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मदरसे में नाबालिग को मौलवी ने अधनंगा कर पीटा, छात्रों से कहा- इस पर थूको: ₹100 की घड़ी चुराने का आरोप लगाकर की बर्बरता

महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित एक मदरसे में 100 रुपए की घड़ी चुराने के जुर्म में नाबालिग लड़के के साथ बर्बरता करने की घटना सामने आई है। चोरी के आरोप में छात्र को मदरसे के मौलाना सैयद उमर अली ने ‘क्रूर सज़ा’ देने का फैसला किया। 16 साल के किशोर को अर्धनग्न करके उसके साथी छात्रों ने उस पर थूका। इतना ही नहीं, उसकी बुरी तरह से पिटाई भी की गई।

जिस किशोर छात्र के साथ यह बर्बरता की गई, वह गुजरात के सूरत का रहने वाला है। उसका दाखिला छत्रपति संभाजी नगर (पूर्व में औरंगाबाद) के खुलताबाद इलाके के जामिया बुरहानुल उलूम मदरसा में हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस किशोर ने पास की दुकान से एक घड़ी चुरा ली। उस घड़ी की कीमत सिर्फ 100 रुपए बताई जा रही है। चोरी की वारदात इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई।

चोरी का पता चलने पर दुकानदार ने तुरंत इसकी शिकायत दर्ज कराई। चोरी का सामान बरामद हो गया। बाद में मदरसे के मौलवी सैयद उमर अली ने छात्र को क्रूर सज़ा देने का फैसला किया। उसने किशोर को अर्धनग्न करके उसकी जमकर पिटाई की। इतना ही नहीं, उसने साथी छात्रों से भी उसे पिटवाया। साथी छात्रों ने उस पर थूका भी। नाबालिग छात्र के साथ बर्बरता का ये कुकृत्य रिकॉर्ड भी किया गया।

इसकी फुटेज जब पीड़ित परिवार तक पहुँची तो वे घबरा गए। उन्होंने इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस स्टेशन में दी और इसकी शिकायत दर्ज करवाई है। इस मामले में मौलवी के खिलाफ माइनर स्टूडेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। हालाँकि, मौलवी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। वहीं, मारपीट करने वाले नाबालिग छात्रों को समझा कर छोड़ दिया गया।

मदरसों में इस तरह की घटनाएँ आम हैं। मार-पिटाई ही नहीं, बल्कि बच्चों के यौन शोषण की भी घटनाएँ सामने आती रहती हैं। अभी कुछ दिन पहले बिहार के पूर्णिया जिले में एक मदरसा टीचर पर छात्राओं के साथ छेड़खानी और सहकर्मी महिला शिक्षिका से रेप का आरोप लगा था। आरोपित टीचर का नाम मोहम्मद तहसीन है। तहसीन पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मदरसे में बड़ी उम्र की लड़कियाँ पढ़ने जाती हैं। पढ़ाई के दौरान ही सहायक टीचर मोहम्मद तहसीन उन लड़कियों को मदरसे के ऊपर बने कमरे में ले जाता है और वहाँ उनसे मालिश करवाता है। मोहम्मद तहसीन का मदरसे में ही पढ़ाने वाली एक महिला शिक्षिका के साथ गलत संबंध है। तहसीन के किसी आपत्तिजनक वीडियो के भी वायरल होने का दावा किया जा रहा है।

इसी तरह कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मदरसा में पढ़ाने वाले एक मौलाना द्वारा अपनी छात्रा से रेप करने का मामला सामने आया था। पीड़िता की उम्र महज 8 वर्ष है। मौलाना आब्दीन का बच्ची की माँ से भी अवैध संबंध थे। इस मामले में पुलिस ने 19 फरवरी 2024 को केस दर्ज करके मौलाना आब्दीन और बच्ची की माँ को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, आब्दीन का भाई अरशद फरार था।

दरभंगा में मोहम्मद जावेद के मकान से मिले 7 जिंदा बम, विस्फोट होने पर लोगों ने दी थी पुलिस को खबर: किसी बड़ी घटना को अंजाम देने का अंदेशा

बिहार के दरभंगा जिले के एक गाँव में पुलिस ने मोहम्मद जावेद के घर से 7 जिंदा बम बरामद किए हैं। कहा जा रहा है कि इस इलाके में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना के तहत इतनी बड़ी संख्या में बमों को रखा गया था। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है कि आखिर किन उद्देश्यों के लिए यहाँ बम रखे गए थे। साथ ही इसमें जावेद की संलिप्तता की भी जाँच की जा रही है।

बताया जाता कि जिले के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटी एकमी गाँव में बीती रात (29 फरवरी 2024) को एक अर्ध निर्मित मकान में विस्फोट आ था। धमाके की आवाज सुनकर गाँव के लोग घबरा गए। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुँची और उस घर से 7 जिंदा बम बरामद कर लिया। पुलिस ने इन बमों को डिफ्यूज कर दिया है।

गाँव वालों ने पुलिस को सूचना डायल 112 के जरिए दी थी। सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक, दरभंगा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर थानाध्यक्ष लहेरियासराय, थानाध्यक्ष बहादुरपुर, गश्ती दल पदाधिकारी, बहादुरपुर थाना पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी एवं डायल 112 की टीम घटनास्थल पर पहुँची थी। वहाँ बम स्क्वॉयड को भी बुला लिया गया था।

