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राम मंदिर का न्योता ठुकराने पर 2 धड़ों में बँटी कॉन्ग्रेस तो सफाई देता फिर रहा आलाकमान: अध्यक्ष खड़गे बोले – जो जाना चाहते हैं वो जाएँ

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराने पर कॉन्ग्रेस पार्टी हर तरफ से आलोचना झेल रही है। विपक्ष तो विपक्ष, पार्टी के नेता ही वरिष्ठ नेताओं के इस फैसले पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसको सफाई दी है। खड़गे ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में न जाने का उद्देश्य किसी की भावनाओं या किसी धर्म को ठेस पहुँचाना नहीं है।

उन्होंने कहा, “हम पहले ही कह चुके हैं कि अगर कोई (22 जनवरी को ‘प्राण प्रतिष्ठा’ कार्यक्रम के लिए) अयोध्या जाना चाहता है तो वह जब चाहे, वहाँ जाने के लिए स्वतंत्र है। हालाँकि, कार्यक्रम में शामिल न होने के हमारे फैसले को लेकर बीजेपी लगातार हम पर निशाना साध रही है। यह गलत है। हमारे फैसले का मकसद किसी शख्स या धर्म की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।”

गाँधी परिवार के नजदीकी मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहते हैं कि उन्होंने मुद्रास्फीति और बेरोजगारी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए? हम यह भी चाहेंगे कि वह हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताएँ। ये ऐसे मुद्दे, हैं जो सीधे देश और इसके लोगों को प्रभावित करते हैं।”

बताते चलें कि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए सोनिया गाँधी, खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को निमंत्रण भेजा गया था। हालाँकि, इन लोगों ने इस निमंत्रण को ठुकरा दिया था। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को ‘बीजेपी-आरएसएस’ का कार्यक्रम कहकर वहाँ जाने से इनकार कर दिया था।

कॉन्ग्रेस के इस स्टैंड पर बीजेपी ने उस पर देश की पहचान और आत्मा को नकारने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “राम मंदिर हमारा राष्ट्र मंदिर है और प्रभु श्रीराम हमारे अस्तित्व और आस्था के अभिन्न अंग हैं। वह देश की पहचान और आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, अयोध्या में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ में शामिल होने के निमंत्रण को ठुकराकर उन्होंने हमारी सभ्यता की जड़ों और राष्ट्रीय पहचान को नकार दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

वहीं, कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कहा, “प्राण प्रतिष्ठा’ के आसपास अनुष्ठानों की एक प्रणाली और रिवाज है। यदि यह आयोजन धार्मिक है तो यह आयोजन चारों पीठों के शंकराचार्यों के मार्गदर्शन में क्यों नहीं हो रहा? चारों शंकराचार्यों ने साफ कहा है कि अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती।”

खेड़ा ने आगे कहा, “अगर ये आयोजन धार्मिक नहीं है तो इसका राजनीतिक होना तय है। मैं किसी पार्टी के कुछ नेताओं को मेरे और मेरे आराध्य देवता के बीच बिचौलियों के रूप में काम करते हुए स्वीकार नहीं कर सकता। हमारे कुछ राजनेता ठेकेदारों की तरह काम कर रहे हैं। तारीख तय करने से पहले बीजेपी ने किस ‘पंचांग’ का हवाला दिया? तारीख (लोकसभा) चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनी गई है।”

कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने आरोप लगाया कि यह प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन ‘विशुद्ध रूप से धार्मिक’ नहीं है। इसमें विशिष्ट ‘राजनीतिक निहितार्थ’ हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंदिर का उद्घाटन उसके निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही किया जा रहा है।

वहीं, कॉन्ग्रेस का एक धड़ा ऐसा भी है, जो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर सकारात्मक रूख अपनाए हुए हैं। उनमें से एक हैं हिमाचल प्रदेश के कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह। विक्रमादित्य सिंह प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा है कि एक हिंदू होने के नाते वहाँ होना उनकी जिम्मेदारी बनती है।

वहीं विक्रमादित्य सिंह की माँ और हिमाचल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को राम मंदिर निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आए एक वीडियो में प्रतिभा सिंह कह रही हैं, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राम मंदिर निर्माण की पहल वास्तव में सराहनीय है।”

हिमाचल प्रदेश के मंडी से कॉन्ग्रेस सांसद प्रतिभा सिंह ने कहा कि उन्हें और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को एक संयुक्त निमंत्रण मिला है। वहीं संभल के कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी कॉग्रेस के राममंदिर न्योता ठुकराने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि श्रीराम मंदिर के निमंत्रण को ठुकराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आत्मघाती फ़ैसला है।

वहीं गुजरात की पोरबंदर सीट से कॉन्ग्रेस विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा था, “भगवान श्रीराम आराध्य देव हैं। यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कॉन्ग्रेस को ऐसे (प्राण प्रतिष्ठा में नहीं जाने के) राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था।”

