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‘जहाँ शाम के बाद आने से डरते थे लोग, वहाँ आज कंपनियाँ लगा रहीं प्रोजेक्ट’: PM मोदी ने 8 लेन के द्वारका एक्सप्रेसवे का किया उद्घाटन, रोडशो में गूँजा ‘जय श्री राम’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में द्वारका एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि द्वारका एक्सप्रेसवे नए भारत की तस्वीर है। उन्होंने ‘मोदी की गारंटी’ की बात करते हुए इसे ‘प्रगति का हाइवे’ करार दिया। इस एक्सप्रेसवे से न सिर्फ दिल्ली, बल्कि हरियाणा को भी फायदा होगा, जाम से भी मुक्ति मिलेगी। पीएम मोदी ने उद्घाटन के बाद एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया।

8 लेन का द्वारका एक्सप्रेसवे 29.5 किलोमीटर का है, जिसका 19 किलोमीटर का हिस्सा गुरुग्राम होकर गुजरता है। दिल्ली में 9 किलोमीटर का काम जून 2024 तक पूरा हो जाएगा। इसका पहला हिस्सा महिपालपुर के पास शिव मूर्ति से द्वारका तक जाता है। दूसरा हिस्सा ‘अर्बन एक्सटेंशन रोड’ (UER) से बजघेड़ा तक जाता है। तीसरा हिस्सा वहाँ से बसई रेल ओवरब्रिज को जोड़ता है जो दिल्ली-हरियाणा का बॉर्डर है। अंतिम व चौथा हिस्सा खेड़की दौला तक जाता है।

पीएम मोदी ने उद्घाटन से पहले हरियाणा के गुरुग्राम में भव्य रोडशो भी किया। ये देश का पहला एलिवेटेड एक्सप्रेसवे है। इसके चालू होने के बाद अब मात्र 25 मिनट में दिल्ली से गुरुग्राम की दूरी सड़क मार्ग से तय की जा सकेगी। नेशनल हाईवे-48 पर जाम से भी मुक्ति मिलेगी। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गुरुग्राम बाईपास तक की दूरी भी अब कम समय में पूरी होगी। अभी द्वारका एक्सप्रेसवे के हरियाणा वाले हिस्से का उद्घाटन किया गया है।

पीएम मोदी ने इस दौरान नितिन गडकरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ द्वारका एक्सप्रेसवे के मॉडल को भी देखा। एक्सप्रेसवे के किनारे खड़े लोगों ने रोडशो के दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए। प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगे श्रमिकों से भी बातचीत की। उन्होंने कुल 144 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में 9000 करोड़ रुपए की लागत आई है।

पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकारें छोटी सी कोई योजना बनाकर और छोटा सा कोई कार्यक्रम करके उसकी डुगडुगी 5 साल तक पीटती रहती थी, वहीं भाजपा सरकार जिस रफ्तार से काम कर रही है, उसमें शिलान्यास व लोकार्पण के लिए समय और दिन कम पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत बड़े विजन, बड़े लक्ष्यों का भारत है जो प्रगति की रफ़्तार से कोई समझौता नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो न छोटा सोचते हैं, न छोटे संकल्प लेते हैं, बल्कि उन्हें जो भी करना है वो विराट चाहिए, विशाल चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “2024 के अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, और इतने कम समय में 10 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण हो चुका है। ये सिर्फ वो प्रोजेक्ट्स हैं, जिसमें मैं खुद शामिल हुआ हूँ। इसके अलावा मेरे मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने भी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया है। आज जहाँ द्वारका एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ है, एक समय था, जब शाम ढलने के बाद लोग इधर आने से बचते थे। टैक्सी ड्राइवर भी मना कर देते थे कि इधर नहीं आना है। इस पूरे इलाके को असुरक्षित समझा जाता था। लेकिन आज कई बड़ी कंपनियाँ यहाँ आकर अपने प्रोजेक्ट लगा रही हैं। ये इलाका NCR के सबसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शामिल हो रहा है।”

सेक्स सीन में गीता को दिखाने वाली फिल्म को 7 अवॉर्ड, खुले मंच पर नंगे जॉन सीना… यूँ ही नहीं एलन मस्क ने ऑस्कर को कह दिया Woke, साल दर साल गिर रही गरिमा

कहा गया है – ‘अति सर्वत्र वर्जयेत्’, अर्थात कुछ भी जब बहुत ज़्यादा हो जाता है तो हानिकारक ही होता है। उदाहरण के लिए, बारिश फसलों के लिए लाभदायक है लेकिन अतिवृष्टि नहीं। इसी तरह, आजकल कुछ लोग कुछ ज़्यादा ही ‘जागरूक’ हो गए हैं। इतने ‘जागरूक’ कि किसी फिल्म में अश्वेत व्यक्ति को अच्छा दिखा दिया गया तो अवॉर्ड देने के मामले में अच्छी कहानी, निर्देशन और अभिनय वाली फिल्मों के ऊपर उसे तरजीह दे दी जाती है। इतने ‘जागरूक’, कि विमान में घूमने और फाइव स्टार होटल में रुकने वाले पर्यावरण पर ज्ञान बाँचते हैं और पूरी जनसंख्या को गाली देते हैं।