मौके पर पहुँचकर पुलिस ने देखा कि घटनास्थल पर एक बोरा है। उसमें सात जिंदा बम रखे हुए हैं। वहीं, विस्फोट हुए बम का अवशेष एक उस मकान में फैला हुआ है। दरभंगा के सिटी एसपी शुभम आर्य ने कहा कि मौके पर पुलिस को भेजा गया तो घटनास्थल से दो फूटा हुआ बम का बिखरा हुआ टुकड़ा बरामद हुआ। इस घटना के सम्बन्ध में बहादुरपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज करके जाँच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस मकान मालिक जावेद से भी पूछताछ कर रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन बमों को रखने में कहीं जावेद की तो भूमिका नहीं है। एसपी का कहना है कि अगर इसमें जावेद की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

राहुल गाँधी को क्रैंबिज ने ‘लेक्चर’ पर नहीं बुलाया, ‘पेड इवेंट’ के लिए भारत जोड़ो न्याय यात्रा रोक कर गए हैं ब्रिटेन: जीसस कॉलेज ने ऑपइंडिया को बताया

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को बीच में छोड़कर विदेश निकल गए हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने प्रचारित किया कि उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने लेक्चर देने के लिए बुलाया है। ये सारा दावा फर्जी निकला है, ऑपइंडिया के पास इस बात के एक्सक्लूसिव सबूत हैं।

दरअसल, राहुल गाँधी की जिस यात्रा को कैंब्रिज विश्वविद्यालय की यात्रा बताया जा रहा है, वो दरअसल एक कॉलेज की यात्रा है। यही नहीं, उस कॉलेज में भी राहुल गाँधी ने जो ‘भाषण’ यानी लेक्चर दिया है, उससे सुनने वाले भी मुट्ठी भर लोग थे। और इस भाषण को देने के लिए ‘व्यवस्था’ करनी पड़ी, क्योंकि इस जगह को पैसे देकर कोई भी बुक कर सकता है।

ऑपइंडिया ये बात यूँ ही नहीं कह रहा है, बल्कि खुद कैंब्रिज विश्वविद्यालय के उस जीसस कॉलेज ने ही ये साफ कर दिया है कि राहुल गाँधी की विजिट ‘बुकिंग’ के बाद हुई थी। उसका कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और जीसस कॉलेज से कोई लेना देना नहीं है। न ही कॉलेज और न ही विश्वविद्यालय की उसमें कोई सहभागिता रही, न ही वो इस कार्यक्रम के आयोजक रहे।

बता दें कि 21 फरवरी 2024 को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ये जानकारी दी थी कि राहुल गाँधी अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को बीच में रोककर 26 फरवरी से 1 मार्च के लिए कैंब्रिज विश्वविद्यालय जा रहे हैं। जहाँ वो ‘लंबे समय से प्रस्तावित’ दो विशेष लेक्चर देंगे। ये लेक्चर 27 फरवरी और 28 फरवरी को होंगे। इसके लिए वो नई दिल्ली में हो रही पार्टी की बैठकों तक में शामिल नहीं हो पाएँगे, क्योंकि ये लेक्चर बहुत अहम हैं।

इसके बाद कॉन्ग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं, नेताओं ने राहुल गाँधी की ‘तथाकथित कैंब्रिज विश्वविद्यालय’ में दिए गए लेक्चर को शेयर किया। किसी ने उन्हें सादगी की मूर्ति बताया, तो किसी ने कुछ। चूँकि कॉन्ग्रेस का दावा है कि ‘लंबे समय’ ये लेक्चर तय था, ऐसे में कॉन्ग्रेसियों ने माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छूटी, लेकिन अब इसकी असलियत सामने आ चुकी है, क्योंकि राहुल गाँधी को बुलाना तो दूर, कैंब्रिज ने पूछा तक नहीं। न ही कैंब्रिज विश्वविद्यालय और न ही जीसस कॉलेज की तरफ से इस कार्यक्रम की सूचना दी गई है और न ही आधिकारिक कार्यक्रमों में इसे लिस्ट किया गया है।

कैंब्रिज की वेबसाइट पर कोई सूचना नहीं।

ऑपइंडिया ने पूछे सवाल, जीसस कॉलेज ने दिया जवाब, ये है कॉन्ग्रेस के फर्जीवाड़े का सबूत

कॉन्ग्रेस पार्टी ने कैंब्रिज के जिस ‘लेक्चर’ का भौकाल बनाया था, जब उसके बारे में सही सूचनाएँ नहीं मिली, तो ऑपइंडिया ने जीसस कॉलेज के प्रशासन से संपर्क किया और 5 सवाल पूछे:

1-कॉन्फ्रेंस रूम कब और कितने समय के लिए बुक किया गया था?

2-कार्यक्रम के आयोजक कौन थे?

3-क्या कॉलेज प्रशासन ने राहुल गाँधी को कार्यक्रम में बोलने के लिए आमंत्रित किया था?

4-कार्यक्रम में कितने उपस्थित लोग उपस्थित थे?

5-ऐलेना हॉल को बुक करने के लिए आयोजकों ने कितना भुगतान किया?

