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पैसे लेकर सेक्स कर लो… लक्षद्वीप में सैनिक अनवर आलम ने 13 साल के बच्चे को दिया था लालच, केरल HC ने बेल से किया साफ मना

केरल हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप के अनवर हुसैन नाम के एक सैनिक की जमानत याचिका ठुकरा दी है। अनवर पर आरोप है कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग बालक को सेक्स करने के लिए पैसे का लालच दिया। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अनवर को बेल देने से मना किया।

जानकारी के अनुसार, लक्षद्वीप के अमीनी गाँव में रहने वाले अनवर हुसैन टी पर आरोप है कि उसने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को पैसों का लालच दिया कि वह उनके साथ सेक्स कर ले।

इस मामले में नाबालिग लड़के के परिजनों ने पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया। हालाँकि, कोर्ट के सामने अनवर हुसैन ने कहा कि जिस नाबालिग लड़के के साथ सेक्स करने के लिए पैसे का लालच देने का आरोप उस पर लगाया गया है, उसके परिवार से उनका विवाद है।

अनवर ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसे पारिवारिक विवाद में फँसाने के लिए ऐसा किया गया है। अनवर के ऊपर POCSO के तहत मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। इसीलिए उसने केरल हाई कोर्ट के सामने जमानत याचिका लगाई थी।

गौरतलब है कि लक्षद्वीप का परिक्षेत्र केरल हाई कोर्ट के अंतर्गत आता है। हाई कोर्ट ने अनवर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। केरल हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही जज सोफी थॉमस ने कहा, “एक सैनिक होने के कारण आरोपित (अनवर) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को और गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनसे यह आशा की जाती है कि वह देश के नागरिकों के सम्मान की रक्षा करेंगे।”

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में जाँच चल रही है और अगर अनवर के ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं तो एक सैनिक होने के नाते यह बड़ी ही अभद्र और सैन्य अफसर के व्यवहार के विपरीत होगी। कोर्ट ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनवर को जमानत देने से मना कर दिया।

प्रायश्चित पूजा, कर्मकूटि पूजा… अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा का यज्ञ आरंभ, जानिए रामलला से किस बात के लिए माँग रहे क्षमा: PM मोदी नहीं होंगे मुख्य यजमान

अयोध्या में भगवान राम के नवनिर्मित भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। आज मंगलवार (16 जनवरी 2024) से शुरू यह अनुष्ठान 22 जनवरी 2024 को संपन्न होगा। इस संपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या में ‘प्रायश्चित पूजा’ के साथ की गई है। प्रायश्चित पूजा को मुख्य यजमान द्वारा किया जाता है। इसे विशेष पूजा माना जाता है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का मुख्य यजमान बनाया गया है। उन्हें इस पूरे कार्यक्रम के दौरान न सिर्फ मौजूद रहना है, बल्कि उन्हीं के हाथों से सभी कार्यक्रम संपन्न कराए जाएँगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यजमान के तौर पर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान अनुष्ठान करेंगे। इसके वो कड़े व्रत का पालन भी कर रहे हैं।

क्या है प्रायश्चित पूजा?

प्रायश्चित पूजा के माध्यम से रामलला से क्षमा माँगी जा रही है। ये क्षमा प्रतिमा बनाने के दौरान छेनी-हथौड़ी या किसी भी वजह से उन्हें जो चोट लगी होगी, उसके लिए माँगी जाती है। प्रायश्चित पूजा के लिए यजमान को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। मुख्य यजमान को 10 विधि से स्नान कराया जाया है। उनमें सबसे पहले गोमूत्र से स्नान कराया जाएगा। उसके बाद गोमय, गोदुग्ध, गोदधि, गोघृत, कुशोदक, भस्म, मिट्टी और शहद से स्नान कराए जाने के बाद अंत में पवित्र जल से स्नान कराया जाएगा।

यजमान के स्नान इत्यादि के दौरान प्रायश्चित पूजा से जुड़े मंत्रोच्चार और अंगभूत हवन होता रहता है। हवन के बाद मुख्य यजमान पंचगव्य का प्राशन करते हैं। तब जाकर मुख्य यजमान इस पूरे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए योग्य होते हैं। प्रायश्चित पूजा के दौरान गोदान भी किया जाता है। इसके अलावा द्रव्य (मुद्रा) दान, स्वर्ण दान भी करना होता है। इस पूरे अनुष्ठान में लगभग 2 घंटे का समय लगता है। इसके बाद कर्मकूटि पूजन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए अयोध्या में होंगे। इसके लिए वे खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर शुद्ध रखने के लिए 11 दिनों का व्रत कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर के तीन दिन लकड़ी से बनी चौकी पर केवल कंबल बिछाकर सोएँगे।

