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जिस भी ‘रिश्तेदार’ का हुआ मन उसने ही ‘अनाथ बच्ची’ से किया रेप, गर्भवती हुई तो खुली पोल: फूफा रहमान सहित 5 पर FIR

गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का मामला सामने आया है। यहाँ एक अनाथ पीड़िता के साथ उसके फूफा रहमान (बदला नाम) ने महीनों तक रेप किया। दरअसल, पीड़िता अपनी फूफी के घर रहती थी। इस दौरान सिर्फ उसके फूफा ने ही नहीं, बल्कि अन्य सगे संबंधियों ने महीनों तक बलात्कार किया। इसकी वजह से लड़की गर्भवती भी हो गई।

नाबालिग के साथ रेप करने वालों में रहमान के अलावा सलमान, आमिर, अब्दुल और जमील (पीड़िता की पहचान छिपाने के लिए सभी के नाम बदले गए हैं) शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ POCSO एक्ट में FIR दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला सुरेंद्रनगर जिले के वाधवान का है। यहाँ मुस्लिम समुदाय की एक नाबालिग लड़की के अम्मी-अब्बू का काफी पहले देहांत हो गया था। उसके परिवार में और कोई नहीं था। अनाथ होने की वजह से लड़की को उसकी फूफी ने अपने साथ रख लिया। जब पीड़िता 16 साल की थी, तब उसके फूफा रहमान ने उस के साथ बलात्कार किया।

रहमान के बाद पीड़िता के 4 अन्य सगे संबंधियों ने भी उसके साथ रेप किया। दुष्कर्म का यह सिलसिला लगभग 6 महीने तक चलता रहा। आरोप है कि सभी आरोपित पीड़िता को अलग-अलग मौकों पर कई जगहों पर ले गए। वहाँ उन्होंने लड़की से कई बार रेप किया। पीड़िता जब इसका विरोध करती थी तो आरोपित उसे धमकी देकर चुप करा देते थे।

डर की वजह से नाबालिग पीड़िता किसी के सामने अपना मुँह नहीं खोला। हालाँकि, लगातार दुष्कर्म के चलते पीड़िता गर्भवती हो गई। जब उसका गर्भ 6 माह का हुआ तो इसकी जानकारी लड़की के फूफी हो गई। उसने लड़की से पूछताछ की तो उसने सारा माजरा अपनी फूफी को बता दिया। इसके बाद फूफी ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई।

पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू की। ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी के लिए सुरेंद्रनगर पुलिस को सम्पर्क किया। पुलिस ने बताया कि अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है। माना यह भी जा रहा है कि जाँच के बाद पीड़िता से रेप करने वाले कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।

PM मोदी ने देखा इसरो का गगनयान, देश को ‘गगनवीरों’ से मिलवाया: कहा- टाइम भी हमारा, काउंटडाउन भी हमारा और रॉकेट भी हमारा

इसरो के गगनयान मिशन के लिए आज (27 फरवरी 2024) आखिरकार उन चार अंतरिक्ष यात्रियों के नाम का ऐलान हो गया जो मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गगनयान देखने के बाद इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों को विंग्स देकर इनके नामों की घोषणा की।

पीएम नरेंद्र मोदी ने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में बताया कि ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला, गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्री हैं।

पीएम ने कहा, “ये सिर्फ 4 नाम और 4 इंसान नहीं हैं, ये 140 करोड़ लोगों की आकांक्षा स्पेस में ले जाने वाली 4 शक्तियाँ हैं। 40 वर्ष के बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाने वाला है। लेकिन इस बार टाइम भी हमारा है, काउंटडाउन भी हमारा है और रॉकेट भी हमारा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें गर्व और खुशी है कि गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश पुरजे़ भारत में बने हैं। उन्होंने मीडियाकर्मियों से भी कहा कि वो इन चारों हीरों की तैयारी में बाधा न बनें, उन्हें भ्रमित न करें। उन्हें उनके फोकस से काम करने दें। उनका सपना सिर्फ हाथ में तिरंगा, अंतरिक्ष और 140 करोड़ देशवासियों का सपना ही सिर्फ फोकस में होना चाहिए।

