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हाजी मकबूल ताहरी का ढाबा; रोटियों पर कारीगर की अजीब हरकत… थूकने का आरोप लगाकर हिन्दू संगठनों थाने में दी तहरीर, कार्रवाई की माँग की

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सिर पर टोपी लगाए एक युवक तंदूर में रोटियाँ सेंकता दिख रहा है। इसी दौरान वो अपने सिर को रोटियों की तरफ झुकाता है। हिन्दू जागरण मंच ने रोटी बना रहे युवक पर खाने में थूकने का आरोप लगाकर रविवार (17 दिसंबर 2023) को थाने में तहरीर दी है।

वायरल वीडियो 38 सेकेंड का है। इस वीडियो को एक एक्स यूजर ने 16 दिसंबर 2023 (शनिवार) को पोस्ट किया। इसके कैप्शन में लिखा गया, “मिनाक्षी चौक मुज़फ्फरनगर में मक़बूल तहारी वालों के यहाँ थूक मिलाकर रोटी दी जा रही है। इसको हलाल कहते हैं। शायद प्रशासन ध्यान दे।” वीडियो में रोटी बनाने वाला युवक काली टी शर्ट और काली टोपी में है।

हिन्दू जागरण मंच ने इस मामले में मुजफ्फरनगर के थाना सिविल लाइंस में तहरीर दी है। तहरीर में कहा गया है कि मीनाक्षी चौक पर मकबूल ताहरी नाम की खानपान की दुकान है। इस होटल में रोटी बना रहा लड़का रोटियों पर थूक कर उसे तंदूर में डाल रहा है। शिकायतकर्ता ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर देखने का दावा किया है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया है कि होटल मालिक और उसके कर्मचारियों द्वारा यह हरकत समाज में द्वेष फैलाने के मकसद से जान-बूझ कर की गई है। जिस जगह यह होटल है, वहाँ से मुस्लिम बहुल इलाका खालापार का क्षेत्र शुरू होता है। शिकायतकर्ता ने रोटी बनाने वाले की इस हरकत से अपनी भावनाओं को आहत होने का आरोप लगाया है।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि उस होटल में हर समाज के लोग खाना खाने जाते हैं। शिकायत में रोटी बनाने वाले के साथ-साथ होटल के मालिक पर भी कार्रवाई करने की माँग की गई है। ऑपइंडिया के पास इस शिकायत कॉपी मौजूद है। मिली जानकारी के मुताबिक मुज़फ्फरनगर पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है।

सीएम योगी की राह पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उज्जैन में रात बिताकर तोड़ा मिथक: बोले- महाकाल तो ब्रह्मांड के राजा, हम उनके बेटे

राजनीति भी अंधविश्वास से अछूता नहीं है। कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस डर से नोएडा नहीं आते थे कि उनकी कुर्सी चली चली जाएगी। हालाँकि, इस प्रथा को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तोड़ दिया। इसके बाद ना सिर्फ उनकी कुर्सी बची रही, बल्कि लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने। इसी तरह की एक प्रथा को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तोड़ा है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारी तक महाकाल की नगरी उज्जैन में नहीं रूका करते थे। उन्हें डर होता था कि इससे उनकी कुर्सी चली जाएगी। हालाँकि, भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री बनाए गए डॉक्टर मोहन यादव ने इस प्रथा को तोड़ दिया। उन्होंने शनिवार (16 दिसंबर 2023) की रात उज्जैन में बिता कर दशकों पुराने मिथक को तोड़ दिया।

उज्जैन का प्राचीन नाम अवंतिका नगरी है। इसे महाकाल की नगरी भी कहा जाता है। इसे माता हरसिद्धि की नगरी भी कहा जाता है। माता हरसिद्धि महाराजा विक्रमादित्य की कुलदेवी हैं। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। उज्जैन को लेकर अब तक यही मिथक रही है कि उज्जैन के राजा महाकाल हैं। इसलिए यहाँ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री रात नहीं गुजार सकते।

चूँकि मोहन यादव उज्जैन में जन्मे और पले-बढ़े हैं। इतना ही नहीं, वे उज्जैन दक्षिण से भाजपा के विधायक भी हैं। इसलिए उनका कहना है कि वे महाकाल के पुत्र हैं और यह मिथक उन पर लागू नहीं होता। दरअसल, मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव उज्जैन पहुँचे और एक रोड शो किया। इसमें लोगों को संबोधित करते हुए इस मिथक बारे में भी जानकारी दी।

