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‘आतंकवाद का पनाहगार लोकतंत्र पर दे रहा उपदेश’: UN के इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन में भारत ने पाकिस्तान को धोया, कहा- पहले टेररिज्म फैक्ट्रीज बंद करो

संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा ऑफिस में इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (आइपीयू) में रविवार (25 मार्च 2024) को भारत ने पाकिस्तान को जमकर धोया। भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने पाकिस्तान को आतंक की फैक्ट्री बताया और कहा कि इस्लामाबाद को भारत को लेक्चर देने के बजाय आतंक की इन फैक्ट्रियों को बंद करना चाहिए जो सीमा पार से जम्मू कश्मीर में हमले करते हैं। जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के आरोपों का जिक्र करते हुए राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि एक ऐसे देश द्वारा उपदेश दिया जाना जिसका लोकतंत्र का ट्रैक रिकार्ड बेहद खराब है, ये बेहद हास्यास्पद है।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश आईपीयू की 148वीं बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। पाकिस्तान के खिलाफ जवाब देने के अपने अधिकार का उपयोग करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि मैं भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा की गई बेतुकी टिप्पणियों को खारिज करता हूँ। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

हरिवंश ने भारत को लेकर पाकिस्तान की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि “एक ऐसा देश जिसके लोकतंत्र का ट्रैक रिकॉर्ड खराब है, हमें भाषण देना हास्यास्पद है। बेहतर होता कि पाकिस्तान इस तरह के आरोपों और आख्यानों से आईपीयू जैसे मंच के महत्व को कम न करता।”

हरिवंश ने अपनी टिप्पणी में आईपीयू के सदस्यों को याद दिलाया कि पाकिस्तान का आतंवादियों को पनाह देने, सहायता करने और सक्रिय रूप से समर्थन करने का इतिहास है। उन्होंने कहा, “मैं याद दिला दूँ कि वैश्विक आतंक का चेहरा ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में पाया गया था। इस देश ने सबसे बड़ी संख्या में आतंकवादियों को पनाह दे रखी है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंधित किया हुआ है। मैं विश्वास करता हूं कि इस्लामाबाद अपने लोगों की भलाई के लिए सही सबक लेगा।”

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध ठप हैं। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर आड़े हाथ लिया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि ‘नया भारत’ आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करता है, बल्कि मुँह तोड़ जवाब देता है। आतंकवाद से जुड़े लोगों को सबक सिखाने का ‘नया भारत’ दम रखता है। भारत पर आतंकी हमला कराने वालों का क्या हाल हो रहा है, ये दुनियाभर के लोग देख रहे हैं।

‘बेटे की शादी में उपहार लाने के बजाय नरेंद्र मोदी को दें वोट’: तेलंगाना के कारोबारी द्वारा छपवाया कार्ड वायरल, लिखा- यही हमारे लिए बेस्ट गिफ्ट होगा

तेलंगाना के संगरेड्डी में एक पिता द्वारा अपने बेटे की शादी के लिए छपवाया गया कार्ड सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कार्ड में दूल्हे के पिता ने मेहमानों से अपने साथ कोई गिफ्ट लाने के बजाय आने वाले लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी को वोट देने की अपील की है। कार्ड के ऊपर नरेंद्र मोदी की फोटो भी छपी हुई है। यह शादी 4 अप्रैल 2024 को होनी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला हैदराबाद के पास संगारेड्डी जिले का है। यहाँ रहने वाले दम्पति नंदीकांति नरसिंहलू और निर्मला के बेटे साईं कुमार की शादी 4 अप्रैल को है। साईं कुमार की दुल्हन का नाम महिमा रानी है। TOI के मुताबिक, कार्ड छपवाने के लिए नंदीकांति ने अपने घर वालों से सलाह-मशविरा किया। आखिरकार कार्ड के ऊपर उन्होंने नरेंद्र मोदी की फोटो छपवाई।

कार्ड में नीचे की ओर लिखा है, “कृपया अपने साथ कोई उपहार न लाएँ। प्रधानमंत्री मोदी को वोट दें। आपका एक वोट हमारे लिए बेस्ट गिफ्ट होगा।” कार्ड के सबसे ऊपर एक तरफ भगवान गणेश और दूसरी तरफ शिव एवं पार्वती की फोटो है। नीचे छपी मोदी की फोटो के बगल में हल्दी लगाई गई है। हिन्दू धर्म में हल्दी लगाने को शुभ शगुन माना जाता है।

नंदीकांति नरसिंहलू लकड़ियों से बने सामानों का कारोबार करते हैं। इससे पहले उन्होंने अपनी 2 बेटियों की शादी की थी। हालाँकि, उन बेटियों की शादी के कार्डों में उन्होंने यह प्रयोग नहीं किया था। नंदीकांति के अनुसार, जो भी उस कार्ड को पढ़ता है उसकी थोड़ी देर के लिए नजर वहीं टिकी रहती है।

बताते चलें कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो चुकी है। देश में चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है। 7 चरणों में होने जा रहे इस चुनाव में वोटों की गिनती 4 जून 2024 को की जाएगी। सात चरणों में होने वाले चुनावों के लिए 19 अप्रैल, 26 अप्रैल, 7 मई, 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून की तिथि तय की गई है।

पहले चरण में 19 अप्रैल को 102 सीटों को मतदान होगा। वहीं, दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 89 सीटों पर, तीसरे चरण में 7 मई को 94 सीटों पर, चौथे चरण में 13 मई को 96 सीटों पर, 20 मई को पाँचवें चरण में 49 सीटों पर, 25 मई को छठे चरण में 57 सीटों पर और एक जून को सातवें एवं आखिरी चरण में 57 सीटों के लिए मतदान होगा।

कस्टडी से CM केजरीवाल ने दिल्ली के जल मंत्री को कैसे जारी किया आदेश? ED करेगी जाँच, आतिशी से हो सकती है पूछताछ

दिल्ली शराब नीति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा था कि वे जेल से सरकार चलाएँगे। इसके बाद सीएम केजरीवाल ईडी की हिरासत से रविवार (24 मार्च 2024) को अपना पहला आदेश जारी किया है। यह आदेश जल मंत्रालय से संबंधित था। अब इस आदेश का ईडी ने संज्ञान लिया है।

दरअसल, सीएम केजरीवाल के आदेश के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने आदेश का जिक्र करते हुए कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कुछ इलाकों में पानी और सीवर से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया है। उन्होंने गर्मी के मौसम में पानी के टैंकरों की पर्याप्त व्यवस्था करने का आदेश दिया है।

सीएम केजरीवाल ने अपने नोट में लिखा था, “मुझे पता चला है कि दिल्ली के इलाकों में पानी और सीवर की काफी समस्या हो रही है। इसको लेकर मैं चिंतित हूँ। चूँकि मैं जेल में हूँ, इस वजह से लोगों को जरा भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए। गर्मियाँ आ रही हैं। जहाँ पानी की कमी है, वहाँ उचित संख्या में टैंकरों का इंतजाम कीजिए। मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को आदेश दीजिए ताकि जनता को किसी तरह की परेशानी ना हो।”

उन्होंने अपने नोट में आगे लिखा था, “जनता की समस्याओं का तुरंत और समुचित समाधान होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उपराज्यपाल महोदय का भी सहयोग लें। वे भी आपकी मदद जरूर करेंगे।” आतिशी ने बताया था कि सीएम केजरीवाल ने यह नोट अपने वकील के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा था। बता दें कि सीएम केजरीवाल को 28 मार्च तक ईडी की रिमांड पर हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ED अपनी जाँच में पता लगाने की कोशिश करेगी कि सीएम केजरीवाल के आदेश उनकी हिरासत अवधि के दौरान विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के आदेश के अनुरूप थे। इसके साथ ही केंद्रीय एजेंसी इसकी भी जाँच करेगी कि सीएम केजरीवाल ने इस पत्र को लिखा कैसे।

ईडी ने कहा कि वह पार्टी के दावे की जाँच करेगी, क्योंकि हिरासत में लिए गए लोगों के लिए किसी भी स्टेशनरी की अनुमति नहीं है। सूत्रों ने कहा कि आतिशी से कथित ‘आदेश’ के स्रोत और इसे किसने लाया और उन्हें कब और दिया इसके बारे में पूछताछ करेगी। सूत्रों ने कहा कि एजेंसी सीसीटीवी फुटेज के जरिए दावे की पुष्टि करेगी।

बताते चलें कि 55 साल के अरविंद केजरीवाल को हिरासत में भेजते समय अदालत ने उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और निजी सहायक बिभव कुमार को हर दिन शाम 6 बजे से 7 बजे के बीच मिलने की अनुमति दी है। इसके साथ ही उन्हें अपने वकील से मिलने के लिए आधे घंटे का समय निर्धारित किया है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा भेजे गए निर्देश को पढ़ने के बाद भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला था। भाजपा ने कहा था कि यह चिंताजनक है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उनके कार्यालय से एक आदेश जारी किया गया है। भाजपा के मनजिंदर सिंह सिरसा ने पत्र के फर्जी होने का दावा करते हुए उपराज्यपाल से इस पर गौर करने का आग्रह किया।

सिरसा ने कहा, “सीएम ईडी की हिरासत में हैं और उन्हें बाहर का भोजन और दवा लेने के लिए भी अदालत से अनुमति लेनी होगी। इस स्थिति में, कौन मुख्यमंत्री से संपर्क किया गया था? और यह अधिकार वह केवल अपने प्रमुख सचिव को ही दे सकते हैं। फिर आदेश आतिशी जी तक कैसे पहुँचा? मुख्यमंत्री कार्यालय को हाईजैक कर लिया गया है।”

