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BPSC से बहाल हुए टीचर, स्कूल से उठाकर करवा दी शादी: बिहार में बवाल के बाद ‘वर-वधू’ पुलिस कस्टडी में, पकड़ौआ विवाह की तस्वीर वायरल

बिहार में एक शिक्षक का पकड़ौआ विवाह कराने की घटना सामने आई है। शिक्षक को स्कूल से ही उठा लिया गया था। अपहरण की शिकायत और आक्रोशित लोगों के बवाल के बाद पुलिस ने लड़का-लड़की को कस्टडी में ले लिया है। दोनों की शादी की तस्वीर भी वायरल है।

घटना वैशाली जिले की है। हाल ही में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर शिक्षक बने गौतम कुमार को बुधवार (29 नवंबर 2023) को स्कूल से अगवा कर लिया गया ​था। गौतम पातेपुर के रेपुरा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षक हैं। वे पातेपुर थाना क्षेत्र के ही महया मालपुर गाँव के रहने वाले हैं।

शिक्षक को अगवा किए जाने की बात सामने आने के बाद आक्रोशित लोगों ने ताजपुर-हाजीपुर स्टेट हाइवे जाम कर दिया। इसके कुछ बाद पातेपुर पुलिस ने शिक्षक गौतम कुमार को महनार थाना क्षेत्र के नारायणपुर डेढ़पुरा गाँव से बरामद किया। साथ में उनकी नई नवेली दुल्हन भी थी। इस मामले में पुलिस ने एक शख्स को हिरासत में भी लिया है।

गौतम कुमार बुधवार की दोपहर बच्चों को पढ़ा रहे थे। तभी गाँव के ही राजेश राय, डब्लू राय, भूषण राय, विनोद राय, प्रमोद राय स्कूल पहुँचे और पिस्टल के बल पर धमकाया और बोलेरो में बैठाकर जबरन अपने साथ ले गए। स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य और गौतम कुमार के दादा ने पातेपुर थाने में अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई। शिक्षक के अपहरण से गुस्साए परिवारवालों और ग्रामीणों ने एसएच-49 पर यातायात रोक दिया।

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बिहार में अगवा शिक्षक के पकड़ौआ शादी की तस्वीर वायरल (फोटो साभार: आज तक)

पुलिस ने कुछ घंटों में अगवा शिक्षक को उनकी पत्नी के साथ बरामद कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक राजेश राय की बेटी से शिक्षक गौतम की पकड़ौआ शादी कराई गई है। शादी लड़की के चाचा के ससुराल नारायणपुर डेढ़पुरा में हुई। अब इस मामले में लड़का और लड़की के परिवारों के बीच आपसी समझौते की बातें भी सामने आ रही है।

पातेपुर थाना के प्रभारी हसन सरदार ने बताया कि 164 के तहत शिक्षक का बयान कोर्ट में दर्ज करवाया जाएगा। कोर्ट में दिए बयान के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने पकड़ौआ विवाह से जुड़े एक मामले के सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी महिला की माँग में जबरदस्ती सिन्दूर लगाना या लगवाना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शादी नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह तब तक वैध नहीं है, जब तक कि यह स्वैच्छिक न हो। इसमें ‘सप्तपदी’ (अग्नि के सात फेरे) की रस्म निभाना जरूरी है।

PM मोदी के रंग में रंगा दुबई, हाथों में तिरंगा लिए भारतीय लगा रहे थे ‘फिर से मोदी सरकार’ के नारे: COP-28 में शिरकत करेंगे प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी COP-28 के ‘विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार (30 नवंबर) रात दुबई पहुँचे। यहाँ भारतीय प्रवासियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सामने आई वीडियो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी के दुबई पहुँचने से भारतीय इतना खुश हुए कि उन्होंने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए।

समाचार एजेंसी एएनआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पीएम मोदी के स्वागत का वीडियो शेयर किया हुआ है। इस वीडियो में देख सकते हैं कि प्रवासी भारतीय झूमते गाते- “मोदी-मोदी, अब की बार मोदी सरकार और वंदे मातरम” जैसे नारे लगा रहे हैं।

प्रवासी भारतीयों में से एक ने पीएम मोदी से मुलाकात पर खुशी जताई और कहा, “मैं 20 साल से यूएई में रह रहा हूँ, लेकिन आज ऐसा लगा जैसे मेरा कोई अपना इस देश में आया हो… जो पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन करता है, वह भारत का हीरा है।” एक अन्य सदस्य ने कहा, “हम पीएम मोदी को यहाँ देखकर बहुत खुश हैं। दुनिया को पीएम मोदी जैसे नेता की जरूरत है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई में ऐसा स्वागत देखने के बाद भारतीय प्रवासियों को खुशी जाहिर की। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकॉउंट पर लिखा, “दुबई में भारतीय समुदाय के गर्मजोशी से स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हूँ। उनका समर्थन और उत्साह हमारी जीवंत संस्कृति और मजबूत संबंधों का प्रमाण है।” इसके साथ उन्होंने भारतीयों के साथ कुछ तस्वीरें भी साझा की। इसमें उनका स्वागत और पीएम मोदी अभिवादन करते नजर आ रहे हैं।

क्या है COP-28?

बता दें कि COP-28 की फुल फॉर्म क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस है। यह समित उत्सर्जन को कम करने और मौसम संबंधी घटनाओं से निपटने में विकासशील देशों का समर्थन करने पर केंद्रित है। यह जलवायु को लेकर UN की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज की 28वीं बैठक का हिस्सा है, इसलिए इसे COP 28 का नाम दिया गया है। इस समित में शामिल होने के लिए UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने निमंत्रण भेजा था।

जिस देश के राजा कहलाते हैं ‘राम’, वहाँ भी बसी है एक ‘अयोध्या’; भक्त हनुमान को भी समर्पित है एक शहर

भारत की अयोध्या से करीब 3500 किलोमीटर दूर है, अयुथ्या (Ayutthaya)। इसे थाईलैंड की अयोध्या कहते हैं। थाईलैंड वह देश है, जिसके राजा आज भी ‘राम’ की उपाधि धारण करते हैं।

अयुथ्या थाइलैंड के स्वर्णभूमि एयरपोर्ट से करीब 93 किमी दूर है। इस एयरपोर्ट पर समुद्र मंथन की प्रतिकृति बनी है। इससे ही सटा एक और शहर है, लोकमुरी। यह शहर राम भक्त हनुमान को समर्पित है। यहाँ वानरों की पूजा की जाती है। थाईलैंड की 95 फीसदी जनसंख्या बौद्ध है। लेकिन विष्णु, गणेश, त्रिदेव और इंद्र को पूजते हैं। इस देश की भाषा का भी संस्कृत से रिश्ता है।

कहानी ‘अयुथ्या’ की

अयुथ्या शहर सियामी साम्राज्य की दूसरी राजधानी थी। इस साम्राज्य की पहली राजधानी सुखोताई थी। इस ऐतिहासिक शहर को 1350 में बसाया गया था। ये साम्राज्य 14वीं से 18वीं शताब्दी तक फला-फूला, क्योंकि ये एक ऐसे द्वीप पर बना हुआ था जिसके चारों तरफ तीन नदियाँ चाऊफ्रेया, पासक और लोकमुरी थी। ये समुंदर को सीधे इस शहर से जोड़ती थीं। इस तरह की भौगोलिक स्थिति के चलते ये दुश्मन के हमले और बाढ़ के खतरे सुरक्षित था।

इस दौरान रणनीतिक नजरिए से बेहद सुरक्षित यह शहर दुनिया के सबसे बड़ा महानगरीय शहर क्षेत्र होने के साथ ही वैश्विक कूटनीति और वाणिज्य का केंद्र बन गया। आज भी अयुथ्या ऐतिहासिक पार्क में इस पुराने शहर के खंडहर हो चुके हिस्से इसकी भव्यता की गाथा कहते नजर आते है। इसकी स्थापना राजा रामतिबोदी प्रथम ने की थी।

1350 में सिंहासन पर बैठने से पहले उन्हें प्रिंस यू थोंग (गोल्डन क्रैडल) के तौर पर जाना जाता था। उथोंग के बारे में कई बातें कही जाती हैं। इसमें उनके मंगराई का वंशज होना भी शामिल है। एक प्रसिद्ध किंवदंती में कहा गया है कि रामतिबोदी एक चीनी थे जो चीन से आए थे। कई ऐतिहासिक दस्तावेज उन्हें कंबोडिया के ख्मेर वंश का मानते हैं। ख्मेर कंबुज कंबोडिया का ही प्राचीन नाम है।

थाइलैंड पर ख्मेर वंश ने सन 850 में कब्जा कर लिया था, लेकिन 1767 में बर्मा की सेना ने इसे तबाह कर यहाँ के निवासियों को शहर छोड़ने को मजबूर कर दिया था। बर्मीज ने यहाँ 100 साल तक राज किया। इसका असर अब भी शहर पर दिखता है। हालाँकि इस शहर का पुनर्निर्माण उसी जगह पर कभी नहीं किया गया और इसलिए ये आज भी पुरातात्विक स्थल के तौर पर जाना जाता है।

1976 में इसके ऐतिहासिक पार्क होने का ऐलान किया गया। इसके एक हिस्से को 1991 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया। इसका क्षेत्रफल 289 हेक्टेयर है। मौजूदा वक्त में ये शहर फ्रा नखोन सी अयुथ्या जिले के फ्रा नखोन सी अयुथ्या प्रांत में है।

खंडहर देते हैं भव्यता की गवाही

कभी वैश्विक कूटनीति और वाणिज्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा अयुथ्या, अब एक पुरातात्विक खंडहर है। इसकी खासियत ऊँचे प्रांग (अवशेष टावर) और विशाल बौद्ध मठों के अवशेष हैं। इससे शहर के अतीत के आकार और इसकी वास्तुकला की भव्यता का अंदाजा देते हैं। अयुथ्या को बेहद व्यवस्थित तरीके से बनाया गया था। इसके सभी प्रमुख संरचनाओं के आसपास सड़कें, नहरें और खाई शामिल थीं।

नदियों का अधिक से अधिक फायदा उठाने के लिए जल प्रबंधन के लिए एक हाइड्रोलिक प्रणाली थी जो तकनीकी तौर से बेहद उन्नत और दुनिया में अद्वितीय थी। यह शहर सियाम की खाड़ी के ऊँचाई पर था जो भारत और चीन के बीच समान दूरी पर था और नदी के ठीक ऊपर अरब और यूरोपीय शक्तियों से सुरक्षित था।

आर्थिक गतिविधियों का था केंद्र

कभी अयुथ्या क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अर्थशास्त्र और व्यापार का केंद्र था। वह पूर्व और पश्चिम के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु के तौर पर जाना गया। इससे शाही दरबार ने दूर-दूर तक राजदूतों की अदला-बदली की। इसमें वर्साय के फ्राँसीसी दरबार, दिल्ली के मुगल दरबार के साथ-साथ जापान और चीन के शाही दरबार भी शामिल थे। अयुथ्या में विदेशियों ने सरकारी नौकरियाँ की और शहर में निजी तौर पर भी रहे।

