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आज दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में बलि देने पर रोक, कल कहेंगे – माँ काली के गले से हटा दो नरमुंडों की माला: बकरीद की कुर्बानी से अलग है सनातन की यह परंपरा

बिहार सरकार ने दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद हिन्दू आक्रोशित हैं। ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद’ ने ये फैसला लिया है। इसके अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन हैं, जो पूर्व में विधि सचिव रहे हैं। उनका पुतला जलाते हुए उन्हें पद से हटाने की माँग की जा रही है। श्रद्धालु कह रहे हैं कि हिन्दू परंपरा के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है, इतिहास में प्राचीन काल से जो प्रथा चली आ रही है उसमें बाहर से हस्तक्षेप क्यों किया जा रहा है?

यही कारण है कई ‘बजरंग दल’ जैसे हिन्दू संगठन भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। बिहार में जदयू, राजद और कॉन्ग्रेस की संयुक्त सरकार है जिसके मुखिया नीतीश कुमार हैं। तेजस्वी यादव उनके डिप्टी हैं। तीनों ही दल भाजपा के विरोध में हैं, केंद्र की मोदी सरकार के विरोधी हैं। भाजपा हिंदुत्व के मुद्दों को लेकर मुखर रहती है। ऐसे में हिन्दू धर्म में हस्तक्षेप करने वाले इस फैसले को लेकर विरोध होना स्वाभाविक है। जिन भक्तों की श्यामा माई में आस्था है और जिनकी पीढ़ियाँ दशकों से वहाँ पशु बलि देती आ रही है, उनके हाथ बाँधे जाने का क्या तुक है?

आइए, सबसे पहले श्यामा माई मंदिर के बारे में जानते हैं। ये मंदिर दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर स्थित है। रामेश्वर सिंह साधक भी थे, इसीलिए उनकी चिता पर माँ काली का ये मंदिर बना। यही कारण है कि इसे रामेश्वरी माई मंदिर भी कहा गया। उनके बेटे कामेश्वर सिंह ने सन् 1933 में इसका निर्माण करवाया था। मंदिर के गर्भगृह की बात करें तो माँ काली की प्रतिमा के दाहिनी ओर महाकाल और और बाईं ओर गणपति एवं बटुकभैरव स्थापित हैं।

माँ काली के गले में जो मुंडमाला है, उसमें हिंदी वर्णमाला में जितने अक्षर हैं उतने ही नरमुंड हैं। हिंदी वर्णमाला को सृष्टि का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्र में यहाँ विशेष आयोजन होता आ रहा है। बड़ी बात ये है कि यहाँ वैदिक के साथ-साथ तांत्रिक प्रक्रियाओं से भी माँ काली की आराधना होती है। ‘रामेश्वर चरित मिथिला रामायण’ में महाराज के सेवक रह चुके लालदास ने श्यामा माई को माँ सीता का रूप भी बताया है। इसमें कथा है कि सहस्त्रानन्द असुर का एक ठीक भगवान राम को लग गया, जिसके बाद आक्रोशित माँ सीता का रंग काला पड़ गया और जिह्वा निकल आई।

इसके बाद उन्होंने असुर का वध कर दिया। उनके इसी रूप को श्यामा माई कहा गया। कहा जाता है कि उनका क्रोध शांत करने के लिए स्वयं भगवान शिव को आना पड़ा था। यहाँ 2 चीजें गौर करने लायक हैं – पहली, ये एक शाक्त मंदिर है, देवी पूजा का स्थल है। दूसरी, यहाँ तंत्र साधना भी होती आई है। ये दोनों ही सनातन हिन्दू परंपरा का हिस्सा हैं। इनमें पशु बलि दी जाती है। यही कारण है कि हिन्दू श्रद्धालु आक्रोशित हैं। किसी भी समुदाय अपनी पूजा-पद्धति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकता।

असल में ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद’ ने पशु क्रूरता अधिनियम का हवाला देकर बलि प्रथा पर रोक लगाई है। प्रदर्शनकारी तैयारी कर रहे हैं कि कुछ दिनों बाद सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा होकर पशु बलि दी जाएगी और राज्य सरकार के इस आदेश के साथ असहयोग की घोषणा होगी। इसी तरह अक्टूबर-नवंबर 2020 में महाराष्ट्र के नागपुर स्थित कामठी के दुर्गा मंदिर में पशु बलि देने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई थी। केरल में तो कानून बना कर ही पशु बलि को बैन कर दिया गया था।

‘वैदिक भारत’ के संस्थापक और हिन्दू परंपराओं के विशेषज्ञ मोहित भरद्वाज ने तब ऑपइंडिया से कहा था कि पशु बलि की हिन्दू धर्म में अनुमति है, लेकिन कई नियमों एवं पाबंदियों के साथ। उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म में ही कई समुदाय देवता को भोजन के रूप में पशु को समर्पित करते हैं। उन्होंने श्रौत और गृह्य सूत्रों का उदाहरण दिया, जिनमें पशु बलि की अनुमति है। सुचित्रा समंता ने ‘एसोसिएशन फॉर एशियाई स्टडीज’ में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में बताया था कि कई तंत्रों एवं पुराणों में पशु बलि की अनुमति है।

