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‘वे मस्जिद तोड़ रहे और तुम मंदिर बना रहे’: अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर से बौखलाए इस्लामी कट्टरपंथी, UAE के शासक को भी दे रहे गाली

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में बने BAPS स्वामी नारायण मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वहाँ पहुँचे हैं। वह अबू धाबी में बुधवार (14 फरवरी 2024) को इस मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस मंदिर पर अपनी घृणा दिखानी शुरू कर दी है।

अबू धाबी में नवनिर्मित इस मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथी लगातार टिप्पणी कर रहे हैं। वे उल्टी सीधी टिप्पणी कर रहे हैं। इसके साथ ही कट्टरपंथी इस्लामी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शासकों से पूछ रहे हैं कि एक इस्लामी मुल्क में आखिर मंदिर का कार्यक्रम होने ही क्यों दिया जा रहा है।

अबू धाबी में स्थित इस BAPS स्वामी नारायण मंदिर को लेकर जब UAE के सबसे बड़े समाचार पत्र खलीज टाइम्स ने ट्विटर पर खबर शेयर की तो कट्टरपंथी भड़क गए। ऐसे ही एक कट्टरपंथी ने लिखा, “वो तुम्हारी मस्जिदें गिराएँ और तुम उनके मंदिर बनाते जाओ। उनको शर्मिन्दा होना चाहिए, जिन्होंने इसे बनाया और इसके लिए पैसे दिए।”

उवैद खान नाम के एक कट्टरपंथी ने पूछा, “UAE ने इस कार्यक्रम की अनुमति ही क्यों दी?”

वहीं, एक दूसरे कट्टरपंथी ने लिखा, “मेरी दुआ है कि अरब मुनाफिक (अरब के मौलाना) इस मंदिर को चलाएँ।”

एक और कट्टरपंथी ने UAE के शासकों पर मंदिर को लेकर प्रश्न उठाए। हमीद रजा ने लिखा, “क्या हुआ अगर वे (हिंदू) भारत में मस्जिद को गिरा रहे हैं और मुस्लिम को मार रहे हैं। आप यूएई के बेशर्म लोगों पर शर्म आनी चाहिए।”

एक कट्टरपंथी ने तो यहाँ तक कह दिया कि कैसा हो अगर शेख जायद मस्जिद को ढहा कर मंदिर बना दिया जाए, ताकि हिन्दू खुश हो जाएँ।

क्या है UAE के इस मंदिर की खासियत

इस नवनिर्मित मंदिर को 1 मार्च 2024 आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर परिसर में एक विजिटर केंद्र, प्रार्थना कक्ष, प्रदर्शनियाँ, लर्निंग सेंटर, बच्चों और युवाओं के लिए खेल क्षेत्र, उद्यान, पानी की सुविधाएँ, फूड कोर्ट, पुस्तक एवं उपहार की दुकानों के साथ अन्य सुविधाएँ भी होंगी।

जिस मंदिर का प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे, वह अबू धाबी का पहला हिंदू मंदिर है। यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात के अमीर द्वारा उपहार में दी गई 27 एकड़ भूमि पर बना है। स्वामी नारायण मंदिर के निदेशक प्रणव देसाई ने इस मंदिर के लिए संयुक्त अरब अमीरात और भारतीय नेतृत्व को आभार जताया है।

बता दें स्वामीनारायण संप्रदाय की वेबसाइट के अनुसार, इस संप्रदाय का हिंदू मंदिर UAE के अबू धाबी, दुबई, शारजाह और रुवैस शहर में स्थित हैं। ये मंदिर या तो बन गए हैं या फिर बन रहे हैं। अगर मीडिल ईस्ट की बात करें तो स्वामीनारायण मंदिर ओमान के मस्कट और सोहर तथा कुवैत एवं बहरीन में भी स्थित हैं।

दरअसल, स्वामीनारायण संप्रदाय के बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के तत्कालीन अध्यक्ष स्वामी महाराज 5 अप्रैल 1997 को UAE के शारजाह के एक रेगिस्तानी इलाके में गए। वहाँ पर स्वामी जी विश्व शांति और सभी धर्मों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम के लिए प्रार्थना की। उन्होंने सभी देशों की प्रगति की भी कामना की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा से अबू धाबी में एक मंदिर बनाने के लिए भी प्रार्थना भी की।

अगले दो दशकों में स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों एवं भक्तों ने स्वामी जी की कल्पना के अनुसार मंदिर बनाने के लिए UAE के लोगों एवं वहाँ के नेताओं से मुलाकात की और उनसे इसके लिए इजाजत माँगी। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर बनाने के लिए जमीन की भी माँग की।

साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद भारत और UAE के बीच आपसी विश्वास का माहौल बना और दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए। इसके बाद साल 2015 में UAE की सरकार ने हिंदू मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी।

इसके बाद पीएम मोदी ने UAE सरकार की दिल खोलकर सराहना की थी। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, “मैं अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए भूमि आवंटित करने के फैसले के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार का बहुत आभारी हूँ। यह एक महान कदम है।” मंदिर परियोजना के निर्माण, विकास और प्रशासन के लिए दोनों सरकारों ने स्वामीनारायण संस्था और मंदिर लिमिटेड को चुना।