इन तीन दिनों पीएम मोदी सिर्फ फलाहार करेंगे। खुद पीएम मोदी ने इस बात की जानकारी माँगी थी कि उन्हें व्रत से जुड़ी जानकारियाँ दी जाए। वो कठिन से कठिन व्रत करने को भी तैयार हैं। ऐसे में पीएम मोदी को जाप के लिए विशेष मंत्रों की भी जानकारी दी गई है।

कर्मकूटि पूजन

कर्मकूटि पूजन उस पूजन को कहा जाता है, जिसमें मुख्य हवन वाली वेदी को जागृति किया जाता है। इस पूजन के पश्चात ही मंदिर और प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रम की शुरुआत होती है। प्रायश्चित पूजा भगवान से क्षमा और यजमान को तैयार करने के लिए होती है। कर्मकूटि पूजन कार्यक्रम के साथ ही अनुष्ठान को मुख्य मंदिर में किया जाता है। कर्मकूटि पूजन में भगवान विष्णु का आह्वान किया जाता है। इस पूजन के बाद ही अन्य वेदियों को जागृत किया जाता है।

22 जनवरी तक होंगे ये अनुष्ठान

16 जनवरी: प्रायश्चित और कर्मकूटि पूजन
17 जनवरी: मूर्ति का परिसर प्रवेश
18 जनवरी (सायं): तीर्थ पूजन, जलयात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास
19 जनवरी (प्रातः): औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास
19 जनवरी (सायं): धान्याधिवास
20 जनवरी (प्रातः): शर्कराधिवास, फलाधिवास
20 जनवरी (सायं): पुष्पाधिवास
21 जनवरी (प्रातः): मध्याधिवास
21 जनवरी (सायं): शय्याधिवास

भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा योग का शुभ मुहूर्त, पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी, विक्रम संवत 2080, यानी सोमवार (22 जनवरी, 2024) को है। सभी शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए, प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अभिजित मुहूर्त में संपन्न किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व शुभ संस्कारों का प्रारंभ 16 जनवरी 2024 से शुरु हो गया है, जो 21 जनवरी 2024 तक चलता रहेगा। इसके बाद 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

समारोह के अनुष्ठान की सभी प्रक्रियाओं का समन्वय, समर्थन और मार्गदर्शन करने वाले 121 आचार्य होंगे। इस संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान गणेश्वर शास्त्री द्राविड सभी प्रक्रियाओं की निगरानी, समन्वय और दिशा-निर्देशन कर रहे हैं। वहीं, काशी के लक्ष्मीकांत दीक्षित मुख्य आचार्य के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

राम का नाम लेने पर दक्षिण की स्वर कोकिला को गाली दे रहे वामपंथी-कट्टरपंथी, कहा था- 22 जनवरी को राम नाम का जाप करना, घर में 5 दीए जलाना

मलयालम की मशहूर गायिका केएस चित्रा ने 22 जनवरी 2024 को लेकर एक वीडियो में संदेश जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने लोगों से अपील की थी कि लोग प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन भगवान राम का नाम लें और घर-घर को रौशनी से जगमगा दें। उनके फैंस ने जहाँ इस वीडियो के लिए उन्हें सराहा तो वहीं वामंपथी-कट्टरपंथी इसे सुन भड़क गए। इनके कमेंट्स पढ़कर कई लोग केएस चित्रा के समर्थन में उतरे हैं। वहीं कुछ अब भी उन्हें उलटा-सीधा बोल रहे हैं।

क्या कहा था केएस चित्रा ने

साउथ की नाइटएंगल (कोकिला) कही जाने वाली केएस चित्रा ने 22 जनवरी को लेकर कहा था कि अयोध्या में 22 जनवरी को जब प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हो, तब हर कोई राम मंत्र- श्रीराम, जयराम जय जय राम का जाप करे और अपने घरों में पाँच दीये तो जरूर ही जलाए। उन्होंने प्रार्थना की थी कि भगवान अपना आशीर्वाद सब पर बनाएँ रखें और कहा था- लोक समस्त सुखिनो भवन्तु:।

विरोध में उतरे लिबरल-कट्टरपंथी

उनके इस वीडियो को देख सिंगर सूरज संतोष ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा- “गौर देने वाली बात ये है कि मासूम लोग जो कह रहे हैं लोक समस्त सुखिनो भवन्तु: वो इतिहास भूल गए हैं, तथ्यों को साइड रख दिया गया है कि मंदिर एक मस्जिद को तोड़कर बना है। कितनी मूर्तियाँ एक के बाद एक तोड़ी जाएँगी। कितनी केएस चित्रा अपने रंग दिखाएँगी।”