ऐसे ही लोगों के कारण आज ‘Woke’ शब्द गाली बन गया है। इसका ताज़ा इस्तेमाल दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने किया है। पहले इसकी पृष्ठभूमि समझते हैं। असल में रविवार (10 मार्च, 2024) को 96वें एकेडमी अवॉर्ड्स का आयोजन हुआ, जिसमें परमाणु बम के जनक रॉबर्ट ओपेनहाइमर के जीवन पर आधारित फिल्म ‘Oppenheimer’ को 7 पुरस्कारों से नवाजा गया। इसे कुल 13 नॉमिनेशन प्राप्त हुए थे। क्रिस्टोफर नोलन की ये फिल्म खासी विवादित रही थी।

एलन मस्क ने ऑस्कर अवॉर्ड्स की आलोचना की है। उन्होंने अपने मालिकाना हक़ वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “आजकल ऑस्कर जितने का मतलब है कि आपने वोक प्रतियोगिता जीत ली।” उनके कहने का अर्थ था कि जिस फिल्म में Wokism का जितना ज्यादा छौंक होगा, बाकी चीजों को नज़रअंदाज़ कर उसे अवॉर्ड मिलने की संभावना उतनी बढ़ जाएगी। वास्तविक मुद्दों से हट कर बनावटी मुद्दों को बढ़ा-चढ़ा कर प्रदर्शित करना ही तो Woke होने की निशानी है।

एलन मस्क ने ऑस्कर समारोह पर साधा निशाना

एलन मस्क ने कहा कि जब किसी पुरस्कार को कमजोर कर दिया जाता है तो हर कोई, यहाँ तक कि इसे जीतने वाले भी जानते हैं कि अब ये सम्मान का पात्र नहीं रह गया है। ऑस्कर हॉलीवुड ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के फ़िल्मी समाज के लिए सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड माना जाता रहा है लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इसकी गरिमा धूमिल हुई है। ‘Moonlight’ जैसी बोरिंग फिल्मों को अवॉर्ड मिलने के बाद इस पर तेज़ बहस शुरू हुई। सेक्सुअल ओरिएंटेशन, अश्वेत और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हौव्वा बना दिया गया।

विवादों में रही थी फिल्म ‘Oppenheimer’

फिल्म ‘Oppenheimer’ काफी विवादों में रही थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ‘मैनहटन प्रोजेक्ट’ के तहत विकसित किए गए ‘लॉस एलामोस लेबोरेटरी’ के डायरेक्टर अमेरिकी फिजिसिस्ट रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने जो परमाणु बम बनाया था, उसका ही इस्तेमाल कर के अमेरिका ने जापान में तबाही मचाई थी। जब दुनिया का पहला परमाणु ब्लास्ट सफल रहा था तब रॉबर्ट ओपेनहाइमर के मन में हिन्दू धर्मग्रंथ भगवद्गीता के शब्द गूँजे थे – “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, संसारों का विध्वंस करने वाला।”

फिल्म में इस अंश को जिस तरह से प्रदर्शित किया गया, उस पर लोगों ने आपत्ति जताई। फिल्म में एक सेक्स वाले दृश्य में दिखाया गया है कि अभिनेता लड़की को भगवद्गीता पढ़ने के लिए देता है। युवती पूछती है कि ये क्या है? इस पर वो बताता है कि ये संस्कृत में है। इसके बाद वो इसे पढ़ने के लिए कहता है। इसके बाद वो ग्रन्थ का वो हिस्सा पढ़ती है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने विष्णु के रूप में अर्जुन को अपना विकराल स्वरूप दिखाते हैं। इसके बाद अभिनेता युवती को आगे पढ़ने के लिए कहता है।

इस दृश्य में अभिनेता और अभिनेत्री, दोनों ही बिस्तर पर नंगे हैं। युवती को पूरी तरह न्यूड दिखाया गया है और उसके स्तन पर्दे पर दिख रहे होते हैं। आगे वो भगवद्गीता का वो श्लोक पढ़ती है, जिसे रॉबर्ट ओपेनहाइमर दोहराया करते थे। इतिहास में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि सेक्स करते समय वो गीता पढ़ते थे। एक सेक्स सीन घुसा कर उसमें भगवद्गीता को दिखाना कहाँ तक उचित था? क्या इन्हीं चीजों के लिए ‘Oppenheimer’ को सम्मानित किया गया है?

भरे समारोह में मंच पर नंगे जॉन सीना: ऑस्कर में Wokism

2024 के ऑस्कर समारोह में एक और नज़ारा देखने को मिला। WWE के रेसलर जॉन सीना बेस्ट कॉस्ट्यूम का अवॉर्ड देने के लिए मंच पर पहुँचे। इस दौरान वो पूरी तरह नग्न थे। उन्होंने एक कार्डबोर्ड से अपने प्राइवेट पार्ट को ढँक रखा था। इस दौरान हँसी-मजाक भी चलता रहा। क्या कपड़े उतार देना ही जागरूक होने की निशानी है? खुले मंच पर नंगा हो जाना ही अगर जागरूकता है तो फिर कपड़ों की ज़रूरत ही नहीं है। अजीबोगरीब हरकतों को सामान्य साबित करने की प्रक्रिया ही तो Wokism है।

यही कारण है कि एलन मस्क ने इस पुरस्कार समारोह पर निशाना साधा है। लोग अब उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वो एकेडमी अवॉर्ड्स को भी ट्विटर की तरह खरीद लें और उसमें सुधार करें। हिन्दू धर्मग्रंथ का अपमान करने वाली फिल्म को जिस तरह से अवॉर्ड दिया गया है, उसके बाद ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इस्लाम या ईसाइयत का अपमान करने वालों को सम्मानित करने की इनकी हिम्मत होती? अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में ऑस्कर का और भी बुरा हाल होगा।

भारत में बॉलीवुड भी इन्हीं चीजों से प्रेरणा लेता है। अमेरिकी फिल्मों में जिन चीजों को बढ़ावा दिया जाता है, बॉलीवुड उसकी नक़ल करता है। फिल्मों में पार्टी-पब कल्चर को दिखाना हो, पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ युवाओं को भड़काना हो, दारू-शराब-सिगरेट की लत को बढ़ावा देना हो, सेक्स-हिंसा के दृश्यों का महिमामंडन करना हो या फिर व्यभिचार को सामान्य बताना हो – बॉलीवुड हर मामले में इसी नक्शेकदम पर चलता दिखता है। यहाँ के अवॉर्ड समारोहों में भी वही फूहड़ता आ रही है।

22217 इलेक्टोरल बॉन्ड, सबकी जानकारी अलग-अलग जगह: SBI ने इसलिए माँगा था अतिरिक्त समय, सुप्रीम कोर्ट ने दिया सिर्फ 1 दिन का वक्त

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को झटका देते हुए आदेश दिया है कि 12 मार्च उसके आदेश को पूरा किया जाए और इलेक्टोरल बॉन्ड की पूरी जानकारी उसे उपलब्ध कराई जाए। यही नहीं, 15 मार्च तक इस पूरी जानकारी को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी डाला जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक आँकड़ों को सार्वजनिक न करने के लिए एसबीआई की खिंचाई भी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछला आदेश 26 दिन पहले आया था, लेकिन अब तक आपने क्या काम किया है? हालाँकि एसबीआई ने कहा कि वो कुछ छिपा नहीं रहा, बस उसे इन जानकारियों को पूरी सुरक्षा के साथ और हरेक आँकड़े के मिलान के साथ जारी करने में समय में लगेगा।

सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई ने याचिका दायर की थी, और कहा था कि उसे 30 जून 2024 तक का समय दिया जाए, ताकि वो इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सारी जानकारियाँ कोर्ट में रख सके। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही है, जिसमें चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना ,जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं। इस याचिका की सुनवाई के समय कोर्ट ने पूछा कि पिछले आदेश के 26 दिन बीत जाने के बावजूद अबतक उसपर अमल क्यों नहीं किया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर चेतावनी दी है कि अगर 12 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी नहीं दी जाएगी, तो एसबीआई के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी की जाएगी। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि ये सारी जानकारी 15 मार्च तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी पब्लिश की जाए।

क्यों एसबीआई माँग रही समय? आखिर दिक्कत क्या है?

सुप्रीम कोर्ट में समय माँगने पहुँची एसबीआी ने बताया कि आखिर उसे दिक्कत क्या हो रही है। इसे कुछ लाइनों में सीधे तरीके से समझिए।

1-स्टेट बैंक ने जो इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए, उसकी जानकारियाँ अलग-अलग जगह हैं।

2- इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी प्राइवेसी की शर्तों की वजह से सारी जानकारियाँ अलग रखी गई।

3- इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने के बाद उसे खरीदने वाले का डाटा अलग जगह रखा जाता है।

4- राजनीतिक पार्टियों द्वारा भुनाए गए बॉन्ड का डाटा एसबीआई की मुंबई शाखा में रखा जाता है, वो भी सीलबंद लिफाफे में।

5-एसबीआई को बॉन्ड खरीदने वाले, फिर उस बॉन्ड को भुनाने वाली पार्टी, बॉन्ड नंबर इत्यादि का मिलान करना होगा।

6-एसबीआई ने 12 अप्रैल 2019 से लेकर 15 फरवरी 2024 तक 22,217 बॉन्ड जारी किए हैं।

7- 22,217 बॉन्ड के लिए अलग-अलग फाइलें अलग-अलग जगहों पर हैं। ठीक इतनी ही फाइलें अलग-अलग दलों से आई हैं, जिन्होंने इन बॉन्ड्स को भुनाया है। ऐसे में 44,434 फाइलों के डाटा को एक जगह किया जाना है।

8- एसबीआई का कहना है कि सभी राजनीतिक दलों के लिए एसबीआई में ही खाते खोले गए हैं। उन खातों के माध्यम से ही इलेक्टोरल बॉन्ड को भुनाया जा सकता है। ऐसे में इन खातों की जानकारी भी इकट्ठा करनी होगी।

9- इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारियों को अलग-अलग जगह रखा ही इसलिए गया था, ताकि सुरक्षा में सेंध न लग सके। ऐसे में बहुत सारा डाटा ऑफ लाइन रखा गया है, खासकर बॉन्ड को खरीदने वालों की केवाईसी डिटेल्स।

10- सारी जानकारियों को एक जगह लाने में समय लगेगा, उसके लिए ज्यादा लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए उसे 30 जून तक का समय दिया जाए।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की एक भी दलील नहीं मानी और उसे 12 मार्च को सारी जानकारी सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का आदेश दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सारी जानकारी कोर्ट को सौंपे जाने से जुड़ा नियम भी है, ऐसे में एसबीआई इन जानकारियों को देने में देरी न करे। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी के अपने आदेश में इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक बता दिया था। जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2018 और जनवरी 2024 के बीच 16,518 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे गए थे, इसमें से अधिकतर बॉन्ड चुनावी फंडिंग के तौर पर दी गई थी।

‘मेरे फाड़े कपड़े, दुर्गा माता की मूर्ति तोड़ी, सब लूट ले गए’ : बंगाल में भाजपा बूथ अध्यक्ष की पत्नी पर 300-400 की मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, BJP ने शेयर की वीडियो

