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AAP ने उतारे 215 उम्मीदवार, मिली 0 सीट, 1% वोट भी नहीं मिला: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की जनता ने अरमानों पर फेरा झाड़ू

भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में जीत दर्ज की है। मध्य प्रदेश में उसने सत्ता वापस हासिल करने में सफलता पाई है तो वहीं राजस्थान और छतीसगढ़ से उसने कॉन्ग्रेस को बाहर कर दिया है। कॉन्ग्रेस भी तेलंगाना जीतने में सफल रही है। लेकिन इन चुनावों में हिस्सा लेने वाली आम आदमी पार्टी की हालत अब भी खराब है।

आम आदमी पार्टी ने इनमें से मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ और राजस्थान में अपने 215 उम्मीदवार उतारे थे। राजस्थान और मध्य प्रदेश में पार्टी मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी जम कर प्रचार किया था। हालाँकि, इन राज्यों के चुनावी नतीजों में AAP (खबर लिखने तक) कहीं नहीं दिख रही है।

राजस्थान में आम आदमी पार्टी ने 88 सीट पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें से एक भी जीत हासिल नहीं कर सका है। राजस्थान में पार्टी का वोट प्रतिशत भी 0.3% रहा है। इसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। कई जगह AAP के उम्मीदवारों से अधिक वोट NOTA (इनमें से कोई नहीं) के विकल्प को मिले हैं।

कमोबेश ऐसी ही हालत AAP की मध्य प्रदेश में भी है। यहाँ AAP ने 70 उम्मीदवार उतारे थे। मध्य प्रदेश में सिंगरौली और दमोह सीट पर इसके उम्मीदवारों की बड़ी चर्चा हुई थी। सिंगरौली में AAP की प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान मेयर रानी अग्रवाल जबकि दमोह से चर्चित टीवी एक्ट्रेस चाहत पांडे को टिकट मिला था। चाहत पांडे के कई वीडियो भी वायरल हुए थे।

चाहत पांडे दमोह में मात्र 11 राउंड की गिनती के बाद 1,418 वोट पा सकी हैं और चौथे स्थान पर रही हैं। चाहत पांडे की सीट पर भाजपा के उम्मीदवार जयंत मलैया 60 हजार वोट पा चुके हैं। रानी अग्रवाल भी अपनी सीट सिंगरौली के मुकाबले में चौथे स्थान पर रही हैं। उन्हें कुल 8,008 वोट मिले हैं। इस सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार राम निवास शाह आगे हैं।

AAP को मध्य प्रदेश के भीतर 0.4% वोट मिला है। यहाँ भी इसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है।

इन दोनों राज्यों के अलावा 90 विधानसभा वाले छत्तीसगढ़ में भी AAP 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। यहाँ भी इसके कोई उम्मीदवार जीतने में नहीं कामयाब हो सके हैं। यहाँ इसके कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। छतीसगढ़ में AAP को लगभग 0.9% वोट मिले हैं।

आम आदमी पार्टी की तीनों राज्यों में इस करारी हार पर शिरोमणि अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि भगवंत मान ने AAP को ₹500 करोड़ की मदद दी फिर भी वह इन चुनावों में एक सीट तक नहीं जीत सके।

AAP या फिर केजरीवाल की तरफ से इन चुनाव नतीजों और उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर अभी कोई ट्वीट या आधिकारिक बयान नहीं आया है।

घी-चावल वाला अक्षत कलश, हल्दी, भगवान राम की तस्वीर… घर-घर पहुँच रहा अयोध्या मंदिर का निमंत्रण

अयोध्या में बन रहे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए तैयारियाँ जोरों पर हैं। अब इसके लिए श्रीराम मंदिर से अक्षत को लोगों के घरों तक पहुँचाया जा रहा है। देश के अलग-अलग शहरों में इसके लिए अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से अक्षत पहुँच रहे हैं। वाराणसी में भी इसी क्रम में अक्षत कलश पहुँचे हैं। इन अक्षत कलशों में पहुँचे अक्षतों को अब 40 क्विंटल चावल और घी के साथ मिश्रित किया जाएगा। इसके पश्चात इन्हें वाराणसी के घर-घर बाँटा जाएगा। यह अक्षत विशेष कलशों में वाराणसी पहुँचे हैं, जिन्हें बाँटने की जिम्मेदारी ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ को दी गई है।

‘विश्व हिन्दू परिषद’ के काशी विभाग के प्रभारियों को पाँच कलश सौंपे गए हैं। जब इनकी मात्र बढ़ा ली जाएगी तब इन्हें हल्दी और प्रभु श्रीराम की एक तस्वीर के साथ वाराणसी के घरों में बाँटा जाएगा। इसके जरिए लोगों को श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में आने का निमन्त्रण दिया जाएगा।

गौरतलब है कि अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी को होना है। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे। इस दिन से मंदिर को आधिकारिक तौर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। अभी मंदिर निर्माण के आखिरी चरण का काम चल रहा है।

इस विषय में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने PTI को दिए वीडियो इंटरव्यू में कहा था कि अयोध्या के भगवान राम के भव्य मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा होगी। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भगवान राम के मंदिर का भूतल 31 दिसंबर, 2023 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। 31 दिसंबर तक भगवान रामलला की जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी, उसका भी अंतिम स्वरूप मिल जाएगा।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने लोगों से अपील की थी कि वे उस दिन अयोध्या न आएँ और अपने घर-गाँव में ही पूजा करें। लोग अपने गाँव में, शहर में, घरों में प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाएँ। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का टीवी पर प्रसारण भी होगा। ट्रस्ट का कहना है कि 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में भारी भीड़ होने की संभावना है, जिससे सुरक्षा और सुविधाओं में दिक्कतें आ सकती हैं।

कद को लेकर प्रियंका गाँधी ने कसा था तंज, MP में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद बोले सिंधिया – ग्वालियर-मालवा ने दे दिया जवाब: पूरे चुनाव में कॉन्ग्रेस के निशाने पर थे ‘महाराज’

मध्य प्रदेश के विधानसभा नतीजों के बाद वहाँ सरकार का भारतीय जनता पार्टी की सरकार का बनना तय है। इस दौरान नतीजों के रुझानों में कॉन्ग्रेस के पिछड़ने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ अपना पुराना हिसाब बराबर किया है।

सिंधिया ने कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी के उनकी लंबाई पर किए तंज का माकूल जवाब दिया है। ग्वालियर-मालवा क्षेत्र में भाजपा के शानदार प्रदर्शन पर एक सवाल का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा, “किसी ने मेरे कद के बारे में बात की थी। ग्वालियर-मालवा के लोगों ने दिखा दिया है कि उनका कद कितना बड़ा है।” दरअसल, बीते महीने दतिया में एक रैली में प्रियंका गाँधी ने कभी उनकी पार्टी में रहे अब प्रतिद्वंद्वी बने सिंधिया पर निशाना साधते हुए उन्हें गद्दार करार दिया था। प्रियंका ने ये भी कहा था कि उन्होंने लोगों के जनादेश के साथ विश्वासघात किया।

प्रियंका ने कहा था, “उनके (भाजपा के) सभी नेता थोड़े अजीब हैं। पहले – हमारे सिंधिया। मैंने उनके साथ यूपी में काम किया है, दरअसल, उनका कद थोड़ा छोटा है लेकिन अहंकार में ‘वाह भाई वाह’ है।” प्रियंका ने ये भी कहा था,”हमारे कार्यकर्ता सिंधिया के पास जाया करते थे और उन्हें बताया करते थे कि कैसी दिक्कतें आती थीं। वे कहते थे कि हम उन्हें महाराज कहते हैं तो सुनवाई होती है। ऐसा नहीं कहते तो बात ही नहीं सुनी जाती।”

यही नहीं, प्रियंका गाँधी सिंधिया के परिवार पर भी तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पारिवारिक परंपरा को ही आगे बढ़ा रहे हैं। गद्दारी बहुत से लोगों ने की, लेकिन सिंधिया ने ग्वालियर और चंबल की जनता से गद्दारी की और सरकार ही गिरा दी। दरअसल, प्रियंका गाँधी ने 1857 के विद्रोह के दौरान सिंधिया शाही परिवार के अंग्रेजों का साथ देने को लेकर ही इसे उनकी परंपरा कहा था। बताते चले कि यह 2020 में सिंधिया के नेतृत्व में राजनीतिक विद्रोह के चलते मध्य प्रदेश में कमल नाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार गिर गई थी।

इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को नरेंद्र मोदी सरकार में राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया। साल 2023 का विधानसभा चुनाव एक तरह से सिंधिया का इम्तिहान था। इसमें उनके ग्वालियर क्षेत्र में प्रभाव पर बीजेपी की नजर थी और चुनावी नतीजे सिंधिया को यहाँ पास दिखा रहे हैं।

एमपी चुनावों में बीजेपी के मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए सिंधिया ने कहा, “मैंने कहा था कि भाजपा जीतेगी। मैं मध्य प्रदेश के मतदाताओं को धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने हमें इतना बड़ा बहुमत दिया। प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व काम आया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का मार्गदर्शन भी काम आया।” इस दौरान सिंधिया ने मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जन-कल्याणकारी योजनाएँ लाने को भी इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएँ हर दरवाजे तक पहुँचीं और पार्टी को जीत दिलाने में मदद मिली।

भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उनके चुनावी अभियान के दौरान कॉन्ग्रेस के नेताओं ने लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा, “मैंने बीते तीन साल में मुझ पर लगाए गए सभी आरोपों और बुरी बातों को स्वीकार कर लिया। मैंने कोई जवाब नहीं दिया।”

