बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मणिपुर की मैतई समाज से आने वाली एक्ट्रेस लिन लैशराम से पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह कर लिया है। रणदीप हुड्डा ने अपनी विवाह की कुछ झलकियाँ सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा- “आज से हम दोनों एक हैं।”
लिन की फोटो देखने के बाद कुछ लोगों ने कहा कि आज तक सिर्फ और सिर्फ स्कूल की किताबों में मणिपुर की ड्रेस को दिखाया गया था। लेकिन आज रणदीप और लिन के कारण लोग देख पाए कि वाकई ऐसे पारंपरिक परिधानों की आज भी कदर की जाती है।
हर्षा कुमारी ने लिखा- “वाओ, खूब सुंदर। स्कूल में सोशल स्टडीज की किताब में ही पढ़ा था मणिपुर वालों के ड्रेस के बारे में। आज देखा भी बहुत सुंदर है।
सयानी गुप्ता ने लिखा- “उफ्फ!!! बिलकुल साँस थामने वाला है। कभी इतनी खूबसूरत दुल्हन नहीं देखी। लिनला तुम जादू हो। तुम दोनों को आशीर्वाद।”
अजय कटारिया ने लिखा- थैंक गॉड। कम से कम टिपिकल बॉलीवुड पिंक आउटफिट वाली शादियों से कुछ अलग देखने को मिला।
मृदुला ने लिखा- “वाह शुभकामनाएँ। मुझे सच में इस पर गर्व है। इस लड़की ने मनीष मल्होत्रा और सब्याची लहंगे के ट्रेंड को छोड़ कर अपने मणिपुरिया परंपरा से जुड़ी रही। मुझे इस लड़की की सादगी पसंद है। कोई शोबाजी नहीं। बिलकुल मणिपुर की ट्रेडिशनल वेडिंग। जो लोग रेसिस्ट कमेंट कर रहे हैं उनकी शायद पता नहीं मणिपुर भारत में है। लड़की भारतीय है।”
कुछ लोगों ने इस पारंपरिक परिधान में जोड़े को देख कहा कि बॉलीवुड आजतक हल्के रंगों में शादी की सुंदरता को फीका करता आ रहा था, उससे ये शादी थोड़ी अलग है।
बता दें कि रणदीप हुड्डा ने 29 नवंबर को अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड रही लिन लैशराम संग शादी मणिपुर में की। शादी को मणिपुर रीति-रिवाजों से किया गया। शेयर की गई तस्वीरों में देख सकते हैं कि रणदीप हुड्डा ने Kokyet पगड़ी बाँधी थी। ये मणिपुर में दूल्हे की पारंपरिक पोशाक है। वहीं लिन ने जो पहना था उसे पोटलोई कहते हैं। ये मोटे कपड़े और बैंबू से बनता है। इसमें सिलेंड्रिकल स्कर्ट बनी होती है जिसे साटिन कपड़े से सजाया जाता है।
शादी से पहले रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए बताया था कि वो 29 नवंबर को शादी करने वाले हैं। उनके पोस्ट मे महाभारत का जिक्र था। उनके पोस्ट में लिखा था- “महाभारत की तर्ज पर जहाँ अर्जुन ने मणिपुरी योद्धा राजकुमारी चित्रांगदा से शादी की थी।वहीं पर हम भी दोस्तों और परिवार के आशीर्वाद से शादी कर रहे हैं।हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमारी शादी 29 नवंबर 2023 को इम्फाल, मणिपुर में होगी।इसके बाद मुंबई में एक रिसेप्शन होगा।हम इस यात्राके लिए तैयार हैं।हम संस्कृतियों के इस मिलन के लिए आपका आशीर्वाद और प्यार चाहते हैं, जिसके लिए हम ताउम्र ऋणी और आभारी रहेंगे।लिन और रणदीप।”
केंद्र की मोदी सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ यानी पीएमजीकेएवाई को 5 और साल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत 1 जनवरी 2024 से 5 साल तक 81.35 करोड़ लोगों को फ्री राशन मिलेगा। इस पर केंद्र सरकार 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी।
कोविड महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने गरीबों को राहत देने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना में लाभार्थियों को चावल, गेहूँ और मोटा अनाज/पोषक अनाज दिया जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स/ट्विटर पर किए एक पोस्ट में कहा है, “देश के मेरे परिवारजनों में से कोई भी भूखा नहीं सोए, हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। अपनी इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले 5 वर्षों तक बढ़ा दिया है। यानी मेरे गरीब भाई-बहनों के लिए वर्ष 2028 तक मुफ्त राशन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। इसका फायदा करीब 81 करोड़ देशवासियों को मिलेगा। मुझे विश्वास है कि हमारा यह प्रयास उनके जीवन को अधिक से अधिक आसान और बेहतर बनाएगा।”
देश के मेरे परिवारजनों में से कोई भी भूखा नहीं सोए, हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। अपनी इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पांच वर्षों तक बढ़ा दिया है। यानि मेरे गरीब भाई-बहनों के लिए वर्ष 2028 तक मुफ्त राशन की व्यवस्था निरंतर… https://t.co/H4vGSaChyA
ये फैसला देश की जनसंख्या की बुनियादी भोजन और पोषण जरूरतों को पूरा करने और उनके कल्याण के लिए पीएम मोदी की मजबूत प्रतिबद्धता का सुबूत है। केंद्रीय सूचना-प्रसारण और युवा मामले एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि बीते 5 साल में लगभग साढ़े 13 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। जो अपने आप में मोदी सरकार के कार्यक्रम और नीतियों की बहुत बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा, “फैसला किया गया है कि जनवरी 2024 से पीएमजीकेएवाई को अगले पाँच साल के लिए बढ़ा दिया जाएगा। देश में जितने चिन्हित परिवार हैं उनको हर महीने 5 किलो खाद्यान मिलेगा। इस तरह से अंत्योदय के परिवारों को 35 किलो प्रतिमाह खाद्यान मुफ्त में मिलता रहेगा।”
1 जनवरी, 2024 से 5 साल के लिए पीएमजीकेएवाई के तहत मुफ्त दिए जाने वाले चावल, गेहूँ और मोटा अनाज भारत की गरीब आबादी की आर्थिक मुश्किलों में कमी लाएँगे। इस योजना के तहत वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के जरिए योजना के लाभार्थी देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से मुफ्त खाद्यान्न ले सकते हैं।
हेनरी किसिंजर की मृत्यु हो गई है। वे 100 साल के थे। वह साल 1973 से 1977 के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री और 1969 से 1975 तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे। नोबल पीस प्राइज विनर किसिंजर को भले कई लोग ‘महान डिप्लोमेट’ मानते हैं, लेकिन वे अपनी कूटनीति से भारत पर प्रभाव नहीं डाल पाए। इस बौखलाहट में उन्होंने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और भारतीयों के लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया था। 2005 में उन्होंने इसके लिए माफी भी माँगी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जेराल्ड फोर्ड के कार्यकाल में किसिंजर विदेश मंत्री रहे थे। उन्हें अमेरिका के विदेश संबंधों में बड़ा नाम माना जाता है। 1973 में इजरायल और अरब राष्ट्रों के बीच योम किप्पुर युद्ध, वियतनाम युद्ध आदि में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका और चीन को करीब लाने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है। उनके लगातार एक देश से दूसरे देश जाकर कूटनीति करने के स्टाइल को ‘शटल डिप्लोमेसी’ का नाम दिया गया था।
किसिंजर की मृत्यु कनेक्टीकट स्थित उनके घर पर 29 नवंबर 2023 को हुई। उनकी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है। उनकी मौत को लेकर पूरी दुनिया से शोक सन्देश भेजे जा रहे हैं। कुछ जगह से उनकी मौत पर विपरीत प्रतिक्रिया भी आई हैं। किसिंजर, अमेरिका में काफी सम्माननीय थे. लेकिन भारत में उनको इतने अनुकूल रवैये से नहीं देखा जाता है। उनके भारतीय विरोधी बयान और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के लिए अभद्र भाषा इस्तेमाल करने को लेकर उनकी भारत में काफी आलोचना होती रही है।
किसिंजर ने भारतीयों और प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को लेकर क्या कहा?
नवम्बर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्वी पाकिस्तान (जो कि बाद में बांग्लादेश बना) को लेकर तल्खी बढ़ रही थी। इस दौरान भारत को जहाँ सोवियत संघ का साथ मिला हुआ था तो वहीं पाकिस्तान के लिए अमेरिका पूरा जोर लगा रहा था।
किसिंजर और निक्सन इस बात से खफा थे कि भारत मुक्ति वाहिनी (बांग्लादेश को आजाद करवाने के लिए बनाई गई गुरिल्ला फ़ौज) को ट्रेनिंग और अन्य सहायता दे रहा है। वह भारत पर दबाव बनाना चाहते थे कि वह बांग्लादेश से आ रहे शरणार्थियों को चुपचाप ले और पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी एक्शन ना ले।
इंदिरा गाँधी के साथ हेनरी किसिंजर (चित्र साभार: Bangla Tribune)
इसी समबन्ध में इंदिरा गाँधी अमेरिका से बातचीत करने के लिए 4 और 5 नवम्बर 1971 को अमेरिका के दौरे पर गईं। उनके दौरे के दूसरे दिन तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन और सुरक्षा सलाहकार किसिंजर बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत का ब्यौरा अमेरिका के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है।
इसी बातचीत के दौरान निक्सन ने कहा, “यही कारण है कि वह (इंदिरा गाँधी) एक कुतिया है।” इसके जवाब में किसिंजर कहते हैं, “कुछ भी हो भारतीय तो हरामी हैं ही।” इसके कुछ देर बाद बातचीत में किसिंजर कहते हैं, “यह बात जरूर है कि वह (इंदिरा गाँधी) एक कुतिया है, लेकिन हम जो चाहते थे वह हमें मिल गया।”
किसिंजर और निक्सन के बीच बातचीत का अंश (चित्र साभार: US State Department)
इसके बाद फिर से एक बार किसिंजर यही बात दोहराते हैं। वह कहते हैं, “हालाँकि, वो एक कुतिया है, लेकिन राष्ट्रपति जी आपको यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए कि अपनी मर्जी का काम हो गया।” आगे वह कहते हैं, “वह एक कुतिया जरूर है, लेकिन मैं उसके साथ आज नरमी बरतूँगा।”
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की ‘दारा शिकोह फाउंडेशन’ ने कश्मीर में पाकिस्तान के हिंदू मंदिरों के तोड़े जाने पर संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को (UNESCO) को पत्र लिखा है। इसमें फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहम्मद आमिर राशिद ने लिखा है कि कश्मीर में पाकिस्तानी सरकार ने हेरिटेज साइट हिंदू मंदिर ‘शारदा पीठ’ की दीवार को बगैर अदालती आदेश के ढहा दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सरकार सांस्कृतिक विरासत हिंदू मंदिर ‘शारदा पीठ’ को जानबूझ कर निशाना बना रही है। वो वहाँ अपने फौजियों के लिए कॉफी हाउस बनाने पर आमादा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की नीलम वैली में शारदा पीठ हिंदू मंदिर के बचे हुए अवशेष हैं और शिक्षा का प्राचीन केंद्र हैं।
उन्होंने अपने इस पत्र में यूनेस्को के महानिदेशकों से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। उन्होंने ये भी लिखा कि यूनेस्को को मंदिर के पुनर्वास और संरक्षण काम को अपने हाथ में लेना चाहिए। फाउंडेशन के अध्यक्ष राशिद ने इस पत्र में एक अन्य हिंदू मंदिर का भी हवाला दिया है जो बकायदा पाकिस्तान सरकार तोड़ रही है।
Hindu Minority under attack in Pakistan. Hindu Temple at Tharparkar Mithi, Sindh Hinglaj Mata Mandir is being demolished by Pakistan’s anti encroachment Court in Mirpurkhas of Sindh. Will they ever demolish a mosque in Pakistan similarly? The world remains silent on such abuse. pic.twitter.com/Ei3w254gNw
उन्होंने कहा, “हमने पत्र में माँग की है कि यूनेस्को महानिदेशक को स्थानीय प्रतिनिधि को बुलाना चाहिए और जब यूनेस्को ने खुद इसे सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है तो इसे संरक्षित करने के लिए शारदा पीठ का पुनर्वास और पुनरुद्धार किया जाना चाहिए।”
राशिदके मुताबिक, ”हमने यूनेस्को के महानिदेशक को एक पत्र लिखा है, जिन्होंने हाल ही में उपाध्यक्ष की जगह पाकिस्तान को दी और शारदा पीठ के सांस्कृतिक विरासत होने का ऐलान किया। इसके बावजूद पाकिस्तानी सरकार ने पीओके के अंदर पाकिस्तानी सैनिकों के लिए बनाए जा रहे कॉफी हाउस को बढ़ाने के लिए जानबूझकर शारदा पीठ की कुछ दीवारों को नुकसान पहुँचाया है। जबकि अदालत का आदेश भी है कि उसे सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना है, इसके बावजूद पाकिस्तानी सेना ने 26/11 की बरसी पर भारतीय लोगों की भावनाओं और खासकर देशभर के हिंदू लोगों की आस्था को जानबूझकर चोट पहुँचाई है।”
मोहम्मद राशिद का कहना है, ”इस घटना को खास तौर पर इसलिए अंजाम दिया गया है ताकि कहीं न कहीं उनकी कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा मिले। कॉफी हाउस की आड़ में वे सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद शारदा पीठ को नुकसान पहुँचा रहे हैं। वहाँ हिंगलाज मंदिर भी है। तीन-चार हफ्ते के भीतर कई मंदिरों को बकायदा तोड़ा गया है।”
गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने हिंदू समुदाय पर अत्याचारों में इजाफा करते हुए सिंध प्रांत में एक प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर को ध्वस्त किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेश के बावजूद इस पर रोक लगाने के बावजूद विध्वंस को मंजूरी दे दी गई।
पाकिस्तान में हिंदू मंदिर के विध्वंस की ये अकेली घटना नहीं है। ये वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए पाकिस्तान की असहिष्णुता का एक नमूना भर है। इस देश में मंदिरों का यह विध्वंस धरोहरों के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के कोशिशों को धत्ता बताता है।
ये इस मुल्क में सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों की रक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। इस तरह के वाकये पाकिस्तान जैसे मुस्लिम बहुसंख्यक मुल्क में हिंदुओं के लगातार और बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पीड़न को जाहिर करती है।
अमेरिका ने पिछले दिनों दावा किया था कि उसने अपनी जमीन पर खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को मार गिराने की साजिश को नाकाम कर दिया है। इस दावे की जाँच के लिए भारत ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। अब अमेरिकी न्याय विभाग ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपए) में पन्नू की सुपारी दी गई थी। पन्नू आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का सरगना है।
बयान में दावा किया गया है कि इस साजिश के पीछे एक भारतीय अधिकारी और निखिल गुप्ता थे। कथित तौर पर जिस ‘हिटमैन’ को सुपारी दी गई, वह अमेरिकी पुलिस का ‘खबरी’ था। पूरी साजिश में चार लोगों को शामिल बताया गया है। दावा है कि यह साजिश इस साल मई-जून के आसपास रची गई थी।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अपने बयान में साजिश में शामिल भारतीय अधिकारी की पहचान का खुलासा नहीं किया है। उसे CC1 नाम दिया गया है। 52 साल के निखिल गुप्ता को मास्टरमाइंड बताया गया है। साजिश में शामिल तीसरे और चौथे व्यक्ति की पहचान क्रमश: CS और US के तौर पर बताई गई है। ये दोनों ही अमेरिका के एजेंट हैं। कथित तौर पर पन्नू को मारने के लिए CS ने निखिल गुप्ता से US को मिलवाया था।
On Gurpatwant Singh Pannun killing row, US Justice Dept says "Indian govt employee working with others…directed a plot to assassinate…political activist"; US authorities says hitman who was undercover U.S. law enforcement officer was given $100,000 to kill Pannu pic.twitter.com/yVL8U0MXKP
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट का दावा है कि CC1 ने निखिल को पन्नू को मारने का आदेश दिया। निखिल ने US को इसके लिए सुपारी दी थी। पन्नू को मारने के लिए 1 लाख डॉलर में US के साथ डील हुई है। इसमें 15,000 डॉलर का उसे अग्रिम भुगतान किया गया था। US को यह पैसे CC1 और निखिल ने न्यूयॉर्क में दिलवाए। इसकी कुछ तस्वीरें भी बाहर आई हैं। जस्टिस डिपार्टमेंट का कहना है कि निखिल गुप्ता को अमेरिकी सरकार के कहने पर चेक रिपब्लिक ने गिरफ्तार कर लिया है।
गौरतलब है कि भारत ने इस मामले में जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि अमेरिका द्वारा दी गई जानकारी को भारत गंभीरता से लेता है और इस विषय में जाँच कर रहा है। जाँच कमिटी का गठन 18 नवम्बर 2023 को किया गया था।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के इस दस्तावेज में 18 जून 2023 को कनाडा में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी जिक्र है। निज्जर की हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया था, जिसे भारत ने बकवास बताया था।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 24 नवंबर 2023 को सरकारी बस कंडक्टर पर ‘चापड़’ से हमला करने वाला बी.टेक छात्र लारेब हाशमी (20) पाकिस्तान के कट्टरपंथी मौलवी खादिम हुसैन रिजवी का फैन निकला। पुलिस जाँच में सामने आया कि वो मौलवी खादिम हुसैन रिजवी की वीडियोज को सुनता था।
उसने हमले के बाद बनाए गए वीडियो में भी इस मौलवी का जिक्र किया था। उसका कहना था कि हरिकेश विश्वकर्मा ने इस्लाम का अपमान किया इसलिए उसने उसे मारा। हालाँकि प्रत्यक्षदर्शी ड्राइवर मंगल प्रसाद ने बताया था कि लारेब ने किराए को लेकर हुई बहस के बाद जानलेवा हमला किया।
Kanhaiyalal like incident in Prayagraj. Ashiq-e-Rasool Lareb Hashmi, a B. Tech. student after the attack ? pic.twitter.com/zQqbs9BkGc
— Sanjay Dixit ಸಂಜಯ್ ದೀಕ್ಷಿತ್ संजय दीक्षित (@Sanjay_Dixit) November 24, 2023
खादिम हुसैन रिजवी का दीवाना था लारेब हाशमी
प्रयागराज के यूनाइटेड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च में हाशमी बीटेक छात्र था। अपनी वीडियो में लारेब ने बोला था, “वो (हरिकेश विश्वकर्मा) मुस्लिम को गाली दे रहा था। मैंने उसे मारा है इंशाअल्लाह वो बचेगा नहीं, ए खादिम हुसैन रिज़वी, आपने कहा था, अल्लाह के नाम पर निकलो, फरिश्ते आएँगे, इस्लाम के दुश्मनों की लाशों का ढेर लगा दो।”
रिजवी से प्रेरित लारेब कह रहा था, “आपने (रिज़वी) हमसे कहा था कि अगर हम अल्लाह के रास्ते पर चलेंगे तो फ़रिश्ते आएँगे। आपने कहा है कि न केवल एक शख्स को मार डालो बल्कि इस्लाम के दुश्मनों की लाशों का ढेर लगा दो।”
जिस मौलाना रिज़वी का ये लारेब हाशमी जिक्र कर रहा था। वो पाकिस्तान के कट्टर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) का संस्थापक था। इस कुख्यात इस्लामिक मौलवी की 1955 से लेकर 2020 तक पाकिस्तान में तूती बोलती थी।
इसने वहाँ सख्त ईशनिंदा कानूनों को संरक्षित करने के लिए एक अभियान चलाया था। वह वहाँ खासा मशहूर था खासकर पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में वो खासा सक्रिय था। रिज़वी 19वीं सदी के इस्लामिक उपदेशक, बरेलवी दीन की नींव रखने वाले इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी का चेला था।
