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महिला एंकर के कंधे पर रखा हाथ, कान में कहा… नीतीश कुमार का वीडियो वायरल, बीजेपी नेता बोले- FIR हो, यौन कुंठित हो गए हैं CM

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर चर्चा में है। विधानसभा में गर्भनिरोधक के तरीकों के बारे में बात करने के तरीकों के लिए उनकी काफी चर्चा हुई थी। हालाँकि, यह उनकी आलोचना थी। अब नीतीश कुमार ने अपने एक कार्यक्रम की संचालिका (एंकर) के कंधे पर हाथ रख दिया और उनसे चुटकी ले ली। इस पर नीतीश कुमार की फिर चर्चा हो रही है। हालाँकि, भाजपा नेता सुशील मोदी ने इसे नीतीश कुमार की यौन कुंठा बताया है।

दरअसल, बिहार के सीएम एवं जदयू के सुप्रीमो नीतीश कुमार गुवार (21 दिसंबर 2023) को पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड पहुँचे थे। यहाँ पर पशु संसाधन विभाग का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जब सीएम नीतीश कार्यक्रम में पहुँचे तो महिला एंकर ने स्वागत करते हुए कहा, “सादर निवेदन माननीय मुख्यमंत्री महोदय से कि वो मंच पर आकर स्थान ग्रहण करें।”

इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच की ओर बढ़े और एंकर को पास जाकर अपने दोनों हाथों उसके कंधे पर हाथ रख दिया और कहा, “आपका अभिनंदन”। इसके बाद महिला एंकर मुस्कुराने लगी और कहा, थैंक यू सर… थैंक यू सो मच”। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस व्यवहार को देखकर वहाँ खड़े अधिकारियों एवं लोगों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई।

नीतीश कुमार के इस अंदाज पर राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने उन पर तंज कसा है। सुशील मोदी ने नीतीश कुमार के इस व्यवहार को उनकी यौन कुंठा बताया और कहा कि उन्हें अपने आचरण और वाणी पर नियंत्रण नहीं है। भाजपा नेता ने उद्घोषिका का नाम सोमा चक्रवर्ती बताया।

अपने एक्स पोस्ट में सुशील मोदी ने कहा, “नीतीश कुमार ने महिला उद्घोषिका सोमा चक्रवर्ती को दोनों हाथों से सार्वजनिक मंच पर स्पर्श करते हुए उनके चेहरे के बहुत पास अपना मुँह ले जाकर जिस शराररपूर्ण ढंग से ‘आपका भी अभिवादन’ कहा, वह अत्यंत शर्मसार करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि सीएम की गहरी यौन कुंठा के कारण उनके शब्दों, संकेतों और सार्वजनिक व्यवहार से महिलाओं को लज्जित-अपमानित करने की घटनाएँ बार-बार हो रही हैं।”

भाजपा सांसद ने आगे कहा, “नीतीश कुमार ने पिछले दिनों विधान मंडल के दोनों सदनों में प्रजनन दर रोकने की चर्चा करते हुए ऐसी भाषा का उपयोग किया, जिससे महिला सदस्य अपमानित महसूस कर रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि सदन में अपने अश्लील वक्तव्य के कारण नीतीश कुमार ने जीवन में पहली बार बिना शर्त क्षमा याचना की थी। इससे पहले वे भाजपा की महिला विधायक निकी हेम्ब्रम पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं।”

नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा, “नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति को देखते हुए जदयू को अब नया नेता चुन लेना चाहिए, अन्यथा एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से महिलाओं के अपमान की कोई बड़ी घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार की चर्चित उद्घोषिका और वरिष्ठ रंगकर्मी सोमा चक्रवर्ती को साहस कर नीतीश कुमार पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराना चाहिए।”

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA मेवाराम जैन पर पॉक्सो का केस: पीड़िता बोली- पहले मेरा रेप किया, फिर मेरी सहेली का, नाबालिग बेटी से भी छेड़छाड़

राजस्थान में बाड़मेर से लगातार तीन बार कॉन्ग्रेस के विधायक रहे मेवाराम जैन के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि पूर्व विधायक ने उसके साथ रेप किया। उसकी सहेली से भी जबर्दस्ती की। उसकी नाबालिग बेटी के साथ भी छेड़छाड़ करते थे।

जोधपुर के राजीव नगर थाने में इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है। जैन के अलावा अन्य आठ लोग भी आरोपित हैं। थानाध्यक्ष शकील अहमद ने बताया है कि महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन, राजस्थान पुलिस सर्विसेज (RPS) के अधिकारी आनंद राजपुरोहित, गंगाराम खावा, दाऊद खान, रामस्वरूप आचार्य, सुरतान सिंह, गिरधर सिंह सोढ़ा, प्रवीण सेठिया और गोपाल सिंह राजपुरोहित के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

हाल ही में संपन्न राजस्थान विधानसभा चुनावों में जैन को निर्दलीय प्रियंका चौधरी से शिकस्त झेलनी पड़ी है। इस बीच राजस्थान हाई कोर्ट ने 22 जनवरी तक कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश पुलिस को दिए हैं।

आरोप: वीडियो बना किया ब्लैकमेल, दूसरी महिलाओं को लाने का दबाव

पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि 2021 में वह अपने पिता के इलाज कराने के लिए बस से सफर कर रही थी। इसी दौरान रामस्वरूप से मुलाकात हुई। रामस्वरूप ने उससे दोस्ती की। फिर होटल ले जाकर उसे नशे की गोलियाँ खिला दी और रेप किया। रामस्वरूप ने इसका वीडियो बना लिया। ब्लैकमेल कर कई बार रेप किया।

कथित तौर पर इसके बाद रामस्वरुप उसे बाड़मेर के तत्कालीन कॉन्ग्रेस विधायक मेवाराम जैन के पास ले गया। जैन ने भी उसका रेप किया। पीड़िता का आरोप है कि ये लोग उसके घर भी आते थे और रेप करते थे। इसी दौरान एक बार उसकी सहेली के साथ रेप किया गया था। बाद में उसकी नाबालिग बेटी से भी आरोपित छेड़छाड़ करने लगे। बेटी के सामने ही पीड़िता के साथ अश्लील हरकत करते थे। अन्य महिलाओं को भी लाने का दबाव डालते थे।

पुलिस से लगाई गुहार तो झेलनी पड़ी प्रताड़ना

पीड़िता का कहना है कि डर और बदनामी के कारण वह चुपचाप प्रताड़ना झेलती रही। लेकिन जब उसकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ हुआ तो वह शिकायत लेकर बाड़मेर के कोतवाली थाने गई। लेकिन केस दर्ज करने के बजाए उसे पुलिसकर्मियों ने प्रताड़ित किया। पीड़ित महिला का कहना है कि इसके बाद रामस्वरूप और मेवालाल ने उसके खिलाफ दो झूठे मामले भी दर्ज करा दिए।