पीएम ने कहा कहा, “हमारे स्पेस सेक्टर में महिला सशक्तिकरण को बहुत महत्व दिया जा रहा है। चंद्रयान हो या गगनयान, महिला वैज्ञानिकों के बिना ऐसे किसी भी मिशन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।” उन्होंने कहा- 21वीं सदी का भारत, विकसित होता हुआ भारत, आज दुनिया को अपने सामर्थ्य से चौंका रहा है। पिछले 10 वर्षों में हमने लगभग 400 सेटेलाइट लॉन्च किए हैं, जबकि इससे पहले के 10 वर्षों में मात्र 33 सेटेलाइट लॉन्च किए गए थे।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने तिरुवनंतपुरम के पास थुंबा में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के दौरे में इसरो की तीन प्रमुख अंतरिक्ष बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं (वीएसएससी में एक ‘ट्राइसोनिक विंड टनल’, तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सेमी-क्रायोजेनिक इंटीग्रेटेड इंजन संबंधी इकाई और आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसएचएआर) में पीएसएलवी एकीकरण इकाई) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन के साथ वीएसएससी में प्रदर्शित विभिन्न इसरो परियोजनाओं की प्रदर्शनी भी देखी।

‘अवैध ढाँचे मजहबी प्रचार का नहीं हो सकते स्थान’: सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई की मस्जिद को गिराने का आदेश रखा बरकरार, कहा- यह जमीन सरकार की

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें चेन्नई के कोयम्बेडु स्थित एक मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि यह ढाँचा पूरी तरह से अवैध है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि ऐसी अनधिकृत धार्मिक संरचनाएँ धर्म प्रचार का स्थान कभी नहीं हो सकतीं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की पीठ 22 नवंबर 2023 को मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी। मद्रास उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति जे निशा बानू ने इस मामले में अधिकारियों द्वारा दिखाई गई उदासीनता पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, “यह न्यायालय बार-बार आधिकारिक उत्तरदाताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए चेतावनी देता रहा है कि उचित योजना अनुमति के बिना कोई भी निर्माण न किया जाए। इस न्यायालय के बार-बार आदेशों के बावजूद आधिकारिक उत्तरदाताओं ने अनधिकृत निर्माणों के प्रति आँखें मूंद रखी हैं।”

इन सब अवलोकन के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने मस्जिद को ध्वस्त करने और उसे एक नए क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष सहमत नहीं हुआ और इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की ओर से हाइदा मुस्लिम वेलयफेयर ट्रस्ट मस्जिद-ए हिदाया और मदरसे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों की याद दिलाई। उन आदेशों में राज्यों और उच्च न्यायालयों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि सार्वजनिक सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मंदिर, चर्च, मस्जिद या गुरुद्वारे के नाम पर किसी भी अनधिकृत निर्माण की अनुमति न दी जाए।

अपीलकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस नागामुथु ने दलील दी कि ट्रस्ट ने जमीन खरीदी थी और मस्जिद के कारण जनता को कोई बाधा नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि जमीन लंबे समय से खाली पड़ी है। इस पर अदालत ने कहा कि चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CMDA) ने जमीन का अधिग्रहण कर लिया था और उस पर बिना किसी अनुमति के निर्माण किया गया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस संपत्ति का मालिक नहीं है। यह भूमि चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी की है और उस पर याचिकाकर्ता का अवैध कब्जा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने भवन निर्माण योजनाओं की मंजूरी के लिए भी कभी आवेदन नहीं किया और 9 दिसंबर 2020 को CDMA द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आधारों पर उसे मस्जिद के तोड़ने के उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। कोर्ट ने इस ढाँचे को हटाने के लिए अधिकारियों को 31 मई 2024 तक का समय दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस नागमुथु, प्रियरंजनी नागमुथु, शालिनी मिश्रा, आर सुधाकरन, टी हरिहार सुधन, पीवीके देवेन्द्रन आदि शामिल हुए।

आतंक का समर्थन और पाकिस्तान की वकालत… इसीलिए निताशा कौल को भारत में नहीं दिया घुसने, जारी किया गया था लुकआउट सर्कुलर