अयुथ्या के रॉयल पैलेस से नीचे की तरफ विदेशी व्यापारियों और मिशनरियों के एन्क्लेव थे। हर इमारत अपनी-अपनी स्थापत्य शैली में थी। शहर में विदेशी असर बहुत अधिक था और वो अभी भी जीवित कला और स्थापत्य खंडहरों में देखा जा सकता है। अयुथ्या का स्कूल ऑफ आर्ट वहाँ सभ्यता की सरलता और रचनात्मकता के साथ-साथ कई विदेशी प्रभावों को जज्ब करने की काबिलियत दिखाता है।

यहाँ बने बड़े महल और बौद्ध मठ उदाहरण के लिए वाट महथत और वाट फ्रा सी सेनफेट उनके बनाने वालों की आर्थिक संपन्नता और तकनीकी कौशल के साथ-साथ उनकी अपनाई गई बौद्धिक परंपरा के भी प्रमाण हैं। सभी इमारतों को उच्चतम गुणवत्ता के शिल्प और भित्ति चित्रों से सजाया गया था। इसमें सुखोताई की पारंपरिक शैलियों का असर था। ये अंगकोर से विरासत में मिला था जो जापान, चीन, भारत, फारस की 17 वीं और 18 वीं शताब्दी की कला शैलियों से उधार लिया गया था।

वाट फरा में विराजते हैं श्रीराम

यूट्यूबर/पत्रकार मुकेश तिवारी ने कुछ महीनों पहले अयोध्या से अयुथ्या तक की यात्रा की थी। उन्होंने ट्रैवल जुनून नाम के यूट्यूब चैनल पर 18 अप्रैल 2023 को एक वीडियो अपलोड कर इस यात्रा के बारे में बताया है।

वीडियो में मुकेश ने बताया है कि यहाँ का वाट फरा राम मंदिर हिंदू देवता मर्यादा पुरोषत्तम को समर्पित है, जो बताता है कि यहाँ पुराने वक्त से उनका अस्तिव रहा है। इसे अयुथ्या के पहले राजा रमाथी बोधी प्रथम के अंत्येष्टि की जगह पर तैयार किया गया था। राजा बोधी प्रथम हिंदू और बौद्ध धर्म में बराबर आस्था रखते थे।

उनका धर्म तो बौद्ध था, लेकिन हिंदू धर्म और प्रभु श्रीराम में गहरी आस्था की वजह से ही उनकी अंत्येष्टि की जगह पर ये मंदिर बनाया गया। इसे बनाने की इजाजत उनके बेटे ने दी थी। ये भी कहा जाता है कि माथी बोधी प्रथम की मौत के बाद बनाया गया ये पहला मंदिर था। इस मंदिर में बड़ा खजाना था जिसे लंबे वक्त तक लूटा गया। ये भगवान राम और हिंदू धर्म से बहुत प्राचीन समय से चला आ रहा थाईलैंड का रिश्ता ही जो इस देश की राजधनी बैंकॉक में तीसरी वर्ल्ड हिंदू कॉन्ग्रेस में 61 देशों के सैकड़ों हिंदू जुटे थे।

जिस हसन के वीडियो पर ‘पैगंबर मोहम्मद का अपमान’, उसने बोला – मार दो मेरे अब्बा को: NIT श्रीनगर में कट्टर मुस्लिमों के बवाल से है कनेक्शन

इजरायल और हमास के बीच जारी सीजफायर के 7 वें दिन दोनों ओर से बंधकों की रिहाई व अदला-बदली जारी है। ऐसे में हमास के सह-संस्थापक शेख हसन यूसुफ के बेटे का मोसाब हसन यूसुफ का बयान सामने आया है।

वीडियो में उसने इजरायल से अपील की है कि वो सभी बंधकों को छुड़ाने के लिए हमास को एक समयावधि दें, अगर हमास फिर भी सभी कैदियों को रिहा करने से मना करे तो उनके अब्बा सहित सभी हमास के टॉप आतंकियों को मार दिया जाए।

वीडियो में मोसाब ने कहा, “बंधकों को अगर कुछ भी नुकसान होता है तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए। इजरायल की हिरासत में सैकड़ों लोग हैं। सिर्फ यही भाषा है जो हमास को समझ आती है।”

आगे मोसाब ने कहा, “मैं जब हमास के टॉप लीडर की बात करता हूँ तो उसमें मेरे पिता शेख हसन भी आते हैं। किसी को छूट नहीं। वो किसी को हिंसा के लिए उकसा नहीं सकते। लोगों को मरने के लिए नहीं भेज सकते। बच्चों को भड़काना उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है।”

NIT श्रीनगर में हुए बवाल से मोसाब का कनेक्शन

बता दें कि मोसाब हसन यूसुफ हमास आतंकियों के खिलाफ अक्सर सवाल उठाते रहे हैं। बताया जाता है कि वह एक वीडियो में पैगंबर मोहम्मद पर भी विवादित बातें कह चुके हैं। पिछले दिनों उनकी वही वीडियो शेयर करने के कारण श्रीनगर के NIT का एक हिंदू छात्र मुश्किलों में पड़ गया। उसने उनकी वीडियो को अपने स्टेटस पर लगाया था। बाद में छात्र के खिलाफ एफआईआर हुई, उसे सस्पेंड किया गया और अब वह इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर है।

हिंदुओं से कोई दिक्कत नहीं- मोसाब

उन्होंने ‘सन ऑफ हमास’ नाम से किताब भी लिखी है। कुछ दिन पहले उन्होंने टाइम्स नाउ को इंटरव्यू दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कट्टर मुस्लिम किसी और के साथ नहीं रह सकते हैं और न ही वे ऐसा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हिंदुओं को कोई परेशानी नहीं है, ईसाई और यहूदी भी सह-अस्तित्व में हैं। हिंसा केवल कट्टर मुस्लिमों की ओर से ही क्यों आती है?”

