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15 दिन के भीतर ‘हलाल’ माल का सारा स्टॉक हटाओ: योगी सरकार का निर्देश, UP में बैन के बाद 92 जगहों पर छापेमारी

उत्तर प्रदेश में हलाल प्रोडक्ट बैन होने के बाद वहाँ की योगी सरकार ने राज्य के सभी थोक और फुटकर विक्रेताओं को आदेश दिया है कि वो 15 दिनों के अंदर अपने स्टॉक में मौजूद हलाल उत्पादों को हटा लें। साथ ही हलाल सर्टिफिकेट के साथ सामान बनाने वाले UP की 92 कंपियों से कहा गया है कि वो दुकानों पर बेचा गया अपना माल वापस मँगा लें और उसे बिना हलाल के ठप्पे वाले नए पैक में भर कर बेचें। हलाल उत्पादों में मिलावट की आशंका को देखते हुए इसके सैंपल भी जाँच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं।

खाद्य सुरक्षा प्रशासन की आयुक्त अनीता सिंह ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि 18 नवंबर 2023 को हजरतगंज थाने में हलाल सर्टिफिकेट से जुड़े लोगों पर FIR दर्ज होने के बाद इस मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है। अब तक प्रदेश भर में 92 दबिश के साथ 500 स्थानों पर जाँच-पड़ताल की जा चुकी है। इस दौरान लगभग 3000 किलो हलाल प्रोडक्ट को जब्त किया गया है। जब्त हुए सामान की अनुमानित कीमत 7 से 8 लाख रुपए के बीच बताई जा रही है।

इसके अलावा मिलावट की आशंका के चलते 81 सैम्पलों को जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। आयुक्त अनीता के अनुसार मिलावट पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने गुरुवार (23 नवंबर) को इस बाबत सभी जिले के अधिकारियों से कॉन्फ्रेंसिंग पर बात भी की। मीटिंग के दौरान उन्होंने छापेमारी तेज करने के निर्देश दिए। छापेमारी के दौरान तेलंगाना, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र आदि की कंपनियों के प्रोडक्ट हालात सर्टिफिकेट के साथ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिकते मिले जिन्हे जब्त किया जा रहा है।

जब्त हुए सामानों में चीनी, तेल और बेकरी के सामान अदि हैं। आयुक्त अनीता सिंह ने आगे बताया कि माँस और उसके उत्पादों को सर्टिफिकेट देने के लिए पूरे देश में महज 3 कम्पनियाँ अधिकृत हैं। इसमें से एक लखनऊ में है। फिलहाल पूरे देश में 700 से 800 ऐसे संस्थान पाए गए हैं हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रहे थे। इन सभी संस्थानों को उत्तर प्रदेश में बैन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने हलाल सर्टिफिकेट को वर्ग विशेष को लाभ पहुँचाने का हथकंडा बताया है।

पवन सिंह के पीछे-पीछे पॉलिटिक्स में अक्षरा सिंह, PK की बनेंगी ‘हमसफर’: कभी भोजपुरी की थी ‘सबसे हॉट जोड़ी’, जानिए फिर कैसे हुआ कट्टमकट्टा

भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह ‘जन सुराज’ में शामिल होने वाली हैं। बता दें कि इस संगठन की स्थापना प्रशांत किशोर ने की है और वो पूरे बिहार में घूम-घूम कर इससे लोगों को जोड़ रहे हैं। अक्षरा सिंह से उनकी मुलाकात के बाद अब अभिनेत्री के ‘जन सुराज’ में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। प्रशांत किशोर एक सफल चुनावी रणनीतिकार हैं, जो नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, कैप्टन अमरिंदर सिंह, ममता बनर्जी और जगमोहन रेड्डी जैसे नेताओं के चुनाव का प्रबंधन देख चुके हैं।

बता दें कि पवन सिंह के साथ करीबी रिश्ते को लेकर अक्षरा सिंह अक्सर चर्चा में रही हैं। भोजपुरी स्टार पवन सिंह के साथ उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है। पवन सिंह ने 2017 में ही भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया था और तब से वो पार्टी के कुछ कार्यक्रमों में दिखते भी रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले अब दोनों ही राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। अक्षरा सिंह पटना के कंकड़बाग की रहने वाली हैं।

पवन सिंह संकेतों में बता चुके हैं कि वो भोजपुर लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं, वहीं अक्षरा सिंह पटना को अपनी राजनीति का कार्यक्षेत्र बनाना चाहती हैं। फ़िलहाल भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद प्रसाद पटना से सांसद हैं। अक्षरा सिंह का बचपन भी यहीं से गुजरा है। वहीं आरा (भोजपुर) से केंद्रीय मंत्री आरके सिंह सांसद हैं। पवन सिंह कह चुके हैं कि कौन आगे नहीं बढ़ना चाहता, उन्हें बस ऊपर से आदेश का इंतज़ार है।

इसका सीधा अर्थ है कि पवन सिंह की तैयारी पूरी है। भोजपुरी इंडस्ट्री में ये बात प्रचलित है कि अक्षरा सिंह मानती हैं कि पवन सिंह ने उन्हें धोखा दिया। इसके बाद वो कई दिनों तक एकदम टूट गई थीं। ज्योति सिंह की एंट्री के बाद पवन सिंह ने अक्षरा से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे। वहीं अब पवन और ज्योति के बीच भी तलाक का केस चल रहा है और दोनों अलग रहते हैं। पवन सिंह की एक पत्नी ने शादी के 1 साल बाद ही आत्महत्या कर ली थी।

मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाने में जुटी UP पुलिस, कई जगहों पर वॉल्यूम करवाया कम: मजहबी स्थलों पर बिजली चोरी भी पकड़ी

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इबादतगाहों, मस्जिदों और धर्मस्थलों पर लगे अवैध लाऊडस्पीकर उतारने का एक विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत पहले राज्य के सभी जिलों में ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया जिन पर मानकों के अनुरूप लाउडस्पीकर नहीं लगे हैं। अब उन अवैध लाउडस्पीकरों को उतरवाया जा रहा है। सोमवार (27 नवंबर, 2023) की सुबह से शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब तक सैकड़ों लाउडस्पीकरों को या तो जब्त कर लिया गया है या उनकी आवाज को कम करवाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान की शुरुआत सोमवार की सुबह 5 बजे से हुई। इसके तहत लखनऊ में तकिया वाली मस्जिद सहित कई अन्य हिस्सों में लाउडस्पीकरों को उतरवाया गया। इसके साथ ही कानपुर, हमीरपुर सहित अन्य जिलों में भी पुलिस ने या तो माइकों के वॉल्यूम को कम करवाया या तो लाउडस्पीकरों को नीचे उतरवा दिया। इस अभियान के दौरान अयोध्या और चित्रकूट जैसे जिलों में भी मस्जिदों पर मानक के अनुरूप लाउडस्पीकर नहीं दिखे। चित्रकूट की एक मस्जिद से लाउडस्पीकर उतरवाया गया। इस अभियान में पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रतापगढ़ जिले में 350 ऐसे स्थानों पर कार्रवाई हुई जहाँ अवैध लाउडस्पीकर लगाए गए थे। पुलिस ने बताया कि उन लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज करवाई जा रही है जो बार-बार समझाने के बावजूद सरकारी आदेश का पालन नहीं किए।

कौशाम्बी जिले में ऐसे 203 स्थान चिन्हित किए गए जहाँ नियमों के विरुद्ध लाउडस्पीकर बजाए जा रहे थे। पुलिस ने इन सभी स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवा लिए। इसमें से कुछ ऐसे मज़हबी स्थल भी दिखे जहाँ बिजली का कनेक्शन नहीं था। पुलिस ने विद्युत् विभाग को पत्र लिख कर वहाँ हो रही बिजली चोरी की जानकारी और कार्रवाई की अपेक्षा की है।

फर्रुखाबाद जिले में कुल 46 स्थानों पर मानकों के खिलाफ लाउडस्पीकर लगे पाए गए। इसमें से 37 स्थानों पर माइक की आवाज कम करवाई गई जबकि 9 जगहों पर लाउडस्पीकर उतार लिए गए। ललितपुर जिले में कई मस्जिदों में लगे माइक की आवाज कम करवाया गया जबकि 3 जगहों पर लाउडस्पीकरों को उतार लिया गया। कन्नौज जिले की 20 मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों की आवाज कम करवाई गई। फतेहपुर जिले में 14 मस्जिदों से माइक उतारे गए जबकि 21 जगहों पर आवाज कम करवाई गई।

इन सभी के अलावा औरैया जिले में 4 स्थानों पर माइक उतार कर 19 जगहों पर उनकी आवाज कम करवाई गई। कुछ जिलों में पुलिस अधीक्षकों ने मौलानाओं, इमामों और मौलवियों के साथ बैठकें की हैं। इस दौरान उनको तय शासकीय मानकों को पालन करने के लिए कहा गया। इस कार्रवाई के दौरान कई मंदिरों और मठों से भी माइक उतारे गए हैं। इस अभियान का निर्देश उत्तर प्रदेश के स्पेशल DG प्रशांत कुमार ने दिया था। मिल रही जानकारी के मुताबिक इस अभियान में मौलानाओं का भी सहयोग मिला। अभी तक का अभियान शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ है।

बैट पर फिलिस्तीन का झंडा लगाकर खेलने आए आजम खान, जुर्माना लगा तो समर्थन में उतरे पाकिस्तानी विशेषज्ञ: कहा- जिगरा चाहिए

पाकिस्तानी क्रिकेटर आज़म खान ने अपने बल्ले पर फिलिस्तीन का झंडा लगा कर मैच में हिस्सा लिया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है। उन पर मैच फी का 50% जुर्माना भी लगाया गया है, जिसके बाद पाकिस्तान में लोग वहाँ के क्रिकेट बोर्ड PCB का विरोध कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड) के क्लॉथिंग एन्ड इक्विपमेंट रेगुलेशंस का उल्लंघन करने के लिए उन पर ये जुर्माना लगाया गया है।

मामला कराची में झेले जा रहे एक नेशनल T20 टूर्नामेंट का है। आज़म खान ‘कराची व्हाइट्स’ नामक टीम से खेल रहे हैं। ये मैच रविवार (26 नवंबर, 2023) को खेला गया जब आज़म खान अपने बैट पर फिलिस्तीन का झंडा लगा कर बल्लेबाजी करने आए। आज़म खान फिलिस्तीनियों के लिए समर्थन दिखाना चाहते थे। लेकिन, ICC का नियम है कि बल्ला या ग्लव्स वगैरह पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक, मजहबी या फिर बयानों वाला लोगो नहीं लगाया जा सकता।

बता दें कि अभी इजरायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध चल रहा है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के इस्लामी आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1500 लोगों का नरसंहार किया और यहूदी राष्ट्र पट 5000 रॉकेट्स दागे गए, जिसके बाद इजरायल ने गाजा में घुस कर आतंकियों को मिटाने के लिए अभियान शुरू किया। इसके बाद दुनिया भर के इस्लामी संगठन हमास के समर्थन में उतर आए और इस्लामी मुल्क इजरायल की निंदा करने लगे।

पाकिस्तानी टीवी पर विशेषज्ञों ने आज़म खान का समर्थन करते हुए कहा कि इसके लिए जिगरा चाहिए। चेतावनी के बावजूद आज़म खान ने अपने बल्ले से इसे नहीं हटाया। पाकिस्तान में इस्लामी लोग इसका समर्थन कर रहे हैं। आज़म खान पहले भी 2 मैचों में ऐसा कर चुके हैं। इससे पहले ODI वर्ल्ड कप में पाकिस्तानी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान में लीग मैच में जीत फिलिस्तीन को समर्पित की थी। पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने भी पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड से इस पर सफाई माँगी है।

बस इतना कहा था कूड़ा साफ कर दो…पत्नी ने गुस्से में काट खाया पति का कान: दिल्ली के सुल्तानपुरी की घटना, FIR दर्ज​

दिल्ली के सुल्तानपुरी में एक महिला ने गुस्से में आकर अपने पति का कान दाँत से काट डाला। घटना की जानकारी हाल में पुलिस को दी गई। पीड़ित पति ने बताया कि उसकी पत्नी की इस हरकत के कारण उसका दाहिना कान का ऊपरी हिस्सा कट गया था और इस वजह से उसे सर्जरी करानी पड़ी। इलाज के बाद उसने पत्नी के विरुद्ध थाने में शिकायत दी।

पुलिस ने बताया कि पीड़ित पति की शिकायत के बाद आईपीसी की धारा 324 के तहत महिला के विरुद्ध एफआईआर हुई है। अब मामले की जाँच चल रही है। पति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया, “मैं 20 नवंबर को सुबह करीब 9:20 बजे अपने घर के बाहर कूड़ा फेंकने गया था। मैंने अपनी पत्नी से घर की सफाई करने के लिए कहा। जैसे ही मैं घर लौटा, मेरी पत्नी ने बेकार के मुद्दे को लेकर मुझसे लड़ना शुरू कर दिया। मैंने उसे समझाने की कोशिश की। मगर तब वो मुझे मारने को आगे आने लगी।”

पीड़ित ने बताया, “मैं उसे ढकेल कर घर से बाहर जा रहा था, तभी उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और गुस्से में आकर मेरा दाहिना कान इतनी जोर से काटा कि मेरे कान का ऊपरी हिस्सा कट गया। मेरा बेटा मुझे इलाज के लिए मंगोलपुरी के संजय गाँधी अस्पताल ले गया। बाद में मेरी सर्जरी जयपुर गोल्डन अस्पताल में हुई।”

पुलिस ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी 20 नवंबर को हुई थी। इसके बाद उन्होंने मामले की जाँच की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब उन्होंने पीड़ित से संपर्क किया तब पीड़ित की हालत खराब थी वो बयान नहीं दे सकता ता। उसने पुलिस ने अनुरोध किया कि वो थाने आकर खुद ही शिकायत दे देगा। इसके बाद 22 नवंबर को इस संबंध में लिखित शिकायत हुई और एफआईआर करके मामले में जाँच शुरू हुई। उसने पुलिस को य बताया कि उसकी पत्नी ने उससे घर बेचकर हिस्सा देने के लिए भी कहा था ताकि वह बच्चों के साथ अलग रह सके।

गौरतलब है कि इस घटना के मीडिया में आने से कुछ दिन पहले ही एक ऐसी खबर ने सबके होश उड़ा दिए थे जब पुणे की रहने वाली महिला ने सिर्फ अपने पति को मुक्का मारकर इसलिए मारा डाला क्योंकि वो उसे जन्मदिन पर दुबई नहीं ले जा रहा था। इस झगड़े में पति की जान चली गई थी।

तमिलनाडु के रिटायर्ड IAS और चर्चे ओडिशा के अगले CM बनने के, कौन हैं वीके पांडियन जिन्हें बताया जा रहा BJD में नवीन पटनायक का उत्तराधिकारी

पूर्व IAS अधिकारी वीके पांडियन ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बीजू जनता दल की सदस्यता ले ली है। इससे पहले अक्टूबर, 2023 में उन्होंने IAS से त्यागपत्र दे दिया था। वह पटनायक के निजी सचिव थे। वहीं अब उनकी चर्चा ओडिशा के अगले CM और नवीन पटनायक के अगले उत्तराधिकारी के रूप में हो रही है।

वह एक दशक से नवीन पटनायक के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें ओडिशा में नवीन पटनायक का दाहिना हाथ समझा जाता है। पांडियन का दबदबा सरकार से लेकर बीजू जनता दल तक रहा है। उन्हें पिछले महीने ओडिशा सरकार के 5T और नबीनओडिशा प्रोग्राम का मुखिया बनाया गया था।

इस काम के लिए उन्हें त्यागपत्र के तुरंत बाद ओडिशा सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। बता दें कि पांडियन तमिलनाडु मूल के हैं और वर्ष 2000 बैच के ओडिशा कैडर के अफसर हैं। वह 2012 के बाद से नवीन पटनायक के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें पटनायक के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

48 वर्षीय पांडियन के प्रभाव के चलते उन्हें विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ रही थी। नवीन पटनायक के निजी सचिव रहते हुए उनके लोगों से मिलने, रैलियों को संबोधित करने और मुख्यमंत्री का प्रतिनधि बन कर जाने को लेकर कई बार प्रश्न उठे थे। विपक्ष का कहना था कि क्या कोई सेवायत अफसर एक राजनीतिक व्यक्ति की तरह व्यवहार कर सकता है?

