अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसको लेकर कट्टरपंथी हताश नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका अपने गुर्गों से धमकी दिलवा रहे हैं। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के एक पक्षकार आशुतोष पांडेय को अब ‘सिर कलम’ करने की धमकी मिली है।
आशुतोष पांडेय ने आरोप लगाया कि उन्हें पाकिस्तान से धमकी मिली है और उनका फेसबुक आईडी हैक कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत में बैन आतंकी संगठन पीएफआइ द्वारा कई बार उन्हें हत्या की धमकी मिल चुकी है। अब पाकिस्तान से कई युवकों द्वारा जन्मभूमि के वाद में पैरवी करने को लेकर धमकी दी है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के वाद में पैरवी करने पर सिर कलम करने की धमकी दी गई है। उन्होंने कहा कि शनिवार (6 जनवरी 2024) की देर रात उनकी फेसबुक पेज आईडी को भी हैक कर लिया। गया और उन्हें एडमिन से हटा दिया है। इस मामले में उन्हें मथुरा पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
आशुतोष ने प्रमुख गृह सचिव केंद्र सहित एसएसपी मथुरा और उत्तर प्रदेश गृह विभाग को ईमेल के जरिए शिकायत की है। एसएसपी ने मामले को जाँच के लिए साइबर सेल को सुपुर्द कर दिया है। वहीं, एसपी सिटी अरविंद कुमार ने कहा कि इस मामले की जाँच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएँगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आशुतोष पांडे से पहले खुद को सत्यम पंडित बताने वाले एक शख्स ने इसी तरह का दावा किया था। सत्यम ने कहा था कि वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसका हक दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई है। सत्यम पंडित ने लेटर दिखा कर दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की तरफ से उन्हें यह धमकी दी गई है।
सत्यम को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मामले के संबंध में गाजियाबाद घंटाघर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। एसीपी निमिष पाटिल ने कहा था कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और आगे जाँच की जा रही है। पीड़ित के ऑफिस के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
झारखंड के राँची स्थित राम-जानकी मंदिर में अराजक तत्वों ने ना सिर्फ चोरी की घटना को अंजाम दिया, बल्कि मंदिर की मूर्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस घटना के बाद इलाके के हिंदुओं में आक्रोश है। मंदिर से भगवान का मुकुट सहित दूसरे सामान गायब हो गए हैं। घटनास्थल पर भाजपा सांसद संजय सेठ और विधायक सीपी सिंह और काँके विधायक समरी लाल भी पहुँचे।
दरअसल, राँची के बरियातू स्थित मंदिर में सोमवार (8 जनवरी 2024) की सुबह जब माली फूल देने गया तो देखा कि मंदिर का ताला टूटा हुआ है। इसके बाद उसने इस घटना की जानकारी मंदिर के पुजारी को दी। पुजारी मंदिर पहुँचा तो देखा कि मंदिर का सामान चोरी हो गया है और मूर्ति के साथ तोड़फोड़ की गई है। इसके बाद पुजारी ने घटना की जानकारी पुलिस को दी।
इधर, घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग भी मंदिर पहुँच गए। घटना से नाराज हिंदुओं ने वहाँ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। नाराज लोगों ने सड़क को जाम कर दिया। कुछ युवक मंदिर के सामने की सड़क पर बैठ गए और वहाँ हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। घटना को देखते हुए घटनास्थल पर पुलिस बल को तैनात किया गया है।
घटना को लेकर स्थानीय सांसद संजय सेठ ने कहा कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होने जा रहा है। उससे पहले इस तरह की घटना से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह चोरी की घटना नहीं है। अगर चोरी की मंशा होती तो चोर सारा सामान चोर फेंककर नहीं जाते।