‘मार खाना ही भाग्य में’: बंगाल में नंगा कर पीटे गए साधुओं ने कहा, भीड़ ने जटाएँ पकड़ घसीटा, रौंदा गेरुआ वस्त्र, BJP बोली- वहाँ हिंदू होना गुनाह

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल में साधुओं के साथ पालघर लिचिंग जैसा वाकया सामने आया है। साधुओं के साथ ना सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि उन्हें नंगा किया गया, उनकी जटाएँ खींची गईं, उनके गेरुआ वस्त्र को रौंदा गया और डंडों से उनकी पिटाई की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने 30 सेकेंड के इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं। बंगाल बचाने का आह्वान करते हुए मालवीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू होना अपराध हो गया है।

उन्होंने लिखा, “पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पालघर की तरह की एक लिंचिंग में मकर संक्रांति के लिए गंगासागर जा रहे साधुओं को सत्तारूढ़ टीएमसी से जुड़े अपराधियों ने निर्वस्त्र कर पीटा। ममता बनर्जी के शासन में शाहजहाँ शेख जैसे आतंकवादी को सरकारी संरक्षण मिलता है और साधुओं की हत्या की जा रही है।”

वीडियो में साफ दिख रहा है कि भीड़ पुरुलिया की सड़कों पर कुछ लोग सरेआम साधुओं की बेरहमी से पिटाई कर रही है। उनकी जटाओं को पकड़कर घुमा रही है। इस दौरान साधु बचने की कोशिश करते हैं और रहम की गुजारिश करते हैं, लेकिन हमलावर मानने को तैयार नहीं है। वहाँ चारों तरफ लोगों खड़े होकर तमाशा देख रहे हैं। वहीं, एक आदमी उन साधुओं को बचाने की कोशिश करता दिख रहा है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा के प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने X पर लिखा है, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में पालघर पार्ट 2 का नजारा देखने को मिला। जिस प्रकार से साधु-संतों को पीटा गया, टीएमसी के गुंडों के द्वारा। जिस प्रकार उद्धव ठाकरे जी के राज में पालघर पार्ट 1 हुआ था, उस प्रकार ममता दीदी के राज में पालघर पार्ट 2 इसलिए हो रहा है कि वहाँ राजनीतिक हिंसा चरम पर पहुँच चुकी है?”

जयहिंद ने आगे कहा, “वहाँ कोई भी सुरक्षित नहीं है। चाहे वो ED के ऑफिसर हों, सेंट्रल एजेंसी के लोग हों, राष्ट्रवादी लोग हों या साधु-संत हों। क्या इतनी नफरत हो चुकी है जय श्रीराम कहने से? क्या इतनी नफरत हो चुकी है नफरत हो चुकी है हिंदू होने से? वहाँ शाहजहाँ जैसे गुंडे को तो पूरा संरक्षण मिल रहा है। यही हकीकत है आज के पश्चिम बंगाल की।”

रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुलिया में साधुओं के साथ हुई पिटाई का पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि, साधु पक्ष की ओर से कोई एफआईआर नहीं दर्ज कराई गई है। TV9 की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित साधुओं का कहना है कि उन्हें लगता है कि मार खाना उनके भाग्य में ही लिखा है।

बताते चलें कि 16 अप्रैल 2020 को महाराष्ट्र के पालघर में 72 साल के कल्पवृक्ष गिरि और 35 साल के सुशील गिरि नाम के दो साधुओं की लिचिंग कर दी गई थी। वे दोनों अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से सूरत जा रहे थे। इस दौरान पालघर में 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें बच्चा चोरी करने का आरोप लगा रोका और दोनों साधुओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

मीडिया को माइक से 2 घंटे तक माँ-बहन की गाली: कौन हैं प्रतीक सिन्हा, क्यों हिंदुस्तान अखबार पर निकाल रहे भड़ास, प्रशासन से माँगी अनुमति

  • मेनस्ट्रीम मीडिया की ऑफिस के सामने माइक लगाकर गाली
  • ब्यूरो चीफ और जिला संवाददाता को 2 घंटे तक माँ-बहन की गाली
  • बहुत इच्छा होने पर भी न तो जूते से मारेंगे, न ही धमकी देंगे
  • 2 घंटे तक गाली का कार्यक्रम समाप्त होने पर खुद को कानून को सौंप देंगे
  • 15 जनवरी 2024 को होगा यह कार्यक्रम, समय होगा दिन के 12 बजे

मेनस्ट्रीम मीडिया कई बार बिना तथ्यों के खबरें छापता आया है, यह किसी से छिपा नहीं है। फैक्ट चेक वाली विधा इनके इन्हीं करतूतों की वजह से वजूद में आई। सुधार फिर भी नहीं के बराबर। इसलिए उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के निवासी प्रतीक सिन्हा ने फैक्ट चेक से एक कदम आगे जाकर ‘माँ-बहन की गाली’ के साथ मीडिया को आईना दिखाने के लिए प्रशासन से अनुमति माँगी है। ऊपर जो 5 लाइनें लिखी हैं, वो इन्हीं प्रतीक सिन्हा के प्रशासन को दिए आवेदन से ली गई हैं।

कौन हैं ये प्रतीक सिन्हा? किस मीडिया को देना चाहते हैं माँ-बहन की गाली? गाली देने के पीछे वजह क्या है? दरअसल 8 जनवरी 2024 को हिंदुस्तान अखबार ने एक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में नगरपालिका की भूमि पर अवैध कब्जा के संबंध में एक खबर प्रकाशित की। यह 8 जनवरी 2024 की बात है। खबर के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया। बुलडोजर चला। 10 जनवरी 2024 को फिर से हिंदुस्तान अखबार ने बुलडोजर चलने वाली खबर को छापा। इस खबर में अवैध प्लॉटिंग किए गए भूखंडों को प्रशासन के बुलडोजर से ढाहने वाली बात को हाईलाइट किया गया। इसी खबर को लेकर प्रतीक सिन्हा ने 2 चिट्ठी लिखी है। दोनों चिट्ठियाँ वायरल हैं।

प्रतीक सिन्हा ने एक चिट्ठी लिखी है हिंदुस्तान के संपादक को। इसमें उन्होंने बिना साक्ष्य खबर छापने के कारण उनको हुई आर्थिक तथा सामाजिक हानि का जिक्र किया है। प्रतीक सिन्हा के अनुसार जिस जमीन को हिंदुस्तान की खबर में अवैध बताया गया, उसके वो मालिक है, उससे संबंधित सारे कागजात उनके पास हैं। इसलिए उन्होंने संपादक को खबर से संबंधित साक्ष्य पेश करने वरना मानहानि के लिए तैयार रहने के लिए सूचित किया।

दूसरी चिट्ठी लिखी गई है प्रतापगढ़ के उपजिलाधिकारी को। इसमें प्रतीक सिन्हा ने लिखा है कि हिंदुस्तान की खबर के आधार पर उन्हें न सिर्फ भूमाफिया घोषित कर दिया गया बल्कि उनकी मालिकाना जमीन पर प्रशासन ने बुलडोजर भी चलवा दिया। इसी चिट्ठी में प्रतीक सिन्हा लिखते हैं, प्रशासन से अनुमति माँगते हैं:

“15 जनवरी 2024 को दिन में 12 बजे हिंदुस्तान कार्यालय के सामने माइक लगाकर ब्यूरो चीफ और जिला संवाददाता को 2 घंटे तक माँ-बहन की गालियाँ देना चाहता हूँ। यह विश्वास दिलाता हूँ कि बहुत इच्छा होने पर भी न तो जूते से मारूँगा, न ही धमकी दूँगा। गाली कार्यक्रम के पश्चात कानून के सामने खुद के पेश भी कर दूँगा ताकि सुसंगत धाराओं के तहत मेरा चालान हो सके।”

प्रतीक सिन्हा ने चिट्ठी भेज कर अपनी मंशा जाहिर कर दी है। गाली देकर अपने गुस्से को वो शांत कर पाएँगे या नहीं, यह प्रशासन को तय करना है। देखना यह है कि तथाकथित मीडिया इस प्रकरण से कितना सीख पाता है।

फिदायीन हमले की थी योजना, पुलिस की वर्दी चुराने की कर रहे थे कोशिश: NIA ने लश्कर के 8 आतंकियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमले की साजिश रचने के मामले में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आठ आतंकियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। इनमें एक आजीवन कारावास की सजा पाया और दो भगोड़े आतंकवादी शामिल हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई ने के अनुसार, सभी आठ आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है।

यह मामला मूल रूप से बेंगलुरु सिटी पुलिस ने दर्ज किया था, जिसमें 18 जुलाई 2023 को सातों आतंकी एक साथ जुटे थे। सातों आतंकियों के कब्जे से हथियार, गोला-बारूद, हथगोले और वॉकी-टॉकी बरामद किए गए थे। इस मामले की NIA ने अक्टूबर 2023 में जाँच अपने हाथों में ली थी। इसके बाद सामने आया कि कई बम धमाकों में शामिल रहा टी नसीर साल 2017 में बेंगलुरु जेल में बंद रहने के दौरान इन आतंकियों के संपर्क में आया था। उसी ने सबको लश्कर की विचारधारा से जोड़ा और उन्हें फिदायीन बनने के लिए प्रेरित किया।