उन्होंने आगे कहा था, “मुझे बाकी दुनिया से कोई परेशानी नहीं है। भारतीयों को कोई दिक्कत नहीं है। ईसाई, यहूदी, हम सभी सह-अस्तित्व में हैं। हमास और किसी भी अन्य इस्लामी आंदोलन को ख़त्म करने की ज़रूरत है। हमें इसे बहुत खुले तौर पर और स्पष्ट तरीके कहना होगा। आतंकवाद स्वीकार नहीं है।”

स्वदेशी रक्षा निर्माताओं को मिल सकता है अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर: रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस और 156 प्रचंड खरीदने की दी मंजूरी

भारत ने सशस्त्र बलों को आधुनिकीकरण के तहत गुरुवार (30 नवंबर 2023) को 2.23 लाख करोड़ रुपए की रक्षा खरीद परियोजनाओं को प्रारंभिक मंजूरी दे दी। इसमें 97 तेजस हल्के लड़ाकू विमान और 156 प्रचंड लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की खरीद शामिल है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इन परियोजनाओं को मंजूरी दी।

इस रक्षा खरीद को ऐसे समय में मंजूरी दी गई है, जब भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 2.23 लाख करोड़ रुपए की कुल खरीद का 98 प्रतिशत घरेलू उद्योगों से प्राप्त किया जाएगा। मंत्रालय के इस कदम से घरेलू रक्षा उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा।

97 तेजस फाइटर जेट और 156 प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर की कुल कीमत 1.10 लाख करोड़ रुपए है। दोनों स्वदेशी हैं। यह भारत के इतिहास में स्वदेशी निर्माताओं को मिलने वाला सबसे बड़ा ऑर्डर है। इसके अलावा, कुछ अन्य रक्षा सौदों को भी मंजूरी दी गई है। इन्हें भारतीय वायुसेना और थल सेना के लिए हासिल किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि भारतीय नौसेना के सतह प्लेटफॉर्म के लिए मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों को भी मंजूरी दी गई। वहीं, भारतीय फील्ड गन की जगह लेने के लिए टोड गन सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। डीएसी ने दो प्रकार के एंटी-टैंक युद्ध सामग्री अर्थात् ‘एरिया डिनायल युद्ध सामग्री’ (एडीएम) टाइप-2 और टाइप-3 की खरीद के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) या प्रारंभिक मंजूरी दी है।

सैन्य साजोसामान की खरीद संबंधी शीर्ष निकाय ने भारतीय नौसेना के लिए मध्यम दूरी की पोतरोधी मिसाइल (MRASHM) खरीदने के एक अन्य प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा, टी-90 टैंकों के लिए स्वचालित लक्ष्य ट्रैकर (एटीटी) और ‘डिजिटल बेसाल्टिक कंप्यूटर’ (डीबीसी) के अधिग्रहण और एकीकरण को भी मंजूरी मिली है। MRASHM सतह से सतह पर मार करने वाला एक हल्का प्रक्षेपास्त्र है।

हालाँकि, DAC द्वारा दी गई मंजूरी खरीद की स्वीकृति है। इसके बाद इनके निर्माताओं के साथ बातचीत होगी और कीमत तय की जाएगी। इसमें कुछ समय लग सकता है, लेकिन यह अवधि विदेशी निर्माताओं की तुलना में बहुत कम होने की उम्मीद है। तेजस भारत का बनाया हुआ अपना पहला फाइटर जेट है। इसे फरवरी 2019 में पूरी तरह से हथियारबंद फाइटर जेट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल करने की अंतिम परिचालन मंजूरी मिली थी।

वहीं, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों का पहला बैच पिछले साल वायुसेना और थल सेना में शामिल किया गया था। दो इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर को HAL ने विकसित किया है। लगभग 5.8 टन वजन वाला यह हेलीकॉप्टर 21,000 फीट की ऊँचाई पर भी अपनी सेवाएँ दे सकता है। इसे सियाचिन, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे जगहों के लिए डिजाइन किया गया है।

राजस्थान में पूर्ण बहुमत से आ रही BJP सरकार, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़-तेलंगाना पर Exit Polls भी कंफ्यूज: 3 दिसंबर को आएगा फाइनल रिजल्ट

तेलंगाना में आज गुरुवार (30 नवंबर 2023) को मतदान समाप्त होने के साथ ही पाँच राज्यों में जारी विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया। तेलंगाना में शाम पाँच पर 64 प्रतिशत मतदान हुए। इन राज्यों में मतगणना 3 दिसंबर को होगी। मतदान खत्म होने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल भी आ गए हैं।

एक्जिट पोल के अनुसार, राजस्थान में भाजपा शानदार वापसी करने जा रही है। वहाँ पर हर पाँच साल में सरकार बदलने का रिवाज है। इस बार भी परंपरा टूटती नजर नहीं आ रही है। वर्तमान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है। 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा सीट में बहुमत के लिए 101 के आँकड़े की जरूरत है।