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के करणदिघी उपमंडल के अल्तापुर गाँव में शुक्रवार (8 मार्च 2024) को बीजेपी बूथ अध्यक्ष की पत्नी पर हमला किया गया। इस हमले की जानकारी ‘बीजेपी वेस्ट बंगाल’ के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में दी गई।

वीडियो में पीड़िता अपना दर्द सुना रही है। वह कहती है, “300-400 मुसलमानों की भीड़ मेरे घर पर आई। मैं खिड़की से उनसे बात कर रही थी और विनती कर रही थी कि वो हमें अकेला छोड़ दें। लेकिन उन्होंने हमारी नहीं सुनी। उन्होंने हमारा दरवाजा तोड़ा। फिर वो हमारे सूटकेस, अलमारी, टीवी, बिस्तर और यहाँ तक कि चावल रखने के बर्तनों को भी ले गए।”

पीड़िता ने आगे बताया, “हमलावरों ने हमारे घर में रखी देवी दुर्गा और देवी मनसा की मूर्तियों को भी तोड़ दिया। इसके अलावा बेटे पर हमला करके उसके पैर को तोड़ा, वहीं बेटी का हाथ फ्रैक्चर हो गया।”

पीड़िता के अनुसार, उनपर भी ईंट फेंककर हमला हुआ जिसके बाद उनकी कान से खून निकलने लगा। इतना ही नहीं, उन्हें कहते सुना जा सकता है, “उन लोगों ने मेरे कपड़े फाड़े, मेरे शरीर से सब हटा दिया। उस भीड़ में एक भी हिंदू नहीं था। सबके सब मुसलमान थे।”

महिला रोते हुए कहती है कि वो लोग भाजपा समर्थक हैं इसलिए उनके साथ ये सब होता है। वह बताती हैं, “मेरे पति बीजेपी के बूथ अध्यक्ष हैं। पार्टी की बैठकें मेरे घर पर आयोजित की जाती हैं। ऐसी ही एक बैठक कल हुई। जब से मेरे पति ने चुनाव लड़ा, तब से हमें धमकी दी जा रही थी।”

उन्होंने कहा, “मेरे पास कुछ नहीं बचा है। उन्होंने सब कुछ नष्ट कर दिया। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि हम बीजेपी का समर्थन करते हैं…मेरे पति मुसलमानों के डर से छिपे थे लेकिन उन्हें आसपास न पाकर मुझे निशाना बनाया गया।”

गौरतलब है कि बंगाल में भाजपा की बूथ अध्यक्ष की पत्नी के साथ हुई इस घटना की जानकारी होने के बाद बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में संदेशखाली से करणदिघी तक हिंदुओं का उत्पीड़न बिन रोक-टोक जारी है। मुख्यमंत्री लगातार दोष हिंदुओं पर मढ़ती हैं। पश्चिम बंगाल के निवासियों को न्याय का इंतजार है। #NoVoteToMamata”

वहीं शनिवार (9 मार्च 2024) को बीजेपी विधायक डॉ अशोक कुमार लाहिड़ी ने अस्पताल में पीड़िता से मुलाकात की। उन्होंने एक ट्वीट में जानकारी दी, “कल रात (8 मार्च) करीब 1 बजे, करणदिघी विधानसभा क्षेत्र के अल्तापुर में टीएमसी प्रायोजित गुंडों ने बीजेपी बूथ अध्यक्ष राजकुमार दास की पत्नी और परिवार के सदस्यों पर हमला किया। आज, मैं उनसे (राजकुमार दास की पत्नी) रायगंज जिला अस्पताल में मिला। मैं दोषियों के लिए सख्त सजा की माँग करता हूँ।”

बता दें कि संदेशखाली में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार की घटना सामने आने के बाद स्थानीय वैसे ही हैरान हैं कि आखिर बंगाल में हो क्या रहा है। इस बीच ममता बनर्जी की एक वीडियो सामने आई है जोकि 2019 की है। इस वीडियो को भी बीजेपी ने ही शेयर किया था और बताया था कि कैसे वो तुष्टिकरण की राजनीति करती हैं।

इस वीडियो में ममता बनर्जी इफ्तार में जाने की बात पर कहती नजर आ रही हैं– जे गोरु दूध देई, तार लाठी खेता होई (हमें उस गाय की लात बर्दाश्त करनी होगी जो हमें दूध देती है।)

शफीक ने सेब खरीदा, काटने के लिए चाकू भी… काट डाला हिंदू प्रेमिका का गला: भाग कर एक दिन पहले ही साथ गुजारी थी रात, 20 दिन बाद मिली लाश

बिहार के कैमूर की रहने वाली एक 21 साल की हिंदू लड़की को शफीक अंसारी में अपना भविष्य दिखता था। वो शफीक के कहने भर से सारी दुनिया से भिड़ने को तैयार रहती थी, क्या घर वाले और क्या समाज? शफीक अंसारी की सराफत के आगे वो एकदम नतमस्तक रहती थी। और अब जब शफीक अंसारी की सराफत सामने आई है, तो वो लड़की इस दुनिया में नहीं है, क्योंकि शफीक ने पहले तो रात भर उसके जिस्म का सुख प्राप्त किया और फिर दूसरे दिन उसे पहाड़ी पर चाकू से गोद दाला और शव को झाड़ियों में ठिकाने लगा दिया।

