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जिस जज ने खुलवाया राम जन्मभूमि का ताला, MBBS पढ़ती उनकी बेटी को ‘विशेष वर्ग’ ने किया था टॉर्चर: मुलायम सरकार में प्रमोशन भी नहीं

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए कई लोगों ने संघर्ष किया है। इसमें उन जज ‘कृष्ण मोहन पांडे’ का नाम भी आता है जिन्होंने हिंदुओं को वहाँ पूजा करने की इजाजत दी। इस एक फैसले के बाद उनके जीवन में जो उथल-पुथल मची, उसका किसी को अंदाजा भी नहीं है। बताया जाता है कि हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देने के बाद उन्हें पाकिस्तान से तो धमकियाँ आती ही थीं। देश में भी उनके साथ अन्याय होना शुरू हो गया था। इस फैसले को देने की वजह से तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा उनका प्रमोशन रोक दिया गया था। पदोन्नति पाने के लिए उन्हें कोर्ट में लड़ाई लड़नी पड़ी थी। इतना ही नहीं उनकी बेटी को क्लास में एक खास वर्ग द्वारा परेशान किया जाता था, जिसका जिक्र बहुत कम पढ़ने को मिलता है।

बेटी को किया गया प्रताड़ित

आज राम मंदिर में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इसी क्रम में जज कृष्ण मोहन पांडे के फैसले को भी याद किया जा रहा है जो उन्होंने 1 फरवरी 1986 को दिया था। इसी आदेश में जन्मभूमि का ताला खोलकर हिंदुओं को वहाँ पूजा पाठ करने की इजाजत दी गई थी। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, केएम पांडे की बेटी मधु पांडे की मानें तो उनके पिता लंबित मामलों के खिलाफ थे और इसीलिए उन्होंने इस मामले में सीधा निर्णय सुनाया। वह किसी तरह दबाव में नहीं थे। जब वे फैजाबाद (अब अयोध्या) के जिला जज नियुक्त हुए तो उन्होंने 40 वर्ष से लंबित इस मुकदमे को प्राथमिकता दी थी।

मधु पांडे के अनुसार उनके पिता ने खुद गजेटियर से लेकर पुराने साक्ष्यों का तीन से चार माह तक गहन अध्य्यन किया था। इसके बाद उन्होंने सारे साक्ष्य जुटाए थे। जब उन्हें कहीं ये बात नहीं मिली कि मंदिर का ताला क्यों बंद है तो उन्होंने 1 फरवरी 1986 को अपना ऐतिहासिक निर्णय दिया। इस फैसले को न हाईकोर्ट ने पलटा न सुप्रीम कोर्ट ने। मगर इस एक निर्णय से सब तत्कालीन सरकार बिलबिला गई।

उन्होंने उनकी पदोन्नति रोक दी। वहीं कृष्ण मोहन पांडे के फैसला देने के बाद उनकी बेटी को भी प्रताड़ित किया गया। वह उस समय केजीएमसी में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। जब क्लास में सबको पता चला कि ताला खोलकर पूजा पाठ करने की अनुमति देने का फैसला उनके पिता का है तो उन्हें एक ‘वर्ग’ द्वारा बहुत परेशान किया गया। हालत ऐसी कर दी गई कि उन्हें कई पेपर छोड़ने की स्थिति बन गई।

केएम पांडे के भतीजे सुजीत पांडे बताते हैं कि एक फैसला सुनाने के लिए उन्होंने अपने चाचा को 8-8 घंटे रिसर्च करते देखा था। करीबन 6 माह तक ऐसा रहा। लेकिन किसी को उन्होंने भनक भी नहीं लगने दी कि वह किस मुकदमे पर काम कर रहे हैं। सुजीत पांडे ये भी बताते हैं कि उनके चाचा को एक ज्योतिषी प्रो कुन्ने ने कहा था कि कुछ समय बाद उनका एक छोटे जिले में ट्रांसफर होगा, वह वहाँ जाने से मना न करें। उन्हें प्रसिद्धि मिलेगी। जब केएम पांडे का ट्रांसफर फैजाबाद हुआ और उनके सामने अयोध्या का मामला आया तो वो समझ गए कि यही वो केस है। उन्होंने दिन रात मेहनत करके इस फैसले पर निर्णय दिया।

वानर खुद बैठा था फैसला सुनने

1991 में उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘अंतरआत्मा की आवाज’ में लिखा, ”जिस दिन मैं ताला खुलवाने का फैसला दे रहा था उस दिन मुझे बजरंगबली के वानर के रूप में दर्शन हुए। मेरे दरबार की छत पर एक काला बंदर दिन भर झंडा-स्तंभ पकड़े बैठा रहा। जो लोग इस फैसले को सुनने के लिए दरबार में आए थे, वे उन्हें चना दे रहे थे और उस बंदर को मूँगफली, लेकिन मजे की बात है कि उस बंदर ने कुछ भी नहीं खाया। वह चुपचाप झंडा चौकी पकड़कर लोगों को देखता रहा। वह मेरे आदेश सुनाते ही चला गया। जब फैसला देने के बाद डीएम और एसएसपी मुझे घर ले गए तो मैंने देखा कि वही बंदर मेरे घर के बरामदे में बैठा है। मैं बहुत हैरान हुआ। मैंने उसे प्रणाम किया। वह कोई दिव्य शक्ति रही होगी।”

