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DMK की फंडिंग करता था ड्रग तस्कर जाफर सादिक, उदयानिधि को दिए थे पैसे,पूछताछ में किया खुलासा: रिपोर्ट

₹2000 करोड़ के ड्रग रैकेट का सरगना और DMK का पूर्व पदाधिकारी जाफर सादिक अब NCB की गिरफ्त में है। उसने पूछताछ में बताया है कि वह तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK को फंडिंग करता था। उसने खुलासा किया है कि उसने पार्टी के लिए पैसे CM स्टालिन के और राज्य सरकार में मंत्री उदयानिधि स्टालिन को दिए थे। यह खुलासा उसने NCB की पूछताछ में किया है।

इंडिया टुडे को सूत्रों ने बताया है कि ड्रग्स तस्करी के सरगना जाफर सादिक ने NCB के सामने खुलासा किया है वह मंत्री उदयानिधि स्टालिन से मिला था। सादिक ने कबूल किया है कि उसने ₹7 लाख उदयानिधि स्टालिन दिए थे। इसमें से ₹5 लाख की सहायता बाढ़ के पीड़ितों के लिए थी। इसके अलावा ₹2 लाख का फंड DMK के लिए था।

सादिक के इस खुलासे के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि जाँच एजेंसी उदयानिधि स्टालिन को पूछताछ के लिए बुला सकती है। इस बात की भी जाँच की जाएगी कि जो पैसा उसने उदयानिधि को दिया, वह कहीं ड्रग तस्करी से तो नहीं कमाया गया था। इस मामले में पैसे के लेनदेन की जाँच अब ED से करवाए जाने की योजना है।

गौरतलब है कि फरवरी, 2024 में दिल्ली पुलिस और NCB ने एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करके दिल्ली से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पता चला था कि इस पूरे रैकेट का सरगना तमिलनाडु का रहने वाला जाफ़र सादिक है जो कि सत्ताधारी DMK का पदाधिकारी था।

वह एक फिल्म निर्माता भी है। सादिक की तमिलनाडु CM स्टालिन और उनके बेटे उदयानिधि के साथ तस्वीरें भी सामने आई थी। सादिक इस खुलासे के बाद से ही फरार था। एजेंसियाँ उसकी तलाश कर रही थीं। उसे कल (9 मार्च, 2024) को जयपुर के एक होटल से एजेंसी ने पकड़ा था।

दिल्ली में मारे गए इस छापे में स्यूडोफेड्राइन नाम की एक ड्रग बरामद हुई थी। सामने आया था कि यह रैकेट इस ड्रग को अलग अलग खाने के सामान में छुपा कर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेज रहा था, जहाँ इसकी कीमत करोड़ों में है। यह ड्रग समुद्र के रास्ते भेजी जाती थी।

यह भी सामने आया था कि बीते तीन वर्षों में 3500 किलो से अधिक ड्रग इन देशों को भेजी जा चुकी है। अब तक 45 बार इन देशों ड्रग भेजी गई थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजर में कीमत कम से कम ₹2000 करोड़ बताई जा रही थी। इस पूरे रैकेट के तार सादिक से जुड़े थे।

CM स्टालिन के साथ दिखा था जाफ़र सादिक

जाफ़र सादिक एक तमिल फिल्म निर्माता है। वह अब तक 4-5 फिल्म बना चुका है। उसने एक फिल्म ‘मंगाई’ बनाई थी। इसका एक गाना उदयानिधि की पत्नी के हाथों लॉन्च किया गया था। इससे पहले वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी मिला था। वह सीएम स्टालिन से 17 दिसम्बर 2023 को मिला था। सादिक ने इस दौरान उन्हें ₹10 लाख चेक सौंपा था। यह चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। यह दान उसने तूफ़ान मिचौन्ग के बाद दिया था।

वह सिर्फ सीएम स्टालिन से ही नहीं बल्कि उनके बेटे और तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयानिधि स्टालिन से भी मिला था। उन्हें इसने ₹2 लाख का चेक सौंपा था, जो मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। इस दान को लेकर उदयानिधि ने सादिक की प्रशंसा में एक पोस्ट भी लिखा था, वह अब डिलीट कर दिया गया है।

DMK का पदाधिकारी था जाफ़र सादिक

जाफ़र सादिक तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK से जुड़ा हुआ था और इसकी NRI विंग का मैनेजर था। उसे ड्रग आरोपों के बाद पार्टी ने निकाल दिया गया था उसकी कई DMK सांसदों और विधायकों के साथ फोटो हैं।

DMK के पदाधिकारी के ड्रग तस्करी रैकेट का सरगना होने की जानकारी के बाद राज्य का विपक्ष DMK पर हमलावर है। वह इस मामले में उच्च स्तरीय जाँच की माँग कर रहा है।

CAA विरोधी PFI की रैली में आया था जिस TMC MP अबू ताहेर खान का नाम, उसे ममता बनर्जी से फिर से दिया टिकट, कहा – नहीं लागू होने दूँगी NRC