राजस्थान

अगर एक्जिट पोल की बात करें तो ‘रिपब्लिक टीवी-जन की बात’ एजेंसी ने राजस्थान में भाजपा को 100-122 सीटें दी हैं। TV9-पोलस्ट्रैट ने 100-110, टाईम्स नाऊ-ईटीजी ने 108-128, पी-मार्क ने 105-125 और Axis My India ने 80-100 सीटें दी हैं। इन एजेंसियों ने कॉन्ग्रेस को 62-91 के बीच सीटें दी हैं। हालाँकि, Axis My India ने कॉन्ग्रेस को 86-106 सीटें दी हैं।

छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ को लेकर सामने आए एक्जिट पोल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर है। जन की बता ने भाजपा को 34-45 और कॉन्ग्रेस को 42-53 सीटें दी हैं। एक्सिस माई इंडिया ने भाजपा को 41 और कॉन्ग्रेस को 45 सीटें दी हैं। CNX ने भाजपा को 30-40 और कॉन्ग्रेस को 45-46 सीटें दी हैं।

टीवी5 न्यूज ने छत्तीसगढ़ में भाजपा को 29-39 और कॉन्ग्रेस को 54-64 सीटें दी हैं। सी वोटर ने भाजपा को 36-48 और कॉन्ग्रेस 41-53, इंडिया टुडे-चाणक्य ने भाजपा को 33 और कॉन्ग्रेस को 57, मैट्रिज ने भाजपा को 34-42 और कॉन्ग्रेस को 44-52 और ईटीजी ने भाजपा को 32-40 सीटें और कॉन्ग्रेस को 48-56 सीटें दी हैं।

अगर सारे एक्जिट पोल एजेंसियों का औसत देखें तो भाजपा को लगभग 38 सीटें और कॉन्ग्रेस को 50 सीटें मिलती दिख रही हैं। इस तरह छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस अपना बढ़त बनाए हुए नजर आ रही है। बता दें कि 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है।

मध्य प्रदेश

सामने आए विभिन्न एजेंसियों के एक्जिट पोल में मध्य प्रदेश में भाजपा एक फिर से सत्ता में वापसी करती हुई दिख रही है। 230 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 116 के आँकड़े की जरूरत होगी। जन की बात एजेंसी के अनुसार, मध्य प्रदेश में भाजपा को 113 और कॉन्ग्रेस को 112 सीटें मिलती दिख रही हैं। मैट्रिज ने भाजपा को 118-130 सीटें और कॉन्ग्रेस को 97-107 सीटें दी हैं।

पोलस्ट्रैट के आँकड़ों के अनुसार, एमपी में भाजपा को 106-116 और कॉन्ग्रेस को 111-121 सीटें मिलेंगी। दैनिक भास्कर की एक्जिट पोल के अनुसार, एमपी में भाजपा को 95-115 और कॉन्ग्रेस को 105-120 सीटें और इंडिया टुडे चाणक्या ने भाजपा को 151 और कॉन्ग्रेस को 74 सीटें दी हैं।

तेलंगाना

एक्जिट पोल के अनुसार, तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की BRS और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर नजर आ रही है। 119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा सीट में बहुमत के लिए 60 सीटों की जरूरत होगी। इस चुनाव में भाजपा भी बेहतर प्रदर्शन करती हुई नजर आ रही है।

जन की बात के आँकड़े के अनुसार, तेलंगाना में भाजपा को 7-13, कॉन्ग्रेस को 48-64 और BRS को 40-55 सीटें मिलती नजर आ रही है। वहीं, AIMIM को 4-7 सीटें दी गई हैं। CNX के अनुसार, भाजपा को 2-4 सीटें, कॉन्ग्रेस को 63-79, बीआरएस को 31-47 और AIMIM को 5-7 सीटें मिलेंगी।

पोलस्ट्रैट के अनुसार, भाजपा को 5-10 सीटें, कॉन्ग्रेस को 49-59 सीटें, BRS को 48-58 सीटें और AIMIM को 6-8 सीटें मिलेंगी। वहीं, मैट्रिज ने भाजपा को 4-9 सीटें, कॉन्ग्रेस को 58-68 सीटें, BRS को 46-56 सीटें और AIMIM को 5-7 सीटें दी हैं।

बता दें कि जिन पाँच राज्यों में चुनाव हुए हैं, वे हैं- राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम। इन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव की मतगणना 3 दिसंबर 2023 को होगी।

37 जगहों पर लगा रोजगार मेला, PM मोदी ने 51000 को दिए सरकारी नौकरी के लेटर: कहा- कर्मयोगी प्रारंभ से जुड़कर बढ़ाए क्षमता

गुरुवार (30 नवंबर 2023) को देश के 37 जगहों पर रोजगार मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करीब 51 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी के लेटर दिए।

नियुक्ति पाने वाले नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थी केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों में सेवा देंगे। इस दौरान पीएम मोदी ने अगले 25 साल भारत के लिए बेहद अहम बताते हुए नियुक्ति पाने वाले युवाओं से ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ जुड़कर अपनी क्षमता बढ़ाने को कहा। केंद्र सरकार ने कर्मयोगी प्रारंभ नाम से लर्निंग मॉड्यूल की पहल एक साल पहले शुरू की थी। उसके बाद से लाखों नए सरकारी कर्मचारी इसके जरिए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

