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‘भगवान राम हमारे जीजा, बहन के घरवास के लिए वस्तुएँ लाए हैं’: श्रीराम के ससुराल से साजोसामान लेकर अयोध्या पहुँचा जत्था, कहा – खाली घर भरने आए हैं

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम के नए मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होना है। इसके लिए देश भर में उत्साह का माहौल है। वहीं अब माँ जानकी के स्थल से भी लोग अयोध्या पहुँचे हैं। मिथिला की परंपरा और संस्कृति भी अब अयोध्या में गूँज रही है। भगवान श्रीराम के ससुराल से एक जत्था कई उपहार लेकर अयोध्या पहुँचा है, जिसमें महिला-पुरुष दोनों शामिल हैं। सरकारी मीडिया संस्थान दूरदर्शन ने इसका वीडियो भी शेयर किया है।

मिथिला के 2 क्षेत्र माँ सीता से मुख्य रूप से जुड़े हुए हैं। एक बिहार के सीतामढ़ी का पुनौरा धाम, जहाँ राजा जनक ने हल चलाया था और माँ सीता का जन्म हुआ था। दूसरा नेपाल का जनकपुर, जहाँ जनक की राजधानी हुआ करती थी और वहाँ भव्य मंदिर भी है। वहीं ताज़ा वीडियो में महिलाओं को अपने सिर पर सामान रखे हुए देखा जा सकता है। एक महिला ने कहा, “जनकपुर में मेरी बहन है और अयोध्या में राम। इस हिसाब से जीजाजी का नाता हुआ।”

उन्होंने कहा, “बहन के हिसाब से हमलोग आए हैं सारा सामान लेकर, गृह प्रवेश है तो घर खाली होगा। नया घर बन रहा है तो उसमें भरने के लिए सामान लेकर आए हैं। बहन के पास घर नहीं था, वो टेंट में थी। अब नया घर बना तो इतनी ख़ुशी हुई कि सोचने लगे क्या करें और क्या नहीं करें। ” सामानों में तरह-तरह के बर्तन से लेकर गहने और साजोसामान की वस्तुएँ देखी जा सकती हैं। एक अन्य पुरुष ने कहा कि ये गिफ्ट नहीं है, घरवास में जो चीजें दी जाती हैं ये वही हैं।

वहीं ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। ट्रस्ट ने लिखा, “श्रीराम भारत को भी प्रिय हैं, श्रीराम नेपाल को भी। श्रीराम दोनो देशों में पूज्य भी हैं। वस्तुतः नेपाल और भारत के बीच सेतु हैं श्रीराम। श्रीराम हमें जोड़ते हैं – स्वयं से, और संपूर्ण विश्व से। जय श्री सीता राम। सबके राम।” बता दें कि मिथिला क्षेत्र बिहार और नेपाल में फैला हुआ है। कभी ये क्षेत्र राजा जनक के साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था, जिनकी बेटी वैदेही से श्रीराम का विवाह हुआ।

गाँधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत… गुजरात दहलाने का ISIS ने बनाया था प्लान, जंगल में बमों की टेस्टिंग: आतंकी शाहनवाज ने की थी रेकी

दुनिया का सबसे बर्बर आतंकी संगंठन आईएसआईएस (ISIS या IS) भारत को लहूलुहान करने की साजिश रच रहा था। गिरफ्तार आईएसआईएस आतंकी शाहनवाज आलम ने स्वीकार किया है कि गोधरा का बदला लेने के लिए आईएसआईएस के निर्देश पर उसने गुजरात के कई शहरों की रेकी की थी। उसने गुजरात के गाँधीनगर, अहमदाबाद, बडोदरा और सूरत की रेकी की थी।

शाहनवाज ने बताया कि आईएसआईएस के निशाने पर गुजरात के बीजेपी नेता, RSS के पदाधिकारी, विहिप के नेता सहित विभिन्न हिंदू संगठनों के नेताओं थे। इतना ही नहीं, जिला न्यायालय, विश्वविद्यालय, मंदिर, यहूदी स्थाल और भीड़भाड़ वाले इलाके भी उनके निशाने पर थे। ISIS पूरे गुजरात में सिलसिलेवार तरीके से बम धमाके करके देश में आतंक का राज स्थापित करना चाहता था।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और एनआईए की पूछताछ में आईएसआईएस के पुणे, दिल्ली और अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े आतंकी शाहनवाज ने माना कि साल 2023 में उसने गुजरात में कई जगहों का दौरा किया था। उसने तस्वीरें खींची थीं और हमलों वाली जगह का ब्लू-प्रिंट भी तैयार किया था। यही नहीं, शाहनवाज ने बोहरा मस्जिद, दरगाह, अहमदाबाद की मजार, दरगाह और साबरमती आश्रम की तस्वीरें भी खींची थी।

