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सेक्स नहीं करने देती है पत्नी, तलाक चाहिए: पति की याचिका पर बोला हाईकोर्ट- यह मानसिक क्रूरता, संबंध विच्छेद करने का माना वैध आधार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पत्नी का पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना क्रूरता है। कोर्ट ने कहा कि पति और पत्नी के बीच शारीरिक संबंध एक महत्वपूर्ण पक्ष है और पत्नी का लगातार पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना पति के लिए मानसिक या भावनात्मक पीड़ा का कारण बन सकता है। इस तरह का व्यवहार पति को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक माँगने का वैध आधार प्रदान करता है।

सुदीप्तो साहा बनाम मौमिता साहा केस की सुनवाई करते हुए जबलपुर में न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने भोपाल की एक पारिवारिक अदालत के फैसले को पलट दिया। पारिवारिक अदालत ने नवंबर 2014 के अपने फैसले में एक व्यक्ति के तलाक के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।

व्यक्ति ने तर्क दिया कि उसकी पत्नी का लंबे समय तक बिना किसी उचित कारण के यौन संबंध बनाने से इनकार कर देना मानसिक क्रूरता के समान है। हाईकोर्ट ने पति के इस दावे को स्वीकार करते हुए पारिवारिक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि इस तरह का व्यवहार हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार बनता है।

हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने 12 जुलाई 2006 को शादी के दिन से लेकर 28 जुलाई 2006 को पति के भारत से बाहर चले जाने तक लगातार संबंध बनाने से इनकार कर शादी को संपन्न नहीं होने दिया था। पीठ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बिना कोई वैध कारण बताए लंबे समय तक संभोग से दूर रहने के पत्नी के एकतरफा निर्णय की वजह से शादी कभी भी संपन्न नहीं हुई थी।

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि पत्नी ने पति के दावे का विरोध नहीं किया। नतीजतन, अदालत ने कहा कि पति की दलीलों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने पुरुष की दलील को तलाक माँगने योग्य माना। इस मामले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुखेंदु दास वर्सेज रीता मुखर्जी केस पर दिए गए फैसले का भी जिक्र किया।

कोर्ट ने बताया कि फैमिली कोर्ट ने यह कहकर फैसले में गलती की है कि पत्नी के शादी से इनकार करने को वैवाहिक बंधन को खत्म करने के लिए वैध आधार नहीं माना जा सकता है। इस दृष्टिकोण के विपरीत, उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में माना और पुष्टि की कि पत्नी द्वारा वैवाहिक कार्य में शामिल होने से इनकार करना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह को खत्म करने की माँग करने के लिए एक वैध और स्वीकार्य कारण है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी को इस बात की पूरी जानकारी थी कि पति शादी के तुरंत बाद भारत छोड़ देगा। इस जानकारी के बावजूद पत्नी ने उसके जाने से पहले सीमित समय के दौरान विवाह को पूरा करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, “इस अवधि के दौरान पति को शादी संपन्न होने की उम्मीद थी, लेकिन पत्नी ने इससे इनकार कर दिया और निश्चित रूप से यह कृत्य (पत्नी का) मानसिक क्रूरता के बराबर है।”

‘विधिवत संपन्न हो राम मंदिर का काज, आशीर्वाद…’ : 2 मठों के शंकराचार्यों ने प्राण-प्रतिष्ठा के लिए भेजी शुभकामनाएँ, ये महामंत्र जाप करने का संदेश

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले उल-जुलूल खबरों को फैलाने का कार्य किया जा रहा है। कैसे भी कोशिश है कि पूरे आयोजन पर सवाल खड़े हो सकें। इसी क्रम में बताया गया था कि देश के चारों शंकराचार्यों ने इस आयोजन से दूरी बना रहे हैं। अब इन्हीं खबरों को निराधार बताते हुए दो मठों के शंकराचार्यों ने राम मंदिर के लिए आयोजित कार्यक्रम के विधिवत सफलतापूर्व संपन्न होने की कामना की है।

द्वारका शारदापीठम के स्वामी सदानन्द सरस्वती के नाम पर फैलाई गई भ्रामक खबर

गुजरात के द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्या स्वामी सदानन्द सरस्वती ने इस संबंध में रामभक्तों के नाम संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी ओर से कोई वक्तव्य प्रसारित नहीं किया गया है। किसी समाचार पत्र में जो कुछ भी लिखा गया है वो महाराज की बिना आज्ञा के प्रसारित हुआ है और ये पूरी तरह भ्रामक है।

संदेश में कहा कि 500 साल बाद पूरा विवाद समाप्त हुआ है। सनातन धर्मावलम्बियों के लिए प्रसन्नता का अवसर है। महाराज चाहते हैं कि अयोध्या में होने वाली श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठता समारोह के सभी कार्यक्रम वेद शास्त्रानुसार, धर्म शास्त्रों की मर्यादा का पालन करते हुए विधिवत संपन्न हों।

श्रृंगेरी शारदा पीठम ने खारिज की खबर

वहीं श्रृंगेरी शारदा पीठम ओर से सूचना जारी करते हुए कहा गया कि अब जब 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होने वाली है उस समय कुछ धर्मद्वेषियों ने शंकराचार्य, जगद्गुरु भारतीतीर्थजी महाराज की फोटो इस्तेमाल करके झूठ फैलाने का काम किया है।

उन्होंने ऐसी खबर फैलाने के लिए साफ तौर पर दैनिक जागरण का नाम लिया है। साथ ही साफ कहा है कि श्रृंगेरी शंकराचार्य ने महोत्सव के विषय में किसी तरह का विरोध नहीं व्यक्त किया है।

उन्होंने इसे मिथ्या प्रचार कहा और लोगों से इस पर ध्यान न देने को कहा। उन्होंने बताया कि इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में तो बीती दीवाली के अवसर पर ही श्रृंगेरी जगदगुरु द्वारा समस्त आस्तिकों को श्रीराम तारक महामंत्र का जाप करने का संदेश दिया गया था।

श्रृंगेरी शंकराचार्य ने इस पावन अवसर पर आशीर्वाद दिया है कि अतिपावन और दुर्लभ इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के सुसंदर्भ में यथायोग्य भाग लिया जाए।

दैनिक जागरण ने झाड़ा पल्ला

दक्षिण पीठम की ओर से जारी सूचना के बाद दैनिक जागरण ने पोस्ट के नीचे सफाई दी है। पोस्ट में लिखा है कि दैनिक जागरण और इसकी साइट का ऐसे पोस्ट और पब्लिकेशन से कोई लेना देना नहीं है। जागरण ने गौर करवाते हुए कहा कि ये उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास है। संस्थान ने ऐसे पोस्ट को फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार की बात भी पोस्ट में कही है।

हिंदू साथी संग होटल में ठहरने पर मुस्लिम महिला को उठा ले गए जंगल, किया गैंगरेप: 7 में से 3 आरोपित गिरफ्तार, 1 अस्पताल में

कर्नाटक के हावेरी जिले में एक मुस्लिम महिला का गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। कुल 7 आरोपितों में से 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को इस संबंध में जानकारी दी। दरअसल, जिले के हंगल इलाके के एक होटल में मुस्लिम महिला अपने हिंदू पुरुष मित्र के साथ थी। इसको लेकर आरोपितों ने दोनों पर हमला कर दिया था।

इसके बाद आरोपितों ने होटल में महिला और पुरुष के साथ मारपीट की थी और बाद में महिला को अपने साथ बाइक पर बैठक एक जंगल में लेकर चले गए थे। वहाँ तीन अलग-अलग जगहों पर उनके साथ बारी बारी से गैंगरेप किया था। इसके बाद इनमें से तीन आरोपितों ने उसे कार में बैठाकर एक बस स्टैंड पर छोड़ दिया था। इसको लेकर कई वीडियो भी सामने आए हैं।

पहले वीडियो में मुस्लिम महिला और हिंदू पुरुष पर हमला करते हुए हमलावर दिख रहे हैं। इसमें वे उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे हैं। वहीं, दूसरी वीडियो में महिला के साथ एक जंगली क्षेत्र में बदतमीजी करने का वीडियो सामने आया है। तीसरी वीडियो में कार में महिला के साथ बदतमीजी का करते हुए आरोपित दिख रहे हैं, जबकि एक अन्य वीडियो में पीड़ित महिला इन पर गैंगरेप का आरोप लगाते दिख रही है।

वहीं, मामला दर्ज कर पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पीड़िता को मेडिकल कराया गया और उसका बयान दर्ज कराया गया। अपने बयान में पीड़ित ने बताया कि उसका अपहरण करने के बाद 7 लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। पीड़िता ने कहा कि इस दौरान आरोपितों ने उसे जान से मारने की कोशिश भी की।

दरअसल, इस मुस्लिम महिला ने अपने हिंदू पुरुष साथ के साथ 7 जनवरी 2024 को होटल में चेक इन किया था। इसके बाद आरोपितों को पता चला तो वे वहाँ पहुँच गए और इन लोगों से जबरन कमरा खुलवाया दोनों के साथ मारपीट की। इसका वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के संज्ञान में यह मामला आया।

इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज करके तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपितों में 24 साल का आफताब मकबुल अहमद चंदनकट्टी, 23 साल का मदारसाब मोहम्मद इसाक मंदक्की और 28 साल का ऑटो चालक अब्दुल खादर जाफर साब हंचिनमनी शामिल हैं। वहीं, चौथे आरोपित का अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक, चौथे आरोपित मोहम्मद सैफ सविकेरी की बाइक बालुर के पास एक गाड़ी के टकरा गई थी। इससे उसके पैर में चोट आई गई है। उसकी सर्जरी की जा रही है और ठीक होने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपितों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

जिले के एसपी अंशू कुमार ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ गैरकानूनी सभा, दंगा भड़काने, आपराधिक धमकी देने, चोट पहुँचाने और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से उनके खिलाफ हमला या आपराधिक बल प्रयोग के तहत दर्ज किया गया था। हालाँकि, महिला के बयान के बाद इसमें गैंगरेप का मामला भी जोड़ दिया गया है।

संशोधित एफआईआर 11 जनवरी 2024 को दर्ज की गई। होटल में काम करने वाले विनय क्यासानूर की शिकायत के आधार पर पहली FIR 10 जनवरी 2024 को दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिला और पुरुष पड़ोसी जिले के रहने वाले है और उनकी उम्र लगभग 30 से 40 साल के बीच है।

इस केस को लेकर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई कहा, “मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जो मॉरल पुलिसिंग के बारे में बहुत बात करते हैं, वे इस विशेष घटना पर चुप क्यों हैं? क्या इसलिए कि उपद्रवी अल्पसंख्यक समुदाय से थे? सिद्धारमैया इस घटना पर अपना रुख साफ करें।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इसे संजीदगी से लेने जा रहे हैं और मैं चाहता हूँ कि पुलिस इस पर स्वतंत्र रूप से और विवेकपूर्ण ढंग से काम करें। उन्हें तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन हर किसी को गिरफ्तार नहीं किया। तुरंत एक्शन लिया जाए किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए। चाहे वो सत्ता पक्ष से हो या विपक्षी पार्टी से”

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा, “लोगों में खौफ नहीं है। सीएम केवल राजनीति और लोकसभा चुनाव के बारे में सोच रहे हैं, लोगों के बारे में नहीं।” बीजेपी नेता सी.टी. रवि ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा, “कुछ मंत्री सोचते हैं कि अगर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य बलात्कार जैसे अपराध करते हैं तो यह ठीक है।”

‘जब तक एक भी हिन्दू व्यक्ति जीवित है… तब तक रहेगी माता सीता की कथा’ – क्यों स्वामी विवेकानंद बनना चाहते थे गिलहरी?

इतिहास साक्षी है कि पुण्यभूमि भारत की गाथा सहस्त्रों वर्षों के कठोर संघर्ष की गौरव गाथा है। इस शांतिप्रिय देश पर निरंतर कुठाराघात होने के कारण यहाँ के जनमानस में घोर निराशा छा गई थी। भारतवासियों का स्वाभिमान सो गया था। यह देश अपना गौरवशाली इतिहास, अपनी महान संस्कृति, अस्तित्व सब भूल बैठा था। परतंत्रता रूपी अंधकार में डूबे भारत में 12 जनवरी 1863 में बंगाल की भूमि पर एक ऐसे प्रकाशपुंज का आविर्भाव हुआ, जिन्हें संसार योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद के नाम से जानता है।

उनका समस्त जीवन भारत माता को समर्पित था। परिव्राजक संन्यासी से रूप में अनेकों कष्टों का सामना करते हुए उन्होंने पूरा भारत भ्रमण किया। कोने कोने में गए। लोगों से मिले और अपने देश को बहुत करीब से देखा। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य स्पष्ट हुआ। अतः भारत के सोए स्वाभिमान को जगाने हेतु वे विदेश की धरती पर पहुँचे। उन्होंने पूरी दुनिया में अपने महान सनातन धर्म, संस्कृति और दर्शन का लोहा मनवाया।

भारतीय आत्मा को अक्षुण्ण रखते हुए सार्वभौमिक विचारों से संवाद स्वामीजी की प्रमुख विशेषता थी। उन्होंने कहा था भारत एक बार फिर समृद्धि तथा शक्ति की महान ऊँचाइयों पर उठेगा और अपने समस्त प्राचीन गौरव को पीछे छोड़ जाएगा, भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा, जो पूरे संसार का पथ प्रदर्शन करने में समर्थ होगा। आज उनका यह कथन काफी हद तक सत्य होता दिखलाई दे रहा है। केवल भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व ही राममय हो गया है। प्रभु श्रीराम लला की प्राण-प्रतिष्ठा हेतु चराचर जगत उत्साहित है। रामराज्य की स्थापना से पूर्व ही भारत वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर अग्रसर हो चुका है।

स्वामी विवेकानंद और रामायण

स्वामी विवेकानंद ने विभिन्न अवसरों पर अपने व्याख्यानों में श्रीराम कथा के पात्रों विशेषकर श्रीराम, माता सीता और श्रीहनुमान आदि के चरित्र का बखान करते हुए मुक्त कंठ से उनकी प्रशंसा की। 2 सितंबर 1897 को मद्रास (अब के चेन्नई) के विक्टोरिया हॉल में उन्होंने कहा था:

“मैं बस राम के पुल के निर्माण में उस गिलहरी की तरह बनना चाहता हूँ, जो पुल पर अपनी थोड़ी सी रेत-धूल डालकर काफी संतुष्ट थी।”

इतना ही नहीं अपितु उन्होंने अपने द्वितीय विदेश प्रवास में 31 जनवरी 1900 को अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया स्थित शेक्सपियर क्लब में ‘रामायण’ शीर्षक पर व्याख्यान देते हुए सबको संक्षिप्त रामायण भी सुनाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि श्रीराम और माता सीता भारतीय राष्ट्र के आदर्श हैं।

इसके बाद 30 मार्च 1901 को अब के बांग्लादेश के ढाका में ‘मैंने क्या सीखा’ शीर्षक के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद कहते हैं, “जहाँ राम हैं, वहाँ काम नहीं है; जहाँ काम है, वहाँ राम नहीं हैं। रात और दिन कभी एक साथ नहीं रह सकते।”

माता सीता पर विवेकानंद के विचार

अपने मद्रास व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद कहते हैं, “सीता का चरित्र अद्वितीय है। यह चरित्र सदा के लिए एक ही बार चित्रित हुआ है। राम तो कदाचित अनेक हो गए हैं, किंतु सीता और नहीं हुईं।”

एक अन्य अवसर पर भी उन्होंने कहा था, “सीता विशिष्ट हैं, उनका चरित्र सभी के लिए आदर्श है। सीता सच्ची भारतीय स्त्री का उदाहरण हैं, सभी भारतीयों के लिए, एक परिपूर्ण स्त्री का आदर्श अकेली सीता के जीवन से निकलकर आता है। सम्भव है कि हमारा समस्त पौराणिक साहित्य लुप्त हो जाए, किन्तु फिर भी, जब तक एक भी हिन्दू व्यक्ति जीवित है, चाहे वह कितनी ही ग्राम्य बोली क्यों न बोलता हो, तब तक सीता की कथा रहेगी, मेरे इन शब्दों को आप याद रखें। सीता हमारी जाति के जीवनावश्यक तत्वों में सम्मिलित हैं। वह प्रत्येक हिन्दू पुरुष और स्त्री के रक्त में हैं। हम सब सीता की ही सन्तान हैं।”

हनुमान भक्त स्वामी विवेकानंद

बाल्यकाल से ही स्वामी विवेकानंद को ध्यान लगाना अतिप्रिय था। लगभग 4-5 वर्ष की आयु में ही वे माता सीता, श्रीराम और महादेव की मिट्टी की मूरत पर फूल अर्पित कर ध्यानमग्न हो जाया करते थे। उन्होंने स्वयं एक बार अपने शिष्य शरतचंद्र चक्रवर्ती को बताया था कि बचपन में जब भी यह ज्ञात होता कि आस पड़ोस में कहीं निपुण गायकों की मण्डली रामायण का पाठ करने वाली है, तो वह अपना खेल आदि छोड़कर उसमें उपस्थित हो जाते थे।

हनुमान जी महाराज पर उनकी आस्था इतनी प्रगाढ़ थी कि लोक मान्यता के अनुसार यह सुनकर कि हनुमान जी को कदली (केला) वनों में ढूंढा जा सकता है, वे उत्साहित होकर अपने घर के समीपस्थ एक केले के उद्यान में रात भर उनके दर्शन की लालसा से बैठे रहे। स्वामीजी की यह हार्दिक इच्छा थी, “प्रत्येक भारतीय के घर में महावीर हनुमान की पूजा का अनुष्ठान किया जाना चाहिए। ऐसा करने से मानव मन की आत्मशक्ति जागृत की जा सकेगी।”

स्वामी विवेकानंद ने भारत में विघटित होते जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए युवा पीढ़ी पर ही सबसे अधिक भरोसा किया था। वे कहते हैं, “अपने महिमावान अतीत को मत भूलो। स्मरण करो… हम कौन हैं? किन महान पूर्वजों का रक्त हमारी नसों में प्रवाहित हो रहा है? एक ऐसे महान भारत की नींव रखो जो विश्व का पथप्रदर्शन कर सके।”

तत्कालीन समाज को दिया गया स्वामी विवेकानंद का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है। अब समय आ गया है कि देश का युवा उसी सेवा, समर्पण और भक्ति से अपनी भारत माता के लिए कार्य करे, जिस निष्ठा से हनुमान जी ने अपने आराध्य श्रीराम का कार्य किया। उसी उत्साह से देश के पुनरुत्थान में योगदान दें, जैसे गिलहरी ने दिया था।

युगों से इस राष्ट्र के आदर्श और महापुरुषों के प्रेरणास्रोत मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम और माता सीता ही रहे हैं। राम मंदिर का बनना हर सनातनी के लिए गर्व का विषय है परन्तु इस दिव्य क्षण के लिए किए गए वर्षों के संघर्ष को हमें भूलना नहीं है और इसके संरक्षण हेतु हमें अपनी जड़ों को सींचना होगा अर्थात अपने पवित्र ग्रंथों का पठन-पाठन तथा चिंतन-मनन करना होगा।

Merry Christmas vs Hanu Man: विजय सेतुपति-कैटरीना कैफ पर भारी पड़ रहे तेजा सज्जा! दर्शकों ने हनुमान को बताया सुपर डुपर

इस सप्ताह हिंदी बेल्ट में दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई हैं। इसमें मेरी क्रिसमस और हनु मान हैं। दोनों ही फिल्में 12 जनवरी 2024 को रिलीज़ हुई हैं। खास बात ये है कि समीक्षकों से दोनों ही फिल्मों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। हालाँकि, दर्शकों की प्रतिक्रिया हनुमान के पक्ष में ज्यादा आ रही हैं। दर्शक हनुमान फिल्म की खूब तारीफ कर रहे हैं।

खास बात ये है कि फिल्म मेरी क्रिसमस में एक तरफ मँझे हुए निर्देशक और एक्टर हैं तो दूसरी तरफ हनुमान फिल्म में एक अनजाना-सा कई चेहरे नजर आ रहे हैं। ऐसे में कम बजट और कम चर्चा के बावजूद हनुमान फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ पर भारी पड़ती दिख रही है।

कैसी फिल्म है मेरी क्रिसमस?

इस सप्ताह तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय सेतुपति और बॉलीवुड की महिला सुपरस्टार कैटरीना कैफ की एक फिल्म आई है, जो औसत बॉलीवुडिया फिल्मों से बहुत बेहतर है। इस फिल्म का नाम ‘मेरी क्रिसमस’ है। इसी नाम से 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में ईसाई लोग अपना त्यौहार मनाते हैं। इस फिल्म के डायरेक्टर हैं श्रीराम राघवन, जो अपनी थ्रिलर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। राघवन की फिल्में ऐसी होती हैं कि अगले सीन का अंदाजा कोई लगा नहीं पाता। मेरी क्रिसमस में भी वो ऐसा करने में कामयाब रहे हैं।

राघवन को साथ मिला है सबसे बेहतरीन एक्टर्स में शुमार विजय सेतुपति का, जो अब बॉलीवुडिया फिल्मों के लिए कोई अनजान चेहरा नहीं हैं। वहीं, कैटरीना कैफ तो खैर हैं ही बेहद असरदार। वैसे, ये फिल्म 2022 के क्रिसमस पर ही रिलीज होने वाली थी। उसके बाद 2023 में नई तारीख आई, लेकिन अब मकर संक्रांति से दो दिन पहले रिलीज हुई है।

हनुमान में रचा गया है कैसा संसार?

अब बात करते हैं हनुमान की। ये फिल्म डायरेक्टर प्रशांत वर्मा ने मूलत: तेलुगू में बनाई है। ये फिल्म हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, अंग्रेजी, स्पेनिश, कोरियन, जापानी और मंदारिन (चीनी) सहित 11 भाषाओं में एक साथ रिलीज हुई है। इस फिल्म में लीड रोल में हैं तेजा सज्जा, जो बहुत कई सारी फिल्मों में बाल अभिनेता के तौर पर काम कर चुके हैं। हनुमान के बारे में सबसे पहले ये जान लें कि ये फिल्म हनुमान जी की शक्तियों से प्रेरित होकर ही बनाई गई है। प्रशांत वर्मा ने इसे पहला फुल सुपरहीरो सिनेमा करार दिया है।

प्रशांत वर्मा अपना सिनेमैटिक यूनिवर्स खड़ा करना चाहते हैं, जिसमें कई सुपर हीरो होंगे। तो पहले सुपर हीरो के तौर पर हनुमंत के रोल में तेजा सज्जा आ चुके हैं। ये फिल्म बेहतरीन सिनेमैटिक फील देने वाली है। गानों के नाम पर कूड़ा नहीं ठूँसा गया है। यह गंभीरता के साथ बनाई गई फिल्म लगती है। हनुमान चालीसा को री-क्रिएट किया गया है। वीएफएक्स का शानदार इस्तेमाल किया गया है। दर्शकों को भी ये फिल्म खूब पसंद आ रही है।

क्यों भारी पड़ रहे हनुमान के तेजा सज्जा ?

अब बात करते हैं कि क्यों हनुमान की चर्चा ज्यादा है। सबसे पहले तो हनुमान फिल्म बच्चों के साथ ही बड़ों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। पूरा देश अभी राममय है। ऐसे में भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान कोई फिल्म आ रही है तो जाहिर है लोग एक बार देखना चाहेंगे। दूसरा, इस फिल्म को यूनिवर्सल यानि यू सर्टिफिकेट दिया गया है, जो पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है।

इस फिल्म को न ही एनिमेशन मूवी कह सकते हैं और न ही पूर्णत: धार्मिक। ऐसे में इस फिल्म के सामने एक बड़ा बाजार है। हालाँकि, फिल्म का उतना प्रचार-प्रसार नहीं हुआ है, जितना कि होना चाहिए। वैसे, इस फिल्म के हर टिकट पर 5 रुपए अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण के लिए जाएँगे।

वहीं, मेरी क्रिसमस फिल्म में कोई कमीं नहीं दिखती है। पर ये फिल्म एक खास जॉनर की है। इस फिल्म को विजय सेतुपति और कैटरीना कैफ का हार्डकोर फैन भी अवॉइड करेगा। श्रीराम राघवन की फिल्मों की जो खास यूएसपी होती है, फिल्म उसी तरह की है। ऐसे में इस फिल्म को बच्चों के साथ नहीं देख सकते। आम तौर पर ऐसी फिल्में बनती भी हैं तो मल्टीप्लेक्स के दर्शकों को ध्यान में रखकर। ऐसे में मेरी क्रिसमस से किसी को बहुत बड़े बॉक्स ऑफिस धमाके की उम्मीद भी नहीं है।

ये दोनों ही फिल्में लंबा बिजनेस करने वाली हैं। अगले सप्ताह कोई बड़ी फिल्म आती हुई नहीं दिख रही है, सिवाय राजनीतिक फिल्म ‘मैं अटल हूँ’ के। आम तौर पर ऐसी फिल्मों के दर्शक खास वर्ग के होते हैं। हालाँकि, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर बनी फिल्म बड़े दर्शकों के लिए नहीं होगी। ऐसे में 25 जनवरी तक दोनों फिल्मों के पास खूब समय है। अब देखना ये है कि बॉक्स ऑफिस की दौड़ पर कौन भारी पड़ता है।

विजय सेतुपति और कटरीना कैफ की “मेरी क्रिसमस” और सज्जा तेजा की “हनुमान” के बीच बॉक्स ऑफिस पर उलटफेर देखने को मिल सकता है। “मेरी क्रिसमस” को फिल्म समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं कर पाई है। “मेरी क्रिसमस” एक अच्छी तरह से बनाई गई फिल्म है, लेकिन खास जॉनर की फिल्म होने की वजह से इसकी अपनी सीमाएँ हैं।

दूसरी ओर, “हनुमान” को फिल्म समीक्षकों से भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह “मेरी क्रिसमस” से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रही है। दर्शकों का कहना है कि “हनुमान” एक मनोरंजक फिल्म है, जिसमें सज्जा तेजा का दमदार अभिनय है। फिल्म में एक्शन और ड्रामा का अच्छा मिश्रण है।

वैसे, एक बात जोड़ना शायद रह गया था कि ये दोनों फिल्में भले ही तमिल-तेलुगू को मूल में रखकर बनी हैं, पर इन्हें अपने मूल बाजार से बाहर ही कमाई के लिए देखना पड़ेगा। दरअसल, मेरी क्रिसमस फिल्म को हिंदी और तमिल में एक साथ अलग-अलग स्टारकास्ट के साथ शूट किया गया है। वहीं, हनुमान मूल रूप से तेलुगू में शूट की गई है, पर दोनों ही फिल्मों को बड़े सुपरस्टार्स से टक्कर मिल रही है।

विजय सेतुपति की मेरी क्रिसमस को धनुष की फिल्म ‘कैप्टन मिलर’ से कड़ी टक्कर मिलने जा रही है तो तेलुगू सिनेमा बॉक्स ऑफिस पर महेश बाबू की फिल्म ‘गुंटूर कारम’ के छाने की संभावनाएँ हैं। इसे वेंकटेश की फिल्म ‘सैंधव’ से भी टक्कर मिलने वाली है। इसकी रिलीज डेट 13 जनवरी की है। ऐसे में दोनों ही फिल्मों को बिजनेस के लिए हिंदी पट्टी की तरफ ही देखना पड़ रहा है।

हाथ पकड़े, बाल खींचे, गर्दन झुकाई और काट दिया… खच्च… तस्वीरों के सहारे है वो माँ जिसके बेटे को बकरा काटने वाले चाकू से काट दिया

23 साल का अंकित सक्सेना आपको याद है? वही अंकित सक्सेना जिनकी फरवरी 2018 में हुए दिल्ली के रघुबीर नगर इलाके में निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के तीन साल बाद अंकित के पिता भी चल बसे। अब इसी मोहल्ले के अपने घर में उनकी माँ दो तस्वीरों (बेटे और पति की) के सहारे अपनी जिंदगी काट रही हैं। हर समय सीसीटीवी पर नजर बनी रहती है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए।

इस मामले में दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने पिछले दिनों अकबर अली, सलीम और शहनाज को दोषी करार दिया था। इनको 15 जनवरी 2024 को सजा सुनाई जाएगी। इस मामले में एक नाबालिग बाल सुधार गृह में है। अकबर और शहनाज उस शहजादी के अम्मी-अब्बा हैं, जिसके साथ कथित प्रेम संबंधों के कारण फोटोग्राफर अंकित सक्सेना की सरेराह गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। वहीं एक अन्य दोषी सलीम, शहजादी का मामा है।

रघुबीर नगर के उस घर तक पिछले दिनों आज तक की रिपोर्टर पहुँची थी, जिसमें रहने वाली महिला (अंकित सक्सेना की माँ) का जीवन दो तस्वीरों के सहारे चल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रिपोर्टर जब संकरी सीढ़ियों से होते हुए इस घर की ड्राइंगरूम में पहुँचती है तो सामने ही अंकित की मुस्कुराती हुई बड़ी सी तस्वीर नजर आती है। इसके ठीक बगल में उनके पिता की तस्वीर लगी थी, जिनका निधन कोविड काल में हो गया था। पास ही में सीसीटीवी स्क्रीन लगी हुई थी। अंकित के एक रिश्तेदार ने बताया, “अकेली रहती हैं। मामला पेचीदा है। पास ही माइनोरिटी बस्ती है। हर कोई इन्हें जानता है। हमने ही जिद कर कैमरा लगवा दिया। बाकी पड़ोसी तो हैं ही। कोई खटका हुआ तो देख लेंगे।”

जब 1 फरवरी 2018 (जिस रात अंकित सक्सेना की हत्या हुई) को हुई घटना के बारे में रिपोर्टर पूछती है तो अंकित की माँ कमलेश बताती हैं कि रात के करीब आठ बजे थे। काम से लौटकर अंकित घर आता है। बैग रहकर बाहर चला जाता है। वह खाने की तैयारियों में लगी थीं। इसी समय एक लड़का दौड़ते हुए उनके घर आता है और बताता है कि गली में अंकित की कुछ लोगों से लड़ाई हो गई हैं। अपनी इकलौती संतान को खो चुकी माँ बताती हैं, “मैं भागती हुई नीचे गई तो देखा कि हमारे पुराने पड़ोसी गाली-गलौज कर रहे थे। चिल्ला रहे थे कि बता, हमारी बेटी को कहाँ छिपा रखा है। मेरा बेटा लगातार बोले जा रहा था- आंटी मुझे शहजादी का नहीं पता। आप पुलिस को बुलवा लीजिए। मैं यहीं खड़ा रहूँगा।”