लेखिका इंदू मेनन ने कहा, “लोगों के खून, उनके पलायन और उनके दर्द का कितना भी राग अलाप लो, कोई राम और विष्णु आने वाले नहीं हैं। चाहे आप 5 लाख दीपक भी जला लें, आपका मन प्रकाश से भरने वाला नहीं है। केवल आवाज के कारण दुनिया को विश्वास हो गया कि यह कोकिला है, लेकिन यह साबित हो गया है कि आप वास्तव में एक ‘फर्जी कोकिला’ हैं।”

समर्थन मिला

इसी तरह कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस्लामी कट्टरपंथी भी उन्हें उनकी वीडियो पर उल-जुलूस बातें कह रहे हैं। ये सब देख उन्हें गायक जी वेणुगोपाल ने समर्थन दिया है। उन्होंने कहा, “मेरी और चित्रा की 50 साल से दोस्ती है। वह एक अच्छी गायिका है। ऑनलाइन ऐसे कई कमेंट देख दुखी हूँ जहाँ उनकी आलोचना हो रही है। अगर आप अलग मत रखते हैं तो क्या आराम से रख नहीं सके। कृपया दूसरे को न दुख पहुँचाएँ।”

बीजेपी के केरल अध्यक्ष ने भी गायिका पर हुए हमलों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिनराई विजयन के शासन में ये हिंदुओं के कैसे हाल हैं कि वो अपने विचार भी स्वतंत्र रूप से साझा नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस इस हरकत पर चुप है। लेकिन भाजपा उन्हें समर्थन देती है।

बता दें कि केएस चित्रा एक तमिल गायिका हैं। उन्हें 6 राष्ट्रीय अवार्ड और 6 राज्यों से 36 स्टेट फिल्म अवार्ड मिले हैं। उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने 250000 गानों को अलग-अलग भाषा में गाया है।

4 बच्चों का अब्बा, बीवी 5वीं बार प्रेग्नेंट, फिर भी साली को ले भागा सलीम: गर्भवती बहन की सेवा करने आई थी 5 बच्चों की अम्मी

हरियाणा के करनाल में एक मुस्लिम व्यक्ति सलीम पाँच बच्चों वाली अपनी साली को लेकर भाग गया। सलीम के खुद के चार बच्चे हैं और उसकी बीवी अभी भी गर्भवती है। यानी उसका पाँचवाँ बच्चा भी पैदा होने वाला है। इस मामले में महिला के घरवालों ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद का सलीम हरियाणा के करनाल के घरौंदा इलाके में रहता है। कुछ दिन पहले उसकी गर्भवती बीवी की की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद उसने बीवी की देखभाल के लिए अपनी साली को बुलाया था।

इसके कुछ दिनों के बाद ही सलीम अपनी साली को लेकर फरार हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। उनके भागने के बाद परिवार वालों को पहले कुछ दिनों तक इस मामले की भनक तक नहीं मिली।

बताया जा रहा है सलीम के पहले ही चार बच्चे हैं और बीवी पाँचवें बच्चे के लिए गर्भवती है। वह अपने जिस साले की पत्नी को लेकर भागा है उसके भी पाँच बच्चे हैं। दोनों के भागने के बाद परिजन कई दिनों तक उनकी तलाश रिश्तेदारी में करते रहे। हालाँकि, कोई पता नहीं लगा।

यह भी पता लगा है कि सलीम का साढ़ू अपनी बीवी को उसके घर नहीं भेजना चाह रहा था। हालाँकि, सलीम के काफी कहने सुनने पर वह अपनी बीवी को सलीम के साथ भेजने के लिए तैयार हुआ था। सलीम के साले की 10 साल पहले शादी हुई थी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। दोनों की तलाशी के लिए अभियान भी चलाया है। हालाँकि, अभी तक दोनों का कुछ पता नहीं लग सका है। घटना को लगभग एक सप्ताह हो चुका है। वहीं, हरियाणा पुलिस ने यह उम्मीद जताई है कि उन्हें जल्द ही तलाश लिया जाएगा।

कारसेवकों की सेवा में जुटे थे ग्रामीण, गाँव को घेर मुलायम की पुलिस ने की फायरिंग: महिलाओं से हुई थी बदसलूकी, सत्यवान सिंह हो गए थे बलिदान

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को राम जन्मभूमि पर बन रहे भव्य मंदिर में भगवान रामलला की की प्राण-प्रतिष्ठा होने जा रहा है। इसको लेकर देश और दुनिया भर में जो राममय माहौल है, उसके पीछे ज्ञात-अज्ञात रामभक्तों का बलिदान एक बड़ा कारण है। ऑपइंडिया ने अयोध्या की ग्राउंड रिपोर्ट में उन तमाम गुमनाम रामभक्तों की तलाश की और उनसे अथवा उनके परिजनों से बात की।

