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दिल्ली HC से अरविंद केजरीवाल को झटका, अब कभी भी गिरफ्तार कर सकती है ईडी, कोर्ट से माँगी थी अरेस्टिंग पर रोक की गारंटी, ED ने दिए ठोस सबूत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। वो दिल्ली हाई कोर्ट में ये याचिका लेकर पहुँचे थे कि उनके खिलाफ ईडी गिरफ्तारी जैसा कदम न उठाए, इस बात की लिखित गारंटी भी दी जाए। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी से पूछा था कि आपके पास क्या सबूत हैं कि अरविंद केजरीवाल को ईडी गिरफ्तार करना चाहती है। कोर्ट ने ईडी से सबूत भी माँगे थे, जिसके बाद ईडी ने कोर्ट में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सबूत दिखाए। इस पूरी सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर रोक वाली याचिका खारिज कर दी और उन्हें कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि अरविंद केजरीवाल के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

इससे पहले, अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी से पूछा था कि वो अरविंद केजरीवाल को समन पर समन क्यों भेज रही है, क्यों नहीं गिरफ्तार कर रही है। इस पर ईडी के वकील एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि ईडी तो अरविंद केजरीवाल को सिर्फ पूछताछ के लिए बुला रही थी, पता नहीं कहाँ से अरविंद केजरीवाल खुद की गिरफ्तारी का हल्ला मचा रहे हैं। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ गिरफ्तारी से जुड़ा कोई सबूत है, तो वो कोर्ट को दिखाया जाए। इसके बाद ईडी के अधिकारियों ने कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की फाइल दी थी।

कोर्ट ने ईडी को फाइल देने के लिए दोपहर 2.30 बजे तक का समय दिया था। इस फाइल को देखने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वो गिरफ्तारी पर रोक जैसा आदेश इस मामले में नहीं दे सकती, क्योंकि सबूतों को देखने के बाद हम अंतरिम राहत नहीं दे सकते।

केजरीवाल की ओर से हाईकोर्ट में पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह समन उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी का बहाना है। ईडी ने 25 हजार पेज इसके लिए तैयार कर रहे हैं, जबकि हमने जो जवाब दिए हैं, उसमें सारे सवालों के जवाब हैं। सिंघवी ने कहा कि मेरे मुवक्किल को चुनाव में खुलकर हिस्सा लेने से रोकने के लिए गिरफ्तारी की तलवार लटकाई जा रही है। उन्होंने कोर्ट में कहा कि बीते साल अक्टूबर में जब पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव थे, तभी से अरविंद केजरीवाल को समन जारी किए जा रहे हैं।

बता दें कि ईडी ने नौंवा समन जारी कर अरविंद केजरीवाल को आज यानी 21 मार्च 2024 को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन अरविंद केजरीवाल अपनी गिरफ्तारी पर रोक के आदेश के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँच गए थे। अब हाईकोर्ट ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को पहले ही अग्रिम जमानत ले लेनी चाहिए थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी से मिली फाइल देखने के बाद ही ये टिप्पणी की और गिरफ्तारी पर रोक लगाने पर कोई आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने इस मामले में अब 22 अप्रैल की तारीख रख दी है, साथ ही ईडी को भी 22 अप्रैल से पहले अपना जवाब देने के लिए कहा है।

होली पर रेन डांस या पूल डांस का आयोजन नहीं: हिन्दू त्योहार आते ही बेंगलुरु के जल बोर्ड का फरमान, दीपावली पर लगता है पटाखा बैन तो जन्माष्टमी पर तय होती है हांडी की ऊँचाई

हिन्दू पर्व-त्योहारों के आते ही प्रशासन से लेकर एक्टिविस्ट तक कुछ ज़्यादा ही सक्रिय हो जाते हैं। दीपावली पर सरकार पटाखों को प्रतिबंधित कर देती है, जन्माष्टमी पर अदालत हांडी की ऊँचाई तय करती है, महाशिवरात्रि पर दूध बचाने का ज्ञान दिया जाता है और होली पर पानी बचाने के लिए कहा जाता है। अब बेंगलुरु वाटर सप्लाई एन्ड सीवेज बोर्ड (BWSSB) ने होली पर कमर्शियल पूल डांस या रेन डांस आयोजित नहीं करने की अपील की है। इसका विरोध हो रहा है।

हालाँकि, बोर्ड ने कहा है कि कर्नाटक की राजधानी में होली खेले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा, खासकर घरों और आवासीय क्षेत्रों में। बोर्ड ने कहा है कि होली पर अगर रेन डांस या पूल डांस का आयोजन किया जाता है तो इसमें हिस्सा लेने वालों को कावेरी या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके लिए उन्हें ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। बोर्ड ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग और ग्राउंडवाटर रिचार्ज को प्राथमिकता देने की बात कही है।

बोर्ड ने कहा है कि इमारत में कितने भी फ्लोर्स हों या बिल्डिंग का आकार कैसा भी हो, पाइलाइन को फिक्स करने के लिए लोगों को प्लंबर की मदद लेनी चाहिए। साथ ही प्लम्बरों से कहा इमारत के मालिकों को शिक्षित करना चाहिए ताकि वो जल संरक्षण के प्रति जागरूक हों। BWSSB के अध्यक्ष रामप्रसाद मनोहर ने कहा कि लोगों की उपेक्षा की वजह से ये स्थिति आन पड़ी है। उन्होंने लोगों पर पानी बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रति 100 लिटर पानी की सप्लाई के लिए जल बोर्ड 90 रुपए खर्च करता है, जबकि उपभोक्ताओं से उसे 45 रुपए ही मिलते हैं।

होली से पहले उन्होंने ज्ञान देते हुए ये भी कहा कि लोगों को पानी की महत्ता पता होनी चाहिए और उन्हें इसका सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। मनोहर ने लोगों को BWSSB के दोस्त के रूप में काम करने की अपील करते हुए कहा कि प्लम्बरों को घरों में नलों में एरिएटर या वाटर फ्लो कंट्रोलर इंस्टॉल करना चाहिए, और लोगों को जागरूक करना चाहिए। व्हाइटफील्ड स्थित अलॉफ्ट होटल्स ‘गुलाल’ नाम से सबसे बड़ी होली पार्टी का आयोजन कर रहा है, जिसमें 8 घंटे तक DJ-संगीत, भोजन-नाश्ता और रंगों के अलावा मौज-मस्ती की व्यवस्था होगी।

बेंगलुरु में अन्य बड़े आयोजनों की बात करें तो कनकपुरा रोड स्थित अरबल वैली रिजॉर्ट ‘होली बरसाने वाली’ फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है। इसमें रेन डांस, ओपन लॉन, पूल डांस और संगीत की व्यवस्था होगी। शहर के पॉश इलाके में होटल रेनिसेंस ‘होली फेस्टिवल रंग बरसे’ आयोजित कर रहा है। इसी तरह धवनी बार एन्ड किचेन ‘ग्रैंड होली फेस्टिवल’ आयोजित कर रहा है। अब होली से पहले वहाँ के जल बोर्ड ने नए फैसले लिए हैं। बता दें कि अन्य मौकों पर भी पूल डांस और रेन डांस में युवा हिस्सा लेते रहे हैं।

पाकिस्तानी आर्मी चीफ खैरात के लिए पहुँचे सऊदी के द्वार, रमजान में रोजा खोलने के लिए मिला 100 टन खजूर: ‘इस्लामी भाईचारा’ भी नहीं आ रहा काम

मुस्लिमों का पाक महीना रमजान चल रहा है। भारत का पड़ोसी इस्लामी मुल्क पाकिस्तान ‘खैरात’ के लिए दरवाजा-दर-दरवाजा घूम रहा है। एक तरफ पाकिस्तान अंतराराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट पैकेज के लिए गुहार लगा है, तो दूसरी तरफ पाक‍िस्‍तानी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर सऊदी अरब पहुँचकर हाथ फैला हुए हैं। सऊदी अरब ने रमजान में रोजा खोलने के लिए पाकिस्तानियों को 100 टन खजूर भेंट किया है।

पाकिस्‍तानी मीडिया का कहना है कि आर्मी चीफ के सऊदी अरब दौरे का असली मकसद क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान से पैसे माँगना है। बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी जल्दी ही सऊदी अरब जा सकते हैं, ताकि पैसे के लिए गुहार लगाई जा सके। इस दौरान के दौरान पाकिस्तान और सऊदी अरब ने संयुक्त बयान भी दिया है, जिसमें मजबूत रिश्ते की बात कही गई है।

पाकिस्‍तानी सेना ने एक बयान में कहा कि प्रिंस सलमान ने कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्‍तान के बीच ऐतिहासिक भाईचारे वाला मजबूत रिश्‍ता है। दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के लिए खड़े हैं। बता दें कि पाकिस्‍तान लगातार सऊदी अरब से लोन माँग रहा है, लेकिन सऊदी अरब ने खैरात देने से साफ कर दिया है। पाकिस्‍तान को लोन के बदले संपत्ति देनी होगी। ऐसा ही मिस्र भी कर रहा है।

हालाँकि, सऊदी अरब ने भाईचारा निभाते हुए पाकिस्तान को 100 टन खजूर भेजे हैं। आमतौर पर मुस्लिम रोजा खजूर से ही तोड़ते हैं, क्योंकि इस्लाम के शुरुआती दिनों से सऊदी अरब में यही प्रथा है। सऊदी अरब की देखा-देखी अन्य मुस्लिम मुल्क के मुस्लिम भी खजूर से ही अपना रोजा खोलते हैं। इसी रोजे को देखते हुए ही सऊदी अरब ने खजूर का उपहार पाकिस्तान को दिया है।

इसको लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सऊदी दूतावास के दूतावास ने कहा, “दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के सम्मानित नेतृत्व की सिफारिश के बाद सऊदी अरब की सरकार ने सद्भावना के संकेत के रूप में रमजान के पाक महीने के दौरान इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान के अपने सम्मानित भाइयों में बाँटने के लिए 100 टन खजूर का उपहार देकर खुश है।”

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के 2021 के आँकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब दुनिया में खजूर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। यहाँ हर साल 16 लाख टन खजूर का पैदावार होता है। वहीं, मिस्र दुनिया में खजूर का सबसे बड़ा उत्पादक मुल्क है। यहाँ 17 लाख टन खजूर उगाए जाते हैं।

उधर, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बुधवार (20 मार्च 2024) को कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से चले आ रहे संरचनात्मक सुधारों की दिशा में स्थायी प्रोत्साहन के लिए 24वें मध्यम अवधि के बेलआउट पैकेज की माँग कर रहा है। आईएमएफ ने कहा कि उसके कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी के बाद पाकिस्तान को अप्रैल के अंत तक यह पैकेज दिया जा सकता है।

अल्लाह जाने किसने हिन्दू बच्चों को मारा, बोले साजिद के गाँव वाले मुस्लिम: परिवार 2 बार बदल चुका है ठिकाना

बदायूँ में दो हिन्दू बच्चों के हत्यारे साजिद के गाँव के मुस्लिम इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन बच्चों की हत्या किसने की। उनका कहना है कि साजिद ने किसी और ने उन बच्चों को मारा है, वह यह नहीं जानते। वहीं अन्य स्थानीय लोग बता रहे हैं कि साजिद का परिवार इससे पहले दो बार अपना ठिकाना बदल चुका है।

ऑपइंडिया बदायूँ में हिन्दू बच्चों की हत्या के मामले में ग्राउंड पर जाकर सच जानने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में ऑपइंडिया बदायूँ में बच्चों की हत्या करने वाले साजिद के गाँव पहुँचा। यह गाँव बदायूँ से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है और इसका नाम सखानूं है।

सखानू में ऑपइंडिया ने स्थानीय दुलीचंद से बात की। उन्होंने बताया कि साजिद का परिवार यहाँ का मूल निवासी नहीं है। उन्होंने यह खुलासा किया कि साजिद का परिवार इससे पहले दो बार अपना ठिकाना बदल चुका है। साजिद का परिवार इससे पहले ककराला और उपराला गाँव में रहते थे। यह दोनों गाँव भी बदायूँ जिले में ही हैं।

दुलीचंद ने बताया कि साजिद के दादा का नाम गनी था जो कि दवाई देते थे। दुलीचंद ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उन्हें कोई गुंडई नहीं दिखी। इस दौरान दुलीचंद ने वर्तमान योगी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में यहाँ शासन व्यवस्था ठीक है।

दुलीचंद ने बताया कि गाँव में आधे से अधिक मुस्लिम आबादी है, बाकी में हिन्दू हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगाया गया था तब यहाँ बाहर के बहुत से लोगों को छुपाया गया था। उन्होंने यह बताया कि 2017 से पहले यहाँ दबंगई से मजदूरी भी करवाई जाती थी।

सखानू के ही एक मुस्लिम व्यक्ति से बात करने पर उसने इस बात पर शक जाहिर किया कि हिन्दू बच्चों की हत्या साजिद ने की है या किसी और ने की है। उन्होंने कहा कि यह बात अल्लाह जान सकता है कि साजिद ने ही बच्चों को मारा है या किसी और ने मारा है।