अंकित की माँ के अनुसार जब उन्होंने बीच-बचाव की कोशिश की तो शहजादी की अम्मी उन पर टूट पड़ी। गाली देते हुए मारपीट करने लगी। वह कहती हैं, “अंकित मुझे बचाने आया तो लड़की के भाई और मामा ने उसके हाथ पकड़ लिए। पीछे से उसके पापा आए। मेरे बेटे का बाल खींचकर उसकी गर्दन अपनी ओर झुकाई और चाकू (बकरा काटने वाला चाकू) से काट दिया। खच्च। एक ही झटके में। जैसे पूरी प्लानिंग करके आए हों।”

अंकित की माँ के अनुसार उन्हें अपने बेटे और शहजादी के रिश्ते के बारे में कुछ पता नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि अपने परिजनों को बचाने के लिए शहजादी कोर्ट में मुकर भी गई थी। उल्लेखनीय है कि कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने घटनाओं को सिलसिलेवार तरीके से सामने रखा और हत्या की प्लानिंग की पूरी जानकारी कोर्ट के सामने रखी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दायर चार्जशीट में यह स्पष्ट किया था कि हत्या पूर्व नियोजित थी। इस बात का भी पता चला कि लड़की का परिवार हिंदू लड़के से प्रेम करने के कारण उसके साथ सख़्ती से पेश आ रहा था। शहजादी का अब्बा कसाई का काम करता था और इस मामले में प्रयुक्त हथियार भी बरामद हो गया था।

अयोध्या का महंत दुष्कर्म केस में गिरफ्तार: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले खबर को लोग कर रहे वायरल – सनातन को बदनाम करने की साजिश या फेक न्यूज, जानिए सच

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन जिस तरह नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे विरोधी दल लगातार सनातन धर्म को बदनाम करने में लगे हैं। इसी क्रम में खोज-खोजकर पुरानी खबरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं। हाल में देखा गया कि एक अयोध्या के एक महंत के गिरफ्तार होने की खबर फैलाने का काम हुआ।

खबर की हेडलाइन है- अयोध्या के चंद्रहरि मंदिर का महंत कृष्णकांताचार्य दुष्कर्म में गिरफ्तार।

इस खबर की तस्वीर को उस प्रतीक पटेल ने शेयर किया है जो खुद को ओबीसी समाज की आवाज बताता है।

प्रतीक पटेल ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले फैलाई पुरानी खबर

उसके एक्स अकॉउंट पर मौजूद जानकारी से पता चलता है कि उसका झुकाव जदयू की तरफ है। उसके बायो में उसने खुद को नीतीश कुमार का सैनिक बता रखा है और जनता दल यूनाटिड में खुद को सोशल एक्टिविस्ट कहा है।

प्रतीक पटेल का एक्स अकॉउंट पर मौजूद जानकारी

इस खबर को खुद को विचारक, इतिहास पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता, मानवतावादी, समाजवादी, कर्पूरीवादी, मंडलवादी, अंबेडकरवादी बताने वाले और नीतीश सरकार के प्रति खास झुकाव रखने वाले भानू नंद ने भी बड़ी चालाकी के साथ इस खबर को फैलाने का काम किया।

भानू नंद का एक्स पर बायो

भानू नंद ने पोस्ट में लिखा, “खबरदार जो किसी ने कुछ उल्टा सीधा लिखा! अंधभक्तों की भावनाएँ बहुत जल्दी आहत हो जाती हैं, हम उनकी भावनाओं का पूरा ख्याल रखेंगे। क्या आप लोग उनकी भावनाओं का ख्याल रखेंगे?”

तथाकथित बुद्धिजीवी की हरकत

अपने आपको वकील बताने वाले शैलेश वर्मा ने इस खबर को साझा करते हुए लिखा- “मामला अयोध्या के महंत कृष्णकांतचार्य का है जिनकी उम्र लगभग 60 वर्ष है। इस मामले में अंधभक्तों की भावनाएं कभी आहत नही होंगी क्योंकि अंधभक्तों के घर वाले ही ऐसे बाबाओं को ज्यादा पसंद करते है। अब रामराज स्थापित हो रहा है तो सारे भक्त चुप्पी मार जाएँगेl”

वरिष्ठ वकील बताने वाले शैलेश ने फैलाई पुरानी खबर

5 साल पुरानी खबर की जा रही प्राण-प्रतिष्ठा से पहले शेयर

तमाम कुत्सित मानसिकता के लोग हैं जो राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले इस खबर से ऐसा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि जिस अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, वहाँ वर्तमान समय में महंत पद पर पैदा शख्स बलात्कार मामले में गिरफ्तार हो रहा है। नीचे खबरों की तारीख देख सकते हैं कि सारी 1 जनवरी 2019 की है।

जबकि, हकीकत तो यह है कि ये मामला साल 2018-19 का है, जिसे घटिया मंशा के साथ आज के समय में प्रासंगिक बनाकर पेश करने का प्रयास हो रहा है। ऐसी हरकतों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर अयोध्या पुलिस को शिकायत दी जा रही है। कहा जा रहा है कि 5 साल पुरानी तस्वीरें अभी किस खास मकसद से शेयर हो रही हैं इसका पता लगाया जाए और माहौल खराब करने में जुटे लोगों पर एक्शन हो।

26 साल की ‘कच्ची उम्र’ का मर्द, लड़की 13 साल की… महिला जज ने इनके बीच सेक्स को नहीं माना वासना, कहा प्रेम में बने यौन संबंध

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने 13 साल की एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार शख्स को जमानत दे दी। कोर्ट ने तर्क दिया कि नाबालिग लड़की के साथ 26 वर्षीय आदमी ने इसलिए यौन संबंध बनाए, क्योंकि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था, ना कि वासना। वहीं, विरोधी पक्ष ने कहा कि चूँकि लड़की नाबालिग है, इसलिए यौन संबंधों के लिए उसकी सहमति कोई मायने नहीं रखती।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के ने कहा कि मौजूदा हालात में लड़की नाबालिग थी, फिर भी पुलिस को दिए गए बयान में लड़की ने अपनी मर्जी से माता-पिता का घर छोड़ा था। नाबालिग लड़की ने पुलिस को दिए गए बयान में आरोपित व्यक्ति के साथ अपने ‘प्रेम संबंध’ को स्वीकार किया था।