इसके बाद अबू धाबी-दुबई राजमार्ग के नजदीक अबू धाबी-स्वीहान-अल ऐन रोड पर अल रहबा क्षेत्र के अबू मुरीखा में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मंदिर में सात टावर हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सात अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंदिर को बनाने की आधिकारिक घोषणा फरवरी 2018 में शाही दरबार में की गई थी और अप्रैल 2019 में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था। मई 2023 में 30 से अधिक देशों के राजनयिकों ने निर्माणाधीन मंदिर का दौरा किया था।

मंदिर के प्रवक्ता के अनुसार, प्राचीन प्रथाओं का पालन करते हुए इस मंदिर के निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। यह विशाल मंदिर पूरी तरह से पत्थर से बनाया गया है। इसे बनाने के लिए 700 से अधिक कंटेनरों में 20,000 टन से अधिक पत्थर और संगमरमर अबू धाबी भेजा गया। नींव को भरने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है, जिससे कंक्रीट मिश्रण में 55 प्रतिशत सीमेंट की जगह ली गई है।

इस मंदिर को पर्यावरण के अनुकूल बन गया है। इसके कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आई है। मंदिर की संरचना की निगरानी के लिए, दबाव, तापमान और भूकंपीय घटनाओं का लाइव डेटा हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर 300 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं। गुजरात और राजस्थान के कारीगरों को बुलाकर मंदिर के खंभों एवं दीवारों पर मोर, घाथी, घोड़े, ऊँट, चंद्रमा आदि को उकेरा गया है।

Islamists cry foul as pm modi reaches abu dhabi to inaugurate baps swaminarayan mandir

जो जमीन दिल्ली हाई कोर्ट की, उस पर AAP ने बना लिया कार्यालय: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वापस करो

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को कहा कि दिल्ली के राउज़ एवेन्यू स्थित आम आदमी पार्टी (AAP) का राजनीतिक कार्यालय कब्जा की हुई जमीन पर बनी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस जमीन पर यह राजनैतिक कार्यालय बनाया गाय है, वह जमीन दिल्ली हाई कोर्ट को आवंटित की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हैरानी की बात है कि दिल्ली हाईकोर्ट की जमीन पर एक राजनीतिक दल का दफ्तर चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह जमीन दिल्ली हाईकोर्ट को लौटाई जाए। कोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी सचिव और वित्त सचिव अगली तारीख से पहले हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के साथ एक बैठक करें और मामले का समाधान निकालें। 

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। उन्होंने सवाल किया, “कोई राजनीतिक दल उस पर कैसे बैठ सकता है? हाईकोर्ट को कब्जा दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट इसका उपयोग किस लिए करेगा? केवल जनता और नागरिकों के लिए करेगा।”

CJI ने कहा कि सभी अतिक्रमण हटाए जाएँगे और आगे के निर्देशों के लिए इस मामले में सोमवार (19 फरवरी 2024) को होगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में न्यायिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित एक मामले से निपटान के दौरान इस मुद्दे पर ध्यान दिया और ये बातें कहीं।

दरअसल, CJI चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ को मंगलवार (13 फरवरी 2024) को एमिकस क्यूरी के परमेश्वर ने सूचित किया कि उच्च न्यायालय के अधिकारी आवंटित भूमि पर कब्जा करने गए थे, लेकिन वहाँ एक राजनीतिक दल का कार्यालय बनाया गया है। इसलिए वे जमीन पर कब्जा नहीं ले सके।

दिल्ली सरकार के कानून सचिव भरत पाराशर ने अदालत को यह भी बताया कि उक्त जमीन 2016 से आम आदमी पार्टी के पास है। इस पर मुख्य न्ययाधीश ने कहा कि यह जमीन दिल्ली हाई कोर्ट को लौटानी होगी। उन्होंने इसके लिए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पीडब्ल्यू सचिव और वित्त सचिव को बैठक कर समाधान निकालने के लिए कहा।

पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने दिल्ली जिला न्यायपालिका में बुनियादी ढाँचे के लिए धन उपलब्ध कराने के प्रति उदासीन रवैये के लिए दिल्ली सरकार की आलोचना की थी। उस समय सीजेआई ने कहा था कि मार्च 2021 तक चार में से तीन परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी गई, लेकिन इन परियोजनाओं के लिए धन जारी नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि 5 दिसंबर 2023 तक 887 न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या को समायोजित करने के लिए 118 अदालत कक्षों या 813 न्यायिक अधिकारियों की वर्तमान कार्यशील शक्ति को समायोजित करने के लिए 114 अदालत कक्षों की आवश्यकता थी। तब सरकार की ढुलमुल रवैये की आलोचना की थी।

बिहार में सरकार बदलते लालू यादव के साले के घर पर चला बुलडोजर, भागे-भागे कोर्ट पहुँच कर किया सरेंडर: CM नीतीश के ‘जनता दरबार’ में पहुँची थी जमीन कब्जाने की शिकायत

राजद सुप्रीमो लालू यादव के साले सुभाष यादव ने आत्म-समर्पण कर दिया है। हाल ही में बिहार में राजद सत्ता से विपक्ष में भी गई है, क्योंकि नीतीश कुमार ने राजद को छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया। सुभाष यादव के खिलाफ रंगदारी के एक मामले में कुर्की के आदेश का इश्तिहार जारी किया गया था। मामला बिहटा थाने का है। मंगलवार (13 फरवरी, 2024) को बिहार पुलिस बुलडोजर लेकर सुभाष यादव के आवास पर पहुँची थी, जिसके बाद उन्होंने सरेंडर किया।