‘ईशनिंदा’ के नाम पर काटा था खासा बवाल
रिजवी को पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है। साल 2017 में उनके किए प्रदर्शनों में कम से कम छह लोगों की जान गई और 200 लोग घायल हो गए थे।
ये प्रदर्शन महज इस बात पर किए गए थे कि पाकिस्तानी सरकार ने चुनावों में ली जाने वाली कसम में एक मामूली बदलाव किया था, जिसका संबंध पैगंबर मुहम्मद से जुड़ा था। इस बदलाव से अहमदी संप्रदाय को लाभ पहुँचने वाला था।
Khadim Hussain Rizvi has been taken into protective custody by police and shifted to a guest house.They insisted to come to Rwp refusing Governments proposal for alternative arrangements It’s to safeguard public life, property and order and has to do nothing with Asia Bibi case
जनता के गुस्से को भाँपते हुए पाकिस्तानी सरकार ने इसे ‘क्लर्क की गलती’ मानते हुए तुरंत अपना फैसला रद्द कर दिया। इसके बाद भी विरोध जारी रहा और तत्कालीन कानून मंत्री के इस्तीफा सौंपने के बाद ही इसे बंद किया गया।
रिजवी की छत्रछाया में साल 2018 में टीएलपी ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आसिया बीबी को बरी किए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया और उन्हें 8 साल मौत की सजा के इंतजार में जेल में बिताने पड़े।
इसके बाद ही रिज़वी को लेकर पाकिस्तानी सरकार हरकत में आई और उसे हिरासत में लिया गया। उस पर देशद्रोह और राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया। इसी इस्लामिक मौलवी रिजवी ने ‘पैगंबर मुहम्मद कार्टून प्रतियोगिता’ का ऐलान करने वाले डच राजनेता गीर्ट वाइल्डर्स के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
तब उसने डच राजदूत को देश से निष्कासित करने और नीदरलैंड के साथ सभी राजनयिक संबंधों को खत्म करने की भी माँग की थी। यही नहीं 2020 में फ्रांसीसी स्टायरिकल मैग्जीन शार्ली एब्दो के पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापने पर फ्राँस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में रिज़वी सबसे आगे रहा था।
Eminent Pakistani Islamic preacher Khadim Rizvi threatens to nuke France.Wants Pak to do an atom bomb strike on France (educated Pakistani ISI agents like David Headley have plotted terror attacks in Europe in the past. World needs to crack down on global epicentre of terror Pak) https://t.co/RI0D2kNswy
तब रिजवी ने फ्राँसीसी उत्पादों के बहिष्कार का भी आह्वान किया था। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से इस्लामाबाद से फ्राँसीसी राजदूत को वापस भेजने की माँग भी की थी।
इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान यूरोपीय देश ने कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद से लड़ने की कसम खाई थी। इसके बाद रिज़वी ने पाकिस्तान को ‘इस्लामोफोबिया’ के कथित कृत्य के लिए फ्रांस के खिलाफ परमाणु हमले शुरू करने को कहा था।
उसकी मौत के बाद भी टीएलपी ने ईशनिंदा के नाम पर खादिम रिज़वी की हिंसा की विरासत को संभाल के रखा है। अब उसका बेटा साद हुसैन रिज़वी कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी का नेतृत्व कर रहा है और मुल्क को अंधकार युग में धकेल रहा है।
गैर-मुस्लिम रिजवी नजर में इंसान नहीं
कट्टरपंथी रिजवी ने अपने जिंदा रहते क्रूर हिन्दू और सिख विरोधी बयानबाजी को खासा बढ़ावा दिया था। इस वजह से पाकिस्तान में इन मजहबी समुदायों को हाशिए पर धकेल कर उनका बहिष्कार किया गया।
एक बगैर तारीख के वीडियो में खादिम हुसैन रिज़वी को ‘काफ़िरों’ की तुलना (गैर- मुस्लिमों के लिए बेइज्जती भरा लफ्ज) लैट्रिन से करते देखा गया था। उसने कहा था, “एक मुस्लिम का काफिर से रिश्ता लैट्रिन की तरह ही एक दायित्व है। जैसे आप लैट्रिन में जाते हैं क्योंकि आपको इसकी जरूरत है। आप वहाँ दुर्गंध सूंघने के लिए नहीं जाते हैं।”
एक अन्य वीडियो में रिजवी को सोमनाथ मंदिर लूटने वाले महमूद गजनवी की तारीफ करते सुना जा सकता। उसने यह भी दावा किया था कि इस्लामिक आक्रमणकारी के घोड़ों की टापों को सुनकर हिन्दू महिलाओं का गर्भपात हो जाता था।
Khadim Hussain Rizvi, leader of Pakistan's 5th biggest party Tehreek-e-Labbaik, says Hindu women suffered miscarriages when they heard the hoofbeats of Mahmud Ghaznavi's horses. There are Pakistani Hindus as well. Think for a moment how they'll feel after listening to this filth pic.twitter.com/kkusxcgKBu
पाकिस्तान अनटोल्ड के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में खादिम हुसैन रिज़वी को हिंदुओं पर हमलों, मंदिरों और मूर्तियों के अपमान को जायज ठहराते हुए देखा गया था।
उसने कहा था, “महमूद गजनवी ने जब सोमनाथ की मूर्ति को तोड़ना शुरू कर दिया। हिन्दू उसके पास गए और इसरार किया- हे महमूद! हमारे भगवान को मत तोड़ो। हम आपको इस मूर्ति के भार से भी अधिक सोना देंगे। महमूद ने जवाब दिया था, मेरे पैगम्बर ने मुझे मूर्तियाँ तोड़ना सिखाया। उन्होंने मुझे उन्हें बचाना नहीं सिखाया।”
"Mahmud Ghaznavi started breaking Somnath idol. Hindus went to him and begged – O Mahmud! Don't break our god. We will give you more gold than weight of this idol. Mahmud told – My prophet taught me to break idols. He didn't teach me to save them."