इसके जवाब में जीसस कॉलेज ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के सभी दावों की हवा निकाल दी। कैंब्रिज विश्वविद्यालय से संबद्ध जीसस कॉलेज की प्रवक्ता ने 1 मार्च को ऑपइंडिया के सवालों के लिखित में जवाब दिए। जिसमें बताया गया कि जीसस कॉलेज के ऐलेना हाल में हुआ कार्यक्रम एक ‘पेड कार्यक्रम’ था, इसे कॉलेज प्रशासन ने आयोजित नहीं किया था। जवाब में लिखा गया है, “ये बाहरी कार्यक्रम था, कॉमर्शियल बुकिंग के आधार पर हुआ था। कॉलेज का इस कार्यक्रम के आयोजन या फंडिंग से कोई लेना-देना नहीं है।”

राहुल गाँधी के कार्यक्रम की सच्चाई

इस रिपोर्ट से साफ है कि राहुल गाँधी का ‘कैंब्रिज दौरा’ जनता की आँखों में धूल झोंकने जैसा था। न ही राहुल गाँधी को कैंब्रिज ने बुलाया और न ही जीसस कॉलेज ने। बल्कि पेड कार्यक्रम के जरिए भारत देश की 140 करोड़ जनता को भ्रम में डालने का प्रयास कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी की तरफ से किया गया।

(दिबाकर दत्ता की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है। विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)

‘TMC नेता ने संदेशखाली में बहन-बेटियों के साथ दुस्साहस की हदें पार की’: PM मोदी ने ‘CM दीदी’ को घेरा, बंगाल को दी ₹7000+ करोड़ की परियोजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड के बाद अब पश्चिम बंगाल पहुँच गए हैं। बंगाल में पीएम मोदी ने सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने संदेशखाली का मुद्दा भी उठाया। टीएमसी से निलंबित किए गए नेता शाहजहाँ शेख पर संदेशखाली की महिलाओं ने यौन शोषण और जमीनों पर कब्जे का आरोप लगाया है।

पश्चिम बंगाल के आरामबाग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “बंगाल की स्थिति आज पूरा देश देख रहा है। माँ, माटी, मानुष… इसकी ढोल पीटने वाली टीएमसी ने संदेशखाली की बहनों के साथ जो किया है, उसे देखकर पूरा देश दुखी है… आक्रोशित है। राजा राममोहन राय की आत्मा आज जहाँ कहीं भी होगी, इन लोगों के कारनामे देखकर अत्यंत दुखी हुई होगी।”

उन्होंने आगे कहा, “इन्होंने संदेशखाली में जो किया, उसे देखकर राजा राममोहन राय की आत्मा आज रोती होगी। टीएमसी के नेता ने संदेशखाली में बहनों-बेटियों के साथ दुस्साहस की सारी हदें पार कर दीं। जब संदेशखाली की बहनों ने अपनी आवाज बुलंद की, ममता दीदी से मदद माँगी तो उन्हें बदले में क्या मिला? मुख्यमंत्री दीदी ने… बंगाल सरकार ने टीएमसी के नेता को बचाने के लिए पूरी शक्ति लगा दी।”

प्रधानमंत्री यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा, “बीजेपी ने नेताओं ने रात-दिन लड़ाई लड़ी। माताओं-बहनों के सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी। लाठियाँ खाईं, मुसीबतें झेलीं। बीजेपी के दबाव में आखिरकार कल (29 फरवरी 2024) बंगाल पुलिस ने आपकी (जनता की) ताकत के सामने झुक करके उस आरोपित को गिरफ्तार करना पड़ा।”

ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए धरने पर बैठ जाती हैं। टीएमसी चाहती है कि केेंद्र की योजनाओं में भी उनको खुली लूट करने का मौका मिले। अब मोदी इनकी मनमानी चलने नहीं दे रहा है। इसलिए मोदी को टीएमसी अपना दुश्मन नंबर वन मानती है। (आम लोगों से पूछते हुए) आप ही मुझे बताइए, क्या मैं टीएमसी की ये लूट चलने दूँ क्या?”

उन्होंने जनता से मुखातिब होते हुए पूछा, “ये टीएमसी जो करती है, उसे मैं करने दूँ क्या? ये पैसा आपका है या नहीं है? ये बंगाल के लोगों का पैसा है या नहीं है? आपकी मेहनत का पैसा है कि नहीं है? क्या मैं उसे औरों को लूटने दूँ? इन लूटेरों से मैं लड़ता हूँ तो अच्छा करता हूँ या नहीं करता हूँ?” इस दौरान जनता ने पीएम मोदी के पक्ष में जमकर नारे लगाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज मैं बंगाल की जनता से वादा हूँ। ये मेरी गारंटी है कि इन लूटने वालों को लौटाना पड़ेगा। ये मोदी छोड़ने वाला नहीं है। मोदी इनकी गालियों से डरता नहीं है। इनके हमले से डरने वाला… रूकने वाला मोदी नहीं है। मैंने पश्चिम बंगाल के बहनों, गरीबों और युवाओं को गारंटी दी है। मोदी की गारंटी ये है कि जिसने गरीब को लूटा है, उसको लौटाना ही पड़ेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि TMC ने बंगाल में अपराध और भ्रष्टाचार का एक नया मॉडल पैदा कर दिया है। राज्य सरकार भ्रष्टाचार एवं अपराध को बढ़ावा देती है और अपराधियों को संरक्षण के बदले TMC नेताओं को भर-भर कर पैसे मिलते हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार गरीब, किसान, नौजवान और महिला के सशक्तिकरण में बहुत बड़ी रुकावट है। इन वर्गों के बिना बंगाल विकसित नहीं हो सकता।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में 7,000 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में रेलवे, बंदरगाह, पेट्रोल और जल शक्ति जैसे बुनियादी ढाँचा शामिल हैं। सरकार ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह और अन्य संबद्ध परियोजनाओं से संबंधित बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए 1,000 करोड़ रुपए की घोषणा की।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट, मौके पर बम निरोधक दस्ता: बोले बीजेपी MP तेजस्वी सूर्या- कस्टमर छोड़कर गया था बैग, CM दें जवाब