इस दौरान ऑपइंडिया की टीम ने उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान 22 अक्टूबर 1990 में हुए पहले नरसंहार के बारे में बताया था। इस नरसंहार में कारसेवकों की तलाश में बस्ती जिले के सांडपुर गाँव में घुसी पुलिस ने विरोध कर रहे ग्रामीणों पर फायरिंग की थी। इस फायरिंग में 3 रामभक्तों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

पिछली रिपोर्ट में हमने बलिदान हुए राम चन्दर यादव के बारे में बताया था। इसी नरसंहार में दूसरे बलिदानी का नाम है सत्यवान सिंह। ऑपइंडिया ने सत्यवान सिंह के घर जाकर जानकारी जुटाई। सत्यवान सिंह एक मध्यवर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। परिवार की आजीविका का साधन खेती-बाड़ी है। सांडपुर गाँव में हमें सत्यवान सिंह के भाई सत्यप्रकाश सिंह मिले।

रामभक्तों को गाँव में रोकने से भड़का था प्रशासन

सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि 22 अक्टूबर 1990 को हुए नरसंहार के वे चश्मदीद हैं। उन्होंने कहा कि उस समय सांडपुर गाँव में बाहर से कई कारसेवक आए थे, जिनके रहने-खाने आदि की व्यवस्था गाँव वालों ने की थी। तब अयोध्या आने-जाने के तमाम रास्ते बंद कर दिए गए थे। हालाँकि, सांडपुर इसके लिए उपयुक्त स्थान था।

सांडपुर गाँव के पास नदी होने की वजह से कारसेवक इस नदी को माध्यम बनाकर नाव के जरिए अयोध्या में घुस रहे थे। नाव ग्रामीण उपलब्ध करा रहे थे। इसी बीच दुबौलिया थाना के प्रभारी राम चन्दर राय को किसी मुखबिर ने इसकी जानकारी दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस के साथ-साथ PAC और पैरामिलिट्री ने पूरे गाँव को घेर लिया।

बुजुर्गों को पीटकर पूछ रहे थे कारसेवकों का पता

सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि उनके गाँव सांडपुर में सुरक्षाबल ने सुबह-सुबह लगभग 5 बजे हमला किया। ग्रमीणों को पहले ही पुलिस की दबिश की सूचना मिल गई थी। इसलिए सभी कारसेवकों को रात में ही उनके गंतव्य की तरफ भेज दिया गया था। जब सुरक्षाबलों ने गाँव में घुसकर कारसेवकों को खोजना शुरू किया तो एक भी कारसेवक नहीं मिले।

गाँव में कारसेवकों को ना पाकर पुलिस बल घरों में घुसा और बुजुर्गों को पीट-पीट कर उनका पता पूछने लगा। पुलिस टीम में दुबौलिया के थाना प्रभारी राम चन्दर राय, थाना प्रभारी छावनी, थाना प्रभारी कप्तानगंज, थाना प्रभारी हरैया आदि अधिकारी मौजूद थे। इन सभी को बस्ती के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक IPS सुभाष गुप्ता निर्देश दे रहे थे।

ग्रामीणों ने किया विरोध तो बरसा दी गोलियाँ

सत्यप्रकाश सिंह ने आगे बताया कि बुजुर्गों को पीटने के बाद पुरुष पुलिसकर्मियों ने सांडपुर गाँव की महिलाओं को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। दबिश देने वाली टीम में कोई भी महिला स्टाफ नहीं थी। उस समय गाँव में अधिकतर लोग सो रहे थे। शोरगुल सुनकर न सिर्फ सांडपुर, बल्कि आसपास के गाँवों के लोग भी जमा हो गए।

जब ग्रामीणों को पता चला कि प्रताड़ित हो रहे लोगों का दोष केवल रामभक्ति है तो लोगों में आक्रोश फ़ैल गया। तब पुलिस ने कुछ ही देर में बिना किसी चेतावनी के ग्रामीणों पर गोलियाँ बरसा दीं। सत्यप्रकाश सिंह का दावा है कि पुलिस बल ने हवा में गोलियाँ बरसाने के बजाए सीधे ग्रामीणों की छाती और सिरों को निशाना बनाकर गोलियाँ मारीं। इस दौरान महिलाएँ और बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया।

लगभग 35 वर्षीय सत्यवान सिंह भी उन तमाम ग्रामीणों में एक थे, जो पुलिस बर्बरता का विरोध कर रहे थे। इसी बीच पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के सत्यवान सिंह के सीने में गोली मार दी। गोली लगते ही सत्यवान सिंह जमीन पर गिर पड़े और दर्द से कराहने लगे। सत्य प्रकाश सिंह अपने भाई को बचाने दौड़े तो उनको भी निशाना साधकर गोली मारी गई। हालाँकि, गोली उनके कानों को छूते हुए निकल गई।