भारत विरोधी वामपंथी ब्रिटिश प्रोफ़ेसर निताशा कौल को एक प्रिवेंटिव लुकआउट सर्कुलर के कारण देश में नहीं घुसने दिया गया था। इस कारण से कौल को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर ही रोक कर वापस इंग्लैंड भेज दिया गया। उसके खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने यह सर्कुलर जारी किया था।

यह सारी जानकारी टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट में सरकार के सूत्रों के हवाले से दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने निताशा कौल के भारत विरोधी रवैये और कश्मीर पर लगातार भ्रम फैलाकर भारत की छवि खराब करने के कारण उसे देश में घुसने से रोकने का निर्णय लिया था। बताया गया है कि निताशा कौल द्वारा कश्मीर पर फैलाया गए प्रोपगैंडा का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इस्तेमाल कर रही है। ISI इसके जरिए भारत विरोधी भावनाओं को हवा देना चाहती है।

इस विषय में एक अधिकारी ने एजेंसी को कथित तौर पर बताया, “किसी को देश में घुसने से रोकने के लिए जारी किए जाने वाले सर्कुलर सुरक्षा एजेंसियों की माँग पर जारी होते हैं। जिस भी व्यक्ति के विरुद्ध यह जारी होते हैं, उसके विषय में यह जाँच की जाती है कि क्या उसने पहले भारत विरोधी रवैया अपनाया जिससे देश की एकता और संप्रुभता पर खतरा आया हो। क्या वह भारत आकर भी ऐसा ही रुख अपना सकते हैं।”

गौरतलब है कि एक कश्मीरी पंडित और ब्रिटिश नागरिक निताशा कौल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक थ्रेड लिख कर दावा किया था कि उसे भारत में नहीं घुसने दिया गया। उसने दावा किया था कि यहाँ अधिकारियों ने उससे कहा कि उन्हें दिल्ली से आदेश आया था। उसने इस पोस्ट थ्रेड में उसने काफी प्रलाप किया था।

निताशा बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई थी। उसे कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने आमंत्रित किया था। उसे भारत में घुसने से रोक दिया गया और फिर अगली फ्लाइट से वापस इंग्लैंड भेज दिया गया था। गौरतलब है कि निताशा भले ही ब्रिटिश नागरिक है लेकिन उसके पास ओवरसीज सिटीजन ऑफ़ इंडिया (भारतीय प्रवासी कार्ड) भी है जिसके अंतर्गत वह बिना किसी वीजा के भारत आ जा सकती है। हालाँकि, निताशा कौल के खिलाफ जारी किया गया सर्कुलर उसके भारत में ना घुस पाने की वजह बना।

निताशा ने पाकिस्तान में जाकर भारत विरोधी बातें की हैं, वह कश्मीर में हिन्दुओं के नरसंहार को भी नहीं मानती है। वह भारत पर आरोप लगाती है कि उसने कश्मीर पर कब्जा कर रखा है। इसके अलावा उसके ISI के लोगों से जुड़े होने का शक है।

ब्याह से पहले अनंत अंबानी ने बसाया पशुओं का घर, 3000 एकड़ में फैला है ‘वनतारा’; 2000+ जानवरों का रेस्क्यू: बोले- हिंदू धर्म यही सिखाता है

रिलायंस इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनंत अंबानी द्वारा 26 फरवरी 2024 को उनके ‘वनतारा (जंगल के सितारे)’ प्रोग्राम की घोषणा सार्वजनिक रूप से की गई। इस प्रोजेक्ट के तहत 3000 एकड़ की जमीन पर वनतारा इकोसिस्टम बनाया गया है जहाँ पशुओं का बचाव और पुनर्वास होता है।

मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी ने अपनी शादी की तैयारियों से पहले गुजरात के जामनगर में इस प्रोग्राम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने इसकी शुरुआत इसलिए की है क्योंकि उनके माता-पिता ने उन्हें बचपन में बताया था कि जो बेजुबानों की सेवा करता है उसे पुण्य मिलता है।

