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स्वदेशी रक्षा निर्माताओं को मिल सकता है अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर: रक्षा मंत्रालय ने 97 तेजस और 156 प्रचंड खरीदने की दी मंजूरी

भारत ने सशस्त्र बलों को आधुनिकीकरण के तहत गुरुवार (30 नवंबर 2023) को 2.23 लाख करोड़ रुपए की रक्षा खरीद परियोजनाओं को प्रारंभिक मंजूरी दे दी। इसमें 97 तेजस हल्के लड़ाकू विमान और 156 प्रचंड लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की खरीद शामिल है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इन परियोजनाओं को मंजूरी दी।

इस रक्षा खरीद को ऐसे समय में मंजूरी दी गई है, जब भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 2.23 लाख करोड़ रुपए की कुल खरीद का 98 प्रतिशत घरेलू उद्योगों से प्राप्त किया जाएगा। मंत्रालय के इस कदम से घरेलू रक्षा उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा।

97 तेजस फाइटर जेट और 156 प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर की कुल कीमत 1.10 लाख करोड़ रुपए है। दोनों स्वदेशी हैं। यह भारत के इतिहास में स्वदेशी निर्माताओं को मिलने वाला सबसे बड़ा ऑर्डर है। इसके अलावा, कुछ अन्य रक्षा सौदों को भी मंजूरी दी गई है। इन्हें भारतीय वायुसेना और थल सेना के लिए हासिल किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि भारतीय नौसेना के सतह प्लेटफॉर्म के लिए मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों को भी मंजूरी दी गई। वहीं, भारतीय फील्ड गन की जगह लेने के लिए टोड गन सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। डीएसी ने दो प्रकार के एंटी-टैंक युद्ध सामग्री अर्थात् ‘एरिया डिनायल युद्ध सामग्री’ (एडीएम) टाइप-2 और टाइप-3 की खरीद के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) या प्रारंभिक मंजूरी दी है।

सैन्य साजोसामान की खरीद संबंधी शीर्ष निकाय ने भारतीय नौसेना के लिए मध्यम दूरी की पोतरोधी मिसाइल (MRASHM) खरीदने के एक अन्य प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा, टी-90 टैंकों के लिए स्वचालित लक्ष्य ट्रैकर (एटीटी) और ‘डिजिटल बेसाल्टिक कंप्यूटर’ (डीबीसी) के अधिग्रहण और एकीकरण को भी मंजूरी मिली है। MRASHM सतह से सतह पर मार करने वाला एक हल्का प्रक्षेपास्त्र है।

हालाँकि, DAC द्वारा दी गई मंजूरी खरीद की स्वीकृति है। इसके बाद इनके निर्माताओं के साथ बातचीत होगी और कीमत तय की जाएगी। इसमें कुछ समय लग सकता है, लेकिन यह अवधि विदेशी निर्माताओं की तुलना में बहुत कम होने की उम्मीद है। तेजस भारत का बनाया हुआ अपना पहला फाइटर जेट है। इसे फरवरी 2019 में पूरी तरह से हथियारबंद फाइटर जेट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल करने की अंतिम परिचालन मंजूरी मिली थी।

वहीं, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों का पहला बैच पिछले साल वायुसेना और थल सेना में शामिल किया गया था। दो इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर को HAL ने विकसित किया है। लगभग 5.8 टन वजन वाला यह हेलीकॉप्टर 21,000 फीट की ऊँचाई पर भी अपनी सेवाएँ दे सकता है। इसे सियाचिन, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे जगहों के लिए डिजाइन किया गया है।

राजस्थान में पूर्ण बहुमत से आ रही BJP सरकार, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़-तेलंगाना पर Exit Polls भी कंफ्यूज: 3 दिसंबर को आएगा फाइनल रिजल्ट

तेलंगाना में आज गुरुवार (30 नवंबर 2023) को मतदान समाप्त होने के साथ ही पाँच राज्यों में जारी विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया। तेलंगाना में शाम पाँच पर 64 प्रतिशत मतदान हुए। इन राज्यों में मतगणना 3 दिसंबर को होगी। मतदान खत्म होने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल भी आ गए हैं।

एक्जिट पोल के अनुसार, राजस्थान में भाजपा शानदार वापसी करने जा रही है। वहाँ पर हर पाँच साल में सरकार बदलने का रिवाज है। इस बार भी परंपरा टूटती नजर नहीं आ रही है। वर्तमान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है। 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा सीट में बहुमत के लिए 101 के आँकड़े की जरूरत है।

राजस्थान

अगर एक्जिट पोल की बात करें तो ‘रिपब्लिक टीवी-जन की बात’ एजेंसी ने राजस्थान में भाजपा को 100-122 सीटें दी हैं। TV9-पोलस्ट्रैट ने 100-110, टाईम्स नाऊ-ईटीजी ने 108-128, पी-मार्क ने 105-125 और Axis My India ने 80-100 सीटें दी हैं। इन एजेंसियों ने कॉन्ग्रेस को 62-91 के बीच सीटें दी हैं। हालाँकि, Axis My India ने कॉन्ग्रेस को 86-106 सीटें दी हैं।

छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ को लेकर सामने आए एक्जिट पोल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर है। जन की बता ने भाजपा को 34-45 और कॉन्ग्रेस को 42-53 सीटें दी हैं। एक्सिस माई इंडिया ने भाजपा को 41 और कॉन्ग्रेस को 45 सीटें दी हैं। CNX ने भाजपा को 30-40 और कॉन्ग्रेस को 45-46 सीटें दी हैं।

टीवी5 न्यूज ने छत्तीसगढ़ में भाजपा को 29-39 और कॉन्ग्रेस को 54-64 सीटें दी हैं। सी वोटर ने भाजपा को 36-48 और कॉन्ग्रेस 41-53, इंडिया टुडे-चाणक्य ने भाजपा को 33 और कॉन्ग्रेस को 57, मैट्रिज ने भाजपा को 34-42 और कॉन्ग्रेस को 44-52 और ईटीजी ने भाजपा को 32-40 सीटें और कॉन्ग्रेस को 48-56 सीटें दी हैं।

अगर सारे एक्जिट पोल एजेंसियों का औसत देखें तो भाजपा को लगभग 38 सीटें और कॉन्ग्रेस को 50 सीटें मिलती दिख रही हैं। इस तरह छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस अपना बढ़त बनाए हुए नजर आ रही है। बता दें कि 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है।

मध्य प्रदेश

सामने आए विभिन्न एजेंसियों के एक्जिट पोल में मध्य प्रदेश में भाजपा एक फिर से सत्ता में वापसी करती हुई दिख रही है। 230 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 116 के आँकड़े की जरूरत होगी। जन की बात एजेंसी के अनुसार, मध्य प्रदेश में भाजपा को 113 और कॉन्ग्रेस को 112 सीटें मिलती दिख रही हैं। मैट्रिज ने भाजपा को 118-130 सीटें और कॉन्ग्रेस को 97-107 सीटें दी हैं।

पोलस्ट्रैट के आँकड़ों के अनुसार, एमपी में भाजपा को 106-116 और कॉन्ग्रेस को 111-121 सीटें मिलेंगी। दैनिक भास्कर की एक्जिट पोल के अनुसार, एमपी में भाजपा को 95-115 और कॉन्ग्रेस को 105-120 सीटें और इंडिया टुडे चाणक्या ने भाजपा को 151 और कॉन्ग्रेस को 74 सीटें दी हैं।

तेलंगाना

एक्जिट पोल के अनुसार, तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की BRS और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर नजर आ रही है। 119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा सीट में बहुमत के लिए 60 सीटों की जरूरत होगी। इस चुनाव में भाजपा भी बेहतर प्रदर्शन करती हुई नजर आ रही है।

जन की बात के आँकड़े के अनुसार, तेलंगाना में भाजपा को 7-13, कॉन्ग्रेस को 48-64 और BRS को 40-55 सीटें मिलती नजर आ रही है। वहीं, AIMIM को 4-7 सीटें दी गई हैं। CNX के अनुसार, भाजपा को 2-4 सीटें, कॉन्ग्रेस को 63-79, बीआरएस को 31-47 और AIMIM को 5-7 सीटें मिलेंगी।

पोलस्ट्रैट के अनुसार, भाजपा को 5-10 सीटें, कॉन्ग्रेस को 49-59 सीटें, BRS को 48-58 सीटें और AIMIM को 6-8 सीटें मिलेंगी। वहीं, मैट्रिज ने भाजपा को 4-9 सीटें, कॉन्ग्रेस को 58-68 सीटें, BRS को 46-56 सीटें और AIMIM को 5-7 सीटें दी हैं।

बता दें कि जिन पाँच राज्यों में चुनाव हुए हैं, वे हैं- राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम। इन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव की मतगणना 3 दिसंबर 2023 को होगी।

37 जगहों पर लगा रोजगार मेला, PM मोदी ने 51000 को दिए सरकारी नौकरी के लेटर: कहा- कर्मयोगी प्रारंभ से जुड़कर बढ़ाए क्षमता

गुरुवार (30 नवंबर 2023) को देश के 37 जगहों पर रोजगार मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करीब 51 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी के लेटर दिए।

नियुक्ति पाने वाले नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थी केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों में सेवा देंगे। इस दौरान पीएम मोदी ने अगले 25 साल भारत के लिए बेहद अहम बताते हुए नियुक्ति पाने वाले युवाओं से ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ जुड़कर अपनी क्षमता बढ़ाने को कहा। केंद्र सरकार ने कर्मयोगी प्रारंभ नाम से लर्निंग मॉड्यूल की पहल एक साल पहले शुरू की थी। उसके बाद से लाखों नए सरकारी कर्मचारी इसके जरिए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

