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‘रमजान है, इसीलिए हम अपना बंद वापस लेते हैं’: शाम के 4 बजे TMC का ऐलान, केंद्रीय मंत्री के काफिले पर गुंडों के हमले के बाद BJP का प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) ने कूच विहार के दिनहाटा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री निसिथ प्रामाणिक और राज्य के नॉर्थ बंगाल डेवलपमेंट मंत्री उदयन गुहा के बीच समर्थकों संग हुई झड़प के बाद बंद बुलाया था, लेकिन रमजान को देखते हुए अब इस बंद को रद्द कर दिया गया है। निसिथ प्रामाणिक कूच विहार से वर्तमान सांसद हैं। बंद के कारण शाम 4 बजे तक दिनहाटा में दुकानें बंद थीं और सड़क पर गाड़ियाँ भी अधिक संख्या में नहीं दिख रही थीं।

उदयन गुहा ने दावा किया कि लोगों को बढ़-चढ़ कर इस बंद में हिस्सा लिया है। उन्होंने आगे कहा कि रमजान को देखते हुए और आगे लोगों को तकलीफ न हो इसको ध्यान में रखते हुए शाम के 4 बजे इस बंद को वापस लिया जाता है। वहीं भाजपा ने भी स्थानीय SP के दफ्तर के बाहर इस घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। वहाँ लगे बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की गई। हालाँकि, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस भी दिनहाटा पहुँचे।

उन्होंने राज्य के DGP से इस घटना को लेकर रिपोर्ट भी तलब की है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय हिंसा की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्वीकार किया कि वहाँ का राजनीतिक वातावरण सही नहीं है। उन्होंने कहा कि वो चुनाव आयोग की गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उन्होंने पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा को याद करते हुए कहा कि अब इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि जहाँ भी हिंसा होगी वहाँ वो दौरा करेंगे और ऐसे उठाएँगे जिनसे हिंसा न हो।

उन्होंने जमीनी स्थिति की समीक्षा करने का भी आश्वासन दिया। CV आनंद बोस ने दिनहाटा में दोनों पक्षों को सुनने के बाद हालात को जल्द सामान्य करने के लिए कदम उठाने की बात कही। मंगलवार (19 मार्च, 2024) को निसिथ प्रामाणिक और उदयन गुहा अपने-अपने समर्थकों के साथ आपस में भिड़ गए थे। ये घटना सवा 9 बजे हुई जब केंद्रीय राज्यमंत्री अपने काफिले के साथ चौपाटी क्षेत्र से गुजर रहे थे। वहीं TMC समर्थक वहाँ उदयन गुहा का जन्मदिन मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे।

उदयन गुहा का दावा है कि निसिथ प्रामाणिक नीचे उतरे और उन्होंने अपने सुरक्षा गार्ड्स के साथ तृणमूल समर्थकों पर हमला कर दिया। वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि उन पर पत्थरबाजी की गई, बम तक फेंके गए। दोनों मंत्री आमने-सामने आ गए। प्रामाणिक का कहना है कि पत्थरबाजी और बमबारी के बाद वो देखने उतरे थे कि क्या हुआ है, लेकिन उन पर हमला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इलाके में संभावित हार को देखते हुए उदयन गुहा ने ये सब करवाया।

‘जावेद ही साजिद को मेरे घर लाया था, बोल रहा है झूठ’: बदायूँ के मृतक बच्चों की माँ बोली- मेरे सामने हो पूछताछ, पिता बोला- सैलून में आते थे गुंडे, फाँसी दी जाए

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में दो हिन्दू बच्चों की हत्या के मामले में फरार जावेद को बरेली से गिरफ्तार कर लिया गया है। जावेद पर यूपी पुलिस ने ₹25,000 का इनाम रखा था। उसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह अपने आप को बेकसूर बता रहा है। हालाँकि, मृतक बच्चों की माँ संगीता ने कहा कि जावेद झूठ बोल रहा है। जावेद ही अपने साथ साजिद लेकर उनके घर आया था।

दरअसल, सामने आए वीडियो में जावेद बताता दिख रहा है कि वह हत्या के बाद भीड़ के चलते बदायूँ से भागकर दिल्ली चला गया था। उसके पास लोगों के फ़ोन आ रहे थे कि उसके भाई साजिद ने बदायूँ में हत्या कर दी है। उसने दावा किया है कि वह बेकसूर है और उसे नहीं पता कि उसके भाई साजिद ने बच्चों की हत्या क्यों की। उसने यह भी कहा कि वह आत्मसमर्पण करने के लिए वापस बरेली आया है।

