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बांग्लादेश में फिर से ‘हसीना सरकार’, 5वीं बार बनेंगी प्रधानमंत्री: क्रिकेटर शाकिब अल हसन ने सियासी पिच पर भी जीत से खोला खाता

पड़ोसी देश बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजे साफ हो गए हैं। सत्ताधारी आवामी लीग एक बार फिर बांग्लादेश में वापसी कर रही है। इसकी सुप्रीमो शेख हसीना पाँचवी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। 350 सीटों वाली बांग्लादेशी संसद में आवामी लीग ने बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया है। इन चुनावों में बांग्लादेश के क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने भी जीत हासिल की है। वह सत्ताधारी आवामी लीग से ही चुनाव लड़ रहे थे।

इन चुनावों के लिए मतदान 7 जनवरी, 2024 को करवाया गया था। इसके तुरंत बाद ही मतगणना चालू हो गई। अब तक की मतगणना में शेख हसीना की आवामी पार्टी 190 से अधिक सीटों पर आगे है। प्रधानमंत्री शेख हसीना भी गोपालगंज-3 सीट से भारी मतों से जीत गई हैं। वहीं लगभग 50 निर्दलीय उम्मीदवार भी जीतते दिख रहे हैं।

जातीय पार्टी बांग्लादेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर रही है। जातीय पार्टी को अब तक लगभग 11 सीटों पर बढ़त मिल रही है। बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी मानी जाने वाली बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने इन चुनावों का बहिष्कार किया था। इससे पहले 2019 में बांग्लादेश में चुनाव हुए थे, जिसमें शेख हसीना की आवामी लीग को 350 में से 306 सीट मिलीं थी।

बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मागुरा-1 सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने इस चुनाव में अपने निकट प्रतिद्वंदी को 1.5 लाख से अधिक मतों से हराया। वह चुनाव से कुछ दिन पहले ही आवामी लीग में शामिल हुए थे। हालाँकि, वह क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे।

बांग्लादेश चुनावों को देखने आए विदेशी आब्जर्वर ने भी इनकी प्रशंसा की है। उन्होंने इन चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष बताया है। इस बार बांग्लादेश के चुनावों में 40% मतदान हुआ है। हालाँकि, इसके पीछे मतदान के समय में कमी को कारण माना जा रहा है।

बांग्लादेश के इस बार के चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें थी। अमेरिका ने कई बार अपने क़दमों से दिखाया था कि वह अब आगे और शेख हसीना को सत्ता में नहीं देखना चाहता है। जबकि भारत, चीन और रूस जैसे देश बांग्लादेश से रिश्तों में स्थायित्व के लिए शेख हसीना को ही सही विकल्प मानते आए हैं।

शेख हसीना के यह चुनाव जीतने के साथ हीवह विश्व में सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली महिला प्रमुख बन गई हैं। वह 1996 से 2001 और फिर 2009 से लगातार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही हैं। उनके शासनकाल में बांग्लादेश में काफी विकास हुआ है। उन्होंने बांग्लादेश को काफी तेज आर्थिक विकास दर दिलाने में सफलता पाई है।

भारत से रिश्तों में भी शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद काफी बढ़ोतरी हुई है। शेख हसीना से पहले बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही खालिदा जिया के समय में बांग्लादेश से भी आतंकी आने का खतरा भारत में बढ़ गया था। एक दो आतंकी संगठन भी बांग्लादेश में अपना बेस बना चुके थे। शेख हसीना के शासन के दौरान बंगलादेश और भारत ने कई विवाद सुलझाए हैं।

बांग्लादेश के इन आम चुनावों में हिंसा की भी छिटपुट घटनाएँ सामने आई हैं। हालाँकि, किसी बड़े स्तर पर हिंसा नहीं हो पाई।

मालदीव को झटके पर झटका, ‘EaseMyTrip’ ने बंद की फ्लाइट बुकिंग: 8 हजार+ लोग करा चुके हैं होटल बुकिंग रद्द, 2500 टिकट भी कैंसिल

देश की बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने मालदीव को बड़ा झटका दिया है। इसके फाउंडर और सीईओ ने कहा है कि वह अपने पोर्टल से मालदीव की फ्लाइट टिकट बुकिंग बंद कर रहे हैं। EaseMyTrip ने यह निर्णय मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद लिया है।

EaseMyTrip के सीईओ और फाउंडर निशांत पिट्टी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “अपने देश के साथ मजबूती से खड़े होते हुए EaseMyTrip ने मालदीव की सभी फ्लाइट बुकिंग को निलंबित कर दिया है।” EaseMyTrip भारत में ऑनलाइन ट्रैवल बाजार का बड़ा खिलाड़ी है।

EaseMyTrip की देश के ऑनलाइन ट्रैवल बाजार में लगभग 10% की हिस्सेदारी है। यह बाजार ₹1.5 लाख करोड़ का है। EaseMyTrip के इस कदम के बाद अन्य ट्रैवल कम्पनियों पर भी दबाव पड़ रहा है कि वह ऐसे ही कदम उठाएँ।

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और बड़ी हस्तियों ने ने मालदीव के रवैये की आलोचना की थी। कई बॉलीवुड सितारों ने लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे और साथ ही खुद भी जाने की बात कही थी।