एनआईए के आरोप पत्र में बताया गया है कि बेंगलुरु जेल में बंद रहे सभी आतंकी अलग-अलग वारदातों में जेल पहुँचे थे। इनमें से एक सलमान खान POCSO Act के तहत जेल में बंद था, जबकि अन्य हत्या के आरोप में जेल में बंद थे। टी नसीर ने उन्हें न सिर्फ एकजुट किया, बल्कि सभी को आतंकी वारदातों में शामिल होने के लिए तैयार किया।

आरोप पत्र में शामिल आतंकवादियों में केरल के कन्नूर का रहने वाला टी नसीर 2013 से बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है, जबकि जुनैद अहमद उर्फ जेडी और सलमान खान के विदेश भाग जाने का संदेह है। अन्य की पहचान सैयद सुहैल खान उर्फ सुहैल, मोहम्मद उमर, जाहिद तबरेज, सैयद मुदस्सिर पाशा और मोहम्मद फैसल रब्बानी उर्फ सदत के रूप में हुई है।

एनआईए ने आगे बताया कि टी नसीर ने देखा कि ये सभी आतंकी बन सकते हैं तो उसने इन सभी को धीरे-धीरे अपनी बैरक में शिफ्ट करा लिया। धीरे-धीरे इन्हें कट्टरपंथी बनाने लगा और लश्कर की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जुनैद और सलमान को मना लिया। उसने उसने जुनैद के साथ मिलकर अन्य आरोपियों को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने की साजिश रची।

माना जाता है कि जेल से रिहा होने के बाद जुनैद कुछ और अपराध करने के बाद विदेश भाग गया। NIA के अनुसार, जुनैद ने जेल के भीतर और बाहर आतंकी लश्कर की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपने साथियों को विदेश से धन भेजना शुरू कर दिया। उसने अपने साथियों को पुलिस की इस्तेमाल की गई कैप चुराने और हमले के अभ्यास के तौर पर सरकारी बसों में आगजनी करने का भी निर्देश दिया।

NIA के अनुसार, “जुनैद ने ‘फिदायीन’ हमले को अंजाम देने और नसीर को अदालत जाने के दौरान रास्ते में पुलिस हिरासत से भगाने में मदद करने के लिए सलमान के साथ मिलकर साजिश रची और इसके लिए हथियार, गोला-बारूद, हथगोले और वॉकी-टॉकी पहुँचाया।” एजेंसी ने कहा कि पिछले साल जुलाई में हथियार आदि की जब्ती के साथ साजिश को नाकाम कर दिया गया था।

मॉरीशस भी हुआ राममय, प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का उत्सव मनाने के लिए विशेष छुट्टी: प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने किया ऐलान

हिंदुओं का लगभग 500 वर्षों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। भगवान श्रीराम के नवनिर्मित मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इसको लेकर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के हिंदुओं में उत्साह है। हिंदू समुदाय राममय है। हिंदुओं की बड़ी आबादी वाले देश मॉरीशस ने 22 जनवरी को छुट्टी की घोषणा की है।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ (Pravind Jugnauth) के नेतृत्व में मॉरीशस की कैबिनेट ने वहाँ हिंदू कर्मचारियों को 22 जनवरी को 2 घंटे की विशेष छुट्टी दी है। इस दौरान वे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर होने वाले स्थानीय कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे और लाइव टेलिकास्ट देख सकेंगे। इसके लिए मॉरीशस के हिंदू सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने माँग की थी।

प्रधानमंत्री जगन्नाथ की अध्यक्षता वाली मॉरीशस की कैबिनेट ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को एक आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया है कि सोमवार 22 जनवरी 2024 की दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक, दो घंटे की विशेष छुट्टी देने का फैसला किया है। भारत में अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर यह फैसला लिया गया है।

बयान में कहा गया है कि यह हिंदुओं के लिए एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि यह भगवान राम की वापसी का प्रतीक है। ऐसे में मॉरीशस सरकार के हिंदू अधिकारी एवं कर्मचारी उस दिन 2 घंटे की विशेष घंटे की छुट्टी पर रहेंगे। पीएम प्रविंद जुगनाथ ने कहा कि यह भावनाओं और परंपराओं के सम्मान का छोटा सा प्रयास है।

मॉरीशस में हिंदुओं की आबादी लगभग 48.5 प्रतिशत है। यहाँ के हिंदुओं की जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं। अफ्रीकी महाद्वीप से सटा हिंद महासागर में स्थित बेहद खूबसूरत द्वीपीय देश मॉरीशस अकेला ऐसा देश है, जहाँ हिंदू धर्म के अनुयायी इतनी बड़ी संख्या में रहते हैं। अगर देश की आबादी के अनुपात में देखें तो भारत और नेपाल के बाद यहाँ सबसे अधिक हिंदू रहते हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में भगवान रामलला की मूर्ति की स्थापना में शामिल होंगे। इस समारोह में सभी क्षेत्रों की हस्तियों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही इस प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में 50 से अधिक देशों के गणमान्य व्यक्तियों भी शामिल होंगे।

मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़ा यह समारोह 16 जनवरी 2024 से शुरू होकर सात दिनों तक चलेगा और 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा होगी। यह अनुष्ठान वैदिक रीति-रिवाजों से होगा। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिनों का विशेष व्रत भी रखा है।

इस भव्य समारोह में समाज के विभिन्न तबकों का प्रतिनिधित्व होगा। इसमें आने वाले लगभग 7000 मेहमानों में 4000 धर्माचार्य और लगभग 3000 अन्य लोग आएँगे। इनमें लगभग 50 पद्म सम्मानों से सम्मानित हस्तियाँ रहेंगी। इसके साथ ही इस मंदिर को बनाने वाले लगभग 300 श्रमिकों और दान देने वाले लोगों को भी अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है।  

बंगाल की खाड़ी में 3.4 किलोमीटर नीचे दफन था भारतीय वायुसेना का विमान, 2016 में हो गया था गायब: 22 लोग थे सवार

साल 2016 में खोए भारतीय वायुसेना के विमान का पता चल गया है। इस विमान ने बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक मिशन के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन बाद में गायब हो गया था। सालों-साल चली खोज के बाद आखिरकार विमान का मलवा मिल गया है। परेशानी की बात ये है कि विमान का मलवा समुद्र में बहुत नीचे है। ये मलबा चेन्नई तट से लगभग 310 किलोमीटर दूर 3.4 किलोमीटर की गहराई में मिला है। ऐसे में उसे कैसे निकाला जाए, इसको लेकर मंथन हो रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी करके इस विमान के मिलने की पुष्टि की। रक्षा मंत्रालय ने बताया, “भारतीय वायुसेना का एक एएन-32 विमान (पंजीकरण के-2743) 22 जुलाई 2016 को एक ऑपरेशन मिशन के दौरान बंगाल की खाड़ी के ऊपर से लापता हो गया था। इस विमान में 29 कर्मी सवार थे। विमान और जहाजों द्वारा बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाया गया, लेकिन मलबे का पता नहीं लग पाया था।”

रक्षा मंत्रालय ने आगे बताया, “पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तत्वावधान में कार्य करने वाले राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान ने लापता एएन-32 विमान के अंतिम ज्ञात स्थान पर हाल ही में गहरे समुद्र में अन्वेषण क्षमता के साथ एक ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (एयूवी) तैनात किया था। यह खोज मल्टी-बीम सोनार (साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग), सिंथेटिक एपर्चर सोनार और हाई रिज़ॉल्यूशन फोटोग्राफी सहित कई पेलोड का उपयोग करके 3400 मीटर की गहराई पर की गई। खोज के दौरान प्राप्‍त तस्‍वीरों के विश्लेषण से चेन्नई तट से लगभग 140 समुद्री मील (लगभग 310 किमी) दूर समुद्र तल पर एक दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे की उपस्थिति का संकेत मिला।”

बयान में आगे कहा गया, “खोज के दौरान प्राप्‍त तस्‍वीरों की जाँच की गई और उन्हें एएन-32 विमान के अनुरूप पाया गया। संभावित दुर्घटना स्थल पर इतिहास में किसी अन्‍य विमान के लापता होने के बारे में कोई जानकारी के नहीं होने के कारण मलबे को संभवतः दुर्घटनाग्रस्त भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान (के-2743) से संबंधित होने की ओर इशारा करता है।”

कैसा है एएन-32 विमान ?

भारतीय वायुसेना में एनएन-32 विमानों का बड़ा जत्था है। 100 से भी ज्यादा की संख्या में एएन-32 विमानों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना करती है। ये काफी पुराने हो चुके हैं और सरकार इन्हें बदलने में लगी हुई है। इस बीच, 35 विमानों की ओवरहॉलिंग भी की गई है। एएन-32 विमान डबल इंजन के मीडियम रेंज के ट्रांसपोर्ट विमान हैं, जो कम समय में सैनिकों समेत अन्य सामाग्रियों को एक जगह से दूसरे जगह पर पहुँचाते हैं।

4 साल के बेटे की हत्या करने से पहले सूचना सेठ ने सुनाई थी लोरी, खिलौनों के बीच छिपा रखी थी लाश: खुद की भी लेना चाहती थी जान

अपने बेटे की हत्या करने वाली एक स्टार्टअप की CEO सूचना सेठ ने हत्या से पहले अपने बेटे को लोरी सुनाई थी। हत्या के बाद सूचना सेठ ने खुद की जान लेने की भी कोशिश की। हालाँकि, बाद में वो बेटे के शव को खिलानों से भरे बैग में लेकर टैक्सी के सहारे भाग निकली। टैक्सी ड्राइवर की चतुराई से उसे कर्नाटक के चित्रदुर्ग में गिरफ्तार किया गया था। गोवा पुलिस शुक्रवार (15 जनवरी 2024) को सूचना को लेकर क्राइम स्पॉट पर पहुँची और सीन को री-क्रिएट किया।

इतना ही नहीं, पुलिस को टिशू पेपर पर आई लाइनर से लिखा हुआ एक नोट भी मिला है। उसे फाड़ने की कोशिश की गई थी। यह सूचना सेठ के सामान से मिला है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उस नोट पर सूचना सेठ ने लिखा था कि वह किसी भी कीमत पर अपने बेटे की कस्टडी अपने पति को नहीं देगी। कोर्ट कहेगा तब भी नहीं। बेटे से पति को मिलने की कोर्ट द्वारा दी गई इजाजत से भी वह नाराज थी।

गोवा पुलिस ने क्राइम सीन किया री-क्रिएट

गोवा पुलिस शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को सूचना सेठ को लेकर उस होटल के कमरे में पहुँची, जहाँ उसने अपने बेटे की हत्या की थी। वारदात वाली जगह पर पुलिस ने क्राइम सीन को री-क्रिएट किया और हत्या के मामले की गहराई से जाँच की। इस बीच, सूचना सेठ का मेडिकल कराया गया है। उसकी जाँच मनोचिकित्सक से भी कराई गई है।

सूत्रों के मुताबिक, सूचना सेठ ने बच्चे का तकिए से नाक-मुँह दबाकर या किसी कपड़े के सहारे गला घोंट दिया था। सूचना सेठ के होटल वाले कमरे से कफ सीरप की दो खाली शीशियाँ मिली हैं। पुलिस को आशंका है कि बेटे की हत्या से पहले सूचना सेठ ने उसे नशे की भारी डोज दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे का स्ट्रगल करने का निशान नहीं मिला है। संभवत: वह भारी नशे में था।

बच्चे की हत्या के बाद जब उसे चित्रदुर्ग में गिरफ्तार किया गया, उस समय पुलिस ने उसका बैग खुलवाया। उसमें कुछ नहीं मिला था। जब बैग खुलवाया गया था तो उसमें भी कुछ नहीं दिखा। हालाँकि, पुलिस ने जब उसमें कपड़े निकाले तो खिलौनों के नीचे उसके बेटे का शव बरामद हुआ था। पुलिस के पूछने पर सूचना सेठ ने आराम से जवाब दिया था कि ये उसके बेटे का शव है।

इसके बाद उसने जाँच को भटकाने की तमाम कोशिशें कीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूचना सेठ को अपने बच्चे से तो लगाव था, लेकिन उसे अपने बच्चे में अपने पति का अक्स भी दिखता था, जो उसके पति के साथ बिगड़े रिश्ते की याद दिलाता था। वह अपने बेटे को पति से किसी भी कीमत पर मिलने देना नहीं चाहती थी। जिस दिन उसने बेटे की हत्या की थी, उस दिन उसके पति ने बेटे से मिलने का आग्रह किया था।

सूचना सेठ ने काटी थी हाथ की नस

जानकारी के मुताबिक, सूचना सेठ ने अपने बाएँ हाथ की कलाई को भी काटा था। उसी का खून होटल में पड़ा मिला था। बाद में होटल के कर्मचारियों ने कमरे में खून के धब्बे देखे थे। कर्मचारियों ने यह भी कहा था कि सूचना सेठ के साथ उसका बेटा जाते समय नहीं था। वो प्राइवेट टैक्सी लेकर बेंगलुरू के लिए रवाना हुई थी, जबकि होटल के कर्मचारियों ने उसे एयरपोर्ट जाने का सुझाव दिया था।

कैब के ड्राइवर रेजोन डिसूजा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे सोमवार की सुबह 10.30 के आसपास गोवा के कैलंगुट पुलिस स्टेशन से फोन आया था। उस समय मैं सूचना को लेकर बेंगलुरू के रास्ते में था। मुझे आसपास के किसी पुलिस स्टेशन तक पहुँचने को कहा गया था। ऐसे में मैं शौचालय जाने के बहाने एक रेस्टोरेंट पर रुका और उसके चौकीदार से नजदीकी पुलिस स्टेशन की जानकारी माँगी। फिर मैं पुलिस स्टेशन पहुँचा और वहीं पर बैग में बच्चे का शव बरामद हुआ। शव के ऊपर कपड़ा था और उसमें सबसे ऊपर खिलौने रखे थे।”

नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीराम ने ही चुना, प्राण प्रतिष्ठा से पहले बोले आडवाणी: कहा- नियति ने तय कर लिया था अयोध्या में मंदिर