पीएम मोदी ने अभ्यर्थियों से कहा, “ये नियुक्ति पत्र आपके परिश्रम और प्रतिभा का नतीजा है। मैं आपकों और आपके परिवार को बहुत बधाई देता हूँ। अब आप राष्ट्र निर्माण की उस धारा से जुड़ने जा रहे हैं जिसका सरोकार सीधे जनता जनार्दन से है। भारत सरकार के कर्मचारी के तौर पर आप सभी को बड़े दायित्व निभाने हैं। आप जिस भी पद पर रहें, जिस भी क्षेत्र में काम करें देश के लोगों के लिए ईज ऑफ लिविंग ही होनी चाहिए।”

बताते चलें कि पीएम मोदी ने दिसंबर 2023 तक 10 लाख रोजगार देने का ऐलान किया था। इसके तहत अब तक लाखों युवाओं को नियुक्ति पत्र बाँटे जा चुके हैं। अगले महीने इस साल का आखिरी रोजगार मेला लगेगा।

नवनियुक्त कर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग

नवनियुक्त कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल कर्मयोगी प्रारंभ के जरिए खुद को प्रशिक्षित करने का मौका भी मिलेगा। आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर ‘कहीं भी किसी भी उपकरण पर’ सीखने के प्रारूप में 800 से अधिक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम मुहैया कराए गए हैं।

नवनियुक्त कर्मी अपने रचनात्मक विचारों और भूमिका से जुड़ी दक्षताओं के जरिए अन्य बातों के साथ-साथ देश के औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक विकास को मजबूत करने के काम में योगदान देंगे। इससे प्रधानमंत्री के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिलेगी।

इन विभागों में मिलेगी भर्ती

देशभर से चुने गए नवनियुक्त युवा कर्मचारी सरकार के राजस्व विभाग, गृह मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा श्रम और रोजगार मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में अपना योगदान देंगे।

कब-कब लगे रोजगार मेले

रोजगार मेले का सिलसिला 22 अक्‍टूबर 2022 से शुरू हुआ था। इस पहले रोजगार मेला में 75 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र बाँटे गए थे। इसके बाद 22 नवंबर 2022 को आयोजित दूसरे मेले में 71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को जॉइनिंग लेटर मिले थे।

तीसरा मेला 20 जनवरी 2023 और चौथा 13 अप्रैल 2023 को लगा था। इन दोनों में 71-71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। पांचवाँ रोजगार मेला 16 मई, छठा 13 जून और सातवाँ 22 जुलाई 2023 को लगा था। इसमें 70-70 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।

वहीं आठवाँ रोजगार मेला 28 अगस्त 2023 को लगा था। इसमें भी 51,000 से ज्‍यादा देश के युवाओं को सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए। इसके बाद 9वाँ रोजगार मेला 26 सितंबर को हुआ, जिसमें 51 हजार से ज्यादा लोगों को मिला अपॉइंटमेंट लेटर मिले थे।

PM मोदी को दी पत्रकारों की लिस्ट, बताया साथ न ले जाएँगे तो खराब होंगे रिश्ते… जानिए कैसे बंद हुआ प्रधानमंत्री के विमान में विदेश जाने का चलन

2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव आया। इनमें से विदेश यात्राओं के दौरान प्रधानमंत्री के विमान में पत्रकारों को ले जाने की परिपाटी बंद करना भी है। पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि कैसे पीएम मोदी ने इस चलन को बंद किया।

मिश्रा श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं। वे पहले कार्यकाल में पीएम मोदी के प्रमुख सचिव भी रह चुके हैं। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के पॉडकास्ट में बताया है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद जब नरेंद्र मोदी पहले विदेश दौरे पर जा रहे थे तो उन्हें भी पहले से चली आ रही परिपाटी के अनुसार साथ जाने वाले पत्रकारों के नाम दिए गए थे। लेकिन उन्होंने इस परिपाटी को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के साथ विदेश यात्रा पर उनके विमान में किसी भी निजी मीडिया संस्थान के पत्रकार नहीं जाते हैं। उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों का प्रधानमंत्री के साथ उनके विमान में विदेश दौरों पर जाना संस्कृति बन गई थी।

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि जब पहली विदेश यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी विदेश जाने वाले थे तो उन्हें साथ जाने वाले पत्रकारों की सूची गई थी। शुरुआत में उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बाद में जब नृपेंद्र मिश्रा ने इस संबंध में पूछा तो प्रधानमंत्री का सवाल था कि अगर हम प्रेस को साथ अपने विमान में ना लेकर जाएँ तो क्या होगा?

मिश्रा ने उन्हें जवाब दिया कि इससे मीडिया के साथ रिश्ते बिगड़ेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ भी हो प्रेस को साथ नहीं ले जाया जाएगा। उनका कहना था कि मीडिया के बड़े नाम प्रधानमंत्री के साथ अपने पत्रकार भेज कर अपना पैसा बचाते हैं। उन्हें अपने आर्थिक स्थिति की कोई चिंता नहीं होती। उन्हें अपने खर्चे पर विदेश में अपने पत्रकार भेजने चाहिए।

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में दिल्ली के बड़े पत्रकारों को प्रधानमंत्री के आधिकारिक विमान में साथ में ले जाया जाता था। इन पत्रकारों को प्रधानमंत्री की पूरी यात्रा के दौरान रहने की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई जाती थी। इसके लिए विदेश मंत्रालय होटल का चयन करता था।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री के विमान में 34 सीट पत्रकारों के लिए थी। इनमें से 2 सीट एसपीजी लेती थी, जबकि 32 सीटें पत्रकारों को दी जाती थी। इन पत्रकारों को मुफ्त भोजन और काम करने के बाद थकने पर शराब भी मुफ्त में पिलाई जाती थी।