यानी, इनमें देवी-देवताओं को भोजन के रूप में मांस और सब्जियाँ, दोनों अर्पण करने के विधान हैं। देवी पूजा में पशु बलि का विशेष महत्व रहा है। जैसे, बंगाल को ले लीजिए। बंगाल में नवरात्रि के दौरान देवी को मांस भी प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है। दुनिया भर में देवी पूजा बंगाल में भी सबसे भव्य तरीके से होती है। वहाँ पशु बलि आम है, क्योंकि ये शाक्त परंपरा का हिस्सा है। शाक्त, हिन्दू समाज का हिस्सा है। शक्ति की उपासना और तंत्र साधना में पशु बलि प्राचीन काल से दी जाती रही है।

इसका कारण है कि वनवासी समाज भी हिन्दू धर्म का हिस्सा है और वो देवी-देवताओं को खुश करने के लिए वही अर्पण करता रहा है, जो उसकी दिनचर्या का हिस्सा है। इसीलिए, वो मांस भी प्रसाद के रूप में चढ़ाते आ रहे हैं। भारत के ‘सेक्युलर’ कानून का तमाशा देखिए कि यहाँ अगर कोई मांस खाने के लिए पशु हत्या करे तो ये जायज है, लेकिन अगर बलि के रूप में हो तो अपराध है। साफ़ है कि सिर्फ एक समुदाय की धार्मिक परंपराओं का मानमर्दन किया जा रहा है, उन्हें रोका जा रहा है।

पशु बलि पर सरकार बैन लगा देती है, लेकिन बकरीद के दिन खून की नदियाँ बह जाती हैं फिर भी किसी के मुँह से चूँ तक नहीं मिलता। मुस्लिम समाज मांस भी ‘झटका’ नहीं, ‘हलाल’ खाता है। इस प्रक्रिया में जानवरों को तड़पा-तड़पा कर धीमे-धीमे मारा जाता है। इसमें किसी को पशु क्रूरता नज़र नहीं आती। चूँकि मुस्लिम समाज में एकता है और राजनीतिक दलों का उनका तुष्टिकरण भी करना है, इसीलिए उनकी किसी भी परंपरा को छुआ तक नहीं जाता।

लेकिन, बात हिन्दुओं की हो तो सरकारें ठेकेदार बन कर सामने आ जाती हैं। जबकि पशु हत्या का इस्लामी तरीका खासा बर्बर है। हालाँकि, इस्लामी तौर-तरीके इसका आधार नहीं होने चाहिए कि हिन्दू परंपराओं को लेकर सरकार या अदालत क्या फैसला लेती है। हिन्दू समाज को अपनी परंपराओं के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। दूसरे समाज में क्या हो रहा है, इसे आधार बना कर नहीं बल्कि अपने इतिहास को आधार बना कर। इस हिसाब से पशु बलि पर सरकार का बैन लगाना ठीक नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं द्वारा पूजा किए जाने की अनुमति दे दी थी, उन एक्टिविस्ट्स की याचिका के आधार पर जिनकी हिन्दू धर्म में कोई श्रद्धा ही नहीं थी। जबकि सबरीमाला मंदिर में बच्चियों और बुजुर्ग महिलाओं को पूजा की अनुमति है। फिर भी इस मंदिर के बारे में दुष्प्रचारित किया गया कि ये महिला विरोधी है। किसी मस्जिद में कौन घुसेगा और कौन नहीं, क्या ये आपने सरकार या न्यायपालिका को तय करते हुए देखा है?

हिन्दू धर्म कैसे चलेगा, ये हमारे मंदिरों की परंपराओं, शास्त्रों, इतिहास और हिन्दू विद्वानों के मत से तय होगा – सरकार या कोर्ट से नहीं। क्योंकि सनातन हिन्दू धर्म जब से चला आ रहा है, तब से अनेक बार इसमें नए बदलाव हुए हैं, कुछ चीजें जुड़ी हैं और कुछ हटाई गई हैं – ये सब समाज ने ही तय किया है। तब कोर्ट या सरकार मौजूदा रूप में नहीं होते थे। कुछ दिनों बाद सरकार कहने लगेगी कि माँ काली के गले से नरमुंड भी हटा दिए जाएँ, इससे हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है। धर्म ऐसे नहीं चलेगा।

इलेक्शन जीत गीर्ट वाइल्डर्स ने भारत का जताया आभार, कहा- हिंदुओं का समर्थन करता रहूँगा: नीदरलैंड के PM बनने के हैं आसार

नीदरलैंड के संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी को मिली सफलता के बाद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने हिंदुओं का समर्थन करते रहने की बात कही है। चुनावी नतीजों के बाद इस दक्षिणपंथी नेता के यूरोपीय देश का प्रधानमंत्री बनने के आसार हैं।

वाइल्डर्स की पहचान एक ऐसे नेता के तौर पर है जो इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर हैं। उन्होंने एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा है, “नीदरलैंड के चुनावों में जीत के बाद दुनिया भर से बधाई संदेश भेजने वाले मित्रों का आभार। भारत से समर्थन में काफी संदेश आ रहे हैं। मैं हमेशा उन हिंदुओं का समर्थन करता रहूँगा ​जिन्हें हिंदू पहचान के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान में निशाना बनाया जाता है। प्रताड़ित किया जाता है।”

