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3 साल में ₹60 लाख की मदद: इस योजना के जरिए रिसर्च के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ा रही मोदी सरकार, फेलोशिप से लेकर ग्रांट्स तक की है व्यवस्था

वैज्ञानिक रिसर्च की दुनिया में लैंगिक असमानता सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चुनौती का विषय रहा है। लेकिन भारत सरकार अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के SERB (Science and Engineering Research Board) द्वारा संचालित POWER (Promoting Opportunities For Women in Exploratory Research) स्कीम इस परिस्थिति को बदलने की पुरजोर कोशिश कर रही है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को वैज्ञानिक रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कई ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

भारत सरकार द्वारा साल 2020 से चलाई जा रही SERB-POWER योजना का उद्देश्य भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इन योजनाओं के तहत महिला वैज्ञानिकों को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए उन्हें इंटरनेशनल सेमिनारों और वर्कशॉप में हिस्सा लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व करने के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

भारत सरकार के SERB POWER योजनाओं के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिसमें SERB POWER स्कीम के तहत SERB POWER Fellowship और SERB POWER Research Grants शामिल हैं। आइए, अब इनके बारे में विस्तार से जान लीजिए।

SERB-POWER फेलोशिप (SERB-POWER Fellowship) : यह फेलोशिप महिला वैज्ञानिकों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करती है। इसके तहत साइंस और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में Ph.D धारक महिला वैज्ञानिकों की पहचान कर उन्हें फेलोशिप प्रदान की जाएगी। इसमें महिला वैज्ञानिक का सक्रिय वैज्ञानिक, साथ ही अच्छा शोध रिकॉर्ड होना जरूरी है। ये फेलोशिप फुल टाइम है और इसके साथ किसी अन्य सरकारी फेलोशिप का लाभ नहीं लिया जा सकता।

इसके तहत नियमित आय से इतर 15 हजार रुपए प्रतिमाह का खर्च भी दिया जाएगा। यही नहीं, इस योजना के तहत महिला वैज्ञानिक को 10 लाख रुपए प्रति वर्ष की आर्थिक मदद उसके संस्थान के माध्यम से दी जाएगी। ये फेलोशिप तीन साल के लिए है। ये फेलोशिप सिर्फ उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जो भारत में स्थित संस्थानों में रिसर्च वर्क करेंगे। इस ग्रांट से मिले पैसों का इस्तेमाल छोटे-मोटे शोध यंत्र से लेकर घरेलू यात्रा तक में किया जा सकता है।

SERB-POWER रिसर्च ग्रांट्स: इस स्कीम के तहत उभरती और पहले से शोध कार्य में लगीं महिला वैज्ञानिकों को मदद पहुँचाई जा रही है। ये ग्रांट साइंस और इंजीनियरिंग सेक्टर में काम कर रहे अलग-अलग व्यक्ति केंद्रित शोध के लिए दी जा रही है। इसके दो हिस्से हैं, जो संस्थानों के स्तर पर अलग-अलग किए गए हैं। लेवल-1 के तहत शीर्ष संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएसईआर, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्र सरकार के संस्थानों के राष्ट्रीय स्तर के लैब्स में शोध कर रही महिला वैज्ञानिकों के लिए है, जिसमें 60 लाख रुपए यानी कि सालाना 20 लाख रुपए की मदद की जा रही है।

वहीं, लेवल-2 में अन्य संस्थानों में शोध कार्य कर रही महिला वैज्ञानिकों को ये सहायता प्रदान की जाएगी, जिसकी कुल राशि तीन वर्षों में 30 लाख और सालान 10 लाख की होगी। इन ग्रांट्स के लिए महिला वैज्ञानिक SERB-CORE RESEARCH GRANT के प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन अप्लाई कर सकती हैं, जिसमें उनका चयन प्रोग्राम एडवायजरी कमेटी (पीएसी) द्वारा किया जाएगा।

इन ग्रांट्स का असर और भविष्य की संभावनाएँ

SERB-POWER योजनाओं को महिला वैज्ञानिकों को एसएंडआर में नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से, महिला वैज्ञानिकों को अनुसंधान परियोजनाओं का नेतृत्व करने, अनुसंधान कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्किंग करने का अवसर मिलेगा। इससे महिला वैज्ञानिकों के लिए एसएंडआर में अपना करियर बनाने और नेतृत्व करने के अवसर बढ़ेंगे।

भारत सरकार की इन पहलों का फायदा सिर्फ धन से मदद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये अकादमिक और रिसर्च संस्थानों में महिलाओं के लिए जगह बनाने और उनकी भागीदारी बढ़ाने में भी मदद करेगा।

मालदीव विवाद में भारत के समर्थन में उतरा इजरायल, दिखाई लक्षद्वीप की खूबसूरती: बताया- यहाँ करेंगे प्रोजेक्ट की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सोशल मीडिया पर लक्षद्वीप की तस्वीरें देख मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार की मंत्रियों ने जो भारत पर अपमानजनक टिप्णियाँ कीं, उसके बाद भारत के साथ समर्थन दिखाने वालों की लिस्ट में इजरायल भी जुड़ गया है। उन्होंने लक्षद्वीप में टूरिज्म को बढ़ावा देने की पहल को सपोर्ट किया है।

भारत में स्थित इजरायली दूतावास ने लक्षद्वीप की कुछ तस्वीरें डाली हैं। इजरायली दूतावास ने लिखा है, “हम पिछले वर्ष केंद्र सरकार के कहने पर लक्षद्वीप में डीसैलिनेशन प्रोग्राम शुरू करने के लिए गए थे। इजरायल अब इस पर काम करने के लिए तैयार है। जिन्होंने अभी लक्षद्वीप के खूबसूरत नजारे नहीं देखे हैं, उनके लिए यहाँ कुछ तस्वीरें हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

क्या पड़ा मालदीव पर असर?