सांसद सेठ ने कहा कि टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राँची की शांति को किसी भी कीमत पर भंग होने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से घटना को अंजाम देने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने की माँग की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मंदिर की मूर्तियाँ बदली जाएँ और उनकी प्राण प्रतिष्ठा की जाए।
लोगों के बढ़ते विरोध को देखकर स्थानीय प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए हैं। उन्होंने विरोध करने वाले लोगों को समझाने की कोशिश की। डीएसपी सदर प्रभात कुमार बरवार ने कहा कि हम मामले में सबूत जुटाई जा रही है। सीसीटीवी का एक फुटेज मिला है, जिसमें एक व्यक्ति हाथ में झोला लिए हुआ दिखा है। उन्होंने कहा कि उसे देखकर लगता है कि वह कचरा चुनने वाला हो सकता है।
डीएसपी बरवार ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के अलावा पुलिस प्रशासन फिंगर प्रिंट भी जुटा कर रहा है। आरोपितों की पहचान करके उन्हें जल्द-से-जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, इस मामले पर एसपी सिटी का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि घटना की जाँच के लिए पाँच थाने की पुलिस को मिलाकर एसआईटी गठित की जाएगी।
एसपी सिटी राजकुमार मेहता ने यह भी कहा कि सांसद और विधायक नई प्रतिमाएँ बनवाएँगे। उन्होंने कहा कि वे खुद भी अपने वेतन से एक प्रतिमा बनवाएँगे। इसके अलावा मंदिर में सीसीटीवी लगाने और मंदिर के पीछे शौचालय का निर्माण कराने की बात भी कही है। उन्होंने लोगों से विरोध प्रदर्शन खत्म करने का आग्रह किया।
मालदीव की मुइज्जू सरकार में शामिल मंत्रियों के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत को लेकर की गई टिप्पणियों से भारत सरकार खासी नाराज है। भारत ने मामले को राजनयिक चैनलों से उठाने के बाद अब मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया।
मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। वह 9:35 मिनट पर भारतीय विदेश मंत्रालय पहुँचे थे और 9:40 पर बाहर आते हुए दिखे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था। मालदीव की सरकार द्वारा भारत के हाई कमिश्नर मुनु महावर को भी मालदीव के विदेश मंत्रालय बुलाए जाने की बात सामने आई है।
#WATCH | Ibrahim Shaheeb, Maldives Envoy exits the MEA in Delhi's South Block.
He had reached the Ministry amid row over Maldives MP's post on PM Modi's visit to Lakshadweep. pic.twitter.com/Dxsj3nkNvw
मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत का नाम लिए बिना कहा है कि इस तरह विदेशी नेताओं और करीबी पड़ोसियों पर हालिया टिप्पणी अस्वीकार्य है। ये मालदीव के आधिकारिक पक्ष को नहीं दिखाता।
The recent remarks against foreign leaders and our close neighbours are unacceptable and do not reflect the official position of the Government of #Maldives.
We remain committed to fostering a positive and constructive dialogue with all our partners, especially our neighbours,…
गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।
भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।
इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने ने मालदीव के रवैये की आलोचना की थी। कई बॉलीवुड सितारों ने लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे और साथ ही खुद भी जाने की बात कही थी। एक ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।
मुगल काल से वर्तमान तक कई युद्धों और कानूनी लड़ाइयों के बाद आखिरकार 22 जनवरी, 2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा उनकी जन्मभूमि पर बने मंदिर में की जाएगी। इस अवसर पर देश भर का माहौल राममय हो चुका है। ऐसे में दुनिया भर के हिन्दू उन रामभक्तों को याद कर रहे हैं जिन्होंने बाबर से ले कर मुलायम तक के शासन काल में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उन तमाम ज्ञात-अज्ञात वीरों में एक थे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के निवासी राम बहादुर वर्मा। राम बहुदर वर्मा को 30 अक्टूबर, 1990 की कारसेवा के दौरान गोली लगी थी। ऑपइंडिया ने राम बहादुर वर्मा के घर जा कर वर्तमान हालातों की जानकारी ली।