ममता बनर्जी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में टीएमसी की सबसे बड़ी रैली का आयोजन किया। इसी रैली में उन्होंने इंडी गठबंधन को पीछे छोड़ते हुए पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों के लिए टीएमसी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। इस लिस्ट में एक नाम ऐसा है, जिसका नाम पीएफआई जैसी देश विरोधी संस्थाओं से रहा है, जो लगातार सीएए का विरोध करता रहा है। पीएफआई ने पश्चिम बंगाल की रैली में इस सांसद के आने की भी घोषणा की थी। ये सांसद है मुर्शिदाबाद का अबू ताहेर खान। उसे टीएमसी ने एक बाद फिर से मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।

ममता बनर्जी ने कोलकाता की रैली में घोषणा की है कि वो पश्चिम बंगाल में एनआरसी नहीं लागू होने देंगी और न ही राज्य में किसी को डिटेंशन कैंप में भेजा जाएगा। हकीकत ये है कि अभी एनआरसी लागू करने को लेकर सरकार ने कोई आधिकारिक तारीख नहीं घोषित की है, लेकिन ममता बनर्जी लोगों को सीएए और एनआरसी का डर दिखा रही हैं। खास बात ये है कि मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट पर जिस अबू ताहेर खान को फिर से लोकसभा भेजने की तैयारी की जा रही है, वो सीट बांग्लादेश से सटी है और माना जाता है कि यहाँ अवैध रूप से आकर बसे बांग्लादेशियों की काफी तादात है।

अबू ताहेर खान 2018 में टीएमसी में शामिल हुआ था। और साल 2019 में वो मुर्शिदाबाद से लोकसभा सांसद बना। ताहेर खान नावोदा विधानसभा सीट पर 2001 से कॉन्ग्रेस का विधायक था और चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुका था। साल 2020 में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई(तब बैन लगाने की तैयारी चल रही थी) ने देश भर में सिटिजनशिप एमेंडमेंड एक्ट (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किए थे और हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया था। उसने पश्चिम बंगाल में सीएए विरोधी रैली में मुर्शिदाबाद के टीएमसी सांसद अबू ताहेर खान के आने का भी ऐलान किया था। हालाँकि अबू ताहेर खान ने सीएए का विरोध कर रहे पीएफआई के विरोध पूरे देश में चल रही पुलिसिया कार्रवाई को देखते हुए सामने से इस रैली में शामिल होने से इनकार कर दिया था।

अब भी वो मीडिया रिपोर्ट्स इंटरनेट पर मौजूद हैं, जिसमें पीएफआई के पदाधिकारी ने कहा था कि अबू ताहेर खान पीएफआई की रैली में शामिल होगा।

पहले भी विवादों में घिरा रहा है ताहेर खान

अबू ताहेर खान पहले भी विवादों में घिरा रहा है। वो टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा से तनाव की वजह से सुर्खियाँ पा चुका है, तो अपनी गाड़ी से 6 साल की बच्ची को रौंदने की वजह से भी। उसने पीड़ित पर ही एक्सीडेंट का दोष मढ़ दिया था। ये घटना नवंबर 2022 की है। उसे पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी हिंसा से जुड़े मामले में सीबीआई ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था।

मुर्शिदाबाद बांग्लादेश से सटी सीट, मुस्लिम लीग भी जीत चुकी है चुनाव, कभी हिंदू नहीं जीता

मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट में 60 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिमों की है। ये सीट बांग्लादेश से सटी हुई है। सीमा के दूसरी ओर बांग्लादेश का राजशाही शहर पड़ता है। मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट का इतिहास है कि यहाँ से किसी हिंदू प्रत्याशी को कभी जीत मिली ही नहीं। इस सीट पर इंडियन नेशनल मुस्लिम लीग तक जीत दर्ज कर चुकी है। अबू ताहे खान इस बार फिर से टीएमसी का कैंडिडेट है, जिसके सामने बीजेपी ने गौरी शंकर घोष को मैदान में उतारा है।

शिवलिंग पर कंडोम वाला फोटो पोस्ट किया तो मिला TMC से लोकसभा टिकट, सायोनी घोष को बनाया गया जादवपुर से उम्मीदवार

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (10 मार्च, 2024) पश्चिम बंगाल के लिए लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। CM ममता की पार्टी ने बंगाल के जादवपुर ने अभिनेत्री सायोनी घोष को उम्मीदवार बनाया है। सायोनी घोष इससे पहले शिवलिंग पर भद्दा फोटो डाल कर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचा चुकी हैं।

TMC ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। इस सूची में जादवपुर सीट से अभिनेत्री सायोनी घोष का भी नाम है। सायोनी को यहाँ अभिनेत्री मिमी चक्रबर्ती की जगह पर उतारा गया है। चक्रबर्ती ने सांसद पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। सायोनी की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद उनके पुराने कारनामे सामने आए हैं।

सायोनी के एक्स (पहले ट्विटर) पर 2015 में किए गए एक हिन्दू विरोधी ट्वीट को याद दिलाया जा रहा है। फरवरी, 2015 में सायोनी ने ट्विटर पर एक फोटो पोस्ट किया था जिसमें एक महिला हिन्दुओं के लिए आराध्य शिवलिंग पर कंडोम चढ़ाते हुए दिखती है।