मराठा राजपरिवार ने फैलाया यह भ्रम

सीएम मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में रात नहीं बिताने के मिथक को मराठों के तत्कालीन राजा दौलतराव सिंधिया ने चलाया था। उन्होंने कहा कि महादजी सिंधिया के निधन के बाद उनके बेटे दौलतराव सिंधिया अपनी राजधानी को उज्जैन से हटाकर ग्वालियर ले जाना चाहते थे।

मोहन यादव ने कहा कि महादजी सिंधिया सन 1812 में राजधानी ग्वालियर ले भी गए, लेकिन लोगों के बीच एक मंत्र फूँक गए कि उज्जैन में कोई राजा रात को नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि यह महादजी सिंधिया की राजनीति और रणनीति का हिस्सा था, ताकि यहाँ कोई कब्जा करने नहीं आए।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “हम भी कहते हैं कि राजा रात में नहीं रहेगा। अरे राजा तो बाबा महाकाल हैं। हम सब तो उनके बेटे हैं। क्यों रात में नहीं रहेंगे। अगर बाबा महाकाल ने टेढ़ी निगाह कर दी तो ब्रह्मांड में कोई बच नहीं सकता। मुझे पीएम मोदी ने कहा कि बनारस मैं संभालता हूँ मोहन जी, आप उज्जैन संभालो। मैं मुख्यमंत्री नहीं, मुख्य सेवक हूँ यहाँ।”

उज्जैन में रुकने के बाद मोरारजी देसाई PM पद और येदियुरप्पा CM पद गँवाए

हालाँकि, मोहन यादव का दावे से अलग राजनीति में इसे बड़े लगन से पालन किया गया। कोई भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री रात में उज्जैन नहीं रुकते थे। कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के 18 साल मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज सिंह चौहान भी रात में कभी उज्जैन में नहीं रूके। उनसे पहले की सरकारों के मुख्यमंत्री भी यहाँ रात में नहीं रूके।

कहा जाता है कि देश के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई एक बार उज्जैन में रात में रूक गए थे। इसके अगले ही दिन उनकी कुर्सी चली गई थी। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे बीएस येदियुरप्पा भी एक रात यहाँ विश्राम कर चुके हैं। इसके 20 दिन बाद उन्हें मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र देना पड़ गया था।

नोएडा के मिथक को सीएम योगी ने तोड़ा

बता दें कि उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिले के नोएडा (NOIDA) के बारे में यह मिथक प्रचलित था। कहा जाता था कि पद पर रहते हुए जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, वह दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनता। इस मिथक को वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तोड़ दिया है। वे कई अब तक कई बार नोएडा आ चुके हैं और कई परियोजनाओं का शुभारंभ कर चुके हैं।

छत्तीसगढ़ का अकलतरा नगरपालिका को लेकर भी मिथक

ऐसा ही मिथक छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की अकलतरा नगरपालिका को लेकर भी प्रचलित है। कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री यहाँ आता है, उसे दोबारा कुर्सी नहीं मिलती है। मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल भी वहाँ कभी नहीं गए। हालाँकि, ये अलग बात है कि वे फिर भी दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।

इस नगरपालिका क्षेत्र में वर्ष 1958 में अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू आए थे। इसके बाद वे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने। इसकी तरह 1973 में मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी यहाँ आए। वे भी दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने। छत्तीसगढ़ बनने के बाद साल 2002 में मुख्यमंत्री अजीत जोगी आए। इसके बाद वे भी दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने।

रूहानी ताकत से जलाने की देता था धमकी, झाड़-फूँक के नाम पर महिलाओं से छेड़छाड़ का आरोप: मुफ्ती साजिद की पिटाई का वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें कुछ लोग एक व्यक्ति की पिटाई करते नजर आ रहे हैं। पिट रहे व्यक्ति का नाम मुफ़्ती साजिद हुसैन बताया जा रहा है जो झाड़-फूँक का काम करता है। उस पर इसी बहाने महिलाओं से छेड़़खानी करने का आरोप है। पुलिस ने गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को इस मामले में केस दर्ज कर लिया।