इसके लिए आतंकियों ने किराए की एक बाइक का इस्तेमाल किया था। ये सब उसने आईएसआईएस के हैंडलर अबु सुलेमान के कहने पर किया था। उसके साथ रिजवान अली और इमरान भी थे। रिजवान फिलहाल फरार है। शाहनवाज ने पूछताछ में बताया कि वो जनवरी 2023 में दो दिनों के लिए अहमदाबाद पहुँचा था। यहाँ से वो वडोदरा पहुँचा और स्टेशन के पास ही एक हॉस्टल में कमरा लेकर रुक गया।

वडोदरा से आतंकियों ने किराए पर बाइक ली और रेकी को अंजाम दिया। इसके बाद सभी आतंकी सूरत गए और फिर से किराए पर स्कूटी लेकर शहर भर की रेकी की। आतंकियों ने हीरा बाजार, यहूदी केंद्र, इस्कॉन मंदिर समेत 7 जगहों की रेकी की थी। फिर उन्होंने फोटोग्राफ और वीडियोग्राफी की फाइल तैयार कर अबु सुलेमान को भेज दिया था।

शाहनवाज ने बाजार से केमिकल लेकर बम बनाने के कई प्रयोग किए और जंगलों में विस्फोट कर उसका डेमो भी किया था। हालाँकि वो कोई बड़ा धमाका कर पाता, इससे पहले ही गिरफ्तार लिया गया था। शाहनवाज स्वप्रेरित आईएसआईएस आतंकी था। उसने अपने जेहादी मंसूबों को पूरा करने के लिए झारखंड के हजारीबाग में कई छोटी-मोटी आपराधिक कार्यों को अंजाम दिया था।

31 साल के शाहनवाज हजारीबाग में ही पैदा हुआ था और वहीं पर उसे जेल भी जाना पड़ा था। जेल से निकलने के बाद वो पुणे चला गया था। फिर एनआईए की छापेमारी में जब आईएसआईएस का पुणे मॉड्यूल ध्वस्त हुआ, तो वो फरार हो गया। उस पर तीन लाख का ईनाम रखा गया था।

फरहतुल्ला से जुड़ा है शाहनवाज का कनेक्शन

पुणे से भागा शाहनवाज दिल्ली और अलीगढ़ मॉड्यूल के साथ जुड़ गया था, जिसमें अहम भूमिका निभाई थी आईएसआईएस, आईएसआई, लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद जैसे कई आतंकी गुटों के लिए काम करने वाले और हिज्ब उत तहरीर का संचालन करने वाले फरहतुल्ला गोरी से। फरहतुल्ला पाकिस्तान से ही भारत में आईएसआईएस के मॉड्यूल्स को खड़ा कर रहा था।

ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से फरहतुल्ला कई नामों से जाना जाता था और वो सभी आईएसआईएस आतंकियों के बीच इकलौता कनेक्शन था। वही आईएसआईएस आतंकियों को शपथ दिलाता था और शाहनवाज जैसे आतंकियों को उनके जेहादी लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर रहा था।

हिंदू बसंती को मरियम बनाकर जेहाद में लगाया

शाहनवाज ने गाजियाबाद के विश्वेश्वरैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली गुजरात की बसंती पटेल नाम की हिंदू लड़की से निकाह किया और उसे जेहादी बना दिया। शाहनवाज ने बसंती को पहले इस्लाम कबूल करवाया फिर उससे निकाह किया। निकाह के बाद बसंती का नया इस्लामी नाम मरियम रखा गया था।

क्या था पुणे ISIS मॉड्यूल

दरअसल, में पुणे पुलिस ने जुलाई 2023 में चोरी की बाइक के साथ 2 लोगों को पकड़ा था। इसमें शाहनवाज भी था। शुरुआत में पुलिस ने दोनों को वाहन चोर समझा पर जाँच में उनके ISIS नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई। इस बीच शाहनवाज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद इस साल अगस्त माह में पुणे के कोंढवा स्थित एक घर में दबिश डाली। 

दबिश के दौरान बम बनाने और ब्लास्ट करने की ट्रेनिंग लेते हुए 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 3 अन्य संदिग्ध फरार हो गए थे। फरार होने वालों के नाम रिज़वान अब्दुल हाजी, अब्दुल्लाह फ़ैयाज़ शेख और तलहा लियाकत खान है। इन तीनों के साथ शाहनवाज पर भी 3-3 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इसके बाद शाहनवाज को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनआईए के साथ मिलकर गिरफ्तार किया था।

सेल्फी लेने आया था वोटर, बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन ने घुमाकर जड़ा झापड़: चुनाव जीतने के बाद Video वायरल

बांग्लादेश के क्रिकेटर स्टार शाकिब अल हसन ने आम चुनावों में जीत हासिल करके अपनी सियासी करियर की शुरुआत कर दी है। उनके चुनाव में जीतने के साथ ही एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें दिखाया जा रहा है कि उन्होंने एक शख्स को थप्पड़ जड़ा।

