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शाहजहाँ शेख का भाई आलमगीर 2 दोस्तों के साथ गिरफ्तार, पूछताछ में सब CBI को भटका रहे थे: खेती लायक नहीं रहे संदेशखाली में कब्ज़ा किए गए जमीन, राज्यपाल ने बनाई कमिटी

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण का मुद्दा पूरे देश में चर्चा में रहा, जिसमें राज्य की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) का नेता शाहजहाँ शेख मुख्य आरोपित था। शाहजहाँ शेख ED अधिकारियों पर हमले के बाद से ही फरार रहा, जो अब CBI की गिरफ्त में है। अब उसके भाई आलमगीर और दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। न सिर्फ यौन शोषण, बल्कि इन सब पर अवैध जमीन कब्जे के भी आरोप हैं। पीड़िताओं में अधिकतर जनजातीय समाज के हैं।

आलमगीर और उसके दोनों साथियों को CBI ने समन जारी किया था। 5 जनवरी, 2024 को ED अधिकारियों के खिलाफ हुई हिंसा में उन पर कार्रवाई की गई है। अब शनिवार (16 मार्च, 2024) को गिरफ्तार किया गया है। महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद संदेशखाली का मुद्दा चर्चा में आया था। भाजपा ने भी इसे उठाया था। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बंगाल में ये मुद्दा गर्म है। गिरफ़्तारी से पहले आलमगीर से CBI के कार्यालय में 9 घंटे पूछताछ की गई।

बताया गया है कि पूछताछ के दौरान न सिर्फ आलमगीर, बल्कि उसके साथी माफीजुल मोल्ला और सिराजुल मोल्ला भी CBI के अधिकारियों को गुमराह कर रहे थे। ये लोग सवालों का अलग-अलग जवाब दे रहे थे। अंततः रात के करीब 9 बजे CBI ने उनकी गिरफ़्तारी की कार्रवाई की। अगले दिन रविवार (17 मार्च, 2024) को इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। संदेशखाली मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। कई ED अधिकारी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे।

उधर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है, जो संदेशखाली में कब्जा किए गए जमीनों का सही उपयोग कैसे किया जाए इस संबंध में अध्ययन करेगी। इन जमीनों को कब्ज़ा कर के अवैध रूप से मछलीपालन किया जा रहा था। ये जमीन उनके मालिकों को लौटा दी गई है, लेकिन अब ये खेती के लायक नहीं रह गई है। मिट्टी की ऊपरी परत को रिप्लेस करना पड़ेगा, ताकि इसमें खेती हो। दिल्ली के कृषि विशेषज्ञों से बोस ने इस संबंध में बात की थी।

असम के कवि रकीबुद्दीन अहमद ने नीलाभ सौरभ के नाम से फेसबुक पर बनाई आईडी, भगवान राम और माता सीता का किया अपमान: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को असम के मुस्लिम कवि रकीबुद्दीन अहमद को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी, जिस पर हिंदू देवताओं भगवान राम और सीता के बारे में एक अश्लील कविता पोस्ट करने का आरोप है। सुप्रीन कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने एकपक्षीय सुनवाई में इस मामले में असम सरकार से जवाब भी माँगा है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को पटलते हुए अहमद को जमानत दी, क्योंकि उसने ‘माफी’ माँग ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रकीब उद्दीन जाँच में सहयोग करेगा, इसलिए उसे गिरफ्तार न किया जाए। खास बात ये है कि रकीबुद्दीन अहमद को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में उतरे 4 वकीलों में से 3 हिंदू हैं। इस केस में रकीबुद्दीन के लिए एडवोकेट शाहरुख खान, आकृति चौधरी, शांतनु सिंह और साधना माधवन ने कोर्ट में पैरवी की।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने नहीं दी थी राहत

रकीबुद्दीन अहमद ने फेसबुक पर नीलाभ सौरभ नाम से गलत पहचान वाली एक आईडी बनाई और उस पर भगवान राम और माता सीता का अपमान करने वाली कविता पोस्ट की। इस मामले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में वो फरार चल रहा था और 22 फरवरी को गुवाहाटी हाई कोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के लिए कहा था।

इस मामले में रकीबुल हसन के खिलाफ दो धार्मिक समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने और धार्मिक भावनाओं को ढेस पहुँचाने के मामले में केस दर्ज हुआ था। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कहा था कि रकीब ने अपनी पहचान बदल कर जो काम किया, वो बेहद गंभीर है। ऐसे में उसे पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत है। हाई कोर्ट ने इस मामले में गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद उसने तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे गिरफ्तारी से राहत दे दी है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने रकीबुद्दीन अहमद को पुलिस जाँच में शामिल होने के निर्देश दिए हैं, साथ ही कहा है कि पुलिस उसे पूछताछ पूरी होने तक गिरफ्तार नहीं करेगी। उसके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के बताया कि आरोपित एक नामी कवि है और उसे साहित्य अकादमी सम्मान भी दिया जा चुका है। उसने इस मामले में पहले ही माफी माँग ली थी।

‘माल-ए-गनीमत’ व्यवस्था पर ISIS के आतंकियों को था विश्वास, पैसे जुटाने के लिए लूटपाट का लेते थे सहारा: NIA ने कोर्ट में जमानत का किया विरोध

केरल के त्रिशूर और पलक्कड़ से पकड़ाए इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकियों की जाँच में पता चला है कि यह मॉड्यूल ‘ग़नीमा’ की पुरानी अवधारणा में विश्वास करता था। गनीमा अरबी का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘युद्ध के दौरान की लूट’ है। दरअसल, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मन्नारक्कड़ से पकड़ाए पाँचवें आरोपित साहिर ईपी की जमानत याचिका के दौरान इसे अदालत में बताया।

यह मामला साल 2023 में गठित आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ से संबंधित है। इस मॉड्यूल के आतंकी समाज के प्रमुख सदस्यों और अन्य समुदायों के धार्मिक स्थानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। इस मामले में NIA ने मथिलाकाथ कोदायिल आसिफ, सैयद नबील अहमद, शियास टीएस, रईस टीएस और साहिर को गिरफ्तार किया था।

एनआईए द्वारा मामला दर्ज करने के बाद इस मॉड्यूल के संस्थापक नबील और एक अन्य सदस्य अमीर भूमिगत हो गए थे। हालाँकि, उन्हें बाद में पकड़ लिया गया था। वहीं, इन दोनों को भूमिगत होने में मदद करने वाले साहिर को भी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने उठाया था। एजेंसी ने कोर्ट बताया कि इन आरोपितों के अपराध गनीमा पर आधारित हैं।

एजेंसी ने कोर्ट ने बताया कि वे चोरी और डकैती करके अपनी गतिविधियों के लिए फंडिंग करने में विश्वास करते थे। एनआईए ने कहा कि मॉड्यूल के सदस्यों का मानना था कि चोरी से प्राप्त धन लूट का माल है, जिसका इस्तेमाल अपने लाभ के लिए किया जा सकता है। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि नबील प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का सदस्य था।

नबील 20 अप्रैल 2023 को हुई एक डकैती सहित कई अपराधों में शामिल था। बाद में उसे केरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और चावक्कड़ जेल में बंद कर दिया। हालाँकि, जमानत पर रिहा होने के बाद भी उसने अपने आपराधिक तरीके जारी रखे। यहाँ तक कि वह केरल में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों के लिए भी धन की व्यवस्था करने लगा।

इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए NIA ने जब आसिफ को सत्यमंगलम से गिरफ्तार किया तो नबील ने साहिर को संपर्क किया। इसके बाद साहिर ने नबील की बीवी के लिए एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड की व्यवस्था की। साहिर ने नबील को अलानल्लूर में स्थित एक लॉज में किराए पर कमरा लेने में मदद की। इसके लिए साहिर ने अपना आईडी कार्ड दिया।

सहीर ने बताया था कि नबील उसे शेयर ट्रेडिंग का प्रशिक्षण दे रहा था और फोन एवं सिम कार्ड उसी के लिए है। उन लोगों को नबील के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी नहीं थी। हालाँकि, NIA ने कहा कि डकैती के बाद नबील की गिरफ्तारी की खबरें मीडिया में थीं और उन खबरों को नजरअंदाज करना असंभव था।