बलिदानी राम बहादुर वर्मा का घर सुल्तानपुर जिले के थाना क्षेत्र जयसिंहपुर में पड़ता है। उनके गाँव का नाम सरतेजपुर है। सरतेजपुर की अयोध्या रामजन्मभूमि से दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। जब हम राम बहादुर के घर पहुँचे तो गाँव के बाहर ही उनके बड़े बेटे काली सहाय वर्मा मिल गए। काली सहाय वर्मा ने बताया कि 48 वर्ष की उम्र में बलिदान होने के समय उनके पिता अपने पीछे बीमार पत्नी और 6 संतानें छोड़ गए थे। इन 6 संतानों में 2 बेटियाँ और 4 बेटे हैं। तब सभी अविवाहित थे। फ़िलहाल सभी का शादी-ब्याह हो चुका है।
राम बहादुर के घर पर मौजूद उनके पुत्र जयराम वर्मा
राम बहादुर वर्मा का परिवार मूल रूप से किसान है और खेती-बारी उनका मुख्य पेशा है। इसके अलावा उन्होंने धान कूटने की मशीन भी लगा रखी है। फिलहाल उनके बड़े बेटे काली सहाय ग्राम प्रधान हैं। काली सहाय पोलियो की वजह से बचपन से ही एक पैर से दिव्यांग हैं। वर्तमान में उनका मकान टूटा-फूटा हुआ है जिसके उधड़े प्लास्टर साफ देखे जा सकते हैं।
माँ ने अदा किया पिता का फर्ज
जब राम बहादुर वर्मा वीरगति को प्राप्त हुए तब उनके बड़े बेटे काली सहाय की उम्र 20 साल के आसपास थी। काली सहाय के मुताबिक, खबर सुन कर घर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। हालाँकि, राम बहादुर की पत्नी चंद्रावती ने अपने बच्चों का भविष्य देखते हुए खुद को सँभाला। काली सहाय ने भी बड़े भाई का कर्तव्य निभाया और गन्ने की पेराई जैसे काम कर के अपने छोटे भाई-बहनों को न सिर्फ पढ़ाया लिखाया बल्कि उनकी शादी-ब्याह भी किया। काली सहाय वर्मा ने बताया कि वो समय उनके परिवार के लिए सबसे कठिन था।
राम बहादुर के बड़े पुत्र काली सहाय वर्मा
बलिदानी कारसेवक राम बहादुर की पत्नी पहले से ही बीमार रहती थीं। बाद में उन्हें कैंसर हो गया। घर वालों ने उनके इलाज में काफी पैसे लगाए। लम्बे इलाज के बाद आखिरकार चंद्रावती ने भी साल 2016 में दुनिया को अलविदा कह दिया। देहांत के समय चंद्रावती की उम्र लगभग 73 वर्ष थी। फ़िलहाल राम बहादुर का परिवार अभी भी अपने-आप को इन त्रासदियों से उबारने के लिए संघर्ष कर रहा है।
सिर में मारी गई थी गोली
काली सहाय वर्मा ने हमें बताया कि उनके पिता भगवान राम और बजरंग बली के परम भक्त थे। हर मंगलवार राम बहादुर पास के हनुमान मंदिर में दर्शन करने जाते थे। हर पूर्णिमा को वो अयोध्या साइकिल से जाते थे। जब सन 1990 में कारसेवा शुरू हुई तब देश के कोने-कोने से आ रहे कारसेवकों को राम बहादुर ने शरण देने के साथ उनके खाने-पीने का भी इंतजाम करवाया। आखिरकार 25 अक्टूबर, 1990 को वो अपने आसपास के कुछ साथियों के साथ जत्था बना कर अयोध्या की तरफ कूच कर गए। अयोध्या जाते समय राम बहादुर ने अपनी पत्नी से कहा था, “मैं शायद न लौट पाऊँ। बच्चों का ध्यान रखना।” नम आँखों से काली सहाय ने आगे कहा, “मेरे पिता के लिए पत्नी और बच्चों से कहीं अधिक प्रिय प्रभु श्रीराम थे।”
काली सहाय ने हमें आगे बताया कि उनके पिता को अयोध्या जाने के वो तमाम रास्ते मालूम थे जो मुख्य मार्गों पर तैनात पुलिस वाले नहीं जानते थे। खेतों में छिपते-छिपाते आख़िरकार राम बहादुर साथियों सहित 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या पहुँच ही गए। काली सहाय का कहना है कि उनके पिता जत्थे में सबसे आगे चल रहे थे। दावा है कि कोठारी बंधुओं के पीछे राम बहादुर वर्मा भी गुंबद पर चढ़ने लगे। इसी दौरान मुलायम सिंह के आदेश पर गोली चल गई। गोली लगने से राम बहादुर बुरी तरफ से घायल हो कर जमीन में गिर पड़े।
2 महीने मौत से लड़ी जंग फिर हुए बलिदान
बलिदानी राम बहादुर के बेटे ने हमें आगे बताया कि उनके पिता के पूरे शरीर में गोलियों के छर्रे धँसे हुए थे। ये छर्रे सीधे लगने के बजाय तिरछे एंगल से दागे गए थे। काली सहाय को आशंका है कि उनके पिता पर हेलीकॉप्टर से गोलियाँ बरसाई गईं थी। इन छर्रों में से एक राम बहादुर के सिर में लगा और वो अचेत हो कर भीड़ में गिर गए। साथी कारसेवकों ने बेहोश राम बहादुर को भीड़ से निकाला और अपने प्राणों को संकट में डाल कार अयोध्या के श्रीराम अस्पताल में भर्ती करवाया।