बेंगलुरु के एक कैफे में रहस्यमयी धमाका हुआ है। यहाँ एक बैग में रखे सामान में ब्लास्ट होने से पाँच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। धमाका रामेश्‍वरम कैफे में हुआ है। एचएएल पुलिस स्टेशन को एक घटना की सूचना मिली जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची। बेंगलुरु के कैफे में हुए धमाके को शुरूआती जानकारी में सिलेंडर ब्लास्ट का मामला बताया गया। हालाँकि भाजयुमो अध्यक्ष और बेंगलुरु से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कैफे के संचालक के हवाले से दावा किया है कि ये विस्फोट एक बैग में हुआ, जो एक ग्राहक लेकर आया था।

सिलेंडर ब्लास्ट की मिली थी सूचना

शुरुआती जानकारी में पता चला कि बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में द रामेश्वरम कैफे में विस्फोट हुआ, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए। व्हाइटफील्ड फायर स्टेशन की तरफ से बताया गया कि उन्हें सिलेंडर ब्लास्ट की सूचना मिली थी। एक कर्मचारी ने बताया, “हमें फोन आया कि रमेश्वरम कैफे में सिलेंडर विस्फोट हुआ है। हम मौके पर पहुँचे और स्थिति का विश्लेषण कर रहे हैं।”

भाजयुमो अध्यक्ष और बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे बम धमाका बताते हुए मुख्यमंत्री से स्पष्टता की माँग की है। तेजस्वी सूर्या ने कहा, “अभी-अभी रामेश्वरम कैफे के संस्थापक श्री नागराज से उनके रेस्तरां में हुए विस्फोट के बारे में बात हुई। उन्होंने मुझे बताया कि विस्फोट एक ग्राहक द्वारा छोड़े गए बैग के कारण हुआ, न कि किसी सिलेंडर विस्फोट के कारण। इस धमाके में रेस्तराँ का एक कर्मचारी भी घायल हो गया है। यह स्पष्ट तौर पर बम विस्फोट का मामला लग रहा है। सीएम सिद्दारमैया से बेंगलुरू स्पष्ट जवाब चाहती है।”

बम निरोधक दस्ता भी रामेश्वरम कैफे पहुँचा, जहाँ धमाका हुआ था।

घटनास्थल पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम और जाँच में जुट गई।

बेंगलुरु सेंट्रल से बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बेंगलुरु सेंट्रल संसदीय क्षेत्र के रामेश्वरम कैफे में रहस्यमयी विस्फोट के बारे में सुनकर चिंतित हूँ। मेरी संवेदनाएँ प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। अधिकारियों से जाँच करने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह है।”

बता दें कि ये धमाका 1 मार्च को दोपहर के समय हुआ। इस धमाके में पाँच लोगों के घायल होने की खबर है। जिस रामेश्वरम कैफे में ये धमाका हुआ, वहाँ आम तौर पर काफी भीड़ रहती है। हालाँकि अभी तक धमाके की वजह सामने नहीं आ पाई है। जाँच के बाद ही धमाके की असली वजह सामने आ पाएगी।

छोटे बेटे की शादी से पहले नीता अंबानी ने बताई ‘मन की 2 इच्छाएँ’, अनंत-राधिका की प्री वेडिंग जलसे के लिए जामनगर चुनने की वजह भी बताई

गुजरात के जामनगर में अनंत-राधिका के प्री वेडिंग फंक्शन की तैयारियों के बीच अंबानी परिवार ने कला-संस्कृति, हिंदू धर्म, पशु प्रेम को लेकर जो अपना लगाव जाहिर किया है, उसकी तारीफ हर भारतीय कर रहा है। इसी बीच एक और वीडियो सामने आई है। इसमें रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने बताया कि उनकी छोटे बेटे अनंत की शादी को लेकर दो सबसे खास क्या इच्छाएँ हैं।

नीता अंबानी की इस वीडियो में उन्होंने बताया कि वो पूरी जिंदगी कला से प्रेरणा लेती रही हैं। वह कला के प्रति काफी पैशनेट भी हैं। उन्होंने कहा, “अपने पूरे जीवन में, मैं कला और संस्कृति से प्रेरित रही हूँ। इसने मुझे गहराई से प्रभावित किया है और मैं इसे लेकर बहुत भावुक हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मेरे सबसे छोटे बेटे अनंत की राधिका के साथ शादी की बात आई, तो मेरी दो महत्वपूर्ण इच्छाएँ थीं। सबसे पहले, मैं अपनी जड़ों के साथ उत्सव को मनाना चाहती थी। जामनगर हमारे दिलों में एक विशेष स्थान रखता है और इसका गहरा महत्व है।”

नीता अंबानी ने कहा, “गुजरात वह जगह है जहाँ से हम आते हैं। यहीं पर मुकेश अंबानी और उनके पिता धीरू भाई अंबानी ने रिफाइनरी का निर्माण किया और मैंने इस शुष्क और रेगिस्तान जैसे क्षेत्र को हरे-भरे टाउनशिप और एक जीवंत समुदाय में परिवर्तित करके अपना करियर शुरू किया।”

अपनी दूसरा इच्छा बताते हुए वह बोलीं, “दूसरा, मैं चाहता थी कि यह उत्सव हमारी कला और संस्कृति के प्रति एक ट्रिब्यूट हो और हमारे प्रतिभाशाली क्रिएटिव दिमागों के हाथों, दिलों और कड़ी मेहनत से बनाई गई हमारी विरासत और संस्कृति का प्रतिबिंब हो।” इस वीडियो में नीता अंबानी ने कहा कि वह भारत की पवित्र भूमि के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करती हैं, जिसके स्तंभ ‘संस्कृति’ और ‘परंपरा’ हैं।

बता दें कि अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी से पूर्व पूरा अंबानी परिवार जामनगर में आकर लगातार धर्म-कर्म के कार्यों में जुटा है। उन्होंने हाल में जामनगर में 14 मंदिरों का निर्माण करवाया है जिसकी सुंदर देखते ही बनती है। इसके अलावा उन्होंने प्री वेडिंग की जो शुरुआत की है उसे भी अन्न सेवा से की है। इसके लिए उन्होंने 51 हजार लोगों को बिठाकर भोजन करवाया। अभी हाल में अनंत अंबानी का इंटरव्यू भी सामने आया है जिसमें उन्होंने अपने परिवार के धार्मिक होने की बात बताई थी। उन्होंने अपने भाई को राम समान बताया और बहन को माँ जैसी।

अब ओलंपिक और नेशनल ट्रायल रुकवाने दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा ‘पहलवान गैंग’, कहा- भारतीय कुश्ती संघ नहीं जारी कर सकता सर्कुलर

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के खिलाफ खड़े होने वाले पहलवान बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और सत्यव्रत कादियान ने एक बार फिर कोर्ट का रूख किया है। इन पहलवानों ने WFI द्वारा पहलवानों को एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर और विश्व ओलंपिक क्वालीफायर के चयन ट्रायल में भाग लेने के लिए बुलाने का विरोध किया है। उन्होंने इसके खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दी है।

पहलवानों द्वारा दायर याचिका पर अगले सप्ताह उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। ये वही पहलवान हैं, जो भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। बृजभूषण शरण सिंह के कार्यकाल खत्म होने के बाद संजय सिंह कुश्ती संघ के प्रमुख बने हैं और भाजपा सासंद के करीबी माने जाते हैं।

पहलवानों ने अपनी याचिका में कहा है कि WFI को खेल मंत्रालय द्वारा निलंबित कर दिया गया है। इसलिए उसके पास पहलवानों को ट्रायल के लिए बुलाने की कोई शक्ति नहीं है। याचिका में तर्क दिया गया है कि WFI के मामलों के प्रबंधन के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) द्वारा एक तदर्थ समिति का गठन किया गया था। इसके बाद भी WFI ने चयन परीक्षणों के लिए नोटिस जारी किया है।

याचिका में आगे कहा गया है, “जब तक प्रतिवादी नंबर 2 (WFI) को इस तरह के आयोजनों को आयोजित करने या ऐसे किसी भी परिपत्र को जारी करने से रोका नहीं जाता है, तब तक वह कुश्ती खिलाड़ियों को गुमराह करना, हेरफेर करना, प्रभावित करना, धमकाना, अनुचित एवं अनावश्यक प्रतिकूलताएँ पैदा करना जारी रखेगा।”

याचिका में कहा गया है कि तदर्थ समिति ने ट्रायल की तारीखें भी जारी की हैं और वे WFI द्वारा जारी की गई तारीखों से मेल खाती हैं। इससे दो समानांतर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के परिणामस्वरूप प्रतिस्पर्धा करने वाले एथलीटों के बीच भ्रम और असमानता पैदा होगी। साथ ही याचिकाकर्ताओं की पात्रता प्रामाणिकता से WFI जानबूझकर छेड़छाड़ कर सकता है।

याचिकाकर्ता पहलवानों ने यह भी तर्क दिया है कि भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा उन्हें और अन्य पहलवानों को जानबूझकर परेशान किया गया है, क्योंकि उन्होंने महासंघ में अवैधताओं और बृज भूषण शरण सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर मुखर और आलोचनात्मक रूख अपनाया था। उन्होंने कोर्ट से 10-11 मार्च को होने जा रहे ट्रायल पर रोक लगाने की माँग की है।

इन पहलवानों ने WFI के ट्रायल का भी बहिष्कार किया है। पहलवानों ने कहा कि जब तक सरकार इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करती और उचित समाधान नहीं निकालती, तब तक प्रदर्शनकारी पहलवान भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा घोषित राष्ट्रीय ट्रायल में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, “हम ट्रायल में तभी शामिल होंगे जब तदर्थ पैनल या सरकार इसे आयोजित करेगी।” 

पिछले दो महीने से रुस में प्रशिक्षण ले रहे बजरंग पूनिया ने कहा कि वह ट्रायल का हिस्सा नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “अगर मैं ट्रायल में भाग नहीं लेता तो मैं अपने प्रशिक्षण पर 30 लाख रुपए खर्च नहीं करता, लेकिन निलंबित WFI ट्रायल कैसे आयोजित कर रहा है? मुझे समझ में नहीं आ रहा कि सरकार की मजबूरी क्या है?” WFI ने यह सर्कुलर 26 फरवरी को जारी किया था।

बता दें कि विश्व कुश्ती की सर्वोच्च संस्था युनाइटेड व‌र्ल्ड रेसलिंग (UWW) ने भारत पर लगाया गया अस्थायी निलंबन इस साल फरवरी के मध्य में हटा लिया था। प्रतिबंध हटाने का मतलब है कि भारतीय पहलवान अब विश्व संस्था की अगली प्रतियोगिता में देश के ध्वज तले खेल पाएँगे। दरअसल, समय पर चुनाव नहीं करा पाने के कारण यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने पिछले साल 23 अगस्त को उसे निलंबित कर दिया था। हालाँकि, बाद में चुनाव हुए और इसमें संजय सिंह विजयी हुए।

 

कॉन्ग्रेस की जीत के बाद कर्नाटक विधानसभा में लगे थे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, फॉरेंसिक जाँच से खुलासा: मीडिया में सूत्रों के हवाले से दावा

कर्नाटक विधानसभा में कॉन्ग्रेस नेता की जीत पर लगे नारों के बाद जो विवाद उपजा उस पर एक नई जानकारी सामने आई है। इंडिया टुडे ने अपने सूत्रों के हवालों से छापी रिपोर्ट में बताया है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि वीडियो में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद-जिंदाबाद’ ही कहा जा रहा था।

इंडिया टुडे की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में कहा गया है कि जो फॉरेंसिक रिपोर्ट राज्य सरकार को दी गई है उसमें कन्फर्म है कि पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी वीडियो और ऑडियो दोनों में हुई है। यानी कि जो फुटेज भाजपा नेताओं ने शेयर की थी वो बिलकुल भ्रामक नहीं है।

गौरतलब हो कि अगर इंडिया टुडे की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में दी जानकारी सही निकलकर आती है तो ये सवाल जरूर उठेगा कि आखिर ऑल्ट न्यूज वाले मोहम्मद जुबैर ने और कॉन्ग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने कौन सी रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि सदन में कहीं पाकिस्तान समर्थन में नारे नहीं लगे और सारे आरोप भाजपा की साजिश हैं।

बता दें कि मोहम्मद जुबैर ने और प्रियांक खड़गे ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के मामले में नासिर हुसैन के समर्थकों को क्लीन चिट उसी दिन दे दी थी जब ये मामला मीडिया में सामने आया था। कॉन्ग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने तो कहा था कि उन्होंने फॉरेंसिक जाँच भी करवा ली है और रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं मिला।

हालाँकि उसके अगले ही दिन खबर आई कि पुलिस तो अभी इस मामले में जाँच कर ही रही है। उन्होंने बताया था कि उन्होंने ब्यादगी शहर से शफी नशीपुड़ी नाम के शख्स को हिरासत में लिया है और उसकी आवाज का सैंपल मिलाने के लिए जाँच के लिए भेजा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार हावेरी के एसपी अंशु कुमार ने बताया था कि 27 फरवरी को विधानसभा में नारेबाजी को लेकर एक केस दर्ज हुआ था। बाद में इस मामले में मोहम्मद शफी को उठाया गया था। उससे पूछताछ हुई। वहीं शफी ने मीडिया में आकर सबको बताया कि उसने नासिर खान जिंदाबाद, नासिर साहब जिंदाबाद कहा है, जो आरोप लग रहे हैं वो सारे झूठे हैं।

अब देखना है कि सूत्रों के हवाले से जो एक्सक्लूसिव खबर इंडिया टुडे ने चलाई है उसकी सच्चाई क्या है। मामले में आधिकारिक बयान आने के बाद ही स्पष्ट होगा भाजपा नेताओं के दावे सच थे या फिर कॉन्ग्रेस मंत्री की बात।

सिद्धार्थ के पेट में अन्न का नहीं था दाना, शरीर पर थे घाव ही घाव: केरल में छात्र की मौत के बाद SFI के 9 गुंडों की तलाश, पीड़ित पिता बोले- डीन को सब पता था

केरल के वायनाड जिले में स्थित पुक्कोडे पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में सेकंड ईयर के स्टूडेंट सिद्धार्थ जेएस की मौत को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। यहाँ एसएफआई के कार्यकर्ताओं पर उसकी हत्या के आरोप लगे हैं, जिसमें 8 को गिरफ्तार कर लिया गया है, तो अब सिद्धार्थ के पिता ने डीन डॉ एमके नारायणन पर मामले की लीपापोती के आरोप लगाए हैं। सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश टी ने कहा है कि डीन डॉ एमके नारायणन को घटना के बारे में पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद वो छात्रों पर मुँह बंद करने का दबाव डालते रहे।

एसएफआई से जुड़े कई नेता गिरफ्तार

सिद्धार्थ आत्महत्या केस में 6 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज यूनियन अध्यक्ष के. अरुण और एसएफआई के कॉलेज ईकाई सचिव अमल इहसन ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि एसएफआई से जुड़े आसिफ खान समेत 9 अन्य आरोपितों की तलाश पुलिस कर रही है। डीएसपी टीएन सजीव ने मीडिया से बातचीत में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आसिफ खान समेत 9 आरोपितों की तलाश जारी है, जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डीएसपी सजीव ने कहा कि शेष आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी चल रही है।

इस बीच, मृतक छात्र सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने कहा कि कैंपस के डीन डॉ नारायणन ने इस मामले में लीपापोती की है और उन्हें पूरे मामले की जानकारी थी। ऐसे में उन्हें भी आरोपित बनाया जाए। सिद्धार्थ के पिता ने कहा, “मुझे यही लग रहा था कि सिद्धार्थ की मौत आत्महत्या का मामला है और मैं इसके पीछे के कारण के बारे में सोच रहा था।” उन्होंने कहा, “एक छात्र ने मुझे बताया कि एसएफआई नेता ने उन्हें सिद्धार्थ की मौत की असलियत बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। यहाँ तक कि परिसर में शिक्षक और प्रशासनिक प्रमुख भी इन एसएफआई गुंडों की धुन पर नाचने वाली कठपुतली मात्र हैं। ऐसे कई अन्य छात्र हैं जिन्हें इसी तरह से प्रताड़ित किया गया।”

इस मामले में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने नारायणन से जवाब माँगा था कि सिद्धार्थ पर हमले को लेकर इतने दिनों तक कोई रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। इसका जवाब देते हुए नारायणन ने बताया कि वो व्यस्त थे। उन्होंने परिसर में सिक्योरिटी को बढ़ाने की घोषणा की और कहा कि सीसीटीवी कैमरों की संख्या के साथ ही सुरक्षाकर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। नारायणन ने कहा है कि इस मामले की जाँच की जा रही है, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि पुलिस ने 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब ये संख्या बढ़कर 8 हो चुकी है। 9 अब भी फरार हैं।

एसएफआई का गढ़ है पुक्कोड़ कैंपस

बता दें कि वायनाड के पुक्कोडे में केरल पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (केवीएएसयू) परिसर एसएफआई का गढ़ रहा है, जहाँ अन्य राजनीतिक विचारधाराओं की कोई जगह नहीं है। यहाँ विरोधी विचारधारा को कुचल दिया जाता है। ऐसे में छात्रों के सामने सिर्फ एसएफआई से ही जुड़ने का रास्ता रहता है।

अपना नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने ओनमनोरमा से कहा, ‘चाहे वो छात्रों का आपसी विवाद हो, या छात्रों की शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें, या कैंपस में किसी तरह की प्रशासनिक दिक्कत, सबकुछ एसएफआई से जुड़े छात्र नेताओं के हाथ में रहता है। यहाँ कंगारू कोर्ट लगाकर छात्रों, शिक्षकों को सजा दी जाती है और लोगों को डराया धमकाया जाता है।’ शिक्षक का कहना है कि अगर खुद शिक्षक या कोई कर्मचारी विरोध करता है या शिकायत करता है, तो उसे एसएफआई के लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता है। वो व्यक्ति खुद मुसीबत में फंस जाता है।

एसआईटी करेगी मामले की जाँच

इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मामले की जाँच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया है। सीएम कार्यालय की तरफ से इस बारे में नोट जारी कर बताया गया है कि “सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की जाँच करेगी।” वहीं, विपक्षी नेता वीडी सतीसन ने इस मामले में डीन को आरोपित बनाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि अगर एसएफआई को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यूडीएफ बड़ा विरोध-प्रदर्शन करेगी।

सिद्धार्थ नाम के छात्र ने कर ली थी आत्महत्या

गौरतलब है कि 18 जनवरी, 2024 को वायनाड के एक कॉलेज में पशु विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी। सिद्धार्थ को कॉलेज हॉस्टल के एक टॉयलेट में लटकता पाया गया था। इसके बाद सिद्धार्थ की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में कई खुलासे हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि मौत से पहले सिद्धार्थ को बुरी तरीके से मारा पीटा गया था। उसका पेट खाली था और शरीर पर घाव थे।

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया। इस मामले में 12 छात्रों को कॉलेज से निलंबित भी कर दिया गया। निलंबित किए जाने वालों में एसएफआई के वामपंथी छात्र नेता भी हैं। सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने बताया है कि उनके बेटे को वामपंथी छात्रों ने काफी प्रताड़ित किया।

उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ ने 14 फरवरी (वैलेंटाइन डे) के दिन एक छात्रा के साथ डांस किया था। वामपंथी छात्र इससे खीझ गए थे। वह अगले दिन घर लौटने वाला था। लेकिन इन SFI नेताओं ने बेटे को हॉस्टल में बुलाकर प्रताड़ित करना चालू किया। तीन दिनों तक लगातार उसे प्रताड़ित किया गया। उसे खाना पीना नहीं दिया गया। उसे रॉड से पीटा गया। उसको नंगा करके हॉस्टल में घुमाया गया और बेइज्जत किया गया। इसके बाद सिद्धार्थ के आत्महत्या की खबर आई।

महाराष्ट्र के मीरा भयंदर में 8 रोहिंग्या मुस्लिम गिरफ्तार, बिना वैध कागजात के मछली पकड़ने का करते थे काम: बोले- जम्मू-कश्मीर में रहता है उनका परिवार

महाराष्ट्र पुलिस ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को भारत में अवैध रूप से रह रहे म्यांमार के 8 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने कहा कि इन अवैध घुसपैठियों को 26 फरवरी 2024 को उत्तान सागरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर विदेशी अधिनियम के साथ-साथ भारती पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए है।

जिन आठ लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनकी पहचान हामिद हुसैन अली अकबर (55), नूरुल अमीन यूसुफ अली (52), अली हुसैन अब्दुल सोबी (49), अमीर हुसैन असद अली (42), मोहम्मद जौहर नूर मोहम्मद (39), कमाल हुसैन नूर कमाल (35), मोहम्मद जाकिर हुसैन अबू आलम (30) और इमाम हुसैन अब्दुल कासिम (25) के रूप में हुई है।

उत्तान सागरी पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने कहा, “एक गुप्त सूचना पर उन्हें चौकगाँव मछली पकड़ने के घाट से गिरफ्तार किया गया है। वे वैध दस्तावेजों के बिना एमबीवीवी पुलिस सीमा में रह रहे थे। आगे की जाँच चल रही है।” इससे पहले पुलिस ने इन्हें पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहे थे। ये सभी हिंदी बोलने में निपुण हैं।

अवैध रूप से भारत में रह रहे इन रोहिंग्याओं ने दावा किया कि वे शरणार्थी हैं, जो मछली पकड़ने वाली नौकाओं में सहायक के रूप में नौकरियों की तलाश में तटीय क्षेत्र में आए थे। इसके बाद पुलिस ने नई दिल्ली में म्यांमार के दूतावास से संपर्क स्थापित किया और उनके बारे में अप्रवासी विवरण माँगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके परिवार जम्मू-कश्मीर में रहते हैं।

दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में भारतीय क्षेत्र में म्यांमार के नागरिकों के वीजा-मुक्त प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाने के लिए फ्री मूवमेंट रिजिम (एफएमआर) को तत्काल निलंबित करने की सिफारिश की है। इस बीच, अवैध अप्रवासियों को ठाणे की जिला सत्र अदालत में पेश करने के बाद पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। आगे की जाँच चल रही थी।

बता दें कि बांग्लादेश और म्यांमार से अवैध रूप से भारत में घुसे रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी मुस्लिम अब देश के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। वे ना सिर्फ अवैध रूप से देश में घुसकर काम-काज कर रहे हैं, बल्कि खुद को यहाँ का निवासी साबित करने के लिए आधार और वोटर कार्ड जैसे फर्जी दस्तावेज भी बना रहे हैं। अब वे मृत लेगों के आधार और वोटर कार्ड आदि दस्तावेज अपने नामों पर हस्तांतरण करा रहे हैं।

ये घुसपैठिए भारत के अलग-अलग राज्यों में छिप कर रह रहे हैं और अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे लोगों के पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। इन नामों से ये घुसपैठिए ना सिर्फ अपना कारोबार चला रहे हैं कि बैंकों में खाते भी खुलवा लिए हैं। इस तरह के मामले सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) सहित भारत की अन्य एजेंसियों को हाल ही में इस तरह के कई सबूत मिले हैं, जिनमें इन्हें अवैध रूप से भारत में लाकर अलग-अलग राज्यों में बसाने वाले गिरोह का पता चला है।ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है। कुछ बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या मुस्लिमों को राज्य के विभिन्न जगहों से पकड़ा भी गया है।

हाल ही में यूपी एटीएस ने विदेशी फंडिंग लेकर अवैध घुसपैठियों की मदद करने वाले एक सिंडीकेट से जुड़े कुछ लोगों को पकड़ा था। कानपुर से पकड़े गए गिरोह के सक्रिय सदस्य और बांग्लादेश निवासी  मोहम्मद राशिद अहमद ने पूछताछ में बताया कि उसने पाँच अन्य बांग्लादेशियों को फर्जी दस्तावेजों की मदद से पहचान बदलकर देवबंद में ठिकाना दिलाया था।

इससे पहले पकड़े जा चुके बांग्लादेशी आदिलुर्रहमान को भी फर्जी दस्तावेज राशिद ने ही उपलब्ध कराए थे। एटीएस ने विदेशी फंडिंग के मास्टरमाइंड और एनजीओ चलाने वाले अबू सालेह मंडल को बीते दिनों लखनऊ से पकड़ा था। वह अपने एनजीओ में विदेशी फंडिंग लेता था और अवैध घुसपैठियों को भारत में बसाने में उनकी मदद करता था।

अबू सालेह ने ATS को बताया कि वह हरोआ-अल जमियातुल इस्लामिया दारूल उलूम मदरसा और कबीरबाग मिल्लत एकेडमी नाम से दो ट्रस्ट चलाता है। इन ट्रस्टों के FCRA खातों में ब्रिटेन के उम्मा वेलफेयर ट्रस्ट से साल 2018-22 तक लगभग 58 करोड़ रुपए आए। उम्मा ट्रस्ट को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और उनकी मदद करने के कारण अमेरिका प्रतिबंधित कर चुका है।

उधर, दैनिक भास्कर ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि NIA ने कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु में मोहम्मद सोरीफुल बाबू मियां, शहाबुद्दीन हुसैन और मुन्ना उर्फ नूर करीम को गिरफ्तार किया था। ये तीनों लंबे समय से बांग्लादेश से भारत में लाए गए रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट आदि बनाकर देते थे।

इन तीनों ने पूछताछ में बताया कि रोहिंग्या मुस्लिमों को भारतीय पहचान देने के लिए वे मृतकों के दस्तावेज इस्तेमाल करते हैं। NIA को ऐसे लोगों की सूची आरोपितों से मिले हैं। इसकी पड़ताल और फर्जी दस्तावेज पर रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जा रही है। NIA की जाँच में तमिलनाडु, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू सहित कई राज्यों में रोहिंग्या घुसपैठियों के रहने की जानकारी मिली है।