आसिफ की गिरफ्तारी के बाद नबील से उसके संबंधों की भी खबरें भी खूब प्रसारित हुईं। एजेंसी ने कहा कि कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों से पता चलता है कि सितंबर 2023 में चेन्नई से गिरफ्तार होने से पहले साहिर ने नबील को पुलिस को चकमा देने में मदद की थी। इस तरह साहिर ने नबील की कई दफे मदद की।

तमाम तर्कों को सुनने के बाद एनआईए कोर्ट ने साहिर की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उस पर लगे आरोप गंभीर हैं। न्यायाधीश पीके मोहनदास ने कहा, “मेरे सामने रखी गई सामग्रियों की जाँच पर अदालत का विचार है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सच है।”

‘EVM होता तो पाकिस्तान चुनाव में नहीं होती धाँधली, 1 घंटे में हो जाता सारी समस्याओं का समाधान’: बोले पूर्व PM इमरान खान, भारत में विपक्षी दल रोते हैं रोना

जहाँ भारत में विपक्षी दल अक्सर हार के बाद EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर ठीकरा फोड़ते रहे हैं, वहीं पाकिस्तान में आवाज़ उठ रही है कि अगर वहाँ EVM से चुनाव होते तो इतनी धाँधली नहीं होती। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि अगर EVM से चुनाव होते तो फिर चुनाव की सारी गड़बड़ियों का समाधान मात्र एक घंटे में हो जाता। इमरान खान फ़िलहाल जेल में बंद हैं। वो ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI)’ राजनीतिक पार्टी के संस्थापक हैं।

अदियाला जेल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने ये बातें कही। वो अल-कादिर ट्रस्ट केस में फँसे हुए हैं, जिसमें उनकी बीवी बुशरा भी आरोपित हैं। PTI ने भी सोशल मीडिया पर इमरान खान का ये बयान प्रकाशित किया गया, जिसमें उन्होंने कहा है कि चुनाव में EVM का इस्तेमाल किया गया होता तो एक घंटे में धाँधली की सारी समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाता। उन्होंने इस दौरान पाकिस्तान के चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए।

इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने कुछ राजनीतिक दलों और ‘व्यवस्था’ के साथ मिल कर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को चुनाव में इस्तेमाल नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि उन अधिकारियों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए, जिन्होंने आम चुनावों में जनमत की चोरी की। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी को 3 करोड़ वोट्स मिले, जबकि बाकी की 17 राजनीतिक पार्टियों को मिला कर इतने ही वोट मिले। पाकिस्तान में अब PTI समर्थक EVM से चुनाव कराए जाने की माँग कर रहे हैं।

वहीं भारत में कई राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं, फिर भी वो EVM को भला-बुरा कहते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शायराना अंदाज़ में इसका जवाब देते हुए कहा, “अधूरी हसरतों को इल्जाम हर बार हम पर ही लगाना ठीक नहीं, बफर खुद से नहीं होती और खता ईवीएम की कहते हो। और बाद में जब परिणाम आता है तो उसपे कायम भी नहीं रहते हो।” उन्होंने बताया कि अब तक 40 बार सुप्रीम कोर्ट इससे संबंधित याचिकाओं को ख़ारिज कर चुका है।

‘अरविन्द केजरीवाल हाजिर हों’: शराब घोटाले में ED ने दिल्ली के CM केजरीवाल को भेजी 9वीं नोटिस… जल बोर्ड मामले में भी बढ़ी मुसीबत, समन जारी

दिल्ली शराब घोटाले की जाँच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 9वाँ समन जारी किया है। इसमें सीएम केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को पूछताछ के लिए तलब किया है। वहीं, जब बोर्ड मामले में अलग से पहली बार समन भेजा गया है। बता दें कि शनिवार (16 मार्च) को उन्हें दिल्ली की एक अदालत ने पिछले समन पर पेश नहीं होने के मामले में अग्रिम जमानत दे दी थी।

दरअसल, पूछताछ के लिए ईडी सीएम केजरीवाल को लगातार समन जारी करती है, लेकिन वे इससे बचते रहे हैं। उनकी पार्टी AAP का आरोप है कि पूछताछ के बहाने ईडी गिरफ्तार उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए प्रचार ना कर सकें। वहीं, ED का कहना है कि वो घूसखोरी के आरोपों का केजरीवाल का बयान दर्ज करना चाहती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (16 मार्च 2024) को अरविन्द केजरीवाल को 2 नोटिस भेजे हैं। इसमें पहला नोटिस दिल्ली जल बोर्ड मामले को लेकर है। वहीं दूसरी नोटिस दिल्ली शराब घोटाले से जुड़ी है। शराब घोटाले में केजरीवाल को भेजी गई यह 9वीं नोटिस है। इसेमें उन्हें 21 मार्च को बुलवाया गया है। पिछले 8 नोटिसों पर वे पेश नहीं हुए हैं।

वहीं, दिल्ली जल बोर्ड मामले में मिली नोटिस को अरविन्द केजरीवाल के लिए नई मुसीबत माना जा रहा है। इस मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार में मंत्री और आप पार्टी की नेत्री आतिशी ने इसे अरविन्द केजरीवाल को नए मामले में फँसाने की साजिश करार दिया है।

आतिशी का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं है कि दिल्ली जल बोर्ड का मामला क्या है, जो ED अरविन्द केजरीवाल को नोटिस जारी कर रही है। बकौल आतिशी केजरीवाल को दिल्ली जल बोर्ड वाली नोटिस शराब घोटाले वाली 9वीं नोटिस के कुछ ही घंटों के बाद आ गई। भाजपा ने अरविन्द केजरीवाल की लगातार गैरहाजिरी पर सवाल खड़े किए है।

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव ने ED जाँच को लेकर AAP के बयानों को हैरान करने वाला बताया है। उन्होंने अरविन्द केजरीवाल को भ्रष्टाचारी बताते हुए यह भी सवाल दागा कि अगर वो बेगुनाह हैं तो जाँच से भाग क्यों रहे हैं। बकौल वीरेंद्र सचदेव, भाजपा केजरीवाल के भ्रष्टाचार को दिल्ली की जनता तक पहुँचाएगी।

Enforcement Directorate (ED) issues 9th notice to Arvind Kejriwal in Delhi liquor scam

अवैध बनी थी मस्जिद, कार्रवाई में तोड़ी गई: अब रमजान का महीना बताकर उस जगह पर नमाज पढ़ने की माँगी गई इजाजत, दिल्ली हाई कोर्ट ने किया खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (11 मार्च 2024) को वह याचिका रद्द कर दी, जिसमें ध्वस्त हुई एक मस्जिद में रमजान के महीने में नमाज़ पढ़ने की माँग की गई थी। इस मस्जिद का नाम अखूनजी मस्जिद है, जो लगभग 600 साल पुरानी बताई जाती है। इसे 30 जनवरी 2024 को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ध्वस्त कर दिया था।

दिल्ली के महरौली में अवैध रूप से बनाई गई इस मस्जिद के साथ एक मदरसे को भी DDA ने गिरा दिया था। इस मदरसे का नाम बाहरुल मदरसा था। इन्हें गिराने के बावजूद स्थानीय मुस्लिम इसमें नमाज आदि पढ़ने का हक लेने की कोशिश करते रहते हैं। इससे पहले शब-ए-बरात में इसी मस्जिद के लिए इसी तरह की एक याचिका ख़ारिज हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रमजान के महीने में गिराई गई अखूनजी मस्जिद वाली जगह पर नमाज की इजाजत माँगने वाली याचिका मुंतजामिया कमेटी मदरसा बहरूल उलूम और कब्रिस्तान नामक संगठन ने दायर किया था। इस केस में प्रतिवादी DDA (दिल्ली विकास प्राधिकरण) को बनाया गया था। मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत में हुई।

याचिका में मस्जिद के 600 से 700 साल पुरानी होने की भी बात कहते हुए DDA पर इसे अवैध रूप से गिराने का आरोप लगाया गया था। साथ ही उस जगह को दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़ा मामला बताया गया था। याचिकाकर्ता के वकील शम्स ख्वाजा ने उस जगह पर रमजान के महीने में नमाज़ की इजाजत माँगी थी, जहाँ अखूनजी मस्जिद बनी थी।

DDA की इस कार्रवाई के बाद 5 फरवरी 2024 को हाईकोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए थे। DDA ने अपनी कार्रवाई को जायज करार दिया। 11 मार्च को अपने फैसले में अदालत ने बताया कि इससे पहले भी 23 फरवरी को उसी जगह पर शब ए बरात मनाने के माँग वाली की याचिका ख़ारिज हो चुकी है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वहां पर कई लोगों के परिजनों की कब्रे हैं इस वजह से लोगों को वहां पर नमाज अदा करने दी जाए। हालाँकि, दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आगे कहा कि नई याचिका में याचिकाकर्ता द्वारा की गई माँग को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अंत में कोर्ट ने याचिका ख़ारिज कर दी।

बताते चलें कि अखूनजी मस्जिद दिल्ली के महरौली इलाके में मौजूद थी। 30 जनवरी 2024 को हुई कार्रवाई में अखूनजी मस्जिद के साथ मदरसे और कई कब्रों को तोड़ दिया था। DDA ने इन्हें अवैध निर्माण बताया था।

निजाम ने संजय बनकर हिंदू लड़की से दोस्ती की, नौकरी लगवाने का झाँसा देकर बुलाया: अमरोहा के होटल में लेकर किया रेप, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 14 मार्च 2024 को लव जिहाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। एक मुस्लिम ने हिंदू नाम से एक लड़की से दोस्ती की और फिर उसे नौकरी दिलाने का लालच देकर उसके साथ रेप किया। बाद में हिंदू संगठनों के सहयोग से लड़की और उसके परिजनों ने थाने में मामला दर्ज कराया। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया।

दरअसल, अमरोहा के गजरौला स्थित सैदनगली थाने के अंतर्गत आने वाले भदौरा के रहने वाले निज़ाम ने हापुड जिले के देहात थाना क्षेत्र की एक युवती से इंस्टाग्राम पर दोस्ती की। उसने संजय कुमार (कुछ मीडिया रिपोर्ट में शिवम) नाम से आईडी बनाई थी। वह हिंदू होने का नाटक करके लड़की को अपने झाँसे में लिया था।

इसी दौरान बातचीत के क्रम में निजाम ने लड़की को नौकरी लगवाने का झाँसा दिया। उसने 8 मार्च को पीड़िता को गजरौला बुलाया और एक होटल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में पीड़ित लड़की को जब सच्चाई और आरोपित का असली नाम जाना तो हैरान रह गई। उसने अपने परिजनों को पूरी बात बताई।

युवती के परिजनों ने बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों से संपर्क किया और उन्हें लेकर थाने पहुँची। वहाँ हिंदू संगठन के लोगों ने जमकर हंगामा और पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की। इसके बाद पुलिस ने संजय कुमार उर्फ निजाम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

बता दें कि मथुरा में भी लव जिहाद का कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। यहाँ राशिद नाम के एक मुस्लिम लड़के ने अपनी पहचान छिपाकर एक हिंदू युवती को प्रेमजाल में फँसा लिया। इसके बाद उससे शादी का वादा करके उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। जब लड़की गर्भवती हो गई तो राशिद उसे छोड़कर भाग गया।

मामला मथुरा के गोवर्धन इलाके का है। यहाँ की इंदिरा रसोई में राजस्थान के दौसां की एक हिंदू युवती काम करती थी। युवती का आरोप है कि यहीं पर राशिद नाम का मुस्लिम लड़का अपनी छिपाते हुए अमन बनकर काम करता था। काम करने के दौरान आरोपित राशिद ने उसे अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। राशिद लड़की को शादी का झाँसा देता रहता था।

युवती का कहना है कि शादी का झाँसा देकर राशिद ने उससे कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इसी बीच वह गर्भवती हो गई। उसने जब अमन बने राशिद पर शादी करने का दबाव बनाया तो अमन का असली रूप सामने आ गया। वह उससे शादी से इनकार कर दिया। राशिद का गोवर्धन का ही रहने वाला है।

इतना ही नहीं, युवती को गर्भवती देखकर राशिद वहाँ से फरार हो गया। युवती ने जब उसकी खोजबीन शुरू की तो पता चला कि जिसे वह अमन समझ रही थी, वह असल में राशिद है। इसके बाद युवती ने इलाके को हिंदूवादी संगठनों से संपर्क किया। हिंदू संगठनों ने युवती को लेकर जाकर गोवर्धन थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

RSS से जुड़ने पर हिंदू धर्म को समझने का मौका मिला, जाने लगे मंदिर: प्रयागराज के प्रोफेसर एहसान अहमद ने की घर वापसी, कहलाएँगे अनिल पंडित

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक मुस्लिम प्रोफेसर ने घर वापसी की है। घर वापसी करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर का नाम एहसान अहमद है। अब वे अनिल पंडित के नाम से जाने जाएँगे। एहसान अहमद CMP डिग्री कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं।

घर वापसी करने के बाद प्रोफेसर एहसान अहमद ने एक हिन्दू महिला से शादी की है। उनकी पत्नी भी इंटर कॉलेज में लेक्चरर हैं। फिलहाल एहसान अहमद गुरुवार (14 मार्च 2024) से अपनी घर वापसी के सरकारी कागजात बनवाने में व्यस्त हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को अपने मतांतरण का आवेदन दिया है।

अपने आवेदन में प्रोफेसर एहसान अहमद ने लिखा है कि साल 2020 में वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। इस दौरान उन्हें हिन्दू धर्म के बारे में काफी कुछ समझने को मिला था। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व में उन्हें बहुत सी खूबियाँ दिखीं और इन्हीं खूबियों की वजह से उन्होंने अपनी मर्जी से घर वापसी का निर्णय लिया है।

प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्र में एहसान अहमद ने आगे बताया है कि उन्होंने पूरी तरह से सोच-समझ कर बिना किसी दबाव के घर वापसी का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने अपना नाम एहसान अहमद से अनिल पंडित रखे जाने की भी जानकारी दी है। सर्टिफिकेट जारी होने के बाद एहसान अहमद अनिल पंडित के नाम से जाने जाएँगे।

प्रयागराज की एडीएम प्रशासन पूजा मिश्रा ने बताया कि एहसान अहमद के घर वापसी के कागजात और आवेदन प्राप्त हुए हैं। सभी दस्तावेजों की जाँच की जा रही है। जाँच के बाद जल्द ही एहसान अहमद को मतांतरण का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद वे अपने कागजातों में नाम बदलवा सकेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोफेसर एहसान अहमद ने अपनी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है। यहाँ से उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी किया है। पीएचजी के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में कुछ दिन पढ़ाने का भी काम किया। फिर वे इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में लेक्चरर की तौर पर नियुक्त हो गए।

एहसान अहमद काफी समय से हिन्दू धर्म से प्रभावित थे। वो बजरंग बली के भक्त हैं और अक्सर मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते थे। एहसान ने एक हिन्दू लड़की से शादी भी की है। उनकी पत्नी उत्तर प्रदेश के ही बलिया जिले के एक इंटर कॉलेज में लेक्चरर हैं। उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की है।

हिंदुओं के खिलाफ नफरत, धर्मांतरण और विदेशों से अवैध फंडिंग: तमिलनाडु की ईसाई मिशनरी जीसस रिडीम्स की FCRA लाइसेंस रद्द

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मोहन सी लाजरस द्वारा संचालित विवादास्पद ईसाई मिशनरी संगठन जीसस रिडीम्स का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कानूनी कार्यकर्ता समूह लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम (LRPF) की एक शिकायत के बाद हुई है। शिकायत में एफसीआरए के प्रावधानों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