इस बीच 4 दिनों तक राम बहादुर की कोई खोज खबर न मिलने पर उनकी पत्नी और बेटों ने उनको अयोध्या में खोजना शुरू किया। कई जगहों की ख़ाक छानने के बाद आखिरकार राम बहादुर गंभीर हालत में श्रीराम अस्पताल में भर्ती मिले। यहाँ वो लगभग 12 दिनों तक भर्ती रहे। हालत गंभीर होते देख कर राम बहादुर को लखनऊ मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया। जैसे-तैसे राम बहादुर के परिजन उनको ले कर लखनऊ पहुँचे। यहाँ उनका इलाज शुरू हुआ लेकिन आखिरकार लगभग 2 माह बाद 3 जनवरी, 1991 को राम बहादुर स्वर्ग सिधार गए।
बेहोशी की हालत में भी लेते थे राम का नाम
काली सहाय 1990 में अपने पिता की देखरेख के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सिर में लगे छर्रे से मस्तिष्क में सम्भवतः मवाद बन गई थी। इसी के चलते अक्सर राम बहादुर रह-रह कर बेहोश हो जाया करते थे। काली सहाय का दावा है कि अस्पताल में उनके पिता मूर्छित अवस्था में भी राम-राम कहा करते थे। आखिरकार 3 जनवरी, 1991 को उनके देहांत के बाद शव को पैतृक गाँव सरतेजपुर लाया गया।
शव पर लोगों ने बरसाए थे फूल
काली सहाय ने साल 1990 को याद करते हुए कहा कि उनके पिता के अयोध्या कूच से पहले जितनी फ़ोर्स इलाके में तैनात थी उसकी कई गुना ज्यादा फ़ोर्स अंतिम संस्कार के समय जुट गई थी। इस दौरान लोगों के आने-जाने पर कई तरह की प्रशासनिक पाबंदियाँ लगा दी गईं थीं लेकिन बावजूद इसके अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। 4 जनवरी, 1991 को हिन्दू संगठन के सदस्यों ने राम बहादुर के शव की पूरे क्षेत्र में झाँकी निकाली थी जिस पर लोगों ने फूल बरसाए। थे। आखिरकार अगले दिन 5 जनवरी को उनका अंतिम संस्कार गाँव के मुहाने पर एक प्राचीन मंदिर के आगे हुआ।
पिता जी ने स्वीकार किया था मुलायम का चैलेन्ज
काली सहाय वर्मा अपना सबसे बड़ा दुश्मन मुलायम सिंह यादव को बताते हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह ने उनको अनाथ कर दिया। राम बहादुर वर्मा का परिवार राम मंदिर बनने से भी बेहद खुश है। वह इसे अपने पिता का बलिदान सार्थक होना बताता है। बकौल काली सहाय 1990 में मुलायम सिंह यादव ने चैलेन्ज दिया था कि परिंदा भी पर अयोध्या में नहीं मार सकता लेकिन उनके बलिदानी पिता ने न सिर्फ इस चैलेन्ज को स्वीकार किया बल्कि प्राणों को गँवा कर भी जीत हासिल की।
6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढाँचा ध्वंस होने की घटना काली सहाय वर्मा 1990 में वीरगति पाए कारसेवकों की प्रेरणा बताते हैं। राम बहादुर के परिजन 22 जनवरी, 2024 को हो रहे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सम्मिलित भी होना चाहते हैं।
राम बहादुर की समाधि आज भी देती है प्रेरणा
जिस स्थान पर 5 जनवरी, 1991 को राम बहादुर का अंतिम संस्कार हुआ था आज वहाँ एक समाधि स्थल है। यह समाधि खुद राम बहादुर वर्मा के परिजनों ने बनवाई है। हर साल 3 जनवरी को यहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा होता है और हनुमान चालीसा के साथ रामचरितमानस का पाठ किया जाता है। इसी के अलावा अन्य पर्व त्योहारों पर राम बहादुर के परिजन मिल कर यहाँ श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ करते हैं।
कारसेवक राम बहादुर वर्मा दाह स्थली पर बनी समाधि
हालाँकि इस स्मारक के आसपास जमीन न होने की वजह से लोगों के जुटने में समस्या खड़ी हो जाया करती है। राम बहादुर के घर वालों ने प्रशासन और शासन से इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने की गुहार लगाई है। साथ ही वो यह भी चाहते हैं कि अयोध्या राम मंदिर में उनके पिता और बाकी अन्य बलिदानियों का स्मारक बना कर उनके त्याग के बारे में लोगों को बताया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के बिलकिस बानो गैंगरेप केस के 11 दोषियों को जेल से जल्दी छोड़ने के फैसले को पलट दिया है। अगस्त 2022 में गुजरात सरकार ने निर्णय लिया था कि बिलकिस मामले में जेल में बंद दोषियों के अच्छे व्यवहार के आधार पर उनकी बाकी सजा माफ़ कर दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान ने इस मामले का निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि बिलकिस के गैंगरेप के दोषियों को दो सप्ताह के भीतर फिर से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करके जेल जाना होगा। उसका कहना है कि इन 11 दोषियों को जेल से जल्दी छोड़ने का निर्णय गुजरात सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