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। इसमें दिख रहा है कि शाकिब अपने चाहने वालों के बीच में खड़े हैं और सेल्फी लेने के लिए धक्का-मुक्की हो रही है। इसी दौरान शाकिब परेशान होकर उनसे चिपककर सेल्फी लेने वाले एक आदमी को हाथ घुमाकर थप्पड़ मारते हैं।

वीडियो को शेयर करके सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कप्तान शाकिब अल हसन ने संसद सीट जीत ली है। MP बनते ही फैन को जड़ा थप्पड़।

मीडिया में इस वीडियो को लेकर बताया जा रहा है कि ये वीडियो चुनाव वाले दिन की है जहाँ शाकिब को एक मतदान केंद्र पर बड़ी संख्या में फैंस की भीड़ का सामना करना पड़ा। इस दौरान वह अपना आपा खो बैठे और फैन को थप्पड़ जड़ दिया। नतीजों वाले दिन इस वीडियो को वायरल कर दिया गया। अब इस वीडियो को देखकर कुछ लोग उनसे नाराजगी जता रहे हैं। वहीं कुछ लोग संदेह कर रहे हैं कि ये शाकिब ही हैं या कोई और।

बता दें कि बांग्लादेश के आम चुनाव में सत्ताधारी आवामी लीग ने एक बार फिर बांग्लादेश में वापसी की है। उन्होंने 350 सीटों वाली बांग्लादेशी संसद में बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया। वहीं शेख हसीना भी गोपालगंज-3 सीट से भारी मतों से जीत गईं। तो बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मागुरा-1 सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने इस चुनाव में अपने निकट प्रतिद्वंदी को 1.5 लाख से अधिक मतों से हराया। वह चुनाव से कुछ दिन पहले ही आवामी लीग में शामिल हुए थे। उन्हें शेख हसीना की पार्टी ने मगुरा-1 निर्वाचन क्षेत्र से उतारा था। 

पूनम पांडेय ने मालदीव में रद्द कर दी शूटिंग, गिड़गिड़ाता रह गया अब्दुल खान: अमिताभ बच्चन का साफ़ सन्देश – हम भारत हैं, हमारी आत्मनिर्भरता पर आँच मत डालिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में लक्षद्वीप दौरे पर पहुँचे, जहाँ से उन्होंने कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डाली। हालाँकि, इससे मालदीव के कट्टरपंथी भड़क गए और उन्होंने भारत व पीएम मोदी को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। असल में पीएम मोदी ने लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा दिया, जहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ मालदीव से मिलती-जुलती हैं। इसके बाद कई बॉलीवुड सेलेब्स और क्रिकेटरों ने लक्षद्वीप की सुन्दर तस्वीरें शेयर कर पीएम मोदी का समर्थन किया और मालदीव को लताड़ लगाई।

इसी फेहरिस्त में अब पूनम पांडेय का नाम भी जुड़ गया है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मी पूनम पांडेय मॉडल हैं और साथ ही इरॉटिक फिल्मों में अभिनय भी करती रही हैं। अपनी सेमी-न्यूड तस्वीरों से सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने वाली पूनम पांडेय ने अब मालदीव में अपनी शूटिंग रद्द कर दी है। ऐसा उन्होंने खुद 2 तस्वीरें पोस्ट कर के बताया। एक तस्वीर में उन्होंने व्हाट्सएप्प चैट का स्क्रीनशॉट डाला है, जबकि दूसरे में उन्होंने बिकनी में अपनी तस्वीर अपलोड की है।

उन्होंने किसी ‘RIM प्रोडक्शन’ के अब्दुल खान के साथ बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें उधर से अब्दुल खान लिखते हैं, “हाय पूनम जी, मुझे नील सर से पता चला कि आप शूट शेड्यूल रद्द करना चाहती हैं।” इसके बाद पूनम पांडेय ने ऑडियो के जरिए उन्हें अपना जवाब भेजा। फिर अब्दुल खान ने लिखा, “मैम, मैंने पूरे क्रू के लिए टिकट्स बुक कर लिए हैं। होटल भी बुक कर लिए गए हैं। अंतिम क्षणों में शूट रद्द करना संभव नहीं है।”

इसके बाद पूनम पांडेय ने 2 ऑडियो भेजा। फिर अब्दुल खान ने उनसे गुहार लगाई कि उन्हें एक दिन का समय दिया जाए। हालाँकि, इसके बाद अभिनेत्री ने ‘गुड नाइट’ लिख कर चैट बंद कर दिया। पूनम पांडेय ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए कहा कि उन्हें मालदीव में शूट करने में मजा आता है लेकिन अब वो वहाँ कभी शूट नहीं करेंगी। पूनम पांडेय ने बताया कि उन्होंने मालदीव में शूट रद्द कर दिया है और उनकी टीम भी गई है। पूनम पांडेय ने आशा जताई कि जल्द ही वो लक्षद्वीप में शूट शुरू करेंगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के लिए मालदीव के 3 मंत्री बर्खास्त किए जा चुके हैं। वहाँ की नई सरकार का चीन की तरफ ज़्यादा झुकाव देखा जा रहा है। मालदीव के हाई कमिश्नर को भारतीय विदेश मंत्रालय में तलब किया गया, जहाँ वो 5 मिनट तक रुके। उधर सोशल मीडिया पर एक के बाद एक सेलेब्स ने मालदीव का विरोध किया और लक्षद्वीप की तस्वीरें शेयर की। लक्षद्वीप में पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिए मोदी सरकार भी प्रयासरत है।