60 साल के वाइल्डर्स की कंजर्वेटिव पार्टी फॉर फ्रीडम (PVV) ने संसदीय चुनावों में सबसे ज्यादा 37 सीटें जीती है। सरकार बनाने के लिए 76 सांसदों की जरूरत है। गठबंधन सरकार बनाने को लेकर पार्टी की अन्य दलों से बातचीत चल रही है। इस बात की पूरी संभावना है कि गठबंधन का नेतृत्व करते हुए गीर्ट वाइल्डर्स प्रधानमंत्री बनेंगे। वैसे पूरी प्रक्रिया में अभी 8-10 महीने का समय लग सकता है।

PVV नीदरलैंड में इस्लाम के प्रसार के विरुद्ध रही है। नीदरलैंड में मस्जिदों, कुरान और हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की माँग करती रही है। ऐसे में उसकी जीत का प्रभाव पूरे यूरोप पर पड़ने की संभावना है। बीते साल जब ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने नूपुर शर्मा को टारगेट किया था, तब वाइल्डर्स ने बीजेपी की इस पूर्व नेता का समर्थन किया था। जुबैर के उकसावे के बाद से नूपुर शर्मा को जिहादी हत्या की धमकी दे रहे हैं। वे सार्वजनिक जीवन से दूर रहने को मजबूर हैं।

कौन हैं गीर्ट वाइल्डर्स?

नीदरलैंड के वेनलो में 6 सितंबर 1963 में जन्मे गीर्ट वाइल्डर्स एक दक्षिणपंथी डच नेता हैं। वह अपने इस्लाम विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह वर्ष 2004 के बाद से लगातार पुलिस सुरक्षा में रहते हैं। उनके एक बार मोरक्को के लोगों को कूड़ा बोलने पर काफी विवाद हुआ था। पीवीवी की स्थापना उन्होंने 2006 में की थी। उन्हें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का डच अवतार भी कहा जाता है।

वाइल्डर्स ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत उदारवादी पार्टी पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी (वीवीडी) से की थी। वे पिछले ढाई दशकों से नीदरलैंड की राजनीति में सक्रिय हैं, वह 1998 के बाद से डच संसद में हैं। उनका ताल्लुक एक सामान्य माध्यम वर्गीय परिवार से है। वह 1981 से 1983 के बीच इजरायल में भी रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मध्य एशियाई देशों की यात्रा की, जिस दौरान वे कट्टरपंथी इस्लाम के खतरों से अवगत हुए।

वाइल्डर्स को अवैध प्रवासियों के प्रति उनके कठोर रवैए और डच हितों को सबसे आगे रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने जुलाई 2022 में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा भी डच संसद में उठाया था। उन्होंने अक्टूबर 2022 में भी नूपुर शर्मा के समर्थन में ट्वीट किया था। डच सांसद ने भारत में हिंदुओं पर हमले की घटनाओं का भी जिक्र किया था। उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा एक हिंदू दर्जी (कन्हैया लाल) का सिर कलम करने की घटना पर भी प्रकाश डाला था।

उन्होंने कहा था कि नुपुर शर्मा ने सही कहा था और मुस्लिमों के उन के खिलाफ विरोध को बेजा बताया था। वाइर्ल्डस ने तब अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया था, “अल-कायदा जैसे इस्लामी आतंकवादियों के आगे कभी न झुकें, वे बर्बरता का प्रतिनिधत्व करते हैं। पूरे भारतीय राष्ट्र को अब नूपुर शर्मा के पक्ष में एकजुट होना चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए। अल कायदा और तालिबान ने सालों पहले मुझे अपनी हिटलिस्ट में डाल में दिया था। इसके एक सबक है कि आतंकवादियों के सामने कभी न झुकें, कभी नहीं।”

गीर्ट ने 2012 में ‘मार्क्ड फॉर डेथ: इस्लाम्स वॉर अगेंस्ट द वेस्ट एंड मी’ किताब लिखी थी। अपने एक लेख में उन्होंने कहा था कि वो मुस्लिमों से नहीं, लेकिन उनकी किताब और उनकी विचारधारा से जरूर नफरत करते हैं। बताते चले कि गीर्ट ने साल 2008 में ‘फितना’ नाम की एक फिल्म भी बनाई है। इसमें उन्होंने आतंकी घटनाओं को कुरान से जोड़ा है। उनकी इस फिल्म पर खासा विवाद छिड़ा था। गीर्ट के खिलाफ अदालत में केस तक चला था।

दाऊद इब्राहिम को ‘अज्ञात’ ने जहर देकर नहीं मारा, अनाम रिश्तेदार ने मौत की खबरों को बताया गलत

इस्लामी आतंकी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को कराची में अज्ञात व्यक्ति द्वारा जहर दिए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे सही नहीं हैं। यह उसके एक रिश्तेदार ने बताया है। इससे पहले 17 दिसम्बर 2023 को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था कि दाऊद को जहर दिया गया है और अस्पताल में उसकी मौत हो गई है।

इन दावों में कहा गया था कि दाऊद इब्राहिम को जहर किसी अज्ञात आदमी ने दिया और इसके बाद उसे कराची स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहाँ गंभीर हालत में दो दिन रहने के बाद उसकी मौत हो गई। हालाँकि, ना ही दाऊद के परिवार ने और ना ही किसी अन्य आधिकारिक स्रोत से इसकी पुष्टि हुई थी।

दरअसल, वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाके करवाने वाला दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान के कराची के बेहद पॉश एवं सुरक्षित क्लिफ्टन इलाके में रहता है। भारतीय एजेंसियाँ लंबे समय से इसकी बारे में कहती रही हैं। हालाँकि, 1993 के बाद से उसकी कोई भी फोटो बाहर तक नहीं आई है।

अब सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों को लेकर समाचार वेबसाइट रिपब्लिक ने एक रिश्तेदार के हवाले से कहा है कि दाऊद इब्राहिम को जहर दिए जाने की खबर सही नहीं है। रिपब्लिक ने दाऊद के रिश्तेदार का नाम स्पष्ट नहीं किया है। उसने रिश्तेदार के हवाले से बताया है कि दाऊद को जहर देने की बात अफवाह है।

उस कथित रिश्तेदार ने यह भी बताया कि दाऊद अभी कहाँ है, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल खबरों में यह भी कहा गया था कि दाऊद की मौत के चलते पाकिस्तान में इन्टरनेट भी बंद कर दिया गया था। दाऊद की मौत पर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ के नाम से एक ट्वीट भी वायरल हुआ था।

हालाँकि, ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में सामने आया था कि पाकिस्तान में इन्टरनेट में आ रही समस्याओं का सम्बन्ध 18 दिसम्बर 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ‘तहरीक-ए-इन्साफ'(PTI) की एक वर्चुअल रैली से था। PTI का कहना था कि सरकार उनकी रैली को रोकने के लिए इन्टरनेट में रुकावट डाल रही है।

वही, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ के नाम पर वायरल किए गए ट्वीट की जाँच करने पर पता चला था कि यह ट्वीट एक फर्जी अकाउंट से किया गया था। यह पाकिस्तान के कार्यवाही प्रधानमंत्री के नाम पर बनाया गया था। बाद में इस अकाउंट का नाम भी बदल दिया गया।

‘सनातन धर्म में बलि प्रथा अनादि काल से’: बोले मोदी के मंत्री गिरिराज सिंह, पूछा- श्यामा माई मंदिर में रोक लगाने वाले क्या बकरीद पर बंद करवा सकते हैं

बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने एक फरमान जारी कर दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में बलि देने पर रोक लगा दी है। इस फरमान का स्थानीय लोग सड़क पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और बिहार के बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने भी इस फरमान का विरोध किया है। उन्होंने पूछा है कि श्यामा माई मंदिर में बलि देने पर रोक लगाने वाले क्या बकरीद पर इस तरह की रोक लगा सकते हैं।

मोदी सरकार में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि यदि बकरीद उनके मजहब का हिस्सा है तो बलि प्रदान करना भी हमारे धर्म का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अनादि काल से सनातन में बलि देने की परंपरा चली आ रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुओ को केवल झटका माँस ही खाना चाहिए।

अपने लोकसभा क्षेत्र बेगूसराय में रविवार (18 दिसम्बर, 2023) को उन्होंने कहा कि वे उन मुस्लिमों के प्रशंसक हैं जो अपने मजहब के प्रति समर्पित हैं। जिन्होंने तय कर रखा है कि वे केवल हलाल माँस का सेवन करेंगे। हिंदुओं को भी अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति इसी तरह की प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिंदू अपने धर्म की रक्षा के लिए केवल झटका माँस खाए। नहीं मिले तो नहीं खाएँ। उन्होंने यह भी बताया कि सनातन में बलि प्रदान करने का जो तरीका है उसमें एक बार में वध किया जाता था। इसे ‘झटका’ कहते हैं। वहीं हलाल में पशु को धीरे-धीरे काटा जाता है। हिंदुओं को इस तरीके का माँस खाकर खुद को भ्रष्ट नहीं करना चाहिए।

उन्होंने सभा में मौजूद लोगों को शपथ दिलाई कि वह सभी झटका माँस ही खाएँगे और हलाल माँस नहीं खाएँगे। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शाम के समय मंदिर जाएँ। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में सनातन से बढ़िया कोई धर्म नहीं है।

गौरतलब है कि हाल ही में गिरिराज सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा था जिसमें राज्य में हलाल उत्पादों की बिक्री को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर रोकने की माँग की थी। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने इसी साल नवंबर में हलाल प्रमाणित उत्पादों के बिक्री पर रोक लगा दी थी।

धीरज साहू पर कॉन्ग्रेस को राजदीप सरदेसाई ने दी क्लीनचिट: कहा- उन्हें टिकट नहीं देना चाहती थी पार्टी, जिन्होंने दिलवाई वे मर गए या या BJP में हैं

कॉन्ग्रेस और वामदलों के हिमायती पत्रकार राजदीप सरदेसाई सांसद धीरज साहू के घर से बरामद सैकड़ों करोड़ रुपए की नकदी के मामले में उनकी पार्टी के बचाव में उतर आए हैं। आयकर (आईटी) विभाग ने कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर रेड डालकर 353 करोड़ रुपए से अधिक की भारी नकदी बरामद की है।

नकदी बरामद होने के बाद कुछ दिनों बाद ही राजदीप सरदेसाई कॉन्ग्रेस की ढाल बनते दिख रहे हैं। दरअसल, शुक्रवार (16 दिसंबर 2023) को अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में सरदेसाई ने दावा किया कि घोटाले के इस दागी नेता के सांसद बनने की कोई उम्मीद नहीं थी।

उन्होंने एक काल्पनिक सोर्स का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस 2018 में साहू को राज्यसभा का टिकट नहीं देना चाहती थी। विवादास्पद पत्रकार सरदेसाई ने दावा किया कि कॉन्ग्रेस पार्टी उन नेताओं की पैरवी के बाद साहू को टिकट देने को तैयार हुई थी, जो अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

राजदीप सरदेसाई ने मर चुके एक कॉन्ग्रेस नेता का हवाला देते हुए अंदाजा लगाया कि शायद उन्होंने ने ही धीरज प्रसाद साहू को राज्यसभा भेजने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी पर दबाव डाला था। इस तरह सरदेसाई कॉन्ग्रेस आलाकमान को क्लीन चिट देने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में वे कह रहे हैं, “झारखंड के एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने दावा किया है कि साहू को 2018 में टिकट नहीं दिया जाना था, लेकिन वह दिल्ली में साहू के लिए लॉबिंग करता रहा। कॉन्ग्रेस के रसूखदार लोगों की मदद से आखिरी वक्त में वह साहू को राज्यसभा का टिकट दिलाने में कामयाब रहा।”

सरदेसाई बेशर्मी से कहते हैं, “उनको (धीरज साहू) फायदा पहुँचाने वालों में एक ऐसा शख्स भी था, जो अब जिंदा नहीं है। उसने बहुत लंबे वक्त तक कॉन्ग्रेस की कमान संभाली थी। दिलचस्प बात यह है कि जिन अन्य लोगों ने भी उनकी मदद की थी, उनमें से कुछ अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं।”

धीरज प्रसाद साहू से जुड़ा विवाद

धीरज प्रसाद साहू झारखंड से कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं। उनका परिवार आजादी के बाद से ही कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है। वह 2009 के उपचुनाव में पहली बार राज्यसभा सांसद बने थे। इसके बाद साल 2010 में उन्हें दूसरी बार राज्यसभा सांसद के रूप में चुना गया था। उन्हें तीसरी बार कॉन्ग्रेस ने 2018 में राज्यसभा के लिए चुना।

धीरज साहू संसदीय कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इतना ही नहीं, वह राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा भी रहे थे। अब जबकि उनके यहाँ बेहिसाब नकदी बरामद हुई तो कॉन्ग्रेस खुद को धीरज साहू से अलग कर रही है। इसके लिए राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार भरपूर माहौल बना रहे हैं।

दरअसल, ओडिशा में धीरज प्रसाद साहू की भागीदारी वाली बौध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड में हालिया छापेमारी में आयकर विभाग ने 353 रुपए करोड़ की नकदी बरामद की है। इससे भी दिलचस्प बात यह है कि आईटी छापे में अपने सांसद धीरज साहू के पास से करोड़ों रुपए की नकदी जब्त होने के बाद अब पार्टी ने क्राउडफंडिंग अभियान का ऐलान कर डाला है।

‘ऐश्वर्या राय अब बूढ़ी हो गई… पर अभी भी करेंट है’: फेवरेट बॉलीवुड हिरोइन के नाम पर पाकिस्तानी क्रिकेटर संग नादिर अली ने की गंदी बात

अभिनेत्री ऐश्वर्या राय इन दिनों पारिवारिक अनबन की खबरों को लेकर चर्चा में हैं। कहा जा रहा है कि वह अपनी बेटी के साथ परिवार से अलग रह रही हैं। इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पाकिस्तान का पूर्व क्रिकेटर राणा नावेद उल हसन और पॉडकास्टर नादिर अली अभिनेत्री को लेकर द्विअर्थी बातें करते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तानी पॉडकास्टर नादिर अली पहले भी हिन्दुओं और ईसाइयों को लेकर अपनी घृणा दिखा चुका है। वह बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल और प्रियंका चोपड़ा पर भी अभद्र टिप्पणियाँ कर चुका है। ऐश्वर्या राय से जुड़ी बातचीत वाला जो वीडियो है वह जुलाई 2023 का है। नादिर अली ने यह वीडियो अपने फेसबुक पेज पर फिर से 17 दिसंबर 2023 को पोस्ट किया है।

पॉडकास्ट चैनल पर 8 लाख से अधिक सब्स्क्राइबर हैं। वहीं उसके फेसबुक पेज पर भी करीब 10 लाख फॉलोवर हैं। 17 दिसंबर को उसने जो वीडियो शेयर किया है उसमें वह वह पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज राणा नावेद उल हसन से बातचीत कर रहा है। शुरुआत में बाबर आजम और विराट कोहली को लेकर बातें होती है। क्रिकेट की बातों के बाद नादिर अली पूछता है कि आपकी फेवरेट बॉलीवुड हिरोइन कौन सी है।

इसके जवाब में नावेद कहते हैं कि ऐश्वर्या राय उनकी पसंदीदा हीरोइन है, जिनकी फिल्में वो देखते हैं। इसके बाद नावेद कहते हैं कि वह (ऐश्वर्या राय) अब बूढ़ी हो गई हैं। इसके जवाब में नादिर कहता है, “लेकिन अभी उनमें करंट है।” वो इस दौरान आँख मार कर अभद्र इशारा भी करता है। इसके बाद वो महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करते हुए कहता है, “लड़की की उम्र उतनी होती है जितनी वो दिखती है।” नीचे लगे वीडियो में आप 5 मिनट के बाद से यह बातचीत देख सकते हैं।

ऐश्वर्या राय पर इससे पहले पाकिस्तानी क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक ने भी अभद्र टिप्पणी की थी। विवाद होने पर उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था, “अगर आप सोचते हैं कि मैं ऐश्वर्या (राय) से शादी करूँगा और फिर मेरे अच्छे और नेक बच्चे होंगे, तो ऐसा कभी नहीं हो सकता। इसलिए पहले आपको अपने इरादे ठीक करने होंगे।”

हालाँकि यह पहली बार नहीं है कि जब किसी भारतीय अभिनेत्री पर नादिर ने अभद्र टिप्पणी की हो। इससे पहले नादिर अमीषा पटेल और प्रियंका चोपड़ा पर भी अभद्र टिप्पणी कर चुका है। नादिर ने पाकिस्तानी अभिनेता मोअम्मर राणा के साथ बातचीत में अमीषा पटेल के फिगर और प्रियंका चोपड़ा की सुन्दरता को लेकर गंदी बातें की थी।

नादिर अली ने एक पाकिस्तानी ईसाई महिला के साथ पॉडकास्ट में ईसाइयों और हिन्दुओं के खिलाफ भी जहर उगला था। उसने धर्मांतरण की पैरवी भी की थी। नादिर ने ईसाई सुनीता मर्चेंट पर वीडियो में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया था। इसी वीडियो में पाकिस्तान में हिन्दुओं के जबरन धर्मान्तरण को वह कह रहा है, “अल्लाह उन्हें इस्लाम की राह दिखा रहा है।”

प्रिया सिंह को कार से रौंदने के मामले में ब्वॉयफ्रेंड अश्वजीत गायकवाड़ सहित 3 गिरफ्तार, पुणे में SIT ने गाड़ी भी जब्त की

महाराष्ट्र सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर प्रिया सिंह की प्रताड़ना के मामले में उनके ब्वॉयफ्रेंड अश्वजीत गायकवाड़ को ठाणे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अश्वजीत के साथ-साथ उसके दो अन्य आरोपितों- रोमिल पाटिल और सागर शेडगे को ठाणे पुलिस ने रविवार (17 दिसंबर 2023) को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपित ठाणे के रहने वाले हैं।

वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो और लैंड रोवर डिफेंडर भी जब्त कर ली गई है। 26 साल की प्रिया ने हाल ही में अपने ब्वॉयफ्रेंड अश्वजीत गायकवाड़ पर झगड़े के बाद कार से रौंदने का इल्जाम लगाया था। इसके बाद अश्वजीत ने प्रिया पर नशे में होने ओर मारपीट का आरोप लगाया था।

बताते चलें कि ठाणे के पुलिस आयुक्त जयजीत सिंह ने अश्वजीत के खिलाफ आरोपों की जाँच के लिए DCP अमर सिंह जाधव के नेतृत्व में विशेष जाँच दल (SIT) बनाया था। अश्वजीत भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पदाधिकारी हैं और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार गायकवाड़ के बेटे हैं।

गिरफ्तारी करने वाली SIT के प्रमुख अमर सिंह ने बताया, “इस मामले के संबंध में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के नाम अश्वजीत गायकवाड़, रोमिल पाटिल और सागर शेडगे हैं। हमने 4 पहिया वाहन जब्त कर लिया है। आगे की जाँच जारी है। सोमवार (18 दिसंबर 2023) को आरोपितों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।”

इस मामले में शिकायत के बाद प्रिया ने कहा था, “11 दिसंबर 2023 को मैं ठाणे के घोड़बंदर रोड के पास एक होटल में अश्वजीत गायकवाड़ से मिलने गई थी। उसने मुझ पर पर हमला किया और अपनी एसयूवी से मुझे कुचलने की कोशिश की। कासारवडवली पुलिस ने केस दर्ज किया, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।”

इस मामले में आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने धारा 279 (रैश ड्राइविंग), 323 (जानबूझकर से चोट पहुँचाना), 338 (गंभीर चोट पहुँचाना), 504 (किसी को उकसाने के लिए जानबूझकर उसका अपमान करना) और 34 (सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कई लोगों के किए गए काम) के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

पुलिस ने कहा, “गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और फोरेंसिक सबूत इकट्ठे किए जा रहे हैं। अगर जाँच के दौरान और तथ्यों का खुलासा हुआ तो आरोपितों पर और धाराएँ जोड़ी जाएँगी।” वहीं, प्रिया की वकील दर्शना पवार का कहना है कि उन्होंने पुलिस से आरोपितों पर हत्या की कोशिश की धारा लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।

प्रिया ने कहा था कि वह गायकवाड़ के साथ रिलेशनशिप में थीं और उन्हें गायकवाड़ के शादीशुदा होने का पता नहीं था। जब पता चला तो उन्होंने इसके बारे में पूछा। इस पर अश्वजीत ने कहा कि वह अपनी पत्नी से अलग हो गया है और अब पीड़िता से शादी करना चाहता है। प्रिया का कहना है कि घटना के दिन अश्वजीत के साथ उसकी पत्नी भी थी।

प्रिया का आरोप है कि जब अश्वजीत के साथ उनकी बहस हुई तो वह आक्रामक हो गया और उस पर हमला कर दिया। प्रिया के मुताबिक, “वह अपनी कार से अपना बैग लेने गई थी, तभी अश्वजीत, उसके दोस्त रोमिल पाटिल और ड्राइवर सागर शेडगे ने गाड़ी चला दी, जिससे मैं घायल हो गई।”

मर गया ‘मानवता का मसीहा’ दाऊद इब्राहिम, पाकिस्तानी PM ने किया ट्वीट: जानिए सोशल मीडिया पर वायरल खबर की सच्चाई

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के कराची में रह रहे अंडरवर्ल्ड डॉन और भारत का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम को जहर दे दिया गया है। इससे उसकी मौत हो गई है। दाऊद की मौत को लेकर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ का एक ट्वीट भी वायरल हो रहा है।

दरअसल, 17 दिसम्बर 2023 की रात से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया गया कि दाऊद इब्राहिम को जहर दे दिया गया है। उसे गंभीर हालात में पाकिस्तान के कराची में स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इसके कुछ देर बाद ये दावे किए गए कि जहर देने के कारण दाऊद इब्राहिम की मौत हो गई है। इसी सम्बन्ध में यह भी दावा किया गया कि दाऊद इब्राहिम की मौत पर पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ ने ट्वीट किया है। इस ट्वीट में काकड़ के हवाले से दावा किया गया कि दाऊद की मौत जहर देने के कारण हो गई है।

इस ट्वीट में लिखा है, “मानवता का मसीहा, हर पाकिस्तानी के दिलअजीज हमारे प्यारे महान दाऊद इब्राहिम की अज्ञात व्यक्तियों द्वारा जहर दिए जाने से मौत हो गई है। उन्होंने कराची में आखिरी साँस ली। अल्लाह उन्हें जन्नत में सबसे ऊँचा मुकाम दे। इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलाही राजि’उन।”

हालाँकि, यह दावा कितना सच और कितना झूठ है, इसका फैक्ट चेक ऑपइंडिया ने किया है। पहली नजर में यह ट्वीट एकदम सच नजर आता है। अनवार उल काकड़ की वही तस्वीर, नाम और ट्विटर हैंडल भी एक जैसा ही दिखता है, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह ट्वीट फर्जी है।

दरअसल, जिस ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किया गया है, वह @Anwaar_Kakkar है, यानी काकड़ की स्पेलिंग में इसमें दो K है। वहीं, अनवार उल हक काकड़ के असली अकाउंट देखने पर पता चलता है कि यह ट्विटर हैंडल @Anwaar_Kakar है और इसमें एक ही K है।

अनवार उल हक काकड़ के असली ट्विटर हैंडल को खंगालने पर ऐसा कोई ट्वीट नहीं मिला। उनकी ट्विटर टाइमलाइन पर आखिरी ट्वीट 16 दिसम्बर 2023 का है। इसमें वह कुवैत के अमीर की मौत पर दुःख जता रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

जिस फर्जी अकाउंट से यह ट्वीट किया गया है, उसे खंगालने पर पता चला कि अब इसके नाम में अनवार उल हक काकड़ के साथ ही ‘फैन्स’ शब्द भी जोड़ दिया गया है। इसी के साथ ही अनवार उल काकड़ के प्रधानमंत्री बनने के अलावा और कोई ट्वीट नहीं है।

यदि दाऊद को जहर दिए जाने और उसके मरने की खबर सही भी है तो पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इसे नहीं मानेगा। दरअसल, भारत लम्बे समय से कहता आया है कि दाऊद इब्राहिम कराची के ‘क्लिफ्टन’ क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा के बीच रह रहा है। पाकिस्तान की सेना और ISI उसकी सुरक्षा करती है। हालाँकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा यह ट्वीट करने की गुंजाइश नहीं है।

इसके साथ ही इन्टरनेट पर यह भी दावा किया जा रहा है कि दाऊद इब्राहिम की मौत के कारण पाकिस्तान में इन्टरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं। दावा किया गया कि पाकिस्तान के लोग अब फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसी वेबसाइट नहीं चला पा रहे।

इस बात का भी सच थोड़ा अलग है। यह बात सही है कि पाकिस्तान में 17 दिसम्बर 2023 को इन्टरनेट सेवाएँ प्रभावित हुई थीं, लेकिन इसका कारण दाऊद इब्राहिम की मौत नहीं है।

इंटरनेट डाउन होने के पीछे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक-ए-इन्साफ’ की एक वर्चुअल रैली थी। तहरीक-ए-इन्साफ ने खुद भी यह साफ़ किया है कि पाकिस्तान की सरकार उन्हें दबाने और उनकी आवाज जनता तक पहुँचने से रोकने के लिए ऐसा कर रही है।

ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में जहाँ दाऊद की कथित मौत पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकड़ का ट्वीट फर्जी निकला, वहीं पाकिस्तान में दाऊद की मौत पर इन्टरनेट बंद किए जाने का दावा भी अर्धसत्य निकला। दाऊद की मौत को लेकर स्थिति अभी साफ़ नहीं हो पाई है।

हिंदू प्रेमी से शादी करना चाहती थी शीबा, भाइयों ने गला दबाकर मार डाला: शव गंगनहर में फेंका, सूफियान और महताब गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिंदू लड़के से प्यार करने के कारण शीबा नाम की मुस्लिम लड़की को उसके भाइयों ने हत्या कर दी। यह बात उसके भाइयों को पसंद नहीं आई और उसे घुमाने के बहाने गाजियाबाद लेकर आए। इसके बाद गला दबाकर हत्या कर दी और लाश को मुरादनगर के गंगनहर में फेंक दिया।

दरअसल, उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के अंतर्गत आने वाले रुड़की जिले की 17-18 साल की शीबा एक स्थानीय हिंदू लड़के से प्यार करती थी। यह बात उसके भाइयों- 21 साल के सूफियान और 24 साल के महताब को पसंद नहीं आई। परिजनों ने उसे दिल्ली में चचेरे भाई के पास भेज दिया। हालाँकि, यहाँ भी वह फोन के जरिए अपने प्रेमी के संपर्क में थी।

यह बात उसके चचेरे भाई महताब को पता चली तो उसने सूफियान को बताया। इसके बाद दोनों ने मिलकर शीबा की हत्या की योजना बनाई। दोनों शीबा को घुमाने के बहाने गाजियाबाद में मुरादनगर गंगनहर के पास लेकर आए। यहाँ उन्होंने शीबा की गला दबाकर हत्या कर दी और लाश को गंगनहर में फेंक दिया।

DCP (ग्रामीण) विवेक चंद्र यादव ने बताया, “दोनों आरोपित वारदात को अंजाम देकर पैदल ही लौट रहे थे। इसी दौरान वहाँ गश्त कर रही पुलिस की फैंटम टीम ने उन्हें रोक लिया। पूछताछ के दौरान दोनों सकपका गए। दोनों को संदिग्ध पाकर पुलिस उन्हें मुरादनगर थाने लेकर आई गई। यहाँ पर उन्होंने अपनी बहन की हत्या की बात कबूल की।”

DCP ने बताया कि पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उनकी बहन की प्रेम-प्रसंग के चलते सामाज में उनकी बेइज्जती हो रही थी। इसलिए उन्होंने उसकी हत्या कर दी। DCP यादव के अनुसार, शीबा को ऑटो में लेकर दोनों भाई दिल्ली से कस्बा मुरादनगर गंगनहर तक आए थे। इसके बाद लगभग डेढ़ किलोमीटर तक गंगनहर की पटरी पर पैदल चले। इस दौरान मौका पाकर उन्होंने शीबा की हत्या कर दी।

शीबा का सगा भाई सूफियान मजदूरी करता है, जबकि चचेरा भाई महताब दिल्ली में ऑटो चलाता है। DCP यादव ने बताया कि दोनों के खिलाफ हत्या एवं अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने मृतक के सैंडल, कपड़े, आधार कार्ड और गमछा बरामद किया गया है।

गंगनहर में पानी का बहाव तेज होने के कारण अभी तक लाश बरामद नहीं हो पाई है। इसके लिए NDRF, SDRF और पुलिस की टीमों को लगाया गया है। आसपास के जिलों की पुलिस को भी इसके बारे में सूचित कर दिया गया है।

काशी में काफिले को रोक PM मोदी ने एंबुलेंस को दिया रास्ता: काशी-कन्याकुमारी ट्रेन को हरी झंडी, वाराणसी क्षेत्र को ₹19000 करोड़ की 37 परियोजनाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (17 दिसंबर 2023) को अपने गृहराज्य गुजरात के सूरत के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुँचे। यहाँ उन्होंने स्थानीय सांसद के रूप में ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने काशी तमिल सम्मेलन का उद्घाटन किया और कन्याकुमारी-वाराणसी तमिल संगमम ट्रेन का शुभारंभ किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार की सुबह वाराणसी के बावतपुर हवाई अड्डे पहुँचे। यहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर CM योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर के कहा, “बाबा श्री विश्वनाथ जी की पावन नगरी काशी में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।”

एयरपोर्ट से निकलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहाँ लोगों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने खुद को उनका सेवक बताया और सरकार की योजनाओं को एक-एक व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

PM मोदी ने बताया कि अब तक उनकी सरकार ने पूरे देश में लगभग 4 करोड़ परिवारों को पक्के मकान दिए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अब उनकी सरकार सभी लाभार्थियों से उनका अनुभव पूछ रही है। उन्होंने जनता की संतुष्टि को अपने लिए परीक्षा जैसा बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष्मान कार्ड़ से स्वस्थ हुए लोगों से मिले आशीर्वाद को अपने लिए सबसे बड़ी चीज बताया। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के हाथों से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है उन्हें भी आत्मिक संतोष मिलता है। PM मोदी के मुताबिक, अब बैंकों ने भी ऋण देने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है।

नरेंद्र मोदी ने लोगों से विकसित भारत यात्रा को एक बड़े सपने और संकल्प के तौर पर सोचने और भरत को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होने की अपील की। बता दें कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में वाराणसी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में आए लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

अपने काशी दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘काशी तमिल संगमम’ में भी हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में नरेंद्र मोदी ने बताया कि कन्याकुमारी से वाराणसी के बीच नई ट्रेन चलाई गई है। कार्यक्रम में पीएम मोदी की मौजूदगी में विभिन्न भाषाओं में अनुवादित कई तमिल ग्रंथों का लोकार्पण भी हुआ। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु से कई लोग आए थे।

प्रधानमंत्री के काफिले को देखने के लिए सड़कों पर लोगों का हुजूम नजर आया। खुद पीएम मोदी ने कहा कि उनके परिवार जैसी वाराणसी की जनता का उत्साह देख कर वो गदगद हैं। जिस वक्त उनका काफिला रोड शो कर रहा था, उसी वक्त रास्ते में एक एंबुलेंस आ गया। इसके बाद काफिले को रुकवा करके एंबुलेंस को रास्ता दिया गया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुँचे हैं। अपने इस दौरे में पीएम मोदी काशी तथा उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 19,000 करोड़ रुपए की 37 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन करेंगे।