पांडियन ने इन आरोपों के बीच अक्टूबर 2023 में त्यागपत्र दिया था और अब उन्होंने बीजू जनता दल की सदस्यता भी ले ली है। पांडियन के पार्टी की सदस्यता लेते समय मुख्यमंत्री नवीन पटनायक समेत पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे।

बता दें कि पांडियन को वर्तमान में ओडिशा की राजनीति में सबसे ताकतवर व्यक्ति समझा जाता है। चूँकि, राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की जनता के बीच काफी कम ही तस्वीरें सामने आती हैं और वह कम ही लोगों से मिलते भी हैं। उनसे मिलने के लिए भी पांडियन से सम्पर्क रखना होता है।

गौरतलब है कि नवीन पटनायक वर्ष 2000 से ओडिशा के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। प्रत्येक चुनाव के साथ उनकी पार्टी की स्थिति राज्य में मजबूत होती गई है। 147 सीटों वाली ओडिशा विधानसभा में उनकी पार्टी की 111 सीटें हैं। बता दें कि ओडिशा में अगले विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही होंगे।

लोकसभा और राज्य के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पांडियन का अपनी IAS सेवा छोड़ कर सीधे राजनीति में उतरना बड़ा संकेत दे रहा है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि राज्य में पुनः पार्टी को जीत मिलती है तो क्या 77 वर्षीय नवीन पटनायक, पांडियन को और बड़ी जिम्मेदारी देंगे?

‘मार्च 2024 तक तैयार हो जाएँगे CAA के नियम-कायदे’: केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने बता दिया समय, अब तक 8 बार बढ़ाई जा चुकी है अवधि

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के संबंध में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि CAA को लागू करने में हमारी सरकार की तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे ही हमारी सरकार बनी, हमने 2016 में इसे संसद में रखा और संयुक्त संसदीय समिति में ये गई। 7 जनवरी, 2019 को इसकी रिपोर्ट आई और अगले ही दिन लोकसभा में इसे पारित कर दिया गया। लेकिन, राज्यसभा में NDA का बहुमत न होने के कारण इसे पारित नहीं कराया जा सका।

अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने याद किया कि 2019 में लोकसभा चुनाव होने के साथ ही ये अधिनियम रद्द हो गया क्योंकि इसे फिर से दोनों सदनों में पारित कराए जाने की ज़रूरत थी। 2019 में सरकार बनने के साथ ही 9 दिसंबर को इसे लोकसभा में रखा गया और अगले ही दिन ये लोकसभा में पास हो गया। 11 दिसंबर को इसे राज्यसभा में पास करा दिया गया और 12 को ये कानून बन गया। 10 जनवरी, 2020 को देश में CAA को लागू कर दिया गया। याद हो कि CAA के खिलाफ जम कर आंदोलन किया गया था और शाहीन बाग़ में मुस्लिम महिलाओं ने लंबा धरना दिया था।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने कहा, “लागू होने के बाद कानून के नियम-कायदे बनाए जाते हैं। उसके बाद ही कानून पूरी तरह लागू होता है। इसके नियम-कायदे बनाने के लिए दिए गए हैं। जो लोकसभा की विधान बनाने की समिति है उसने 9 जनवरी, 2024 और राज्यसभा की विधान बनाने की समिति ने 30 मार्च, 2024 की तारीख़ दी है। उस समय तक ये बन जाएगा। कानून जब संसद से पास होकर अधिनियमित हो गया है, उसे लागू होना ही होना है।”

