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JNU PhD धारी कन्हैया कुमार के लिए वीजा मतलब वायरस, छात्रों की बात करते हुए ‘पिघल’ कर ‘बिहार में हनीमून’ तक पहुँच गए

कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार जेएनयू से पीएचडी डिग्री धारी हैं। राहुल गाँधी के करीबी माने जाते हैं। बड़े-बड़े मुद्दों पर कॉन्ग्रेस की ओर से छोटी-छोटी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहते हैं। इसी बीच, शुक्रवार (1 मार्च 2024) को उन्होंने रूस में रह रहे उन 20 भारतीयों को लेकर प्रेस से बातचीत की, जो वहाँ फंसे हुए हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका सामान्य ज्ञान भी सामने आ गया, जब उन्होंने खतरनाक H1N1 वायरस को वीजा कैटेगिरी बता डाला।

कन्हैया कुमार ने दावा किया, ”सरकार को उन युवाओं के साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, जो यहाँ की परिस्थितियों के कारण भारत छोड़ने को मजबूर हैं।” कन्हैया ने कहा, “ये तो सरकार बताए कि ये लोग विदेश कैसे पहुँचे कि वो लोग स्टूडेंट वीजा पर गए हैं, वर्क वीजा पर गए गए हैं, टूरिस्ट वीजा पर गए हैं। वीजा की कैटेगिरी क्या है? एच1एन1 कौन सा वीजा लेकर गए हैं? ये सरकार बताएगी। हम कैसे बता सकते हैं, हम तो विदेश मंत्री हैं नहीं।”

जेएनयू से अफ्रीकन अध्ययन में पीएचडी करने वाले कन्हैया कुमार को शायद ये बात पता भी नहीं कि H1N1 को वीजा की कैटेगिरी नहीं है, बल्कि ये स्वाइन फ्लू का वायरस है। एच1एन1 वायरस साल 2009-2010 के दौरान तेजी से फैला था, जो मूलत: इन्फ्लूएंजा वायरस है। ये इंसानों में पक्षियों और सुवरों के माध्यम से फैलता है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने साल 2009 में महामारी घोषित की थी, क्योंकि इससे 2.84 लाख लोगों की मौत हो गई थी।

स्वाइन फ्लू अब भी फैलता है और जब इसके फैलने की खबर आती है तो हजारों-लाखों जानवरों को मारना पड़ता है। लेकिन साल 2011 में जेएनयू के सेंटर फॉर अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी के लिए दाखिला लेने वाले कन्हैया कुमार को ये नहीं पता है कि एच1एन1 कोई वीजा कैटेगिरी नहीं, बल्कि वायरस है।

वैसे, अगर हम कन्हैया कुमार के बारे में ये मान लें कि एच1एन1 कोई वीजा कैटेगिरी है भी, तो भी उसका रूस से कोई लेना देना नहीं। पहली बात तो ये ही एच1एन1 कोई वीजा कैटेगिरी नहीं, बल्कि एच1बी वीजा कैटेगिरी होती है। जो सिर्फ अमेरिका के संदर्भ में लागू होती है। लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का अमेरिका से कोई लेना देना नहीं था, बल्कि इसका आयोजन रूस के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए किया गया था।

बिहार में हनीमून डेस्टिनेशन की कमी

कन्हैया कुमार अपनी प्रेस कॉफ्रेंस में बिहार की बदहाली पर भी बात करते नजर आए। उन्होंने तमाम बातों के बीच बिहार में हनीमून के लिए बाहर जाने की मजबूरी भी गिनाई। कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। यहाँ तक कि हनीमून मनाने भी बाहर जाने के लिए लोग मजबूर हैं। खैर, कन्हैया कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इतना महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, उसके लिए बिहार के नौजवान जरूर उनके ऋणी रहेंगे।

विश्वासघात का दूसरा नाम TMC सरकार: पीएम मोदी ने कहा- ममता सरकार संदेशखाली के गुनाहगार को बचाना चाहती थी

लोकसभा चुनावों की घोषणा से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई राज्यों के दौरे पर हैं। आज शनिवार (2 मार्च 2024) को उन्होंने बंगाल के कृष्णानगर में जनसभा को संबोधित किया। यहाँ उन्होंने केंद्रीय सरकार की योजनाओं के बारे में लोगों को बताया और ‘अबकी बार 400 के पार’ का नारा दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, “बंगाल के लोगों ने बार-बार यहाँ टीएमसी को भारी बहुमत दिया, लेकिन यहाँ टीएमसी अविश्वास और अत्याचार का दूसरा नाम बन गई है। टीएमसी के लिए विकास नहीं, भ्रष्टाचार और परिवारवाद ही प्राथमिकता है। टीएमसी का मतलब भ्रष्टाचार, विश्वासघात, परिवारवाद। टीएमसी बंगाल के लोगों को गरीब बनाए रखना चाहती है, ताकी उसकी राजनीति चलती रहे, उसका खेल चलता रहे।”