वहीं, मृतक बच्चों की माँ संगीता का कहना है, “जावेद खुद को बचाने के लिए यह सब कह रहा है। वह झूठ बोल रहा है। घटना के वक्त जावेद ही साजिद को बाइक से लेकर उनके घर आया था। हत्या के बाद साजिद ने मेरे घर से किसी को फोन किया था। पुलिस कॉल रिकॉर्ड निकलवाकर पता लगाए कि साजिद ने किसको फोन किया था।” उन्होंने कहा कि पुलिस जावेद से पूछताछ उनके सामने करे।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, संगीता ने कहा, “जावेद को सब पता था। उससे पूछा जाए कि यह कब से प्लान बना रहे थे। एक दिन में यह प्लान नहीं बना होगा। जावेद क्यों मेरे घर आया था? हमारे बच्चों का कहीं कोई आना-जाना भी नहीं था। बच्चे घर में ही खेलते रहते थे।” वहीं, मृतक बच्चों की दादी मुन्नी देवी का कहना है कि जावेद से पूछताछ की जाए कि आखिर इसने दोनों बच्चों को क्यों मारा।

मृतक लड़कों की माँ ने कहा कि साजिद उनके घर शाम 6 बजे आया था और पत्नी के बारे में झूठ बोलकर उनसे 5000 रुपए माँगे थे। वह पहली बार उनके घर आया था। जब उन्होंने साजिद को पैसे दे दिए तो वह छत पर चला गया। वहाँ उनके दोनों बेटे खेल रहे थे। वहाँ उसने दोनों बेटों की बेरहमी से हत्या कर दी। संगीता ने कहा, “मुझे न्याय चाहिए। पूछताछ हमारे सामने होनी चाहिए।”

ABP की रिपोर्ट के मुताबिक, संगीता ने आगे कहा, “हमें भी पूछना है कि उसने हमारे बच्चों को क्यों मारा। किसी के कहने पर तो ऐसा नहीं किया, क्योंकि हमारी उससे कोई दुश्मनी नहीं थी। पुलिस हमारे सामने जावेद को लेकर आए और हमारे सामने उसकी हत्या होनी चाहिए।” संगीता ने कहा कि बड़े ऑपरेशन से उनका बच्चा हुआ था और अब सिर्फ एक ही बेटा बचा है।  

इस हत्याकांड के दूसरे आरोपित जावेद की गिरफ्तारी के बाद मृतक बच्चों के पिता विनोद ने उसे फाँसी देने और उसके घर पर बुलडोजर चलाने की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा की भी माँग की है। उन्होंने कहा कि जावेद से पूछा जाना चाहिए कि इस घटना में और कौन-कौन शामिल है, क्योंकि यह अकेले की घटना नहीं है।

विनोद ने कहा, “हमारे बच्चे उसे जानते थे। उसे भैया कहते थे। उससे बाल कटवाते थे। छोटा बच्चा भी जानता है कि कौन जावेद है, कौन साजिद है। जावेद अपने बचाव के लिए झूठ बोल रहा है। यह भी दोषी है। इसने अपने भाई का पूरा साथ दिया है। इसकी दुकान पर गुंडे भी आते थे। इनसे पूछना चाहिए कि क्या इन लोगों को पैसा दिया गया या किसी रंजिश के चलते इन लोगों ने यह किया।”

रमजान के जुमे से चालू होगा ‘कमाल मौलाना’ मस्जिद का सर्वे, ASI ढूंढेगी सरस्वती मंदिर के चिन्ह, पुलिस से सुरक्षा के इंतजाम को लिखा पत्र

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर का कल से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) सर्वे करेगा। यह सर्वे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद किया जा रहा है। यह सर्वे शुक्रवार (22 मार्च, 2024) से चालू होगा। इसके लिए ASI ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है और सर्वे में कोई समस्या ना आए प्रशासन से सुरक्षा के इंतजाम करने को कहा है।

ASI को इस सर्वे की रिपोर्ट 29 अप्रैल, 2024 के पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को सौंपनी होगी। कल से चालू होने वाले सर्वे में ASI इस भोजशाला परिसर में मौजूद प्रतीकों और अन्य साक्ष्यों का अध्ययन करेगी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 11 मार्च, 2024 को एक निर्णय सुनाते हुए ASI को आदेश दिया था कि वह इस परिसर का सर्वे करके उसे रिपोर्ट सौंपे। अब ASI ने सर्वे की तैयारी पूरी कर ली हैं और उसने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा के इंतजाम करने को कह़ा है। कल रमजान का जुमा भी है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कार्बन डेटिंग मेथड का इस्तेमाल कर के सर्वे में इस संरचना की उम्र का पता लगाया जाए। जमीन के भीतर और बाहर जो कई संरचनाएँ हैं, उन सबका सर्वे होगा। दीवारों, स्तम्भों, फर्श, छतों और इसके गर्भगृह को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। ASI के वरिष्ठ अधिकारी इस सर्वे में शामिल होंगे और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। हाईकोर्ट ने एक्सपर्ट कमिटी द्वारा तैयार होने के बाद रिपोर्ट को पेश किए जाने का आदेश दिया था।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ASI के डायरेक्टर जनरल/एडिशनल DG खुद मौजूद रह कर रिपोर्ट सौंपें। अब इस सर्वे के लिए इस परिसर में जो दरवाजे बंद हैं, उन्हें खोला जाएगा। अंदर जो मूर्तियाँ या अन्य वस्तुएँ मिलेंगी, उन सबके फोटोग्राफ्स लिए जाएँगे। कार्बन डेटिंग के जरिए उन सबकी उम्र का पता लगाया जाएगा।

साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी आदेश दिया था कि ये सर्वे किसी भी संरचना, वस्तुओं या मूर्तियों को नुकसान नुकसान पहुँचाए बिना अंजाम दिया जाए। इसके जरिए इस पूरे परिसर की वास्तविक प्रकृति और स्वभाव का पता लगाया जाए। हिंदू संगठन की माँग रही है कि भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित की जाए।

‘भोजशाला’ ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती को समर्पित एक अनूठा और ऐतिहासिक मंदिर है। इसकी स्थापना राजा भोज ने की थी। राजा भोज (1000-1055 ई.) परमार राजवंश के सबसे बड़े शासक थे। वे शिक्षा एवं साहित्य के अनन्य उपासक भी थे। उन्होंने ही धार में इस महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा। यहाँ दूर-दूर से छात्र पढ़ाई करने के लिए आते थे।

मुस्लिम जिसे ‘कमाल मौलाना मस्जिद’ कहते हैं, उसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़कर बनवाया है। अभी भी इसमें भोजशाला के अवशेष स्पष्ट दिखते हैं। मस्जिद में उपयोग किए गए नक्काशीदार खंभे वही हैं, जो भोजशाला में उपयोग किए गए थे। मस्जिद की दीवारों से चिपके उत्कीर्ण पत्थर के स्लैब में अभी भी मूल्यवान नक्काशी किए हुए हैं। 

इसमें प्राकृत भाषा में भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक लिखे हुए हैं। एक अन्य अभिलेख में संस्कृति व्याकरण के बारे में जानकारी दी गई है। अब सर्वे से इस परिसर के बारे में और भी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

दिल्ली HC से अरविंद केजरीवाल को झटका, अब कभी भी गिरफ्तार कर सकती है ईडी, कोर्ट से माँगी थी अरेस्टिंग पर रोक की गारंटी, ED ने दिए ठोस सबूत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। वो दिल्ली हाई कोर्ट में ये याचिका लेकर पहुँचे थे कि उनके खिलाफ ईडी गिरफ्तारी जैसा कदम न उठाए, इस बात की लिखित गारंटी भी दी जाए। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी से पूछा था कि आपके पास क्या सबूत हैं कि अरविंद केजरीवाल को ईडी गिरफ्तार करना चाहती है। कोर्ट ने ईडी से सबूत भी माँगे थे, जिसके बाद ईडी ने कोर्ट में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सबूत दिखाए। इस पूरी सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर रोक वाली याचिका खारिज कर दी और उन्हें कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि अरविंद केजरीवाल के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

इससे पहले, अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी से पूछा था कि वो अरविंद केजरीवाल को समन पर समन क्यों भेज रही है, क्यों नहीं गिरफ्तार कर रही है। इस पर ईडी के वकील एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि ईडी तो अरविंद केजरीवाल को सिर्फ पूछताछ के लिए बुला रही थी, पता नहीं कहाँ से अरविंद केजरीवाल खुद की गिरफ्तारी का हल्ला मचा रहे हैं। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ गिरफ्तारी से जुड़ा कोई सबूत है, तो वो कोर्ट को दिखाया जाए। इसके बाद ईडी के अधिकारियों ने कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की फाइल दी थी।

कोर्ट ने ईडी को फाइल देने के लिए दोपहर 2.30 बजे तक का समय दिया था। इस फाइल को देखने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वो गिरफ्तारी पर रोक जैसा आदेश इस मामले में नहीं दे सकती, क्योंकि सबूतों को देखने के बाद हम अंतरिम राहत नहीं दे सकते।

केजरीवाल की ओर से हाईकोर्ट में पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह समन उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी का बहाना है। ईडी ने 25 हजार पेज इसके लिए तैयार कर रहे हैं, जबकि हमने जो जवाब दिए हैं, उसमें सारे सवालों के जवाब हैं। सिंघवी ने कहा कि मेरे मुवक्किल को चुनाव में खुलकर हिस्सा लेने से रोकने के लिए गिरफ्तारी की तलवार लटकाई जा रही है। उन्होंने कोर्ट में कहा कि बीते साल अक्टूबर में जब पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव थे, तभी से अरविंद केजरीवाल को समन जारी किए जा रहे हैं।