इससे पहले ऑपइंडिया को घटनास्थल के आसपास रहने वालों ने बताया था कि बदायूँ के इस इलाके में उसके परिवार की 11 दुकानें हैं। स्थानीय लोगों ने बताया था कि वैसे यह सारी दुकानें रात 8-9 बजे तक खुली रहती थीं। घटना के दिन जब लोगों ने ढूँढा तो एक भी दुकान नहीं खुली थी। सारे परिजन भाग चुके थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि इस हत्या के पीछे कोई बड़ा राज है और सभी को जानकारी थी।

साजिद और जावेद की दुकान पर बाल कटवाने के लिए जाने वाले इन स्थानीय लोगों ने बताया था कि दोनों बातचीत में सामान्य थे और इन्होने कलावा भी बाँध रखा था। उन्होंने बताया कि इनके अधिकांश परिजनों ने ऐसे नाम रखे हैं जिनसे सीधे सीधे धर्म का पता ना लगे।

गौरतलब है कि 19 मार्च, 2024 की शाम को बदायूं में नाई की दुकान चलाने वाले साजिद ने दो हिन्दू बच्चों आयुष और अहान की छुरी से रेत कर हत्या कर दी थी। साजिद यह हत्या करके फरार हो गया था। यूपी पुलिस ने साजिद को उसी दिन मुठभेड़ में मार गिराया था। घटना के दौरान मौजूद रहा साजिद का भाई जावेद फरार था। पुलिस की टीमे उसकी तलाश में दबिश दे रही थी। जावेद पर पुलिस ने ₹25,000 का इनाम भी घोषित किया था। जावेद को आज (21 मार्च, 2024) को गिरफ्तार किया गया है।

बेटी को कोटा पढ़ने भेजा, आई हाथ-पाँव बँधी तस्वीरें… जिस लड़की के लिए केंद्रीय मंत्री से लेकर CM तक आ गए हरकत में, उसने खुद रचा अपने अपहरण का ड्रामा

मध्य प्रदेश के शिवपुरी की एक छात्रा का राजस्थान के कोटा से अपहरण की खबर सुर्ख़ियों में छाई हुई थी। केंद्रीय नागर एवं विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस सम्बन्ध में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी बातचीत की थी। अब जो खुलासा हुआ है, वो हैरान करने वाला है। असल में ये पूरा का पूरा मामला फर्जी निकला है। बेटी ने विदेश घूमने के लिए ये साजिश रची थी। उसने अपने ही अपहरण का ड्रामा रच कर पिता से रुपए वसूलने की योजना बनाई।

एक व्हाट्सएप्प मैसेज के जरिए पिता को काव्या धाकड़ की तस्वीर भेजी गई थी, जिसमें वो लेटी हुई है और उसके हाथ-पाँव बाँधे हुए हैं। लड़की को माता-पिता ने NEET की तैयारी के लिए कोटा भेजा था। जब पुलिस माता-पिता को लेकर बताए गए कोचिंग संस्थान और हॉस्टल में पहुँची तो पता चला काव्या धाकड़ नाम की कोई छात्रा वहाँ पंजीकृत है ही नहीं। पिता को भेजे गए धमकी भरे मैसेज में कहा गया था कि 30 लाख रुपए न देने पर लड़की की अगली फोटो बिना सिर के आएगी।

कोटा की पुलिस अधीक्षक (SP) अमृता दुहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के बताया कि रघुवीर धाकड़ ने सोमवार (18 मार्च, 2024) को बेटी के अपहरण की FIR दर्ज करवाई थी। पुलिस ने काव्या धाकड़ की अंतिम लोकेशन इंदौर में पकड़ी है। उसका एडमिशन करा कर माँ जैसे ही वापस लौटी, लड़की भी इंदौर लौट आई। इंदौर में वो अपने दोस्तों के साथ रुकी हुई थी। इस दौरान वो अपने माता-पिता से बात करती रही और उन्हें क्लासेज, एटेंडेंस और टेस्ट वगैरह के बारे में बताती रही।

लड़की के पिता को व्हाट्सएप्प के जरिए मिली थी धमकी

काव्या धाकड़ के ही एक दोस्त ने पुलिस के सामने ये सारे राज़ खोलते हुए बताया कि वो वित्तीय हालत से परेशान थी और अपने एक दोस्त के साथ विदेश भाग जाना चाहती थी। उसने भँवरकुआँ स्थित सिमरन हॉस्टल में ही रस्सी से खुद को बँधवा कर फोटोशूट करवाया। काव्या धाकड़ अभी बरामद नहीं हुई है। पुलिस ने अपील की है कि किसी को भी खबर मिले तो वो उसके माता-पिता या पुलिस को सूचित करे। उससे भी अपील की गई है कि वो लौट आए।

उधर जयपुर के दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें काव्या धाकड़ 2 युवकों के साथ दिखाई दे रही है। जयपुर के अहिंसा सर्किल पर भी उसकी फुटेज मिली है, 2 युवक वहाँ भी उसके साथ हैं। दोनों युवकों ने चेहरे पर मास्क लगा रखा है। पुलिस की एक टीम दिल्ली में भी है। 20 वर्षीय छात्रा का सितंबर 2023 में कोटा में एडमिशन कराया गया था। दीवाली पर वो घर भी आई थी। पिता ने बताया था कि 2 साल पहले जब लड़की इंदौर रहती थी तो रिंकू धाकड़ नामक एक युवक उसे परेशान करता था।

खबरों में ये भी बताया गया है कि लड़की और उसके प्रेमी ने मिल कर ये पूरी साजिश रची थी। दोनों पैसे लेकर विदेश में बसना चाहते थे। पुलिस ने छात्रा को सुरक्षा देने का आश्वासन देते हुए अपील की है कि वो जहाँ भी है वापस आ जाए। वहीं पिता ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर ये सच है तो फिर उनकी बेटी कहाँ है? दोनों युवकों की पहचान ब्रजेन्द्र और हर्षित के रूप में हुई है। जहाँ फोटोशूट हुआ ब्रजेन्द्र उसी हॉस्टल में रहता है।

ब्रजेन्द्र से कोटा पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस ने हॉस्टल से रस्सी भी बरामद की है। मंगलवार को इंदौर स्थित दीक्षा हॉस्टल के बाहर रात के साढ़े 9 बजे काव्या धाकड़ को दोनों युवकों के साथ देखा गया। छात्रा का कोटा में पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था, ऐसा पुलिस का कहना है। जिस फोन नंबर से धमकी दी गई, वो MP की ही है। छात्रा की लोकेशन इंदौर की आई। जिन खाते में पैसे माँगे गए वो भी छात्रा के ही थे। इन संदिग्ध कड़ियों से पुलिस को साजिश का पता चला।

राहुल गाँधी की देश-तोड़ू जाति-राजनीति पर कॉन्ग्रेस में ही विरोध, सीनियर नेता ने इंदिरा को याद कर लिखा – ‘न जात पर, न पात पर…’

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस की वर्किंग कमेटी के सदस्य, दिग्गज नेता आनंद शर्मा ने राहुल गाँधी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राहुल गाँधी की चुनाव केंद्रिय नीतियों पर सवाल उठाते हुए उसे इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का अपमान करार दिया है, खासकर जातिगत जनगणना के मुद्दे पर। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा घोषित जातिगत जनगणना को लेकर राहुल गाँधी पर हमला किया और बताया कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर जाने का मतलब है कि कॉन्ग्रेस अब अपने ऐतिहासिक रुख से पलट रही है, जो इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की लीगेसी का अपमान भी है।

कॉन्ग्रेस के विद्रोही जी-23 टीम के सदस्य और वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के लोकप्रिय चुनावी नारों का भी हवाला दिया है। उन्होंने मंगलवार (19 मार्च 2024) को कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र लिखा है, जिसमें राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक नीतियों का विरोध किया गया है। उन्होंने अपने पत्र में इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के चुनावी नारे ‘न जात पर, न पात पर… मोहर लगेगी हाथ पर’ का जिक्र किया। बता दें कि इस नारे को सबसे पहले इंदिरा गाँधी ने साल 1980 में दिया था और ये नारा कुछ समय पहले तक इस्तेमाल भी होता रहा है, खासकर उन हिंदी भाषी राज्यों में, जहाँ जाति आधारित राजनीतिक पार्टियाँ सक्रिय हैं।

आनंद शर्मा ने पत्र में लिखा है कि राहुल गाँधी जिस जातिगत जनगणना के मुद्दे को जोरशोर से उठा रहे हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी ने चुनाव में जीत के बाद जिस जातिगत जनगणना को कराने की बात कही है, वो कॉन्ग्रेस के ऐतिहासिक रुख से ठीक उलट है। इस नीति पर चलते से कॉन्ग्रेस को नुकसान ही होगा, क्योंकि विपक्षी भी उसे खूब निशाना बनाएँगे।

कॉन्ग्रेस नेता आनंद शर्मा का ये पत्र ऐसे समय पर सामने आया है, जब लोकसभा चुनाव में पार्टी उतर चुकी है। ये पत्र कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि एक तरफ वो जातिगत जनगणना को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ आनंद शर्मा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का नाम लेकर और कॉन्ग्रेस के सियासी इतिहास को सामने रखकर कॉग्रेस के दावों की हवा निकाल दी है।

आनंद शर्मा जी-23 नेताओं में से एक हैं। उन नेताओं ने साल 2021 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को तीखा पत्र लिखा था और पार्टी की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव लाने की बात कही थी। इन नेताओं में कई नेता पार्टी छोड़ गए हैं, तो कईयों को हाशिये पर ढकेल दिया गया है। इस पत्र में भी कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल आनंद शर्मा ने पार्टी में समन्वय की कमी का मामला उठाया है। उन्होंने कहा है कि जिला और प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटियों की कोई पूछ नहीं है।

गाड़ी से कुचलकर की BJP नेता की हत्या… 4 साल बाद इरफान बिस्ती गिरफ्तार: हेयर सैलून खोलकर छिपा रहा था पहचान, कॉन्ग्रेस नेता से मिली थी सुपारी

गुजरात के दाहोद में भारतीय जनता पार्टी के पार्षद हिरेन पटेल की हत्या मामले में चार साल बाद गुजरात आतंकवाद दस्ते ने बुधवार (20 मार्च 2024 ) को नौंवे आरोपित को गिरफ्तार किया है। इस आरोपित की पहचान मोहम्मद इरफान बिस्ती के तौर पर हुई है। गुजरात एटीएस ने मध्य प्रदेश एटीएस के साथ मिलकर इसे गिरफ्तार किया। ये घटना के बाद से फरार था और इंदौर में छिपकर हेयर सैलून चला रहा था।

बता दें कि पुलिस की रिपोर्टों में इस केस को ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ और राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में हुई हत्या बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 4 साल पहले 27 सितंबर 2020 को मॉर्निंग वॉक पर निकले बीजेपी नेता को गाड़ी से कुचलकर मार डाला गया था। हत्या की साजिश दाहोद के पूर्व सांसद बाबूभाई कटारा के बेटे अमित कटारा ने रची थी।

बीजेपी नेता की मौत के बाद जब मामले में मुकदमा दर्ज हुआ तो 8 लोग गिरफ्तार हुए। साजिशकर्ता इमरान गुड़ाला निकला, उसी ने अमित कटारा से पैसे लेकर ये सब करवाया था। जब इमरान पकड़ा गया तो इरफान के नाम की भी जानकारी हुई। लेकिन, नाम खुलते ही इरफान फरार हो गया।

मामले में पुलिस अधीक्षक हर्ष उपाध्याय बताते हैं, “घटना के बाद आरोपित इंदौर चले गए थे। जब इरफान को पता चला कि उसका नाम सामने आ गया है तब वह अपनी पत्नी के साथ इंदौर के खरजाना में छिप गया। उसने कुछ समय बाद वहाँ हेयर सैलून खोल लिया ताकि किसी को उस पर शक न हो।”

गुजरात एटीएस यूनिट को जब इसकी जानकारी नहीं हुई कि इरफान कहाँ है तो उन्होंने मध्य प्रदेश एटीएस से संपर्क किया। इरफान की जानकारी उनके साथ शेयर की गई और आखिरकार इरफान को मध्य प्रदेश एटीएस की इंदौर यूनिट की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वो हिरेन पटेल की हत्या मामले में शामिल था।

कॉन्ट्रैक्ट में सुपारी के तौर पर इरफान को 25000 रुपए भी दिए गए थे ये बात भी इरफान ने पुलिस पूछताछ में स्वीकारी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इरफान बिस्ती अपने साथियों औक मामले के सह आरोपितों के साथ हत्या की साजिश को अंजाम देने इंदौर से झालोद आए थे। हिरेन पटेल यहीं की नगर पालिका में पार्षद थे।

‘अहमियत नहीं मिलने से नाराज हैं कार्यकर्ता’: हिमाचल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने लोकसभा चुनाव लड़ने से किया इनकार, पेशोपेश में नेतृत्व

कॉन्ग्रेस अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी में ना सिर्फ भगदड़ मची है, बल्कि जिन उम्मीदवारों को लोकसभा चुनाव 2024 का टिकट मिल रहा है, वो भी चुनाव लड़ने से मना कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश राजपरिवार की प्रमुख और कॉन्ग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। उन्होंने इसकी सूचना पार्टी अध्यक्ष को दे दी है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को मंडी संसदीय क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया। हिमाचल प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में सरकार रहते हुए कार्यकर्ताओं के लिए कुछ नहीं किया गया। ऐसे में कार्यकर्ता कॉन्ग्रेस को कैसे वोट देंगे। उन्हें प्रदेश में अहमियत नहीं मिल रही है।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने छह विधायकों के रूप में एक नई चुनौती है, जिन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। उपचुनाव होने जा रहे हैं। इन छह सीटों पर चुनाव होना है और हमें सभी पर जीत हासिल करनी है। इन्हें जिताना मेरी जिम्मेदारी है। यही कारण है कि मैंने मंडी से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। पहले स्थिति बहुत अलग थी।” बता दें कि हिमाचल में अंतिम चरण में मतदान होना है।

मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह ने बुधवार (20 मार्च 2024) को कहा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, क्योंकि जमीनी स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने राज्य के हर क्षेत्र का व्यापक दौरा किया और पाया कि कोई भी कार्यकर्ता सक्रिय नहीं है। ऐसी स्थिति में सफलता मुश्किल है। आप सिर्फ सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD) योजना निधि बाँटकर चुनाव नहीं जीत सकते।”

पूर्व बुशहर रियासत की महारानी प्रतिभा सिंह ने कहा, “मैंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है, क्योंकि मैं इसे लड़ने की स्थिति में नहीं हूँ। पार्टी के कार्यकर्ता नाराज हैं, क्योंकि उनके लिए कुछ नहीं किया गया है। किसी भी चुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होती है। मैंने कई बार कहा कि कार्यकर्ताओं को महत्व देना जरूरी है, तभी हम प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला कर सकते हैं।”

प्रतिभा सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय के बारे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को बता दिया है। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश अध्यक्ष हैं, इसलिए सिर्फ एक सीटों तक केंद्रित नहीं रह सकती हैं। उन्हें पूरे राज्य की स्थिति देखनी है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय नेतृत्व को उन्होंने मंडी के लिए कौल सिंह ठाकुर का नाम सुझाया है, क्योंकि वे इस क्षेत्र में जाने माने नेता हैं और उन्हें जमीनी हकीकत की अच्छी समझ है।

वर्ष 2021 में मंडी संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव जीतने वाली प्रतिभा सिंह ने कहा, “जहाँ तक बाकी टिकटों का सवाल है, हमारे पास अभी समय है। हिमाचल प्रदेश में 1 जून 2024 को मतदान है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी बैठक में कहा कि हमारे पास अभी समय है। कुछ दिनों में हम लोकसभा और विधानसभा की सीटों के लिए उम्मीदवार तय कर लेंगे।”

अभी कुछ ही समय पहले पार्टी के 6 बागी विधायकों को विधानसभा से बर्खास्त कर दिया गया था। धर, प्रतिभा सिंह के बेटे एवं कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी बीते दिनों राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार से इस्तीफा दे दिया था। वे सरकार के खिलाफ काफी मुखर थे। हमीरपुर, कांगड़ा और शिमला में मजबूत प्रत्याशियों की तलाश कर रही कॉन्ग्रेस के लिए मंडी एक नई मुसीबत बन गई है। 

अरुणाचल भारत का हिस्सा, चीन की घुसपैठ का करते हैं कड़ा विरोध: अमेरिकी विदेश मंत्रालय

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत में चीन की घुसपैठ का वह विरोध करता है। उसने कहा है कि LAC (लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल) के पार की जाने वाली गड़बड़ी के वह पूरी तरह से विरोध में है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश को वह भारत का हिस्सा मानता है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने अरुणाचल प्रदेश में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे पर चीन की टिप्पणी को लेकर एक प्रश्न के उत्तर में कहा, “अमेरिका अरुणाचल प्रदेश को भारत की जमीन मानता है और LAC के पार सैन्य घुसपैठ या अतिक्रमण से अपनी जमीन बढ़ाने के दावे के एकतरफ़ा प्रयास का पूरी तरीके से विरोध करता हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में पीएम मोदी ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण सेला सुरंग समेत तमाम परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया था। सेला दुनिया की सबसे ऊँचाई पर बनी सुरंग है। पीएम मोदी ने इस दौरान पूर्वोत्तर में किए गए अन्य विकास कार्यों का भी ब्यौरा दिया था।

पीएम मोदी के इस दौरे के बाद चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल झांग ज़ियाओगांग ने कहा था कि जिजांग (तिब्बत का भाषा में नाम) का दक्षिण का क्षेत्र चीन का पारम्परिक रूप से हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश को अवैध रूप से स्थापित किया है और बीजिंग इसे कभी नहीं मानेगा।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब चीन अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ या उस पर अपना दावा जताता आया हो। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के इलाकों में घुसपैठ करता है और उसे तिब्बत का एक हिस्सा बताता है। वह अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को ‘नत्थी वीजा’ देता है। चीन ने 1950 के दशक में बौद्धों को भगा कर तिब्बत पर कब्जा कर लिया था और अब उसका दावा है कि अरुणाचल उसकी तिब्बत का एक हिस्सा है। भारत ने चीन को हमेशा इस मामले में कड़ा जवाब दिया है।

चीनी रक्षा मंत्रालय की इस टिप्पणी के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट रूप से जवाब दिया था। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ” हमारे ध्यान में चीनी प्रवक्ता द्वारा की गई टिप्पणियाँ आई हैं। चीनी रक्षा अरुणाचल प्रदेश को लेकर बेतुके दावे कर रहा है। इस बारे में बार-बार एक ही तरह के दावे दोहराने से इस दावे को कोई सच नहीं मान लेगा। अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा ही रहेगा। अरुणाचल प्रदेश के निवासियों को हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का लाभ लगातार मिलता रहेगा।”

गौरतलब है कि चीन लद्दाख और उत्तराखंड वाले क्षेत्र में भी लगातार सीमा पर गड़बड़ी करता रहता है। वह लगातार इन हिस्सों को अपना बताने का दावा करता है। हालाँकि, भारत ने उसके सभी दावे नकारते हुए इन सभी इलाकों में सेना की मजबूत तैनाती कर रखी है।

सेंसर बोर्ड में अटक गई वीर सावरकर पर रणदीप हुड्डा की फिल्म? – सोशल मीडिया में केंद्रीय मंत्री को क्यों टैग कर रहे यूजर्स, जानिए

अभिनेता रणदीप हुड्डा महान स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर फिल्म लेकर आए हैं। ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने ही किया है। गहन शोध के बाद बनाई गई इस फिल्म के लिए उन्होंने खासी मेहनत की है। कालापानी के दौर को पर्दे पर जीवंत करने के लिए रणदीप हुड्डा को अपने शरीर को काफी कमजोर करना पड़ा। हालाँकि, अब खबर आ रही है कि सेंसर बोर्ड में ये फलम अटक गई है, इसकी रिलीज को लेकर अनिश्चितता है।

फिल्म कारोबार विश्लेषक सुमित काडेल ने एक ट्वीट के जरिए बताया, “कई सूत्रों से मुझे ये सुनने को मिल रहा है कि ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ का सेंसर सर्टिफिकेट जानबूझकर रोक दिया गया है। इस कारण इसके कई शो रद्द हो रहे हैं। इससे फिल्म की रिलीज में बाधा आ सकती है और इसके प्रदर्शन का जो अधिकार है उसे नकारा जा सकता है। इससे संबद्ध संस्थाओं को इसकी अच्छी तरह जाँच करनी चाहिए। उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि न्याय हो।”

सुमित काडेल ने कहा कि कलात्मक स्वतंत्रता को बनाए रखने और फिल्म निर्माण प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने ये आशंका भी जताई कि जब हिंदी सेंसर को इतने लंबे समय तक रोक कर रखा गया है तो मराठी के लिए अप्लाई करने का समय ही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर इस कारण फिल्म मराठी भाषा में रिलीज नहीं हो पाती है तो ये त्रासद होगा। बता दें कि वीर सावरकर मराठी ही थे।

इस खबर के सामने आने के बाद लोगों ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को टैग कर के हस्तक्षेप करने की माँग की। ‘मिस्टर सिन्हा’ नामक ट्विटर हैंडल ने कहा कि ये परेशान करने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि वामपंथी इकोसिस्टम सेंसर बोर्ड का प्रबंधन कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ हफ़्तों में ये दूसरी ऐसी घटना है। बता दें कि लेफ्ट लॉबी वीर सावरकर का विरोध करती है और उनके योगदानों को नकारती है, क्योंकि उन्होंने हिंदुत्व के लिए आवाज़ उठाई।