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बंगाल को पहला एम्स देने की घोषणा की थी। उसका लोकार्पण किया जा चुका है। लगभग 1000 बेड का यह अस्पताल कई सुविधाएँ लेकर आया है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लेकर आया है। उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी का मतलब है गारंटी पूरी होने की गारंटी। पीएम ने कहा कि आज सभी टीएमसी के कुशासन में रो रहे हैं।

हाल की घटना का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “संदेशखाली की बहनें इंसाफ की गुहार लगाती रहीं, लेकिन टीएमसी सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी। बंगाल में स्थिति ये है कि यहाँ पुलिस नहीं, अपराधी तय करते हैं कि उन्हें कब गिरफ्तार होना है। राज्य सरकार तो चाहती ही नहीं थी कि संदेशखाली का गुनाहगार कभी गिरफ्तार हो। ये तो बंगाल की नारीशक्ति दुर्गा बनकर खड़ी हो गई। तब राज्य सरकार को झुकना पड़ा।”

उन्होंने कहा, “महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार जो भी योजना यहाँ लाती है, उसे भी टीएमसी सरकार यहाँ ठीक से लागू नहीं होने देती। पूरे देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चला, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने यहाँ लागू नहीं होने दिया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरे देश में महिला हेल्पलाइन शुरू की गई है, लेकिन टीएमसी सरकार इसको भी लेकर गंभीर नहीं है।”

टीएमसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “टीएमसी सरकार हर स्कीम को स्कैम में बदल देती है। स्कीम को स्कैम में बदलने में टीएमसी की मास्टरी है। भाजपा की केंद्र सरकार के 6 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है। आने वाले 5 वर्ष तक ये योजना चलती रहेगी। ये मोदी की गारंटी है। इस योजना पर भी टीएमसी के लोग अपना स्टीकर लगाते हैं और गरीबों के राशन लूटने में भी पीछे नहीं रहते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पश्चिम बंगाल देश के अन्य राज्यों के लिए पूर्वी द्वार का काम करता है। पूर्व में इस द्वार से प्रगति की अपार संभावनाओं का प्रवेश हो सकता है। इसलिए हमारी सरकार पश्चिम बंगाल में सड़क मार्ग, रेल मार्ग, वायु मार्ग और जल मार्ग की आधुनिक कनेक्टिविटी के लिए काम कर रही है।”

उन्होंने कहा, “इंफ्रास्ट्रक्चर के दृष्टिकोण से रेल पश्चिम बंगाल के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहा है, लेकिन इतिहास की जो बढ़त बंगाल को हासिल थी, आजादी के बाद उसे सही ढंग से आगे नहीं बढ़ाया गया। यही कारण है कि तमाम संभावनाओं के बावजूद बंगाल पीछे छूटता गया। पिछले 10 वर्षों में हमने उस खाई को पाटने के लिए यहाँ के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत जोर दिया है।”

स्पेन की महिला से झारखंड के दुमका में गैंगरेप, खेतों में पुलिस को मिले अंडरगारमेंट्स: गूगल ट्रांसलेटर की मदद से पुलिस ने लिखी शिकायत

झारखंड के दुमका में एक विदेशी महिला से गैंगरेप की खबर है। विरोध करने पर स्पैनिश दम्पति को पीटा भी गया। पीड़िता मूल रूप से स्पेन की रहने वाली है, जो अपने पति के साथ भारत में घूमने आई थी। आरोपितों की संख्या 7-8 के बीच बताई जा रही है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। 4 संदिग्ध हिरासत में बताए जा रहे हैं। घटना शुक्रवार (1 मार्च 2024) रात की है। भाजपा ने झारखंड सरकार में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दुमका के थानाक्षेत्र हँसडीह की है। यहाँ टूरिस्ट वीजा पर स्पेन से अपने पति के साथ आई 30 वर्षीया पीड़िता एक खेत में कैम्प डाल कर रुकी थी। यहाँ से इन दोनों को भागलपुर जाना था। आरोप है कि रात में करीब 7 से 8 की तादाद में कुछ लोग कैंप में घुसे। उन्होंने पीड़िता से रेप किया।

पीड़ित महिला के पति ने आरोपितों को रोकने का प्रयास किया तो उनकी भी पिटाई कर दी गई। रेप के बाद महिला अपने पति के साथ रात में ही कैम्प से निकल गई और रात लगभग 10:30 पर कुमारहाट चौक पर पुलिस की गश्ती टीम को देख कर अपने साथ हुई घटना को बताया।

बताया जा रहा है कि हिंदी न आने की वजह से महिला और उसके पति ने गूगल ट्रांसलेटर के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने सर्च अभियान चला कर एक खेत से पीड़िता के अंडरगारमेंट्स तलाशे। रात में ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया, जिसमें उसके साथ समूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई।

पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ गैंगरेप सहित अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। जाँच के लिए डॉग स्क्वायड सहित अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों की मदद ली जा रही है। अब तक 4 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना के बाद झारखंड सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने संसदीय क्षेत्र में हुई इस घटना पर दुःख प्रकट किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में चल रही वर्तमान सरकार ने बिना ट्रेनिंग दिए ही तमाम पुलिसकर्मियों को तैनात कर रखा है, जिसका नकारात्मक असर सीधे तौर पर लॉ एन्ड आर्डर की बदहाली के तौर पर देखा जा सकता है। भाजपा सांसद दुबे ने बलात्कार जैसी घटनाओं के पीछे प्रशासन को ही जिम्मेदार बता कर पुलिस वालों को ही जेल भेजने की माँग उठाई है।

वनडे वर्ल्ड कप दिलाने वाले 2 क्रिकेटर राजनीति से दूर: गौतम गंभीर के लिए अब सिर्फ क्रिकेट ही करियर, युवराज सिंह बोले- गुरदासपुर से नहीं लड़ूँगा चुनाव

लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले पूर्व दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/BJP) के सांसद गौतम गंभीर ने ऐलान किया है कि वो राजनीति को अलविदा कह रहे हैं और दोबारा अपना करियर क्रिकेट में देखेंगे। वहीं, युवराज सिंह ने जानकारी दी है कि वो गुरदासपुर से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वो लोगों की मदद अपने फाउंडेशन के जरिए ही करेंगे। कल तक युवराज को लेकर मीडिया में सूत्रों से बताया जा रहा था कि भाजपा उन्हें गुरदासपुर से चुनावी मैदान में उतार सकती है।

भारतीय क्रिकेट टीम के दोनों पूर्व खिलाड़ियों ने इस संबंध में ट्वीट किया है। गौतम गंभीर ने लिखा, “मैंने माननीय पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से अनुरोध किया है कि वो मुझे मेरे राजनीतिक कर्तव्यों से मुक्त करें ताकि मैं अपनी आगामी क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केंद्रित कर सकूँ। मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अम‍ित शाह को हृदय से धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने मुझे लोगों की सेवा करने का अवसर दिया। धन्यवाद…जय हिन्द।”

मालूम हो कि गौतम गंभीर 2019 में लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली सीट से जीतकर संसद पहुँचे थे। उन्होंने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अरविंदर सिंह लवली और आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी आतिशी मार्लेना को हराया था। उनकी जीत 3 लाख 91 हजार 222 वोटों से हुई थी। इसके अलावा पूर्वी दिल्ली में किए गए उनके कार्यों के लिए भी उनकी तारीफ होती थी। लेकिन अब उन्होंने राजनीति को अलविदा कहने का फैसला लिया है।

वहीं युवराज सिंह को लेकर कल जो खबरें आई थीं कि वो गुरदासपुर से भाजपा के प्रत्याशी हो सकते हैं…उस पर आज युवराज सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा, “मेरा जुनून विभिन्न क्षमताओं में लोगों का समर्थन करने और उनकी मदद करने में निहित है और मैं अपनी फाउंडेशन के माध्यम से ऐसा करना जारी रखूँगा। आइए अपनी क्षमताओं के साथ मिलकर बदलाव लाना जारी रखें।”

2011 में वनडे विश्व कप के बाद युवराज सिंह ने अमेरिका में जाकर अपने कैंसर का इलाज करवाया था। इसी के बाद जब वो कैंसर से रिकवर हो गए तो उन्होंने अपने यूवीकैन फाउंडेशन की शुरुआत की। इस फाउंडेशन के जरिए वह कैंसर पीड़ितों की मदद करते हैं।

बता दें कि दोनों पूर्व भारतीय खिलाड़ियों को क्रिकेट की दुनिया में 2011 का वर्ल्ड कप जिताने के लिए याद किया जाता रहा है। अब जब दोनों ने एक साथ राजनीति से दूरी बनाने का ऐलान किया है तो इनके फैंस इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। युवराज सिंह को लेकर लोग खुश हैं कि वो राजनीति में घुसने बच रहे हैं तो गंभीर को लेकर उनके आगे करियर की शुभकामना दी जा रही है। वहीं कुछ ये अंदाजा भी लगा रहे हैं कि शायद गौतम को टिकट देने से मना कर दिया गया है इसलिए वो ऐसा फैसला ले रहे हैं।

‘बिना बुर्का के थाने क्यों ले गई पुलिस, उन पर एक्शन लो’: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की मुस्लिम महिला की याचिका, कहा – सुरक्षा और न्याय सबसे ऊपर

