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239 लोगों को एक साथ मारने का ‘मजा’, पायलट जहरी अहमद शाह की सेक्स लाइफ और एक भी लाश नहीं मिलने की ‘फूलप्रूफ प्लानिंग’: MH370 फिर चर्चा में

मलेशिया का एक विमान मार्च 2014 में उड़ान के बाद अचानक लापता हो गया था। फ्लाइट संख्या MH370 में कुल 239 यात्री सवार थे। तमाम कोशिशों के बावजूद उस विमान को आज तक खोजा नहीं जा सका। अब ब्रिटेन के निवासी और बोइंग एक्सपर्ट साइमन हार्डी ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि संभावना है कि पायलट कैप्टन जहरी अहमद शाह द्वारा विमान को जानबूझ कर समुद्र में डुबाया गया हो। उन्होंने आशंका जताई है कि ऐसा कैप्टन ने अपने साथ कई लोगों को मौत के मुँह में धकेलने के लिए किया हो।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह विमान 8 मार्च 2014 को दक्षिण चीन सागर के ऊपर उड़ाने भरने के बाद अचानक ही गायब हो गया था। विमान कुआलालंपुर से बीजिंग की यात्रा पर था। उड़ान भरने के महज 39 मिनट बाद गायब हुए इस विमान को दोबारा कभी नहीं देखा गया। घटना के एक साल बाद 2015 में साइमन हार्डी इस लापता हुए विमान का पता लगाने के लिए जाँच दल में शामिल हुए। जाँच ऑस्ट्रेलियाई परिवहन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा की जा रही है।

अब द सन अखबार ने हार्डी के हवाले से बताया, “मैं MH 370 की खोज में एक शामिल एक विशेषज्ञ हूँ। मुझे पता है कि कैसे एक ‘आत्मघाती’ पायलट ने विमान और यात्रियों को समुद्र के नीचे पूरी तरह से डुबो दिया था।”

यह बयान उन्होंने विमान के लापता होने की दसवीं बरसी पर एक ख़ास इंटरव्यू के दौरान दिया है। साइमन हार्डी ने आगे बताया, “मेरा मानना है कि विमान को ऐसी जगह गिराया गया था, जहाँ पहले कोई खोजी दल नहीं गया था। पायलट को पता था कि वहाँ जहाज हमेशा के लिए खो जाएगा।”

साइमन हार्डी ने आगे कहा, “विमान के पायलट, कैप्टन ज़हरी ने सभी यात्रियों को मारने का प्लान बनाया था। वह इस आत्मघाती साजिश को अंजाम देते हुए बेहद खुश था। अमेरिका की संघीय जाँच ब्यूरो (एफबीआई) भी अपनी शुरुआती जाँच में इसी फैसले पर पहुँची थी।”

पायलट के बारे में हार्डी ने आगे बताया कि वह एक शातिर साजिशकर्ता था, जो इस बात को लेकर संतुष्ट होना चाहता था कि विमान को ऐसी जगह गिराया जाए, जहाँ कोई खोज न पाए। हार्डी का मानना है कि सैकड़ों यात्रियों से भरे विमान को गायब करने में पायलट को अलग प्रकार का ही मजा आया होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बोइंग विशेषज्ञ हार्डी ने विमान की तलाश के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सिमुलेटर का उपयोग किया था। वो इस फैसले पर पहुँचे कि 53 वर्षीय पायलट ज़हरी जहाज को समुद्र के उस क्षेत्र में डुबाना चाहता था, जिसे गिल्विनक फ्रैक्चर ज़ोन कहा जाता है। यह इलाका दक्षिणी हिंद महासागर के नीचे सैकड़ों मील क्षेत्र में फैला हुआ है, जहाँ गायब हुए विमान को खोजना बेहद मुश्किल काम है।

लापता विमान MH 370 विमान की खोज के लिए छेड़ा गया व्यापक अभियान साल 2017 में बंद कर दिया गया था। खोजकर्ता हार्डी तब तक अपने दावे को साबित नहीं कर पाए थे। हार्डी का यह भी कहना है कि अगर भविष्य में कभी कोई भी खोजकर्ता लापता विमान तक पहुँच पाया तो वो इसे गहरे समुद्र की चट्टानों के बीच दबा पाएगा।

अकेलापन और परेशान, आत्मघाती थे कैप्टन जहरी

कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मनोवैज्ञानिकों और साथी पायलट के मुताबिक पहले से परेशान कैप्टन जहरी अकेलेपन के शिकार थे। उनकी हरकतों को आत्मघाती भी बताया गया है। दावा किया था कि उन्होंने एक युवा इंस्टाग्राम मॉडल के जुड़वाँ बच्चों को डरावने फेसबुक मैसेज भेजे थे, जो बाद में सार्वजानिक हो गए थे। इसके बाद कैप्टन जहरी को मनोवैज्ञानिकों ने आत्मघाती सोच वाला माना था। कैप्टन के साथी पायलटों ने यहाँ तक दावा किया है कि जहरी अपनी शादी टूट जाने के बाद कुछ फ्लाइट अटेंडेंट के साथ हमबिस्तर भी हुए थे।

साथी पायलटों ने यह भी बताया था कि कैप्टन अहमद शाह जहरी फेसबुक पर कई मॉडलों को फॉलो करते थे। वह उन मॉडलों को सेक्स प्रपोजल देकर कुआलालंपुर आने का ऑफर देते थे। ब्रिटिश विशेषज्ञ हार्डी ने अपनी जाँच निष्कर्ष में पायलट जहरी की इन हरकतों को भी शामिल किया है। एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कैप्टन ने उड़ान भरने से पहले ग्राउंड स्टाफ से पूरे केबिन के बजाय सिर्फ कॉकपिट के लिए अतिरिक्त ऑक्सीजन भरने के लिए कहा था। साथ ही उन्होंने एक्स्ट्रा पेट्रोल भी भरवाया था।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इस बात की भी आशंका है कि पायलट ज़ाहरी ने साजिश के तहत यात्रियों को धीरे-धीरे मारने की तैयारी की थी। इसी साजिश के तहत जहरी ने शायद पहले अपने साथी पायलट को या तो मार डाला था या बेहोश कर दिया था। विमान के उड़ान भरने के बाद उसकी सैटेलाइट आदि से मिली लोकेशन और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को भेजे जाने वाले संकेतों में कमी भी कहीं न कहीं हार्डी के दावे को मजबूती देती हैं।

हार्डी के अनुसार जहाज में एक्स्ट्रा पेट्रोल डालने की माँग के पीछे कैप्टन जहरी की सोच विमान को कई घंटे तक किसी अज्ञात स्थान की तरफ उड़ाने की थी। यह समय लगभग 7 घंटे का होता, तब तक सभी यात्री और चालक दल के सदस्य बेहोश हो चुके होते। बकौल हार्डी हर यात्री के मर जाने की वजह से भी विमान को तलाशने में दिक्कत आई। साथ ही जहाज को लम्बे समय इधर-उधर घुमाने के बाद ऐसी जगह गिराया गया, जहाँ पहले कोई खोज नहीं हुई थी। यह वजह विमान का मलबा न मिलने में सबसे अहम रही क्योंकि जहाज सागर की गहराइयों में समा चुका था।

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि खोजकर्ताओं को लापता विमान के कुछ हिस्से मिले। इनमें फ्लैपरॉन (पंख मतलब साइड विंग्स का टुकड़ा) भी शामिल है। यह टुकड़ा मेडागास्कर से लगभग 425 मील पश्चिम दिशा में रीयूनियन नामक द्वीप के पास पाया गया। हार्डी ने कहा कि अगर फ़्लैप नीचे थे तो इसका मतलब कोई लीवर को हिला रहा था। फ़िलहाल हार्डी के बयान के बाद दुनिया भर में एक नई बहस छिड़ गई है।

फिर हारे पहलवान बजरंग पूनिया, ट्रायल्स में रोहित कुमार ने दी पटखनी: बिना ट्रायल्स के एशियन गेम्स में गए थे, वहाँ भी मिली थी हार

भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया 2024 के ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाएँगे। इन ओलम्पिक का आयोजन फ्रांस की राजधानी पेरिस में होना है। बजरंग पूनिया की ओलम्पिक के लिए आयोजित ट्रायल्स में ही हार गए हैं। उन्हें पहलवान रोहित कुमार ने पटखनी दी है।

पेरिस ओलंपिक के लिए अभी क्वालिफायर्स होना बाकी हैं। उससे पहले सोनीपत में ट्रायल्स का आयोजन किया गया था। यह ट्रायल्स सोनीपत में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) की एकेडमी में हुए थे। इसमें बजरंग पूनिया का मुकाबला रोहित कुमार से हुआ।

रोहित कुमार ने इन ट्रायल में बंजरंग पूनिया को 9-1 के अंतर से पटखनी दे दी। इसी के बाद स्पष्ट हो गया कि वह क्वालिफायर्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इससे पहले के क्वालीफायर में भी बजरंग पूनिया मुश्किल से जीत कर यहाँ तक पहुँचे थे। पहलवान रविंदर कुमार ने एक पॉइंट गंवा दिया था, इसके कारण पूनिया को जीत मिल गई थी।

बजरंग पूनिया के प्रदर्शन में काफी गिरावट देखी गई है। इससे पहले वह 2023 एशियन गेम्स में भी हार चुके हैं। उन्हें जापान के एक पहलवान के यामागुची ने 10-0 से शिकस्त दी थी। वह एशियन गेम्स से बिना मेडल लिए ही लौट आए थे।

गौरलतब है कि पूनिया बिना ट्रायल्स के ही एशियन गेम्स में गए थे। इसकी माँग वह लगातार कर रहे थे। इसके बाद भारतीय कुश्ती संघ ने उन्हें एशियन गेम्स में बिना कोई ट्रायल लिए ही भेज दिया था। इसको लेकर अन्य कुछ पहलवानों ने प्रश्न भी उठाए थे।

पहलवान प्रदर्शन और बजरंग पूनिया

बजरंग पूनिया का नाम हालिया सुर्खियों में कुश्ती की वजह से कम और धरने प्रदर्शन की वजह से अधिक आया है। पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के साथ दिल्ली में हुए पहलवान प्रदर्शन का नेतृत्व भी कर रहे थे। वह लगातार तत्कालीन कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे और उन्हें हटाने की माँग कर रहे थे। बजरंग पूनिया इसके बाद राहुल गाँधी के साथ भी दिखे थे। राहुल गाँधी उनके यहाँ एक दिन पहुँचे थे और खाना भी खाया था। राहुल ने पूनिया के साथ कुश्ती के दांव पेंच भी आजमाए थे।

बजरंग पूनिया ने दिसम्बर 2023 में ही अपना पद्म श्री पुरष्कार भी लौटा दिया था। उन्हें 2019 में यह दिया गया था। बताया गया कि जब वह आज के ट्रायल में हार गए तो गुस्से से बाहर निकल गए। उन्हें SAI के अधिकारियों ने रोका भी लेकिन वह नहीं रुके।

केरल यूनिवर्सिटी में बवाल: वामपंथी SFI गुंडों के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, पुलिस ने विद्यार्थियों पर ही किया लाठीचार्ज, कई घायल, ‘इंतिफादा’ से तनाव

