Home Blog Page 1176

इंदिरा गाँधी और नरगिस दत्त के नाम से नहीं होगा अब फिल्म पुरस्कार, सरकार ने नेशनल अवॉर्ड में किए कई बदलाव: पैसा भी बढ़ाया

अब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और दिवंगत अभिनेत्री नरगिस दत्त के नाम पर नहीं दिए जाएँगे। इसका ऐलान मंगलवार (13 फरवरी 2024) को किया गया। ऐसा 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए बनाए गए नियमों के अंतर्गत किया जा रहा है। वहीं, कई पुरस्कारों को एकीकृत किया गया है। इसके साथ ही उसमें दी जाने वाली राशि भी बढ़ाई गई है।

यह उन कुछ बदलावों में से है, जो कि इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में किए गए हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के नियम-कानून भी बदले हैं। इसके अंतर्गत दी जाने वाली धनराशि भी बढ़ाई गई है। यह सभी बदलाव एक समिति द्वारा किए गए हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड महामारी के दौरान बनाया था।

सरकार द्वारा बनाई गई कमिटी द्वारा किए गए बदलाव के अनुसार, अब इंदिरा गाँधी बेस्ट डेब्यू फिल्म का नाम बदलकर ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ अ डायरेक्टर’ कर दिया गया है। वहीं, नरगिस दत्त के नाम पर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाली फीचर फिल्म को दिए जाने वाले पुरस्कार का नाम ‘बेस्ट फिल्म ऑन प्रमोटिंग नेशनल, सोशल एंड इनवॉयरमेंटल वैल्यूज’ कर दिया गया है।

इंदिरा गाँधी बेस्ट डेब्यू फिल्म के अंतर्गत जिस फिल्म को यह पुरस्कार दिया जाता था, उसके निर्देशक और निर्माता- दोनों के बीच यह धनराशि बाँटी जाती थी। अब यह राशि सिर्फ निर्देशक को ही मिलेगी। इसमें कोई बँटवारा नहीं होगा। वहीं, ‘बेस्ट फिल्म ऑन प्रमोटिंग नेशनल, सोशल एंड इनवॉयरमेंटल वैल्यूज’ के अंतर्गत दिए जाने वाले पुरस्कार को सामाजिक मुद्दों और पर्यावरण संरक्षण वाले अनुभागों को भी एक में मिला दिया गया है।

देश के सबसे बड़ा फिल्म पुरस्कार माना जाने वाले दादा साहब फाल्के के अंतर्गत फिल्म कलाकार को दी जाने वाली धनराशि को बढ़ाकर ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दिया गया है। इसके अलावा, सभी वर्ग में दिए जाने वाले स्वर्ण कमल पुरस्कार और रजत कमल पुरस्कार की राशि को क्रमशः ₹3 लाख और ₹2 लाख कर दिया गया है।

स्वर्ण कमल पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ फिल्म, पहली फिल्म, भरपूर मनोरंजन प्रदान करने वाली फिल्म, निर्देशन और बच्चों की फिल्म वाली श्रेणी में दी जाती है। वहीं, रजत कमल पुरस्कार राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सभी अभिनय श्रेणियों, सर्वश्रेष्ठ पटकथा, संगीत और ऐसी अन्य श्रेणियों के विजेताओं को दिया जाता है।

इसके अलावा, एक और बदलाव किया गया है। ‘सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म’ और ‘सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफेक्ट’ के पुरस्कार को दो उप-श्रेणियों के साथ ‘सर्वश्रेष्ठ एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) फिल्म’ नामक एक नई श्रेणी में जोड़ा गया है। पहले यह अलग-अलग होता था। तीन सब-कैटेगरी वाले बेस्ट ऑटोबायोग्राफी सेक्शन को अब बेस्ट साउंड डिजाइन के नाम से जाना जाएगा।

इस कैटेगरी के अंतर्गत दी जाने वाली पुरस्कार राशि को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दिया गया है। कमिटी ने और भी बहुत सारे बदलाव किए हैं। ये बदलाव करने वाली कमिटी की मुखिया सूचना और प्रसारण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव नीरजा शेखर हैं। उनके साथ ही कमिटी में फिल्म निर्माता प्रियदर्शन, राष्ट्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।

‘हमने लोगों की जरूरतों और सपनों को पूरा करने पर ध्यान दिया’: दुबई में ‘वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट’ में बोले PM मोदी – सरकार ऐसी हो जो सबको साथ लेकर चले

UAE दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (14 फरवरी, 2024) को UAE में ‘वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट’ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ये प्लेटफॉर्म दुनिया के विभिन्न नेताओं को एक साझा मंच पर लाने का माध्यम बना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दुबई दुनिया भर में वैश्विक अर्थव्यवस्था, वाणिज्य और तकनीक का केंद्र बन कर उभर रहा है, ये विश्व के समक्ष एक उदाहरण पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज हम 21वीं सदी में हैं। पीएम मोदी ने कहा कि एक तरफ दुनिया आधुनिकता की तरफ बढ़ रही है तो पिछली सदी से चले आ रही चुनौतियाँ भी उतने ही व्यापक हो रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि फ़ूड सिक्योरिटी हो, हेल्थ सिक्योरिटी हो, वॉटर सिक्योरिटी हो, एनर्जी सिक्योरिटी हो, शिक्षा हो, समाज को सद्भाव वाला बनाना हो, हर सरकार अपने नागरिकों के प्रति अनेक दायित्वों से बँधी हुई है। उन्होंने कहा कि आज हर सरकार के सामने सवाल है कि वो किस अप्रोच के साथ आगे बढ़े। बकौल पीएम मोदी, उनका मानना है कि आज विश्व को ऐसी सरकारों की जरूरत है जो Inclusive हों, जो सबको साथ लेकर चले।

पीएम मोदी ने दुबई में मंच से कहा कि आज हर सरकार के सामने सवाल है कि वो किस अप्रोच के साथ आगे बढ़े। बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनका मानना है कि आज विश्व को ऐसी सरकारों की जरूरत है जो इन्क्लूसिव हों, जो सबको साथ लेकर चले। उन्होंने कहा कि आज विश्व को आवश्यकता ऐसी सरकारों की है जो Ease of Living, Ease of Justice, Ease of Mobility, Ease of Innovation, Ease of Doing Business को अपनी प्राथमिकता बनाकर चलें।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं मानता हूँ कि सरकार का अभाव भी नहीं होना चाहिए और सरकार का दबाव भी नहीं होना चाहिए। बल्कि मैं तो ये मानता हूँ कि लोगों की जिंदगी में सरकार का दखल कम से कम हो, ये सुनिश्चित करना भी सरकार का काम है। इन 23 वर्षों में सरकार में मेरा सबसे बड़ा सिद्धांत रहा है- मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस। मैंने हमेशा ऐसा माहौल बनाने पर जोर दिया है, जो नागरिकों में उद्योग और ऊर्जा दोनों को और बढ़ाए।

पीएम मोदी ने कहा कि हम टॉप-डाउन और बॉटम-अप अप्रोच के साथ-साथ पूर्ण सामाजिक अप्रोच को लेकर भी चले हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मंत्र पर चलते हुए हम Last Mile Delivery और सैचुरेशन की अप्रोच पर बल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सैचुरेशन की अप्रोच, यानी सरकार की योजनाओं के लाभ से कोई भी लाभार्थी छूटे नहीं, सरकार खुद उस तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि गवर्नेस के इस मॉडल में भेदभाव और भ्रष्टाचार दोनों की ही गुंजाइश समाप्त हो जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने गवर्नेंस में जन-भावनाओं को प्राथमिकता दी है, हम देशवासियों की जरूरत के प्रति संवेदनशील हैं। उन्होंने वैश्विक नेताओं को बताया कि हमने लोगों की जरूरतों और लोगों के सपनों को पूरा करने पर ध्यान दिया है। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद को मानवता के लिए खतरा बताया और जलवायु परिवर्तन को भी चिंता जताई। तकनीक का इस्तेमाल कर के हो रहे अपराध की तरफ भी उन्होंने ध्यान बँटाया।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज Solar, Wind, Hydro के साथ-साथ Biofuels, Green Hydrogen पर भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि प्रकृति से जितना हासिल किया है, उसे लौटाने का प्रयास भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को एक नया मार्ग सुझाया है, जिस पर चलते हुए हम पर्यावरण की बहुत मदद कर सकते हैं। ये मार्ग है – मिशन लाइफ यानि Lifestyle For Environment का, ये मिशन Pro Planet People का रास्ता दिखाता है।

51 करोड़ अकाउंट, 35 करोड़ रुपे कार्ड, ₹2 लाख करोड़ डिपॉजिट: ‘जनधन’ से गरीबों को डायरेक्ट लाभ, करप्शन फुर्र

देश हर पाँच साल पर होने वाले सबसे बड़े त्योहार यानि आम चुनाव की दहलीज पर है। पीएम मोदी की सरकार के 10 साल पूरे होने को हैं। अब वे अपने तीसरे कार्यकाल के लिए मैदान में हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपनी योजनाओं की सफलता के बल पर लोगों से वोट माँग रहे हैं। यह सरकार इन योजनाओं पर कितना खरी उतरी है, ऑपइंडिया अगले कुछ दिनों में इनकी पड़ताल आपके सामने रखेगा। इस कड़ी में प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) पर बात सबसे पहले होगी।

सबसे पहले प्रधानमंत्री जनधन योजना को चुनने के पीछे भी एक कारण है। कारण यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद सबसे पहले इसी बड़ी योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से किया था।

इस योजना की आधिकारिक शुरुआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी। इसका योजना का उद्देश्य देश के हर घर में कम-से-कम एक बैंक खाता सुनिश्चित करवाना था। इसके आधार पर सरकार आगे की योजनाओं का क्रियान्वयन करना चाहती थी, जो लाभदायक भी सिद्ध हुआ।

क्यों लाई गई PM जनधन योजना?

दरअसल, पीएम मोदी को पता था कि जब तक सरकारी सहायता लोगों तक सीधे नहीं पहुँचेगी तब तक भ्रष्टाचार कम नहीं होगा और मदद सीधे पहुँचे, इसके लिए लोगों के पास बैंक खाते होने जरूरी थे। देश की आजादी के लगभग 7 दशक पूरे होने और बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद भी एक बड़ी आबादी के पास बैंक सुविधाओं का एक्सेस नहीं था। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2011 तक भारत की लगभग 70% आबादी बैंक खाते की सुविधा से महरूम थी।

देश की आबादी का बड़ा हिस्सा सिर्फ इसलिए खाता नहीं खुलवा सकता था, क्योंकि उसके पास उसमें जमा करने के लिए न्यूनतम राशि भी नहीं थी। यह इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा था। जब देश में लोगों के पास खाते नहीं थे तो एटीएम जैसी सुविधाओं की बात ही छोड़ दी जाए। इसमें भी हमारा देश दुनिया के बाक़ी विकासशील देशों से कहीं पीछे थे।

साल दर साल बदली तस्वीर

मोदी सरकार ने यह सभी समस्याएँ इसी एक योजना के जरिए सुलझाने की सोची और 28 अगस्त 2014 को जनधन योजना शुरू हो गई। यह भी अनोखी बात थी कि कोई योजना ऐलान के मात्र दो सप्ताह के भीतर जमीन पर उतर आई हो। इसके लिए सरकारी बैंकों ने गाँवों में अपने कैम्प लगाए। बैंक मित्र नियुक्त किए गए, जो कि गरीब एवं वंचित तबके के लोगों को इसके बारे में जागरूक कर उनके खाते खुलवाते।

योजना के अंतर्गत सरकार ने खाता खोलने के लिए कोई न्यूनतम राशि रखने की शर्त हटा दी। सिर्फ आधार एवं अन्य पहचान पत्र पर बैंकों ने खाते खोले। जनधन योजना के शुरू ही हिट हो गई। गाँव-गाँव में लगे कैम्प असर दिखाने लगे। जनधन योजना की रिपोर्ट बताती है कि योजना चालू होने के एक महीने के भीतर ही 3.3 करोड़ से अधिक खाते खुले। इनमें से 1.8 करोड़ से अधिक खाते ग्रामीण इलाकों में खोले गए थे।

साल दर साल जनधन योजना के अंतर्गत खातों की सँख्या बढ़ी है
साल दर साल इस योजना के अंतर्गत खातों की सँख्या बढ़ी है

मात्र एक वर्ष में जनधन योजना के अंतर्गत 17.9 करोड़ खाते खोले गए। उससे भी बड़ी सफलता यह रही कि इनमें से 60% खाते ग्रामीण इलाकों में खोले गए थे। एक माह के भीतर ही देश के 1 करोड़ लोगों को रुपे ATM कार्ड भी दे दिए गए। एक साला पूरा होते-होते देश में इस योजना के अंतर्गत खोले जाने वाले खातों की संख्या लगभग 18 करोड़ पहुँच गई। इसमें से लगभग 11 करोड़ खाते ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए थे।

वर्तमान स्थिति के अनुसार, जनधन योजना के अंतर्गत 51 करोड़ से अधिक खाते देश भर में खोले जा चुके हैं। अब देश की बहुत बड़ी आबादी के पास बैंक खाते और ATM है। इस योजना के तहत देश में 35 करोड़ से अधिक रुपे एटीएम जारी किए जा चुके हैं। इन कार्ड की खासियत यह है कि इन पर आमजनों को कोई चार्ज नहीं देना पड़ता, जबकि पहले विदेशी कम्पनियों के कार्ड पर सालाना फीस देनी पड़ती थी।

खाते खुले तो पहुँची सीधी मदद

जनधन खातों का सबसे बड़ा लाभ देश की आम जनता को सरकारी लाभ लेने में रहा है। सरकार द्वारा लोगों के खाते में सीधे लाभ भेजने में बीते 10 वर्षों में खासी तेजी आई है। रिपोर्ट बताती है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के तहत जहाँ 2013-14 में मात्र 10.8 करोड़ लोगों को सीधे सहायता राशि भेजी जा रही थी। वहीं, कोरोनाकाल के दौरान यह संख्या 98 करोड़ पहुँच गई। 98 करोड़ लाभार्थियों को अलग-अलग योजनाओं के तहत सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई। यह इसीलिए संभव हो पाया, क्योंकि अब इन सबके पास बैंक खाता है।

जनधन योजना से बैंकों की भी सुधरी हालत

प्रधानमंत्री जनधन योजना से सिर्फ लोगों को ही नहीं, बल्कि बैंकों को भी फायदा हुआ है। लोगों द्वारा छोटी-छोटी बचत को बैंक में जमा करने के कारण अब बैंकों के पास अधिक पूँजी आ रही है। रिपोर्ट बताती है कि जनधन योजना के अंतर्गत खोले गए खातों में देश के लोगों ने ₹2 लाख करोड़ से अधिक की धनराशि जमा कर रखी है। इस धनराशि के आने से बैंकों को अपना संचालन करने में आसानी हुई है।

यह योजना लोगों की बचत को बढ़ाने और बैंक के द्वार तक लाने में ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, शौचालय योजना और अनेकों ऐसी योजनाओं का लाभ दिलाने का आधार बनी है। इसने भारत में वित्तीय क्रान्ति लाने में बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसे में मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना ऑपइंडिया की पड़ताल में सफल साबित होती है। हालाँकि, अभी भी इसमें नवाचार की गुंजाइश है।

‘यह आपकी मेहनत है’: डायरेक्टर का नेशनल अवाॅर्ड लौटा गए चोर, घर के बाहर छोड़ी चिट्ठी में लिखा- सर माफ कर दो

तमिलनाडु में एक अजीब घटना घटी है। यहाँ के मदुरै में में रहने वाले फिल्म डायरेक्टर के घर चोरों ने बीते गुरुवार (7 फरवरी) की रात चोरी की घटना को अंजाम दिया। चोरों ने फिल्म डायरेक्टर के घर से कैश, सोना तो चुराया ही, साथ ही उनके द्वारा जीते गए 2 नेशनल अवॉर्ड की ट्रॉफिया भी उड़ा ले गए। इस घटना की पुलिस जाँच ही कर रही थी, कि अब चोरी किए गए पदक चोरों ने वापस कर दिए, साथ ही माफी नामे के साथ एक नोट भी छोड़ा है। इस खबर के सामने आने के बाद से सब हैरान हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला दो-दो नेशनल अवॉर्ड जीत चुके तमिल फिल्म डायरेक्टर एम मणिकंदन से जुड़ा है। यहाँ चोरों ने कैश, सोना और नेशनल अवॉर्ड के तौर पर मिले दो पदक उड़ा ले गए। चोर बाकायदा सेंध लगाकर उनके घर में घुसे थे। उनके घर से 1 लाख रुपए नकद के साथ लाखों रुपए का सोना भी चोर ले गए। हालाँकि चोरी के कुछ दिनों बाद शायद चोरों का मन बदल गया।

चोरों ने सोमवार की रात (12 फरवरी 2024) को उनके घर के बाहर नेशनल अवॉर्ड के रूप में मिले दोनों पदकों और तमिल में माफीनामा लिख कर एक प्लास्टिक बैग में रख कर छोड़ दिया। चोरों ने माफी नामे में लिखा, “सर, हमें माफ कर दो, ये (अवॉर्ड) आपकी मेहनत है।” इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस मामले की जाँच में जुट गई। हालाँकि उस इलाके में सीसीटीवी कैमरों के न लगे होने की वजह से चोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

मणिकंदन ने जीते हैं दो नेशनल अवॉर्ड

मणिकंदन की पहली फिल्म ‘काका मुत्तई’ को साल 2015 में 62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का अवॉर्ड मिला था। वहीं, पिछले साल ही ‘कदैसी विवासयी’ फिल्म को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था। वो चेन्नई में रहते हैं, लेकिन मदुरै के उसिलामपट्टी में ये घर है। जहाँ कुछ लोगों को उन्होंने देखरेख लिए रखा है। उन्होंने चोरी की वारदात की पुलिस में शिकायत भी की थी।

‘अब मोदी पंजाब आया तो बचेगा नही’: ये कैसे ‘किसान’ जो PM को दे रहे धमकी, खालिस्तान के समर्थन में भी सुनाई पड़े हैं स्वर