प्रधानमंत्री के साक्षात्कार और उनसे जुड़ी खबरों पर भी इन निजी मीडिया चैनल का कब्जा हो गया था, जबकि सरकारी चैनल दूरदर्शन समस्याओं से घिरा हुआ था। प्रधानमंत्री के साथ जाने से सरकार के बड़े अधिकारियों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री तक इन पत्रकारों की सीधी पहुँच होती थी।

कथित ईशनिंदा के विरोध की आड़ में घाटी में अराजकता फैलाने वालों पर हमारी कड़ी नजर, इकट्ठा कर रहे हैं सबूत: जम्मू-कश्मीर डीजीपी

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में NIT (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) के छात्रों ने एक हिन्दू छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि छात्र ने सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। प्रदर्शन के दौरान ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे भी लगे थे और इस प्रदर्शन को पाकिस्तानी हैंडलों से भी हवा दी गई थी।

इसको लेकर जम्मू-कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन का कहना है, “हमने सभी पहलुओं पर कानूनी कार्रवाई की है। मामले दर्ज कर लिए गए हैं और जाँच चल रही है। हम इस पर नजर रख रहे हैं और सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। इस विरोध के बहाने कुछ और करने की कोशिश की जा रही है। उन पर भी हमारी नजर है और उनके खिलाफ भी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं।”

डीजीपी ने कहा, “हमने तय किया है कि CrPC की धारा 144 के तहत सरसरी तौर पर एक कानून लाएँगे, जिसमें किसी किस्म का कंटेंट, मैसेज, वीडियो, ऑडियो… जिससे कम्युनल सेंसिटिविटी खत्म हो जाएगी या किसी को डराया जाएगा, धमकाया जाएगा… वो चाहे टेररिस्ट-सेपरेटिव्स की से हो या दहशत पंसद की तरफ से हो, ऐसे कंटेंट को पोस्ट करना कानून जुर्म हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पोस्ट करने वाले को जरूर हम कानून के दायरे में लाएँगे और उसको फॉर्वर्ड-शेयर करना भी कानूनन जुर्म हो जाएगा। कोई अगर ये कहे कि साब किसी ने इनोसेंटली मुझे भेज दिया, मैं क्या करूँ तो उसके जवाब में ये रहेगा कि साब अब आपको, आपके बगैर इजाजत के अगर किसी ने इस तरह के ऑब्जेक्शनेबल वीडियो, ऑडियो, मैसेज, टेक्स्ट भेजा तो आप नजदीकी थाने में जाकर कह सकते थे कि मैं नहीं चाहता था कि ये मैसेज मेरे फोन में आए। ये पता नहीं कि किसने और कहाँ से भेजा है।”

डीजीपी स्वैन ने कहा, “आप ये इन्फॉर्मेशन अपनी तरफ से थाने में दे दीजिएगा। इसके बाद आप क्रिमिनल लायब्लिटी के बाहर हो जाएँगे। लेकिन, अगर आप जानते हैं कि ये ये ऑडियो-वीडियो या टेक्स्ट माहौल को खराब करने वाले किसी टेटरिस्ट-सेपरेटिब्स नेटवर्क है या कोई ऐसा है जो दंगा-फसाद कराना चाहता है या पैगंबर साहब की इज्जत को ठेस पहुँचाने वाला काम करता है या कम्युनिली सेंसिटिव चीजों को पोस्ट करता है और आगे आप उसे फॉरवर्ड करते हो तो यह कानून जुर्म बन जाएगा।”

फिर खाली उसी बुनियाद पर कार्रवाई करने के लिए कानून हमें इजाजत देगी। हम उसको कोर्ट में पेश करेंगे और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। यकीनन ऐसे लोगों को हम इंडेक्स करके रखेंगे ताकि उनको हर हालत में, हर स्टेज में उनको पता रहे कि उन्होंने ये गलत काम किया है। ऐसे करने से ही लोगों के मन भय पैदा होता है। क्योंकि कुछ चंद लोग इसका फायदा लेते हैं और अपनी रोटी सेंकते हैं।”

दरअसल, कॉलेज में 28 नवंबर 2023 को पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर श्रीनगर के NIT में बवाल और प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद पुलिस ने आरोपित छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। साथ ही आरोपित को इंस्टिट्यूट से सस्पेंड करते हुए आने वाले सेमेस्टर के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

दरअसल, यहाँ पढ़ने वाले एक छात्र (जो हिंदू है) ने इस्लाम के नबी पैगंबर मोहम्मद के विरुद्ध आपत्तिजनक वीडियो अपने व्हाट्सएप स्टेस्ट्स और इंस्टाग्राम पर डाला था। इसके उलट हालाँकि सोशल मीडिया पर कई लोग उस वीडियो का स्क्रीनशॉट लगा कर यह दावा कर रहे हैं कि वो वीडियो हमास के संस्थापक के बेटे का है, खुद आरोपित लड़के ने अपनी ओर से कोई बात नहीं कही है।

सोशल मीडिया में आरोपित लड़के से संबंधित जिस स्क्रीनशॉट को शेयर किया जा रहा है, उसके अनुसार इस वीडियो में हमास संस्थापक का बेटा इस्लाम के बारे में कुछ बता रहा है। कट्टर मुस्लिमों ने इसे पैगंबर मोहम्मद की आपत्ति से जोड़ दिया, ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। ऊपर के सोशल मीडिया पोस्ट में आरोपित लड़के और उसकी मुस्लिम गर्लफ्रेंड के बारे में भी लिखा गया है। नेटिजन्स इस पर भी बात कर रहे हैं कि स्थानीय कट्टर मुस्लिम भीड़ को इस बात से दिक्कत है कि एक हिंदू लड़के की गर्लफ्रेंड मुस्लिम क्यों?