केरल स्टेट यूनिवर्सिटी में चल रहे सालाना जलसे में जमकर बवाल हुआ है। केरल स्टू़डेंट यूनियन के कार्यकर्ताओं ने स्टेज पर चढ़कर हंगामा काटा और एसएफआई का विरोध किया। इस दौरान पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया और छात्रों को तितर बितर भी किया। केरल यूनिवर्सिटी में चल रहा ये यूथ फेस्टिवल वही है, जिसे पहले “इंतिफादा” नाम दिया गया था, लेकिन काफी विरोध प्रदर्शन और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस नाम को बदल दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिरुअनंतपुरम में केरल स्टूडेंट यूनियन ने यूनिवर्सिटी के सीनेट हॉल में इतना जोरदार प्रदर्शन किया कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ गया। इसके बाद पुलिस और स्टूडेंट्स यूनियन के बीच भी जोरदार बवाल हुआ। इस दौरान पुलिस स्टूडेंट्स को कॉलर से पकड़ते हुए खदेड़ती नजर आई। पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत भी लिया। केरल स्टूडेंट यूनियन एसएफआई की गुंडागर्दी के विरोध में प्रदर्शन कर रही थी। उनका आरोप है कि केरल सरकार भी एसएफआई का समर्थन करती है।

केरल यूनिवर्सिटी में बवाल के बीच केएसयू से जुड़े छात्रों ने आरोप लगाया है कि एफएसआई के कार्यकर्ताओं ने फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुँचे छात्रों को पीटा है, जिसके बाद उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। मनोरमा न्यूज द्वारा प्रसारित वीडियो में पुलिस केएसयू कार्यकर्ताओं की पिटाई करते हुए और उन्हें घसीटते हुए भी दिख रही है। इस दौरान पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में भी लिया है।

बेईमानी के लिए एफआईआर दर्ज

केरल यूनिवर्सिटी में 4 दिनों से आर्ट फेस्टिवल चल रहा है। इस फेस्टिवल में यूनिवर्सिटी से जुड़े तमाम कॉलेज भी हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन एक कार्यक्रम में आरोप लगाया गया कि प्रतियोगिता के जजों ने पैसे लेकर गलत टीम (कॉलेज) को जिता दिया, जबकि उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। ये इस मामले में शनिवार को हंगामा होने के चलते कई कार्यक्रमों में देरी हो गई थी, जिसके बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई औऱ पुलिस ने प्रतियोगिता के जज, ट्रेनर और दो अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया।

बताया जा रहा है कि “मारगमकली” नाम की प्रतियोगिता में चौदह टीमों ने भाग लिया। जिसमें इवानियोस कॉलेज को विजेता घोषित कर दिया गया। इसका विरोध करने वालों ने आरोप लगाया कि इवानियोस टीम ने प्रदर्शन के दौरान लय खो दी थी और पैसे लेकर जज ने उस टीम के पक्ष में फैसला दिया। इस मामले में अब इवानियोस कॉलेज ने यूनिवर्सिटी के वीसी और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से शिकायत की है कि दबाव के चलते प्रतियोगिता के फैसले को बदला जा रहा है। ऐसे में इस मामले को लेकर भी दो पक्ष आमने-सामने आ चुके हैं।

DMK की फंडिंग करता था ड्रग तस्कर जाफर सादिक, उदयानिधि को दिए थे पैसे,पूछताछ में किया खुलासा: रिपोर्ट

₹2000 करोड़ के ड्रग रैकेट का सरगना और DMK का पूर्व पदाधिकारी जाफर सादिक अब NCB की गिरफ्त में है। उसने पूछताछ में बताया है कि वह तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK को फंडिंग करता था। उसने खुलासा किया है कि उसने पार्टी के लिए पैसे CM स्टालिन के और राज्य सरकार में मंत्री उदयानिधि स्टालिन को दिए थे। यह खुलासा उसने NCB की पूछताछ में किया है।

इंडिया टुडे को सूत्रों ने बताया है कि ड्रग्स तस्करी के सरगना जाफर सादिक ने NCB के सामने खुलासा किया है वह मंत्री उदयानिधि स्टालिन से मिला था। सादिक ने कबूल किया है कि उसने ₹7 लाख उदयानिधि स्टालिन दिए थे। इसमें से ₹5 लाख की सहायता बाढ़ के पीड़ितों के लिए थी। इसके अलावा ₹2 लाख का फंड DMK के लिए था।

सादिक के इस खुलासे के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि जाँच एजेंसी उदयानिधि स्टालिन को पूछताछ के लिए बुला सकती है। इस बात की भी जाँच की जाएगी कि जो पैसा उसने उदयानिधि को दिया, वह कहीं ड्रग तस्करी से तो नहीं कमाया गया था। इस मामले में पैसे के लेनदेन की जाँच अब ED से करवाए जाने की योजना है।

गौरतलब है कि फरवरी, 2024 में दिल्ली पुलिस और NCB ने एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करके दिल्ली से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पता चला था कि इस पूरे रैकेट का सरगना तमिलनाडु का रहने वाला जाफ़र सादिक है जो कि सत्ताधारी DMK का पदाधिकारी था।

वह एक फिल्म निर्माता भी है। सादिक की तमिलनाडु CM स्टालिन और उनके बेटे उदयानिधि के साथ तस्वीरें भी सामने आई थी। सादिक इस खुलासे के बाद से ही फरार था। एजेंसियाँ उसकी तलाश कर रही थीं। उसे कल (9 मार्च, 2024) को जयपुर के एक होटल से एजेंसी ने पकड़ा था।

दिल्ली में मारे गए इस छापे में स्यूडोफेड्राइन नाम की एक ड्रग बरामद हुई थी। सामने आया था कि यह रैकेट इस ड्रग को अलग अलग खाने के सामान में छुपा कर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेज रहा था, जहाँ इसकी कीमत करोड़ों में है। यह ड्रग समुद्र के रास्ते भेजी जाती थी।

यह भी सामने आया था कि बीते तीन वर्षों में 3500 किलो से अधिक ड्रग इन देशों को भेजी जा चुकी है। अब तक 45 बार इन देशों ड्रग भेजी गई थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजर में कीमत कम से कम ₹2000 करोड़ बताई जा रही थी। इस पूरे रैकेट के तार सादिक से जुड़े थे।

CM स्टालिन के साथ दिखा था जाफ़र सादिक

जाफ़र सादिक एक तमिल फिल्म निर्माता है। वह अब तक 4-5 फिल्म बना चुका है। उसने एक फिल्म ‘मंगाई’ बनाई थी। इसका एक गाना उदयानिधि की पत्नी के हाथों लॉन्च किया गया था। इससे पहले वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी मिला था। वह सीएम स्टालिन से 17 दिसम्बर 2023 को मिला था। सादिक ने इस दौरान उन्हें ₹10 लाख चेक सौंपा था। यह चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। यह दान उसने तूफ़ान मिचौन्ग के बाद दिया था।

वह सिर्फ सीएम स्टालिन से ही नहीं बल्कि उनके बेटे और तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयानिधि स्टालिन से भी मिला था। उन्हें इसने ₹2 लाख का चेक सौंपा था, जो मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। इस दान को लेकर उदयानिधि ने सादिक की प्रशंसा में एक पोस्ट भी लिखा था, वह अब डिलीट कर दिया गया है।

DMK का पदाधिकारी था जाफ़र सादिक

जाफ़र सादिक तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK से जुड़ा हुआ था और इसकी NRI विंग का मैनेजर था। उसे ड्रग आरोपों के बाद पार्टी ने निकाल दिया गया था उसकी कई DMK सांसदों और विधायकों के साथ फोटो हैं।

DMK के पदाधिकारी के ड्रग तस्करी रैकेट का सरगना होने की जानकारी के बाद राज्य का विपक्ष DMK पर हमलावर है। वह इस मामले में उच्च स्तरीय जाँच की माँग कर रहा है।

CAA विरोधी PFI की रैली में आया था जिस TMC MP अबू ताहेर खान का नाम, उसे ममता बनर्जी से फिर से दिया टिकट, कहा – नहीं लागू होने दूँगी NRC

ममता बनर्जी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में टीएमसी की सबसे बड़ी रैली का आयोजन किया। इसी रैली में उन्होंने इंडी गठबंधन को पीछे छोड़ते हुए पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों के लिए टीएमसी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। इस लिस्ट में एक नाम ऐसा है, जिसका नाम पीएफआई जैसी देश विरोधी संस्थाओं से रहा है, जो लगातार सीएए का विरोध करता रहा है। पीएफआई ने पश्चिम बंगाल की रैली में इस सांसद के आने की भी घोषणा की थी। ये सांसद है मुर्शिदाबाद का अबू ताहेर खान। उसे टीएमसी ने एक बाद फिर से मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।

ममता बनर्जी ने कोलकाता की रैली में घोषणा की है कि वो पश्चिम बंगाल में एनआरसी नहीं लागू होने देंगी और न ही राज्य में किसी को डिटेंशन कैंप में भेजा जाएगा। हकीकत ये है कि अभी एनआरसी लागू करने को लेकर सरकार ने कोई आधिकारिक तारीख नहीं घोषित की है, लेकिन ममता बनर्जी लोगों को सीएए और एनआरसी का डर दिखा रही हैं। खास बात ये है कि मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट पर जिस अबू ताहेर खान को फिर से लोकसभा भेजने की तैयारी की जा रही है, वो सीट बांग्लादेश से सटी है और माना जाता है कि यहाँ अवैध रूप से आकर बसे बांग्लादेशियों की काफी तादात है।

अबू ताहेर खान 2018 में टीएमसी में शामिल हुआ था। और साल 2019 में वो मुर्शिदाबाद से लोकसभा सांसद बना। ताहेर खान नावोदा विधानसभा सीट पर 2001 से कॉन्ग्रेस का विधायक था और चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुका था। साल 2020 में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई(तब बैन लगाने की तैयारी चल रही थी) ने देश भर में सिटिजनशिप एमेंडमेंड एक्ट (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किए थे और हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया था। उसने पश्चिम बंगाल में सीएए विरोधी रैली में मुर्शिदाबाद के टीएमसी सांसद अबू ताहेर खान के आने का भी ऐलान किया था। हालाँकि अबू ताहेर खान ने सीएए का विरोध कर रहे पीएफआई के विरोध पूरे देश में चल रही पुलिसिया कार्रवाई को देखते हुए सामने से इस रैली में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

अब भी वो मीडिया रिपोर्ट्स इंटरनेट पर मौजूद हैं, जिसमें पीएफआई के पदाधिकारी ने कहा था कि अबू ताहेर खान पीएफआई की रैली में शामिल होगा।

पहले भी विवादों में घिरा रहा है ताहेर खान

अबू ताहेर खान पहले भी विवादों में घिरा रहा है। वो टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा से तनाव की वजह से सुर्खियाँ पा चुका है, तो अपनी गाड़ी से 6 साल की बच्ची को रौंदने की वजह से भी। उसने पीड़ित पर ही एक्सीडेंट का दोष मढ़ दिया था। ये घटना नवंबर 2022 की है। उसे पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी हिंसा से जुड़े मामले में सीबीआई ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था।

मुर्शिदाबाद बांग्लादेश से सटी सीट, मुस्लिम लीग भी जीत चुकी है चुनाव, कभी हिंदू नहीं जीता

मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट में 60 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिमों की है। ये सीट बांग्लादेश से सटी हुई है। सीमा के दूसरी ओर बांग्लादेश का राजशाही शहर पड़ता है। मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट का इतिहास है कि यहाँ से किसी हिंदू प्रत्याशी को कभी जीत मिली ही नहीं। इस सीट पर इंडियन नेशनल मुस्लिम लीग तक जीत दर्ज कर चुकी है। अबू ताहे खान इस बार फिर से टीएमसी का कैंडिडेट है, जिसके सामने बीजेपी ने गौरी शंकर घोष को मैदान में उतारा है।

शिवलिंग पर कंडोम वाला फोटो पोस्ट किया तो मिला TMC से लोकसभा टिकट, सायोनी घोष को बनाया गया जादवपुर से उम्मीदवार

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (10 मार्च, 2024) पश्चिम बंगाल के लिए लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। CM ममता की पार्टी ने बंगाल के जादवपुर ने अभिनेत्री सायोनी घोष को उम्मीदवार बनाया है। सायोनी घोष इससे पहले शिवलिंग पर भद्दा फोटो डाल कर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचा चुकी हैं।

TMC ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। इस सूची में जादवपुर सीट से अभिनेत्री सायोनी घोष का भी नाम है। सायोनी को यहाँ अभिनेत्री मिमी चक्रबर्ती की जगह पर उतारा गया है। चक्रबर्ती ने सांसद पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। सायोनी की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद उनके पुराने कारनामे सामने आए हैं।

सायोनी के एक्स (पहले ट्विटर) पर 2015 में किए गए एक हिन्दू विरोधी ट्वीट को याद दिलाया जा रहा है। फरवरी, 2015 में सायोनी ने ट्विटर पर एक फोटो पोस्ट किया था जिसमें एक महिला हिन्दुओं के लिए आराध्य शिवलिंग पर कंडोम चढ़ाते हुए दिखती है।

सायोनी का शिवलिंग पर ट्वीट
सायोनी का ट्वीट

सायोनी ने शिवलिंग वाले इस अपमानजनक ट्वीट पर लिखा था, “‘Gods cudnt have been more useful’ (भगवान इससे ज्यादा उपकारी नहीं हो सकते)। उनके इस ट्वीट को लेकर काफी बवाल मचा था। यह ट्वीट 2021 में दुबारा वायरल हो गया था। सायोनी पर इस ट्वीट के कारण FIR भी करवाई गई थी।

सायोनी घोष ने लोगों के विरोध को दबाने के लिए तर्क दिया था कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो चुका था, इसीलिए किसी और ने यह ट्वीट किए। सायोनी ने दावा किया था कि उन्हें अपना अकाउंट 2017 के बाद वापस मिल सका। हालाँकि, लोगों ने उनके द्वारा इसी अवधि में किए गए निजी ट्वीट भी दिखा दिए और प्रश्न पूछा कि भला कोई हैकर ऐसे ट्वीट क्यों करेगा। लोगों ने उनके फिल्म सम्बंधित ट्वीट भी सामने रख कर सायोनी से प्रश्न पूछे थे।

सायोनी के खिलाफ भाजपा नेता और त्रिपुरा तथा मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने शिकायत भी दर्ज करवाई थी। उन्होंने कहा था कि वह एक शिव भक्त हैं और सयानी के ट्वीट से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। सायोनी के विरुद्ध गुवाहाटी में भी एक शिकायत दर्ज करवाई गई थी।

सायोनी को लोकसभा टिकट दिए जाने के बाद TMC पर प्रश्न उठ रहे हैं। हालाँकि, सयोनी के यह ट्वीट सामने के मात्र 2 महीने बाद मार्च 2021 में ही TMC ने उन्हें इनाम दिया था और आसनसोल दक्षिण से विधानसभा उम्मीदवार बनाया था। वह भाजपा की अग्निमित्रा पॉल से चुनाव हार गई थीं। सायोनी पश्चिम बंगाल में युवा तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष भी हैं।

सायोनी को लोकसभा टिकट मिलने के बाद लोग प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर हिन्दू धर्म पर अपमानजनक तस्वीर डालने के बाद भी उन्हें उम्मीदवार क्यों बनाया जा रहा है।

‘जय श्री राम’ नारे पर भड़के कॉन्ग्रेसी, किया हमला… गुजरात के बारडोली में राहुल गाँधी की बैठक रद्द, बिना सभा किए रवाना

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ लेकर मणिपुर से निकले राहुल गाँधी गुजरात पहुँच चुके हैं। यह यात्रा रविवार (10 मार्च, 2024) को उत्तरी गुजरात से चल कर सूरत के बारडोली पहुँची है। यहाँ राहुल गाँधी को विरोध का सामना करना पड़ा। राहुल गाँधी की इस यात्रा में हिंदू संगठन ‘श्री राम सेना’ के कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’ और ‘जो राम का नहीं, वो हमारे किसी काम का नहीं’ के नारे लगाए। मिली जानकारी के मुताबिक इस नारेबाजी के बाद राहुल गाँधी की बैठक रद्द कर दी गई और वो बारडोली से बिना सभा किए व्यारा के लिए रवाना हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार की सुबह राहुल गाँधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान ऐतिहासिक ‘स्वराज आश्रम’ का दौरा किया। जब वो यहाँ से लौट रहे थे तो स्थानीय हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने रास्ते में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। इसी दौरान राहुल गाँधी की यात्रा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी किया गया। जय श्री राम के नारे सुन कर राहुल गाँधी के साथ चल रहे कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। वो नारे लगा रहे लोगों के बीच पहुँच गए और उनको रोकने की कोशिश करने लगे।

दोनों पक्षों के आमने-सामने आ जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। हल्की झड़प की भी खबरें हैं। राहुल गाँधी की यात्रा में बारडोली में एक सार्वजनिक बैठक प्रस्तावित थी। यह बैठक लिम्डा चौक पर प्रस्तावित थी। हालाँकि हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं के विरोध की वजह से यह बैठक अचानक रद्द कर दी गई। इसके बाद राहुल गाँधी अपनी यात्रा लेकर सीधे व्यारा के लिए निकल गए।

हमारे राजा राम हैं, उनके विरोधी का हम करेंगे विरोध

ऑपइंडिया ने राहुल गाँधी की यात्रा का विरोध करने वाले श्री राम सेना संगठन के पदाधिकारी संजय पटेल से बात की। उन्होंने हमसे कहा, “हमने राहुल गाँधी का विरोध किया है। जो राम का नहीं वह किसी काम का नहीं। राहुल गाँधी कहते हैं कि मंदिर जाने से किसी को रोजगार नहीं मिलेगा, वह और उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी पहले से ही राम मंदिर के विरोध में खड़ी है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा कर कॉन्ग्रेस ने अपनी मानसिकता जगजाहिर कर दी है।”

संजय पटेल ने आगे कहा, “राहुल गाँधी युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। अगर वे हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करेंगे तो हम भी हमेशा उनका विरोध करेंगे। भगवान राम हमारे राजा हैं। उनमे हमारे अटूट आस्था है। हम किसी भी हाल में उनकी खिलाफत बर्दाश्त नहीं करने वाले।”

संजय पटेल ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर अपने साथियों और सहयोगियों पर हमला करने का भी आरोप लगाया है। बकौल संजय कॉन्ग्रेस ने हमेशा सरदार पटेल को हेय दृष्टि से देखा है लेकिन बारडोली में दिखावा करने के लिए कॉन्ग्रेसी उनके ही नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कई बार कर चुके हैं राम विरोधी टिप्पणी

बताते चलें कि अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी ने कई स्थानों पर राम मंदिर पर टिप्पणी की है। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर भी सवाल खड़े किए थे। तब उन्होंने कहा था कि कार्यक्रम में गरीबों को क्यों नहीं बुलाया गया ? इसके अलावा राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था, “वह चाहते हैं कि भारत के युवा पूरे दिन अपने फोन से चिपके रहें। ‘जय श्री राम’ का जाप करें और भूख से मर जाएँ।” राहुल के इस बयान का काफी विरोध हुआ था।

क्रिकेटर यूसुफ पठान को TMC ने अधीर रंजन चौधरी के सामने उतारा, नहीं किया बंगाल में कॉन्ग्रेस से गठबंधन: मुश्किल हुई कॉन्ग्रेसी नेता की राह

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (10 मार्च, 2024) लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल के अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। TMC ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषणा कर दी है। TMC ने क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से टिकट दिया है।

TMC के सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम क्रिकेटर यूसुफ पठान का ही है। उन्हें जिस बहरामपुर सीट से टिकट दिया गया है, उस सीट से अभी कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी सांसद हैं। वह लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता भी हैं। युसूफ पठान के उतरने के बाद चौधरी की राह मुश्किल हो गई है।

यूसुफ पठान का बंगाल से सीधा कोई नाता नहीं है, वह गुजरात के रहने वाले हैं। हालाँकि, TMC ने बहरामपुर सीट से उन पर दाँव खेला है। अधीर रंजन चौधरी इस सीट से 1999 से लगातार सांसद हैं। वह इस सीट से लगातार 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 का चुनाव जीत चुके हैं। अधीर रंजन चौधरी स्वयं बहरामपुर के ही रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले INDI गठबंधन के अंतर्गत कॉन्ग्रेस और TMC में बंगाल में सीट समझौते की बातें सामने आई थीं। हालाँकि, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ने वाली है। दूसरी तरफ अधीर रंजन चौधरी, जो कि बंगाल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं, ने भी TMC से गठबंधन को नकार दिया था।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चौधरी 2024 लोकसभा चुनाव भी इसी सीट से लड़ेंगे क्योंकि कॉन्ग्रेस ने बंगाल के लोकसभा उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। लेकिन TMC से गठबंधन नहीं होने के बाद उनका यहाँ से प्रत्याशी बनना तय माना जा रहा है।

उनके प्रत्याशी बनने की राह में TMC से गठबंधन एक रोड़ा था क्योंकि कहा जा रहा था कि यदि दोनों पार्टियाँ मिल कर चुनाव लड़ती हैं तो उनकी बहरामपुर सीट TMC के खाते में जा सकती है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि यहाँ TMC अपने उम्मीदवार यूसुफ पठान को लड़ाएगी।

चौधरी के लिए यह चुनाव जीतना अब काफी कठिन होगा क्योंकि एक तो यूसुफ पठान को एक प्रसिद्ध क्रिकेटर होने का फायदा मिलेगा और साथ ही यहाँ मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सीट पर 52% मुस्लिम आबादी है, जिनके TMC के उम्मीदवार यूसुफ पठान के साथ जाने के कयास लग रहे हैं।

अधीर का ग्राफ भी चुनाव दर चुनाव गिरा है। 2009 लोकसभा चुनाव में जहाँ वह कुल वोटों का 56% वोट पाए थे वहीं 2014 में यह घट कर लगभग 50% रह गया। 2019 में इसमें और भी गिरावट आई और यह 45% के आसपास आ गया। उनसे हारने वाले TMC के उम्मीदवार अपूर्ब सरकार को 39% वोट मिले थे। यानी अधीर और अपूर्ब के बीच मात्र 6% का अंतर था।

2019 के चुनाव में भाजपा ने भी यहाँ 11% वोट हासिल किए थे। भाजपा यहाँ अधीर के वोटबैंक में सेंध लगा सकती है। भाजपा ने इस बार यहाँ से निर्मल कुमार साहा को उम्मीदवार बनाया है। अगर भाजपा अधीर के वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल होती है और चुनाव त्रिकोणीय हो जाता है तो अधीर को समस्या हो सकती है।

TMC की सूची में महुआ मोइत्रा का नाम भी शामिल है। वह कृष्णानगर से चुनाव लड़ेंगी। उन्हें दिसम्बर 2023 में लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। उन पर पैसे और गिफ्ट लेकर प्रश्न पूछने का आरोप सिद्ध हुआ था। इसके अलावा शत्रुघन सिन्हा को पार्टी ने आसनसोल से उम्मीदवार बनाया है।

INDI गठबंधन में अपनी ढपली-अपना राग: कोलकाता से मुंबई तक टूट रही साझेदारी, ममता बनर्जी ने भी सभी 42 सीटों पर किया उम्मीदवारों के नाम का ऐलान, देखती रह गई कॉन्ग्रेस

कोलकाता से मुंबई तक INDI गठबंधन जो कभी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा था, वो पूरी तरह से टूट चुका है। केरल से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल तक गठबंधन के परखच्चे उड़ चुके हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने कॉन्ग्रेस की सभी उम्मीदों को धराशाई करते हुए सभी 42 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है।

राजनीति में खास तौर से चुनावों के पहले बहुत कुछ उलटफेर देखा जाता है। पार्टियाँ अपनी सुविधा के हिसाब से पाले बदलती हैं। एक तरफ तो एनडीए दिन प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है, और इंडी गठबंधन के ही साथियों को तोड़ता जा रहा है, तो दूसरी तरफ इंडी गठबंधन अपने साथियों को संभाल नहीं पा रही है। इंडी गठबंधन की ममता बनर्जी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वो सभी 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगी। कॉन्ग्रेस उम्मीद लगाए बैठी थी कि आखिर तक वो ममता बनर्जी को मना ही लेगी। लेकिन ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस के आखिरी सपने को भी ध्वस्त कर दिया है।

वैसे, ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी की सीट पर स्टार पॉवर उतारा है। एक तरफ तो आईपीएल चल रहा है, तो दूसरी तरफ केकेआर के लिए लंबे समय तक खेले क्रिकेटर यूसुफ पठान को अधीर रंजन की सीट पर उतार दिया गया है। वहीं, महुआ मोइत्रा को एक बार फिर से ममता बनर्जी ने मैदान में उतारा है, जो कुछ माह पहले ही घूसकांड के चलते लोकसभा की सदस्यता गवाँ बैठी थी।

इंडी गठबंधन में आज का सच यह है कि लोकसभा चुनाव सामने है और बड़े हिस्सेदार सीटों पर बातचीत को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं। वे इस मामले पर एकमत भी नहीं दिखते। एक भी दल अपने प्रभाव वाले इलाके में गठबंधन के किसी दूसरे सहयोगी को एक भी सीट देने को राजी नहीं दिखाई दे रहे हैं। लोक सभा में मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस को गठबंधन से जुड़े दल बहुत भाव नहीं दे रहे हैं। महाराष्ट्र में भी यही हाल है। एनसीपी आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना एनसीपी और कॉन्ग्रेस पर आँखे तितेर रही है। कुल मिलाकर परसेप्शन बन चुका है कि इंडी गठबंधन खंड-खंड होकर बिखर गया है।

इंडी गठबंधन की हालत ये है कि वो आपस में ही लड़कर चूर-चूर हो जा रहे हैं। उसी का नतीजा है कि नीतीश फिर से एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन बैठे हैं। इसी का परिणाम है कि बाला साहब ठाकरे की शिवसेना फाड़ हो गई तो शरद पवार की बनाई पार्टी एनसीपी आज उन्हीं के सामने उनकी नहीं रही।

महाराष्ट्र में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी भले ही नहीं है, लेकिन वो अपने सहयोगियों को साधना जानती है, यही वजह है कि देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम होकर भी महाराष्ट्र में एनडीए को संभाले हुए हैं, तो बिहार में राम विलास पासवान की पार्टी दो फाड़ होकर भी एनडीए का ही हिस्सा है। वहीं, एनडीए ने आँध्र प्रदेश में सीटों का बंटवारा कर लिया है।

इंडी गठबंधन का सनातन विरोध से लेकर हर पैंतरा फेल

इंडी गठबंधन के नेता एनडीए और बीजेपी को रोकने के लिए हर रोज ऊल-जलूल बयानबाजी पर उतर आए हैं। भगवान राम से लेकर हिंदुत्व तक को निशाना बनाया जा रहा है। इसके बावजूद एनडीए लगातार न सिर्फ मजबूत होती जा रही है, बल्कि जनता में भी सकारात्मक मैसेज जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी विकास की भी बातें कर रही है, तो चुनावी मैदान में सबसे अहम बात अपने सहयोगियों को साधे रखने की कला में भी बीजेपी अपनी ताकत दिखा रही है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार में आधा दर्जन से अधिक सहयोगियों के होने के बावजूद एनडीए में सबकुछ सही दिख रहा है।

वहीं, इंडी गठबंधन में शामिल दल अपने निहित स्वार्थों के चक्कर में न सिर्फ ऊल-जलूल फैसले कर रहे हैं, बल्कि अपनी माँगों को लेकर एकजुट भी होते नहीं दिख रहे हैं। अब ये साफ हो चुका है कि पंजाब में इंडी गठबंधन आपस में ही लड़ रहा है। केरल में भी इंडी गठबंधन का यही हाल है। पश्चिम बंगाल में भी सबकुछ साफ हो चुका है, तो महाराष्ट्र में भी कमोवेश स्थिति ज्यादा सीटों पर कब्जे की लड़ाई में टूट की ही दिख रही है।

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के लिए 400 से अधिक सीट और बीजेपी के लिए 370 सीटों का जो लक्ष्य रखा है, उसके सामने इंडी गठबंधन की कोई हैसियत ही नजर नहीं आ रही है। संसद में यह नारा देने के बाद पीएम मोदी इसी लक्ष्य को पूरा करने को अपनी ओर से अनेक प्रयास करते देखे जा रहे हैं। वह चाहे मंदिर-मंदिर जाना हो या फिर यूएई की धरती से केरल और देश के मुसलमानों को साधने की कोशिश। देश के अंदर उनके काम का आँकड़ा उनके साथ पहले से ही है। वहीं, इंडी गठबंधन कहीं से भी टक्कर देने की हैसियत में भी नहीं दिख रही है।

मुस्लिम बहुल गाँव में दलितों के श्मशान पर चला दिया बुलडोजर, शव को नोच कर खा रहे थे कुत्ते: विरोध करने पर च**र वाली गाली, 2 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से लैंड जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ बॉबी अंसारी और शाहनवाज पर दलित समुदाय के लोगों का श्मशान घाट अवैध तौर पर कब्ज़ा करने का आरोप लगा है। विरोध करने पर पीड़ितों को न सिर्फ जातिसूचक गालियाँ दी गईं बल्कि जान से मार डालने का प्रयास भी किया गया। इस दौरान आरोपितों द्वारा गोलियाँ भी चलाई गईं। पीड़ितों ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। शनिवार (9 मार्च 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। दोनों आरोपितों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

यह घटना सहारनपुर के थानाक्षेत्र जनकपुरी की है। यहाँ के गाँव सड़क दूधली में रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के संजय कुमार ने शनिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनके गाँव के अब्दुल ने डेढ़ साल पहले अपनी 5 बीघा जमीन खान आलमपुर की शाहीन नाम की महिला को बेचा था। इसी जमीन पर बॉबी अंसारी और शाहनवाज अवैध तौर पर एक कॉलोनी बना रहे थे। बॉबी अंसारी का दूसरा नाम कमरूजमा भी है, जो शाहीन के ही गाँव में रहता है।

शिकायत में पीड़ित ने आगे बताया कि जिस जगह बॉबी अंसारी अवैध कॉलोनी बनवा रहा है, उसी के बगल श्मशान घाट है। यहाँ पीड़ित परिवार व आसपास के मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है। आरोप है कि बॉबी अंसारी और शाहनवाज ने श्मशान घाट पर भी अवैध ढंग से कब्ज़ा करने के लिए उस पर JCB मशीन चलवा दी। इस हरकत की वजह से वहाँ बनी कई समाधियाँ उखड़ गईं। आरोपितों द्वारा श्मशान घाट में बने पेड़ों को भी उखाड़ दिया गया। बॉबी अंसारी और शहनवाज की मंशा श्मशान के बीचो-बीच से रास्ता निकालने की बताई जा रही है।

पीड़ित दलित संजय कुमार ने बताया कि बॉबी अंसारी और शाहनवाज की इस हरकत से उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। श्मशान पर बुलडोजर चलने की जानकारी मिलते ही संजय के साथ प्रेमचंद, जितेंद्र, बृजेन्द्र और मुकेश आदि कई अन्य लोग ऐसा न करने की मिन्नत लेकर बॉबी अंसारी के पास गए। आरोप है कि तब बॉबी ने पीड़ितों को भीमटा और च**र सहित कई अन्य जातिसूचक शब्द बोले। दोनों आरोपितों ने पीड़ितों पर गोलियाँ भी चला दीं। जैसे-तैसे पीड़ित अपनी जान बचा कर वहाँ से लौटे।

सहारनपुर के एडिशनल एसपी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची और दोनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। दोनों के अतिरिक्त कुछ अन्य अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है, जिनकी तलाश की जा रही है। सभी पर IPC की धारा 297, 307, 323, 504 और 506 के अतिरिक्त SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने पीड़ित संजय कुमार से बात की। उन्होंने बताया कि सड़क दूधली गाँव मुस्लिम बाहुल्य है, जहाँ दलित समुदाय के लोगों की आबादी 40% के आसपास है। बनाई जा रही अवैध कॉलोनी का नाम ‘शाह कॉलोनी’ दिया गया था। उन्होंने बताया कि JCB चलने से कुछ नए शव बाहर आ गए थे, जिनके माँस कुत्ते नोच कर खा रहे थे। पीड़ित ने पुलिस कार्रवाई से खुद को संतुष्ट बताया है।

क्या है लैंड जिहाद

लैंड जिहाद इस समय एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है, जिसकी वजह से कई बार साम्प्रदायिक तनाव जैसी घटनाएँ हुई हैं। हाल ही में हल्द्वानी हिंसा इसका एक बदतर उदाहारण है। इसमें मुस्लिम पक्ष पर सरकारी या अन्य समुदायों की जमीनों पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगता है। कई बार यह कब्ज़ा इबादतगाहों आदि के माध्यम से भी होता है, जिसमें मजार और दरगाह आदि प्रमुख हैं। ऑपइंडिया द्वारा नेपाल सीमा पर इसी प्रकार के लैंड जिहाद का खुलासा किया गया था।