उधर भारतीयों के गुस्से का असर मालदीव पर लगातार पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 2500 फ्लाइट और 8 हजार से ज्यादा होटल बुकिंग भारतीय रद्द कर चुके हैं। यह आँकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

30 साल से मौन हैं 85 साल की सरस्वती देवी, अब रामलला के चरणों में तोड़ेंगी व्रत: अयोध्या राम मंदिर के लिए साधना की एक गाथा यह भी

सरस्वती देवी की उम्र 85 साल है। वे झारखंड के धनबाद में रहती हैं। करीब 30 साल से मौन व्रत में हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने यह संकल्प लिया था। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही उनका संकल्प भी पूरा होगा। वे रामलला के चरणों में ही अपना व्रत तोड़ेंगी। ‘राम नाम’ के साथ ही उनका ये व्रत टूटेगा।

सरस्वती देवी ने 1992 में मौन व्रत शुरू किया था। संकल्प लिया था कि राम मंदिर बनने के बाद ही अपना व्रत तोड़ेंगी। प्राण-प्रतिष्ठा की घड़ी नजदीक आने के साथ ही धनबाद के करमटांड़ में रहने वाली सरस्वती देवी बहुत प्रसन्न हैं। वे लिखकर बताती हैं, “मेरा जीवन सफल हो गया। रामलला ने मुझे प्राण-प्रतिष्ठा में बुलाया है। मेरी तपस्या, साधना सफल हुई। 30 साल बाद मेरा मौन व्रत ‘राम नाम’ के साथ टूटेगा।”

उन्हें प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का न्योता मिल चुका है। इस न्योते से उनका पूरा परिवार खुश है। उनके भाई 8 जनवरी 2024 को उन्हें अयोध्या लेकर जाएँगे। बेटे हरिराम अग्रवाल के मुताबिक, मई 1992 में सरस्वती देवी अयोध्या में राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास से मिलीं थी। तब महंत दास ने उन्हें कामतानाथ पर्वत की परिक्रमा करने को कहा था।

इसके बाद वो चित्रकूट चली गईं। उन्होंने साढ़े सात महीने कल्पवास में एक गिलास दूध के सहारे निकाला और हर दिन कामतानाथ पर्वत की 14 किलोमीटर की परिक्रमा की। परिक्रमा करने के बाद अयोध्या लौटने पर 6 दिसंबर 1992 को स्वामी नृत्य गोपाल दास के कहने पर उन्होंने मौन धारण कर लिया।

इसी दिन सरस्वती देवी ने संकल्प किया कि वो राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन ही अपना व्रत तोड़ेंगी। उनके परिवार ने उनके इस निर्णय का स्वागत और उनके साथ पूरा सहयोग किया। इसके बाद से उनका सारा ही वक्त लगभग पूजा-पाठ में बीतता है। किसी को कुछ कहना होता तो वो इशारों में या ताली बजाकर बताती हैं। मौन के इस संकल्प के साथ ही सरस्वती देवी ने चारों धाम की तीर्थ यात्राएँ भी पूरी की है।

इसके अलावा वे अयोध्या, काशी, मथुरा, तिरुपति बालाजी, सोमनाथ मंदिर, बाबा बैद्यनाथधाम के दर्शनों के लिए जा चुकी हैं। प्रभु राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने वाली सरस्वती देवी आज से 65 साल पहले धनबाद के भौंरा के रहने वाले देवकीनंदन अग्रवाल की जीवनसंगिनी बनीं थी। उन्होंने कभी स्कूल का मुँह तक नहीं देखा था, लेकिन पति ने उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। हालाँकि उनके पति उनका साथ 35 साल पहले ही छोड़ परलोक सिधार गए।

इसके बाद से वो अकेले ही परिवार को चलाती रहीं। अपने 8 बच्चों में से तीन की मौत का दुख भी उन्हें झेलना पड़ा, लेकिन वे भक्ति मार्ग पर चलती रहीं। हर दिन धार्मिक पुस्तकें पढ़ना उनकी दिनचर्या का अंग है। इसके साथ वो केवल एक वक्त का सात्विक भोजन लेती हैं।

मंदिर से लेकर माँ सरस्वती पर जिस राजद MLA ने की अभद्र टिप्पणी, उसके बचाव में आए बिहार के शिक्षा मंत्री: कहा- आहुति देंगे नहीं, लेना जानते हैं

बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह ने हिंदुओं की भावना को आहत करने वाले अपने विधायक नेता फतेह बहादुर सिंह के बयान का समर्थन किया है। फतेह बहादुर ने कुछ दिन पहले एक पोस्टर में मंदिर को लेकर विवादित बातें छपवाई थीं। इसमें कहा गया था कि मंदिर गुलामी का रास्ता होता है जबकि स्कूल का रास्ता प्रकाश का होता है। उनकी इसी हरकत का बचाव करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि ये बात फतेह बहादुर की कही नहीं है बल्कि सावित्री बाई फुले की है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ‘मंदिर गुलामी का रास्ता है…’ इस बात को फतेह बहादुर ने खुद से नहीं कहा बल्कि इस बात को तो देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले ने कहा था। फतेह बहादुर ने तो बस उस बात को दोहराया है। फिर भी षड्यंत्रकारियों ने उनके गले की कीमत लगा दी।

चंद्रशेखर सिंह बोले अब एकलव्य का बेटा अंगूठा दान नहीं करेगा, शहीद जगदेव का बेटा अब आहूति नहीं देगा, क्योंकि वह अब आहूति लेना जानता है। चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि बहुजन लोगों का इतना पसीना बहेगा कि समुंंदर बन जाएगा और सारे विरोधी उस समंदर के पार खड़े दिखेंगे।

इससे पहले फतेह बहादुर खुद भी उस बयान को सावित्री बाई फुले का बयान बताकर पूरे मामले में पल्ला झाड़ चुके हैं। वहीं जिस कार्यक्रम में चंद्रशेखर सिंह ने यह बात कही है उसी के पोस्टर लालू यादव के घर के बाहर लगाए गए थे और उनपर लिखा था-

“मंदिर का मतलब मानसिक गुलामी का मार्ग और स्कूल का मतलब होता है जीवन में प्रकाश का मार्ग। जब मंदिर की घंटी बजती है तो हमें संदेश देती है कि हम अंधविश्वास, पाखंड, मूर्खता और अज्ञानता की तरफ बढ़ रहे हैं और जब स्कूल की घंटी बजती है तो यह संदेश मिलता है कि हम तर्कपूर्ण ज्ञान और वैज्ञानिकता व प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं। अब तय करना है कि आपको किस ओर जाना चाहिए?”

लालू यादव के आवास के बाहर लगे पोस्टर

इस पोस्टर में साइड में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की भी फोटो थी। इसके अलावा पोस्टर में बड़ा सा फतेह बहादुर का फोटो लगा था। कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में भी फतेह बहादुर सिंह कुशवाहा का नाम था, जो कुछ दिन पहले ही माता सरस्वती पर विवादित बयान देने के कारण चर्चा में आए थे।

हर बार दूसरे के हवाले से विवादित टिप्पणी करना, हिंदू आस्था को ठेस पहुँचाना फतेह बहादुर सिंह का काम हो गया है। कुछ समय पहले कुशवाहा समाज से ताल्लुक रखने वाले और बिहार के रोहतास जिले के डेहरी से सत्ताधारी RJD के विधायक फतेह ने कहा था,

“आप ही के ग्रंथ में लिखा हुआ कि सुरसती (सरस्वती) जो है, ब्रह्मा की बेटी है और ब्रह्मा जी का अपनी ही पुत्री पर नियत खराब हुआ और उन्होंने (ब्रह्मा) उनके साथ शादी कर लिया। आप खुद समझिए… पूजा किसका होता है, चरित्रवान का या चरित्रहीन का?”

आरजेडी विधायक ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा था, “ये चरित्रवान-चरित्रहीन वाली बात मैं नहीं बोल रहा हूँ, ये संत कबीरदास ने कहा है। मैं उनका कहा हुआ बात कह रहा हूँ। उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों में सरस्वती जी की प्रतिमा नहीं लगाई जानी चाहिए।”

उनके इन्हीं बयानों के बाद कई लोग उनसे काफी नाराज हुए थे। हिंदू शिवभवानी सेना की ओर से ऐलान किया गया था कि जो फतेह बहादुर की जीभ काटकर लाएगा उसे 10 लाख रुपए का इनाम मिलेगा।

उस्मान ख्वाजा की अपील को ICC ने रद्दी की टोकरी में डाला, गाजा के समर्थन में बाँधी थी काली पट्टी: डाँट के बाद की थी अपील

पाकिस्तानी मूल के ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने आईना दिखाते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया। आईसीसी ने कहा कि उसकी अपील सुनने लायक भी नहीं है। दिसंबर माह में पाकिस्तान के खिलाफ हुए टेस्ट मैच में बिना अनुमति बाँह पर काली पट्टी लगाने के मामले में ख्वाजा को रेफरी ने आधिकारिक तौर पर ‘डाँट’ लगाई थी। ऐसे मामले में अधिकतम सजा यही होती है। उस्मान ख्वाजा ने कहा था कि वो आईसीसी से इस ‘सज़ा’ के विरोध में अपील करेंगे, लेकिन ICC ने उनकी अपील पाते ही खारिज कर दी।

‘सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने उस्मान ख्वाजा की अपील को सुनवाई लायक ही नहीं माना कि इस पर आगे कोई बातचीत की जा सके। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया पर्थ में पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के दौरान मैदान पर काली पट्टी पहनने के लिए उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने फटकार लगाई थी। आईसीसी ने उनके खिलाफ प्रतिबंध हटाने की अपील को खारिज कर दी है। आईसीसी ने कहा कि नियमों को मानना ही पड़ेगा।

बता दें कि पर्थ टेस्ट के बाद पहले मुस्लिम ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने कपड़े और उपकरण विनियमों के खंड एफ का उल्लंघन करने के लिए फटकारा था। उस्मान ख्वाजा ने कहा था कि वो आगे से ऐसा नहीं करेंगे, लेकिन इस ‘डाँट’ वाली सजा को हटाने के लिए अपील करेंगे। बता दें कि आईसीसी के नियमों के अनुसार, खिलाड़ी अपने कपड़ों या उपकरणों पर किसी भी व्यक्तिगत संदेश को प्रदर्शित करने से पहले क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और आईसीसी से अनुमति लेना आवश्यक है। ख्वाजा ने ऐसा नहीं किया, इसलिए आईसीसी ने उन्हें फटकार लगाई है।

गौरतलब है कि उस्मान ख्वाजा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले मुस्लिम हैं। उन्होंने बिना हमास की हरकत को देखे उस इजरायल का विरोध कर दिया, जिसने आतंकी संगठन हमास के खात्मे को अपना मकसद और इस युद्ध को अपने वजूद का सवाल बताया है।

इससे पहले, पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में हुए टेस्ट मैच से पहले की प्रैक्टिस में उन्होंने अपने जूते के निचले हिस्से पर कई रंगों से लिखा था, “सभी जिंदगियाँ बराबर हैं। (All Lives Are Equal) और आजादी लोगों का अधिकार है (Freedom is Human Right)।” इस पर भी काफी विवाद हुआ था। तब, आईसीसी ने उन्हें चेतावनी दी कि वो ऐसे जूता नहीं पहन सकते। इसके विरोध में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट लिखी और कहा कि वो आईसीसी से इस बारे में बात करेंगे।

हालाँकि, पर्थ टेस्ट में वो विवादित जूते तो पहनकर मैदान में नहीं उतरे, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति के ही बाँह पर काली पट्टी बाँधी। इसके बाद पड़ी फटकार के मामले में फिर से उन्हें झटका ही मिला है।

आँकड़ों के इस महाजाल से होकर जाता है मालदीव की बर्बादी का रास्ता, जो वहाँ की चीनपरस्त सरकार ने खुद चुना: यूँ ही नहीं PM मोदी के लक्षद्वीप दौरे से बेचैन हुआ इस्लामी मुल्क

भारतीय उपमहाद्वीप में हिंद महासागर में एक बेहद खूबसूरत द्वीपसमूह देश है, जिसका नाम है मालदीव (Maldives)। करीब 1200 द्वीपों में फैले सुन्नी मुस्लिम बहुल देश मालदीव एशियाई महाद्वीप की मुख्य भूमि से लगभग 750 किलोमीटर की दूरी पर श्रीलंका और भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। नैसर्गिक छँटा बिखेरने वाला देश मालदीव भारत और यहाँ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण चर्चा में है।

मालदीव भारत का पड़ोसी देश है, जिसके भारत के साथ ऐतिहासिक रूप से मधुर संबंध रहे हैं। हालाँकि, बदले भू-राजनीतिक परिदृश्य में मालदीव अपनी पारंपरिक नीतियों से अलग हटकर विपरीत दिशा में राह पकड़ लिया है, जिसके कारण भारत के साथ उसके रिश्तों में खटास पिछले कुछ दिनों से स्पष्ट रूप से दिख रही है।

बात शुरू होती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय केंद्रशासित राज्य लक्षद्वीप की यात्रा से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जनवरी 2024 को लक्षद्वीप की यात्रा की वहाँ पर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इसके बाद वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाते हुए फोटो एवं वीडियो साझा किए। इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर इसे मालदीव से सुंदर बताते हुए इसे यहाँ आने की लोगों से आह्वान करने लगे।

सोशल मीडिया के यूजर, खासकर X (पूर्व में ट्विटर) पर लोग कहने लगे कि जो भारतीय अपनी छुट्टियाँ मनाने के लिए मालदीव जाते हैं, उन्हें मालदीव के बजाय लक्षद्वीप जाना चाहिए। इसके बाद वहाँ की सरकार की मानसिकता दिखने लगी। मालदीव की सरकार में मंत्री इसको लेकर भारत एवं प्रधानमंत्री मोदी पर कई ओछी टिप्पणी कर दी। सोशल मीडिया पर आलोचना झेलने के बाद आखिरकार उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

इसके बाद मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का एक बयान आया। उन्होंने रविवार (7 जनवरी 2024) को पोस्ट करके अपने देश की मंत्री मरियम शिनुआ द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी को भद्दा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने मुइज्जू सरकार को सलाह दी कि वे अपनी मंत्री के बयानों से सरकार को अलग करें।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “मालदीव की सरकार की एक मंत्री ने एक प्रमुख सहयोगी देश, जो कि हमारी सुरक्षा और समृद्धि के लिए जरूरी है, के प्रमुख के लिए किस तरह की भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया है। मोहम्मद मुइज़्ज़ू की सरकार को इस बयान से अपने आप को अलग कर लेना चाहिए और भारत को यह बताना चाहिए कि यह हमारी सरकारी नीति नहीं है।”

मामले को बढ़ता हुआ देखकर आखिरकार मालदीव की सरकार ने अपने मंत्री के बयान से खुद को अलग कर लिया। मालदीव सरकार ने बयान जारी कर कहा, “मालदीव सरकार विदेशी नेताओं और उच्च पदस्थ व्यक्तियों के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपमानजनक टिप्पणियों से अवगत है। ये राय व्यक्तिगत हैं और मालदीव सरकार के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं… इसके अलावा, सरकार के संबंधित अधिकारी ऐसी अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे।”

दरअसल, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हैं। पिछले अक्टूबर में उनकी पार्टी पीपुल्स नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी को जीत मिली थी। पीपुलिस नेशनल कॉन्ग्रेस को चीन का समर्थक और भारत का विरोधी माना जाता है। आमतौर पर मालदीव में कोई भी सरकार बनती है तो वहाँ के राष्ट्रपति सबसे पहले पड़ोसी देश भारत की यात्रा करते हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ।

राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने सबसे पहले चीन जाने का निर्णय लिया। वे 8-12 जनवरी तक चीन की सरकारी यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान चीन हिंद महासागर में अपनी ताकत बढ़ाने के तहत मालदीव को डोरे डालने की कोशिश करेगा। इसके पहले श्रीलंका में चीन ऐसा कर चुका है। चीन अपनी ऋण की जाल में फँसाकर श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह ले चुका है, जो भारत को चिंतित करने वाली बात है।

चूँकी मुइज्जू की सरकार भारत विरोधी है और वहाँ से भारतीय सेना की टुकड़ी को हटाने की माँग वो पहले भी करते रहे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि चीन के साथ मिलकर वो ऐसे फैसले ले सकते हैं, जो भारत के हित के खिलाफ हो। इसके लिए चीन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन मुइज्जू से पहले वाली इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शासन में चीन कामयाब नहीं हो पाया था, क्योंकि सालिह भारत समर्थक माने जाते हैं।

ऐसे में भारत को जब इसकी भनक लगी तो भारत सतर्क हो गया। इसके पहले भारत मालदीव को 100 मिलियन डॉलर की सहायता दे चुका है। मोहम्मद मुइ्ज्जू की भारत विरोधी नीतियों एवं चीन की यात्रा की जानकारी भारत को परेशान करने का कारण बन गया, क्योंकि सबसे पहले चीन की राजकीय यात्रा करने का अर्थ है, भारत के मुकाबले चीन को ज्यादा तरजीह देना। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल लक्षद्वीप में देकर मालदीव को एक संदेश देने की कोशिश की।

दरअसल, मालदीव की पूरी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है। यहाँ सबसे अधिक जाने वाले लोगों में भारतीय शीर्ष पर हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर आते हैं रूसी। साल 2023 में मालदीव सरकार ने जितनी उम्मीद की थी, उससे अधिक लोग मालदीव पहुँचे। मालदीव सरकार को 18 लाख लोगों को आने की उम्मीद थी, लेकिन पहुँचे 1,878,537 लोग। वहीं, साल 2022 में यह संख्या 16 लाख थी।

पिछले साल यानी 2023 में 2,09,100 भारतीय मालदीव गए थे। इतने ही रूसी भी वहाँ भ्रमण के लिए गए। इस तरह इन पर्यटकों के लिए 176 रिसॉर्ट, 809 गेस्टहाउस, 146 सफारी और 14 होटल का कारोबार चला। इन पर्यटकों की बदौलत मालदीव के 5,50,000 लोगों का जीवन-यापन चलता है। विश्व बैंक के अनुसार, मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र का एक-तिहाई योगदान है।

पर्यटन आय में वृद्धि के बावजूद महंगे तेल आयात और बड़ी निवेश परियोजनाओं के लिए पूँजी आयात के कारण मालदीव का साल 2022 में चालू खाता घाटा दोगुना होकर सकल घरेलू उत्पाद का 16.5 प्रतिशत हो गया। उच्च आयात लागत और विदेशी ऋण पुनर्भुगतान ने सकल विदेशी भंडार पर जबरदस्त दबाव डाला है। इस तरह जनवरी में 790 मिलियन अमेरिकी डॉलर से गिरकर जुलाई 2023 में यह 594.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

इतना ही नहीं, चीन के जाल में फँसे मालदीव को निकालने के लिए भारत ने पिछले साल नवंबर में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 816 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद भी दी। IMF की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मालदीव को सबसे अधिक कर्ज देने वाला देश चीन है, जिसने मालदीव को 1.5 बिलियन डॉलर (10,510 करोड़ रुपए) का कर्ज दे रखा है। मालदीव के कु विदेशी कर्ज का 20 प्रतिशत अकेला चीन ने दिया है।

ऐसे में अगर मालदीव की जगह भारतीय लक्षद्वीप जाना शुरू कर दें तो इससे ना सिर्फ पहले से खस्ताहाल और चीन के कर्ज में फँसा मालदीव बर्बादी के कगार पर आ जाएगा, बल्कि भारत में लक्षद्वीप एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के कारण दूसरे देश को लोग भी मालदीव के बजाय लक्षद्वीप की ओर आने लगेंगे। मालदीव ने इसे एक संकेत के रूप में लिया है।

पूजा-जैकलीन से लेकर पंड्या-धवन तक, अर्जुन कपूर से लेकर रणदीप हुड्डा तक, लंबी हुई मालदीव के खिलाफ उतरे सेलेब्स की फेहरिस्त: कहा – लक्षद्वीप प्रकृति का स्वर्ग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे पर मालदीव की मंत्री मरियम शिउना और दूसरे नेताओं के बेतुके बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर यानी एक्स पर #BycottMaldives ट्रेंड करने लगा। मालदीव सरकार ने इस पर सफाई देने के बाद इन दोनों मंत्रियों को रविवार (7 जनवरी,2024) को निलंबित कर दिया।

वहीं बॉलीवुड और क्रिकेट की हस्तियों ने पीएम मोदी का समर्थन करते हुए और उनकी बेइज्जती की बात उठाते हुए पीएम का जोरदार समर्थन किया। इससे एक्स पर #ExploreIndianIsland ट्रेंड कर रहा है। इस हैशटैग पर लगातार सेलेब्स पोस्ट कर रहे हैं। पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद भारत के टूरिस्ट द्वीपों को बढ़ावा देने की माँग को सेलेब्स का खास समर्थन मिला है।