ऑपइंडिया से बातचीत में पीड़ितों ने बताया कि आरोपित मुफ़्ती साजिद हुसैन कई महिलाओं के साथ छेड़खानी जैसी घटनाओं को अंजाम दे चुका है। वह झाड़-फूँक के बहाने अपने नापाक हरकतों को अंजाम देता था। इसके बारे में जब लोगों को पता चला तो उन्होंने मुफ्ती की पिटाई कर दी।

मामला मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाले इशरत नाम के एक शख्स ने 14 दिसंबर को पाकबड़ा थाने में मुफ़्ती साजिद के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में इशरत ने कहा कि मुरादाबाद के चाँद मस्जिद के पास रहने वाला साजिद हुसैन झाड़-फूँक का काम करता है। आए दिन वह मोहल्ले में रौब झाड़ते रहता है।

शिकायत में कहा गया है कि गुरुवार की भी सुबह भी मुफ़्ती साजिद मोहल्ले में हंगामा कर रहा था। जब शिकायतकर्ता ने उसे रोकने की कोशिश की तो मुफ्ती ने उसे जान से मारने की धमकी दी। अपने साथ मोहल्ले वालों को भी डरा बताते हुए इशरत ने मुफ़्ती साजिद से अपने जान-माल का खतरा बताया और पुलिस से कार्रवाई की माँग की है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुफ्ती के खिलाफ IPC की धारा 504 और 506 के तहत केस दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इस बीच एक वायरल वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति की पिटाई कर रहे हैं। पीड़ित इशरत ने कहा कि जिसकी पिटाई हो रही है, वह मुफ़्ती साजिद है।

ऑपइंडिया ने पीड़ित इशरत से बात की। इशरत ने बताया कि वीडियो में मुफ़्ती साजिद ही पिट रहा है। वीडियो को कुछ समय पहले किसी दूसरे मुहल्ले का बताते हुए इशरत ने कहा कि एक महिला से छेड़खानी करने के चलते उसकी पिटाई हुई थी। इशरत ने बताया कि मुफ़्ती साजिद ने झाड़फूंक के नाम पर कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है। इसके चलते उसकी कई बार पिटाई हो चुकी है।

बकौल इशरत, मुफ्ती साजिद ने अपने ही घर में झाड़-फूँक का धंधा खोल रखा है और उसके पास कई महिलाएँ हफ्ते में 2 दिन आया करती हैं। शिकायतकर्ता इशरत ने बताया कि दलित (SC) समुदाय के एक युवक ने उसकी गंदी हरकतों के चलते मुफ्ती साजिद की पिटाई की थी। मुफ़्ती लोगों को रूहानी ताकत से जला देने की धमकी देता है।

ऑपइंडिया को मिले एक वीडियो में मुफ़्ती साजिद पाकबड़ा थाने के अंदर हंगामा करते नजर आ रहा है। यहाँ वो पुलिसकर्मियों के आगे ही अन्य लोगों से भिड़ने पर आमादा दिख रहा है।

महाराष्ट्र में गोला-बारूद बनाने वाली फैक्ट्री में विस्फोट, 9 की मौत: मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख का मुआवजा, कंपनी भी देगी ₹20 लाख

महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड में एक बड़ा धमाका हुआ है। इस धमाके में 9 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यह कम्पनी भारत में गोला-बारूद का निर्माण करने वाली एक प्रमुख कंपनी है। वहीं, मृतकों के परिजन शवों का इंतजार कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, नागपुर के बाजारगाँव इलाके में स्थित सोलर इंडस्ट्रीज फैक्ट्री में रविवार (17 दिसम्बर 2023) की सुबह एक तेज धमाका हुआ। यह धमाका गोला-बारूद को पैक करते समय फैक्ट्री के भीतर कास्ट बूस्टर प्लांट में हुआ। इसके बाद लोगों को चिथड़े उड़ गए। धमाके का समय सुबह 9:30 बजे बताया जा रहा है।

धमाके में 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, घायलों की हालत देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सोलर इंडस्ट्रीज भारतीय सेना के लिए भी बड़े पैमाने पर गोला-बारूद बनाती है। इसके अलावा यह खनन तथा पहाड़ तोड़ने में उपयोग होने वाले विस्फोटकों का भी निर्माण करती है।

धमाके की खबर के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। महाराष्ट्र की सरकार ने इस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को ₹5 लाख का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है। सीएम ने घायलों को उचित उपचार दिलाने के भी निर्देश दिए हैं।

सोलर इंडस्ट्रीज में हुए इस धमाके में मरने वाले 9 लोगों में से 6 महिलाएँ है। सभी मृतक महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। घटनास्थल पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस भी पहुँचे हैं। उन्होंने कहा है कि मामले की गंभीरता से जाँच होगी।

महाराष्ट्र सरकार के ₹5 लाख के मुआवजे के अलावा ₹20 लाख सोलर इंडस्ट्रीज की तरफ से भी मुआवजे में दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसकी जानकारी उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने दी है।

उत्तर भारतीयों को एंटी-मुस्लिम और एंटी-ईसाई प्रोपगैंडा पसंद: हताश कॉन्ग्रेस नेता चिदंबरम ने विभाजन की राजनीति को फिर दी हवा

देश के पूर्व वित्तमंत्री और कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने एक बार फिर उत्तर-दक्षिण की राजनीति को हवा दी है। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह दावा किया है कि उत्तर और मध्य भारत के लोग भाजपा के एंटी-मुस्लिम और एंटी-ईसाई प्रोपगैंडा की राजनीति को पसंद करते हैं।

पी चिदंबरम ने इस इंटरव्यू में भाजपा की प्रशंसा भी की और कहा कि भाजपा हर चुनाव को ऐसे लड़ती है, जैसे यह अंतिम चुनाव हो। उन्होंने कहा कि विपक्ष की पार्टियाँ इस बात को नहीं समझ पाती हैं। चिदंबरम ने यह बात हाल ही में सम्पन्न हुए पाँच राज्यों के चुनावों को लेकर कही।

चिदंबरम का कहना है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हारना कॉन्ग्रेस के लिए चिंता का विषय है। इन राज्यों में जीत को चिदंबरम ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। चिदंबरम ने कॉन्ग्रेस की जाति आधारित जनगणना की राजनीति को हवा देने की बात को भी नकार दिया। उन्होंने कहा कि 2024 में यह मुद्दा प्राथमिकता नहीं रहेगा।

चिदंबरम का कहना है कि वह अन्य किसी मुद्दे को लेकर चिंतित नहीं हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उत्तर और मध्य भारत के लोग भाजपा के एंटी मुस्लिम और एंटी ईसाई प्रोपगैंडा तथा अति-राष्ट्रवाद को पसंद करते हैं। हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस के किसी नेता ने उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीति छेड़ी हो। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा की हार के बाद कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने उत्तर भारतीयों के खिलाफ जहर उगला था।

चिदंबरम ने माना कि अब नोटबंदी जैसे मुद्दे पुराने हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साल 2024 में एक बार फिर भाजपा की सरकार बन सकती है, क्योंकि हवाओं का रुख भाजपा की तरफ है। उन्होंने यह भी माना कि भाजपा बहुत मजबूती से चुनाव लड़ती है। हालाँकि, चिदंबरम ने विपक्षी पार्टियों के लिए 2024 का चुनाव जीतना जरूरी बताया।

लोकसभा चुनावों को लेकर I.N.D.I. गठबंधन की तैयारियों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ मिलकर कम से कम 400 सीटों पर उम्मीदवार भाजपा के खिलाफ उतारने होंगे, तभी कुछ हो पाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसे प्रधानमंत्री का चेहरा बनाएगा, इस पर पार्टियों के बीच एक राय नहीं बन पाई है।

‘प्रोटेस्ट किया हूँ, सर्कुलेट करो’ : ललित झा 1 साल से कर रहा था संसद में घुसपैठ की तैयारी, दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से बरामद किए तोड़े गए फोन

संसद सुरक्षा में हुई चूक के मामले में मुख्य आरोपित ललित झा ने 15 दिसंबर को दिल्ली पुलिस के थाना विजय पथ में सरेंडर कर दिया था। अब पुलिस उस से पूछताछ में जुटी हुई है। पुलिस ने ललित की निशानदेही पर उसके मोबाइल फोन को राजस्थान के कुचामन से बरामद कर लिया है। ललित ने घटना के बाद अपने मोबाइल को तोड़ डाला था। घटना के बाद ललित भाग कर राजस्थान चला गया था। जानकारी यह भी सामने आई है कि ललित झा ने संसद में आरोपितों की वीडियो को पश्चिम बंगाल में भेज कर उसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करने के लिए कहा था। फ़िलहाल अभी ललित से और भी जानकारियाँ निकल कर आने की उम्मीद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद में घटी घटना के बाद ललित भाग कर राजस्थान चला गया था। यहाँ के कुचामन शहर में उसने अपने पास मौजूद 4-5 मोबाइल फोन को आग लगा कर जला डाला। पुलिस को मोबाइल के बिखरे और जले हुए अवशेष मिले हैं। पुलिस जले हुए मोबाइल से भी कुछ डाटा निकालने का प्रयास कर रही है। इस केस का 6वाँ आरोपित मुकेश कुमावत अदालत द्वारा 7 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। कुमावत पर सबूतों की मिटाने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। बताया जा रहा है कि मोबाइल को जला कर तोड़ने में मुकेश कुमावत ने ही ललित झा की मदद की थी।

आज तक के अनुसार सदन में अपने साथियों की करतूत का वीडियो ललित ने पश्चिम बंगाल के एक युवक को व्हाट्सएप पर भेजा था। जय हिन्द से सम्बोधन करते हुए ललित ने युवक से कहा, “प्रोटेस्ट किया हूँ। सर्कुलेट करो।” जिस युवक को ललित ने मैसेज भेजा था उसका नाम सौरव चक्रवर्ती है। सौरव ने ललित से अपनी जान-पहचान फेसबुक के माध्यम से 14 मई 2023 में होना बताया था। हालाँकि सौरव का ये भी कहना है कि ललित ने उस से कभी ये नहीं बताया कि वो ऐसा कदम उठा सकता है। सौरव और ललित 2 रैलियों में मिल भी चुके हैं। हालाँकि सौरव ने खुद को ललित की हरकत से असहमत बताया।

संसद सुरक्षा घेरे को तोड़ने के आरोप में अब तक कुल 6 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। अदालत द्वारा इन सभी आरोपितों को 7 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा गया है। इनमें से सागर शर्मा और मनोरंजन डी पब्लिक गैलरी से लोकसभा चैंबर में कूद गए थे जिस से जीरो ऑवर में चल रहे सदन के अंदर अफरातफरी का माहौल हो गया था। इन सभी ने पीले धुएँ के कनस्तर छोड़े और नारेबाजी की। आखिरकार सदन में मौजूद सांसदों ने इन दोनों को दबोच लिया था।

इधर ललित झा इन सभी के फोन ले कर राजस्थान भाग गया। यहाँ नागौर के कुचामन में उसने सभी मोबाइल फोन को पहले बुरी तरह से तोड़ा और बाद में उसे आग लगा दी। यह हरकत ललित ने एक ढाबे के पास की जहाँ वो थोड़ी देर के लिए रुका था। मिली जानकारी के मुताबिक सभी आरोपित किसी के इशारे पर लगभग 1 साल से सदन की सुरक्षा भेदने की तैयारी कर रहे थे। ये सभी पुलिस की पूछताछ में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं और बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं। सभी आरोपितों के बयानों में विरोधाभास होने की भी जानकारी मिली है।

म्यांमार बॉर्डर के पास हुई BJP नेता की हत्या: हमलावरों ने पहले बातचीत के लिए बुलाया, फिर मार दी गोली

अरुणाचल प्रदेश में भाजपा नेता और पूर्व विधायक यमसेन मैते की गोली मार कर हत्या कर दी। यह घटना शनिवार (16 दिसम्बर, 2023) को म्यांमार सीमा पर बसे तिराप जिले के राजो गाँव में हुई। मैते को पहले किसी बहाने से उनके साथियों से अलग ले जाया गया और फिर मार दिया गया।

यमसेन मैते वर्ष 2009 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर यहाँ की खोंसा पश्चिम विधानसभा से विधायक चुने गए थे और वर्तमान में अपने क्षेत्र में राजनीति में सक्रिय थे। वह आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की ओर लड़ने को लेकर अपनी इच्छा भी जाहिर कर चुके थे। ओल्लो समुदाय से ताल्लुक रखने वाले यमसेन का इस इलाके में काफी प्रभाव था।

उनकी हत्या के पीछे NSCN- KYA उग्रवादी समूह का हाथ बताया जा रहा है। जहाँ यह हत्या हुई वहाँ से म्यांमार सीमा काफी नजदीक है। यह उग्रवादी खुली सीमा का लाभ उठा कर एक तरफ घटना को अंजाम देकर दूसरी तरफ भाग जाते हैं। इस इलाके में कुछ उग्रवादी समूह अब भी सक्रिय हैं।

