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‘कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं’: कॉन्ग्रेस सरकार का ऐलान, भाजपा बोली – PFI के गुंडों और अल्पसंख्यकों को खुश करने का है ये निर्णय

कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनकर आने पर अब कोई रोक-टोक नहीं है। कॉन्ग्रेस सरकार ने शनिवार (23 दिसंबर 2023) को ये ऐलान किया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मैसुरु जिले के नंजनगुड में तीन पुलिस स्टेशनों के उद्घाटन के मौके पर शुक्रवार (22 दिसंबर 2023) को ये घोषणा की थी।

इसके पीछे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने तर्क दिया कि पोशाक और भोजन का चुनाव व्यक्तिगत होता है। इसलिए इस पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर लोगों को पहनावे और जाति के आधार पर बाँटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी को भी वोट बैंक की राजनीति में शामिल नहीं होना चाहिए।

सीएम सिद्धारमैया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “वे कहते हैं ‘सबका साथ, सबका विकास’, लेकिन टोपी-बुर्का पहनने वालों और दाढ़ी रखने वालों को वो दरकिनार कर देते हैं। क्या उनका यही मतलब है?” बताते चलें कि मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने इशारा कर दिया था कि अगर राज्य की सत्ता में आती है तो हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटा देगी।

हिजाब बैन के एक सवाल पर सीएम सिद्धरमैया ने कहा, “आप हिजाब पहन सकते हैं। मैंने निर्देश दिया है कि कल से इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। आप कुछ भी पहन और खा सकते हैं। यह आप पर निर्भर है।” सीएम ने आगे कहा, “आपकी पसंद आपकी है और मेरी पसंद मेरी है। यह बहुत आसान है। मैं धोती-कुर्ता पहनता हूँ और आप पैंट-शर्ट पहनते हैं। यह आपकी पसंद है। इसमें गलत क्या है?”

कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार गरीबों, पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सत्ता में आई है।” सीएम ने अपनी सरकार की पाँच गारंटियों पर को लेकर कहा कि इनका फायदा सभी जाति, धर्म और राजनीतिक विचारधारा के लोगों को मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा, “बीजेपी समर्थक भी इसका फायदा उठा रहे हैं और बस में मुफ्त यात्रा कर रहे हैं। हम भेदभाव नहीं करते।”

कॉन्ग्रेस सरकार के इस ऐलान को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने समाज हित के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर कोई रोक-टोक न होने का फैसला संस्थानों की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति को लेकर चिंता पैदा करने वाला है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक पोशाक की अनुमति देकर कर्नाटक सरकार युवाओं को धार्मिक आधार पर विभाजित कर रही है।

कर्नाटक भाजपा ने कहा कि सिद्धारमैया पीएफआई के गुंडों और अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए वोट बैंक के लिए संविधान में ही संशोधन करने जा रहे हैं। भाजपा ने कहा कि उसकी सरकार के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखा था। आने वाले दिनों में जनता खुद इसे सबक सिखाएगी।

दरअसल, राज्य की भाजपा सरकार ने शिक्षण संस्थानों में समरूपता लाने के लिए ड्रेस कोड लागू किया था। कर्नाटक में इसे हिजाब-बुर्का पर प्रतिबंध बता कर देश के दूसरे हिस्सों में भी बवाल किया गया था। कुछ शिक्षण संस्थानों में विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ वक्त कई शिक्षण संस्थान बंद रखे गए थे।

मामला उडुपी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज फॉर गर्ल्स से शुरू हुआ था। इस कॉलेज की छह छात्राओं को हिजाब में कक्षाओं में आने की मंजूरी नहीं दी गई थी। इसे लेकर दिसंबर 2021 में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए जो पूरे राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में फैल गए थे। बाद में यह देश के हिस्सों में भी फैल गया।

यही नहीं, मामला कर्नाटक हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुँचा था। आखिरकार फैसला हुआ कि शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने पर रोक रहेगी। सिर्फ यूनिफॉर्म पहनकर ही कक्षा में आने की अनुमति होगी। छात्राएँ हिजाब में स्कूल आ सकती थीं, लेकिन कक्षा में प्रवेश करने से पहले उन्हें अपने हिजाब को उतारना होगा।

कुल्हड़ पिज्जा के मालिक को निहंगों ने दी ‘दुकान जलाने’ की धमकी: ‘दुनिया बड़ी बहन$द’ Reel पर बवाल, सेक्स टेप से चर्चा में आया था कपल

कुछ समय पहले ‘प्राइवेट वीडियो’ लीक होने के बाद चर्चा में आए लुधियाना के ‘कुल्हड़ पिज्जा’ के मालिक फिर से विवादों के घेरे में हैं। इस बार उन पर सिख समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगा है। निहंग सिखों ने कुल्हड़ पिज्जा के मालिक सहज अरोड़ा और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सिख समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर दंपति ने इंस्टाग्राम रील को नहीं हटाया और सार्वजनिक रूप से माफी नहीं माँगी तो वे कुल्हड़ पिज्जा रेस्तरां को जला देंगे। निहंग सिखों ने सहज और गुरप्रीत को नकली सिख बताया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को लुधियाना के निहंग रमनदीप सिंह मंगू और उसके साथियों ने कुल्हड़ पिज्जा कपल के रेस्टोरेंट के बाहर जमकर हंगामा किया। ये लोग इस जोड़े की इंस्टाग्राम रील देखकर क्रोधित नजर आ रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस गाने में अपमानजनक बोल और गाली-गलौच है। इस पर रील बनाकर इस जोड़े ने पूरी दुनिया में सिख समुदाय को बदनाम किया है। मंगू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें रेस्तरां पहुँचने के बाद पता चला कि वे लोग शहर में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे वहीं इंतजार करेंगे और व्यक्तिगत रूप से मिलने के बाद ही लौटेंगे।