इस कड़ी में क्रिकेटर हार्दिक पांड्या, शिखर धवन, बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर, रणदीप हुड्डा सहित एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस और पूजा हेगड़े भी शामिल हो गए हैं। बताते चलें कि उनसे पहले बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम, सलमान खान, कंगना रनौत, श्रद्धा कपूर सहित क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सुरेश रैना भारतीय बीच को बढ़ावा देने के लिए फोटो सहित ट्वीट कर चुके हैं।

अभिनेत्री पूजा हेगड़े ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “छुट्टियाँ बिताने और लक्षद्वीप की जीवंत संस्कृति में गोता लगाने का इंतज़ार नहीं कर सकती!एक ऐसी मंजिल जो न महज आँखो को ही नहीं बल्कि दिल को भी लुभा लेती है।#ExploreIndianIslands”

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “2024 को यात्रा और घर के पास सुंदर और दर्शनीय स्थलों की खोज में बिताना चाहती हूँ। मेरी लिस्ट में सबसे ऊपर प्रकृति का स्वर्ग लक्ष्वादीप द्वीप है। इस वंडरलैंड के बारे में इतना सुना है कि मैं वहाँ जाने के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकती!!!”

रणदीप हुड्डा ने पोस्ट किया, “भारत बहुत सुंदर है। वीर सावरकर के जीवन के कालापानी चैप्टर की शूटिंग के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की मौलिक सुंदरता और समृद्ध इतिहास से अभिभूत हो गया था.. जरूर जाएँ।”

वही एक्टर अर्जुन कपूर ने ट्वीट किया, “खूबसूरत लक्षद्वीप द्वीपों को अपनी बकेट लिस्ट में जोड़ रहा हूँ। हमारे देश के ये स्थल सिर्फ मानचित्र के निशान नहीं हैं; ये आतिथ्य, विविध संस्कृतियों और लैंडस्केप का अनुभव करने के लिए निमंत्रण हैं, जो भारत को घूमने के लिए एक अविश्वसनीय जगह बनाते हैं।”

वहीं क्रिकेटर हार्दिक पांड्या ने ट्वीट किया, “भारत के बारे में जो कहा जा रहा है उसे देखकर बेहद दुख हुआ। अपने भव्य समुद्री जीवन, सुंदर समुद्र तटों के साथ, लक्षद्वीप एक आदर्श जगह है और पक्के तौर से ये मुझे अपनी अगली छुट्टियों में वहाँ जरूर जाना चाहिए।”

क्रिकेटर शिखर धवन भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने पोस्ट किया, “भारत के लिए एक सरकारी मंत्री (मालदीव) के नकारात्मक रुख को ‘निजी राय’ करार दिया जाना निराशाजनक है। मैं इस तरह के बर्ताव की निंदा करते हुए और मालदीव और भारत के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए एक राजनयिक समाधान की माँग करता हूँ।”

विरेंद्र सहवाग भी पीएम मोदी के समर्थन में उतरते हुए पोस्ट किया,”चाहे वह उडुपी के खूबसूरत समुद्र तट हों, पोंडी में पैराडाइज बीच, अंडमान में नील और हैवलॉक और हमारे देश भर में कई अन्य खूबसूरत समुद्र तट हों, भारत में ऐसी कई अज्ञात जगह हैं जिनमें कुछ बुनियादी ढाँचे के सहारे के साथ बहुत अधिक संभावनाएं हैं।”

सहवाग ने आगे लिखा, “भारत सभी आपदाओं को अवसर में बदलना जानता है और मालदीव के मंत्रियों के हमारे देश और हमारे प्रधानमंत्री पर यह कटाक्ष भारत के लिए पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने और हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बुनियादी ढाँचे के निर्माण करने का एक बड़ा अवसर है। कृपया अपने पसंदीदा अज्ञात खूबसूरत जगहों के नाम बताएँ।”

social media ExploreIndianIslands trends after maldives ministers comment over pm modi Lakshadweep visit

कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली की भी वापसी: वर्ल्ड कप से पहले T20 टीम में लौटे दोनों दिग्गज, पंड्या-सूर्या बाहर

अफगानिस्तान के खिलाफ खेली जाने वाली 3 मैचों की सीरीज के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे धुरंधरों की टी-20 टीम में वापसी हुई है। जून महीने में वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले वाले टी-20 विश्वकप से पहले दोनों का भारतीय टीम में वापस आना सुखद संकेत हैं। दोनों ही खिलाड़ी 2022 से T20 टीम से बाहर चल रहे थे। रोहित शर्मा और विराट कोहली एक बार फिर से भारतीय टीम के लिए विश्वकप जीत का सपना देखने लगे होंगे। वैसे, रोहित शर्मा ने टीम में लौटने के साथ ही कप्तानी भी सँभाल ही है।

भारतीय टीम से सूर्य कुमार यादव और हार्दिक पांड्या दोनों ही चोट की वजह से बाहर हैं। दोनों को ही कुछ मैचों से कप्तानी की जिम्मेदारी दी जा रही थी। वहीं, रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पांड्या को मुंबई इंडियंस का भी कप्तान बना दिया गया था, जिसके बाद से माना जा रहा था कि रोहित शर्मा शायद ही इस फॉर्मेंट में दोबारा खेलें। लेकिन रोहित शर्मा ने कप्तान के तौर पर इस फॉर्मेट में वापसी की है।