घरवालों को नहीं दी लाश, भाई को भी भेजा जेल

सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक, उनके भाई सत्यवान सिंह और राम चन्दर यादव का शव आसपास ही पड़ा था। दोनों की लाशों को पुलिस ने समेटा और अपने साथ ले गए। इन शवों को बस्ती के जिला अस्पताल में परिजनों को सूचित किए बिना ही पोस्टमार्टम करवाया गया और शहर के अमहट श्मशान घाट पर घर वालों को सूचित किए बिना ही जला दिया।

सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, इस गोलीकांड के बाद भी पुलिस गाँव में घुसकर दबिश दे रही थी। इस कारण से गाँव के अधिकांश लोग पुलिस के डर से घर छोड़कर फरार थे। घरों में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग ही रह गए थे। बुजुर्गों में भी वही लोग घरों में बचे थे, जो बीमारी अथवा अन्य कारणों से चलने-फिरने में असमर्थ थे।

ऐसे में पुलिस की टीमें घर में घुसकर बुजुर्गों की चारपाई पलट देती थीं और महिलाओं से अभद्रता करती थी। आखिरकार गाँव के तमाम लोग एक-एक कर के गिरफ्तार हो गए। उन्हें बुरी तरह से टॉर्चर किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। अधिकतर ग्रामीणों की जमानत हाईकोर्ट से हुई थीं। जमानत के बाद भी कई लोग पुलिस के डर से कई दिनों तक घर नहीं लौटे।

जेल काटकर लौटे, फिर की भाई की तेरहवीं

जेल गए पीड़ितों में सत्यवान सिंह के भाई सत्यप्रकाश सिंह भी थे। सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि उन्होंने खुद को बेकसूर बताते हुए तब के हर सक्षम नेता और अधिकारी से पुलिस के अत्याचार की शिकायत की थी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। सत्यप्रकाश सिंह के जेल से निकलने में काफी दिन बीत गए थे। तब अपने भाई के अंतिम संस्कार की अन्य विधियाँ काफी दिन बाद पूरी करवाए।

सत्यप्रकाश सिंह आज भी बस्ती जिला अदालत में साल 1990 में उन पर लादे गए मुकदमे को लड़ रहे हैं। उनके साथ-साथ उस वक्त के पीड़ित अन्य ग्रामीण भी अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। सत्यप्रकाश सिंह को आज भी इस बात का मलाल है कि उनके गाँव में हुए नरसंहार में शामिल पुलिसकर्मियों पर आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया।

सत्यप्रकाश सिंह अपने गाँव में चली गोली और उसमें मारे गए लोगों का गुनहगार मुलायम सिंह यादव को मानते हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम ने ऐसा सिर्फ मुस्लिमों को खुश करने के लिए किया था। हालाँकि, सत्यप्रकाश सिंह राम मंदिर के निर्माण से बेहद खुश हैं औऱ भाई के बलिदान को सार्थक बता रहे हैं। उनकी इच्छा है कि निर्माणाधीन मंदिर में उनके भाई सहित सभी बलिदानियों की स्मृतियों को सहेजा जाए।

इसी श्रृंखला में ऑपइंडिया की टीम आगे की रिपोर्ट में सांडपुर गाँव में हुए नरसंहार के अन्य पीड़ितों के साथ-साथ बलिदानियों के परिजनों पर चल रहे केस को लेकर विस्तार से बताएगी।

मथुरा के शाही ईदगाह ढाँचे में अभी नहीं होगा सर्वे, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी थी इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर स्थित शाही ईदगाह ढाँचे के सर्वे पर रोक लगा दी है। दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 दिसम्बर 2023 को निर्णय देते हुए इस मामले में एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करके सर्वे की इजाजत दी थी। अब हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 जनवरी 2024) को रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इसकी अगली सुनवाई यहीं होने वाली है। इसलिए तब तक कृष्ण जन्मभूमि का सर्वे नहीं किया जा सकता। सर्वे पर रोक लगाने के लिए शाही ईदगाह की मस्जिद कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका डाली थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में हो सकती है, लेकिन 14 दिसम्बर 2023 के कमिश्नर नियुक्त करने के आदेश और सर्वे को अभी रोका जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 23 जनवरी 2024 तय की है। याचिका हिन्दू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह, वकील विष्णु शंकर जैन समेत 7 लोगों द्वारा लगाई गई थी।

हिंदू पक्ष की वकील रीना एन सिंह ने कहा, “शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें (मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद के) सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी। अदालत ने हिंदू पक्ष को भी नोटिस जारी किया है और उसका जवाब माँगा है। अगली सुनवाई होगी अब 23 जनवरी को आयोजित किया जाएगा।”

दरअसल, 14 दिसम्बर 2023 को हिन्दू पक्ष को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर स्थित शाही ईदगाह के सर्वे के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुमति दे थी। कोर्ट ने इस सम्बन्ध में दायर याचिका को मंज़ूरी देते हुए इस पूरे परिसर की जाँच के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की माँग को मान लिया था। इसी की देखरेख में सर्वे पूरा होना था।

हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बगल में बनी शाही ईदगाह ढाँचा को जबरन वही बना दिया गया, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। हिंदू पक्ष का कहना है कि इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। मथुरा का मुद्दा नया नहीं है।

इस मामले में अदालत में कई याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई हो रही हैं। लगभग 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू पक्ष यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की लगातार माँग करते रहे हैं। सन 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को इसकी भूमि के अधिकार सौंपे थे।

श्रीराम भुजंग स्रोत का करें जाप, फर्जी प्रचार को महत्व न दें: श्रृंगेरी पीठ के होने वाले शंकराचार्य ने भी प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को बताया ‘महोत्सव’, आशीर्वाद दिया

श्रृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु सन्निधम श्री विदुशेखरा भारती ने आगामी 22 जनवरी, 2024 को होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर किए जा रहे झूठे प्रचार को महत्व ना देने की अपील की है। साथ ही प्राण प्रतिष्ठा के दिन सभी रामभक्तों को प्रभु श्रीराम का स्मरण करने को कहा है।

श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु सन्निधम श्री विदुशेखरा भारती ने एक वीडियो में कहा, “पवित्र श्रृंगेरी पीठ और और पवित्र अयोध्या का विशिष्ट सबंध है। भगवान श्रीरामचन्द्रजी की कृपा का पात्र बनने के लिए राम नाम का जाप करें। विशिष्ट दीक्षा में रह कर श्रीराम भुजंग स्रोत का जप इस महोत्सव के संदर्भ में करना चाहिए। लोग जहाँ हों उनके मन में श्रीराम जी होने चाहिए। जो लोग भी झूठा प्रचार कर रहे हैं उसे महत्व नहीं देना चाहिए।”

श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु सन्निधम श्री विदुशेखरा भारती कर्नाटक के चिकमंगलूर में स्थित श्रृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य पद के उत्तराधिकारी हैं। यहाँ के शंकराचार्य जगद्गुरु भारती तीर्थ महासन्निधम हैं। उन्होंने भी नकारात्मक खबरों को नकारते हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर आशीर्वाद दिया है कि अतिपावन और दुर्लभ इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के सुसंदर्भ में यथायोग्य भाग लिया जाए।

गौरतलब है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर फैलाई जा रही झूठी खबरों के बारे में हाल ही में द्वारका पीठ ने भी अपना वक्तव्य जारी किया था। विश्व हिन्दू परिषद ने इस सम्बन्ध में उनके वक्तव्यों को भी एक्स (पहले ट्विटर) पर डाला है। द्वारका पीठ ने अपने वक्तव्य में लिखा है, “500 वर्षों का विवाद समाप्त हुआ है जो कि सभी सनातन धर्मावलम्बियों के लिए प्रसन्नता का अवसर है। हम चाहते हैं कि अयोध्या में होने जा रहे परमात्मा श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के सभी कार्यक्रम वेद शास्त्रानुसार, धर्मशास्त्रों की मर्यादा का पालन करते हुए विधिवत संपन्न हो, ऐसी भगवान से कामना है।”

8 जनवरी, 2024 को द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्या स्वामी सदानन्द सरस्वती ने इस संबंध में रामभक्तों के नाम संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी ओर से कोई वक्तव्य प्रसारित नहीं किया गया है। किसी समाचार पत्र में जो कुछ भी लिखा गया है वो महाराज की बिना आज्ञा के प्रसारित हुआ है और ये पूरी तरह भ्रामक है।

गौरतलब है कि झूठी खबरें फैलाने के उद्देश्य से यह प्रसारित किया गया था कि देश के चारों शंकराचार्यों ने इस आयोजन से दूरी बना रहे हैं। अब इन्हीं खबरों को निराधार बताते हुए दो मठों के शंकराचार्यों ने राम मंदिर के लिए आयोजित कार्यक्रम के विधिवत सफलतापूर्व संपन्न होने की कामना की है।

बेअदबी की भी नहीं, फिर भी निहंग सिख ने शक में मार डाला निर्दोष युवक: Video बनाकर वायरल किया, पुलिस आने पर कमरे में छिपा

पंजाब के फगवाड़ा में एक निहंग सिख ने एक युवक की हत्या कर दी। उसने हत्या के बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी डाला। उसने दावा किया कि यह शख्स गुरुद्वारे में बेअदबी के इरादे से मौजूद था इसलिए उसकी हत्या की गई।

जानकारी के अनुसार, पंजाब के कपूरथला जिले के शहर फगवाड़ा में स्थित चौड़ा खूह गुरुद्वारे में यह घटना हुई। घटना 16 जनवरी, 2024 की सुबह की बताई जा रही है। यहाँ मौजूद एक युवक को निहंग सिख ने मार दिया। उसने इसका वीडियो बनाया और हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए इसे सोशल मीडिया पर डाला।