बता दें कि ईडी ने नौंवा समन जारी कर अरविंद केजरीवाल को आज यानी 21 मार्च 2024 को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन अरविंद केजरीवाल अपनी गिरफ्तारी पर रोक के आदेश के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँच गए थे। अब हाईकोर्ट ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को पहले ही अग्रिम जमानत ले लेनी चाहिए थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी से मिली फाइल देखने के बाद ही ये टिप्पणी की और गिरफ्तारी पर रोक लगाने पर कोई आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने इस मामले में अब 22 अप्रैल की तारीख रख दी है, साथ ही ईडी को भी 22 अप्रैल से पहले अपना जवाब देने के लिए कहा है।

होली पर रेन डांस या पूल डांस का आयोजन नहीं: हिन्दू त्योहार आते ही बेंगलुरु के जल बोर्ड का फरमान, दीपावली पर लगता है पटाखा बैन तो जन्माष्टमी पर तय होती है हांडी की ऊँचाई

हिन्दू पर्व-त्योहारों के आते ही प्रशासन से लेकर एक्टिविस्ट तक कुछ ज़्यादा ही सक्रिय हो जाते हैं। दीपावली पर सरकार पटाखों को प्रतिबंधित कर देती है, जन्माष्टमी पर अदालत हांडी की ऊँचाई तय करती है, महाशिवरात्रि पर दूध बचाने का ज्ञान दिया जाता है और होली पर पानी बचाने के लिए कहा जाता है। अब बेंगलुरु वाटर सप्लाई एन्ड सीवेज बोर्ड (BWSSB) ने होली पर कमर्शियल पूल डांस या रेन डांस आयोजित नहीं करने की अपील की है। इसका विरोध हो रहा है।

हालाँकि, बोर्ड ने कहा है कि कर्नाटक की राजधानी में होली खेले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा, खासकर घरों और आवासीय क्षेत्रों में। बोर्ड ने कहा है कि होली पर अगर रेन डांस या पूल डांस का आयोजन किया जाता है तो इसमें हिस्सा लेने वालों को कावेरी या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके लिए उन्हें ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। बोर्ड ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग और ग्राउंडवाटर रिचार्ज को प्राथमिकता देने की बात कही है।

बोर्ड ने कहा है कि इमारत में कितने भी फ्लोर्स हों या बिल्डिंग का आकार कैसा भी हो, पाइलाइन को फिक्स करने के लिए लोगों को प्लंबर की मदद लेनी चाहिए। साथ ही प्लम्बरों से कहा इमारत के मालिकों को शिक्षित करना चाहिए ताकि वो जल संरक्षण के प्रति जागरूक हों। BWSSB के अध्यक्ष रामप्रसाद मनोहर ने कहा कि लोगों की उपेक्षा की वजह से ये स्थिति आन पड़ी है। उन्होंने लोगों पर पानी बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रति 100 लिटर पानी की सप्लाई के लिए जल बोर्ड 90 रुपए खर्च करता है, जबकि उपभोक्ताओं से उसे 45 रुपए ही मिलते हैं।

होली से पहले उन्होंने ज्ञान देते हुए ये भी कहा कि लोगों को पानी की महत्ता पता होनी चाहिए और उन्हें इसका सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। मनोहर ने लोगों को BWSSB के दोस्त के रूप में काम करने की अपील करते हुए कहा कि प्लम्बरों को घरों में नलों में एरिएटर या वाटर फ्लो कंट्रोलर इंस्टॉल करना चाहिए, और लोगों को जागरूक करना चाहिए। व्हाइटफील्ड स्थित अलॉफ्ट होटल्स ‘गुलाल’ नाम से सबसे बड़ी होली पार्टी का आयोजन कर रहा है, जिसमें 8 घंटे तक DJ-संगीत, भोजन-नाश्ता और रंगों के अलावा मौज-मस्ती की व्यवस्था होगी।

बेंगलुरु में अन्य बड़े आयोजनों की बात करें तो कनकपुरा रोड स्थित अरबल वैली रिजॉर्ट ‘होली बरसाने वाली’ फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है। इसमें रेन डांस, ओपन लॉन, पूल डांस और संगीत की व्यवस्था होगी। शहर के पॉश इलाके में होटल रेनिसेंस ‘होली फेस्टिवल रंग बरसे’ आयोजित कर रहा है। इसी तरह धवनी बार एन्ड किचेन ‘ग्रैंड होली फेस्टिवल’ आयोजित कर रहा है। अब होली से पहले वहाँ के जल बोर्ड ने नए फैसले लिए हैं। बता दें कि अन्य मौकों पर भी पूल डांस और रेन डांस में युवा हिस्सा लेते रहे हैं।

पाकिस्तानी आर्मी चीफ खैरात के लिए पहुँचे सऊदी के द्वार, रमजान में रोजा खोलने के लिए मिला 100 टन खजूर: ‘इस्लामी भाईचारा’ भी नहीं आ रहा काम

मुस्लिमों का पाक महीना रमजान चल रहा है। भारत का पड़ोसी इस्लामी मुल्क पाकिस्तान ‘खैरात’ के लिए दरवाजा-दर-दरवाजा घूम रहा है। एक तरफ पाकिस्तान अंतराराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट पैकेज के लिए गुहार लगा है, तो दूसरी तरफ पाक‍िस्‍तानी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर सऊदी अरब पहुँचकर हाथ फैला हुए हैं। सऊदी अरब ने रमजान में रोजा खोलने के लिए पाकिस्तानियों को 100 टन खजूर भेंट किया है।

पाकिस्‍तानी मीडिया का कहना है कि आर्मी चीफ के सऊदी अरब दौरे का असली मकसद क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान से पैसे माँगना है। बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी जल्दी ही सऊदी अरब जा सकते हैं, ताकि पैसे के लिए गुहार लगाई जा सके। इस दौरान के दौरान पाकिस्तान और सऊदी अरब ने संयुक्त बयान भी दिया है, जिसमें मजबूत रिश्ते की बात कही गई है।

पाकिस्‍तानी सेना ने एक बयान में कहा कि प्रिंस सलमान ने कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्‍तान के बीच ऐतिहासिक भाईचारे वाला मजबूत रिश्‍ता है। दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के लिए खड़े हैं। बता दें कि पाकिस्‍तान लगातार सऊदी अरब से लोन माँग रहा है, लेकिन सऊदी अरब ने खैरात देने से साफ कर दिया है। पाकिस्‍तान को लोन के बदले संपत्ति देनी होगी। ऐसा ही मिस्र भी कर रहा है।

हालाँकि, सऊदी अरब ने भाईचारा निभाते हुए पाकिस्तान को 100 टन खजूर भेजे हैं। आमतौर पर मुस्लिम रोजा खजूर से ही तोड़ते हैं, क्योंकि इस्लाम के शुरुआती दिनों से सऊदी अरब में यही प्रथा है। सऊदी अरब की देखा-देखी अन्य मुस्लिम मुल्क के मुस्लिम भी खजूर से ही अपना रोजा खोलते हैं। इसी रोजे को देखते हुए ही सऊदी अरब ने खजूर का उपहार पाकिस्तान को दिया है।

इसको लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सऊदी दूतावास के दूतावास ने कहा, “दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के सम्मानित नेतृत्व की सिफारिश के बाद सऊदी अरब की सरकार ने सद्भावना के संकेत के रूप में रमजान के पाक महीने के दौरान इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान के अपने सम्मानित भाइयों में बाँटने के लिए 100 टन खजूर का उपहार देकर खुश है।”

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के 2021 के आँकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब दुनिया में खजूर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। यहाँ हर साल 16 लाख टन खजूर का पैदावार होता है। वहीं, मिस्र दुनिया में खजूर का सबसे बड़ा उत्पादक मुल्क है। यहाँ 17 लाख टन खजूर उगाए जाते हैं।

उधर, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बुधवार (20 मार्च 2024) को कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से चले आ रहे संरचनात्मक सुधारों की दिशा में स्थायी प्रोत्साहन के लिए 24वें मध्यम अवधि के बेलआउट पैकेज की माँग कर रहा है। आईएमएफ ने कहा कि उसके कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी के बाद पाकिस्तान को अप्रैल के अंत तक यह पैकेज दिया जा सकता है।

अल्लाह जाने किसने हिन्दू बच्चों को मारा, बोले साजिद के गाँव वाले मुस्लिम: परिवार 2 बार बदल चुका है ठिकाना

बदायूँ में दो हिन्दू बच्चों के हत्यारे साजिद के गाँव के मुस्लिम इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन बच्चों की हत्या किसने की। उनका कहना है कि साजिद ने किसी और ने उन बच्चों को मारा है, वह यह नहीं जानते। वहीं अन्य स्थानीय लोग बता रहे हैं कि साजिद का परिवार इससे पहले दो बार अपना ठिकाना बदल चुका है।

ऑपइंडिया बदायूँ में हिन्दू बच्चों की हत्या के मामले में ग्राउंड पर जाकर सच जानने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में ऑपइंडिया बदायूँ में बच्चों की हत्या करने वाले साजिद के गाँव पहुँचा। यह गाँव बदायूँ से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है और इसका नाम सखानूं है।

सखानू में ऑपइंडिया ने स्थानीय दुलीचंद से बात की। उन्होंने बताया कि साजिद का परिवार यहाँ का मूल निवासी नहीं है। उन्होंने यह खुलासा किया कि साजिद का परिवार इससे पहले दो बार अपना ठिकाना बदल चुका है। साजिद का परिवार इससे पहले ककराला और उपराला गाँव में रहते थे। यह दोनों गाँव भी बदायूँ जिले में ही हैं।

दुलीचंद ने बताया कि साजिद के दादा का नाम गनी था जो कि दवाई देते थे। दुलीचंद ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उन्हें कोई गुंडई नहीं दिखी। इस दौरान दुलीचंद ने वर्तमान योगी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में यहाँ शासन व्यवस्था ठीक है।

दुलीचंद ने बताया कि गाँव में आधे से अधिक मुस्लिम आबादी है, बाकी में हिन्दू हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगाया गया था तब यहाँ बाहर के बहुत से लोगों को छुपाया गया था। उन्होंने यह बताया कि 2017 से पहले यहाँ दबंगई से मजदूरी भी करवाई जाती थी।

सखानू के ही एक मुस्लिम व्यक्ति से बात करने पर उसने इस बात पर शक जाहिर किया कि हिन्दू बच्चों की हत्या साजिद ने की है या किसी और ने की है। उन्होंने कहा कि यह बात अल्लाह जान सकता है कि साजिद ने ही बच्चों को मारा है या किसी और ने मारा है।

इससे पहले ऑपइंडिया को घटनास्थल के आसपास रहने वालों ने बताया था कि बदायूँ के इस इलाके में उसके परिवार की 11 दुकानें हैं। स्थानीय लोगों ने बताया था कि वैसे यह सारी दुकानें रात 8-9 बजे तक खुली रहती थीं। घटना के दिन जब लोगों ने ढूँढा तो एक भी दुकान नहीं खुली थी। सारे परिजन भाग चुके थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि इस हत्या के पीछे कोई बड़ा राज है और सभी को जानकारी थी।

साजिद और जावेद की दुकान पर बाल कटवाने के लिए जाने वाले इन स्थानीय लोगों ने बताया था कि दोनों बातचीत में सामान्य थे और इन्होने कलावा भी बाँध रखा था। उन्होंने बताया कि इनके अधिकांश परिजनों ने ऐसे नाम रखे हैं जिनसे सीधे सीधे धर्म का पता ना लगे।

गौरतलब है कि 19 मार्च, 2024 की शाम को बदायूं में नाई की दुकान चलाने वाले साजिद ने दो हिन्दू बच्चों आयुष और अहान की छुरी से रेत कर हत्या कर दी थी। साजिद यह हत्या करके फरार हो गया था। यूपी पुलिस ने साजिद को उसी दिन मुठभेड़ में मार गिराया था। घटना के दौरान मौजूद रहा साजिद का भाई जावेद फरार था। पुलिस की टीमे उसकी तलाश में दबिश दे रही थी। जावेद पर पुलिस ने ₹25,000 का इनाम भी घोषित किया था। जावेद को आज (21 मार्च, 2024) को गिरफ्तार किया गया है।

बेटी को कोटा पढ़ने भेजा, आई हाथ-पाँव बँधी तस्वीरें… जिस लड़की के लिए केंद्रीय मंत्री से लेकर CM तक आ गए हरकत में, उसने खुद रचा अपने अपहरण का ड्रामा

मध्य प्रदेश के शिवपुरी की एक छात्रा का राजस्थान के कोटा से अपहरण की खबर सुर्ख़ियों में छाई हुई थी। केंद्रीय नागर एवं विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस सम्बन्ध में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी बातचीत की थी। अब जो खुलासा हुआ है, वो हैरान करने वाला है। असल में ये पूरा का पूरा मामला फर्जी निकला है। बेटी ने विदेश घूमने के लिए ये साजिश रची थी। उसने अपने ही अपहरण का ड्रामा रच कर पिता से रुपए वसूलने की योजना बनाई।

एक व्हाट्सएप्प मैसेज के जरिए पिता को काव्या धाकड़ की तस्वीर भेजी गई थी, जिसमें वो लेटी हुई है और उसके हाथ-पाँव बाँधे हुए हैं। लड़की को माता-पिता ने NEET की तैयारी के लिए कोटा भेजा था। जब पुलिस माता-पिता को लेकर बताए गए कोचिंग संस्थान और हॉस्टल में पहुँची तो पता चला काव्या धाकड़ नाम की कोई छात्रा वहाँ पंजीकृत है ही नहीं। पिता को भेजे गए धमकी भरे मैसेज में कहा गया था कि 30 लाख रुपए न देने पर लड़की की अगली फोटो बिना सिर के आएगी।

कोटा की पुलिस अधीक्षक (SP) अमृता दुहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के बताया कि रघुवीर धाकड़ ने सोमवार (18 मार्च, 2024) को बेटी के अपहरण की FIR दर्ज करवाई थी। पुलिस ने काव्या धाकड़ की अंतिम लोकेशन इंदौर में पकड़ी है। उसका एडमिशन करा कर माँ जैसे ही वापस लौटी, लड़की भी इंदौर लौट आई। इंदौर में वो अपने दोस्तों के साथ रुकी हुई थी। इस दौरान वो अपने माता-पिता से बात करती रही और उन्हें क्लासेज, एटेंडेंस और टेस्ट वगैरह के बारे में बताती रही।

लड़की के पिता को व्हाट्सएप्प के जरिए मिली थी धमकी

काव्या धाकड़ के ही एक दोस्त ने पुलिस के सामने ये सारे राज़ खोलते हुए बताया कि वो वित्तीय हालत से परेशान थी और अपने एक दोस्त के साथ विदेश भाग जाना चाहती थी। उसने भँवरकुआँ स्थित सिमरन हॉस्टल में ही रस्सी से खुद को बँधवा कर फोटोशूट करवाया। काव्या धाकड़ अभी बरामद नहीं हुई है। पुलिस ने अपील की है कि किसी को भी खबर मिले तो वो उसके माता-पिता या पुलिस को सूचित करे। उससे भी अपील की गई है कि वो लौट आए।

उधर जयपुर के दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें काव्या धाकड़ 2 युवकों के साथ दिखाई दे रही है। जयपुर के अहिंसा सर्किल पर भी उसकी फुटेज मिली है, 2 युवक वहाँ भी उसके साथ हैं। दोनों युवकों ने चेहरे पर मास्क लगा रखा है। पुलिस की एक टीम दिल्ली में भी है। 20 वर्षीय छात्रा का सितंबर 2023 में कोटा में एडमिशन कराया गया था। दीवाली पर वो घर भी आई थी। पिता ने बताया था कि 2 साल पहले जब लड़की इंदौर रहती थी तो रिंकू धाकड़ नामक एक युवक उसे परेशान करता था।

खबरों में ये भी बताया गया है कि लड़की और उसके प्रेमी ने मिल कर ये पूरी साजिश रची थी। दोनों पैसे लेकर विदेश में बसना चाहते थे। पुलिस ने छात्रा को सुरक्षा देने का आश्वासन देते हुए अपील की है कि वो जहाँ भी है वापस आ जाए। वहीं पिता ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर ये सच है तो फिर उनकी बेटी कहाँ है? दोनों युवकों की पहचान ब्रजेन्द्र और हर्षित के रूप में हुई है। जहाँ फोटोशूट हुआ ब्रजेन्द्र उसी हॉस्टल में रहता है।

ब्रजेन्द्र से कोटा पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस ने हॉस्टल से रस्सी भी बरामद की है। मंगलवार को इंदौर स्थित दीक्षा हॉस्टल के बाहर रात के साढ़े 9 बजे काव्या धाकड़ को दोनों युवकों के साथ देखा गया। छात्रा का कोटा में पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था, ऐसा पुलिस का कहना है। जिस फोन नंबर से धमकी दी गई, वो MP की ही है। छात्रा की लोकेशन इंदौर की आई। जिन खाते में पैसे माँगे गए वो भी छात्रा के ही थे। इन संदिग्ध कड़ियों से पुलिस को साजिश का पता चला।

राहुल गाँधी की देश-तोड़ू जाति-राजनीति पर कॉन्ग्रेस में ही विरोध, सीनियर नेता ने इंदिरा को याद कर लिखा – ‘न जात पर, न पात पर…’

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस की वर्किंग कमेटी के सदस्य, दिग्गज नेता आनंद शर्मा ने राहुल गाँधी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राहुल गाँधी की चुनाव केंद्रिय नीतियों पर सवाल उठाते हुए उसे इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का अपमान करार दिया है, खासकर जातिगत जनगणना के मुद्दे पर। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा घोषित जातिगत जनगणना को लेकर राहुल गाँधी पर हमला किया और बताया कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर जाने का मतलब है कि कॉन्ग्रेस अब अपने ऐतिहासिक रुख से पलट रही है, जो इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की लीगेसी का अपमान भी है।

कॉन्ग्रेस के विद्रोही जी-23 टीम के सदस्य और वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के लोकप्रिय चुनावी नारों का भी हवाला दिया है। उन्होंने मंगलवार (19 मार्च 2024) को कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र लिखा है, जिसमें राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक नीतियों का विरोध किया गया है। उन्होंने अपने पत्र में इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के चुनावी नारे ‘न जात पर, न पात पर… मोहर लगेगी हाथ पर’ का जिक्र किया। बता दें कि इस नारे को सबसे पहले इंदिरा गाँधी ने साल 1980 में दिया था और ये नारा कुछ समय पहले तक इस्तेमाल भी होता रहा है, खासकर उन हिंदी भाषी राज्यों में, जहाँ जाति आधारित राजनीतिक पार्टियाँ सक्रिय हैं।

आनंद शर्मा ने पत्र में लिखा है कि राहुल गाँधी जिस जातिगत जनगणना के मुद्दे को जोरशोर से उठा रहे हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी ने चुनाव में जीत के बाद जिस जातिगत जनगणना को कराने की बात कही है, वो कॉन्ग्रेस के ऐतिहासिक रुख से ठीक उलट है। इस नीति पर चलते से कॉन्ग्रेस को नुकसान ही होगा, क्योंकि विपक्षी भी उसे खूब निशाना बनाएँगे।

कॉन्ग्रेस नेता आनंद शर्मा का ये पत्र ऐसे समय पर सामने आया है, जब लोकसभा चुनाव में पार्टी उतर चुकी है। ये पत्र कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि एक तरफ वो जातिगत जनगणना को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ आनंद शर्मा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का नाम लेकर और कॉन्ग्रेस के सियासी इतिहास को सामने रखकर कॉग्रेस के दावों की हवा निकाल दी है।

आनंद शर्मा जी-23 नेताओं में से एक हैं। उन नेताओं ने साल 2021 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को तीखा पत्र लिखा था और पार्टी की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव लाने की बात कही थी। इन नेताओं में कई नेता पार्टी छोड़ गए हैं, तो कईयों को हाशिये पर ढकेल दिया गया है। इस पत्र में भी कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल आनंद शर्मा ने पार्टी में समन्वय की कमी का मामला उठाया है। उन्होंने कहा है कि जिला और प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटियों की कोई पूछ नहीं है।

गाड़ी से कुचलकर की BJP नेता की हत्या… 4 साल बाद इरफान बिस्ती गिरफ्तार: हेयर सैलून खोलकर छिपा रहा था पहचान, कॉन्ग्रेस नेता से मिली थी सुपारी

गुजरात के दाहोद में भारतीय जनता पार्टी के पार्षद हिरेन पटेल की हत्या मामले में चार साल बाद गुजरात आतंकवाद दस्ते ने बुधवार (20 मार्च 2024 ) को नौंवे आरोपित को गिरफ्तार किया है। इस आरोपित की पहचान मोहम्मद इरफान बिस्ती के तौर पर हुई है। गुजरात एटीएस ने मध्य प्रदेश एटीएस के साथ मिलकर इसे गिरफ्तार किया। ये घटना के बाद से फरार था और इंदौर में छिपकर हेयर सैलून चला रहा था।

बता दें कि पुलिस की रिपोर्टों में इस केस को ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ और राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में हुई हत्या बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 4 साल पहले 27 सितंबर 2020 को मॉर्निंग वॉक पर निकले बीजेपी नेता को गाड़ी से कुचलकर मार डाला गया था। हत्या की साजिश दाहोद के पूर्व सांसद बाबूभाई कटारा के बेटे अमित कटारा ने रची थी।

बीजेपी नेता की मौत के बाद जब मामले में मुकदमा दर्ज हुआ तो 8 लोग गिरफ्तार हुए। साजिशकर्ता इमरान गुड़ाला निकला, उसी ने अमित कटारा से पैसे लेकर ये सब करवाया था। जब इमरान पकड़ा गया तो इरफान के नाम की भी जानकारी हुई। लेकिन, नाम खुलते ही इरफान फरार हो गया।

मामले में पुलिस अधीक्षक हर्ष उपाध्याय बताते हैं, “घटना के बाद आरोपित इंदौर चले गए थे। जब इरफान को पता चला कि उसका नाम सामने आ गया है तब वह अपनी पत्नी के साथ इंदौर के खरजाना में छिप गया। उसने कुछ समय बाद वहाँ हेयर सैलून खोल लिया ताकि किसी को उस पर शक न हो।”

गुजरात एटीएस यूनिट को जब इसकी जानकारी नहीं हुई कि इरफान कहाँ है तो उन्होंने मध्य प्रदेश एटीएस से संपर्क किया। इरफान की जानकारी उनके साथ शेयर की गई और आखिरकार इरफान को मध्य प्रदेश एटीएस की इंदौर यूनिट की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वो हिरेन पटेल की हत्या मामले में शामिल था।

कॉन्ट्रैक्ट में सुपारी के तौर पर इरफान को 25000 रुपए भी दिए गए थे ये बात भी इरफान ने पुलिस पूछताछ में स्वीकारी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इरफान बिस्ती अपने साथियों औक मामले के सह आरोपितों के साथ हत्या की साजिश को अंजाम देने इंदौर से झालोद आए थे। हिरेन पटेल यहीं की नगर पालिका में पार्षद थे।