बिहार में सरकार बदलने के असर के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। एक दिन पहले ही विश्वास-मत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बिहार के नए उप-मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा था कि वो एक-एक की फ़ाइल खुलवाएँगे। सुभाष यादव, लालू यादव के छोटे साले हैं। साधु यादव उनके बड़े भाई हैं। साधु यादव लोकसभा सांसद और विधायक रहे हैं, जबकि सुभाष यादव राज्यसभा सांसद और विधान पार्षद। जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं, तब इन दोनों भाइयों की तूती बोलती थी।

दोनों को लालू-राबड़ी काल में बिहार के माफिया के रूप में देखा जाता रहा है। सुभाष यादव ने अब कुर्की के डर से आत्म-समर्पण किया है। कुर्की की कार्रवाई के लिए पहुँची महिला पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक पुराने मामले को लेकर कोर्ट ने कुर्की-जब्ती के कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन रंगदारी और जमीन की धोखाधड़ी के इस मामले में सुभाष यादव ने इससे पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद कुर्की-जब्ती की कार्रवाई रोक दी गई।

लालू यादव के साले जिस तरह से भागे-भागे कोर्ट पहुँचे, उसे ‘सम्राट इम्पैक्ट’ के रूप में भी देखा जा रहा है। सुभाष यादव ने MP-MLA कोर्ट में आत्म-समर्पण किया है। मामला नेउरा के बेला गाँव निवासी भीम वर्मा से जुड़ा है और 7 कट्ठा जमीन का है। इस मामले में सुभाष यादव की पत्नी रेणु देवी, बेटे और बेला के पूर्व सरपंच भी आरोपित हैं। बिहटा सर्किल इंस्पेक्टर कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने अपनी टीम और एयरपोर्ट थाने की पुलिस के साथ मिल कर नोटिस चस्पाया था। सुभाष यादव का ये घर कौटिल्य नगर स्थित विधायक कॉलोनी में स्थित है।

ये मामला चर्चा में 27 फरवरी, 2021 को आया था। भीम वर्मा नेउरा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुभाष यादव के परिवार ने उनकी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने बताया कि 96 लाख रुपए की जमीन रजिस्ट्री करवा ली गई। जमीन पर कब्ज़ा भी कर लिया गया। शुरू में 60.50 लाख रुपए दिए गए, लेकिन बाद में मारपीट कर वो भी छीन ली गई। 18 अप्रैल, 2022 को भीम वर्मा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘जनता दरबार’ में पहुँचे थे और अपना दर्द साझा किया था।

‘काॅन्ग्रेस को दिल्ली में इंसानियत के नाते 1 सीट देंगे’: AAP ने बताई ‘औकात’, गुजरात में माँगा हिस्सा- पंजाब में अकेले ही लड़ेगी

आम आदमी पार्टी (AAP) ने INDI गठबंधन की अगुवा कॉन्ग्रेस को उसकी राजनैतिक हैसियत सार्वजनिक रूप से याद दिलाई है। AAP ने पंजाब में लोकसभा चुनाव अलग लड़ने की घोषणा करने के बाद अब दिल्ली में कॉन्ग्रेस को मात्र एक सीट देने का ऑफर दिया है। इसके साथ ही AAP ने हरियाणा और चंडीगढ़ पर जल्दी बात करने को कहा है।

AAP के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में INDI गठबंधन की असली हालत की पोल खोल दी है। उन्होंने बताया है कि सीट बँटवारे को लेकर कॉन्ग्रेस के साथ AAP की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। ये बैठकें 8 और 12 जनवरी 2024 को हुई थीं। इसके बाद एक महीने तक बैठक नहीं हुई है।

पाठक ने बताया है कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस के एक भी सांसद-विधायक नहीं हैं और मात्र 9 पार्षद हैं। ऐसे में डेटा के आधार पर कॉन्ग्रेस की एक सीट भी नहीं बनती है, फिर भी गठबंधन धर्म निभाते हुए AAP एक सीट देगी। AAP ने यह भी धमकी दी है कि अगर कॉन्ग्रेस एक सीट को लेकर नहीं मानती तो वह जल्द ही 6 सीट पर अपने उम्मीदवार घोषित कर देगी।

आम आदमी पार्टी के संगठन महासचिव संदीप पाठक ने दिल्ली में कॉन्ग्रेस को दिए गए एक सीट के प्रस्ताव का आधार मेरिट और डेटा बताया है। पंजाब को लेकर उन्होंने यह भी कहा है कि पंजाब में दोनों पार्टियों के स्थानीय नेताओं की माँग को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग लड़ने का निर्णय लिया गया है।

गौरतलब है कि हाल ही में AAP ने पंजाब में अकेले ही लोकसभा लड़ने का ऐलान किया था। संदीप पाठक ने कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा है कि पंजाब का निर्णय हो गया है तो अब चंडीगढ़ और हरियाणा में भी सीट समझौते पर बातचीत जल्द हो वरना यहाँ भी AAP अपने उम्मीदवार उतारेगी। AAP मात्र दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि गुजरात में कॉन्ग्रेस से अपना हिस्सा माँग रही है।

संदीप पाठक ने 2022 गुजरात विधानसभा चुनावों का आँकड़ा सामने रख कर कहा है कि यहाँ AAP की 8 जबकि कॉन्ग्रेस की 18 लोकसभा सीट बनती हैं। ऐसे में इसमें भी बँटवारा किया जाए। गौरतलब है कि INDI गठबंधन में शामिल अधिकाँश दल अब एकला चलो की नीति अपना रहे हैं या फिर भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में शामिल हो रहे हैं।

बीते एक माह के भीतर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से लेकर बिहार में नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश में रालोद INDI गठबंधन से किनारा कर चुकी है। उत्तर प्रदेश में सपा भी कॉन्ग्रेस को कोई ख़ास तवज्जो नहीं दे रही। अब AAP ने भी उसे आँखे दिखाना चालू कर दिया है और उसकी राजनीतिक जमीन की सच्चाई सामने रख कर अपना हिस्सा माँगा है।

मात्र उत्तर भारत में ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में भी कॉन्ग्रेस का बेड़ा गर्क होता दिख रहा है। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ सीएम जगन मोहन रेड्डी की YSRCP और विपक्ष के नेता चन्द्रबाबू नायडू की पार्टी TDP, दोनों ही भाजपा से गठबंधन के लिए जोर लगा रही हैं। उधर तेलंगाना में पहले से ही BRS और कॉन्ग्रेस आमने सामने हैं।

कर्नाटक में JDS भाजपा के साथ जुड़ चुकी है। केरल में वामपंथी पार्टियाँ किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं जबकि तमिलनाडु में DMK कॉन्ग्रेस को विशेष भाव नहीं देना चाह रही। उत्तरपूर्व के राज्यों में भी कॉन्ग्रेस की जमीन खिसक चुकी है। ऐसे में AAP का इस गठबंधन से किनारे होना कॉन्ग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

क़तर पर सुब्रमण्यन स्वामी के झूठ की पोल शाहरुख खान ने खोली, कहा – सारा श्रेय भारत सरकार का, मेरी इसमें भूमिका नहीं

हाल ही में भारत ने अपने 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों की क़तर की जेल से रिहाई सुनिश्चित की। इन सभी को क़तर में सज़ा-ए-मौत सुनाई गई थी, लेकिन भारत के हस्तक्षेप के बाद इसे आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया गया था। पूर्व नौसैनिकों ने रिहाई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद दिया। वहीं भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कह डाला कि बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान के हस्तक्षेप पर ये संभव हो पाया।

हालाँकि, अब खुद शाहरुख़ खान ने इस पर बयान जारी कर के सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। शाहरुख़ खान की मैनेजर पूजा डडलानी ने अभिनेता के कार्यालय द्वारा जारी किया गया बयान सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें कहा गया है कि क़तर से पूर्व नौसेना अधिकारियों की रिहाई के संबंध में शाहरुख़ खान की कथित भूमिका वाली ख़बरों के संबंध में अभिनेता का कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि इसमें उनकी भागीदारी का कोई भी दावा एकदम गलत है।

SRK के दफ्तर ने कहा है कि ऐसी खबरें निराधार हैं। साथ ही ये भी बताया गया है कि इस अभियान को सफल बनाने का सारा श्रेय भारत सरकार के अधिकारियों को जाता है और शाहरुख़ खान की इसमें कोई भूमिका नहीं है। साथ ही बयान में जोड़ा गया कि कूटनीति और शासन-कार्य से जुड़े सभी मामले हमारे सक्षम नेताओं द्वारा देखे जाते हैं। बयान में कहा गया है कि सभी भारतीयों की तरह शाहरुख़ खान भी पूर्व नौसेना अधिकारियों की वापसी से खुश हैं।

बता दें सुब्रमण्यन स्वामी के ट्वीट के बाद ये चर्चाएँ शुरू हुई थीं। उन्होंने लिखा था, “मोदी को अपने साथ सिनेमा स्टार शाहरुख़ खान को लेकर क़तर जाना चाहिए। जब केंद्रीय विदेश मंत्रालय (MEA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) क़तर के शेखों को मनाने में विफल हो गए, तब मोदी ने शाहरुख़ खान से विनती की कि वो हस्तक्षेप करें। इसके बाद हमारे पूर्व नौसेना अधिकारियों की रिहाई के लिए क़तर के शेखों के साथ एक बहुत ही खर्चीली डील हुई।”

‘विरोध-प्रदर्शन से रोक नहीं सकते, बल प्रयोग हो अंतिम विकल्प’: किसानों के ‘दिल्ली मार्च’ पर हाई कोर्ट, कहा- मिलकर निकालें हल

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार (13 फरवरी 2024) को दिल्ली-एनसीआर में चल रहे किसानों के विरोध से संबंधित याचिकाओं पर केंद्र, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सरकार को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों सहित सभी पक्षों से मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग नहीं करने का निर्देश दिया है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायमूर्ति लपीता बनर्जी की खंडपीठ ने विवादों के सौहार्द्रपूर्ण समाधान की सलाह दी और किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन के लिए क्षेत्रों की पहचान करने का सुझाव दिया। इसकी अगली सुनवाई गुरुवार (15 फरवरी 2024) को होगी।

दरअसल, हाई कोर्ट में दायर एक याचिका में प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है। वहीं, दूसरी याचिका में हरियाणा की सीमाओं को सील करने और कुछ जिलों में इंटरनेट निलंबित करने की राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि ये उपाय नागरिकों को सूचना और संचार के अधिकार से वंचित करके स्थिति को और खराब कर देते हैं।

इसके विपरीत, वकील अरविंद सेठ ने एक अलग जनहित याचिका (पीआईएल) में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पूरे पंजाब और हरियाणा में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निवारक उपाय करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की माँग की है। इसमें कहा गया है कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है और उन्हें इससे रोका नहीं जा सकता।

उधार, हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा राज्यों से ये भी देखने को कहा है कि प्रदर्शन एक तय जगह पर हो और सभी पक्ष मिलकर विवाद का हल निकालें। याचिकाकर्ता ने कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। यह धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, गणतंत्र के स्तंभों पर आधारित है। अनुच्छेद 13 से 40 इन सिद्धांतों की पृष्ठभूमि है। मौलिक अधिकार सेंसरशिप के बिना स्वतंत्रता के प्रयोग की अनुमति देते हैं। हरियाणा सरकार ने किसानों को रोका है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक सड़कों पर कीलें और बिजली के तार लगे हैं।”

इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए राज्य को भी कदम उठाना होगा। उनके भी अधिकार हैं। हाईकोर्ट ने के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी स्थिति में बल प्रयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार में संतुलन होना चाहिए। कोई भी अधिकार अलग नहीं है। सावधानी और एहतियात को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट लाल कृष्ण आडवाणी को निशाना बनाकर किए 19 धमाकों में 58 की हुई थी मौत, मास्टरमाइंड आतंकी SA बाशा को डीएमके सरकार ने छोड़ा; अल-उम्मा का संस्थापक की रिहाई पर SC ने लगाई थी रोक

तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट 1998 के मुख्य आरोपित एसए बाशा समेत तीन आरोपितों को जेल से रिहा कर दिया है। इन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी रिहाई पर रोक लगाई थी। कोयंबरटूर में उस समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाकर किए गए 19 सीरियल ब्लास्ट्स में 58 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

हैरानी की बात ये है कि खुद को धर्मविरोधी बताने वाली डीएमके की सरकार ने उस एसए बाशा को रिहा किया है, जो तमिलनाडु में मुस्लिम कट्टरपंथ और आतंकवाद का चेहरा रहा था। इसी केस में बाशा का भाई नवाब खान भी उम्रकैद की सजा पाया और उसका बेटा मोहम्मद तलहा 23 अक्टूबर 2023 को हुए सिलेंडर ब्लास्ट में गिरफ्तार हुआ है, लेकिन डीएमके सरकार इन आतंकी गतिविधियों के प्रति आँख मूँदकर राष्ट्र विरोधी कार्य कर रही है।

सीएनएन-न्यूज18 के पत्रकार राहुल शिवशंकर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके अपराधों को ‘जघन्य’ करार दिए जाने और उन्हें जमानत देने से इनकार करने के बावजूद सरकार ने मास्टरमाइंड एसए बाशा और दो अन्य को रिहा कर दिया।

तमिलनाडु सरकार के इस फैसले पर राज्य बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नादुराई ने डीएमके सरकार और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने एक वीडियो जारी किया और कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीएमके सरकार कोयंबटूर धमाके के सभी 16 दोषियों को रिहा करने की पूरी कोशिश कर रही है। वो इस काम को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है, सिर्फ लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए। हम सभी जानते हैं कि 14 फरवरी 1998 का दिन तमिलनाडु और कोयंबटूर के लोग कभी भूल नहीं पाएँगे, क्योंकि तमिलनाडु में कभी उस तरह का सीरियल ब्लास्ट नहीं हुआ। उन धमाकों में 58 लोग मारे गए, तो 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन धमाके के अलावा 24 जगहों पर बम भी पाए गए थे।”

अन्नामलाई ने अपने वीडियो में आगे कहा, “साल 2009 में 7 नवंबर को 9 दोषियों को रिहा कर दिया गया था।” अन्नामलाई ने तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों पर 1998 के कोयंबटूर विस्फोट मामले में सभी दोषियों की रिहाई सुनिश्चित करने में डीएमके की मदद करने का आरोप लगाया।

बीजेपी नेता अन्नामलाई ने आगे कहा, “अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी 16 दोषियों की जमानत याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि आतंकवाद बहुत गंभीर अपराध है। डीएमके सरकार ने जस्टिस आदिनाथ आयोग की आड़ लेकर इन्हें रिहा कराने की कोशिश की है। इस रिपोर्ट में आतंकियों की रिहाई की सलाह दी गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “ये हैरानी की बात है कि साल 2022 में दीपावली से ठीक पहले एक आत्मघाती हमलावर ने कोयंबटूर शहर को निशाना बनाया। किस्मत से उस धमाके में सिर्फ आत्मघाती हमलावर ही मारा गया, आम लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। इस मामले में एनआईए जाँच कर रही है। ये मॉड्यूल आईएसआईएस से प्रेरित है, जिसमें कई आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। अब डीएमके सरकार उन सभी को रिहा करना चाहती है, मुझे समझ नहीं आता कि डीएमके की मानसिकता क्या है।”

अन्नामलाई ने आशा जताई कि डीएमके सरकार साल 2009 में जो कर चुकी है, वो आगे से ऐसा न करे। उन्होंने कहा, “भारत में धार्मिक तुष्टिकरण वाला सबसे पहला नाम कोई होगा, तो ये डीएमके है।” उन्होंने कहा, “हम अन्य कैदियों की रिहाई के खिलाफ नहीं है, लेकिन आतंकवाद से जुड़े अपराध सबसे गंभीर हैं। इन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए।”

सन न्यूज ने 7 फरवरी 2024 को एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें कोयंबटूर धमाके में शामिल तीन आतंकवादी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके सरकार की तारीफ कर रहे थे। इन तीनों ही आतंकियों के चेहरे पर अपने कारनामों को लेकर कोई पछतावा नहीं दिखा, जिसके बाद ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