उल्लेखनीय है कि मेवाराम जैन ने 30 अक्टूबर 2022 को बाड़मेर के कोतवाली थाने में ब्लैकमेल करने का केस दर्ज करवाया था। 15 नवंबर 203 को प्रवर्तन निदेशालय ने बाड़मेर जैन की ओर से दर्ज कराई गई सेक्सटॉर्शन की शिकायत के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का मामला दर्ज किया था। इसके बाद सोशल मीडिया में उनकी कुछ तस्वीरें भी आईं थी। लेकिन जैन ने इन्हें ​एडिटेड बताया था।

अब पीड़ित महिला ने जिस तरह के गंभीर आरोप जैन और उनके साथियों पर लगाए हैं उसने सनसनी मचा दी है। इस मामले में जोधपुर के डीसीपी (पश्चिम) गौरव यादव ने बताया कि एक महिला की तरफ से थाने में रिपोर्ट दी गई है। मामले की जाँच की जा रही है। महिला की शिकायत पर रेप, गैंगरेप, पॉक्सो, ब्लैकमेलिंग, जान से मारने की धमकी, मारपीट, दुष्कर्म, एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जो लड़की/औरत नहीं उसको भी मिले माहवारी पर छुट्टी: मनोज झा LGBTQIA पर हुए स्खलित, स्मृति ईरानी ने ‘पीरियड के प्रचार’ पर धो डाला

माहवारी के नाम पर कार्यस्थलों पर महिलाओं को पेड छुट्टी मिले या नहीं… ये इन दिनों बहस का मुद्दा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल में ऐसे किसी भी विचार का विरोध किया था। अब एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया है कि वो नहीं चाहतीं कि कार्यस्थलों पर महिलाओं को भेद-भाव महसूस करना पड़े इसलिए उन्होंने इस नीति को लाने का विरोध किया था।

याद दिला दें कि ईरानी ने माहवारी पर पेड लीव के मुद्दे पर कहा था कि ये कोई दिव्यांग होने जैसा नहीं है कि इसके लिए अलग से पेड लीव दी जाए।

अब उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा है कि वो इस मुद्दे पर और भी बहुत बोल सकती थीं, लेकिन जिन्होंने (राजद सांसद मनोज झा) सवाल किए थे उनका मकसद महिलाओं की परेशानियों का समाधान ढूँढना नहीं था। ईरानी ने इंटरव्यू में बताया कि संसद में उन्होंने जो कुछ भी बोला वो निजी अनुभव झेलने के बाद बोला ताकि और किसी महिला के साथ भेदभाव न हो।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसी नीति आ जाती है तो एक महिला को अपनी लीव के लिए पहले अपने बॉस और एचआर को बताना होगा कि उसके पीरियड्स हैं इसलिए छुट्टी चाहिए। ईरानी पूछती हैं कि आखिर महिलाओं को क्यों फोर्स किया जा रहा है कि वो अपने पीरियड के दिनों को प्रचार करें? क्यों आखिर आपको नौकरी देने वाले को आपके पीरियड्स की जानकारी क्यों होनी चाहिए? वह कहती हैं कि क्या कोई इस बात की कल्पना कर सकता है कि महिलाओं को कितना ज्यादा भेदभाव झेलना पड़ेगा। उन्हें काम करने में कितनी बाधाएँ आएँगी।

बता दें कि माहवारी के दौरान महिलाओं को छुट्टी देने का मुद्दा पिछले दिनों संसद में राजद सांसद मनोज झा ने उठाया था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जो सवाल किए उनकी लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं।

यहाँ पूछा गया है कि क्या सरकार मेंस्ट्रुअल हाइजीन पॉलिसी लाने के विचार में है? अगर है जो विवरण दे ; क्या उस नीति में LGBTQIA कम्युनिटी के लोगों के मेंस्ट्रुअल हाइजिन के लिए भी प्रावधान हैं? क्या सरकार इस मुद्दे से जुड़े अभियान स्कूल-कॉलेजों में चला रही है? अगर है तो विवरण है और नहीं है तो कारण दें।

गौरतलब है कि संसद में मुद्दे को उठाने के बाद मनोज झा ने कहा था कि लालू सरकार में 1992-93 में बिहार में ये लीव देने का प्रावधान बिहार में लाया गया था। जिसे ईरानी ने इंटरव्यू के दौरान फर्जी दावा बताया और कहा कि किसी प्राइवेट सेक्टर में ऐसा रूल नहीं चालू हुआ।

इसके अलावा उन्होंने मुख्य रूप से उस तीसरे प्रश्न को उठाया जिसमें मनोझ झा ने LGBTQIA समुदाय का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, “झा जी ने मौखिक उत्तरों के लिए प्रश्नों की सूची में मुझसे LGBTQIA प्लस समुदाय के लिए मासिक धर्म स्वच्छता के उपायों के बारे में पूछा। अब मुझे बताएँ, LGBTQIA समुदाय जिसके लिए माननीय सदस्य प्रतिक्रिया चाहते थे, किस समलैंगिक पुरुष को गर्भाशय के बिना मासिक धर्म होता है?”

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राहुल गाँधी को बचा रही दिल्ली पुलिस कर रही कानूनी गलती: रेप हुई बच्ची की पहचान की थी उजागर, कुतर्क से छीछालेदर पक्का

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 22 दिसंबर 2023 को एक मामले में अदालत के समक्ष अपने ट्वीट को हटाने का वचन दिया। इस में उन्होंने साल 2021 के दिल्ली बलात्कार एवं हत्या के मामले का राजनीतिकरण करने के प्रयास में एक नाबालिग पीड़िता की पहचान का खुलासा किया था। दरअसल, अगस्त 2021 में 9 साल की एक दलित लड़की के साथ दिल्ली के एक श्मशान में कथित तौर पर बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई।

खबर सामने आने के कुछ दिनों बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात की थी। इसके बाद राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस ने उनकी पार्टी ने पीड़ित परिवार की पहचान उजागर कर दिया था। दोनों ने पीड़ित परिवार की तस्वीरें और उनके वीडियो प्रकाशित कर दिए थे।

राहुल गाँधी का ट्वीट

राहुल गाँधी के ट्वीट के बाद NCPCR ने इसका संज्ञान लिया और ट्वीट को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लिखा। एनसीपीसीआर ने ट्विटर को कहा कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 74 के तहत मीडिया के किसी भी रूप में नाबालिग की पहचान का खुलासा करने पर रोक है। इसके साथ ही POCSO अधिनियम 2012 की धारा 23 में भी कहा गया है कि नाबालिग की कोई भी जानकारी या तस्वीर प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए।

शिकायत में कहा था कि राहुल गाँधी द्वारा किए गए ट्वीट में इन दोनों कानूनों का उल्लंघन किया गया था। इसलिए, एनसीपीसीआर ने ट्विटर से राहुल गाँधी द्वारा किए गए इस ट्वीट को हटाने के लिए कहा था। इसके बाद ट्विटर ने राहुल गाँधी के ट्वीट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था, जबकि बाकी दुनिया में उनके ट्वीट को देखा जा रहा था।

दिल्ली उच्च न्यायालय में मौजूदा मामला मकरंद सुरेश म्हाडलेकर द्वारा दायर एक याचिका से संबंधित है। इस याचिका में शिकायकर्ता ने दलील दी थी कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के ट्वीट ने किशोर न्याय अधिनियम और POCSO अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। हालाँकि, ऐसा लग सकता है कि राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट को हटाने पर सहमत होकर कानून का पालन कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है।

उच्च न्यायालय की पीठ ने राहुल गाँधी से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले ट्वीट को हटाने के लिए कहा था, क्योंकि वह राहुल गाँधी के खिलाफ न्यायिक आदेश पारित नहीं करना चाहता था। अदालत ने राहुल गाँधी से कहा कि यदि वे अपना ट्वीट नहीं हटाते हैं तो अदालत उन्हें अनुपालन करने के लिए मजबूर करते हुए एक आदेश पारित करेगी। इसके बाद राहुल गाँधी ने एक हलफनामा पेश किया।

राहुल गाँधी द्वारा पेश किए हलफनामे में उन पोस्ट को हटाने पर सहमति व्यक्त की गई, जहाँ उन्होंने नाबालिग पीड़िता की पहचान का खुलासा किया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अगले 4 हफ्तों में राहुल गाँधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई 24 जनवरी 2024 के लिए टाल दी।

राहुल गाँधी को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने दिया अजीब तर्क

इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को ऐसी दलीलें दीं, जिससे कई लोग हैरान रह गए। दलीलों का उद्देश्य एक नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने के बाद राहुल गाँधी को बचाना और उन्हें दोषमुक्त करना था। मामले में दिल्ली पुलिस के वकील संतोष कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि राहुल गाँधी के खिलाफ जाँच चल रही है और ‘मामले में काफी जटिलताएँ’ हैं।

इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को चौंकाने वाली जानकारी दी कि पीड़िता के साथ बलात्कार या हत्या नहीं की गई थी बल्कि उसकी मौत बिजली का झटका लगने से हुई थी। राहुल गाँधी के खिलाफ जाँच की स्थिति और FIR दर्ज करने के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली पुलिस ने कहा, “जब तक पहला भाग साबित नहीं हो जाता, जो कि मुख्य अपराध है, ट्विटर पर कुछ भी प्रसारित करना अपराध नहीं है। दिल्ली पुलिस का उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं है।”

दिल्ली पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि इस बात को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि 9 वर्षीय दलित लड़की के साथ बलात्कार किया गया और उसके बाद उसकी हत्या की गई थी। पुलिस ने दावा कि चूँकि मूल अपराध साबित नहीं हुआ है, इसलिए राहुल गाँधी ने लड़की की पहचान उजागर करके कोई अपराध नहीं किया है। नाबालिग पीड़िता ने सार्वजनिक रूप से अपने परिवार की पहचान उजागर की।

हमें यहाँ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दिल्ली छावनी के इस कथित बलात्कार और हत्या के मामले का खूब राजनीतिकरण किया गया था। कथित अपराध की खबर सामने आने के बाद राहुल गाँधी पीड़िता के माता-पिता से मिलने गए थे। कई विरोध प्रदर्शन हुए, और एक ‘पुजारी’ द्वारा एक दलित बच्चे के साथ बलात्कार एवं हत्या के बारे में बड़े पैमाने पर हिंदू समुदाय के खिलाफ असंतोष पैदा करने के लिए की गईं।

साल 2021 में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि बच्ची की मौत बिजली के झटके से नहीं हुई, जैसा कि आरोपित ने दावा किया था, बल्कि उसके साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। आरोप पत्र में काफी हद तक आरोपितों के बयानों पर भरोसा करते हुए दिल्ली पुलिस ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में श्मशान के पुजारी 55 वर्षीय राधेश्याम और अन्य कर्मचारियों – कुलदीप, सलीम अहमद और लक्ष्मी नारायण को नामजद किया था। आरोप पत्र में दावा किया गया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।

साल 2021 में अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि चार्जशीट दाखिल करने से पहले गवाहों की गवाही दर्ज करने के अलावा वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य भी एकत्र किए। फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, रोहिणी के साथ-साथ जीव विज्ञान और ओडोन्टोलॉजी पर दिल्ली पुलिस के फोरेंसिक विशेषज्ञों से सहायता ली गई। दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपितों से पूछताछ के दौरान फोरेंसिक मनोवैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया था।

अब, इस मामले में 400 पेज की चार्जशीट दायर करने के 2.5 साल बाद, जिसमें दावा किया गया था कि 4 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, दिल्ली पुलिस ने राहुल गाँधी से संबंधित एक मामले में अदालत में कहा कि वह इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि मामले में बलात्कार और हत्या नहीं हुई। हालाँकि, यह रहस्योद्घाटन काफी चौंकाने वाला था, लेकिन इससे भी अधिक आश्चर्यजनक वह तर्क था जो दिल्ली पुलिस ने इसके आधार पर राहुल गाँधी को बचाने के लिए लिया था।

अदालत में दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि चूँकि उसने निष्कर्ष निकाला है कि बलात्कार और हत्या को साबित करने के लिए कोई फोरेंसिक सबूत नहीं है, इसलिए राहुल गाँधी ने पीड़िता की पहचान उजागर करके कोई कानून नहीं तोड़ा है।

राहुल गाँधी मामले में दिल्ली पुलिस की दलील कानूनी तौर पर कैसे निराधार है?

दिल्ली पुलिस का यह तर्क कि एफआईआर दर्ज होने के 2.5 साल बाद उसने निष्कर्ष निकाला कि कोई बलात्कार या हत्या नहीं हुई थी, इसलिए राहुल गाँधी ने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करके कोई कानून नहीं तोड़ा है, कानूनी रूप से एक गलत राय है। जहाँ तक नाबालिग पीड़िता की पहचान का सवाल है तो कानून स्थापित हो चुका है और इसका आरोपित की अंतिम सजा या बरी होने से कोई लेना-देना नहीं है।

कहने का तात्पर्य यह है कि अदालत में मामले के अंतिम नतीजे का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर की जा सकती है या नहीं। परिणाम चाहे जो भी हो, पहचान उजागर करना कानून का उल्लंघन है। अगर दिल्ली पुलिस के तर्क को स्वीकार कर लिया जाए तो इसका मतलब यह होगा कि जब तक मामला अपने निष्कर्ष तक नहीं पहुँचता, जिसमें कई साल लग सकते हैं, मीडिया सहित कोई भी व्यक्ति नाबालिग पीड़िता की पहचान प्रसारित करने के लिए स्वतंत्र है।

यदि ऐसा होता है तो यह प्राकृतिक न्याय और उस उद्देश्य के खिलाफ होगा, जिसके लिए पहचान के खुलासे के खिलाफ ये कानून लागू किए गए हैं। कानून किसी नाबालिग पीड़ित की पहचान को प्रसारित करने पर रोक लगाता है, भले ही वह बरी हो जाए या दोषी करार दिया जाए, क्योंकि यह नाबालिग पीड़ित को कलंकित करता है। उसकी पहचान उजागर होने से जुड़ा कलंक मामले के निष्कर्ष या अपराध के सबूत पर निर्भर नहीं है।

ऐसे कई कानून, प्रावधान और दिशानिर्देश हैं जो साबित करते हैं कि राहुल गाँधी के मामले में दिल्ली पुलिस की स्थिति कानूनी रूप से सही नहीं है।

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74: बच्चों की पहचान उजागर करने पर रोक-

(1) किसी भी समाचार पत्र, पत्रिका या ऑडियो-विजुअल मीडिया या संचार के अन्य रूपों में किसी भी पूछताछ या जाँच या न्यायिक प्रक्रिया के संबंध में कोई भी रिपोर्ट नाम, पता, स्कूल या किसी अन्य विवरण का खुलासा नहीं करेगी, जिससे उस बच्चे की पहचान जाहिर हो जाए। कानूनी संरक्षण, देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चे या किसी अपराध के पीड़ित या गवाह, ऐसे मामले में शामिल, की तस्वीर भी ना प्रकाशित की जाए। हालाँकि, लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से बोर्ड या समिति, जैसा भी मामला हो, जाँच करते हुए ऐसे प्रकटीकरण की अनुमति दे सकता है, यदि उसकी राय में ऐसा प्रकटीकरण बच्चे के सर्वोत्तम हित में है।

(2) पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र के प्रयोजन के लिए या अन्य ऐसे मामलों में बच्चे के किसी भी रिकॉर्ड का खुलासा नहीं करेगी, जिसमें मामला बंद कर दिया गया है या उसे निपटा दिया गया है।

(3) उप-धारा (1) के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को छह महीने तक की कैद या दो लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 74 यह स्पष्ट करती है कि किसी भी परिस्थिति में नाबालिग पीड़ित या अपराध के मामूली गवाह की पहचान उजागर नहीं की जाएगी। कानून कहता है कि कोई भी विवरण, जिससे नाबालिग पीड़ित या गवाह की पहचान हो सके, किसी भी माध्यम में प्रकाशित नहीं किया जाएगा। इसमें पीड़ित के माता-पिता की पहचान भी शामिल है।

POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 23:

(1) कोई भी व्यक्ति पूर्ण एवं प्रामाणिक जानकारी के बिना किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटोग्राफिक सुविधाओं द्वारा किसी भी बच्चे पर कोई रिपोर्ट या टिप्पणी प्रस्तुत नहीं करेगा, जिससे उस बच्चे की प्रतिष्ठा कम हो सकती है या उसकी गोपनीयता का उल्लंघन हो सकता है।

(2) किसी भी मीडिया में कोई भी रिपोर्ट बच्चे की पहचान का खुलासा नहीं करेगी, जिसमें उसका नाम, पता, फोटो, पारिवारिक विवरण, स्कूल, पड़ोस या कोई अन्य विवरण शामिल है, जिससे कि बच्चे की पहचान का खुलासा हो सकता है। हालाँकि, लिखित रूप में दर्ज किए जाने के लिए अधिनियम के तहत मामले की सुनवाई करने में सक्षम विशेष अदालत ऐसे खुलासे की अनुमति दे सकती है, यदि उसकी राय में ऐसा खुलासा बच्चे के हित में है।

(3) मीडिया या स्टूडियो या फोटोग्राफिक सुविधाओं का प्रकाशक या मालिक अपने कर्मचारी के कृत्यों और चूक के लिए संयुक्त रूप से और अलग-अलग उत्तरदायी होगा।

(4) कोई भी व्यक्ति जो उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, वह किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जा सकता है, जो छह महीने से कम नहीं होगा, लेकिन जिसे एक वर्ष या जुर्माना या दोनों तक बढ़ाया जा सकता है।

POCSO अधिनियम 2021 की धारा 23 यह भी स्पष्ट करती है कि पहचान योग्य जानकारी का कोई भी प्रसार, जिसमें नाबालिग पीड़िता का पारिवारिक विवरण शामिल है, के लिए कम से कम 6 महीने की जेल की सजा का प्रावधान है, जिसे 1 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। हालाँकि, यह नियम मीडिया का उल्लेख करता है, लेकिन इसका विस्तार राहुल गाँधी जैसे व्यक्तियों तक भी है।

IPC की धारा 228A: “जो कोई नाम या कोई भी मामला छापता या प्रकाशित करता है, जिससे किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर हो सकती है जिसके खिलाफ धारा 376, धारा 376ए, धारा 376बी, धारा 376सी या धारा 376डी के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है या किया गया पाया गया है, उसे किसी भी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आईपीसी की धारा 228ए यौन उत्पीड़न की शिकार महिला की पहचान उजागर करने की अवैधता के बारे में बात करती है। हालाँकि, यह कानून विशेष रूप से नाबालिग पीड़ितों के लिए नहीं बनाया गया है, लेकिन यह नाबालिगों सहित यौन उत्पीड़न के सभी पीड़ितों पर लागू होता है।

निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ: निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ मामले में यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की पहचान के संबंध में सख्त दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। ऐसे मामलों में इन दिशानिर्देशों को मानक के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। इस मामले में अदालत ने कहा है:

(1) कोई भी व्यक्ति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया आदि में पीड़िता का नाम नहीं छाप सकता या प्रकाशित नहीं कर सकता या दूर-दूर तक ऐसे किसी भी तथ्य का खुलासा नहीं कर सकता जिससे पीड़िता की पहचान हो सके और जिससे उसकी पहचान जनता को पता चले।

(2) ऐसे मामलों में जहाँ पीड़िता मर चुकी है या मानसिक रूप से विक्षिप्त है, पीड़िता का नाम या उसकी पहचान निकटतम रिश्तेदार की अनुमति के तहत भी प्रकट नहीं की जानी चाहिए, जब तक कि उसकी पहचान प्रकट करने को उचित ठहराने वाली परिस्थितियाँ मौजूद न हों, जिसका निर्णय सक्षम प्राधिकरण, जो वर्तमान में सत्र न्यायाधीश है, द्वारा किया जाएगा।

निपुण सक्सेना मामले में अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति बलात्कार पीड़िता की पहचान या ऐसी कोई भी जानकारी का खुलासा नहीं कर सकता है, जिससे उसकी पहचान बड़े पैमाने पर जनता को पता चले। हालाँकि, राहुल गाँधी ने किया था।

इनमें से किसी भी कानून या मिसाल में मामले के निष्कर्ष का कोई असर नहीं है। यानी इनमें से किसी भी कानून या मिसाल में यह नहीं कहा गया है कि किसी व्यक्ति को पीड़ित की पहचान का खुलासा करने की अनुमति है और ऐसा तब तक नहीं होगा यदि अंततः आरोपित बरी हो जाते हैं तो इसे अपराध माना जाएगा।

इसलिए, यह चौंकाने वाली बात है कि दिल्ली पुलिस अदालत में ऐसी दलील देगी जो देश के स्थापित कानून द्वारा समर्थित नहीं है। दिल्ली पुलिस और उसके वकील के तर्क को स्पष्ट करने वाला एकमात्र निष्कर्ष यह है कि यह राहुल गाँधी को उनकी कार्रवाई के नतीजों से बचाने का एक घटिया प्रयास था, क्योंकि यह स्पष्ट है कि वह अपने रिकॉर्ड पर इस आशय का न्यायिक आदेश नहीं चाहते थे।

राहुल गाँधी मामले में दिल्ली पुलिस के आचरण से उठते सवाल

(1) अगर पुलिस अब कह रही है कि बलात्कार और हत्या हुई थी, इसका समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है, तो उसने 2.5 साल पहले आरोपपत्र में क्यों उल्लेख किया था कि बलात्कार और हत्या के दावों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत थे?

(2) यदि पीड़ित की मौत वास्तव में बिजली के झटके से हुई थी, जैसा कि दिल्ली पुलिस अब दावा कर रही है, तो उसने अपनी चार्जशीट में आरोपित के दावों को उसी प्रभाव से खारिज क्यों किया?

(3) यदि उनके पास 2021 में अपराध के पर्याप्त सबूत थे, तो अगले 2.5 वर्षों में ऐसा क्या बदल गया कि आज वे यह दावा कर सकें कि कोई बलात्कार या हत्या नहीं हुई थी?

(4) आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से पिछले 2.5 वर्षों में मामले की सुनवाई आगे क्यों नहीं बढ़ी?

(5) यदि वास्तव में कोई बलात्कार और हत्या नहीं हुई थी तो राहुल गाँधी मामले में दिल्ली पुलिस ने इस बात पर जोर क्यों दिया कि वे अपनी स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत में दाखिल करेंगे?

(6) यदि दिल्ली पुलिस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर रही है, जिसमें कहा गया है कि कोई बलात्कार नहीं हुआ था, तो उसने इस बात पर जोर क्यों दिया कि वह नहीं चाहती कि विवरण पर खुली अदालत में चर्चा की जाए?

(7) दिल्ली पुलिस को कानून की गलत व्याख्या करके राहुल गाँधी की सुरक्षा करने की मजबूरी क्यों महसूस हुई?

(8) दिल्ली पुलिस ने अदालत में यह क्यों कहा कि वह अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपेगी क्योंकि वह “किसी को बदनाम” नहीं करना चाहती थी? किसने सोचा था कि इससे बदनामी होगी? राहुल गांधी? शुरुआत से ही उनकी चिंता क्यों है?

(9) क्या दिल्ली सरकार ने इस मामले में राहुल गाँधी को बचाने के लिए सक्रिय रूप से कानून को तोड़-मरोड़ कर पेश किया?

(10) दिल्ली पुलिस ने इस बात पर क्यों जोर दिया कि एनसीपीसीआर को राहुल गाँधी के खिलाफ मामले में कोई अधिकार नहीं है, धारा 13 सीपीसीआर अधिनियम स्पष्ट रूप से कहता है?

इन सवालों ने मामले की जानकारी रखने वालों और राहुल गाँधी के खिलाफ जाँच से जुड़े लोगों को भी हैरान कर दिया है। एक वरिष्ठ वकील ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि अदालत में दिल्ली पुलिस की दलील ने सभी को चौंका दिया और इसका कोई कानूनी मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल गाँधी को बचाने के लिए मामले को किसी भी तरह से बिगाड़ा जा रहा है।” गृह मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी, जिसके अंतर्गत दिल्ली पुलिस आती है, ने कहा कि वे इस मामले को देखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि राजनीतिक कारणों से जाँच से समझौता नहीं किया जा रहा है।

26 दिसंबर से भारत-दक्षिण अफ्रीका का पहला टेस्ट, लेकिन विराट कोहली लौट आए घर: रिपोर्टों में ‘फैमिली इमरजेंसी’ को बताई वजह, गायकवाड़ टीम से बाहर

टीम इंडिया इस समय दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर है। 26 दिसंबर को दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट है। लेकिन उससे पहले विराट कोहली के भारत लौट आने की खबरें मीडिया में तैर रही है। इसकी वजह फैमिली इमरजेंसी बताई जा रही है।

इसके अलावे टेस्ट सीरिज शुरू होने से पहले ही रुतुराज गायकवाड़ भी टीम से बाहर हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ओपनर बल्लेबाज गायकवाड़ को ऊँगली की चोट से न उबर पाने की वजह से उन्हें दक्षिण अफ्रीका में भारतीय टीम प्रबंधन ने रिलीज कर दिया है।

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार कोहली ने फैमिली इमरजेंसी की वजह से टीम प्रबंधन और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से मुंबई जाने की इजाजत ली थी। इसके कारण ही वे प्रिटोरिया में चल रहे तीन दिवसीय अभ्यास मैच का हिस्सा नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह फैमिली इमरजेंसी किसी तरह की है, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन पहले टेस्ट मैच से पहले कोहली के जोहान्सबर्ग में टीम के साथ जुड़ जाने की उम्मीद है।

उधर दूसरी तरफ 26 साल के बल्लेबाज गायकवाड़ को 19 दिसंबर 2023 को पोर्ट एलिजाबेथ में मेजबान टीम के खिलाफ इस हफ्ते की शुरुआत में खेले गए दूसरे वनडे के दौरान ऊँगली में चोट लग गई थी। उन्हें मैच में फिल्डिंग के दौरान बॉल कैच करते वक्त रिंग फिंगर में चोट लगी थी।

BCCI ने गुरुवार (21 दिसंबर 2023) को तीसरे और अंतिम वनडे की शुरुआत से पहले कहा, “वह (गायकवाड़) दूसरे वनडे में फिल्डिंग के दौरान रिंग फिंगर में लगी चोट से अब तक पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। वो बीसीसीआई मेडिकल टीम की देखरेख में ही रहेंगे।”

अब टेस्ट मैचों से पहले उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। टीम प्रबंधन ने बीसीसीआई से सलाह लेने के बाद उन्हें तुरंत रिलीज करने का फैसला किया है। उनके शनिवार (23 दिसंबर 2023) तक भारत पहुँचने की उम्मीद है। इधर 30 दिसंबर 2023 को बॉक्सिंग डे टेस्ट के बाद सभी भारतीय खिलाड़ी केपटाउन का रुख करेंगे। यहाँ 3 जनवरी 2024 को सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट मैच शुरू होगा।

जिस दिन रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, उसी दिन पूरी होगी इस्कॉन की ‘श्रीराम पदयात्रा’: 5000 भक्तों को अयोध्या में रोजाना कराएगी मुफ्त भोजन

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। उसी दिन इस्कॉन की श्रीराम पद यात्रा भी पूर्ण होगी। दिल्ली से अयोध्या तक की 41 दिनों की यह​ यात्रा 10 दिसंबर 2023 को शुरू हुई थी।

अयोध्या दर्शन के लिए आने वाले 5000 भक्तों के लिए इस्कॉन मुफ्त भोजन की व्यवस्था करेगा। प्राण-प्रतिष्ठा के दिन इस्कॉन के मंदिरों में घी के दिए जलाए जाएँगे। इस्कॉन के मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का लाइव प्रसारण भी भक्तों के लिए होगा। ये जानकारी इस्कॉन इंडिया के संचार निदेशक और राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंदा दास ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर की है।

इस दौरान देश-विदेश से आए इस्कॉन संस्था से जुड़े भक्त अयोध्या की गली-गली में संकीर्तन करेंगे। वैदिक साहित्य बाँटा जाएगा। अयोध्या में 20 जनवरी से 26 फरवरी 2024 तक प्रतिदिन 5000 तीर्थयात्रियों को दोपहर का भोजन परोसा जाएगा। साथ ही निशुल्क चिकित्सा सेवाएँ भी मुहैया करवाई जाएँगी।

अयोध्या पहुँचने वाले सभी भक्तों के लिए रानोपाली (उदासीन ऋषि संगत आश्रम के बगल में) में इस्कॉन शिविर में व्यवस्था की गई है। ये आश्रम अयोध्या के पश्चिमी-दक्षिणी कोने में है।

बताते चलें कि इस्कॉन की तरफ से भक्ति और सेवा के संदेश का प्रसार करने के लिए दिल्ली से अयोध्या तक की 635 किलोमीटर लम्बी ‘श्रीराम पदयात्रा’ शुरू की गई है। यात्रा का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री अश्वनी कुमार चौबे और मीनाक्षी लेखी ने इस्कॉन के वरिष्ठ संतों की मौजूदगी में किया था। इस पदयात्रा में एक बैलगाड़ी पर भगवान विराजमान हैं। उनके साथ भारत, रूस, मारीशस सहित अन्य देशों के भक्त कीर्तन करते हुए चलते हैं।

इस्कॉन से पहले अयोध्या में सिख समाज ने दो महीने तक लंगर चलाने की बात की थी। इसकी अगुवाई बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर करेंगे। वे बाबा फकीर सिंह खालसा की आठवीं पीढ़ी के हैं। बाबा फकीर सिंह खालसा की अगुवाई में 25 निहंग सिखों ने सबसे पहले 30 नवंबर 1858 को अयोध्या में बाबरी ढाँचे पर कब्जा किया था। उन्होंने कई दिनों तक कब्जा बनाए रखा था और राम नाम का पाठ किया था। उन्होंने बाबरी ढाँचे पर राम नाम भी लिख दिया था।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से क्रिकेट खेलने वाला एकमात्र मुस्लिम खिलाड़ी करने लगा गाजा का समर्थन, ICC ने बजाई पुंगी तो कहा – अब नहीं करूँगा

इजरायल द्वारा गाजा पर की जा रही कार्रवाई का विरोध करने के लिए हाल में ऑस्ट्रेलियाई खिलाडी उस्मान ख्वाजा काली पट्टी पहनकर क्रिकेट खेलने मैदान में उतरे। उन्होंने ये हरकत पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए पहले टेस्ट मैच के वक्त की, जिसे देख आईसीसी ने उन्हें फटकार लगाई।

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने कपड़े और उपकरण विनियमों के खंड एफ का उल्लंघन करने के लिए फटकारा। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में हुए पहले टेस्ट के दौरान ऐसा करने के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी।

आईसीसी के नियमों के अनुसार, खिलाड़ी अपने कपड़ों या उपकरणों पर किसी भी व्यक्तिगत संदेश को प्रदर्शित करने से पहले क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और आईसीसी से अनुमति लेना आवश्यक है। ख्वाजा ने ऐसा नहीं किया, इसलिए आईसीसी ने उन्हें फटकार लगाई है।

दीन के लिए कुछ भी?

बता दें कि उस्मान ख्वाजा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले मुस्लिम हैं। उन्होंने बिना हमास की हरकत को देखे उस इजरायल का विरोध कर दिया, जिन्होंने आतंकी संगठन हमास के खात्मे को अपना मकसद और इस युद्ध को अपने वजूद का सवाल बताया है।

जूतों पर लिखा था गाजा के लिए संदेश

अजीब बात यह है कि फिलीस्तीन और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को 2 महीने हो चुके हैं। ऐसे में उस्मान ख्वाजा को अब अचानक याद आया है कि उन्हें विरोध करना है। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में हुए टेस्ट मैच से पहले की प्रैक्टिस में उन्होंने अपने जूते के निचले हिस्से पर कई रंगों से लिखा था, “सभी जिंदगियाँ बराबर हैं। (All Lives Are Equal) और आजादी लोगों का अधिकार है (Freedom is Human Right)।”

इस पर भी काफी विवाद हुआ था। तब, आईसीसी ने उन्हें चेतावनी दी कि वो ऐसे जूता नहीं पहन सकते। इसके विरोध में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट लिखी और कहा कि वो आईसीसी से इस बारे में बात करेंगे। हालाँकि पर्थ टेस्ट में वो विवादित जूते तो पहनकर मैदान में नहीं उतरे, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति के ही बाँह पर काली पट्टी बाँधी।

आईसीसी ने क्या कदम उठाया?

