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‘बहरा नहीं हूँ मैं’: प्यार के लिए तरसते हर बच्चे को हिंसक जानवर बना रही ‘Animal’? किशोरों को भटकाने वाले दृश्य, अभिभावकों की सख्ती के पीछे मजबूरी भी

रणबीर कपूर और रश्मिका मंदाना की 1 दिसंबर 2023 को रिलीज होने वाली फिल्म ‘ANIMAL’ का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही खासी चर्चा में है। फिल्म की एडवांस बुकिंग के लिए लोग टूट पड़े हैं। इस फिल्म के 3 मिनट के ट्रेलर को देख इसका इतना क्रेज है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म और किरदार गहरे तक लोगों के दिलो-दिमाग पर असर डालने की कुवत रखते हैं।

बता दूँ कि ‘अर्जुन रेड्डी’ और ‘कबीर सिंह’ फेम डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की डायरेक्ट की गई इस फिल्म को पिता-पुत्र के बिगड़े हुए रिश्तों पर आधारित बताया जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर भी ऐसा ही कुछ आभास देता है।

फिल्म के ट्रेलर शुरू होते ही रणवीर कपूर की आवाज सुनाई पड़ती है, “ओके पापा लेट्स प्ले गेम।” इसके बाद सफेद कुर्ता पायजामा पहने पिता के किरदार में अनिल कपूर और बेटे के किरदार में रणवीर कपूर पर्दे पर होते हैं।

बेटा पापा से कहता है, “पापा आपको याद है 5th स्टैंडर्ड में था और माइकल जैक्शन का कॉन्सर्ट हो रहा था बॉम्बे में, आप जानते थे कि मैं माइकल जैक्शन का कितना बड़ा फैन था। मेरे सारे दोस्त जा रहे थे, लेकिन मैं नहीं गया, क्योंकि आपका बर्थडे था। उसी दिन को रिप्ले करते हैं।”

इससे साफ है कि बेटा ये चाहता है कि उस दिन को उसके पापा उसके नजरिए से सोच कर देखें और जिएँ। इसके बाद बेटे के किरदार में रणवीर कपूर चिल्लाते हुए बहुत ही तल्ख आवाज में बोलते हैं, “सुनाई दे रहा है, बहरा नहीं हूँ मैं…” इसके बाद सीन में बेटे की माँ आती है वो उसके पापा से कहती है, “आप उसके सुपर हीरो हो, वो आपको अडोर करता है। दिन मैं 10 मिनट भी नहीं दे सकते अपने बेटे को।”

‘एनिमल’ कहानी इस रिश्ते के ही इर्द-गिर्द घूमती हुई लग है। एक पिता जो कारोबार के चक्कर में अपने बेटे से दूर रहा है। बेटा पिता से बहुत प्यार करता है और उसे ये गम है कि पिता उसके प्यार को कभी समझ नहीं सके। बस फिर क्या है बेटा अपने नुकसान का रास्ता अख्तियार कर लेता है और गैंगस्टर बन जाता है।

इसमें कोई शक नहीं कि फिल्म का ट्रेलर ही जाहिर कर देता है कि हर किरदार ने बेहतरीन अभिनय किया है। यहाँ तक तो सब ठीक है, लेकिन जहाँ एक छोटे से बच्चे के एक लेटर लिख ये कहने की बात आती है कि टाइम बताएगा वो अपने पापा से कितना प्यार करता है और फिर उसके बाद वही बेटा हिंसक और खूंखार अवतार में दिखाई देता है, परेशानी यहाँ से शुरू होती है।

ये सच है कि दबा, सहमा और प्यार को तरसता बचपन बड़े होने पर पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है। इस बात को साइकॉलोजिस्ट भी मानते हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम पर्दे पर इसे इस तरह से पेश करें कि टीनऐज के बच्चे भटकाव की राह पकड़ लें। वो पिता या अभिभावकों की भलाई के लिए कही बातों को भी अतिरेक में लेकर गलत राह पर चल पड़े।

वैसे तो फिल्म ‘एनिमल’ को सेंसर बोर्ड ने A सर्टिफिकेट के साथ पास किया है। ए का मतलब यानी एडल्ट सर्टिफिकेट। इस वजह से 18 साल से अधिक उम्र के लोग ही इस फिल्म को सिनेमाघरों में देख पाएँगे, लेकिन क्या ऐसा मुमकिन है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे इसे देखने से चूकेंगे। मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में ऐसा कम ही लगता है।

फिल्मों और उसकी दीवानगी टीनऐज के बच्चों में इस कदर होती है कि वो उनके लहजे, हेयरस्टाइल से लेकर कपड़ों तक को अपनी असली जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं। इस उम्र में दिल-दिमाग की जमीं इतनी पक्की नहीं होती कि वो सही और गलत में अंतर करना सीख सकें।

उन्हें तो वैसे ही रूपहले पर्दे का संसार असली नजर आता है। ऐसे में वे सिनेमा और फिल्मों में दिखाई गई घटनाओं की साम्यता अपनी निजी जिंदगी में तलाशने लगते हैं। ऐसे कई वारदातें हुई हैं जिनमें बच्चों और युवाओं ने फिल्मों की तर्ज पर अपराधों को अंजाम दिया है।

ऐसे में एनिमल जैसी फिल्में उनके दिलो-दिमाग पर अच्छा असर डालेंगी। इसे मान पाना मुश्किल ही लगता है। जब बच्चे जरा से मोबाइल देखने पर डाँटने पर अपनी जान ले लेते हैं। चार साल का बच्चा जब रेप करने की मानसिकता रख लेता है।

ऐसे माहौल में हम कैसे यकीन कर सकते हैं कि ‘एनिमल’ जैसी फिल्म एक बच्चे के जेहन पर सकारात्मक असर डालेगी? बच्चे ही क्यों पल-पल में बागी होने को तैयार दिखता युवा गर्म खून इस फिल्म का संदेश समझ पाएगा और सही रास्ता पकड़ेगा?

क्या बेटा समझ पाएगा कि पिता क्यों उसके लिए सख्त थे उनकी क्या मजबूरियाँ रही थी? और क्या जरूरत से ज्यादा सख्त एक पिता या अभिभावक ये समझ पाएँगे कि बचपन में किस तरह से मानसिक और भावनात्मक तौर पर समझे जाने की जरूरत होती है?

ऐसे में फिल्मों में इतनी हिंसा को देखते हुए हम क्या यकीन कर सकते हैं कि पिता और पुत्र के रिश्तों पर बनी फिल्म ‘एनिमल’ हमारे बच्चों और युवाओं को हिंसक जानवर बनाने की राह नहीं सुझाएगी। इस सवाल का जवाब फिल्मों को समाज का आईना बताने वाले सिनेमा जगत से लेकर हर आम-वो-खास के लिए ढूँढना जरूरी है।

श्रमेव जयते… क्रिकेट खेल बाहर निकले श्रमिक, उत्तरकाशी की सुरंग के बाहर स्वागत को खड़े थे CM धामी: 16 दिन से अंदर फँसे हुए थे मजदूर

आखिरकार 16 दिनों बाद उत्तरकाशी के सिलक्यारा स्थित सुरंग में ‘श्रम’ की जीत हुई। श्रम की जीत, अर्थात चारधाम यात्रा को आसान बनाने के लिए जो श्रमिक लगातार लगे हुए थे और ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सुरंग के ध्वस्त होने के बाद फँस गए थे, उन सभी 41 मजदूरों को बाहर सुरक्षित निकाल लिया गया है। श्रम की जीत, अर्थात बाहर इनके लिए प्रार्थना कर रहे श्रमिकों के परिजनों की जीत, इनके साथी श्रमिकों की आशा की जीत।

सभी मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका स्वागत किया है। माइक्रो टनलिंग क्सपर्ट क्रिस कूपर ने ही बताया है कि सही श्रमिक बाहर निकाल लिए गए हैं।

श्रम की जीत, अर्थात मशीनों से लेकर मानव संसाधन तक के श्रम की जीत, 16 दिनों से इस रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे लोगों के श्रम की जीत, इसकी निगरानी कर रहे सत्ता में बैठे नेताओं के भी श्रम की जीत। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते रहे हैं – ‘श्रमेव जयते’। हर परियोजना के पूरे होने पर पीएम मोदी श्रमिकों को सम्मान देते रहे हैं, चाहे वो दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर हो या फिर जुलाई 2023 में दिल्ली का IECC कॉम्प्लेक्स। 41 श्रमिकों के सुरंग से सुरक्षित निकाले जाने के बाद ये भावना और प्रबल हुई है।