वायरल वीडियो पर निराशा व्यक्त करते हुए निहंग सिख ने कहा कि इस जोड़े ने सिख समुदाय को शर्मसार किया है और वे केवल रियलिटी शो बिग बॉस में जगह बनाने के लिए ये लोग इस तरह की घटिया हरकतें कर रहे हैं। मंगू के मुताबिक, सहज का मोबाइल फोन फिलहाल बंद है और उन्हें एक मेसेज भेजकर जल्द माफी माँगने को कहा गया है।

इंस्टाग्राम की जिस रील को लेकर निहंगों ने आपत्ति जताई है, उसमें कुल्हड़ पिज्जा युगल एक गाना गाते और नाचते हुए दिखाई दे रहा है। इस रील में गाने का बोल है, ‘ये दुनिया बड़ी बहन*द है…’। इसी को लेकर निहंगों ने आपत्ति जाहिर की है।

इस कपल ने “हाय री दुनिया” गाने के हिस्से पर परफॉर्म किया था, जो मूल रूप से रश्मीत कौर, इक्का, रुशा और ब्लिज़ा द्वारा गाया गया है। उनके द्वारा परफॉर्म किया गया हिस्सा मूल गाने में 1.19 सेकंड से शुरू होता है।

कुल्हड़ पिज्जा के मालिक सहज अरोड़ा ने फेसबुक पर एक वीडियो बयान जारी करके इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम रील में जिस गाने पर वह और उनकी पत्नी परफॉर्म करते नजर आ रहे हैं, वह उनका अपना नहीं है। उन्होंने बताया कि यह एक पेड प्रमोशन था और वीडियो को प्रमोट करने के लिए गाने के निर्माताओं ने उनसे संपर्क किया था। अपने फोन में आए एक मैसेज को दिखाते हुए अरोड़ा ने साफ कहा कि उन्हें प्रोड्यूसरों ने ऐसा करने के लिए कहा था।

उन्होंने कहा कि जिस गाने पर वह परफॉर्म करते नजर आ रहे हैं, उसके शब्द उनके अपने नहीं हैं। वह बस निर्माताओं की जरूरतों के मुताबिक गाने का प्रचार कर रहे थे, जिसके लिए उन्हें भुगतान किया जाएगा।अरोड़ा ने कहा कि अगर उन्होंने अनजाने में किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो वह माफी माँगने को तैयार हैं।

सहज अरोड़ा ने अपने वीडियो बयान में आरोप लगाया कि निहंग रमनदीप सिंह मंगू के सहयोगी ने उन्हें ब्लैकमेल किया था और इस मामले को सुलझाने के लिए उनसे 50,000 रुपए की माँग की थी। सहज अरोड़ा ने अपने दावे के समर्थन में एक वीडियो का एक हिस्सा भी दिखाया।

प्राइवेट वीडियो मामले पर भी तोड़ी चुप्पी, हुए थे सेक्सटॉर्शन रैकेट के शिकार

यह पहली बार नहीं है जब कुल्हड़ पिज्जा कपल किसी विवाद में फँसा है। सितंबर 2023 में उनका एक कथित ‘प्राइवेट वीडियो‘ वायरल हो गया था। इस मामले में 22 सितंबर 2023 को कुल्हड़ पिज्जा के मालिक सहज अरोड़ा ने इंस्टाग्राम पर अपना दूसरा वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में वो अपने परिवार को पहुँचे मानसिक आघात के बारे में बताते हुए रो पड़े थे। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर न करने की अपील की थी।

ये वायरल वीडियो एक सेक्स टेप था, जिसमें कपल के बीच अंतरंग पलों को दिखाया गया है। वीडियो में पुरुष का चेहरा पूरा दिख रहा था, जबकि महिला का चेहरा आंशिक रूप से दिख रहा था। उस वीडियो में दिख रही महिला का टैटू उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर जैसा ही था। इसके अतिरिक्त वीडियो में महिला को लाल चूड़ियाँ पहने हुए देखा गया, जो पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा उनकी शादी के बाद पहनी जाती हैं। इससे पता चलता है कि वीडियो जोड़े की शादी के बाद बनाया गया था। कुल्हड़ पिज़्ज़ा कपल के पहले के कई वीडियो में गुरप्रीत कौर को पारंपरिक लाल ‘चूड़ा’ चूड़ियाँ पहने हुए भी देखा गया है।

वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सहज अरोड़ा ने 21 सितंबर 2023 को इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए अपने पहले वीडियो संदेश में कुल्हड़ पिज्जा के मालिक ने आरोप लगाया कि वीडियो नकली था और दृश्यों को बदलने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि टेप के वायरल होने के बाद से वह और उनका परिवार किस सदमे से गुजर रहा है।

सेक्सटॉर्शन रैकेट का शिकार होने का संकेत देते हुए अरोड़ा ने कहा कि वीडियो 15 दिन पहले इंस्टाग्राम पर एक ब्लैकमेल संदेश के साथ लीक हो गया था। ब्लैकमेलर के दबाव के आगे झुकने के बजाय कपल ने कानूनी रास्ते से न्याय पाने का फैसला किया, जिसके बाद सहज ने कहा कि उन्होंने जालंधर के थाना नंबर 4 में एफआईआर दर्ज कराई थी।