मुलायम सरकार ने रोकी पदोन्नति

इसी फैसले के बाद जब केंद्र सरकार के पास हाईकोर्ट में प्रमोट करने वाले जजों की लिस्ट भेजी गई तो कृष्ण मोहन पांडे के नाम के साथ मुलायम सिंह यादव ने भी अपना नोट छोड़ा। इस नोट में लिखा था– “पांडे जी सुलझे हुए ईमानदार तथा कर्मठ जज हैं। फिर भी 1986 में राम जन्मभूमि का ताला खुलवाने का आदेश देकर उन्होंने सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा की थी, इसलिए मैं उनके नाम की सिफारिश नहीं करता।” बस इसी नोट के कारण केएम पांडे पदोन्नति के लिए नामित होने के बाद भी प्रमोशन न पा सके।

बाद में 13 जनवरी 1990 को विश्व हिंदू परिषद अधिवक्ता संघ के तत्कालीन महासचिव हरिशंकर जैन ने इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। तब जाकर कृष्ण मोहन पाण्डेय को हाई कोर्ट में पदोन्नति मिली। जानकारी के अनुसार, याचिका में जस्टिस पांडेय के प्रमोशन की माँग करते हुए कहा गया था कि यूपी सरकार ने 15 लोगों का नाम केंद्र को भेजा था, जिसमें मुख्यमंत्री का लिखा उक्त कथित नोट लगा हुआ था। केंद्रीय कैबिनेट ने वह सूची विचार के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भेजी। सीजेआई ने उसमें से 7 नामों को मंजूरी दी, जिसमें जस्टिस पांडेय का नाम भी शामिल था। लेकिन, केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने सीजेआई की ओर से सूची में मंजूर कर भेजे गए 7 नामों में से 6 को नियुक्ति की मंजूरी दी और जस्टिस पांडेय का नाम रोक लिया। बाद में उनसे कनिष्ठ जज आरके अग्रवाल को हाई कोर्ट प्रमोट किया गया।

मिस्टर सिन्हा को जान से मारने की धमकी: कौन हैं, क्या किया… क्यों एक ट्वीट से मालदीव ने टेके घुटने, 3 मंत्रियों की हुई छुट्टी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की यात्रा की और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया। इन तस्वीरों को और पीएम मोदी की यात्रा को भारत में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम माना गया। इस बीच, एक एक्स यूजर मिस्टर सिन्हा ने कुछ ऐसा लिख दिया कि सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। इस जंग में कूदे मालदीव के एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन मंत्रियों को छुट्टी हो गई। मालदीव सरकार को सफाई देनी पड़ी, इसके बावजूद भारतीयों ने मालदीव का बायकॉट कर दिया है और मालदीव की भारत विरोधी सरकार को लोग जमकर सुना रहे हैं। तो आखिर ये मिस्टर सिन्हा हैं कौन? जिनके ट्वीट पर इतना बड़ा बवाल हो गया।

दरअसल, मिस्टर सिन्हा का पूरा नाम रौशन सिन्हा है और वो एक राजनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पीएम मोदी की एक वीडियो को साझा किया था। सिन्हा ने पीएम मोदी द्वारा लक्षद्वीप के पर्यटन को बढ़ाने देने की अपील को री-ट्वीट करते हुए मालदीव की सरकार को चीन की कठपुतली सरकार बता दिया। उन्होंने लिखा, “क्या बढ़िया कदम है! यह मालदीव की नई चीनी कठपुतली सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। साथ ही इससे लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।”

इस पोस्ट ने मालदीव की युवा अधिकारिता, सूचना और कला उप मंत्री मरियम शिउना को परेशान कर दिया। सिन्हा की उस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मालदीव की नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “विदूषक” और “इजरायल की कठपुतली” कह दिया। इस मामले में सोशल मीडिया पर जबरदस्त बखेड़ा खड़ा हो गया। जिसके बाद मालदीव में सत्ताधारी पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ शिउना को निलंबित कर दिया गया है।

इस पूरे मामले के बाद मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर एक पोस्ट किया और उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि ये मामला मालदीव तक पहुँच गया है और कई मालदीववासी इससे आहत हैं। मैं बस ये साफ करना चाहता हूँ कि हम मालदीव के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि तुम्हारे चीनी कठपुतली सरकार के खिलाफ हैं, जो भारत विरोधी है।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मालदीव में विपक्ष भारत समर्थक है जबकि मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ सरकार चीन समर्थक है। बता दें कि ये विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब 8 जनवरी को मुइज्जू चीन की यात्रा पर जाने वाले थे। सिन्हा ने भारतीयों की ताकत को रेखांकित करते हुए लिखा, “विदेश मंत्रालय ने ऐसे समय में मालदीव के दूत को बुलाया, जब मालदीव के राष्ट्रपति चीन में हैं। यह एक तरह से चीन के लिए भी बड़ा संदेश है।” सिन्हा ने कहा कि भारत विरोधी शक्तियों के खिलाफ अब भारतीय एकजुट हो गए हैं।

मिस्टर सिन्हा गुजरात में रहने वाले व्यवसाई हैं। वो मूलरूप से बिहार के हैं। सिन्हा भारत की राजनीति, वैश्विक राजनीति और विदेश नीति में रूचि रखते हैं। वो अपनी हिंदू पहचान पर गर्व भी करते हैं। अपनी राजनीतिक चेतना के बारे में बात करते हुए मिस्टर सिन्हा का कहना है कि साल 2014 के बाद से भारतीयों के आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि हुई है। मिस्टर सिन्हा पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। उनका एक अकाउंट भले ही सस्पेंड हो गया है, लेकिन उनके एक्स सोशल मीडिया पर 167k से ज्यादा फॉलोवर हैं।

सिन्हा ने ऑपइंडिया को बताया कि ये विवाद शुरू होने के बाद से उन्हें इनबॉक्स में कई लोगों ने जान से मारने की धमकी दी है, तो कई लोगों ने गालियाँ भी दी हैं। हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि भारतीयों द्वारा मालदीव के बहिष्कार को भारत सरकार का भी समर्थन मिलता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि मालदीव में सरकार का बदलना भारत के लिए अच्छा ही होगा। 7 जनवरी को सूत्रों के हवाले से मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर दावा किया कि मालदीव का पर्टयन विभाग भारत विरोधी अभियान को हवा दे रहा है।

सिन्हा ने कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “मालदीव में राष्ट्रपति मुइज्जू के करीबी लोग, उनके मंत्री और कुछ व्यापारिक घराने भारत विरोधी अभियान को हवा देने में जुटे हैं, क्योंकि वो चीन को खुश करना चाहते हैं। वो कुछ समय में चीन भी जाने वाले हैं।” हालाँकि अब मुइज्जू चीन पहुँच चुके हैं।

मालदीव के एक अखबार ने भारत विरोधी पोस्ट शेयर किया था, जिसमें मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों पर तुरंत रोक लगाने का आह्वान किया गया था। इस पोस्ट में यूरोपीय पर्यटकों और भारतीय पर्यटकों के बीच तुलना की गई थी और बताया गया था कि यूरोप के पर्यटक भारतीयों से बेहतर क्यों है। इसमें भारतीय पर्यटक के तौर पर मिस्टर सिन्हा की तस्वीर इस्तेमाल की गई थी।

ऐसे में जब सिन्हा ने लक्षद्वीप को लेकर पोस्ट किया और मालदीव को आईना दिखाया, तो मालदीव की भारत विरोधी ताकतें नाराज हो गईं और भारतीयों को नीचा दिखाने की कोशिश में जुट गए। इसी कड़ी में उन्होंने पीएम मोदी का भी अपमान करने की कोशिश की। इसके बाद जब भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, तो मालदीव की सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने तीन मंत्रियों को पद से हटाना पड़ा। वहीं, इस बीच मालदीव में भारत समर्थक नेताओं ने भारत का जबरदस्त समर्थन किया। इस विवाद के बीच इस बात की जरूरत भी थी कि मालदीव के जिम्मेदार लोग या जो पहले जिम्मेदार पदों पर रहे हैं, वो भारत को लेकर अपना रुख साफ करें। कई पूर्व राष्ट्रपतियों और मंत्रियों ने ऐसा किया भी और भारत के साथ दोस्ती की कसमें खाईं।

वैसे, इस पूरे मामले में एक बात तो साफ हो गई कि मालदीव का भारत विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। इससे भी जरूरी बात ये हुई कि भारतीय लोग जाग गए और उन्होंने पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखा दी। अब इस मामले में भले ही तीन मंत्रियों को हटा दिया गया हो, लेकिन भारतीय लोग #VisitMaldives के विरोध में #Explore IndianIslands #BoycottMaldives #MaldivesOut #LakshadweepTourism जैसे हैशटैग लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और मालदीव को घुटने पर ला रहे हैं।

लड़की को हिन्दू लड़के से था प्यार, अम्मी ने सिर में गोली मार दी गोली: झारखंड में 15 साल की नाबालिग की ‘ऑनर किलिंग’

झारखंड के गिरिडीह में ऑनर किलिंग का मामला सामने आया है। यहाँ अम्मी ने अपनी 15 साल की बेटी की ही गोली मार कर हत्या कर दी। असल में नाबालिग लड़की को मोहल्ले के ही एक लड़के से प्यार था और वो उस लड़के से शादी भी करना चाहती थी। पुलिस ने हत्यारी अम्मी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। साथ ही हत्या में जिस पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था, उसे भी जब्त कर लिया गया है। मामला बगोदर के हरिजन मोहल्ले का है। अम्मी ने बेटी की लव मैरिज से इनकार कर दिया, क्योंकि लड़का हिन्दू समुदाय का था।

मामला मुस्लिम परिवार का है। घटना शनिवार (6 जनवरी, 2024) की है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और तनाव व्याप्त हो गया। अम्मी ने खुद थाने पहुँच कर बेटी की हत्या वाली बात बताई। इसके बाद ये खबर पूरे इलाके में फैल गई। मृतका के अब्बा ने बगोदर थाने में शिकायती पत्र दिया है, जिसमें अपनी पत्नी को ही उसने आरोपित बताया है। SDPO नौशाद आलम ने इसकी पुष्टि की है कि प्रेम प्रसंग में माँ ने अपनी ही बेटी की गोली मार कर हत्या कर दी है।

पुलिस ने बताया कि लड़की की अम्मी उसकी शादी कहीं और करना चाहती थी, लेकिन बेटी अड़ी रही कि वो उसी से शादी करेगी जिसे वो प्यार करती है। अभी इसकी जाँच ही चल रही है कि पिस्टल कहाँ से आया था और किसने मँगाया था। अम्मी ने बेटी की मनाही के बावजूद उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी और 15 जनवरी से निकाह की रस्में भी शुरू होने वाली थीं। 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी का उस दिन सुबह से ही अमित के साथ झगड़ा चल रहा था।