रोहित शर्मा और विराट कोहली की अगुवाई में मजबूत भारतीय टीम को अफगानिस्तान के खिलाफ उतारा जा रहा है, जिसमें जोशीले युवाओं को भी जगह मिली है। संजू सैमसन एक बार फिर से टीम में शामिल हुए हैं, तो ऑलराउंडर के दौर पर शिवम दुबे को भी मौका मिला है। वहीं, रिंकू सिंक और मुकेश कुमार को भी टीम में जगह मिली है।

बता दें कि भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर हाल ही में दक्षिण अफ्रीका गए थे, जहाँ भारतीय टीम टेस्ट सीरीज खेल रही थी। उन्होंने विराट कोहली और रोहित शर्मा को टीम में वापसी के लिए मनाया।

अफगानिस्तान के खिलाफ घोषित की गई भारतीय टीम इस प्रकार है-

रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, जितेश शर्मा (विकेट कीपर), संजू सैम्सन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, आवेश खान और मुकेश कुमार।

बता दें कि विराट कोहली और रोहित शर्मा ने साल 2022 में टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल में हार के बाद से एक भी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला। अब अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 टीम वापसी से रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए आगामी विश्वकप में भाग लेने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ये टी-20 विश्वकप वेस्टइंडीज और अमेरिका में संयुक्त रूप से आयोजित किए जाएँगे, जिसका शेड्यूल जारी कर दिया गया है। भारतीय टीम अपने सारे मुकाबले अमेरिका में खेलेगी।

मालदीव के 3 मंत्री बर्खास्त: PM मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी से आया राजनीतिक भूचाल, 2 पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी की निंदा

रविवार का दिन मालदीव की राजनीति के लिए अच्छा नहीं रहा। भारत विरोध के दम पर सत्ता में आए राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू को इस कदर बैकफुट पर आना पड़ा कि उनके अपने ही तीन खास मंत्रियों को बर्खास्त करना पड़ा। खास बात ये है कि अब तक मोइज्जू की चुनावी जीत में इन चेहरों ने अहम भूमिका निभाई थी, जिन्हें पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद बढ़े दबाव के बीच हटाना पड़ा। भारत सरकार नहीं, बल्कि भारतीयों से मिल रही तीखी प्रतिक्रिया को देखते हुए मालदीव की सरकार ने ये कदम उठाया।

भारत ने मालदीव की सरकार के सामने तीन मंत्रियों के विवादित बयानों को लेकर अपनी बात रखी थी। इसके बाद मालदीव की सरकार ने मंत्री मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद को उनके पदों से हटा दिया है। मालदीव के एटोल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस विवाद को बढ़ाने वाले मंत्रियों को हटा दिया गया है।

मरियम शिउना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्ष्यदीप यात्रा के बाद उनका अपमान किया था। उन्होंने पीएम मोदी को जोकर कहा था और उनका वीडियो शेयर किया था। हालाँकि विरोध बढ़ने पर उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन भारत में विरोध तेजी से बढ़ने लगा। सरकार ने आधिकारिक तौर पर नाराजगी जताई।

भारत के नाराजगी जताने के बाद मालदीव के विदेश मंत्रालय ने अपमानजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जारी की थी। फिर एक घंटे बाद ही मरियम शिउना और मालशा शरीफ के साथ-साथ युवा मंत्रालय के एक अन्य उप मंत्री महज़ूम माजिद को निलंबित कर दिया गया। राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने निलंबन की पुष्टि की।

इस मामले में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने कहा था कि मैं सोशल मीडिया पर मालदीव सरकार के मंत्रियों द्वारा भारत के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही घृणास्पद भाषा की निंदा करता हूँ। भारत हमेशा मालदीव का एक अच्छा दोस्त रहा है और हमें इस तरह की कठोर टिप्पणियों को हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती पर नकारात्मक प्रभाव डालने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी पीएम मोदी के खिलाफ मरियम शिउना की अपमानजनक टिप्पणी की निंदा की और इसे ‘भयानक भाषा’ बताया। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री अहमद अदीब ने लंबा पोस्ट करके मंत्रियों के बयानों की निंदा की।

दरअसल, चीन के समर्थन से भारत विरोधी माहौल बनाकर सत्ता में आए मोहम्मद मोइज्जू को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि वो जिन भावनाओं को अपने सहयोगियों के नाम पर भड़का रहे हैं, उसमें उनका हाथ खुद ही जल जाएगा। अब तक भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में लगभग सफल रहे और इंडिया आउट का नारा देकर सत्ता में आए मोइज्जू भारत को आँख ही दिखा रहे थे। उनकी सरकार ने भारत द्वारा दिए गए नौसैनिक डॉर्नियर विमान और उसे मैनेज करने वाली टीम को वापस करने के लिए कहा था।

