Home Blog Page 1347

‘रेप करना है तो गेट बंद करके कर लो… सबको मत दिखाओ’: बुरहान और मोहम्मद की लड़ाई में हजारों बच्चियाँ-औरतें शिकार, खतरे में पूरा सूडान

“तुम मेरे साथ रेप करने वाले हो, प्लीज दरवाजा बंद कर लो, दूसरे सैनिकों को मत देखने दो।”

“तुम मेरी बहन हो, तुम अरबी लड़की हो, तुम सुरक्षित हो… मैं तेरे साथ सोना चाहता हूँ। अपने बेडरूम में ले चलो।”

ऊपर दो अलग-अलग महिलाओं की आपबीती है। दोनों महिलाएँ सूडान की हैं। ऐसी आपबीती सिर्फ दो पीड़ित तक सीमित नहीं है बल्कि हजारों महिलाओं-बच्चियों की है। जिन लोगों ने इनके साथ रेप-गैंगरेप किया है, वो अरबी लड़ाके या सैनिक हैं। जिन पर यह सब बीत रही है, वो भी अरब से पैदा हुए मजहब इस्लाम को ही मानने वाले हैं। यह सब इतने व्यापक स्तर पर हो रहा है कि सूडान एक देश के तौर पर खत्म भी हो सकता है, ऐसा संयुक्त राष्ट्र का मानना है।

सूडान में जो मार-काट मची है, यह महीनों से चली आ रही। शुरुआती लड़ाई में एक पक्ष दूसरे पक्ष को मार रहा था, मर रहा था। कुछ ही दिनों के बाद लड़ने वाले ‘मर्दों’ ने इसका दायरा बढ़ा लिया है – महिलाएँ और बच्चियों का शिकार किया जाने लगा। सूडान में जिनके साथ यह हैवानियत हो रही, उनमें से कुछ ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की टीम को अपनी-अपनी आपबीती बताई है। भयावह रेप-गैंगरेप से गुजरने के बावजूद सिर्फ कुछ पीड़ित ही आपबीती सुना पा रहे। एक मानवाधिकार शोधार्थी ने इसके पीछे की वजह बताया – सूडान का इस्लामी समाज और इनकी रूढ़िवादी सोच। इस शोधार्थी ने बताया:

“यहाँ एक रूढ़िवादी मुस्लिम समुदाय है। ये महिलाओं के शरीर को कितनी ‘शुद्ध’, कितनी ‘स्वच्छ’ के नजरिये से देखते हैं। विपक्षी लड़ाकू सेना के लोग यौन हिंसा को एक हथियार के तौर पर देखते हैं, इसलिए नस्लीय हो या मजहबी, महिलाओं के साथ रेप करके वो पीड़ित पक्ष को दिखाना चाहते हैं कि तुम्हारी महिलाओं का स्थान सबसे निचले पायदान पर है।”

सूडान में रेप किनके साथ, कैसी पाशविकता

सबसे ऊपर 2 रेप पीड़िता की जो आपबीती है, वही सबसे भयावह है, ऐसा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट में जितनी भी घटनाएँ सामने आई हैं, वो ऊपर से कम भयावह नहीं है।

  • एक महिला और उनकी 3 बेटियों का बलात्कार किया गया, एक ही जगह पर, सबको एक-दूसरे के सामने।
  • 2 बच्चियों का रेप उनके पिता के सामने किया गया। इनमें एक की मौत आंतरिक रक्तस्राव से हो गई। दूसरी बच गई लेकिन पिता की मौत सदमे के कारण हो गई।
  • 15 साल की एक बच्ची के सामने उनके माँ-पिता को मार दिया गया। फिर 5 लोगों ने उसके और उसके एक दोस्त के साथ गैंग-रेप किया। गैंगरेप के बाद उस दोस्त को भी गोली मार दी गई।
  • एक महिला को उसके पूरे परिवार को मारने की धमकी दी गई, उसकी बेटी को सेक्स-गुलाम बनाने के लिए कहा गया। सबको बचाने के लिए उस महिला ‘हार’ मानते हुए खुद का बलात्कार करवाया।
  • 25 साल की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता महिला के घर पर हमला किया गया, उसके छोटे भाई को मार डाला, बाप-बहन को घायल किया, 15 साल की छोटी बहन को अगवा कर लिया। मानवाधिकार कार्यकर्ता को कहा गया कि आकर अपना बलात्कार करवाओ, तब छोटी बहन को रिहा करेंगे। ‘हार’ मान कर अपनी बहन को बचाने के लिए वो खुद अपना गैंग-रेप करवाने अरबी लड़ाकों के पास गईं।
  • 24 साल की एक महिला का रेप उसके ही घर में किया गया, उसकी माँ से बस कुछ फीट की दूरी पर।
  • 19 साल की एक लड़की के सामने उसकी माँ को गोली मार दी गई। अफरा-तफरी में उसके 5 छोटे भाई-बहन बिछड़ गए। फिर इसके साथ 3 दिनों तक 4 लोगों के द्वारा गैंग-रेप किया गया।
  • अपने-अपने स्कूल/कॉलेज की टॉपर 3 लड़कियों का गैंगरेप सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि ये तीनों अरबी लोगों से अलग मसालित (Masalit) समुदाय से आते हैं।
  • 19 साल की एक लड़की का 4 लोगों ने 3 दिन तक गैंगरेप किया।
  • एक महिला का बलात्कार उसके पूरे परिवार के सामने किया गया।
  • 28 साल की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता महिला को उसके घर से उठा लिया गया, घंटों तक उसका गैंगरेप किया गया।
  • एक वीडियो में सैनिक की वर्दी पहने लोग हवा में गोली चला रहे थे, कुछ निगरानी कर रहे और बाकी बचे खुलेआम रेप कर रहे थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार सूडान की 40 लाख महिलाओं और लड़कियों पर यौन हिंसा और बलात्कार का खतरा है। अरबी प्रभुत्व वाला पैरामिलिट्री समूह और अरबी बंदूकधारी लोग मसालित (Masalit) समुदाय की महिलाओं-लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। मसालित समुदाय के लोग सामान्यतः गहरे रंग के होते हैं। इस्लाम में जाति-रंग-लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है, इन वहशी घटनाओं से यह भ्रम भी टूटता है।