सायोनी का शिवलिंग पर ट्वीट
सायोनी का ट्वीट

सायोनी ने शिवलिंग वाले इस अपमानजनक ट्वीट पर लिखा था, “‘Gods cudnt have been more useful’ (भगवान इससे ज्यादा उपकारी नहीं हो सकते)। उनके इस ट्वीट को लेकर काफी बवाल मचा था। यह ट्वीट 2021 में दुबारा वायरल हो गया था। सायोनी पर इस ट्वीट के कारण FIR भी करवाई गई थी।

सायोनी घोष ने लोगों के विरोध को दबाने के लिए तर्क दिया था कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो चुका था, इसीलिए किसी और ने यह ट्वीट किए। सायोनी ने दावा किया था कि उन्हें अपना अकाउंट 2017 के बाद वापस मिल सका। हालाँकि, लोगों ने उनके द्वारा इसी अवधि में किए गए निजी ट्वीट भी दिखा दिए और प्रश्न पूछा कि भला कोई हैकर ऐसे ट्वीट क्यों करेगा। लोगों ने उनके फिल्म सम्बंधित ट्वीट भी सामने रख कर सायोनी से प्रश्न पूछे थे।

सायोनी के खिलाफ भाजपा नेता और त्रिपुरा तथा मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने शिकायत भी दर्ज करवाई थी। उन्होंने कहा था कि वह एक शिव भक्त हैं और सयानी के ट्वीट से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। सायोनी के विरुद्ध गुवाहाटी में भी एक शिकायत दर्ज करवाई गई थी।

सायोनी को लोकसभा टिकट दिए जाने के बाद TMC पर प्रश्न उठ रहे हैं। हालाँकि, सयोनी के यह ट्वीट सामने के मात्र 2 महीने बाद मार्च 2021 में ही TMC ने उन्हें इनाम दिया था और आसनसोल दक्षिण से विधानसभा उम्मीदवार बनाया था। वह भाजपा की अग्निमित्रा पॉल से चुनाव हार गई थीं। सायोनी पश्चिम बंगाल में युवा तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष भी हैं।

सायोनी को लोकसभा टिकट मिलने के बाद लोग प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर हिन्दू धर्म पर अपमानजनक तस्वीर डालने के बाद भी उन्हें उम्मीदवार क्यों बनाया जा रहा है।

‘जय श्री राम’ नारे पर भड़के कॉन्ग्रेसी, किया हमला… गुजरात के बारडोली में राहुल गाँधी की बैठक रद्द, बिना सभा किए रवाना

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ लेकर मणिपुर से निकले राहुल गाँधी गुजरात पहुँच चुके हैं। यह यात्रा रविवार (10 मार्च, 2024) को उत्तरी गुजरात से चल कर सूरत के बारडोली पहुँची है। यहाँ राहुल गाँधी को विरोध का सामना करना पड़ा। राहुल गाँधी की इस यात्रा में हिंदू संगठन ‘श्री राम सेना’ के कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’ और ‘जो राम का नहीं, वो हमारे किसी काम का नहीं’ के नारे लगाए। मिली जानकारी के मुताबिक इस नारेबाजी के बाद राहुल गाँधी की बैठक रद्द कर दी गई और वो बारडोली से बिना सभा किए व्यारा के लिए रवाना हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार की सुबह राहुल गाँधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान ऐतिहासिक ‘स्वराज आश्रम’ का दौरा किया। जब वो यहाँ से लौट रहे थे तो स्थानीय हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने रास्ते में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। इसी दौरान राहुल गाँधी की यात्रा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी किया गया। जय श्री राम के नारे सुन कर राहुल गाँधी के साथ चल रहे कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। वो नारे लगा रहे लोगों के बीच पहुँच गए और उनको रोकने की कोशिश करने लगे।

दोनों पक्षों के आमने-सामने आ जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। हल्की झड़प की भी खबरें हैं। राहुल गाँधी की यात्रा में बारडोली में एक सार्वजनिक बैठक प्रस्तावित थी। यह बैठक लिम्डा चौक पर प्रस्तावित थी। हालाँकि हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं के विरोध की वजह से यह बैठक अचानक रद्द कर दी गई। इसके बाद राहुल गाँधी अपनी यात्रा लेकर सीधे व्यारा के लिए निकल गए।

हमारे राजा राम हैं, उनके विरोधी का हम करेंगे विरोध

ऑपइंडिया ने राहुल गाँधी की यात्रा का विरोध करने वाले श्री राम सेना संगठन के पदाधिकारी संजय पटेल से बात की। उन्होंने हमसे कहा, “हमने राहुल गाँधी का विरोध किया है। जो राम का नहीं वह किसी काम का नहीं। राहुल गाँधी कहते हैं कि मंदिर जाने से किसी को रोजगार नहीं मिलेगा, वह और उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी पहले से ही राम मंदिर के विरोध में खड़ी है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा कर कॉन्ग्रेस ने अपनी मानसिकता जगजाहिर कर दी है।”

संजय पटेल ने आगे कहा, “राहुल गाँधी युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। अगर वे हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करेंगे तो हम भी हमेशा उनका विरोध करेंगे। भगवान राम हमारे राजा हैं। उनमे हमारे अटूट आस्था है। हम किसी भी हाल में उनकी खिलाफत बर्दाश्त नहीं करने वाले।”