उसे पाकिस्तान में सिख तीर्थस्थल ‘करतारपुर साहिब’ को ‘गंदा’ करार देते और सिख समुदाय के खिलाफ नफरत भरा भाषण देते हुए भी देखा गया था। ऐसे में हैरानी की बात नहीं कि प्रयागराज का हमलावर लारेब हाशमी खादिम हुसैन रिज़वी का मुरीद था।
बता दें कि खादिम हुसैन रिज़वी ने पाकिस्तान के प्रमुख राजनेता और पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे के समर्थन में रैली की थी। तासीर ने ईशनिंदा के झूठे केस में फँसाई गई आसिया बीबी को सार्वजनिक तौर से अपना समर्थन दिया था।
उनके ‘मुर्तद’ होने का ऐलान कर उनके अंगरक्षक मुमताज कादरी ने उन्हें गोली मार दी। रिज़वी और उसके समर्थकों ने कादरी का समर्थन किया और उसे ‘हीरो’ कहा। दिलचस्प बात यह है कि कादरी की फाँसी के बाद ही इस्लामी उपदेशक रिजवी टीएलपी की नींव रखी थी।
इतना ही नहीं खादिम रिज़वी ने तनवीर अहमद नामक पाकिस्तानी को भी अपना समर्थन दिया था। अहमद ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में ईशनिंदा के आरोप में एक अहमदी दुकानदार की हत्या कर दी थी।
अहमद को 27 साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद रिजवी ने कहा, “मुझे इस बात पर फख्र है कि हम संपर्क में हैं और यह फख्र फैसले के दिन और उससे आगे तक बना रहेगा।”
This religious leader wanted to kill me and he inspired millions of Pakistani extremists to kill me in the name of Islam. He claimed he read my book, but of course, he didn't. He lied. https://t.co/7aH93QINXW
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बताया था कि कैसे खादिम रिज़वी उनकी किताब ‘लज्जा’ के जरिए ईशनिंदा करने के लिए उन्हें फाँसी पर चढ़ाना चाहते थे। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “यह मजहबी नेता मुझे मारना चाहता था और उसने इस्लाम के नाम पर लाखों पाकिस्तानी आंतकवादियों को मुझे मारने के लिए उकसाया है। उसने दावा किया कि उसने मेरी किताब पढ़ी, लेकिन पक्के तौर पर उसने ऐसा नहीं किया। उसने झूठ बोला।”
ईशनिंदा के हत्यारों के लिए प्रेरणा
कथित ईशनिंदा करने वालों की हत्याएँ करने वाले कई अपराधियों के लिए खादिम हुसैन रिज़वी प्रेरणा रहा। खतीब हुसैन नाम के एक मुस्लिम छात्र ने मार्च 2019 में पाकिस्तान के बहावलपुर शहर में अपने अंग्रेजी प्रोफेसर पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाने के बाद उसे चाकू मार दिया था। ये भी रिज़वी के वीडियो से प्रेरित था और शायद सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बना।
इससे पहले पाकिस्तान के चारसद्दा शहर में 2018 में अन्य छात्र ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
इस अनाम छात्र ने कबूला था “मैंने यह हत्या की और मैंने इसे स्वीकार कर लिया। यह अल्लाह का दिया आदेश था।” इस छात्र नें 2017 में टीएलपी की बैठकों में शिरकत की थी।
ईशनिंदा, STSJ नारेबाजी और पाकिस्तानी
गौर देने वाली बात यह है कि ‘सर तन से जुदा (STSJ)‘ का जानलेवा नारा खादिम हुसैन रिज़वी की देन है। इसे भारत में इस्लामवादियों ने कमलेश तिवारी, यति नरसिघानंद सरस्वती और नूपुर शर्मा जैसे हिंदुओं के खिलाफ हथियार बनाया।
जब कादरी ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की हत्या की थी। इसके बाद 2011 में रिज़वी ने हत्यारे के लिए समर्थन जुटाने के लिए एक मार्च निकाला था। इस जुलूस के दौरान दो नारे जमकर लगाए गए थे। एक था ‘रसूल अल्लाह, रसूल अल्लाह’ और दूसरा था, ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा।’
रिज़वी सामूहिक प्रदर्शनों के दौरान लोगों से जब पूछता था, ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सज़ा?’ तब जवाब में प्रदर्शनकारी ‘सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ कहकर जवाब देते थे।
रिज़वी की 2020 में मौत गई, लेकिन उसके नारे पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश में हत्यारे इस्लामवादियों के बीच आज भी जिंदा है। ये लोग लगातार ईशनिंदा करने वाले लोगों के सिर काटने की माँग करते हैं। इसके अलावा कई तो खुद ईशनिंदा करने वालों की हत्या पर मुहर लगाते हैं।
पाकिस्तान के रहने वाले नसरुल्लाह के प्यार में दिवानी बनी दो बच्चों की माँ अंजू 6 महीने बाद बुधवार (29 नवंबर 2023) को भारत वापस लौट आई है। वहाँ उसने नसरुल्लाह से निकाह कर लिया था और इस्लाम में धर्मांतरण करने के बाद फातिमा बन गई। वह पंजाब के बाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत पहुँची।
अंजू को फिलहाल BSF कैंप में रखा गया है। वहाँ मीडिया से बात करने से मना कर दिया। हालाँकि, उसने इतना जरूर कहा कि ‘मैं खुश हूँ’। अंजू राजस्थान में अलवर जिले के भिवाड़ी में अपने पति अरविंद और दो बच्चों के साथ रहती थी। 35 साल की अंजू का 15 साल की एक बेटी और छह साल का एक बेटा है।
अरविंद के मुताबिक, उसका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया का रहने वाला है, जबकि अंजू मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली है। दोनों ने साल 2007 में शादी की थी। अरविंद ईसाई है, जबकि अंजू हिंदू है। अंजू ने शादी के बाद अपना धर्म बदल लिया था।
अंजू एक ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करती थी, जबकि उसका पति अरविंद इंडो कंपनी में काम करता है। इसी दौरान साल 2020 में फेसबुक पर अंजू मुलाकात पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के ऊपरी दीर जिले का रहने वाले नसरुल्लाह हुई। दोस्ती आगे बढ़ी तो दोनों ने एक-दूसरे का कॉन्टैक्ट नंबर लेकर वॉट्सएप पर बातचीत करने लगे।
करीब दो साल तक संपर्क में रहने के बाद अंजू और नसरुल्लाह ने मिलने का प्लान बनाया। नसरुल्लाह ने भारत आने में असमर्थता जताई तो अंजू पाकिस्तान आने को तैयार हो गई। इसके बाद अंजू ने अपना पासपोर्ट बनवा लिया और 21 जून 2023 को पाकिस्तान के वीजा के लिए आवेदन दिया।
वीसा मिलने के बाद अंजू ने 20 जुलाई 2023 को अपने पति अरविंद से यह कहकर निकली की वह अपनी सहेली से मिलने के लिए जयपुर जा रही है। इसके बाद वह पाकिस्तान पहुँच गई। इसके तीन दिन बाद यानी 23 जुलाई 2023 को मीडिया में खबरें आईं कि अंजू अपने प्रेमी नसरुल्लाह से मिलने पाकिस्तान पहुँच गई है।
मीडिया में जिस वक्त अंजू और नसरुल्लाह की प्रेम कहानी आई, उस समय भारत की मीडिया में पाकिस्तान से आई सीमा हैदर की कहानी चल रही थी। सीमा हैदर पाकिस्तान में अपने शौहर को छोड़कर बाल-बच्चों समेत नेपाल के रास्ते भारत आ गई थी और सचिन के साथ हिंदू रीति रिवाज के अनुसार रहने लगी थी।
इसी दौरान पाकिस्तान की मीडिया में अंजू और नसरुल्लाह की प्रेम और धर्मांतरण के बाद निकाह की खबर आई। दोनों की प्री-बेडिंग शूट और बाद में निकाह के रिसेप्शन की तस्वीरें भी सामने आई। उस समय अंजू ने कहा था कि वह पाकिस्तान में खुश है। बाद में अंजू ने कहा था कि उसे अपने बच्चों की बहुत याद आ रही है और वह भारत लौटना चाहती है।
हालाँकि, अंजू के पति अरविंद ने साफ कह दिया था कि वह अपने बच्चों को अंजू से नहीं मिलने देंगे और उन्हें अपने पास ही रखेंगे। इसको लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दी है। नसरुल्लाह ने हाल ही में कहा था कि अंजू यह सोचकर नहीं आई थी कि वह पाकिस्तान में इतने लंबे समय तक रहेगी। इसलिए उसे जाना पड़ा है। अंजू के दस्तावेज तैयार हैं और भारत यात्रा के बाद पाकिस्तान लौट आएगी।
बॉलीवुड को अलविदा कहकर दीन की खिदमत के लिए एक मौलाना से निकाह करने वाली पूर्व अभिनेत्री सना खान ने पाकिस्तान के एक कट्टरपंथी मौलाना के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखा है। सना और उसके शौहर अनस ने पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखा है। ये वही मौलाना जमील हैं, जिन्होंने जन्नत की हूरों की शारीरिक ढाँचे को परिभाषित किया था।
सना खान ने 5 जुलाई 2023 को एक बेटे को जन्म दिया था। हाल ही में सना खान और उनके शौहर मुफ्ती अनीस ने “तारिक जमील से मुलाकात की थी। सना खान ने अपने बेटे के साथ मौलाना तारिक जमील से मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया है।
इस वीडियो में सना खान ने लिखा है, जूनियर तारिक जमील का सीनियर हजरात मौलाना तारिक जमील साब से मुलाकात। मौलाना को देखकर वाकई अल्लाह याद आते हैं। वह अंदर से खूबसूरत इंसान हैं। अल्लाह हमेशा उनकी रक्षा करें और उन्हें अच्छा स्वास्थ्य दें।”
सना ने आगे लिखा, “उन्होंने मुझे हमेशा बेटी कहा है और अपने ज्ञान के शब्दों से मुझे बहुत कुछ दिया है। लोग आपको तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं और अपने मफ़ाद के लिए आपको निशाना बना सकते हैं, लेकिन हमें मजबूत होना होगा और यह अल्लाह की ओर से एक परीक्षा भी है।”
ये वही मौलाना तारिक हैं, जिनकी उटपटांग और महिला विरोधी बातों को लेकर दुनिया भर में उनकी मजम्मत हो चुकी है। इस साल जून में मौलाना तारिक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह जन्नत के हूरों के बारे में बता रहे थे। उस वीडियो में उन्होंने कहा था कि जन्नत में हूरें एक नहर से पैदा होती हैं और उनकी लंबाई 130 फीट होती हैं।
वीडियो में जमील कहते हैं, “जन्नत में मोतियों से ढँकी एक नहर है। उसके अंदर मुश्क और जाफरान बहता है। जब अल्लाह जन्नत की किसी लड़की को बनाता है तो उस पर अपना नूर डालता है और 130 फीट की लड़की निकलकर बाहर आ जाती है। जन्नत हूरें माँ की पेट से पैदा नहीं होतीं। तुम पाँच फीट के जन्नत में चले गए तो हूरें तुम्हें अपनी जेब में डाल लेंगी। लिहाजा, अल्लाह हमें भी 130 फीट का बना देगा।”
हूरों के बारे में बताते हुए कट्टरपंथी तबलीगी जमात के सदस्य तारिक जमील ने आगे कहा था, “अल्लाह के हुक्म पर हूरें जन्नत में गीत सुनाती हैं। जब हूरें अपनी जुल्फें बिखराती हैं तो रंग-बिरंगी रौशनी जलने लगती हैं और पूरी जन्नत रौशनी से भर जाती है।”
उन्होंने जन्नत में मिलने वाली शराब का भी खूब वर्णन किया था। वायरल एक अन्य वीडियो में मौलाना ने कहा था, “जन्नत में शराब पीने के तीन दर्जे होते हैं। पहले दर्जे में लोग खुद के हाथों से शराब निकालकर पीते हैं। यह सबसे निचला दर्जा होता है। दूसरा दर्जा किसी मिडिल क्लास की तरह होता है, जिनको शराब परोसने के लिए नौकर, पत्नी, हूरें और फरिश्ते होते हैं।”
— वेदं प्रति प्रत्यागच्छतु? (@Truth_z7) June 11, 2023
जन्नत के सबसे ऊँचे दर्जे के बारे में बताते हुए मौलाना ने कहा था, “यह किसी VVIP की तरह होता है। इस दर्जे में अल्लाह खुद शराब पिलाते हैं। अगर इस धरती पर लोग शराब को न कर दें तो जन्नत में खुद अल्लाह उन्हें शराब पिलाते हैं।”
साल 2020 में जब देश-दुनिया में कोरोना महामारी फैला था, तब भी मौलाना जमील ने कहा था कि कोरोना वायरस के रूप में दुनिया अल्लाह के कोप का सामना कर रही है। इस कोप की वजह बढ़ती अश्लीलता और नग्नता है। जब समाज में अश्लीलता आम बात हो गई है तो अल्लाह नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा था, “जहाँ लड़कियाँ नाच रही हों और कम कपड़े पहनती हों, उस पर कोरोना जैसी विपत्ति आनी ही है।”
भारत के विभाजन के लिए जिम्मेवार मुहम्मद अली जिन्ना को लेकर एक बार उन्होंने कहा था, “एक दफा मैंने ख्वाब में देखा तो मैंने (जिन्ना से) पूछा कि आपका क्या हाल है। कहने लगे कि मैं बड़ी ‘राहत’ में हूँ। उन्होंने अपनी दो उँगलियाँ मेरी तरफ कीं कि ये चूस लो। उनकी दो उँगलियाँ मैंने मुँह में डाली तो उसमें से गाढ़ा-मीठा शहद निकल-निकल कर मेरे मुँह में आना शुरू हुआ। उसके साथ ही मेरी आँख खुली तो उसकी मिठास मेरे मुँह में बाकी थी।”
तारिक जमील तब्लीगी जमात का सदस्य है। तब्लीगी जमात भले ही खुद को सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन बताता हो, लेकिन दिसंबर 2021 में सऊदी अरब ने इसे ‘आतंकवाद का एंट्री गेट’ करार देते हुए बैन कर दिया था। वहीं, भारत में कोरोना महामारी के दौरान जमात लगाने और पुलिसकर्मियों पर थूकने की घटनाओं के बाद यह संगठन चर्चा में आया था।
उत्तरकाशी के सिलक्यारा स्थित सुरंग से 41 मजदूरों को बचा कर सुरक्षित निकाल लिया गया है। सुरंग ध्वस्त होने के कारण ये मजदूर 12 नवंबर, 2023 को सुरंग में फँसे थे, जिन्हें 28 नवंबर, 2023 को वापस निकाला गया। 17 दिनों तक ये मैराथन प्रयास चला। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल VK सिंह ने वहाँ कैंप किया। PMO के अधिकारी वहाँ मजजूद रहे। संसाधन की किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी गई।
तभी तो अमेरिकी मशीन तक मँगाई गई। ये अलग बात है कि वो काम नहीं आई। अरनॉल्ड डिक्स के नेतृत्व में कई विदेशी विशेषज्ञ लगातार लगे रहे। बाबा बौखनाग का अस्थायी मंदिर बनाया गया और वहाँ पूजा-अर्चना चलती रही। कई मजदूर भी बचाव कार्य में लगे रहे। अंदर गब्बर सिंह नेगी फँसे हुए साथी मजदूरों का हौसला बढ़ाते रहे, उन्हें योग-व्यायाम कराते रहे। अंत में रैट माइनर्स की सहायता से पाइप डालने का काम हुआ और इसके सहारे सभी मजदूरों को वापस बुलाया गया।
वहीं सुरंग में ही एक अस्थायी अस्पताल भी बनवा दिया गया था। फँसे हुए मजदूरों को निकाले जाने के बाद चिन्यालसौड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया, जहाँ सीएम धामी भी पहुँचे। उत्तरकाशी के जिला अस्पताल ही नहीं, बल्कि उन्हें एयरलिफ्ट कर के ऋषिकेश स्थित एम्स में भी ले लाया गया जहाँ पहले से सारी तैयारियाँ कर के रखी गई थीं। हालाँकि, सभी श्रमिक स्वस्थ हैं। जिस तरीके से केंद्र एवं राज्य सरकार ने इस पूरे प्रकरण को सँभाला, उसके बाद उनकी तारीफ़ होनी स्वाभाविक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव PK मिश्रा और डिप्टी सेक्रेटरी मंगेश घिल्डियाल इसमें सीधे तौर पर लगातार जुड़े रहे। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंग ध्वस्त होने की खबर जैसे ही पता चली, पीके मिश्रा ने पीएम मोदी को इसके बारे में बताया। इसके बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी इस रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी में जुट गए। 27 नवंबर को तो PK मिश्रा खुद मौके पर पहुँचे और बचाव अभियान की समीक्षा की। अंदर फँसे मजदूरों से संपर्क के लिए संचार व्यवस्था भी बनाई गई थी।
इसी के जरिए पीके मिश्रा ने उन श्रमिकों से बात की और आश्वासन दिया कि उन्हें बाहर निकाल लिया जाएगा। जब तक ये ऑपरेशन सफल नहीं हो गया, मंगेश घिल्डियाल भी उत्तरकाशी में मौजूद रह कर इसकी निगरानी करते रहे। इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे से भी निवेदन किया गया कि वो मौके पर जाएँ। वो वहाँ प्रतिदिन की व्यवस्थाओं व कामकाज की निगरानी कर रहे थे। कई प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स की भी इसमें मदद लेने की तैयारी थी।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ये प्रधानमंत्री कार्यालय की ही सक्रियता का ही परिणाम था कि RVNL (रेल विकास निगम लिमिटेड), ONGC (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन), SJVNL, THDC, DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन), DST (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग), भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना (IAF), BRO (सीमा सड़क संगठन), NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल), NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण), उत्तरकाशी जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार इसमें समन्वय बना कर काम करती रही।
इन सभी के विषेशज्ञ एवं उपकरण इस रस्के ऑपरेशन का या तो हिस्सा बने, या फिर ये तैयार थे। सलाह, मानव संसाधन और उपकरण – इन सभी का इस्तेमाल किया गया। जब जहाँ जिसकी जैसी ज़रूरत पड़ी, उनसे सेवा ली गई। इन सभी संस्थाओं के मुखियाओं के साथ 20 नवंबर को ही प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने बैठक ली थी और उन्हें हर घंटे अपडेट्स लेते रहने को कहा गया था। केंद्रीय गृह मंत्रायल और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दे दिया गया था कि वो मशीनों एवं विशेषज्ञों की आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था बनाए रखें।
#WATCH | On the successful rescue of all 41 workers from the Silkyara tunnel, former advisor to PMO Bhaskar Khulbe says, "I will always wish that such a disaster doesn't strike again. The courage shown by the 41 workers demonstrates shows how one should never leave hope" pic.twitter.com/DpWUC7n1Pd
देश के विभिन्न हिस्सों से मशीनरी आ रही थी और विशेषज्ञ पहुँच रहे थे। NDMA को भी कहा गया था कि वो समय-समय पर सारी जानकारी देते रहें। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कह चुके हैं कि सरकार इस घटना से सीखेगी और सुरंगों की सेफ्टी ऑडिट के लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। खासकर हिमालय के पत्थर और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए काम लिए जाएगा। ये बड़ी बात है। आगे इस तरह की घटना न हो, सरकार ने इसके लिए अभी से ही कमर कस ली है।