दरअसल एग्जिट पोल को धत्ता साबित करते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों 2023 के नतीजों में 230 सीटों में से भाजपा 43 सीटें जीत चुकी थी और 122 सीट पर आगे चल रही है। पार्टी को 165 सीट मिलने की संभावना है। वहीं कॉन्ग्रेस 64 सीटों पर सिमट सकती है तो वहीं अन्य को 1 सीट मिलती दिख रही है।

EVM पर मंथन करना जरूरी, जरूरत हो तो इसे हटाया जाए: 3 राज्यों के नतीजे देख कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को सताई लोकतंत्र की चिंता, तेलंगाना पर चुप्पी

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों के रुझानों में करारी हार के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर सवाल खड़े किए हैं। उत्तर प्रदेश के कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने रविवार (3 दिसंबर 2023) को हार का ठीकरा EVM के माथे पर फोड़ते हुए इस पर आत्ममंथन को जरूरी बताया। हालाँकि इसी प्रकार के मतदान के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी तेलंगाना में पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज करती नजर आ रही है। लेकिन इस पर अंशु अवस्थी ने कुछ नहीं बोला।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने यह बयान 44 सेकेंड का एक वीडियो जारी करके दिया है। उन्होंने कहा, “हम बार-बार ये कह रहे हैं कि EVM पर चिंता करने की जरूरत है। मंथन करने की जरूरत है। देश के जनमानस में यह बात है कि EVM में फेर-फेर होता है। हम कहीं भी जीतें या हारें लेकिन EVM पर चिंतन होना चाहिए।”

बकौल अंशू अवस्थी लोगों का EVM पर नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र में भरोसा होना जरूरी है। कॉन्ग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वो अपनी चिंता चुनाव आयोग को बता चुके हैं। अंशू अवस्थी ने यह भी कहा कि जरूरत हो तो EVM को हटाया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले भी विपक्ष के कई नेता ईवीएम पर सवाल उठा चुके हैं। 2 महीने पहले कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी EVM के बदले बैलेट चुनाव कराए जाने की माँग की थी।

EVM मशीन में हेराफेरी और छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए मनीष तिवारी ने कहा था कि देश के लोकतंत्र को तकनीकी पर नहीं छोड़ा जा सकता है। वोटिंग के बाद जारी हुए एक्जिट पोल पर भी कॉन्ग्रेस ने तब सवाल उठाए थे। तब उसमें मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते दिखाया गया था।

बताते चलें कि रविवार (3 दिसंबर 2023) को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए पड़े वोटों की गिनती हुई। अब तक मिले रुझानों के मुताबिक भाजपा ने न सिर्फ मध्य प्रदेश में अपना मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा बल्कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी शासन कर रही कॉन्ग्रेस को हरा दिया है। तेलंगाना चुनाव के रुझानों में कॉन्ग्रेस स्पष्ट बहुमत की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है।

जिस चुनाव को बताया था ‘भारत और पाकिस्तान का मैच’, उसे रोहतक के योगी ने जीता: बाबा बालकनाथ के तेज से तिजारा में बुझ गया कॉन्ग्रेस का इमरान

राजस्थान के तिजारा से भाजपा के महंत बालकनाथ योगी ने जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी इमरान खान को 6173 वोटों से हरा दिया है। उन्हें 20 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद 1,10,209 वोट मिले। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी इमरान खान को 1,04,036 वोटों से संतोष करना पड़ा, जो दूसरे स्थान पर रहे। महंत बालकनाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं। बालकनाथ यादव समाज से आते हैं और हिन्दू धर्म को लेकर खुल कर आवाज़ उठाते रहे हैं।

महंत बालकनाथ योगी के नामांकन के दौरान सीएम योगी भी पहुँचे थे। बाबा बालकनाथ को ‘राजस्थान का योगी’ भी कहा जाता है। वो फ़िलहाल अलवर से भी लोकसभा सांसद हैं। चुनाव से पहले उन्हें राजस्थान में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष का पद भी दिया गया। वो भी भगवा वस्त्रों में ही रहते हैं। उनका जन्म 16 अप्रैल, 1984 को राजस्थान के अलवर स्थित कोहराना गाँव में हुआ था। महंत खेतानाथ के पास उन्हें 6 वर्ष की उम्र में ही अध्यात्म की शिक्षा के लिए भेज दिया गया था।

इसके बाद वो महंत चाँदनाथ के पास पहुँचे और उनसे दीक्षा ली। उनमें बालक जैसी प्रवृत्तियाँ देख कर उन्हें चाँदनाथ ने ही बालकनाथ नाम दिया। साथ ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी चुना। इस तरह वो हरियाणा के रोहतक स्थित मस्तनाथ मठ (अस्थल बाहर) के महंत बने। साथ ही वो मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। महंत बालकनाथ मात्र 40 वर्ष के हैं, यानी राजनीति में युवा हैं। उनके गुरु चाँदनाथ भी अलवर से सांसद रहे थे। बालकनाथ ने इमरान खान को 2019 के लोकसभा चुनाव में भी हराया था।