संजय पटेल ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर अपने साथियों और सहयोगियों पर हमला करने का भी आरोप लगाया है। बकौल संजय कॉन्ग्रेस ने हमेशा सरदार पटेल को हेय दृष्टि से देखा है लेकिन बारडोली में दिखावा करने के लिए कॉन्ग्रेसी उनके ही नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कई बार कर चुके हैं राम विरोधी टिप्पणी

बताते चलें कि अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी ने कई स्थानों पर राम मंदिर पर टिप्पणी की है। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर भी सवाल खड़े किए थे। तब उन्होंने कहा था कि कार्यक्रम में गरीबों को क्यों नहीं बुलाया गया ? इसके अलावा राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था, “वह चाहते हैं कि भारत के युवा पूरे दिन अपने फोन से चिपके रहें। ‘जय श्री राम’ का जाप करें और भूख से मर जाएँ।” राहुल के इस बयान का काफी विरोध हुआ था।

क्रिकेटर यूसुफ पठान को TMC ने अधीर रंजन चौधरी के सामने उतारा, नहीं किया बंगाल में कॉन्ग्रेस से गठबंधन: मुश्किल हुई कॉन्ग्रेसी नेता की राह

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (10 मार्च, 2024) लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल के अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। TMC ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषणा कर दी है। TMC ने क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से टिकट दिया है।

TMC के सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम क्रिकेटर यूसुफ पठान का ही है। उन्हें जिस बहरामपुर सीट से टिकट दिया गया है, उस सीट से अभी कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी सांसद हैं। वह लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता भी हैं। युसूफ पठान के उतरने के बाद चौधरी की राह मुश्किल हो गई है।

यूसुफ पठान का बंगाल से सीधा कोई नाता नहीं है, वह गुजरात के रहने वाले हैं। हालाँकि, TMC ने बहरामपुर सीट से उन पर दाँव खेला है। अधीर रंजन चौधरी इस सीट से 1999 से लगातार सांसद हैं। वह इस सीट से लगातार 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 का चुनाव जीत चुके हैं। अधीर रंजन चौधरी स्वयं बहरामपुर के ही रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले INDI गठबंधन के अंतर्गत कॉन्ग्रेस और TMC में बंगाल में सीट समझौते की बातें सामने आई थीं। हालाँकि, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ने वाली है। दूसरी तरफ अधीर रंजन चौधरी, जो कि बंगाल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं, ने भी TMC से गठबंधन को नकार दिया था।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चौधरी 2024 लोकसभा चुनाव भी इसी सीट से लड़ेंगे क्योंकि कॉन्ग्रेस ने बंगाल के लोकसभा उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। लेकिन TMC से गठबंधन नहीं होने के बाद उनका यहाँ से प्रत्याशी बनना तय माना जा रहा है।

उनके प्रत्याशी बनने की राह में TMC से गठबंधन एक रोड़ा था क्योंकि कहा जा रहा था कि यदि दोनों पार्टियाँ मिल कर चुनाव लड़ती हैं तो उनकी बहरामपुर सीट TMC के खाते में जा सकती है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि यहाँ TMC अपने उम्मीदवार यूसुफ पठान को लड़ाएगी।

चौधरी के लिए यह चुनाव जीतना अब काफी कठिन होगा क्योंकि एक तो यूसुफ पठान को एक प्रसिद्ध क्रिकेटर होने का फायदा मिलेगा और साथ ही यहाँ मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सीट पर 52% मुस्लिम आबादी है, जिनके TMC के उम्मीदवार यूसुफ पठान के साथ जाने के कयास लग रहे हैं।

अधीर का ग्राफ भी चुनाव दर चुनाव गिरा है। 2009 लोकसभा चुनाव में जहाँ वह कुल वोटों का 56% वोट पाए थे वहीं 2014 में यह घट कर लगभग 50% रह गया। 2019 में इसमें और भी गिरावट आई और यह 45% के आसपास आ गया। उनसे हारने वाले TMC के उम्मीदवार अपूर्ब सरकार को 39% वोट मिले थे। यानी अधीर और अपूर्ब के बीच मात्र 6% का अंतर था।

2019 के चुनाव में भाजपा ने भी यहाँ 11% वोट हासिल किए थे। भाजपा यहाँ अधीर के वोटबैंक में सेंध लगा सकती है। भाजपा ने इस बार यहाँ से निर्मल कुमार साहा को उम्मीदवार बनाया है। अगर भाजपा अधीर के वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल होती है और चुनाव त्रिकोणीय हो जाता है तो अधीर को समस्या हो सकती है।

TMC की सूची में महुआ मोइत्रा का नाम भी शामिल है। वह कृष्णानगर से चुनाव लड़ेंगी। उन्हें दिसम्बर 2023 में लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। उन पर पैसे और गिफ्ट लेकर प्रश्न पूछने का आरोप सिद्ध हुआ था। इसके अलावा शत्रुघन सिन्हा को पार्टी ने आसनसोल से उम्मीदवार बनाया है।

INDI गठबंधन में अपनी ढपली-अपना राग: कोलकाता से मुंबई तक टूट रही साझेदारी, ममता बनर्जी ने भी सभी 42 सीटों पर किया उम्मीदवारों के नाम का ऐलान, देखती रह गई कॉन्ग्रेस