अमेरिका में फिर हिंदू मंदिर पर हमला: आतंकी भिंडरावाला को बताया ‘शहीद’, PM मोदी के लिए लिखा ‘टेररिस्ट’

खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश रचने का आरोप भारत पर लगाने वाले अमेरिका में एक बार फिर हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। कैलिफोर्निया के नेवार्क के एक मंदिर में खालिस्तान समर्थकों द्वारा यह हमला किया गया है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

अमेरिका के हिंदू-अमेरिकन फाउंडेशन ने भी इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर लिखा है कि खालिस्तानियों ने कैलिफोर्निया के नेवार्क में स्वामीनारायण मंदिर वासना संस्था को निशाना है। खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवारों ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘शहीद भिंडरावाले जिंदाबाद’ लिखा है। इसके साथ ही पीएम मोदी को आतंकी कह दिया है।

इस घटना की जानकारी नेवार्क पुलिस के साथ-साथ सिविल राइट्स अधिकारियों को भी दे दी गई है। हिंदू-अमेरिकन फाउंडेशन का कहना है कि इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि घटना की जाँच पुलिस इसे हेट क्राइम मानकर करे। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि इस मामले की गहन जाँच की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है, जब अमेरिका में इस तरह की घटना हुई हो। फरवरी 2019 में अमेरिका के केंटकी राज्य में स्थित स्वामीनारायण संप्रदाय के एक हिन्दू मंदिर में हुई तोड़-फोड़ की गई थी। इस घटना में स्वामीनारायण की मूर्ति पर काला पेंट छिड़क दिया गया था। इसके साथ ही मुख्य सभा में रखी हुई कुर्सियों में चाकू भी गोदा गया था।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका में रह रहे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप अमेरिका ने भारत पर लगाया है। इस संबंध में चेक गणराज्य से निखइल गुप्ता नाम के एक भारतीय नागरिक को भी गिरफ्तार किया है। इस कारण से दोनों देशों के बीच रिश्ते में खटास दिख रही है।

वहीं, दो दिन पहले पीएम मोदी ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि इस संबंध में अगर अमेरिका सबूत देता है तो उस पर गौर किया जाएगा। पीएम ने कहा था कि इन कुछ घटनाओं से भारत-अमेरिका संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने खालिस्तानियों पर भी निशाना साधा था। खालिस्तानियों को लेकर उन्होंने कहा था, “ये लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में डराने-धमकाने और हिंसा भड़काने में लगे हुए हैं।” पीएम ने जोर देते हुए ये भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों की अहम कड़ी सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग है।

जिस पन्नू की हत्या की साजिश को लेकर अमेरिका ने इतना बवाल खड़ा किया है, वह भारत में घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू है। वो प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संगठन का सरगना है और भारत के खिलाफ आग उगलता रहता है। उसके पास संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की दोनों देशों की नागरिकता है।

बता दें कि अमेरिकी की तरह ही कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में भी हिंदू एवं उनके मंदिरों पर लगातार हमले किए जाते रहे हैं। इसी दौरान एक खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया था।

इसको लेकर कनाडा के साथ भारत के रिश्तों में खटास आ गई है। भारत ने कनाडा के नागरिकों के वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही दिल्ली स्थित कनाडा के राजयनिकों की संख्या में कटौती भी कर दी थी। हालाँकि, दोनों देशों के संबंध अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे हैं।

शराब नीति घोटाले में CM केजरीवाल पर लटकी तलवार! अभी पंजाब में कर रहे हैं विपश्यना: ED ने तीसरी बार किया तलब, 3 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया

दिल्ली शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तीसरी बार समन जारी किया है। उन्हें 3 जनवरी 2024 को ईडी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। इससे पहले सीएम केजरीवाल को दो समन जारी किया जा चुका है, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। उन्होंने खुद के शहर से बाहर होने और नोटिस को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया था।

बता दें कि ईडी दिल्ली एक्साइज नीति में कथित घोटाले के धनशोधन के पहलू की जाँच कर रही है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि केजरीवाल इस तीसरे समन का पालन करेंगे या नहीं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस समय विपश्यना के लिए पंजाब के होशियारपुर गए हुए हैं और 30 दिसंबर 2023 तक लौटने की उम्मीद है।

इससे पहले, ईडी ने 18 दिसंबर 2023 को अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दूसरा समन जारी किया था और 21 दिसंबर 2023 को पेश होने के लिए कहा था। इस समन को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने राजनीति से प्रेरित करार दिया था। उन्होंने कहा था कि ईडी ने ये समन ऐसे समय में जारी किया, जब वो 20 दिसंबर 2023 को विपश्यना के लिए रवाना होने वाले हैं।

वहीं, ईडी ने इस मामले में 2 नवंबर 2023 को पहला समन भेजकर अरविंद केजरीवाल को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया था। तब अरविंद केजरीवाल खुद को चुनाव में व्यस्त बताकर ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया था। वो मध्य प्रदेश के सिंगरौली में चुनाव प्रचार करने चले गए थे।

इस मामले में जेल में बंद अरविंद केजरीवाल के करीबी साथियों और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं- संजय सिंह और मनीष सिसोदिया दोनों ने जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, कोर्ट ने शुक्रवार (22 दिसंबर 2023) को उनकी याचिका खारिज कर दी। संजय सिंह को 10 जनवरी 2024 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि मनीष सिसोदिया की सुनवाई 19 जनवरी 2024 को होगी।