सिरसा ने आगे कहा, “आतिशी जी, यह कोई शराब की दुकान नहीं है, जहाँ कोई भी बोतल ले सके। यह मुख्यमंत्री का कार्यालय है, जिसे केवल मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा अनुमति प्राप्त अधिकारी द्वारा ही संचालित किया जा सकता है। इस आदेश में कोई संख्या नहीं है और किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं। शराब घोटाला की तरह, यह एक पत्र घोटाला है।”

AAP को खालिस्तानियों ने दिए ₹133 करोड़, आतंकी भुल्लर को छोड़ने का केजरीवाल ने किया था वादा: SFJ वाले पन्नू का दावा

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आम आदमी पार्टी और CM केजरीवाल पर खालिस्तानियों से सैकड़ों करोड़ चन्दा लेने का लगाया है। आतंकी पन्नू ने दावा किया है कि CM केजरीवाल ने खालिस्तानियों से मुलाक़ात में आतंकी भुल्लर को छोड़ने का वादा भी किया था। पन्नू ने यह आरोप एक वीडियो में जड़े हैं।

सिख फॉर जस्टिस (SFJ) आतंकी संगठन के मुखिया पन्नू ने CM केजरीवाल, आम आदमी पार्टी और पंजाब CM भगवंत मान पर आरोप लगाते हुए एक ढाई मिनट का वीडियो जारी किया है। इसमें पन्नू ने CM केजरीवाल की हालिया गिरफ्तारी के बाद कई आरोप जड़े हैं।

पन्नू ने इस वीडियो में कहा, “अरविन्द केजरीवाल खुद को ईमानदार हिन्दू कहते हैं लेकिन वह बेईमान हिन्दू हैं। जब 2014 में उनके पास सत्ता नहीं थी, तब उन्होंने अमेरिका आकर न्यूयॉर्क में खालिस्तानियों से वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो प्रोफ़ेसर देविंदर पाल सिंह भुल्लर को 5 घंटे के भीतर छोड़ दिया जाएगा।” पन्नू ने केजरीवाल पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। पन्नू ने कहा कि भुल्लर को तो नहीं छोड़ा गया लेकिन खालिस्तानियों की बात करने वालों को पंजाब में भगवंत मान की सरकार रोक रही है।

इसके बाद पन्नू ने आरोप लगाया कि भगवंत मान और केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के लिए खालिस्तानियों से मोटी रकम ली है। पन्नू ने कहा, “2014-2022 के बीच खालिस्तानियों ने AAP की सरकार बनाने के लिए 16 मिलियन डॉलर (₹133 करोड़) की मदद दी।”

पन्नू ने आरोप लगाया कि पंजाब में खालिस्तानियों के खिलाफ झूठे पुलिस एनकाउंटर CM अरविन्द केजरीवाल के दिशानिर्देश पर CM भगवंत मान करवा रहे हैं। पन्नू ने केजरीवाल से हिसाब किताब करने की धमकी भी दी है। पन्नू ने खालिस्तानी अमृतपाल को लेकर भी बात की।

गौरतलब है कि जिस देविंदर पाल सिंह भुल्लर की बात पन्नू कर रहा है, उसने दिल्ली में 1993 में एक कार में बम लगा कर धमाका किया था। भुल्लर के आतंकी कृत्य में 9 लोगों की मौत हुई थी जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। भुल्लर ने यह धमाका यूथ कॉन्ग्रेस के दफ्तर के बाहर किया था। इसमें यूथ कॉन्ग्रेस के तब अध्यक्ष रहे एमएस बिट्टा घायल हुए थे। भुल्लर अभी जेल में बंद है। उसे फांसी की सजा दी गई थी लेकिन बाद में इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।

पन्नू के इन आरोपों पर आम आदमी पार्टी की तरफ से अभी कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों का अभी कोई जवाब भी नहीं दिया है। गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने 21 मार्च, 2024 को दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया था। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं। इस बीच पन्नू ने उनकी पार्टी और उन पर यह गंभीर आरोप जड़े हैं। ऐसे में देखना होगा कि पार्टी इस पर क्या जवाब देती है।

जिहादियों का नया ‘हमदर्द’ है JNUSU अध्यक्ष धनंजय, दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के साजिशकर्ता शरजील इमाम-उमर खालिद की चाहता है रिहाई: Video वायरल

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के धनंजय ने रविवार (24 मार्च 2024) को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के प्रेसीडेंट पोस्ट पर जीत हासिल की। स्टूडेंट यूनियन के इस चुनाव के परिणामों की घोषणा के कुछ ही देर बाद धनंजय का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो दिल्ली के एंटी-हिंदू दंगों के आरोपितों शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई की माँग कर रहा है। ये वीडियो जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की प्रेसिडेंसियल डिबेट के दौरान का है, जिसमें धनंजय बोल रहा है, “मैं इस मंच से शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई की माँग करने आया हूँ।”

इस वायरल वीडियो का मूल वीडियो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर शेयर किया गया है। इस वीडियो में धनंजय को ये कहते सुना जा रहा है, कि “हमारे साथियों को जेल में डाल दिया गया है। मैं उनकी रिहाई की माँग करने के लिए यहाँ हूँ।” चुनावी भाषण के दौरान आइसा नेता ने यह भी कहा, ”मैं इस मंच से शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई की माँग करने के लिए यहाँ आया हूँ।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धनंजय ने एबीवीपी के उमेश चंद्र अजमीरा को 922 वोटों से हराकर चुनाव जीता है। शरजील इमाम के बारे में जो लोग नहीं जानते, उन्हें ये बता दें कि शरजील इमाम वही है, जिन्हे अलीगढ़ में एक सभा को संबोधित करते हुए मुस्लिमों से सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी भारत की ‘चिकेन नेक’ को देश से काटने के लिए कहा था, ताकि नॉर्थ-ईस्ट के सात राज्यों का भारत की मुख्य भूमि से संपर्क कट जाए। यही नहीं, उसने असम को भारत से अलग करने की बात भी कही थी।

उसने मुस्लिमों से देश के अंदर की सड़कों को बंद करने और इंटरनेशनल मीडिया का ध्यान खींचने के लिए कहा था, ताकि उनके कथित आंदोलन पर सबकी नजर आए और भारत सरकार झुक जाए। वो द वायर में आर्टिकल भी लिखता रहा था।

शरजील इमाम दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मुख्य आरोपितों में से एक है। उसपर यूएपीए के तहत मामला भी चल रहा है, जिसमें वो जमानत पाने की लड़ाई लड़ रहा था। वो सीएए के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों और हिंसा का सूत्रधार रहा है। वहीं, उमर खालिद पर भी ऐसे ही आरोप हैं।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

4-5 मुस्लिम चिल्लाते हुए आए, खंजर खोपा, कुल्हाड़ी और लाठियों से किया वार… 25 मार्च को ही हुई थी उस पत्रकार की हत्या जो दंगाइयों से लोगों को बचाने निकले थे

पिछले 10 वर्षों में एक शब्द अंग्रेजी के शब्दकोष से निकल कर भारत के सेक्यूलर-लिबरल और वामपंथी कहे जाने वाले कथित बुद्धिजीवियों की पहली पसंद बना है। इस शब्द को दिल्ली के किसी कैफे में बैठा कोई बुद्धिजीवी जब उपयोग करता है तो उसका तात्पर्य एक अल्पसंख्यक के भीड़ से गुस्से से मारे जाने से होता है। यदा कदा यही शब्द मीडिया की रिपोर्टों, लिखे और लिखवाए जाने वाले लेखों में दिखाई पड़ता है। यह शब्द ‘मॉब लिंचिंग’ है। इसका शाब्दिक अर्थ तो भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति की हत्या होता है लेकिन इसकी व्याख्यायें कई हैं।

इसी मॉब लिंचिंग पर दिन भर बौद्धिक शो चलाने वाले भारतीय वामपथी लिबरल 93 वर्ष पुरानी एक घटना भूल जाते हैं। ज्यादा सही यह कहना होगा कि वह जान कर भी भूलने का प्रयास करते हैं। आज (25 मार्च, 2024) से ठीक 93 साल पहले (25 मार्च, 1931) एक ऐसी ही मॉब लिंचिंग हुई थी। मॉब लिंचिंग भी कोई सामान्य नहीं थी और ना ही उसमें प्राण गंवाने वाला व्यक्ति। यह मॉब लिंचिंग कानपुर में हुई थी। मॉब लिंचिंग करने वाले ‘समुदाय विशेष’ यानी मुस्लिम समुदाय से थे और उनका शिकार होने वाले व्यक्ति थे गणेश शंकर विद्यार्थी।

गणेश शंकर विद्यार्थी: पत्रकार और समाजसेवी

प्रयागराज में 1890 में जन्मे गणेश शंकर विद्यार्थी के पिता एक सामान्य शिक्षक थे। शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी एक जगह क्लर्क की नौकरी करने लगे थे। इसके बाद वह कानपुर में शिक्षक बन गए। हालाँकि, विद्यार्थी की असल रूचि पत्रकारिता में थी। विद्यार्थी कानपुर में पत्रकारिता के साथ ही समाजसेवा में जुड़े थे।

गणेश शंकर विद्यार्थी को केवल इसलिए मारा गया था क्योंकि वह दगों में फंसे लोगों को बचा रहे थे। गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने पत्रकारिता प्रेम और अंग्रेजो के विरुद्ध चल रहे आन्दोलन को धार देने के लिए एक समाचार पत्र शुरू करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय काफी कठिन था क्योंकि समाचार पत्र शुरू करने के लिए उन दिनों मात्र पैसे ही नहीं बल्कि आदमी साहस की भी आवश्यकता थी। अंग्रेज सरकार हर चीज पर नियंत्रण रखती थी। विद्यार्थी ने अपने तीन साथियों के साथ ‘प्रताप’ समाचार पत्र की स्थापना की।

अंग्रेजों के दमन के विरुद्ध लिखने और स्पष्ट तरीके से अपनी बात लिखने के कारण यह समाचार पत्र पत्रकारिता का प्रतिमान बन गया। इस समाचार पत्र में छपने वाले विद्यार्थी के लेख जनमानस की आवाज उठाते और सामन्ती व्यवस्था के खिलाफ प्रहार करते। विद्यार्थी को पत्रकारिता उतनी ही प्रिय थी जितनी देश का स्वराज्य का सपना। वह कॉन्ग्रेस (तब कॉन्ग्रेस का अर्थ स्वराज्य आन्दोलन करने वालों का दस्ता हुआ करता था) से जुड़ गए। गाँधी जी को उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया।

गणेश शंकर विद्यार्थी असहयोग आन्दोलन में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने कानपुर के मिल वर्करों की पहली हड़ताल का नेतृत्व किया। रायबरेली के किसानों के दर्द को जनता के सामने रखा। उन्हें रायबरेली कि किसानों के लिए बोलने पर जेल में डाला गया। उनकी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त से गहरी दोस्ती हुई। उन्होंने प्रताप में क्रांतिकारियों की 63 दिन की भूख हड़ताल को प्रमुख स्थान दिया। इसी हड़ताल में बाघा जतिन दास की मृत्यु हुई थी। वह 1925-1929 के बीच उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सदस्य भी रहे।

एक मजहबी भीड़ और विद्यार्थी की हत्या

गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में सदैव समाजसेवा में लगे रहते थे। 1927 में मुस्लिमों ने एक हिन्दू शादी में बैंड बजाने पर बवाल कर दिया था। विद्यार्थी ने कुछ नेताओं के साथ मिल कर एक मस्जिद के सामने संगीत बजाकर इस मानसिकता का विरोध किया। 1931 में जब 23 मार्च को भारत के तीन सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दी गई तो पूरे देश में उबाल आ गया। कॉन्ग्रेस समेत तमाम क्रांतिकारियों ने देश में हड़ताल, धरने और बंद का आयोजन किया।

कानपुर में भी बंद बुलाया गया था। सभी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद करने की अपील थी। हालाँकि, देश के भावों से विरोध करने वालों की कमी ना अब है, ना तब थी। कुछ मुस्लिम दुकानदारों ने इस बंद को मानने से इनकार कर दिया था। यह सब अंग्रेजों के शह पर हो रहा था। दुकानें बंद ना करने के बाद साम्प्रदायिक हिंसा भड़की और भीड़ गली मुहल्लों में जाकर लोगों को मारने लगी। इस दौरान विद्यार्थी जी कराची जाने की तैयारी कर रहे थे। वह कॉन्ग्रेस के एक अधिवेशन में शामिल होने की तैयारी में थे।

जब उनके शहर का मिजाज बिगड़ गया तो वह यहीं रुक गए। उन्होंने दंगों में फंसे लोगों की सहायता करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस दौरान तमाम हिन्दू-मुस्लिमों को दंगे की चपेट से बचाया। लेकिन एक दिन भीड़ के हत्थे चढ़ गए।

बताते हैं कि 25 मार्च के दिन वह कानपुर के चौबेगोला इलाके में भीड़ और दंगे को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। युग पुरुष गणेश शंकर विद्यार्थी में दिए घटना के विवरण के अनुसार, चौबेगोला में नई सड़क इलाके में 4-5 मुस्लिमों का एक समूह आया और गणेश शंकर विद्यार्थी की तरफ चिल्लाते हुए मारने के लिए बढ़ा। इस समूह ने गणेश शंकर विद्यार्थी के खंजर घोंपा और लाठियों से उन पर वार किया। उन पर एक कुल्हाड़ी से भी वार किया गया।

गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या के विषय दिया विवरण
गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या के विषय दिया विवरण

एक और किताब ‘भारत के निर्माता: गणेश शंकर विद्यार्थी’ में लिखा गया है कि पहले कुछ मुस्लिमों ने उनसे हाथ मिलाया और उनकी तारीफ की। उनसे एक भाषण देने की अपील की गई। फिर उन्हें एक जगह पर ले जाकर छोड़ दिया गया। इसके बाद उन पर हमला हुआ। गणेश शंकर विद्यार्थी ने इस हमले पर अपने आप को आगे कर दिया। नृशंस तरीके से उनकी हत्या हुई। उनके साथ के लोगों पर हमले हुए। गणेश शंकर विद्यार्थी की लाश दो दिन बाद एक बोरे में मिली।