सभी श्रमिक स्वस्थ थे, चूँकि बाहर लोग उनसे संपर्क में थे इसीलिए कैमरे के जरिए उनका हालचाल पता चल रहा था। इसके बावजूद किसी भी तरह की कमी न रहे, इसीलिए उन्हें निकालने के लिए स्ट्रेचर का इस्तेमाल किया गया और चिन्यालसौर स्थित कम्युनिटी अस्पताल, उत्तरकाशी स्थित जिला अस्पताल और ऋषिकेश स्थित एम्स में सारी तैयारियाँ कर के रखी गई थीं। श्रमिकों के स्वागत के लिए बाहर फूल मालाएँ तैयार रखी गई थीं।

यहाँ तक कि सुरंग के पास भी हेल्थ ट्रेनिंग के लिए एक अस्थायी मेडिकल व्यवस्था और डॉक्टरों को तैयार रखा गया था। 8 बेड की व्यवस्था थी और डॉक्टरों की टीम ने इसकी जाँच की। एक दिन पहले पाइप के जरिए मजदूरों को क्रिकेट बैट और गेंद भी भेजी गई थी, उन्होंने क्रिकेट भी खेली थी। मजदूरों को एयरलिफ्ट करने के लिए भारतीय वायुसेना का ‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर भी तैयार रखा गया है।

घर के सामने ही गोली बरसा रहे थे शूटर्स: बुजुर्ग महिला ने झाड़ू लेकर दौड़ा लिया, अकेले ही चार को भगाया; वीडियो वायरल

हरियाणा के भिवानी से एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें एक महिला की बहादुरी सामने आई है। महिला ने केवल एक लाठी के सहारे ही चार हथियारबंद शूटर्स को दौड़ा लिया और खदेड़ दिया। यह शूटर्स एक व्यक्ति की हत्या करने आए थे, जिसका घर महिला के घर के सामने ही वीडियो में दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, भिवानी की डाबर कालोनी में रहने वाले हरिकिशन 27 नवम्बर, 2023 की शाम को अपने घर के बाहर खड़े थे। इसी समय चार युवक दो मोटरसाइकिल पर आए और उनसे कुछ बात करने के बाद गोलियाँ बरसाने लगे। हरिकिशन ने अपने घर में भाग कर जान बचाई लेकिन उन्हें गोली लग गई, हमलावरों ने उनको घर में घुस कर गोली मारने का प्रयास किया लेकिन तभी एक बुजुर्ग महिला पड़ोस के घर से डंडे वाली झाड़ू लेकर निकली और शूटर्स को दौड़ा लिया जिससे शूटर्स भाग गए। शूटर्स ने महिला पर भी हमला करने की कोशिश की।

इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, इसमें हरिकिशन खड़े हुए दिख रहे हैं। इसके बाद हमलावर हमला करते हैं और उस पर गोलियाँ बरसा देते हैं। जानकारी के अनुसार, हरिकिशन को चार गोलियाँ इस दौरान लगी हैं। उसका इलाज चल रहा है। वहीं यह भी सामने आया है कि हरिकिशन किसी मामले में जमानत पर जेल से बाहर है।

अभी इस घटना के संबंध में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस जाँच कर रही है। भिवानी के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हरिकिशन पर हमले की योजना बनाते हुए पाँच लोगों को कुछ महीने पहले भी गिरफ्तार किया गया था।

इस हमले का वीडियो वायरल होने के बाद अब लोग सोशल मीडिया पर इस पर रिएक्शन दे रहे हैं। अधिकांश लोग इस महिला की हिम्मत की तारीफ़ कर रहे हैं जिसने डंडे की मदद से ही अपराधियों को भगा दिया।

एक यूजर ने लिखा, “ये है हरियाणा की शेरनी”। एक दूसरे यूजर ने लिखा, “लट्ठ बन्दूक से ज्यादा ताकतवर है।”

गौरतलब है कि अब पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। फ़िलहाल किसी आरोपित की अभी तक गिरफ्तारी नहीं है।