पीएम मोदी ने अभ्यर्थियों से कहा, “ये नियुक्ति पत्र आपके परिश्रम और प्रतिभा का नतीजा है। मैं आपकों और आपके परिवार को बहुत बधाई देता हूँ। अब आप राष्ट्र निर्माण की उस धारा से जुड़ने जा रहे हैं जिसका सरोकार सीधे जनता जनार्दन से है। भारत सरकार के कर्मचारी के तौर पर आप सभी को बड़े दायित्व निभाने हैं। आप जिस भी पद पर रहें, जिस भी क्षेत्र में काम करें देश के लोगों के लिए ईज ऑफ लिविंग ही होनी चाहिए।”

बताते चलें कि पीएम मोदी ने दिसंबर 2023 तक 10 लाख रोजगार देने का ऐलान किया था। इसके तहत अब तक लाखों युवाओं को नियुक्ति पत्र बाँटे जा चुके हैं। अगले महीने इस साल का आखिरी रोजगार मेला लगेगा।

नवनियुक्त कर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग

नवनियुक्त कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल कर्मयोगी प्रारंभ के जरिए खुद को प्रशिक्षित करने का मौका भी मिलेगा। आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर ‘कहीं भी किसी भी उपकरण पर’ सीखने के प्रारूप में 800 से अधिक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम मुहैया कराए गए हैं।

नवनियुक्त कर्मी अपने रचनात्मक विचारों और भूमिका से जुड़ी दक्षताओं के जरिए अन्य बातों के साथ-साथ देश के औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक विकास को मजबूत करने के काम में योगदान देंगे। इससे प्रधानमंत्री के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिलेगी।

इन विभागों में मिलेगी भर्ती

देशभर से चुने गए नवनियुक्त युवा कर्मचारी सरकार के राजस्व विभाग, गृह मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा श्रम और रोजगार मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में अपना योगदान देंगे।

कब-कब लगे रोजगार मेले

रोजगार मेले का सिलसिला 22 अक्‍टूबर 2022 से शुरू हुआ था। इस पहले रोजगार मेला में 75 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र बाँटे गए थे। इसके बाद 22 नवंबर 2022 को आयोजित दूसरे मेले में 71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को जॉइनिंग लेटर मिले थे।

तीसरा मेला 20 जनवरी 2023 और चौथा 13 अप्रैल 2023 को लगा था। इन दोनों में 71-71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। पांचवाँ रोजगार मेला 16 मई, छठा 13 जून और सातवाँ 22 जुलाई 2023 को लगा था। इसमें 70-70 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।

वहीं आठवाँ रोजगार मेला 28 अगस्त 2023 को लगा था। इसमें भी 51,000 से ज्‍यादा देश के युवाओं को सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए। इसके बाद 9वाँ रोजगार मेला 26 सितंबर को हुआ, जिसमें 51 हजार से ज्यादा लोगों को मिला अपॉइंटमेंट लेटर मिले थे।

PM मोदी को दी पत्रकारों की लिस्ट, बताया साथ न ले जाएँगे तो खराब होंगे रिश्ते… जानिए कैसे बंद हुआ प्रधानमंत्री के विमान में विदेश जाने का चलन

2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव आया। इनमें से विदेश यात्राओं के दौरान प्रधानमंत्री के विमान में पत्रकारों को ले जाने की परिपाटी बंद करना भी है। पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि कैसे पीएम मोदी ने इस चलन को बंद किया।

मिश्रा श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं। वे पहले कार्यकाल में पीएम मोदी के प्रमुख सचिव भी रह चुके हैं। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के पॉडकास्ट में बताया है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद जब नरेंद्र मोदी पहले विदेश दौरे पर जा रहे थे तो उन्हें भी पहले से चली आ रही परिपाटी के अनुसार साथ जाने वाले पत्रकारों के नाम दिए गए थे। लेकिन उन्होंने इस परिपाटी को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के साथ विदेश यात्रा पर उनके विमान में किसी भी निजी मीडिया संस्थान के पत्रकार नहीं जाते हैं। उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों का प्रधानमंत्री के साथ उनके विमान में विदेश दौरों पर जाना संस्कृति बन गई थी।

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि जब पहली विदेश यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी विदेश जाने वाले थे तो उन्हें साथ जाने वाले पत्रकारों की सूची गई थी। शुरुआत में उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बाद में जब नृपेंद्र मिश्रा ने इस संबंध में पूछा तो प्रधानमंत्री का सवाल था कि अगर हम प्रेस को साथ अपने विमान में ना लेकर जाएँ तो क्या होगा?

मिश्रा ने उन्हें जवाब दिया कि इससे मीडिया के साथ रिश्ते बिगड़ेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ भी हो प्रेस को साथ नहीं ले जाया जाएगा। उनका कहना था कि मीडिया के बड़े नाम प्रधानमंत्री के साथ अपने पत्रकार भेज कर अपना पैसा बचाते हैं। उन्हें अपने आर्थिक स्थिति की कोई चिंता नहीं होती। उन्हें अपने खर्चे पर विदेश में अपने पत्रकार भेजने चाहिए।

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में दिल्ली के बड़े पत्रकारों को प्रधानमंत्री के आधिकारिक विमान में साथ में ले जाया जाता था। इन पत्रकारों को प्रधानमंत्री की पूरी यात्रा के दौरान रहने की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई जाती थी। इसके लिए विदेश मंत्रालय होटल का चयन करता था।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री के विमान में 34 सीट पत्रकारों के लिए थी। इनमें से 2 सीट एसपीजी लेती थी, जबकि 32 सीटें पत्रकारों को दी जाती थी। इन पत्रकारों को मुफ्त भोजन और काम करने के बाद थकने पर शराब भी मुफ्त में पिलाई जाती थी।

प्रधानमंत्री के साक्षात्कार और उनसे जुड़ी खबरों पर भी इन निजी मीडिया चैनल का कब्जा हो गया था, जबकि सरकारी चैनल दूरदर्शन समस्याओं से घिरा हुआ था। प्रधानमंत्री के साथ जाने से सरकार के बड़े अधिकारियों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री तक इन पत्रकारों की सीधी पहुँच होती थी।

कथित ईशनिंदा के विरोध की आड़ में घाटी में अराजकता फैलाने वालों पर हमारी कड़ी नजर, इकट्ठा कर रहे हैं सबूत: जम्मू-कश्मीर डीजीपी

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में NIT (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) के छात्रों ने एक हिन्दू छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि छात्र ने सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। प्रदर्शन के दौरान ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे भी लगे थे और इस प्रदर्शन को पाकिस्तानी हैंडलों से भी हवा दी गई थी।

इसको लेकर जम्मू-कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन का कहना है, “हमने सभी पहलुओं पर कानूनी कार्रवाई की है। मामले दर्ज कर लिए गए हैं और जाँच चल रही है। हम इस पर नजर रख रहे हैं और सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। इस विरोध के बहाने कुछ और करने की कोशिश की जा रही है। उन पर भी हमारी नजर है और उनके खिलाफ भी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं।”

डीजीपी ने कहा, “हमने तय किया है कि CrPC की धारा 144 के तहत सरसरी तौर पर एक कानून लाएँगे, जिसमें किसी किस्म का कंटेंट, मैसेज, वीडियो, ऑडियो… जिससे कम्युनल सेंसिटिविटी खत्म हो जाएगी या किसी को डराया जाएगा, धमकाया जाएगा… वो चाहे टेररिस्ट-सेपरेटिव्स की से हो या दहशत पंसद की तरफ से हो, ऐसे कंटेंट को पोस्ट करना कानून जुर्म हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पोस्ट करने वाले को जरूर हम कानून के दायरे में लाएँगे और उसको फॉर्वर्ड-शेयर करना भी कानूनन जुर्म हो जाएगा। कोई अगर ये कहे कि साब किसी ने इनोसेंटली मुझे भेज दिया, मैं क्या करूँ तो उसके जवाब में ये रहेगा कि साब अब आपको, आपके बगैर इजाजत के अगर किसी ने इस तरह के ऑब्जेक्शनेबल वीडियो, ऑडियो, मैसेज, टेक्स्ट भेजा तो आप नजदीकी थाने में जाकर कह सकते थे कि मैं नहीं चाहता था कि ये मैसेज मेरे फोन में आए। ये पता नहीं कि किसने और कहाँ से भेजा है।”

डीजीपी स्वैन ने कहा, “आप ये इन्फॉर्मेशन अपनी तरफ से थाने में दे दीजिएगा। इसके बाद आप क्रिमिनल लायब्लिटी के बाहर हो जाएँगे। लेकिन, अगर आप जानते हैं कि ये ये ऑडियो-वीडियो या टेक्स्ट माहौल को खराब करने वाले किसी टेटरिस्ट-सेपरेटिब्स नेटवर्क है या कोई ऐसा है जो दंगा-फसाद कराना चाहता है या पैगंबर साहब की इज्जत को ठेस पहुँचाने वाला काम करता है या कम्युनिली सेंसिटिव चीजों को पोस्ट करता है और आगे आप उसे फॉरवर्ड करते हो तो यह कानून जुर्म बन जाएगा।”

फिर खाली उसी बुनियाद पर कार्रवाई करने के लिए कानून हमें इजाजत देगी। हम उसको कोर्ट में पेश करेंगे और उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। यकीनन ऐसे लोगों को हम इंडेक्स करके रखेंगे ताकि उनको हर हालत में, हर स्टेज में उनको पता रहे कि उन्होंने ये गलत काम किया है। ऐसे करने से ही लोगों के मन भय पैदा होता है। क्योंकि कुछ चंद लोग इसका फायदा लेते हैं और अपनी रोटी सेंकते हैं।”

दरअसल, कॉलेज में 28 नवंबर 2023 को पैगंबर मोहम्मद के कथित अपमान को लेकर श्रीनगर के NIT में बवाल और प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद पुलिस ने आरोपित छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। साथ ही आरोपित को इंस्टिट्यूट से सस्पेंड करते हुए आने वाले सेमेस्टर के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

दरअसल, यहाँ पढ़ने वाले एक छात्र (जो हिंदू है) ने इस्लाम के नबी पैगंबर मोहम्मद के विरुद्ध आपत्तिजनक वीडियो अपने व्हाट्सएप स्टेस्ट्स और इंस्टाग्राम पर डाला था। इसके उलट हालाँकि सोशल मीडिया पर कई लोग उस वीडियो का स्क्रीनशॉट लगा कर यह दावा कर रहे हैं कि वो वीडियो हमास के संस्थापक के बेटे का है, खुद आरोपित लड़के ने अपनी ओर से कोई बात नहीं कही है।

सोशल मीडिया में आरोपित लड़के से संबंधित जिस स्क्रीनशॉट को शेयर किया जा रहा है, उसके अनुसार इस वीडियो में हमास संस्थापक का बेटा इस्लाम के बारे में कुछ बता रहा है। कट्टर मुस्लिमों ने इसे पैगंबर मोहम्मद की आपत्ति से जोड़ दिया, ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। ऊपर के सोशल मीडिया पोस्ट में आरोपित लड़के और उसकी मुस्लिम गर्लफ्रेंड के बारे में भी लिखा गया है। नेटिजन्स इस पर भी बात कर रहे हैं कि स्थानीय कट्टर मुस्लिम भीड़ को इस बात से दिक्कत है कि एक हिंदू लड़के की गर्लफ्रेंड मुस्लिम क्यों?

ईशनिंदा की बात सुन कट्टर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई। कुछ ही देर में इस वीडियो को ईशनिंदा बताते हुए श्रीनगर NIT के तमाम मुस्लिम छात्र ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ (रसूल अल्लाह हम तेरे लिए हाजिर हैं) का नारा लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे।

योग, कबड्डी, ताश… जानिए 2.5 किमी लंबी सुरंग में मजदूरों ने कैसे काटे 17 दिन, कैसे भेजा अंदर फँसे होने का संकेत

उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 श्रमिकों को 17वें दिन 28 नवम्बर 2023 की शाम को निकाला गया था। ये श्रमिक 12 नवम्बर से ही सुरंग में मलबा आ जाने के कारण फँसे हुए थे। अब श्रमिकों ने बताया है कि कैसे वह इस कठिन परिस्थिति में अपना समय व्यतीत कर रहे थे।

सुरंग के भीतर फँसने वाले श्रमिकों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तराखंड के श्रमिक थे। सुरंग से सुरक्षित बाहर आए ओडिशा के श्रमिकों ने बताया है कि वे अन्दर कबड्डी और ताश खेल कर अपना समय काट रहे थे।

ओडिशा के बालासोर के रहने वाले राजू भी अन्दर फँसे हुए थे। उन्होंने बताया है कि वह 11 नवम्बर 2023 की रात को इस सुरंग के अन्दर घुसे थे। उन्हें सुबह 8 बजे तक काम करना था, लेकिन सुबह 5:30 बजे ही एकाएक मलबा आ जाने के कारण वह सभी लोग फँस गए।

पहले कुछ घंटों तक बाहर मौजूद लोगों को भी नहीं पता चला कि श्रमिक अंदर फँसे हुए हैं। अंदर मौजूद श्रमिकों ने इसके बाद पानी के पाइपों को हटा कर बाहर अपने बारे में संकेत भेजा। इससे लोगों को पता चला कि अन्दर श्रमिक फँस गए हैं। शुरुआत में उनकी संख्या भी स्पष्ट नहीं थी।

राजू ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस अखबार से बात करते हुए बताया, “बाहर कुछ इंजीनियर थे जिनको लगा कि अन्दर श्रमिक फँसे हुए हैं। उन्होंने 7 घंटे के बाद हमसे सम्पर्क स्थापित किया। उन्होंने हमें पाइप के माध्यम से सूखे अनाज भेजे।” राजू ने बताया कि उन्हें लाई (मुढ़ी) अन्दर भेजी गई, जिसे खाकर वह भूख मिटा रहे थे। अंदर ऑक्सीजन भी भेजी गई।

पानी भेजने का कोई रास्ता न बन पाने के कारण शुरुआत में श्रमिकों को चट्टानों से रिस रहा पानी पीकर काम चलाना पड़ा। हालाँकि, स्थितियाँ तब सुधर गईं जब अन्दर 6 इंच व्यास वाला पाइप डाल दिया गया। इस पाइप के माध्यम से अंदर गर्म भोजन और पानी दोनों पहुँचे।

श्रमिकों का कहना है कि एक बार खाना-पानी और गरम कपड़े पहुँचने और परिवार से बात होने के पश्चात वह सभी शांत हो गए थे और इसका इन्तजार कर रहे थे कि कब उन्हें बाहर निकाला जाएगा। इस बीच इन सभी ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाए रखा।

एक अन्य श्रमिक भगवान का कहना है कि उन्हें मजदूर होने के कारण मुश्किलों में रहना आता है, लेकिन यहाँ की स्थितियाँ काफी विपरीत थीं। उनका कहना है कि बाहर से प्रशासन और कम्पनी के अधिकारी उन्हें लगातार हौसला बँधाते रहे जिससे उनका मनोबल बढ़ा।

श्रमिकों ने यह भी जानकारी दी कि मलबे के पीछे 2.5 किलोमीटर की जगह थी, जिसमें वे सुबह की सैर, योग वगैरह करते थे। वे लोग कबड्डी, ताश आदि भी खेलते थे। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अंदर अपने फोन भी मिल गए थे। उस पर भी वह समय व्यतीत करते थे। वॉकी टॉकी मिलने के बाद वे अपने परिवारों से भी बात कर पाए।

झारखंड के सिंहभूम के एक मजदूर बासेत मुर्मू भी अंदर फँसे हुए थे। उनके पिता भक्तू मुर्मू की इसी दौरान मौत हो गई। बाहर निकलने के बाद भी वह अपने घर नहीं पहुँच सके इसलिए उनके घर वालों ने उनके पिता का अंतिम संस्कार कर दिया।

इन श्रमिकों को निकाले जाने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन्हें ₹1 लाख के चेक सौंपे हैं। जिन राज्य के यह श्रमिक हैं, वहाँ के अधिकारी और मंत्री भी पहुँचे हैं। अब इन श्रमिकों को ऋषिकेश में इलाज के लिए ले जाया गया है जहाँ उनकी मेडिकल जाँच चल रही है।

गरीबों को कुछ भी फ्री में न बाँटा जाए, बदले में वो भी कुछ दें: Infosys के संस्थापक नारायणमूर्ति, कहा- चीन की नीतियों से सीखना जरूरी

टेक कम्पनी इनफ़ोसिस (Infosys) के संस्थापकों में से एक एन आर नारायणमूर्ति ने कहा है कि देश में कुछ भी मुफ्त में नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि अब भी कुछ फ्री में दिया जाए तो इसके बदले में सरकार लोगों से कुछ करवाए। उन्होंने चीन की आर्थिक तरक्की का उदहारण भी दिया है।

नारायणमूर्ति ने हाल ही में युवाओं के 70 घंटे काम करने वाला बयान दिया था जिस पर सोशल मीडिया पर काफी बहस हुई थी। अब उन्होंने सरकारों द्वारा लोगों को मुफ्त चीजें बाँटने पर बात की है। उन्होंने यह बातें बेंगलुरु टेक समिट 2023 में निखिल कामथ से बातचीत में कही है।

नारायणमूर्ति ने कहा, “जब आप मुफ्त सुविधाएँ देते हैं। जब आप ऐसी सब्सिडी देते हैं, तो सरकार को लोगों से बदले में भी कुछ लेना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि सरकार बिजली देना चाहती है तो उसे लोगों से कहना चाहिए कि हम तभी यह बिजली तभी देंगे जब प्राथिमक और माध्यमिक विद्यालयों में 20% उपस्थिति बढ़ेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं मुफ्त सुविधाओं के विरोध में नहीं हूँ। मैं भी समझता हूँ क्योंकि मैं गरीब परिवार से आता हूँ। लेकिन हमें इनके बदले में उन लोगों से कुछ चीजों की आशा करनी चाहिए जैसे कि वह अपनी, अपने बच्चों की और अपने से बड़े लोगों की जिन्दगी बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए।”

नारायणमूर्ति ने यह भी कहा,

“हमारे नेताओं को चीन की नीतियों को बहुत बारीकी से पढ़ना चाहिए। चीन के साथ भी हमारी जैसी ही बहुत सी समस्याएँ थी लेकिन उसकी जीडीपी अब हमसे पाँच-छः गुना बड़ी है। इसलिए मैं अपने नेताओं से यह विनती करूँगा कि चीन को बारीकी से समझें और देखें कि क्या अच्छी चीजें हम अपने यहाँ लागू कर सकते है, जिससे भारत भी चीन के जैसी ही तरक्की करे और अपने लोगों की गरीबी को घटाने में सफल हो।”

उनका कहना है कि दयावान पूंजीवाद ही भारत में सफल हो सकता है। नारायणमूर्ति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में हुई तरक्की की भी तारीफ़ की है। वह इससे पहले कॉन्ग्रेस सरकार की आलोचना भी कर चुके हैं।

रेप केस में पीड़ित महिला का बयान सबसे बड़ा सबूत नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट, बदला लेने के लिए केस कराने की बढ़ती प्रवृत्ति देख की टिप्पणी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार (28 नवंबर 2023) को एक मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि बलात्कार के केस में पीड़ित महिला का बयान सबसे बड़ा सबूत नहीं हो सकता है। दरअसल, जज ने झूठे और बदला लेने के इरादों से बलात्कार के केस दर्ज कराने के मामलों में बढ़ोतरी के मद्देनजर यह टिप्पणी की।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनन्या बंदोपाध्याय ने कहा, “बलात्कार की पीड़िता के घायल होने को ही ‘स्टर्लिंग विटनेस’ बताया गया है। एक रूढ़िवादी समाज में एक महिला खुद को या अपने परिवार को अपमानित नहीं करती है। ऐसी महिला खराब नैतिक व्यवहार का प्रदर्शन नहीं करती है। हालाँकि, ऐसी स्थिति को सार्वभौमिक नहीं माना जा सकता है।”

जज बंदोपाध्याय ने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ पीड़िता ने झूठ या बदला लेने के इरादे से रेप के केस दर्ज करवाए हैं। इन टिप्पणियों के साथ ही जज ने रेप और घर में जबरन घुसने के आरोप में जेल काट रहे एक दोषी को अपील की अनुमति दे दी।

मामला साल 2006 का है। दोषी व्यक्ति पर आरोप है कि उसने अपने पड़ोस में रहने वाली एक महिला के घर में जबरदस्ती घुस गया। वहाँ महिला को अकेली देखकर उसका बलात्कार किया। इस दौरान दोषी ने महिला के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया, ताकि उसकी आवाज कोई सुन ना सके।

महिला ने अपने बयान में कहा था कि जब शख्स पुरुलिया स्थित उसके घर में घुसा था, तब वह अकेली थी। हालाँकि, कोर्ट में जब क्रॉस सवाल हुए तब उसने बताया कि जिस समय शख्स उसके घर में घुसा था, उस वक्त वह अपने बच्चे को स्तनपान करा रही थी।

कोर्ट के ध्यान में यह भी गया कि मेडिकल रिपोर्ट में विशेष तौर पर बलात्कार की बात नहीं है। यहाँ तक कि रेप की घटना के दौरान रेप पीड़िता द्वारा पहने गए कपड़ों की फोरेंसिक जाँच से संबंधित रिपोर्ट भी कोर्ट के रिकॉर्ड में थी। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि महिला के बयानों में कई तरह की असमानता है।

कोर्ट ने माना कि यह जब पीड़िता के बच्चे को जमीन पर फेंक दिया गया था, तब उसने कोई आवाज नहीं उठाई, यह बात भी अस्वाभाविक सी है। दरअसल, पुरुलिया की कोर्ट ने पीड़िता के बयान के आधार पर शख्स को रेप का दोषी ठहराकर सजा सुनाई थी।

2 बीवी, 6 गर्लफ्रेंड और 9 बच्चे… मिलिए उस ठग से जो पैसा डबल करने के नाम पर चूरन वाले नोट थमाता था, लखनऊ पुलिस ने पकड़ा

लखनऊ पुलिस ने एक ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है जो कि लोगों को नकली नोट देकर पैसा हड़पता था। इस ठग का नाम अजीत मौर्या है। अजीत ने बताया है कि वह अपनी 2 बीवी, 6 गर्लफ्रेंड और 9 बच्चों के लिए यह फर्जीवाड़ा करता था।

उसे लखनऊ पुलिस ने सरोजिनी नगर से पकड़ा है। 27 नवम्बर 2023 को लखनऊ पुलिस के सामने एक व्यक्ति ने यह जानकारी दी थी कि उसे पैसे डबल करने का लालच देकर अजीत मौर्या उर्फ़ रमेश ने उसके ₹3 लाख की ठगी कर ली।

अजीत मौर्या कुछ साथियों के साथ मिलकर यह काम करता था। उसने पूछताछ के दौरान बताया कि वह और उसके साथी लोगों को फ़ोन कर के पैसों को डबल करने का लालच देते हैं। इसके लिए सबसे पहले उसका एक साथी मुंबई से फ़ोन करता है और लोगों को फँसाता है।

इसके बाद यह लोग उस आदमी को समझाते हैं कि वह नेपाल से नकली नोट लाते हैं जो बिलकुल असली लगते हैं। यह एक नोट के बदले दो नोट देने का झाँसा देते हैं। आगे, जिससे ठगी की जा रही है, उसको विश्वास हो जाए इसके लिए वह पहले कुछ असली नोट देकर ही कहते हैं कि यह नकली नोट हैं।

वह पीड़ितों से इन्हें बाजार में चलाने के लिए कहते हैं। असली नोट होने के कारण पीड़ित उन्हें बाजार में जब सफलतापूर्वक चला लेता है तो वह इनके झाँसे में आ जाता है। इसके बाद जब पीड़ित उन्हें अधिक रुपए देता है तो इसके बदले में उसे यह ठग चूरन वाली नोटों की गड्डी पकड़ा देते हैं, इनमें ऊपर असली नोट लगे होते हैं।

पैसे की अदलाबदली यह ठग भीड़भाड़ वाले स्थान पर करते थे जिससे यह जल्दी भाग जाएँ और भीड़ में कोई इन्हें पकड़ ना पाए। यदि कोई नोट चेक करने की बात करता है तो यह भीड़ का बहाना बनाते हैं और पीड़ित से कहीं आराम से चेक करने को कहते हैं।

लखनऊ पुलिस ने अब इस मामले में अजीत मौर्या नाम के एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। अजीत गोंडा जिले का रहने वाला है। यह भी जानकारी सामने आई है कि अजीत ने वर्ष 2000 में मुंबई में एक महिला से शादी की थी जिसके साथ उसके 7 बच्चे हैं। वह 2010 में अपने गाँव लौट आया लेकिन यहाँ कोई कामधाम ना मिलने के कारण चोरी चकारी करने लगा।

उसने 2012 में एक और संगीता नाम की महिला से शादी कर ली जिसके साथ उसके 2 बच्चे और हैं। उसने इन दोनों बीवियों के लिए दो अलग-अलग घर बना रखे थे। यह भी सामने आया है कि वह रील्स भी बनाता था और उसने 6 गर्लफ्रेंड भी बना रखी थी। ठगी के पैसों से वह शानदार जिन्दगी जीता था। उसके पास से एक स्कार्पियो गाड़ी भी बरामद हुई है जिस पर उसने फर्जी नम्बर लगाया हुआ था। पुलिस का कहना है कि अजीत मौर्या पर पहले से सात मुकदमे दर्ज हैं और इसके दो साथियों को अभी पकड़ा जाना बाकी है।

चीन को वॉलमार्ट से भी झटका, अब भारत से सामान ले रही अमेरिकी कंपनी: 5 साल में 10 गुना बढ़ा आयात

अमेरिकी रिटेलस्टोर चेन वॉलमार्ट अपनी जरूरत का लगभग एक चौथाई सामान भारत से ले रही है। जहाँ वह भारत से आयात बढ़ा रही है, वहीं चीन पर से अपनी निर्भरता भी कम कर रही है। वॉलमार्ट पहले चीन से सामान लेकर अमेरिका में बेचा करती थी, लेकिन अब वह भारत से सामान ले रही है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइट रॉयटर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि वॉलमार्ट ने वर्ष 2023 में जनवरी-अगस्त के बीच में अमेरिका के लिए बाहर से खरीदे जाने वाले सामान में से 60% चीन से खरीदा। यह 2018 में 80% था। इसके उलट भारत से इसने लगभग 25% सामान आयातित किया। वर्ष 2018 में वॉलमार्ट भारत से मात्र 2% सामान खरीदती थी।

वालमार्ट के CEO डौग मैकमिलन के साथ प्रधानमंत्री मोदी
वालमार्ट के CEO डौग मैकमिलन के साथ प्रधानमंत्री मोदी (चित्र साभार: @narendramodi/X)

गौरतलब है कि वॉलमार्ट समेत तमाम बहुदेशीय कम्पनियाँ चीन पर निर्भरता कम करना चाह रही हैं। इन कम्पनियों के पास चीन के विकल्प के रूप में भारत ही सबसे मुफीद विकल्प है। भारत में श्रम की सस्ती लागत के कारण यहाँ से बाहर जाने वाला माल अन्य देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है।

आँकड़े बताते हैं कि वॉलमार्ट इस समय भारत से प्रति वर्ष 3 बिलियन डॉलर (लगभग ₹25,000 करोड़) का सामान आयातित कर रही है। यह भारत के कुल सामान आयात का 0.6% हैं। वॉलमार्ट का लक्ष्य है कि वह आने वाले सालों में भारत से प्रति वर्ष 10 बिलियन डॉलर (लगभग ₹83,000 करोड़) के आयात करेगी।

वॉलमार्ट अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल स्टोर चेन है। इसके पास अमेरिका में 4,600 से अधिक, जबकि पूरे विश्व में लगभग 10,000 स्टोर हैं। यह दुनिया की सबसे प्रभावशाली कम्पनियों में से एक है। इसके भारत से सामान आयात करने के कारण भारत में स्थानीय इंडस्ट्री मजबूत हो रही है।

चीन का निर्यात घटना भी भारत के लिए एक शुभ संकेत है। चीन से जो विदेशी कम्पनियाँ सस्ते में तैयार माल खरीद रही थीं, अब चीन में आर्थिक तरक्की होने के कारण ऐसा नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में उन्हें भारत एक विकल्प के तौर पर मिला है।

मात्र वॉलमार्ट ही नहीं, बल्कि अमेज़ॉन और एप्पल जैसी अमेरिकी कम्पनियाँ भी भारत में ही अधिक निर्माण का लक्ष्य बना रही हैं। एप्पल लगातार भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। एप्पल ने वित्त वर्ष 2023-24 के मात्र 6-7 मात्र महीनों में ही 5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹41,000 करोड़) के स्मार्टफोन भारत से निर्यात किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार कहते आए हैं कि भारत को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ के फार्मूले पर चलना होगा। प्रधानमंत्री का कहना है कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए विश्व में आपूर्तिकर्ता का स्थान लेना होगा। मई 2023 में वॉलमार्ट के CEO डौग मैकमिलन प्रधानमंत्री मोदी से मिले भी थे।