रेप के बाद महिलाएँ किस मानसिक तनाव से जीती हैं, वो एक पीड़ित की आपबीती से समझ सकते हैं। उसने अपने मासिक धर्म को लेकर कहा:

“रेप के 4 दिन के बाद मुझे पीरियड आए। हर महीने आने वाला पीरियड दर्द के साथ आता था, उस दिन जो पीरियड आया, वो सबसे बड़ी राहत लेकर आया था।”

रेप के कारण गर्भवती होना पीड़ित महिलाओं या लड़कियों के लिए अभिशाप कैसे है, इसे 24 साल की रेप पीड़िता की आपबीती से समझा जा सकता है। इनका गैंग-रेप इनकी माँ के सामने किया गया। फिर मार कर भगा दिया गया। मेडिकल फैसिलिटी के अभाव में इन्होंने 2 महीने गुजार दिए। तब जाकर इनको पता चला कि वो गर्भवती हैं। अब इन्होंने रोते हुए बताया कि ऐसा बच्चा इनको नहीं चाहिए।

जब ‘विदेशियों’ के साथ रेप, तब चुप था समाज

सुडान में जब गृहयुद्ध शुरू हुआ, तो उस समय ‘विदेशी महिला’ के साथ रेप की खबरें सामने आईं। लोगों ने इसको लेकर कानाफूसी की, चटखारे लिए। यह खबर लेकिन न तो मीडिया में उछली, न ही सामाजिक चेतना जगा पाई। क्यों? क्योंकि तब इसी देश के लोग और महिलाएँ आपस में बात कर रहे थे कि रेप या गैंगरेप सूडानी लड़कियों के साथ नहीं हो रहे, वो लोग सुरक्षित हैं।

जल्द ही इन सबका भ्रम टूट गया। सूडानी महिलाएँ, लड़कियों, बच्चियों तक को भी नहीं बख्शा गया। 50 साल से ऊपर तक की महिलाओं को भी शिकार बनाया गया। हिंसा प्रभावित इलाकों से निकल कर महिलाओं के प्रति हिंसा अन्य इलाकों तक में फैल गई।

संयुक्त राष्ट्र के दर्जन भर से ज्यादा एक्सपर्ट सूडान में हो रहे रेप, गैंगरेप को लेकर बड़ी चिंता जता चुके हैं। इस चिंता की कई वजह है। सबसे बड़ी वजह है – सूडान की 97% सुन्नी मुस्लिमों की आबादी। जिनका रेप या गैंगरेप किया जा रहा, वो भी इस्लाम को मानने वाले… जो रेप या गैंगरेप कर रहे, वो सब भी मुस्लिम। मतलब मसला मजहबी नहीं है, बल्कि नस्ली है, समुदाय-संबंधी है। आपसी वर्चस्व की लड़ाई है। यूएन की टीम का मानना है कि यह नस्लीय नरसंहार की ओर जा रहा है।

15 अप्रैल 2023 से सूडान में एक तरह का गृहयुद्ध चल रहा है। 10000 से ज्यादा लोग अब तक मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार मौत के भय से 63 लाख लोग अपने-अपने घरों को छोड़ कर भाग गए हैं। महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, यौन शोषण, बलात्कार, गुलामी, तस्करी, जबरन वेश्यावृत्ति, जबरन शादी आदि की भी कई रिपोर्ट हैं। इनमें से कई मामले नस्लीय, जातीय और राजनीति से प्रेरित भी हैं। संयुक्त राष्ट्र की टीम ने अपील करते हुए कहा:

“सूडान में हो रहे अत्याचारों और बड़े पैमाने पर होने वाली यौन हिंसा पर दुनिया को चिंतित होने की जरूरत, न कि आँखें मूंदने की।”

आखिर कौन हैं जो सूडान में लड़ रहे हैं? एक तरफ से लड़ने वाले हैं – सूडान आर्मी चीफ अब्देल फताह अल-बुरहान (Abdel Fattah al-Burhan) के समर्थक और लड़ाके। दूसरी तरफ हैं वहाँ की पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के कमांडर मोहम्मद हमदान दाग्लो के वफादार। मोहम्मद हमदान दाग्लो (Mohamed Hamdan Daglo) कभी आर्मी चीफ अब्देल फताह अल-बुरहान का डेप्यूटी भी रहा था।

कौन हैं वे योगी जिनमें राजस्थान देख रहा ‘भविष्य’, वसुंधरा से ज्यादा लोग चाहते हैं बाबा बने CM: जानिए योगी आदित्यनाथ से क्या है कनेक्शन

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुके हैं। वोटों की गिनती 3 दिसंबर 2023 को होगी। विभिन्न एजेंसियों ने राज्य में सरकार बनाने को लेकर अपने एग्जिट पोल्स जारी कर दिए हैं। इस बीच राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर एक सर्वे सामने आया है। इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम महंत बालकनाथ योगी का है।

आजतक एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल में राजस्थान में सीएम पद के चेहरे को लेकर उनकी राय पूछी गई। इसमें 10 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे बालकनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। बालकनाथ ने भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे और कॉन्ग्रेस सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट को भी पीछे छोड़ दिया है।

सर्वे में 9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे वसुंधरा राजे को सीएम देखना चाहते हैं, जबकि दीया कुमारी को 1 प्रतिशत लोग मुख्यमंत्री बनते हुए देखना चाहते हैं। भाजपा में वसुंधरा राजे, गजेंद्र सिंह शेखावत, दिया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राजेंद्र राठौड़ सहित कई नाम चर्चा में हैं। सर्वे में 21 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे भाजपा के किसी भी उम्मीदवार को सीएम बनते देखना चाहते हैं।

कौन हैं महंत बालकनाथ

हालाँकि, सीएम पद की रेस में बालकनाथ द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जैसी नेता को पीछे छोड़ देना साधारण बात नहीं है। महंत बालकनाथ योगी इस समय अलवर से भाजपा के सांसद हैं। पार्टी ने इस बार के राजस्थान विधानसभा में उन्हें हरियाणा-राजस्थान सीमा पर आने वाले तिजारा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है।