कोलकाता से मुंबई तक INDI गठबंधन जो कभी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा था, वो पूरी तरह से टूट चुका है। केरल से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल तक गठबंधन के परखच्चे उड़ चुके हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने कॉन्ग्रेस की सभी उम्मीदों को धराशाई करते हुए सभी 42 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है।

राजनीति में खास तौर से चुनावों के पहले बहुत कुछ उलटफेर देखा जाता है। पार्टियाँ अपनी सुविधा के हिसाब से पाले बदलती हैं। एक तरफ तो एनडीए दिन प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है, और इंडी गठबंधन के ही साथियों को तोड़ता जा रहा है, तो दूसरी तरफ इंडी गठबंधन अपने साथियों को संभाल नहीं पा रही है। इंडी गठबंधन की ममता बनर्जी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वो सभी 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगी। कॉन्ग्रेस उम्मीद लगाए बैठी थी कि आखिर तक वो ममता बनर्जी को मना ही लेगी। लेकिन ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस के आखिरी सपने को भी ध्वस्त कर दिया है।

वैसे, ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी की सीट पर स्टार पॉवर उतारा है। एक तरफ तो आईपीएल चल रहा है, तो दूसरी तरफ केकेआर के लिए लंबे समय तक खेले क्रिकेटर यूसुफ पठान को अधीर रंजन की सीट पर उतार दिया गया है। वहीं, महुआ मोइत्रा को एक बार फिर से ममता बनर्जी ने मैदान में उतारा है, जो कुछ माह पहले ही घूसकांड के चलते लोकसभा की सदस्यता गवाँ बैठी थी।

इंडी गठबंधन में आज का सच यह है कि लोकसभा चुनाव सामने है और बड़े हिस्सेदार सीटों पर बातचीत को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं। वे इस मामले पर एकमत भी नहीं दिखते। एक भी दल अपने प्रभाव वाले इलाके में गठबंधन के किसी दूसरे सहयोगी को एक भी सीट देने को राजी नहीं दिखाई दे रहे हैं। लोक सभा में मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस को गठबंधन से जुड़े दल बहुत भाव नहीं दे रहे हैं। महाराष्ट्र में भी यही हाल है। एनसीपी आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना एनसीपी और कॉन्ग्रेस पर आँखे तितेर रही है। कुल मिलाकर परसेप्शन बन चुका है कि इंडी गठबंधन खंड-खंड होकर बिखर गया है।

इंडी गठबंधन की हालत ये है कि वो आपस में ही लड़कर चूर-चूर हो जा रहे हैं। उसी का नतीजा है कि नीतीश फिर से एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन बैठे हैं। इसी का परिणाम है कि बाला साहब ठाकरे की शिवसेना फाड़ हो गई तो शरद पवार की बनाई पार्टी एनसीपी आज उन्हीं के सामने उनकी नहीं रही।

महाराष्ट्र में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी भले ही नहीं है, लेकिन वो अपने सहयोगियों को साधना जानती है, यही वजह है कि देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम होकर भी महाराष्ट्र में एनडीए को संभाले हुए हैं, तो बिहार में राम विलास पासवान की पार्टी दो फाड़ होकर भी एनडीए का ही हिस्सा है। वहीं, एनडीए ने आँध्र प्रदेश में सीटों का बंटवारा कर लिया है।

इंडी गठबंधन का सनातन विरोध से लेकर हर पैंतरा फेल

इंडी गठबंधन के नेता एनडीए और बीजेपी को रोकने के लिए हर रोज ऊल-जलूल बयानबाजी पर उतर आए हैं। भगवान राम से लेकर हिंदुत्व तक को निशाना बनाया जा रहा है। इसके बावजूद एनडीए लगातार न सिर्फ मजबूत होती जा रही है, बल्कि जनता में भी सकारात्मक मैसेज जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी विकास की भी बातें कर रही है, तो चुनावी मैदान में सबसे अहम बात अपने सहयोगियों को साधे रखने की कला में भी बीजेपी अपनी ताकत दिखा रही है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार में आधा दर्जन से अधिक सहयोगियों के होने के बावजूद एनडीए में सबकुछ सही दिख रहा है।

वहीं, इंडी गठबंधन में शामिल दल अपने निहित स्वार्थों के चक्कर में न सिर्फ ऊल-जलूल फैसले कर रहे हैं, बल्कि अपनी माँगों को लेकर एकजुट भी होते नहीं दिख रहे हैं। अब ये साफ हो चुका है कि पंजाब में इंडी गठबंधन आपस में ही लड़ रहा है। केरल में भी इंडी गठबंधन का यही हाल है। पश्चिम बंगाल में भी सबकुछ साफ हो चुका है, तो महाराष्ट्र में भी कमोवेश स्थिति ज्यादा सीटों पर कब्जे की लड़ाई में टूट की ही दिख रही है।

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के लिए 400 से अधिक सीट और बीजेपी के लिए 370 सीटों का जो लक्ष्य रखा है, उसके सामने इंडी गठबंधन की कोई हैसियत ही नजर नहीं आ रही है। संसद में यह नारा देने के बाद पीएम मोदी इसी लक्ष्य को पूरा करने को अपनी ओर से अनेक प्रयास करते देखे जा रहे हैं। वह चाहे मंदिर-मंदिर जाना हो या फिर यूएई की धरती से केरल और देश के मुसलमानों को साधने की कोशिश। देश के अंदर उनके काम का आँकड़ा उनके साथ पहले से ही है। वहीं, इंडी गठबंधन कहीं से भी टक्कर देने की हैसियत में भी नहीं दिख रही है।