मारपीट भी हुई, जिसे पड़ोसियों ने हस्तक्षेप कर शांत कराया था। शाम को गोली चलने की आवाज़ सुनी गई। बेटी रुखसाना की हत्या के बाद अम्मी फरजाना खातून थाने पहुँची और कबूल किया कि उसने अपनी बेटी की हत्या कर दी है। रुखसाना के सिर पर गोली के निशान थे। एसपी दीपक शर्मा ने भी कहा कि हत्या अम्मी ने ही की है, मामला लव मैरिज बनाम अरेंज मैरिज के विवाद का है। मृतका के अब्बा अंजान खान मैकेनिक हैं। 3 साल से परिवार इसी किराए के मकान में रहता है। घटना के वक्त अब्बा नहीं थी, जबकि लड़की की नानी घर में थी।

गौरक्षक बिट्टू बजरंगी के भाई की मौत: हमलावरों ने पेट्रोल डालकर जला दिया था, दिल्ली के AIIMS में हो रहा था इलाज

गौ-रक्षक बिट्टू बजरंगी के भाई 32 वर्षीय महेश पांचाल की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई है। बीते साल 13 दिसंबर को फरीदाबाद में कुछ कार सवार बदमाशों ने महेश पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। इसके बाद वे 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे और उनका दिल्ली के AIIMS में इलाज चल रहा था।

गौरतलब है कि 13 दिसम्बर 2023 को बिट्टू बजरंगी के भाई महेश को जान से मारने का प्रयास किया गया था। हमलावरों ने महेश के ऊपर फरीदाबाद की दाबुआ कॉलोनी में थिनर डाल कर आग लगा दी थी। महेश को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया था। महेश का शरीर इस हमले में 60% जल चुका है।

इस हमले के विषय में फरीदाबाद पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया गया था, जिसकी जाँच हरियाणा पुलिस की SIT कर रही है। इसी मामले में 22 दिसम्बर 2024 को ‘हिन्दुतान टाइम्स’ में लीना धनखड़ नाम की एक पत्रकार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

HT में प्रकाशित इस खबर में लिखा था कि फरीदाबाद पुलिस ने कहा है कि बिट्टू बजरंगी के भाई अलाव में गिर जाने के कारण जल गए थे और उनकी हत्या के प्रयास के कोई सबूत नहीं हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल के जलने के मामले में पुलिस में फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई और एक गौतस्कर को इसमें फँसाया गया।

हालाँकि, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की इस खबर को नकार दिया था। फरीदाबाद के ACP ने इस खबर के बारे में बताए जाने पर पूछा कि आखिर पुलिस में किसने इस केस को फेक बता दिया? उन्होंने कहा कि ये बात ठीक है कि अभी इस मामले में आरोपित के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि केस फर्जी होने की बात कही गई है। उन्होंने इसकी पुष्टि की थी कि बिट्टू बजरंगी के भाई जल गए हैं।

इसके बाद बिट्टू बजरंगी अपने भाई की हत्या के प्रयास को झूठा बताकर फेक न्यूज फैलाने के आऱोप में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि जुबैर ने उनके और उनके भाई के बारे में पहले भी अफवाहें फैलाई हैं। इस बार उनके झूठी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस घिनौनी कार्रवाई को अंजाम दिया, जबकि उनका भाई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

HT में खबर प्रकाशित होने और जुबैर द्वारा इसे प्रचारित करने के बाद बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि इसको लेकर वह कार्रवाई करेंगे। इसके बाद उन्होंने गुुरुवार (28 दिसंबर 2023) को फरीदाबाद पुलिस को शिकायत दी थी। बिट्टू बजरंगी द्वारा पुलिस से की गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसमें उन्होंने जुबैर को कट्टरपंथी और घोर सांप्रदायिक बताया है।

 

Beaches Of India… समुद्री तटों का आनंद लेना चाहते हैं तो ये कंपनी दे रही भारी डिस्काउंट, लक्षद्वीप यात्रा के लिए भी ऑफर

सोशल मीडिया से निकली बहस ने मालदीव के तीन मंत्रियों की कुर्सी छीन ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप की यात्रा के बाद शुरू हुए विवाद ने मालदीव के पर्यटन को काफी नुकसान पहुँचाया है। वहीं, भारत का लक्षद्वीप एकाएक लोगों की नजर में आ गया है। बुकिंग करने वाली कंपनी ‘मेक माय ट्रिप’ ने बताया है कि लक्षद्वीप के बारे में लोग खूब सारी इन्क्वॉयरी कर रहे हैं। सिर्फ लक्षद्वीप ही नहीं, भारत के अन्य बीच वाले ठिकानों के बारे में भी लोग जानना चाह रहे हैं।

सोशल मीडिया पर #BoycottMaldives ट्रेंड के बीच लोग बीच (Beach) वाले भारतीय शहरों के बारे में सर्च कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, लक्षद्वीप के लिए उसके प्लेटफॉर्म पर हुए सर्च में 3400% की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद ‘मेक माय ट्रिप’ ने लक्षद्वीप के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम “Beaches of India” है।

इस अभियान में कंपनी लक्षद्वीप और अन्य भारतीय द्वीपों के लिए यात्रा पैकेजों में छूट एवं ऑफर प्रदान कर रही है। वहीं, लक्षद्वीप के बारे में गूगल पर 50 हजार से अधिक लोगों ने सर्च किया।

सर्च में 3400 प्रतिशत की बढ़ोतरी

मेक माय ट्रिप ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “न्यूज़फ्लैश: हमने माननीय प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद से लक्षद्वीप के लिए ऑन-प्लेटफॉर्म खोजों में 3400% की वृद्धि देखी है। भारतीय समुद्र तटों में इस रुचि ने हमें भारतीय यात्रियों को देश के आश्चर्यजनक समुद्र तटों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है और इसके लिए ऑफ़र एवं छूट के साथ मंच पर ‘भारत के समुद्र तट’ अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। इस स्थान को देखते रहें!“

ट्रैवल कंपनी ने मालदीव के लिए बुकिंग कैंसिल की

एक अन्य ट्रैवल वेबसाइट, EaseMyTrip ने घोषणा की है कि उसने मालदीव के लिए उड़ानों और होटलों की सभी बुकिंग को रद्द कर दिया है। एक्स पर एक पोस्ट में कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ निशांत पिट्टी ने कहा कि मालदीव के मंत्रियों द्वारा पीएम मोदी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद सभी मालदीव उड़ान बुकिंग निलंबित कर दी गई हैं।

EaseMyTrip के सह-संस्थापक प्रशांत पिट्टी ने कहा, “हमारी कंपनी पूरी तरह से घरेलू और भारत में बनी है। पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा पर मालदीव के सांसद की पोस्ट पर विवाद के बीच हमने फैसला किया है कि हम मालदीव के लिए कोई भी बुकिंग स्वीकार नहीं करेंगे। हम चाहते हैं कि अयोध्या और लक्षद्वीप अंतर्राष्ट्रीय डेस्टिनेशन बने।”

गौरतलब है कि लक्षद्वीप द्वीप समूह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। यह द्वीपसमूह हिंद महासागर में स्थित है। लक्षद्वीप में कई खूबसूरत समुद्र तट हैं। द्वीप समूह में कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं। वहीं, मालदीव भारतीय पर्यटकों के लिए लोकप्रिय पर्यटनस्थलों में से एक है। देश के पर्यटन मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक, साल 2023 के दौरान मालदीव जाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा थी। भारत से 2.05 लाख पर्यटन मालदीव पहुँचे थे तो दूसरे नंबर पर 2.03 लाख पर्यटक रूस से मालदीव पहुँचे थे।

704 किलोमीटर स्केटिंग कर के जयपुर से अयोध्या पहुँचेगा 10 साल का हिमांशु, कहा – ठण्ड है, लेकिन भगवान श्रीराम की कृपा है: रामेश्वरम से अगस्त्य भी निकले

भगवान राम के 10 साल के भक्त ने जयपुर से अयोध्या तक स्केटिंग करने का फैसला किया है। 10 साल का हिंमाशु सैनी पूरे 7 दिन की स्केटिंग करके अयोध्या पहुँचेगा। हिमांशु जयपुर के कोटपुतली के रहने वाले हैं। हिमांशु सैनी को कोटपूतली के अंग्रेशन तिराहे से कोटपूतली विधायक के प्रतिनिधि तरुण पटेल और समाज सेवी मुकेश गोयल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हिमांशु के साथ उसके पिता व भाई भी उसके साथ रहेंगे। वहीं, अगस्त्य 80 दिन स्केटिंग करके रामेश्वरम से अयोध्या पहुँच रहे हैं।

हिमांशु की अयोध्या तक की यात्रा के दौरान बीजेपी भी पूरी मदद करेगी। कोटपुतली के विधायक प्रतिनिधि तरुण पटेल और समाज सेवी मुकेश गोयल ने हिमांशु को रास्ते में कोई समस्या न हो, इसके लिए बीजेपी कार्यकर्ता पूरा ध्यान रखेंगे। उन्होंने कहा कि हिमांशु की हौसला अफजाई के लिये रास्ते मे जगह जगह प्रशासन और पुलिस को जानकारी दे दी गई है, ऐसे में उसे कोई समस्या नहीं होने पाएगी। वहीं, स्केटिंग छात्र हिमांशु सैनी ने बताया, “मेरे ऊपर भगवान रामचंद्र जी का आशीर्वाद है, उन्हीं की प्रेरणा से मैं मूर्ति स्थापना पर उनके मंदिर अयोध्या जा रहा हूँ।

भास्कर से बातचीत में हिमांशु ने कहा, “एक दिन मैं यूट्यूब पर वीडियो देख रहा था। अयोध्या में भगवान राम के उत्सव में शामिल होने लोग पैदल जा रहे थे। तब मैंने स्केटिंग करके अयोध्या तक जाने का फैसला किया। पापा और भैया भी साथ जा रहे हैं। अयोध्या यहाँ से 704 किलोमीटर है। पूरे रास्ते स्केटिंग करता जाऊँगा। ठंड तो है, लेकिन श्रीराम की कृपा है।”

रामेश्वरम से अयोध्या पहुँचने वाले हैं अगस्त्य

हिमांशु जयपुर से स्केटिंग करते हुए अयोध्या को रवाना हुए हैं, तो करीब 75 दिन पहले से रामेश्वरम से अयोध्या के लिए अगस्त्य भी निकले हैं। अगस्त्य 80 दिन की धर्मसेतु यात्रा पर है। अगस्त्य ने बताया कि सालों बाद रामलला अयोध्या मंदिर में विराजित होंगे। इसकी ही खुशी और उत्साह है। अगस्त्य का पूरा नाम अगस्त्य घनश्याम भाई है और उनकी उम्र 22 साल है। अगस्त्य 22 साल के हैं और वो भगवान राम के दर्शन के लिए रामेश्वरम से अयोध्या तक धर्मसेतु यात्रा पर स्केटिंग करते हुए निकले हैं।