लाल कृष्ण आडवाणी और हिंदुओं को मारना था लक्ष्य

कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट 1998 का मुख्य आरोपित एसए बाशा था, जो अल-उम्मा नाम के कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन का अध्यक्ष था। ये धमाके साल 1997 में कोयंबटूर में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों के विरोध में किए गए थे, जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी की फ्लाइट लेट हो गई थी, जिसकी वजह से वो बाल-बाल बच गए थे। एक बम ब्लास्ट तो उनके लिए बनाए गए मंच की जगह से सिर्फ 800 मीटर की दूरी पर हुआ था, तो 70 किलो विस्फोटक वाली कार में रखे बम को डिफ्यूज कर दिया गया था।

ये ब्लास्ट 14 से 17 फरवरी 1998 को किए गए थे। उसी दिन शाम को 4 बजे लाल कृष्ण आडवाणी की रैली होनी थी। लाल कृष्ण आडवाणी की हत्या के लिए कई आतंकियों ने अपने शरीर पर विस्फोटक बाँधे थे, लेकिन उन्होंने पुलिस ने पहले धमाके के बाद पकड़ लिया था।

बाशा और अल-उम्मान ने इस आतंकी साजिश को ‘ऑपरेशन अल्लाहु अकबर’ नाम दिया गया था। बाशा की योजना कुछ ही घंटों में तीन दर्जन जगहों पर धमाके की थी, लेकिन इसमें से कई जगहों पर धमाके हो नहीं पाए। इस बड़े सीरियल ब्लास्ट में सभी धमाके 12 किलोमीटर की रेडियस में 11 जगहों पर किए गए थे, जिसमें हिंदुओं को निशाना बनाया गया। ये सभी धमाके हिंदुओं की प्रॉपर्टी या फिर भीड़भाड़ वाले इलाकों में किए गए थे। इन धमाकों की वजह से लोकसभा चुनाव को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था।

कँटीले तार, रेलवे वाले पत्थर, मारो-भगाओ चिल्लाती भीड़… नगर निगम कर्मियों ने बताया हल्द्वानी में कैसे इस्लामी ने बरपाया कहर, बोले – हमें हनुमान जी ने बचाया

उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में प्रशासन द्वारा अवैध मदरसा और मस्जिद ध्वस्त किए जाने को लेकर भड़की भीड़ ने थाने और पेट्रोल पंप को फूँक दिया, पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की। पत्रकारों तक को नहीं बख्शा गया। महिला पुलिसकर्मियों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। उनके कपड़े फाड़े गए। स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ नाम पूछ-पूछ कर मार रही थी, मुस्लिमों को छोड़ दिया जा रहा था और हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा था।

हल्द्वानी के कॉन्ग्रेस नेता गब्बर वाल्मीकि ने बताया है कि जहाँ पर दंगे भड़के, अगले दिन वहीं पर सफाईकर्मियों पर भी पत्थरबाजी हुई। उन्होंने पुलिस पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाए जाने को एक सही फैसला करार देते हुए कहा कि रेलवे लाइनों के पत्थर जमा कर के हमले के लिए रखा गया था। उन्होंने ये भी कहा कि इनके भीतर के ख़ुफ़िया राज़ बाहर नहीं निकल पाते हैं। जवाहर नगर के वार्ड संख्या 13 में रहने वाले गब्बर वाल्मीकि ने बताया कि प्रशासन के खिलाफ जाना इनकी सोची-समझी साजिश थी।

उन्होंने बताया कि हमले के लिए सरे इंतजाम पहले से रखे गए थे। नगर निगम के लोगों पर सोमवार (12 फरवरी, 2024) को भी पत्थर चले हैं। गब्बर वाल्मीकि जिला कॉन्ग्रेस के युवा सचिव हैं। उन्होंने अब्दुल मलिक को हल्द्वानी का सबसे अमीर आदमी बताया। उन्होंने कहा कि हमलावरों पर रासुका लगना चाहिए, पुलिस न हो तो कत्लेआम हो जाता। गब्बर वाल्मीकि ने बताया कि ऊपर से कटे हुए पत्थर फेंके जा रहे थे, नीचे वाले व्यक्ति का पत्थर ऊपर पहुँच ही नहीं पाएगा।

ऑपइंडिया ने एक अन्य सफाईकर्मी मिथुन वाल्मीकि से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि 20-25 सफाईकर्मियों को लेकर वो नगर निगम की गाड़ी चलाते हुए गए थे, लेकिन महिलाओं की भीड़ सामने आई और पुलिस से झड़प करने लगी, फिर बच्चों को आगे किया गया। उन्होंने बताया कि अचानक से पथराव शुरू हो गया, गाड़ी घेर लिया गया तो उतर कर भागना पड़ा। इसी क्रम में मिथुन वाल्मीकि के पाँव भीड़ द्वारा बिछाई गई तार में फँस गया, फिर उन पर ईंटें बरसाए गए।

फिर वो किसी तरह जान बचा कर निकले। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और 2 बेटे हैं, माँ-बाप भी नहीं हैं, न भागते तो वो नहीं भाग पाते। उन्होंने बताया कि भीड़ ने सरिया भी ले रखा था, पुलिस वाले भी गिरते-पड़ते भाग रहे थे जान बचा कर। सफाईकर्मी मिथुन वाल्मीकि ने बताया कि उनकी तरफ से सब मारो-भगाओ चिल्ला रहे थे, ज़िंदा जलाने की साजिश थी। उनका इलाज सरकार चला रही है, उनका पाँव टूट गया है। अब वो अपनी नौकरी भी एकाध महीने ज्वाइन नहीं कर पाएँगे।

मिथुन वाल्मीकि ने बताया कि भाग कर घर पहुँचने के बाद उन्हें दर्द का एहसास हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चे तक मार रहे थे, गाड़ी वगैरह जलाई गई, सरकारी संपत्ति जलाई गई। उन्होंने कहा कि वो मर गए तो कोई उनके घर को नहीं देखने वाला, ऐसे में वो वहाँ दोबारा काम करने नहीं जाएँगे। दलित समाज के ही एक अन्य सफाईकर्मी मनोज वाल्मीकि ने बताया कि वो निगम की तरफ से वहाँ गए थे, वहाँ महिलाओं को अधिकारी समझाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वापस आते समय भीड़ ने चारों तरफ से पत्थरबाजी की।

उनके हाथ में पत्थरों के कारण जख्म हुआ है। मनोज वाल्मीकि ने बताया कि दूसरे पक्ष से कोई भी व्यक्ति मारपीट करने वालों को मना नहीं कर रहा था। उनका भी इलाज सरकारी खर्च से चल रहा था। उन्होंने बताया कि पुलिस और नगर निगम का एक भी कर्मचारी नहीं है जिसे चोट न लगी हो। उनका एक 15 साल का लड़का और एक बेटी है, उनके खुद के घर तक नहीं हैं जबकि अतिक्रमणकारी अवैध मकान बना कर रहे हैं, कार्रवाई होने पर वो दंगे करते हैं।

मनोज वाल्मीकि कहते हैं कि उन्हें हनुमान जी ने बचाया है। उन्होंने बताया कि कई छोटे-बड़े पत्थर पड़े, गमले जैसी चीज चला कर भी मारी गई। मनोज का कहना है कि उन्होंने हनुमान जी से गुहार लगाई कि वो उन्हें बचा लें, फिर उनके भीतर किसी तरह ताकत आई और वो सीधे भाग कर अपने वाल्मीकि मोहल्ले में पहुँचे। उनकी पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल था। सफाईकर्मियों के आगे JCB रास्ता बनाती हुई चल रही थी, वरना कँटीले तारों में उलझ कर कई लोग मारे जा सकते थे।

नगर निगम के एक अन्य दलित कर्मचारी सागर सोनकर भी घायल हैं। उन्होंने बताया कि वो दंगे के वक्त मौके पर मौजूद थे और उन्हें लगा कि उनकी मौत हो जाएगी। वो बेहोश हो गए थे। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि 6 महीने से इसकी साजिश चल रही थी। बकौल सागर सोनकर, लगातार उनका खून बह रहा था। उन्हें घर भाग कर आते-आते 7-8 घंटे लग गए, क्योंकि जिस तरफ से वो जा रहे थे उधर ही पत्थर चल रहे थे। उन्होंने बताया कि पत्थरबाजों को उनके समाज के लोग रोक भी नहीं रहे थे। उन्होंने बताया कि अगर वो न भागते तो उनकी हत्या कर दी जाती।

स्टेडियम में चल रहा था फुटबॉल का मैच, बिजली गिरी और खिलाड़ी की हो गई मौत : पैर-सीना झुलसा, Video देख लोगों को नहीं हो रहा विश्वास

इंडोनेशिया से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। यहाँ एक फुटबॉल खिलाड़ी पर बीच मैदान बिजली गिर गई। बिजली गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। इस घटना का वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार (10 फरवरी, 2024) की है। मैच इंडोनेशिया के बड़े शहर बांडुंग में एक स्टेडियम में हो रहा था, यह एक मैत्री मैच था जो कि FBI सुबांग और 2 FLO फुटबॉल क्लब के बीच खेला जा रहा था। इस खेल में जिस खिलाड़ी की बिजली गिरने से मौत हुई, उसकी पहचान 35 वर्षीय सेप्तियन रेहरजा के रूप में हुई है।

इस घटना के वायरल वीडियो में दिखता है कि रेहरजा फील्ड में बाकी साथी खिलाड़ियों से दूर खड़े होते हैं और थोड़ा आगे बढ़ते हैं। इसी बीच यहाँ तेज रोशनी होती है और उन पर बिजली गिर जाती है। बिजली गिरने से खिलाड़ी रेहरजा की मौके पर ही जमीन पर गिर जाते हैं और अचेतन अवस्था में चले जाते हैं।

उन्हें देख मैदान में एकाएक बिजली गिरने से हलचल मच जाती है। एक दूसरा खिलाड़ी रेहरजा के पास दौड़ कर जाता है। इसके बाद बाकी खिलाड़ी भी यहाँ पहुँचते हैं। बताया गया है कि बिजली गिरने के कुछ मिनट बाद तक रेहरजा की साँसे चल रही थी लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।

बिजली गिरने के कारण उनके पैर और सीना जल गए थे। उनकी इस अप्रत्याशित मौत से उनके फैन्स में शोक की लहर है। उनकी टीम के समर्थक सोशल मीडिया पर दुख प्रकट कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक वर्ष के भीतर ऐसी ही दूसरी घटना है। इससे पहले के अंडर 13 खिलाड़ी की भी बिजली गिरने से मौत हो गई थी। आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों का अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा तो नहीं एकत्र किया जा सका लेकिन अलग-अलग रिपोर्ट बताती हैं कि प्रतिवर्ष इससे 6000-24000 तक मौत होती हैं।

बैरिकेड तोड़े, पुलिस पर पथराव… शंभू बाॅर्डर पर बवाल: किसानों के विरोध में कारोबारी भी जुटे, बोले- हमारे रोजगार पर लात न मारें

दिल्ली और उसके आसपास के कथित किसान अपनी माँगों को लेकर ट्रैक्टर एवं अन्य वाहनों के साथ राजधानी दिल्ली पहुँच रहे हैं। इसको देखते हुए दिल्ली बॉर्डर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। पूरे बॉर्डर को सील कर दिया गया है। वहीं, दिल्ली के लाल किला को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों के गेट को भी बंद कर दिया गया है।

दिल्ली के गाजीपुर, सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर लोहे और कंक्रीट के बॉर्डर लगाए गए हैं। इसके अलावा कंटीले तार, लोहे की कीलें, कंटेनर और डंपर लगाकर भी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। सिंघु बॉर्डर पर हरियाणा से दिल्ली आने वाला ट्रैफिक पूरी तरह से रोका गया है। वहीं दिल्ली-नोएडा सड़क और NH24 पर लंबा जाम लग गया है। दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाले कालिंदी कुंज के रास्ते पर भी लंबा जाम लगा हुआ है।

महामाया फ्लाईओवर से ही वाहनों की कतारें लगी हुई है। दिल्ली के केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन का गेट 2 शाम तक बंद रहेगा। किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली में धारा 144 लगा दी गई है। वहीं, हरियाणा में धारा 144 लागू है। चंडीगढ़ में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने एक एडवाइजरी जारी कर यात्रियों से ट्रैफिक जाम को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाने का आग्रह किया है।

खबर है कि शंभू बॉर्डर पर कथित किसानों ने पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ दिया। यहाँ किसानों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई है। उन्होंने फ्लाईओवर की रेलिंग को तोड़ दिया। इसके साथ पुलिस पर पथराव भी किया। इसके बाद पुलिस ने एक्शन लिया और आँसू गैस के गोले छोड़े। वहाँ के हालात को देखकर अन्य जगहों पर भी पुलिस ने कमर कस लिया है। खनौरी-जींद बॉर्डर पर पुलिस सतर्क है।

इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “देश में बड़ी पूँजीवादी कंपनियाँ हैं। उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी बना ली है और इस देश पर कब्जा कर लिया है। ऐसे में दिक्कतें आएँगी ही। अगर दिल्ली मार्च कर रहे किसानों के साथ कोई अन्याय हुआ या सरकार ने उनके लिए कोई दिक्कत पैदा की तो ना वो किसान हमसे ज्यादा दूर हैं और ना दिल्ली हमसे ज्यादा दूर है।”

इन किसानों के उत्पाद के कारण दिल्ली-एनसीआर के अपने काम-धंधों पर जाने वाले लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, व्यवसायी वर्ग भी खासा प्रभावित है। कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज की झज्जर जिला ईकाई के सदस्यों ने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने व्यवसाय पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक केंद्र बहादुरगढ़ में अपना विरोध प्रदर्शन न करें।

कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज, हरियाणा के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें हमारे व्यापार उद्योगों के लिए समस्या नहीं पैदा करनी चाहिए। पिछले दो दिनों से इंटरनेट बंद है, जिसके कारण अनिवार्य ई-चालान/ईवे बिलिंग संभव नहीं हो पा रही है। दूसरे राज्यों में सामग्रियों का परिवहन नहीं हो पा रहा है। यहाँ के लोगों में दहशत है। केवल हमारे जिले में सालाना लगभग 50,000 करोड़ रुपए के राजस्व वाले विनिर्माण होता है। इससे उद्योगों को सीधा नुकसान है।”

बता दें कि करीब दो साल बार एक बार फिर कथित किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं। साल 2020-21 में संयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM के तहत 32 किसान संगठन एक बैनर के तले आई आए थे। अब ये टूटकर एसकेएम (पंजाब), एसकेएम (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (KMM) बन गई हैं। इस बार के आंदोलन को पिछली बार की तरह सभी किसान संगठनों का समर्थन प्राप्त नहीं है।

इस बार जगजीत सिंह दल्लेवाल का संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) और किसान मजदूर मोर्चा इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। ये दोनों संगठन पूर्व में SKM का हिस्‍सा रहे हैं। किसान मजदूर मोर्चा 18 किसानों का समूह है, जिसके संयोजक सरवन सिंह पंढेर हैं। दोनों ही समूहों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और यूपी के किसान शामिल हैं।

वहीं, साल 2020 के किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने इस बार आंदोलन से दूर हैं। चढूनी ने इस बार के किसान को लेकर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि इस आंदोलन से उन नेताओं को अलग रखा गया है, जो पिछले आंदोलन में शामिल थे।

ऑल इंडिया किसान सभा के वाइस प्रेसिडेंट और संयुक्त किसान मोर्चा नेता हनन मोल्ला ने कहा है कि ऑल इंडिया किसान सभा संयुक्त किसान मोर्चा का सबसे बड़ा दल है और वे इस प्रदर्शन में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा से कुछ दल अलग हो गए थे और यह प्रोटेस्ट उन्होंने ही बुलाया है।