मुस्लिम बहुल गाँव में दलितों के श्मशान पर चला दिया बुलडोजर, शव को नोच कर खा रहे थे कुत्ते: विरोध करने पर च**र वाली गाली, 2 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से लैंड जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ बॉबी अंसारी और शाहनवाज पर दलित समुदाय के लोगों का श्मशान घाट अवैध तौर पर कब्ज़ा करने का आरोप लगा है। विरोध करने पर पीड़ितों को न सिर्फ जातिसूचक गालियाँ दी गईं बल्कि जान से मार डालने का प्रयास भी किया गया। इस दौरान आरोपितों द्वारा गोलियाँ भी चलाई गईं। पीड़ितों ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। शनिवार (9 मार्च 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। दोनों आरोपितों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

यह घटना सहारनपुर के थानाक्षेत्र जनकपुरी की है। यहाँ के गाँव सड़क दूधली में रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के संजय कुमार ने शनिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनके गाँव के अब्दुल ने डेढ़ साल पहले अपनी 5 बीघा जमीन खान आलमपुर की शाहीन नाम की महिला को बेचा था। इसी जमीन पर बॉबी अंसारी और शाहनवाज अवैध तौर पर एक कॉलोनी बना रहे थे। बॉबी अंसारी का दूसरा नाम कमरूजमा भी है, जो शाहीन के ही गाँव में रहता है।

शिकायत में पीड़ित ने आगे बताया कि जिस जगह बॉबी अंसारी अवैध कॉलोनी बनवा रहा है, उसी के बगल श्मशान घाट है। यहाँ पीड़ित परिवार व आसपास के मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है। आरोप है कि बॉबी अंसारी और शाहनवाज ने श्मशान घाट पर भी अवैध ढंग से कब्ज़ा करने के लिए उस पर JCB मशीन चलवा दी। इस हरकत की वजह से वहाँ बनी कई समाधियाँ उखड़ गईं। आरोपितों द्वारा श्मशान घाट में बने पेड़ों को भी उखाड़ दिया गया। बॉबी अंसारी और शहनवाज की मंशा श्मशान के बीचो-बीच से रास्ता निकालने की बताई जा रही है।

पीड़ित दलित संजय कुमार ने बताया कि बॉबी अंसारी और शाहनवाज की इस हरकत से उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। श्मशान पर बुलडोजर चलने की जानकारी मिलते ही संजय के साथ प्रेमचंद, जितेंद्र, बृजेन्द्र और मुकेश आदि कई अन्य लोग ऐसा न करने की मिन्नत लेकर बॉबी अंसारी के पास गए। आरोप है कि तब बॉबी ने पीड़ितों को भीमटा और च**र सहित कई अन्य जातिसूचक शब्द बोले। दोनों आरोपितों ने पीड़ितों पर गोलियाँ भी चला दीं। जैसे-तैसे पीड़ित अपनी जान बचा कर वहाँ से लौटे।

सहारनपुर के एडिशनल एसपी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची और दोनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। दोनों के अतिरिक्त कुछ अन्य अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है, जिनकी तलाश की जा रही है। सभी पर IPC की धारा 297, 307, 323, 504 और 506 के अतिरिक्त SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने पीड़ित संजय कुमार से बात की। उन्होंने बताया कि सड़क दूधली गाँव मुस्लिम बाहुल्य है, जहाँ दलित समुदाय के लोगों की आबादी 40% के आसपास है। बनाई जा रही अवैध कॉलोनी का नाम ‘शाह कॉलोनी’ दिया गया था। उन्होंने बताया कि JCB चलने से कुछ नए शव बाहर आ गए थे, जिनके माँस कुत्ते नोच कर खा रहे थे। पीड़ित ने पुलिस कार्रवाई से खुद को संतुष्ट बताया है।

क्या है लैंड जिहाद

लैंड जिहाद इस समय एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है, जिसकी वजह से कई बार साम्प्रदायिक तनाव जैसी घटनाएँ हुई हैं। हाल ही में हल्द्वानी हिंसा इसका एक बदतर उदाहारण है। इसमें मुस्लिम पक्ष पर सरकारी या अन्य समुदायों की जमीनों पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगता है। कई बार यह कब्ज़ा इबादतगाहों आदि के माध्यम से भी होता है, जिसमें मजार और दरगाह आदि प्रमुख हैं। ऑपइंडिया द्वारा नेपाल सीमा पर इसी प्रकार के लैंड जिहाद का खुलासा किया गया था।

130 लोगों के सामने ‘नंगा’, रूम से लेकर बरामदे तक घसीट-घसीट कर मारा: 97 लोगों से पूछताछ, जे एस सिद्धार्थन की मौत में SFI के गुंडों की रूह कँपाने वाली हर डिटेल

केरल के वायनाड के एक मेडिकल कॉलेज में फरवरी माह में एक छात्र जे एस सिद्धार्थन की मौत के विषय में नए खुलासे हुए हैं। छात्र की मौत हॉस्टल में रैगिंग के दौरान प्रताड़ना के बाद हुई थी। यह रैगिंग लेने वालों में वामपंथी छात्र संगठन SFI के गुंडे भी शामिल थे। अब इस विषय में एंटी रैगिंग कमिटी की रिपोर्ट आई है।

कमिटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि सिद्धार्थन 15 फरवरी, 2024 को कॉलेज से घर के लिए निकल गया था। हालाँकि, उसे फोन करके वापस हॉस्टल बुलाया गया। सिद्धार्थन 16 फरवरी की सुबह हॉस्टल लौट आया। इसके बाद प्रताड़ना का दौर चालू हुआ।

रिपोर्ट में बताया गया है कि उसे दूसरे हमलावर छात्रों द्वारा कॉलेज के पास एक पहाड़ी पर ले गया गया, यहाँ उसको बुरी तरीके से मारा पीटा गया। उसको मारने पीटने के लिए तार, बेल्ट और ऐसी ही चीजों का उपयोग किया गया। इसके बाद उसे वापस पकड़ कर हॉस्टल लाया गया।

यहाँ कमरा नम्बर 21 में उसे दुबारा प्रताड़ना दी गई। उसके पेट और पीठ पर मुक्के मारे गए। कई छात्र उसे काफी देर तक पीटते रहे। सिद्धार्थन को इसके बाद सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने को कहा गया। सिद्धार्थन पर आरोप लगाया गया कि उसने एक लड़की से बदतमीजी की थी।

उसे हॉस्टल में मात्र एक अंडरवियर में लाया गया और सबके सामने माफ़ी मँगवाई गई। इसके बाद उसकी हॉस्टल में परेड निकाली गई। इस परेड के दौरान भी उस पर हमले हुए और प्रताड़ना चलती रही। सबके बीच में सिद्धार्थन को पीटा गया। इसके बाद वापस सिद्धार्थन को हॉस्टल के अंदर लाकर प्रताड़ना दी गई।

सिद्धार्थन को इतना मारा गया कि उसके पेट में दर्द उठा। कुछ छात्रों ने उसकी जाँच के बाद कुछ दवा दी। बताया गया कि सिद्धार्थन को खाना तक नहीं दिया गया था। इसके बाद 18 फरवरी को सिद्धार्थन का शव एक बाथरूम में लटकते हुए पाया गया। इस बात की जानकारी डीन को भी दी गई।

कॉलेज और हॉस्टल प्रशासन ने इस पर कार्रवाई करने के बजाय मामला छुपाने का प्रयास किया। कमिटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि सिद्धार्थन को प्रताड़ना देते हुए 130 छात्रों ने देखा। 97 छात्र और शिक्षक इस विषय में कमिटी के सामने पेश हुए। हालाँकि, कई लोग पूरी जानकारी देने बच रहे हैं।

इस मामले का मुख्य आरोपित शिंजो जॉनसन है जिसने सिद्धार्थन को सबसे ज्यादा प्रताड़ना दी। इस मामले में 18 छात्रों को आरोपित बनाया गया था। यह सभी पुलिस की गिरफ्त में हैं। इनमे से कुछ वामपंथी छात्र संगठन SFI के सदस्य थे। सिद्धार्थन के पिता का कहना है कि उनके बेटे को मारा गया है।

उन्होंने पुलिस पर धीमी कार्रवाई का आरोप भी लगाया था। सिद्धार्थन के माता पिता केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से भी मिले थे। उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग की थी। CM विजयन ने कहा है कि मामले में राज्य की पुलिस कार्रवाई कर रही है लेकिन राज्य सीबीआई को जाँच सौंपेगा।

हर माँ अपने बेटे को कसम खिलाए कि वोट केजरीवाल को ही देना: दिल्ली के CM की नई राजनीति, कभी खाई थी अपने बच्चों की झूठी कसम

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वोट पाने के अलग तरकीब अपनाई है। अरविंद केजरीवाल अब महिलाओं से कह रहे हैं कि वो ‘मोदी-मोदी’ करने वाले अपने अपने पतियों को खाना ही देने से मना कर दिया है। केजरीवाल ने कहा कि महिलाएँ अपने पतियों को तब तक रात का खाना न दें, जबतक वो मुझे (अरविंद केजरीवाल को) वोट देने के लिए मान न जाएँ। महिलाएँ अपने पतियों को कसम दिलाएँ और तब तक खाना न दें, जबतक वो आप को वोट देने के लिए मान न जाएँ। माँएं अपने बेटों को कसम दिलाएँ कि वो मोदी को वोट न दें, केजरीवाल को वोट दें।

आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने दिल्ली में ‘महिला सम्मान समारोह’ नामक एक टाउनहॉल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत से लोग पीएम मोदी का नाम जप रहे हैं, लेकिन आपको इसे ठीक करना होगा। केजरीवाल ने महिलाओं कहा कि अगर आपके पति मोदी का नाम जपते हैं, तो उन्हें बताएँ कि आप उन्हें रात का खाना नहीं देंगी।