मीडिया से मुखातिब होते हुए अनंत अंबानी ने बड़ी शालीन होकर बताया- “मैं बचपन से ही जानवरों की सेवा करता आया हूँ। मेरे मम्मी और पापा ने मुझे बताया था कि जो बेजुबान जानवरों की सेवा करता है उससे पुण्य मिलता है। हिंदू धर्म में भी कहा जाता है कि जानवर आज की तारीख में भगवान का रूप होते हैं। हम तो सामने से भगवान को देख नहीं सकते हैं, इसलिए मैं तो यह मानता हूँ कि जानवरों की सेवा करना ही भगवान का काम है। मेरी मम्मी ने बचपन से ही जानवर से प्रेम करना और पशु पालन करना सिखाया है। इसलिए मैंने इसकी शुरुआत की।”

उन्होंने कहा- “मैं हमेशा से बहुत ज्यादा धार्मिक रहा हूँ। हमारे हिंदू धर्म में श्रीराम ने जटायु और छोटी सी गिलहरी को प्रेम दिया। माता रानी भी शेर पर बैठती हैं, माता लक्ष्मी के पास उल्लू है, सरस्वती माँ का वाहन मोर है और श्रीकृष्ण तो कहते हैं हाथी, घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की।”

उन्होंने बताया कि उनके द्वारा ये केंद्र कोविड की पीक पर वन्यजीवों के बचाव के लिए शुरू किया गया था। इसके लिए उन्होंने 3000 एकड़ की जगह में 600 एकड़ का जंगल बनाया जो कि हाथियों के लिए एक संपूर्ण आवास है। वो भारत के अलग-अलग जगहों से 200 के करीब हाथियों को बचाकर यहाँ ला चुके हैं। इसके अलावा 2000 से ज्यादा जानवरों का ये घर बन गया है।

उन्होंने बताया कि ‘ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू’ सेंटर 2020 में शुरू हुआ था। अब जूलॉजिकल रिसर्च एंड रेस्क्यू सेंटर के लिए लगभग 3,000 लोग काम कर रहे हैं। इसमें से, कुछ लोग प्रवासी भी हैं, जो कि शिक्षक या प्रोफेसर की भूमिका में हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट में वह न्यूट्रिशियन स्पेशलिस्ट जैसी विभिन्न पृष्ठभूमियों से युवा स्नातकों को लेते हैं जिन्होंने अभी-अभी पशु चिकित्सा में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। हमारे पास कुछडॉक्टर भी हैं जो जानवरों के प्रति बेहद भावुक हैं।”

रिलायंस फाउंडेशन के डायरेक्टर अनंत अंबानी ने कहा- “हमने 200 से ज्यादा हाथियों को बचाया और उन्हें देश के अन्य पार्कों से लेकर आए। हम यहाँ हाथियों की सेवा करते हैं। ये जूलॉजिकल पार्क नहीं बल्कि सेवालय है। 600 एकड़ इलाके को ऐसे विकसित किया गया है कि ये हाथियों के लिए प्राकृतिक वास है।”

उन्होंने कहा, “ये मेरा एक पैशन प्रोजेक्ट है। हमने अत्याधुनिक तकनीक वाला एक पशु चिकित्सालय बनाया है। अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें, एंडोस्कोपिक रोबोटिक सर्जरी मशीनें और 6 सर्जिकल सेंटर हैं। यहाँ अस्पताल में जानवरों के लिए कृत्रिम अंग लगाएँ जाएँगे… प्राणी उद्यान जल्द ही जनता के लिए खोला जाएगा।” अपनी होने वाली पत्नी राधिका मर्चेंट को लेकर उन्होंने कहा कि उनके वेंचर में और शख्स जुड़ेगा जो कि उन्हीं की तरह बड़ा जुनूनी है।

बता दें कि अनंत अंबानी के इस प्रोग्राम के तहत वनतारा में 43 प्रजातियों के 2000 से अधिक जानवर बचाव और पुनर्वास केंद्र में है। इसमें 200 से अधिक हाथी हैं, 300 से ज्यादा तेंदुए, बाघ, शेर सहित अन्य जंगली जीव रखे गए हैं। यहाँ 300 से अधिक शाकाहारी जानवरों को भी रखा गया है।

‘उनकी आत्मा को शांति दे भगवान’: शफीकुर्रहमान बर्क के इंतकाल पर अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि, कोरोना को ‘अल्लाह की सजा’ बताते थे सपा MP

उत्तर प्रदेश के संभल लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का आज (27 फरवरी, 2024) निधन हो गया। बर्क की 93 वर्ष आयु थी। उनका निधन मुरादाबाद स्थित एक अस्पताल में हुआ। अचानक तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें मुरादाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