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

वहीं इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स ने मालदीव का बहिष्कार करने की माँग भारतीय एयरलाइन्स से की है। साथ ही इसने खुद से जुड़े ट्रेवल एजेंट से अपील की है कि वह मालदीव को घूमने वाले जाने वालों को लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार जाने की सलाह दें।

जब ‘क़त्ल की रात’ डर से काँप रहे थे इमरान, भारत में उनका गुणगान कर रहे थे ‘गिद्ध पत्रकार’: अभिनंदन पर नए खुलासे के बाद क्या कहेंगे राजदीप-बरखा?

आपको अभिनंदन वर्तमान याद हैं? वही अभिनंदन वर्तमान जो फ़िलहाल भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन के पद पर हैं। जिस समय के वाकये को लेकर वो चर्चा में आए थे, तब वो विंग कमांडर हुआ करते थे। 40 वर्षीय अभिनंदन वर्तमान 2004 से ही भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं। 14 फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था। लेथापोरा में सरपफके काफिले को निशाना बनाया गया। इस आत्मघाती बम विस्फोट में हमारे 40 जवान बलिदान हो गए थे।

पुलवामा हमला, एयर स्ट्राइक और अभिनंदन वर्तमान को बंधक बनाया

इसके बाद भारत में आक्रोश का माहौल था। सभी की ज़बान पर एक ही शब्द था – बदला। सरकार भी डॉ मनमोहन सिंह की नहीं, नरेंद्र मोदी की थी। मुंबई में 2008 में हुए 26/11 के हमलों के बाद भारत सरकार डोजियर पर डोजियर सौंपते रह गई थीं लेकिन पाकिस्तान अपनी चाल से बाज नहीं आया, न ही उसका कुछ बिगड़ा। तब UPA की सरकार थी, 2009 में NDA की सरकार 5 वर्ष पूरे करने का रही थी। मोदी सरकार ने एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।

रातोंरात भारतीय वायुसेना पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में घुसी और एयर स्ट्राइक के जरिए बड़ी संख्या में आतंकियों का संहार किया। उनके अड्डे तबाह किए गए और फिर हमारे विमान और सैनिक सुरक्षित वापस लौट भी आएँ। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से पलटवार का भी करारा जवाब दिया गया। इसी क्रम में Mig-21 उड़ा रहे अभिनंदन वर्तमान पाकिस्तानी विमानों का पीछा करते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुस गए। उन्हें पैराशूट से लैंड करना पड़ा और उन्हें पाकिस्तानियों ने बंधक बना लिया।

इसके बाद पूरे भारत को इंतजार था अभिनंदन वर्तमान की वापसी का। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि अगर पाकिस्तान अभिनंदन वर्तमान को नहीं लौटता तो वो उसके लिए ‘क़त्ल की रात’ होती। अब एक नई किताब से खुलासा है कि 9 मिसाइलें पाकिस्तान की तरफ लक्ष्य किए तैनात थीं। उस समय वहाँ PTI की सरकार थी और इमरान खान मुल्क के प्रधानमंत्री थे। भारत का मीडिया गिरोह भी इमरान खान का फैन हुआ करता था।

PM मोदी से बात करना चाहते थे डरे हुए इमरान खान

तब इस्लामाबाद में भारत के राजदूत रहे अजय बिसारिया ने अपनी पुस्तक ‘Anger Management: The Troubled Diplomatic Relationship between India and Pakistan’ में बताया है कि कैसे उस रात इमरान खान ने उनका दरवाजा खटखटाया था क्योंकि वो स्थिति को शांत करने के लिए फोन कॉल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना चाहते थे। पाकिस्तान के हाई कमिश्नर सोहैल महमूद ने भारत के हाई कमिश्नर अजय बिसारिया को फोन घुमाया था।

वो चाहते थे कि इमरान खान की पीएम मोदी से बात कराई जाए, हालाँकि, ये संभव नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात करने से इनकार कर दिया। आखिरकार पाकिस्तान को अभिनंदन वर्तमान को रिहा करना पड़ा, इसके लिए ‘शांति के लिए प्रयास’ के बहाने बनाए गए। भारत का मीडिया गिरोह भी इमरान खान का महिमामंडन करने लगा। असल में पश्चिमी देशों ने इमरान खान को चेताया था कि अगर अभिनंदन वर्तमान को रिहा नहीं किया गया तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं।

अमेरिका और UK के राजनयिकों द्वारा निराश किए जाने के बाद इमरान खान को ये कदम उठाना पड़ा। हालाँकि, इस दौरान भारत का मीडिया गिरोह इमरान खान की जय-जयकार करता रहा। इस गिरोह का नेतित्व कर रहे थे भारत विरोधी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने के लिए मशहूर राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त। आइए, पहले इन पत्रकारों के ट्वीट्स पर एक नज़र डालते हैं देखते हैं कि कैसे जब इमरान खान और उनकी सरकार डर से काँप रही थी, तब उन्हें भारत के मीडिया का एक धड़ा ‘शांति का दूत’ बता कर उनकी तारीफ करने में लगा था।

इमरान खान भारत के पत्रकारों का गिरोह

राजदीप सरदेसाई ने लिखा था, “भारत में हम भले ही इसे पसंद नहीं करें, लेकिन अगर सही दृष्टि से देखें तो फ़िलहाल इमरान खान नैतिक स्तर पर इस दिन जीत रहे हैं। आतंक का मामला रखने के लिए हमारा पक्ष मजबूत था, लेकिन हमारे नेता वोट गिनने में व्यस्त हैं।” देखिए, कैसे राजदीप सरदेसाई ने न सिर्फ भारत सरकार के नेताओं पर सवाल खड़ा कर दिए, बल्कि दुश्मन मुल्क के प्रधानमंत्री में ‘नैतिकता’ खोज ली। जब प्रधानमंत्री खुद अधिकारियों-नेताओं के साथ लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे थे, राजदीप सरदेसाई जैसे लोग ऐसे दिखा रहे थे जैसे वो सब हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।

इसी तरह बरखा दत्त ने लिखा था कि हमें इमरान खान के इस कदम का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि प्रोपगैंडा पत्रकार का ये भी मानना था कि स्थिति को ठीक करने के लिए इमरान खान ने दरवाजा खोल दिया है। बरखा दत्त को इससे भी दिक्कत थी कि टीवी एंकर्स क्यों पाकिस्तान के खिलाफ बोल रहे हैं। हरिंदर बवेजा ने इन चैनलों को ‘नॉर्थ कोरियन’ बता दिया था और इमरान खान के कदम को ‘पीस गेस्चर’ बताया था। लेखिका शोभा डे ने तो इमरान खान की तारीफ करते हुए पाकिस्तान के लोगों को धन्यवाद दे दिया था।

इसी तरह ज्योतिमणि, जो कि आगे चल कर कॉन्ग्रेस से लोकसभा सांसद भी बनीं, उन्होंने लिखा था कि अभिनंदन वर्तमान की बिना शर्त रिहाई की गई है। उन्होंने अपनी ही सरकार पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप मढ़ दिया। वहीं सुमंत रमण ने लिखा कि इमरान खान आगे निकल गए हैं और आतंकवाद पर भारत के पक्ष में चीजें होने के बावजूद वोट बैंक ने सब गुड़-गोबर कर दिया। रवि सुब्रमण्यन ने तो इमरान खान को पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा राजनेता करार दिया और कहा कि दबाव में ये उनकी सबसे बड़ी पारी है।

आपने देखा, कैसे पत्रकारों ने इमरान खान के ‘डर’ को उनकी ‘दयालुता’ बता कर पेश कर दिया। पुलवामा का आतंकी हमला पाकिस्तान के समर्थन से हुआ, अभिनंदन वर्तमान को बंधक पाकिस्तान ने बनाया, लेकिन भारत के ही ये पत्रकार पाकिस्तान का गुणगान कर रहे थे। मोदी सरकार ने आतंक के खिलाफ कड़ा रुख क्या अख्तियार किया, ‘अमन की आशा’ की फर्जी बातें कर के भारतीय सैनिकों को केवल बलिदान देते देखने की चाहत रखने वाले इस गिरोह को ये हजम भी नहीं हुआ कि भारतीय सेना पलटवार भी कर सकती है।

आज भी पाकिस्तानपरस्ती में व्यस्त है पत्रकार गिरोह

इमरान खान को आज उनके ही मुल्क में जेल में ठूँस दिया गया है। उनकी सरकार का पाकिस्तानी फौज ने ही तख्तापलट कर दिया। सरकार भी गई, जेल भी मिली। जिस नेता का अपने ही मुल्क में ये हाल है, उसे पत्रकारों के भारतीय गिरोह ने पूरे उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा नेता बता कर पेश कर दिया। आज जब खुलासा हुआ है कि इमरान खान उस समय पीएम मोदी से हाथ मिलाने के लिए बेताब थे ताकि इस तस्वीर से पाकिस्तान का किया-धरा शांत हो जाए।

इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति में कितने प्रासंगिक है और कितने नहीं, ये तो वहाँ होने वाले आम चुनावों के बाद पता चलेगा। लेकिन, भारत का मीडिया गिरोह खुद को उसका वफादार बनाए रखेगा जो पाकिस्तान की सत्ता में हो। अभिनंदन वर्तमान को छुड़ाने का क्रेडिट कहीं मोदी सरकार के पास न चला जाए, इसीलिए इस गिरोह ने पूरा प्रयास किया ये दिखाने का कि पाकिस्तान ने भारत पर एहसान किया है। इनका एक ही मकसद होता है – वैश्विक मंच पर किसी तरह भारत की बदनामी हो।

अमेरिका के शहरों में गूँजेगा ‘जय श्रीराम’, न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर होगा प्राण प्रतिष्ठा का टेलिकास्ट: तैयारी शुरू, मंदिरों में भी इंतजाम पूरे

22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर दिखाया जाएगा। इसकी तैयारी चालू हो गई है। इसके अलावा अमेरिका के सभी शहरों में रामजन्मभूमि का यह कार्यक्रम टेलिकास्ट होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में व्यस्त इलाका है। यहाँ पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगी हैं। यहाँ पर किसी चीज का प्रदर्शन पूरी दुनिया का ध्यान खींचता है। यहाँ पर टाइम्स स्क्वायर में ही 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम लाइव प्रदर्शित किया जाएगा। ना सिर्फ यहीं बल्कि पूरे अमेरिका के अलग अलग शहरों में भी यह प्रसारण होगा ताकि वहाँ भी लोग इस भव्य आयोजन को देख सकें।

अमेरिका में अब बड़ी हिन्दू आबादी रहती है। एक अनुमान के अनुसार, अमेरिका में लगभग 33 लाख हिन्दू रहते हैं जो कि अमेरिका की कुल जनसंख्या का 1% हैं। अमेरिका के मंदिरों में भी राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर इंतजाम किए जाने की सूचना है।

वहीं, राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भारत में आमजनों तक पहुँचाने के लिए भाजपा ने भी तैयारी कर ली है। भाजपा का कहना है कि यह कार्यक्रम वह बूथ स्तर पर दिखाएगी। उसके बूथ स्तर के कार्यकर्ता लोगों को प्राण प्रतिष्ठा अलग-अलग जगह पर बड़ी स्क्रीन पर दिखाएँगे।

इस कार्यक्रम को भाजपा के अलावा विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ता भी दिखाएँगे। विश्व हिन्दू परिषद ने यह भी तय किया है कि वह देश के पाँच लाख मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा के दिन लोगों को इकट्ठा करेगी। वह यहाँ पर साफ़ सफाई करके पूजा अर्चना करेंगे।

यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या से देश को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री 22 जनवरी को यजमान की भूमिका निभाएँगे। इस दिन वह संतों और धर्मगुरुओं के आदेशों के अनुसार मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में भाग लेंगे।

मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद भाजपा के देश भर से भक्तों को अयोध्या लाने की योजना भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यहाँ 60 दिनों तक ट्रस्ट भंडारा भी चलाया जाएगा और साथ ही में बाहर से आने वाले भक्तों के रहने की व्यवस्था भी की जाएगी।

बिना चुनाव जीते ही BJP ने राजस्थान में बनाया मंत्री, फिर भी श्रीकरणपुर से हार गए सुरेंद्रपाल सिंह: कॉन्ग्रेस के कुन्नर जीते

भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में हाल में राजस्थान में बनी भाजपा की सरकार में मंत्री बनाए गए सुरेंद्रपाल सिंह टीटी विधानसभा चुनाव हार गए हैं। टीटी बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बनाए गए थे। भाजपा ने उन्हें श्रीकरणपुर विधानसभा सीट से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के रुपिंदर सिंह कुन्नर ने उन्हें 11,261 वोटों से हरा दिया है।

टीटी को भाजपा ने राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया था। चुनाव हारने के बाद अब उनके मंत्री पद पर संकट छा गया है। राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है, जब विधायक बनने से पहले कोई नेता मंत्री बना हो और अपना चुनाव हार गया हो। कुन्नर को 94,761 और टीटी को 83,500 वोट मिले है।

बताते चलें कि राजस्थान के कुल 200 सीटों पर कुछ महीने पहले चुनाव की घोषणा की गई थी। हालाँकि, चुनाव प्रचार के दौरान ही श्रीकरणपुर सीट के कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सरदार गुरमीतसिंह कुन्नर का निधन हो गया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट का चुनाव कुछ समय के टाल दिया था। इसके बाद इस सीट पर 5 जनवरी 2024 को मतदान हुआ था।

इस सीट पर कॉन्ग्रेस ने अपने दिवंगत प्रत्याशी गुरमीत सिंह के बेटे रुपिंदर सिंह को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव जीतने के बाद रुपिंदर सिंह कुन्नर भावुक हो गए। उन्होंने अपने पिता गुरमीत सिंह की तस्वीर के आगे मत्था टेका तो आँसू आ गए। उन्होंने कहा कि ये चुनाव सरदार गुरमीत सिंह कुन्नर ही लड़ रहे थे। कुन्नर की जीत पर कॉन्ग्रेस नेता अशोक गहलोत ने उन्हें बधाई दी है।

वहीं, टीटी की हार पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि वे हार की समीक्षा करेंगे। दरअसल, टीटी को विधायक बनने से पहले राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाकर चार अहम विभाग- कृषि विपणन विभाग, कृषि सिंचित क्षेत्र विकास एवं जल उपयोगिता, इंदिरा नहर विभाग और अल्पसंख्यक मामले एवं वक्फ विभाग दिए गए थे। हालाँकि, अभी तक उन्होंने कार्यभार नहीं सँभाला है।

बताते चलें कि श्रीकरणपुर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में पड़ता है। इस जिले में विधानसभा की कुल 6 सीटें हैं। इनमें से 2 सीटें भाजपा के खाते में आई हैं, जबकि कॉन्ग्रेस के खाते में इस जिले की चार सीटें हो गई हैं। गुरमीत सिंह कुन्नर ने 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार पृथ्वीपाल सिंह और भाजपा के सुरेंद्रपाल सिंह को शिकस्त दी थी। उन्होंने 73,092 वोटों से जीत हासिल की थी। 

अब जबकि टीटी चुनाव हार गए हैं तो उनका मंत्री बने रहना मुश्किल है। हालाँकि, नियम ये कहता है कि कोई भी भारतीय नागरिक बिना विधायक बने छह महीने तक मंत्री बने रह सकता है। इस दौरान उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। राजस्थान में विधानसभा तो है, लेकिन विधान परिषद नहीं है। ऐसे में विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें छह महीने में अपना पद छोड़ना होगा।

‘अभिनन्दन को नहीं छोड़ा तो भारत दाग देगा मिसाइल’: बालाकोट एयरस्ट्राइक से खौफ में था पाकिस्तान, PM मोदी से बात करने को गिड़गिड़ाए थे इमरान खान

14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले के बाद भारत में माहौल गर्म था। भारत ने इसके जवाब में 26 फरवरी 2019 की रात को एयरस्ट्राइक की। सुबह पाकिस्तान के जेट भारत की तरफ आए, भारत ने उन्हें मार भगाया और एक लड़ाकू विमान गिराया भी। इसी दौरान भारतीय पायलट अभिनन्दन वर्धमान पाकिस्तानी सीमा में चले गए। उनकी रिहाई को लेकर भारत ने पाकिस्तान को ऐसा झटका दिया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात के लिए गिड़गिड़ाते रहे।

यह सारे खुलासे बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान पाकिस्तान में भारत के हाई कमिश्नर रहे अजय बिसारिया ने अपनी आगामी किताब में किए हैं। अजय बिसारिया ने अपनी आगामी किताब ‘एंगर मैनेजमेंट: ट्रबल्ड डिप्लोमैटिक रिलेशनशिप बिटवीन इंडिया एंड पाकिस्तान’ किताब लिखी है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अजय बिसारिया ने अपनी किताब में लिखा है कि जब कश्मीर के आकाश में लड़ाकू विमानों की लड़ाई के बाद भारतीय फाइटर पायलट अभिनन्दन वर्धमान पाकिस्तान में गिर गए और उन्हें छुड़ाने को लेकर भारत सरकार दबाव बनाने लगी। इसके जवाब में इमरान खान भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फ़ोन पर बात करने की कोशिश करने लगे।

अजय बिसारिया ने बताया है कि 27 फरवरी 2019 की रात को तब भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर सोहेल महमूद का फ़ोन आया। उन्होंने बिसारिया से कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान प्रधानमंत्री मोदी से बात करना चाहते हैं। बिसारिया ने महमूद से कहा कि अगर उन्हें कुछ बात नई दिल्ली तक पहुँचानी है तो उन्हें बता दें वह इस रास्ते से पहुँचा देंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बाद में एक रैली में ‘क़त्ल की रात’ कहा था।

बिसारिया ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की सेना भी इस दौरान भारत के रुख से डरी हुई थी। पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश सचिव तहमीना जंजुआ को बताया था कि भारत ने उनकी तरफ 9 मिसाइलें तान रखी हैं और अगर अभिनन्दन वर्धमान को नहीं छोड़ा गया तो यह भारत कभी भी छोड़ देगा।

जब पाकिस्तानी विदेश सचिव को यह सूचना मिली तब वह अमेरिका और इंग्लैंड के राजदूतों के साथ बातचीत कर रही थीं। बिसारिया ने अन्य कई खुलासे भी अपनी किताब में किए हैं। बिसारिया ने बताया है कि जून 2019 में इमरान खान किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी से हाथ मिलाना चाहते थे।

इसके अलावा बिसारिया ने बताया है कि भारत के 2019 के रुख के कारण पाकिस्तान सकते में आ गया था। बिसारिया ने बताया है कि पाकिस्तान की सेना इस रुख के चलते आतंकियों पर कार्रवाई करने जा रही थी। इमरान खान ने भारत से रिश्ते खत्म किए जबकि सेना भारत से अच्छे रिश्ते रखना चाहती थी।

इसके अलावा बिसारिया ने एक मामले का जिक्र किया है जिसमें पाकिस्तान के किसी व्यक्ति ने उन्हें एक हमले के बारे में बताया था। उन्हें ISI के एक करीबी ने बताया था पाकिस्तान आतंकी जाकिर मूसा की मौत का बदला लेने के लिए बड़ी साजिश रच रहा है।

‘भगवान राम हमारे जीजा, बहन के घरवास के लिए वस्तुएँ लाए हैं’: श्रीराम के ससुराल से साजोसामान लेकर अयोध्या पहुँचा जत्था, कहा – खाली घर भरने आए हैं

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम के नए मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होना है। इसके लिए देश भर में उत्साह का माहौल है। वहीं अब माँ जानकी के स्थल से भी लोग अयोध्या पहुँचे हैं। मिथिला की परंपरा और संस्कृति भी अब अयोध्या में गूँज रही है। भगवान श्रीराम के ससुराल से एक जत्था कई उपहार लेकर अयोध्या पहुँचा है, जिसमें महिला-पुरुष दोनों शामिल हैं। सरकारी मीडिया संस्थान दूरदर्शन ने इसका वीडियो भी शेयर किया है।

मिथिला के 2 क्षेत्र माँ सीता से मुख्य रूप से जुड़े हुए हैं। एक बिहार के सीतामढ़ी का पुनौरा धाम, जहाँ राजा जनक ने हल चलाया था और माँ सीता का जन्म हुआ था। दूसरा नेपाल का जनकपुर, जहाँ जनक की राजधानी हुआ करती थी और वहाँ भव्य मंदिर भी है। वहीं ताज़ा वीडियो में महिलाओं को अपने सिर पर सामान रखे हुए देखा जा सकता है। एक महिला ने कहा, “जनकपुर में मेरी बहन है और अयोध्या में राम। इस हिसाब से जीजाजी का नाता हुआ।”

उन्होंने कहा, “बहन के हिसाब से हमलोग आए हैं सारा सामान लेकर, गृह प्रवेश है तो घर खाली होगा। नया घर बन रहा है तो उसमें भरने के लिए सामान लेकर आए हैं। बहन के पास घर नहीं था, वो टेंट में थी। अब नया घर बना तो इतनी ख़ुशी हुई कि सोचने लगे क्या करें और क्या नहीं करें। ” सामानों में तरह-तरह के बर्तन से लेकर गहने और साजोसामान की वस्तुएँ देखी जा सकती हैं। एक अन्य पुरुष ने कहा कि ये गिफ्ट नहीं है, घरवास में जो चीजें दी जाती हैं ये वही हैं।

वहीं ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। ट्रस्ट ने लिखा, “श्रीराम भारत को भी प्रिय हैं, श्रीराम नेपाल को भी। श्रीराम दोनो देशों में पूज्य भी हैं। वस्तुतः नेपाल और भारत के बीच सेतु हैं श्रीराम। श्रीराम हमें जोड़ते हैं – स्वयं से, और संपूर्ण विश्व से। जय श्री सीता राम। सबके राम।” बता दें कि मिथिला क्षेत्र बिहार और नेपाल में फैला हुआ है। कभी ये क्षेत्र राजा जनक के साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था, जिनकी बेटी वैदेही से श्रीराम का विवाह हुआ।

गाँधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत… गुजरात दहलाने का ISIS ने बनाया था प्लान, जंगल में बमों की टेस्टिंग: आतंकी शाहनवाज ने की थी रेकी

दुनिया का सबसे बर्बर आतंकी संगंठन आईएसआईएस (ISIS या IS) भारत को लहूलुहान करने की साजिश रच रहा था। गिरफ्तार आईएसआईएस आतंकी शाहनवाज आलम ने स्वीकार किया है कि गोधरा का बदला लेने के लिए आईएसआईएस के निर्देश पर उसने गुजरात के कई शहरों की रेकी की थी। उसने गुजरात के गाँधीनगर, अहमदाबाद, बडोदरा और सूरत की रेकी की थी।

शाहनवाज ने बताया कि आईएसआईएस के निशाने पर गुजरात के बीजेपी नेता, RSS के पदाधिकारी, विहिप के नेता सहित विभिन्न हिंदू संगठनों के नेताओं थे। इतना ही नहीं, जिला न्यायालय, विश्वविद्यालय, मंदिर, यहूदी स्थाल और भीड़भाड़ वाले इलाके भी उनके निशाने पर थे। ISIS पूरे गुजरात में सिलसिलेवार तरीके से बम धमाके करके देश में आतंक का राज स्थापित करना चाहता था।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और एनआईए की पूछताछ में आईएसआईएस के पुणे, दिल्ली और अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े आतंकी शाहनवाज ने माना कि साल 2023 में उसने गुजरात में कई जगहों का दौरा किया था। उसने तस्वीरें खींची थीं और हमलों वाली जगह का ब्लू-प्रिंट भी तैयार किया था। यही नहीं, शाहनवाज ने बोहरा मस्जिद, दरगाह, अहमदाबाद की मजार, दरगाह और साबरमती आश्रम की तस्वीरें भी खींची थी।

इसके लिए आतंकियों ने किराए की एक बाइक का इस्तेमाल किया था। ये सब उसने आईएसआईएस के हैंडलर अबु सुलेमान के कहने पर किया था। उसके साथ रिजवान अली और इमरान भी थे। रिजवान फिलहाल फरार है। शाहनवाज ने पूछताछ में बताया कि वो जनवरी 2023 में दो दिनों के लिए अहमदाबाद पहुँचा था। यहाँ से वो वडोदरा पहुँचा और स्टेशन के पास ही एक हॉस्टल में कमरा लेकर रुक गया।

वडोदरा से आतंकियों ने किराए पर बाइक ली और रेकी को अंजाम दिया। इसके बाद सभी आतंकी सूरत गए और फिर से किराए पर स्कूटी लेकर शहर भर की रेकी की। आतंकियों ने हीरा बाजार, यहूदी केंद्र, इस्कॉन मंदिर समेत 7 जगहों की रेकी की थी। फिर उन्होंने फोटोग्राफ और वीडियोग्राफी की फाइल तैयार कर अबु सुलेमान को भेज दिया था।