दिल्ली की आबकारी नीति में घोटाले में दिल्ली सरकार ने शराब की बिक्री और लाइसेंसिंग का काम निजी कंपनियों को दे दिया था। इस नीति पर कई सवाल उठे थे, जिसमें यह भी सवाल था कि क्या इस नीति से दिल्ली सरकार को राजस्व में नुकसान हुआ है। ईडी ने इस घोटाले की जाँच शुरू की और उसने कई लोगों से पूछताछ की।

अरविंद केजरीवाल के अलावा, इस घोटाले में कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए, जिनमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। मनीष सिसोदिया, संजय सिंह जैसे महत्वपूर्ण लोग इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। इसी मामले में उन्होंने जमानत की याचिका दाखिल की थी।

बीवी नहीं बनाने देती शारीरिक संबंध… BJD सांसद की गुहार ओडिशा हाई कोर्ट ने सुनी, मिली तलाक को मंजूरी

ओडिशा हाईकोर्ट ने गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को बीजेडी सांसद अनुभव मोहंती के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनका तलाक मंजूर कर लिया। अनुभव मोहंती के वकील ललितेंदु मिश्रा ने फैसला सुनाए जाने के बाद बताया कि खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अनुभव मोहंती के साथ उनकी पत्नी वर्षा प्रियदर्शनी ने क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया और उन्हें शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति नहीं दी।

उन्होंने बताया कि इसी आधार पर हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 (1) (आईबी) के तहत तलाक के आदेश द्वारा विवाह को भंग करने की घोषणा की।

बता दें कि अनुभव मोहंती ओडिसी फिल्मों के फेमस एक्टर हैं। इसके अलावा राजनीति में आने के बाद वह बीजेडी सांसद भी हैं। उन्होंने 2014 में अभिनेत्री वर्षा प्रियदर्शनी से शादी की थी। हालाँकि कुछ समय बाद ही अनुभव और वर्षा के बीच अनबन की खबरें आने लगीं।

शादी के दो साल बाद अनुभव मोहंती ने अपनी पत्नी के विरुद्ध केस कराया कि उनकी पत्नी उन्हें शारीरिक संबंध बनाने और स्वाभाविक दांपत्य जीवन की अनुमति नहीं देती है। उन्होंने कहा था कि शारीरिक संबंध स्थापित करने के गंभीर प्रयासों के बाद हमेशा निराशा मिली।

वहीं वर्षा प्रियदर्शिनी ने अनुभव पर आरोप लगाया था कि अनुभव ने उनको माँ बनने के अधिकार से वंचित रखा। अपनी शिकायत में वर्षा ने अनुभव को शराबी बताया था और कहा था कि उनके कई अफेयर्स भी रह चुके हैं। बात बढ़ी तो अनुभव ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट की और कहा था- “हमारी शादी को 8 साल हो गए हैं, लेकिन इतने सालों बाद भी उनकी पत्नी ने उनके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए। वह जब भी उनके पास जाते वह इजाजत नहीं देती। उन्होंने कहा था कि वह मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। कोई कितने दिन और इंतजार करे? मैं अपनी पत्नी से तलाक चाहता हूँ, लेकिन अभी मामला कोर्ट में है। अनुभव ने एक फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दी।”

साल 2021 में खबर आई कि अनुभव ने तलाक की याचिका दिल्ली के कोर्ट में डाली है और उनकी पत्नी ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली। बाद में ये दोनों केस कटक में ट्रांसफर हो गए। 22 सितंबर को इस मामले में कटक कोर्ट ने अनुभव के पक्ष में तलाक का फैसला देने से इनकार कर दिया क्योंकि वो अपने आरोप कथतितौर पर साबित नहीं कर पाए थे कि उनकी पत्नी उन्हें संबंध नहीं बनाने देतीं या फिर उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करती हैं। कटक कोर्ट के इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी और सुनवाई के बाद दो जजों की पीठ ने उनके पक्ष में फैसला दिया।

संजय सिंह और मनीष सिसोदिया को फिर नहीं मिली बेल, जेल में ही मनाएँगे नया साल: दिल्ली की शराब नीति बन गई गले की फाँस

दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और दिल्ली के पटपड़गंज से AAP के विधायक एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कोर्ट से फिर राहत नहीं मिल पाई है। अब दोनों जेल में नया साल बिताने को मजबूर हो गए हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 19 जनवरी 2024 तक बढ़ा दी है। वहीं, संजय सिंह की न्यायिक हिरासत 10 जनवरी 2024 तक बढ़ाई गई है।

15 जनवरी तक का दिया समय

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत खत्म हो रही थी, जिसके बाद उन्हें शुक्रवार (22 दिसंबर 2023) को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मनीष सिसोदिया के वकीलों ने कहा कि अभी तक उन्हें सीबीआई की तरफ से चार्जशीट नहीं मिली है। हालाँकि, सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि चार्जशीट से संबंधित सभी कागजात आरोपितों को उपलब्ध करा दिए गए हैं।

इस पर कोर्ट ने आरोपित पक्ष के वकील को 15 जनवरी 2024 तक का समय देते हुए कहा कि वे सुबह 10 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक सीबीआई के दफ्तर जाकर डॉक्यूमेंट्स की जाँच कर लें। कोर्ट ने सीबीआई को सभी फाइलें डीवीडी फॉर्मेंट में देने का आदेश दिया।

कोर्ट ने AAP नेता मनीष सिसोदिया के वकीलों के वकीलों को फटकार लगाते हुए कहा कि वे जान बूझकर मामले की सुनवाई में देरी करना चाह रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 19 जनवरी 2024 तय कर दी।

संजय सिंह को भी नहीं मिली बेल

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष सीबीआई न्यायाधीश एमके नागपाल की कोर्ट में संजय सिंह की पेशी हुई। इस मामले में कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उनकी हिरासत 10 जनवरी 2024 तक के लिए बढ़ा दी है। इससे पहले कोर्ट ने 11 दिसंबर 2023 को संजय सिंह की न्यायिक हिरासत 10 दिन के लिए बढ़ा दी थी।

बता दें कि दिल्ली की शराब नीति से जुड़े घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ही पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया जेल में हैं। उनके साथ ही संजय सिंह भी जेल में हैं। वहीं, ईडी ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल को भी जाँच में शामिल होने के लिए समन भेजा है। हालाँकि, अरविंद केजरीवाल ने समन को ही गलत बताते हुए कहा कि उन्हें ये ही नहीं बताया गया है कि ईडी ने किस हैसियत से उन्हें बुलाया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 21 दिसंबर 2023 को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन अरविंद केजरीवाल 20 दिसंबर 2023 को विपश्यना करने के लिए पंजाब के होशियारपुर चले गए। वहीं, ED ने शुक्रवार (22 दिसंबर 2023) को एक बार फिर सीएम केजरीवाल को समन जारी करके पूछताछ के लिए बुलाया है।

‘तुम कितने बलूच मारोगे’: हर शहर-हर गली से आई आवाज, पाकिस्तान के ‘सरकारी आतंकवाद’ के खिलाफ एकजुट हुआ बलूचिस्तान

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सरकारी आतंकवाद के खिलाफ हर शहर और गाँव में पुरजोर विरोध हो रहा है। वहाँ के लोग करीब एक महीना पहले हुए बलूच नरसंहार और युवाओं के अपहरण के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। अब इसकी आग राजधानी इस्लामाबाद तक जा पहुँची है। इसको लेकर पूरा बलूचिस्तान बंद है। वहाँ सभी सड़कें बंद हैं।

इस्लामाबाद और डीजी खान से उठाए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई की माँग की जा रही। चेतावनी दी गई है कि अगर छात्रों और प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया तो बलूचिस्तान पूरी तरह से जाम हो जाएगा। दरअसल पाकिस्तानी पुलिस ने बलूच नरसंहार के खिलाफ लॉन्ग मार्च में शामिल चार बलूच युवाओं को गैरकानूनी तरीके से उठाकर उनकी हत्या कर दी थी।

बलूच नरसंहार के खिलाफ इस्लामाबाद में ग्वादर के सरबंदन इलाके में एक बडे़ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बलूचों पर अमानवीय अत्याचार किया। पुलिस ने 200 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें महिलाएँ भी शामिल थीं। इन्हीं में से एक महिला को 26 घंटे के अपमान, उत्पीड़न और यातना के बाद इस्लामाबाद पुलिस ने रिहा किया। इसके बाद वहाँ विरोध-प्रदर्शनों में तेजी आ गई है।

बलूच यकजहती समिति ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “बलूचिस्तान में सरकारी आतंकवाद के खिलाफ बलूचिस्तान के हर शहर और गाँव में विरोध रैलियाँ हो रही हैं। इस्लामाबाद में ग्वादर के सरबंदन इलाके में बलूच माताओं-बहनों के अपमान के खिलाफ बलूच समुदाय सामने आ गया है और अपना गुस्सा जाहिर कर रहा है। पूरा बलूचिस्तान इस वक्त सरकारी आतंकवाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है।”

बलूच यकजहती समिति ने सोशल मीडिया पर हिरासत में ली गई महिला के दर्द भरे अनुभवों को भी शेयर किया है। इसमें बताया गया है कि किस तरह से महिला के साथ पाकिस्तानी पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं।

वहीं, समिति ने इस्लामाबाद में बलूच प्रदर्शनकारियों के साथ किए जा रहे व्यवहार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने की अपील की है। समिति की इस अपील के बाद से बड़ी संख्या में बलूच पाकिस्तान के के अलग-अलग हिस्से से इस्लामाबाद कूच करने लगे।

इस दौरान बरखान, रुकनी, फोर्ट मुनरो, टौंसा, डीजी खान, क्वेटा, केच, ग्वादर, वाध, कोहलू, कलात, हब सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। बलूच महिलाओं की रिहाई के बावजूद फिक्र बनी हुई है, क्योंकि उनके 200 से अधिक पुरुष साथी अभी हिरासत में हैं। इनमें से 162 लोगों को अदियाला जेल भेज दिया गया है, जबकि 50 से अधिक लोगों इस्लामाबाद के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में हिरासत में रखा गया है।

बलूच यकजहती समिति ने बलूच नरसंहार और गैरकानूनी अपहरण के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का दृढ़ संकल्प जताया है। समिति ने कहा, “हम बलूच नरसंहार और गैरकानूनी अपहरण के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे। अगले कदम का ऐलान जल्दी ही मीडिया के जरिए किया जाएगा।”

बताते चलें कि ये बलूच यकजहती समिति ने बलूच नरसंहार के विरोध में लॉन्ग मार्च आयोजित किया था। ये लॉन्ग मार्च बालाच मोला बख्श की मौत से शुरू हुआ था। उन्हें 29 अक्टूबर 2023 को आतंकवाद विरोधी पुलिस उनके घर से उठा ले गई थी। केच जिले के चार युवा बलूचों को पुलिस उठाकर ले गई थी और उनकी हत्या कर दी।

इसके बाद पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में तेजी आ गई। बलूच नरसंहार के विरोध के तौर पर शुरू यह मार्च बलूचिस्तान और पंजाब के कई जिलों से होते हुए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक जा पहुँचा। वहाँ पहुँचने पर मार्च में शामिल बलूच प्रर्दशनकारियों को बेहद क्रूरता का सामना करना पड़ा।

बलूच मानवाधिकार परिषद ने इस्लामाबाद पुलिस और अंतरिम सरकार की अमानवीय और क्रूर प्रतिक्रिया पर गहरी चिंता जताई है। परिषद ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की है। इसके साथ ही पुलिस पर पर बलूच कार्यकर्ताओं को पीटने और गिरफ्तार करने के साथ-साथ मार्च में भाग लेने वाले बुजुर्ग पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

बलूच मानवाधिकार परिषद ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “ये लोग अपने लोगों के लिए न्याय चाहते हैं, जिन्हें पाकिस्तान के कई हिस्सों से जबरन गायब कर दिया गया है।” परिषद ने क्रूरता और जबरदस्ती की निंदा करने का आह्वान किया और पाकिस्तानी अधिकारियों से मानवाधिकार उपकरणों का सम्मान करने की अपनी प्रतिज्ञा को बरकरार रखने का आग्रह किया।

‘प्राइवेट पार्ट में डाला डंडा, माँगता था बच्चियाँ’: कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA ने जो किया-जो करवाया, रेप पीड़िता ने पुलिस को सब कुछ बताया

राजस्थान के बाड़मेर से तीन बार कॉन्ग्रेस के विधायक रहे मेवाराम जैन सहित 9 के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज हुआ है। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में जो कुछ बताया है, उससे पता चलता है कि उसकी प्रताड़ना करीब दो साल से चल रही थी। न केवल उसके साथ रेप हुआ, बल्कि उसकी सहेली का भी रेप किया गया। उसकी नाबालिग बेटी का भी यौन शोषण हुआ।

पीड़िता के अनुसार कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक मेवाराम जैन को नाबालिग लड़कियों के साथ संबंध बनाने का चस्का है। नाबालिग बच्चियों और अन्य महिलाओं को लाने के लिए उस पर दबाव बनाया जाता था। महिला का आरोप है कि पूर्व विधायक की शह पर पुलिसकर्मियों ने भी उसे टॉर्चर किया। उसके प्राइवेट पार्ट में डंडा तक डाल दिया गया था।

झूठे केस दर्ज कराए, प्राइवेट पार्ट में डाला डंडा: पीड़िता

रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने बताया है कि मेवाराम और रामस्वरूप ने उसके दो अश्लील वीडियो बनाए थे। जब उसके साथ रेप करते-करते उनका मन भर गया, तो वे 15-16 साल की लड़कियाँ लाने को उसे कहने लगे। पीड़िता के अनुसार उसके घर में घुसकर आरोपितों ने उसकी सहेली के साथ रेप किया और उसका भी वीडियो बनाया।

पीड़िता के अनुसार रामस्वरूप और मेवालाल ने उसके खिलाफ दो मामले भी दर्ज कराए हैं। पहला मामला 29 नवंबर 2022 को दर्ज कराया गया था। इस मामले में बाड़मेर कोतवाली के थानाधिकारी गंगराम खावा और एसआई दाऊद खान उसे जरूरी काम बताकर पाली रोड के एक फॉर्म हाउस पर ले गए। वहाँ डीएसपी आनंद सिंह राजपुरोहित और कई पुलिसकर्मी मौजूद थे। मौके पर ही थोड़ी देर में उसकी सहेली को भी बुलाया गया। पीड़िता के अनुसार इसके बाद उसे और उसकी सहेली को बुरी तरह पीटा गया। उनके प्राइवेट पार्ट में लकड़ी का डंडा डालकर प्रताड़ित किया गया।

पीड़ित महिला के अनुसार इस दौरान आरोपितों ने एक वीडियो भी शूट किया। इसमें उन्हें खुद को ब्लैकमेलर बताने को मजबूर किया गया। साथ ही सादे कागजों पर दस्तखत करा लिए गए। इन घटनाओं के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी। पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में ये खुद को, अपने परिवार को और मामले के अन्य गवाहों को मेवाराम तथा रामस्वरूप से जान का खतरा भी बताया है।

क्या है मामला

पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि 2021 में वह अपने पिता के इलाज कराने के लिए बस से सफर कर रही थी। इसी दौरान रामस्वरूप से मुलाकात हुई। रामस्वरूप ने उससे दोस्ती की। फिर होटल ले जाकर उसे नशे की गोलियाँ खिला दी और रेप किया। रामस्वरूप ने इसका वीडियो बना लिया। ब्लैकमेल कर कई बार रेप किया।

कथित तौर पर इसके बाद रामस्वरुप उसे बाड़मेर के तत्कालीन कॉन्ग्रेस विधायक मेवाराम जैन के पास ले गया। जैन ने भी उसका रेप किया। पीड़िता का आरोप है कि ये लोग उसके घर भी आते थे और रेप करते थे। इसी दौरान एक बार उसकी सहेली के साथ रेप किया गया था। बाद में उसकी नाबालिग बेटी से भी आरोपित छेड़छाड़ करने लगे। बेटी के सामने ही पीड़िता के साथ अश्लील हरकत करते थे। अन्य महिलाओं को भी लाने का दबाव डालते थे।

पीड़िता का कहना है कि डर और बदनामी के कारण वह चुपचाप प्रताड़ना झेलती रही। लेकिन जब उसकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ हुआ तो वह शिकायत लेकर बाड़मेर के कोतवाली थाने गई। लेकिन केस दर्ज करने के बजाए उसे पुलिसकर्मियों ने प्रताड़ित किया। पीड़ित महिला का कहना है कि इसके बाद रामस्वरूप और मेवालाल ने उसके खिलाफ दो झूठे मामले भी दर्ज करा दिए।

उल्लेखनीय है कि मेवाराम जैन ने 30 अक्टूबर 2022 को बाड़मेर के कोतवाली थाने में ब्लैकमेल करने का केस दर्ज करवाया था। 15 नवंबर 203 को प्रवर्तन निदेशालय ने बाड़मेर जैन की ओर से दर्ज कराई गई सेक्सटॉर्शन की शिकायत के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का मामला दर्ज किया था। इसके बाद सोशल मीडिया में उनकी कुछ तस्वीरें भी आईं थी। लेकिन जैन ने इन्हें ​एडिटेड बताया था।

अब पीड़ित महिला ने जिस तरह के गंभीर आरोप जैन और उनके साथियों पर लगाए हैं उसने सनसनी मचा दी है। इस मामले में जोधपुर के डीसीपी (पश्चिम) गौरव यादव ने बताया कि एक महिला की तरफ से थाने में रिपोर्ट दी गई है। मामले की जाँच की जा रही है। महिला की शिकायत पर रेप, गैंगरेप, पॉक्सो, ब्लैकमेलिंग, जान से मारने की धमकी, मारपीट, दुष्कर्म, एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘पद्मश्री’ लौटाकर प्रियंका गाँधी के आँगन में दिखे बजरंग पुनिया, संन्यास लेने वाली साक्षी मलिक भी थी साथ: संजय सिंह के WFI अध्यक्ष बनने से हैं नाराज

बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह जब से कुश्ती संघ के अध्यक्ष चुने गए हैं तभी से कुछ नामी भारतीय पहलवान इसका विरोध कर रहे हैं। कल (22 दिसंबर 2023) साक्षी मलिक ने कहा था कि वो अपनी कुश्ती छोड़ रही हैं तो आज बजरंग पुनिया ने अपना पद्मश्री का सम्मान वापस लौटाने का ऐलान किया है। एक वीडियो सामने आई है जिसमें बजरंग पुनिया अवार्ड को फुटपाथ पर रखकर भाग रहे हैं। उन्होंने अपने एक्स अकॉउंट पर लिखा, “मैं अपना पद्मश्री पुरस्कार प्रधानमंत्री जी को वापस लौटा रहा हूँ। कहने के लिए बस मेरा यह पत्र है।”

अपने पत्र में बजरंग पुनिया ने प्रधानमंत्री से कहा,

“इसी साल जनवरी महीने में देश की महिला पहलवानों ने कुश्ती संघ पर काबिज बृजभूषण शरण सिंह पर सेक्सुअल हरासमेंट के गंभीर आरोप लगाए थे, जब उन महिला पहलवानों ने अपना आंदोलन शुरू किया तो मैं भी उसमें शामिल हो गया। आंदोलित पहलवान जनवरी में अपने घर लौट गए, जब उन्हें सरकार ने ठोस कार्रवाई की बात कही। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी बृजभूषण पर एफआईआर तक नहीं की। तब हम पहलवानों ने अप्रैल महीने में दोबारा सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया ताकि दिल्ली पुलिस कम से कम बृजभूषण सिंह पर एफआईआर दर्ज करे, लेकिन फिर भी बात नहीं बनी, तो हमें कोर्ट में जाकर एफआईआर करवानी पड़ी।

जनवरी में शिकायतकर्ता महिला पहलवानों की गिनती 19 थी जो अप्रैल आते-आते 7 रह गई थी। यानी इन तीन महीनों में अपनी ताकत के दम पर बृजभूषण सिंह ने 12 महिला पहलवानों को अपने न्याय की लड़ाई में पीछे हटा दिया था। आंदोलन 40 दिन चला। इन 40 दिनों में एक महिला पहलवान और पीछे हट गईं। हम सब पर बहुत दबाव आ रहा था। हमारे प्रदर्शन स्थल को तहस-नहस कर दिया गया और हमें दिल्ली से बाहर खदेड़ दिया गया और हमारे प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी। जब ऐसा हुआ तो हमें कछ समझ नहीं आया कि हम क्या करें। इसलिए हमने अपने मेडल गंगा में बहाने की सोची।

उसी समय आपके एक जिम्मेदार मंत्री का फोन आया और हमें कहा गया कि हम वापस आ जाएँ, हमारे साथ न्याय होगा। इसी बीच हमारे गृहमंत्री जी से भी हमारी मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वे महिला पहलवानों के लिए न्याय में उनका साथ देंगे और कुश्ती फेडरेशन बृजभूषण, उसके परिवार और उसके गुर्गों को बाहर करेंगे। हमने उनकी बात मानकर सड़कों से अपना आंदोलन समाप्त कर दिया, क्योंकि कुश्ती संघ का हल सरकार कर देगी और न्याय की लड़ाई न्यायालय में लड़ी जाएगी, ये दो बातें हमें तर्कसंगत लगी।