अदालत ने यह भी कहा कि नाबालिग लड़की आरोपित के साथ विभिन्न स्थानों पर रही और उसने कोई शिकायत नहीं की कि उसे जबरदस्ती ले जाया गया। कोर्ट ने आगे कहा कि इससे स्पष्ट है कि नाबालिग प्रेम संबंधों के कारण आरोपित के साथ गई, जो कि 26 साल की कच्ची उम्र (Tender Age) का है। ऐसे प्रेम संबंधों के कारण वे एक हो गए।

जस्टिस जोशी फाल्के ने कहा, “आवेदक की 26 साल की कच्ची उम्र का है और प्रेम संबंध के कारण वे एक साथ आए। ऐसा लगता है कि यौन संबंध की कथित घटना दो युवाओं के बीच आकर्षण के कारण है और ऐसा नहीं है कि आवेदक ने ऐसा ‘वासना के कारण पीड़िता पर यौन हमला किया’।”

वहीं, लड़की पक्ष ने कहा कि आरोपित नाबालिग लड़की के पड़ोस में रहता था और जिस समय यह घटना हुई उस समय वह सिर्फ 13 साल की थी। दरअसल, 23 अगस्त 2020 को लड़की अपने सहपाठी से किताब लाने के बहाने घर से निकली, लेकिन वह लौटकर नहीं आई। परिजनों ने आसपास खोजा, लेकिन उसका पता नहीं चला।

थक-हारकर नाबालिग के परिजनों ने अमरावती जिले के अंजनगाँव सुर्जी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में FIR दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित शख्स के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार और POCSO के तहत मुकदमा दायर कर लिया। पुलिस जाँच में पता चला कि लड़की आरोपित के साथ घर से भागी है और दोनों बेंगलुरु में रह रहे हैं।

आखिरकार पुलिस ने आरोपित को 30 अगस्त 2020 को गिरफ्तार कर लिया गया। तब से वह हिरासत में था। वहीं, आरोपित ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की सुनवाई के दौरान दलील दी कि लड़की ने अपनी मर्जी से घर छोड़ा था और यौन संबंध बनाने में कोई जबरदस्ती नहीं हुई।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने दलील दी कि मामला जघन्य है, क्योंकि वो नाबालिग है। इसलिए यौन संबंध के लिए उसकी सहमति अमान्य है। हालाँकि, न्यायालय ने इन तथ्यों को ध्यान में रखा और यह भी कहा कि मुकदमे में अभी कोई प्रगति नहीं हुई। हालाँकि, इस मामले में आरोप पत्र साल 2020 में ही दायर किया गया था।

एक तरफ पकड़ौआ ब्याह, दूसरी ओर प्रेम विवाह वाले बेटी-दामाद-नातिन की एक साथ हत्या: कितना ढोंगी है बिहार का समाज

बिहार में प्यार करके शादी करने, घर बसाने के लिए सजा के तौर पर न सिर्फ पति-पत्नी को मौत की नींद सुलाई जाती है बल्कि 2 साल की उनकी बेटी को भी मार डाला जाता है। वहीं दूसरी ओर लड़के को उठा कर जबरन किसी लड़की से पकड़ौआ विवाह करा देना इसी समाज को स्वीकार हो जाता है। बिहार के जमुई और नौगछिया के हालिया मामले यहाँ के समाज के दोहरे रवैये की ओर इशारा करते हैं।

भागलपुर जिले के नौगछिया में तीन साल बाद चंदन कुमार की उसके ससुर ने पूरे परिवार सहित इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उन्होंने उनकी बेटी के साथ प्यार करने के बाद शादी कर परिवार बसाया था। उधर दूसरी तरफ जमुई में BPSC शिक्षक मुकेश कुमार वर्मा का पकड़ौआ विवाह करा डाला।

समाज का ये कैसा रवैया है? यहाँ एक लड़की का परिवार मना करने वाले शख्स से जबरन अपनी बेटी का विवाह करवा कर खुश हो जाता है, लेकिन उनकी बेटी से प्यार कर शादी करने वाले दामाद के खून का प्यासा हो जाता है।

नवगछिया में चंदन कुमार नाम के दामाद को उनके ससुर पप्पू सिंह ने बेटी चांदनी और दो साल की नातिन सहित मौत के घाट उतार डाला। पप्पू सिंह ने चंदन के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया और इसके बाद उसने बेटे धीरज कुमार को बुलाकर तीनों पर गोलियाँ बरसा दीं।

इस मामले में साल 2021 में चांदनी और चंदन दोनों गाँव से चले गए थे और दोनों ने शादी कर ली थी। तीन साल बाद चंदन अपने बीमार पिता को देखने परिवार सहित गाँव लौटे थे। इसी दौरान अपने नए घर वापस जाते समय उनके सुसराल वालों ने पूरे परिवार को मौत की सजा दी।

चंदन के बड़े भाई केदार नाथ सिंह ने कहा, “मेरे भाई को चांदनी से प्यार हो गया और उसने उससे शादी कर ली। वो दोनों एक साथ खुश थे। गोली लगने से कुछ देर पहले मेरा भाई, उसकी पत्नी और उनकी बेटी हमारे बीमार पिता को देखने आए थे। मेरी भाभी के पिता और भाई ने उन्हें मार डाला और मौके से भाग गए।”

इस घटना पर नौगछिया के एसपी सुशांत कुमार सरोज ने कहा कि दोनों ने 2021 में भागकर शादी कर ली थी क्योंकि चांदनी के परिवार ने उनके रिश्ते को कभी मंजूरी नहीं दी थी। दोनों एक ही गाँव के थे और दोनों को 20 साल की उम्र में एक-दूसरे से प्यार हो गया था। पुलिस के अनुसार उन्हें 11 जनवरी 2024 की शाम 4 बजे इस हत्याकांड की खबर मिली।

दूसरी घटना बिहार के ही जमुई जिले के गिद्धौर की है। यहाँ बुधवार (10 जनवरी, 2024) की रात गिद्धौर के ऐतिहासिक पंच शिव मंदिर में गाँव वालों ने BPSC शिक्षक मुकेश कुमार वर्मा का पकड़ौआ विवाह करा डाला।

जानकारी के मुताबिक, चकाई प्रखंड के बेलदारी गाँव के रहने वाले सत्यनारायण वर्मा के पुत्र मुकेश की दो साल पहले पूर्णिमा कुमारी उर्फ सपना नाम की लड़की से शादी तय हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों साल 2015 से एक-दूसरे के प्यार करते थे। इसी वजह से परिवार वालों ने दोनों के विवाह का फैसला लिया था। लेकिन अब BPSC शिक्षक मुकेश कुमार वर्मा का पकड़ कर विवाह कर दिया गया… मतलब बिहारी शब्दावली में उनका पकड़ौआ विवाह किया गया।

मुकेश 2023 में बीपीएससी परीक्षा पास कर गिद्धौर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बनझुलिया में सहायक शिक्षक बन गए। प्रेमिका पूर्णिमा का आरोप है कि इसी के बाद से मुकेश बदल गए। उनके अनुसार पहले घंटों बातें करने वाले मुकेश ने उनका फोन उठाना ही बंद कर दिया।

पूर्णिमा का कहना है कि मुकेश की शादी तोड़ने की जिद पर कई बार गाँव में पंचायत बुलाई गई, लेकिन वो शादी करने के लिए नहीं माने। प्रेमिका ने ये भी बताया कि दिसंबर 2023 में सुबूतों के साथ उसने पुलिस में मुकेश के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मजबूर होकर घरवालों ने बुधवार की रात मुकेश को पकड़कर पंच शिव मंदिर में हिंदू रीति रिवाज से उनकी शादी करा दी। दोनों की शादी का वीडियो वायरल है। इसमें मुकेश कह रहे हैं, “मुझे मार दीजिए, ये हमको ब्लैकमेल कर रही थी फोटो रखने की वजह से और अभी जब जॉब लगा तो शादी करने के लिए मेरे पीछे पड़ गई है।”

वो आगे कहते हैं, “2018 का फोटो दिखा रहा। आप लोगों को वही फोटो दिखा-दिखा कर हमें ब्लैकमेल किया। वो बर्थडे का फोटो था। हम इसके साथ खुश नहीं हैं। जबरदस्ती शादी करा भी देंगे तो कोई फायदा नहीं।”

व्रत, नियम और कठोर तपस्या… राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले PM मोदी करेंगे 11 दिन का अनुष्ठान: नासिक के पंचवटी से होगा आरंभ, जानें क्या है इसका महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पूरे 11 दिन पहले एक संदेश जारी किया है। इस संदेश में उन्होंने बताया कि वो मंदिर में रामलला की प्रतिष्ठा से पहले 11 दिन का अनुष्ठान करने जा रहे हैं। इस दौरान वह कुछ नियमों का पालन करेंगे। उनके इस अनुष्ठान की शुरुआत नासिक के पंचवटी से होगी जहाँ भगवान श्रीराम ने काफी समय बिताया था।

नमो एप पर अपना संदेश जारी करते हुए उन्होंने कहा, “प्रभु ने मुझे प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए मैं आज से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान आरंभ कर रहा हूँ और मैं सभी जनता-जनार्दन से आशीर्वाद का आकांक्षी हूँ।”

प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, “इस समय मेरे लिए अपनी भावनाओं को शब्दों में कह पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन मैंने अपनी तरफ से एक प्रयास किया है…हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ईश्वर के यज्ञ के लिए स्वयं में भी दैवीय चेतना जगानी होती है। इसके लिए व्रत और कठोर नियम बताए गए हैं। जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा से पहले पालन करना होता है। इसलिए, आध्यात्मिक यात्रा की कुछ तपस्वी आत्माओं और महापुरुषों से मुझे जो मार्गदर्शन मिला है, उन्होंने जो यम-नियम सुझाए हैं, उसके अनुसार ये अनुष्ठान करूँगा।

पीएम ने बताया कि उनका ये अनुष्ठान नासिक के पंचवटी से आरंभ होगा। उन्होंने कहा, “मेरा ये सौभाग्य है कि 11 दिन के अपने अनुष्ठान का आरंभ, मैं नासिक धाम-पंचवटी से कर रहा हूँ। पंचवटी, वो पावन धरा है, जहाँ प्रभु श्रीराम ने काफी समय बिताया था।”

अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने माँ हीराबेन को याद किया जो हमेशा राम नाम जपती रहती थीं। इस दौरान उन्होंने आज के दिन स्वामी विवेकानंद और जीजाबाई की जयंती होने को भी सुखद संयोग बताया।

नासिक के पंचवटी से होगा अनुष्ठान की शुरुआत, क्यों हैं इसका महत्व

पंचवटी महाराष्ट्र के नासिक में स्थित जगह है। जब भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उन्होंने कुछ समय इस जगह भी गुजारा था। आज यहाँ कालाराम मंदिर है जहाँ बड़े-बड़े बरगद के पेड़ हैं। माना जाता है कि सारे बरगद के पेड़ पाँच बरगद के पेड़ों से उत्पन्न हुए थे, इसलिए इस जगह का नाम पंचवटी रखा गया। इस शब्द में पंच तो 5 संख्या के लिए इस्तेमाल होता है जबकि वटी बरगद के पेड़ के लिए प्रयोग होती है। इसके अलावा इस जगह कहा जाता है कि माता की गुफा भी स्थित है।

इस जगह कालाराम मंदिर के अलावा कपालेश्वर मंदिर, गंगागोदावरी मंदिर, सुंदर नारायण मंदिर, तालकुटेश्वर मंदिर, नीलकंठेश्वर गोराराम मंदिर, मुरलीधर मंदिर, तिलभांडेश्वर मंदिर समेत बहुत सारे मंदिर हैं। इन मंदिरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि लोग इसे पश्चिमी भारत का काशी कहते हैं। कात्या मारुति मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, भद्रकाली मंदिर, कटपुरथला स्मारक भी पंचवटी और इसके आसपास के इलाकों में स्थित हैं।

पीएम मोदी अनुष्ठान के दौरान करेंगे व्रत

बता दें कि प्रधानमंत्री अपनी दिनचर्या में ब्रह्ममुहूर्त में जगना, साधना करना, सात्विक आहार करना जैसे नियमों का पालन करते हैं। लेकिन ये जो 11 दिन का अनुष्ठान वह करने वाले हैं उससे पहले उन्होंने बताया है कि इस दौरान वह शास्त्रों में बताए व्रत और कठोर नियमों का भी पालन करेंगे।