इन सभी दोषियों को अच्छे व्यवहार के चलते गुजरात सरकार ने 15 अगस्त 2022 को जेल से छोड़ा था। इन्हें 2004 में गिरफ्तार किया गया था जबकि 2008 में सजा सुनाई गई थी। इन सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 2022 तक इन्हें सजा पाए लगभग 15 वर्ष हो गए थे। इसीलिए गुजरात सरकार ने 2022 में छोड़ दिया था।
इनको 2022 में छोड़े जाने के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दाखिल की गईं थी। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका बिलकिस बानो ने खुद भी डाली थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में बारह दिनों तक सुनवाई की थी और इस पर निर्णय को रिजर्व कर लिया था। अब इसका निर्णय बिलकिस बानो के पक्ष में आया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2002 में गुजरात के गोधरा में कारसेवकों की एक ट्रेन पर मुस्लिम भीड़ ने हमला करके उसमें आग लगा दी थी। इस हमले में 59 कारसेवक मारे गए थे। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे। इन दंगों के दौरान ही बिलकिस बानो के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सजा बॉम्बे हाई कोर्ट ने बरकरार रखी थी इसलिए इन दोषियों को माफ़ करने का निर्णय भी महाराष्ट्र सरकार का होना चाहिए था ना कि गुजरात सरकार का। हालाँकि मालूम हो कि यह मामला महाराष्ट्र से गुजरात ट्रांसफर कर दिया गया था।
लेखक और गीतकार जावेद अख्तर को हाल ही में रिलीज हुई एनिमल (Animal) फिल्म की टीम से करारा जवाब मिला है। जावेद अख्तर ने एक फिल्म फेस्टिवल के दौरान एनिमल के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की कबीर सिंह और एनिमल फिल्मों के दो सीन की आलोचना की थी।
जावेद अख्तर को एनिमल फिल्म के एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट पर करारा जवाब मिला है। एक्स पर एनिमल द फिल्म (Animal The Film) ने लिखा, “अगर आपके जैसा लेखक एक प्रेमी के धोखे को (जोया और रणविजय के बीच) को नहीं समझ सका तो आपकी सारी आर्ट झूठी है।”
Writer of your calibre cannot understand the betrayal of a lover (Between Zoya & Ranvijay) then all your art form is big FALSE ? & If a woman (betrayed and fooled by a man in the name of love) would have said "lick my shoe" then you guys would have celebrated it by calling it…
आगे लिखा “यहीं अगर प्यार में धोखा खाई और मूर्ख बनाई गई एक महिला ने अपने प्रेमी से उसका जूता चाटने को कह दिया होता तो तुम लोग उसे फेमिनिज्म कह कर इसकी प्रशंसा कर रहे होते। प्रेम को लिंग और राजनीति से अलग रखते हैं। उन्हें सिर्फ प्रेमी कहते हैं। एक प्रेमी ने धोखा दिया और झूठ बोला। प्रेमी ने बोला- मेरा जूता चाटो। बस यही है।”
जावेद अख्तर को यह जवाब उनके औरंगाबाद में अजन्ता एलोरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिए गए एक बयान पर मिला। यहाँ उन्होंने कहा था, “मुझे लगता है कि यह नए फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ा ही कठिन समय है क्योंकि ना जाने वो कैसे पात्र अपनी फिल्मों में दिखाना चाहते हैं जिनकी समाज प्रशंसा करेगा। उदहारण के लिए, अगर एक ऐसी फिल्म है जिसमें एक पुरुष एक महिला से उसका जूता चाटने को कहता है और एक महिला को थप्पड़ मारना सही है और फिल्म भी सुपरडुपर हिट है तो यह बड़ा खतरनाक है।”
यहाँ जावेद अख्तर एनिमल फिल्म के उस सीन की बात कर रहे थे जिसमें रणबीर कपूर (फिल्म में विजय सिंह) तृप्ति डिमरी (फिल्म में जोया) से उनका जूता चाटने को कहते हैं। वहीं थप्पड़ मारने की बात उन्होंने 2019 में आई कबीर सिंह फिल्म से सम्बंधित थी। इसमें शाहिद कपूर (कबीर सिंह) कियारा अडवानी (प्रीती) के थप्पड़ मारते हैं।
एनिमल और कबीर सिंह दोनों ही फिल्मों को संदीप रेड्डी वांगा ने निर्देशित किया है। संदीप रेड्डी वांगा की यह दोनों फ़िल्में सुपर हिट रही हैं।
पड़ोसी देश बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजे साफ हो गए हैं। सत्ताधारी आवामी लीग एक बार फिर बांग्लादेश में वापसी कर रही है। इसकी सुप्रीमो शेख हसीना पाँचवी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। 350 सीटों वाली बांग्लादेशी संसद में आवामी लीग ने बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया है। इन चुनावों में बांग्लादेश के क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने भी जीत हासिल की है। वह सत्ताधारी आवामी लीग से ही चुनाव लड़ रहे थे।
इन चुनावों के लिए मतदान 7 जनवरी, 2024 को करवाया गया था। इसके तुरंत बाद ही मतगणना चालू हो गई। अब तक की मतगणना में शेख हसीना की आवामी पार्टी 190 से अधिक सीटों पर आगे है। प्रधानमंत्री शेख हसीना भी गोपालगंज-3 सीट से भारी मतों से जीत गई हैं। वहीं लगभग 50 निर्दलीय उम्मीदवार भी जीतते दिख रहे हैं।
जातीय पार्टी बांग्लादेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर रही है। जातीय पार्टी को अब तक लगभग 11 सीटों पर बढ़त मिल रही है। बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी मानी जाने वाली बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने इन चुनावों का बहिष्कार किया था। इससे पहले 2019 में बांग्लादेश में चुनाव हुए थे, जिसमें शेख हसीना की आवामी लीग को 350 में से 306 सीट मिलीं थी।
बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन ने मागुरा-1 सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने इस चुनाव में अपने निकट प्रतिद्वंदी को 1.5 लाख से अधिक मतों से हराया। वह चुनाव से कुछ दिन पहले ही आवामी लीग में शामिल हुए थे। हालाँकि, वह क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे।
बांग्लादेश चुनावों को देखने आए विदेशी आब्जर्वर ने भी इनकी प्रशंसा की है। उन्होंने इन चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष बताया है। इस बार बांग्लादेश के चुनावों में 40% मतदान हुआ है। हालाँकि, इसके पीछे मतदान के समय में कमी को कारण माना जा रहा है।
बांग्लादेश के इस बार के चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें थी। अमेरिका ने कई बार अपने क़दमों से दिखाया था कि वह अब आगे और शेख हसीना को सत्ता में नहीं देखना चाहता है। जबकि भारत, चीन और रूस जैसे देश बांग्लादेश से रिश्तों में स्थायित्व के लिए शेख हसीना को ही सही विकल्प मानते आए हैं।
शेख हसीना के यह चुनाव जीतने के साथ हीवह विश्व में सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली महिला प्रमुख बन गई हैं। वह 1996 से 2001 और फिर 2009 से लगातार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही हैं। उनके शासनकाल में बांग्लादेश में काफी विकास हुआ है। उन्होंने बांग्लादेश को काफी तेज आर्थिक विकास दर दिलाने में सफलता पाई है।
भारत से रिश्तों में भी शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद काफी बढ़ोतरी हुई है। शेख हसीना से पहले बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही खालिदा जिया के समय में बांग्लादेश से भी आतंकी आने का खतरा भारत में बढ़ गया था। एक दो आतंकी संगठन भी बांग्लादेश में अपना बेस बना चुके थे। शेख हसीना के शासन के दौरान बंगलादेश और भारत ने कई विवाद सुलझाए हैं।
बांग्लादेश के इन आम चुनावों में हिंसा की भी छिटपुट घटनाएँ सामने आई हैं। हालाँकि, किसी बड़े स्तर पर हिंसा नहीं हो पाई।
देश की बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने मालदीव को बड़ा झटका दिया है। इसके फाउंडर और सीईओ ने कहा है कि वह अपने पोर्टल से मालदीव की फ्लाइट टिकट बुकिंग बंद कर रहे हैं। EaseMyTrip ने यह निर्णय मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद लिया है।
EaseMyTrip के सीईओ और फाउंडर निशांत पिट्टी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “अपने देश के साथ मजबूती से खड़े होते हुए EaseMyTrip ने मालदीव की सभी फ्लाइट बुकिंग को निलंबित कर दिया है।” EaseMyTrip भारत में ऑनलाइन ट्रैवल बाजार का बड़ा खिलाड़ी है।
EaseMyTrip की देश के ऑनलाइन ट्रैवल बाजार में लगभग 10% की हिस्सेदारी है। यह बाजार ₹1.5 लाख करोड़ का है। EaseMyTrip के इस कदम के बाद अन्य ट्रैवल कम्पनियों पर भी दबाव पड़ रहा है कि वह ऐसे ही कदम उठाएँ।
गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।
इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।
भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।
प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और बड़ी हस्तियों ने ने मालदीव के रवैये की आलोचना की थी। कई बॉलीवुड सितारों ने लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे और साथ ही खुद भी जाने की बात कही थी।
उधर भारतीयों के गुस्से का असर मालदीव पर लगातार पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 2500 फ्लाइट और 8 हजार से ज्यादा होटल बुकिंग भारतीय रद्द कर चुके हैं। यह आँकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
सरस्वती देवी की उम्र 85 साल है। वे झारखंड के धनबाद में रहती हैं। करीब 30 साल से मौन व्रत में हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने यह संकल्प लिया था। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही उनका संकल्प भी पूरा होगा। वे रामलला के चरणों में ही अपना व्रत तोड़ेंगी। ‘राम नाम’ के साथ ही उनका ये व्रत टूटेगा।
सरस्वती देवी ने 1992 में मौन व्रत शुरू किया था। संकल्प लिया था कि राम मंदिर बनने के बाद ही अपना व्रत तोड़ेंगी। प्राण-प्रतिष्ठा की घड़ी नजदीक आने के साथ ही धनबाद के करमटांड़ में रहने वाली सरस्वती देवी बहुत प्रसन्न हैं। वे लिखकर बताती हैं, “मेरा जीवन सफल हो गया। रामलला ने मुझे प्राण-प्रतिष्ठा में बुलाया है। मेरी तपस्या, साधना सफल हुई। 30 साल बाद मेरा मौन व्रत ‘राम नाम’ के साथ टूटेगा।”
उन्हें प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का न्योता मिल चुका है। इस न्योते से उनका पूरा परिवार खुश है। उनके भाई 8 जनवरी 2024 को उन्हें अयोध्या लेकर जाएँगे। बेटे हरिराम अग्रवाल के मुताबिक, मई 1992 में सरस्वती देवी अयोध्या में राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास से मिलीं थी। तब महंत दास ने उन्हें कामतानाथ पर्वत की परिक्रमा करने को कहा था।
इसके बाद वो चित्रकूट चली गईं। उन्होंने साढ़े सात महीने कल्पवास में एक गिलास दूध के सहारे निकाला और हर दिन कामतानाथ पर्वत की 14 किलोमीटर की परिक्रमा की। परिक्रमा करने के बाद अयोध्या लौटने पर 6 दिसंबर 1992 को स्वामी नृत्य गोपाल दास के कहने पर उन्होंने मौन धारण कर लिया।
इसी दिन सरस्वती देवी ने संकल्प किया कि वो राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन ही अपना व्रत तोड़ेंगी। उनके परिवार ने उनके इस निर्णय का स्वागत और उनके साथ पूरा सहयोग किया। इसके बाद से उनका सारा ही वक्त लगभग पूजा-पाठ में बीतता है। किसी को कुछ कहना होता तो वो इशारों में या ताली बजाकर बताती हैं। मौन के इस संकल्प के साथ ही सरस्वती देवी ने चारों धाम की तीर्थ यात्राएँ भी पूरी की है।
इसके अलावा वे अयोध्या, काशी, मथुरा, तिरुपति बालाजी, सोमनाथ मंदिर, बाबा बैद्यनाथधाम के दर्शनों के लिए जा चुकी हैं। प्रभु राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने वाली सरस्वती देवी आज से 65 साल पहले धनबाद के भौंरा के रहने वाले देवकीनंदन अग्रवाल की जीवनसंगिनी बनीं थी। उन्होंने कभी स्कूल का मुँह तक नहीं देखा था, लेकिन पति ने उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। हालाँकि उनके पति उनका साथ 35 साल पहले ही छोड़ परलोक सिधार गए।
इसके बाद से वो अकेले ही परिवार को चलाती रहीं। अपने 8 बच्चों में से तीन की मौत का दुख भी उन्हें झेलना पड़ा, लेकिन वे भक्ति मार्ग पर चलती रहीं। हर दिन धार्मिक पुस्तकें पढ़ना उनकी दिनचर्या का अंग है। इसके साथ वो केवल एक वक्त का सात्विक भोजन लेती हैं।
बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह ने हिंदुओं की भावना को आहत करने वाले अपने विधायक नेता फतेह बहादुर सिंह के बयान का समर्थन किया है। फतेह बहादुर ने कुछ दिन पहले एक पोस्टर में मंदिर को लेकर विवादित बातें छपवाई थीं। इसमें कहा गया था कि मंदिर गुलामी का रास्ता होता है जबकि स्कूल का रास्ता प्रकाश का होता है। उनकी इसी हरकत का बचाव करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि ये बात फतेह बहादुर की कही नहीं है बल्कि सावित्री बाई फुले की है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ‘मंदिर गुलामी का रास्ता है…’ इस बात को फतेह बहादुर ने खुद से नहीं कहा बल्कि इस बात को तो देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले ने कहा था। फतेह बहादुर ने तो बस उस बात को दोहराया है। फिर भी षड्यंत्रकारियों ने उनके गले की कीमत लगा दी।
चंद्रशेखर सिंह बोले अब एकलव्य का बेटा अंगूठा दान नहीं करेगा, शहीद जगदेव का बेटा अब आहूति नहीं देगा, क्योंकि वह अब आहूति लेना जानता है। चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि बहुजन लोगों का इतना पसीना बहेगा कि समुंंदर बन जाएगा और सारे विरोधी उस समंदर के पार खड़े दिखेंगे।
इससे पहले फतेह बहादुर खुद भी उस बयान को सावित्री बाई फुले का बयान बताकर पूरे मामले में पल्ला झाड़ चुके हैं। वहीं जिस कार्यक्रम में चंद्रशेखर सिंह ने यह बात कही है उसी के पोस्टर लालू यादव के घर के बाहर लगाए गए थे और उनपर लिखा था-
“मंदिर का मतलब मानसिक गुलामी का मार्ग और स्कूल का मतलब होता है जीवन में प्रकाश का मार्ग। जब मंदिर की घंटी बजती है तो हमें संदेश देती है कि हम अंधविश्वास, पाखंड, मूर्खता और अज्ञानता की तरफ बढ़ रहे हैं और जब स्कूल की घंटी बजती है तो यह संदेश मिलता है कि हम तर्कपूर्ण ज्ञान और वैज्ञानिकता व प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं। अब तय करना है कि आपको किस ओर जाना चाहिए?”
लालू यादव के आवास के बाहर लगे पोस्टर
इस पोस्टर में साइड में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की भी फोटो थी। इसके अलावा पोस्टर में बड़ा सा फतेह बहादुर का फोटो लगा था। कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में भी फतेह बहादुर सिंह कुशवाहा का नाम था, जो कुछ दिन पहले ही माता सरस्वती पर विवादित बयान देने के कारण चर्चा में आए थे।
हर बार दूसरे के हवाले से विवादित टिप्पणी करना, हिंदू आस्था को ठेस पहुँचाना फतेह बहादुर सिंह का काम हो गया है। कुछ समय पहले कुशवाहा समाज से ताल्लुक रखने वाले और बिहार के रोहतास जिले के डेहरी से सत्ताधारी RJD के विधायक फतेह ने कहा था,
“आप ही के ग्रंथ में लिखा हुआ कि सुरसती (सरस्वती) जो है, ब्रह्मा की बेटी है और ब्रह्मा जी का अपनी ही पुत्री पर नियत खराब हुआ और उन्होंने (ब्रह्मा) उनके साथ शादी कर लिया। आप खुद समझिए… पूजा किसका होता है, चरित्रवान का या चरित्रहीन का?”
आरजेडी विधायक ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा था, “ये चरित्रवान-चरित्रहीन वाली बात मैं नहीं बोल रहा हूँ, ये संत कबीरदास ने कहा है। मैं उनका कहा हुआ बात कह रहा हूँ। उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों में सरस्वती जी की प्रतिमा नहीं लगाई जानी चाहिए।”
"चरित्रहीन की पूजा नहीं होती"
RJD विधायक फतेह बहादुर कुशवाहा ने मां सरस्वती को चरित्रहीन बताते हुए उनकी जगह स्कूलों में सावित्री बाई फुले की प्रार्थना और मूर्ति लगाने की मांग की। pic.twitter.com/wFQ1u6Iaje
उनके इन्हीं बयानों के बाद कई लोग उनसे काफी नाराज हुए थे। हिंदू शिवभवानी सेना की ओर से ऐलान किया गया था कि जो फतेह बहादुर की जीभ काटकर लाएगा उसे 10 लाख रुपए का इनाम मिलेगा।