आधार कार्ड पर्सनल, पत्नी भी नहीं माँग सकती पति की जानकारी: हाई कोर्ट ने रिश्तों में बताई प्राइवेसी की अहमियत

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर एक पत्नी अकेले अपने पति का आधार डेटा हासिल नहीं कर सकती है, क्योंकि कानून के वैधानिक ढाँचे के मुताबिक ये किसी भी शख्स के गोनिजता के अधिकारों की स्वायत्तता और सुरक्षा के तहत आता है ये मामला। और इसके उल्लंघन की इजाजत किसी को नहीं है।

जस्टिस एस सुनील दत्त यादव और जस्टिस विजयकुमार ए पाटिल की बेंच ने कहा कि महज शादी करने से आधार कार्डधारक की निजता का अधिकार कम करके नहीं आँका जा सकता। इसलिए उसके कार्ड के डेटा तक पहुँच के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

दरअसल, कर्नाटक हाई कोर्ट ने ये फैसला हुबली की एक महिला की याचिका पर सुनाया था। इस महिला ने अपने अलग हो चुके पति का आधार नंबर, नामांकन विवरण और फोन नंबर माँगा था।

महिला ने दलील दी थी कि पति की डिटेल न होने से उसके खिलाफ पारिवारिक अदालत के भरण-पोषण के आदेश को लागू करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक इस जोड़े की साल 2005 में शादी हुई थी। इस शादी से उनकी एक बेटी भी है।

महिला ने इस रिश्ते में दिक्कतें पेश आने की वजह से कानून का सहारा लिया था। इसके बाद पारिवारिक अदालत ने महिला के पति से उन्हें भरण-पोषण के तौर पर 10,000 रुपए और उनकी बेटी के लिए अतिरिक्त 5,000 रुपए देने का फैसला दिया था।

उसने अपने पति के नामालूम ठिकाने और उसके भाग जाने की वजह से पारिवारिक अदालत के आदेश को लागू करने में चुनौतियाँ पैदा होने की खबर अदालत को दी।

इस वजह से महिला ने मदद की माँग करते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) से संपर्क साधा था। लेकिन यूआईडीएआई ने उसका आवेदन 25 फरवरी, 2021 को खारिज कर दिया।

महिला को उसके पति के आधार डाटा की जानकारी देने से इंकार करने के पीछे यूआईडीएआई ने आधार अधिनियम की धारा 33 के तहत हाईकोर्ट के जस्टिस के दिए फैसले का हवाला दिया।

इसके बाद महिला ने कोर्ट की सिंगल बेंच का रूख किया। महिला के लिए 8 फरवरी, 2023 को इस सिंगल बेंच की तरफ से राहत वाला फैसला आया। इसके बाद डिविजन बेंच यानी कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंच ने यूआईडीएआई को महिला के पति को सुनने के बाद दोबारा से उसके आवेदन पर आरटीआई के तहत पुर्नविचार करने का निर्देश दिया।

इस मामले में, डिवीजन बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि सिंगल जज इस मामले को यूआईडीएआई को नहीं भेज सकते थे क्योंकि धारा 33 के तहत सुनवाई करने और फैसले पर पहुँचने की शक्ति किसी ऐसे अदालत के पास है जो हाईकोर्ट से कमतर नहीं है।

इसे लेकर महिला ने कोर्ट में तर्क दिया था कि विवाह का मतलब दोनों की एक पहचान होना है। इस वजह से जीवनसाथी की हर तरह की जानकारी तक पहुँच जायज है। डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी खुलासे से पहले दूसरे शख्स को भी अपना पक्ष रखने का हक है।

कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आगे कहा, “विवाह का संबंध जो दो भागीदारों का मिलन है, लेकिन ये दोनों में से किसी के भी निजता के अधिकार पर हावी नहीं हो सकता, क्योंकि ये एक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और व्यक्ति के इस अधिकार को धारा 33 के तहत सुनवाई के लिए स्वायत्तता, मान्यता और संरक्षित किया गया है। विवाह अपने आप में आधार अधिनियम की धारा 33 के तहत प्रदत्त सुनवाई की प्रक्रिया के इस अधिकार को ख़त्म नहीं करता है।”

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि धारा 33 के तहत बगैर दूसरा पक्ष सुने बगैर आधार डेटा तक पहुँच नहीं हो सकती। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए सिंगल बेंच को वापस भेज दिया।

केरल में बवासीर का इलाज, ‘डॉक्टर’ बंगाल वाले… कलेक्टर ऑफिस से बस 4 किलोमीटर दूर: पुलिस ने क्यों कर लिया अरेस्ट

केरल पुलिस ने त्रिशूर में 2 बंगाली झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। यह दोनों बिना किसी डॉक्टरी की पढ़ाई किए दशकों से लोगों को इलाज के नाम पर मूर्ख बना रहे थे। साथ ही ये कई गंभीर रोगों का इलाज करने का दावा करते थे।

इनमें से एक बंगाली व्यक्ति तो जिलाधिकारी के दफ्तर से मात्र 4 किलोमीटर दूर ही बैठ कर यह झोलाछाप डॉक्टर क्लिनिक चला रहा था, इसका नाम इसने ‘चाँदसी क्लीनिक’ रखा हुआ था। इसका नाम दिलीप कुमार सिकदर है और यह बंगाल का रहने वाला है। हैरानी की बात यह है कि वह पिछले तीन दशकों से यह क्लीनिक चला रहा था।

इसके खिलाफ एक शिकायत आई थी जिस पर जिले की मेडिकल टीम ने छापा मारा और इसे गिरफ्तार किया। उसके पास से यूनानी, एलोपैथिक और होम्योपैथिक दवाइयाँ बरामद हुई हैं। उसके पास से एक ऐसा फर्जी प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है जिसमें लिखा था कि वह किसी भी तरह की मेडिकल प्रैक्टिस कर सकता है। सिकदर गंभीर रोगों जैसे कि भगंदर और बवासीर का इलाज करने का दावा करता था और काफी बड़ा क्लीनिक बना रखा था। त्रिशूर से ही एक और फर्जी बंगाली डॉक्टर त्रिदीप कुमार रॉय को पकड़ा गया है। वह भी एक ऐसा ही क्लिनिक चला रहा था।

गौरतलब है कि मात्र केरल ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऐसे डॉक्टर बड़ी संख्या में हैं। गाँवों में इनका प्रभाव और भी ज्यादा है। वर्ष 2016 में आई WHO की एक रिपोर्ट बताती है कि देश में 57 प्रतिशत डॉक्टर फर्जी हैं। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों में इनकी संख्या में कमी आई है।

स्थानीय स्तर पर अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ ना हों और जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पतालों का दूर होना भी ऐसे फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों के लिए मुफीद स्थिति पैदा करता है। जिस तरह के डॉक्टर त्रिशूर में पकड़े गए हैं, यह अधिकांश गंभीर बीमारियों को सस्ते में ठीक करने का दावा करते हैं। स्वास्थ्य के लिए अधिक पैसा ना लगाने में सक्षम गरीब जनता इनके चंगुल में आती है।

बिल्ली को बचाने की कोशिश कर रही थी अंजना, खुद आठवीं मंजिल से गिरी, दो इमारतों के बीच खून से लथपथ लाश मिली

जानवरों के इंसान से प्यार करने और इंसान के लिए जानवरों के जान कुर्बान करने के कई किस्से आपने सुने होंगे। आज एक किस्सा कोलकाता की 33 साल की महिला का भी सुने। ये महिला अपनी प्यारी पालतू बिल्ली को बचाने के चक्कर में सोमवार (27 नवंबर 2023) 8वें फ्लोर से गिरी और उनके प्राण पखेरू उड़ गए।

रिपोर्ट के मुताबिक अंजना दास नाम की ये महिला कोलकाता शहर के टॉलीगंज इलाके में एक अपार्टमेंट में रहती थी। सोमवार तड़के वो इसी इमारत की ऊपरी मंजिल पर संकरे कंक्रीट के शामियाने से अपने पालतू बिल्ली के बच्चे को बचाने की कोशिश कर रही थी। इस कोशिश में वो नीचे गिर पड़ी।

उनके गिरने की जोरदार आवाज वहाँ रहने वाले लोगों और सुरक्षा गार्डों ने सुनी। अंजना दास का खून से लथपथ लेक एवेन्यू रोड पर दो इमारतों के बीच दरार में पाया गया। महिला यहाँ किराए पर रहती थी और उन्हें इस अपार्टमेंट में आए हुए महज एक महीना ही हुआ था।

अंजना को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हालाँकि जिस बिल्ली को बचाने के चक्कर में अंजना की जान गई उस बिल्ली को कंक्रीट के शामियाने से सुरक्षित नीचे लाया गया।

पड़ोसियों के मुताबिक, अंजना बीती शाम यानी रविवार (26 नवंबर 2023) से अपने लापता बिल्ली के बच्चे की तलाश कर रही थी। उन्हें सोमवार को पता चला कि बिल्ली कंक्रीट वाले शामियाने में फँसी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, इस अपार्टमेंट में फर्स्ट फ्लोर पर रहने वाले एक शख्स ने बताया कि उन्होंने अंजना को अपनी चप्पल उतार कर छत से कंक्रीट के शामियाने पर जाने की कोशिश करते हुए देखा था। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वो नीचे गिर पड़ी।

जानकारी के मुताबिक, अंजना ने डेढ़ महीने पहले एक बिल्ली को गोद लिया था। इस बिल्ली ने कुछ हफ़्ते पहले तीन बच्चों को जन्म दिया था। अंजना अपनी बुजुर्ग माँ के साथ यहाँ रहती थी।

वहीं एक पड़ोसी ने कहा, “मृतका की पैतृक संपत्ति का नवीनीकरण का काम चल रहा है और प्रमोटर ने उनके 11 महीने के लिए इस अपार्टमेंट में रहने के इंतजाम किए थे।” संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं संगठन) सैयद वकार रजा ने कहा कि महिला की दुखद मौत में किसी साजिश का कोई संकेत नहीं है।

UP में मस्जिद-इबादतगाहों से उतरवाए गए 3238 लाउडस्पीकर, 7288 की कम करवाई आवाज: 22 दिसंबर तक चलेगा अभियान

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 23 नवंबर, 2023 से पूरे राज्य की इबादतगाहों और मस्जिदों में लगे अवैध लाउडस्पीकरों के खिलाफ अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत 3000 से अधिक लाउडस्पीकरों को उतरवाया गया है। ये लाउडस्पीकर विभिन्न मत-मज़हबों को मानने वाले लोगों की इबादतगाहों पर लगे थे। इसके अलावा 7 हजार से अधिक माइकों की आवाजों को कम करवाया गया। नियमों की अनदेखी करने के चलते 2 जिलों में FIR भी दर्ज हुई है जबकि कई जगहों पर चालान भी काटा गया है।

TOI के मुताबिक इबादतगाहों पर अवैध लाउडस्पीकर के खिलाफ 23 नवंबर से शुरू हुआ ये अभियान 1 महीने यानी 22 दिसंबर तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत अब तक 61399 ऐसी जगहों को चेक किया गया है जहाँ लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। अधिकारियों को सुबह 5 से 7 बजे के बीच इबादतगाहों और मस्जिदों की चेकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष DG लॉ एंड आर्डर IPS प्रशांत कुमार ने बताया कि जिले से हर दिन ध्वनि प्रदूषण कम करने लिए किए जा रही प्रयासों की आख्या मँगवाई जा रही है।

प्रशांत कुमार ने बताया कि अब तक कुल 3238 लाउडस्पीकरों को विभिन्न इबादतगाहों और मस्जिदों से हटवाया जा चुका है। इसके अलावा 7288 माइकों की आवाज तय मानक से तेज थी जिन्हें कम करवाया गया है। आदेशों की अनदेखी करने के चलते आगरा और प्रतापगढ़ जिले में 1-1 FIR दर्ज की गई है।

वहीं गौतमबुद्ध नगर जिले में 21 लोगों का चालान किया गया है। ज़ोन के हिसाब से सबसे अधिक 698 लाउडस्पीकर गोरखपुर में हटाए गए। बता दें कि बरेली ज़ोन में सबसे अधिक 1975 माइकों की आवाज कम की गई। राजधानी लखनऊ में 538 लाउडस्पीकर विभिन्न इबादतगाहों से हटाए गए।

जिला स्तर पर सबसे अधिक नियम विरुद्ध 283 लाउडस्पीकर अम्बेडकरनगर में बज रहे थे। वहीं 195 माइकों के साथ बहराइच जिला दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा 100 से अधिक इबादतगाहों को नोटिस जारी कर के नियमों का पालन करने की नसीहत दी गई है।

‘मस्जिदों को कर दो ध्वस्त, इस्लाम से लड़ने का यही उपाय’: घुसपैठियों पर भी बरसे स्वीडन के सत्ताधारी नेता, PM ने की निंदा

स्वीडन के दक्षिणपंथी नेता जिम्मी अकेस्सन ने कहा है कि पुलिस को उन मस्जिदों की खोज के लिए अभियान चलाना चाहिए और उन्हें ध्वस्त कर देना चाहिए जहाँ लोकतंत्र विरोधी बातें की जा रही है। उनके इस बयान का देश के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि ऐसी मस्जिदों को खोजने और फिर उन्हें तोड़ कर ही बढ़ते इस्लामीकरण से लड़ा जा सकता है। जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि नई मस्जिदों को बनाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दी जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि देश में बाहर से आने वाले अवैध घुसपैठियों को मस्जिदें बनाने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

अकेस्सन ने कहा, “हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम न मस्जिदों को तोड़ना और सीज करना चालू करें जहाँ से सर्वाधिक लोकतंत्र-विरोधी, स्वीडन-विरोधी, सेमेटिक विरोधी, होमोफोबिक-विरोधी और स्वीडिश समाज विरोधी प्रोपेगंडा निकलता है।”

जिम्मी अकेस्सन स्वीडन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट के नेता हैं। वह सरकार के साथ गठबंधन में भी शामिल हैं। उनकी पार्टी के पास स्वीडन की संसद रिक्स्दाग में 72 सीटें हैं। उनके बयान का स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि अकेस्सन का बयान निंदनीय है। उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि स्वीडन के अंदर हम इबादतगाहों को गिराते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो अकेस्सन ने कहा है वह स्वीडिश मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा है कि हमें कट्टरपंथ से लड़ना चाहिए लेकिन लोकतांत्रिक फ्रेमवर्क में रहकर लड़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री अकेस्सन ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि ये हमारे NATO में शामिल होने के मौके भी कम करता है। गौरतलब है कि स्वीडन NATO में शामिल होना चाहता है लेकिन तुर्की उसे समर्थन नहीं दे रहा है। तुर्की का कहना है कि स्वीडन में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा है इसलिए हम उसका समर्थन नहीं करेंगे। स्वीडन में इससे पहले कुरान जलाने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

दौड़ रहा था खिलाड़ी, सुन्न हो गया लिंग, ठीक करने के लिए करना पड़ा गर्म: कहा – अच्छा हुआ दूसरा बच्चा होने ही वाला है…

स्वीडन के एक खिलाड़ी के साथ अजीब सी समस्या आ गई है। क्रॉस-कंट्री स्कीअर कैले हाफवर्सन इस वीकेंड फिनलैंड में एक स्कीइंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने गए थे। बर्फ के बीच चल रहे इस खेल के दौरान बेहद कम तापमान के बीच कुछ ऐसा हो गया, जो शायद ही आज तक किसी ने सुना हो। कूसामो में 20 किलोमीटर के एक वर्ल्ड कप इवेंट में हिस्सा लेने के बाद उन्होंने बताया है कि उनका गुप्तांग ही जम गया था, जिसके बाद उन्हें एक गर्म जगह पर शरण लेनी पड़ी।

बता दें कि जब रेस शुरू हुई थी, उस दौरान वहाँ का तापमान 5 डिग्री फारेनहाइट (-15°C) पहुँच गया था। कैले हाफवर्सन ने कहा कि बर्फ के कारण उनका लिंग सचमुच जम गया है। उन्हें खिलाड़ियों के टेंट में जाकर 10 मिनट तक लेटना पड़ा, ताकि वो इसे गर्म कर सकें। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत दर्द हुआ, ये डरावना था। उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि वो सौभाग्यशाली हैं कि उनके दूसरे बच्चे का जन्म अगले कुछ ही दिनों में होने वाला है, वरना बाद में उनके लिए ये शायद संभव न हो।