उधर अपने फैंस द्वारा ‘सदी के महानायक’ कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन ने भी मालदीव का विरोध किया है। वीरेंद्र सहवाग ने उडुपी और अंडमान के बीच की सुंदर तस्वीरें शेयर की थीं, जिस पर अमिताभ बच्चन ने वो अंडमान व लक्षद्वीप जा चुके हैं, दोनों जगह काफी सुंदर हैं। ‘जय हिन्द’ का नारा लगाते हुए अमिताभ बच्चन ने लिखा, “हम भारत हैं , हम आत्मनिर्भर हैं , हमारी आत्मनिर्भरता पे आँच मत डालिए।” उन्होंने बताया कि भारत के इन द्वीपों पर समुद्र के भीतर एडवेंचर करना एक अविश्वसनीय अनुभव है।

‘सिर कलम कर देंगे…’: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार को मिली धमकी, फेसबुक पेज हैक करने का भी लगाया आरोप

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसको लेकर कट्टरपंथी हताश नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका अपने गुर्गों से धमकी दिलवा रहे हैं। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के एक पक्षकार आशुतोष पांडेय को अब ‘सिर कलम’ करने की धमकी मिली है।

आशुतोष पांडेय ने आरोप लगाया कि उन्हें पाकिस्तान से धमकी मिली है और उनका फेसबुक आईडी हैक कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत में बैन आतंकी संगठन पीएफआइ द्वारा कई बार उन्हें हत्या की धमकी मिल चुकी है। अब पाकिस्तान से कई युवकों द्वारा जन्मभूमि के वाद में पैरवी करने को लेकर धमकी दी है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के वाद में पैरवी करने पर सिर कलम करने की धमकी दी गई है। उन्होंने कहा कि शनिवार (6 जनवरी 2024) की देर रात उनकी फेसबुक पेज आईडी को भी हैक कर लिया। गया और उन्हें एडमिन से हटा दिया है। इस मामले में उन्हें मथुरा पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

आशुतोष ने प्रमुख गृह सचिव केंद्र सहित एसएसपी मथुरा और उत्तर प्रदेश गृह विभाग को ईमेल के जरिए शिकायत की है। एसएसपी ने मामले को जाँच के लिए साइबर सेल को सुपुर्द कर दिया है। वहीं, एसपी सिटी अरविंद कुमार ने कहा कि इस मामले की जाँच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएँगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

आशुतोष पांडे से पहले खुद को सत्यम पंडित बताने वाले एक शख्स ने इसी तरह का दावा किया था। सत्यम ने कहा था कि वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसका हक दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई है। सत्यम पंडित ने लेटर दिखा कर दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की तरफ से उन्हें यह धमकी दी गई है।

सत्यम को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मामले के संबंध में गाजियाबाद घंटाघर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। एसीपी निमिष पाटिल ने कहा था कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और आगे जाँच की जा रही है। पीड़ित के ऑफिस के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

राँची के राम जानकी मंदिर में चोरी, विग्रहों को किया खंडित: भाजपा नेता बोले- रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बीच माहौल बिगाड़ने की कोशिश

झारखंड के राँची स्थित राम-जानकी मंदिर में अराजक तत्वों ने ना सिर्फ चोरी की घटना को अंजाम दिया, बल्कि मंदिर की मूर्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस घटना के बाद इलाके के हिंदुओं में आक्रोश है। मंदिर से भगवान का मुकुट सहित दूसरे सामान गायब हो गए हैं। घटनास्थल पर भाजपा सांसद संजय सेठ और विधायक सीपी सिंह और काँके विधायक समरी लाल भी पहुँचे।

दरअसल, राँची के बरियातू स्थित मंदिर में सोमवार (8 जनवरी 2024) की सुबह जब माली फूल देने गया तो देखा कि मंदिर का ताला टूटा हुआ है। इसके बाद उसने इस घटना की जानकारी मंदिर के पुजारी को दी। पुजारी मंदिर पहुँचा तो देखा कि मंदिर का सामान चोरी हो गया है और मूर्ति के साथ तोड़फोड़ की गई है। इसके बाद पुजारी ने घटना की जानकारी पुलिस को दी।

इधर, घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग भी मंदिर पहुँच गए। घटना से नाराज हिंदुओं ने वहाँ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। नाराज लोगों ने सड़क को जाम कर दिया। कुछ युवक मंदिर के सामने की सड़क पर बैठ गए और वहाँ हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। घटना को देखते हुए घटनास्थल पर पुलिस बल को तैनात किया गया है।