उस्मान ख्वाजा इजरायल का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने गाजा के आतंकियों पर बमबारी की। उन्होंने इस विरोध को करने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के मैदान का इस्तेाल किया। उनकी इस हरकत के बाद आईसीसी ने उन्हें फटकारा है। अगर वह ऐसा लगातार 4 बार करते हैं तो आईसीसी सजा के तौर पर मैच फीस का 75 पर्सेंट जुर्माना उनपर ठोंक सकते हैं।

उस्मान ख्वाजा ने क्या कहा?

उस्मान ख्वाजा ने आईसीसी की सुनने के बाद कहा है कि वो अगली बार ऐसा नहीं करेंगे। उनके मुताबिक ऐसा करने के पीछे कोई राजनीतिक संदेश नहीं था, बस ‘मानवता’ का था। वह कहते हैं कि पहले भी कई खिलाड़ी ऐसा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें तो आईसीसी ने कोई सजा नहीं दी।

हालाँकि वो अब ऐसा नहीं करेंगे। उस्मान ख्वाजा ने पहले टेस्ट मैच में पहली पारी में 41 रन और दूसरी पारी में 90 रन बनाए थे। पर्थ टेस्ट के बाद आईसीसी द्वारा जारी की गई एक संदेश में कहा गया था कि ख्वाजा ने ऐसा करने से पहले कोई अनुमति नहीं ली थी।

सूखा राहत पैकेज माँग प्राइवेट जेट से उड़े कर्नाटक के CM सिद्धारमैया, मंत्री जमीर खान ने शेयर किया Reel: भाजपा बोली- कॉन्ग्रेस के लिए राज्य सरकार ATM

भाजपा ने कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर करारा हमला बोला है। उसने कहा कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री कहते हैं कि राज्य के पास पैसे नहीं हैं और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चार्टर्ड विमान में यात्रा करते हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके मंत्रियों के लक्जरी चार्टर्ड विमान से दिल्ली की यात्रा का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो को लेकर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कॉन्ग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “कर्नाटक सूखे से जूझ रहा है और वहाँ के मुख्यमंत्री केंद्र से सूखा राहत कोष की माँग कर रहे हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अपने विधायकों और लोगों से कहते हैं कि विकास के लिए कोई पैसा नहीं बचा है, क्योंकि सारा पैसा कॉन्ग्रेस ने अपने किए गए कथि वादों पर खर्च कर दिया है। ऐसे में वो लोगों के वादों को पूरा करने में असमर्थ हैं।”

पूनावाला ने आगे कहा, “वे दूध का दाम बढ़ा रहे हैं। बिजली का दाम बढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ हम देख रहे हैं कि कर्नाटक सरकार के मंत्रीगण VVIP जेट प्लेन में यात्रा कर रहे हैं और वहाँ अपनी फोटोशूट करा रहे हैं। ये सब करदाताओं के पैसों पर किया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है और यह दिखाता है कि कॉन्ग्रेस जहाँ भी सत्ता में रहती है, उसे ATM के रूप में इस्तेमाल करती है।”

भाजपा नेता ने कहा, “कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं ने छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ऐसा किया। अब वह कर्नाटक और तेलंगाना में ऐसा करना चाहते है। ATM उन राज्य सरकारों के लिए सही शब्द है, जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार है।” बता दें कि वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कर्नाटक सरकार में राज्यमंत्री बीजेड जमीर अहमद खान भी मौजूद हैं।

इस प्राइवेट जेट में यात्रा का वीडियो राज्यमंत्री जमीर अहमद खान ने सोशल मीडिया साइट X पर खुद पोस्ट किया था। इस वीडियो में मंत्री और मुख्यमंत्री एक लग्जरी प्राइवेट जेट बैठे दिख रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में लिखा गया था, “हमारे गौरवान्वित नेता मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ दिल्ली से बेंगलुरु की यात्रा के सुखद क्षण।”

इस वीडियो के सामने आने बाद सोशल मीडिया यूजर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ-साथ मंत्री जमीर अहमद खान पर निशाना साध रहे हैं। वीडियो में एक प्राइवेट जेट में चार लोग दिखाई दे रहे हैं, जिनमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री के. गोविंदराज को टैग किया गया है। वीडियो को हर एंगल से शूट करके Reel जैसा बनाया गया है और इसमें बैकग्राउंड म्यूजिक भी लगाया गया है। 

लग्जरी जेट में यात्रा को लेकर जारी विवाद के बीच में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार (22 दिसंबर 2023) को कहा, “नरेंद्र मोदी कैसे यात्रा करते हैं? यह सवाल भाजपा से पूछें। भाजपा सदस्यों से पूछें कि नरेंद्र मोदी यात्रा के लिए कौन से विमान का उपयोग करते हैं। वह उन विमानों में अकेले यात्रा करते हैं। वह अकेले यात्रा क्यों करते हैं? यह सवाल सीधे उनसे पूछें।”

अल्पसंख्यक लड़कियों का हॉस्टल, बाथरूम में सलीम अली ने लगा दिया कैमरा: मोबाइल पर छात्राओं को देखता था, पकड़ा गया

कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में अल्पसंख्यक छात्राओं के हॉस्टल के बाथरूम में कैमरा लगाए जाने की घटना सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने 20 दिसंबर 2023 को सलीम अली को गिरफ्तार किया है। जेवर्गी के इस हॉस्टल में 10वीं पास अल्पसंख्यक छात्राएँ रहती हैं। सलीम पर इसी हॉस्टल के बाथरूम में गुपचुप तरीके से वाई-फाई कैमरा लगाने का आरोप है।

इस कैमरे के जरिए वह मोबाइल पर छात्राओं को देखता रहता था। रिपोर्ट के अनुसार सलीम अली हॉस्टल की पड़ोस में बनी एक इमरात में किराए पर रहता था। वह मांडेवाला गाँव के रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम हुसैन बाबा है। लहसुन बेचकर गुजारा करने वाले सलीम ने एक पाइप का इस्तेमाल कर बाथरूम की खिड़की से एक वाईफाई कैमरा अंदर लगा दिया था।

यह कैमरा उसके मोबाइल फोन से कनेक्ट था। 20 नवंबर की सुबह हॉस्टल की लड़कियाँ नहाने जा रही थीं तो उन्होंने आरोपित को बाथरूम के पास संदिग्ध तौर पर घूमते देखा। उन्होंने हॉस्टल वार्डन को इसकी जानकारी दी। इसके बाद सलीम की करतूतों का खुलासा हुआ।

तीन बच्चों के पिता सलीम को हॉस्टल वार्डन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियों में से एक ने खिड़की से सलीम को कैमरा एडजस्ट करते हुए देखा और चिल्ला पड़ी। उसका चिल्लाना सुनकर जैसे ही अन्य लड़कियाँ बाथरूम के अंदर आईं, उन्होंने कैमरा देखा और आरोपित को धर दबोचा। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसकी धुनाई कर दी।

इसके बाद वार्डन की शिकायत पर पुलिस ने सलीम को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ जेवर्गी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूछताछ के दौरान, सलीम ने लड़कियों को बाथरूम जाते वक्त मोबाइल के जरिए देखने की बात स्वीकार की हैं। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि सलीम ने कैमरा कब लगाया गया था और उसने कैमरे की वीडियो रिकॉर्डिंग किसी और के साथ शेयर तो नहीं की है।

पुलिस ने कैमरा और अन्य उपकरण जब्त कर लिए हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तालुका अधिकारी हुलिकुंटाराय के मुताबिक, छात्राओं को सुबह 6.30 बजे के आसपास कैमरा मिला और उन्होंने पास में रहने वाले सलीम को पकड़ लिया। उन्होंने बताया, “छात्रावास में 50 से अधिक छात्राएँ रहती हैं और पहले ऐसी किसी घटना की सूचना नहीं मिली थी।”

बताते चलें कि इस साल जुलाई में उडुपी जिले से भी इसी तरह की एक घटना सामने आई थी। इसमें मुस्लिम समुदाय की तीन छात्राओं ने कथित तौर पर उडुपी के नेत्र ज्योति कॉलेज के शौचालय में गुप्त रूप से हिंदू महिला छात्रों का एक वीडियो बनाया था और इसे मुस्लिमों पुरुषों के साथ शेयर किया था। इसके लिए इन मुस्लिम छात्राओं अलीमातुल शैफ़ा, शबानाज़ और आलिया पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

नंगे विन डीजल ने स्तन दबाया, चुम्मा लिया, जबरन पकड़ाया लिंग… फिल्म वाली महिला के अंडरवियर उतारने से मना करने पर दीवार से रगड़ किया हस्तमैथुन

हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता विन डीजल (Vin Diesel) पर उनकी एक्स असिस्टेंट एस्टा जोनासन ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। वैनिटी फेयर द्वारा उठाए गए इस मुद्दे में उस शिकायत का जिक्र है जो एस्टा ने डीजल पर करवाई। इस शिकायत में उन्होंने बताया कि कैसे 13 साल पहले डीजल ने एक बंद कमरे में उनके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी, और जब उन्होंने इन सबमें उनका साथ नहीं दिया तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था।

लॉस एंजिल्स में दायर मुकदमे के अनुसार, एस्टा जोनासन नाम की उनकी पूर्व असिस्टेंट ने कहा कि अटलांटा में ‘फास्ट फाइव’ के सेट पर काम करने के दौरान 2010 में उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। उनका दावा है कि 2010 में डीजल ने उन्हें होटल के एक कमरे में दीवार के सटा दिया था और जबरन अपना प्राइवेट पार्ट पकड़वाया था। साथ ही उनके सामने मास्टरबेट किया था।

एस्टा ने अपनी शिकायत में बताया कि सितंबर 2010 में अभिनेता ने उनको ‘सेंट रेगिस होटल’ में अपने कमरे में आने के लिए कहा और तब तक रुकने को कहा गया जब तक वह क्लब से वापस नहीं आ जाते। जैसे ही डीजल क्लब से लौटे, कथित तौर पर उन्होंने फिर एस्टा के साथ जबरदस्ती की कोशिश की। अभिनेता ने असिस्टेंट को अपने बिस्तर में खींच लिया, और उन्हें चूमते हुए उनके स्तन दबाए और शरीर पर हाथ लगाते रहे। थोड़ी देर बाद उन्होंने खुद कपड़े भी उतारने शुरू कर दिए।

शिकायत में बताया गया कि डीजल ने कमरे में जैसे ही अपने कपड़े उतारना शुरू किए, पीड़िता ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वो डीजल के डर से पहले कुछ बोल ही नहीं पाईं। उन्हें अपनी नौकरी भी जाने का डर था, लेकिन जब उनसे वो सारी चीज बर्दाश्त नहीं हुई तो उन्होंने एक्टर को दूर करना शुरू किया, उस समय डीजल ने उन्हें इतना टाइट पकड़ रखा था कि वो चाहकर भी नहीं भाग पा रही थीं।

इसके बाद जब डीजल अपनी असिस्टेंट के आगे अंडरवियर उतारने लगे तो उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया और बाथरूम की ओर भाग गईं। उस टाइम डीजल खड़े हुए और उनको दीवार से लगाकर उनसे चिपक गए। डीजल ने जबरन महिला से अपने प्राइवेट पार्ट पर हाथ लगा लगवाया, जब उन्होंने ऐसा करने से मना किया तो वो मास्टरबेट करने लगे।

डीजल की इस हरकत का जब पीड़िता ने विरोध किया और वो वहाँ से भाग गईं तो उसके कुछ ही देर बाद विन डीजल की बहन का फोन आया और खबर दी गई कि उन्हें नौकरी से निकाला जाता है। शिकायत में कहा गया कि ये स्पष्ट है कि आखिर जोनासन को उनकी नौकरी से क्यों निकाला गया।

याचिका में कहा गया कि उस स्थिति में जोनासन असहाय महसूस कर रही थीं, उनका आत्म-सम्मान ध्वस्त हो गया था, और तब उन्होंने अपने कौशल पर सवाल उठाया और खुद से ही पूछा कि क्या एक सफल करियर में आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपने शरीर का व्यापार करना होगा।

इस घटना के बाद जोनासन ने फिल्म इंडस्ट्री में काम किया लेकिन कभी डर से कुछ नहीं बोला। हाल में ‘मीटू’ जैसे अभियान देखकर उनकी शिकायत करने की हिम्मत हुई और उन्होंने लॉस एंजिल्स में शिकायत दी। इस शिकायत पर अभी डीजल की ओर से कोई बयान नहीं आया है। उनके वकील ने कहा है कि उनका मुअक्किल सारे इल्जामों को नकार रहा है।