ये रेस रविवार (26 नवंबर, 2023) को आयोजित की गई थी। इसमें वो 18वें स्थान पर रहे। बता दें कि इस खेल में उन्हें रेसिंग सूट पहननी होती है, जो शरीर में एकदम चुपकी हुई और टाइट होती है। इसके भीतर एक पतली सी परत होती है। बहुत ज़्यादा ठण्ड में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 2022 में बीजिंग में हुए ओलंपिक खेलों में फिनलैंड के रेमी लिंडहोल्म को 50 किलोमीटर की रेस के दौरान इसी समस्या का सामना करना पड़ा था, जब उनके प्राइवेट पार्ट के सुन्न होने के बाद वहाँ हीट पैक का इस्तेमाल करना पड़ा था।

ब्रिटेन के प्रिंस हैरी ने भी इस तरह का अनुभव होने की बात बताई थी। 2011 में वो नॉर्थ पोल में एक खोज पर गए थे, जहाँ से वो अपने भाई विलियम और केट मिडलटन की शादी में पहुँचे थे। उस दौरान उन्होंने जमे हुए लिंग का अनुभव किया था। स्कीइंग एक कठिन खेल है, खासकर बर्फ में। कैले हाफवर्सन को 2021 में फिनलैंड में ही इसी समस्या का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि फिनिश लाइन के करीब पहुँचने पर उन्हें इसका पता चला और वो असमंजस में पड़ गए थे कि आगे बढ़ते रहें या नहीं।

सवाल- क्या गैर मुस्लिम से करवा सकते हैं मेहंदी-मेकअप, बुर्के वाली का जवाब- गीले हाथों से काफिर जहाँ टच करे उसे पाक करें: Video वायरल

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक बुर्कानशीं महिला बाकी मुस्लिम महिलाओं को सलाह दे रही है कि उनके शरीर के जिस भी हिस्से को कोई गैर-मुस्लिम छू दे उसे अच्छे से साफ़ करो। यह नसीहत मेहंदी और मेकअप किसी गैर-मुस्लिम व्यक्ति से करवाने के सवाल पर दी गई। इस वीडियो को @RightWingBoy_ नाम के हैंडल ने सोमवार (27 नवंबर, 2023) को शेयर किया है।

लगभग 17 सेकेंड के इस वीडियो में बड़े फ्रेम का चश्मा लगाए एक मुस्लिम लड़की माइक के आगे बैठी दिख रही है। महिला ने चेहरे को छोड़ कर अपने पूरे शरीर को काले लिबास से ढक रखा है। वीडियो की शुरुआत में महिला खुद से ही सवाल करती है कि क्या गैर मुस्लिम से मेहंदी, मेकअप या वैक्स करवा सकते हैं? बाद में वो अपने सवाल का खुद ही जवाब देने लगी। महिला ने शुरू में तो कहा, “आप ये तमाम अमल एक नॉन मुस्लिम से भी करा सकते हैं। इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है।” हालाँकि, अगली ही लाइन में उसने नसीहत देना शुरू कर दिया।

महिला ने वीडियो में 10 वें सेकेंड से आगे कहा, “लेकिन बाद में आपको उन तमाम एरिया या पार्ट्स को पाक करना होगा। जिस भी जगह को एक काफिर ने गीले हाथों से टच किया था।” यहाँ ये जानना जरूरी है कि काफिर गैर-मुस्लिमों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अमानवीय शब्द है।

ऑपइंडिया की पड़ताल में यह सलाह देने वाली इस मुस्लिम महिला ने इस वीडियो के पूरे अंश को 19 नवंबर को इंस्टाग्राम हैंडल ‘शियाफिक’ पर शेयर किया था। वहीं खबर लिखे जाने तक इस वीडियो पर 3512 लाइक्स मिल चुके हैं। वीडियो को शेयर करने वाले इंस्टाग्राम चैनल ‘शियाफिक’ पर 638 से अधिक पोस्ट हैं। इसके 2.29 लाख फॉलोअर्स भी हैं। इस इंस्टाग्रम हैंडल के कई अन्य वीडियो में भी बुर्का पहने महिलाओं को गैर-मुस्लिमों के लिए भेदभाव वाली बातों को करते हुए सुना जा सकता है। साथ ही इस हैंडल को फॉलो करने वाले कई मुस्लिमों को इसकी विचारधारा का समर्थन करते भी देखा जा सकता है।