निहंग ने दावा किया कि उसने जिसकी हत्या की, उसे किसी ने बेअदबी के लिए भेजा था। बेअदबी किसी भी ऐसे कृत्य को कहा जाता है जिसमें गुरु ग्रन्थ साहिब या सिख धर्म से जुड़े प्रतीकों से छेड़छाड़ की जाए। यह भी बताया जा रहा है कि मृतक युवक कहीं बाहर का रहने वाला है।

हत्या करने वाले निहंग सिख का नाम रमनदीप सिंह है। हत्या करने के बाद उसने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया। मामले की जानकारी होने के बाद पुलिस यहाँ पूछताछ के लिए पहुँची है। अपने आप को कमरे में बंद कर चुके सिख को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

इस घटना के बाद फगवाड़ा में काफी तनाव है। यहाँ गुरुद्वारे के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस के उच्चाधिकारी मौके पर पहुँच कर गुरुद्वारा प्रबन्धन कमिटी से बातचीत कर रहे हैं और घटना के विषय में जानकारी जुटा रहे हैं।

फगवाड़ा के एसपी गुरप्रीत सिंह ने कहा है, “एक निहंग सिख ने फगवाड़ा के चौड़ा खूह साहिब गुरुद्वारा में एक युवक की बेअदबी के शक में हत्या कर दी है, मामले में पुलिस की जाँच जारी है। अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।”

गौरतलब है कि बीते कुछ समय में निहंगों द्वारा हिंसा की ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें बेअदबी या सही से धर्म का पालन ना करने का आरोप लगाया गया है। अक्टूबर 2021 में इसी तरह निहंगों ने किसान आन्दोलन के दौरान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी और उसको मार कर लटका दिया था।

अगस्त 2023 में एक निहंग सिख ने अपनी बेटी की कृपाण से काट कर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने उसके शव को मोटरसाइकिल से बाँध कर पूरे गाँव में घसीटा था। उसने बेटी की हत्या इसलिए की थी क्योंकि वह बिना बताए पार्टी करने चली गई थी।

₹20 करोड़ में बनी HanuMan ने पहले वीकेंड में तोड़े KFG और कांतारा के रिकॉर्ड, पुष्पा को दी बराबर की टक्कर: 2024 की बनी पहली सुपरहिट

HanuMan फिल्म के रिलीज के 4 दिन बाद ही खबर है कि इसने केजीएफ, कांतारा जैसी बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड को तोड़ा है। 500 करोड़ रुपए में बनी फिल्में भी 20 करोड़ रुपए की लागत में बने इस सिनेमा के आगे नहीं टिक पा रहीं। एक्टर तेज सज्जा की एक्टिंग की हर कोई सराहना कर रहा है। वहीं फिल्म की कहानी काफी हटके कही जा रही है।

Sacnilk इंडिया की बॉक्स ऑफिस कलेक्शन रिपोर्ट की बात करें तो पता चलता है कि फिल्म के पर्दे पर आने के चौथे दिन में इसका कलेक्शन 14.50 करोड़ रुपए रहा। इससे फिल्म का टोटल कलेक्शन 55.15 करोड़ पहुँच गया है।

अब इसकी तुलना केजीएफ और कांतारा से करें तो केजीएफ ने रिलीज के पहले सोमवार को 10.75 करोड़ रुपए और ऋषभ शेट्टी की कांतारा ने 3.7 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। इस तरह पहले सोमवार के मामले में तेज की यह फिल्म आगे निकल गई है।

पहले वीकेंड की कमाई

इसके अलावा पहले वीकेंड तक फिल्म ने 40 करोड़ रुपए के करीब कमाए थे। पहले दिन इसकी शुरुआत 8 करोड़ रुपए कमाने से हुई थी लेकिन फिर इसमें काफी उछाल आया। तेलुगु में फिल्म ने ₹28.21 करोड़ कमाए थे, तमिल में ₹0.19 करोड़ कमाए। इस तरह कन्नड़ में ₹0.19 करोड़ और मलयालम में ₹0.06 करोड़ का बिजनेस शामिल है।

सिर्फ हिंदी वर्जन की बात करें तो शुक्रवार को फिल्म ने ₹2.15 करोड़ और शनिवार को ₹4.05 करोड़ का नेट बिजनेस किया। वहीं, रविवार को कलेक्शन ₹6.06 करोड़ रहा। इस तरह मात्र तीन दिनों में ही फिल्म ने हिंदी बेल्ट में ₹12.26 करोड़ नेट कमाए।