राम मंदिर को जनआंदोलन में बदलने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि रथयात्रा के समय उन्हें अहसास हो गया था कि नियति ने तय कर दिया है कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा। उन्होंने खुद को सारथी बताया। साथ ही राममंदिर के सुख क्षण लाने के उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई भी दी। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आडवाणी भी मौजूद रहेंगे।

बताते चलें कि लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से अपनी ‘रथयात्रा’ की शुरुआत की थी। इस रथयात्रा के संयोजक उस समय नरेंद्र मोदी थे। यह यात्रा 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के साथ समाप्त हुई थी। कहा जाता है कि जब विवादित ढाँचा टूटा था, उस समय लालकृष्ण आडवाणी अयोध्या में ही थे।

देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मंदिर सभी भारतीयों को भगवान राम के गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा, “उस समय (सितंबर 1990 में यात्रा शुरू होने के कुछ दिन बाद) मुझे लगा कि नियति ने तय कर लिया है कि एक दिन अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा… अब यह केवल समय की बात है।”

राष्ट्रधर्म नाम की एक पत्रिका से बात करते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने आगे कहा, “और, ‘रथयात्रा’ शुरू होने के कुछ कुछ दिनों बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं सिर्फ एक सारथी था। मुख्य संदेश यात्रा ही थी… वह ‘रथ’ पूजा के योग्य था, क्योंकि यह भगवान राम के जन्मस्थान पर जा रहा था।” उन्होंने रथयात्रा को अपने राजनीतिक करियर की सबसे निर्णायक और परिवर्तनकारी घटना बताया।

आडवाणी ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि यह रथयात्रा जनआंदोलन का रूप ले लेगी। इसे ‘खुद को खोजने’ का एक मौका बताते हुए उन्होंने कहा, “यात्रा के दौरान, कई अनुभव हुए जिन्होंने मेरे जीवन को प्रभावित किया। दूरदराज के गाँवों से ग्रामीण मेरे पास आते थे, रथ देखकर भावना से अभिभूत होते थे। वे नमस्कार करते थे। ‘राम’ का जाप करते थे और चले जाते थे। यह एक संदेश था।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए आडवाणी ने कहा कि कहा कि भगवान राम ने अपने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए नरेंद्र मोदी के रूप में अपना भक्त चुना, जिनकी देखरेख में मंदिर की इमारत बन रही है। उन्होंने कहा, “अब जब पीएम मोदी मंदिर का अभिषेक करेंगे तो वह भारत के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करेंगे।”

लालकृष्ण आडवाणी ने ये सारी बातें राष्ट्रधर्म नाम की एक मासिक पत्रि‍का से बातचीत में ये बातें कहीं। ‘श्रीराममंदिर: एक दिव्‍य स्‍वप्‍न की पूर्ति’ नाम से यह लेख 15 जनवरी 2024 को प्रकाशि‍त होगा। बता दें कि विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने पिछले दिनों कहा था कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में लालकृष्ण आडवाणी शामिल रहेंगे। 

भारत के 10 सबसे गंदे शहर एक ही राज्य में, इस राज्य का नाम है पश्चिम बंगाल: हावड़ा हो या कोलकाता, स्वच्छता सर्वेक्षण में सब रहे फिसड्डी

राष्ट्रपति द्रौपदी द्रौपदी मुर्मू ने 11 जनवरी 2024 को स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार 2023 प्रदान किए। स्वच्छ शहर, सबसे स्वच्छ छावनी, सफाई मित्र सुरक्षा, गंगा टाउन और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य की श्रेणियों में 13 पुरस्कार दिए गए। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) यह सालाना सर्वेक्षण करवाता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार देश के 10 सबसे गंदे शहर एक ही राज्य में हैं। यह राज्य है तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल।

पश्चिम बंगाल का हावड़ा भारत का सबसे गंदा शहर है। सर्वेक्षण में पाया गया कि देश के ऐसे शहर जिनकी आबादी 1 लाख से अधिक है, उनमें 10 सबसे गंदे पश्चिम बंगाल से आते हैं। इस साल सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार में मध्य प्रदेश के इंदौर और गुजरात के सूरत को संयुक्त तौर पर मिला है।

सर्वेक्षण के अनुसार जो शहर देश में सबसे गंदे हैं उनमें हावड़ा के अलावा पश्चिम बंगाल के ही कल्याणी, मध्यग्राम, कृष्णानगर, आसनसोल, रिशरा, बिधाननगर, कांचरापाड़ा, कोलकाता और भाटपारा हैं। अगर कोलकता और भाटपारा को छोड़ दिया जाए तो पश्चिम बंगाल के बाकी आठ शहरों का स्वच्छता स्कोर 1000 से कम है। सर्वेक्षण के दौरान स्वच्छता और स्वच्छता आचरण के आधार पर शहरों का मूल्यांकन किया गया है।