बताया गया है कि मैते की जहाँ हत्या हुई वहाँ से कुछ दूर वह अपने साथियों के साथ किसी काम से गए थे। इसके पश्चात एक आदमी ने उनसे आकर अकेले में बातचीत करने को कहा। उस व्यक्ति के साथ कुछ दूर जाने के बाद उन्हें गोली मार दी गई। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जिसने मैते को गोली मारी उसने उनके साथियों को भी वापस आकर धमकी दी।

मैते 2009 से ही राजनीति में उतरे थे। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में अफसर थे। मैते अपने समुदाय में स्नातक शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति थे। उनके हत्यारों के पकड़े जाने के विषय में अभी कोई जानकारी सामने नहीं है।

मैतेक की तिराप जिले में हत्या से पहले उनकी ही सीट से वर्ष 2019 में विधायक का चुनाव जीते NPP विधायक तिरोंग अबोह की वर्ष 2019 में उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। उनके काफिले पर हमला करके उग्रवादियों ने 10 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी।

MP में इबादतगाहों से लाउडस्पीकर हटवाने का काम शुरू, चेकिंग के लिए गठित हुआ फ्लाइंग दस्ता: कई मस्जिदों पर लगे मिले 7-7 माइक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वो प्रदेश भर के विभिन्न जिलों की इबादतगाहों पर तेज आवाज में बजाए जाने वाले लाउडस्पीकरों को उतरवाएँ। इस आदेश पर तत्काल अमल भी शुरू हो गया है। इंदौर, कटनी सहित प्रदेश के कई जिलों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इबादतगाहों से लाउडस्पीकर उतरवाने में जुट गए हैं। इस कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर जिला प्रशासन ने इबादतगाहों से लाउडस्पीकर उतरवाने के लिए विशेष दस्ते का गठन किया है। थाना स्तर पर 13 फ्लाइंग दस्ता गठित किया गया है। इसमें स्थानीय थाना प्रभारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इस निर्णय के बाद दस्ते ने शनिवार (16 दिसंबर) को इंदौर के ग्रामीण इलाकों की कई मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाए हैं। कार्रवाई से पहले प्रशासन ने तमाम मौलाना-मौलवियों के साथ बैठक की।

इस मीटिंग का नेतृत्व डीआइजी (ग्रामीण) राजेश हिंगणकर, कलेक्टर टी. इलैया राजा और पुलिस अधीक्षक ने किया। इंदौर के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्रवाई के दौरान ऐसी मस्जिदें भी दिखीं, जिस पर 7-7 माइक लगे हुए थे। प्रशासन की सख्ती के बाद कई इबादतगाहों से लाउडस्पीकर वहाँ के व्यवस्थापकों ने ही उतार लिए थे। इनमें खजराना में नाहर शाहवली दरगाह के सदर रिजवान भी शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने सांवेर, बड़गोंद और किशनगंज आदि क्षत्रों की कई मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों को हटवाया।

धार जिले में भी इबादतगाहों पर लगे अवैध लाउडस्पीकरों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। यहाँ मुस्लिम तबके के कई लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है। NDTV से बातचीत में एक मुस्लिम व्यक्ति ने बताया कि शिवराज सिंह चौहान सरकार ने भी इसी तरह का आदेश दिया था, लेकिन अधिकारियों की कमी से उसका पालन नहीं हो पाया।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में भी इबादतगाहों पर लगे अवैध लाउडस्पीकरों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान सुन्नी नूरानी मस्जिद अंकुर नगर, खानशाहवली कॉलोनी आदि स्थानों पर नियमों के विरुद्ध लगे लाउडस्पीकर हटा दिए गए।

हालाँकि, इस कार्रवाई की जद में कई मंदिरों पर लगे लाउडस्पीकर भी आए। कटनी पुलिस द्वारा शेयर की गई कार्रवाई की जानकारी में मंदिरों से लाउडस्पीकर उतारे जाने का मामला भी सामने आया है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, उनकी कार्रवाई शासन के निर्देशों के मुताबिक है।

बताते चलें कि इबादतगाहों पर अवैध तौर पर लगे लाउडस्पीकरों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी बड़ा अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के तहत नियमों को न मानने वाले लोगों पर FIR भी दर्ज की जा रही है।

शादीशुदा हिन्दू महिला के संबंध बनाना चाहता था फारुख पठान, मना करने पर ‘सिर तन से जुदा’ करने आया: परिवार को कत्ल की धमकी देकर हुआ फरार

गुजरात के खेड़ा जिले में एक मुस्लिम युवक द्वारा हिन्दू महिला पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शादीशुदा पीड़िता ने आरोपित फारुख पठान से रिश्ता रखने से मना करना कर दिया था। गंभीर हालत में पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर के फरार फारुख की तलाश और जाँच शुरू कर दी है। घटना गुरुवार (14 दिसंबर 2023) की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला खेड़ा के गलाटेश्वर तालुका का है। यहाँ के गाँव सनदरा में 33 साल की पीड़िता अपने 8 साल के बेटे के साथ रहती है। साल 2010 में महिला की शादी पड़ोसी गाँव के एक युवक से हुई थी। थोड़े समय बाद दोनों के वैवाहिक जीवन में अनबन शुरू हो गई। आखिरकार महिला 3 साल पहले अपने बच्चे के साथ मायके में आकर माता-पिता के साथ रहने लगी। इसी बीच लगभग 2 माह से फारुख नाम का युवक उसके पीछे पड़ गया। फारुख पीड़िता पर शारीरिक संबंध बनाने का भी दबाव डालने लगा।

पीड़िता ने कई बार फारुख को मना किया लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा। वह पीड़िता का पीछा करता रहा। गुरुवार (14 दिसंबर) सुबह करीब सात बजे फारूक अचानक पीड़िता के पास पहुँचा। उसने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ दी और जातिसूचक शब्द बोले। थोड़ी देर में फारुख ने पीड़िता की गर्दन पर ब्लेड से हमला किया। पीड़िता ने इस हमले को अपने हाथ से रोका जिस से उसका हाथ कट गया। फारुख ने अपने वार जारी रखे जिससे पीड़िता की कलाई पर गंभीर चोटें आईं।

पीड़िता की चीखें सुन कर घर में मौजूद उसकी भाभी वहाँ पहुँचीं। उन्होंने जब बीच-बचाव की कोशिश की तो फारुख ने उनको भी धमकी दी। फारुख ने पीड़िता और उसकी भाभी से साफ कहा कि अगर किसी ने भी उसकी बातचीत बंद करवाई तो वो पूरे परिवार का कत्ल कर देगा। जब फारुख ने घर के बाकी परिजनों को आते देखा तो वो घटनास्थल से भाग निकला। ब्लेड के हमले में घायल पीड़िता को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ से उसे अहमदाबाद के एसवीपी हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया है।

पीड़िता के परिजनों ने सेवालिया थाने में शिकायत दर्ज करवाई। इस शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 326, 504 और 506(2) के तहत FIR दर्ज की है। घटना के बाद आरोपित फारुख पठान फरार हो गया है जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया से बातचीत में पीड़िता के रिश्तेदार ने बताया कि फारुख पठान लगभग डेढ़ माह से परेशान कर रहा था। वह महिला से जबरन संबंध बनाना चाहता था। जब पीड़िता ने मना कर दिया तब उसका गला काटने की कोशिश की गई। खुद के बचाव में महिला का हाथ कट गया। हमें बताया गया कि एक बार फारुख ने स्कूल जाते समय पीड़िता के बेटे का भी अपहरण कर के पूरे परिवार की हत्या की धमकी दी थी। वहीं हिन्दू संगठनों ने इस घटना को लव जिहाद बता कर प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। अहमदाबाद बजरंग दल के कार्यकर्ता भावेश कंसारा ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपित के परिजन पीड़िता के घर वालों पर सुलह का दबाव बना रहे थे। हालाँकि पीड़िता के घर वालों ने सुलह से इंकार कर दिया है।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर गए अशोक गहलोत: प्रदेश पर छोड़ा ₹5.37 लाख करोड़ का कर्जा, GDP सुधारने पर ध्यान तक नहीं दिया

राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 15 दिसम्बर 2023 को राजस्थान के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं। उन्होंने कुछ बड़े निर्णय भी ले लिए हैं। हालाँकि, अभी आगे की राह बहुत लम्बी है विशेषकर तब जब अशोक गहलोत की अगुवाई वाली पिछली कॉन्ग्रेस सरकार राजस्थान की अर्थव्यवस्था तबाह करके गई है।

राजस्थान में पिछले 3 दशक से यह चलन रहा है कि पाँच वर्ष पर सरकार बदल जाती है। हालाँकि, जब-जब राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार सत्ता में आई है, तब-तब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क हुआ है। इस बार भी आँकड़े यही बता रहे हैं।

जहाँ एक ओर राजस्थान पर भारी कर्ज है और वह देश में अपनी जीडीपी के मुकाबले सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले राज्यों में शामिल है, वहीं दूसरी ओर पिछले 5 वर्षों में उसकी जीडीपी में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं दिखी। इसके अलावा गहलोत सरकार की आमदनी अठन्नी-खर्चा रुपैया की नीति के चलते राज्य भारी आर्थिक संकट में भी फँस गया है।

अशोक गहलोत के राज में कर्ज तले दब गया राजस्थान

राजस्थान इस समय कर्ज के भारी बोझ में दबा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक राजस्थान पर ₹5.37 लाख करोड़ का कर्ज है। जब अशोक गहलोत को वर्ष 2018 में सत्ता मिली थी, तब यह कर्ज मात्र ₹2.81 लाख करोड़ था। अशोक गहलोत ने बीते पाँच वर्षों में ₹2.55 लाख करोड़ का नया कर्ज राजस्थान पर चढ़ाया है।

लगातार रेवड़ी योजनाओं को लाने और वोट के लिए सरकारी खजाना कॉन्ग्रेस सरकार ने खूब लुटाया। यह बात ध्यान देने वाली है कि जब अशोक गहलोत को 2018 में सत्ता मिली थी तब वह पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार द्वारा लिए गए लगभग ₹1.63 लाख करोड़ के कर्ज को बहुत अधिक बता रहे थे। अब वह स्वयं राज्य को कर्ज के दलदल में डाल गए हैं।

राजस्थान की वित्तीय स्थिति काफी खराब है। इस राज्य पर उसकी जीडीपी का 40% कर्ज है। देश में राज्य और केंद्र के लिए कर्जे की सीमा तय करने वाले FRBM कानून के तहत यह किसी भी राज्य में 20% से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार की फिजूलखर्ची से यह दोगुना हो गया है।

जीडीपी बढ़ी नहीं, कर्ज लगातार ऊपर

ऐसा भी नहीं है कि अशोक गहलोत यह कर्ज लेकर राज्य के विकास को कोई नई गति दे पाए हों। उलटे उनके राज में राजस्थान की अर्थव्यवस्था बहुत सामान्य रफ़्तार से बढ़ी है। वर्ष 2013 में जब कॉन्ग्रेस की सरकार राज्य से गई थी, तब राजस्थान की जीडीपी ₹4.93 लाख करोड़ थी।

भाजपा सरकार में साल 2018 तक यह बढ़कर ₹6.28 लाख करोड़ हो गई। इसके बाद 2018 से 2023 के बीच राज्य की जीडीपी ₹7.99 लाख करोड़ रही। दोनों काल में राज्य की जीडीपी 27.2% बढ़ी। लेकिन इतनी ही बढ़त के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने कहीं ज्यादा कर्ज लिया।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

कॉन्ग्रेस की सरकार ने बीते पाँच सालों में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया की नीति अपनाई है। राज्य का राजकोषीय घाटा (सरकार की कमाई और खर्चे के बीच का अंतर) बीते पाँच वर्षों में बेतहाशा बढ़ा है। वर्ष 2018 में जब भाजपा सरकार सत्ता से बाहर हुई थी तब यह ₹25,342 करोड़ था जो कि अशोक गहलोत के जाते-जाते साल 2023 में दोगुना से भी अधिक होकर ₹58,212 करोड़ हो चुका है। यह घाटा राजस्थान की जीडीपी का लगभग 4.3% है। नियम कहता है कि यह 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

राज्य की पाँच वर्षों तक आर्थिक हालत बिगाड़ने के बाद अब अशोक गहलोत सत्ता से बाहर गए हैं। ऐसे में नए मुख्यमंत्री भजनलाल को काफी संभलकर काम करना होगा। उन्हें एक ओर कर्जे घटाने होंगे, दूसरी तरफ रूकी पड़ी अर्थव्यवस्था में भी जान डालनी होगी। इसके अलावा कानून व्यवस्था को ठीक करना आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी होगा।