बाबा बालकनाथ उसी नाथ पंथ के योगी हैं, जिसके प्रमुख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। बालकनाथ योगी आदित्यनाथ के करीबी हैं और राजस्थान में उन्हें फायरब्रांड नेता के रूप में जाना जाता है। इसलिए उन्हें ‘राजस्थान का योगी’ कहा जाता है।

बाबा बालकनाथ की अलवर और उसके आसपास के इलाकों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी छवि को देखते हुए राजस्थान भाजपा में उन्हें उपाध्यक्ष भी बनाया गया है। बालकनाथ ने साल 2019 में अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता था। उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रभावशाली नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह को 3 लाख से ज्यादा वोटों से मात दी थी। 

बालकनाथ का प्रारंभिक जीवन

महंत बालकनाथ का जन्म 16 अप्रैल 1984 को राजस्थान के अलवर जिले के कोहराना गाँव में हुआ। उनके पिता एक किसान थे। उनके पिता का नाम सुभाष यादव और माँ का नाम उर्मिला देवी है। महंत बालकनाथ अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनका परिवार साधु-संतों की सेवा में लगा रहता था।

इसी दौरान उनके माता-पिता ने अध्यात्म का अध्ययन करने के लिए उन्हें महंत खेतानाथ के आश्रम में छोड़ दिया। उस समय बालकनाथ की उम्र सिर्फ 6 साल की थी। खेतानाथ से दीक्षा लेने के बाद बालकनाथ महंत चांदनाथ के पास आ गए। इसके बाद साल 2016 में उन्होंने बालकनाथ को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया।

महंत बालक नाथ नाथ संप्रदाय के आठवें संत है। बालक नाथ बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं। बालकनाथ रोहतक स्थित बाबा मस्तनाथ मठ के महंत हैं। उनका मठ अपने नाथ संप्रदाय से जुड़ी हुई विभिन्न प्रकार के जन कल्याणकारी संस्थान भी चलाते हैं। इस कारण से उनकी पहचान एक जन नेता के रूप में है।

योगी आदित्यनाथ के नजदीकी

बालकनाथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी हैं। सीएम योगी बालकनाथ के नामांकन में भी पहुँचे थे। बालकनाथ कई मौकों पर कह चुके हैं कि योगी आदित्यनाथ उनके बड़े भाई और मार्गदर्शक हैं। योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय के सभी मठों के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वहीं, रोहतक मठ उपाध्यक्ष है।

10-10 बच्चे करो पैदा, ₹13 लाख मिलेंगे: रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने महिलाओं से की अपील, ‘मदर हिरोइन’ पुरस्कार देने का वादा

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने रूस की महिलाओं से कम से कम 8 बच्चे पैदा करने की अपील की है। मॉस्को में मंगलवार (28 नवंबर,2023) को वर्ल्ड रशियन पीपुल्स काउंसिल को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि देश को उस समय में लौटना चाहिए जब बड़े परिवार आदर्श थे।

राष्ट्रपति पुतिन ने रूसी महिलाओं को 10 या उससे अधिक बच्चे पैदा करने पर 13 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। इस तरह से पुतिन ने सोवियत काल का 1944 का ‘मदर हीरोइन’ पुरस्कार फिर से शुरू कर दिया है। 10 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिला को ये पुरस्कार दिया जाता था।

दरअसल, पूर्व सोवियत देश कोविड और यूक्रेन युद्ध की जंग की वजह से जनसंख्या में कमी से जूझ रहा है। यूक्रेन में युद्ध और गहराते आर्थिक संकट के बीच रूसी जन्म दर लगातार गिर रही है। यूक्रेन के साथ उनके युद्ध में मारे जाने वाले रूसी सैनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे ये देश जनसंख्या संकट के दौर से गुजर रहा है।

इसी को लेकर पुतिन फिक्रमंद हैं। उन्होंने रूस के लोगों से कहा, “हमारी कई दादी और परदादी के सात, आठ या उससे भी अधिक बच्चे थे। आइए हम इन उत्कृष्ट परंपराओं को संरक्षित और पुनर्जीवित करें। रूस में सभी को बड़े परिवारों को आदर्श बनाना चाहिए। परिवार सिर्फ राष्ट्र और समाज की नींव नहीं है। यह एक आध्यात्मिक घटना है, नैतिकता का जरिया है।”

पुतिन ने आगे कहा, “आने वाले दशकों और यहाँ तक कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रूस की जनसंख्या को संरक्षित करना और बढ़ाना हमारा लक्ष्य है। यह रूसी दुनिया, सहस्राब्दी पुराने, शाश्वत रूस का भविष्य है।”

पुतिन का यह बयान रूस में दशकों से गिरती जा रही जन्म दर के बीच आया है। इस दौरान यूक्रेन पर उसके आक्रमण और उसके बाद के आर्थिक नतीजों ने इसे और बदतर हालात में ला दिया है। यूक्रेन में युद्ध की वजह से मोटे अनुमान के मुताबिक 900,000 लोगों को देश छोड़कर भागना पड़ा।

यही वजह रही कि यूक्रेन से लड़ने के लिए अतिरिक्त 300,000 लोगों को रूसी सेना में भर्ती किया गया है। इसकी वजह से रूस में काम करने वाले लोगों की कमी हो गई है। जुलाई में रूसी मीडिया आउटलेट मीडियाज़ोना और मेडुज़ा के किए एक सांख्यिकीय विश्लेषण में कहा गया था कि यूक्रेन के साथ युद्ध में लगभग 50,000 रूसी पुरुषों ने जान गवाई।

वहीं अक्टूबर में आए, ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, रूस के यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में संभवतः 290,000 मारे गए या घायल हुए ।

बताते चलें की 24 साल पहले सत्ता में आने के बाद से ही पुतिन ने लोगों के लिए सरकारी प्रोत्साहनों की एक सीरीज शुरू करके रूस की जन्मदर को बढ़ावा देने की कोशिश की है।

पुतिन ने एक से अधिक बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को पैसा देने की भी शुरुआत की। हालाँकि ये सब भी रूस की आबादी बढ़ाने में काम नहीं आया। ले मोंडे की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की संघीय सांख्यिकी सेवा, रोसस्टैट के आँकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी तक रूसी जनसंख्या 146,447,424 थी, जो 1999 के मुकाबले में कम थी। तब पुतिन पहली बार राष्ट्रपति बने थे।

रोसस्टैट में काम कर चुके जनसांख्यिकी विशेषज्ञ एलेक्सी रशा ने फरवरी में एएफपी को बताया था, “रूस में मजदूरों की कमी है।” उन्होंने कहा था, “यह एक पुरानी समस्या है, लेकिन लोगों के सामूहिक तौर पर देश छोड़ कर जाने से यह और भी बदतर हो गई है।”

रेडियोफ्रीयूरोप/रेडियोलिबर्टी ने 2020 में रिपोर्ट दी थी कि कुछ रूसियों ने कहा था कि सरकार ने बड़े परिवारों के लिए जमीनी भूखंड देने जैसी आर्थिक मदद का जो वादा किया था, वह कभी पूरा नहीं हुआ। ऐसी अफवाह है कि पुतिन के चार से अधिक बच्चे हैं, हालाँकि उन्होंने कभी भी सार्वजनिक तौर पर नहीं स्वीकारा।

अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप स्कीम के लिए आए 25.5 लाख आवेदन, 26% फर्जी निकले: CBI के हवाले होगा मामला

भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ‘अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना’ 2022-23 को लेकर हुई जाँच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। पता चला है कि राज्यों से इस स्कीम के लिए 25.5 लाख आवेदन आए थे, लेकिन जब प्रशासन ने इन आवेदकों के सत्यापन की जाँच की तो पता चला कि उनमें से 26 फीसदी आवेदक फर्जी थे।

दरअसल, पड़ताल के दौरान जब आवदेकों का आधार कार्ड के जरिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया गया तो 6.7 लाख से अधिक आवेदक पाए ही नहीं गए। अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति स्कीम का फायदा देने के लिए फर्जी आवेदक बनाए गए थे जो वास्तव में जमीनी तौर पर कहीं थे ही नहीं।

जाँच से यह भी खुलासा हुआ कि आवेदनों के सत्यापन के लिए जिम्मेदार 1 लाख से अधिक संस्थागत नोडल अधिकारी (INO) और इतनी ही संख्या में संस्थानों के प्रमुख (HoI) आवेदकों के बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान नदारद थे। कुल 5,422 आईएनओ और 4,834 एचओआई गैर हाजिर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, ये सब अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय सीबीआई के साथ साझा करेगा। जाँच एजेंसी पहले से ही अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों की जाँच कर रही है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय ने छेड़ा था जाँच अभियान

इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने छात्रवृत्ति की योजना के मद्देनजर वेरिफिकेशन का अभियान छेड़ा। इस अभियान में फर्जी आवेदकों के सामने आने के बाद मंत्रालय ने कुल 18.8 लाख आवेदकों का सत्यापन किया। इनमें 6.2 लाख वो आवेदक भी शामिल थे जिन्होंने छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, जाँच में सामने आया कि साल 2022-23 में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति स्कीम नवीनीकरण वर्ग के तहत 30 फीसदी आवेदक फर्जी थे।

गौरतलब है कि किसी भी आवेदक को छात्रवृत्ति के देने के लिए सबसे पहले संस्थागत नोडल अधिकारी सत्यापन करता है। इसके बाद जिला स्तर पर नोडल अल्पसंख्यक अधिकारी के अनुमोदन और सही प्रमाणीकरण के बाद छात्रवृत्ति मिलती है। ये पैसा लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे दिया जाता है।

21 राज्यों में 830 संस्थानों के लाभार्थी फर्जी

टीओआई के अनुसार उन्होंने अपनी एक खबर में पहले ही जानकारी दी थी कि राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीकृत 21 राज्यों के 1572 अल्पसंख्यक संस्थानों में से 830 के लाभार्थी फर्जी थे। जिसका खुलासा होने के बाद ही इस जाँच में सीबीआई को शामिल करना पड़ा।

साल 2017-18 से 2021-22 के बीच इन संस्थानों के रजिस्टर्ड लाभार्थियों को कई श्रेणियों में छात्रवृत्ति के तौर पर करीब 145 करोड़ रुपए दिए गए थे। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की जाँच में एक बहुराज्यीय छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा हुआ था।

इसी के बाद अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सार्वजनिक धन के कथित हेरफेर का मामला जुलाई में सीबीआई को सौंप दिया। मंत्रालय ने डेटाबेस की जाँच जारी रखी। यही वजह रही कि मंत्रालय ने 2022-23 के लिए आवेदकों की वास्तविकता को जाँचने के लिए एक खास अभियान के तहत जैव प्रमाणीकरण यानी Bio Authentication किया गया।

जब इस अभियान के पहले चरण में राज्यों के सत्यापित 25.5 लाख आवेदकों की जाँच की गई तो 19.8 लाख आवेदकों ने अपना बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया और बाकी के 5.7 लाख गायब पाए गए। संस्थागत नोडल अधिकारियों और जिला और राज्य नोडल अधिकारियों के स्तर पर सत्यापन के दौर में इन सत्यापित आवेदकों की संख्या और कम होकर 18.8 लाख रह गई।

छात्रवृत्ति के मिलते हैं सालाना 4 हजार से लेकर 25 हजार रुपए

गौरतलब है कि मदरसों से लेकर शीर्ष पायदान के निजी और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों तक 1.8 लाख संस्थान हैं जो अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीकृत हैं। अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति की राशि सालाना 4000 रुपए से लेकर 25,000 रुपए तक होती है। अल्पसंख्यक मंत्रालय छात्रवृत्ति के लिए सालाना 2000 करोड़ रुपए से अधिक जारी करता है।

देश में अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिम, सिख ईसाई,बौद्ध, जैन, पारसी और अन्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के स्टूडेंट के लिए जून 2006 में अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप योजना की शुरू की गई। ये योजना अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को फायदा पहुँचने के लिए बनाई गई है। इस अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप 2023 का मकसद मेधावी अल्पसंख्यक छात्रों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मुहैया कराना है।

केरल में 36 साल की इजरायली महिला की लाश मिली, रेता हुआ था गला: 75 साल के मलयाली पति का दावा- उसके कहने पर की हत्या

केरल के कोल्लम जिले में 36 साल की एक इजरायली महिला की लाश मिली है। उसका गला रेता हुआ था। महिला के 75 वर्षीय मलयाली पति पर ही उसकी हत्या का शक है। मृत महिला की पहचान राधा उर्फ सतवा के तौर पर हुई है।

उसके पति कृष्णचंद्रन उर्फ चंद्रशेखरन नायर को गंभीर चोटों की वजह से तिरुवनंतपुरम के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने संदेह के आधार पर कृष्णचंद्रन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत एफआईआर दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक कृष्णचंद्रन का कहना है कि पत्नी के कहने पर ही उसने उसकी हत्या की और उसके बाद खुद की भी जान देने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक वारदात गुरुवार (30 नवंबर, 2023) को दोपहर करीब 3.30 बजे की है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, “कृष्णचंद्रन और सतवा बीते 16 साल से एक साथ रह रहे हैं। कृष्णचंद्रन पहले ऋषिकेश में योग प्रशिक्षक था और सतवा उसकी छात्रा थी। बाद में दोनों ने शादी कर ली और यह दंपती एक साल से केरल में रह रहा था।”

अधिकारी के मुताबिक आरोपित कृष्णचंद्रन ने बताया है कि कुछ समय से वह और सतवा सेहत संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे थे। इस वजह से दोनों ने आत्महत्या करने की योजना बनाई थे। बकौल आरोपित दोपहर के भोजन के बाद सतवा और उसने खुद को चाकू मार लिया था। कृष्णचंद्रन ने पुलिस को बताया है कि जब चाकू मारने के बाद भी सतवा नहीं मरी तो उसने पति से खुद को मारने के लिए कहा था। जानकारी के मुताबिक, कोट्टियम के जिस घर में कृष्णचंद्रन और सतवा रहते थे उसे रविकुमार और बिंदू ने किराए पर लिया था। बिंदू कृष्णचंद्रन की भतीजी हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार दोनों को घायल हालत में देख एक रिश्तेदार ने मदद के लिए चिल्लाना शुरू किया। इसके बाद कृष्णचंद्रन ने दरवाजा बंद कर दिया। रिश्तेदार ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने गेट तोड़ा और घर के भीतर घुसी। लेकिन तब तक सतवा की मौत हो चुकी थी।

‘गुलाम बनो या फिर इस्लाम अपना लो…’: बेंगलुरु के 48 स्कूलों को बम से उड़ाने की मिली धमकी, पुलिस ने परिसर कराए खाली

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के स्कूलों को एक बार फिर से बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। करीब 48 स्कूलों (कुछ रिपोर्ट में 15-16 तो कुछ 28 और 48 स्कूल) को शुक्रवार (1 दिसंबर 2023) को सुबह एक ईमेल मिला, जिसमें धमकी दी गई कि स्कूल परिसर में बम रखा गया है। इसके बारे में पुलिस को सूचित किया गया। आनन-फानन में पुलिस ने सभी स्कूलों को खाली कराकर तलाशी शुरू कर दी।

पुलिस की तलाशी अभियान में अभी तक कुछ नहीं मिला है। हालाँकि, पुलिस का तलाश अभियान जारी है। साथ में बम निरोधक दस्ते और तोड़फोड़ रोधी जाँच दल भी है। माना जा रहा है कि पिछली बार की तरह ये धमकी भी फर्जी हो सकती है। बता दें कि पिछले साल बेंगलुरु के कई स्कूलों को ईमेल भेजकर बम विस्फोट की धमकी दी गई थी। बाद में यह धमकी फर्जी निकली थी।

घटना के बाद स्कूल ने अभिभावकों को बुलाकर बच्चों को घर भेज दिया। एक स्कूल ने बताया, “आज स्‍कूल प्रशासन एक अप्रत्याशित परिस्थिति का सामना कर रहा है। स्‍कूल में बम होने की धमकी मिली है। छात्रों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि छात्रों को तुरंत स्‍कूल से बाहर निकाला जाए। सुरक्षाबलों की सलाह पर छात्रों को घर भेजा जा रहा है।”

वहीं, शहर के पुलिस कमिश्नर ने कहा, “बेंगलुरु शहर के कुछ स्कूलों को आज सुबह ‘बम की धमकी’ का संकेत देने वाले ईमेल मिले हैं। सत्यापन और पता लगाने के लिए तोड़फोड़ रोधी और बम खोजी दस्तों को सेवा में लगाया गया है। ये हॉक्स कॉल लगती है, फिर भी दोषियों का पता लगाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।”

कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा, “हम ईमेल के सोर्स की पुष्टि कर रहे हैं। हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं। मैंने प्राथमिकता के आधार पर इसकी जाँच करने के लिए पुलिस को सूचित कर दिया है।” वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पुलिस को जाँच करने का निर्देश दिया है। सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं। माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है।

इन स्कूलों को भेजे गए ईमेल में कहा गया है, “26 नवंबर को अल्लाह की राह में शहीद होने वालों ने सैकड़ों मूर्तिपूजकों को मार डाला। हाथ में चाकू लेकर काफिरों पर रखना वाकई पावरफुल अनुभव है। अल्लाह की राह में शहीद होने के लिए सैकड़ों मुजाहीद्दीन युद्ध क्षेत्र में जा रहे हैं। तुम अल्लाह के दुश्मन हो और हम तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को मार देंगे।”

स्कूलों को भेजा गया ईमेल (साभार: टाइम्स नाऊ)

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, इस ईमेल में आगे लिखा है, “तुम लोगों के पास हमारा गुलाम बनने या अल्लाह के असली दीन को अपनाने का विकल्प है। बिस्मिल्लाह हम अल्लाह के सच्चे दीन को पूरे भारत में फैलाएँगे। इस्लाम अपनाओ या इस्लाम की तलवार से अपनी गर्दन कटवाओ। जब हम काफिरों से मिलेंगे तो उनके सिर काट देंगे। उनकी अंगुलियों को काट देंगे।”

गौरतलब है कि साल 2022 में बेंगलुरु के 15 स्कूलों को इसी तरह का एक ईमेल प्राप्त हुआ था। उस ईमेल का धमकी दी गई थी कि स्कूल के परिसर में विस्फोटक लगाए गए है। इसके बाद पुलिस की टीम ने इन स्कूलों की गहन तलाशी ली थी, लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला था। बाद में पता चला कि यह किसी सिरफिरे की शरारत है।

‘इंशाअल्लाह फिलीस्तीन जाना चाहता हूँ’: सिंगर लकी अली ने जताई ख्वाहिश, नेटिजन्स ने वीजा से टिकट तक का बता दिया रास्ता

इजरायल और हमास के बीच चल रही तनातनी के बीच मशहूर गायक लकी अली ने 30 नवंबर को फिलीस्तीन जाने की इच्छा जताई। उन्होंने अपने एक्स अकॉउंट पर लिखा- “इंशाल्लाह मैं फिलीस्तीन जाना चाहता हूँ।”

उनके इस ट्वीट को देखने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्हें बताया गया है कि कैसे उन्हें फिलीस्तीन जाने के लिए एक्स पर लिखने की जरूरत नहीं हैं, वो चाहें तो वैसे भी वीजा लेकर फिलीस्तीन की फ्लाइट पकड़ सकते हैं।

द स्किन डॉक्टर ने लकी अली के पोस्ट पर लिखा, “इजिप्ट की एक फ्लाइट है कल 11:20 की जो दिल्ली से कायरो जाएगी। कायरो से बस और टैक्सी करनी होगी जो सीधे आपको राफाह क्रॉसिंग बॉर्डर तक लेकर जाएगी। वहाँ मिस्र की पुलिस आपसे आपके आने का कारण पूछेगी और दस्तावेज देखेगी। इसके बाद आपको गाजा भेज दिया जाएगा। उम्मीद है आपकी इतने से मदद हो जाएगी।”

अब देखा जाए तो द स्किन डॉक्टर ने एक रास्ता बताया था उन्हें फिलीस्तीन जाने का… लेकिन लकी अली ने इसकी कद्र किए बिना नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- “फिजिशियन तुम अपना इलाज करो।”

लकी अली के ऐसे ट्वीट को देख कई यूजर उन्हें कहने लगे कि इलाज तो लकी को अपना करवाना चाहिए। एक ने कहा कि एक तो स्किन डॉक्टर ने पूरा प्लॉन बनाकर दिया ऊपर से इतनी एहसानफरामोशी…?

बता दें कि इजरायल और हमास के बीच चल रहे तनाव के दौरान एक भी बार लकी अली ने हमास द्वारा 7 अक्टूबर को किए गए हमले की निंदा नहीं की। लेकिन जब इजरायल ने आतंकियों का सफाया शुरू किया तो उनका फिलीस्तीन जाने का मन हो गया।

लोगों ने उनका ऐसा रवैया देख कहा कि भारत ने लकी अली को सबकुछ दिया। मजहब से परे उनसे प्यार किया, लेकिन देखो इनकी तो सारी मोहब्बत उम्माह के लिए हैं। इन्होंने कभी नहीं कहा था कि ये भारत के साथ मिल पाकिस्तान से लड़ना चाहते थे। मगर फिलीस्तीन जाने के लिए ये उतावले हैं।

इस पर इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें सपोर्ट करने आए और समझाया कि फिलीस्तीन में अल अक्सा मस्जिद है जो कि उनके लिए पाक है। लकी अली भी वहीं जाना चाहते हैं। दक्षिणपंथी सिर्फ उनकी इच्छा को आतंकी घोषित करने में लगा है।

हालाँकि इन कट्टरपंथियों ने लकी अली को समर्थन देने के साथ ये साफ नहीं किया कि इसी समय क्यों लकी अली की अल अक्सा मस्जिद देखने की इच्छा उठी।

हमास ने किया था इजरायल पर हमला

बता दें कि हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला किया था। करीबन 5000 रॉकेट गाजा से दागे गए थे। आतंकियों ने महिलाओं का रेप करके उन्हें मार डाला था और कई को अगवा कर लिया था। 1300 से ज्यादा लोग इस हमले में मारे गए थे। वहीं 200 का अपहरण हुआ था।

शिवराज का ‘नारी सम्मान’, ‘लाडली बहना’ ने रखा मान: यूँ ही Exit Polls नहीं दिखा रहे मध्य प्रदेश में फिर से ‘मामा की सरकार’

पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों को लेकर विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल (Exit Poll) आ गए हैं। इनमें राजस्थान और मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनाती हुई नजर आ रही है। बाकी राज्यों- छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम को लेकर एग्जिट पोल भी कन्फ्यूज है।

मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 200 सीटें और सरकार बनाने के लिए कम से कम 116 सीटों की जरूरत है। अगर एग्जिट पोल के रुझानों को देखें तो अधिकांश एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार स्पष्ट बहुमत के साथ वापसी कर रही है। जिन एग्जिट पोल में भाजपा को कम सीटें दी गई हैं, वे बहुमत के आसपास ही हैं।

‘इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया’ और ‘न्यूज 24-टुडेज चाणक्य’ ने भाजपा को 151 सीटें दी हैं, जबकि ‘इंडिया टीवी-सीएनएक्स’ ने 149 और ‘रिपब्लिक-मैट्रिज’ ने 124 सीटें दी हैं। इन चार एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल में भाजपा को स्पष्ट और भारी बहुमत दी है।

वहीं, ‘टाइम्स नाऊ-ईटीजी’ और ‘टीवी9-पोलस्ट्रैट’ ने मध्य प्रदेश में भाजपा को 111 सीटें दी हैं। अगर इनके एग्जिट पोल को भी सही माना जाए तो भी भाजपा बहुमत के आँकड़े से सिर्फ 5 कदम पीछे है। वहीं, दैनिक भास्कर और एबीपी-सी वोटर्स ने भाजपा को क्रमश: 105 और 100 सीटें दी हैं।

इस तरह 8 एजेंसियों के एग्जिट पोल में मध्य प्रदेश में भाजपा को चार एजेंसियों ने पूर्ण बहुमत और दो एजेंसियों ने ‘बहुमत के नजदीक’ के नजदीक के आँकड़े दिए हैं। सिर्फ तीन ही एजेंसियाँ हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस को बहुमत दिया है। इनमें एबीपी-सी वोटर्स ने कॉन्ग्रेस को 125 सीटें, टाइम्स नाऊ-ईटीजी ने 117 सीटें और टीवी9-पोलस्ट्रैट ने 116 सीटें दी हैं।

अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है और पार्टी शिवराज सिंह चौहान को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाती है तो मुख्यमंत्री के रूप में यह उनका पाँचवाँ कार्यकाल होगा। इस तरह मध्य प्रदेश की जनता अपने ‘मामा’ पर एक बार फिर विश्वास करती नजर आ रही है। भाजपा अगर एक बार फिर सरकार बनाती है तो इसमें उसकी जनहित नीतियों का सबसे अधिक श्रेय जाएगा।

भाजपा सराकर ने राज्य में महिलाओं, किसानों, गरीब-मजदूरों के लिए विशेष योजनाएँ चलाईं। अगर चौहान सरकार की वापसी होती है तो इसमें महिलाओं का विशेष योगदान होगा। भाजपा सरकार में मध्य प्रदेश की महिलाओं का अटूट विश्वास दिख रहा है। चौहान सरकार ने महिलाओं के लिए लाडली जैसी कई योजनाएँ चलाईं, जिनकी बदौलत उनकी लोकप्रियता में और वृद्धि हुई।

मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा शुरू गई महिलाओं की एक प्रसिद्ध योजना है ‘लाडली बहन योजना’। इस योजना के तहत राज्य की लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं को अक्टूबर महीने से 1,250 रुपए दिए जा रहे हैं। इससे पहले यह राशि 1000 रुपए थी। सीएम चौहान ने अगस्त 2023 में कहा था कि इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपए प्रति माह की जाएगी।

लाडली बहना योजना इस साल 10 जून को शुरू हुई थी। राज्य सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इस सरकारी योजना के तहत पात्र महिलाओं को वित्तीय सहायता के रूप में लगभग 3,628.85 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस योजना में पहले 23 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ मिल रहा था। बाद में चौहान सरकार ने उम्र घटाकर 21 वर्ष कर दी।

इसी तरह 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को पहले 600 रुपए प्रति माह दिए जाते थे। उन्हें भी अब राज्य सरकार 1000 रुपए महीना दे दे रही है। इसके अलावा, प्रदेश की जिन महिलाओं के पास रहने के लिए जमीन नहीं है उन्हें फ्री में प्लॉट दिया जाएगा। बढ़े हुए बिजली बिल माफ होंगे। 

इसके अलावा, शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के आरक्षण में बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा है कि शिक्षकों भर्ती में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। अन्य सरकारी भर्तियों में भी महिलाओं का आरक्षण 35% होगा। इसी तरह स्थानीय निकाय चुनाव में 50 फीसदी, पुलिस की नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि अगले वर्ष से प्रदेश में शराब की दुकानें बंद करने की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा था कि नई शराब नीति बनाई जाएगी, जिसमें जहाँ आधी से अधिक यानि 50% से अधिक महिलाएँ चाहेंगी की शराब की दुकान न हो तो वहाँ शराब की दुकानें बंद की जाएँगी। उन्होंने प्रदेश की लड़कियों की पढ़ाई की फीस का जिम्मा खुद उठाने का ऐलान किया था। 

बेटियों के जन्म होने पर परिवार की सोच बदलने के लिए चौहान सरकार ने एक अप्रैल 2007 को ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की थी। इसमें बेटियों के जन्म को लेकर सकारात्मक सोच के साथ-साथ लिंगानुपात में सुधार, उनकी शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार आदि के लिए शुरू की गई थी। इसके भी सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं।

चौहान सरकार ने मध्य प्रदेश में महिलाओं की शिक्षा पर भी खूब काम किया। साल 2005 में प्राथमिक स्तर की शिक्षा में लड़कियों के स्कूल छोड़ने का दर 18.26 प्रतिशत था, वो 2023 में घटकर 6.63 प्रतिशत रह गया। माध्यमिक स्तर पर यह दर 18.41 प्रतिशत से रहकर 1.26 प्रतिशत रह गया है। इसी महिला साक्षरता भी 44 से बढ़कर 65.4 प्रतिशत हो गई है।

शिवराज सरकार ने महिलाओं से संबंधित कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपए की ‘नारी सम्मान कोष’ की भी स्थापना की है। इसके अलावा, छोटे व्यवसायों के लिए ब्याज मुक्त कर्ज पीएम स्वनिधि योजना एवं मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजनाओं के अंतर्गत दिया जा रहा है। इसमें भी महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘स्कूटी योजना के तहत सरकार हर साल 12वीं के टॉपर्स छात्राओं को स्कूटी खरीदने के‍ लिए पैसे दे है।

मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना’ भी चलाई जाती है। इस योजना के तहत गरीब परिवार की बेटियों की शादी-निकाह के लिए सरकार द्वारा 51,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। इसके अलावा, महिलाओं को 450 रुपए में रसोई गैस सिलेंडर जैसी योजनाएँ भी हैं।

केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि के माध्यम से मिलने वाले 6,000 रुपए के अलावा मध्य प्रदेश सरकार किसान कल्याण योजना के तहत राज्य को किसानों को 4,000 रुपए वार्षिक देती है। इस तरह लाभार्थी किसानों को साल में कुल 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिल जाती है।

इस तरह, राज्य की आबादी में 50 प्रतिशत का योगदान देने वाली महिलाओं पर केंद्रित योजनाओं के कारण शिवराज सिंह चौहान का प्रेदश की महिलाओं के बीच अच्छी पैठ है। संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में इस बार मध्य प्रदेश में 77.15 फीसदी का बंपर मतदान हुआ है। पिछले विधानसभा चुनावों की अपेक्षा इसमें 2.10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

इस बार के मतदान में महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी रही। राज्य में उनकी कुल वोटिंग जनसंख्या का 76.02 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया है। साल 2003 में यह प्रतिशत 62.14 था, जबकि साल 2018 के चुनाव में यह प्रतिशत 74.02 था। इस तरह भाजपा की कल्याणकारी योजनाओं की वजह से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

UP की मस्जिद में 11 साल की बच्ची से बलात्कार, खून से लथपथ पहुँची घर: जिस मौलवी से पढ़ती थी उर्दू, उसने ही की दरिंदगी