जीत के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं की मेहनत को श्रेय देते हुए कहा कि अलवर की जनता का ऋण वो कभी नहीं चुका सकते। उन्होंने कहा कि चुनाव के भीतर देश विरोधी ताकतें जुटी थीं, कॉन्ग्रेस की मानसिकता भी वही हो चुकी है जिसके लोग मंच पर खड़े होकर सनातन धर्म को गाली देते हैं। उन्होंने राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति और महिलाओं-किसानों से धोखे का आरोप लगाया। CM बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी ने तिजारा की जनता की सेवा का अवसर दिया है।

उन्होंने विकास, प्रशासनिक व्यवस्था और कानून का राज़ स्थापित किए जाने को अगली भाजपा सरकार का मुख्य फोकस करार दिया। राजस्थान में बहुमत के लिए 100 सीटें चाहिए, जिसमें से भाजपा 115 सीटें जीतती हुई दिख रही हैं, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी 69 सीटों पर आगे है। महंत बालकनाथ योगी को लोग मुख्यमंत्री के पद का भी दावेदार बता रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने इससे इनकार किया है। वसुंधरा राजे, दीया कुमारी और गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम भी दावेदारों में है, लेकिन राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनियाँ हार गए हैं।

‘लुंगी पहनी थी इसलिए रेस्टोरेंट में घुसने तक नहीं दिया’: One8Commune में ‘तमिलों के अपमान’ का आरोप, फैन को लौटना पड़ा भूखे पेट

क्रिकेटर विराट कोहली की रेस्टोरेंट चेन One8 Commune पर एकबार फिर भेदभाव करने का आरोप लगा है। ये आरोप तमिलनाडु के एक शख्स ने लगाया है। व्यक्ति का कहना है कि उन्हें मुंबई के जुहू में स्थित One8commune रेस्टोरेंट में लुंगी पहन कर प्रवेश नहीं करने दिया गया।

बताते चलें कि इससे पहले भी साल 2021 में कोहली के रेस्टोरेंट पर LGBTQIA+ समुदाय के साथ भेदभाव करने का आरोप लग चुका है। अब सोशल मीडिया पर रेस्टोरेंट पर भेदभाव करने का आरोप लगाया गया है। शख्स ने इस पोस्ट पर विराट कोहली को भी टैग किया है।

शख्स का कहना है कि रेस्टोरेंट में महज इसलिए एंट्री नहीं दी गई क्योंकि उन्होंने शर्ट के साथ पारंपरिक पोशाक लुंगी (वेष्टी) पहनी थी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु से मुंबई वो खास जुहू स्थित One8 Commune रेस्टोरेंट के लिए आए थे, लेकिन यहाँ उनके साथ हुए भेदभाव से वो आहत और निराश हैं।

उन्होंने कहा कि वो विराट कोहली के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, इसलिए जुहू के जेडब्ल्यू मैरियट होटेल में चेक इन करने के तुरंत बाद वो बेहद उत्सुक होकर उस रेस्टोरेंट में पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने एक बड़े मशहूर ब्रांड रामराज कॉटन की शर्ट और लुंगी पहन रखी थी।

उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट के मैनेजमेंट ने शर्ट लुंगी में उन्हें देखकर उन्हें रेस्टोरेंट के अंदर ही नहीं घुसने दिया। मैनेजमेंट ने कहा कि उनकी पोशाक रेस्टोरेंट के ड्रेस कोड के मुताबिक नहीं है, इसलिए वो अंदर नहीं जा सकते। इसके बाद वो निराश होकर अपने होटल वापस आ गए।

विराट के इस प्रशंसक ने सोशल मीडिया पर कहा है कि उन्हें संदेह है कि विराट कोहली उनकी इस पोस्ट को देखने के बाद रेस्टोरेंट मैनेजमेंट के खिलाफ एक्शन लेंगे, लेकिन वो उम्मीद करते हैं कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ न हो।

उन्होंने आगे कहा, “मैं तमिलनाडु की संस्कृति की सम्मानित पोशाक पहनकर वहाँ गया था। अगर उन्होंने मुझे 3/4 लेंथ की रंग-बिरंगी लुंगी या कोई कैजुअल ड्रेस पहने पर टोका होता तो और अंदर नहीं जाने दिया होता तो ईमानदारी से मैं इसे स्वीकार करता।”

वो कहते हैं कि वो इस वीडियो को बनाकर इसलिए पोस्ट कर रहे हैं क्योंकि रेस्टोरेंट ने तमिलों और उनकी पूरी संस्कृति का अपमान किया। उन्होंने कहा, “विराट कोहली के रेस्टोरेंट में उत्सुकता से जाने का ईनाम मुझको यही मिला कि मुझे वहाँ से भूखे पेट लौटना पड़ा।”