इस दौरान उन्होंने याद किया कि कैसे भाजपा विरोधी तत्वों ने सुप्रीम कोर्ट में भी CAA को असंवैधानिक बता कर इसे चुनौती दी हुई है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 में इसकी सुनवाई की तारीख़ मुक़र्रर की गई है। बता दें कि अब तक 8 बार CAA के फाइनल ड्राफ्ट को पूरा किए जाने की अवधि आगे बढ़ाई जा चुकी है। पिछली बार अगस्त 2023 में इसे आगे बढ़ाया गया था। इसी तरह जनवरी 2023 में 7वीं बार इसे बढ़ाया गया था। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरकता मिलनी है।

1 दिसंबर से बिना वीजा मलेशिया जा सकेंगे भारतीय, पासपोर्ट दिखाकर 30 दिनों तक रह सकेंगे: भारत से ही जाते हैं सबसे ज्यादा पर्यटक

दक्षिणपूर्व एशियाई देश मलेशिया ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा लेने की बाध्यता को हटा दिया है। यह नई व्यवस्था 1 दिसम्बर, 2023 से लागू होगी। मलेशिया में अब भारतीय केवल अपने पासपोर्ट के सहारे ही 30 दिन तक रह सकेंगे।

मलेशिया ने भारत के अलावा चीन के नागरिकों के लिए यही वीजा मुक्त व्यवस्था लागू की है। मलेशिया ने यह कदम अपने यहाँ पर्यटन के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उठाया है क्योंकि भारत और चीन दोनों बड़ी पर्यटक संख्या वाले देश हैं।

यह घोषणा मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम ने अपनी पार्टी की सालाना कॉन्फ्रेंस के दौरान पुत्राजाया में की। इब्राहिम इस कदम के जरिए आशा कर रहे हैं कि उनके देश की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। गौरतलब है कि मलेशिया में सबसे अधिक पर्यटक चीन और भारत से ही पहुँचते हैं। वर्ष 2023 में केवल जनवरी से जून के बीच ही भारत से 2.8 लाख पर्यटक मलेशिया पहुँचे।

दक्षिणपूर्वी एशिया में स्थित अधिकांश देश अब अपने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ऐसी ही रियायते दे रहे हैं। हाल ही में थाईलैंड ने भी भारतीय नागरिकों के लिए वीजा मुक्त यात्रा की घोषणा की थी। थाईलैंड ने नवम्बर, 2023 और मई 2024 के बीच भारत से जाने वाले पर्यटकों के लिए वीजा की आवश्यकता को हटा दिया है।

थाईलैंड के अलावा श्रीलंका ने हाल ही में भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा की शुल्क ना लेने का निर्णय लिया था। श्रीलंका का भी लक्ष्य अपने देश में पर्यटन को बढ़ाना है। इसके जरिए वह अपनी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाह रहा है।

एक अन्य दक्षिणपूर्व एशियाई देश विएतनाम भी भारतीयों के लिए वीजा की बाध्यता को खत्म करने पर विचार कर रहा है। विएतनाम के लिए भारत एक बड़ा पर्यटक स्रोत है। वियतनाम की एयरलाइन कम्पनियाँ भी लगातार अपनी सेवाएँ भारत में बढ़ा रही हैं।

विश्व के अलग-अलग देशों के पासपोर्ट की ताकत को बताने वाली हेनले इंडेक्स के अनुसार, भारत के नागरिक बिना वीजा के 57 देशों की यात्रा कर सकते हैं। अधिक देशों का किसी देश के नागरिकों को बिना वीजा के आने देना उसके प्रभाव को प्रदर्शित करता है।

सफेद धोती, भगवा अंगवस्त्र, माथे पर टीका… PM ने तिरुपति बालाजी के किए दर्शन, 140 करोड़ भारतीयों की समृद्धि के लिए की प्रार्थना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (27 नवंबर 2023) को हर भारतीय के लिए तिरुपति बालाजी मंदिर में पूजा अर्चना की। उनके अकॉउंट से इस पूजा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर की गई।

फोटो में पीएम मोदी वेंकटेश्वर मंदिर के अंदर पंडितों के आगे सफेद धोती, भगवा अंगवस्त्र और टीका लगाए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट में उन्होंने लिखा, “तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 140 करोड़ भारतीयों के अच्छे स्वास्थ्य, कल्याण और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।”