सर्वेक्षण के दौरान 12 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी। इतने विशल सैंपल साइज के कारण यह यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण है। पश्चिम बंगाल के शहरों के अलावा, मेघालय की राजधानी शिलांग और बिहार का सीतामढी भी रैंकिंग में निचले पायदान पर हैं।

वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर ने लगातार सातवीं बार भारत के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता। इसके साथ इस साल गुजरात के सूरत ने भी अव्वल दर्जा हासिल किया है। दूसरे नबंर पर महाराष्ट्र का नवी मुंबई फिर आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम और उसके बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल है।

सर्वे में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को उच्चतम स्वच्छता मानकों वाले राज्य का दर्जा मिला। इसके उलट अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और नागालैंड को सबसे कम साफ राज्यों का तमगा मिला है। देश के राज्यों के छावनी बोर्ड में सफाई में आला बोर्डों में मध्य प्रदेश में महू छावनी बोर्ड ने स्वच्छता के लिए शीर्ष स्थान हासिल किया तो उत्तराखंड के नैनीताल छावनी रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर रही।

कालाराम मंदिर में की सफाई, देश को सौंपा अटल सेतु: नासिक से मुंबई तक PM मोदी ने सेवा, स्वच्छता और विकास की लिखी नई गाथा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को मुंबई में अटल सेतु का उद्घाटन किया। लगभग 17 हजार करोड़ रुपए की बने इस का शिलान्यास पीएम मोदी ने साल 2016 में किया था। इस पुल के शुरू हो जाने से मुंबई और नवी मुंबई के बीच की दूरी घटकर महज 20 मिनट की रह गई है। उद्धाटन के समय पीएम के साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैंस, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी मौजूद रहे।

2 घंटे की दूरी महज 20 मिनट में पूरी

पीएम मोदी ने मुंबई में जिस अटल बिहारी वाजपेयी शिवड़ी-न्हावा शेवा अटल सेतु का उद्घाटन किया है, उसे पहले मुंबई ट्रांसहार्बर लिंक (एमटीएचएल) का नाम दिया गया था। करीब 17,840 करोड़ रुपए की लागत से बना अटल सेतु भारत का सबसे लंबा पुल है। अभी तक दक्षिणी मुंबई से नवी मुंबई पहुँचने में 1.30 घंटे से 2 घंटे तक का समय लगता था, लेकिन इस पुल से यह दूरी 20 मिनट में हो जाएगी। इस पुल से औसतन 70 हजार वाहन हर दिन गुजरेंगे।

अटल सेतु से जुड़ी खास बातें…

अटल सेतु की लंबाई लगभग 21.8 किलोमीटर है। 6 लेन वाला यह समुद्री पुल 16.5 किलोमीटर समुद्र में और लगभग 5.5 किलोमीटर जमीन पर बना है। यह भारत का ना सिर्फ सबसे लंबा पुल है, बल्कि सबसे लंबा समुद्री पुल भी है। यह पुल मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ेगा। इससे मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाला समय भी बचेगा।

इससे मुंबई बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर बनेगा। अटल पुल पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटे तय की गई है। इस पर बाइक, ऑटो रिक्शा और ट्रैक्टरों को पुल से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। पुल पर ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए 8.5 किमी लंबा नॉइज बैरियर लगा है। साल 2018 से 5403 मजदूरों और इंजीनियरों ने इसमें काम किया है।

नवी मुंबई में 12,700 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में अटल सेतु का उद्घाटन करने के बाद नवी मुंबई पहुँचे। यहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने 12,700 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने ईस्टर्न फ्री-वे के ऑरेंज गेट को मरीन ड्राइव से जोड़ने वाली भूमिगत सड़क सुरंग की आधारशिला भी रखी।

प्रधानमंत्री रत्न और आभूषण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एसईईपीजेड एसईजेड में ‘भारत रत्नम’ और न्यू एंटरप्राइजेज एंड सर्विसेज टॉवर (एनईएसटी) 01 का भी उद्घाटन हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने रेल और पेयजल से संबंधित कई परियोजनाएँ राष्ट्र को समर्पित की। यही नहीं, पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण की दिशा के एक प्रयास में ‘नमो महिला सशक्तिकरण’ अभियान भी शुरू किया।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल यूथ फेस्टिवल का भी उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “आज भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चमक रहा है और दुनिया के शीर्ष-3 स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। आज भारत नवाचार की शक्ति और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में चमक रहा है। इन उपलब्धियों के पीछे हमारी युवा शक्ति है, हमारे युवाओं की क्षमताएँ हैं।”

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। उन्होंने नासिक में भगवान राम को समर्पित कालाराम मंदिर में जाकर पूजा अर्चना भी की। उन्होंने मंदिर की सफाई भी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो अयोध्या में रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले 11 दिनों तक व्रत रखेंगे और नियमों का पालन करेंगे।