ईसाई मिशनरी संगठन जीसस रिडीम्स तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित है। इसका उन संगठनों से विदेशी धन प्राप्त करने का बहुत ही संदिग्ध रिकॉर्ड है, जो भारतीय हितों के खिलाफ काम करने के लिए जाने जाते हैं। भारत सरकार द्वारा जाँच करने के बाद उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लगीं और आखिरकार उसका FCRA लाइसेंस (076160018) रद्द कर दिया गया।

दरअसल, LRPF ने नवंबर 2023 में जीसस रिडीम्स और उसके विदेशी दानदाताओं की गतिविधियों की व्यापक जांँच का केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था। उसने कहा था कि जीसस रिडीम्स नाम का यह संस्था लोगों के बीच धार्मिक, जातिय, नस्लीय, सामाजिक, भाषाई, क्षेत्रीय या सामुदायिक स्तर पर वैमनस्य पैदा करने की कोशिश करता है।

अपनी शिकायत में एलआरपीएफ ने कहा था, “जीसस रिडीम्स के मुख्य पदाधिकारी के रूप में मोहन लाजरस उर्फ ​​मोहन सी लाजरस का कार्य विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम 2010 की विभिन्न धाराओं को आकर्षित करता है, जो उक्त संगठन के एफसीआरए पंजीकरण निलंबन/रद्दीकरण का कारण बन सकता है। जैसे कि अध्याय II, 9 (ई) (v): धार्मिक, नस्लीय, सामाजिक, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों, जातियों या समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करना। अध्याय III 12 (4) (एफ) (vi): धार्मिक, नस्लीय, सामाजिक, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों, जातियों या समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करना।”

LRPF ने गृह मंत्रालय से ‘जीसस रिडीम्स’ की आधिकारिक पत्रिका की भी जाँच करने का आग्रह किया था। इसे मोहन लाजरस द्वारा प्रकाशित किया जा रहा था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस एनजीओ का संचालन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, मलेशिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, कनाडा और श्रीलंका सहित कई अन्य देशों में है।

भारत सरकार से मामले की जाँच का आग्रह करते हुए लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने कहा था कि जीसस रिडीम्स लगातार विदेशों में ईसाई धर्म का कार्यक्रम आयोजित कर रहा है और चीन सहित विभिन्न देशों से पादरियों को आमंत्रित कर रहा है। संस्था ने इन आयोजनों पर होने वाले खर्च की ऑडिट रिपोर्ट आदि की भी जाँच करने का आग्रह किया था।

जीसस रिडीम्स को डैंगोटे ग्रुप के निदेशकों से भी भारी विदेशी फंड प्राप्त हुआ था। डैंगोटे नाइजीरिया की एक खनन कंपनी है, जिसका सिनोमा इंटरनेशनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के साथ बेहद करीबी संबंध है। सिनोमा इंटरनेशनल चीन के सरकारी स्वामित्व वाली एक कंपनी है।

द कम्युन मैगजीन के अनुसार, मोहन लाजरस जीसस रिडीम्स नाम से एक ईसाई संगठन चलाता और इसके जरिए वह धर्मांतरण की गतिविधियों को संचालित करता है। वह हिंदू विरोधी बयान देकर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के लिए भी कुख्यात है। हिंदू मंदिरों और हिंदू देवताओं के खिलाफ बयान देने के कारण लाजरस के खिलाफ तमिलनाडु के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में IPC की विभिन्न धाराओं में कई मुकदकमे दर्ज हैं।

एक अन्य मामले में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने मोहन लाजरस को नया पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर दिया। दरअसल, लाजरस ने पासपोर्ट आवेदन में उनके खिलाफ लंबित 4 आपराधिक मामले की जानकारी छुपा ली थी। इतना ही नहीं, फरवरी 2021 में मद्रास उच्च न्यायालय ने हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ बयान देने के लिए इस पादरी को सख्त चेतावनी दी थी।

हालाँकि, लाजर को 2020 के केस संख्या W.P.(MD)No.15829 के माध्यम से उच्च न्यायालय से राहत मिली, जिसमें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार के रूप में उसके ‘यात्रा करने के अधिकार’ पर जोर दिया गया।

‘मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचने आया हूँ’: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले – 2047 की कर रहा हूँ तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के फिनाले को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं चाहता तो टैक्स पेयर के पैसों से जनता को मुफ्त की चीजें दे देता, जिससे वाहवाही तो हो जाती, लेकिन देश का क्या होता? इसीलिए मैंने आसान नहीं, बल्कि मुश्किल रास्ते को चुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचने आया हूँ।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वो कर्नाटक से सीधे यहाँ पहुँचे, क्योंकि 2024 छोड़िए, साल 2029 भी छोड़िए, बल्कि वो साल 2047 (विकसित भारत का लक्ष्य) की तैयारी में लगे हैं। इस कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘पिछले 10 साल में 1500 से ज्यादा पुराने कानून समाप्त किए हैं, इनमें से कितने कानून अंग्रेजों के समय में बने हुए थे, लोगों के जीवन में सरकार का दबाव भी नहीं और अभाव भी नहीं होना चाहिए। 2047 तक मैं हर एक की जिंदगी से सरकार को बाहर निकाल दूँगा। सामान्य नागरिक को अपनी जिंदगी को जीने के लिए खुला आसमान मिलना चाहिए।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं मक्खन पर लकीर करने नहीं बल्कि पत्थर पर लकीर करने आया हूँ। मैं आपके बच्चों के हाथों में एक समृद्ध हिंदुस्तान देना चाहता हूँ। हमारी सरकार के गवर्नेंस मॉडल को समझना है तो पीएसयू को देखिए। बहुत कम पीएसयू होते हैं जो देश के काम आते हैं, वरना बर्बादी लाते हैं। पहले सरकारों के चलते बीएसएनएल और एमटीएनएल बर्बाद हो ग।. बीएचएल और एलआईसी क्या है आज देखिए। आज एचईएल के पास आज एशिया के पास सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर बनाने वाली फैक्ट्री है। हमारी सरकार के कदमों की बदौलत आज पीएसयू के प्रॉफिट लगातार बढ़ रहे हैं। दस वर्षों में पीएसयू की नेटवर्थ 9.5 लाख से बढ़कर 78 लाख करोड़ तक पहुँच गई है।”

पीएम मोदी ने कहा, “पहले की सरकार के समय आपने इज ऑफ लिविंग जैसे शब्द सुने ही नहीं होंगे। जो उस दौर में सक्षम थे वो सुविधाओं के सबसे बड़े हकदार बन गए थे… बीच में पिसता कौन था वो देश का सामान्य नागरिक जो आरके लक्ष्मण के कार्टूनों में झलकता है। इस कॉमन मैन की इज ऑफ लिविंग को भी हमारी सरकार ने प्राथमिकता में रखा। पहले पासपोर्ट बनवाना हो तो औसतन पचास दिन लगते थे। इन पचास दिनों में भी लोगों को पचास फोन करने पड़ते थे और सिफारिश लगानी पड़ती है।”

उन्होंने आगे कहा, “आज एक पासपोर्ट औसतन 5-6 दिन में आपके घर पहुँच जाता है। सब कुछ वहीं है लेकिन बदलाव कैसे आया, लेकिन सरकार ने जैसे ही इज ऑफ लिविंग पर ध्यान देना शुरू किया तो सिस्टम में खुद बदलाव आ गया। पहले 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज तकरीबन सवा पाँच सौ पासपोर्ट सेवा केंद्र हैं। ऐसे और भी कई बदलाव आए हैं।”

पीएम स्वनिधि योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पीएम स्वनिधि से स्ट्रीट वेंडर को सस्ता और आसान लोन बिना गारंटी के मिला है। इसके पीछे का कारण है कि मेरी जिंदगी का जो तजुर्बा है, मैंने गरीबों की अमीरी भी देखी है और अमीरों की गरीबी भी देखी है। मेरा सपना था कि स्ट्रीट वेंडर को मदद करेंगे। मैंने कोविड का वह दौर देखा जब इन स्ट्रीट वेंडर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। तब मैंने तय किया था कि मैं इनकी जरूर मदद करूँगा। भारत की डिजिटल क्रांति में ये रेहड़ी पटरी वाले अहम भूमिका निभा रहे हैं।’