घटना को लेकर स्थानीय सांसद संजय सेठ ने कहा कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होने जा रहा है। उससे पहले इस तरह की घटना से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह चोरी की घटना नहीं है। अगर चोरी की मंशा होती तो चोर सारा सामान चोर फेंककर नहीं जाते।

सांसद सेठ ने कहा कि टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राँची की शांति को किसी भी कीमत पर भंग होने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से घटना को अंजाम देने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने की माँग की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मंदिर की मूर्तियाँ बदली जाएँ और उनकी प्राण प्रतिष्ठा की जाए।

लोगों के बढ़ते विरोध को देखकर स्थानीय प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए हैं। उन्होंने विरोध करने वाले लोगों को समझाने की कोशिश की। डीएसपी सदर प्रभात कुमार बरवार ने कहा कि हम मामले में सबूत जुटाई जा रही है। सीसीटीवी का एक फुटेज मिला है, जिसमें एक व्यक्ति हाथ में झोला लिए हुआ दिखा है। उन्होंने कहा कि उसे देखकर लगता है कि वह कचरा चुनने वाला हो सकता है।

डीएसपी बरवार ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के अलावा पुलिस प्रशासन फिंगर प्रिंट भी जुटा कर रहा है। आरोपितों की पहचान करके उन्हें जल्द-से-जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, इस मामले पर एसपी सिटी का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि घटना की जाँच के लिए पाँच थाने की पुलिस को मिलाकर एसआईटी गठित की जाएगी।

एसपी सिटी राजकुमार मेहता ने यह भी कहा कि सांसद और विधायक नई प्रतिमाएँ बनवाएँगे। उन्होंने कहा कि वे खुद भी अपने वेतन से एक प्रतिमा बनवाएँगे। इसके अलावा मंदिर में सीसीटीवी लगाने और मंदिर के पीछे शौचालय का निर्माण कराने की बात भी कही है। उन्होंने लोगों से विरोध प्रदर्शन खत्म करने का आग्रह किया।

MEA ने मालदीव के हाई कमिश्नर को तलब किया, 5 मिनट में ही बाहर निकले इब्राहीम शहीब: PM मोदी पर टिप्पणी करने वाले 3 मंत्री हो चुके हैं बर्खास्त

मालदीव की मुइज्जू सरकार में शामिल मंत्रियों के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत को लेकर की गई टिप्पणियों से भारत सरकार खासी नाराज है। भारत ने मामले को राजनयिक चैनलों से उठाने के बाद अब मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया।

मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। वह 9:35 मिनट पर भारतीय विदेश मंत्रालय पहुँचे थे और 9:40 पर बाहर आते हुए दिखे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था। मालदीव की सरकार द्वारा भारत के हाई कमिश्नर मुनु महावर को भी मालदीव के विदेश मंत्रालय बुलाए जाने की बात सामने आई है।

मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत का नाम लिए बिना कहा है कि इस तरह विदेशी नेताओं और करीबी पड़ोसियों पर हालिया टिप्पणी अस्वीकार्य है। ये मालदीव के आधिकारिक पक्ष को नहीं दिखाता।

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने ने मालदीव के रवैये की आलोचना की थी। कई बॉलीवुड सितारों ने लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे और साथ ही खुद भी जाने की बात कही थी। एक ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

पूरे शरीर में धँस गए थे गोलियों के छर्रे, बेहोशी में भी कह रहे थे राम-राम: कारसेवक राम बहादुर वर्मा के बेटों ने कहा – मुलायम ने हमें किया था अनाथ

मुगल काल से वर्तमान तक कई युद्धों और कानूनी लड़ाइयों के बाद आखिरकार 22 जनवरी, 2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा उनकी जन्मभूमि पर बने मंदिर में की जाएगी। इस अवसर पर देश भर का माहौल राममय हो चुका है। ऐसे में दुनिया भर के हिन्दू उन रामभक्तों को याद कर रहे हैं जिन्होंने बाबर से ले कर मुलायम तक के शासन काल में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उन तमाम ज्ञात-अज्ञात वीरों में एक थे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के निवासी राम बहादुर वर्मा। राम बहुदर वर्मा को 30 अक्टूबर, 1990 की कारसेवा के दौरान गोली लगी थी। ऑपइंडिया ने राम बहादुर वर्मा के घर जा कर वर्तमान हालातों की जानकारी ली।

बलिदानी राम बहादुर वर्मा का घर सुल्तानपुर जिले के थाना क्षेत्र जयसिंहपुर में पड़ता है। उनके गाँव का नाम सरतेजपुर है। सरतेजपुर की अयोध्या रामजन्मभूमि से दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। जब हम राम बहादुर के घर पहुँचे तो गाँव के बाहर ही उनके बड़े बेटे काली सहाय वर्मा मिल गए। काली सहाय वर्मा ने बताया कि 48 वर्ष की उम्र में बलिदान होने के समय उनके पिता अपने पीछे बीमार पत्नी और 6 संतानें छोड़ गए थे। इन 6 संतानों में 2 बेटियाँ और 4 बेटे हैं। तब सभी अविवाहित थे। फ़िलहाल सभी का शादी-ब्याह हो चुका है।

राम बहादुर के घर पर मौजूद उनके पुत्र जयराम वर्मा

राम बहादुर वर्मा का परिवार मूल रूप से किसान है और खेती-बारी उनका मुख्य पेशा है। इसके अलावा उन्होंने धान कूटने की मशीन भी लगा रखी है। फिलहाल उनके बड़े बेटे काली सहाय ग्राम प्रधान हैं। काली सहाय पोलियो की वजह से बचपन से ही एक पैर से दिव्यांग हैं। वर्तमान में उनका मकान टूटा-फूटा हुआ है जिसके उधड़े प्लास्टर साफ देखे जा सकते हैं।

माँ ने अदा किया पिता का फर्ज

जब राम बहादुर वर्मा वीरगति को प्राप्त हुए तब उनके बड़े बेटे काली सहाय की उम्र 20 साल के आसपास थी। काली सहाय के मुताबिक, खबर सुन कर घर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। हालाँकि, राम बहादुर की पत्नी चंद्रावती ने अपने बच्चों का भविष्य देखते हुए खुद को सँभाला। काली सहाय ने भी बड़े भाई का कर्तव्य निभाया और गन्ने की पेराई जैसे काम कर के अपने छोटे भाई-बहनों को न सिर्फ पढ़ाया लिखाया बल्कि उनकी शादी-ब्याह भी किया। काली सहाय वर्मा ने बताया कि वो समय उनके परिवार के लिए सबसे कठिन था।

राम बहादुर के बड़े पुत्र काली सहाय वर्मा

बलिदानी कारसेवक राम बहादुर की पत्नी पहले से ही बीमार रहती थीं। बाद में उन्हें कैंसर हो गया। घर वालों ने उनके इलाज में काफी पैसे लगाए। लम्बे इलाज के बाद आखिरकार चंद्रावती ने भी साल 2016 में दुनिया को अलविदा कह दिया। देहांत के समय चंद्रावती की उम्र लगभग 73 वर्ष थी। फ़िलहाल राम बहादुर का परिवार अभी भी अपने-आप को इन त्रासदियों से उबारने के लिए संघर्ष कर रहा है।

सिर में मारी गई थी गोली

काली सहाय वर्मा ने हमें बताया कि उनके पिता भगवान राम और बजरंग बली के परम भक्त थे। हर मंगलवार राम बहादुर पास के हनुमान मंदिर में दर्शन करने जाते थे। हर पूर्णिमा को वो अयोध्या साइकिल से जाते थे। जब सन 1990 में कारसेवा शुरू हुई तब देश के कोने-कोने से आ रहे कारसेवकों को राम बहादुर ने शरण देने के साथ उनके खाने-पीने का भी इंतजाम करवाया। आखिरकार 25 अक्टूबर, 1990 को वो अपने आसपास के कुछ साथियों के साथ जत्था बना कर अयोध्या की तरफ कूच कर गए। अयोध्या जाते समय राम बहादुर ने अपनी पत्नी से कहा था, “मैं शायद न लौट पाऊँ। बच्चों का ध्यान रखना।” नम आँखों से काली सहाय ने आगे कहा, “मेरे पिता के लिए पत्नी और बच्चों से कहीं अधिक प्रिय प्रभु श्रीराम थे।”

काली सहाय ने हमें आगे बताया कि उनके पिता को अयोध्या जाने के वो तमाम रास्ते मालूम थे जो मुख्य मार्गों पर तैनात पुलिस वाले नहीं जानते थे। खेतों में छिपते-छिपाते आख़िरकार राम बहादुर साथियों सहित 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या पहुँच ही गए। काली सहाय का कहना है कि उनके पिता जत्थे में सबसे आगे चल रहे थे। दावा है कि कोठारी बंधुओं के पीछे राम बहादुर वर्मा भी गुंबद पर चढ़ने लगे। इसी दौरान मुलायम सिंह के आदेश पर गोली चल गई। गोली लगने से राम बहादुर बुरी तरफ से घायल हो कर जमीन में गिर पड़े।

2 महीने मौत से लड़ी जंग फिर हुए बलिदान

बलिदानी राम बहादुर के बेटे ने हमें आगे बताया कि उनके पिता के पूरे शरीर में गोलियों के छर्रे धँसे हुए थे। ये छर्रे सीधे लगने के बजाय तिरछे एंगल से दागे गए थे। काली सहाय को आशंका है कि उनके पिता पर हेलीकॉप्टर से गोलियाँ बरसाई गईं थी। इन छर्रों में से एक राम बहादुर के सिर में लगा और वो अचेत हो कर भीड़ में गिर गए। साथी कारसेवकों ने बेहोश राम बहादुर को भीड़ से निकाला और अपने प्राणों को संकट में डाल कार अयोध्या के श्रीराम अस्पताल में भर्ती करवाया।

इस बीच 4 दिनों तक राम बहादुर की कोई खोज खबर न मिलने पर उनकी पत्नी और बेटों ने उनको अयोध्या में खोजना शुरू किया। कई जगहों की ख़ाक छानने के बाद आखिरकार राम बहादुर गंभीर हालत में श्रीराम अस्पताल में भर्ती मिले। यहाँ वो लगभग 12 दिनों तक भर्ती रहे। हालत गंभीर होते देख कर राम बहादुर को लखनऊ मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया। जैसे-तैसे राम बहादुर के परिजन उनको ले कर लखनऊ पहुँचे। यहाँ उनका इलाज शुरू हुआ लेकिन आखिरकार लगभग 2 माह बाद 3 जनवरी, 1991 को राम बहादुर स्वर्ग सिधार गए।

बेहोशी की हालत में भी लेते थे राम का नाम

काली सहाय 1990 में अपने पिता की देखरेख के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सिर में लगे छर्रे से मस्तिष्क में सम्भवतः मवाद बन गई थी। इसी के चलते अक्सर राम बहादुर रह-रह कर बेहोश हो जाया करते थे। काली सहाय का दावा है कि अस्पताल में उनके पिता मूर्छित अवस्था में भी राम-राम कहा करते थे। आखिरकार 3 जनवरी, 1991 को उनके देहांत के बाद शव को पैतृक गाँव सरतेजपुर लाया गया।

शव पर लोगों ने बरसाए थे फूल

काली सहाय ने साल 1990 को याद करते हुए कहा कि उनके पिता के अयोध्या कूच से पहले जितनी फ़ोर्स इलाके में तैनात थी उसकी कई गुना ज्यादा फ़ोर्स अंतिम संस्कार के समय जुट गई थी। इस दौरान लोगों के आने-जाने पर कई तरह की प्रशासनिक पाबंदियाँ लगा दी गईं थीं लेकिन बावजूद इसके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। 4 जनवरी, 1991 को हिन्दू संगठन के सदस्यों ने राम बहादुर के शव की पूरे क्षेत्र में झाँकी निकाली थी जिस पर लोगों ने फूल बरसाए। थे। आखिरकार अगले दिन 5 जनवरी को उनका अंतिम संस्कार गाँव के मुहाने पर एक प्राचीन मंदिर के आगे हुआ।

पिता जी ने स्वीकार किया था मुलायम का चैलेन्ज

काली सहाय वर्मा अपना सबसे बड़ा दुश्मन मुलायम सिंह यादव को बताते हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह ने उनको अनाथ कर दिया। राम बहादुर वर्मा का परिवार राम मंदिर बनने से भी बेहद खुश है। वह इसे अपने पिता का बलिदान सार्थक होना बताता है। बकौल काली सहाय 1990 में मुलायम सिंह यादव ने चैलेन्ज दिया था कि परिंदा भी पर अयोध्या में नहीं मार सकता लेकिन उनके बलिदानी पिता ने न सिर्फ इस चैलेन्ज को स्वीकार किया बल्कि प्राणों को गँवा कर भी जीत हासिल की।

6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढाँचा ध्वंस होने की घटना काली सहाय वर्मा 1990 में वीरगति पाए कारसेवकों की प्रेरणा बताते हैं। राम बहादुर के परिजन 22 जनवरी, 2024 को हो रहे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सम्मिलित भी होना चाहते हैं।

राम बहादुर की समाधि आज भी देती है प्रेरणा

जिस स्थान पर 5 जनवरी, 1991 को राम बहादुर का अंतिम संस्कार हुआ था आज वहाँ एक समाधि स्थल है। यह समाधि खुद राम बहादुर वर्मा के परिजनों ने बनवाई है। हर साल 3 जनवरी को यहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा होता है और हनुमान चालीसा के साथ रामचरितमानस का पाठ किया जाता है। इसी के अलावा अन्य पर्व त्योहारों पर राम बहादुर के परिजन मिल कर यहाँ श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ करते हैं।

कारसेवक राम बहादुर वर्मा दाह स्थली पर बनी समाधि

हालाँकि इस स्मारक के आसपास जमीन न होने की वजह से लोगों के जुटने में समस्या खड़ी हो जाया करती है। राम बहादुर के घर वालों ने प्रशासन और शासन से इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने की गुहार लगाई है। साथ ही वो यह भी चाहते हैं कि अयोध्या राम मंदिर में उनके पिता और बाकी अन्य बलिदानियों का स्मारक बना कर उनके त्याग के बारे में लोगों को बताया जाए।

गुजरात सरकार की माफी गलत, यह महाराष्ट्र सरकार का अधिकार: बिलकिस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, रिहा सभी 11 लोग जेल जाएँगे