गणेश शंकर विद्यार्थी अंतिम क्षणों तक लोगों से दंगा रोकने की अपील करते रहे। हालाँकि, नफरत में अंधे दंगाइयों पर इसका ना असर होना था, ना हुआ। गणेश शंकर विद्यार्थी की जब हत्या हुई तब वह मात्र 41 वर्ष के थे। वह इस उम्र में ही काफी ख्याति पा चुके थे और भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का बड़ा चेहरा थे। लेकिन नफरती भीड़ ने यह ना देख कर मात्र यह देखा कि गणेश शंकर विद्यार्थी उन लोगों के मजहब से नहीं थे और उन्हें मार दिया।

आज देश में मॉब लिंचिंग को लच्छेदार शब्दों में लपेट कर खूब हवा दी जाती है। लेकिन गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या पर बात नहीं होती। शायद उनकी हत्या पर बात करते समय उस मानसिकता पर बात करनी पड़ेगी, जो उनकी हत्या की जिम्मेदार थी और आज भी यदा कदा देखने को मिलती है।

तेलंगाना में होली का जश्न मना रहे लोगों पर मस्जिद के पास हमला, कहा- नमाज के टाइम गाने नहीं बजा सकते: महिलाओं को भी नहीं छोड़ा

तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी जिले के चेंगिचेरला इलाके में होली का त्योहार मनाते समय हिंदुओं पर मुस्लिमों की भीड़ ने धावा बोल दिया। होलिका दहन के बाद मस्जिद से सटे इलाके में लोगों ने हिंदुओं पर हमला किया, जिसमें महिलाओं समेत कई लोग घायल हो गए। ये घटनाक्रम रविवार (24 मार्च 2024) की शाम की है, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया है कि चेंगिचेरला की पीतल बस्ती में होली मनाते समय कुछ लोगों ने स्पीकर लगा दिए। कुछ लोगों ने उनसे आवाज बंद करने को कहा, जिससे दो समुदायों के बीच बहस शुरू हो गई, जो एक-दूसरे पर हमले में बदल गई। यह घटना रविवार की शाम 4:15 बजे की है। इस हमले के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल रहे हैं।

सुभी विश्वकर्मा ने एक्स पर लिखा, “ये वीडियो तेलंगाना का है, जहाँ इस्लामी भीड़ ने अनुसूचित जाति के लोगों पर हमला किया, क्योंकि उन्होंने मस्जिद के नजदीक ही होलिका दहन किया था। नमाज के दौरान होली के जश्न से ये लोग चिढ़ गए थे, क्योंकि होली के गाने बज रहे थे।”

दूसरी ओर, तेलंगाना के खम्मम से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिसमें टेकुलापल्ली इलाके में स्थानीय लोगों ने शराब के ठेकों पर हमला कर दिया और वहाँ से शराब की पेटियाँ उठा गए। शराब लूट की इस घटना में चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें महिलाएँ भी शामिल थीं, जो वीडियो में शराब की पेटियां उठाकर ले जाती दिखीं। वाइन शॉप मालिकों का आरोप है कि उनकी करीब 15 से 20 लाख रुपये की शराब लूटी गई है। अब पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

वामपंथी सरकार ने ठोके 200+ केस, सबरीमाला के लिए जेल गए… कौन हैं K सुरेन्द्रन, क्या वायनाड में भी राहुल गाँधी का होगा अमेठी जैसा हाल

भाजपा ने केरल के प्रदेश अध्यक्ष कुन्नुम्मल सुरेन्द्रन (के सुरेन्द्रन) को 2024 लोकसभा चुनावों के लिए वायनाड से प्रत्याशी बनाया है। उनके नाम का ऐलान रविवार (25 मार्च, 2024) को जारी की गई सूची में किया गया। के सुरेन्द्रन का मुकाबला वायनाड में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से होगा।

वायनाड से प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर सुरेन्द्रन ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मुझे आपके साथ यह साझा करते हुए खुशी हो रही है भाजपा ने वायनाड में लोकसभा चुनावों में इंडी गठबंधन के नेता राहुल गाँधी के खिलाफ NDA उम्मीदवार के रूप में मेरे नाम की घोषणा की है। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ।”

वायनाड से प्रत्याशी बनाए गए सुरेन्द्रन प्रदेश अध्यक्ष के साथ साथ फायरब्रांड नेता भी हैं। वह 2020 से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। के सुरेन्द्रन को केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री और केरल के बड़े भाजपा नेता वी मुरलीधरन का करीबी माना जाता है। सुरेन्द्रन को जमीन पर काम करने वाले नेताओं में गिना जाता है।

सुरेन्द्रन केरल के कोझिकोड जिले के मूल निवासी हैं। विज्ञान से स्नातक सुरेन्द्रन की राजनीतिक परवरिश अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई है। वह राज्य में एबीवीपी और भारतीय जनता युवा मोर्चा में कई पदों पर रहे हैं। एबीवीपी में जहाँ वह राज्य कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं तो वहीं वह युवा मोर्चा के भी प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।

सुरेन्द्रन केरल की वामपंथी सरकार के खिलाफ लगातार लोहा लेते रहे हैं। सुरेन्द्रन ने स्वामी अयप्पा को समर्पित सबरीमाला मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश को लेकर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। इस कारण से उन पर राज्य सरकार ने 200 से अधिक मुकदमे लगाए थे। यह जानकारी उन्होंने 2019 में भरे गए एक चुनावी हलफनामे में दी थी।

सबरीमला में धार्मिक मान्यताओं के लिए लड़ने पर सुरेन्द्रन को 21 दिन जेल में भी गुजारने पड़े थे। इसके बाद उन्हें केरल हाई कोर्ट से जमानत मिली थी। सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश एक बड़ा मुद्दा बना था और सुरेन्द्रन ने जेल से छूटने के बाद परम्पराओं के ना टूटने को लेकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी।

सुरेन्द्रन चुनावी राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। वह 2009, 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 2016 और 2021 में वह केरल विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2016 में वह मंजेश्वर विधानसभा से मात्र 89 वोटों से चुनाव हारे थे। अब पार्टी ने उन्हें वायनाड भेजने का निर्णय लिया है।

वायनाड से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद सुरेन्द्रन ने मीडिया से कहा, “वायनाड में राहुल गाँधी का वही हाल होगा जो अमेठी में उनका हुआ था। राहुल गाँधी ने सांसद रहते हुए भी वायनाड के लिए कोई विकास कार्य नहीं करवाए लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने वायनाड को एस्पिरेशनल जिलों में डाला और विकास कार्य शुरू करवाए।”

गौरतलब है कि 2019 चुनावों में राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश के अमेठी और केरल की वायनाड, दोनों सीटों से चुनाव लड़े थे। उन्हें अमेठी में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हरा दिया था। हालाँकि, वह वायनाड से चुनाव जीतने में सफल रहे थे। इस बार कॉन्ग्रेस ने उन्हें फिर से वायनाड से उम्मीदवार बनाया है।

सुरेन्द्रन जिस वायनाड लोकसभा क्षेत्र से उम्मेदवार बनाए गए हैं, वह 2009 में परिसीमन के बाद स्थापित हुआ था। यहाँ 2009 से ही कॉन्ग्रेस का कब्जा है। इस सीट पर राहुल गाँधी से पहले मुहम्मद इब्राहिम शानवास दो बार सांसद रह चुके हैं।

जिस सीट से चुनी गई थीं TMC की नुसरत जहाँ, वहीं से BJP ने रेखा पात्रा को उतारा: संदेशखाली में शाहजहाँ शेख के गैंग से भिड़ने वाली महिला को जानिए

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने उम्मीदवारों की पाँचवीं लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में 19 उम्मीदवारों के नाम हैं। इसमें बशीरघाट लोकसभा सीट से रेखा पात्रा को उम्मीदवार बनाया गया है। बशीरघाट में ही वो संदेशखाली इलाका में है, जो टीएमसी के गुंडों की वजह से चर्चा में रहा है। संदेशखाली में टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उसके खास गुंडों शिबू हाजरा और उत्तर सरदार पर महिलाओं के उत्पीड़न, जमीनों पर कब्जे के आरोप हैं।

उत्तर 24 परगना में आने वाली बशीरहाट लोकसभा सीट पर रेखा पात्रा को मैदान में उतारा है। वो टीएमसी के हाजी नूरुल इस्लाम की चुनौती का सामना करेंगी। इस सीट पर साल 2019 में टीएमसी की ओर से अभिनेत्री नुसरत जहाँ ने जीत हासिल की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने चुनाव न लड़ने के ऐलान किया था और सांसदी से भी इस्तीफा दे दिया था।

बीजेपी की ओर से उम्मीदवार बनाने जाने के बाद रेखा पात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा है कि वो महिलाओं और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेंगी।

रेखा पात्रा ने संदेशखाली में जमीनों पर कब्जा करने, उत्पीड़न के मामले में आवाज उठाई थी। वो संदेशखाली में हिंसा पीड़ित रहते हुए महिलाओं के आंदोलन का चेहरा बनी थीं। संदेशखाली मामले में तीनों आरोपित शाहजहाँ शेख, शिबू हाजरा और उत्तम सरदार जेल में है। संदेशखाली इलाका बशीरहाट लोकसभा सीट के अंदर ही आता है, जहाँ हिंसा और उत्पीड़न की सैकड़ों वारदातों को अंजाम दिया गया।

बीजेपी के प्रवक्ता अमित मालवीय ने भी एक्स पर रेखा पात्रा के बारे में बताया। उन्होंने लिखा बीजेपी ने बंगाल के बशीरहाट सीट से रेखा पात्रा को मैदान में उतारा है। मालवीय ने एक्स पर लिखा, “रेखा पात्रा संदेशखाली के पीड़ितों में से एक हैं, जिसे शेख शाहजहाँ के हाथों उत्पीड़ित होना पड़ा। बीजेपी संदेशखाली की महिलाओं और बंगाल के साथ खड़ी है।” उन्होंने ममता बनर्जी पर भी हमला बोला।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संदेशखाली की पीड़िताओं के साथ मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद खुद प्रधानमंत्री ने रेखा के नाम पर मुहर लगाई।

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए BJP ने जारी की 5वीं सूची: वीके सिंह और वरुण गाँधी का टिकट कटा, अरुण गोविल और कंगना रनौत मैदान में

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने उम्मीदवारों की पाँचवीं लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 111 उम्मीदवारों के नाम हैं। बीजेपी ने पीलीभीत से वरुण गाँधी का टिकट काट दिया है, उनकी जगह जितिन प्रसाद को उतारा है, तो इस बार हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से कंगना रनौत को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी ने मेरठ से रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को चुनावी मैदान में उतार दिया है, तो सुल्तानपुर से मेनका गाँधी को एक बार फिर से उम्मीदवार बनाया है।

बीजेपी की पाँचवीं लिस्ट में उत्तर प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों सहित देश भर की 111 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम हैं। बीजेपी ने मेरठ लोकसभा सीट से रामायण में भागवान राम के रूप का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि पीलीभीत से अपने वर्तमान सांसद वरुण गाँधी का टिकट काट दिया है। उनकी जगह पर जितिन प्रसाद को मैदान में उतारा गया है। गाजियाबाद से वीके सिंह को भी टिकट नहीं मिला है। हालाँकि उन्होंने खुद ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया था। उनकी जगह अतुल गर्ग को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, सुल्तानपुर से मेनका गाँधी को एक बार फिर से चुनाव मैदान में उतारा गया है।

उत्तर प्रदेश ये इन्हें मिला टिकट

सहारनपुर- राघव लखनपाल

मुरादाबाद- सर्वेश सिंह

मेरठ-अरुण गोविल

गाजियाबाद- अतुल गर्ग

अलीगढ़-सतीश गौतम

हाथरस -अनूप वाल्मीकि

बदायूं-दुर्विजय सिंह शाक्य

बरेली-छत्रपाल सिंह गंगवार

पीलीभीत-जितिन प्रसाद

सुल्तानपुर-मेनका गांधी

कानपुर-रमेश अवस्थी

बाराबंकी-राजरानी रावत

बहराईच-अरविंद गोंड

बिहार की सभी सीटों पर घोषित हुए नाम

बीजेपी ने बिहार में अपने हिस्से की सभी 17 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने पश्चिम चंपारण से संजय जायसवाल, दरभंगा से गोपाल जी ठाकुर, मुजफ्फरपुर से राज भूषण निषाद को मैदान में उतारा है, तो महाराजगंज से जनार्दन सिंह सिग्रिवाल, पूर्वी चंपारण से राधा मोहन सिंह, अररिया से प्रदीप कुमार सिंह, औरंगाबाद से सुशील कुमार सिंह, मधुबनी से अशोक कुमार यादव को टिकट दिया है, तो सारण से एक बार फिर से राजीव प्रताप रूडी को टिकट दिया गया है। इसके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय को उजियारपुर, बेगूसरात से गिरिराज सिंह को मैदान में उतारा गया है।

बीजेपी ने नवादा से विवेक ठाकुर, पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद, पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव, आरा से राजकुमार सिंह, बक्सर से मिथिलेश तिवारी और सासाराम से शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया है।

हरियाणा से चार उम्मीदवार, नवीन जिंदल का भी नाम

बीजेपी ने हरियाणा की कुरुक्षेत्र सीट से नवीन जिंदल को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा हिसार से रणजीत चौटाला, सोनीपत से मोहन लाल बडोली, रोहतक से अरविंद कुमार शर्मा को मैदान में उतारा गया है। नवीन जिंदल ने आज ही कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया है और बीजेपी में शामिल हुए हैं। बीजेपी ने उन्हें मैदान में उतार दिया है।

गोवा-गुजरात से भी उम्मीदवारों का ऐलान

बीजेपी ने इस लिस्ट में दक्षिण गोवा सीट से पल्लवी श्रीनिवास डेम्पो को टिकट दिया है। गुजरात की मेहसाणा सीट से हरिभाई पटेल, साबरकांठा से शोभनाबेन बरैया, सुरेंद्रनगर से चंदूभाई शिहोरा, जूनागढ़ से राजेशभाई चूडासमा, अमरेली से भरतभाई सुतारिया, वडोदरा से हेमंग योगेशचंद्र जोशी को टिकट दिया गया है।