यही नहीं, मोइज्जू ने भारत से एक सर्वे काम भी छीन लिया था और उसे चीन के हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली थी। लेकिन इस विवाद के बाद अब मोइज्जू बैकफुट पर हैं। इस बार सिर्फ भारत की सरकार ही नहीं, आम लोग भी मोइज्जू के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। मालदीव की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में अधिकांश हिस्सा भारतीयों का है, ऐसे में भारतीयों ने मालदीव का बहिष्कार शुरू कर दिया, तो देश पर आने वाली तंगहाली को देखते हुए मोइज्जू को अपने मंत्रियों को सस्पेंड करना पड़ा है।

जिसने राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल, पत्रकार ने उसके हाथों अवॉर्ड लेने से कर दिया इनकार: ‘जय श्री राम’ से गूँज उठा दर्शक दीर्घा

‘मुंबई तरुण भारत’ के संपादक तरुण शेलार को पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए दर्पणकार बालशास्त्री जांभेकर साहित्य पुरस्कार दिया जा रहा था। शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को आयोजित दर्पणकर बालशास्त्री जांभेकर मेमोरियल पुरस्कार कार्यक्रम में मंच से कार्यक्रम के अध्यक्ष, मराठी दैनिक समाचार पत्र ‘देशोन्नति’ के संपादक – प्रकाश पोहारे द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना था। इस दौरान मंच से सभी लोगों ने अपनी राय रखी, जिसमें प्रकाश पोहारे ने तमाम मुद्दों के साथ ही भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा दिया।

इस बात से नाराज तरुण शेलार ने मंच से ही नाराज़गी जताई और उनके (प्रकाश पोहारे) हाथों पुरस्कार लेने से ही मना कर दिया। इसके बाद मराठी दैनिक समाचार पत्र ‘दैनिक प्रहार’ के संपादक सुकृत खांडेकर ने दर्पणकार बालशास्त्री जांभेकर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया।

महाराष्ट्र में 6 जनवरी को बालशास्त्री जांभेकर द्वारा शुरू की गई अंग्रेजी और मराठी पत्रिका ‘दर्पण’ के पहले प्रकाशन की स्मृति में पत्रकार दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें नई मराठी पत्रकारिता का अग्रदूत भी कहा जाता है। उन्होंने 6 जनवरी 1832 को ‘दर्पण’ शुरू किया। मुंबई मराठी पत्रकारिता लेखक संघ (2001 में स्थापित) अपना स्थापना दिवस मनाता है और 5 जनवरी को बालशास्त्री जांभेकर की स्मृति में हर साल एक पत्रकार को पुरस्कार देता है। इस वर्ष यह पुरस्कार किरण शेलार को प्रदान किया जा रहा है।

बालशास्त्री जांभेकर को मराठी पत्रकारिता का पुरोधा माना जाता है (फोटो साभार: नेशन नाउ)

महा एमटीबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम का आयोजन मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय के सुरेंद्र गावस्कर मेमोरियल हॉल में किया गया था। इस अवसर पर पत्रकारों और लेखकों का एक लिटरेचर-फेस्टिवल भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ भालचंद्र मुनगेकर थे। मंच पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में सिसिलिया कार्वाल्हो और सुकृत खांडेकर शामिल थे। इस कार्यक्रम का अध्यक्ष प्रकाश पोहरे को बनाया गया था। मुंबई के दादर इलाके में इस कार्यक्रम के लिए मुंबई मराठी पत्रकारिता लेखक संघ के अध्यक्ष एकनाथ बिरवाडकर और संघ के अन्य पदाधिकारी और कई पत्रकार, लेखक और अन्य लोग उपस्थित थे।

पुरस्कार समारोह से पहले सभी अतिथियों ने अपने विचार रखे। प्रकाश पोहरे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। अपने भाषण के दौरान, उन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया और राम मंदिर के साथ-साथ अयोध्या में मंदिर के आगामी अभिषेक समारोह के लिए चल रही भव्य तैयारियों की भी आलोचना की। इसके बाद प्रकाश पोहरे ने दलितों, जनजातीय समाज, वंचितों आदि की समस्याओं पर बात रखी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरण शेलार खड़े हुए और कहा, ”इस देश की जो समस्याएँ पहले के वक्ताओं ने उठाई हैं, वे वास्तविक हैं और भगवान श्री राम का अस्तित्व भी वास्तविक है। इसलिए मुझे उन लोगों से पुरस्कार नहीं चाहिए जो मानते हैं कि श्री राम एक कल्पना हैं, मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। हालाँकि, मैं मराठी पत्रकारिता के पुरोधा बालशास्त्री जाम्भेकर का अपमान नहीं करना चाहता। इसलिए मुंबई मराठी पत्रकारिता लेखक संघ को यह निर्णय लेना चाहिए कि पुरस्कार देना है या नहीं।”

पुरस्कार समारोह में बोलते हुए किरण शेलार (फोटो साभार: महा एमटीबी)

पुरस्कार स्वीकार न करने के किरण शेलार के रुख का सभागार में मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ भव्य स्वागत किया। दर्शकों ने भी उन्हें अवॉर्ड से ज्यादा इस स्टैंड के लिए बधाई दी। इसके बाद आयोजकों ने किरण शेलार को ‘प्रहार’ के संपादक सुकृत खांडेकर के हाथों पुरस्कार प्रदान किया। बाद में किरण शेलार ने इस घटना के बारे में अपने सोशल मीडिया पेज पर विस्तार से जानकारी दी।

ये समाचार मूल रूप से गोपाल तिवारी द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें