है। क्या केवल विपक्षी नेता ही भ्रष्ट हैं? कोई भी भाजपा नेता भ्रष्ट नहीं है?”
मून ने देश के संविधान को बचाने के लिए मतदाताओं से अपील की कि INDI गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट दें। मून ने यह भी कहा कि RSS ऑनलाइन संगठन महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन का समर्थन करेगा। उन्होंने भाजपा नेताओं को भ्रष्ट बताया और कहा कि देश को इस पार्टी से बचाने की जरूरत है।
इस बीच, 2017 में बनाए गए RSS ऑनलाइन के उपप्रमुख अब्दुल गफूर ने दावा कर दिया कि देश में RSS ऑनलाइन एकमात्र RSS है। उसने दावा किया कि और कोई अन्य RSS उनके संगठन के बराबर महत्व नहीं रखता है। उसने इस दौरान रजिस्ट्रेशन के बारे में भी बात की।
बताया गया है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस महाराष्ट्र के नागपुर में हुई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि इसे असली RSS द्वारा आयोजित किया गया था। इसमें दावा किया गया कि यह कॉन्फ्रेंस उस RSS की थी जो कि भाजपा सरकार का समर्थन करने वाला एक हिन्दू संगठन है।
आवाज़ टीवी इंडिया नाम के यूट्यूब चैनल ने इस कॉन्फ्रेंस को अपने चैनल पर लाइव प्रकाशित किया। उसने दावा किया कि और दावा किया कि RSS ने कॉन्ग्रेस पार्टी को अपना समर्थन दिया जिसके परिणामस्वरूप देश के राजनीतिक माहौल काफी उथल पुथल हुई है। इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में बताया गया है कि इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन RSS ऑनलाइन द्वारा किया गया था, ना कि मूल RSS द्वारा जिसके सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत हैं।
इस मामले की सच्चाई यह है कि RSS और RSS ऑनलाइन दो अलग-अलग संगठन हैं, और इन दोनों में से RSS ऑनलाइन नया है। इसका कर्ता-धर्ता जनार्दन मून है। इसके एक्स हैंडल में मून ने खुद को RSS का मुखिया बताया है। हालाँकि, वह यह नहीं बताता कि वह RSS ऑनलाइन का मुखिया है जो कि नया संगठन है और इसका असली RSS से कोई लेना देना नहीं।
तीसरी बात, जनार्दन मून का RSS से इसलिए कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि RSS की कार्यप्रणाली में "संस्थापक अध्यक्ष" शब्द का उपयोग नहीं होता है। pic.twitter.com/PramtZT60Y
इन दोंनो संगठनों की आपस में ना केवल विचारधाराएँ बल्कि संगठन का लोगो, उनके संगठन का ढाँचा आदि भी अलग हैं। RSS ऑनलाइन के सदस्यों का मूल, पुराने, पारंपरिक हिंदू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से कोई लेना-देना नहीं है। RSS ऑनलाइन दावा करता है कि मूल RSS पंजीकृत नहीं है। इस पर हमने असली RSS से बात की।
हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मीडिया प्रमुख राकेश पांडे से बात की, जिन्होंने पुराने संगठन के पंजीकृत ना होने के दावों को खारिज कर दिया। “RSS 90+ वर्ष पुराना संगठन है और देश की भलाई और विकास के लिए काम कर रहा है। इतने वर्षों से देश के लिए काम कर रही संस्था अप्रामाणिक कैसे हो सकती है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष 1925 से काम कर रहा है, यह मूल संगठन है और मूल RSS के विषय में प्रामाणिकता पर जो दावे हो रहे हैं, वो पूरी तरह से झूठे हैं।”
RSS के नाम से कुछ लोग फर्जी संगठन बनाकर खुद को और अपने वामपंथी सहयोगियों को धोखा दे सकते है समाज को नहीं।
संघ 1925 से देश और फिर दुनिया भर में कार्य कर रहा है। इनका दावा खोखला और राजनीतिक षड्यंत्र से प्रेरित है, जनार्दन मून और उसके गिरोह राष्ट्र विरोधी और मोदी विरोधियो के इशारे… pic.twitter.com/TicBRuN4Ik
द पैम्फलेट द्वारा दी गई एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, मून ने 2017 में नागपुर पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी। उसने दावा किया था कि उनके नए RSS को पंजीकृत करने के प्रयास करने के बाद असली RSS के कार्यकर्ता उन्हें धमकी दे रहे थे। इस दौरान के RSS के डॉ. राजेंद्र गुंडलवार ने बताया कि उन्होंने RSS को एक NGO के रूप में पंजीकृत किया था, लेकिन महाराष्ट्र के नागपुर जिले में नहीं, बल्कि चंद्रपुर में।
जनार्दन मून ने एक बार आरएसएस कार्यकर्ताओं से अपनी जान को खतरा बताते हुए नागपुर पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की थी। इसके बाद ही वे अपनी वाली RSS को रजिस्टर करने भी पहुँचे थे। चैरिटी कमिश्नर के पास उनका आवेदन 14 सितंबर 2017 को सुनवाई के लिए गया था। लेकिन इस बीच डॉ राजेंद्र गुंडलवार… pic.twitter.com/iK7Y2lgegt
इसके बाद डॉ. गुंडलवार ने मून से यह भी कहा कि वह RSS के नाम का दुरुपयोग करना बंद करें क्योंकि वह एक जानामाना हिंदू संगठन है जो देश की भलाई के लिए लगातार काम कर रहा है। पैम्फलेट से उन्होंने कहा “RSS एक बहुत ही प्रतिष्ठित संगठन है जो बिना किसी से कुछ लिए निस्वार्थ भाव से काम करता है और दुनिया भर में लाखों स्वयंसेवक उसी RSS के लिए काम कर रहे हैं।”
गुंडलवार ने कहा कि जनार्दन मून की मंशा संदिग्ध है और वह ऐसा करके लोगों के बीच भ्रम पैदा करना चाहते हैं, जिससे भविष्य में धार्मिक दंगे भड़क सकते हैं। जनार्दन मून ने विक्टिम कार्ड खेलते हुए दावा किया कि गुंडलवार उनकी जान को खतरा पैदा कर रहे हैं। ऑनलाइन RSS से सम्बंधित यह दावे पैम्फलेट द्वारा किए गए हैं और इस रिपोर्ट को लिखे जाने तक कोई भी आधिकारिक स्रोत इसकी पुष्टि नहीं कर सका है। पुष्टि प्राप्त होते ही रिपोर्ट अपडेट कर दी जाएगी।
हाई कोर्ट ने वर्ष 2019 में मून की एक याचिका खारिज कर दी थी। मून ने इस दौरान ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ या RSS नाम पर दावा किया था। मून ने इस नाम के एक NGO के पँजीकरण करने के लिए आवेदन किया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि इसी नाम से पहले से ही एक संस्था मौजूद है। मून ने इस बारे में कहा था कि RSS चैरिटी कमिश्नर के साथ पंजीकृत नहीं किया गया था और उसने अपनी संस्था को यह नाम आवंटित करने का अनुरोध किया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम पर नए संगठन के बनाने और पंजीकरण को लेकर दायर याचिका भी खारिज कर दी थी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस मामले में कहा था, “क्या याचिकाकर्ता RSS के नाम पर एक और संगठन बनाकर समाज में भ्रम फैलाना चाहता है?” कोर्ट ने यह याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की नई संस्था को पहले से मौजूद संस्था के नाम पर पंजीकृत नहीं किया जा सकता।
बिग बॉस के विनर मुनव्वर फारूकी रमजान के महीने में हुक्का बार में नशा करते पकड़े गए। पुलिस ने हुक्का बार में छापा मारकर उन्हें और 13 अन्य लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि पुलिस ने मुनव्वर फारूकी को पकड़ने के बाद जब उनका मेडिकल चेक अप कराया तो वो पॉजिटिव आया।
बता दें कि पूरी घटना 26 मार्च 2024 की रात की है। मुंबई पुलिस को टिप मिली थी कि एमआरए मार्ग के बोरा बाजार पर स्थित सबलान नाम का हुक्का बार अवैध रूप से चल रहा है। छापेमापी की गई तो वहाँ से 4 हजार 400 रुपए नकद और 13 हजार 500 रुपए के 9 हुक्का बर्तन जब्त किए गए।
पुलिस ने इस छापेमारी को लेकर कहा, “हमारी टीम ने प्राप्त सूचना पर हुक्का बार में छापा मारा जहाँ पाया गया कि हर्बल हुक्का की आड़ में तंबाकू आधारित हुक्का उपयोग कर रहे थे। जाँच में भी अगर ये बात पुष्टि हो जाती है तो केस को आगे बढ़ाया जाएगा।”
Big Boss 17 winner Munawar Faruqui and 13 others were detained and a case has been registered against them in a hookah bar raid in the Fort area last night. All accused were released after questioning: Mumbai Police
फिलहाल ये मामला मुनव्वर फारूकी पर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 या सीओटीपीए, 2003 के तहत मामला दर्ज किया गया है। छापे के दौरान फारूकी वहीं मौजूद था। उसके साथ 13 लोगों को भी हिरासत में लिया गया।
बताया गया है कि पुलिस ने छापे के बाद पकड़े लोगों का जब मेडिकल टेस्ट कराया तो वो मुनव्वर फारूकी का पॉजिटिव निकला, मगर पुलिस ने उसे फिलहाल के लिए छोड़ दिया है। वहीं फारूकी की ओर से इस संबंध में अभी कोई बयान नहीं आया है। लेकिन उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक एयरपोर्ट तस्वीर को शेयर किया है। इसमें भी उन्होंने हुक्का बार से जुड़ी घटना पर कोई खास जानकारी नहीं दी है। लेकिन मीडिया में उन्हें हिरासत में लिए जाने की बात हर जगह है।
देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर को लेकर कहा है कि सरकार राज्य से सेनाओं को विशेष शक्तियाँ देने वाला AFSPA हटाने के विषय में विचार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि राज्य में अनुच्छेद 370 को लेकर भ्रांतियाँ फैलाई गईं थी, जिसका फायदा उठाकर पाकिस्तान ने आतंकियों की भर्ती की।
गृह मंत्री अमित शाह ने जेके मीडिया को दिए इंटरव्यू में जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार की नीतियों, भविष्य के कदमों और 370 हटने के बाद आए बदलावों को लेकर बात की। उन्होंने इस दौरान पहले के हालात भी बताए। लगभग 50 मिनट लम्बे इस इंटरव्यू में गृह मंत्री शाह ने कई महत्वपूर्ण बातें कही।
गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370 पर कहा कि इसको लेकर घाटी की जनता में भ्रांतियाँ फैलाई गईं। इसके हटने के बाद भी यहाँ की संस्कृति जस की तस है। 370 के हटने से बाहर के लोगों के यहाँ बसने को लेकर जो झूठ फैलाया गया था वह भी ध्वस्त हो चुका है। कश्मीर की कश्मीरियत बची हुई है।
उन्होंने कहा कि 370 के आड़ में आतंक बढ़ाया गया और इसके कारण 40,000 युवा आतंकी बन कर मारे गए। गृह मंत्री शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस, PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने परिवारवाद को बढ़ा कर राज्य के विकास को रोका। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में राज्य से तीनों पार्टियाँ साफ़ हो जाएँगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राज्य में अब तक केंद्र सरकार अलग अलग योजनाओं के तहत ₹45,000 करोड़ खर्च कर चुकी है। राज्य में पीएम आवास, जल जीवन और ग्राम सड़क योजना का कवरेज बढ़ा है। उन्होंने कहा है इससे कश्मीरियों के जीवन में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि राज्य में 2022-23 में ₹2100 करोड़, 2023-24 में ₹2300 करोड़ का निवेश हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य की जीडीपी 2015 में ₹1 लाख करोड़ थी जो कि अब बढ़ कर ₹2.3 लाख करोड़ हो चुका है।
कश्मीर में आगे के कामों को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि डल झील को दुनिया की सबसे सुंदर झील में बदला जाएगा। जम्मू कश्मीर में चुनावों को लेकर भी उन्होंने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमने यहाँ ग्राम पंचायत और जिला पंचायत चुनाव करवाए हैं, जिनके परिणाम काफी सुखद रहे हैं।
जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव को लेकर भी गृह मंत्री ने जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है 31 सितम्बर, 2024 से पहले विधानसभा चुनाव करवाए जाएँ। हम उस आदेश को टाल नहीं सकते। ऐसे में वह हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि राज्य में लोकतंत्र स्थापित करने को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि फारुक अब्दुल्लाह की सरकार के दौरान राज्य में जितने फर्जी एनकाउंटर हुए, उतने कभी नहीं हुए। गृह मंत्री शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के जो संगठन अलगाववादी रवैया अपनाते हैं उनके साथ कोई बातचीत नहीं होगी, राज्य के युवाओं से बातचीत होगी। ऐसे संगठन राज्य में 40,000 लोगों की मौत के जिम्मेदार हैं। गृह मंत्री ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर को लेकर कहा कि उसे वापस लेना मात्र गृह मंत्री ही नहीं बल्कि हर भारतीय और हर कश्मीरी का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि वह भूमि और वहाँ की जनता हमारी है।
जम्मू कश्मीर में आतंक के शून्य होने पर कहा कि राज्य के युवाओं को पाकिस्तान के मुगालते से बाहर आना होगा। यह पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा है कि कश्मीर आजाद होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानियों को कश्मीर आज स्वर्ग प्रतीत होता है।
गृह मंत्री ने बताया कि आतंक से लड़ते हुए शहीद हुए जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों के घरवालों को नौकरी देने का काम पूरा हो गया है। पहले यह 10 वर्षों तक लटका रह जाता था। राज्य से सेना और अर्धसैनिक बलों को हटाने को लेकर कहा कि हमने इसको लेकर ब्लूप्रिंट बना लिया है और इसको लेकर चुनावों के बाद काम भी चालू होने की उम्मीद है।
जम्मू कश्मीर से सेना को विशेष शक्तियाँ देने वाला एक्ट AFSPA हटाने को लेकर गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि इस पर काम हो रहा है कि सेना बैरकों में वापस जाए और जम्मू कश्मीर की पुलिस के हवाले राज्य की कानून व्यवस्था रहे। उन्होंने कहा कि राज्य में अब आतंक विरोधी ऑपरेशन में पुलिस ही आगे रहती है। जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि भाजपा जम्मू क्षेत्र में अकेले चुनाव लड़ेगी और कश्मीर क्षेत्र पर अभी विचार चल रहा है।
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि परिसर में गोली चलने की खबर है। बताया जा रहा है कि वहाँ तैनात पीएसी के प्लातून कमांडर को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगी, जो उनके सीने के आर-पार हो गई। अब उनकी हालत नाजुक है और उनको लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में रेफर किया गया है जहाँ वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईजी अयोध्या रेंज प्रवीण कुमार ने बताया कि गोली दुर्घटनावश चली थी। जवान उस समय अपनी बंदूक की नली साफ कर रहे थे तभी उनसे गलती से उसका ट्रिगर दब गया और गोली निकलकर सीने के आर-पार हो गई। पुलिस अब इस मामले में जाँच कर रही है। घटनास्थल पर तैनात अन्य जवानों से भी घटना के बारे में पूछा जाएगा।
जवान के बारे में सामने आई शुरुआती जानकारी के अनुसार, 32वीं वाहिनी PAC के जवान का नाम राम प्रसाद है। 53 वर्षीय राम प्रसाद अमेठी के निवासी हैं। वर्तमान में वह श्रीराम जन्मभूमि की सुरक्षा में तैनात थे।
अयोध्या: राम मंदिर परिसर में हादसा, सुरक्षा में तैनात PAC जवान को लगी गोली
अयोध्या रेंज के आईजी प्रवीण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि एक प्लाटून कमांडर को गोली लगी है. दुर्घटनावश चली गोली सीने से हो पार हो गई.
मंगलवार को शाम 5:45 पर जब उनकी एके-47 से अचानक से गोली चली और इसकी आवाज अन्य जवानों व परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुनाई दी तो हड़कंप मच गया। हालाँकि, इस बीच कुछ सुरक्षाकर्मियों ने श्रद्धालुओं को पैनिक होने से रोका और कुछ ने जाकर फौरन राम प्रसाद को मंडलीय हॉस्पिटल में भर्ती करवाया।
इसके बाद मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के बाद गंभीरावस्था में उन्हें लखनऊ रेफर किया गया, जहाँ फौरन उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर डाल दिया गया। अभी उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। कुछ जगह बताया जा रहा है कि गोली आर-पार हो जाने से उनके शरीर के कई अंदरूनी हिस्सों का नुकसान हुआ है।
देश की राजधानी दिल्ली में एक मुस्लिम लड़की ने सनातन धर्म में घर वापसी की है। सनातन अपनाने वाली लड़की का नाम उजमा है, जो अब मीरा नाम से जानी जाएगी। मंगलवार (26 मार्च 2024) को मीरा ने विधि-विधान से आर्य समाज मंदिर में अनिल नाम के युवक से शादी भी कर ली। अनिल दलित समुदाय से आते हैं। इस शादी और घर वापसी में में हिन्दू मोर्चा के पदाधिकारियों ने सहयोग किया और नव विवाहित दम्पति को सम्मान और सुरक्षा देने का भी संकल्प लिया।
घर वापसी करने वाली लड़की उजमा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले की रहने वाली हैं। उनके अब्बा का नाम जनाब अहमद खान है। वहीं, उनके पति अनिल दिल्ली के टैगोर गार्डन इलाके के निवासी हैं। उजमा ने खुद को बालिग बताया और कहा कि अनिल से शादी और घर वापसी का फैसला उनका अपना फैसला है और इसके लिए किसी ने जोर जबरदस्ती नहीं की। वहीं, अनिल ने भी खुद के बालिग होने का प्रमाण पत्र दिया। इन दोनों का विवाह दिल्ली के सनातन वैदिक समाज कल्याण संस्था के माध्यम से हुआ।
दोनों के विवाह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार हुआ। विधि-विधान से उजमा ने मीरा बनकर हवन पूजन किया। दम्पति ने अग्नि के 7 फेरे लिए और हमेशा एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लिया। इस मौके पर हिन्दू मोर्चा के पदाधिकारियों के अलावा अनिल वाल्मीकि के परिजन भी मौजूद थे। उन्होंने वर-वधू को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उजमा अपनी शादी से बेहद ख़ुश हैं। शादी के बाद वो अपने पति के साथ चली गईं। हिन्दू मोर्चा के सदस्यों ने इस अवसर पर जय श्री राम का उद्घोष भी किया। ऑपइंडिया के पास विवाह प्रमाण पत्र मौजूद है।
हिन्दू मोर्चा के अध्यक्ष दीपक मलिक ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने हमें बताया कि शाहजहाँपुर की मूल निवासी लड़की का परिवार फ़िलहाल पश्चिमी दिल्ली में रहता है। यहीं पर लड़की की 6 साल पहले अनिल वाल्मीकि से मुलाकात हुई थी। कुछ ही दिनों की दोस्ती में दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। आखिरकार अलग-अलग मजहबों से होने के बावजूद उजमा और अनिल ने एक दूसरे से शादी करने का फैसला कर लिया। अनिल ने अपने परिजनों को इस रिश्ते के लिए मना लिया, लेकिन उजमा के परिजन तैयार नहीं हुए।
मलिक ने आगे कहा कि उजमा के परिजनों ने उसकी निकाह के लिए एक मुस्लिम लड़का देख भी लिया था। इसके बाद अनिल और उजमा ने अपनी शादी में सहयोग के लिए हिन्दू मोर्चा को सम्पर्क किया। आखिरकार 26 मार्च 2024 को उजमा घर से बाहर निकली और सीधे आर्य समाज मंदिर पहुँची। यहाँ उजमा ने पहले विधि-विधान से सनातन स्वीकार करके मीरा बनीं और उसके बाद अनिल से विवाह किया।