‘मुस्लिमों की लाश पर बन रहा है राम मंदिर, 22 जनवरी ब्लूस्टार’: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पन्नू ने उगला जहर, खालिस्तान के बाद अब ‘उर्दूस्तान’ की माँग

भारत में वांछित सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अयोध्या में बन रहे भगवान राम के भव्य मंदिर को लेकर धमकी दी है। इसके साथ ही उसने मुस्लिमों को भी भड़काने की कोशिश की है। भारतीय मुस्लिमों से राम मंदिर उद्घाटन समारोह का विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि बाबरी ढाँचे की जगह मंदिर बनना मुस्लिमों के लिए ब्लूस्टार ऑपरेशन की तरह है। उन्होंने एक वीडियो जारी है।

अपने वीडियो में खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भड़काने की कोशिश की है। उसने कहा, “हर मुस्लिम को राम मंदिर का विरोध करना चाहिए। 22 जनवरी मुसलमानों के खिलाफ मोदी का ऑपरेशन ब्लूस्टार है। अमृतसर से अयोध्या तक हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन बंद कर दो।”

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आगे कहा, “राम मंदिर बाबरी मस्जिद पर बनाया जा रहा है। यह मुस्लिमों को शवों पर बनाया जा रहा है। यह 2 करोड़ मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन है। अब समय आ गया है मुसलमानों, तुम भारत से एक अलग देश उर्दूस्तान बनाओ।” बता दें कि पन्नू इससे पहले भी इसी तरह के वीडियो जारी कर कई बार धमकी दे चुका है।

दरअसल, अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी आतंकवादियों से खाली कराने के लिए इंदिरा गाँधी ने एक ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया था। इस आदेश को ऑपरेशन ब्लूस्टार कहा जाता था। इस ऑपरेशन को 1-8 जून 1984 को चलाया था, जिसमें भारतीय सेना ने खालिस्तानी आतंकी जनरैल सिंह भिंडारवाले को मार गिराया था। पन्नू इस भिंडारवाला को अपना आदर्श बताता है।

बताते चलें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है। वह खालिस्तान को लेकर भारत के खिलाफ जहर उगलते रहता है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर आऱोप लगाया था कि वह उसके नागरिक पन्नू की हत्या करने की कोशिश कर रहा है। इसको लेकर दोनों देश बीच रिश्ते में खटास भी आ गई थी।

गुरपतवंत सिंह पन्नू को साल 2020 में भारत ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत नामित आतंकवादी घोषित किया था। पन्नू ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हुई हत्या पर कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में भारतीय वाणिज्य दूतावासों और मिशनों को भी धमकी दी थी।

पिछले साल, उसने कनाडा की राजधानी ओटावा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और टोरंटो में महावाणिज्यदूत अपूर्व श्रीवास्तव की तस्वीरों वाले पोस्टर में प्रसारित की थी। इस पोस्टर में इन भारतीय अधिकारियों को खालिस्तानी निज्जर की हत्या में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। इसको लेकर भारत और कनाडा के संबंध भी खराब हो गए थे।

देश-विदेश में 136 शाखाएँ, करोड़ों की जमा पूँजी, खाता खुलवाने के लिए 10000 लोग लाइन में: साधारण नहीं है अयोध्या का ‘सीताराम बैंक’

सनातन की अति प्राचीन नगरियों में से एक अयोध्या नगरी में ऐसा बैंक है, जिसकी शाखाएँ देश ही नहीं, विदेशों में भी है। खास बात ये है कि यहाँ करोड़ों की जमा-पूँजी भी लोग जमा करते हैं। ये अलग बात है कि इस अनोखे बैंक में ‘धन’ राम नाम का होता है, ‘मुद्रा’ का नहीं। जी हाँ, अयोध्या में स्थित अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक में करोड़ों ‘राम नाम’ का खजाना मौजूद है।

‘राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने सन 1970 में इस अनोखे बैंक की शुरुआत की थी। तब से अयोध्या में ‘मणि राम दास छावनी’ में इस बैंक का संचालन होता है। इस बैंक में लोग ‘सीताराम’ का नाम लिखकर जमा करते हैं। आज इस बैंक की देश-विदेश में 136 शाखाएँ हैं। अयोध्या के वाल्मीकि रामायण भवन में इस बैंक का हेड ऑफिस है।

अंतर्राष्ट्रीय सीताराम नाम बैंक के मैनेजर गोपाल दास जी महाराज ने बताया कि यहाँ 28 हजार से अधिक खातेदार हैं। जिन्होंने ‘सीता राम’ नाम की करोड़ों मुद्राएँ जमा कर रखी हैं। यहाँ आप भी खाता खुलवाना चाहते हैं, तो पहले ढाई लाख ‘सीता राम’ नाम लिखकर जमा करें, और फिर अपनी सदस्यता का इंतजार करना होगा। अभी 10 हजार से अधिक लोग इस बैंक में खाता खुलवाने के लिए लाइन में हैं।

इस बैंक से बाकायदा पासबुक भी जारी किया जाता है। गोपाल दास जी महाराज कहते हैं कि इस बैंक में लोग दुनिया के कोने-कोने से आते हैं। उन करोड़ों मुद्राओं को ससम्मान सरयू जी में हमेशा के लिए जमा भी कर दिया जाता है। इस बैंक में लोग अपनी इच्छा से कुछ दान भी करते हैं, तो राम नाम लिखने के लिए खास कॉपियाँ छपवा ली जाती हैं। वो बताते हैं कि पहले 5 लाख सीताराम नाम लिखने पर खाता खुलता था, लेकिन अभी ढाई लाख सीता राम से शुरुआत कर सकते हैं। कुछ खास संख्याओं तक पहुँचने पर मंदिर की तरफ से रसीद और प्रमाण पत्र भी दिए जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक (फोटो साभार : GNTTV)

खास बात ये है कि अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक का मुख्यालय भले ही अयोध्या में है, लेकिन इसकी 136 शाखाएँ भारत के विभिन्न हिस्सों में और दुनिया भर में हैं। बैंक की शाखाएँ अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी कई भाषाओं में सेवाएँ प्रदान करती हैं। बैंक का मानना है कि राम नाम का जप करने से लोगों को शांति, सुख और मोक्ष मिलता है।

टूरिस्ट नहीं, टेररिस्ट के लिए भी ‘जन्नत’ है मालदीव, ISIS में सबसे अधिक भर्ती यहीं से: खुले में त्योहार नहीं मना सकते गैर-मुस्लिम, शरिया लागू

भारतीय उपमहाद्वीप में हिंद महासागर में एक बेहद खूबसूरत द्वीपसमूह देश है, जिसका नाम है मालदीव (Maldives)। करीब 1200 द्वीपों में फैले सुन्नी मुस्लिम बहुल देश मालदीव एशियाई महाद्वीप की मुख्य भूमि से लगभग 750 किलोमीटर की दूरी पर श्रीलंका और भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हालाँकि, मालदीव जितना खूबसूरती के लिए विख्यात है, उतना ही आतंकवाद के लिए कुख्यात भी है।

एक तरफ प्रकृति की छँटा को निहारने को उत्सुक सैलानी मलादीव में समुद्र के किनारे सुनहरे रेतों पर चलने के लिए मचलते हैं, तो दूसरी तरफ यह आतंकियों के लिए कुछ समय से जन्नत साबित हो रहा है। मालदीव में दुनिया के सबसे बर्बर इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट या आईएसआईस (ISIS या IS) और अल कायदा (Al Qaeda) अपनी जड़े जमा चुके हैं। शरिया संचालित इस मुल्क में कई आतंकी दुनिया की रडार पर हैं।

मालदीव में गैर-मुस्लिमों को आजादी नहीं

एक ऐसा भी समय था, जब यहाँ का शासन बौद्ध क्षत्रियों के हाथों में था। इसकी बानगी यहाँ के द्वीपों पर मिलने वाले बौद्ध स्तूप इसकी कहानी कहते हैं। हालाँकि, कालांतर में इस यहाँ मुस्लिमों की संख्या बढ़ती गई और आज 98 प्रतिशत से अधिक आबादी कट्टर सुन्नी मुस्लिमों की है। अब इस मुस्लिम बहुल देश में ज्यादातर बौद्ध स्तूप या तो तोड़ दिए गए हैं और फिर जर्जर हालात में हैं, जो कभी भी नष्ट हो सकते हैं।

मुस्लिम बहुल आबादी होने के साथ ही इस मुल्क में कट्टरपंथी सुन्नी की व्याख्या अपने हिसाब से करने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और अल कायदा अपना दबदबा बनाने लगे। मालदीव के बारे में अमेरिका तक कह चुका कि ये हद से ज्यादा चरमपंथी देश है। यहाँ सरकार की नीति भी इस्लामी और शरिया समर्थक है। इस देश में रहने वाली 2 प्रतिशत अन्य धर्मों की आबादी भी अपनी इच्छा के अनुसार जी सकती।

मालदीव में रहने वाले 2 प्रतिशत अन्य धर्म के लोगों को अपने धार्मिक प्रतीकों को मानने या सार्वजनिक तौर पर अपने त्योहार मनाने की छूट नहीं है। अगर किसी को मालदीव की नागरिकता चाहिए तो उसे मुस्लिम, वो भी सुन्नी मुस्लिम होना पड़ता है। मालदीव में धार्मिक मामलों को सरकार की इस्लामी मामलों का मंत्रालय (MIA) नियंत्रित करती है। यही कारण है कि आतंकी संगठनों को यहाँ पनपने का मौका मिला।

पिछले साल जुलाई में अमेरिका के गृह मंत्रालय ने मालदीव के कुछ कट्टरपंथियों एवं संगठनों को आतंकियों की सूची में डाला था। आईएसआईएस के 18 समर्थक और अल-कायदा के 2 समर्थकों सहित इन आतंकी संगठनों से संबद्ध 29 कंपनियों को इस लिस्ट में डाला था। ये लोग और संगठन आईएसआईएस-खुरासान के स्थानीय भर्तीकर्ता मोहम्मद अमीन से जुड़े थे।

मालदीव में ISIS और अल कायदा

इतना ही नहीं, यूएस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि साल 2014 से लेकर 2018 के शुरुआत तक मालदीव के 250 से ज्यादा लोग ISIS में भर्ती के लिए सीरिया चले गए। ये जनसंख्या के अनुपात में दुनिया में सबसे ज्यादा है। इनमें से काफी आतंकी मारे गए, जबकि मालदीव की ज्यादातर महिलाएँ सीरिया के कैंपों में हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, मालदीव का अड्डू शहर इस्लामी चरमपंथियों का गढ़ है। ये शहर साल 2018 के बाद एक्टिव हुआ और ISIS की विचारधारा को फैलाते हुए यहाँ पर लोगों की भर्तियाँ कर रहा है। यहाँ के कई स्थानीय गुट ISIS-K के लिए काम करते हैं। इसके लीडर इस्लामिक स्टेट तक IED और लड़ाके पहुँचाने का काम करते हैं। ये युवाओं के दिमाग में जिहाद का जहर भरकर उन्हें ISIS और अल कायदा से जोड़ते हैं।

साल 2014 के बाद भले ही मालदीव के कट्टरपंथियों का झुकाव ISIS और अल कायदा की ओर बढ़ा हो, लेकिन उससे पहले पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन वहाँ अपनी पैठ बना चुके थे। साल 2004 में मालदीव में आए सुनामी के बाद पाकिस्तान स्थित जमात-उद-दावा (जेयूडी) का एक धर्मार्थ मोर्चा इदारा खिदमत-ए-खल्क (आईकेके) मानवीय सेवा प्रदान करने की आड़ में मालदीव पहुँचा।

ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार, IKK ने मालदीव में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों का नेतृत्व किया, जिसका ध्यान युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने पर था। आईकेके ने मालदीव में 282,000 डॉलर खर्च करने की बात कही। हालाँकि, मालदीव सरकार का कहना है कि संगठन को कभी भी सुनामी के बाद राहत प्रदान करने वाले धर्मार्थ समूह के रूप में पंजीकृत नहीं किया गया था।

सीरिया और इराक में ISIS में लड़ाके के रूप में जाने से पहले मालदीव के कट्टरपंथी अफगानिस्तान की सरकार को गिराने के लिए तालिबान की भर्ती यहाँ से करते थे। मालदीव के कई नागरिक ना सिर्फ पाकिस्तान में, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में शामिल रहे हैं। सेंटर फॉर ज्वॉइंट वारफेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 5.5 लाख की आबादी वाले इस देश में इस समय लगभग 1400 आतंकी सक्रिय हैं।

मौमून गयूम ने किया मालदीव का इस्लामीकरण

इस देश का इस्लामीकरण मौमून गयूम ने किया। गयूम ने मालदीव में इस्लामीकरण को बढ़ावा दिया, जिसके कारण लोगों में कट्टरपंथ भरता गया। गयूम मालदीव का तानाशाह था, जिसने सन 1978 से लेकर 2008 तक देश पर शासन किया। उसके शासन में धार्मिक एकता संरक्षण अधिनियम 1994 लाया गया, जिसमें मालदीव के लोगों पर सुन्नी इस्लाम को थोपा गया और धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित कर दिया।

इतना ही नहीं, मालदीव में मौमून गयूम ने साल 1997 में वहाँ के संविधान में एक संशोधन किया। इस संशोधन के तहत मालदीव में इस्लाम को एकमात्र राजकीय धर्म घोषित किया गया और बाकी अन्य धर्मों के मानने को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। आगे चलकर गयूम के सौतेले भाई अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव की सत्ता पर कब्जा किया और उसने सऊदी अरब के कट्टर वहाबियों से अपने संबंधों को मजबूत किया।

अब्दुल्ला यामीन की पार्टी के वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हैं। वह भी भारत विरोधी रूख के लिए जाने जाते हैं। इसके विपरीत लोकतांत्रिक तरीके से इसके पहले वाली सरकार में चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद थोड़े नरम स्वभाव के माने जाते हैं और भारत को एक दोस्त की भूमिका में देखते हैं। इन्होंने अपने शासन काल में आतंकियों की नकेल कसने की पूरी कोशिश की थी।

रील बना कर नाचती थी रानी, पति ने मना किया तो मार डाला: मजदूरी कर पालता था परिवार, अब फाँसी पर लटका मिला शव

बिहार के बेगूसराय में एक महिला ने अपने पति की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि वह उसे इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने से रोकता था। पति को अपने मायके बुला कर महिला ने अपने परिजनों के साथ मिल कर हत्या कर दी। मृतक समस्तीपुर जिले का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार, बेगूसराय के फफौत गाँव में रहने वाली रानी कुमारी ने अपने पति महेश्वर कुमार को फाँसी पर लटका कर मार दिया। हालाँकि, महिला परिवार कह रहा है कि महेश्वर ने ख़ुदकुशी की है।

जानकारी के अनुसार, उसका पति कोलकाता में काम करता था और उसके रील बनाने से परेशान रहता था। वह दो-तीन दिनों में वापस कोलकाता जाने वाला था। वह कोलकाता में मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता था। महेश्वर का 6 साल पहले रानी कुमारी से विवाह हुआ था। वह पहले सही से व्यवहार करती थी लेकिन बाद में उसे टिकटॉक तथा रील्स बनाने की आदत लग गई।

जब महेश्वर ने उसे मना किया तो वह झगड़ा करने लगी। बताया गया है कि महेश्वर 7 जनवरी, 2024 की शाम को ही अपनी ससुराल गया था। इसके बाद वहाँ उसका अपनी पत्नी से रील्स बनाने को लेकर विवाद हुआ, महेश्वर के घर वालों ने आरोप लगाया है कि इसी कारण से उसकी पत्नी के घर वालों ने उसकी फाँसी पर लटका कर हत्या कर दी।

इस बात की सूचना जब उसके कोलकाता में रहने वाले भाई को मिली तो उसने अपने पिता को यहाँ भेजा जहाँ पहुँचने पर महेश्वर लटका मिला। मामला पुलिस को सूचित किए जाने के बाद उसने शव कब्जे में ले लिया है और इसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने युवक की साली और पत्नी को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है। अभी पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि वह पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ एक्शन लेगी।