बता दें कि प्रधानमंत्री के तिरुपति बालाजी मंदिर जाने से पहले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड ने एक बयान जारी कर बताया था कि पीएम मोदी 26 नवंबर की शाम में तिरुपति पहुँचेंगे, जहाँ वह रात में रुकेंगे और उसके बाद 27 नवंबर की सुबह भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर आशीर्वाद लेंगे। 

प्रधानमंत्री मंदिर में पूजा पाठ के बाद काफी समय वहीं रहे। इसके बाद वह तेलंगाना के लिए रवाना हो गए। लेकिन उनके अकॉउंट्स से डाली गई फोटोज को देख सोशल मीडिया यूजर्स काफी इमोशनल हो गए। 

चंद्रभूषण नाम के एक्स अकॉउंट ने पीएम मोदी को भगवान का आदमी बताया।

वहीं कुछ ने कहा कि भले ही प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ भारतीयों के लिए पूजा पाठ की, लेकिन इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो उन्हें सिर्फ गाली देने में, उनके किए कार्यों को नीचा दिखाने में व्यस्त रहते हैं।

एक यूजर कहता है- प्रभु बालाजी आपको स्वस्थ जीवन दें और ताकत दें। भारत को आपके नेतृत्व की जरूरी है। आपकी ऐसी भक्ति ही आपकी सच्ची शक्ति है।

बता दें कि तिरुपति बालाजी का मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है। भारत में होने के बावजूद इस मंदिर से दुनियाभर के लोगों की आस्था जुड़ी है।

‘कुरान शरीफ से बड़ी कोई किताब नहीं, NCERT के सिलेबस में शामिल करें’: सपा MP शफीकुर्रहमान बर्क ने रामायण-महाभारत की पढ़ाई का किया विरोध

संसार में कुरान शरीफ से बड़ी कोई किताब नहीं है। इसे NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। यह कहना है उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का। उन्होंने यह बात रामायण महाभारत की पढ़ाई का विरोध करते हुए कही।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मीडिया में यह खबर आई ​थी कि एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को शामिल किया जा सकता है। हालाँकि एनसीईआरटी ने अपनी ओर से इस तरह की कोई सिफारिश करने से इनकार किया था।

शफीकुर्रहमान बर्क ने इस विषय में प्रश्न पूछे जाने पर कहा कि वे पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को शामिल करने का विरोध करते हैं। इन दोनों धर्मग्रंथों की जगह पर कुरान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, क्योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी किताब है और अल्लाह का कलाम है।

शफीकुर्रहमान ने कहा है कि यह इस वक्त की सियासत की कमी है कि बच्चों में देशभक्ति की कमी है। उनका कहना है कि दुनिया की किसी भी शिक्षा में देशभक्ति की कोई कमी नहीं है। वह इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं।

गौरतलब है हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि NCERT के पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को भारत के इतिहास विषय में शास्त्रीय काल के अंतर्गत रखा जाएगा। इसके लिए एक कमिटी की सिफारिश का हवाला दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट में पैनल अध्यक्ष और इतिहासकार रिटायर्ड प्रोफेसर सीआई आईजैक का हवाला देते हुए कहा गया था कि पैनल ने यह प्रस्ताव भी रखा है कि स्कूल की हर क्लास में दीवार पर संविधान की प्रस्तावना भी लिखी जाए। इसके साथ ही यह प्रस्तावना क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि पैनल ने इतिहास के पाठयक्रम को चार कालों शास्त्रीय काल, मध्यकालीन काल, ब्रिटिश काल और आधुनिक भारत में बाँट कर पढ़ाने की सिफारिश की है। अभी, भारतीय इतिहास को स्कूली किताबों में तीन कालों प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक के तहत पढ़ाया जाता है।

हालाँकि इस खबर के बाद NCERT ने ऐसे किसी भी पैनल और उसकी सिफारिशों से इनकार किया था। NCERT ने कहा था कि ऐसी कोई कमेटी नहीं है और प्रोफेसर आईजैक ने जो कुछ भी कहा है वह उनकी निजी राय है। शिक्षा निकाय ने उनके ऐसे दावों पर सख्त एतराज जताते हुए इसे सिरे से नकार दिया था।