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की एक मस्जिद में 11 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के आरोप में पुलिस ने मौलवी मुंतजिर आलम को गिरफ्तार किया है। 30 साल का आलम मस्जिद में बच्चों को उर्दू की तालीम देता था। घटना कुरारा थाना क्षेत्र की है।

हमीरपुर सदर के सीओ राजेश कमल ने बताया है कि बुधवार (29 नवंबर 2023) को एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी। कुरारा पुलिस ने उपयुक्त धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश यादव के मुताबिक आरोपित मौलाना पर बलात्कार के साथ ही पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

पीड़ित बच्ची के चाचा ने इस संबंध में कुरारा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक बुधवार सुबह 7 बजे 11 साल की बच्ची अपने छोटे भाई के साथ घर से मस्जिद में ऊर्दू पढ़ने के लिए गई थी। जब बच्ची मस्जिद में पढ़ने के लिए पहुँची तो आरोपित मौलाना ने बच्ची के भाई को टॉफी देकर बाहर पढ़ने बैठा दिया। इसके बाद मौलवी बच्ची को मस्जिद में बने एक कमरे के अंदर ले गया। वहाँ जाते ही मौलवी ने दरवाजा बंद कर बच्ची के साथ दरिंदगी की।

बच्ची के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुन मस्जिद में पढ़ने आए अन्य बच्चों ने बाहर से दरवाजा पीटना शुरू किया। उसके बाद आरोपित मौलवी ने बच्ची को छोड़ा। पीड़ित बच्ची खून से लथपथ होकर घर पहुँची तो परिवार वालों के होश उड़ गए। उसने अपनी माँ को खुद के साथ हुई दरिंदगी के बारे में बताया। इसके बाद परिवार थाने पहुँचा।

जानकारी के मुताबिक आरोपित मौलवी मुंतजिर आलम बिहार के पूर्णिया जिले के कोचगढ़ का रहने वाला है। वह करीब 4-5 साल पहले हमीरपुर आया था। मुस्लिम समाज की रजामंदी से उसे मस्जिद में समाज के बच्चों को ऊर्दू पढ़ाने के लिए रखा गया था।

जिस पाकिस्तानी मौलाना पर रखा बेटे का नाम, उसके गोद में सना खान ने डाला अपना बच्चा: Video देख बोले यूजर्स- गैर महरम… तेरी हया कहाँ है

बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री सना खान ने अपने शौहर मुफ्ती अनस के साथ पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील से मुलाकात की थी। उन्होंने अपने बेटे का नाम भी चूँकि मौलाना के नाम पर ही ‘जूनियर तारिक जमील’ रखा है, तो ऐसे में वो उसे मौलाना से मिलाने ले गई थीं। ये मुलाकात सऊदी अरब में उमराह के दौरान हुई थी। जिसकी वीडियो सना ने शेयर की थी और लंबा पोस्ट लिखा था। कई लोगों ने जहाँ इस वीडियो को देख तारीफ की, वहीं कुछ ने सना के अंदाज पर नाराजगी भी जताई।

दरअसल, सना खान द्वारा शेयर की गई वीडियो में सना खान और उनके शौहर मौलाना पहले तोहफा देते दिख रहे हैं। इसके बाद मौलाना तारिक उनके बच्चे ‘जूनियर तारिक जमील’ के साथ खेलते दिखते हैं। बीच में बच्चा उनकी दाढ़ी भी पकड़ता है जिसे तुरंत सना और मुफ्ती अनस छुड़वा देते हैं। अगली क्लिप में वो मौलाना के पास बैठी दिखती हैं।

ये क्लिप देखने के बाद कुछ कट्टरपंथियों ने सना की वीडियो पर उन्हें कहा, गैरमहरम के आगे औरत का ऐसा बैठना कैसा है जी ये तारिक भाई से ही पूछो।

देख सकते हैं एक यूजर ने लिखा- अस्तागफिरउल्लाह, तू अपना चेहरा ढके बिना गैर महरम के इतने करीब कैसे बैठी, उन्हें खुद बच्चा दे रही है, तेरी हया कहाँ है।

कुछ यूजर्स ने सना के पोस्ट पर भी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि मौलाना तारिक जमील को देखकर अल्लाह की याद आती है। फाबेहा ने लिखा- मौलाना को देखके अल्लाह याद आ जाते हैं? कुछ समझ नहीं आया ये अल्लाह को याद करने के लिए किसी की जरूरत नहीं है।

इन नेगेटिव कमेंट्स के बीच कई मुस्लिमों ने सना की तारिक जमील से मुलाकात को सराहा। मोहम्मद युनूस ने दुआ कि अल्लाह आपकी औलाद को मोहम्मद जमील जैसा बनाए।

सना खान का पोस्ट

सना खान ने इस मुलाकात के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “आपको तहे दिल से प्यार और इज्जत तारिक जमील।” आगे उन्होंने लिखा- जूनियर तारिक जमील ने सीनियर हजरत मौलाना तारिक जमील साहब से मुलाकात की। मौलाना को देखकर वाकई अल्लाह याद आ जाता है। वह वाकई खूबसूरत इंसान हैं। मेरे और मेरे जैसे तमाम लोगों के लिए वो हिदायत का जरिया हैं। अल्लाह उनकी रक्षा करे और अच्छा स्वस्थ दे।

अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा- “उन्होंने हमेशा मुझे बेटी बोला और अपने शब्दों के जादू से मुझे बहुत सब्र दिया। लोग आपको तोड़ने की कोशिश करते हैं और आपके माफद को टारगेट करते हैं लेकिन आपको हमेशा मजबूत रहना है। यही अल्लाह द्वारा लिया गया इम्तेहान है।”

बता दें कि तारिक जमील तब्लीगी जमात के सदस्य हैं। जिनकी उटपटांग और महिला विरोधी बातों को लेकर दुनिया भर में उनकी मजम्मत हो चुकी है। इस साल जून में मौलाना तारिक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह जन्नत के हूरों के बारे में बता रहे थे। उस वीडियो में उन्होंने कहा था कि जन्नत में हूरें एक नहर से पैदा होती हैं और उनकी लंबाई 130 फीट होती हैं।