आगे बजरंग पुनिया ने संजय सिंह के अध्यक्ष बनने का हवाला दिया और कहा कि WFI के अध्यक्ष पद पर बृजभूषण शरण फिर काबिज हो गया है। उसने बयान दिया है कि दबदबा है और दबदबा रहेगा। महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोपित सरेआम ऐसा दावा कर रहा था, इसी मानसिक दबाव में आकर ओलंपिक पदक विजेता एकमात्र महिला पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से सन्यास ले लिया।

उन्होंने लिखा, “खेल हमारी महिला खिलाड़ियों के जीवन में जबरदस्त बदलाव लेकर आए थे। पहले देहात में यह कल्पना नहीं कर सकता था कि देहाती मैदानों में लड़के-लड़कियाँ एक साथ खेलते दिखेंगे। लेकिन पहली पीढ़ी की महिला खिलाड़ियों की हिम्मत के कारण ऐसा हो सका। हर गाँव में आपको लड़कियाँ खेलती दिख जाएँगी और वे खेलने के लिए देश विदेश तक जा रही हैं। लेकिन जिनका दबदबा कायम हुआ है या रहेगा, उनकी परछाई तक महिला खिलाड़ियों को डराती है और अब तो वे पूरी तरह दोबारा काबिज हो गए हैं। उनके गले में फूल-मालाओं वाली फोटो आप तक पहुँची होगी।”

बता दें कि साल 2013 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कई साहित्यकारों ने भी अवार्ड वापस का अभियान चलाया था। कुछ समय बाद पता चला था वो पूरा अभियान राजनीति से प्रेरित था। आज जब पहलवान बजरंग पुनिया ने अपना अवार्ड लौटाया उस समय भी ऐसा नजारा देखने को मिला। कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए ट्वीट में देखने को मिला कि बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक समेत कई पहलवानों से कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने मुलाकात की।

महिला एंकर के कंधे पर रखा हाथ, कान में कहा… नीतीश कुमार का वीडियो वायरल, बीजेपी नेता बोले- FIR हो, यौन कुंठित हो गए हैं CM

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर चर्चा में है। विधानसभा में गर्भनिरोधक के तरीकों के बारे में बात करने के तरीकों के लिए उनकी काफी चर्चा हुई थी। हालाँकि, यह उनकी आलोचना थी। अब नीतीश कुमार ने अपने एक कार्यक्रम की संचालिका (एंकर) के कंधे पर हाथ रख दिया और उनसे चुटकी ले ली। इस पर नीतीश कुमार की फिर चर्चा हो रही है। हालाँकि, भाजपा नेता सुशील मोदी ने इसे नीतीश कुमार की यौन कुंठा बताया है।

दरअसल, बिहार के सीएम एवं जदयू के सुप्रीमो नीतीश कुमार गुवार (21 दिसंबर 2023) को पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड पहुँचे थे। यहाँ पर पशु संसाधन विभाग का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जब सीएम नीतीश कार्यक्रम में पहुँचे तो महिला एंकर ने स्वागत करते हुए कहा, “सादर निवेदन माननीय मुख्यमंत्री महोदय से कि वो मंच पर आकर स्थान ग्रहण करें।”

इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच की ओर बढ़े और एंकर को पास जाकर अपने दोनों हाथों उसके कंधे पर हाथ रख दिया और कहा, “आपका अभिनंदन”। इसके बाद महिला एंकर मुस्कुराने लगी और कहा, थैंक यू सर… थैंक यू सो मच”। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस व्यवहार को देखकर वहाँ खड़े अधिकारियों एवं लोगों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई।

नीतीश कुमार के इस अंदाज पर राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने उन पर तंज कसा है। सुशील मोदी ने नीतीश कुमार के इस व्यवहार को उनकी यौन कुंठा बताया और कहा कि उन्हें अपने आचरण और वाणी पर नियंत्रण नहीं है। भाजपा नेता ने उद्घोषिका का नाम सोमा चक्रवर्ती बताया।

अपने एक्स पोस्ट में सुशील मोदी ने कहा, “नीतीश कुमार ने महिला उद्घोषिका सोमा चक्रवर्ती को दोनों हाथों से सार्वजनिक मंच पर स्पर्श करते हुए उनके चेहरे के बहुत पास अपना मुँह ले जाकर जिस शराररपूर्ण ढंग से ‘आपका भी अभिवादन’ कहा, वह अत्यंत शर्मसार करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि सीएम की गहरी यौन कुंठा के कारण उनके शब्दों, संकेतों और सार्वजनिक व्यवहार से महिलाओं को लज्जित-अपमानित करने की घटनाएँ बार-बार हो रही हैं।”

भाजपा सांसद ने आगे कहा, “नीतीश कुमार ने पिछले दिनों विधान मंडल के दोनों सदनों में प्रजनन दर रोकने की चर्चा करते हुए ऐसी भाषा का उपयोग किया, जिससे महिला सदस्य अपमानित महसूस कर रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि सदन में अपने अश्लील वक्तव्य के कारण नीतीश कुमार ने जीवन में पहली बार बिना शर्त क्षमा याचना की थी। इससे पहले वे भाजपा की महिला विधायक निकी हेम्ब्रम पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं।”

नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा, “नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति को देखते हुए जदयू को अब नया नेता चुन लेना चाहिए, अन्यथा एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से महिलाओं के अपमान की कोई बड़ी घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार की चर्चित उद्घोषिका और वरिष्ठ रंगकर्मी सोमा चक्रवर्ती को साहस कर नीतीश कुमार पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराना चाहिए।”