हिंदी बेल्ट में कांतारा, केजीएफ के बिजनेस की बात करें, तो कांतारा ने ओपनिंग वीकेंड पर ₹7.52 करोड़ कमाए थे, वहीं केजीएफ चैप्टर 1 ने 9.20 करोड़ का कलेक्शन किया था। इसका मतलब साफ है कि हनुमैन ने दोनों को पछाड़ दिया है। वहीं पुष्पा फिल्म भी कुछ ही फर्क से इससे आगे वरना कमाई के मामले में काफी टक्कर दी। पुष्पा पार्ट 1का ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन 12.68 करोड़ था।

दर्शकों में हनुमैन फिल्म का क्रेज देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि फिल्म 100 करोड़ के क्लब में शामिल हो सकती है।

‘दिल्ली की सभी झुग्गी-झोपड़ी तोड़ दी जाएगी, सबको बसाया जाएगा 40-50 किलोमीटर दूर’: AAP नेता फैला रहे झूठ, DDA ने बताई सच्चाई

दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं के हालिया बयानों को झूठा करार दिया है। AAP के नेता लगातार तीन-चार दिनों से इस बात का जोरशोर से प्रचार कर रहे हैं कि DDA दिल्ली के अंदर झुग्गी झोपड़ियों को तोड़ना चाहती है।

DDA ने इस सम्बन्ध में एक बयान 15 जनवरी, 2024 को जारी किया है। DDA ने कहा, “झुग्गियाँ तोड़ने के विषय में दिए गए बयान फर्जी, गड़बड़ और लोगों को गुमराह करने की भावना से दिए गए हैं।” DDA ने झुग्गियों को तोड़ने पर कानूनी स्थिति भी स्पष्ट की है।

DDA ने कहा है, “पहली बात यह है कि किसी भी झुग्गी झोपड़ी को ध्वस्त नहीं किया गया है। उन्हें इस कारण से ध्वस्त भी नहीं किया जा सकता है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (विशेष प्रावधान) के दूसरे अधिनियम 2011’ की वैधता को तीन सालों के लिए बढ़ा दिया है। इस कानून के तहत अनाधिकारिक निर्माण को कार्रवाई से मुक्त रखा गया है। इसमें झुग्गी झोपड़ियाँ भी आती हैं। ऐसे में इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।”

DDA ने यह भी बताया है कि 13 जनवरी, 2024 को उसने दिल्ली के गोकुलपुरी में सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था। यहाँ सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें बनाई गई थी। इनमें कई ऑटोमोबाइल शोरूम भी शामिल थे, जो करोड़ों का लाभ कमा रहे थे।

गौरतलब है कि हाल ही में AAP ने दिल्ली में एक सप्ताह का एक अभियान चलाने का ऐलान किया था। इसके अंतर्गत इसके मंत्रीगण दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं। 15 जनवरी, 2024 को दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज और आतिशी मार्लेना दिल्ली की सफदरजंग और बीआर कैम्प में पहुँचे। यहाँ इन्होंने लोगों को बताया कि DDA इनकी झुग्गी झोपड़ियाँ तोड़ना चाहती हैं।

इन्होंने इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में DDA पर आरोप लगाया कि वह दिल्ली की सभी झुग्गी झोपड़ियों को तोड़ना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन झुग्गियों को तोड़ कर यहाँ रहने वाले लोगों को 40-50 किलोमीटर दूर बसाने की DDA की योजना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सौरभ भारद्वाज और आतिशी मार्लेना ने कहा कि AAP इन लोगों को उनकी झुग्गी की जगह पर ही फ्लैट दिलवाएगी।

वहीं भाजपा नेताओं ने AAP सरकार पर दिल्ली के विकास का कोई काम नहीं करने का आरोप लगाया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि दिल्ली में DDA के 55000 फ्लैट बन कर तैयार हैं, इन्हें AAP सरकार आवंटित नहीं कर पाई है। उन्होंने आरोप लगाया AAP की इस ढीलाढाली के चलते यह फ्लैट अब खराब स्थिति में पहुँच गए हैं।

अगस्त 2023 में राज्यसभा में दी गई एक जानकारी में केंद्र सरकार ने बताया था कि दिल्ली के अंदर वर्तमान में 675 झुग्गी बस्ती वाले इलाके (क्लस्टर) हैं। इनमें 30,000 से अधिक झुग्गियों की पहचान की गई है। केंद्र सरकार ने बताया था कि इन झुग्गी वाले इलाकों में 15 लाख से अधिक लोग रह रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की उन एजेंसियों से लगातार रस्साकशी चलती रहती है, जिनमें केंद्र सरकार या दिल्ली के उपराज्यपाल का सीधा दखल होता है। DDA दिल्ली के उपराज्यपाल के अंतर्गत आती है, जो इसके चेयरमैन होते हैं। ऐसे में DDA पर आरोप लगाना भी इसी रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है।