ये मामला तब भी न खुलता, अगर बिहार पुलिस इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद न लेती, क्योंकि मोबाइल लोकेशन, आखिरी कॉल डिटेल्स जैसे सबूतों के दम पर जब पुलिस ने शफीक अंसारी को उठाया, तब जाकर पता चला कि वो हिंदू लड़की कहाँ है। क्योंकि वो लड़की 20 दिन गायब थी और परिजनों को लगता था कि वो भाग चुकी है। कहीं अपनी जिंदगी जी रही होगी, लेकिन लड़की तो 20 दिन पहले ही मर गई थी और उसक शव झाड़ियों में पड़ा सड़ रहा था।

ये मामला सासाराम जिले का है, जहाँ रोहतास के माँझर कुंड में शफीक अंसारी ने लड़की के शव को ठिकाने लगाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैमूर जिले के भभुआ थाना क्षेत्र के कुदरा की रहने वाली लड़की भभुआ आ गई थी। यहाँ वो 17 फरवरी को अपनी ममेरी बहन को मैट्रिक की परीक्षा दिलाने आई थी, लेकिन इसके बाद वो गायब हो गई। कैमूर के कुदरा थाना इलाके के रहने वाले शफीक अंसारी के साथ वो सासाराम के किराए के मकान में रात भर रुकी। इसके अगले दिन शफीक उसे लेकर रोहतास के माँझर कुंड के जंगलों में ले गया। उसने प्रेमिका को सेब खिलाने के लिए चाकू भी खरीदा और मौका पाते ही उसने प्रेमिका को मौत के घाट उतार दिया।

भभुआ के एसडीपीओ शिवशंकर कुमार ने मीडिया से बताया कि युवती का शव माँझर कुंड पहाड़ी के जंगल से बरामद किया गया है। पुलिस ने जब शफीक को पकड़ा, तब उसने अपनी प्रेमिका को ठिकाने लगाने की बात कबूली। उसने बताया कि प्रेमिका की हत्या उसने 18 फरवरी को ही कर दी थी और फिर पहाड़ी की ही झाड़ियों में उसके शव को छिपा आया। पुलिस ने युवती के शव को बरामद कर लिया है, वहीं से चाकू भी मिल गया है।

‘छोड़ो बहन के ल%@$ …’ : राजौरी गार्डन में आदिल को पकड़ने गई दिल्ली पुलिस, भीड़ ने घेर कर लाठी-डंडे-चाकू से किया हमला

दिल्ली के राजौरी गार्डन के रघुबीर नगर में पुलिस पर हमले की खबर आई है। वहाँ पुलिस आदिल नाम के बदमाश को पकड़ने गई थी। इसी दौरान इलाके में मौजूद आदिल के समर्थकों ने पुलिकर्मियों पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावरों के पास लाठी-डंडे और चाकू जैसे हथियार थे। हमले में पुलिकर्मियों को काफी चोट आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आदिल की तलाश पुलिस को लंबे समय से थी। द्वारका के मोहन गार्डन थाने की कई पुलिस टीमें आदिल को पकड़ने की कोशिश कर रही थीं। ऐसे में जब पुलिस को उसके राजौरी में होने की सूचना मिली तो वह वहाँ उसे पकड़ने गए लेकिन इलाके में आदिल को पकड़ते ही उसके समर्थक और रिश्तेदार हथियारों के साथ बाहर आ गए। उन्होंने पुलिस पर हमला किया। साथ ही उनकी गाड़ी के शीशे भी तोड़े।

राजौरी गार्डन की घटना वाली वीडियो में क्या है?

सबने मिलकर आदिल को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे छूटने नहीं दिया। सामने आई वीडियो में पुलिस को एक व्यक्ति को जकड़े देखा जा सकता है। वहीं आसपास भीड़ हल्ला करती दिख रही है। औरतें चिल्ला रहीं हैं, पुलिस के साथ उलझ रही हैं। वहीं पुलिस उन्हें शांत कराने का प्रयास कर रही है।

एक पुलिकर्मी इस दौरान आदिल को गर्दन से पकड़े रखता है। आदिल भीड़ का हल्ला देख बीच बीच में खुद को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने का प्रयास भी करता है। मगर, पुलिस उसे खींचकर ले जाती है। वीडियो में स्थानीय महिलाओं को पुलिस की वर्दी पकड़कर खींचते भी साफ देखा जा सकता है। इसके अलावा सुदर्शन न्यूज ने जो 4 मिनट की वीडियो शेयर की है उसमें 2:30 मिनट के बाद देख सकते हैं पीछे से एक युवक पुलिस को गाली भी देता है… “छोड़ो ओ बहन के ल%@$”

बता दें कि दिल्ली के इंदरलोक का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि दिल्ली के दूसरे इलाके से पुलिस पर हमले की घटना सामने आई है। पुलिस टीम ने वहाँ स्थिति को संभालने की बहुत कोशिश की लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो राजौरी गार्डन और तिलक नगर थाने के एसएचओ के साथ काफी संख्या में पुलिसकर्मियों को वहाँ भेजकर भीड़ को शांत कराया गया। मौके पर पुलिस टीम जाने के बाद इलाके में शांति का माहौल है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में एफआईआर हो गई है। पुलिस ने आदिल के अलावा तीन लोगों को और गिरफ्तार किया है।

‘राजीव गाँधी के साथ नाचते हुए इटली की बार डांसर सोनिया’ : कॉन्ग्रेस के कार्टून पर BRS का डायरेक्ट हमला, राहुल सहित वीडियो रिलीज करने की धमकी भी

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस और भारत राष्ट्र समिति के बीच की तनातनी अब पर्सनल अटैक तक आ गई है। भारत राष्ट्र समिति यानी बीआरएस ने कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में न सिर्फ कॉन्ग्रेस की सबसे बड़ी नेता सोनिया गाँधी बल्कि उनके स्वर्गीय पति राजीव गाँधी को भी घसीट लिया है। यही नहीं, अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए बीआरएस ने ऐसा पोस्टर जारी किया है, जैसा अब तक किसी पार्टी ने नहीं किया। इस पोस्टर में सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी को डाँस करते दिखाया गया है, साथ ही धमकाया भी गया है कि अगर कॉन्ग्रेस नहीं सुधरी, तो राहुल गाँधी का वीडियो भी जारी किया जाएगा।

बीआरएस ने वो कर दिया, जो अब तक किसी ने भी नहीं किया था

बीआरएस ने कॉन्ग्रेस को सीधे तौर पर ‘बार डांसर पार्टी’ करार दे दिया। इस तस्वीर में सोनिया गाँधी और उनके स्वर्गीय पति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को दिखाया गया है। यही नहीं, बीआरएस ने सीधे तौर पर कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस पार्टी नहीं सुधरी, तो वो भी पर्सनल अटैक जारी रखेगी।

बीआरएस ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “केसीआर की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ बंद कर दिया जाए, जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर तेलंगाना के लिए संघर्ष किया। अगर आप नहीं रुके, तो हम सोनिया और राहुल की और भी तस्वीरें मॉर्फ कर सकते हैं। वैसे, तुमने ये नहीं सुना होगा कि कुत्ते की दुम सीधी हो गई, वो टेढ़ी की टेढ़ी ही रहती है। वैसे, हमें ये बताने की जरूरत नहीं कि ‘बापति’ कौन है। सारी दुनिया जानती है कि वो (राजीव गाँधी) इटली के बार में डांस के चक्कर में नशे (शराब) की वजह से फंस गए। अगर ये सब जारी रहा, तो हम पूरा वीडियो भेजेंगे, जिसे वो लोग चबाकर निगल नहीं पाएँगे।”

इन विवाद की शुरुआत तब हुई, जब बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने तेलंगाना के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी उन नौकरियों को अपना बता रहे हैं, जो केसीआर ने मुख्यमंत्री रहते तेलंगाना के युवाओं को दी। उन्हें शर्म आनी चाहिए।

इसके जवाब में तेलंगाना पार्टी ने एक मॉर्फ तस्वीर जारी की, जिसमें केसीआर, केटीआर, हरीश राव, कविता और संतोष राव को ‘चीप कार गैंग’ के तौर पर दिखाया गया, एक ऐसे गैंग के तौर पर, जो कार चोरी करते हैं। तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने लिखा, “कलवाकुंतला गैंग सस्ते शब्दों की आड़ में कारों (वोटों) की चोरी करने में जुटी है। वो जो काम (नौकरियाँ दिलाने का) करते हैं, उसका क्रेडिट लें। अगर वो अच्छा काम करेंगे, तभी वो क्रेडिट ले सकते हैं। लेकिन इन्होंने लोगों का खून पिया है। सस्ते शब्दों और झूठे प्रचार से बचना चाहिए और अच्छे विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। अन्यथा वो भूमिका भी छिन जाएगी। सुरक्षित रहें।”

बता दें कि तेलंगाना के निर्माण के लिए केसीआर ने लंबे समय तक लड़ाई लड़ी थी। तेलंगाना बनने के बाद वो दो बार मुख्यमंत्री रहे, लेकिन पिछले चुनाव में उनकी पार्टी को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा। अभी तेलंगाना में कॉन्ग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार है। चूँकि लोकसभा चुनाव सिर पर है, ऐसे में दोनों पार्टियों में खूब तनातनी हो रही है। तेलंगाना में 17 लोकसभा सीटें हैं, जिन पर कब्जे की कड़ी लड़ाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में बीआरएस ने 9 सीटें जीती थी, लेकिन इस बार मुकाबला काफी कड़ा है।

दिल्ली पुलिस को घेर, गालियाँ बकती हमलावर मुस्लिम भीड़: ‘पुलिसकर्मी मनोज तोमर और नमाज’ मामले से अलग, DP के पक्ष पर लोग उठा रहे सवाल

बीते शुक्रवार (8 मार्च 2024) को दिल्ली के इंदरलोक में हुई घटना के बाद एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुई है। इस वीडियो को लेकर कई यूजर्स ने दावा किया कि ये एसआई मनोज कुमार तोमर पर हुए हमले की वीडियो है। वीडियो में दिख रहा है कि सैंकड़ों की भीड़ कुछ पुलिसकर्मियों को घेरकर चल रही है। वहीं पीछे से आवाज आ रही है- ‘मारो सालों को &^%$ को। बहन के %&^* को मारो…’ सोशल मीडिया यूजर्स के हिसाब से ये इस वीडियो में जहाँ एसआई मनोज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों को घेरा जा रहा है, उन्हें गाली दी जा रही है। वहीं डीसीपी नॉर्थ ने इस वीडियो को लेकर किए गए दावों का खंडन किया है।

दरअसल, भीड़ वाली वीडियो शेयर करके लिखा जा रहा था- “कल दिल्ली में एक नमाजी को लात मारने वाले दरोगा मनोज तोमर पर पुलिस की मौजूदगी में हमला।” इसी दावे को नकारते हुए डीसीपी नॉर्थ दिल्ली के आधिकारिक हैंडल से कहा गया कि यह दावा और जानकारी गलत है।

उन्होंने कहा- “यह गलत जानकारी है। बताए गए एसआई इस वीडियो में नहीं है। वीडियो कल (9 मार्च) की नहीं है बल्कि 8 मार्च की है जब प्रदर्शनकारी इंदरलोक में इकट्ठा हुए थे। स्थानीय लोग पुलिस अधिकारियों को बचाते हुए पुलिस पोस्ट तक लेकर गए थे जिसके बाद वहाँ झड़प हुई थी।”

बता दें कि इस वीडियो से संबंधित दी गई पुलिस की जानकारी से नेटिजन्स संतुष्ट नहीं हैं। वो अलग-अलग सवाल उठा रहे हैं। कोई कह रहा है कि इस सफाई के लिए शुक्रिया, लेकिन जिस तरह का माहौल बनाया गया है उसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोई पूछ रहा है कि अगर इस वीडियो में एसआई नहीं भी हैं तो भी ये घटना जहाँ की है, वहाँ पर कार्रवाई होनी चाहिए। वीडियो को शेयर करके गौर करवाया जा रहा है कि वीडियो में भीड़ कह रही है- “यही है $$££, मारो साले को।”

डीसीपी के ट्वीट के नीचे आई प्रतिक्रिया।

गौरतलब है कि 8 मार्च 2024 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होना शुरू हुई थी। उस वीडियो में पुलिसकर्मी मनोज तोमर सड़क पर बैठकर नमाज पढ़ने वालों को हटाते दिख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक नमाजी को पैर मारकर भी हटने को कहा। इसी हरकत की वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। कुछ लोग जहाँ इस वीडियो में नजर आ रहे पुलिकर्मी का विरोध करते दिखे तो वहीं कुछ लोग समर्थन में आ गए। सोशल मीडिया पर #IStandWithManojTomar जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

एल्विश-मैक्सटर्न के बीच सुलह, सामने आई थी मारपीट की वीडियो: FIR के बाद बोले – ‘सिस्टम’ वाले… एक घर में बर्तन तो बजते ही हैं’

यूट्यूबर एल्विश यादव और मैक्सटर्न वाले सागर ठाकुर के बीच कई दिन तक चली लड़ाई के बाद सुलह हो गई है। इससे पहले एल्विश के सागर ठाकुर को पीटने का एक वीडियो भी सामने आया था। एल्विश ने भी एक वीडियो डाल कर अपना बचाव किया था। अब एल्विश ने एक फोटो सागर ठाकुर के साथ डाली है और कहा कि उनके बीच भाईचारा है।

यह पूरा मामला तब चालू हुआ जब एल्विश यादव विवादित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के साथ नजर आए और लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। सागर ठाकुर ने भी उन्हें इसी दौरान ट्रोल किया। उन्होंने इसको लेकर एल्विश की एक पुरानी वीडियो डाली।

इस पर एल्विश ने सागर को धमकाया। गुरुग्राम में दोनों के बीच विवाद हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सागर ठाकुर ने एक वीडियो जारी किया और पूरी बात बताई थी। सागर ने दावा किया, “जब एल्विश स्टोर पर आया, तो उसने सीधे मुझे मारा और उसके साथियों ने भी गालियाँ देते हुए पीटना शुरू कर दी। एल्विश यादव ने मेरी रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश की ताकि मैं शारीरिक रूप से बेकार हो जाऊँ। एल्विश ने जाने से पहले मुझे जान से मारने की धमकी भी दी।”

इस वीडियो में सागर ने गुरुग्राम पुलिस पर एल्विश को बचाने के भी आरोप लगाए थे और कहा, “एल्विश के ऊपर एक भी वो सेक्शन नहीं लगा, जो मैंने एफआईआर में लिखवाई थी। हरियाणा में इस तरह गुंडागर्दी चल रही है कि एक बंदा आता है मारता है और उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होता। इसे क्या समझा जाए, जिसके पास पैसा है वो कुछ भी कर सकता है। अगर मुझे कुछ भी होता है, तो इसके जिम्मेदार एल्विश यादव होंगे।” सागर ने सीएम खट्टर से भी मदद की गुहार लगाई थी।

इस मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया था। एल्विश इसमें अपने साथियों के साथ आते हैं। मारपीट का ये वीडियो करीब 5 मिनट का है, जिसमें वो ‘जान से मारने’ की धमकी भी देते दिख रहे हैं। इस वीडियो में एल्विश और उसके साथी सागर ठाकुर को पीटते हुए साफ दिख रहे हैं। वहीं, हरे रंग के कपड़ों में पीड़ित सागर ठाकुर है। इसी मारपीट के मामले में एल्विश यादव औऱ उसके साथियों के खिलाफ आईपीसी के सेक्शन 147, 149, 323 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया था।

इसके बाद एल्विश यादव ने भी अपना पक्ष रखने के लिए एक वीडियो जारी किया। इसमें एल्विश ने कहा, “मैं चाहता हूँ एक साइड की स्टोरी आपने सुनी। दूसरी साइड की स्टोरी भी जानने का आपको हक है और मुझे सुनाने का हक है। जो लोग हरकतें करके विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं, जो ये लोग मेरे खिलाफ इकट्ठा होकर आवाज उठा रहे, बहुत पुरानी आदत है मुझे, मैं ये 2020 से झेल रहा हूँ मैं।”

आगे उन्होंने कहा, “जो ये लेफ्ट लॉबी इकट्ठी हो जाती है। ठीक है, मेरे साइड की भी स्टोरी सुन हो भाई, आप उसका (सागर ठाकुर) ट्विटर हैंडल खोलना, जब मैं बिग बॉस में गया था, 8 महीने हो गए हैं, 8 महीने से आप देखना कि मैं क्या कर रहा हूँ मैक्सटर्न के साथ और मैक्सटर्न मेरे साथ क्या कर रहा है। उसका हर एक ट्वीट मेरे विरुद्ध मिल जाएगा।” एल्विश ने कहा कि सागर ने उनके परिवार को जिन्दा जलाने की बात कही, जिससे उनको गुस्सा आया।

इस मामले में दर्ज की गई FIR पर एल्विश यादव को गुरुग्राम पुलिस ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था। हालाँकि, अब दोनों पक्ष के बीच समझौते की खबर आ गई और इसकी पुष्टि एल्विश यादव ने ही एक फोटो के साथ कर दी। हालाँकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि सागर ठाकुर उर्फ़ मैक्सटर्न ने अपनी FIR वापस ली है या नहीं।

बेंगलुरु में पानी की किल्लत, कोरोना-काल वाला तर्क और WFH: सूसू-पॉटी-खाने-पीने की आजादी को लेकर घर से काम करने वाला आइडिया से निकलेगा हल?

बेंगलुरु में लोगों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। नहाने, पीने और बाकी के कामों के लिए पानी की भीषण समस्या है। पूरा शहर पानी की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में बेंगलुरु में रहने वालों ने पानी की कमी से बचने के लिए आईडिया देना चालू कर दिए हैं।

बेगलुरु में काम करने वाले पानी की कमी के कारण अब घर से काम करने (Work From Home) की इजाजत माँग रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यहाँ स्थित कम्पनियों में काम करने वालों को घर से काम करने को कह दिया जाए तो यह समस्या जल्दी ही सुलझ जाएगी।

सोशल मीडिया पर अपील की जा रही है कि बेंगलुरु में बाहर के शहरों से काम करने आए लोगों को उनके घर जाकर काम करने की इजाजत दी जाए। इससे उन्हें पानी कमी नहीं होगी। उनके बाहर जाने से शहर में रहने वालों के लिए पानी की आपूर्ति भी बढ़ सकेगी और दोनों पक्ष आराम से रह सकेंगे।

WFH की माँग करने वालों का तर्क है कि इससे पहले कोरोना के दौर में भी वह घर से काम कर चुके हैं और इससे उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ा था। ऐसे में अगर पानी की कमी को सुलझाने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है।

गौरतलब है कि बेंगलुरु वर्तमान में पानी की भीषण किल्लत से जूझ रहा है। शहर के बड़े हिस्से में पानी नहीं पहुँच रहा है। यहाँ लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर लोग बता रहे हैं कि उन्हें नहाने और शौच के लिए तक पास के शॉपिंग मॉल्स में जाना पड़ रहा है।

एक यूजर ने रेडिट पर बताया की समस्या इतनी गंभीर है कि लोग बर्तन ना धोने के लिए बाहर से खाना ऑर्डर कर रहे हैं। नहाने के पानी की कमी से बचने को यहाँ काम करने वाले लोग नए इंतजाम बना रहे हैं। पानी की कमी ने बेंगलुरु के आम जीवन के हर आयाम को प्रभावित किया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक सिटी बेंगलुरु के पानी का मुख्य स्रोत कावेरी नदी है। बेंगलुरु में कावेरी से ही पीने और बाकी कामों के लिए पानी आता है। यह पानी शहर के पानी आपूर्ति सिस्टम से भेजा जाता है। हालाँकि, जिन इलाकों में यह पानी नहीं पहुँचता है, वहाँ जमीन में की गई बोरिंग के जरिए पानी पहुँचता है।

यहाँ जमीन में किए गए बोरवेल से पानी की आपूर्ति होती है और टैंक में पानी का भंडारण किया जाता है। इसके अलावा पानी के टैंकरों के द्वारा भी पानी की आपूर्ति होती है। लेकिन इस समय समस्या यह है कि जमीन के बोरवेल सूख गए हैं और उनमें पानी नहीं आ रहा है। पानी का स्तर नीचे गिरने से ही यह समस्या आई है।

गौरतलब है कि बेंगलुरु में बाहर के शहरों से आकर काम के लिए रहने वालों की बड़ी संख्या है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बेंगलुरु की जनसंख्या का 50% से अधिक है। ऐसे में इस जनसंख्या का दबाव कम होने से आपूर्ति में आ रही समस्या को कुछ समय के लिए हल किया जा सकता है।

बेंगलुरु टेक कम्पनियों का देश में सबसे बड़ा हब है। इन कम्पनियों में काम करने के लिए देश भर से लोग आते हैं। बेंगलुरु में बाहर से आने वाले पहले ही ऊँचे किराए और रहने की जगह ना मिलने सम्बन्धी समस्याएँ बताते रहे हैं। अब पानी की समस्या ने उन्हें फिर से WFH की माँग करने पर मजबूर कर दिया है।

टेक कम्पनियों में काम करने वालों के WFH की माँग करने के पीछे तर्क है कि उनका काम कहीं भी बैठ कर हो सकता है, ऐसे में इस संकट के बीच यह कदम उठाया जाना चाहिए। हालाँकि, अभी कर्नाटक सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है। माना जा रहा है कि अगर समस्या बनी रहती है तो कुछ टेक कम्पनियाँ यह निर्णय ले सकती हैं।