दिल्ली सीमा पर जुटने के लिए पंजाब से किसान निकलकर शंभू बॉर्डर पर जुटे हैं। इस बीच प्रशासन उन्हें समझाने की, मनाने की, उनकी बात सुनने की कोशिश कर रहा है। लेकिन कुछ उपद्रवी तत्व ऐसे हैं जिनकी मंशा किसानों के हित की नहीं बल्कि अपने एजेंडे को अंजाम देने की है। शंभू बॉर्डर से एक कथित किसान का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वो पीएम मोदी को धमकी देता दिख रहा है।

ये वीडियो अजीत अंजुम के चैनल पर मौजूद है। वीडियो में 21:37 सेकेंड के बाद इस कथित किसान की धमकी को सुना जा सकता है। प्रदर्शन करने निकला ये ‘किसान’ कहता है- “अगर मोदी आया न वापस पंजाब तो उसे इस आँसू गैस के दर्शन कराएँगे वो टेंशन न लें। पिछली बार आया था न फिरोजपुर से भाग गया था। बहाना मारा था कि मैं बच के आ गया। इस बार आएगा तो बच के नहीं जाएगा।”

किसान आंदोलन में खालिस्तानी तत्व

बता दें कि पुरानी घटनाओं को देखते हुए और खुफिया रिपोर्ट्स के मद्देनजर शुरू से ही किसानों के इस आंदोलन पर और इसमें शामिल अराजक तत्वों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

इससे पहले एक यूट्यूब चैनल सत्य खबर ने 12 फरवरी को एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कुछ सिख खालिस्तान की माँग करते दिख रहे हैं। उनमें से एक सिख ने कहा, “हम सिंघु बॉर्डर पर खड़े हैं, जहाँ तुम लोगों ने बैरिकेड लगा रखे हैं। एक काम करो: हरियाणा के बॉर्डर को हमेशा के लिए बंद कर दो। हम पाकिस्तान के साथ सीमा खोलेंगे। तुम लोगों ने हमें भारत से अलग किया तो अब अलग ही हो जाते हैं।”

इसके बाद इन लोगों ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उस कथित किसान ने आगे कहा, “मोदी सरकार पंजाब को अपना नहीं समझती है। अगर वो पंजाब को अपना नहीं समझते हैं तो हमें अलग हो जाने दो। हमें अपना देश खालिस्तान बनाने दो। हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जाएँगे। हमने दीवारें नहीं बनाईं, तुमने बनाईं। तुमने हमें भारत से अलग कर दिया है। अब हम खालिस्तान बनाएँगे।”

किसान आंदोलन में इस तरह के बयान आने से पहले ट्रैक्टर पर भिंडरावाले की फोटो वाला झंडा भी देखा गया था और अब खुलेआम पीएम मोदी को धमकी दी जाने लगी है।

पंजाब में हुई थी पीएम की सुरक्षा में सेंध

धमकी में जिस पंजाब की घटना का जिक्र है वो 5 जनवरी 2022 की है। उस समय पीएम मोदी का विमान बठिंडा में लैंड हुआ था, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था।

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध था। सड़क मार्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

यूपी में हलाल सर्टिफिकेट के पीछे एक बड़े उलेमा का हाथ: सबूत जुटाने में लगी STF, टेरर फंडिंग की भी चल रही जाँच

हलाल सर्टिफिकेट देने के मामले में उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम मजहबी उलेमा का नाम सामने आया है। इसको लेकर यूपी STF को कई अहम साक्ष्य मिले हैं। इसको लेकर पिछले दिनों चार गिरफ्तार लोगों गिरफ्तार किया गया था। उनसे भी कुछ बेहद महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं। अब STF इस उलेमा की कुंडली खंगालने में लग गई है। हालाँकि, उस उलेमा का नाम अभी सामने नहीं आया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को गिरफ्तार किया है। ये हलाल सर्टिफिकेट देने के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे।

इन लोगों के पास न कोई लैब थी, न वो किसी सामान की टेस्टिंग करते थे, बस 10 हजार लिया और सर्टिफिकेट दे दिया। मुंबई में बैठकर पैसे बना रहे ऐसे ही मौलानाओं की चौकड़ी को यूपी एसटीएफ ने पहले तो पूछताछ के लिए बुलाया, और जब पूछताछ में उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया, तो फिर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।

दरअसल, इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुंबई जैसी मुस्लिम संस्थाएँ कंपनियों को हलाल प्रमाण पत्र दे रही थीं। इस प्रमाण पत्र का उद्देश्य यह बताना था कि ये सारे प्रोडक्ट मुस्लिमों द्वारा शरीयत के तहत तैयार किया गया है और इसे मुस्लिम इस्तेमाल कर सकते हैं।

STF की जाँच और पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में सामने आया है कि ये लोग खाड़ी देशों में अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए हलाल प्रमाण पत्र जारी करते थे। कंपनियों द्वारा पैसे देते ही ये लोग बिना किसी जाँच के हलाल प्रमाण पत्र दे देते थे। दरअसल, हलाल प्रमाण पत्र होने से खाड़ी देश और मुस्लिम समाज के लोग बिना किसी रोक-टोक के इनका माल खरीदेंगे।

STF ने हलाल प्रकरण से जुड़े आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज कराने के साथ उनके सहयोगियों की धरपकड़ में लगी है। साथ ही इनके लेनदेन करने वालों की मंशा का भी पता लगाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक यह रकम देश के साथ विदेशी खातों में भी भेजी जा रही थी। जिससे इसका देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की बात सामने आ रही है।

STF के एक अधिकारी के मुताबिक, कंपनियों को हलाल सर्टिफिकेट देकर ये लोग मोटा पैसा बना रहे थे। अब STF इस बात की भी जाँच की जा रही है कि इन पैसे से टेरर फंडिंग से लेकर एक विशेष धर्म के लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए तो नहीं की जा रही थी। अब तक करीब 20 कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जिसके साथ ये लोग लेनदेन कर रहे थे।

यूपी एसटीएफ ने आरोपितों के बैंक खाते फ्रीज करा दिए हैं। उनके लेनदेन का विवरण भी जुटाया जा रहा है। इससे पता चल सकेगा कि इन खातों में कहाँ-कहाँ से और किन-किन लोगों ने पैसे भेजे हैं। इसके साथ ही इन पैसों को आरोपितों ने किन-किन लोगों एवं संस्थाओं को हस्तांतरित किया, इसकी भी जाँच की जाएगी।

बता दें कि पिछले साल योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले सामान बेचने पर जेल भेजने का फैसला किया था। प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि हलाल सर्टिफिकेट उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे में ये भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार के पत्र में किया गया है।

इस पत्र में बताया गया है कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिंट ऑयल, रेडी टू ईट सेवरीज व खाद्य तेल आदि के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है, जो कि गलत है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के लिए एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र ही काफी है।

‘एक मिनट भी नहीं लगेगा, SC/ST एक्ट का मुकदमा करा दूँगा’: DM, SDM, CO सबको चंद्रशेखर ‘रावण’ ने सरेआम धमकाया, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश की ‘आज़ाद समाज पार्टी’ के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो SC-ST एक्ट लगाने की धमकी देते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो में वो एक अधिकारी से पूछते हैं, “आप कब आए यहाँ?” इस पर उक्त अधिकारी जवाब देता है – “27 तारीख़ को।” फिर चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ कहते हैं, “फिर भी 7 दिन के भीतर पैसा जमा कराना होता है। मैं आपके खिलाफ SC-ST एक्ट का मुकदमा करा सकता हूँ, आपको पता है?”

इसके बाद वो कहते हैं, “अगर आपको नहीं पता है तो मैं बता देता हूँ। अगर आपने 7 दिन में पैसा इनके खाते में नहीं भेजा ना, तो आप पर, CO साहब पर और DM साहब पर भी SC-ST एक्ट का मुकदमा करा दूँगा। बहुत छोटा सा काम है मेरे लिए, एक मिनट भी नहीं लगेगा कराने में। आप चाहते हो मुकदमा में फँसना?” बता दें कि चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ ‘भीम आर्मी’ नामक संगठन के भी संस्थापक हैं, जिसे विभिन्न दलित संगठनों को मिला कर बनाया गया है।

वीडियो औरैया जिले का बताया जा रहा है। वहाँ वो बृजेश कुमार नामक एक मृतक के पत्नी और बच्चों से मिलने के लिए गए थे। उनकी 22 जनवरी, 2023 को हत्या कर दी गई थी। बृजेश कुमार की हत्या से लगभग एक साल पहले उनकी माँ की भी लाश भी एक खेत से मिली थी। बताया जा रहा है कि उनके पिता जयप्रकाश की भी हत्या ही हुई थी। हालाँकि, बहादुरपुर गाँव के रहने वाले इस परिवार के लोगों की हत्या के आरोप किसी पर साबित नहीं हुए।

बृजेश कुमार की विधवा आरती देवी ने गजेंद्र सिंह समेत 4 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में गजेंद्र सिंह की गिरफ़्तारी भी हुई थी। परिवार ने चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी। 7 फरवरी, 2024 को वो यहाँ पहुँचे थे। इसी दौरान उन्होंने SDM को धमकी दी। पिछले कुछ वर्षों में SC-ST एक्ट के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट एक बार इस कानून को निरस्त भी कर चुका है, लेकिन भारी विरोध प्रदर्शन के बाद इसे संसद के माध्यम से आपस लाना पड़ा था।

संदेशखाली की जिन औरतों से हैवानियत पर देश सन्न, उनकी MP नुसरत जहाँ रील डालने में बिजी: चुप्पी पर उठे सवाल तो कहा- आग में घी मत डालो

पश्चिम बंगाल का संदेशखाली पिछले कई दिनों से चर्चा में है। यहाँ की महिलाओं ने राज्य की सत्ताधारी दल तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के गुंडों पर घर से उठाकर ले जाने और रेप करने का आरोप लगाया था। इस मामले में महिलाओं की आपबीती से पूरा देश सन्न है। लेकिन वहीं की सांसद नुसरत जहाँ सोशल मीडिया पर रील डालने में व्यस्त हैं। जब उनकी चुप्पी पर सवाल उठे तो उन्होंने ‘आग में घी मत डालो’ कहकर पूरे मामले पर लीपापोती की कोशिश की।

नुसरत जहाँ बशीरहाट से टीएमसी की सांसद हैं। संदेशखाली इसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में स्थानीय सांसद होने के कारण नुसरत जहाँ की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती थी कि वह पीड़ित महिलाओं के साथ खड़े हों और उनको न्याय मिलना सुनिश्चित करें। लेकिन सोशल मीडिया पर जिस तरह से उनके पोस्ट सामने आए हैं उससे लगता है कि नुसरत जहाँ उन लोगों के प्रति अपने दायित्व को भूल चुकी हैं जिन्होंने उन्हें चुना है।

संदेशखाली महिलाओं का आरोप

बता दें कि संदेशखाली में पिछले कुछ दिनों से महिलाएँ सत्ताधारी पार्टी के गुंडों के विरुद्ध सड़कों पर उतरी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टीएमसी के गुंडों के लिए रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते। मीटिंग में सिर्फ महिलाओं को बुलाते हैं। पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा, वहाँ टीएमसी के गुंडे यौन शोषण करते हैं, लेकिन महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं, विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आ गई, उसे वो रात भर उठाकर ‘भोगते’ हैं और मन भर जाने पर सुबह घर भेज देते हैं। महिलाओं का यह भी आरोप है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है। वो पीड़ितों को ही दबाती है।

राज्यपाल से माँगा न्याय

महिलाओं की इन यातनाओं को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी उठाया था। उन्होंने कहा था कि संदेशखाली में जवान शादीशुदा महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है और ममता बनर्जी ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही हैं जो हिंदू महिलाओं को टारगेट करते हैं। इन महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश के राज्यपाल आनंद बोस ने भी इनसे मुलाकात की। वहीं प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को उठाया और सुरक्षा पर चिंता जताई। इसी बीच भाजपा ने बशीरहाट की सांसद नुसरत जहाँ की चुप्पी पर सवाल उठाए।