झारखंड के रोजगार मंत्री के बेटे को मिली कोर्ट में चपरासी की नौकरी, भतीजा का नाम भी है लिस्ट में

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में श्रम और रोजगार मंत्री सत्यानन्द भोक्ता के बेटे मुकेश भोक्ता को एक कोर्ट में चपरासी की नौकरी मिली है। उनके भतीजे रामदेव भोक्ता का नाम अभी इसी नौकरी के लिए वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।

जानकारी के अनुसार, झारखंड के चतरा सिविल कोर्ट में चपरासी, कोषागार प्रबन्धक, दफ्तरी और चौकीदार जैसे पदों के लिए अगस्त 2023 में भर्ती निकाली गई थी। झारखंड सरकार में मंत्री सत्यानन्द भोक्ता के पुत्र मुकेश भोक्ता और भतीजे रामदेव भोक्ता ने भी इसमें आवेदन किया था।

इन पदों के लिए आवदेन ऑफलाइन तरीके से किए गए थे और अभ्यर्थियों को अपना आवेदन प्रभारी न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय को भेजना था। इसके पश्चात इसमें से अभ्यर्थियों का साक्षात्कार किया गया और सफल अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तैयार की गई। यह साक्षात्कार जिला चयन समिति के माध्यम से किए गए थे।

अब इसकी अंतिम सूची में हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री सत्यानंद भोक्ता के बेटे मुकेश भोक्ता और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की सूची में उनके भतीजे रामदेव भोक्ता का नाम है। मुकेश भोक्ता का नाम इस सूची में 13वें स्थान पर है। भतीजे रामदेव भोक्ता का नाम प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की सूची में 11वें स्थान पर है।

चयनित अभ्यर्थियों की सूची में मुकेश भोक्ता का नाम
चयनित अभ्यर्थियों की सूची में मुकेश भोक्ता का नाम

मुकेश भोक्ता के चपरासी की नौकरी लेने पर अब कई लोग प्रश्न भी उठा रहे हैं। हालाँकि, मुकेश का कहना है कि उनके पिता भले ही राजनीति करते हैं लेकिन वह यह नौकरी करेंगे और उनके पिता भी उन्हें यह करने से रोक नहीं सकेंगे।

मुकेश का कहना है कि उनके पिता मंत्री हैं क्योंकि उन्हें जनता ने चुना है और वह चपरासी की नौकरी इसलिए करेंगे क्योंकि उन्हें यह मिली है। मुकेश के पिता सत्यानन्द भोक्ता चतरा सीट से ही राजद के विधायक हैं और हेमंत सोरेन की गठबंधन सरकार में मंत्री हैं। सत्यानंद पहले भाजपा में थे लेकिन बाद में वह दल-बदल कर राजद में आ गए थे।

हिन्दू महिला का बच्चा पैदा होते ही बेचा मुस्लिम नेता को: ‘डॉक्टर’ अकरम और हफीजुर्रहमान गिरफ्तार, अस्पताल पर लगा ताला

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक निजी अस्पताल के अंदर एक नवजात हिन्दू बच्चे को मुस्लिम के हाथों बेचे जाने का मामला सामने आया है। 26 नवंबर 2023 को बच्चे की माँ की तहरीर पर पुलिस ने अकरम जमाल और हफीजुर्रहमान नाम के 2 ‘झोलाछाप’ डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया था। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने पीड़िता के बच्चे को निसार नाम के सभासद को बेच दिया था। अपनी इस करतूत को छिपाने के लिए दोनों ने पीड़िता को बताया कि उनका बच्चा जन्म के 24 घंटे बाद मर गया। पुलिस ने दोनों आरोपित डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच के दौरान अकरम जमाल का अस्पताल अवैध निकला जिसे सील कर दिया गया है।

यह मामला बलरामपुर जिले के थानाक्षेत्र पचपेड़वा का है। यहाँ की रहने वाली पुष्पा देवी ने 26 नवंबर 2023 को पुलिस में FIR दर्ज करवाई। इस FIR में उन्होंने बताया कि 1 माह पहले जब वो गर्भवती थीं तब डिलीवरी के लिए पचपेड़वा स्थित बलरामपुर मिशन अस्पताल गई थीं। यहाँ पुष्पा की मुलाक़ात डॉ अकरम जमाल से हुई। अकरम जमाल ने पड़ोसी जिले सिद्धार्थनगर के बढ़नी इलाके में रूबी नर्सिंग होम चलाने वाले डॉ हफीजुर्रहमान को बुला कर पीड़िता का बच्चा ऑपरेशन से पैदा करवाया। अस्पताल में पीड़िता लगभग 1 हफ्ते रही।

पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान आरोपितों ने उनके बच्चे को किसी के हाथों बेच दिया था। पुष्पा के अनुसार जब उन्होंने अपना बच्चा माँगा तो वो लोग टाल मटोल करने लगे। ज्यादा पूछताछ की तो दोनों डॉक्टरों ने पुष्पा से बताया कि उनका नवजात बच्चा 24 घंटे में मर गया था जिसको दफना दिया गया है। पुष्पा ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की। जिसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 311 के तहत केस को दर्ज करके डॉ हफीजुर्रहमान और अकरम जमाल को गिरफ्तार कर लिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान बच्चा बढ़नी के वार्ड नंबर 2 सभासद निसार के पास बरामद हुआ। बच्चे को उसकी माँ को सुपुर्द कर दिया गया है। मामले में अपना नाम सामने आते ही बच्चा खरीदने वाला निसार फरार हो कर नेपाल चला गया। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसको गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपित के रिश्तेदार नेपाल के कृष्णानगर इलाके में रहते हैं।

निसार लोगों को बैंकों का लोन आदि दिलाने का काम करता है। पुलिस ने पूछताछ के लिए एक बैंक अधिकारी को भी बुलवाया है। वहीं मामला संज्ञान में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने डॉ अकरम जमाल के अस्पताल की जाँच की। जाँच में बलरामपुर मिशन अस्पताल अवैध तौर पर चलता पाया गया। बुधवार (29 नवंबर 2023) को प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया है।

बहुतेरे MP निकम्मे, फिर भी 2024 में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ सकती है BJP: जानिए कैसे और गहरा हुआ मोदी मैजिक

बिहार का एक संसदीय क्षेत्र है- मधुबनी। BJP के अशोक यादव यहाँ से लोकसभा सांसद हैं। पहले उनके पिता हुकुमदेव नारायण यादव सांसद हुआ करते थे। जीवन भर हुकुमदेव अपनी गरीब पृष्ठभूमि की मार्केटिंग करते रहे और उनका परिवार समृद्ध होता रहा। लेकिन बाप-बेटे मिलकर भी मधुबनी शहर तक को नरकीय हालात से बाहर न निकाल सके।

मधुबनी से ही सटा है- दरभंगा। यहाँ से बीजेपी के सांसद सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले गोपाल जी ठाकुर हैं। एक बार विधायक बनने के बाद ठाकुर राजनीतिक बियाबान में चले गए थे। कीर्ति आजाद की बगावत ने उनके लिए मौका पैदा किया और वे संसद पहुँच गए। पर दरभंगा के दिन नहीं बदले। पार्टी के भीतर के ही लोग कहते हैं कि कितना भी खा लें उनका (ठाकुर जी)पेट नहीं भरता। पिछले 5 साल की उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्हें जो भी गर्दन मिली, उसमें उन्होंने मखान की माला को लाद दिया।

मधुबनी जिले का ही एक संसदीय क्षेत्र है- झंझारपुर। यहाँ से जदयू के सांसद हैं- रामप्रीत मंडल। यह दूसरी बात है कि मंडल की ‘अति सक्रियता’ के कारण झंझारपुर के लोगों को भी अपने सांसद का नाम याद नहीं रहता है।

2019 में ये सभी मोदी के नाम पर जीते। लेकिन जीत के बाद इन्होंने अपने कर्मों से ‘अकर्मण्यता’ की नई गाथा लिखने का काम किया। ऐसा करने वाले केवल यही तीन सांसद नहीं हैं। ऐसा भी नहीं है कि ऐसे सासंद केवल बीजेपी में ही हैं। निशिकांत दुबे जैसे बहुत कम नाम हैं जो अपने संसदीय क्षेत्र में न केवल विकास योजनाएँ लेकर गए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि वह जमीन पर समय से उतर भी जाए।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन सांसदों की अकर्मण्यता 2024 के आम चुनावों में बीजेपी को भारी पड़ने वाली है। इसका जवाब है- नहीं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावी नतीजे बताते हैं कि इस अकर्मण्यता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू भारी है। यह जादू लगातार मजबूत होता जा रहा है। यह जादू बीजेपी को 2024 में 2019 से भी बड़ा जनादेश दे सकती है।

PM मोदी के इस जादू का साल दर साल मजबूत होने का कारण वे लोककल्याणकारी योजनाएँ हैं, जिनका फायदा आम लोगों को सीधे बैंक खाते या घर की रसोई में दिखता है। साथ ही इस समय बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जो चुनाव लड़ना भी जानती है और उसे जीतना भी।

2014 के आम चुनावों के बाद से बीजेपी की इस बात को लेकर लगातार प्रशंसा होती रही है कि उसकी मशीनरी हमेशा चुनाव लड़ने को तैयार रहती है। एक चुनाव जीतने के बाद उसके नेता जश्न मनाने को ठहरते नहीं, बल्कि दूसरे मोर्चे पर निकल पड़ते हैं। प्रशंसा इस बात को लेकर भी होती है कि स्थानीय चुनावों तक में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पूरी ताकत झोंक देता है और नतीजों की चिंता किए बिना चुनाव को किसी युद्ध की तरह लड़ता है।

लेकिन इन प्रशंसाओं के बीच बीजेपी के उन साहसिक फैसलों का जिक्र कम ही होता है, जिसे लेने में किसी भी राजनीतिक दल के साँस फूल जाए। मसलन, 2018 के दिल्ली नगर निगम चुनावों में पार्टी ने सभी पार्षदों का टिकट काट दिया था। इन पार्षदों के पारिवारिक सदस्यों को भी टिकट देने से इनकार कर दिया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के दौरान सभी सांसदों के टिकट काट दिए थे। इनमें इस राज्य के पार्टी के सबसे बड़े नेता और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह के सांसद बेटे भी शामिल थे। 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव के समय पार्टी ने कई हैवीवेट सहित 44 विधायकों को बेटिकट कर दिया था। इस बार मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में न केवल सांसदों, बल्कि मोदी मंत्रिमंडल के भी कुछ सदस्यों को उतारा गया।

साहसिक फैसले लेने वाली आज की बीजेपी अपने ही भूलों से सीखती भी दिखती है। सितंबर 2023 में ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि कैसे तेलंगाना में लगातार आगे बढ़ रही बीजेपी के अचानक से पाँव उखड़ने लगे हैं और उसकी जगह को कॉन्ग्रेस भर रही है। 3 दिसंबर 2023 को आए तेलंगाना विधानसभा चुनाव के नतीजे भी बताते हैं कि बीजेपी ने इस राज्य में कई बड़ी रणनीतिक भूलें की। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी नेतृत्व को भी इस भूल का एहसास शायद हो चुका था। यही कारण है कि जिन परिस्थितियों के कारण उसने तेलंगाना से बंदी संजय को हटा लिया था, ठीक उसी तरह की परिस्थितियाँ तमिलनाडु में बनने के बाद भी के अन्नामलई को नहीं हटाया।

पर चुनाव केवल फैसलों और रणनीतियों से ही नहीं जीते जाते। सामान्य वोटरों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए जरूरी होता है- उम्मीद। अच्छे दिनों की उम्मीद। यह उम्मीद चेहरा पैदा करता है। वो योजनाएँ पैदा करती हैं जिसका लाभ आम लोगों तक सीधे पहुँचता है और वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उससे बदलाव महसूस करते हैं। भविष्य में और बेहतरी के सपने देखते हैं।

बीजेपी ने उम्मीद जगाने वाला चेहरा 13 सितंबर 2013 को ही खोज लिया था, जब उसने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। मोदी ने 2014 का आम चुनाव सामान्य लोगों के मन ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की उम्मीद जगाकर जीता था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अच्छे दिन लाने वाली योजनाओं की डिलिवरी की और इसका नतीजा 2019 के आम चुनावों में दिखा जब बीजेपी ने अकेले 303 सीटें जीती थी।

गरीबों को बैंकिंग सिस्टम में शामिल करने के लिए मोदी सरकार ‘जन धन योजना’ लेकर आई। जीरो बैलेंस पर यह अकाउंट खुलता है। चेक बुक, पासबुक, दुर्घटना बीमा के अलावा ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी की सुविधा मिलती है। ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के कारण जनधन खाता धारक बैलेंस नहीं रहने पर भी अपने अकाउंट से 10 हजार रुपए निकाल सकते हैं। इस योजना से अब तक करीब 51 करोड़ लोग लाभ उठा चुके हैं। कोविड संकट जैसे समय में यह योजना गरीबों तक सीधे पैसे पहुँचाने के काम भी आई।

कोविड महामारी के दौरान फ्री राशन यानी ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ केंद्र सरकार ने शुरू की। इसे हाल ही में 2028 तक बढ़ाने का फैसला किया गया है। 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने इस योजना का लाभ मिलता है। इसके अलावा गरीबों की रसोई में गैस सिलिंडर पहुँचाने के लिए ‘उज्ज्वला योजना’ लाई गई। इस योजना में बीपीएल कार्ड वालों को मु्फ्त गैस कनेक्शन मिलता है। सब्सिडी पर एक साल में 12 गैस सिलिंडर मिलते हैं। सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जमा होती है। 1 मार्च 2023 तक उज्ज्वला योजना का 9.60 करोड़ लोगों को लाभ मिल चुका है। अगले तीन साल में इस योजना के तहत 75 लाख नए कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य है।

देश के छोटे, लघु और सीमांत किसानों को केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत सालाना 6 हजार रुपए की आर्थिक मदद देती है। करीब आठ करोड़ किसानों को इसका सीधा लाभ मिलता है। इसी तरह श्रमिकों के लिए ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ लाई गई है। 13000 करोड़ रुपए इस पर खर्च होंगे।

इसके अलावा 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हो या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना। घर-घर बिजली और पानी पहुँचाने की योजना हो या फिर गरीबों के इलाज के लिए लाई गई आयुष्मान भारत। या फिर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना… बीते 9 साल में मोदी सरकार ने जितनी भी जनकल्याणकारी योजनाएँ शुरू की हैं, उसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल रहा।

2014 में उम्मीद जगाकर आए मोदी को साल दर साल मजबूत बनाने वाली ये योजनाएँ ही हैं, क्योंकि इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिख रहा है। उनका जीवन सरल हो रहा है। वे मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इन योजनाओं के बलबूते मोदी ने एक ऐसा वोट बैंक तैयार किया है, जिसके सामने जातीय/क्षेत्रीय/ मजहबी समीकरण दम तोड़ देते हैं। साल दर साल इन योजनाओं का असर बढ़ता जा रहा है। इसके कारण मोदी का जादू भी और असरदार होते जा रहा है। ऐसे में जब लोग वोट डालने जाते हैं तो वे अकमर्णय सांसदों को भूल जाते हैं, क्योंकि उनके सामने मोदी का चेहरा रहता है। वे उन राज्यों में भी बीजेपी को सत्ता दे देते हैं, जहाँ राजनीतिक पंडित उसे मुश्किल मुकाबले में बता रहे होते हैं या फिर बीजेपी के लिए संभावना ही नहीं देखते।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के नतीजे भी उम्मीदों का ही जनादेश हैं। ये जनादेश जिस तरह से आया है वह यह भी बताता है कि 2024 के आम चुनावों से कुछ महीने पहले मतदाताओं पर PM मोदी का प्रभाव अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है।

सनातन धर्म का अपमान कॉन्ग्रेस को ले डूबा… अपनी ही पार्टी पर बरसे आचार्य प्रमोद कृष्णम, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद बोले – सनातन को गाली देने का नतीजा

देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। रविवार (3 दिसंबर, 2023) को चार राज्यों के चुनाव नतीजों जारी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के रुझानों की मानें तो तीनों ही राज्यों में भाजपा सत्ता में आ रही है। इन चुनाव परिणामों के साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी को याद दिलाई जा रही है कि कैसे पार्टी ने सनातन धर्म का अपमान किया था, सनातन का अपमान करने वालों का जम कर साथ दिया।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस के पिछड़ने पर पार्टी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “सनातन (धर्म) का विरोध करने से पार्टी डूब गई है। यह सनातन (धर्म) का विरोध करने का अभिशाप है।”

उन्होंने कहा, “भारत भावनाओं का देश है और सनातन का विरोध हमें ले डूबा। जातिवादी राजनीति को इस देश ने कभी स्वीकार नहीं किया है। 6 सितंबर, 1990 का राजीव गाँधी जी का भाषण हैं संसद में वो सुन लीजिएगा। देश अगर जातिवादी होता तो विश्वनाथ प्रताप सिंह को गाँव-गाँव पूजा जाता। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी जब मंडल लाए थे उनसे बड़ा कोई जातिवाद का कार्ड खेलने वाला नहीं था और न हुआ, लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह जी की हालत इस देश में क्या हुई ये सबके सामने है। इसीलिए, जातिवादी राजनीति और सनातन का विरोध ये हमें ले डूबे।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है ये कॉन्ग्रेस की हार नहीं है बल्कि वामपंथ की हार है। कुछ दिनों से कॉन्ग्रेस में कुछ ऐसे नेता घुस आए थे और घुस आए हैं और उनका बड़ा प्रभुत्व हैं। कॉन्ग्रेस के सभी फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका है। और वो कुछ नेता कॉन्ग्रेस को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर वामपंथ के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं और ले जा रहे हैं। जो कॉन्ग्रेस पार्टी महात्मा गाँधी के रास्ते पर चलकर यहाँ तक आई है।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा, “महात्मा गाँधी जी के सभा की शुरुआत रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम से हुई थी। आज उस कॉन्ग्रेस को सनातन के विरोधी पार्टी के रूप में देखा जा रहा है। ये दुर्भाग्य है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अगर ऐसे नेताओं को नहीं निकाला तो पार्टी की हालत जल्द ही AIMIM जैसी हो जाएगी। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस को महात्मा गाँधी, पंडित नेहरू, इंदिरा गाँधी राजीव गाँधी की कॉन्ग्रेस रहने दिया जाए। पार्टी को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर मार्क्स के रास्ते पर ले जाने वाले जो नेता है। इनको बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।” आचार्य प्रमोद ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की हार पर कहा, “इस हार का पूरा विश्लेषण होगा। फिलहाल तो इन राज्यों के पार्टी प्रभारियों को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। अगर उनमें जरा सभी शर्म हो। तो खुद ऐसा करना चाहिए।”

वहीं पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने भी सनातन धर्म का विरोध करने वालों पर कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट किया, “सनातन धर्म को गालियाँ देने वालों का बुरा नतीजा भुगतना पक्का था। प्रचंड जीत के लिए भाजपा को बहुत-बहुत बधाई। प्रधानमंत्री के अद्भुत नेतृत्व का एक और प्रमाण नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह और जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर के शानदार काम का नतीजा है ये चुनाव परिणाम।”