ईशनिंदा की बात सुन कट्टर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई। कुछ ही देर में इस वीडियो को ईशनिंदा बताते हुए श्रीनगर NIT के तमाम मुस्लिम छात्र ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ (रसूल अल्लाह हम तेरे लिए हाजिर हैं) का नारा लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे।

योग, कबड्डी, ताश… जानिए 2.5 किमी लंबी सुरंग में मजदूरों ने कैसे काटे 17 दिन, कैसे भेजा अंदर फँसे होने का संकेत

उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 श्रमिकों को 17वें दिन 28 नवम्बर 2023 की शाम को निकाला गया था। ये श्रमिक 12 नवम्बर से ही सुरंग में मलबा आ जाने के कारण फँसे हुए थे। अब श्रमिकों ने बताया है कि कैसे वह इस कठिन परिस्थिति में अपना समय व्यतीत कर रहे थे।

सुरंग के भीतर फँसने वाले श्रमिकों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तराखंड के श्रमिक थे। सुरंग से सुरक्षित बाहर आए ओडिशा के श्रमिकों ने बताया है कि वे अन्दर कबड्डी और ताश खेल कर अपना समय काट रहे थे।

ओडिशा के बालासोर के रहने वाले राजू भी अन्दर फँसे हुए थे। उन्होंने बताया है कि वह 11 नवम्बर 2023 की रात को इस सुरंग के अन्दर घुसे थे। उन्हें सुबह 8 बजे तक काम करना था, लेकिन सुबह 5:30 बजे ही एकाएक मलबा आ जाने के कारण वह सभी लोग फँस गए।

पहले कुछ घंटों तक बाहर मौजूद लोगों को भी नहीं पता चला कि श्रमिक अंदर फँसे हुए हैं। अंदर मौजूद श्रमिकों ने इसके बाद पानी के पाइपों को हटा कर बाहर अपने बारे में संकेत भेजा। इससे लोगों को पता चला कि अन्दर श्रमिक फँस गए हैं। शुरुआत में उनकी संख्या भी स्पष्ट नहीं थी।

राजू ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार से बात करते हुए बताया, “बाहर कुछ इंजीनियर थे जिनको लगा कि अन्दर श्रमिक फँसे हुए हैं। उन्होंने 7 घंटे के बाद हमसे सम्पर्क स्थापित किया। उन्होंने हमें पाइप के माध्यम से सूखे अनाज भेजे।” राजू ने बताया कि उन्हें लाई (मुढ़ी) अन्दर भेजी गई, जिसे खाकर वह भूख मिटा रहे थे। अंदर ऑक्सीजन भी भेजी गई।

पानी भेजने का कोई रास्ता न बन पाने के कारण शुरुआत में श्रमिकों को चट्टानों से रिस रहा पानी पीकर काम चलाना पड़ा। हालाँकि, स्थितियाँ तब सुधर गईं जब अन्दर 6 इंच व्यास वाला पाइप डाल दिया गया। इस पाइप के माध्यम से अंदर गर्म भोजन और पानी दोनों पहुँचे।

श्रमिकों का कहना है कि एक बार खाना-पानी और गरम कपड़े पहुँचने और परिवार से बात होने के पश्चात वह सभी शांत हो गए थे और इसका इन्तजार कर रहे थे कि कब उन्हें बाहर निकाला जाएगा। इस बीच इन सभी ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाए रखा।

एक अन्य श्रमिक भगवान का कहना है कि उन्हें मजदूर होने के कारण मुश्किलों में रहना आता है, लेकिन यहाँ की स्थितियाँ काफी विपरीत थीं। उनका कहना है कि बाहर से प्रशासन और कम्पनी के अधिकारी उन्हें लगातार हौसला बँधाते रहे जिससे उनका मनोबल बढ़ा।

श्रमिकों ने यह भी जानकारी दी कि मलबे के पीछे 2.5 किलोमीटर की जगह थी, जिसमें वे सुबह की सैर, योग वगैरह करते थे। वे लोग कबड्डी, ताश आदि भी खेलते थे। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अंदर अपने फोन भी मिल गए थे। उस पर भी वह समय व्यतीत करते थे। वॉकी टॉकी मिलने के बाद वे अपने परिवारों से भी बात कर पाए।

झारखंड के सिंहभूम के एक मजदूर बासेत मुर्मू भी अंदर फँसे हुए थे। उनके पिता भक्तू मुर्मू की इसी दौरान मौत हो गई। बाहर निकलने के बाद भी वह अपने घर नहीं पहुँच सके इसलिए उनके घर वालों ने उनके पिता का अंतिम संस्कार कर दिया।

इन श्रमिकों को निकाले जाने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन्हें ₹1 लाख के चेक सौंपे हैं। जिन राज्य के यह श्रमिक हैं, वहाँ के अधिकारी और मंत्री भी पहुँचे हैं। अब इन श्रमिकों को ऋषिकेश में इलाज के लिए ले जाया गया है जहाँ उनकी मेडिकल जाँच चल रही है।