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के बिलकिस बानो गैंगरेप केस के 11 दोषियों को जेल से जल्दी छोड़ने के फैसले को पलट दिया है। अगस्त 2022 में गुजरात सरकार ने निर्णय लिया था कि बिलकिस मामले में जेल में बंद दोषियों के अच्छे व्यवहार के आधार पर उनकी बाकी सजा माफ़ कर दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान ने इस मामले का निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि बिलकिस के गैंगरेप के दोषियों को दो सप्ताह के भीतर फिर से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करके जेल जाना होगा। उसका कहना है कि इन 11 दोषियों को जेल से जल्दी छोड़ने का निर्णय गुजरात सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर था।

इन सभी दोषियों को अच्छे व्यवहार के चलते गुजरात सरकार ने 15 अगस्त 2022 को जेल से छोड़ा था। इन्हें 2004 में गिरफ्तार किया गया था जबकि 2008 में सजा सुनाई गई थी। इन सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 2022 तक इन्हें सजा पाए लगभग 15 वर्ष हो गए थे। इसीलिए गुजरात सरकार ने 2022 में छोड़ दिया था।

इनको 2022 में छोड़े जाने के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दाखिल की गईं थी। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका बिलकिस बानो ने खुद भी डाली थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में बारह दिनों तक सुनवाई की थी और इस पर निर्णय को रिजर्व कर लिया था। अब इसका निर्णय बिलकिस बानो के पक्ष में आया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2002 में गुजरात के गोधरा में कारसेवकों की एक ट्रेन पर मुस्लिम भीड़ ने हमला करके उसमें आग लगा दी थी। इस हमले में 59 कारसेवक मारे गए थे। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इन दंगों के दौरान ही बिलकिस बानो के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सजा बॉम्बे हाई कोर्ट ने बरकरार रखी थी इसलिए इन दोषियों को माफ़ करने का निर्णय भी महाराष्ट्र सरकार का होना चाहिए था ना कि गुजरात सरकार का। हालाँकि मालूम हो कि यह मामला महाराष्ट्र से गुजरात ट्रांसफर कर दिया गया था।

जावेद अख्तर को टीम Animal ने रगड़ा, फिल्म में हिरोइन के जूता चाटने पर उठाए थे सवाल, कहा था- ऐसी फिल्म का हिट होना खतरनाक

लेखक और गीतकार जावेद अख्तर को हाल ही में रिलीज हुई एनिमल (Animal) फिल्म की टीम से करारा जवाब मिला है। जावेद अख्तर ने एक फिल्म फेस्टिवल के दौरान एनिमल के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की कबीर सिंह और एनिमल फिल्मों के दो सीन की आलोचना की थी।

जावेद अख्तर को एनिमल फिल्म के एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट पर करारा जवाब मिला है। एक्स पर एनिमल द फिल्म (Animal The Film) ने लिखा, “अगर आपके जैसा लेखक एक प्रेमी के धोखे को (जोया और रणविजय के बीच) को नहीं समझ सका तो आपकी सारी आर्ट झूठी है।”

आगे लिखा “यहीं अगर प्यार में धोखा खाई और मूर्ख बनाई गई एक महिला ने अपने प्रेमी से उसका जूता चाटने को कह दिया होता तो तुम लोग उसे फेमिनिज्म कह कर इसकी प्रशंसा कर रहे होते। प्रेम को लिंग और राजनीति से अलग रखते हैं। उन्हें सिर्फ प्रेमी कहते हैं। एक प्रेमी ने धोखा दिया और झूठ बोला। प्रेमी ने बोला- मेरा जूता चाटो। बस यही है।”

जावेद अख्तर को यह जवाब उनके औरंगाबाद में अजन्ता एलोरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिए गए एक बयान पर मिला। यहाँ उन्होंने कहा था, “मुझे लगता है कि यह नए फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ा ही कठिन समय है क्योंकि ना जाने वो कैसे पात्र अपनी फिल्मों में दिखाना चाहते हैं जिनकी समाज प्रशंसा करेगा। उदहारण के लिए, अगर एक ऐसी फिल्म है जिसमें एक पुरुष एक महिला से उसका जूता चाटने को कहता है और एक महिला को थप्पड़ मारना सही है और फिल्म भी सुपरडुपर हिट है तो यह बड़ा खतरनाक है।”

यहाँ जावेद अख्तर एनिमल फिल्म के उस सीन की बात कर रहे थे जिसमें रणबीर कपूर (फिल्म में विजय सिंह) तृप्ति डिमरी (फिल्म में जोया) से उनका जूता चाटने को कहते हैं। वहीं थप्पड़ मारने की बात उन्होंने 2019 में आई कबीर सिंह फिल्म से सम्बंधित थी। इसमें शाहिद कपूर (कबीर सिंह) कियारा अडवानी (प्रीती) के थप्पड़ मारते हैं।

एनिमल और कबीर सिंह दोनों ही फिल्मों को संदीप रेड्डी वांगा ने निर्देशित किया है। संदीप रेड्डी वांगा की यह दोनों फ़िल्में सुपर हिट रही हैं।