सीएम केजरीवाल ने महिलाओं से कहा कि वे अपने परिवार के सदस्यों से कसम खाने को कहें कि वे उनका और आप का समर्थन करेंगे। उन्होंने महिलाओं से यह भी कहा कि वे बीजेपी का समर्थन करने वाली अन्य महिलाओं को बताएँ कि केवल आपका भाई केजरीवाल ही आपके साथ खड़ा होगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सोचकर घर नहीं बैठना, वे बहुत बदमाश हैं। क्या पता ईवीएम में कुछ कर रखा हो लेकिन अगर उससे 10 फीसदी वोट इधर-उधर हों तो हमें 20 फीसदी ज्यादा के लिए काम करना है। अब यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने पतियों, भाइयों, पिता और इलाके के अन्य लोगों को उस व्यक्ति को वोट देने के लिए मनाएँ जो उनके लाभ के लिए काम कर रहा है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि अब तक महिलाओं को सशक्त बनाने के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही थी। केजरीवाल से पूछा, पार्टियाँ किसी महिला को कोई पद देती हैं और कहती हैं कि महिलाएं सशक्त हो गई हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि महिलाओं को पद नहीं मिलना चाहिए, उन्हें बड़े पद और टिकट मिलने चाहिए, उन्हें सब कुछ मिलना चाहिए। लेकिन इससे केवल दो या चार महिलाओं को ही फायदा होता है। बाकी महिलाओं को क्या मिलता है।

1000 रुपए का भी दिया वास्ता

दिल्ली सरकार द्वारा अपने 2024-25 के बजट में 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को 1,000 रुपए की मासिक राशि प्रदान करने की योजना की घोषणा के बाद महिलाओं के साथ बातचीत करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। महिलाओं को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि मैंने आपकी बिजली मुफ्त कर दी है, उनकी बस टिकट मुफ्त कर दी है और अब मैं महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये दे रहा हूँ। बीजेपी ने उनके लिए क्या किया है? फिर बीजेपी को वोट क्यों दें? इस बार केजरीवाल को वोट दें।

समाज को बचाने के लिए वीर देते थे खुद का बलिदान, महान भारतीय परंपरा का बेंगलुरु में मिला साक्ष्य: बुरी शक्तियों को भगाने के लिए होता था बलिदान

13वीं और 14वीं शताब्दी में बेंगलुरु के वीर समाज को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए खुद का बलिदान देते थे। वह स्वयं का वध करके समाज का उद्धार करते थे। इन्हें समाज में नायक के तौर पर देखा जाता था। यह सभी जानकारियाँ इन बलिदानियों की मूर्तियाँ मिलने के बाद हो रहे एक शोध में सामने आई हैं।

वर्तमान में बेंगलुरु में द मिथिक सोसायटी नाम की एक संस्था यहाँ से प्राप्त अलग अलग मूर्तियों को 3D डिजिटल तरीके से संरक्षित कर रही है। इन्हें बेंगलुरु के अलग अलग हिस्सों से 14 ऐसी मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं जिनमें से स्वयं के बलिदान देते हुए लोगों को प्रदर्शित किया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि प्राचीन बेंगलुरु में यह चलन था कि लोग समाज को बचाने के लिए खुद का बलिदान देने से नहीं कतराते थे।

डेक्कन हेराल्ड को इस शोध के मुखिया उदय कुमार ने बताया, “यह मूर्तियाँ दर्शाती हैं कि इस इलाके में खुद का बलिदान दिया जाता था। ये बलिदान अधिकांश समय समाज में व्याप्त बुराई को दूर करने के लिए दिए जाते थे। इन बलिदान को वीरतापूर्ण कार्य माना जाता था क्योंकि यह समाज या गाँव की भलाई के लिए किया जाता था। आमतौर पर, यह बड़ी समस्याओं जैसे कि सूखे को खत्म करने या फिर महामारी को सही करने के लिए दिए जाते थे।”

यह बलिदान किसी देवी देवता को प्रसन्न करने या कठिन समय में आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद अपना आभार व्यक्त करने के लिए दिए जाते थे। बलिदान के भी एक से अधिक तरीके प्रचलित थे। कुछ लोग तलवार से अपना सर धड़ से अलग कर लेते थे तो कुछ एक ऊँचाई से किसी तलवार पर कूदते थे।

बेंगलुरु के अलग अलग इलाकों में यह मूर्तियाँ मिली हैं। इनमें से कुछ मूर्तियों में सजावट भी दिखती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिनके शरीर पर गहने आदि दिख रहे हैं, वह बलिदानी राजपरिवार के सदस्य हो सकते हैं। कई मूर्तियाँ पुरातन मंदिरों के निकट पाई गई हैं। बताया गया है कि जिन लोगों ने अपने बलिदान दिए, इतिहास में उनके सम्मान में मूर्तियाँ बनाई गईं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में ऐसी मूर्तियाँ पाई गई हैं। इससे पहले 2018 में भी स्वयं का बलिदान देने सम्बंधित मूर्तियाँ कर्नाटक के ही शिवमोगा में पाई गईं थी। इनमें भी जिन लोगों को प्रदर्शित किया गया था, वह स्वयं का बलिदान देते हुए देखे गए थे। बेंगलुरु में पाई गई मूर्तियों के सम्बन्ध में शोधकर्ताओं ने बताया है कि इनकी खोज के बाद आमजनों को इनकी वीरतापूर्ण कहानियों के विषय में बताया जाएगा। इसके लिए एक डिजिटल मानचित्र भी तैयार किया गया है।