शाहनवाज ने बाजार से केमिकल लेकर बम बनाने के कई प्रयोग किए और जंगलों में विस्फोट कर उसका डेमो भी किया था। हालाँकि वो कोई बड़ा धमाका कर पाता, इससे पहले ही गिरफ्तार लिया गया था। शाहनवाज स्वप्रेरित आईएसआईएस आतंकी था। उसने अपने जेहादी मंसूबों को पूरा करने के लिए झारखंड के हजारीबाग में कई छोटी-मोटी आपराधिक कार्यों को अंजाम दिया था।

31 साल के शाहनवाज हजारीबाग में ही पैदा हुआ था और वहीं पर उसे जेल भी जाना पड़ा था। जेल से निकलने के बाद वो पुणे चला गया था। फिर एनआईए की छापेमारी में जब आईएसआईएस का पुणे मॉड्यूल ध्वस्त हुआ, तो वो फरार हो गया। उस पर तीन लाख का ईनाम रखा गया था।

फरहतुल्ला से जुड़ा है शाहनवाज का कनेक्शन

पुणे से भागा शाहनवाज दिल्ली और अलीगढ़ मॉड्यूल के साथ जुड़ गया था, जिसमें अहम भूमिका निभाई थी आईएसआईएस, आईएसआई, लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद जैसे कई आतंकी गुटों के लिए काम करने वाले और हिज्ब उत तहरीर का संचालन करने वाले फरहतुल्ला गोरी से। फरहतुल्ला पाकिस्तान से ही भारत में आईएसआईएस के मॉड्यूल्स को खड़ा कर रहा था।

ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से फरहतुल्ला कई नामों से जाना जाता था और वो सभी आईएसआईएस आतंकियों के बीच इकलौता कनेक्शन था। वही आईएसआईएस आतंकियों को शपथ दिलाता था और शाहनवाज जैसे आतंकियों को उनके जेहादी लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर रहा था।

हिंदू बसंती को मरियम बनाकर जेहाद में लगाया

शाहनवाज ने गाजियाबाद के विश्वेश्वरैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली गुजरात की बसंती पटेल नाम की हिंदू लड़की से निकाह किया और उसे जेहादी बना दिया। शाहनवाज ने बसंती को पहले इस्लाम कबूल करवाया फिर उससे निकाह किया। निकाह के बाद बसंती का नया इस्लामी नाम मरियम रखा गया था।

क्या था पुणे ISIS मॉड्यूल

दरअसल, में पुणे पुलिस ने जुलाई 2023 में चोरी की बाइक के साथ 2 लोगों को पकड़ा था। इसमें शाहनवाज भी था। शुरुआत में पुलिस ने दोनों को वाहन चोर समझा पर जाँच में उनके ISIS नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई। इस बीच शाहनवाज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद इस साल अगस्त माह में पुणे के कोंढवा स्थित एक घर में दबिश डाली। 

दबिश के दौरान बम बनाने और ब्लास्ट करने की ट्रेनिंग लेते हुए 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 3 अन्य संदिग्ध फरार हो गए थे। फरार होने वालों के नाम रिज़वान अब्दुल हाजी, अब्दुल्लाह फ़ैयाज़ शेख और तलहा लियाकत खान है। इन तीनों के साथ शाहनवाज पर भी 3-3 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इसके बाद शाहनवाज को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनआईए के साथ मिलकर गिरफ्तार किया था।

सेल्फी लेने आया था वोटर, बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन ने घुमाकर जड़ा झापड़: चुनाव जीतने के बाद Video वायरल

बांग्लादेश के क्रिकेटर स्टार शाकिब अल हसन ने आम चुनावों में जीत हासिल करके अपनी सियासी करियर की शुरुआत कर दी है। उनके चुनाव में जीतने के साथ ही एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें दिखाया जा रहा है कि उन्होंने एक शख्स को थप्पड़ जड़ा।

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। इसमें दिख रहा है कि शाकिब अपने चाहने वालों के बीच में खड़े हैं और सेल्फी लेने के लिए धक्का-मुक्की हो रही है। इसी दौरान शाकिब परेशान होकर उनसे चिपककर सेल्फी लेने वाले एक आदमी को हाथ घुमाकर थप्पड़ मारते हैं।

वीडियो को शेयर करके सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कप्तान शाकिब अल हसन ने संसद सीट जीत ली है। MP बनते ही फैन को जड़ा थप्पड़।

मीडिया में इस वीडियो को लेकर बताया जा रहा है कि ये वीडियो चुनाव वाले दिन की है जहाँ शाकिब को एक मतदान केंद्र पर बड़ी संख्या में फैंस की भीड़ का सामना करना पड़ा। इस दौरान वह अपना आपा खो बैठे और फैन को थप्पड़ जड़ दिया। नतीजों वाले दिन इस वीडियो को वायरल कर दिया गया। अब इस वीडियो को देखकर कुछ लोग उनसे नाराजगी जता रहे हैं। वहीं कुछ लोग संदेह कर रहे हैं कि ये शाकिब ही हैं या कोई और।

बता दें कि बांग्लादेश के आम चुनाव में सत्ताधारी आवामी लीग ने एक बार फिर बांग्लादेश में वापसी की है। उन्होंने 350 सीटों वाली बांग्लादेशी संसद में बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया। वहीं शेख हसीना भी गोपालगंज-3 सीट से भारी मतों से जीत गईं। तो बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मागुरा-1 सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने इस चुनाव में अपने निकट प्रतिद्वंदी को 1.5 लाख से अधिक मतों से हराया। वह चुनाव से कुछ दिन पहले ही आवामी लीग में शामिल हुए थे। उन्हें शेख हसीना की पार्टी ने मगुरा-1 निर्वाचन क्षेत्र से उतारा था। 

पूनम पांडेय ने मालदीव में रद्द कर दी शूटिंग, गिड़गिड़ाता रह गया अब्दुल खान: अमिताभ बच्चन का साफ़ सन्देश – हम भारत हैं, हमारी आत्मनिर्भरता पर आँच मत डालिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में लक्षद्वीप दौरे पर पहुँचे, जहाँ से उन्होंने कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डाली। हालाँकि, इससे मालदीव के कट्टरपंथी भड़क गए और उन्होंने भारत व पीएम मोदी को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। असल में पीएम मोदी ने लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा दिया, जहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ मालदीव से मिलती-जुलती हैं। इसके बाद कई बॉलीवुड सेलेब्स और क्रिकेटरों ने लक्षद्वीप की सुन्दर तस्वीरें शेयर कर पीएम मोदी का समर्थन किया और मालदीव को लताड़ लगाई।

इसी फेहरिस्त में अब पूनम पांडेय का नाम भी जुड़ गया है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मी पूनम पांडेय मॉडल हैं और साथ ही इरॉटिक फिल्मों में अभिनय भी करती रही हैं। अपनी सेमी-न्यूड तस्वीरों से सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने वाली पूनम पांडेय ने अब मालदीव में अपनी शूटिंग रद्द कर दी है। ऐसा उन्होंने खुद 2 तस्वीरें पोस्ट कर के बताया। एक तस्वीर में उन्होंने व्हाट्सएप्प चैट का स्क्रीनशॉट डाला है, जबकि दूसरे में उन्होंने बिकनी में अपनी तस्वीर अपलोड की है।

उन्होंने किसी ‘RIM प्रोडक्शन’ के अब्दुल खान के साथ बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें उधर से अब्दुल खान लिखते हैं, “हाय पूनम जी, मुझे नील सर से पता चला कि आप शूट शेड्यूल रद्द करना चाहती हैं।” इसके बाद पूनम पांडेय ने ऑडियो के जरिए उन्हें अपना जवाब भेजा। फिर अब्दुल खान ने लिखा, “मैम, मैंने पूरे क्रू के लिए टिकट्स बुक कर लिए हैं। होटल भी बुक कर लिए गए हैं। अंतिम क्षणों में शूट रद्द करना संभव नहीं है।”

इसके बाद पूनम पांडेय ने 2 ऑडियो भेजा। फिर अब्दुल खान ने उनसे गुहार लगाई कि उन्हें एक दिन का समय दिया जाए। हालाँकि, इसके बाद अभिनेत्री ने ‘गुड नाइट’ लिख कर चैट बंद कर दिया। पूनम पांडेय ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए कहा कि उन्हें मालदीव में शूट करने में मजा आता है लेकिन अब वो वहाँ कभी शूट नहीं करेंगी। पूनम पांडेय ने बताया कि उन्होंने मालदीव में शूट रद्द कर दिया है और उनकी टीम भी गई है। पूनम पांडेय ने आशा जताई कि जल्द ही वो लक्षद्वीप में शूट शुरू करेंगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के लिए मालदीव के 3 मंत्री बर्खास्त किए जा चुके हैं। वहाँ की नई सरकार का चीन की तरफ ज़्यादा झुकाव देखा जा रहा है। मालदीव के हाई कमिश्नर को भारतीय विदेश मंत्रालय में तलब किया गया, जहाँ वो 5 मिनट तक रुके। उधर सोशल मीडिया पर एक के बाद एक सेलेब्स ने मालदीव का विरोध किया और लक्षद्वीप की तस्वीरें शेयर की। लक्षद्वीप में पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिए मोदी सरकार भी प्रयासरत है।

उधर अपने फैंस द्वारा ‘सदी के महानायक’ कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन ने भी मालदीव का विरोध किया है। वीरेंद्र सहवाग ने उडुपी और अंडमान के बीच की सुंदर तस्वीरें शेयर की थीं, जिस पर अमिताभ बच्चन ने वो अंडमान व लक्षद्वीप जा चुके हैं, दोनों जगह काफी सुंदर हैं। ‘जय हिन्द’ का नारा लगाते हुए अमिताभ बच्चन ने लिखा, “हम भारत हैं , हम आत्मनिर्भर हैं , हमारी आत्मनिर्भरता पे आँच मत डालिए।” उन्होंने बताया कि भारत के इन द्वीपों पर समुद्र के भीतर एडवेंचर करना एक अविश्वसनीय अनुभव है।