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिला को बिना बुर्का पहनाए थाने ले जाने के मामले में दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में किसी मुस्लिम महिला को बिना बुर्का के थाने ले जाने की कार्रवाई को संवेदनशील मामला बताते हुए पुलिस पर कार्रवाई के साथ भविष्य के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता रेशमा ने खुद को पर्दानशीं बताते हुए पुलिस पर खुद को बिना बुर्का के पकड़ कर ले जाने का आरोप लगाया था। मामला की सुनवाई शुक्रवार (1 मार्च 2024) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के थानाक्षेत्र चांदनी महल में पड़ने वाले रकाबगंज का है। यहाँ 2 लोगों ने खुद को पीड़ित बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने 3 लोगों पर आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता रेशमा इन तीनों आरोपितों की बहन हैं। बताया जा रहा है कि रेशमा ने बालकनी से सारा झगड़ा होते देखा था। दावा यह भी है कि जब रेशमा अपने भाइयों (जो मारपीट के आरोपित हैं) द्वारा 2 लोगों (जो मार खाए, पीड़ित हैं) को पीटते देख रही थीं, तब उन्होंने बुर्का नहीं पहना था।

रेशमा के वकील ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि सुबह 3 बजे दिल्ली पुलिस उनकी मुवक्किल के घर में घुसी थी। याचिका में इस कार्रवाई के दौरान पुलिस पर अभद्रता करने के साथ रेशमा को घसीट कर थाने ले जाने की भी शिकायत की गई थी।

रेशमा का यह कहना था कि पुलिस पहले से जानती थी कि वह बुर्कानशीं महिला है लेकिन उन्हें पर्दा करने का भी टाइम नहीं दिया गया। याचिका में बुर्का को रेशमा ने अपनी व्यक्तिगत पसंद बताया था और पुलिस पर कार्रवाई की माँग की थी। इस दौरान भविष्य में भी पुलिस को बुर्का वाली महिलाओं के मामलों को संवेदनशील मान कर दिशा-निर्देश देने की माँग उठाई गई थी।

रेशमा के इन तमाम आरोपों पर पुलिस ने भी अपना पक्ष अदालत में रखा। तब पुलिस ने रेशमा द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के तमाम आरोपों को गलत बताया था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि खुद रेशमा ने उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए बुलाया था। पुलिस के मुताबिक तब रेशमा को यह डर था कि कहीं वो लोग उन पर हमला न कर दें, जिन्हे रेशमा के 3 भाइयों ने मिल कर पीटा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों पर गौर किया।

याचिका की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने अपना फैसला सुनाया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि पुलिस की जाँच में गोपनीयता जैसी बातों के लिए जगह नहीं हो सकती। अदालत ने सुरक्षा और न्याय को ही सबसे पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इन दोनों को सुनिश्चित करने के लिए पहचान आवश्यक होती है। अदालत ने कहा कि धार्मिक या व्यक्तिगत चॉइस के नाम पर प्राइवेसी का अधिकार मिल जाने से इसके दुरूपयोग की आशंका बढ़ेगी और जाँच में रुकावट खड़ी होगी।

अंत में अदालत ने रेशमा की याचिका ख़ारिज कर दी। रेशमा की तरफ से वकील एम सूफियान सिद्दीकी, आलिया, नियाजुद्दीन और राकेश भुंगरा ने बहस की जबकि दिल्ली पुलिस का पक्ष एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल रुपाली बंधोपाध्याय ने रखा था।

‘प्रोड्यूसर के साथ सोना होगा…’ : अंकिता लोखंडे ने बताया कास्टिंग काउच का काला सच, छोटी उम्र में हुईं थी शिकार

बिग बॉस-17 की मशहूर कंटेस्टेंट और टीवी की फेमस अभिनेत्री अंकिता लोखंडे ने हाल में कास्टिंग काउच पर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनके लिए टीवी में जगह बनाना आसान नहीं था। छोटी उम्र में एक साउथ के प्रोड्यूसर को इंटरव्यू देते समय उनको कास्टिंग काउच का शिकार होना पड़ा था।

‘हाउटरफ्लाई’ के साथ एक इंटरव्यू में 9 मिनट 17 सेकेंड के बाद, अंकिता ने कास्टिंग काउच के अपने अनुभव के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “मेरे साथ बॉम्बे में ही कास्टिंग काउच हुआ था। मैंने साउथ फिल्म के लिए ऑडिशन दिया था। मुझे कॉल आया कि आप साइन करने आ जाओ। मैं बहुत खुश थी, तो मैंने अपनी माँ को बोला मैं साइन करके आती हूँ। मुझे भी डाउट था कि इतनी आसानी से कैसे हुआ?”

अंकिता ने कहा, “जब मैं साइन करने गई तो मुझे सिर्फ अंदर बुलाया गया और मेरी कॉर्डिनेटर को रुकने को कहा गया। मुझे बोला गया- तुम्हें कॉम्प्रोमाइज करना होगा’ मैं उस समय सिर्फ 19 साल की थी। तभी मेरा हिरोइन बनने वाला फेज चल रहा था। मैंने पूछा कि कौन सा कॉम्प्रोमाइज करना होगा। तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि आपको प्रोड्यूसर के साथ सोना पड़ेगा।”

अंकिता ने बताया कि उन्होंने ये सब सुनकर ऑफर को रिजेक्ट कर दिया और कहा- “मुझे नहीं लगता कि आपके प्रोड्यूसर को कोई टैलेंट की तलाश है, उन्हें सिर्फ एक लड़की चाहिए सोने के लिए। मैं उन लड़कियों में से नहीं हूँ। ये कहकर मैं वहाँ से आ गई।”

बता दें कि अंकिता से पहले कई एक्ट्रेस कास्टिंग काउच के अपने अनुभव को मीडिया में साझा कर चुकी हैं। इससे पहले सुरवीन चावला ने भी खुलासा किया था कि उन्हें तीन बार कास्टिंग काउच का शिकार होना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि साउथ की तरफ कास्टिंग काउच बहुत था। लेकिन कुछ समय से ये सब बदला है। चावला ने बताया था कि उनसे तो उनकी कमर और छाती के साइज पूछे जाते थे।

इसी तरह फिल्म अभिनेत्री डोनल बिष्ट ने बताया था कि जब वो एक वो एक डायरेक्टर के पास काम माँगने के लिए गई थीं तो उसने उनसे काम के बदले सेक्स करने के लिए कहा था। टीवी एक्ट्रेस स्नेहा जैन ने भी बताया था कि उन्हें करियर की शुरुआत में कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ा था। उन्होंने भी बताया था कि जब वो ग्रेजुएशन में थी तब साउथ फिल्मों के कास्टिंग डायरेक्टर ने उन्हें एक सीरियल में काम के बदले साथ में कॉम्प्रोमाइज करने को कहा था।

शादीशुदा मुस्लिम महिला का दूसरे मर्द संग लिव-इन में रहना ‘जिना’ और ‘हराम’ : इलाहाबाद HC का फैसला शरीयत के अनुसार, ₹2000 का जुर्माना भी लगाया

एक शादीशुदा मुस्लिम महिला के पास दूसरे व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशन में रहने का अधिकार नहीं है, अगर वो ऐसा करती है तो शरीयत के मुताबिक इसे ‘जिना’ और ‘हराम’ माना जाएगा… ऐसा इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 26 साल की एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा। कोर्ट ने इतना कहकर उसकी याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने और अपने हिंदू प्रेमी के लिए सुरक्षा माँगी थी। इसके साथ ही कोर्ट ने उसपर 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

जानकारी के मुताबिक, इलाहाबाद कोर्ट में जस्टिस रेणू अग्रवाल की पीठ के समक्ष 26 साल की मुस्लिम महिला की याचिका गई, जो अपने हिंदू प्रेमी के साथ रहना चाहती थी, लेकिन उसे अपने रिश्तेदारों से जान का खतरा था। महिला ने अपनी और अपने प्रेमी की सुरक्षा की गुहार कोर्ट के आगे लगाई, मगर जस्टिस रेणू ने कहा कि शादीशुदा होते हुए महिला किसी और के साथ रह रही है। कोर्ट ऐसे अवैध रिश्तों को संरक्षण नहीं देता है। ऐसे आपराधिक कृत्य का समर्थन नहीं करता है।

रेणू अग्रवाल की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, “प्रथम याचिकाकर्ता (मुस्लिम महिला) मुस्लिम कानून (शरियत) के प्रावधानों के विपरीत दूसरे याचिकाकर्ता के साथ रह रही है। मुस्लिम कानून में विवाहित महिला शादीशुदा जिंदगी से बाहर नहीं जा सकती, इसलिए मुस्लिम महिला के इस कृत्य को ‘जिना’ और ‘हराम’ के तौर पर परिभाषित किया जाता है।”

इस मामले में अजीबोगरीब बात ये है कि कोर्ट में जिस महिला को उसके शादीशुदा होने के कारण हिंदू प्रेमी संग रहने पर सुरक्षा नहीं मिली, उसका शौहर खुद दूसरी बीवी के साथ रह रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला के शौहर का नाम मोहसिन है। निकाह के बाद महिला उसकी शराब पीने की गंदी आदत से परेशान रहती थी। वो उसके साथ बदसलूकी करता था उसे मारता था। जब इसकी शिकायत वो किसी से करती थी तो कोई उसे मदद नहीं मिलती थी। ऐसे में महिला उसे छोड़ एक अलग आ गई और बाद में एक हिंदू युवक के साथ रहने लग गई। लेकिन शौहर ने तब भी उसका पीछा नहीं छोड़ा। वह उसे धमकी देता रहा।

दूसरी ओर महिला के परिजन भी उसे परेशान करने लगे। ऐसे में उसने अपनी सुरक्षा की गुहार कोर्ट में लगाई तो उसे कहा गया- महिला ने धर्म परिवर्तन के लिए संबंधित अधिकारी के पास कोई आवेदन नहीं किया है और न ही उसने अपने पति से तलाक लिया है इसलिए उसे सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने कहा कि 26 वर्षीय महिला अपनी 5 साल की बच्ची के साथ बिना किसी उचित कारण के अपने शौहर का घर छोड़ गई थी। ऐसे दस्तावेज नहीं है कि उसने तलाक लिया। इसलिए वह अपनी भी शादीशुदा मानी जाती है। कोर्ट ने कहा कि वो अवैध रिश्वतों को संरक्षण नहीं देते। उन्होंने मामला खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 2000 रुपए का फाइन लगाया और उसे ये जुर्माना राशि 15 दिन में जमा करने को भी कहा।

बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे बम ब्लास्ट में पुलिस ने एक को दबोचा, CCTV फुटेज से सामने आई थी संदिग्ध की तस्वीर: माँ के फोन से ऐसे बची एक इंजीनियर की जान

कर्नाटक के बेंगलुरु में शुक्रवार (1 मार्च 2024) को बम विस्फोट हुआ। रामेश्वरम कैफे में हुए इस ब्लास्ट एक चलते एक महिला सहित 10 लोग घायल हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक संदिग्ध को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ जारी है।

संदिग्ध हमलावर की हिरासत उस फुटेज के बाद की गई है, जिसमें वो कैफे में रवा इडली का ऑर्डर करने के बाद विस्फोटक रख कर बाहर चला गया था। ब्लास्ट को टाइमर डिवाइस द्वारा एक्टिवेट किए जाने की आशंका है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ UAPA एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। अब घटना के कुछ चश्मदीद सामने आए हैं, जिन्होंने अपनी आपबीती बताई है।

इडली रवा का ऑर्डर किया, फिर विस्फोटक रख कर चला गया

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने शुक्रवार को रामेश्वर कैफे का दौरा किया। दौरे के बाद उन्होंने बताया कि 28 से 30 साल की उम्र वाला हमलावर कैफे में रवा इडली खाने के बहाने आया था। उसने काउंटर पर टोकन लिया और अपना बैग रख कर चला गया। आशंका है कि इसी बैग में बम था।

पुलिस ने इस मामले में एफआईआर HAL नामक थाने में UAPA एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज की है। बेंगलुरु पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की जाँच कर रही है। विस्फोट को कम तीव्रता वाला धमाका बताते हुए डी के शिवकुमार ने बताया कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ही घंटों में मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।

इस बीच CCTV फुटेज का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने अपने X हैंडल से इसे शेयर किया है। इस फोटो में सफेद रंग की कैप में एक युवक को देखा जा सकता है, जिसने अपने हाथ में प्लेट पकड़ रखी है। संदिग्ध की पीठ पर एक बैग टँगा हुआ है, जिसमें विस्फोटक होने की आशंका जताई जा रही है।

टाइमर से किया धमाका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाके में टाइमर का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। मामले की जाँच कर रही पुलिस ने घटनास्थल से टाइमर व अन्य डिवाइस बरामद की हैं। जाँच में सहयोग के लिए NSG की टीम भी शनिवार (2 मार्च 2024) को रामेश्वरम कैफे पहुँच गई है।

विस्फोटक को जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। घायलों का इलाज वैदेही और ब्रुकफील्ड मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पतालों में चल रहा है। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने इन दोनों अस्पतालों में जाकर घायलों से मुलाक़ात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।

घायलों में महिला ग्राहक और कैफे के स्टाफ

रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट के बाद हुए कुल 10 घायलों में अधिकतर वहाँ काम करने वाले स्टाफ हैं। इसमें से एक स्टाफ के कान के पर्दे में चोट आई है। डॉक्टर इसकी वजह धमाके में आई तेज आवाज बता रहे हैं। वहीं महिला ग्राहक 40% तक जल गई है। डॉक्टर पीड़िता की सर्जरी कर रहे हैं।

अन्य घायलों को मामूली चोटें आईं हैं जिनको उपचार दिया जा रहा है। ब्रुकफील्ड अस्पताल के डॉक्टर प्रदीप ने सभी घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई है। घायलों में अभी तक फारुख, दीपांशु, स्वर्णाम्बा, मोहन, नागश्री, मोमी, बलराम कृष्णन, नाव्या और श्रीनिवास के नाम सामने आए है।

चश्मदीदों ने बताया आँखों देखा हाल

इस घटना के कई चश्मदीद सामने आए हैं। ब्लास्ट के समय मूलतः पटना के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर अलंकृत कैफे में ही मौजूद थे। ब्लास्ट का पहला वीडियो सोशल मीडिया पर उन्होंने ही शेयर किया था। अलंकृत का दावा है कि उन्होंने कम से कम 15 लोगों को घायल अवस्था में देखा था, जिसमें से कइयों के कानों से खून निकल रहा था। कुछ जले लोगों का भी जिक्र करते हुए 24 वर्षीय अलंकृत ने बताया कि इतना भयानक मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।

अलंकृत ने आगे बताया कि घटना के ठीक पहले उनकी माँ की कॉल आ गई थी और वो बात करने बाहर निकल गए थे। इसी दौरान कैफे में तेज धमाका हो गया। धमाके के बाद चीख-पुकार और भगदड़ मचने का दावा करते हुए अलंकृत ने कहा कि उन्होंने एक महिला के कपड़े पीछे से फ़टे देखे। किचन से काफी धुँआ निकल रहा था और काफी बुजुर्ग 2 महिलाओं का खून निकल रहा था, जिस पर लोग पट्टी बाँध रहे थे। अलंकृत ने अपनी माँ को भगवान बताते हुए उनकी कॉल की ही वजह से खुद को सुरक्षित बताया।

एक अन्य चश्मदीद नागराज ने बताया कि विस्फोट की जोरदार आवाज हुई। तब धुएँ से रामेश्वरम कैफे का बोर्ड भी दिखना बंद हो गया था। नागराज ने घायलों को ऑटो में बिठा कर अस्पताल पहुँचाने में मदद की थी। एक अन्य चश्मदीद मंजूनाथ ने बताया कि धमाका वाश बेशिन के पास हुआ। एक महिला को काफी खून बह रहा था, तब उन्हें प्राइवेट वाहन में बिठा कर अस्पताल ले जाया गया था।

‘3 दिन में माँफी माँगो, वरना तुम्हारे पैसे से तुम्हीं पर करेंगे कार्रवाई’ : कॉन्ग्रेस को नितिन गडकरी ने भेजा लीगल नोटिस, वीडियो काट फैलाया था झूठ

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव जयराम रमेश को कानूनी नोटिस भेजा गया है। ये नोटिस इसलिए है क्योंकि कॉन्ग्रेस ने केंद्रीय मंत्री के इंटरव्यू की एक वीडियो से क्लिप काटकर भ्रामक जानकारी प्रसारित करने की कोशिश की थी। इस नोटिस में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी नितिन गडकरी से लिखित में माफी माँगे वरना वो आगे कार्रवाई करेंगे।

केंद्रीय मंत्री के वकील बालेंदु शेखर द्वारा भेजे गए नोटिस में कॉन्ग्रेस नेताओं को कहा गया, “ये कानूनी नोटिस आपको एक्स से तुरंत उस पोस्ट को हटाने के लिए कहता है। कानूनी नोटिस मिलने के बाद किसी भी हालत में पोस्ट को अगले 24 घंटे में हटाया जाए। साथ ही तीन दिनों के भीतर मेरे मुवक्किल से लिखित माफी माँगी जाए।” नोटिस में आगे कहा गया, “अगर कॉन्ग्रेस द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है, तो मेरे मुवक्किल के पास आपके जोखिम और खर्च (At your risk and expense) पर नागरिक एवं आपराधिक (Civil and Criminal) सभी कार्रवाइयों का सहारा लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।”

नितिन गडकरी की ओर से भेजे गए नोटिस में कॉन्ग्रेस द्वारा शेयर वीडियो क्लिप को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है। साथ ही कहा गया कि कॉन्ग्रेस ने ऐसा जानबूझकर किया है ताकि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के बीच वैचारिक दरार पैदा हो सके।

नोटिस में कहा गया कि कॉन्ग्रेस की ऐसी हरकत से सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर लोगों ने उस वीडियो को देखा जो कि बिलकुल तथ्यात्मक नहीं है। इससे नितिन गडकरी की प्रतिष्ठा में क्षति, मानहानि और विश्वसनीयता में बड़ी हानि हुई है।

इंटरव्यू की वीडियो को तोड़-मरोड़कर, संदर्भहीन और प्रासंगिक अर्थ के बिना पेश किया गया है। कॉन्ग्रेस ने उन हिस्सों को काट दिया, जहाँ बताया गया था कि हालातों को सुधारने के लिए मोदी सरकार द्वारा कितने प्रयास किए जा रहे हैं जिसके वर्तमान में अच्छे परिणाम भी हैं।

क्यों है वीडियो पर विवाद?

कल (1 मार्च 2024) कॉन्ग्रेस ने अपने हैंडल पर एक वीडियो शेयर की थी जिसमें नितिन गडकरी को बोलते दिखाया गया था कि आज गाँव, गरीब, मजदूर और किसान दुखी हैं। गाँव में अच्छे रोड नहीं हैं, पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं है, अच्छे अस्पताल नहीं हैं, अच्छे स्कूल नहीं।

इस वीडियो को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस ने ऐसा दिखाया जैसे नितिन गडकरी ने ये कहकर मोदी सरकार के कार्यों की पोल खोली हो। लेकिन इस वीडियो में हकीकत में जो पूरी बात केंद्रीय मंत्री ने कही थी वो थी कि-

“कृषि पर जो पॉपुलेशन डिपेंड है वो 65 प्रतिशत है जब गाँधी जी थे जब 90% की आबादी गाँव में रहती थी और धीरे-धीरे 30% पलायन क्यों हुआ। इसका मतलब है कि आज गाँव गरीब, मजदूर, किसान दुखी है। इसका कारण है कि जल जंगल जमीन और जानवर… ये जो ग्रामीण इकोनॉमी है यहाँ अच्छे रोड नहीं है, पीने के लिए पानी नहीं है, अच्छा अस्पताल नहीं है, अच्छा स्कूल नहीं है, किसान के फसल को अच्छे भाव नहीं है… ऐसा नहीं है कि यहाँ विकास नहीं हुआ, लेकिन जिस हिसाब से बाकी जगह हुआ है उतना नहीं है। हमारी सरकार आने के बाद हम इसपर बहुत काम कर रहे हैं। ऐसे ब्लॉक निकाले गए हैं जहाँ विशेष रूप से कार्य करने की जरूरत है।”

वीडियो से साफ था कि गडकरी के बयान पर जो संदेश फैलाने का काम हो रहा है वो सरासर भ्रामक है। असल में केंद्रीय मंत्री ये बता रहे थे कि पलायन इसलिए हुआ क्योंकि ग्रामीणों को अच्छे संसाधन नहीं मिले और उनकी सरकार इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण रूप से काम कर रही है। न कि वो ये कह रहे हैं कि मोदी सरकार में देश के ये हालात हैं।

कॉन्ग्रेस की इसी हरकत पर उन्हें नोटिस भेजा गया है। लेकिन अभी नोटिस का उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।

बिहार में ‘खेला होगा’ कहते रहे गए तेजस्वी यादव, इधर हर दिन लुट रही है RJD: 15 दिनों में 5 विधायकों ने छोड़ी पार्टी, अब एनडीए में भभुआ के MLA हुए शामिल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब महागठबंधन से नाता तोड़कर NDA के साथ आए तो सरकार में सहयोगी रही तेजस्वी यादव वाली राजद ने खेला होने की बात कही थी। हालाँकि, नीतीश कुमार एनडीए के साथ आ भी गए और सरकार भी चला रहे हैं। हालाँकि, इन सबके बीच राजद के साथ ही खेला हो रहा है। पिछले कुछ हफ्ते में राजद के विधायकों ने पाला बदलकर NDA का दामन थाम लिया।

ताजा मामले में बिहार के भभुआ से राजद विधायक भरत बिंद ने शुक्रवार (1 मार्च 2024) को पार्टी को झटका देते हुए उससे किनारा कर लिया। भरत बिंद ने अब बिहार के सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दामन थाम लिया है। पिछले 15 दिनों में राजद की यह पाँचवीं टूट है। इससे तेजस्वी यादव के पेशानी पर बल पड़ गए हैं।

बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के चार विधायक पाला बदलकर NDA में शामिल हो चुके हैं। इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस के भी दो विधायक एनडीए में शामिल हो चुके हैं। राजद के जिन चार विधायकों ने NDA का दामन थामा, उनमें प्रह्लाद यादव, चेतन आनंद, नीलम देवी और संगीता देवी हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस विधायक सिद्धार्थ सौरभ और मुरारी गौतम ने पार्टी छोड़ दी है।

राष्ट्रीय जनता दल छोड़कर सत्ताधारी NDA में शामिल होने को लेकर भरत बिंद ने कहा, “हमारी इच्छा है तो हम आए हैं।” उन्होंने कहा कि सब लोग तो इधर-उधर आते-जाते रहता है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से प्रभावित हैं। उन्होंने पार्टी बदलने को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।

दरअसल, शुक्रवार (1 मार्च 2024) को विधानसभा में विधायी कार्य का अंतिम दिन था। दोपहर के बाद राष्ट्रीय जनता दल के भभुआ से विधायक भरत बिंद सदन में पहुँचे और सत्ता पक्ष की बेंच पर जाकर बैठ गए। इस दौरान विपक्षी दल के विधायक उन्हें देखकर आवाक रह गए। सदन में मौजूद सदस्य कुछ समझते इसके पहले ही पास में बैठे भाजपा के विधायक नितिन नवीन ने इशारा किया।

भाजपा विधायक नितिन नवीन ने यह बताने का प्रयास किया कि राजद के और एक विधायक एनडीए में शामिल हो गए हैं। इसके बाद भरत बिंद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। उन्होंने बुके देकर नीतीश कुमार को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

कैमूर जिले के चाँद थाना क्षेत्र के सिलौटा गाँव के रहने वाले भरत बिंद ने साल 2010 में अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत की थी। साल 2010 में जिला परिषद का चुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे साल 2015 में बसपा की टिकट पर भभुआ विधानसभा से मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा।

इसके बाद भरत बिंद लालू यादव की पार्टी राजद में शामिल हो गए। साल 2020 के विधानसभा चुनावों में राजद ने उन्हें भभुआ से टिकट दिया। इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई। हालाँकि, अगला विधानसभा चुनाव आने से पहले उन्होंने पार्टी बदल ली और राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।