सपा सांसद बर्क को आज सुबह तबियत ज्यादा बिगड़ने पर ICU में ले जाया गया था। हालाँकि, उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और उनका निधन हो गया। बर्क लोकसभा के सबसे अधिक आयु वाले सदस्य थे। वह संभल और मुरादाबाद क्षेत्र में राजनीति का बड़ा चेहरा थे।

उनके निधन पर समाजवादी पार्टी ने दुख जताया है। पार्टी ने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर उनके निधन को लेकर लिखा, “समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, कई बार के सांसद जनाब शफीकुर्रहमान बर्क साहब का इंतकाल, अत्यंत दुखद। उनकी आत्मा को शांति दे भगवान। शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहने का संबल प्राप्त हो। भावभीनी श्रद्धांजलि।”

उनके निधन पर समाजवादी पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी दुख जताया है। उन्होंने भी बर्क के निधन पर दुख जताया है और श्रद्धांजलि दी है। समाजवादी पार्टी ने बर्क को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भी संभल से उम्मीदवार बनाया था।

अखिलेश यादव ने शफीकुर्रहमान बर्क को श्रद्धांजलि दी है।
अखिलेश यादव ने बर्क को श्रद्धांजलि दी है।

बर्क का लंबा राजनीतिक करियर था। वह चार बार लोकसभा और चार बार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर चुके थे। वह संभल और मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके थे। वह मूल रूप से संभल के रहने वाले थे। हाल के दिनों में वह अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहे थे।

उन्होंने NCERT सिलेबस में रामायण-महाभारत को शामिल किए जाने की खबर पर कहा था कि वे पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को शामिल करने का विरोध करते हैं। इन दोनों धर्मग्रंथों की जगह पर कुरान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, क्योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी किताब है और अल्लाह का कलाम है।

उन्होंने सितम्बर 2023 में नई संसद को लेकर कहा था, “देखिए नमाज पढ़ने के लिए तो जगह यहाँ भी नहीं है। नई संसद में भी मुसलमानों के नमाज के लिए भी जगह होनी चाहिए थी। इन लोगों ने नफरत फैला रखा है। क्या जगह देंगे, मुसलमान से नफरत फैला रखी है।”

सपा सांसद बर्क ने कर्नाटक में 2022 में हुए हिजाब विवाद को लेकर कहा था, “मैं हिजाब के पक्ष में हूँ। इस्लाम कहता है कि लड़की को हिजाब में रहना चाहिए। अगर लड़की पर्दे में नहीं रहेगी तो उससे खतरा पैदा होता है। पर्दे में होगी तो उसके जिस्म का हिस्सा ढंका रहेगा। अन्यथा खुले हुए में लोग उसे बुरी नजर से देखेंगे। इससे हालात बिगड़ेंगे।”

इससे पहले उन्होंने कोरोना को लेकर भी एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि कोरोना अगर बीमारी होती तो इसका इलाज मिल गया होता। कोरोना की यह बीमारी आजादे इलाही है जो अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगने से ही खत्म होगी।

उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी घरों पर झंडा लगाने को लेकर भी एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ये मुल्क का झंडा है। मुल्क वाले इसे लगाते हैं। सत्ताधारी बीजेपी की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि वे तो हमें मुल्क का नहीं मानते। उन्होंने कहा कि तिरंगा मुल्क का झंडा है, मुल्क के कार्यालयों पर फहराया जाए। इस अभियान पर विवादित बयान देते हुए सपा सांसद ने कहा है कि जिसकी मर्जी हो वह झंडा लगाए। क्या झंडा लगाने से ही देशभक्ति साबित होगी।

‘इंस्पेक्टर आर्यन’ बन दलित लड़की को फँसाया, शादी के दिन खुली तबरेज की पोल: नाम से लेकर बाल तक सब निकला नकली

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ तबरेज नाम का युवक अपनी असल पहचान छिपा कर दलित समुदाय की लड़की से शादी करने पहुँच गया था। खुद को ‘आर्यन’ बताने वाले तबरेज ने कहा था कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है। लड़की के पिता की तहरीर पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। तबरेज को हिरासत में ले लिया गया है। घटना सोमवार (26 फरवरी 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कुशीनगर के थानाक्षेत्र अहिरौली बाजार का है। यहाँ की रहने वाली पीड़िता से तबरेज लगभग 1 साल पहले आर्यन प्रसाद बन कर मिला था। तब, आर्यन ने खुद की पहचान UP पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर बताई थी। उसने ये भी कहा था कि उसकी पोस्टिंग गोरखपुर में है। साल भर चले रिश्ते में तबरेज ने पीड़िता से कई बार शारीरिक संबंध भी बनाए। जब लड़की के घर वालों को इस रिश्ते का पता चला तो उन्होंने आर्यन बने तबरेज से शादी का प्रस्ताव रखा। तबरेज ने भी ‘हाँ’ कह दी। शादी की तारीख 25 फरवरी 2024 को रखी गई।

लड़की के घर वालों ने शादी के कार्ड भी छपवा कर रिश्तेदारी में बँटवा दिए। कार्ड में सबसे ऊपर बाबा भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर लगाई गई। शादी के दिन मिठाई और खाने-पीने का सामान भी ला कर रख दिया गया। 25 फरवरी को लड़की पक्ष वाले बारात का इंतज़ार करते रहे। काफी देर हो जाने पर तबरेज ने पीड़िता के घर कॉल किया और अपनी माँ को हार्ट अटैक आने का बहाना बताया। यह सुन कर लड़की के परिजन परेशान हो कर सोच-विचार ही कर रहे थे कि अचानक तबरेज दूल्हा बन कर अकेले ही लड़की के घर पहुँच गया।

बताया जा रहा है कि तबरेज ने कार को शादी के अंदाज़ में सजाया था। उसने हिन्दू विधि-विधान से होने वाली शादी की तमाम रस्में भी निभाईं। कुछ देर बाद उसने लड़की के लिए कपड़े और जेवर दिए। यह जेवर लड़की के रिश्तेदारों को नकली लगे जिसकी पुष्टि जाँच में हो भी गई। यहीं से लोगों को तबरेज पर शक हो गया। उन्होंने और पड़ताल की तो तबरेज के सिर पर बाल भी नकली लगे मिले जो आपाधापी में जमीन में गिर गए थे। तलाशी के दौरान तबरेज का आधार कार्ड भी निकल आया। तब जा कर लोगों को उसके मुस्लिम होने की जानकारी हुई।

आखिरकार लड़की के परिजनों ने तबरेज को पकड़ कर बिठा लिया। उन्होंने यह भी पता लगा लिया कि तबरेज पुलिस का स्टाफ भी नहीं है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने तबरेज को हिरासत में ले लिया। पीड़िता के पिता की शिकायत पर तबरेज के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। कुशीनगर के एडिशनल एसपी ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

मस्जिदों के अंदर इफ्तार पार्टी नहीं, इमाम नहीं ले सकेंगे चन्दा; अजान की रिकॉर्डिंग पर भी रोक: रमजान के लिए सऊदी अरब ने बनाए नए नियम

इस्लामी राष्ट्र सऊदी अरब ने रमजान माह के दौरान मस्जिदों के अंदर इफ्तार आयोजित करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सऊदी अरब सरकार ने कहा है कि कोई भी इमाम मस्जिद के भीतर इफ्तार आयोजित नहीं करेगा। इसके साथ ही इफ्तार के लिए चन्दा लेने पर भी रोक लगाई गई है।

सऊदी अरब सरकार के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में एक आदेश जारी करके आगामी रमजान महीने के लिए निर्देश जारी किए हैं। सऊदी अरब की सारी मस्जिदों का नियंत्रण इसी मंत्रालय के पास है। मंत्रालय ने कहा है कि रोजा खत्म होने के बाद शाम को आयोजित किए जाने वाले इफ्तार से मस्जिदों की साफ़ सफाई पर फर्क पड़ता है, मस्जिदों को साफ़ रखने के लिए इन इफ्तारों को यहाँ नहीं बल्कि अन्य स्थानों पर आयोजित किया जाए। इफ्तार आयोजित करने के बाद तुरंत इस स्थान की सफाई करवा दी जाए।

मंत्रालय ने कहा है इन मस्जिदों में इफ्तार आयोजित करने के लिए यहाँ के इमाम किसी भी प्रकार का चन्दा ना इकट्ठा करें। मंत्रालय ने यह भी आदेश दिया है कि मस्जिदों के अंदर लगे कैमरे से अजान कर रहे मुस्लिमों और इमाम की रिकॉर्डिंग ना की जाए, ना ही उनका फोटो खींचा जाए। इसका प्रसारण भी अन्य किसी मीडिया माध्यम से ना हो। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि मस्जिदों के भीतर भिखारियों को भीख माँगने से भी रोका जाए। मंत्रालय ने पिछले वर्ष भी ऐसे ही आदेश जारी किए थे।

गौरतलब है कि आगामी 11 मार्च से रमजान का महीना चालू हो रहा है जिसमें मुस्लिम रोजा रखते हैं। इस दौरान मुस्लिम भोर में खाते पीते हैं और फिर शाम में इफ्तार करते हैं। दिन में वह कुछ नहीं खाते। इसके अलावा रोजे के दौरान और भी कुछ नियम मानने होते हैं।

सऊदी अरब से ही इस्लाम की शुरुआत हुई थी। हालाँकि, बीते कुछ समय से यहाँ काफी बड़े बदलाव हो रहे हैं। सऊदी के वर्तमान प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान बड़े बदलाव कर रहे हैं। वह ऐसे कई नियम खत्म कर रहे हैं जो कि आधुनिक सोच से मेल नहीं खाते। इसमें महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति देने जैसे निर्णय शामिल हैं।

51 दिन फरार TMC नेता शेख शाहजहाँ पर HC की फटकार के बाद FIR, संदेशखाली में MLA नौशाद सिद्दीकी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ के खिलाफ 70 से अधिक शिकायतें मिलने के बाद राज्य की बंगाल पुलिस ने इस मामले में आखिरकार प्राथमिकी दायर कर ली है।

बशीरहाट के पुलिस अधीक्षक एचएम रहमान ने बताया कि उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस के फरार नेता शेख शाहजहाँ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा कि पुलिस को शाहजहाँ के विरुद्ध जितनी शिकायत मिली थी, अब उसके ऊपर एक्शन लिया जाएगा, एफआईआर हो चुकी है।

इस बीच पीड़िताओं से मिलने जाते वक्त ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर है। वहीं पुलिस अधीक्षक ने उन मीडिया खबरों को फर्जी बताया जिसमें कहा जा रहा है कि संदेशखाली मामले में बंगाल पुलिस केस नहीं दर्ज कर रही। उन्होंने कहा ये बिलकुल झूठ है, केस दर्ज हो चुका है। उन्होंने संदेशखाली के लोगों से अपील की है कि कोई भी शख्स अपने हाथ में कानून को न ले वरना कानूनी एक्शन लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि संदेशखाली में कुछ महिलाएँ टीएमसी नेता शंकर सरदार के घर में घुस गई थीं। पुलिस फौरन वहाँ पहुँचकर एक्शन लिया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। हम लोगों को बार बार बता रहे हैं कि संदेशखाली के लोग कुछ भी हो पर कानून हाथध में न लें वरना पुलिस को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी।

बता दें कि शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी पर इससे पहले कोलकाता हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी। अदालत ने साफ किया था कि शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं है। एफआईआर में भी बतौर आरोपी शाहजहाँ शेख का नाम है। ऐसे में उसे गिरफ्तार करने की जरूरत है। वहीं पार्टी ने भी कहा था कि टीएमसी नेता जो पिछले एक माह से फरार है उसे एक हफ्ते में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस संबंध में राज्य मंत्री ब्रत्या बासु और टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि हाई कोर्ट ने शेख शाहजहाँ को पकड़ने का अधिकार दे दिया है। अब उसने हफ्ते भर में पकड़कर दिखाएँगे।

लंदन में पढ़ाई, करोड़ों की नौकरी… सब छोड़ अबू धाबी के हिंदू मंदिर में सेवा कर रहे विशाल पटेल, रेगिस्तान में ढोए कंक्रीट: PM मोदी ने किया था उद्घाटन

खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबूधाबी में नवनिर्मित BAPS स्वामीनारायण मंदिर में सेवा करने के लिए एक व्यक्ति ने अपनी करोड़ों की नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अपनी बैंकिंग क्षेत्र की नौकरी छोड़ यहाँ भगवान की सेवा करने का रास्ता चुना। उन्होंने मंदिर निर्माण में कारसेवा भी की।

स्वामीनारायण मंदिर में सेवा करने का रास्ता चुनने वाले इन व्यक्ति का नाम विशाल पटेल है। 43 वर्षीय विशाल पटेल का जन्म एक गुजराती परिवार में लंदन में हुआ था। वह 2016 में लंदन से UAE आकर बस गए थे। वह पहले लंदन में भी बैंकिंग क्षेत्र में काफी अच्छी नौकरी करते थे। इसके बाद वह UAE आकर दुबई इंटरनेशनल फाइनेंसियल सेंटर में काम करने लगे।

हालाँकि, जब वह लंदन में थे तब भी स्वामीनारायण मंदिर में सेवा करते थे। इसके बाद दुबई में जब उन्हें यह मौका मिला तो उन्होंने नौकरी छोड़ इसमें अपना पूरा समय देने का निर्णय लिया। उन्होंने मंदिर निर्माण के चालू होने के बाद यहाँ बन रही बाड़ लगाने का काम किया। उन्होंने यह कंक्रीट तक उठाया।

इसके बाद वह मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रसाद बाँटने का काम करने लगे और जब मंदिर का उद्घाटन हुआ तो वह इसके मुख्य कम्युनिकेशन ऑफिसर बनाए गए। वह मंदिर का मीडिया सेल से जुड़ा हुआ काम देखते हैं। उनके आस और भी जिम्मेदारियाँ हैं।

विशाल ने खलीज टाइम्स को बताया, “2016 से ही मैं और मेरा परिवार UAE में रह रहे हैं। इससे पहले, मेरा फोकस मेरा करियर था क्योंकि मैं बड़ी इन्वेस्टमेंट बैंकों और हेज फंड में बड़े पदों पर था। हालाँकि, UAE में इस मंदिर में सेवा करने से मुझे समाज पर एक सकारात्मक प्रभाव डालने और ऐसे कामों में शामिल होने का मौक़ा मिला जो जिनसे समाज का भला होता है।”

विशाल ने बताया कि BAPS स्वामीनारायण के प्रमुख स्वामीजी ने उन पर बड़ा प्रभाव डाला है और वह लंदन के दिनों से ही स्वामीनारायण के बड़े भक्त हो चुके थे। उन्होंने बताया, “मैं लंदन के स्वामीनारायण मंदिर में फुटबॉल और क्रिकेट खेलता था। इस तरह मेरा मंदिर के साथ नाता बना। इसके बाद मैं यहाँ सेवा भी करने लगा और BAPS ने समाजसेवा को कैसे बढ़ाया, इसके विषय में मेरी समझ परिपक्व हुई। प्रमुख स्वामी महाराज जैसे धर्म गुरु की दूरदर्शिता ने मेरे जैसे बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।”

विशाल ने बताया कि उनकी करियर में भी BAPS स्वामीनारायण मंदिर का बड़ा रोल है। उन्होंने कहा कि 2002 के आसपास जब वह नौकरी ढूंढ रहे थे तो उनके सामने अनेकों चुनौतियाँ थी। तब नौकरियों के बाजार में मंदी आई हुई थी। ऐसे में उन्हें मंदिर में सेवा करते समय एक बड़ी इन्वेस्टमेंट फर्म मेरिल लिंच के एक अधिकारी मिले जिन्होंने उन्हें करियर सम्बन्धी सलाह दी।

गौरतलब है कि अबूधाबी के इस मंदिर का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 फरवरी को किया था। इस मंदिर को 7 शिखर के साथ निर्मित किया गया है। नागर शैली में बने इस मंदिर का अगला हिस्सा वैश्विक मूल्यों की ओर इंगित करता है, वहीं जहाँ विभिन्न संस्कृतियों में सद्भाव का संदेश है, हिन्दू ऋषि-मुनियों को दर्शाया गया है और अवतारों की गाथाएँ कही गई हैं। ये मंदिर परिसर 27 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें से 13.5 एकड़ में मुख्य मंदिर है।