भाजपा ने उठाए थे नुसरत की चप्पी पर सवाल, तब दिया जवाब

बता दें कि नुसरत जहाँ पर इसी तरह बीजेपी की पश्चिम बंगाल ईकाई ने कहा था, “जब शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गे हिंदू महिलाओं को कैद में रख रहे हैं और टीएमसी कार्यालय में उनके साथ बलात्कार कर रहे हैं तो बशीरहाट (जिसका संदेशखाली एक हिस्सा है) से टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ इंस्टा और फेसबुक के लिए रील बनाने में व्यस्त हैं! ममता बनर्जी और उनके सांसदों को शर्म आनी चाहिए।”

वहीं भाजपा नेता दिलीप घोष ने ने कहा- “वह डॉग डे चॉकलेट डे के दीवाने हैं। फिर वैलेंटाइन डे मनाते हैं। लोग ऐसे लोगों को वोट क्यों देते हैं जिनमें संवेदनशीलता कम है। उनकी ओर से कोई बयान नहीं है। एक शब्द नहीं है। उन्हें एक बार तो वहाँ जाना चाहिए था। वह महिलाओं की इस दुख की घड़ी में ही वहाँ नहीं है। ऐसी देवियों को वोट दोगे तो यही होगा।”

दिलीप घोष के सवाल पूछने के बाद उन्होंने कहा, “ऐसी गंभीर स्थिति में किसी को भी दूसरों को उकसाना नहीं चाहिए बल्कि एकजुट होकर राज्य प्रशासन का समर्थन करना चाहिए। राज्य सरकार वह कर रही है जिसकी जरूरत है और अधिकारी स्थानीय लोगों की अथक सहायता कर रहे हैं। इस घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। हमारा काम आग बुझाना है। आग में घी डालना नहीं। एक जन प्रतिनिधि के तौर पर मैं लगातार अधिकारियों के संपर्क में हूँ।”

गौरतलब है कि नुसरत जहाँ एक तरफ संदेशखाली की स्थिति पर चुप रहने की राय भाजपा नेता को दे रही हैं और दूसरी तरफ इंस्टाग्राम पर अपना प्रमोशन करने में लगी हैं। उनके पोस्ट से पता चलता है कि उन्हें वैलेंटाइन वीक पर पोस्ट डालने की चिंता है लेकिन संदेशखाली में महिलाओं की स्थिति पर क्या एक्शन लिया गया, इस पर अपडेट देने की नहीं।

नुसरत जहाँ के हालिया इंस्टा पोस्ट

उनके पोस्टों पर देख सकते हैं कि लोगों ने उन्हें कमेंट करके संदेशखाली के बारे में भी बताया लेकिन फिर भी उन्होंने इस मामले पर कोई बयान नहीं दिया। उनका बयान आया जब उन पर उंगली उठने लगी।

RJD के साथ आओ, ₹10 करोड़ और मंत्री पद पाओ: जेडीयू MLA को अपनी ही पार्टी के विधायक ने दिया था ऑफर, FIR दर्ज

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बहुमत साबित न कर सके, इसके लिए जेडीयू के विधायकों को खरीदने की कोशिश की गई। इस मामले में जेडीयू विधायक सुधांशु शेखर ने अपनी ही पार्टी के विधायक संजीव कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने एफआईआर में पूर्व विधायक इंजीनियर सुनील का भी नाम शामिल कराया है। सुधांशु शेखर ने कहा कि उन्हें नीतीश कुमार की सरकार गिराने और आरजेडी के खेमे में आने के लिए 10 करोड़ का ऑफर दिया गया, साथ ही मंत्री पद का भी।

सुधांशु शेखर ने आरोप लगाए कि उनके साथ ही कई अन्य विधायकों को भी इसी तरह से ऑफर दिए गए। मुझे 5 करोड़ पहले और 5 करोड़ काम होने के बाद दिए जाने की बात कही गई। सुधांशु शेखर ने पटना कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। उनके द्वारा दी गई एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है, जिसमें हर बात का विस्तार से जिक्र है।

एफआईआर के मुताबिक, जेडीयू विधायक सुधांशु शेखर ने कहा कि इंजीनियर सुनील ने मेरे रिश्तेदार के माध्यम से फोन पर महागठबंधन के साथ आने के लिए कहा। उन्होंने पाँच करोड़ कैश तुरंत और पाँच करोड़ काम पूरा (नीतीश सरकार गिर जाने) होने के बाद देने के लिए कहा। साथ ही ये भी कहा कि आप मंत्री पद ले लीजिए। पहला वॉट्सऐप कॉल 9 परवरी की रात 8.32 बजे आया था। दूसरी वॉट्सऐप कॉल 10 फरवरी को सुबह 10.11 बजे पूर्व मंत्री नागमणि कुशवाहा के नंबर से आई।

एक घंटे बाद ही इंटरनेशनल नंबर से इंटरनेट कॉल आया। सामने वाले ने अपना नाम अखिलेश बताया और खुद को राहुल गाँधी का करीबी बताया। उसने सारी डिमांड पूरी करने की बात कही, बदले में विश्वासमत के दौरान गठबंधन का समर्थन करने को कहा।

इसी तरह से साथी विधायक कृष्ण मुरारी शरण को आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव का फोन पहले ही आया था। उन्हें आरजेडी के पक्ष में वोट करने के बदले मंत्री पद और मनचाहा पैसा देने की बात कही। एफआईआर में निरंजन कुमार मेहता को भी आरजेडी के पक्ष में वोट करने के लिए लालच और धमकी देने की बात कही गई।

सुधांशु शेखर ने इन कामों में परबत्ता विधानसभा से जेडीयू विधायक संजीव कुमार की भूमिका को संदिग्ध बताया। शिकायत के मुताबिक, संजीव के साथ ही पूर्व विधायक इंजीनियर सुनील को भी आरोपित बनाया गया है। उन्होंने शिकायत में विधायकों के अपहरण का भी आरोप लगाया।

इस मामले में जेडीयू विधायक संजीव कुमार का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ विधायकों उनके खिलाफ साजिश करके ऐसी एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि इस पूरे मामले के बारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कुछ नहीं पता है।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को विधानसभा में विश्वास मत जीत लिया था। इस दौरान जेडीयू के कई विधायकों के बागी होने का अंदेशा भी जताया जा रहा था। विपक्षी दल के नेता ‘खेला’ होने का दावा कर रहे थे। हालाँकि फ्लोर टेस्ट के दौरान आरजेडी के ही तीन विधायक सत्ता पक्ष की तरफ आ गए।

पीठ पर गुदवाए पुलवामा बलिदानियों के नाम, किसी को बेटी की करनी थी शादी तो कोई जन्मदिन मनाकर लौटा था… देश कर रहा नमन

पुलवामा के बलिदानियों की पाँचवी बरसी पर आज (14 फरवरी 2024) हर देश भक्त बलिदानियों को याद कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की है जो देश की सेवा करते करते बलिदान हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “मैं पुलवामा में बलिदान हुए वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। हमारे राष्ट्र के लिए उनकी सेवा और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।”

बता दें कि पुलवामा के बलिदानियों की बरसी पर हर साल इन्हें हर देशभक्त अपने ढंग से याद करता है। कोई इनके स्केच बनाता है, कोई इनके शौर्य को याद करता है। ऐसे ही एक राष्ट्रभक्त भीलवाड़ा के अगरपुरा गाँव के नारायण हैं। उन्होंने अनूठा अंदाज में पुलवामा बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भीलवाड़ा जिले के अगरपुरा गाँव के नारायण ने पुलवामा में बलिदान हुए 40 जवानों का नाम अपने शरीर पर गुदवाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने शरीर पर तिरंगे के साथ इन बलिदानियों का नाम लिखवाया और ये भी लिखा- एक विचार विश्व बदल सकता है। नारायण ने अपने सीने पर भगत सिंह की फोटो भी गुदवाई है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा-

“14 फरवरी 2019 को शाम को जब हमने यह खबर सुनी की जम्मू कश्मीर के पुलवामा अटैक में हमारे देश के करीब 40 जवान शहीद हो गए हैं। इसके बाद मुझे पूरी रात नींद नहीं आई। मैंने सोचा कि मैं हर एक बलिदानी के अंतिम संस्कार में जा सकूँ। 14 फरवरी को हर कोई व्यक्ति प्रेम का दिवस मनाता है लेकिन इस प्रेमी ने देश की सुरक्षा और सुरक्षा के लिए अपनी जान तक परवाह नहीं की और खुशी-खुशी अपनी जान दे दी। देश के सैनिक से बड़ा प्रेमी कोई नहीं हो सकता है। मैंने निर्णय लिया कि मैं इन सभी 40 शहीदों का नाम अपने शरीर पर गुदवाउँगा। जब तक मैं जिंदा रहूँगा इन सभी देश प्रेमी और 40 जवानों के नाम मेरे शरीर पर जिंदा रहेंगे और उन्हें हमेशा याद करते रहेंगे की कैसे उन्होंने अपने देश के लिए जान दी है।”

नारायण कहते हैं- “आजकल हम फिल्मों में हीरो देखते हैं वह हीरो नहीं है असल जिंदगी में हीरो देश का सैनिक है जो हमारी रक्षा के लिए तन मन से हमेशा लगे रहते है और देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने के लिए एक बार भी नहीं सोचते है। देश के जवान ही असल जिंदगी में एक रियल हीरो हैं। वैलेंटाइन डे को इन देशभक्तों के नाम करना चाहिए क्योंकि यह इसके सच्चे काबिल है।”

बता दें कि पुलवामा हमले की बरसी पर पूरा देश बलिदान हुए वीर जवानों को याद कर रहा है। ऐसे में ऑपइंडिया आपके लिए लेकर आया है वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की कुछ चुनिंदा कहानियाँ… जिन्हें पढ़ आपको भी शायद लगे कि नारायण जैसे लोग आखिर क्यों इन बलिदानियों को सच्चा हीरो बताते हैं।

जन्मदिन मनाकर लौटे नसीर अहमद

पुलवामा में बलिदान हुए नसीर अहमद फिदायीन हमले से एक दिन पहले ही अपना 46 वाँ जन्मदिन मनाकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे। 22 साल सेना को दे चुके नसीर उस बस के कमांडर थे, जिसे आत्मघाती हमले में निशाना बनाया गया। नसीर का पार्थिव शरीर जब उनके गाँव पहुँचा तो दोदासन देशभक्ति के नारों से गूँज उठा था। वहाँ मौजूद हर शख्स के चेहरे पर आतंकियों को लेकर गुस्सा था। नसीर का बेटा बार-बार बस यही दोहरा रहा था कि पहले वो पापा की मौत का बदला लेगा फिर अपना जन्मदिन मनाएगा।

संजय ने खुद बढ़वाए थे नौकरी के 5 साल

पुलवामा में वीरगति को प्राप्त हुए संजय राजपूत 20 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी देश के लिए अपनी सेवा को पाँच वर्ष के लिए आगे बढ़वाया था। मगर उन्हें क्या मालूम था उनका यह फ़ैसला उन्हें हमेशा के लिए परिवार से दूर कर देगा। संजय के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 13 और 10 साल है। उनके परिवार में चार भाई और एक बहन हैं। एक भाई को पहले ही परिवार एक्सिडेंट में खो चुका है।

‘बेटे को करूँगी सेना को समर्पित’

अपने घर के इकलौते कमाने वाले नितिन राठौर 14 फरवरी को हुए आत्मघाती हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। महज 23 की उम्र में साल 2006 में सीआरपीएफ में शामिल होने वाले नितिन के घर में उनकी पत्नी वंदना, बेटा जीवन, बेटी जीविका माँ सावित्री बाई, पिता शिवाजी, भाई प्रवीण समेत दो बहनें हैं। नितिन के वीरगति के प्राप्त होने की ख़बर सुनने के बाद गाँव के लोगों ने अपने घरों में खाना नहीं बनाया। वहीं वीर की पत्नी ने हिम्मत दिखाते हुए कहा था कि वो अपने बेटे को भी सेना को समर्पित करेंगी क्योंकि यह उनके पति (नितिन) का सपना था।

वीर कुलविंदर की अंतिम यात्रा में पहुँचीं थी मंगेतर

कुलविंदर सिंह 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकियों के कायरतापूर्ण हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। कुलविंदर अपने माता-पिता के इकलौती संतान थे। कुलदीप की आठ नवंबर को शादी होनी तय थी। इस खबर को सुनकर उनकी मँगेतर अमनदीर कौर ससुराल आई और भारत माता के वीर सपूत की अंतिम यात्रा में शामिल हुई। उन्होंने वीरगति को प्राप्त अपने मंगेतर के पार्थिव शरीर को सैल्यूट ठोक शत्-शत् नमन किया। कुलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि उन्होंने अपने जवान बेटे को सदा के लिए खो दिया है। उन्होंने हमले वाले दिन से ही अपने बेटे की वर्दी पहन रखी थी। उनके इस जोश को देख कर अन्य लोग भी अभिभूत थे।

छिन गया सबसे छोटा बेटा

अश्वनी कुमार काछी भी पुलवामा में हुए हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। अश्वनी कुमार काछी परिवार के सबसे छोटे बेटे थे। चार भाइयों में सबसे छोटे अश्वनी की पहली पोस्टिंग साल 2017 में श्रीनगर में हुई थी। उनके बुज़ुर्ग पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु पर गर्व है, लेकिन यक़ीन नहीं होता कि वो अब इस दुनिया में नहीं है। अश्वनी कुमार घर के एकमात्र कमाऊ पूत थे। अश्वनी की माँ अपने पाँचों बच्चों के भरण-पोषण के लिए बीड़ी बनाने का कार्य किया करती थी। जब अश्विनी की नौकरी लगी, तब उन्होंने अपनी माँ से बीड़ी बनाने वाला कार्य छुड़वा दिया था।

बेटी की शादी के लिए लड़का देखने जाने वाले थे संजय

पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त बिहार के संजय कुमार सिन्हा को अपनी बड़ी बेटी रूबी की शादी की फ़िक्र सता रही थी। वापस ड्यूटी पर जाते वक़्त उन्होंने घरवालों से दोबारा आने का वादा किया था। संजय ने कहा था कि वह घर लौटते ही बेटी के लिए लड़का देखने जाएँगे। घरवाले भी उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन जब उनके वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिली, पूरा परिवार ही स्तब्ध रह गया और गाँव में मातम पसर गया। जब उनकी मृत्यु का समाचार आया, तब उनकी पत्नी बबीता भोजन कर रही थी। यह दुःखद सूचना मिलते ही थाली उनके हाथों से गिर पड़ी और वह दहाड़ मार कर रोने लगी।

सालगिरह के दिन वीरगति को प्राप्त हुए थे तिलक राज

हिमाचल प्रदेश स्थित कांगड़ा के सीआरपीएफ जवान तिलक राज 14 फ़रवरी को पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। जिस दिन उन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर किए, उसी दिन उनकी चौथी मैरिज एनिवर्सरी भी थी। जब तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा तिलक के परिजनों से मिलने पहुँचे, तब सावित्री ने उनसे कहा- ‘साहब, मुझे भी सीआरपीएफ की नौकरी दे दो।‘ एक माह से भी कम उम्र के बच्चे को अपनी गोद में लेकर बैठी सावित्री की आवाज़ में गज़ब की दृढ़ता थी।

सबको सिसकियाँ भरने के लिए छोड़ गए विजय

पुलवामा आतंकी हमले में जान गँवा बैठे जवानों में एक नाम देवरिया के सीआरपीएफ जवान विजय कुमार मौर्य का भी है। विजय के इस हमले में शिकार होने के बाद उनके कई रिश्ते ताउम्र सिसकियाँ भरने के लिए पीछे छूट गए। इस हमले में सिर्फ़ देश की सेना का एक जवान ही नहीं बलिदान हुआ बल्कि बुजुर्ग पिता ने विजय के रूप में अपने घर के सबसे होनहार बेटे को गवाँ दिया। उस पत्नी का सुहाग भी उजड़ गया जिसके पास विजय की तीन साल की मासूम बच्ची है, जो अभी अपने पिता को ढंग से जान भी नहीं पाई थी। इसके अलावा दो भतीजियों की आस भी टूट गई, जिनकी जिम्मेदारी उनके पिता की मौत के बाद विजय ने ही उठाई हुई थी।

गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़ गए वीर रतन ठाकुर

14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए रतन ठाकुर अपनी गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़कर चले गए थे। रतन के पिता निरंजन ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे रतन ने पत्नी राजनंदनी को फोन करके यह बताया था कि वो श्रीनगर जा रहे हैं और शाम तक वहाँ पहुँच जाएँगे। रतन ठाकुर ने अपनी पत्नी से होली पर आने का वादा किया था और इसी इंतज़ार में उनकी पत्नी के दिन कट रहे थे। बता दें कि रतन सिंह का चार साल का बेटा भी है जो कहता है कि उसके पिता ड्यूटी पर हैं। चार साल के इस बच्चे को हर पल अपने पिता का इंतज़ार रहता है।

4 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे वीर अजीत कुमार

14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में अजीत कुमार को उनके घरवालों ने हमेशा के लिए खो दिया। अजीत की उम्र मात्र 38 साल थी। चार दिन पहले ही अजीत अपनी छुट्टियाँ बिताकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे। अजीत कुमार सीआरपीएफ की 115वीं बटालियन में तैनात थे। अजीत के वीरगति के प्राप्त होने की सुनने के बाद घर में कोहराम मच गया। अजीत के भाई रंजीत ने बताया कि एक महीने पहले ही उनके बड़े भाई अजीत छुट्टियों में घर आए थे, लेकिन 10 फरवरी को छुट्टी समाप्त होने पर वो जम्मू वापस लौट गए थे। किसे मालूम था कि अजीत के घरवालों की मुलाकात उनसे आखिरी है, इसके बाद वो तिरंगे में लिपट कर ही वापस आएँगे।

क्या हुआ था 14 फरवरी 2019 को और उसके बाद

गौरतलब है 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा (Pulwama Attack) में हुए भीषण आतंकी हमले में CRPF के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। पुलवामा हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) ने ली थी। इस हमले के 12 दिन बाद यानी 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी। इस एयर स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद के 350 से अधिक आतंकी मारे गए थे।