माँ पर आस्था रखने की बात करते हुए भास्कर खुल्बे ने कहा कि वो हमेशा देवी को प्रणाम कर के जाते थे और अंतिम दिन उन्होंने दण्डवत किया। उन्होंने ख़ुशी की आँसू को सफलता की सबसे बड़ी भावना करार दिया। साथ ही कहा कि ऐसी विपदा और न आए, वो चाहेंगे। उन्होंने 41 श्रमिकों द्वारा दिखाए गए हौसले और मेहनत को प्रेरणा बताते हुए कहा कि विपत्ति में हमें हौसला नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा कि इनके हौसले की बदौलत ही बाहर रेस्क्यू अभियान चला रहे लोग भी प्रेरित होते रहे।
मेजर जनरल (रिटायर्ड) हर्ष काकर ने भी इसकी प्रशंसा करते हुए बताया कि कैसे PMO के 5 अधिकारी दिन-रात 15 दिनों तक मौके पर कैंप करते रहे और कंटेनर में रहे, CM धामी रोज 3-4 घंटे वहाँ पर रहे, जनरल वीके सिंह और नितिन गडकरी वहाँ पहुँचे, स्लोवेनिया से ऑगर मशीन लाने के लिए हैदराबाद से विशेष विमान भेजा गया, दुनिया के बेस्ट रेस्क्यू एक्सपर्ट को बुलाया गया, अमेरिका से विशेष प्लाजमा कटर लाया गया और नए हेलीपैड के अलावा वर्टिकल ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट तक स्थापित किया गया।
गुरुवार (30 नवंबर, 2023) गुरुवार को होने जा रहे तेलंगाना विधानसभा चुनावों को ले कर सोशल मीडिया पर ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (IB) के नाम से एक लिस्ट वायरल की जा रही है। इस लिस्ट में विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की जीत और पूर्ण बहुमत का दावा किया जा रहा है। इस लिस्ट को कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ उनके समर्थक भी अपने X हैंडल पर शेयर कर रहे हैं। कांफिडेंशियल का ठप्पा लगी इस लिस्ट में तारीख 23 नवंबर, 2023 की पड़ी हुई है।
क्या है इस लिस्ट में
लिस्ट को बाकायदा प्रेसनोट बता कर शेयर किया जा रहा है जो कि उसमें लिखा भी हुआ है। ऊपर अंग्रेजी के बड़े-बड़े शब्दों में ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ लिखा होने के साथ बगल IB का आधिकारिक Logo भी लगा दिख रहा है। नीचे तेलंगाना राज्य विधानसभा चुनाव 2023 लिखा गया है। पहले पैराग्राफ में ही घोषणा कर दी गई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी राज्य में प्रचंड बहुमत से आ रही है। साथ ही कॉन्ग्रेस को 44% वोट शेयर के साथ 72 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
लिस्ट के दूसरे पैराग्राफ में भाजपा और AIMIM को वोट कटुआ पार्टी बताया गया है। इन दोनों पार्टियों पर BRS का वोट खा जाने का दावा किया गया है। भाजपा और अन्य दलों को 12 से नीचे सीटें मिलने का दावा इस लिस्ट में किया गया है। लिस्ट में BRS की हार की वजह किसानों का गुस्सा, सत्ता विरोधी लहर और राज्य में फैला भ्र्ष्टाचार बताया गया है। की पॉइंट में यह भी दावा किया गया है कि इस सर्वे को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया गया है।
इन दावों के नीचे एक तालिका बनाई गई है। तालिका में BRS को 34 से 37, कॉन्ग्रेस को 71 से 74, भाजपा को 2 से 4 और अन्य को 6 से 8 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वोट शेयर के हिसाब से BRS को 34 से 37%, कॉन्ग्रेस को 43 से 46%, भाजपा को 7 से 9% और अन्य को 8 से 10% मत मिलने का अनुमान जताया गया है। इस तालिका के नीचे ‘की पॉइंट’ नाम से सबहेड दिया गया है जिसमें इस सर्वे को 7 से 22 नवंबर 2023 के बीच का बताया गया है। दावा किया गया है कि सर्वे के दौरान 17,850 लोगों से मिल कर उनकी राय ली गई।
खास बात ये है कि प्रेसनोट लिखे सबहेड में लिखा गया है कि ऊपर कही गई बातें आंतरिक जानकारी के लिए ही हैं। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट 23 नवंबर को ऑफिस में जमा करने का दावा किया गया है।
कॉन्ग्रेस पदाधिकारी और उसके कार्यकर्ता कर रहे हैं वायरल
इस लिस्ट को पूरे आत्मविश्वास के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और उसके समर्थक शेयर कर रहे हैं। अपने ‘X’ हैंडल पर खुद को पुडुच्चेरी में कॉन्ग्रेस पार्टी का सोशल मीडिया विभाग का चेयरमैन बताने वाले कोरकाडू अशोक ने इस लिस्ट को IB की रिपोर्ट बता कर शेयर किया है।
IB report says its a clear majority for Congress in #Telangana
Intelligence bureau has predicted this: BRS : 34 – 37 Congress : 71 – 74 BJP : 2 – 4 Others: 6 – 8
तेलंगाना के नागार्जुन सागर से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अभिषेक बिक्कू ने यह लिस्ट शेयर करने के साथ यह भी दावा किया है कि इसे भारत सरकार के गृह मंत्रालय में जमा किया जा चुका है।
Game over for #BRS IB report says it's a clear majority for Congress in #Telangana Intelligence bureau has predicted this: BRS : 34 – 37 Congress : 71 – 74 BJP : 2 – 4 Others: 6 – 8 This report has been reportedly submitted to the Union Home ministry.#MaarpuKavaliCongressRavalipic.twitter.com/ea4ikmYCJ9
इसके अलावा कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े कई अन्य लोग भी है जो इस स्क्रीनशॉट को शेयर करने में जुटे हुए हैं। यह शेयरिंग मतदान से 1 दिन पहले 29 नवंबर को खासतौर पर जोर पकड़ चुकी है।
कॉन्ग्रेस जीत रही तेलंगाना, जानिये सच्चाई
ऑपइंडिया की पड़ताल में यह बात निकल कर आई है कि कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों और उनके समर्थकों द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो के नाम से शेयर की जा रही ये लिस्ट फर्जी है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का काम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की सूचनाएँ जमा करना है। IB राजनैतिक मामलों से जुड़े इस प्रकार के एक्जिट पोल नहीं जारी करती है।