Tuesday, July 16, 2024
Homeराजनीतिराजस्थान की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर गए अशोक गहलोत: प्रदेश पर छोड़ा ₹5.37 लाख...

राजस्थान की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर गए अशोक गहलोत: प्रदेश पर छोड़ा ₹5.37 लाख करोड़ का कर्जा, GDP सुधारने पर ध्यान तक नहीं दिया

अशोक गहलोत के राज में राजस्थान पर कर्ज उसकी जीडीपी का 40% हो चुका है। राजस्थान की जीडीपी भी उनके राज में कोई विशेष तौर पर नहीं बढ़ सकी है। हालाँकि राज्य का कर्ज जरूर इस दौरान 2.5 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया है।

राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 15 दिसम्बर 2023 को राजस्थान के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं। उन्होंने कुछ बड़े निर्णय भी ले लिए हैं। हालाँकि, अभी आगे की राह बहुत लम्बी है विशेषकर तब जब अशोक गहलोत की अगुवाई वाली पिछली कॉन्ग्रेस सरकार राजस्थान की अर्थव्यवस्था तबाह करके गई है।

राजस्थान में पिछले 3 दशक से यह चलन रहा है कि पाँच वर्ष पर सरकार बदल जाती है। हालाँकि, जब-जब राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार सत्ता में आई है, तब-तब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क हुआ है। इस बार भी आँकड़े यही बता रहे हैं।

जहाँ एक ओर राजस्थान पर भारी कर्ज है और वह देश में अपनी जीडीपी के मुकाबले सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले राज्यों में शामिल है, वहीं दूसरी ओर पिछले 5 वर्षों में उसकी जीडीपी में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं दिखी। इसके अलावा गहलोत सरकार की आमदनी अठन्नी-खर्चा रुपैया की नीति के चलते राज्य भारी आर्थिक संकट में भी फँस गया है।

अशोक गहलोत के राज में कर्ज तले दब गया राजस्थान

राजस्थान इस समय कर्ज के भारी बोझ में दबा हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक राजस्थान पर ₹5.37 लाख करोड़ का कर्ज है। जब अशोक गहलोत को वर्ष 2018 में सत्ता मिली थी, तब यह कर्ज मात्र ₹2.81 लाख करोड़ था। अशोक गहलोत ने बीते पाँच वर्षों में ₹2.55 लाख करोड़ का नया कर्ज राजस्थान पर चढ़ाया है।

लगातार रेवड़ी योजनाओं को लाने और वोट के लिए सरकारी खजाना कॉन्ग्रेस सरकार ने खूब लुटाया। यह बात ध्यान देने वाली है कि जब अशोक गहलोत को 2018 में सत्ता मिली थी तब वह पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार द्वारा लिए गए लगभग ₹1.63 लाख करोड़ के कर्ज को बहुत अधिक बता रहे थे। अब वह स्वयं राज्य को कर्ज के दलदल में डाल गए हैं।

राजस्थान की वित्तीय स्थिति काफी खराब है। इस राज्य पर उसकी जीडीपी का 40% कर्ज है। देश में राज्य और केंद्र के लिए कर्जे की सीमा तय करने वाले FRBM कानून के तहत यह किसी भी राज्य में 20% से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार की फिजूलखर्ची से यह दोगुना हो गया है।

जीडीपी बढ़ी नहीं, कर्ज लगातार ऊपर

ऐसा भी नहीं है कि अशोक गहलोत यह कर्ज लेकर राज्य के विकास को कोई नई गति दे पाए हों। उलटे उनके राज में राजस्थान की अर्थव्यवस्था बहुत सामान्य रफ़्तार से बढ़ी है। वर्ष 2013 में जब कॉन्ग्रेस की सरकार राज्य से गई थी, तब राजस्थान की जीडीपी ₹4.93 लाख करोड़ थी।

भाजपा सरकार में साल 2018 तक यह बढ़कर ₹6.28 लाख करोड़ हो गई। इसके बाद 2018 से 2023 के बीच राज्य की जीडीपी ₹7.99 लाख करोड़ रही। दोनों काल में राज्य की जीडीपी 27.2% बढ़ी। लेकिन इतनी ही बढ़त के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने कहीं ज्यादा कर्ज लिया।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

कॉन्ग्रेस की सरकार ने बीते पाँच सालों में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया की नीति अपनाई है। राज्य का राजकोषीय घाटा (सरकार की कमाई और खर्चे के बीच का अंतर) बीते पाँच वर्षों में बेतहाशा बढ़ा है। वर्ष 2018 में जब भाजपा सरकार सत्ता से बाहर हुई थी तब यह ₹25,342 करोड़ था जो कि अशोक गहलोत के जाते-जाते साल 2023 में दोगुना से भी अधिक होकर ₹58,212 करोड़ हो चुका है। यह घाटा राजस्थान की जीडीपी का लगभग 4.3% है। नियम कहता है कि यह 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

राज्य की पाँच वर्षों तक आर्थिक हालत बिगाड़ने के बाद अब अशोक गहलोत सत्ता से बाहर गए हैं। ऐसे में नए मुख्यमंत्री भजनलाल को काफी संभलकर काम करना होगा। उन्हें एक ओर कर्जे घटाने होंगे, दूसरी तरफ रूकी पड़ी अर्थव्यवस्था में भी जान डालनी होगी। इसके अलावा कानून व्यवस्था को ठीक करना आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी होगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अर्पित त्रिपाठी
अर्पित त्रिपाठीhttps://hindi.opindia.com/
अवध से बाहर निकला यात्री...

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने वोट के लिए आतंक को दिया बढ़ावा’: DGP ने घाटी के सिविल सोसाइटी में PAK के घुसपैठ की खोली पोल,...

जम्मू कश्मीर के DGP RR स्वेन ने कहा है कि एक राजनीतिक पार्टी ने यहाँ आतंक का नेटवर्क बढ़ाया और उनके आका तैयार किए ताकि उन्हें वोट मिल सकें।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चलती रहेगी आय से अधिक संपत्ति मामले CBI की जाँच: दौलत के 5 साल...

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI जाँच से राहत देने से मना कर दिया है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -